Published By : Admin |
September 18, 2024 | 15:14 IST
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2024 ലെ റാബി സീസണിൽ (01.10.2024 മുതൽ 31.03.2025 വരെ) ,ഫോസ്ഫറസ്, പൊട്ടാഷ് (P&K) വളങ്ങളുടെ പോഷകങ്ങൾ അടിസ്ഥാനമാക്കിയുള്ള സബ്സിഡി നിരക്കുകൾ (NBS) നിശ്ചയിക്കുന്നതിനായി കേന്ദ്ര രാസവസ്തു- രാസവള മന്ത്രാലയം മുന്നോട്ടുവച്ച നിർദ്ദേശത്തിന് പ്രധാനമന്ത്രി ശ്രീ നരേന്ദ്ര മോദിയുടെ അധ്യക്ഷതയിൽ ചേർന്ന കേന്ദ്ര മന്ത്രിസഭ അംഗീകാരം നൽകി.
2024-ലെ റാബി സീസണിലെ ഉദ്ദേശ ബജറ്റ് ആവശ്യം ഏകദേശം 24,475.53 കോടി രൂപയായിരിക്കും
പ്രയോജനങ്ങൾ:
*കർഷകർക്ക് സബ്സിഡി നിരക്കിലും താങ്ങാവുന്നതും ന്യായമായ വിലയിലും വളങ്ങളുടെ ലഭ്യത ഉറപ്പാക്കും.
*രാസവളങ്ങളുടെയും ഉൽപന്നങ്ങളുടെയും അന്താരാഷ്ട്ര വിലകളിലെ സമീപകാല പ്രവണതകൾ കണക്കിലെടുത്ത് ഫോസ്ഫറസ്, പൊട്ടാഷ് (P&K) വളങ്ങളുടെ സബ്സിഡി യുക്തിസഹമാക്കുന്നു.
നടപ്പാക്കൽ തന്ത്രവും ലക്ഷ്യങ്ങളും:
കർഷകർക്ക് താങ്ങാവുന്ന വിലയിൽ ഫോസ്ഫറസ്, പൊട്ടാഷ് (P&K) രാസവളങ്ങളുടെ സുഗമമായ ലഭ്യത ഉറപ്പാക്കുന്നതിന്, 2024 റാബി സീസണിലെ (01.10.2024 മുതൽ 31.03.2025 വരെ ബാധകമായ) അംഗീകൃത നിരക്കുകളെ അടിസ്ഥാനമാക്കിയായിരിക്കും ഈ വളങ്ങൾക്ക് സബ്സിഡി നൽകുന്നത്.
പശ്ചാത്തലം:
രാസവള നിർമ്മാതാക്കൾ/ഇറക്കുമതിക്കാർ മുഖേന കർഷകർക്ക് സബ്സിഡി നിരക്കിൽ 28 ഇനം ഗ്രേഡുകളിലുള്ള ഫോസ്ഫറസ്, പൊട്ടാഷ് (P&K) വളങ്ങൾ ഗവണ്മെന്റ് ലഭ്യമാക്കുന്നു. P&K വളങ്ങളുടെ സബ്സിഡി നിയന്ത്രിക്കുന്നത് 01.04.2010 മുതൽ പ്രാബല്യത്തിലുള്ള NBS സ്കീം അനുസരിച്ചാണ്. കർഷക സൗഹൃദ സമീപനത്തിന് അനുസൃതമായി, കർഷകർക്ക് താങ്ങാവുന്ന വിലയിൽ P&K വളങ്ങളുടെ ലഭ്യത ഉറപ്പാക്കാൻ ഗവണ്മെന്റ് പ്രതിജ്ഞാബദ്ധമാണ്. രാസവളങ്ങളുടെയും ഉൽപന്നങ്ങളുടെയും,അതായത് യൂറിയ, ഡിഎപി, എംഒപി, സൾഫർ എന്നിവയുടെ അന്താരാഷ്ട്ര വിലകളിലെ സമീപകാല പ്രവണതകൾ കണക്കിലെടുത്ത്, 2024-റാബി സീസണിലെ(01.10.24 മുതൽ 31.03.25 വരെ) എൻബിഎസ് നിരക്കുകൾ ഫോസ്ഫറസ്, പൊട്ടാഷ് (P&K) രാസവളങ്ങൾക്ക് ഏർപ്പെടുത്താൻ ഗവണ്മെന്റ് തീരുമാനിച്ചു. അംഗീകൃതവും വിജ്ഞാപനം ചെയ്തതുമായ നിരക്കുകൾ അനുസരിച്ച് വളം കമ്പനികൾക്ക് സബ്സിഡി നൽകുന്നത് വഴി കർഷകർക്ക് താങ്ങാവുന്ന വിലയിൽ വളം ലഭ്യമാക്കാനും കഴിയും.
हमारे किसान भाई-बहनों को निरंतर सस्ती दरों पर खाद की आपूर्ति जारी रहे, इसके लिए हमने 2024 के रबी सीजन के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी की दरों को स्वीकृति प्रदान की है। इस कदम से देशभर के अन्नदाताओं की खेती की लागत भी कम होगी।https://t.co/NRwHn2p68d
Text of Prime Minister addressing session on ''Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity'' at G7 summit in Evian, France
June 16, 2026
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राष्ट्रपति मैक्रों, Your Excellencies,
नमस्कार!
G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।
Friends,
आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।
ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।
विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।
Friends,
पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।
किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।
Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.
अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।
Friends,
भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।
भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।
संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।
श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।
भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.
Friends,
आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।
हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।
Friends,
अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।
हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।
Friends,
भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।