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ദേശീയ വികസന 'മഹായജ്ഞ'ത്തില്‍ എന്‍ഇപി സുപ്രധാന ഘടകം: പ്രധാനമന്ത്രി
യുവാക്കള്‍ക്കും അവരുടെ ആഗ്രഹങ്ങള്‍ക്കുമൊപ്പം രാജ്യവുമുണ്ടെന്ന് പുതിയ വിദ്യാഭ്യാസ നയം ഉറപ്പ് നല്‍കുന്നു: പ്രധാനമന്ത്രി
സുതാര്യതയും സമ്മര്‍ദമില്ലായ്മയും പുതിയ വിദ്യാഭ്യാസ നയത്തിലെ പ്രധാന സവിശേഷതകള്‍: പ്രധാനമന്ത്രി
8 സംസ്ഥാനങ്ങളിലെ 14 എന്‍ജിനിയറിങ് കോളേജുകള്‍ 5 ഇന്ത്യന്‍ ഭാഷകളില്‍ വിദ്യാഭ്യാസം നല്‍കുന്നതിനു തുടക്കം കുറിക്കും: പ്രധാനമന്ത്രി
മാതൃഭാഷ പഠനമാധ്യമമാക്കുന്നത്, പാവപ്പെട്ട, ഗ്രാമീണ, ഗോത്രവര്‍ഗ പശ്ചാത്തലത്തില്‍ നിന്നുള്ള വിദ്യാര്‍ത്ഥികള്‍ക്ക് ആത്മവിശ്വാസം പകരും: പ്രധാനമന്ത്രി

नमस्कार! कार्यक्रम में मेरे साथ जुड़ रहे कैबिनेट के मेरे सभी सहयोगीगण, राज्यों के माननीय राज्यपाल, सभी सम्मानित मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, राज्य सरकारों के मंत्रीगण, उपस्थित शिक्षाविद, अध्यापकगण, सभी अभिभावक और मेरे प्रिय युवा साथियों!

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक साल पूरा होने पर सभी देशवासियों और विशेषकर सभी विद्यार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बीते एक वर्ष में देश के आप सभी महानुभावों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, नीतिकारों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने में बहुत मेहनत की है। कोरोना के इस काल में भी लाखों नागरिकों से, शिक्षकों, राज्यों, ऑटोनॉमस बॉडीज से सुझाव लेकर, टास्क फोर्स बनाकर नई शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। बीते एक वर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आधार बनाकर अनेक बड़े फैसले लिए गए हैं। आज इसी कड़ी में मुझे बहुत सारी नई योजनाओं, नए initiatives की शुरुआत करने का सौभाग्य मिला है।

साथियों, 
ये महत्वपूर्ण अवसर ऐसे समय में आया है जब देश आज़ादी के 75 साल का अमृत महोत्सव मना रहा है। आज से कुछ ही दिन बाद 15 अगस्त को हम आज़ादी के 75वें साल में प्रवेश भी करने जा रहे हैं। एक तरह से, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का implementation, आजादी के अमृत महोत्सव का प्रमुख हिस्सा बन गया है। इतने बड़े महापर्व के बीच 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' के तहत आज शुरू हुई योजनाएं 'नए भारत के निर्माण' में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगी। भारत के जिस सुनहरे भविष्य के संकल्प के साथ आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, उस भविष्य की ओर हमें आज की नई पीढ़ी ही ले जाएगी। भविष्य में हम कितना आगे जाएंगे, कितनी ऊंचाई प्राप्त करेंगे, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपने युवाओं को वर्तमान में, यानि आज कैसी शिक्षा दे रहे हैं, कैसी दिशा दे रहे हैं। इसीलिए, मैं मानता हूं, भारत की नई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में बड़े factors में से एक है। और इसीलिए, देश ने इस शिक्षा नीति को इतना आधुनिक बनाया है, इतना फ्यूचर रेडी रखा है। आज इस कार्यक्रम में जुड़े अधिकांश महानुभाव, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बारीकियों से परिचित हैं, लेकिन ये कितना बड़ा मिशन है, इस ऐहसास को हमें बार-बार याद करना ही है।

साथियों, 
देश भर से हमारे कई युवा स्टूडेंट्स भी इस कार्यक्रम में हमारे साथ हैं। अगर इन साथियों से हम उनकी आकांक्षाओं के बारे में, सपनों के बारे में पूछें, तो आप देखेंगे कि हर एक युवा के मन में एक नयापन है, एक नई ऊर्जा है। हमारा युवा बदलाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। वो इंतज़ार नहीं करना चाहता। हम सबने देखा है, कोरोनाकाल में कैसे हमारी शिक्षा व्यवस्था के सामने इतनी बड़ी चुनौती आई। स्टूडेंट्स की पढ़ाई का, जीवन का ढंग बदल गया। लेकिन देश के विद्यार्थियों ने तेजी से इस बदलाव को adopt किया। ऑनलाइन एजुकेशन अब एक सहज चलन बनती जा रही है। शिक्षा मंत्रालय ने भी इसके लिए अनेक प्रयास किए हैं। मंत्रालय ने दीक्षा प्लेटफॉर्म शुरु किया, स्वयं पोर्टल पर पाठ्यक्रम शुरू किए, और हमारे स्टूडेंट्स पूरे जोश से इनका हिस्सा बन गए। दीक्षा पोर्टल पर मुझे बताया गया कि पिछले एक साल में 23 सौ करोड़ से ज्यादा हिट होना बताता है कि ये कितना उपयोगी प्रयास रहा है। आज भी इसमें हर दिन करीब 5 करोड़ हिट हो रहे हैं। साथियों, 21वीं सदी का आज का युवा अपनी व्यवस्थाएं, अपनी दुनिया खुद अपने हिसाब से बनाना चाहता है। इसलिए, उसे exposure चाहिए, उसे पुराने बंधनों, पिंजरों से मुक्ति चाहिए। आप देखिए, आज छोटे छोटे गाँवों से, कस्बों से निकलने वाले युवा कैसे-कैसे कमाल कर रहे हैं। इन्हीं दूर-दराज इलाकों और सामान्य परिवारों से आने वाले युवा आज टोक्यो ओलंपिक्स में देश का झण्डा बुलंद कर रहे हैं, भारत को नई पहचान दे रहे हैं। ऐसे ही करोड़ों युवा आज अलग अलग क्षेत्रों में असाधारण काम कर रहे हैं, असाधारण लक्ष्यों की नींव रख रहे हैं। कोई कला और संस्कृति के क्षेत्र में पुरातन और आधुनिक के fusion से नई विधाओं को जन्म दे रहा है, कोई रोबोटिक्स के क्षेत्र में कभी साई-फ़ाई मानी जाने वाली कल्पनाओं को हकीकत में बदल रहा है। कोई artificial intelligence के क्षेत्र में मानवीय क्षमताओं को नई ऊंचाई दे रहा है, तो कोई मशीन लर्निंग में नए माइल स्टोन्स की तैयारी कर रहा है। यानि हर क्षेत्र में भारत के युवा अपना परचम लहराने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यही युवा भारत के स्टार्टअप eco-system को revolutionize कर रहे हैं, इंडस्ट्री 4.0 में भारत के नेतृत्व को तैयार कर रहे हैं, और डिजिटल इंडिया को नई गति दे रहे हैं। आप कल्पना करिए, इस युवा पीढ़ी को जब इनके सपनों के अनुरूप वातावरण मिलेगा तो इतनी शक्ति कितनी ज्यादा बढ़ जाएगी। और इसीलिए, नई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' युवाओं को ये विश्वास दिलाती है कि देश अब पूरी तरह से उनके साथ है, उनके हौसलों के साथ है। जिस आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस के प्रोग्राम को अभी लॉंच किया गया है, वो भी हमारे युवाओं को future oriented बनाएगा, AI driven economy के रास्ते खोलेगा। शिक्षा में ये डिजिटल revolution, पूरे देश में एक साथ आए, गाँव-शहर सब समान रूप से डिजिटल लर्निंग से जुड़ें, इसका भी खास ख्याल रखा गया है। National Digital Education Architecture, यानी NDEAR और नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम -NETF इस दिशा में पूरे देश में डिजिटल और टेक्नोलॉजिकल फ्रेमवर्क उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगे। युवा मन जिस दिशा में भी सोचना चाहे, खुले आकाश में जैसे उड़ना चाहे, देश की नई शिक्षा व्यवस्था उसे वैसे ही अवसर उपलब्ध कराएगी।


साथियों, 
बीते एक वर्ष में आपने भी ये महसूस किया होगा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रखा गया है। जो openness पॉलिसी के लेवेल पर है, वही openness स्टूडेंट्स को मिल रहे विकल्पों में भी है। अब स्टूडेंट्स कितना पढ़ें, कितने समय तक पढ़ें, ये सिर्फ बोर्ड्स और universities नहीं तय करेंगी। इस फैसले में स्टूडेंट्स की भी सहभागिता होगी। Multiple entry and exit की जो व्यवस्था आज शुरू हुई है, इसने स्टूडेंट्स को एक ही क्लास और एक ही कोर्स में जकड़े रहने की मजबूरी से मुक्त कर दिया है। आधुनिक टेक्नालजी पर आधारित 'अकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' इस सिस्टम से इस दिशा में स्टूडेंट्स के लिए revolutionary change आने वाला है। अब हर युवा अपनी रुचि से, अपनी सुविधा से कभी भी एक स्ट्रीम को choose कर सकता है, छोड़ सकता है। अब कोई कोर्स सलेक्ट करते समय ये डर भी नहीं रहेगा कि अगर हमारा डिसिज़न गलत हो गया तो क्या होगा? इसी तरह, 'Structured Assessment for Analyzing Learning levels' यानी 'सफल' के जरिए स्टूडेंट्स के आंकलन की भी वैज्ञानिक व्यवस्था शुरू हुई है। ये व्यवस्था आने वाले समय में स्टूडेंट्स को परीक्षा के डर से भी मुक्ति दिलाएगी। ये डर जब युवा मन से निकलेगा तो नए-नए स्किल लेने का साहस और नए नए innovations का नया दौर शुरू होगा, संभावनाएं असीम विस्तार होंगी। इसलिए, मैं फिर कहूंगा कि आज नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जो ये नए कार्यक्रम शुरू हुए हैं, उनमें भारत का भाग्य बदलने का सामर्थ्य है।

साथियों,
हमने-आपने दशकों से ये माहौल देखा है जब समझा जाता था कि अच्छी पढ़ाई करने के लिए विदेश ही जाना होगा। लेकिन अच्छी पढ़ाई के लिए विदेशों से स्टूडेंट्स भारत आयें, बेस्ट institutions भारत आयें, ये अब हम देखने जा रहे हैं। ये जानकारी बहुत उत्साह बढ़ाने वाली है कि देश की डेढ़ सौ से ज्यादा यूनिवर्सिटीज में Office of International Affairs स्थापित किए जा चुके हैं। भारत के Higher Education Institutes, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च और एकैडेमिक में और आगे बढ़ें, इसके लिए आज नई गाइडलाइंस भी जारी की गई हैं।

साथियों,
आज बन रही संभावनाओं को साकार करने के लिए हमारे युवाओं को दुनिया से एक कदम आगे होना पड़ेगा, एक कदम आगे का सोचना होगा। हेल्थ हो, डिफेंस हो, इनफ्रास्ट्रक्चर हो, टेक्नोलॉजी हो, देश को हर दिशा में समर्थ और आत्मनिर्भर होना होगा। 'आत्मनिर्भर भारत' का ये रास्ता स्किल डेव्लपमेंट और टेक्नालजी से होकर जाता है, जिस पर NEP में विशेष ध्यान दिया गया है। मुझे खुशी है कि बीते एक साल में 1200 से ज्यादा उच्च शिक्षा संस्थानों में स्किल डवलपमेंट से जुड़े सैकड़ों नए कोर्सेस को मंजूरी दी गई है।

साथियों,
शिक्षा के विषय में पूज्य बापू महात्मा गांधी कहा करते थे- "राष्ट्रीय शिक्षा को सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय होने के लिए राष्ट्रीय परिस्थितियों को reflect करना चाहिए"। बापू के इसी दूरदर्शी विचार को पूरा करने के लिए स्थानीय भाषाओं में, mother language में शिक्षा का विचार NEP में रखा गया है। अब हायर एजुकेशन में 'मीडियम ऑफ इन्सट्रक्शन' के लिए स्थानीय भाषा भी एक विकल्प होगी। मुझे खुशी है कि 8 राज्यों के 14 इंजीनियरिंग कॉलेज, 5 भारतीय भाषाएं- हिंदी, तमिल, तेलुगू, मराठी और बांग्ला में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। इंजीनिरिंग के कोर्स का 11 भारतीय भाषाओं में ट्रांसलेशन के लिए एक टूल भी डवलप किया जा चुका है। क्षेत्रीय भाषा में अपनी पढ़ाई शुरू करने जा रहे छात्र-छात्राओं को मैं विशेष बधाई देना चाहता हूं। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब वर्ग को, गाँव-कस्बों में रहने वाले मध्यम वर्ग के स्टूडेंट्स को, दलित-पिछड़े और आदिवासी भाई-बहनों को होगा। इन्हीं परिवारों से आने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा language divide का सामना करना पड़ता था, सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं परिवार के होनहार बच्चों को उठाना पड़ता था। मातृभाषा में पढ़ाई से गरीब बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, उनके सामर्थ्य और प्रतिभा के साथ न्याय होगा।

साथियों,
प्रारम्भिक शिक्षा में भी मातृ भाषा को प्रोत्साहित करने का काम शुरू हो चुका है। जो 'विद्या प्रवेश' प्रोग्राम आज लाँच किया गया, उसकी भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। प्ले स्कूल का जो कान्सेप्ट अभी तक बड़े शहरों तक ही सीमित है, 'विद्या प्रवेश' के जरिए वो अब दूर-दराज के स्कूलों तक जाएगा, गांव-गांव जाएगा। ये प्रोग्राम आने वाले समय में universal प्रोग्राम के तौर पर लागू होगा, और राज्य भी अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से इसे लागू करेंगे। यानी, देश के किसी भी हिस्से में, बच्चा अमीर का हो या गरीब का हो, उसकी पढ़ाई खेलते और हँसते हुए ही होगी, आसानी से होगी, इस दिशा का ये प्रयास होगा। और जब शुरुआत मुस्कान के साथ होगी, तो आगे सफलता का मार्ग भी आसानी से ही पूरा होगा।

साथियों, 
आज एक और काम हुआ है, जो मेरे हदय के बहुत करीब है, बहुत संवेदनशील है। आज देश में 3 लाख से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिनको शिक्षा के लिए सांकेतिक भाषा की आवश्यकता पड़ती है। इसे समझते हुए भारतीय साइन लैंग्वेज को पहली बार एक भाषा विषय यानि एक Subject का दर्जा प्रदान किया गया है। अब छात्र इसे एक भाषा के तौर पर भी पढ़ पाएंगे। इससे भारतीय साइन लैंग्वेज को बहुत बढ़ावा मिलेगा, हमारे दिव्यांग साथियों को बहुत मदद मिलेगी। 

साथियों,
आप भी जानते हैं कि किसी भी स्टूडेंट की पूरी पढ़ाई में, उसके जीवन में बड़ी प्रेरणा उसके अध्यापक होते हैं। हमारे यहाँ तो कहा गया है- 

गुरौ न प्राप्यते यत् तत्, 
न अन्य अत्रापि लभ्यते। 

अर्थात्, जो गुरु से प्राप्त नहीं हो सकता वो कहीं प्राप्त नहीं हो सकता। यानी, ऐसा कुछ भी नहीं है जो एक अच्छा गुरु, अच्छा शिक्षक मिलने के बाद दुर्लभ हो। इसीलिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के formulation से लेकर implementation तक हर स्टेज पर हमारे शिक्षक सक्रिय रूप से इस अभियान का हिस्सा हैं। आज लाँच हुआ ‘निष्ठा' 2.0 ये प्रोग्राम भी इस दिशा में एक अहम भूमिका निभाएगा। इस प्रोग्राम के जरिए देश के शिक्षकों को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग भी मिलेगी, और वो अपने सुझाव भी विभाग को दे पाएंगे। मेरा आप सभी शिक्षकों से, academicians से अनुरोध है कि इन प्रयासों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लीजिये, अधिक से अधिक योगदान दीजिये। आप सभी शिक्षा के क्षेत्र में इतना अनुभव रखते हैं, व्यापक अनुभव के धारक हैं, इसलिए जब आप प्रयास करेंगे तो आपके प्रयास राष्ट्र को बहुत आगे लेकर जाएंगे। मैं मानता हूँ, कि इस कालखंड में हम जिस भी भूमिका में हैं, हम सौभाग्यशाली हैं कि हम इतने बड़े बदलावों के गवाह बन रहे हैं, इन बदलावों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आपके जीवन में ये स्वर्णिम अवसर आया है कि आप देश के भविष्य का निर्माण करेंगे, भविष्य की रूपरेखा अपने हाथों से खींचेगे। मुझे पूरा विश्वास है, आने वाले समय में जैसे-जैसे नई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' के अलग-अलग Features, हकीकत में बदलेंगे, हमारा देश एक नए युग का साक्षात्कार करेगा। जैसे-जैसे हम अपनी युवा पीढ़ी को एक आधुनिक और राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते जाएंगे, देश आज़ादी के अमृत संकल्पों को हासिल करता जाएगा। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। आप सब स्वस्थ रहें, और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ते रहें। बहुत बहुत धन्यवाद।

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Prime Minister shares Sanskrit Subhashitam highlighting respect for nature and environmental stewardship
July 30, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, said that respect for nature, the environment and the entire creation lies at the very core of our existence. He called upon everyone to participate, with a spirit of gratitude and selfless service towards nature, in building a healthy, prosperous and strong nation.

The Prime Minister shared a Sanskrit Subhashitam-

“शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु।

शं न ओषधीर्वनिनो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः॥”

The Subhashitam conveys that May Dyuloka and the Earth, which have been revered since the beginning of creation, always be auspicious for us. May the intermediate space between the Earth and the Sun be beneficial and enlightening for our lives. May all medicinal herbs and forest plants provide us with health, nourishment, and happiness. May the all-pervading and victorious Lord of all worlds ever grant us welfare, peace, and prosperity.

The Prime Minister wrote on X;

“प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है। आइए, हम इनके प्रति पूरी कृतज्ञता और सेवाभाव के साथ एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनें।

शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु।

शं न ओषधीर्वनिनो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः॥”