प्रधानमंत्री ने गुरु बसावेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की, उन्हें सदियों पहले सामाजिक सुधार का रास्ता दिखाने वाले की संज्ञा दी
भारतीय समाज अद्वितीय है क्योंकि समय-समय पर समाज में सुधार लाने और सामाजिक बुराइयों से लड़ने के लिए समाज सुधारक आगे आए: पीएम मोदी
ऋषि, संत, और मठ... सभी ने समाज के लिए काफ़ी सेवा की है: प्रधानमंत्री मोदी
संन्यासी, संत... वे विपरीत परिस्थितियों से बाहर आए और यह सुनिश्चित किया कि समाज से बुराईयां दूर हों: प्रधानमंत्री
21वीं सदी ज्ञान की सदी है। जिसके पास अधिकाधिक ज्ञान और जानकारी होगी, वह पूरे विश्व को प्रभावित करेगा: प्रधानमंत्री
संतों ने 21वीं सदी की मर्म को समझा है और इसलिए ज्ञान का यह केंद्र शुरू किया जा रहा है: प्रधानमंत्री
हमें हमारे जवानों और सुरक्षा बलों पर गर्व है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
मानवता के दुश्मन, जो भारत की प्रगति नहीं देख सकते, ने पठानकोट पर हमला किया लेकिन हमारे सुरक्षा बलों ने उन्हें सफ़ल होने नहीं दिया: पीएम

मुझे पूछ रहे थे कि मैं हिन्‍दी में बोलू तो यहां translation करने की जरूरत है क्‍या? स्‍वामी जी स्‍वयं बताए कि कोई जरूरत नहीं, यहां सब हिन्‍दी समझते हैं। ये मेरा सौभाग्‍य है कि इस पवित्र उपक्रम में मुझे सरीक होने का अवसर मिला है। इतनी बड़ी संख्‍या में संतों की हाजिरी हो, इतने वरिष्‍ठ संत, इस उम्र में, इस समारोह में उपस्‍थित हो, ऐसा सौभाग्‍य कहां मिलता है।

कुछ दिन पहले मैं लंदन गया था। लोकतंत्र की बातें, मानवतावाद की बातें, women empowerment की चर्चाएं, दुनिया के देशों को लगता है ये सारे विचार वहीँ पर शुरू हुए, वही पर पैदा हुए और दुनिया को वही से मिले। जहां इस प्रकार की सोच है वहां पर मुझे उस महापुरुष के statue का अनावरण करने का सौभाग्‍य मिला। वे बसेश्‍वर जी, social reformers कैसे होते हैं, women empowerment क्‍या होता है, grass root level democracy की ताकत क्‍या होती है, सदियों पहले इसी धरती के महापुरुष बसेश्‍वर जी ने दुनिया को करके दिखाया। स्‍वीडन के पार्लियामेंट के स्‍पीकर उस अवसर पर मौजूद थे और जो मैंने समाज सुधार का महान काम करने वाले बसेश्‍वर जी की बातें सुनाई तो उनके लिए तो आश्‍चर्य था कि सदियों पहले भारत में महापुरुष का ऐसा चिंतन हुआ करता था और वो सिर्फ विचार नहीं व्‍यवहार भी था, आचरण भी था और करके दिखाया था। आज उसी परंपरा की एक कड़ी के साथ मुझे जुड़ने का सौभाग्‍य मिला है। मैं अपने आप को बहुत भाग्‍यशाली मानता हूं।

सारे विश्‍व में, इस बात के विषय में बहुत कम जानकारी है और कभी-कभी तो विश्‍व छोड़ो हमारे देश में भी एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो अपने आप को बहुत बड़ा बुद्धिमान मानता है, बड़ा elite class मानता है। उन्‍हें अंदाजा नहीं है कि भारत में ऋषियों ने, मुनियों ने, संतों ने, मंतों ने समाज हित के लिए कितने बड़े-बड़े काम किए हैं। उनका उस तरफ ध्‍यान ही नहीं है और इसलिए जहां-तहां हमारी इस महान परंपरा की आलोचना करते रहना यही कुछ लोगों की आदत बन गई है। इस देश की विशेषता है कि हजारों साल पुराने इस समाज जीवन में समय-समय पर किसी न किसी बुराई ने प्रवेश कर दिया है। समाज में विकृति आई, गलत चीजें घुस गई, गलत पंरपराएं घुस गई, जिसने इस समाज की आत्‍मा को भी तहस-तहस कर दिया लेकिन उसके बाद यही समाज की ताकत देखिए कि इसी समाज में से संत पैदा हुए, समाज सुधारक पैदा हुए, ऋषि-मुनि पैदा हुए और उन्‍होंने समाज के विरोधों के बावजूद भी समाज सुधार का बीड़ा उठाया और समाज की बुराइयों से समाज को मुक्‍त कराने का अविरत प्रयास किया।

हजारों साल से ये देश, ये परंपराएं, ये संस्‍कृति इसलिए बची है कि हर युग में जब-जब संकट आया, जब-जब हमारे भीतर बुराइयां आई, हमारे भीतर से ही एक नई ऊर्जा पैदा हुई, नया नेतृत्‍व पैदा हुआ, नई ताकत पैदा हुई, नई परंपरा पैदा हुई और समाज सुधार का काम चलता रहा और इसलिए मैं आज जब His Holiness जगतगुरु श्री डॉ. शिवराथरी राजेन्‍द्र महास्‍वामी जी के शताब्‍दी समारोह में आया हूं, उस महाने परंपरा को नमन करने के लिए आया हूं, जिस महान परंपरा ने समाज के हितों की, समाज के कल्‍याण की, चिंता करने में कभी कोई कमी नहीं की।

हम आजादी के आंदोलन को देखे, इस तरफ हमारे लोगों का ध्‍यान बहुत कम जाता है। लेकिन अगर हम आजादी के आंदोलन को देखे तो 19वीं शताब्‍दी में और 18वीं शताब्‍दी, ये दो शताब्‍दी पर हम नजर गड़े तो हमारे ध्‍यान में आएगा कि 20वीं शताब्‍दी में जो आजादी के आंदोलन की तीव्रता पैदा हुई, उसके पीछे 19वीं शताब्‍दी और 18वीं शताब्‍दी में हमारे संतों महंतों ने, जिसको हम भक्‍ति युग कहते है, उस भक्‍ति युग में जो चेतनाएं जगाई गई, भारत की आत्‍मा को जगाने का प्रयास हुआ और हिन्‍दुस्‍तान के हर क्षेत्र, इलाके में, पूर्व हो, पश्‍चिम हो, उत्‍तर हो, दक्षिण हो, हर भाषा-भाषी ने, कोई तो एक संत पैदा हुआ जो संत, मठ-मंदिरों से बहार निकला, एक सामूहिक जागरण का अभियान चलाया। पूरे देश में फिर से एक बार समाज की आत्‍मा को जगाने का काम दो शताब्‍दी तक हमारे संतों ने, हमारे महापुरुषों ने किया और वो चेतना जगी। जिस चेतना में से 1857 के स्‍वतंत्रता संग्राम की ज्‍योति जगी। वही एक तरह से 1947 में, देश आजादी को प्राप्‍त कर सका। आजादी के आंदोलन की पीठिका ऐसे महापुरुषों ने रची। जिसको आगे महात्‍मा गांधी का नेतृत्‍व मिला और देश ने महात्‍मा गांधी को भी कभी राजनेता के रूप में नहीं देखा था। उसी संत परंपरा की एक कड़ी के रूप में देखा था, तभी तो उनको महात्‍मा कहा था। जो बात संतों-महंतों के लिए कही जाती थी, वो बात महात्‍मा गांधी के लिए कही जाती थी। उसी परंपरा का नेतृत्‍व मिला और तब जाकर के देश को आजादी प्राप्‍त हुई और इसलिए भारत ने समाज जीवन के हर कबीला-कबिलाई, कबीलों से मुक्‍ति दिलाने का काम हमारे संतों के द्वारा हुआ है।

उसी प्रकार से, आज हम इस पीठ को देखते हैं। मुझे तो यहां पहले भी आने का सौभाग्‍य मिला है। शिक्षा के क्षेत्र में कितना बड़ा काम किया है। करीब एक लाख विद्यार्थियों की जिन्‍दगी, यहां बदल रही है। एक प्रकार से सरकार का काम संत कर रहे हैं। सरकार का बोझ भी हल्‍का कर रहे हैं और समाज की शक्‍ति बढ़ा रहे हैं।

आज यहां इस शताब्‍दी समारोह में knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है। ये बात सत्‍य है कि पिछली शताब्‍दियों में राष्‍ट्र की शक्‍ति को नापने का आधार या तो धन शक्‍ति हुआ करता था या तो सैन्‍य बल शक्‍ति द्वारा। इस देश के पास कितना military power है और कितना money power है उसके आधार पर विश्‍व में उस देश की ताकत को नापा जाता था। उसी के आधार पर वो देश कितना शक्‍तिशाली है और उसके आधार पर विश्‍व में उसकी स्‍वीकृति बनती थी। लेकिन वक्‍त बदल चुका है, आज धन बल हो या सैन्‍य बल हो, इतने से गाड़़ी चलती नहीं है। 21वीं सदी ज्ञान की सदी है, knowledge की century है। जिसके पास ज्‍यादा information होगी, ज्‍यादा knowledge होगा, समय के अलग सोचने वाले innovations होंगे, दुनिया पर उसी देश की चलने वाली है। और इसलिए 21वीं सदी की ताकत को संतों ने पहचाना है और उस ताकत को वैज्ञानिक तरीके से रंग देने के लिए आज knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है।

पिछली अनेक शताब्‍दियों में मानव जाति ने ज्ञान के आधार पर, विज्ञान के आधार पर, technology के आधार पर जो प्रगति की है, आज हर घंटे, हर दिन, हर महीने, हर साल विज्ञान के नए अविष्‍कार, ज्ञान का सर्वश्रेष्‍ठ प्रभाव, technology का प्रभुत्‍व, समाज जीवन को इतनी तेजी से बदल रहा है, जो पिछली शताब्‍दियों में कभी नहीं हुआ था। जिस गति से दुनिया बदल रही है, technology विज्ञान और ज्ञान के आधार पर उसको cope-up करने के लिए कभी-कभी मानव की कल्पना शक्‍ति भी कम पड़ जाती है। कही एक जगह पर लोग आगे बढ़े तो हम सोचते रह जाते हैं कि भई हम वहां कहां पहुंचेंगे। दुनिया इतनी तेजी से ज्ञान-विज्ञान और technology के सहारे बदल रही है। क्‍या भारत इंतजार करता रहेगा क्‍या? क्या भारत यही सोचता रहेगा क्या कि कोई महापुरुष, संत, महात्मा के आशीर्वाद मिल जाएंगे और देश महान हो जाएगा। संत भी ऐसा नहीं मानते हैं, संत भी मानते हैं कि knowledge Resource Centre बनाने चाहिए।

नए innovations होने चाहिए। पिछले दिनों आपको पता होगा पेरिस में दुनिया के सभी देशों के लोग इकट्ठे आए थे। एक बड़ा विश्व का कुंभ मेला लगा था और वे सब ब्रहमांड की चर्चा करने में लगे थे, Global warming के लिए, Global warming से कैसे मानव जात को बचाया जाए, विश्व को बचाया जाए, पृथ्वी को बचाया जाए, इसकी चिंता हो रही थी। लेकिन वहां पर दो बातें हुईं। एक भारत, अमेरिका, फ्रांस, इनके initiative थे, innovation पर बल देने के लिए योजना बने और इस संकट का सामना करना होगा, तो नए अनुसंधान करने पड़ेंगे, innovations करने पड़ेंगे और उसके लिए एक सामूहिक रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है और दूसरा वाला निर्णय हआ। जो देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश उपलब्ध होता है, ऐसे देश इकट्ठे आएं। विश्व में करीब 122 countries ऐसे हैं कि जहां Solar Radiation काफी मात्रा में हैं और इससे भारत के प्रयासों से, भारत के नेतृत्व में दुनिया के 122 देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश रहता है इकट्ठे आएं और सूर्य शक्ति का मानव जात में कैसे उपयोग हो, उस पर एक संगठन का निर्माण किया है।

इन चीजों का आने वाले युगों तक प्रभाव रहने वाला है। उसके मूल में ज्ञान है, विज्ञान है, technology है, innovation है और वही, वही बदलाव आया है और बदलाव को लाने की दिशा में एक उत्तम कदम है। और मैं मानता हूं कि शताब्दी समारोह तक पूज्य स्वामी जी को उत्तम से उत्तम श्रद्धांजलि, इस एक उत्तम कदम के द्वारा दी जा रही है और इसके लिए आप सब बधाई के पात्र हैं, अभिनंदन के पात्र हैं।

भारत सरकार की तरफ से इन उत्तम प्रयासों के लिए हमेशा-हमेशा के लिए कंधे से कन्धा मिलकर के देश, दिल्ली में बैठी हुई सरकार आपके साथ चलेगी और नए innovations समाज-जीवन के काम आएं, ज्ञान का भंडार, मानव जात के कल्याण का कारण बनें, उस दिशा में हम प्रयास करते रहें।

आज जब में इस पवित्र कार्यक्रम में आया हूं, मैं देश के जवानों का गर्व करना चाहता हूं, देश के सुरक्षा बलों का गर्व करना चाहता हूं, उनका अभिनंदन करना चाहता हूं। जब युद्ध होते हैं तो दुश्मन देश, अपने सामने वाले देश की सैन्य शक्ति पर घात करने के प्रयास करता है। आज मानवता के दुश्मनों ने जो भारतीय प्रगति को देखने की उनको परेशानी हो रही है, ऐसे तत्वों ने ऐसी ताकतों ने पठानकोट में हिंदुस्तान की सैन्य शक्ति का अंग Airbase देने का प्रयास किया है। मैं देश के सुरक्षा बलों को बधाई देता हूं कि दुश्मनों के उन इरादों को उन्होंने खाक में मिला दिया। उनको सफल नहीं होने दिया और जिन जवानों ने शहादत दी है, उनकी शहादत को मैं नमन करता हूं और देशवासियों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हमारे सुरक्षा बलों में वो सामर्थ्य है कि दुश्मनों की कोई भी नापाक इरादों को उठते ही वो खत्म करने की ताकत रखते हैं और देश को सुरक्षा प्रदान करते हैं। उन जांबाज जवानों को बधाई देता हूं, उन सुरक्षा बलों को अभिनंदन करता हूं और ऐसे समय राष्ट्र का आत्मविश्वास, राष्ट्र का धैर्य और राष्ट्रीय एकता एक स्वर में राष्ट्र जब बोलता है तो दुश्मन के घर नष्ट हो जाते हैं। उस संकल्प लेकर के आगे बढ़ें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। पूज्य स्वामी जी के श्री चरणों में प्रणाम करता हूं और ये knowledge Resource Centre 21वीं सदी में हमें नई ताकत दें, इसी अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद।

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महिलाओं के आरक्षण का हक लागू हो, इसमें कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ूंगा: वाराणसी में पीएम मोदी
April 28, 2026
हमारी सरकार देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है: प्रधानमंत्री
एक विकसित भारत के निर्माण का मिशन निरंतर जारी है; और जब मैं 'विकसित भारत' की बात करता हूं, तो इसका सबसे मजबूत स्तंभ भारत की 'नारी शक्ति' है: प्रधानमंत्री
काशी के सांसद और देश के पीएम होने के नाते, मैं आपसे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए आशीर्वाद चाहता हूं: पीएम
हमारी सरकार की नीतियों ने हमेशा महिलाओं के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है: प्रधानमंत्री
सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ, हमने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया है: प्रधानमंत्री

नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, संसद में मेरे साथी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान नितिन नवीन जी, उत्तर प्रदेश से सांसद और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष श्रीमान पंकज चौधरी जी, जिला पंचायत अध्यक्षा बहन पूनम मौर्या जी, मंच पर उपस्थित काशी की महिला पार्षद और ग्राम प्रधान, अन्य जन प्रतिनिधिगण और विशाल संख्या में यहां पधारी मेरी माताएं, बहनें और बेटियां। आप सबको नमस्कार।

साथियों,

हमारी काशी माता श्रृंगार गौरी, माता अन्नपूर्णा, माता विशालाक्षी, माता संकठा और मां गंगा, ऐसी दिव्य शक्तियों की भूमि है। ऐसे में आप सभी बहनों-बेटियों के इस समागम ने, इस अवसर को बहुत दिव्य बना दिया है। हम काशी के इ भूमि पर, आप सब माई-बहिन के, काशी के बिटियन के प्रणाम करत हई!

साथियों,

आज का ये अवसर नारीशक्ति के वंदन और विकास का उत्सव तो है ही, थोड़ी देर पहले ही यहां हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इसमें काशी में हर प्रकार के विकास से जुड़ी परियोजनाएं हैं। साथ ही, काशी और अयोध्या की कनेक्टिविटी बढ़ाने वाले काम भी हैं। कुछ देर पहले दो अमृत भारत ट्रेनों को हरी-झंडी दिखाई गई है। काशी से पुणे और अयोध्या से मुंबई, ये दोनों अमृत भारत ट्रेनें, यूपी और महाराष्ट्र की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएगी। अब मुंबई-पुणे सहित, पूरे महाराष्ट्र के लोगों को अयोध्या धाम और काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने का एक और आधुनिक विकल्प मिल गया है। मैं इस शुभारंभ के लिए देशवासियों को बधाई देता हूं।

साथियों,

भारत को विकसित बनाने का मिशन अनवरत चल रहा है, और जब मैं विकसित भारत की बात करता हूं, तो उसका सबसे मजबूत स्तंभ भारत की नारीशक्ति है। आज इस कार्यक्रम में आप सभी बहनों-बेटियों से एक महायज्ञ की शुरुआत के लिए आशीर्वाद लेने के लिए मैं आया हूं। काशी के सांसद के तौर पर, देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे देशहित के एक बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप सबका आशीर्वाद चाहिए, और ये बड़ा लक्ष्य है- लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करना। अभी कुछ दिन पहले सपा और कांग्रेस जैसे दलों की वजह से हमारा ये प्रयास संसद में सफल नहीं हो पाया। लेकिन मैं आप सभी बहनों को फिर से भरोसा देता हूं, आपके आरक्षण का हक लागू हो, इसमें कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ूंगा।

साथियों,

घर में महिला के सशक्त होने से पूरे परिवार को ताकत मिलती है, इससे समाज मजबूत होता है, देश मजबूत होता है। अतीत में बहनों-बेटियों को बहुत संघर्ष करना पड़ा है। काशी की आप बहनों ने भी कई तरह की मुश्किलें देखी हैं, आपने भी कितनी ही चुनौतियों का सामना किया है। बेटियों को अक्सर अनेक प्रकार के सवालों से गुजरना पड़ता था, तुम ये करके क्या करोगी? तुम्हें इसकी क्या जरूरत है? तू का करबू, तोहे का जरूरत ह, तू चुप रह, इ काम तोहसे ना हो पाई। और कई बार तो सवाल भी नहीं पूछे जाते थे, सीधे फरमान सुनाया जाता था, ये तुम्हारे बस का काम नहीं है।

साथियों,

ऐसी परिस्थितियां सिर्फ काशी की बहनों के लिए रही हों, ऐसा नहीं है, देश की अधिकतर बहन-बेटियों के ऐसे ही अनुभव रहे हैं, और इसको सहज मान लिया जाता था। इसलिए मैं जब 25 साल पहले गुजरात में मुख्यमंत्री बना था, तो सबसे पहले मैंने ऐसी धारणाओं को तोड़ने का प्रयास किया। उस दौरान बेटियों के लिए समर्पित दो बड़ी योजनाएं शुरू की गई थीं। एक थी- शाला प्रवेशोत्सव, स्कूल में बच्चियों को एडमिशन, ताकि बेटियां ज्यादा संख्या में स्कूल पहुंचें, बीच में ही उनका स्कूल न छूटे। और दूसरी थी- मुख्यमंत्री कन्या केलवणी निधि, ताकि बेटियों की फीस में उनकी मदद की जा सके।

साथियों,

तब से लेकर आज तक हमारी सरकार की नीतियों में निरंतर महिला कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। 2014 में आपने हमें सेवा का अवसर दिया, तो देश में 12 करोड़ से ज्यादा शौचालय बने, इज्जत घर बने। 30 करोड़ से ज्यादा बहनों के बैंक खाते खुलें। ढाई करोड़ से ज्यादा घरों में बिजली का कनेक्शन दिया गया। 12 करोड़ से ज्यादा घरों में नल से जल पहुंचाया गया। यानि, अनेक बड़ी योजना के केंद्र में बहनों-बेटियों को रखा गया।

साथियों,

दो साल पहले यहां बनारस में सुकन्या समृद्धि योजना से जुड़ा बहुत बड़ा अभियान चलाया था। उस समय एक ही महीने में यहां काशी में 27 हजार बेटियों के सुकन्या समृद्धि खाते खुलवाए थे, और हर बेटी के बैंक खाते में 300 रुपए भी ट्रांसफर किए गए थे। बेटियों की शिक्षा में और बेहतर भविष्य में सुकन्या समृद्धि योजना बड़ी भूमिका निभा रही है। इस योजना से बेटियों की पढ़ाई को बल मिला है, और मुद्रा योजना से बेटियों की कमाई सुनिश्चित हुई है। वहीं, मातृवंदन योजना और आयुष्मान भारत योजना से बहनों-बेटियों की दवाई का इंतज़ाम किया गया है।

साथियों,

पढ़ाई, कमाई और दवाई के साथ ही करोड़ों बहनों के नाम पर पहली बार कोई प्रॉपर्टी रजिस्टर हुई है। पीएम आवास योजना के ज्यादातर घर भी बहनों के नाम पर होते हैं। आज हमार माई बहिन सही में अपने घर क मलकिन बनत हईन।

साथियों,

हमारी सरकार का पूरा ज़ोर, बहनों की सुविधा और सुरक्षा पर रहा है। यही दो चीज़ें है, जो सशक्तिकरण की नींव मजबूत करती हैं। आपने यहां यूपी में अपनी आंखों के सामने हालात बदलते देखे हैं। कुछ साल पहले तक, जब यहां समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तो यूपी में बेटियों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया था। लेकिन अब बीजेपी सरकार में बेटियों के विरुद्ध गलत सोच रखने वाला अच्छे से जानता है कि उसका अंजाम क्या होगा।

साथियों,

भारतीय न्याय संहिता ने भी बहनों-बेटियों को सुरक्षा का नया भरोसा दिया है। इसके तहत, महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में तेज़ी से फैसले आने लगे हैं। इसी प्रकार, महिला थानों और परामर्श केंद्रों का नेटवर्क भी निरंतर बढ़ रहा है। आज यहां भी, एक महिला पुलिस चौकी और परामर्श केंद्र के भवन पर काम शुरु हुआ है। ऐसे कदम, बेटियों को सुरक्षा की गारंटी देते हैं।

साथियों,

जब महिलाओं की आर्थिक शक्ति बढ़ती है, तो घर में उनकी आवाज भी उतनी ही बुलंद होती जाती है। इसलिए, सुविधा और सुरक्षा का विश्वास देने के साथ-साथ हमने बहनों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया है। बीते 11 वर्षों में देश की करीब 10 करोड़ बहनें सेल्फ हेल्प ग्रुप्स में जोड़ी गई हैं। काशी की भी सवा लाख बहनें ऐसे समूहों से जुड़ी हैं। इन समूहों को लाखों रुपए की मदद मिल रही है, जिससे बहनें अपना काम कर रही हैं। ऐसे ही प्रयासों से अब तक 3 करोड़ बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं, 3 करोड़ लखपति दीदी, और इसमें बनारस की भी हज़ारों बहनें शामिल हैं।

साथियों,

लखपति दीदी अभियान को गति देने में हमारे डेयरी सेक्टर की भी बड़ी भूमिका है। यहां, बनास डेयरी से जुड़ी लाखों बहनें बहुत ही शानदार काम कर रही हैं। आज इन बहनों को बोनस के रूप में एक सौ छह करोड़ रुपए सीधे मिले हैं। मैं इन सभी बहनों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं काशी में डेयरी सेक्टर से जुड़ी महिलाओं से कहूंगा- अबहीं त शुरुआत भइल हौ, बनारस बढ़ी, बनास डेरी बढ़ी और इ बोनस भी बढ़त जाई।

साथियों,

बीजेपी-एनडीए सरकार बहनों को आत्मनिर्भर भी बना रही है और विकसित भारत बनाने के लिए चल रहे अभियान का नेतृत्व भी दे रही है। डिजिटल पेमेंट्स को आगे बढ़ाने में हज़ारों बैंक सखियों की बड़ी भूमिका है। बीमा और इंश्योरेंस से जुड़े काम को बीमा सखियों का नेतृत्व मिल रहा है। प्राकृतिक खेती के काम को आगे बढ़ाने में कृषि सखियां बड़ी भूमिका निभा रही हैं। और खेती में जो ड्रोन क्रांति आ रही है, उसका नेतृत्व भी हमारी नमो ड्रोन दीदियां ही कर रही हैं। बीते दशक में, बेटियों के लिए थल सेना, नौसेना और वायुसेना में नए अवसर मिले हैं। पहली बार सैनिक स्कूलों और डिफेंस अकेडमी के दरवाजे भी बेटियों के लिए खोले गए हैं। यानि, बीजेपी-एनडीए सरकार का मतलब ही है- नारी का सशक्तिकरण, नारी का उत्थान, नारी का जीवन आसान।

साथियों,

आज हर क्षेत्र में, हर मोर्चे पर भारत की बेटियां इतना शानदार काम कर रही हैं, तो स्वाभाविक है, नीति निर्माण, राष्ट्र के भविष्य से जुड़े फैसलों में भी बहनों-बेटियों की भूमिका और बढ़नी ही चाहिए। देश को आज इसकी बहुत ज़रूरत है। इसके लिए भी ईमानदारी से काम किया जा रहा है। देश की नई संसद बनाने के पीछे भी बहनों की भागीदारी का विचार एक बड़ा कारण था। नई संसद बनी, तो पहला काम हमने महिलाओं को तैंतीस परसेंट आरक्षण देने का ही किया। 40 साल से बहनों का ये अधिकार अटका और लटका हुआ था। इसलिए हमने साल 2023 में संसद में नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित करवाया।

साथियों,

कानून बनने के बाद उसे लागू किया जाना जरूरी होता है। अब ये ज़रूरी है कि ये कानून जल्द से जल्द लागू हो। इसलिए, पिछले दिनों संसद में इसको लेकर चर्चा रखी गई थी। संविधान में संशोधन के लिए हम कानून लाए थे। ये संशोधन ऐसा था, जिसके बाद ज्यादा संख्या में बहनें विधानसभा और संसद में पहुंच पातीं।

लेकिन साथियों,

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके जैसी पार्टियों ने एक बार फिर देश की महिलाओं को धोखा दिया। ऐसे दलों ने 40 साल से महिला आरक्षण पर ब्रेक लगाया हुआ था। अब समाजवादी पार्टी ने फिर से इसे लाल झंडी दिखा दी है।

साथियों,

असली बात ये है कि ये सारे परिवारवादी और तुष्टिकरण में डूबे दल, नारीशक्ति से डरे हुए हैं, आप सभी से डरे हुए हैं। ये परिवारवादी दल, देश की उन बेटियों को विधानसभा और संसद नहीं आने देना चाहते, जो कॉलेज कैंपस से लेकर पंचायतों, स्थानीय निकायों तक, हर जगह अपने दम पर नेतृत्व दे रही हैं। ये जानते हैं कि अगर धरातल पर काम करने वाली बेटियां ऊपर आ गईं, तो इनका नियंत्रण खत्म हो जाएगा, इनकी सत्ता पर सवाल खड़े हो जाएंगे। इसलिए ही जो परिवारवादी दल हैं, ये संसद में हुए विरोध में सबसे आगे रहे हैं।

साथियों,

मुझे संतोष है कि देश की बहनें-बेटियां इनकी इस कुटिल मंशा को पहचान गई हैं। आप देख रहे हैं, असम, केरलम, पुडुचेरी, बंगाल और तमिलनाडु में बहनों ने रिकॉर्ड मतदान किया है। महिला आरक्षण विरोधी दलों को अंदाजा नहीं है कि बहनों का ये वोट महिला विरोधी इन दलों को सज़ा देने के लिए हुआ है।

साथियों,

बीजेपी-NDA सरकार का एक ही मंत्र है- नागरिक देवो भव। देश के नागरिकों की पढ़ाई, कमाई, दवाई, सिंचाई और सुनवाई, ये हमारी प्राथमिकता है। इसी भाव के साथ आज यहां काशी के विकास को भी विस्तार दिया गया है। गंगाजी पर सिग्नेचर ब्रिज बनने से, पूर्वांचल की कनेक्टिविटी और सशक्त होगी।

साथियों,

बीते एक दशक में काशी, उत्तर और पूर्वी भारत का एक बड़ा आरोग्य हब बनकर उभरा है। 500 बेड का मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, काशी के हेल्थकेयर इकोसिस्टम को और मजबूत करेगा। इसके अलावा, सौ बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक का भी शिलान्यास किया गया है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए एक बहुत बड़ी सुविधा काशी में जुड़ेगी।

साथियों,

गंगा जी की साफ-सफाई हो, घाटों के विकास से जुड़ा काम हो, यहां शासन-प्रशासन से जुड़े भवनों का निर्माण हो, हरहुआ और भवानीपुर में किसानों के लिए भंडारण सुविधाएं हों, वृद्धाश्रम हो, महिला छात्रावास हो, ये सब काशी के संवेदनशील विकास का ही प्रमाण हैं। इन कार्यों से बनारस के लोगों को ही सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है।

साथियों,

काशी की विरासत, यहां की धरोहर को सशक्त करने का अभियान भी निरंतर चल रहा है। संत कबीर स्थली का विकास और नगवा स्थित संत रविदास पार्क का जीर्णोद्धार, ये हमारे इसी अभियान का हिस्सा है।

साथियों,

हमारी काशी, अविनाशी है, ये अनवरत चलने वाला शहर है। इसी तरह, विकास का ये अभियान भी निरंतर गतिमान है। मैं नारीशक्ति का वंदन करते हुए, एक बार फिर हमें आशीर्वाद देने के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं, और विकास कार्यों के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मेरे साथ बोलिए-

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम।

हर-हर महादेव।