ഗതാഗതം ഏത് നഗരത്തിന്റെയും രാജ്യത്തിന്റെയും വികസനത്തിലേക്കുള്ള താക്കോലാണ്, കണക്ടിവിറ്റി രംഗത്തെ അടിസ്ഥാന സൗകര്യത്തിനു കേന്ദ്ര ഗവണ്‍മെന്റ് വലിയ പ്രാധാന്യമാണു കല്‍പിച്ചുവരുന്നത് : പ്രധാനമന്ത്രി മോദി
എല്ലാവർക്കും വീട് എന്ന കേന്ദ്ര സർക്കാരിന്റെ സ്വപ്നത്തെ പ്രധാനമന്ത്രി മോദി വീണ്ടു ആവർത്തിച്ചു
2014 ന് ശേഷം മെട്രോ ലൈനുകൾ നിർമ്മിക്കുന്ന വേഗതയും അളവും വർദ്ധിപ്പിക്കുമെന്ന് ഞങ്ങൾ തീരുമാനിച്ചിരുന്നു: പ്രധാനമന്ത്രി
മധ്യവർഗ കുടുംബങ്ങളുടെ ജീവിതം മെച്ചപ്പെടുത്തുന്നതിനായി ഞങ്ങളുടെ ഗവൺമെന്റ് തുടർച്ചയായി പരിശ്രമിച്ചുകൊണ്ടിരിക്കുകയാണ്: പ്രധാനമന്ത്രി മോദി
വികസനത്തിന്റെ പാതയിൽ കേന്ദ്ര ഗവൺമെന്റ് മുന്നോട്ട് പോകുകയാണ്. രാജ്യത്തിന്റെ ഒരു കോണും, ഒരു ഗ്രാമവും പട്ടണവും പിന്നിൽ ആകാൻ പാടില്ല:പ്രധാനമന്ത്രി മോദി
ഞങ്ങളുടെ സംരംഭങ്ങളിലൂടെ ഞങ്ങൾ ദരിദ്രരെ ശക്തിപ്പെടുത്തുകയും വരുടെ ജീവിതനിലവാരം മെച്ചപ്പെടുത്തുകയും ചെയ്യുന്നു: പ്രധാനമന്ത്രി
മുംബൈയിൽ മെട്രോ ശൃംഖല സ്ഥാപിക്കുന്നതിന് കഴിഞ്ഞ 4 വർഷമായി നിരവധി പുതിയ പദ്ധതികൾ ആരംഭിച്ചിട്ടുണ്ട്: പ്രധാനമന്ത്രി മോദി

भारी संख्‍या में पधारे मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनों।

मुम्‍बई और ठाणे, देश का वो हिस्‍सा है जिसने देश के सपनों को साकार करने में मदद की है। छोटे-छोटे गांवों-कस्‍बों से आए सामान्‍य लोगों ने यहां बड़ा नाम कमाया है; गौरवान्वित किया है। यहां जन्‍म लेने वालों, यहां रहने वालों का हृदय इतना विशाल है कि सबको को अपने दिल में जगह दी है। तभी तो यहां पूरे भारत की तस्‍वीर एक ही जगह दिखती है। जो भी यहां आता है वो मुम्‍बईया रंग में रंग जाता है; मराठी परम्‍परा का हिस्‍सा हो जाता है।

भाइयो और बहनों, आज मुम्‍बई का विस्‍तार हो रहा है, चारों ओर विकास हो रहा है; लेकिन इसके साथ-साथ यहां संसाधनों पर भी दबाव बढ़ रहा है। विशेषतौर पर यहां के transport system, सड़क और रेल व्‍यवस्‍था पर इसका प्रभाव देखने को मिलता है। इसी को ध्‍यान में रखते हुए बीते चार-साढ़े चार वर्षों में मुम्‍बई और ठाणे समेत इससे सटे तमाम इलाकों में transport system को बेहतर करने के लिए अनेक प्रयास किए गए हैं।

आज भी यहां जो 33 हजार करोड़ रुपये ये अधिक के प्रोजेक्‍ट्स का शिलान्‍यास किया गया है, उसमें दो मेट्रो लाइन भी शामिल हैं। इसके अलावा ठाणे में 90 हजार गरीब और मध्‍यम वर्ग के परिवारों के लिए अपने घरों के निर्माण से जुड़े प्रोजेक्‍ट्स की भी शुरूआत आज की गई है।

साथियो, transportation किसी भी शहर, किसी भी देश के विकास की महत्‍वपूर्ण कड़ी होता है। भारत तो दुनिया के उन देशों में है जहां तेज गति से शहरीकरण हो रहा है।

हाल में एक रिसर्च सामने आई है कि आने वाले दशक में दुनिया के Top Ten, सबसे तेजी से विकसित होते शहरों में सारे दसों-दस शहर भारत के शहर हैं। यानी देश जितनी तेजी से विकास की गति को पकड़ रहा है, उसका एक मजबूत हिस्‍सा हमारे शहर में रहने वाले लोग हैं।

मुम्‍बई तो वैसे भी देश की आर्थिक गतिविधियों का सेंटर रहा है और आने वाले समय में इसका और विस्‍तार होने वाला है। इसलिए केन्‍द्र में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की सरकार बनी, तब हमने यहां के infrastructure पर ध्‍यान दिया।

मुम्‍बई लोकल के लिए सैंकड़ों करोड़ का आवंटन किया। यहां पुराने रेलवे ब्रिजों का नवीनीकरण किया गया। मुम्बई लोकल के अलावा भी ट्रांसपोर्ट के दूसरे माध्‍यमों का विस्‍तार किया गया, जिसमें से मेट्रो सिस्‍टम सबसे प्रभावी माध्‍यम बनता जा रहा है।

आज जो मेट्रो का विस्‍तार यहां ठाणे में हुआ है, ये मुम्‍बई, ठाणे और आसपास के दूसरे क्षेत्रों को बेहतर connectivity देने के vision का ही हिस्‍सा है।

साथियो, मुम्‍बई में पहली बार साल 2006 में मेट्रो की पहली परियोजना की शुरूआत की गई थी। लेकिन आठ साल तक क्‍या हुआ, कहां मामला अटक गया, बताना मुश्किल है।

पहली लाईन 2014 में शुरू हो पाई और वो भी सिर्फ 11 किलोमीटर की लाइन। आठ साल में सिर्फ और सिर्फ 11 किलोमीटर।

2014 के बाद हमने तय किया कि मेट्रो लाइन बिछाने की स्‍पीड भी बढ़ेगी और स्‍केल भी बढ़ेगी। पिछले चार साल में मुम्‍बई में मेटो का जाल बिछाने के लिए अनेक नई परियोजनाओं की शुरूआत की गई।

इसी सोच पर चलते हुए आज दो और मेट्रो लाइनों का शिलान्‍यास किया गया है। यानी आने वाले तीन साल में यहां 35 किलोमीटर की मेट्रो क्षमता और जुड़ जाएगी।

इतना ही नहीं, साल 2022 से 2024 के बीच मुम्‍बई वासियों को पौने 300 किलोमीटर की मेट्रो लाइन उपलब्‍ध हो जाएगी।

आज जो शिलान्‍यास किए गए हैं, उससे ठाणे से भिवंडी, कल्‍याण,दहिसरसे लेकर मीरा-भायंदर तक के लोगों को तो फायदा पहुंचेगा ही, इनसे पूरी मुम्‍बई में जाम की परेशानी कम होगी।

साथियो, ये सुविधाएं सिर्फ आज की आवश्‍यकताओं के हिसाब से नहीं, बल्कि साल 2035 की जरूरतों को और उसके हिसाब से विकसित की जा रही हैं।

भाइयो और बहनों, आपका सफर आसान हो, आपका जीवन सुगम हो, लेकिन देश के गरीब और मध्‍यम वर्ग के लोगों को बिना घर के न रहना पड़े, इसे लिए भी व्‍यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

केन्‍द्र सरकार ने तय किया है कि साल 2022 में जब देश आजादी का 75वां पर्व मना रहा हो, तब देश के हर परिवार के पास अपनी पक्‍कीछत हो, अपना पक्‍का घर हो; इसी लक्ष्‍य को आगे बढ़ाते हुए आज यहां 90 हजार नए घर बनाने की शुरूआत हुई है। मुझे बताया गया है कि तीन साल के भीतर ये घर बनकर तैयार हो जाएंगे।

साथियो, पहले की सरकार से हमारे संस्‍कार भी अलग हैं, सरोकार भी और रफ्तार भी अलग है। पिछली सरकार ने अपने आखिरी चार वर्षों में सिर्फ साढ़े 25 लाख घर बनाए थे; उनकी सरकार के last four years में 25 लाख 50 हजार मकान बनाए थे। जबकि बीते चार वर्षों में हमारी सरकार ने करीब 1 करोड़ 25 लाख से ज्‍यादा यानी पांच गुना से अधिक लोगों के लिए घर बनाए गए हैं। इसका मतलब इतना काम उनको करना होता तो शायद दो पीढ़ी चली जातीं।

प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत पूरे महाराष्‍ट्र में आठ लाख घर बनाए जा रहे हैं। साथियो, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बेघर लोगों के लिए अच्‍छी सोसायटी का निर्माण किया जा रहा है और ये वो आदर्श सोसायटी नहीं है, जो कि पुरानी सरकार के दौरान चर्चा में रही थी। बल्कि सही मायने में आदर्श सोसायटी बनाई जा रही है जहां एक सामान्‍य परिवार के सपने पलते हैं, बेहतर भविष्‍य का आत्‍मविश्‍वास जगता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हमारी सरकार ढाई लाख रुपये तक की मदद सीधे बैंक में जमा कर रही है।यानी लोन का एमाउंट सीधे ढाई लाख रुपये घट जाता है। यानी निम्‍न और मध्‍यम वर्ग की मदद होम लोन में भी की जा रही है।

इसके अलावा पहले के मुकाबले होम लोन पर ब्‍याज दर भी काफी कम हुई है। सरकार द्वारा इस योजना के तहत कमजोर तबके के लोगों को, निम्‍न आय वर्ग वालों को साढ़े 6 प्रतिशत की interest subsidy भी दी जा रही है।

Medium Income ग्रुप वालों को 3 से 4 प्रतिशत की interest subsidy दी गई है। इन प्रयासों का मतलब ये हुआ कि अगर किसी ने 20 लाख रुपये का होम लोन 20 वर्ष के लिए लिया है, तो उसे इस अवधि में करीब-करीब 6 लाख रुपये तक की सहायता सरकार द्वारा दी जा रही है।

साथियो, सरकार की इन्‍हीं ईमानदार कोशिशों का नतीजा है कि बीते एक-डेढ़ वर्ष में लाखों लोगों ने अपना पहला घर इस योजना का लाभ उठाते हुए बुक किया है, खरीदा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते 7-8 महीने में नए घर खरीदने की रफ्तार पिछले वर्ष के मुकाबले दोगुनी से भी ज्‍यादा अधिक हुई है।

मुझे बताया गया है कि आज जो योजना शुरू हो रही है, उसमें भी इस तरह के लोगों की मदद की जा रही है। महाराष्‍ट्र में 85 हजार से ज्‍यादा लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो हजार करोड़ रुपये की मदद मिल चुकी है।

साथियों, हम सिर्फ मध्‍यम वर्ग के अपने घर के सपनों को ही साकार करने में मदद नहीं कर रहे हैं, बल्कि इससे जुड़ी दूसरी दिक्‍कतों को भी दूर कर रहे हैं।

चार वर्ष पहले तक किस-किस प्रकार की समस्‍याएं अपनी जीवन भर की कमाई से बुक किए घर को पाने में होती थीं, इससे आप भलीभांति परिचित हैं।

कुछ लोगों की मनमानी और गलत नीयत के चलते कैसे बरसों तक आपका घर फंस जाता था। ऐसा भी होता था कि वादा वो कुछ और करते थे और डिलीवरी कुछ और होती थी। इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने का एक बड़ा प्रयास हमारी सरकार ने किया है।

आज Real Estate Regulatory Authority यानी RERA, देश के अधिकांश राज्‍यों में notify किया जा चुका है। 21 राज्‍यों में तो tribunal भी काम कर रहे हैं।

मैं फडणवीस जी को बधाई देता हूं, क्‍योंकि महाराष्‍ट्र देश के उन राज्‍यों में है, जिसने सबसे पहले RERA को लागू किया है। देशभर के करीब 35 हजार रियल एस्‍टेट प्रोजेक्‍ट्स और 27 हजार रियल एस्‍टेट एजेंट्स इससे रजिस्‍टर्ड हो चुके हैं। इसमें भी महाराष्‍ट्र के सबसे अधिक प्रोजेक्‍ट्सशामिल हैं1

साथियो, सोचिए, 70 वर्षों से बिना किसी सख्‍त और स्‍पष्‍ट कानून के Real Estate Sectorचल रहा था। अगर पहले ही इस प्रकार का कानून सरकारें बनातीं तो घर खरीदारों को अदालतों के चक्‍कर न लगाने पड़ते और रियल एस्‍टेट सेक्‍टर भी ईमानदारी के साथ खूब फलता-फूलता।

भाइयो और बहनों, निम्‍न और मध्‍यम वर्ग का बिजली का बिल कैसे कम हो, सरकार इसके लिए भी निरंतर प्रयास कर रही है। देशभर में उजाला योजना के तहत 30 करोड़ से अधिक एलईडी बल्‍ब बांटे गए हैं।जिसमें करीब सवा दो करोड़ बल्‍ब, उसमें से महाराष्‍ट्र में बांटे गए हैं; जिसमें से ठाणे में भी लाखों बल्‍ब दिए जा चुके हैं। जो काम पहले 60 वाट का बल्‍ब करता था, वही आज 7 या 8 वाट का बल्‍ब कर रहा है। यानी बिजली की बचत हो हो रही है, साथ में बिल भी कम हो रहा है।

सिर्फ इसी योजना से देश के तमाम परिवारों को हर साल मिलाकर करीब 16 हजार करोड़ रुपये की बचत हो रही है। सिर्फ महाराष्‍ट्र में ही लोगों का हर साल करीब 1100 करोड़ रुपये का बिजली का बिल कम हुआ है।

ये इसलिए हो पाया है क्‍योंकि हमने LED Bulb पर mission mode पर काम किया। कंपनियों को उत्‍पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्‍साहित किया।Competition को promote किया, बिचौलियों को बीच से हटा दिया। जिसके चलते चार वर्ष पहले जो बल्‍ब 250-300 रुपये का मिलता था, वही आज 50 रुपये तक में मिल रहा है।

साथियो, केन्‍द्र सरकार ‘सबका साथ-सबका विकास’ रास्‍ते पर आगे बढ़ रही है। देश का कोई कोना, कोई गांव और शहर, कोई वर्ग विकास से अछूता न रहे, इसके लिए काम किया जा रहा है। गरीब का जीवन स्‍तर ऊपर उठाया जाए, इसके लिए योजनाएं बनाई और चलाई जा रही हैं।

उज्‍ज्‍वला योजना के तहत देशभर में गरीब बहनों का जीवन धुंआ-मुक्‍त करने औरउनके समय की बचत कराने के लिए मुफ्त गैस के कनेक्‍शन दिए जा रहे हैं।

अब तक करीब 6 करोड़ कनेक्‍शन देशभर में दिए जा चुके हैं। जिसमें से ठाणे समेत पूरे महाराष्‍ट्र की 34 लाख से अधिक बहनों को मुफ्त गैस कनेक्‍शन दिया जा चुका है।

साथियो, ऐसी बहनें जो अपना छोटा-मोटा कारोबार करना चाहती हैं- जैसे सैलून हो, टेलरिंग हो, कोई बुनाई-कढ़ाई का काम हो, हथकरघे का काम हो, ऐसा कोई भी काम करना चाहती हैं, तो उनके लिए बैंकों के दरवाजे खुले हैं।

मुद्रा योजना के तहत 50 हजार रुपये से 10 लाख रुपये तक का बिना गारंटी का लोन दिया जा रहा है। महाराष्‍ट्र में करीब सवा करोड़ ऐसे ऋण दिए जा चुके हैं, जिसमें से एक करोड़ ऋण बहनों के नाम से आवंटित हुए हैं।

भाइयो और बहनों, गरीब को गरिमापूर्ण जीवन मिले, महिलाओं को मान और सम्‍मान मिले; यही हमारा ध्‍येय भी है और हासिल भी।

बच्‍चों को पढ़ाई, युवाओं को कमाई, बुजुर्गों को दवाई, किसानों को सिंचाई, जन-जन की सुनवाई; विकास की इस पंचधारा के प्रति सरकार समर्पित है।

और अंत में फिर एक बार आप सभी को विकास की नई परियोजनाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इतनी बड़ी तादाद में आ करके आपने आशीर्वाद दिए, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।

यहां से मुझे पुणे जाना है। वहां भी हजारों करोड़ के प्रोजेक्‍ट का शिलान्‍यास और लोकार्पण होना है। आपने भारी संख्‍या में ये जो ताकत दिखाई है, इसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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March 23, 2026
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From the Gulf to the Global West and from the Global South to neighbouring countries, India is a trusted partner for all: PM
What gets measured gets improved and ultimately gets transformed: PM
This is the new India, It is leaving no stone unturned for development: PM

नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!