PM pays tributes to Guru Basaveshwara, says he showed the path of social reform centuries ago
Indian society is unique because social reformers arose from it time and again, to reform society, and fight social evils: PM Modi
Rishis, Saints, Seers, Mutts...they have done great service for society: PM Modi
Saints, seers...they overcame so much opposition and ensured evils were removed from society: PM
The 21st century is the century of knowledge. The one with more knowledge and information will influence the world: PM
It is the saints who have understood what the 21st century is about & that is why this knowledge centre is starting: PM
Proud of our Jawans and security forces: PM Narendra Modi
Enemies of humanity who can't see India progress, attacked in Pathankot, but our security forces did not let them succeed: PM

मुझे पूछ रहे थे कि मैं हिन्‍दी में बोलू तो यहां translation करने की जरूरत है क्‍या? स्‍वामी जी स्‍वयं बताए कि कोई जरूरत नहीं, यहां सब हिन्‍दी समझते हैं। ये मेरा सौभाग्‍य है कि इस पवित्र उपक्रम में मुझे सरीक होने का अवसर मिला है। इतनी बड़ी संख्‍या में संतों की हाजिरी हो, इतने वरिष्‍ठ संत, इस उम्र में, इस समारोह में उपस्‍थित हो, ऐसा सौभाग्‍य कहां मिलता है।

कुछ दिन पहले मैं लंदन गया था। लोकतंत्र की बातें, मानवतावाद की बातें, women empowerment की चर्चाएं, दुनिया के देशों को लगता है ये सारे विचार वहीँ पर शुरू हुए, वही पर पैदा हुए और दुनिया को वही से मिले। जहां इस प्रकार की सोच है वहां पर मुझे उस महापुरुष के statue का अनावरण करने का सौभाग्‍य मिला। वे बसेश्‍वर जी, social reformers कैसे होते हैं, women empowerment क्‍या होता है, grass root level democracy की ताकत क्‍या होती है, सदियों पहले इसी धरती के महापुरुष बसेश्‍वर जी ने दुनिया को करके दिखाया। स्‍वीडन के पार्लियामेंट के स्‍पीकर उस अवसर पर मौजूद थे और जो मैंने समाज सुधार का महान काम करने वाले बसेश्‍वर जी की बातें सुनाई तो उनके लिए तो आश्‍चर्य था कि सदियों पहले भारत में महापुरुष का ऐसा चिंतन हुआ करता था और वो सिर्फ विचार नहीं व्‍यवहार भी था, आचरण भी था और करके दिखाया था। आज उसी परंपरा की एक कड़ी के साथ मुझे जुड़ने का सौभाग्‍य मिला है। मैं अपने आप को बहुत भाग्‍यशाली मानता हूं।

सारे विश्‍व में, इस बात के विषय में बहुत कम जानकारी है और कभी-कभी तो विश्‍व छोड़ो हमारे देश में भी एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो अपने आप को बहुत बड़ा बुद्धिमान मानता है, बड़ा elite class मानता है। उन्‍हें अंदाजा नहीं है कि भारत में ऋषियों ने, मुनियों ने, संतों ने, मंतों ने समाज हित के लिए कितने बड़े-बड़े काम किए हैं। उनका उस तरफ ध्‍यान ही नहीं है और इसलिए जहां-तहां हमारी इस महान परंपरा की आलोचना करते रहना यही कुछ लोगों की आदत बन गई है। इस देश की विशेषता है कि हजारों साल पुराने इस समाज जीवन में समय-समय पर किसी न किसी बुराई ने प्रवेश कर दिया है। समाज में विकृति आई, गलत चीजें घुस गई, गलत पंरपराएं घुस गई, जिसने इस समाज की आत्‍मा को भी तहस-तहस कर दिया लेकिन उसके बाद यही समाज की ताकत देखिए कि इसी समाज में से संत पैदा हुए, समाज सुधारक पैदा हुए, ऋषि-मुनि पैदा हुए और उन्‍होंने समाज के विरोधों के बावजूद भी समाज सुधार का बीड़ा उठाया और समाज की बुराइयों से समाज को मुक्‍त कराने का अविरत प्रयास किया।

हजारों साल से ये देश, ये परंपराएं, ये संस्‍कृति इसलिए बची है कि हर युग में जब-जब संकट आया, जब-जब हमारे भीतर बुराइयां आई, हमारे भीतर से ही एक नई ऊर्जा पैदा हुई, नया नेतृत्‍व पैदा हुआ, नई ताकत पैदा हुई, नई परंपरा पैदा हुई और समाज सुधार का काम चलता रहा और इसलिए मैं आज जब His Holiness जगतगुरु श्री डॉ. शिवराथरी राजेन्‍द्र महास्‍वामी जी के शताब्‍दी समारोह में आया हूं, उस महाने परंपरा को नमन करने के लिए आया हूं, जिस महान परंपरा ने समाज के हितों की, समाज के कल्‍याण की, चिंता करने में कभी कोई कमी नहीं की।

हम आजादी के आंदोलन को देखे, इस तरफ हमारे लोगों का ध्‍यान बहुत कम जाता है। लेकिन अगर हम आजादी के आंदोलन को देखे तो 19वीं शताब्‍दी में और 18वीं शताब्‍दी, ये दो शताब्‍दी पर हम नजर गड़े तो हमारे ध्‍यान में आएगा कि 20वीं शताब्‍दी में जो आजादी के आंदोलन की तीव्रता पैदा हुई, उसके पीछे 19वीं शताब्‍दी और 18वीं शताब्‍दी में हमारे संतों महंतों ने, जिसको हम भक्‍ति युग कहते है, उस भक्‍ति युग में जो चेतनाएं जगाई गई, भारत की आत्‍मा को जगाने का प्रयास हुआ और हिन्‍दुस्‍तान के हर क्षेत्र, इलाके में, पूर्व हो, पश्‍चिम हो, उत्‍तर हो, दक्षिण हो, हर भाषा-भाषी ने, कोई तो एक संत पैदा हुआ जो संत, मठ-मंदिरों से बहार निकला, एक सामूहिक जागरण का अभियान चलाया। पूरे देश में फिर से एक बार समाज की आत्‍मा को जगाने का काम दो शताब्‍दी तक हमारे संतों ने, हमारे महापुरुषों ने किया और वो चेतना जगी। जिस चेतना में से 1857 के स्‍वतंत्रता संग्राम की ज्‍योति जगी। वही एक तरह से 1947 में, देश आजादी को प्राप्‍त कर सका। आजादी के आंदोलन की पीठिका ऐसे महापुरुषों ने रची। जिसको आगे महात्‍मा गांधी का नेतृत्‍व मिला और देश ने महात्‍मा गांधी को भी कभी राजनेता के रूप में नहीं देखा था। उसी संत परंपरा की एक कड़ी के रूप में देखा था, तभी तो उनको महात्‍मा कहा था। जो बात संतों-महंतों के लिए कही जाती थी, वो बात महात्‍मा गांधी के लिए कही जाती थी। उसी परंपरा का नेतृत्‍व मिला और तब जाकर के देश को आजादी प्राप्‍त हुई और इसलिए भारत ने समाज जीवन के हर कबीला-कबिलाई, कबीलों से मुक्‍ति दिलाने का काम हमारे संतों के द्वारा हुआ है।

उसी प्रकार से, आज हम इस पीठ को देखते हैं। मुझे तो यहां पहले भी आने का सौभाग्‍य मिला है। शिक्षा के क्षेत्र में कितना बड़ा काम किया है। करीब एक लाख विद्यार्थियों की जिन्‍दगी, यहां बदल रही है। एक प्रकार से सरकार का काम संत कर रहे हैं। सरकार का बोझ भी हल्‍का कर रहे हैं और समाज की शक्‍ति बढ़ा रहे हैं।

आज यहां इस शताब्‍दी समारोह में knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है। ये बात सत्‍य है कि पिछली शताब्‍दियों में राष्‍ट्र की शक्‍ति को नापने का आधार या तो धन शक्‍ति हुआ करता था या तो सैन्‍य बल शक्‍ति द्वारा। इस देश के पास कितना military power है और कितना money power है उसके आधार पर विश्‍व में उस देश की ताकत को नापा जाता था। उसी के आधार पर वो देश कितना शक्‍तिशाली है और उसके आधार पर विश्‍व में उसकी स्‍वीकृति बनती थी। लेकिन वक्‍त बदल चुका है, आज धन बल हो या सैन्‍य बल हो, इतने से गाड़़ी चलती नहीं है। 21वीं सदी ज्ञान की सदी है, knowledge की century है। जिसके पास ज्‍यादा information होगी, ज्‍यादा knowledge होगा, समय के अलग सोचने वाले innovations होंगे, दुनिया पर उसी देश की चलने वाली है। और इसलिए 21वीं सदी की ताकत को संतों ने पहचाना है और उस ताकत को वैज्ञानिक तरीके से रंग देने के लिए आज knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है।

पिछली अनेक शताब्‍दियों में मानव जाति ने ज्ञान के आधार पर, विज्ञान के आधार पर, technology के आधार पर जो प्रगति की है, आज हर घंटे, हर दिन, हर महीने, हर साल विज्ञान के नए अविष्‍कार, ज्ञान का सर्वश्रेष्‍ठ प्रभाव, technology का प्रभुत्‍व, समाज जीवन को इतनी तेजी से बदल रहा है, जो पिछली शताब्‍दियों में कभी नहीं हुआ था। जिस गति से दुनिया बदल रही है, technology विज्ञान और ज्ञान के आधार पर उसको cope-up करने के लिए कभी-कभी मानव की कल्पना शक्‍ति भी कम पड़ जाती है। कही एक जगह पर लोग आगे बढ़े तो हम सोचते रह जाते हैं कि भई हम वहां कहां पहुंचेंगे। दुनिया इतनी तेजी से ज्ञान-विज्ञान और technology के सहारे बदल रही है। क्‍या भारत इंतजार करता रहेगा क्‍या? क्या भारत यही सोचता रहेगा क्या कि कोई महापुरुष, संत, महात्मा के आशीर्वाद मिल जाएंगे और देश महान हो जाएगा। संत भी ऐसा नहीं मानते हैं, संत भी मानते हैं कि knowledge Resource Centre बनाने चाहिए।

नए innovations होने चाहिए। पिछले दिनों आपको पता होगा पेरिस में दुनिया के सभी देशों के लोग इकट्ठे आए थे। एक बड़ा विश्व का कुंभ मेला लगा था और वे सब ब्रहमांड की चर्चा करने में लगे थे, Global warming के लिए, Global warming से कैसे मानव जात को बचाया जाए, विश्व को बचाया जाए, पृथ्वी को बचाया जाए, इसकी चिंता हो रही थी। लेकिन वहां पर दो बातें हुईं। एक भारत, अमेरिका, फ्रांस, इनके initiative थे, innovation पर बल देने के लिए योजना बने और इस संकट का सामना करना होगा, तो नए अनुसंधान करने पड़ेंगे, innovations करने पड़ेंगे और उसके लिए एक सामूहिक रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है और दूसरा वाला निर्णय हआ। जो देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश उपलब्ध होता है, ऐसे देश इकट्ठे आएं। विश्व में करीब 122 countries ऐसे हैं कि जहां Solar Radiation काफी मात्रा में हैं और इससे भारत के प्रयासों से, भारत के नेतृत्व में दुनिया के 122 देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश रहता है इकट्ठे आएं और सूर्य शक्ति का मानव जात में कैसे उपयोग हो, उस पर एक संगठन का निर्माण किया है।

इन चीजों का आने वाले युगों तक प्रभाव रहने वाला है। उसके मूल में ज्ञान है, विज्ञान है, technology है, innovation है और वही, वही बदलाव आया है और बदलाव को लाने की दिशा में एक उत्तम कदम है। और मैं मानता हूं कि शताब्दी समारोह तक पूज्य स्वामी जी को उत्तम से उत्तम श्रद्धांजलि, इस एक उत्तम कदम के द्वारा दी जा रही है और इसके लिए आप सब बधाई के पात्र हैं, अभिनंदन के पात्र हैं।

भारत सरकार की तरफ से इन उत्तम प्रयासों के लिए हमेशा-हमेशा के लिए कंधे से कन्धा मिलकर के देश, दिल्ली में बैठी हुई सरकार आपके साथ चलेगी और नए innovations समाज-जीवन के काम आएं, ज्ञान का भंडार, मानव जात के कल्याण का कारण बनें, उस दिशा में हम प्रयास करते रहें।

आज जब में इस पवित्र कार्यक्रम में आया हूं, मैं देश के जवानों का गर्व करना चाहता हूं, देश के सुरक्षा बलों का गर्व करना चाहता हूं, उनका अभिनंदन करना चाहता हूं। जब युद्ध होते हैं तो दुश्मन देश, अपने सामने वाले देश की सैन्य शक्ति पर घात करने के प्रयास करता है। आज मानवता के दुश्मनों ने जो भारतीय प्रगति को देखने की उनको परेशानी हो रही है, ऐसे तत्वों ने ऐसी ताकतों ने पठानकोट में हिंदुस्तान की सैन्य शक्ति का अंग Airbase देने का प्रयास किया है। मैं देश के सुरक्षा बलों को बधाई देता हूं कि दुश्मनों के उन इरादों को उन्होंने खाक में मिला दिया। उनको सफल नहीं होने दिया और जिन जवानों ने शहादत दी है, उनकी शहादत को मैं नमन करता हूं और देशवासियों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हमारे सुरक्षा बलों में वो सामर्थ्य है कि दुश्मनों की कोई भी नापाक इरादों को उठते ही वो खत्म करने की ताकत रखते हैं और देश को सुरक्षा प्रदान करते हैं। उन जांबाज जवानों को बधाई देता हूं, उन सुरक्षा बलों को अभिनंदन करता हूं और ऐसे समय राष्ट्र का आत्मविश्वास, राष्ट्र का धैर्य और राष्ट्रीय एकता एक स्वर में राष्ट्र जब बोलता है तो दुश्मन के घर नष्ट हो जाते हैं। उस संकल्प लेकर के आगे बढ़ें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। पूज्य स्वामी जी के श्री चरणों में प्रणाम करता हूं और ये knowledge Resource Centre 21वीं सदी में हमें नई ताकत दें, इसी अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Our guiding spirit is - Grow More, Achieve More: PM Modi at the community programme in Melbourne, Australia
July 09, 2026

I would like to begin by acknowledging the traditional owners of the land on which we meet and I pay my respects to their elders past, present and emerging.

वणक्कम मेलबन
नमस्कार माइट्स !
कैसे हैं आप?
केम छो?

ये शो हाउसफुल है, ब्लॉक-बस्टर है।

मैं अपना भाषण शुरू करूँ इससे पहले विक्टोरिया के प्रीमियर और मेरे मित्र प्रधानमंत्रीजी के सम्मान में आप सब अपने मोबाइल फ़ोन का फ्लैशलाइट जलाके इनको सम्मानित कीजिये।

साथियों,

इससे पहले मैं दो बार सिडनी में आपसे मिला था, मेलबन वालों से मिलने का मुझे भी इंतजार था, इसलिए सोचा इस बार मेलबन वालों के साथ फ्लैट व्हाइट कॉफी पीता हूं।

साथियों,

जिस एनर्जी से आप सभी ने हमारे ऑसी फ्रेंड्स ने हम सभी को वेलकम किया है वो और भी Amazing है। मेलबन ने एक तरह से मैदान मार लिया है।

साथियों,

मैं, मेरे मित्र, भारत के मित्र, प्राइम मिनिस्टर एंथनी अल्बनीसी का भी आभारी हूं। आप सिडनी में भी साथ थे, और आज यहां मेलबन में भी, भारतीय कम्यूनिटी के बीच आए हैं। और ये एक प्रकार से फुल सर्कल हो गया है।

अमदाबाद जहां दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड है, और मेलबन, जहां iconic स्टेडियम है हम दोनों साथ रहे हैं। और साथियों हम सभी ने देखा है प्राइम मिनिस्टर अल्बनीसी जब बोलते हैं तो भारतीयों के दिल और दिमाग में छा जाते हैं। सिडनी में भी आपने धूम मचाई थी और यहां भी आप छा गए।

मैं विक्टोरिया के प्रीमियर का भी उनके ऊर्जा भरे शब्दों केलिए, भारत के प्रति इतने स्नेह से उन्होंने जो कहा उसके लिये उनका भी आभार व्यक्त करता हूँ।

साथियों,

मैं जब साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया आया था तो 28 साल के बाद, भारत का कोई पीएम यहां पहुंचा था। और आप याद कीजिए तब मैंने कहा था कि अब आपको 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

पिछले 12 वर्षों में मैं तीसरी बार यहां आया हूं यानि इस बार हैट्रिक लगी है। ये दिखाता है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते किस उंचाईं पर हैं। और जानते हैं इसमें सबसे बड़ी भूमिका किसकी है? मोदी की नहीं, इसमें आप सभी साथियों की भूमिका है, इंडियन डायस्पोरा की भूमिका है।

साथियों,

कहते हैं कि मेलबन शहर एक दिन में ही चार सीज़न के दर्शन करा देता है। लेकिन भारतीय समुदाय ने अपने कल्चरल कलर्स से इसको और वाइब्रेंट बना दिया है।

यहां मेलबन में और आसपास काफी ऐसे स्थान हैं, ऐसे मार्केट्स हैं, जो भारतीयता के रंगों से भरे हैं। कोई उन्हें लिटिल इंडिया कहता है, कोई मिनी इंडिया कहता है, नाम जो भी हों, लेकिन रंग भारतीयता से भरे हैं।

ऐसे ही एक मार्केट का वीडियो किसी ने मुझे दिखाया। वीडियो में बता रहे थे, कि वहां खूब सेल चलती रहती है। इस सेल के चक्कर में, लोग घनचक्कर बन जाते हैं। शॉपिंग का मूड न भी हो, तो भी खरीदारी करनी ही पड़ती है। मैं सही कह रहा हूं?

साथियों,

आप में से कई साथी, फर्स्ट टाइम ऑस्ट्रेलिया आए, और कइयों का जन्म भी यहीं हुआ, पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन भीतर की भारतीयता हमेशा ज़िंदा रहती है। यहां कई सारे साथी ऐसे होंगे जिनके घर में कम से कम दो Time Zone चलते हैं? यहाँ बच्चे स्कूल से घर, ऑस्ट्रेलियन टाइम के हिसाब से आते हैं, लेकिन भारत में दादा-दादी, नाना-नानी, Video Call पर इंतज़ार कर रहे होते हैं। यहाँ Weekend होता है, तो भारत में किसी शादी की Live Streaming चल रही होती है। यानी, दूरी हज़ारों किलोमीटर की है, लेकिन Daily Routine, आज भी भारत से जुड़ा हुआ है। और इस रुटीन के साथ आप सभी ऑस्ट्रेलिया के विकास में पूरी शक्ति से जुटे हुए हैं। मुझे आप सब पर गर्व है।

साथियों,

हम भारतीय ऐसे ही हैं, जैसे दूध में चीनी मिल जाती है, उसे और मीठा कर देती है, वैसे ही हम भारतीय दुनिया में अपने प्रेम का रंग घोलते रहते हैं।

घर में दूध, ऑस्ट्रेलिया वाला आता है, लेकिन चाय भारत वाली बनती है। दाल-सब्ज़ियाँ ऑस्ट्रेलिया की हैं लेकिन उनमें तड़का देसी मसालों का लगता है।

साथियों,

आपने सुना होगा भारत में आजकल भजन क्लबिंग का नया ट्रेंड चल रहा है। इसको हमारी gen-ज़ी ड्राइव कर रही है। और यहां ऑस्ट्रेलिया में भी मैंने सुना है कि आपका वीकेंड आस्था, और आध्यात्म से भरा रहता है।

कहीं किसी के घर भगवान सत्यनारायण की कथा, कहीं गुरुद्वारे में अरदास, कहीं बच्चों द्वारा भांगड़ा या भरतनाट्यम की प्रस्तुति, कहीं कोई क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा होता है।

और अब तो, Indian Film Festival भी यहां आ गया है। कुछ दिन बाद ही मेलबन में इंडियन फिल्म फेस्टिवल शुरु होने वाला है। मैं इसके सफल आयोजन की आपको अभी से शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

आप सभी, ऑस्ट्रेलिया की ग्रोथ को अपने परिश्रम से सींच रहे हैं। लेकिन मैं जानता हूं कि आपकी एक नज़र भारत पर लगातार रहती है। भारत क्या कर रहा है, भारत की प्रगति, भारत की गति, इसकी खोज खबर आप लेते रहते हैं।

साथियों,

21वीं सदी का भारत आज विकसित होने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। एक सपना पूरा होता है, तो नया सपना जन्म ले लेता है।

पहले कहते थे, एक दीप से जले दूसरा, जलते दीप हज़ार। आज में कहता हूँ, एक सपने से जन्मे दूसरा, सपने जन्मे हज़ार। एक लक्ष्य पूरा होता है तो उससे भी बड़ा संकल्प सामने आता है।

ये वो भारत है, जो कहता है- Grow More Achieve More.

हम 140 करोड़ Aspirations से भरे राष्ट्र हैं, हम अधीर हैं, बेसब्र हैं, हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकॉनॉमी हैं, लेकिन हम जल्द से जल्द दुनिया की टॉप थ्री इकॉनॉमी बनना चाहते हैं। क्योंकि हमारी प्रेरणा है- Grow More Achieve More.

साथियों,

आपने भी देखा है, भारत ने मून के साउथ पोल पर चंद्रयान लैंड कराया। दुनिया में कोई और देश ऐसा नहीं कर सका। लेकिन भारत इतने भर से संतुष्ट नहीं हुआ क्योंकि भारत कहता है Grow More Achieve More.

इसलिए साथियों, भारत अब स्पेस में अपना गगनयान भेजने की तैयारी कर रहा है, भारत अब अपना स्पेस स्टेशन बनाने के लक्ष्य पर चल रहा है।

साथियों,

कुछ साल पहले तक, 5G टेक्नॉलॉजी को लेकर बड़े सवाल देश के सामने थे? कब लॉन्च होगी, कैसे रोलआउट होगी, कितना समय लग जाएगा? हमने 2022 के अंत में 5G रोलआउट करना शुरु किया, और आज भारत के Ninety nine percent district इससे कवर्ड हो चुके हैं। और आपको खुशी होगी दोस्तों, भारत 5G का Fastest rollout करने वाले देशों में से एक है।

आज भारत, दुनिया का दूसरा बड़ा 5G मार्केट बन चुका है। औऱ इतना ही नहीं, भारत आज मेड इन इंडिया 6G टेक्नॉलॉजी पर भी तेज़ी से काम कर रहा है। वो इसलिए, क्योंकि भारतीय कहते हैं, Grow More Achieve More.

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में, भारत के दो दर्जन से अधिक शहरों में मेट्रो नेटवर्क पहुंच चुका है। आज भारत में हर दिन सवा करोड़ से अधिक लोग मेट्रो में सफर करते हैं। भारत, दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश है। लेकिन हम भारतीय इससे भी संतुष्ट नहीं है, हम कहते हैं- Grow More Achieve More.

इसलिए हम भारत में नमो भारत रैपिड रेल, और वंदे भारत जैसे सेमी हाईस्पीड नेटवर्क को तेज़ी से बढ़ा रहे हैं।

एक और उदाहरण मेक इन इंडिया का है। बीते 12 वर्ष में, मेक इन इंडिया ग्लोबल ब्रांड बना। हमारे मोबाइल फोन, हमारे इलेक्ट्रॉनिक्स, दुनियाभर में पहुंचे। हमारे ऑटोमोबील, हमारे फार्मा प्रोडक्ट्स का ग्लोबली और विस्तार हुआ। भारत के डिफेंस प्लेटफॉर्म की कैपेबिलिटी और क्रेडबिलिटी, दुनिया देख रही है।

आपने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, डेमो तो देख ही लिया होगा। धमाके, आतंकियों के अड्डों पर हो रहे थे, और गूंज, पूरी दुनिया में सुनाई दे रही थी। टैरर कैंप्स पर इस करारे प्रहार से आपको गर्व हुआ या नहीं?

साथियों,

भारत इतने पर ही रुकना नहीं चाहता, भारत कह रहा है Grow More Achieve More. इसलिए, आज चिप से लेकर शिप तक, मैन्युफेक्चरिंग का भारत में एक नया इकोसिस्टम डवलप किया जा रहा है।

साथियों,

भारत के बड़े सपनों, बड़ी एस्पिरेशन्स की नींव है। भारत का नागरिक, We the people और इन सपनों को एनर्जी दे रहा है। People first, यानि नागरिक देवो भव का मंत्र। ये आज के भारत की गवर्नेंस का मूल मंत्र बन गया है।

मैं आपको अटेस्टेशन का उदाहरण देता हूं। अटेस्टेशन की मजबूरी, कुछ साल पहले तक बहुत कॉमन हुआ करती था। यानि कुछ भी करना हो, कहीं भी अप्लाई करना हो, अपने डॉक्यूमेंट किसी अधिकारी से अटेस्ट कराने पड़ते थे।

कतार में खड़ा रहना पड़ता था सुबह सुबह। ये बताने के लिए कि, हां तुम वही हो। हमारे लिए तो नागरिक देवो भव। अब ये स्थिति नहीं है। अब ज्यादातर काम सेल्फ अटेस्टेशन से ही चल जाता है।

वहां से जो यात्रा शुरू हुई, वो भारत में डिजी-लॉकर तक पहुंच गई है। एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था, जिसमें भारतीय, अपने डॉक्यूमेंट्स Digi फॉर्मेट में रख सकते हैं। इसमें एक क्लिक में डॉक्यूमेंट Share होता है। Verify होता है। Accept होता है।

साथियों,

व्यवस्था बनाना एक चीज है, उसे स्केल और सिक्योर फीचर के साथ बनाना, बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। आप जानते हैं कि आज भारत में डिजीलॉकर के कितने यूज़र हैं? मैं जानता हूँ, यह आंकड़ा याद रखना थोड़ा कठिन है।

इस वक्त तक, 70 करोड़ यानि 700 मिलियन से ज्यादा डिजिलॉकर यूज़र हैं। और इनमें, 850 करोड़ से अधिक डॉक्युमेंट्स स्टोर हैं। 850 करोड़ से अधिक।

साथियों,

नागरिक देवो भव का एक उदाहरण, हमारा हेल्थकेयर सिस्टम है। आज करोड़ों भारतीयों के पास, एक सिक्योर डिजिटल हेल्थ आईडी है। इसमें हेल्थ रिकॉर्ड्स की पूरी हिस्ट्री डिजिटली स्टोर होती है। इससे भारत में, डाइअग्नोसिस और बेहतर हो रहा है। और इससे इलाज की व्यवस्था और सुधर रही है।

यही नहीं टेलिकंसल्टेशन का चलन भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का एक ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म है, इससे अभी तक 48 करोड़ यानि 480 मिलियन टेली-कंसलटेशन्स हो चुकी हैं। इस प्लेटफॉर्म से सवा दो लाख से अधिक हेल्थकेयर प्रोवाइडर जुड़े हैं।

साथियों,

एक जमाने में आप सभी ने पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां भी सही होंगी। आप याद कीजिए, कितने हफ्ते लगते थे पासपोर्ट बनने में? लेकिन आज पासपोर्ट औसतन कुछ ही दिनों में मिल जाता है। यही सिटिजन फर्स्ट गवर्नेंस है। यही नागरिक देवो भव के मंत्र की सफलता है।

साथियों,

मैं अक्सर एक बात कहता हूं, भारत का सामर्थ्य जितना बढ़ता है, उसका फायदा, पूरी मानवता को होता है। हमारे संस्कार हैं- सर्वे भवन्तु सुखिन: यानि सब सुखी रहें। यही शाश्वत संस्कार आज भी भारत की पॉलिसीज़ और एक्शन्स को प्रेरित करते हैं।

साथियों,

अभी पिछले महीने ही वेनज़ुएला में भूकंप की इतनी बड़ी त्रासदी आई। कितना बड़ा विनाश हुआ। सैकड़ों लोगों की जान गई। हमने दूरी कितनी है देखा नहीं। हमने वेनज़ुएला की उस पीड़ा को अपनी पीड़ा समझा। भारत ने रिलीफ़ और rescue के लिए ऑपरेशन चलाया।

हमने जितनी तेज़ी से संभव हो सकता था, मदद भेजी, अपने एक्सपर्ट्स भेजे, हमारी मेडिकल टीम्स ने तेज़ी से काम शुरु किया। मुझे बहुत संतोष है, कि इससे अनेक ज़िंदगियां बच पाईं।

साथियों,

ऐसे ही तुर्किए और सीरिया में जब भूकंप आया, तब भी भारत ने बहुत तेज़ी से राहत और बचाव के लिए मदद भेजी। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, पिछले साल हमने म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा चलाया। श्रीलंका में साइक्लोन की तबाही हुई, तो वहां ऑपरेशन सागर बंधु चलाया।

साथियों,

कोरोनाकाल की यादें भी आज तक हमारे मन में ताजा हैं। हमने दुनियाभर से भारत के ही नहीं, अन्य देशों के नागरिकों को भी अपने-अपने घर पहुंचाया। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। ज़रूरतमंदों तक दवाएं पहुंचाईं, 100 से अधिक देशों को वैक्सीन्स भेजीं। युद्धक्षेत्रों में भी भारत ने, संकट में फंसे व्यक्तों को बाहर निकालने का प्रयास किया।

साथियों,

भारत जब मदद करता है, तो पासपोर्ट नहीं देखता, भारत जब मदद भेजता है, पासपोर्ट का रंग नहीं देखता। इसलिए, दुनिया भी भारत पर इतना विश्वास करती है।

साथियों,

मैं जानता हूं कि मानवता के हित में काम करने में ऑस्ट्रेलिया की भी बहुत बड़ी भूमिका है। ये हम दोनों देशों की पार्टनरशिप का एक अहम पिलर है।

और हम दोनों देशों की साझेदारी को, एक और सेक्टर मजबूती देता है। ये सेक्टर है—स्पोर्ट्स। स्पोर्ट्स की दुनिया में, ऑस्ट्रेलिया अपने आप में एक ब्रैंड है। लेकिन भारत में भी स्पोर्ट्स इकोसिस्टम ट्रांसफॉर्म हो रहा है।

साथियों,

आपने खेलो इंडिया मिशन का नाम सुना होगा। ये सिर्फ एक स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं है, ये अभियान स्कूल लेवल से ही हज़ारों खिलाड़ियों का एक पूल तैयार कर रहा है। भारत में स्कूल, यूनिवर्सिटी और नेशनल लेवल पर खेलो इंडिया गेम्स होते हैं, इनमें लाखों एथलीट्स पार्टिसिपेट करते हैं।

इस मिशन के तहत, भारत के रिमोट एरियाज़ में भी स्पोर्ट्स इंफ्रा तैयार किया जा रहा है। इससे ज्यादा से ज्यादा एथलीट्स को खासतौर पर हमारी बेटियों को ज्यादा अवसर मिल रहे हैं। और ये सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है सांसद खेल महाकुंभ जैसे आयोजनों से गांव-गांव में स्पोर्ट्स को, फिटनेस से जोड़ा जा रहा है, करियर ऑपॉर्चुनिटीज़ से कनेक्ट किया जा रहा है।

और ये जो कुछ भी हो रहा है, इसका इंपैक्ट फील्ड में दिख रहा है। भारत के एथलीट्स, भारत की टीम्स, Better से बेस्ट होती जा रही हैं।

साथियों,

यही कॉन्फिडेंस, भारत को स्पोर्टिंग लीग के नेक्स्ट लेवल पर ले जा रहा है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स, भारत होस्ट कर रहा है। भारत 2036 ओलंपिक्स को होस्ट करने का भी दावेदार है। मुझे पूरा विश्वास है, स्पोर्ट्स के क्षेत्र में भी ऑस्ट्रेलिया और भारत की पार्टनरर्शिप का और विस्तार होगा।

साथियों,

भारत और ऑस्ट्रेलिया, जो कुछ भी करते हैं, वो हम दोनों देशों के लिए भी शुभ होता है। इसका एक बड़ा उदाहरण, भारत-ऑस्ट्रेलिया ट्रेड एग्रीमेंट है। आपने वो शेर सुना होगा, आपको याद होगा:

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

ऐसे ही, भारत और ऑस्ट्रेलिया का एग्रीमेंट एक शुरुआत थी, और आज ये कारवां दुनिया के लगभग 40 देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स तक पहुंच चुका है।

साथियों,

हम केवल, ट्रेडिंग नेशन नहीं हैं, हम इनोवेशन को, साइंस एंड टेक्नॉलॉजी को महत्व देते हैं। ऑस्ट्रेलिया की अनेक उपलब्धियां हैं, Hearing implant, Wi-Fi, Cervical cancer vaccine, Flight Black Box, Secret Ballot Voting, ऐसे कितने ही innovations हैं जिनमें ऑस्ट्रेलिया का एक बड़ा रोल रहा है, और आज ये पूरी दुनिया को बेहतर बनाने के काम आ रहे हैं।

साथियों,

ऐसे ही भारत भी, अपने साइंस, टेक और इनोवेशन इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म कर रहा है। आपको ये जानकर खुशी होगी, आज भारत के 10 हज़ार स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स चल रही हैं। ये स्कूल लेवल पर ही, इनोवेशन का माइंटसेट तैयार कर रही हैं।

बीते 12 वर्षों में भारत दुनिया का तीसरा बड़ा स्टार्ट अप इकोसिस्टम बन गया है। लेकिन मैं नंबर बताउंगा, तो आप भी हैरान रह जाएंगे। आप डेटा सुनना चाहेंगे, तो मैं बताऊं ?

आज भारत में 2 लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्ट अप्स हैं। भारत में हर महीने 4 हज़ार से ज्यादा नए स्टार्ट अप रजिस्टर हो रहे हैं। और डिफेंस और स्पेस जैसे सेक्टर्स में भी सैकड़ों स्टार्ट अप्स काम कर रहे हैं। इनके उदाहरण मैं इसलिए दे रहा हूं, क्योंकि ये सारे सेक्टर पहले भारत में बंद थे। कुछ साल पहले ही इनको प्राइवेट आंत्रप्रन्योरशिप के लिए खोला गया है। और आप देखिए भारत का एक स्पेस स्टार्ट-अप बहुत जल्द, अपने रॉकेट में, पहली बार सैटेलाइट्स लॉन्च करने जा रहा है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि एजुकेशन, स्किल, इनोवेशन में भारत और ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता और गहरा हो रहा है, और मजबूत हो रहा है। आज ऑस्ट्रेलिया में हज़ारों भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं। और अब ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटीज़, भारत में भी अपने कैंपस खोल रही हैं।

डीकिन और वुलोन्गोंग University के कैंपस शुरु हो चुके हैं। और भी ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटीज इस तरफ आगे बढ़ रही हैं। और ये केवल नए कैंपस खोलने तक की बात नहीं है, ये दुनिया को स्किल्ड, इनोवेटिव टैलेंट देने का ग्लोबल लीडरशिप तैयार करने का भी अभियान है।

साथियों,

भारत की इतनी सारी बातें मैंने आपके बीच की हैं। अब मैं आपसे एक आग्रह भी करूंगा। कुछ समय पहले हमने हमारी प्रवासी कम्युनिटी के बच्चों के लिए, भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। ये क्विज दुनिया को भारत की डायवर्सिटी से परिचित कराती है, और साथ ही, भारतीय कम्यूनिटी के परिवारों को अपनी विरासत से जोड़ती है। मुझे ये जानकर अच्छा लगा, कि इस साल ऑस्ट्रेलिया में बहुत सारे युवा साथियों ने इस कार्यक्रम के कर्टेन रेजर में पार्टिसिपेट किया है। अब इस कंप्टीशन के सिक्स्थ एडिशन की शुरुआत होने जा रही है। इस बार गेमीफ़ाइड मोड में बहुत से कंप्टीशन होने जा रहे हैं, मैं ऑस्ट्रेलिया में भारतीय कम्यूनिटी के सभी परिवारों से आग्रह करूंगा, कि इसमें जरूर हिस्सा लें। लेकिन साथ साथ आप ऑस्ट्रेलिया के दोस्तों को भी, आपके स्कूल में पढ़ने वाले साथियों को, कॉलेज में पढ़ने वाले साथियों को इस कंपटीशन में जरुर जोड़ें।

साथियों,

आप सभी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को मजबूत बनाने में बहुत मेहनत की है, बहुत योगदान दिया है। लेकिन आपका काम यहां खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यहां से आपकी ज़िम्मेदारियां और बढ़ गई हैं। अब भारत और ऑस्ट्रेलिया की पार्टनरशिप का एक अलग ही फेज़ शुरु हो रहा है।

इसलिए आप, ऐसे ही भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को जोश से भरते रहिए, चौके-छक्के मारते रहिए, आपकी सफलता में ही, भारत और ऑस्ट्रेलिया की सफलता है।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम के लिए प्राइम मिनिस्टर अल्बनीसी और आप सभी साथियों को मेरा एक बार फिर बहुत बहुत धन्यवाद।

भारत माता की जय!

वंदे मातरम!