Our focus is all-round development of India & North east cannot stay behind in this journey: PM Modi
We want to ensure that youth here gets the opportunities to fulfil their dreams: PM
We would set up Central Institute of Technology for better technical education, Kokrajhar to get deemed university status: PM
Assam gave a PM for 10 years, Congress ruled here for 15 years, still the state faces problems: PM
We want to Act East. Be it rail, roads or waterways, we want to connect our North east with entire India: PM
Our aim is housing for all by 2022 & 24/7 electricity and water: PM Modi during rally in Assam
I assure our Govt would leave no stone unturned in developing the North east region: PM Modi

मंच पर विराजमान बीटीसी के चीफ़ श्रीमान अग्रमा मोहिलरी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और जनप्रिय नेता श्रीमान सर्वानंद जी सोनमल, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और डोनर के मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह जी, बीटीसी के डिप्टी चीफ़ श्रीमान खम्पा जी, श्रीमान हेमंत विश्व शर्मा जी, सांसद श्रीमान विश्वजीत और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों एवं बहनों।

मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा मांगता हूँ क्योंकि मुझे आने में विलंब हुआ। मैं सिक्किम में था मुझे निकलने में देर हुई और आपको काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मुझे इतनी देरी नहीं हुई है जिस कारण आपको विकास के लिए इंतज़ार करना पड़े, आपको अपने हक़ के लिए लड़ाई करनी पड़े। मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर यहाँ के लोगों की भलाई करने आया हूँ, आपके शक्ति, सामर्थ्य, सपनों, यहाँ के युवाओं को अवसर मिले और वे विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करें।

मैं आपके बीच में एक ऐसे समय आया हूँ जब यहाँ पर एकता और सद्भावना का माहौल है। यहाँ के राजनीतिक गुट भी अपने वाद-विवादों को पीछे रखते हुए यहाँ के लोगों की भलाई और उनके विकास के लिए आगे आए हैं। मैं इसके लिए यहाँ के नेतृत्व को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और जो लोग जुड़ रहे हैं, उनका मैं तहे दिल से स्वागत करता हूँ। अग्रमा जी, खम्पा जी मेरे घर पर आये थे, दिल खोलकर बातें हुई थी। उनसे मिलकर मुझे यहाँ की समस्याओं को समझने का अवसर मिला तभी उन्होंने कहा कि मोदी जी, जो देना है, वो दिल खोलकर दे दीजिए क्योंकि बातें भी तो दिल खोलकर हुई थीं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि दिल में आप समा गए हैं।

12-15 साल से जो वादे आपको किये गए, उन वादों का भी निपटारा नहीं हुआ। मैं यह तो मान सकता हूँ कि इसमें कुछ समय लग सकता है लेकिन आप हर बार वादे करें और फ़िर वादों को भुला दें, नए-नए वादें करें इस तरह के वादाखिलाफी से गुस्सा आता है, ये आपकी नाराजगी का प्रदर्शन है।

मैं आपको इतना ही कहने आया हूँ कि जो बात मैं कर रहा हूँ, उसे पूरा करने के लिए मैं जी-जान से जुड़ जाता हूँ, खप जाता हूँ। मैं हैरान हूँ कि एक पार्टी जिसने यहाँ 15 साल राज किया, ये असम प्रदेश जिसने 10 साल के लिए देश को प्रधानमंत्री दिया, 15 साल कांग्रेस ने लगातार राज किया; देखा जाए तो 60 साल तक वो ही सरकार चलाते रहे, मैं तो यह सोच रहा था कि असम में तो अब कोई समस्या हो ही नहीं सकती क्योंकि 10 साल यहाँ से प्रधानमंत्री रहे हैं और 15 साल से एक मुख्यमंत्री यहाँ सरकार चला रहे हैं। जिन्हें अपने काम का हिसाब देना चाहिए, वे सवाल पूछ रहे हैं तो फिर उन्होंने किया क्या? ये सब विफलताओं की दस्तक है। उन्हें यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि उनका अपना प्रधानमंत्री था, असम से मनमोहन सिंह जी को भेजा था लेकिन अभी समस्याओं की लंबी लिस्ट है आपकी।

भाईयों-बहनों, वे 15 साल में कुछ नहीं कर पाए और मुझसे अपेक्षा करते हैं कि मैं 15 दिन में सबकुछ कर दूँ। मुझे बताईये कि क्या ये मेरे साथ न्याय है? ये आपलोगों को गुमराह करने के लिए है लेकिन मेरा आप पर भरोसा है कि आप गुमराह नहीं होंगे। आपने उनके 15 साल देखे हैं और आपने हमारे 15 महीने भी देखे हैं। मेरे सामने कुछ बातें रखी गई थीं और आज मैं बड़े संतोष के साथ कहना चाहता हूँ कि असम के कार्बी मिकिर जनजाति को मैदानी इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में और असम के बोडो काछारी जनजाति को ट्राइब आंगलोंग और एनसी हिल ऑटोनोमस काउंसिल के इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में घोषित किये जाने का मुद्दा काफ़ी समय से लंबित है। अब दोनों ही मसलों की रजिस्ट्रार सेंट्रल ऑफ़ इंडिया और अनुसूचित जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग द्वारा सिफ़ारिश कर दी गई है। आने वाले कुछ समय में ये मामला कैबिनेट में अप्रूव हो जाएगा और उसके बाद संसद में इसे पारित किया जाएगा। वर्षों से आपकी इस समस्या का समाधान निकाला जा रहा है।

आपके नेता ने जब मुझे इस समस्या के बारे में बताया तो मैंने कहा कि मैं पहले इसका समाधान निकालूँगा, फ़िर आऊंगा। इस क्षेत्र के छात्रों को उच्च गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए, औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कोकराझार को एक वर्ष की अवधि में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जाएगा। इस कार्य से यूनिवर्सिटी को और अधिक अकादमिक तथा प्रशासनिक अधिकार प्राप्त होंगे।

मेरे सामने एक मसला आया था, एयरपोर्ट का बहुत पहले एक एयरपोर्ट सेना के साथ मिलकर काम कर रहा था, फ़िर वो बंद हो गया। अब राज्य सरकार ज़मीन नहीं दे रही है मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जैसे ही ज़मीन का मसला पूरा हो जाएगा, रूपसी एयरपोर्ट को भारतीय वायुसेना और आम जनता के लिए संयुक्त रूप से विकसित किया जाएगा।

कंचनजंघा एक्सप्रेस ट्रेन के रूट का बराक वेली में सिलचर तक विस्तार किया जाएगा और मैं आने वाले दिनों में बहुत जल्द उस ट्रेन को आरंभ करने जा रहा हूँ। मुझे एक और कठिनाई बताई गई कि हमारे लिए बजट में इतना आवंटन होता है लेकिन पता नहीं कहाँ जाता है। जनता की पाई-पाई जनता के ही पास जानी चाहिए; जो अब तक लूटा गया है और अब लूटने का अवसर नहीं मिल रहा है इसलिए ये लोग हमसे परेशान हैं। दिल्ली आजकल हिसाब मांगता है।

दिल्ली में अटल जी के समय में नार्थ-ईस्ट के विकास के लिए एक विशेष मंत्रालय - डोनर बना था। अटल जी की सरकार के जाने के बाद इनकी सरकार में क्या-क्या होता है, ये आप सभी को मालूम ही है। हमने डोनर मंत्रालय को एक नया काम दिया है जिससे यहाँ के कुछ नेता लोग काफ़ी परेशान हैं। पहले यहाँ के लोगों को दिल्ली जाना पड़ता था, मिनिस्ट्री खोजनी पड़ती थी, सामान्य लोग वहां जा नहीं पाते थे, शिकायत पहुंचाई नहीं जा सकती थी, क्या चल रहा है, सच-झूठ का पता ही नहीं चलता था। रुपये तो आते थे लेकिन ज़मीन पर कोई काम दिखाई नहीं देता था।

राजीव गाँधी सही कहते थे कि दिल्ली से एक रुपया निकलता है और गाँव में जाते-जाते 15 पैसे हो जाता है। इसलिए हमने तय किया कि डोनर मिनिस्ट्री, उसके अधिकारी महीने में एक बार नार्थ-ईस्ट के राज्यों में जाएंगे, पूरा सचिवालय दिल्ली से गुवाहाटी जाएगा। दिनभर वहां बैठेंगे, सरकार ने जो पैसे दिये, उसका हिसाब मांगेंगे, रुपये कहाँ जा रहे हैं, उसकी पूछताछ होगी और यह काम डॉ. जितेन्द्र सिंह की टीम बखूबी कर रही है। इसके कारण यहाँ लोगों को परेशानी हो रही है कि मोदी हिसाब मांग रहे हैं और आजकल फैशन हो गया है, अपने काम का हिसाब नहीं देना। जब हिसाब मांगते हैं तो कोई और ही आरोप लगाना शुरू कर देते हैं इसलिए नार्थ-ईस्ट की सभी सरकारों को पैसे का हिसाब देना पड़ेगा क्योंकि ये जनता का पैसा है और ये जनता के काम आना चाहिए और इसलिए मैं इन लोगों को बुरा लगता हूँ।

मैं अपना समय इस लिए बर्बाद नहीं करता कि मैं अच्छा लगूं यां बुरा लगूं; मैं अपना समय खपाता हूँ ताकि मेरा देश अच्छा बने। हमारे देश का भविष्य बदलने के लिए मेरा तीन सूत्रीय कार्यक्रम है – विकास, विकास और सिर्फ़ विकास। सारी समस्याओं का समाधान विकास में ही है। पिछले दिनों आपने देखा होगा कि जब दिल्ली में पुलिस की भर्ती हुई तो मैंने आग्रह रखा कि नार्थ-ईस्ट राज्यों के नौजवानों को दिल्ली में पुलिस में भर्ती करना चाहिए और आज बहुत बड़ी संख्या में यहाँ के नौजवानों को दिल्ली में रक्षा के लिए ले जाया गया। एक बार जो बात कही, उसे लागू करने के लिए जी-जान से लगे रहते हैं, पूरी कोशिश करते हैं।

हमें अगर विकास करना है तो इस इलाके की सबसे पहली ज़रूरत है – इंफ्रास्ट्रक्चर, चाहे सड़क हो, रेल हो, या जलमार्ग हो और इसलिए हमारी सरकार ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी बनाई है। इस पॉलिसी के माध्यम से नार्थ-ईस्ट राज्यों को भारत की विकासधारा में जोड़ना है, रास्तों का नेटवर्क बनाना है। पिछले बजट में आपने देखा होगा कि जैसा आवंटन हुआ था, वैसा पहले कभी नहीं किया गया होगा, उतने रुपये हम नार्थ-ईस्ट में सड़क और रेल में लगा रहे हैं।

देश की आज़ादी के इतने साल बीत गए और मैं सोच रहा था कि अब तक तो देश के सभी गांवों में बिजली पहुँच गई होगी लेकिन मुझे हिसाब मिला कि अभी भी 18,000 गाँव ऐसे हैं जहाँ बिजली का खंभा भी नहीं है। हमने बीड़ा उठाया, 15 अगस्त को लाल किले से हमने घोषणा की कि मेरी सरकार जी-जान से काम करेगी और 1,000 दिन में 18,000 गाँव में बिजली पहुंचाऊंगा। आप अपने मोबाइल पर इसका पूरा विवरण देख सकते हैं। इसके लिए एक अलग वेबसाइट बनाई है कि कहाँ-कहाँ बिजली पहुंची और दिन-प्रतिदिन का हिसाब रखा जाता है और हर दिन किसी-न-किसी गाँव में बिजली पहुँच रही है। गाँव में बिजली पहुँचने के बाद लोगों को अहसास होता होगा कि आज़ादी किसे कहते हैं। मैं तो मीडिया के मित्रों को भी कहता हूँ कि बिजली पहुँचने के बाद गाँव में जो लोगों का उत्साह है, उसे लोगों को दिखाएं। इससे देश के साथ-साथ काम करने वालों का भी हौसला बुलंद होगा।

बिजली पहुँचने से शिक्षा और जीवन-व्यवस्था में सुधार होगा और हमारा सपना है 2022 में भारत की आज़ादी के 75 साल होने पर सब जगह लोगों को 24 घंटे बिजली मिले जो आज नहीं मिल रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि 2022 तक हम यह काम करके रहेंगे।

हमारा एक और सपना यह है कि देश के गरीब परिवारों को अपना घर मिले। हमने ठान लिया है कि 2022 में देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के पास भी ख़ुद का रहने का घर हो और घर भी ऐसा जिसमें बिजली हो, पानी आता हो, शौचालय भी हो और बच्चों के लिए नजदीक में स्कूल भी हो। जब इतने मकान बनेंगे, रास्ते बनेंगे, रेल का काम होगा तो बहुत सारे लोगों को रोजगार भी मिलेगा, काम के अवसर बढ़ेंगे।

हमने तय किया था कि हम गरीब से गरीब व्यक्ति का बैंक खाता खोलेंगे; प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की। लोगों को लगता था कि जो काम 70 साल में नहीं हुआ, वो मोदी जी कैसे करेंगे। आज बताते हुए मुझे ख़ुशी हो रही है कि जन-धन योजना के अंतर्गत हमने 20 करोड़ लोगों के खाते खोल दिए हैं। हमने उन्हें अर्थव्यवस्था के धारा में जोड़ा, बैंक तक उनका रास्ता खोला। मैंने कहा था कि पैसे नहीं होंगे तो भी खाते खुलेंगे लेकिन मुझे ख़ुशी है कि गरीबों ने भी सोच लिया कि मुफ़्त में नहीं करना है, बैंक में कुछ तो जमा करेंगे और लोगों ने करीब-करीब 30 हज़ार करोड़ रुपये जमा किये। ये ताकत है देश के आम जन की और इस ताकत को लेकर हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरा एक ही इरादा है कि हिन्दुस्तान में और जगहों पर जितना विकास हुआ है, यहाँ भी उतना ही विकास होना चाहिए। ये काम मुझे करना है और इसलिए मैं आपके पास आशीर्वाद लेने आया हूँ। आज लाखों की तादाद में मैं यह जनसैलाब देख रहा हूँ। मैंने असम में बहुत दौरे किये हैं। लोकसभा के चुनाव में भी आपने भरपूर आशीर्वाद दिया है लेकिन ऐसा नज़ारा मैंने पहले कभी नहीं देखा, ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा। आपके इसी आशीर्वाद से मुझे ताकत मिलती है, आपके लिए दिन-रात दौड़ने की मुझे प्रेरणा मिलती है। मुझे ख़ुशी है कि मुझे नए साथियों के साथ काम करने का मौका मिला है और मैं विश्वास दिलाता हूँ कि यहाँ की जितनी रुकी समस्याएं हैं, उनके समाधान के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। मैं आप सभी का आभारी हूँ, बहुत-बहुत धन्यवाद!       

            

Explore More
শ্ৰী ৰাম জনমভূমি মন্দিৰৰ ধ্বজাৰোহণ উৎসৱত প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ সম্বোধনৰ অসমীয়া অনুবাদ

Popular Speeches

শ্ৰী ৰাম জনমভূমি মন্দিৰৰ ধ্বজাৰোহণ উৎসৱত প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ সম্বোধনৰ অসমীয়া অনুবাদ
Samsung to manufacture AI data center HVAC products in India, expanding to Asia-Pacific

Media Coverage

Samsung to manufacture AI data center HVAC products in India, expanding to Asia-Pacific
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
প্ৰাক্তন ৰাষ্ট্ৰপতি শ্ৰী ৰামনাথ কোবিন্দৰ আত্মজীৱনী উন্মোচনী অনুষ্ঠানত প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ বক্তব্যৰ অসমীয়া অনুবাদ
August 12, 2026
আজি আমি শ্ৰী ৰামনাথ কোবিন্দজীৰ আত্মজীৱনী উন্মোচন কৰাৰ সুযোগ লাভ কৰিছো, এই কাৰ্যসূচীৰ অংশ হ’বলৈ পাই মই সুখীঃ প্ৰধানমন্ত্ৰী
তেওঁৰ যাত্ৰাই ৰাজহুৱা সেৱা আৰু ৰাষ্ট্ৰৰ প্ৰগতিৰ বাবে উৎসর্গীকৃত জীৱনক প্ৰতিফলিত কৰেঃ প্ৰধানমন্ত্ৰী
কোবিন্দজীৰ সৈতে মোৰ দীৰ্ঘদিনীয়া সম্পৰ্ক, মোৰ প্ৰতি তেওঁৰ বিশেষ মৰম আৰু ভালপোৱা মোৰ আটাইতকৈ ডাঙৰ সম্পদঃ প্ৰধানমন্ত্ৰী
মহাত্মা গান্ধী, বাবাচাহেব আম্বেদকাৰ, জ্যোতিবা ফুলে আৰু সাবিত্ৰীবাই ফুলেই এখন নতুন ভাৰত গঢ়াৰ সপোন দেখিছিল, য’ত আটাইতকৈ দৰিদ্ৰ আৰু বঞ্চিত লোকসকলে শীৰ্ষস্থান লাভ কৰাৰ সুযোগ পাব পাৰেঃ প্ৰধানমন্ত্ৰী
কোবিন্দজীৰ দৰে ব্যক্তিসকলে কেৱল নিজৰ অধ্যৱসায় আৰু সক্ষমতাৰ জৰিয়তে নিজৰ জীৱন সলনি কৰাই নহয়, বৰং তেওঁলোকে শতিকা পুৰণি সপোন আৰু দৃষ্টিভংগী বাস্তৱায়িত কৰাত এক গুৰুত্বপূৰ্ণ ভূমিকা পালন কৰেঃ প্ৰধানমন্ত্ৰী
ৰাষ্ট্ৰপতি পদৰ পৰা অৱসৰ লোৱাৰ পাছতো তেওঁ ‘এখন ৰাষ্ট্ৰ, এটা নিৰ্বাচন’ বিষয়ত কাম কৰি আছে, ইয়াৰ সংকল্পই গণতন্ত্ৰত এক নতুন অধ্যায়ৰ সূচনা কৰিব পাৰেঃ প্ৰধানমন্ত্ৰী

আমাৰ প্ৰাক্তন ৰাষ্ট্ৰপতি শ্ৰী ৰামনাথ কোবিন্দ ডাঙৰীয়া, লোকসভাৰ মাননীয় অধ্যক্ষ ওম বিৰলা ডাঙৰীয়া, শ্ৰীমতী সবিতা কোবিন্দ দেৱী আৰু সভাগৃহত উপস্থিত সকলো জ্যেষ্ঠ প্ৰতিনিধি— সকলোৰে নাম হয়তো মই পৃথকে ল'ব পৰা নাই, কিন্তু এই সমাৱেশটো এটি পৰিয়ালৰ মিলনৰ দৰে অনুভৱ হৈছে আৰু ই মোক অপৰিসীম আনন্দ প্ৰদান কৰিছে।

ভাই-ভনীসকল,

আজি এক ভব্য অনুষ্ঠানত শ্ৰী ৰামনাথ কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ আত্মজীৱনী উন্মোচন কৰা হৈছে। মই অত্যন্ত আনন্দিত যে এই অনুষ্ঠানৰ অংশ হ’বলৈ পোৱাৰ সৌভাগ্য মোৰো হৈছে। কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ সৈতে মোৰ দীৰ্ঘদিনীয়া সম্পৰ্ক আছে; তেওঁক অতি ওচৰৰ পৰা জনাৰ, ৰাষ্ট্ৰপতি হিচাপে তেওঁৰ মাৰ্গদৰ্শন লাভ কৰাৰ আৰু এইবোৰৰ সমান্তৰালভাৱে মোৰ প্ৰতি তেওঁৰ যি বিশেষ স্নেহ আৰু উষ্ম আদৰ আছিল, ই মোৰ জীৱনৰ এক অমূল্য সম্পদ। তেওঁৰ জীৱনক মই যিদৰে উপলব্ধি কৰিছোঁ আৰু তেওঁৰ সামৰ্থ্যক যিদৰে প্ৰত্যক্ষ কৰিছোঁ, তাৰ পৰা মই সম্পূৰ্ণ বিশ্বাসেৰে ক'ব পাৰোঁ যে শ্ৰী ৰামনাথ কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ এই আত্মজীৱনী ভাৰতীয় গণতন্ত্ৰ আৰু ভাৰতীয় সমাজৰ বাবে এক অক্ষয় ঐতিহ্য হৈ পৰিব। তেওঁৰ জীৱন যাত্ৰা, সমাজ আৰু ৰাষ্ট্ৰলৈ তেওঁৰ অৱদান, এই বিষয়ে মই বহুত কথা ক'ব পাৰোঁ, কিন্তু গ্ৰন্থ উন্মোচনী অনুষ্ঠানত কেৱল এক ‘আভাস’হে দিব পাৰি। গ্ৰন্থখনৰ প্ৰকৃত সুফল লাভ কৰিবলৈ আপোনালোকে সমগ্ৰ কিতাপখন মনোযোগেৰে পঢ়া উচিত।

বন্ধুসকল,

কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ জীৱন যাত্ৰাৰ কথা তেওঁৰ নিজৰ মুখেৰে জনা, তেওঁৰ লিখনী আৰু অভিজ্ঞতাবোৰ পঢ়া আদিবোৰে নতুন প্ৰজন্মক বহু কথা শিকাৰ সুযোগ দিব। মই শ্ৰী ৰামনাথ কোবিন্দ ডাঙৰীয়াক এই আত্মজীৱনীখনৰ বাবে আন্তৰিক অভিনন্দন জনাইছোঁ।

বন্ধুসকল,

কোবিন্দ ডাঙৰীয়াই তেওঁৰ পুথিখনৰ অতি যথোপযুক্ত নামাকৰণ কৰিছে— “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” (ভাৰতীয় গণৰাজ্যৰ জয়যাত্ৰা: মোৰ জীৱন, মোৰ সংগ্ৰাম)। ইয়াৰ অৰ্থ হ’ল, জীৱন আৰু ইয়াৰ সংগ্ৰামবোৰ ব্যক্তিগত হ’ব পাৰে, কিন্তু সেই সংগ্ৰামৰ পৰা অহা সাফল্যসমূহ ভাৰত গণৰাজ্যৰ, ভাৰতীয় গণতন্ত্ৰৰ।

বন্ধুসকল,

আমি প্ৰায়ে দেখা পাওঁ যে মানুহৰ স্বভাৱ এনেকুৱা, সফলতাত নিজক কৃতিত্ব দিয়ে আৰু বিপদ-সমস্যাৰ সময়ত সমাজক দোষাৰোপ কৰে। কিন্তু হৃদয় যেতিয়া উদাৰ হয়, যেতিয়া ভাৰতীয় মূল্যবোধ অন্তৰত থাকে, তেতিয়া মানুহে সমাজৰ ভুল-ত্ৰুটি বিচাৰি সময় নষ্ট নকৰে। তেওঁ ধনাত্মক দিশটোতহে মনোনিবেশ কৰে আৰু নিজৰ সফলতাত সমাজকো সমানেই অংশীদাৰ বুলি গণ্য কৰে। কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ আত্মজীৱনী আৰু ইয়াৰ পাতনিও ইয়াৰে উৎকৃষ্ট উদাহৰণ। তেওঁৰ জীৱনলৈ চাওক, কানপুৰ দেহাতৰ অতি সাধাৰণ পৰিয়াল এটাত তেওঁ জন্মগ্ৰহণ কৰিছিল। গ্ৰীষ্মকালৰ এদিনাখন কেনেকৈ তেওঁলোকৰ ঘৰত জুই লাগিছিল, সেই কথা তেওঁ কিতাপখনত বৰ্ণনা কৰিছে। নিজৰ নিৰাপত্তাৰ কথা পাহৰি তেওঁৰ মাকে ঘৰুৱা বস্তুবোৰ বচাবলৈ চেষ্টা কৰিছিল। এক সাধাৰণ পৰিয়ালৰ মাতৃৰ বাবেপ্ৰতিটো বস্তুৱেই সন্তানক ডাঙৰ-দীঘল কৰাৰ সম্বল। সেই প্ৰচেষ্টাতে মাক জুইৰ মাজত আবদ্ধ হৈ পৰে আৰু তেওঁৰ কৰুণ মৃত্যু হয়। ভাবি চাওক, ইমান কম বয়সতে এইদৰে মাকক হেৰুওৱাটো কিমান কষ্টকৰ আৰু যন্ত্ৰণাদায়ক আছিল। মই ভাগ্যৱান আছিলোঁ যে মোৰ মা ১০০ বছৰতকৈও অধিক কাল জীয়াই থাকি মোক আশীৰ্বাদ দিছিল। তথাপিও, আজিও মই তেওঁৰ অভাৱ অনুভৱ কৰোঁ।

বন্ধুসকল,

এই হৃদয়বিদাৰক ঘটনাই যিকোনো মানুহকে ভাঙি পেলাব পাৰিলেহেঁতেন, কিন্তু ই কোবিন্দ ডাঙৰীয়াক আৰু অধিক শক্তিশালী কৰি তুলিলে। চুবুৰীয়া এগৰাকী মাকে তেওঁক প্ৰতিপালন কৰাত সহায় কৰিছিল। ইয়াৰ পৰাই তেওঁ সামাজিক ঐক্য আৰু সমন্বয়ৰ শক্তি বুজি পাইছিল। এই ঘটনাৰ পিছত তেওঁৰ পিতৃৰ ভূমিকা আৰু অধিক গুৰুত্বপূৰ্ণ হৈ পৰিল। পিতৃয়ে যিদৰে পৰিয়ালটো চম্ভালিছিল আৰু সন্তানক সংস্কাৰ দিছিল, সেয়েহে কোবিন্দ ডাঙৰীয়াই তেওঁৰ পিতৃক নিজৰ নায়ক বুলি গণ্য কৰে।

বন্ধুসকল,

শৈশৱৰ এই সমগ্ৰ সংগ্ৰামৰ মাজতে কোবিন্দ ডাঙৰীয়াই শিক্ষাকেই নিজক শক্তিশালী কৰাৰ পথ হিচাপে বাছি লৈছিল। তেওঁ কঠোৰ পৰিশ্ৰম কৰিছিল, সম্পদৰ অভাৱক কেতিয়াও নিজৰ দুৰ্বলতা হ’বলৈ দিয়া নাছিল। আৰু তেওঁ এনে এক উচ্চতাত উপনীত হ’ল যিটো সেই সময়ত মানুহে কল্পনাই কৰিব পৰা নাছিল, তেওঁ ভাৰতৰ দৰে বিশাল দেশৰ ৰাষ্ট্ৰপতি হ’ল।

বন্ধুসকল,

এনে এক সৰ্বোচ্চ পদবীত অধিষ্ঠিত হোৱাৰ পিছতো কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ বিনম্ৰ ব্যক্তিত্ব আৰু সৰলতা অপৰিৱৰ্তিত হৈ ৰ’ল। মোৰ মনত আছে, প্ৰধানমন্ত্ৰী হিচাপে যেতিয়া মই তেওঁক ৰাষ্ট্ৰপতি ভৱনত সাক্ষাৎ কৰিবলৈ গৈছিলোঁ, তেওঁ শিষ্টাচাৰ বা প্ৰট'কলৰ ঊৰ্ধ্বত গৈ কাম কৰিছিল। প্ৰধানমন্ত্ৰীক বিদায় জনাবলৈ তেওঁ নিজে গাড়ীৰ দৰ্জাৰ কাষলৈকে আহিছিল। মই তেওঁক এনে নকৰিবলৈ অনুৰোধ জনাইছিলোঁ, কিন্তু তেওঁ শেষলৈকে নিজৰ সৌজন্য আৰু নম্ৰতা এৰা নাছিল। ৰাষ্ট্ৰপতি হোৱাৰ পিছতো যেতিয়া তেওঁ নিজৰ গাঁও 'পৰৌণখ'লৈ গৈছিল, তেওঁ নিজৰ শিক্ষকসকলৰ ভৰি চুই আশীৰ্বাদ লৈছিল। গাঁৱৰ মাটিক প্ৰণাম জনাই সাধাৰণ ৰাইজক ধন্যবাদ জনাইছিল। সমগ্ৰ দেশে সেই আৱেগিক দৃশ্য প্ৰত্যক্ষ কৰিছিল। তেওঁৰ আচৰণে বিশ্বৰ সন্মুখত ভাৰতীয় মূল্যবোধৰ এনে এক ছবি দাঙি ধৰিছিল যাৰ বাবে প্ৰতিজন ভাৰতীয়ই গৌৰৱ অনুভৱ কৰে।

বন্ধুসকল,

শ শ বছৰজোৰা দাসত্বৰ দিনবোৰত আমাৰ দেশে অৰ্থনৈতিক আৰু সামাজিকভাবে বহু বস্তু হেৰুৱালে। আমাৰ পূৰ্বপুৰুষসকলে শতিকা ধৰি সংগ্ৰাম কৰিছিল। মহাত্মা গান্ধী, বাবাচাহেব আম্বেদকাৰ, জ্যোতিবা ফুলে, সাবিত্ৰীবাই ফুলে—এনে বহু মহান ব্যক্তিয়ে এক নতুন ভাৰতৰ স্বপ্ন দেখিছিল, য’ত একেবাৰে দৰিদ্ৰ আৰু বঞ্চিতজনেও সৰ্বোচ্চ শিখৰত উপনীত হ’ব পাৰে। কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ দৰে ব্যক্তিত্বসকলে নিজৰ পৰিশ্ৰম আৰু যোগ্যতাৰে কেৱল নিজৰ জীৱন সলনি কৰাই নহয়, সেই শতিকাপুৰণি সপোন আৰু দৃষ্টিভংগীক বাস্তৱায়িত কৰাত গুৰুত্বপূৰ্ণ ভূমিকা পালন কৰিলে। এই দিশত আমাৰ প্ৰচেষ্টা নিৰন্তৰ অব্যাহত আছে। ভৱিষ্যতে আমাক কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ দৰে এনে বহু যুৱক-যুৱতীৰ প্ৰয়োজন, যিসকল বিপদে ভাঙি পেলাব নোৱাৰে, যিসকল সমস্যাৰ সন্মুখত হতাশ নহয়, বৰঞ্চ কঠোৰ পৰিশ্ৰমেৰে প্ৰতিটো লক্ষ্য সহজ কৰি তোলাৰ সাহস ৰাখে। এই পৰিৱৰ্তনে এক শক্তিশালী ভাৰত গঢ়াৰ সংকল্প পূৰণ কৰিব। ইয়াৰ পৰাই আত্মনিৰ্ভৰ আৰু উন্নত ভাৰতৰ পথ প্ৰশস্ত হ’ব।

বন্ধুসকল,

এনে যুৱ শক্তি গঢ়ি তোলাৰ বাবে কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ আত্মজীৱনী এক গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰেৰণাৰ উৎস হ’ব পাৰে।

বন্ধুসকল,

আত্মজীৱনীখনত কোবিন্দ ডাঙৰীয়াই মোৰাৰজী দেশাই ডাঙৰীয়াৰ সৈতে লাভ কৰা অভিজ্ঞতাৰ কথাও বিশদভাৱে বৰ্ণনা কৰিছে। তেওঁৰ অন্তৰত যি দেশসেৱাৰ ভাব আছিল, মোৰাৰজী ভাইৰ সৈতে কাম কৰি যি শিক্ষা আৰু পথ তেওঁ লাভ কৰিছিল— কোবিন্দ ডাঙৰীয়াই ৰাজনীতি আৰু সমাজসেৱাক নিজৰ সংকল্পৰ পথ কৰি লৈছিল। তেওঁ সদায় নিজৰ কৰ্তব্যৰ প্ৰতি উৎসৰ্গিত হৈ ৰ’ল। সেৱাকেই তেওঁ নিজৰ মূল লক্ষ্য কৰি লৈছিল। সংসদত তেওঁৰ কাৰ্যকাল ইয়াৰ জলন্ত প্ৰমাণ। ৰাজ্যপাল হিচাপেও তেওঁ এক অনন্য উদাহৰণ দাঙি ধৰিছিল। ৰাষ্ট্ৰপতি হিচাপেও আমি একেই সমৰ্পণ প্ৰত্যক্ষ কৰিছিলোঁ। ৰাষ্ট্ৰপতিৰ সৰ্বোচ্চ পদৰ পৰা অৱসৰ লোৱাৰ পিছতো তেওঁ বিশ্ৰাম লোৱা নাই। তেওঁ আজিও 'এক দেশ, এক নিৰ্বাচন'ৰ দৰে গুৰুত্বপূৰ্ণ বিষয়ত কাম কৰি আছে। তেওঁ সমগ্ৰ দেশবাসীক জাগ্ৰত কৰি তুলিছে। ই এনে এক বিষয় যাৰ সমাধানে ভাৰতীয় গণতন্ত্ৰত এক নতুন অধ্যায়ৰ সূচনা কৰিব পাৰে। মই বিশ্বাস কৰোঁ কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ সমৰ্পণ আৰু সেৱাভাৱৰ পৰা দেশবাসীয়ে বহু কথা শিকিব পাৰে।

বন্ধুসকল,

সামাজিক জীৱনত সক্ৰিয় হৈ থাকি আত্মজীৱনীৰ বাবে সময় উলিওৱাটো অত্যন্ত কঠিন কাম। কোবিন্দ ডাঙৰীয়াই আমাৰ সকলোৰে বাবে এই কামটো কৰিছে, কাৰণ তেওঁৰ জীৱনত এনে বহু কথা সোমাই আছে য’ত দৰিদ্ৰ আৰু বঞ্চিত পটভূমিৰ মানুহে নিজৰ জীৱনৰ প্ৰতিফলন দেখিবলৈ পাব। কঠিন পৰিস্থিতিতো এটা সাধাৰণ পৰিয়ালে কেনেকৈ জীৱনৰ পৱিত্ৰতা আৰু সততাৰ সৈতে আপোচ নকৰে; কেনেকৈ সেই আদৰ্শবোৰ পিছলৈ আমাৰ জীৱনৰ ভেটি হৈ পৰে; কেনেকৈ দুৰ্যোগৰ দিনৰ মূল্যবোধে সমগ্ৰ জীৱন আমাক পোহৰ দিয়ে; আৰু কেনেকৈ এই পৱিত্ৰতাই আমাক ৰাষ্ট্ৰসেৱাৰ শক্তি প্ৰদান কৰে, বিভিন্ন পদবীত দায়িত্ব পালন কৰাৰ সমান্তৰালভাৱে কোবিন্দ ডাঙৰীয়াই সমাজক ধাৰাবাহিকভাৱে এই প্ৰেৰণা যোগাই আহিছে।

বন্ধুসকল,

মোৰ দৃঢ় বিশ্বাস যে কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ এই আত্মজীৱনীয়ে কেৱল তেওঁৰ জীৱনৰ স্মৃতিসমূহেই নহয়, আমাৰ গণতন্ত্ৰৰো বহু গুৰুত্বপূৰ্ণ স্মৃতি সযতনে সংৰক্ষণ কৰি ৰাখিব। মই পুনৰবাৰ তেওঁৰ এই আত্মজীৱনীৰ বাবে তেওঁলৈ আন্তৰিক শুভেচ্ছা জ্ঞাপন কৰিছোঁ। আৰু মই বিশেষকৈ নতুন প্ৰজন্মক আহ্বান জনাওঁ— এইটো হ'ল ৰিলছৰ যুগ, ছ’চিয়েল মিডিয়াৰ প্ৰভাৱশালী লোকসকলে আপোনালোকক ইতস্ততঃ বিচলিত কৰে। এই হ্ৰস্ব পথ বা 'শ্বৰ্টকাট'ৰ যুগতো এটা কথা সদায় মনত ৰাখিব। ৰে’লৱে ষ্টেচনবোৰত লিখা থাকে— কিছুমান মানুহে উৰণ সেতু বা ব্ৰীজ ব্যৱহাৰ কৰাৰ সলনি ৰে’ল লাইনৰ ওপৰেৰে জাপ মাৰি পাৰ হয়। তাত লিখা থাকে: Shortcut will cut you short (চুটি ৰাস্তাই আপোনাৰ জীৱন চুটি কৰি দিব পাৰে)। আনকি আপোনালোকে যদি চুটি পথেৰেও যাব বিচাৰে, তথাপিও মই যুৱপ্ৰজন্মক অনুৰোধ কৰোঁ, আপোনালোকে যাক প্ৰশংসা কৰে, তেওঁলোকৰ আত্মজীৱনী পঢ়ক। আত্মজীৱনীয়ে ইতিহাসৰ ঘটনাবোৰক এক ভিন্ন দৃষ্টিকোণৰ পৰা বুজি পোৱাৰ সুযোগ দিয়ে। এইবোৰ ইতিহাসৰ নিচেই কাষৰ। সেয়েহে মই বিচাৰোঁ কোবিন্দ ডাঙৰীয়াৰ এই প্ৰচেষ্টাই যাতে ভৱিষ্যত প্ৰজন্মক, বিশেষকৈ যুৱ সমাজক উপকৃত কৰে।