PM pays tributes to Guru Basaveshwara, says he showed the path of social reform centuries ago
Indian society is unique because social reformers arose from it time and again, to reform society, and fight social evils: PM Modi
Rishis, Saints, Seers, Mutts...they have done great service for society: PM Modi
Saints, seers...they overcame so much opposition and ensured evils were removed from society: PM
The 21st century is the century of knowledge. The one with more knowledge and information will influence the world: PM
It is the saints who have understood what the 21st century is about & that is why this knowledge centre is starting: PM
Proud of our Jawans and security forces: PM Narendra Modi
Enemies of humanity who can't see India progress, attacked in Pathankot, but our security forces did not let them succeed: PM

मुझे पूछ रहे थे कि मैं हिन्‍दी में बोलू तो यहां translation करने की जरूरत है क्‍या? स्‍वामी जी स्‍वयं बताए कि कोई जरूरत नहीं, यहां सब हिन्‍दी समझते हैं। ये मेरा सौभाग्‍य है कि इस पवित्र उपक्रम में मुझे सरीक होने का अवसर मिला है। इतनी बड़ी संख्‍या में संतों की हाजिरी हो, इतने वरिष्‍ठ संत, इस उम्र में, इस समारोह में उपस्‍थित हो, ऐसा सौभाग्‍य कहां मिलता है।

कुछ दिन पहले मैं लंदन गया था। लोकतंत्र की बातें, मानवतावाद की बातें, women empowerment की चर्चाएं, दुनिया के देशों को लगता है ये सारे विचार वहीँ पर शुरू हुए, वही पर पैदा हुए और दुनिया को वही से मिले। जहां इस प्रकार की सोच है वहां पर मुझे उस महापुरुष के statue का अनावरण करने का सौभाग्‍य मिला। वे बसेश्‍वर जी, social reformers कैसे होते हैं, women empowerment क्‍या होता है, grass root level democracy की ताकत क्‍या होती है, सदियों पहले इसी धरती के महापुरुष बसेश्‍वर जी ने दुनिया को करके दिखाया। स्‍वीडन के पार्लियामेंट के स्‍पीकर उस अवसर पर मौजूद थे और जो मैंने समाज सुधार का महान काम करने वाले बसेश्‍वर जी की बातें सुनाई तो उनके लिए तो आश्‍चर्य था कि सदियों पहले भारत में महापुरुष का ऐसा चिंतन हुआ करता था और वो सिर्फ विचार नहीं व्‍यवहार भी था, आचरण भी था और करके दिखाया था। आज उसी परंपरा की एक कड़ी के साथ मुझे जुड़ने का सौभाग्‍य मिला है। मैं अपने आप को बहुत भाग्‍यशाली मानता हूं।

सारे विश्‍व में, इस बात के विषय में बहुत कम जानकारी है और कभी-कभी तो विश्‍व छोड़ो हमारे देश में भी एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो अपने आप को बहुत बड़ा बुद्धिमान मानता है, बड़ा elite class मानता है। उन्‍हें अंदाजा नहीं है कि भारत में ऋषियों ने, मुनियों ने, संतों ने, मंतों ने समाज हित के लिए कितने बड़े-बड़े काम किए हैं। उनका उस तरफ ध्‍यान ही नहीं है और इसलिए जहां-तहां हमारी इस महान परंपरा की आलोचना करते रहना यही कुछ लोगों की आदत बन गई है। इस देश की विशेषता है कि हजारों साल पुराने इस समाज जीवन में समय-समय पर किसी न किसी बुराई ने प्रवेश कर दिया है। समाज में विकृति आई, गलत चीजें घुस गई, गलत पंरपराएं घुस गई, जिसने इस समाज की आत्‍मा को भी तहस-तहस कर दिया लेकिन उसके बाद यही समाज की ताकत देखिए कि इसी समाज में से संत पैदा हुए, समाज सुधारक पैदा हुए, ऋषि-मुनि पैदा हुए और उन्‍होंने समाज के विरोधों के बावजूद भी समाज सुधार का बीड़ा उठाया और समाज की बुराइयों से समाज को मुक्‍त कराने का अविरत प्रयास किया।

हजारों साल से ये देश, ये परंपराएं, ये संस्‍कृति इसलिए बची है कि हर युग में जब-जब संकट आया, जब-जब हमारे भीतर बुराइयां आई, हमारे भीतर से ही एक नई ऊर्जा पैदा हुई, नया नेतृत्‍व पैदा हुआ, नई ताकत पैदा हुई, नई परंपरा पैदा हुई और समाज सुधार का काम चलता रहा और इसलिए मैं आज जब His Holiness जगतगुरु श्री डॉ. शिवराथरी राजेन्‍द्र महास्‍वामी जी के शताब्‍दी समारोह में आया हूं, उस महाने परंपरा को नमन करने के लिए आया हूं, जिस महान परंपरा ने समाज के हितों की, समाज के कल्‍याण की, चिंता करने में कभी कोई कमी नहीं की।

हम आजादी के आंदोलन को देखे, इस तरफ हमारे लोगों का ध्‍यान बहुत कम जाता है। लेकिन अगर हम आजादी के आंदोलन को देखे तो 19वीं शताब्‍दी में और 18वीं शताब्‍दी, ये दो शताब्‍दी पर हम नजर गड़े तो हमारे ध्‍यान में आएगा कि 20वीं शताब्‍दी में जो आजादी के आंदोलन की तीव्रता पैदा हुई, उसके पीछे 19वीं शताब्‍दी और 18वीं शताब्‍दी में हमारे संतों महंतों ने, जिसको हम भक्‍ति युग कहते है, उस भक्‍ति युग में जो चेतनाएं जगाई गई, भारत की आत्‍मा को जगाने का प्रयास हुआ और हिन्‍दुस्‍तान के हर क्षेत्र, इलाके में, पूर्व हो, पश्‍चिम हो, उत्‍तर हो, दक्षिण हो, हर भाषा-भाषी ने, कोई तो एक संत पैदा हुआ जो संत, मठ-मंदिरों से बहार निकला, एक सामूहिक जागरण का अभियान चलाया। पूरे देश में फिर से एक बार समाज की आत्‍मा को जगाने का काम दो शताब्‍दी तक हमारे संतों ने, हमारे महापुरुषों ने किया और वो चेतना जगी। जिस चेतना में से 1857 के स्‍वतंत्रता संग्राम की ज्‍योति जगी। वही एक तरह से 1947 में, देश आजादी को प्राप्‍त कर सका। आजादी के आंदोलन की पीठिका ऐसे महापुरुषों ने रची। जिसको आगे महात्‍मा गांधी का नेतृत्‍व मिला और देश ने महात्‍मा गांधी को भी कभी राजनेता के रूप में नहीं देखा था। उसी संत परंपरा की एक कड़ी के रूप में देखा था, तभी तो उनको महात्‍मा कहा था। जो बात संतों-महंतों के लिए कही जाती थी, वो बात महात्‍मा गांधी के लिए कही जाती थी। उसी परंपरा का नेतृत्‍व मिला और तब जाकर के देश को आजादी प्राप्‍त हुई और इसलिए भारत ने समाज जीवन के हर कबीला-कबिलाई, कबीलों से मुक्‍ति दिलाने का काम हमारे संतों के द्वारा हुआ है।

उसी प्रकार से, आज हम इस पीठ को देखते हैं। मुझे तो यहां पहले भी आने का सौभाग्‍य मिला है। शिक्षा के क्षेत्र में कितना बड़ा काम किया है। करीब एक लाख विद्यार्थियों की जिन्‍दगी, यहां बदल रही है। एक प्रकार से सरकार का काम संत कर रहे हैं। सरकार का बोझ भी हल्‍का कर रहे हैं और समाज की शक्‍ति बढ़ा रहे हैं।

आज यहां इस शताब्‍दी समारोह में knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है। ये बात सत्‍य है कि पिछली शताब्‍दियों में राष्‍ट्र की शक्‍ति को नापने का आधार या तो धन शक्‍ति हुआ करता था या तो सैन्‍य बल शक्‍ति द्वारा। इस देश के पास कितना military power है और कितना money power है उसके आधार पर विश्‍व में उस देश की ताकत को नापा जाता था। उसी के आधार पर वो देश कितना शक्‍तिशाली है और उसके आधार पर विश्‍व में उसकी स्‍वीकृति बनती थी। लेकिन वक्‍त बदल चुका है, आज धन बल हो या सैन्‍य बल हो, इतने से गाड़़ी चलती नहीं है। 21वीं सदी ज्ञान की सदी है, knowledge की century है। जिसके पास ज्‍यादा information होगी, ज्‍यादा knowledge होगा, समय के अलग सोचने वाले innovations होंगे, दुनिया पर उसी देश की चलने वाली है। और इसलिए 21वीं सदी की ताकत को संतों ने पहचाना है और उस ताकत को वैज्ञानिक तरीके से रंग देने के लिए आज knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है।

पिछली अनेक शताब्‍दियों में मानव जाति ने ज्ञान के आधार पर, विज्ञान के आधार पर, technology के आधार पर जो प्रगति की है, आज हर घंटे, हर दिन, हर महीने, हर साल विज्ञान के नए अविष्‍कार, ज्ञान का सर्वश्रेष्‍ठ प्रभाव, technology का प्रभुत्‍व, समाज जीवन को इतनी तेजी से बदल रहा है, जो पिछली शताब्‍दियों में कभी नहीं हुआ था। जिस गति से दुनिया बदल रही है, technology विज्ञान और ज्ञान के आधार पर उसको cope-up करने के लिए कभी-कभी मानव की कल्पना शक्‍ति भी कम पड़ जाती है। कही एक जगह पर लोग आगे बढ़े तो हम सोचते रह जाते हैं कि भई हम वहां कहां पहुंचेंगे। दुनिया इतनी तेजी से ज्ञान-विज्ञान और technology के सहारे बदल रही है। क्‍या भारत इंतजार करता रहेगा क्‍या? क्या भारत यही सोचता रहेगा क्या कि कोई महापुरुष, संत, महात्मा के आशीर्वाद मिल जाएंगे और देश महान हो जाएगा। संत भी ऐसा नहीं मानते हैं, संत भी मानते हैं कि knowledge Resource Centre बनाने चाहिए।

नए innovations होने चाहिए। पिछले दिनों आपको पता होगा पेरिस में दुनिया के सभी देशों के लोग इकट्ठे आए थे। एक बड़ा विश्व का कुंभ मेला लगा था और वे सब ब्रहमांड की चर्चा करने में लगे थे, Global warming के लिए, Global warming से कैसे मानव जात को बचाया जाए, विश्व को बचाया जाए, पृथ्वी को बचाया जाए, इसकी चिंता हो रही थी। लेकिन वहां पर दो बातें हुईं। एक भारत, अमेरिका, फ्रांस, इनके initiative थे, innovation पर बल देने के लिए योजना बने और इस संकट का सामना करना होगा, तो नए अनुसंधान करने पड़ेंगे, innovations करने पड़ेंगे और उसके लिए एक सामूहिक रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है और दूसरा वाला निर्णय हआ। जो देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश उपलब्ध होता है, ऐसे देश इकट्ठे आएं। विश्व में करीब 122 countries ऐसे हैं कि जहां Solar Radiation काफी मात्रा में हैं और इससे भारत के प्रयासों से, भारत के नेतृत्व में दुनिया के 122 देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश रहता है इकट्ठे आएं और सूर्य शक्ति का मानव जात में कैसे उपयोग हो, उस पर एक संगठन का निर्माण किया है।

इन चीजों का आने वाले युगों तक प्रभाव रहने वाला है। उसके मूल में ज्ञान है, विज्ञान है, technology है, innovation है और वही, वही बदलाव आया है और बदलाव को लाने की दिशा में एक उत्तम कदम है। और मैं मानता हूं कि शताब्दी समारोह तक पूज्य स्वामी जी को उत्तम से उत्तम श्रद्धांजलि, इस एक उत्तम कदम के द्वारा दी जा रही है और इसके लिए आप सब बधाई के पात्र हैं, अभिनंदन के पात्र हैं।

भारत सरकार की तरफ से इन उत्तम प्रयासों के लिए हमेशा-हमेशा के लिए कंधे से कन्धा मिलकर के देश, दिल्ली में बैठी हुई सरकार आपके साथ चलेगी और नए innovations समाज-जीवन के काम आएं, ज्ञान का भंडार, मानव जात के कल्याण का कारण बनें, उस दिशा में हम प्रयास करते रहें।

आज जब में इस पवित्र कार्यक्रम में आया हूं, मैं देश के जवानों का गर्व करना चाहता हूं, देश के सुरक्षा बलों का गर्व करना चाहता हूं, उनका अभिनंदन करना चाहता हूं। जब युद्ध होते हैं तो दुश्मन देश, अपने सामने वाले देश की सैन्य शक्ति पर घात करने के प्रयास करता है। आज मानवता के दुश्मनों ने जो भारतीय प्रगति को देखने की उनको परेशानी हो रही है, ऐसे तत्वों ने ऐसी ताकतों ने पठानकोट में हिंदुस्तान की सैन्य शक्ति का अंग Airbase देने का प्रयास किया है। मैं देश के सुरक्षा बलों को बधाई देता हूं कि दुश्मनों के उन इरादों को उन्होंने खाक में मिला दिया। उनको सफल नहीं होने दिया और जिन जवानों ने शहादत दी है, उनकी शहादत को मैं नमन करता हूं और देशवासियों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हमारे सुरक्षा बलों में वो सामर्थ्य है कि दुश्मनों की कोई भी नापाक इरादों को उठते ही वो खत्म करने की ताकत रखते हैं और देश को सुरक्षा प्रदान करते हैं। उन जांबाज जवानों को बधाई देता हूं, उन सुरक्षा बलों को अभिनंदन करता हूं और ऐसे समय राष्ट्र का आत्मविश्वास, राष्ट्र का धैर्य और राष्ट्रीय एकता एक स्वर में राष्ट्र जब बोलता है तो दुश्मन के घर नष्ट हो जाते हैं। उस संकल्प लेकर के आगे बढ़ें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। पूज्य स्वामी जी के श्री चरणों में प्रणाम करता हूं और ये knowledge Resource Centre 21वीं सदी में हमें नई ताकत दें, इसी अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद।

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ബഹുമാന്യരേ,

വിശിഷ്ട വ്യക്തിത്വങ്ങളേ,

നമസ്കാരം!

ബ്രിക്സിന്റെ വിപുലീകരിച്ച കുടുംബത്തിലേക്ക് നിങ്ങളെ ഏവരെയും ഞാൻ ഹൃദ്യമായി സ്വാഗതം ചെയ്യുന്നു.

ഇന്ന് ഈ ഹാൾ വിവിധ ഭൂഖണ്ഡങ്ങളെയും സംസ്‌കാരങ്ങളെയും വൈവിധ്യമാർന്ന വികസന യാത്രകളെയും ഒന്നിച്ചു കൊണ്ടുവരുന്നു. ബ്രിക്സിന് മേൽ വളർന്നുവരുന്ന കരുത്തിന്റെയും ആകർഷണീയതയുടെയും അഭൂതപൂർവ്വമായ വിശ്വാസത്തിന്റെയും ജീവസ്സുറ്റ സാക്ഷ്യപത്രമാണിത്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

ഇന്ത്യയുടെ അധ്യക്ഷതയിൽ നമ്മൾ എല്ലാ ശ്രമങ്ങളും ഇനി പറയുന്ന നാല് സ്തംഭങ്ങളിലാണ് കേന്ദ്രീകരിച്ചിട്ടുള്ളത്: അതിജീവനശേഷി, നവീനാശയം, സഹകരണം, സുസ്ഥിരത. നിങ്ങളുടെയെല്ലാം സഹകരണത്തോടും പിന്തുണയോടും കൂടി നമ്മുടെ പങ്കാളിത്ത കാഴ്ചപ്പാടിനെ ഇരുവിഭാഗത്തിനും പ്രയോജനകരമായ സഹകരണമാക്കി മാറ്റാൻ സാധിച്ചതിൽ എനിക്ക് വളരെയധികം സന്തോഷമുണ്ട്.

ഇന്ന് ലോകത്തിൽ സംഘർഷങ്ങളുടെയും അമർഷങ്ങളുടെയും/അസ്വാരസ്യങ്ങളുടെയും എണ്ണം തുടർച്ചയായി വർദ്ധിച്ചുകൊണ്ടിരിക്കുകയാണ്; അത് സാധാരണക്കാരായ ആളുകളുടെ ജീവിതത്തെ പ്രതികൂലമായും വ്യാപകമായും ബാധിക്കുന്നുമുണ്ട്.

മഹാമാരികളും കാലാവസ്ഥാ ദുരന്തങ്ങളും വിതരണ ശൃംഖലയിലുണ്ടാകുന്ന തടസ്സങ്ങളും തെളിയിക്കുന്നത്, ഇന്നത്തെ പരസ്പരബന്ധിതമായ ലോകത്ത് ഒരു പ്രതിസന്ധിയും ഏതെങ്കിലും ഒരു പ്രദേശത്തു മാത്രമായി ഒതുങ്ങിനിൽക്കില്ല എന്നാണ്. അതുകൊണ്ട്, ബ്രിക്സ് കൂട്ടായ്മയിൽ അതിജീവനശേഷി ശക്തിപ്പെടുത്തുന്നതിന് നമ്മൾ പ്രത്യേക ഊന്നൽ നൽകിയിട്ടുണ്ട്. വെല്ലുവിളികളെ സമയബന്ധിതമായി തിരിച്ചറിയുക, അവയ്ക്കായി സജ്ജരാവുക, ഉടൻ തന്നെ നടപടികൾ സ്വീകരിക്കുക എന്നതും അതുപോലെ തന്നെ പ്രധാനമാണ്.

ഈ ചിന്തയോടെ, പകർച്ചവ്യാധികളുടെ പ്രതിരോധത്തിനും പ്രതികരണത്തിനുമായി നമ്മൾ 'ബ്രിക്സ് ഇന്റഗ്രേറ്റഡ് ഏർലി വാണിംഗ് സിസ്റ്റം' എന്ന കാര്യത്തിൽ ധാരണയിലെത്തിയിട്ടുണ്ട്. ദുരന്ത നിവാരണത്തിനായി 'ഏർലി വാണിംഗ് ഡാറ്റാ ഇന്റഗ്രേഷൻ ഗൈഡ്‌ലൈൻസ്' തയ്യാറാക്കിയിട്ടുണ്ട്. കൂടാതെ 'ബ്രിക്സ് ലോജിസ്റ്റിക്സ് സപ്ലൈ ചെയിൻ കോഓപ്പറേഷൻ ഫ്രെയിംവർക്ക്' നമ്മുടെ വിതരണ ശൃംഖലകളെ കൂടുതൽ വിശ്വസനീയവും ശക്തവുമാക്കാൻ സഹായിക്കും.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

നവീനാശയത്തിന് കീഴിൽ, 'ബ്രിക്സ് ഇൻക്യുബേറ്റർ നെറ്റ്‌വർക്ക്' നമ്മുടെ സ്റ്റാർട്ടപ്പുകളെയും ഇൻക്യുബേറ്ററുകളെയും തമ്മിൽ പരസ്പരബന്ധിതമാക്കും. നവീനവും വിപുലീകരിക്കാൻ കഴിയുന്നതുമായ പരിഹാരങ്ങളെ പ്രോത്സാഹിപ്പിക്കുന്നതിനായി നമ്മൾ 'ബ്രിക്സ് സ്റ്റാർട്ടപ്പ് ഇന്നൊവേഷൻ ഫണ്ട്' മുന്നോട്ടുവെച്ചിട്ടുണ്ട്.

'ബ്രിക്സ് നെറ്റ്‌വർക്ക് ഓൺ ഡിജിറ്റൽ അഗ്രികൾച്ചർ' കർഷകർക്കായി പുതിയ സാധ്യതകൾ തുറന്നുനൽകും. ഈ പദ്ധതിയിലൂടെ കൃത്രിമബുദ്ധി (AI), ജിയോസ്‌പേഷ്യൽ സാങ്കേതികവിദ്യ, ഡിജിറ്റൽ പൊതു അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങൾ എന്നിവയെ കർഷകരുടെ യഥാർത്ഥ ആവശ്യങ്ങളുമായി ബന്ധിപ്പിക്കും.

സാങ്കേതികവിദ്യയുടെയും നി‍ർണായക ധാതുക്കളുടെയും ആയുധവൽക്കരണം നമ്മുടെ പങ്കാളിത്ത പുരോഗതിക്ക് തടസ്സമാകാം. അതിനാൽ സാങ്കേതികവിദ്യ സ്വീകരിക്കുന്നതിൽ നമ്മൾ ഉൾക്കൊള്ളൽ നയത്തിന് പ്രാധാന്യം നൽകിയിട്ടുണ്ട്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

ബ്രിക്സ് വേദി വഴി സൗഹൃദവും പങ്കാളിത്തവും സഹകരണവും ഇന്ത്യ മുന്നോട്ടുകൊണ്ടുപോയിട്ടുണ്ട്.

ബ്രിക്സ് സഹകരണം കേവലം ഗവൺമെന്റുകളിൽ മാത്രം ഒതുങ്ങിനിൽക്കരുത് എന്ന് ഉറപ്പാക്കാനായിരുന്നു നമ്മുടെ ശ്രമം. നമ്മുടെ സംരംഭകർ, കർഷകർ, ഗവേഷകർ, വനിതകൾ, യുവാക്കൾ, സാധാരണ പൗരന്മാർ എന്നിവരെയും ഇതിന്റെ സജീവ പങ്കാളികളാക്കാൻ നമ്മൾ ശ്രമിച്ചിട്ടുണ്ട്.

'ബ്രിക്സ് കണക്ട്' വഴി നമ്മൾ വൈദഗ്ധ്യം, തൊഴിൽക്ഷമത, തൊഴിൽ സേനയിലെ വനിതാ പങ്കാളിത്തം, സാമൂഹിക സുരക്ഷ, ശേഷി വികസനം എന്നിവയെ പ്രോത്സാഹിപ്പിച്ചു.

ചെറുകിട സംരംഭങ്ങളെ അറിവുമായും സാമ്പത്തിക സഹായങ്ങളുമായും പുതിയ വിപണികളുമായും ബന്ധിപ്പിക്കുന്നതിന് നമ്മൾ 'ബ്രിക്സ് എം.എസ്.എം.ഇ കോഓപ്പറേഷൻ പോർട്ടൽ' ആരംഭിച്ചിട്ടുണ്ട്.

നമ്മുടെ നഗരങ്ങൾക്കിടയിൽ മികച്ച പ്രായോഗിക രീതികൾ പങ്കുവെക്കുന്നതിനായി 'ബ്രിക്സ് അർബൻ മൊബിലിറ്റി ഹബ്ബ്' സ്ഥാപിച്ചിട്ടുണ്ട്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

ഭാരതീയ സംസ്കാരത്തിൽ പ്രകൃതിക്ക് അമ്മയുടെ സ്ഥാനമാണ് നൽകിയിട്ടുള്ളത്. വികസനവും പരിസ്ഥിതിയും പരസ്പര വിരുദ്ധമല്ല, മറിച്ച് പൂരകങ്ങളാണ് എന്നാണ് നൂറ്റാണ്ടുകളായി നമ്മുടെ വിശ്വാസം. ബ്രിക്സിലും മാനവ വികസനവും പരിസ്ഥിതിയും തമ്മിലുള്ള സന്തുലിതാവസ്ഥ ഉറപ്പാക്കുന്നതിന് നമ്മൾ പ്രാധാന്യം നൽകിയിട്ടുണ്ട്.

ഇതാണ് സുസ്ഥിരതയുടെ അടിസ്ഥാനം. ഭാവി തലമുറകളോടുള്ള നമ്മുടെ ഉത്തരവാദിത്തം കൂടിയാണിത്. ഈ ദിശയിൽ നിരവധി കാര്യങ്ങളിൽ നമ്മൾ പുരോഗതി കൈവരിച്ചിട്ടുണ്ട്.

സ്മാർട്ട് ഗ്രിഡുകൾക്കും ഊർജ്ജ സംഭരണത്തിനുമായി നമ്മൾ 'ബ്രിക്സ് ഡിജിറ്റൽ സെന്റർ ഓഫ് എക്സലൻസ്' രൂപീകരിച്ചു. ഇത് നമ്മുടെ ശുദ്ധമായ ഊർജ്ജ സംവിധാനങ്ങളെ കൂടുതൽ വിശ്വസനീയവും കാര്യക്ഷമവും എല്ലാവർക്കും ലഭ്യവുമാക്കുവാനും സഹായിക്കും.

അഗ്രോ-ഇക്കോളജിയുടെയും റീജനറേറ്റീവ് അഗ്രികൾച്ചറിന്റെയും അധിഷ്ഠിത കേന്ദ്രങ്ങൾ പരമ്പരാഗത അറിവുകളെ ആധുനിക ശാസ്ത്രവുമായി ബന്ധിപ്പിക്കും. സമൂഹത്തെ അടിസ്ഥാനമാക്കിയുള്ള കാലാവസ്ഥാ വ്യതിയാന പ്രതിരോധത്തിനായി രൂപപ്പെടുത്തിയ തത്ത്വങ്ങൾ, തദ്ദേശീയ അറിവുകളെ കാലാവസ്ഥാ പ്രവർത്തനങ്ങളുടെ സുപ്രധാന അടിത്തറയാക്കി മാറ്റും.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

ഈ നാല് സ്തംഭങ്ങളിൽ അധിഷ്ഠിതമായി മുന്നേറിക്കൊണ്ട്, ബ്രിക്സിലൂടെ, ഉൾക്കൊള്ളുന്ന ആഗോള വളർച്ചയെ പ്രോത്സാഹിപ്പിക്കാനാണ് നമ്മൾ ശ്രമിച്ചിട്ടുള്ളത്. ബ്രിക്സിനുള്ളിൽ വികസിപ്പിച്ചെടുക്കുന്ന പരിഹാരങ്ങളുടെ പ്രയോജനം ബ്രിക്സ് രാജ്യങ്ങളിൽ മാത്രം ഒതുങ്ങിനിൽക്കരുത് എന്നാണ് നമ്മൾ വിശ്വസിക്കുന്നത്. ഗ്ലോബൽ സൗത്തിന്റെ ആവശ്യങ്ങൾക്ക് അനുയോജ്യവും എല്ലാവർക്കും ലഭ്യവുമാകുന്ന രീതിയിലും അവയെ മാറ്റിയെടുക്കേണ്ടതുണ്ട്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

എന്റെ വ്യക്തിപരമായ അനുഭവത്തിൽ നിന്ന് എനിക്ക് പറയാൻ കഴിയും, ഗ്ലോബൽ സൗത്ത് രാജ്യങ്ങൾക്ക് ബ്രിക്സിലുള്ള ആത്മവിശ്വാസം വർദ്ധിച്ചിട്ടുണ്ട്; കാരണം ബ്രിക്സിനുള്ളിൽ:

അവരുടെ ശബ്ദങ്ങൾ കേൾക്കപ്പെടുന്നുണ്ട്.

അവരുടെ അനുഭവങ്ങൾ ബഹുമാനിക്കപ്പെടുന്നുണ്ട്.

കൂടാതെ പരിഹാരങ്ങൾ അവർക്ക് വേണ്ടിയല്ല, മറിച്ച് അവരോടൊപ്പമാണ് വികസിപ്പിച്ചെടുക്കുന്നത്.

നമ്മുടെ വൈവിധ്യത്തിലും സഹകരണത്തിലുമാണ് ബ്രിക്സിന്റെ കരുത്ത് കുടികൊള്ളുന്നത്.

നമ്മൾ വേറിട്ട യാഥാർത്ഥ്യങ്ങളിൽ ഊന്നിയവരായിരിക്കാം, എന്നാൽ ഒന്നിച്ച്, സഹകരണത്തിലൂടെ നമ്മൾ ഉയരുകയും മാനവികതയ്ക്കായി വിടരുകയും ചെയ്യുന്നു.

നമ്മുടെ വൈവിധ്യം നമ്മുടെ അടയാളമായി തുടരട്ടെ, നമ്മുടെ സഹകരണം നമ്മുടെ പ്രചോദനമാകട്ടെ, നമ്മുടെ പുരോഗതി സമസ്ത മാനവികതയുടെയും നന്മയ്ക്കായി ഭവിക്കട്ടെ.

വളരെ നന്ദി.