Our focus is all-round development of India & North east cannot stay behind in this journey: PM Modi
We want to ensure that youth here gets the opportunities to fulfil their dreams: PM
We would set up Central Institute of Technology for better technical education, Kokrajhar to get deemed university status: PM
Assam gave a PM for 10 years, Congress ruled here for 15 years, still the state faces problems: PM
We want to Act East. Be it rail, roads or waterways, we want to connect our North east with entire India: PM
Our aim is housing for all by 2022 & 24/7 electricity and water: PM Modi during rally in Assam
I assure our Govt would leave no stone unturned in developing the North east region: PM Modi

मंच पर विराजमान बीटीसी के चीफ़ श्रीमान अग्रमा मोहिलरी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और जनप्रिय नेता श्रीमान सर्वानंद जी सोनमल, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और डोनर के मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह जी, बीटीसी के डिप्टी चीफ़ श्रीमान खम्पा जी, श्रीमान हेमंत विश्व शर्मा जी, सांसद श्रीमान विश्वजीत और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों एवं बहनों।

मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा मांगता हूँ क्योंकि मुझे आने में विलंब हुआ। मैं सिक्किम में था मुझे निकलने में देर हुई और आपको काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मुझे इतनी देरी नहीं हुई है जिस कारण आपको विकास के लिए इंतज़ार करना पड़े, आपको अपने हक़ के लिए लड़ाई करनी पड़े। मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर यहाँ के लोगों की भलाई करने आया हूँ, आपके शक्ति, सामर्थ्य, सपनों, यहाँ के युवाओं को अवसर मिले और वे विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करें।

मैं आपके बीच में एक ऐसे समय आया हूँ जब यहाँ पर एकता और सद्भावना का माहौल है। यहाँ के राजनीतिक गुट भी अपने वाद-विवादों को पीछे रखते हुए यहाँ के लोगों की भलाई और उनके विकास के लिए आगे आए हैं। मैं इसके लिए यहाँ के नेतृत्व को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और जो लोग जुड़ रहे हैं, उनका मैं तहे दिल से स्वागत करता हूँ। अग्रमा जी, खम्पा जी मेरे घर पर आये थे, दिल खोलकर बातें हुई थी। उनसे मिलकर मुझे यहाँ की समस्याओं को समझने का अवसर मिला तभी उन्होंने कहा कि मोदी जी, जो देना है, वो दिल खोलकर दे दीजिए क्योंकि बातें भी तो दिल खोलकर हुई थीं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि दिल में आप समा गए हैं।

12-15 साल से जो वादे आपको किये गए, उन वादों का भी निपटारा नहीं हुआ। मैं यह तो मान सकता हूँ कि इसमें कुछ समय लग सकता है लेकिन आप हर बार वादे करें और फ़िर वादों को भुला दें, नए-नए वादें करें इस तरह के वादाखिलाफी से गुस्सा आता है, ये आपकी नाराजगी का प्रदर्शन है।

मैं आपको इतना ही कहने आया हूँ कि जो बात मैं कर रहा हूँ, उसे पूरा करने के लिए मैं जी-जान से जुड़ जाता हूँ, खप जाता हूँ। मैं हैरान हूँ कि एक पार्टी जिसने यहाँ 15 साल राज किया, ये असम प्रदेश जिसने 10 साल के लिए देश को प्रधानमंत्री दिया, 15 साल कांग्रेस ने लगातार राज किया; देखा जाए तो 60 साल तक वो ही सरकार चलाते रहे, मैं तो यह सोच रहा था कि असम में तो अब कोई समस्या हो ही नहीं सकती क्योंकि 10 साल यहाँ से प्रधानमंत्री रहे हैं और 15 साल से एक मुख्यमंत्री यहाँ सरकार चला रहे हैं। जिन्हें अपने काम का हिसाब देना चाहिए, वे सवाल पूछ रहे हैं तो फिर उन्होंने किया क्या? ये सब विफलताओं की दस्तक है। उन्हें यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि उनका अपना प्रधानमंत्री था, असम से मनमोहन सिंह जी को भेजा था लेकिन अभी समस्याओं की लंबी लिस्ट है आपकी।

भाईयों-बहनों, वे 15 साल में कुछ नहीं कर पाए और मुझसे अपेक्षा करते हैं कि मैं 15 दिन में सबकुछ कर दूँ। मुझे बताईये कि क्या ये मेरे साथ न्याय है? ये आपलोगों को गुमराह करने के लिए है लेकिन मेरा आप पर भरोसा है कि आप गुमराह नहीं होंगे। आपने उनके 15 साल देखे हैं और आपने हमारे 15 महीने भी देखे हैं। मेरे सामने कुछ बातें रखी गई थीं और आज मैं बड़े संतोष के साथ कहना चाहता हूँ कि असम के कार्बी मिकिर जनजाति को मैदानी इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में और असम के बोडो काछारी जनजाति को ट्राइब आंगलोंग और एनसी हिल ऑटोनोमस काउंसिल के इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में घोषित किये जाने का मुद्दा काफ़ी समय से लंबित है। अब दोनों ही मसलों की रजिस्ट्रार सेंट्रल ऑफ़ इंडिया और अनुसूचित जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग द्वारा सिफ़ारिश कर दी गई है। आने वाले कुछ समय में ये मामला कैबिनेट में अप्रूव हो जाएगा और उसके बाद संसद में इसे पारित किया जाएगा। वर्षों से आपकी इस समस्या का समाधान निकाला जा रहा है।

आपके नेता ने जब मुझे इस समस्या के बारे में बताया तो मैंने कहा कि मैं पहले इसका समाधान निकालूँगा, फ़िर आऊंगा। इस क्षेत्र के छात्रों को उच्च गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए, औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कोकराझार को एक वर्ष की अवधि में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जाएगा। इस कार्य से यूनिवर्सिटी को और अधिक अकादमिक तथा प्रशासनिक अधिकार प्राप्त होंगे।

मेरे सामने एक मसला आया था, एयरपोर्ट का बहुत पहले एक एयरपोर्ट सेना के साथ मिलकर काम कर रहा था, फ़िर वो बंद हो गया। अब राज्य सरकार ज़मीन नहीं दे रही है मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जैसे ही ज़मीन का मसला पूरा हो जाएगा, रूपसी एयरपोर्ट को भारतीय वायुसेना और आम जनता के लिए संयुक्त रूप से विकसित किया जाएगा।

कंचनजंघा एक्सप्रेस ट्रेन के रूट का बराक वेली में सिलचर तक विस्तार किया जाएगा और मैं आने वाले दिनों में बहुत जल्द उस ट्रेन को आरंभ करने जा रहा हूँ। मुझे एक और कठिनाई बताई गई कि हमारे लिए बजट में इतना आवंटन होता है लेकिन पता नहीं कहाँ जाता है। जनता की पाई-पाई जनता के ही पास जानी चाहिए; जो अब तक लूटा गया है और अब लूटने का अवसर नहीं मिल रहा है इसलिए ये लोग हमसे परेशान हैं। दिल्ली आजकल हिसाब मांगता है।

दिल्ली में अटल जी के समय में नार्थ-ईस्ट के विकास के लिए एक विशेष मंत्रालय - डोनर बना था। अटल जी की सरकार के जाने के बाद इनकी सरकार में क्या-क्या होता है, ये आप सभी को मालूम ही है। हमने डोनर मंत्रालय को एक नया काम दिया है जिससे यहाँ के कुछ नेता लोग काफ़ी परेशान हैं। पहले यहाँ के लोगों को दिल्ली जाना पड़ता था, मिनिस्ट्री खोजनी पड़ती थी, सामान्य लोग वहां जा नहीं पाते थे, शिकायत पहुंचाई नहीं जा सकती थी, क्या चल रहा है, सच-झूठ का पता ही नहीं चलता था। रुपये तो आते थे लेकिन ज़मीन पर कोई काम दिखाई नहीं देता था।

राजीव गाँधी सही कहते थे कि दिल्ली से एक रुपया निकलता है और गाँव में जाते-जाते 15 पैसे हो जाता है। इसलिए हमने तय किया कि डोनर मिनिस्ट्री, उसके अधिकारी महीने में एक बार नार्थ-ईस्ट के राज्यों में जाएंगे, पूरा सचिवालय दिल्ली से गुवाहाटी जाएगा। दिनभर वहां बैठेंगे, सरकार ने जो पैसे दिये, उसका हिसाब मांगेंगे, रुपये कहाँ जा रहे हैं, उसकी पूछताछ होगी और यह काम डॉ. जितेन्द्र सिंह की टीम बखूबी कर रही है। इसके कारण यहाँ लोगों को परेशानी हो रही है कि मोदी हिसाब मांग रहे हैं और आजकल फैशन हो गया है, अपने काम का हिसाब नहीं देना। जब हिसाब मांगते हैं तो कोई और ही आरोप लगाना शुरू कर देते हैं इसलिए नार्थ-ईस्ट की सभी सरकारों को पैसे का हिसाब देना पड़ेगा क्योंकि ये जनता का पैसा है और ये जनता के काम आना चाहिए और इसलिए मैं इन लोगों को बुरा लगता हूँ।

मैं अपना समय इस लिए बर्बाद नहीं करता कि मैं अच्छा लगूं यां बुरा लगूं; मैं अपना समय खपाता हूँ ताकि मेरा देश अच्छा बने। हमारे देश का भविष्य बदलने के लिए मेरा तीन सूत्रीय कार्यक्रम है – विकास, विकास और सिर्फ़ विकास। सारी समस्याओं का समाधान विकास में ही है। पिछले दिनों आपने देखा होगा कि जब दिल्ली में पुलिस की भर्ती हुई तो मैंने आग्रह रखा कि नार्थ-ईस्ट राज्यों के नौजवानों को दिल्ली में पुलिस में भर्ती करना चाहिए और आज बहुत बड़ी संख्या में यहाँ के नौजवानों को दिल्ली में रक्षा के लिए ले जाया गया। एक बार जो बात कही, उसे लागू करने के लिए जी-जान से लगे रहते हैं, पूरी कोशिश करते हैं।

हमें अगर विकास करना है तो इस इलाके की सबसे पहली ज़रूरत है – इंफ्रास्ट्रक्चर, चाहे सड़क हो, रेल हो, या जलमार्ग हो और इसलिए हमारी सरकार ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी बनाई है। इस पॉलिसी के माध्यम से नार्थ-ईस्ट राज्यों को भारत की विकासधारा में जोड़ना है, रास्तों का नेटवर्क बनाना है। पिछले बजट में आपने देखा होगा कि जैसा आवंटन हुआ था, वैसा पहले कभी नहीं किया गया होगा, उतने रुपये हम नार्थ-ईस्ट में सड़क और रेल में लगा रहे हैं।

देश की आज़ादी के इतने साल बीत गए और मैं सोच रहा था कि अब तक तो देश के सभी गांवों में बिजली पहुँच गई होगी लेकिन मुझे हिसाब मिला कि अभी भी 18,000 गाँव ऐसे हैं जहाँ बिजली का खंभा भी नहीं है। हमने बीड़ा उठाया, 15 अगस्त को लाल किले से हमने घोषणा की कि मेरी सरकार जी-जान से काम करेगी और 1,000 दिन में 18,000 गाँव में बिजली पहुंचाऊंगा। आप अपने मोबाइल पर इसका पूरा विवरण देख सकते हैं। इसके लिए एक अलग वेबसाइट बनाई है कि कहाँ-कहाँ बिजली पहुंची और दिन-प्रतिदिन का हिसाब रखा जाता है और हर दिन किसी-न-किसी गाँव में बिजली पहुँच रही है। गाँव में बिजली पहुँचने के बाद लोगों को अहसास होता होगा कि आज़ादी किसे कहते हैं। मैं तो मीडिया के मित्रों को भी कहता हूँ कि बिजली पहुँचने के बाद गाँव में जो लोगों का उत्साह है, उसे लोगों को दिखाएं। इससे देश के साथ-साथ काम करने वालों का भी हौसला बुलंद होगा।

बिजली पहुँचने से शिक्षा और जीवन-व्यवस्था में सुधार होगा और हमारा सपना है 2022 में भारत की आज़ादी के 75 साल होने पर सब जगह लोगों को 24 घंटे बिजली मिले जो आज नहीं मिल रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि 2022 तक हम यह काम करके रहेंगे।

हमारा एक और सपना यह है कि देश के गरीब परिवारों को अपना घर मिले। हमने ठान लिया है कि 2022 में देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के पास भी ख़ुद का रहने का घर हो और घर भी ऐसा जिसमें बिजली हो, पानी आता हो, शौचालय भी हो और बच्चों के लिए नजदीक में स्कूल भी हो। जब इतने मकान बनेंगे, रास्ते बनेंगे, रेल का काम होगा तो बहुत सारे लोगों को रोजगार भी मिलेगा, काम के अवसर बढ़ेंगे।

हमने तय किया था कि हम गरीब से गरीब व्यक्ति का बैंक खाता खोलेंगे; प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की। लोगों को लगता था कि जो काम 70 साल में नहीं हुआ, वो मोदी जी कैसे करेंगे। आज बताते हुए मुझे ख़ुशी हो रही है कि जन-धन योजना के अंतर्गत हमने 20 करोड़ लोगों के खाते खोल दिए हैं। हमने उन्हें अर्थव्यवस्था के धारा में जोड़ा, बैंक तक उनका रास्ता खोला। मैंने कहा था कि पैसे नहीं होंगे तो भी खाते खुलेंगे लेकिन मुझे ख़ुशी है कि गरीबों ने भी सोच लिया कि मुफ़्त में नहीं करना है, बैंक में कुछ तो जमा करेंगे और लोगों ने करीब-करीब 30 हज़ार करोड़ रुपये जमा किये। ये ताकत है देश के आम जन की और इस ताकत को लेकर हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरा एक ही इरादा है कि हिन्दुस्तान में और जगहों पर जितना विकास हुआ है, यहाँ भी उतना ही विकास होना चाहिए। ये काम मुझे करना है और इसलिए मैं आपके पास आशीर्वाद लेने आया हूँ। आज लाखों की तादाद में मैं यह जनसैलाब देख रहा हूँ। मैंने असम में बहुत दौरे किये हैं। लोकसभा के चुनाव में भी आपने भरपूर आशीर्वाद दिया है लेकिन ऐसा नज़ारा मैंने पहले कभी नहीं देखा, ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा। आपके इसी आशीर्वाद से मुझे ताकत मिलती है, आपके लिए दिन-रात दौड़ने की मुझे प्रेरणा मिलती है। मुझे ख़ुशी है कि मुझे नए साथियों के साथ काम करने का मौका मिला है और मैं विश्वास दिलाता हूँ कि यहाँ की जितनी रुकी समस्याएं हैं, उनके समाधान के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। मैं आप सभी का आभारी हूँ, बहुत-बहुत धन्यवाद!       

            

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ಮಾಜಿ ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿ ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆ ಬಿಡುಗಡೆ ಸಮಾರಂಭ ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರ ಭಾಷಣ
August 12, 2026
ಇಂದು ಶ್ರೀ ರಾಮ್‌ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಆತ್ಮಚರಿತ್ರೆಯನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡುವ ಅವಕಾಶ ನಮಗೆ ದೊರೆತಿದೆ. ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಭಾಗವಾಗಲು ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಸೇವೆ ಮತ್ತು ನಮ್ಮ ರಾಷ್ಟ್ರದ ಪ್ರಗತಿಗೆ ಮುಡಿಪಾಗಿಟ್ಟ ಜೀವನವನ್ನು ಕೋವಿಂದ್‌ ಅವರ ಪ್ರಯಾಣವು ಪ್ರತಿಬಿಂಬಿಸುತ್ತದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಕೋವಿಂದ್ ಅವರೊಂದಿಗಿನ ನನ್ನ ಸುದೀರ್ಘ ಪರಿಚಯ ಮತ್ತು ನನ್ನ ಬಗ್ಗೆ ಅವರ ವಿಶೇಷ ಪ್ರೀತಿ ಮತ್ತು ಆತ್ಮೀಯತೆ ನನ್ನ ದೊಡ್ಡ ಆಸ್ತಿಯಾಗಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಕಡುಬಡವರು ಮತ್ತು ಅವಕಾಶ ವಂಚಿತರು ಉನ್ನತ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ತಲುಪುವ ಅವಕಾಶ ಪಡೆಯಬಲ್ಲ ನವ ಭಾರತವನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸುವ ಕನಸನ್ನು ಮಹಾತ್ಮಾ ಗಾಂಧಿ, ಬಾಬಾ ಸಾಹೇಬ್ ಅಂಬೇಡ್ಕರ್, ಜ್ಯೋತಿಬಾ ಫುಲೆ ಮತ್ತು ಸಾವಿತ್ರಿಬಾಯಿ ಫುಲೆ ಅವರು ಕಂಡಿದ್ದರು: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಕೋವಿಂದ್ ಅವರಂತಹ ವ್ಯಕ್ತಿಗಳು ತಮ್ಮ ಶ್ರದ್ಧೆ ಮತ್ತು ಸಾಮರ್ಥ್ಯದಿಂದ ಕೇವಲ ತಮ್ಮ ಜೀವನವನ್ನು ಪರಿವರ್ತಿಸಿಕೊಂಡಿರುವುದಲ್ಲದೆ, ಶತಮಾನಗಳಷ್ಟು ಹಳೆಯದಾದ ಕನಸು ಮತ್ತು ಆಶಯವನ್ನು ನನಸು ಮಾಡುವಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸಿದ್ದಾರೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾಗಿ ನಿವೃತ್ತರಾದ ನಂತರವೂ; ಅವರು 'ಒಂದು ರಾಷ್ಟ್ರ, ಒಂದು ಚುನಾವಣೆ' ನಿಟ್ಟಿನಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅದರ ನಿರ್ಣಯವು ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವದಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಅಧ್ಯಾಯವನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸಲಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ

ನಮ್ಮ ಮಾಜಿ ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿ ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ, ಲೋಕಸಭೆ ಸ್ಪೀಕರ್ ಓಂ ಬಿರ್ಲಾ ಜಿ, ಶ್ರೀಮತಿ ಸವಿತಾ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ, ಸಮಾರಂಭದಲ್ಲಿ ಉಪಸ್ಥಿತರಿರುವ ಎಲ್ಲಾ ಹಿರಿಯ ಗಣ್ಯರೆ - ನಾನು ಎಲ್ಲರನ್ನೂ ಉಲ್ಲೇಖಿಸಲು ಸಾಧ್ಯವಾಗದಿರಬಹುದು, ಆದರೆ ಇದು ಒಂದು ಕುಟುಂಬದ ಸಮಾರಂಭದಂತೆ ಭಾಸವಾಗುತ್ತಿದೆ ಎಂಬುದು ನನಗೆ ತುಂಬಾ ಸಂತೋಷ ನೀಡುತ್ತಿದೆ.

ಸಹೋದರ ಸಹೋದರಿಯರೆ,

ಇಂದು ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆಯನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡುವ ಸಂದರ್ಭ ನಮಗಿದೆ. ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಭಾಗವಾಗುವ ಅದೃಷ್ಟ ನನಗೂ ಸಿಕ್ಕಿದೆ ಎಂಬುದರಿಂದ ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಅವರೊಂದಿಗೆ ನನಗೆ ದೀರ್ಘ ಒಡನಾಟ, ಅವರನ್ನು ಹತ್ತಿರದಿಂದ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳುವ ಅವಕಾಶ, ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾಗಿ ಅವರ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನ ಪಡೆಯುವ ಅವಕಾಶ, ಇದೆಲ್ಲದರ ಜತೆಗೆ, ನನ್ನ ಮೇಲಿನ ಅವರ ವಿಶೇಷ ಪ್ರೀತಿ ಮತ್ತು ವಾತ್ಸಲ್ಯ - ಇದು ನನ್ನ ಜೀವನದ ಒಂದು ದೊಡ್ಡ ನಿಧಿಯಾಗಿದೆ. ಅವರ ಜೀವನದ ಬಗ್ಗೆ ನಾನು ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಂಡಂತೆ, ಅವರ ಸಾಮರ್ಥ್ಯಗಳನ್ನು ನಾನು ಹತ್ತಿರದಿಂದ ನೋಡಿದ್ದರಿಂದ, ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಆತ್ಮಚರಿತ್ರೆ ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವ ಮತ್ತು ಭಾರತೀಯ ಸಮಾಜಕ್ಕೆ ಪರಂಪರೆಯಾಗುತ್ತದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ನಾನು ಪೂರ್ಣ ವಿಶ್ವಾಸದಿಂದ ಹೇಳಬಲ್ಲೆ. ಅವರ ಜೀವನ ಪಯಣ, ಸಮಾಜ ಮತ್ತು ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಅವರ ಕೊಡುಗೆ - ನಾನು ಮಾತನಾಡಲು ತುಂಬಾ ಇದೆ, ಆದರೆ ಪುಸ್ತಕ ಬಿಡುಗಡೆಯಲ್ಲಿ "ಮುನ್ನುಡಿ"ಯನ್ನು ಮಾತ್ರ ನೀಡಬೇಕು. ಅದರ ಸಂಪೂರ್ಣ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ಪಡೆಯಲು ನೀವು ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಓದಬೇಕು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಜೀವನ ಪಯಣವನ್ನು ಅವರ ಸ್ವಂತ ಮಾತುಗಳಲ್ಲೇ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳಲು, ಅವರ ಬರವಣಿಗೆ, ಅವರ ಅನುಭವಗಳನ್ನು ಓದಲು - ಇದು ಹೊಸ ಪೀಳಿಗೆಗೆ ಕಲಿಯಲು ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆಯು ಬಹಳಷ್ಟು ನೀಡುತ್ತದೆ. ಈ ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆಗಾಗಿ ನಾನು ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರನ್ನು ಹೃತ್ಪೂರ್ವಕವಾಗಿ ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ತಮ್ಮ ಪುಸ್ತಕಕ್ಕೆ "ಭಾರತೀಯ ಗಣರಾಜ್ಯದ ವಿಜಯೋತ್ಸವ: ನನ್ನ ಜೀವನ, ನನ್ನ ಹೋರಾಟಗಳು" ಎಂಬ ಅತ್ಯಂತ ಸೂಕ್ತವಾದ ಶೀರ್ಷಿಕೆ ನೀಡಿದ್ದಾರೆ. ಇದರ ಅರ್ಥವೇನೆಂದರೆ ಜೀವನ ಮತ್ತು ಅದರ ಹೋರಾಟಗಳು ವೈಯಕ್ತಿಕ, ಆದರೆ ಆ ಹೋರಾಟಗಳಿಂದ ಬಂದ ವಿಜಯಗಳು ಭಾರತ ಗಣರಾಜ್ಯಕ್ಕೆ, ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವಕ್ಕೆ ಸೇರಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಜನರು ಯಶಸ್ಸು ಬಂದಾಗ ತಮ್ಮನ್ನು ತಾವೇ ಹೊಗಳಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ, ಕಷ್ಟಗಳು ಬಂದಾಗ ಸಮಾಜವನ್ನು ದೂಷಿಸುತ್ತಾರೆ, ಇದು ಮಾನವ ಸ್ವಭಾವ ಎಂಬುದನ್ನು ನಾವು ಹೆಚ್ಚಾಗಿ ನೋಡುತ್ತೇವೆ. ಆದರೆ ಹೃದಯವು ಉದಾರವಾಗಿದ್ದಾಗ, ಅಲ್ಲಿ ಭಾರತೀಯ ಮೌಲ್ಯಗಳು ಇದ್ದಾಗ, ಒಬ್ಬ ವ್ಯಕ್ತಿಯು ಸಮಾಜದಲ್ಲಿ ದೋಷಗಳನ್ನು ಹುಡುಕಲು ಸಮಯ ವ್ಯರ್ಥ ಮಾಡುವುದಿಲ್ಲ. ಅವರು ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಹಾದಿಯತ್ತ ಗಮನ ಹರಿಸುತ್ತಾರೆ, ಸಮಾಜವು ತಮ್ಮ ಯಶಸ್ಸಿನ ಸಮಾನ ಪಾಲುದಾರ ಎಂದು ಪರಿಗಣಿಸುತ್ತಾರೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆ ಮತ್ತು ಅದರ ಶೀರ್ಷಿಕೆ ಇದಕ್ಕೆ ಸ್ಪಷ್ಟ ಉದಾಹರಣೆಗಳಾಗಿವೆ. ಕಾನ್ಪುರದ ದೇಹತ್‌ನಲ್ಲಿ ಅತ್ಯಂತ ಸಾಮಾನ್ಯ ಕುಟುಂಬದಲ್ಲಿ ಜನಿಸಿದ ಅವರ ಜೀವನವನ್ನು ನೋಡಿ. ಬೇಸಿಗೆಯ ದಿನದಲ್ಲಿ ಅವರ ಮನೆಗೆ ಬೆಂಕಿ ಹೇಗೆ ಹೊತ್ತಿಕೊಂಡಿತು ಎಂಬುದನ್ನು ಅವರು ತಮ್ಮ ಪುಸ್ತಕದಲ್ಲಿ ವಿವರಿಸಿ ಬರೆದಿದ್ದಾರೆ. ಅವರ ತಾಯಿ, ತನ್ನ ಸ್ವಂತ ಸುರಕ್ಷತೆಯನ್ನು ಮರೆತು, ಮನೆಯ ವಸ್ತುಗಳನ್ನು ಉಳಿಸಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸಿದರು. ಸಾಮಾನ್ಯ ಕುಟುಂಬದ ಆ ತಾಯಿಗೆ, ಪ್ರತಿಯೊಂದು ವಸ್ತುವು ತನ್ನ ಮಕ್ಕಳನ್ನು ಬೆಳೆಸುವ ಸಾಧನವಾಗಿದೆ. ಆ ಪ್ರಯತ್ನದಲ್ಲಿ ಅವರು ಬೆಂಕಿಯ ಜ್ವಾಲೆಗೆ ಸಿಲುಕಿ ನಿಧನರಾದರು. ಊಹಿಸಿ - ಇಷ್ಟು ಚಿಕ್ಕ ವಯಸ್ಸಿನಲ್ಲಿ, ಒಬ್ಬರು ತಾಯಿಯನ್ನು ಈ ರೀತಿ ಕಳೆದುಕೊಳ್ಳುವುದು ಎಷ್ಟು ನೋವಿನಿಂದ ಕೂಡಿರಬೇಕು. ನನ್ನ ತಾಯಿ 100 ವರ್ಷಗಳನ್ನು ಮೀರಿ ಬದುಕಿ ನನ್ನನ್ನು ಆಶೀರ್ವದಿಸಿದ್ದು ನನ್ನ ಅದೃಷ್ಟ. ಹಾಗಿದ್ದರೂ, ನಾನು ಇನ್ನೂ ಅವರ ಅನುಪಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ಅನುಭವಿಸುತ್ತಿದ್ದೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ನೋವಿನ ಘಟನೆ ಯಾರನ್ನಾದರೂ ಬೀಳಿಸಬಹುದಿತ್ತು, ಆದರೆ ಅದು ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರನ್ನು ಬಲಶಾಲಿಯನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿತು. ನೆರೆಮನೆಯ ತಾಯಿ ಅವರ ಪಾಲನೆಗೆ ಮುಂದಾದರು. ಇದರಿಂದ ಅವರಿಗೆ ಸಾಮಾಜಿಕ ಏಕತೆ ಮತ್ತು ಸಾಮರಸ್ಯದ ಬಲ ಅರ್ಥವಾಯಿತು. ಈ ಘಟನೆಯ ನಂತರ, ಅವರ ತಂದೆಯ ಪಾತ್ರ ಇನ್ನಷ್ಟು ಹೆಚ್ಚಾಯಿತು. ಅವರ ತಂದೆ ಕುಟುಂಬವನ್ನು ನಿರ್ವಹಿಸಿದ ರೀತಿ, ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಮೌಲ್ಯಗಳನ್ನು ನೀಡುವ ರೀತಿ - ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ತನ್ನ ತಂದೆಯನ್ನು ತನ್ನ ನಾಯಕ ಎಂದು ಪರಿಗಣಿಸುತ್ತಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ಬಾಲ್ಯದ ಹೋರಾಟಗಳ ನಡುವೆ, ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಮೇಲೇರಲು ಶಿಕ್ಷಣವನ್ನು ಮಾರ್ಗವನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು. ಅವರು ಕಷ್ಟಪಟ್ಟು ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದರು, ಸಂಪನ್ಮೂಲಗಳ ಕೊರತೆಯನ್ನು ದೌರ್ಬಲ್ಯವಾಗಲು ಬಿಡಲಿಲ್ಲ. ಜನರು ಆಗ ಊಹಿಸಲೂ ಸಾಧ್ಯವಾಗದ ಎತ್ತರವನ್ನು ಅವರು ತಲುಪಿದರು - ಅವರು ಭಾರತದಂತಹ ವಿಶಾಲ ದೇಶದ ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾದರು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇಷ್ಟು ಉನ್ನತ ಹುದ್ದೆ ಏರಿದ ನಂತರವೂ, ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ವಿನಮ್ರ ವ್ಯಕ್ತಿತ್ವ ಮತ್ತು ಸರಳತೆ ಹಾಗೆಯೇ ಉಳಿಯಿತು. ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಯಾಗಿ ನಾನು ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿ ಭವನದಲ್ಲಿ ಅವರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಲು ಹೋದಾಗ, ಅವರು ಶಿಷ್ಟಾಚಾರ ದಾಟಿ ಕೆಲಸಗಳನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದರು ಎಂಬುದು ನನಗೆ ನೆನಪಿದೆ. ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಯನ್ನು ಬೀಳ್ಕೊಡಲು ಅವರು ಕಾರಿನ ಬಾಗಿಲಿಗೆ ಬರುತ್ತಿದ್ದರು. ನಾನು ಅವರನ್ನು ಹೀಗೆ ಮಾಡಬೇಡಿ ಎಂದು ವಿನಂತಿಸುತ್ತಿದ್ದೆ, ಆದರೆ ಅವರು ಕೊನೆಯವರೆಗೂ ತಮ್ಮ ವಿನಮ್ರತೆಯನ್ನು ಬಿಡಲಿಲ್ಲ. ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾದ ನಂತರ, ಅವರು ತಮ್ಮ ಗ್ರಾಮವಾದ ಪರೌಂಖ್‌ಗೆ ಹೋದಾಗ, ಅವರು ತಮ್ಮ ಶಿಕ್ಷಕರ ಪಾದಗಳನ್ನು ಮುಟ್ಟಿ ಗೌರವ ಸಲ್ಲಿಸಿದರು. ಅವರು ಹಳ್ಳಿಯ ಮಣ್ಣಿಗೆ ನಮಸ್ಕರಿಸಿ ಸಾಮಾನ್ಯ ಜನರಿಗೆ ಧನ್ಯವಾದ ಅರ್ಪಿಸಿದರು. ಇಡೀ ದೇಶವು ಆ ಭಾವನಾತ್ಮಕ ದೃಶ್ಯವನ್ನು ಕಂಡಿತು. ಅವರ ನಡವಳಿಕೆಯು ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಭಾರತೀಯನು ಹೆಮ್ಮೆಪಡುವ ಭಾರತೀಯ ಮೌಲ್ಯಗಳ ಚಿತ್ರಣವನ್ನು ಜಗತ್ತಿಗೆ ಪ್ರಸ್ತುತಪಡಿಸಿತು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಶತಮಾನಗಳ ಕಾಲದ ಗುಲಾಮಗಿರಿಯಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ದೇಶವು ಆರ್ಥಿಕವಾಗಿ ಮತ್ತು ಸಾಮಾಜಿಕವಾಗಿ ಬಹಳಷ್ಟು ಕಳೆದುಕೊಂಡಿತು. ನಮ್ಮ ಪೂರ್ವಜರು ಶತಮಾನಗಳ ಕಾಲ ಹೋರಾಡಿದರು. ಮಹಾತ್ಮ ಗಾಂಧಿ, ಬಾಬಾಸಾಹೇಬ್ ಅಂಬೇಡ್ಕರ್, ಜ್ಯೋತಿಬಾ ಫುಲೆ, ಸಾವಿತ್ರಿಬಾಯಿ ಫುಲೆ - ಬಡವರು ಮತ್ತು ಅತ್ಯಂತ ನಿರ್ಲಕ್ಷಿತರು ಸಹ ಶಿಖರವನ್ನು ತಲುಪಬಹುದಾದ ನವ ಭಾರತ ಕಟ್ಟುವ ಕನಸು ಕಂಡ ಅನೇಕ ಮಹಾನ್ ವ್ಯಕ್ತಿಗಳಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರಂತಹ ವ್ಯಕ್ತಿಗಳು ತಮ್ಮ ಶ್ರಮ ಮತ್ತು ಸಾಮರ್ಥ್ಯದ ಮೂಲಕ ತಮ್ಮ ಜೀವನವನ್ನು ಬದಲಾಯಿಸಿಕೊಂಡಿದ್ದು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ, ಶತಮಾನಗಳಷ್ಟು ಹಳೆಯದಾದ ಆ ಕನಸು ಮತ್ತು ದೃಷ್ಟಿಕೋನವನ್ನು ನನಸಾಗಿಸುವಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಈ ದಿಕ್ಕಿನಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿವೆ. ಭವಿಷ್ಯದಲ್ಲಿ, ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರಂತಹ ಅನೇಕ ಯುವಕರು ನಮಗೆ ಬೇಕಾಗಿದ್ದಾರೆ, ಅವರು ತೊಂದರೆಗಳಿಂದ ಸೋಲುವುದಿಲ್ಲ, ಕಷ್ಟಗಳ ಮುಂದೆ ಹತಾಶರಾಗುವುದಿಲ್ಲ, ಆದರೆ ಕಠಿಣ ಪರಿಶ್ರಮದ ಮೂಲಕ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಗುರಿಯನ್ನು ಸುಲಭಗೊಳಿಸುವ ಧೈರ್ಯ ಹೊಂದಿರುತ್ತಾರೆ. ಈ ಬದಲಾವಣೆಯು ಬಲಿಷ್ಠ ಭಾರತ ನಿರ್ಮಿಸುವ ಸಂಕಲ್ಪವನ್ನು ಪೂರೈಸುತ್ತದೆ. ಇಲ್ಲಿಂದ ಸ್ವಾವಲಂಬಿ ಮತ್ತು ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಭಾರತಕ್ಕೆ ದಾರಿ ಹೊರಹೊಮ್ಮುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಅಂತಹ ಯುವ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲು, ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆ ಸ್ಫೂರ್ತಿಯ ಪ್ರಮುಖ ಸೆಲೆಯಾಗಬಹುದು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ತಮ್ಮ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರು ಮೊರಾರ್ಜಿ ದೇಸಾಯಿ ಅವರೊಂದಿಗಿನ ತಮ್ಮ ಒಡನಾಟ, ಅನುಭವಗಳನ್ನು ಸುವಿಸ್ತಾರವಾಗಿ ವಿವರಿಸಿದ್ದಾರೆ. ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುವ ಅವರೊಳಗಿನ ಮನೋಭಾವ, ಮೊರಾರ್ಜಿ ಭಾಯಿ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡುವ ಮೂಲಕ ಅವರು ಪಡೆದ ಕಲಿಕೆ ಮತ್ತು ಮಾರ್ಗ - ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರು ರಾಜಕೀಯ ಮತ್ತು ಸಮಾಜ ಸೇವೆಯನ್ನು ತಮ್ಮ ಮಾರ್ಗವನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು. ಅವರು ತಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯಗಳಿಗೆ ಸಮರ್ಪಿತರಾಗಿದ್ದರು. ಅವರು ಸೇವೆಯನ್ನು ತಮ್ಮ ಗುರಿಯಾಗಿಸಿಕೊಂಡರು. ಸಂಸತ್ತಿನಲ್ಲಿ ಅವರ ಅವಧಿ ಇದಕ್ಕೆ ಸಾಕ್ಷಿಯಾಗಿದೆ. ರಾಜ್ಯಪಾಲರಾಗಿಯೂ ಅವರು ಒಂದು ಉದಾಹರಣೆ ನೀಡಿದರು. ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾಗಿಯೂ ನಾವು ಅವರ ಅದೇ ಸಮರ್ಪಣೆಯನ್ನು ಕಂಡಿದ್ದೇವೆ. ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಗಳ ಅತ್ಯುನ್ನತ ಹುದ್ದೆಯಿಂದ ನಿವೃತ್ತರಾದ ನಂತರವೂ ಅವರು ವಿಶ್ರಾಂತಿ ಪಡೆಯಲಿಲ್ಲ. ಅವರು ಇನ್ನೂ ಒಂದು ರಾಷ್ಟ್ರ, ಒಂದು ಚುನಾವಣೆಯಂತಹ ಪ್ರಮುಖ ವಿಷಯಗಳ ಮೇಲೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅವರು ರಾಷ್ಟ್ರವನ್ನು ಜಾಗೃತಗೊಳಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇದು ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವದಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಅಧ್ಯಾಯವನ್ನು ಆರಂಭಿಸಬಹುದಾದ ವಿಷಯವಾಗಿದೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಸಮರ್ಪಣೆ ಮತ್ತು ಸೇವಾ ಮನೋಭಾವದಿಂದ ದೇಶದ ಜನರು ಬಹಳಷ್ಟು ಕಲಿಯಬಹುದು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾನು ನಂಬುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಸಾಮಾಜಿಕ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಸಕ್ರಿಯರಾಗಿರುವುದು, ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಗಾಗಿ ಸಮಯವನ್ನು ಕಂಡುಕೊಳ್ಳುವುದು ತುಂಬಾ ಕಷ್ಟ. ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಈ ಕೆಲಸವನ್ನು ನಮ್ಮೆಲ್ಲರಿಗಾಗಿ ಮಾಡಿದ್ದಾರೆ, ಏಕೆಂದರೆ ಅವರ ಜೀವನವು ಬಡ ಮತ್ತು ಸೌಲಭ್ಯವಂಚಿತ ಹಿನ್ನೆಲೆಯ ಜನರು ತಮ್ಮ ಸ್ವಂತ ಜೀವನದ ಪ್ರತಿಬಿಂಬಗಳನ್ನು ನೋಡಬಹುದಾದ ಬಹಳಷ್ಟು ವಿಷಯಗಳನ್ನು ಒಳಗೊಂಡಿದೆ. ಕಠಿಣ ಸಂದರ್ಭಗಳಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ, ಸಾಮಾನ್ಯ ಕುಟುಂಬವು ಜೀವನದ ಶುದ್ಧತೆ ಮತ್ತು ಪ್ರಾಮಾಣಿಕತೆಯೊಂದಿಗೆ ಹೇಗೆ ರಾಜಿ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವುದಿಲ್ಲ. ಆ ಆದರ್ಶಗಳು ನಂತರ ನಮ್ಮ ಜೀವನದ ಅಡಿಪಾಯವಾಗುತ್ತವೆ. ಕಠಿಣ ಸಮಯದ ಮೌಲ್ಯಗಳು ಜೀವನದುದ್ದಕ್ಕೂ ನಮಗೆ ಹೇಗೆ ಬೆಳಕನ್ನು ನೀಡುತ್ತವೆ. ಈ ಪರಿಶುದ್ಧತೆಯು ನಮಗೆ ಹೇಗೆ ದೇಶ ಸೇವೆಗೆ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ. ವಿವಿಧ ಸ್ಥಾನಗಳಲ್ಲಿ ಜವಾಬ್ದಾರಿಗಳನ್ನು ಪೂರೈಸುವಾಗ, ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಸಮಾಜಕ್ಕೆ ಈ ಸ್ಫೂರ್ತಿಯನ್ನು ನೀಡಿದ್ದಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಯು ಅವರ ಜೀವನದ ನೆನಪುಗಳನ್ನು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ, ನಮ್ಮ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವದ ಪ್ರಮುಖ ನೆನಪುಗಳನ್ನು ಸಹ ಸಂರಕ್ಷಿಸುತ್ತದೆ ಎಂಬ ವಿಶ್ವಾಸ ನನಗಿದೆ. ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ, ಜೀವನಚರಿತ್ರೆ ಹೊರತಂದ ಅವರಿಗೆ ನನ್ನ ಶುಭಾಶಯಗಳನ್ನು ಕೋರುತ್ತೇನೆ. ನಾನು ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಯುವ ಪೀಳಿಗೆಯನ್ನು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ - ಇದು ರೀಲ್‌ಗಳ ಯುಗ, ಸಾಮಾಜಿಕ ಜಾಲತಾಣಗಳ ಪ್ರಭಾವಿಗಳು ನಿಮ್ಮನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಮತ್ತು ಅಲ್ಲಿಗೆ ಎಳೆಯುತ್ತಾರೆ. ಶಾರ್ಟ್‌ಕಟ್‌ಗಳ ಈ ಯುಗದಲ್ಲಿ ಒಂದು ವಿಷಯವನ್ನು ನೆನಪಿಡಿ. ರೈಲ್ವೆ ನಿಲ್ದಾಣಗಳಲ್ಲಿ ಇದನ್ನು ಬರೆಯಲಾಗಿದೆ - ಕೆಲವು ಜನರು ಸೇತುವೆ ಬಳಸುವ ಬದಲು ಹಳಿಗಳ ಮೇಲೆ ಹಾರುತ್ತಾರೆ. ಅಲ್ಲಿ ಬರೆಯಲಾಗಿದೆ: ಶಾರ್ಟ್‌ಕಟ್ ನಿಮ್ಮ ದೂರವನ್ನು ಕಡಿಮೆ ಮಾಡುತ್ತದೆ. ನೀವು ಶಾರ್ಟ್‌ಕಟ್‌ಗಳ ಮೂಲಕ ಹೋಗಲು ಬಯಸಿದ್ದರೂ ಸಹ, ನಾನು ಯುವಕರನ್ನು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ - ನೀವೇ ಮೆಚ್ಚುವವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಗಳನ್ನು ಓದಿ. ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಗಳು ಇತಿಹಾಸದ ಘಟನೆಗಳನ್ನು ವಿಭಿನ್ನ ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವ ಅವಕಾಶವನ್ನು ನಿಮಗೆ ನೀಡುತ್ತವೆ. ಅವು ಇತಿಹಾಸಕ್ಕೆ ಹತ್ತಿರದಲ್ಲಿವೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರ ಪ್ರಯತ್ನವು ಭವಿಷ್ಯದ ಪೀಳಿಗೆಗೆ, ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಯುವ ಜನರಿಗೆ ಪ್ರಯೋಜನವಾಗಬೇಕೆಂದು ನಾನು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು. ತುಂಬು ಧನ್ಯವಾದಗಳು.