“মসি থমোয়গী ইহুল করোর 140গী তৌবা ঙম্বা অমসুং ভারতকী অনৌবা শক্তিগী থাজবগী মীকুপ অমনি”
“‘অমৃত কাল’গী অহানবা মঙালদা মসি মাইপাকপগী ‘অমৃত বর্সা’নি”
“ঐখোয়গী বিজ্ঞানিকশিংগী কত্থোকপা অমসুং তেলেন্তকা লোয়ননা মালেমদা লৈরিবা লৈবাক অমত্তনা ঙসি ফাওবা য়ৌবা ঙমদ্রিবা থাগী সাউথ পোলদা ভারতনা য়ৌবা ঙমখ্রে”
“অঙাংশিংনা ‘চন্দা মামা এক তুর কে’ হায়বদি থা অসি তুর অমা খক্তগী চাংদা লাপ্পি হায়না হায়নগদবা মতম অদু কুইররোই”
“ঐখোয়গী মুন মিসন অসি হ্যুমেন-সেন্ত্রিক এপ্রোচতা য়ুম্ফম ওইখি। মরম অসিনা মাইপাকপা অসি মীওইবা খুন্নাইগীনি”
“ঐখোয়না ঐখোয়গী সোলর সিস্তেমগী অরোইবা পনখৈশিং চাংয়েং তৌগনি অমসুং মীওইবগীদমক য়ুনিভর্সকী লোইনাইদ্রবা ওইথোকপা য়াবশিং অদু পুথোক্নবা থবক তৌগনি”
“ভারতনা অতিয়াদা পনখৈ লোইবা নত্তে হায়বা অসি হঞ্জিন-হঞ্জিন উৎলি”

ঐগী নুংশিরবা ইমুং-মনুংগী মীওইশিং,

ঐখোয়গী মীৎ মাংদা পুৱারি অমা শেম্বদা ঐখোয় উবা ফংবদা পুন্সি অসি মহৈ য়াল্লে। অসিগুম্বা পুৱারিগী থৌদোক অসি লৈবাক অসিগী ওইনা কাউবা ঙম্লোরোইদবা মিকুপ অমনি। মসিগী তাঞ্জা অসি চাউখৎলবা ভারত অমগী মাইপাকপনি। তাঞ্জা অসি অনৌবা ভারতগী হরাওবনি। মসিগী তাঞ্জা অসি অৱাবশিংগী ইপাক লান্থোকপনি। মসিগী মিকুপ অসি থাগী লম্বীদা মাইপাকপগী খোঙচৎনি। মসিগী মিকুপ অসি ভারতমচা করোর ১৪০গী মাইপাকপনি।  মসি ভারতকী অনৌবা শক্তি, অনৌবা থাজবা অমসুং অনৌবা ৱাখল্লোনগী তাঞ্জানি। মিকুপ অসি ভারতকী লাইবক ফবা হেনগৎলকপনি। ঐখোয়না মালেমদা ৱাশক অমা লৌরে অমসুং মসি থাদা থবক ওইনা পাংথোক্লে। ঐখোয়গী সাইন্তিস্ত মরুপ-মপাঙশিংনা হায়খি মদুদি হৌজিক ভারত থাদা য়ৌরে। ঙসি ঐখোয়না স্পেসতা অনৌবা ভারতকী অনৌবা ফ্লাইত উবা ফংলে।

 

ঐগী নুংশিরবা ইমুং-মনুংগী মীওইশিং,

ব্রিক্স মীফম য়াওনবা ঐ হৌজিক খা অফ্রিকাদা লৈরি। অদুবু, লৈবাক অসিগী মীওই খুদিংমক্কী মতৌগুম, ঐগী ৱাখলসু চন্দ্রয়ান মহা অভিয়ানদা মীৎয়েং থম্লে। অনৌবা পুৱারি হেক শেম্বগা, ভারতমচা খুদিংম হরাও-মথোই কারে, য়ুমথোং খুদিংমক হরাও-তয়াম্বা ফোঙদোকপা হৌরে। ঐগী থম্মোয়নুংদগী, ঐগী ইমুং-মনুংগী মীওইশিংগা লোয়ননা ঐসু হরাওবা ফোঙদোকচরি। মিকুপ অসিগীদমক চহি কয়া কন্না হোৎনরকখিবা তিম চন্দ্রয়ান, ইসরো অমসুং সাইন্তিস্ত খুদিংমক ঐনা থম্মোয় শেংনা থাগৎচরি। হরাওবনা থল্লবা মিকুপ অসিগীদমক ঐনা লৈবাক অসিগী মীওই করোর ১৪০শু থাগৎপা ফোঙদোকচরি।

 

ঐগী নুংশিরবা ইমুং-মনুংগী মীওইশিং,

 

ঐখোয়গী সাইন্তিস্তশিংগী হৈথোই-শিংথোইবা অমসুং কন্না হোৎনবদগী, হৌজিক ফাওবা মালেমগী লৈবাক অমতনা য়ৌবা ঙমদ্রিবা থাগী খা মেরুদা ভারতনা য়ৌরে। ঙসিদগী, থাগা মরী লৈনবা থাজনবশিং অহোংবা লৈরগনি, ৱারিশু হোঙলগনি অমসুং অনৌবা মীরোলদা প্রমান-পান্থৈশিংশু হোংলগনি। ভারত্তা, ঐখোয়না মালেম অসি ইমা হায়না কৌনরি অমসুং থানা মামা হায়না কৌনরি। মতম অমদা চান্দা মামা অসি য়াম্না লাপ্পী হায়নরমখি। চান্দা মামা ফাওবা চৎপা অসি য়াম্না নকপা খোঙচৎ অমনি হায়না অঙাংশিংনা হায়গদবা নুমিৎ অদু য়ৌরক্লগনি।

 

মরুপশিং,

নুংঙাইরবা থৌরম অসিদা, মালেমগী মীয়াম, লৈবাক খুদিংমক্কী মীয়ামদা ঐ ৱা ঙাংবা পাম্মী। ভারতকী থাগী খোঙচৎ মাইপাকপা অসি ভারত খক্তগী নত্তে। চহি অসিদা ভারতনা জি-২০গী প্রসিদেন্ত ওইবা মালেম্না উরে। “মালেম অমা, ইমুং অমা, তুংলমচৎ অমা” হায়রিবা ঐখোয়গী পান্দম মালেম শীনবা থুংনা খোন্থাং য়ৈরে। মীওইবগী য়াইফনবা ঐখোয়না হৌদোক্লিবা ৱাফম অসি মালেম শীনবা থুংনা তরাম্না ওক্লে। মরম অদুনা, মসিগী মাইপাকপা অসি মীওই খুন্নাইগীনি। মসিনা তুংদা অতোপ্পা লৈবাকশিংগী থাগী খোঙচৎশিংদা মতেং পাংগনি। গ্লোবেল সাউথ য়াওনা মালেমগী লৈবাক খুদিংমক্না অসিগুম্বাথবক অসি পাংথোকপা ঙমগনি হায়না ঐনা থাজৈ। ঐখোয়না থা অমসুং মসিগী ৱাংমগী অপাম্বা কয়া লৈবা য়াই।

ঐগী নুংশিরবা ইমুং-মনুংগী মীওইশিং,

চন্দ্রয়ান মহা অভিয়ান মাইপাকপা অসিনা ভারতকী খোঙচৎ থাগী ওর্বিৎকী ৱাংমদা পুবা ঙম্লগনি। ঐখোয়গী ঐখোয়গী সোলার সিস্তেমগী ঙমখৈশিং চাংয়েং তৌগনি অমসুং মীওইবা খুন্নাইগীদমক তাইবংপাল অসিগী লোইবা নাইদ্রবশিং খঙনবা ঐখোয়না থবক তৌগনি। তুংগীদমক ঐখোয়না অচৌবা পান্দম কয়া থম্লে।  নুমিৎ মরমদা কুপ্না থিজিন্নবা অথুবা মতমদা ইসরোনা ‘অদিত্য এল-১’ মিসন থাগৎলগনি। মসিগী মতুংদা ইসরোগী পান্দমশিংগী মনুংদা ভেনস য়াওরি। গাগনয়ানগী খুৎথাংদা, লৈবাক অসিগী অহানবা মীওইবা শরুক য়াবা সুন্দ্রংগী খোঙচৎ চৎনবা লৈবাক অসিনা মপুংফানা থৌরাং তৌরে। ভারতনা অমুক হন্না উৎলে অমসুং অতিয়া অসিনা অরোইবা নত্তে।

ঐগী নুংশিরবা ইমুং-মনুংগী মীওইশিং,

সাইন্স অমসুং তেক্নোলোজিনা লৈবাক অসিগী অফবা তুংলমচৎকী য়ুম্ফম্নি। মরম অদুনা লৈবাক অসিনা নুমিৎ অসি মতম চুপ্পদা নিংশিংদুনা লৈহৌরগনি। নুমিৎ অসিনা ঐখোয় মাঙলোমদা চঙশিন্নবা ইথিল পীরগনি। ঐখোয়গী ৱাশকশিং ঙাক্নবা লম্বীশিং নুমিৎ অসিনা ঐখোয়দা তাক্লগনি। মাইথিবদগী পারা তম্লগা কমদৌনা মাইপাকপা ঙম্বগে হায়বা নুমিৎ অসিনা খুদম ওইরে। অমুক হন্না লৈবাক অসিগী সাইন্তিস্তশিং থাগৎচরি অমসুং তুংগী মিসনগী য়াইফ-পাউজেল পীজরি।

অদোম থাগৎচরি।

 

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Text of PM’s remarks in the Rajya Sabha
March 18, 2026
In politics, there are no full stops; your experience and contribution will forever remain a part of the nation’s life: PM
There is much to learn from these senior leaders about staying entirely committed to the responsibilities given by society: PM
The legacy here is a continuous process that enriches our parliamentary system: PM
Parliamentary system gains immense strength from the concept of a second opinion; This second opinion is a massive contribution to our democracy that we must cherish: PM
The six years spent here are invaluable for shaping one's contribution to the nation and for self-growth: PM
The invaluable contributions of the retiring members to nation-building would continue to be felt whether they serve within the formal system or through independent social work: PM

इस विशेष अवसर पर आपने मुझे अपनी भावनाएं प्रकट करने के लिए जो अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

आदरणीय सभापति जी,

सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन आज जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर के हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है, क्या? ये हमारे साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं, और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर के समाज जीवन में कुछ ना कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं। जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं है, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा-हमेशा बना रहेगा।

आदरणीय सभापति जी,

इस सदन में, जो भी सदस्य माननीय हमारे विदाई ले रहे हैं, कुछ सदन सदस्य ऐसे हैं, जिनको शायद उस समय जाने का समय कार्यकाल आएगा जब सदन नहीं चलता होगा, कुछ है जिनको ऑलरेडी सदन के दरमियान ही विदाई मिल रही है। लेकिन ये जाने वाले सभी माननीय सांसदों का बहुत ही उत्तम योगदान है, इसलिए, लेकिन मैं जरूर कहूंगा, आदरणीय देवगोड़ा जी, आदरणीय खड़गे जी, आदरणीय शरद पवार जी, ये ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन का आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्य प्रणाली में गई है, और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों ने सीखना चाहिए, वैसे समर्पित भाव से सदन में आना, जो भी हमसे-उनसे बन सकता है, उतना योगदान करना, यानी समाज में से जो जिम्मेवारी मिली है, उसके प्रति पूरी तरह समर्पित रहना। ये इन सब वरिष्ठ लोगों से हम जैसे सबको सीखने जैसा है। और मैं उनके योगदान की भूरी-भरी सराहना करूंगा, क्योंकि इतना लंबा कार्यकाल छोटा नहीं होता जी, बहुत महत्वपूर्ण है। उसी प्रकार से हमारे उपसभापति जी, हरिवंश जी विदाई ले रहे हैं। हरिवंश जी को लंबे समय तक इस सदन में अपनी जिम्मेवारी निभाने का अवसर मिला है। बहुत ही मृदुभाषी, सदन को चलाने में सबका विश्वास जितने का निरंतर जिन्होंने प्रयास किया और मैंने देखा है कि संकट के समय ज्यादातर उपसभापति के ही जिम्मे आ जाता है कि भाई आप संभाल लेना जरा, तो उनको एक लंबा एक्सपीरियंस होता है, सबको जान भी लेते हैं, भली-भांति जान लेते हैं। लेकिन उनका भी योगदान है। और जब भी, और मैंने देखा कि जब सदन का समय नहीं होता है, तो देश के कोने में, कोने में, कहीं ना कहीं वो यूथ के साथ मिलना- जुलना, देश की परिस्थितियों के संबंध में उनको अवगत कराना, उनमें एक देश के प्रति संवेदनाएं पैदा करना, वो भी निरंतर काम है। वो कलम के धनी तो है ही है, लेकिन कर्म कठोर के नाते भी मैं कहूंगा कि उन्होंने भारत के हर कोने में जाकर के अपना काम किया है।

आदरणीय सभापति जी,

कभी-कभी किसी समय हम सुनते थे कि सदन में बहुत ही हास्य विनोद व्यंग का अवसर मिलता रहता है। इन दिनों शायद धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, क्योंकि 24x7 मीडिया की दुनिया ऐसी है कि हर कोई कॉनशियस रहता है, लेकिन हमारे अठावले जी, है जी, सदा बहार है, अठावले जी जा रहे हैं, लेकिन यहां पर किसी को खोट महसूस नहीं होगी, वो व्यंग विनोद भरपूर परोसते रहेंगे, ऐसा मुझे पूरा भरोसा है।

आदरणीय सभापति जी,

सदन में से हर दो साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है, लेकिन ये ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको बाकी जो लंबे समय से, चार साल से बैठे हुए साथी हैं, अनुभव है, नए लोगों को तुरंत उनसे कुछ ना कुछ सीखने का अवसर मिलता है, और इसलिए एक प्रकार से यहां की जो विरासत है, वो कंटिन्यू प्रोसेस हमेशा रहती है, यह बहुत बड़ा लाभ होता है। मुझे पक्का विश्वास है कि जिनको इस बार जाना नहीं है, वो भी जो नए माननीय सांसद आएंगे, उनको, उनके अनुभव का लाभ मिलेगा और उनका योगदान भी सदन को और समृद्ध करेगा, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है।

आदरणीय सभापति जी,

हम लोग जानते हैं कि जीवन में या सार्वजनिक जीवन में, जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय करना होता है, तो परिवार के लोग बैठकर के मन बना लेते हैं कि ऐसा करना है, लेकिन फिर भी कहते हैं, अरे ऐसा करो, उनसे जरा पूछ लीजिए, एक सेकेंड ओपिनियन ले लीजिए, किसी वरिष्ठ से और घर में वरिष्ठ कहेंगे, मोहल्ले में देखो भाई, वो काफी अनुभवी है, जरा उनसे पूछ लो, एक बार उनका मन क्या करता है। अगर कोई बीमार है, तो भी कहते हैं यार ऐसा करो भाई, एक और डॉक्टर से जरा ओपिनियन ले लो, सेकेंड ओपिनियन का बहुत महत्व होता है। मैं समझता हूं, हमारे संसदीय प्रणाली में इस सेकेंड ओपिनियन की बहुत बड़ी ताकत रही है। एक सदन में कुछ निर्णय होता है, दूसरे सदन में फिर आता है, सेकेंड ओपिनियन के लिए। अगर इस सदन में होता है, तो उस सदन में जाता है सेकेंड ओपिनियन के लिए, और ये सेकेंड ओपिनियन उस सारी बहस को, उस सारे निर्णय प्रक्रिया को एक बहुत बड़ा नया आयाम दे देती है, और वो मैं समझता हूं कि हमारी निर्णय प्रक्रिया को समृद्ध करती है। तो इसलिए, सदन में जो माननीय सांसद बैठते हैं, उनके लिए एक खुलापन रहता है कि भाई चलो इस सदन में नहीं तो, उस सदन में एक अच्छा ओपिनियन नया आएगा, उस सदन में नहीं तो, इस सदन में एक नया ओपिनियन आएगा। तो ये सेकेंड ओपिनियन, ये हमारे लोकतंत्र में एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है, जो जिस विरासत को हमें संभालना, हमारे जो माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, उनका तो योगदान रहा ही है, और इसके लिए भी मैं उनका साधुवाद करता हूं।

आदरणीय सभापति जी,

जो हमारे माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, बहुत आने वाले दिनों में तो शायद ये अवसर रहने वाला ही नहीं है, लेकिन ये माननीय सांसद ऐसे हैं कि जिनको पुराने संसद के भवन में भी बैठने का मौका मिला और नए संसद भवन में भी बैठने का मौका मिला। उनको दोनों इमारतों में, उनको राष्ट्र के कल्याण के लिए अपना योगदान देने का अवसर मिला है, और उनके कार्यकाल में ही, उनको इस नए सदन के निर्माण प्रक्रिया में और नए सदन की निर्णय प्रक्रिया में भी हिस्सा बनने का अवसर मिला है, ये एक विशेष उनके जीवन में याद रहेगी, नई स्मृति रहेगी।

आदरणीय सभापति जी,

मैं सभी माननीय सांसदों के और मैं मानता हूं कि ये सदन अपने आप में एक बहुत बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी है, राष्ट्र जीवन की कई बारीकियों से परिचित होने का अवसर सदन में प्राप्त होता है। एक प्रकार से हमारे यहां शिक्षा भी होती है, हमारी दीक्षा भी होती है। ये 6 साल यहां जो रहने का अवसर मिलता है, वो जीवन को गढ़ने का, राष्ट्र जीवन के गढ़तम्य योगदान का तो महत्व है ही है, क्योंकि निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन स्वयं के जीवन को गढ़ने का भी एक अमूल्य अवसर होता है। और इसलिए जब माननीय सांसद यहां आते हैं, उस समय की उनकी जो भी सोच-समझ और क्षमता है, जब जाते हैं, तो अनेक गुना वो बढ़ती है, उसका विस्तार होता है, और अनुभव की एक बहुत बड़ी ताकत होती है। अब तब जाकर के जाने के बाद राष्ट्र जीवन का उनका निरंतर योगदान बना रहे हैं। वो अपने तरीके से व्यवस्था के तहत हो सकते हैं, व्यवस्था के तहत ना भी हो सके, लेकिन उनका अमूल्य योगदान मिलता ही रहे, राष्ट्र जीवन के निर्माण में उनका अनुभव हमेशा-हमेशा उपयोगी हो, ये मेरी उन सभी माननीय सांसदों को मेरी शुभकामनाएं हैं। और मैं फिर से एक बार सभी माननीय सांसदों के योगदान का गौरव गान करता हूं, साधुवाद करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।