Published By : Admin |
October 7, 2025 | 10:27 IST
Share
ഐഎംസി 2025: ഏഷ്യയിലെ ഏറ്റവും വലിയ ടെലികോം, സാങ്കേതിക പരിപാടിയായ ഐഎംസി 2025, ഒക്ടോബർ 8 മുതൽ 11 വരെ നടക്കും
വിഷയം: "ഇന്നോവേറ്റ് ടു ട്രാൻസ്ഫോം" - ഡിജിറ്റൽ പരിവർത്തനത്തിൽ ഇന്ത്യയുടെ നേതൃത്വം പ്രദർശിപ്പിക്കുന്നു
ശ്രദ്ധാ മേഖലകൾ: 6 ജി, ക്വാണ്ടം കമ്മ്യൂണിക്കേഷൻസ്, സെമികണ്ടക്ടറുകൾ, ഒപ്റ്റിക്കൽ നെറ്റ്വർക്കുകൾ, സൈബർ തട്ടിപ്പ് പ്രതിരോധം
ഐഎംസി 2025 ൽ 400 ലധികം കമ്പനികൾ, ഏകദേശം 7,000 ആഗോള പ്രതിനിധികൾ, 150 ലധികം രാജ്യങ്ങളിൽ നിന്നുള്ള ഏകദേശം 1.5 ലക്ഷം സന്ദർശകർ എന്നിവരുടെ പങ്കാളിത്തം ഉണ്ടാകും
ഏഷ്യയിലെ ഏറ്റവും വലിയ ടെലികോം, മാധ്യമ ,സാങ്കേതിക പരിപാടിയായ ഇന്ത്യ മൊബൈൽ കോൺഗ്രസ് (ഐഎംസി) 2025 ന്റെ 9-ാമത് പതിപ്പ് പ്രധാനമന്ത്രി ശ്രീ നരേന്ദ്ര മോദി 2025 ഒക്ടോബർ 8 ന് രാവിലെ 9:45 ന് ന്യൂഡൽഹിയിലെ യശോഭൂമിയിൽ ഉദ്ഘാടനം ചെയ്യും.
ടെലികമ്മ്യൂണിക്കേഷൻസ് വകുപ്പും (ഡിഒടി) സെല്ലുലാർ ഓപ്പറേറ്റേഴ്സ് അസോസിയേഷൻ ഓഫ് ഇന്ത്യയും (സിഒഎഐ) സംയുക്തമായി സംഘടിപ്പിക്കുന്ന ഐഎംസി 2025 ഒക്ടോബർ 8 മുതൽ 11 വരെ "ഇന്നൊവേറ്റ് ടു ട്രാൻസ്ഫോം" എന്ന വിഷയത്തെ അധികരിച്ച് നടക്കും. ഇത് ഡിജിറ്റൽ പരിവർത്തനത്തിനും സാമൂഹിക പുരോഗതിക്കും വേണ്ടി നവീകരണം പ്രയോജനപ്പെടുത്തുന്നതിനുള്ള ഇന്ത്യയുടെ പ്രതിബദ്ധത എടുത്തുകാണിക്കുന്നു.
ടെലികോമിലെയും വളർന്നുവരുന്ന സാങ്കേതികവിദ്യകളിലെയും ഏറ്റവും പുതിയ മുന്നേറ്റങ്ങൾ പ്രദർശിപ്പിക്കുന്നതിനായി ഐഎംസി 2025 ആഗോള നേതാക്കൾ, നയരൂപകർത്താക്കൾ, വ്യവസായ വിദഗ്ധർ, നൂതനാശയക്കാർ എന്നിവരെ ഒരുമിച്ച് കൊണ്ടുവരും. ഒപ്റ്റിക്കൽ കമ്മ്യൂണിക്കേഷൻസ്, ടെലികോമിലെ സെമികണ്ടക്ടറുകൾ, ക്വാണ്ടം കമ്മ്യൂണിക്കേഷൻസ്, 6G, ഫ്രോഡ് റിസ്ക് ഇൻഡിക്കേറ്ററുകൾ എന്നിവയുൾപ്പെടെയുള്ള പ്രധാന വിഷയങ്ങളിൽ ശ്രദ്ധ കേന്ദ്രീകരിക്കുന്നതിലൂടെ, പരിപാടി അടുത്ത തലമുറ കണക്റ്റിവിറ്റി, ഡിജിറ്റൽ പരമാധികാരം, സൈബർ തട്ടിപ്പ് തടയൽ, ആഗോള സാങ്കേതിക നേതൃത്വം എന്നിവയിൽ ഇന്ത്യയുടെ തന്ത്രപരമായ മുൻഗണനകളെ പ്രതിഫലിപ്പിക്കും.
150-ലധികം രാജ്യങ്ങളിൽ നിന്നുള്ള 1.5 ലക്ഷത്തിലധികം സന്ദർശകർ, 7,000+ ആഗോള പ്രതിനിധികൾ, 400+ കമ്പനികൾ എന്നിവർ പങ്കെടുക്കുമെന്ന് പ്രതീക്ഷിക്കുന്നു. 5G/6G, AI, സ്മാർട്ട് മൊബിലിറ്റി, സൈബർ സുരക്ഷ, ക്വാണ്ടം കമ്പ്യൂട്ടിംഗ്, ഗ്രീൻ ടെക്നോളജി തുടങ്ങിയ മേഖലകളിലെ 1,600-ലധികം പുതിയ പ്രായോഗിക വിഷയങ്ങൾ 100+ സെഷനുകളിലൂടെയും 800+ വിഷയാവതാരകരിലൂടെയും പ്രദർശിപ്പിക്കും.
ജപ്പാൻ, കാനഡ, യുണൈറ്റഡ് കിംഗ്ഡം, റഷ്യ, അയർലൻഡ്, ഓസ്ട്രിയ എന്നിവിടങ്ങളിൽ നിന്ന് പരിപാടിയിൽ പങ്കെടുക്കുന്ന പ്രതിനിധികളുമായുള്ള അന്താരാഷ്ട്ര സഹകരണത്തിനും ഐഎംസി 2025 അടിവരയിടുന്നു.
Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026
Share
पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!
आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।
साथियों,
आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।
साथियों,
BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।
साथियों,
बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।
साथियों,
दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।
साथियों,
इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।
साथियों,
स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!