प्रधानमंत्री ने गुरु बसावेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की, उन्हें सदियों पहले सामाजिक सुधार का रास्ता दिखाने वाले की संज्ञा दी
भारतीय समाज अद्वितीय है क्योंकि समय-समय पर समाज में सुधार लाने और सामाजिक बुराइयों से लड़ने के लिए समाज सुधारक आगे आए: पीएम मोदी
ऋषि, संत, और मठ... सभी ने समाज के लिए काफ़ी सेवा की है: प्रधानमंत्री मोदी
संन्यासी, संत... वे विपरीत परिस्थितियों से बाहर आए और यह सुनिश्चित किया कि समाज से बुराईयां दूर हों: प्रधानमंत्री
21वीं सदी ज्ञान की सदी है। जिसके पास अधिकाधिक ज्ञान और जानकारी होगी, वह पूरे विश्व को प्रभावित करेगा: प्रधानमंत्री
संतों ने 21वीं सदी की मर्म को समझा है और इसलिए ज्ञान का यह केंद्र शुरू किया जा रहा है: प्रधानमंत्री
हमें हमारे जवानों और सुरक्षा बलों पर गर्व है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
मानवता के दुश्मन, जो भारत की प्रगति नहीं देख सकते, ने पठानकोट पर हमला किया लेकिन हमारे सुरक्षा बलों ने उन्हें सफ़ल होने नहीं दिया: पीएम

मुझे पूछ रहे थे कि मैं हिन्‍दी में बोलू तो यहां translation करने की जरूरत है क्‍या? स्‍वामी जी स्‍वयं बताए कि कोई जरूरत नहीं, यहां सब हिन्‍दी समझते हैं। ये मेरा सौभाग्‍य है कि इस पवित्र उपक्रम में मुझे सरीक होने का अवसर मिला है। इतनी बड़ी संख्‍या में संतों की हाजिरी हो, इतने वरिष्‍ठ संत, इस उम्र में, इस समारोह में उपस्‍थित हो, ऐसा सौभाग्‍य कहां मिलता है।

कुछ दिन पहले मैं लंदन गया था। लोकतंत्र की बातें, मानवतावाद की बातें, women empowerment की चर्चाएं, दुनिया के देशों को लगता है ये सारे विचार वहीँ पर शुरू हुए, वही पर पैदा हुए और दुनिया को वही से मिले। जहां इस प्रकार की सोच है वहां पर मुझे उस महापुरुष के statue का अनावरण करने का सौभाग्‍य मिला। वे बसेश्‍वर जी, social reformers कैसे होते हैं, women empowerment क्‍या होता है, grass root level democracy की ताकत क्‍या होती है, सदियों पहले इसी धरती के महापुरुष बसेश्‍वर जी ने दुनिया को करके दिखाया। स्‍वीडन के पार्लियामेंट के स्‍पीकर उस अवसर पर मौजूद थे और जो मैंने समाज सुधार का महान काम करने वाले बसेश्‍वर जी की बातें सुनाई तो उनके लिए तो आश्‍चर्य था कि सदियों पहले भारत में महापुरुष का ऐसा चिंतन हुआ करता था और वो सिर्फ विचार नहीं व्‍यवहार भी था, आचरण भी था और करके दिखाया था। आज उसी परंपरा की एक कड़ी के साथ मुझे जुड़ने का सौभाग्‍य मिला है। मैं अपने आप को बहुत भाग्‍यशाली मानता हूं।

सारे विश्‍व में, इस बात के विषय में बहुत कम जानकारी है और कभी-कभी तो विश्‍व छोड़ो हमारे देश में भी एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो अपने आप को बहुत बड़ा बुद्धिमान मानता है, बड़ा elite class मानता है। उन्‍हें अंदाजा नहीं है कि भारत में ऋषियों ने, मुनियों ने, संतों ने, मंतों ने समाज हित के लिए कितने बड़े-बड़े काम किए हैं। उनका उस तरफ ध्‍यान ही नहीं है और इसलिए जहां-तहां हमारी इस महान परंपरा की आलोचना करते रहना यही कुछ लोगों की आदत बन गई है। इस देश की विशेषता है कि हजारों साल पुराने इस समाज जीवन में समय-समय पर किसी न किसी बुराई ने प्रवेश कर दिया है। समाज में विकृति आई, गलत चीजें घुस गई, गलत पंरपराएं घुस गई, जिसने इस समाज की आत्‍मा को भी तहस-तहस कर दिया लेकिन उसके बाद यही समाज की ताकत देखिए कि इसी समाज में से संत पैदा हुए, समाज सुधारक पैदा हुए, ऋषि-मुनि पैदा हुए और उन्‍होंने समाज के विरोधों के बावजूद भी समाज सुधार का बीड़ा उठाया और समाज की बुराइयों से समाज को मुक्‍त कराने का अविरत प्रयास किया।

हजारों साल से ये देश, ये परंपराएं, ये संस्‍कृति इसलिए बची है कि हर युग में जब-जब संकट आया, जब-जब हमारे भीतर बुराइयां आई, हमारे भीतर से ही एक नई ऊर्जा पैदा हुई, नया नेतृत्‍व पैदा हुआ, नई ताकत पैदा हुई, नई परंपरा पैदा हुई और समाज सुधार का काम चलता रहा और इसलिए मैं आज जब His Holiness जगतगुरु श्री डॉ. शिवराथरी राजेन्‍द्र महास्‍वामी जी के शताब्‍दी समारोह में आया हूं, उस महाने परंपरा को नमन करने के लिए आया हूं, जिस महान परंपरा ने समाज के हितों की, समाज के कल्‍याण की, चिंता करने में कभी कोई कमी नहीं की।

हम आजादी के आंदोलन को देखे, इस तरफ हमारे लोगों का ध्‍यान बहुत कम जाता है। लेकिन अगर हम आजादी के आंदोलन को देखे तो 19वीं शताब्‍दी में और 18वीं शताब्‍दी, ये दो शताब्‍दी पर हम नजर गड़े तो हमारे ध्‍यान में आएगा कि 20वीं शताब्‍दी में जो आजादी के आंदोलन की तीव्रता पैदा हुई, उसके पीछे 19वीं शताब्‍दी और 18वीं शताब्‍दी में हमारे संतों महंतों ने, जिसको हम भक्‍ति युग कहते है, उस भक्‍ति युग में जो चेतनाएं जगाई गई, भारत की आत्‍मा को जगाने का प्रयास हुआ और हिन्‍दुस्‍तान के हर क्षेत्र, इलाके में, पूर्व हो, पश्‍चिम हो, उत्‍तर हो, दक्षिण हो, हर भाषा-भाषी ने, कोई तो एक संत पैदा हुआ जो संत, मठ-मंदिरों से बहार निकला, एक सामूहिक जागरण का अभियान चलाया। पूरे देश में फिर से एक बार समाज की आत्‍मा को जगाने का काम दो शताब्‍दी तक हमारे संतों ने, हमारे महापुरुषों ने किया और वो चेतना जगी। जिस चेतना में से 1857 के स्‍वतंत्रता संग्राम की ज्‍योति जगी। वही एक तरह से 1947 में, देश आजादी को प्राप्‍त कर सका। आजादी के आंदोलन की पीठिका ऐसे महापुरुषों ने रची। जिसको आगे महात्‍मा गांधी का नेतृत्‍व मिला और देश ने महात्‍मा गांधी को भी कभी राजनेता के रूप में नहीं देखा था। उसी संत परंपरा की एक कड़ी के रूप में देखा था, तभी तो उनको महात्‍मा कहा था। जो बात संतों-महंतों के लिए कही जाती थी, वो बात महात्‍मा गांधी के लिए कही जाती थी। उसी परंपरा का नेतृत्‍व मिला और तब जाकर के देश को आजादी प्राप्‍त हुई और इसलिए भारत ने समाज जीवन के हर कबीला-कबिलाई, कबीलों से मुक्‍ति दिलाने का काम हमारे संतों के द्वारा हुआ है।

उसी प्रकार से, आज हम इस पीठ को देखते हैं। मुझे तो यहां पहले भी आने का सौभाग्‍य मिला है। शिक्षा के क्षेत्र में कितना बड़ा काम किया है। करीब एक लाख विद्यार्थियों की जिन्‍दगी, यहां बदल रही है। एक प्रकार से सरकार का काम संत कर रहे हैं। सरकार का बोझ भी हल्‍का कर रहे हैं और समाज की शक्‍ति बढ़ा रहे हैं।

आज यहां इस शताब्‍दी समारोह में knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है। ये बात सत्‍य है कि पिछली शताब्‍दियों में राष्‍ट्र की शक्‍ति को नापने का आधार या तो धन शक्‍ति हुआ करता था या तो सैन्‍य बल शक्‍ति द्वारा। इस देश के पास कितना military power है और कितना money power है उसके आधार पर विश्‍व में उस देश की ताकत को नापा जाता था। उसी के आधार पर वो देश कितना शक्‍तिशाली है और उसके आधार पर विश्‍व में उसकी स्‍वीकृति बनती थी। लेकिन वक्‍त बदल चुका है, आज धन बल हो या सैन्‍य बल हो, इतने से गाड़़ी चलती नहीं है। 21वीं सदी ज्ञान की सदी है, knowledge की century है। जिसके पास ज्‍यादा information होगी, ज्‍यादा knowledge होगा, समय के अलग सोचने वाले innovations होंगे, दुनिया पर उसी देश की चलने वाली है। और इसलिए 21वीं सदी की ताकत को संतों ने पहचाना है और उस ताकत को वैज्ञानिक तरीके से रंग देने के लिए आज knowledge Resource Centre का आरंभ हो रहा है।

पिछली अनेक शताब्‍दियों में मानव जाति ने ज्ञान के आधार पर, विज्ञान के आधार पर, technology के आधार पर जो प्रगति की है, आज हर घंटे, हर दिन, हर महीने, हर साल विज्ञान के नए अविष्‍कार, ज्ञान का सर्वश्रेष्‍ठ प्रभाव, technology का प्रभुत्‍व, समाज जीवन को इतनी तेजी से बदल रहा है, जो पिछली शताब्‍दियों में कभी नहीं हुआ था। जिस गति से दुनिया बदल रही है, technology विज्ञान और ज्ञान के आधार पर उसको cope-up करने के लिए कभी-कभी मानव की कल्पना शक्‍ति भी कम पड़ जाती है। कही एक जगह पर लोग आगे बढ़े तो हम सोचते रह जाते हैं कि भई हम वहां कहां पहुंचेंगे। दुनिया इतनी तेजी से ज्ञान-विज्ञान और technology के सहारे बदल रही है। क्‍या भारत इंतजार करता रहेगा क्‍या? क्या भारत यही सोचता रहेगा क्या कि कोई महापुरुष, संत, महात्मा के आशीर्वाद मिल जाएंगे और देश महान हो जाएगा। संत भी ऐसा नहीं मानते हैं, संत भी मानते हैं कि knowledge Resource Centre बनाने चाहिए।

नए innovations होने चाहिए। पिछले दिनों आपको पता होगा पेरिस में दुनिया के सभी देशों के लोग इकट्ठे आए थे। एक बड़ा विश्व का कुंभ मेला लगा था और वे सब ब्रहमांड की चर्चा करने में लगे थे, Global warming के लिए, Global warming से कैसे मानव जात को बचाया जाए, विश्व को बचाया जाए, पृथ्वी को बचाया जाए, इसकी चिंता हो रही थी। लेकिन वहां पर दो बातें हुईं। एक भारत, अमेरिका, फ्रांस, इनके initiative थे, innovation पर बल देने के लिए योजना बने और इस संकट का सामना करना होगा, तो नए अनुसंधान करने पड़ेंगे, innovations करने पड़ेंगे और उसके लिए एक सामूहिक रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है और दूसरा वाला निर्णय हआ। जो देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश उपलब्ध होता है, ऐसे देश इकट्ठे आएं। विश्व में करीब 122 countries ऐसे हैं कि जहां Solar Radiation काफी मात्रा में हैं और इससे भारत के प्रयासों से, भारत के नेतृत्व में दुनिया के 122 देश जहां 300 दिवस से ज्यादा सूर्य प्रकाश रहता है इकट्ठे आएं और सूर्य शक्ति का मानव जात में कैसे उपयोग हो, उस पर एक संगठन का निर्माण किया है।

इन चीजों का आने वाले युगों तक प्रभाव रहने वाला है। उसके मूल में ज्ञान है, विज्ञान है, technology है, innovation है और वही, वही बदलाव आया है और बदलाव को लाने की दिशा में एक उत्तम कदम है। और मैं मानता हूं कि शताब्दी समारोह तक पूज्य स्वामी जी को उत्तम से उत्तम श्रद्धांजलि, इस एक उत्तम कदम के द्वारा दी जा रही है और इसके लिए आप सब बधाई के पात्र हैं, अभिनंदन के पात्र हैं।

भारत सरकार की तरफ से इन उत्तम प्रयासों के लिए हमेशा-हमेशा के लिए कंधे से कन्धा मिलकर के देश, दिल्ली में बैठी हुई सरकार आपके साथ चलेगी और नए innovations समाज-जीवन के काम आएं, ज्ञान का भंडार, मानव जात के कल्याण का कारण बनें, उस दिशा में हम प्रयास करते रहें।

आज जब में इस पवित्र कार्यक्रम में आया हूं, मैं देश के जवानों का गर्व करना चाहता हूं, देश के सुरक्षा बलों का गर्व करना चाहता हूं, उनका अभिनंदन करना चाहता हूं। जब युद्ध होते हैं तो दुश्मन देश, अपने सामने वाले देश की सैन्य शक्ति पर घात करने के प्रयास करता है। आज मानवता के दुश्मनों ने जो भारतीय प्रगति को देखने की उनको परेशानी हो रही है, ऐसे तत्वों ने ऐसी ताकतों ने पठानकोट में हिंदुस्तान की सैन्य शक्ति का अंग Airbase देने का प्रयास किया है। मैं देश के सुरक्षा बलों को बधाई देता हूं कि दुश्मनों के उन इरादों को उन्होंने खाक में मिला दिया। उनको सफल नहीं होने दिया और जिन जवानों ने शहादत दी है, उनकी शहादत को मैं नमन करता हूं और देशवासियों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हमारे सुरक्षा बलों में वो सामर्थ्य है कि दुश्मनों की कोई भी नापाक इरादों को उठते ही वो खत्म करने की ताकत रखते हैं और देश को सुरक्षा प्रदान करते हैं। उन जांबाज जवानों को बधाई देता हूं, उन सुरक्षा बलों को अभिनंदन करता हूं और ऐसे समय राष्ट्र का आत्मविश्वास, राष्ट्र का धैर्य और राष्ट्रीय एकता एक स्वर में राष्ट्र जब बोलता है तो दुश्मन के घर नष्ट हो जाते हैं। उस संकल्प लेकर के आगे बढ़ें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। पूज्य स्वामी जी के श्री चरणों में प्रणाम करता हूं और ये knowledge Resource Centre 21वीं सदी में हमें नई ताकत दें, इसी अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद।

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वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से सीमावर्ती गांवों के विकास को मिल रही नई रफ्तार: पीएम मोदी
July 26, 2026
यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि यह पहल युवाओं में राष्ट्र-निर्माण की गहरी भावना जगा रही है: पीएम
विकसित गांव ही विकसित भारत की नींव हैं: पीएम
हमारी सरकार ने सीमावर्ती गांवों को देश का पहला गांव माना है: पीएम
विकसित वाइब्रेंट विलेज का यह सफर सभी को जोड़ने और सभी से जुड़ने का एक माध्यम है: पीएम

साथियों,

आप सबसे बात करके बहुत अच्छा लगा। आज हमारे साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी मनसुख मांडविया जी, मंत्री रक्षा खड़से जी और देश भर से जुड़े सभी मेरे युवा साथियों!

आज का यह कार्यक्रम बहुत विशेष है। देश भर के करीब 250 जिलों के युवा साथी इस प्रोग्राम से जुड़े हैं। मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

कुछ साल पहले हमने मेरा युवा भारत माय भारत मंच बनाया था। आज इससे देश भर के करोड़ों युवा जुड़े हैं और आज पूरे देश में माय भारत के युवा साथी बहुत प्रशंसनीय काम कर रहे हैं। विकसित भारत डायलॉग से लेकर विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम तक आप सभी ने अपना सामर्थ्य बखूबी दिखाया है।

साथियों

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के दौरान मैंने एक विचार युवाओं के सामने रखा था। विचार यह था कि क्यों नहीं युवा साथी वर्चुअल माध्यम के बजाय जमीन पर उतर कर भारत को जाने भारत से जुड़े भारत को जीने की कोशिश करें भारत को समझें। भारत के गांवों में विकसित होने के लिए कितनी आकांक्षाएं हैं यह गांवों में जाकर पता चलती है और हमारे सीमावर्ती गांवों में विकास की आकांक्षा और देशभक्ति की भावना यह हम बराबर - बराबर और कभी तो लगता है कि उनके लिए खुद से ज्यादा देश होता है। देश पहले बाकी सारी सुविधाएं बाद में, यह हमको सीमावर्ती गांवों में खास अनुभव आती है। और इसलिए उद्देश्य यह था कि देश के अलग-अलग जिलों के युवा हिमाचल, उत्तराखंड और लद्दाख के गांवों की यात्रा करें। वहां लोग कैसे रहते हैं? खानपान कैसा है? कामकाज, संस्कृति, जीवन व्यवहार यह सारी बातें क्या है? चुनौतियां क्या है? देश के प्रथम गांव में बैठे हुए लोग देश की सुरक्षा के लिए कितने जागरूक है? देश के अन्य भागों से उनका लगाव निकटता कितनी है? इन सभी चीजों का अनुभव मेरे देश के नौजवानों को मिले। यह हमारा उद्देश्य था। और जो उत्साह पूरे देश के युवाओं में दिखा, वह अद्भुत है। लगभग 3 लाख युवाओं ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया और उनमें से 400 से अधिक युवाओं का चयन हुआ। आप सभी एक सप्ताह तक इन दूर-सुदूर के गांवों में रहे। अननोन जगह थी आपके लिए। आपने वहां के जीवन को जीने की कोशिश की। आप उसके अंदर घुलमिल गए। अपनी संस्कृति को वहां की संस्कृति के साथ जोड़ा, कनेक्ट किया। एक भारत श्रेष्ठ भारत का इसमें और इससे उत्तम उदाहरण शायद ही कोई और हो सकता है।

साथियों,

आज का यह कार्यक्रम मेरे लिए बहुत खास इसलिए भी है क्योंकि जब मैं सरकार और राजनीति के जीवन से दूर था, तब मैंने ऐसे सीमावर्ती गांवों में कई बार जाने का मुझे अवसर मिला है। वहां के लोगों से मेरी जान पहचान भी रहती थी। कई गांवों के साथ तो मेरा संपर्क बहुत लंबे समय तक बना रहा था। जब सरकार में आया तो भी मैं सीमावर्ती गांवों में मौका मिलते ही जरूर उस मौके को छोड़ता नहीं हूं। आप सबको पता है दिवाली का त्यौहार तो मैं, सीमा पर जाकर के, बॉर्डर पर जाकर के, अपने देश के सुरक्षा करने वाले हमारे वीर सैनिकों के साथ ही मनाता हूं और यह क्रम तो मेरा 25 साल से चल रहा है। अभी इस यात्रा का हिस्सा रहे जिन साथियों से मेरी बात हुई, उनमें से भी कई गांव ऐसे हैं जहां मैं पहले जा चुका हूं और आप जब वहां का वर्णन कर रहे थे तो मुझे वह पुरानी सारी चीजें नजर आ रही थी। मेरी तरह आप सबका भी अनुभव बहुत शानदार रहा। किसी ने ऊंची पर्वत श्रंखलाओं का रोमांच बताया। कोई सीमांत गांवों के लोगों के स्नेह और अपनत्व से प्रभावित था। किसी ने वहां के बच्चों के सपनों को करीबी से देखा। तो कोई हमारी सेना के अद्भुत साहस और अनुशासन का साक्षी बना। यानी विकसित वाइब्रेंट विलेज का यह पूरा एक्सपीरियंस बहुत शानदार रहा। संयोग से आज कारगिल विजय दिवस भी है। आप में से अनेक साथियों ने कारगिल के आसपास के क्षेत्र को भी देखा। वहां कितनी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हमारे शूरवीरों ने विजय का परचम लहराया था। यह भी आपने देखा है। मैं आप सभी को इस कार्यक्रम में हिस्सा बनने के लिए शानदार अनुभव के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

विकसित गांव विकसित भारत की आधारशिला है। विकसित भारत के निर्माण की यात्रा लगातार चल रही है। और इसमें आप सभी युवा साथियों की बड़ी भूमिका है। इसलिए जब देश का युवा जमीन से जुड़ता है तो वो विकसित भारत के विजन को और व्यापक बनाता है। यह युवा मन में देश के लिए जीने, देश के लिए कुछ करने के संकल्प को और मजबूती देता है।

साथियों,

इस अभियान में आपने अनुभव किया होगा कि बॉर्डर के गांवों का जीवन कितना कठिन होता है। लेकिन हर कठिनाई के बावजूद सीमावर्ती गांवों के लोग देशभक्ति को पल प्रतिपल जीते हैं। कुछ वर्ष पहले तक तो बॉर्डर के गांवों को अंतिम गांव कहकर अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल ऐसी हर बेसिक सुविधाओं का अभाव था। संभव है कि आपने भी ऐसी अनेक कहानियां वहां के लोगों से सुनी होगी। पहले के हाल उन्होंने बताए होंगे और हमें इस पर गर्व होना चाहिए कि ऐसी परिस्थितियों में भी सीमावर्ती गांवों के लोगों की देशभक्ति कभी भी रत्ती भर भी कमजोर नहीं पड़ी।

इसलिए साथियों,

हमारी सरकार ने इन सीमावर्ती गांवों को देश का प्रथम गांव माना। वो प्रथम गांव जहां सुबह की पहली किरण भारत का अभिवादन करती है और जहां आखिरी किरण गुड नाइट कहकर के विदा लेती है। जहां सबसे पहले तिरंगा हवा से संवाद करता है। जहां से दुनिया भारत को पहली बार देखती है। यह सोच बदलने का ही परिणाम है कि आज हमारा सीमांत क्षेत्र बदल रहा है। कई गांवों में आजादी के बाद पहली बार बिजली पहुंची, पहली बार सड़क पहुंची, पहली बार घर में नल से जल पहुंचा, पहली बार घर में गैस कनेक्शन पहुंचा। शहरों में यह सामान्य सुविधाएं लगती है। लेकिन वहां के लोगों के लिए यह जीवन बदलने वाली सुविधाएं हैं। इसके कारण वहां किसान बागवान का जीवन बदल रहा है। फल सब्जी बड़ी-बड़ी मंडियों तक पहुंचाने आसान हुए हैं। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण अब जीवन रुकता नहीं है। नॉनस्टॉप चलता है। और आपने यह भी देखा होगा कि आज दूर सुदूर के इन गांवों में भी बेहतरीन इंटरनेट कनेक्टिविटी है। आप जो साथियों ने बताया कितनी खुशी से बता रहे थे।

साथियों,

ऐसी ही हर सुविधा का एक और फायदा हुआ है। आज इन क्षेत्रों में पर्यटन भी फल-फूल रहा है। जो गांव वीरान पड़ गए थे, आज वहां फिर से चहल-पहल होने लगी है। बेटियां स्कूल कॉलेज जाती हैं। अच्छी पढ़ाई और अच्छी कमाई का माहौल भी बन रहा है। और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम सीमावर्ती गांवों के इस विकास को और गति दे रहा है।

साथियों,

विकसित वाइब्रेंट विलेज की यह यात्रा सबको जोड़ने और सबसे जुड़ने का ही एक सशक्त माध्यम है। और अब आप सभी की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ गई है। आपकी यह यात्रा यूनिटी थ्रू पार्टिसिपेशन की यात्रा है। भारत का युवा जितना ज्यादा भारत के सीमावर्ती गांवों को जानेगा, उतना ही वो भारत को सरलता से जानेगा, वो भारत के कोने-कोने के साथ सरलता से जुड़ेगा और यह प्रयास नई मजबूती का कारण बनेंगे। आप भी जरा याद कीजिए, इन गांवों के घर आपके लिए देखा होगा आपने कोई अलग गेस्ट हाउस नहीं था, कोई होटल नहीं थी। यह सिर्फ गांव, पूरा गांव एक प्रकार से मेहमान नवाजी कर रहा था। लेकिन आपने देखा होगा कि आपका सिर्फ गांव में रहना हुआ इतना नहीं। आपके लिए यह मुलाकात गांव के जीवन से जुड़ने की यात्रा एक प्रकार से संस्कृति की पाठशाला भी बन गई। वहां आपको सुविधाओं से भी ज्यादा संतोष और सम्मान मिला। आप जो कुछ भी अनुभव करके आए हैं, वो किसी क्लास रूम में सीखने को नहीं मिलेगा। इसलिए आप सब ने जो अनुभव किया है उसे आप अन्य युवाओं को शेयर कीजिए। उन्हें भी प्रेरित कीजिए कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में हमारे युवा बॉर्डर के गांवों को विजिट करें। जितने ज्यादा युवा वहां जाएंगे, वहां रहेंगे, तो वे देश को देखेंगे, देश को समझेंगे और जब लोग गांवों में जाना शुरू करेंगे, तो फिर उन गांवों में सुविधाएं भी और तेजी से पहुंचेगी।

साथियों,

हमारी सरकार इन सीमावर्ती गांवों में टूरिज्म को बहुत प्रोत्साहित कर रही है। आप सरकार के इन प्रयासों को विस्तार दे सकते हैं। मेरा आग्रह है कि आपमें से हर युवा साथी कम से कम 100 युवाओं को अपने अनुभव जरूर शेयर करें। जिस क्षेत्र में आप रह रहे हैं, वहां के लोगों से संपर्क में रहें। आपने अगर कोई तस्वीरें वहां ली है, वहां की वीडियो बनाई है, तो उन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर खूब शेयर करें। उन गांवों के जो कंटेंट क्रिएटर्स भी हैं, उनके साथ कोलैब करके आप नेचर और कल्चर को प्रमोट कर सकते हैं। वहां आपने कोई लोकल प्रोडक्ट देखा हो, उसको आप अपने इलाके में कैसे प्रमोट कर सकते हैं, इस बारे में विचार करें। इंटरनेट पर जानकारियां तो बहुत होती है। लेकिन आप इन गांवों की ऑथेंटिक जानकारियां साझा कर सकते हैं। आप अब खुद भी अपने दोस्तों के साथ, अपने परिवार के साथ इन गांवों में घूमने फिरने जाएं और मैं तो स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी से भी कहूंगा कि आप बॉर्डर विलेज के एजुकेशन टूर भी आयोजित कर सकते हैं।

साथियों,

मेरा हमेशा से ही यह दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत के आप जैसे नौजवान 21वीं सदी की दुनिया को शेप करने वाले रहे हैं। भारत के युवा की यही असली नियति है। आज का युवा विकसित भारत की ऊर्जा भी है और विकसित भारत का सबसे बड़ा लाभार्थी भी है। इसलिए युवा शक्ति जब देश की चुनौतियों और समाधानों से सीधी जुड़ेगी, तो भविष्य निश्चित ही उज्ज्वल होगा। इसी भावना के साथ आप सभी को फिर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।