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हमारे देश का भविष्य बदलने के लिए मेरा प्रमुख लक्ष्य है– विकास और नार्थ-ईस्ट राज्यों को भारत की विकासधारा में जोड़ना: पीएम मोदी
मैं इस लक्ष्य के साथ यहाँ आया हूँ कि आपकी शक्ति, सामर्थ्य, सपनों, युवाओं को अवसर मिले और वे विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करें: पीएम
छात्रों को अच्छी तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कोकराझार को एक वर्ष में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा: पीएम
असम ने 10 साल के लिए देश को प्रधानमंत्री दिया, 15 साल कांग्रेस ने लगातार राज किया लेकिन अभी भी यहाँ समस्याएं पहले की तरह ही हैं: पीएम
हमारी सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत इस इलाके के इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, सड़क, जलमार्ग का संपूर्ण विकास किया जाएगा: प्रधानमंत्री मोदी
2022 तक देश के गरीबों को आवास, 24 घंटे बिजली और पानी सुविधा: असम में आयोजित रैली में प्रधानमंत्री मोदी  
मैं विश्वास दिलाता हूँ कि नार्थ-ईस्ट की जितनी रुकी समस्याएं हैं, हम उनके समाधान के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे: पीएम मोदी  

मंच पर विराजमान बीटीसी के चीफ़ श्रीमान अग्रमा मोहिलरी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और जनप्रिय नेता श्रीमान सर्वानंद जी सोनमल, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और डोनर के मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह जी, बीटीसी के डिप्टी चीफ़ श्रीमान खम्पा जी, श्रीमान हेमंत विश्व शर्मा जी, सांसद श्रीमान विश्वजीत और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों एवं बहनों

मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा मांगता हूँ क्योंकि मुझे आने में विलंब हुआ। मैं सिक्किम में था मुझे निकलने में देर हुई और आपको काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मुझे इतनी देरी नहीं हुई है जिस कारण आपको विकास के लिए इंतज़ार करना पड़े, आपको अपने हक़ के लिए लड़ाई करनी पड़े। मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर यहाँ के लोगों की भलाई करने आया हूँ, आपके शक्ति, सामर्थ्य, सपनों, यहाँ के युवाओं को अवसर मिले और वे विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करें।

मैं आपके बीच में एक ऐसे समय आया हूँ जब यहाँ पर एकता और सद्भावना का माहौल है। यहाँ के राजनीतिक गुट भी अपने वाद-विवादों को पीछे रखते हुए यहाँ के लोगों की भलाई और उनके विकास के लिए आगे आए हैं। मैं इसके लिए यहाँ के नेतृत्व को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और जो लोग जुड़ रहे हैं, उनका मैं तहे दिल से स्वागत करता हूँ। अग्रमा जी, खम्पा जी मेरे घर पर आये थे, दिल खोलकर बातें हुई थी। उनसे मिलकर मुझे यहाँ की समस्याओं को समझने का अवसर मिला तभी उन्होंने कहा कि मोदी जी, जो देना है, वो दिल खोलकर दे दीजिए क्योंकि बातें भी तो दिल खोलकर हुई थीं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि दिल में आप समा गए हैं।

12-15 साल से जो वादे आपको किये गए, उन वादों का भी निपटारा नहीं हुआ। मैं यह तो मान सकता हूँ कि इसमें कुछ समय लग सकता है लेकिन आप हर बार वादे करें और फ़िर वादों को भुला दें, नए-नए वादें करें इस तरह के वादाखिलाफी से गुस्सा आता है, ये आपकी नाराजगी का प्रदर्शन है।

मैं आपको इतना ही कहने आया हूँ कि जो बात मैं कर रहा हूँ, उसे पूरा करने के लिए मैं जी-जान से जुड़ जाता हूँ, खप जाता हूँ। मैं हैरान हूँ कि एक पार्टी जिसने यहाँ 15 साल राज किया, ये असम प्रदेश जिसने 10 साल के लिए देश को प्रधानमंत्री दिया, 15 साल कांग्रेस ने लगातार राज किया; देखा जाए तो 60 साल तक वो ही सरकार चलाते रहे, मैं तो यह सोच रहा था कि असम में तो अब कोई समस्या हो ही नहीं सकती क्योंकि 10 साल यहाँ से प्रधानमंत्री रहे हैं और 15 साल से एक मुख्यमंत्री यहाँ सरकार चला रहे हैं। जिन्हें अपने काम का हिसाब देना चाहिए, वे सवाल पूछ रहे हैं तो फिर उन्होंने किया क्या? ये सब विफलताओं की दस्तक है। उन्हें यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि उनका अपना प्रधानमंत्री था, असम से मनमोहन सिंह जी को भेजा था लेकिन अभी समस्याओं की लंबी लिस्ट है आपकी।

भाईयों-बहनों, वे 15 साल में कुछ नहीं कर पाए और मुझसे अपेक्षा करते हैं कि मैं 15 दिन में सबकुछ कर दूँ। मुझे बताईये कि क्या ये मेरे साथ न्याय है? ये आपलोगों को गुमराह करने के लिए है लेकिन मेरा आप पर भरोसा है कि आप गुमराह नहीं होंगे। आपने उनके 15 साल देखे हैं और आपने हमारे 15 महीने भी देखे हैं। मेरे सामने कुछ बातें रखी गई थीं और आज मैं बड़े संतोष के साथ कहना चाहता हूँ कि असम के कार्बी मिकिर जनजाति को मैदानी इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में और असम के बोडो काछारी जनजाति को ट्राइब आंगलोंग और एनसी हिल ऑटोनोमस काउंसिल के इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में घोषित किये जाने का मुद्दा काफ़ी समय से लंबित है। अब दोनों ही मसलों की रजिस्ट्रार सेंट्रल ऑफ़ इंडिया और अनुसूचित जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग द्वारा सिफ़ारिश कर दी गई है। आने वाले कुछ समय में ये मामला कैबिनेट में अप्रूव हो जाएगा और उसके बाद संसद में इसे पारित किया जाएगा। वर्षों से आपकी इस समस्या का समाधान निकाला जा रहा है।

आपके नेता ने जब मुझे इस समस्या के बारे में बताया तो मैंने कहा कि मैं पहले इसका समाधान निकालूँगा, फ़िर आऊंगा। इस क्षेत्र के छात्रों को उच्च गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए, औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कोकराझार को एक वर्ष की अवधि में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जाएगा। इस कार्य से यूनिवर्सिटी को और अधिक अकादमिक तथा प्रशासनिक अधिकार प्राप्त होंगे।

मेरे सामने एक मसला आया था, एयरपोर्ट का बहुत पहले एक एयरपोर्ट सेना के साथ मिलकर काम कर रहा था, फ़िर वो बंद हो गया। अब राज्य सरकार ज़मीन नहीं दे रही है मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जैसे ही ज़मीन का मसला पूरा हो जाएगा, रूपसी एयरपोर्ट को भारतीय वायुसेना और आम जनता के लिए संयुक्त रूप से विकसित किया जाएगा।

कंचनजंघा एक्सप्रेस ट्रेन के रूट का बराक वेली में सिलचर तक विस्तार किया जाएगा और मैं आने वाले दिनों में बहुत जल्द उस ट्रेन को आरंभ करने जा रहा हूँ। मुझे एक और कठिनाई बताई गई कि हमारे लिए बजट में इतना आवंटन होता है लेकिन पता नहीं कहाँ जाता है। जनता की पाई-पाई जनता के ही पास जानी चाहिए; जो अब तक लूटा गया है और अब लूटने का अवसर नहीं मिल रहा है इसलिए ये लोग हमसे परेशान हैं। दिल्ली आजकल हिसाब मांगता है।

दिल्ली में अटल जी के समय में नार्थ-ईस्ट के विकास के लिए एक विशेष मंत्रालय - डोनर बना था। अटल जी की सरकार के जाने के बाद इनकी सरकार में क्या-क्या होता है, ये आप सभी को मालूम ही है। हमने डोनर मंत्रालय को एक नया काम दिया है जिससे यहाँ के कुछ नेता लोग काफ़ी परेशान हैं। पहले यहाँ के लोगों को दिल्ली जाना पड़ता था, मिनिस्ट्री खोजनी पड़ती थी, सामान्य लोग वहां जा नहीं पाते थे, शिकायत पहुंचाई नहीं जा सकती थी, क्या चल रहा है, सच-झूठ का पता ही नहीं चलता था। रुपये तो आते थे लेकिन ज़मीन पर कोई काम दिखाई नहीं देता था।

राजीव गाँधी सही कहते थे कि दिल्ली से एक रुपया निकलता है और गाँव में जाते-जाते 15 पैसे हो जाता है। इसलिए हमने तय किया कि डोनर मिनिस्ट्री, उसके अधिकारी महीने में एक बार नार्थ-ईस्ट के राज्यों में जाएंगे, पूरा सचिवालय दिल्ली से गुवाहाटी जाएगा। दिनभर वहां बैठेंगे, सरकार ने जो पैसे दिये, उसका हिसाब मांगेंगे, रुपये कहाँ जा रहे हैं, उसकी पूछताछ होगी और यह काम डॉ. जितेन्द्र सिंह की टीम बखूबी कर रही है। इसके कारण यहाँ लोगों को परेशानी हो रही है कि मोदी हिसाब मांग रहे हैं और आजकल फैशन हो गया है, अपने काम का हिसाब नहीं देना। जब हिसाब मांगते हैं तो कोई और ही आरोप लगाना शुरू कर देते हैं इसलिए नार्थ-ईस्ट की सभी सरकारों को पैसे का हिसाब देना पड़ेगा क्योंकि ये जनता का पैसा है और ये जनता के काम आना चाहिए और इसलिए मैं इन लोगों को बुरा लगता हूँ।

मैं अपना समय इस लिए बर्बाद नहीं करता कि मैं अच्छा लगूं यां बुरा लगूं; मैं अपना समय खपाता हूँ ताकि मेरा देश अच्छा बने। हमारे देश का भविष्य बदलने के लिए मेरा तीन सूत्रीय कार्यक्रम है – विकास, विकास और सिर्फ़ विकास। सारी समस्याओं का समाधान विकास में ही है। पिछले दिनों आपने देखा होगा कि जब दिल्ली में पुलिस की भर्ती हुई तो मैंने आग्रह रखा कि नार्थ-ईस्ट राज्यों के नौजवानों को दिल्ली में पुलिस में भर्ती करना चाहिए और आज बहुत बड़ी संख्या में यहाँ के नौजवानों को दिल्ली में रक्षा के लिए ले जाया गया। एक बार जो बात कही, उसे लागू करने के लिए जी-जान से लगे रहते हैं, पूरी कोशिश करते हैं।

हमें अगर विकास करना है तो इस इलाके की सबसे पहली ज़रूरत है – इंफ्रास्ट्रक्चर, चाहे सड़क हो, रेल हो, या जलमार्ग हो और इसलिए हमारी सरकार ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी बनाई है। इस पॉलिसी के माध्यम से नार्थ-ईस्ट राज्यों को भारत की विकासधारा में जोड़ना है, रास्तों का नेटवर्क बनाना है। पिछले बजट में आपने देखा होगा कि जैसा आवंटन हुआ था, वैसा पहले कभी नहीं किया गया होगा, उतने रुपये हम नार्थ-ईस्ट में सड़क और रेल में लगा रहे हैं।

देश की आज़ादी के इतने साल बीत गए और मैं सोच रहा था कि अब तक तो देश के सभी गांवों में बिजली पहुँच गई होगी लेकिन मुझे हिसाब मिला कि अभी भी 18,000 गाँव ऐसे हैं जहाँ बिजली का खंभा भी नहीं है। हमने बीड़ा उठाया, 15 अगस्त को लाल किले से हमने घोषणा की कि मेरी सरकार जी-जान से काम करेगी और 1,000 दिन में 18,000 गाँव में बिजली पहुंचाऊंगा। आप अपने मोबाइल पर इसका पूरा विवरण देख सकते हैं। इसके लिए एक अलग वेबसाइट बनाई है कि कहाँ-कहाँ बिजली पहुंची और दिन-प्रतिदिन का हिसाब रखा जाता है और हर दिन किसी-न-किसी गाँव में बिजली पहुँच रही है। गाँव में बिजली पहुँचने के बाद लोगों को अहसास होता होगा कि आज़ादी किसे कहते हैं। मैं तो मीडिया के मित्रों को भी कहता हूँ कि बिजली पहुँचने के बाद गाँव में जो लोगों का उत्साह है, उसे लोगों को दिखाएं। इससे देश के साथ-साथ काम करने वालों का भी हौसला बुलंद होगा।

बिजली पहुँचने से शिक्षा और जीवन-व्यवस्था में सुधार होगा और हमारा सपना है 2022 में भारत की आज़ादी के 75 साल होने पर सब जगह लोगों को 24 घंटे बिजली मिले जो आज नहीं मिल रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि 2022 तक हम यह काम करके रहेंगे।

हमारा एक और सपना यह है कि देश के गरीब परिवारों को अपना घर मिले। हमने ठान लिया है कि 2022 में देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के पास भी ख़ुद का रहने का घर हो और घर भी ऐसा जिसमें बिजली हो, पानी आता हो, शौचालय भी हो और बच्चों के लिए नजदीक में स्कूल भी हो। जब इतने मकान बनेंगे, रास्ते बनेंगे, रेल का काम होगा तो बहुत सारे लोगों को रोजगार भी मिलेगा, काम के अवसर बढ़ेंगे।

हमने तय किया था कि हम गरीब से गरीब व्यक्ति का बैंक खाता खोलेंगे; प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की। लोगों को लगता था कि जो काम 70 साल में नहीं हुआ, वो मोदी जी कैसे करेंगे। आज बताते हुए मुझे ख़ुशी हो रही है कि जन-धन योजना के अंतर्गत हमने 20 करोड़ लोगों के खाते खोल दिए हैं। हमने उन्हें अर्थव्यवस्था के धारा में जोड़ा, बैंक तक उनका रास्ता खोला। मैंने कहा था कि पैसे नहीं होंगे तो भी खाते खुलेंगे लेकिन मुझे ख़ुशी है कि गरीबों ने भी सोच लिया कि मुफ़्त में नहीं करना है, बैंक में कुछ तो जमा करेंगे और लोगों ने करीब-करीब 30 हज़ार करोड़ रुपये जमा किये। ये ताकत है देश के आम जन की और इस ताकत को लेकर हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरा एक ही इरादा है कि हिन्दुस्तान में और जगहों पर जितना विकास हुआ है, यहाँ भी उतना ही विकास होना चाहिए। ये काम मुझे करना है और इसलिए मैं आपके पास आशीर्वाद लेने आया हूँ। आज लाखों की तादाद में मैं यह जनसैलाब देख रहा हूँ। मैंने असम में बहुत दौरे किये हैं। लोकसभा के चुनाव में भी आपने भरपूर आशीर्वाद दिया है लेकिन ऐसा नज़ारा मैंने पहले कभी नहीं देखा, ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा। आपके इसी आशीर्वाद से मुझे ताकत मिलती है, आपके लिए दिन-रात दौड़ने की मुझे प्रेरणा मिलती है। मुझे ख़ुशी है कि मुझे नए साथियों के साथ काम करने का मौका मिला है और मैं विश्वास दिलाता हूँ कि यहाँ की जितनी रुकी समस्याएं हैं, उनके समाधान के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। मैं आप सभी का आभारी हूँ, बहुत-बहुत धन्यवाद!       

            

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स्वयंपूर्ण गोवा का संकल्प टीम गोवा की नई टीम स्पिरिट का परिणाम है : पीएम मोदी
October 23, 2021
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"प्रकृति और आनंद के अलावा,गोवा विकास के एक नए मॉडल,सामूहिक प्रयासों का प्रतिबिंब और पंचायत से प्रशासन तक विकास के लिए एकजुटता का भी प्रतीक है"
"गोवा ने ओडीएफ, बिजली, नल से जल, गरीबों को राशन जैसी सभी प्रमुख योजनाओं में 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है"
"टीम गोवा की इस नई टीम स्पिरिट का ही परिणाम स्वयंपूर्ण गोवा का संकल्प है"
"गोवा में विकसित हो रही अवसंरचना किसानों, पशुपालकों और हमारे मछुआरों की आय बढ़ाने में भी मददगार होगी"
"भारत के टीकाकरण अभियान में भी गोवा सहित देश के उन राज्यों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है, जो पर्यटन के केंद्र हैं, इससे गोवा को भी बहुत लाभ हुआ है"

आत्मनिर्भर भारताचे सपन, स्वयंपूर्ण गोवा येव-जणे-तल्येन, साकार करपी गोयकारांक येवकार। तुमच्या-सारख्या, धड-पड-करपी, लोकांक लागून, गोंय राज्याचो गरजो, गोयांतच भागपाक सुरू जाल्यात, ही खोशयेची गजाल आसा।

जब सरकार का साथ और जनता का परिश्रम मिलता है तो कैसे परिवर्तन आता है, कैसे आत्मविश्वास आता है, ये हम सभी ने स्वयंपूर्ण गोवा के लाभार्थियों से चर्चा के दरमियान अनुभव किया। गोवा को इस सार्थक परिवर्तन की राह दिखाने वाले लोकप्रिय और ऊर्जावान मुख्यमंत्री डॉक्टर प्रमोद सावंत जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे वरिष्ठ सहयोगी श्रीपद नाइक जी, गोवा के डिप्टी सीएम श्री मनोहर अझगांवकर जी, डिप्टी सीएम श्री चंद्रकांत केवलेकर जी, राज्य सरकार के अन्य मंत्री, सांसद, विधायक, लोकल बॉडीज के सभी प्रतिनिधि, जिला परिषद सदस्य, पंचायत सदस्य, अन्य जनप्रतिनिधिगण और मेरे प्यारे गोवा के भाइयों और बहनों !!

कहा जाता है, गोवा यानि आनंद, गोवा यानि प्रकृति, गोवा यानि टूरिज्म। लेकिन आज मैं ये भी कहूंगा- गोवा यानि विकास का नया मॉडल। गोवा यानि सामूहिक प्रयासों का प्रतिबिंब। गोवा यानि पंचायत से लेकर प्रशासन तक विकास के लिए एकजुटता।

साथियों,

बीते वर्षों में देश ने अभावों से निकलकर आवश्यकताओं-आकांक्षाओं की पूर्ति को अपना ध्येय बनाया है। जिन मूलभूत सुविधाओं से देश के नागरिक दशकों से वंचित थे, वो सुविधाएं देशवासियों को देने पर सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इस बार 15 अगस्त को मैंने लाल किले से भी कहा था, कि हमें अब इन योजनाओं को सेचुरेशन यानि शत-प्रतिशत लक्ष्य तक पहुंचाना है। इन लक्ष्यों की प्राप्ति में प्रमोद सावंत जी और उनकी टीम के नेतृत्व में गोवा अग्रणी भूमिका निभा रहा है। भारत ने खुले में शौच से मुक्ति का लक्ष्य रखा। गोवा ने शत-प्रतिशत ये लक्ष्य हासिल किया। देश ने हर घर को बिजली कनेक्शन का लक्ष्य रखा। गोवा ने इसे भी शत-प्रतिशत हासिल किया। हर घर जल अभियान में गोवा सबसे पहले शत-प्रतिशत! गरीबों को मुफ्त राशन देने के मामले में गोवा शत-प्रतिशत!

साथियों,

दो दिन पहले भारत ने 100 करोड़ वैक्सीन डोज़ देने के इस विराट पड़ाव को पार किया है। इसमें भी गोवा पहली डोज़ के मामले में शत-प्रतिशत हो चुका है। गोवा अब दूसरी डोज़ लगाने के लिए शत-प्रतिशत टारगेट को हासिल करने में पूरी ताकत लगा रहा है।

भाइयों और बहनों,

मुझे इस बात की खुशी है कि महिलाओं की सुविधा और सम्मान के लिए जो योजनाएं केंद्र सरकार ने बनाई हैं, उनको गोवा सफलता से जमीन पर उतार भी रहा है और उनको विस्तार भी दे रहा है। चाहे टॉयलेट्स हों, उज्जवला गैस कनेक्शन हों या फिर जनधन बैंक अकाउंट हों, गोवा ने महिलाओं को ये सुविधाएं देने में बेहतरीन काम किया है। इसी वजह से कोरोना लॉकडाउन के दौरान हज़ारों बहनों को मुफ्त गैस सिलेंडर मिले, उनके बैंक अकाउंट में पैसे जमा हो सके। घर-घर नल से जल पहुंचाकर भी गोवा सरकार ने बहनों को बहुत बड़ी सुविधा दी है। अब गोवा सरकार, गृह आधार और दीन दयाल सोशल सिक्योरिटी जैसी योजनाओं से गोवा की बहनों का जीवन और बेहतर बनाने का काम कर रही है।

भाइयों और बहनों,

जब समय मुश्किल होता है, चैलेंज सामने होता है, तब ही असली सामर्थ्य का पता चलता है। बीते डेढ़ दो वर्षों में गोवा के सामने सौ साल की सबसे बड़ी महामारी तो आई ही, गोवा ने भीषण साइक्लोन और बाढ़ की विभीषिका को भी झेला। मुझे एहसास है कि गोवा के टूरिज्म सेक्टर को इससे कितनी मुश्किलें आईं। लेकिन इन चुनौतियों के बीच गोवा की सरकार, केंद्र सरकार, डबल ताकत से गोवा के लोगों को राहत पहुंचाने में जुटी रहीं। हमने गोवा में विकास कार्यों को रुकने नहीं दिया। मैं प्रमोद जी और उनकी पूरी टीम को बधाई दूंगा कि उन्होंने स्वयंपूर्ण गोवा अभियान को गोवा के विकास का आधार बनाया है। अब इस मिशन को और तेज़ करने के लिए 'सरकार तुमच्यादारी' का बड़ा कदम भी उठाया गया है।

साथियों,

ये प्रो पीपल, प्रोएक्टिव गवर्नेंस की उसी भावना का विस्तार है, जिस पर बीते 7 वर्षों से देश आगे बढ़ रहा है। ऐसी गवर्नेंस जहां सरकार खुद नागरिक के पास जाती है और उसकी समस्याओं का समाधान करती है। गोवा ने तो गांव के स्तर पर, पंचायत के स्तर पर, जिला स्तर पर एक अच्छा मॉडल विकसित कर लिया है। मुझे पूरा विश्वास है कि जिस प्रकार केंद्र के अनेक अभियानों में अब तक गोवा शत-प्रतिशत सफल हुआ है, बाकी लक्ष्यों को भी सबके प्रयास से आप जल्द ही हासिल कर लेंगे ये मुझे पक्‍का विश्‍वास है।

साथियों,

मैं गोवा की बात करूं और फुटबॉल की बात ना करूं, ऐसा नहीं हो सकता। फुटबाल के लिए गोवा की दीवानगी कुछ अलग है, फुटबॉल का गोवा में क्रेज़ अलग है। फुटबॉल में चाहे डिफेंस हो या फॉरवर्ड, सभी गोल ऑरिएंटेड होते हैं। किसी को गोल बचाना है तो किसी को गोल करना है। अपने-अपने गोल को हासिल करने की ये भावना गोवा में कभी भी कम नहीं थी। लेकिन पहले जो सरकारें रहीं उनमें एक टीम स्पिरिट की, एक पॉजिटिव वातावरण बनाने की कमी थी। लंबे समय तक गोवा में राजनीतिक स्वार्थ, सुशासन पर भारी पड़ता रहा। गोवा में राजनीतिक अस्थिरता ने भी राज्य के विकास को हानि पहुंचाई। लेकिन बीते कुछ वर्षों में इस अस्थिरता को गोवा की समझदार जनता ने स्थिरता में बदला है। मेरे मित्र स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर जी ने गोवा को तेज़ विकास के जिस विश्वास के साथ आगे बढ़ाया, उसको प्रमोद जी की टीम पूरी ईमानदारी से नई बुलंदियां दे रही है। आज गोवा नए आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है। टीम गोवा की इस नई टीम स्पिरिट का ही परिणाम स्वयंपूर्ण गोवा का संकल्प है।

भाइयों और बहनों,

गोवा के पास एक बहुत समृद्ध ग्रामीण संपदा भी है और एक आकर्षक अर्बन लाइफ भी है। गोवा के पास खेत-खलिहान भी है और ब्लू इकॉनॉमी के विकास की संभावनाएं भी हैं। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जो कुछ ज़रूरी है, वो गोवा के पास है। इसलिए गोवा का संपूर्ण विकास डबल इंजन की सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार गोवा के ग्रामीण, शहरी और कोस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दे रही है। गोवा का दूसरा एयरपोर्ट हो, लॉजिस्टिक हब का निर्माण हो, भारत का दूसरा सबसे बड़ा केबल-ब्रिज हो, हज़ारों करोड़ रुपए से नेशनल हाईवे का निर्माण हो, ये सब कुछ गोवा की नेशनल और इंटरनेशनल कनेक्टिविटी को नए आयाम देने वाले हैं।

भाइयों और बहनों,

गोवा में विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर किसानों, पशुपालकों, हमारे मछुआरे साथियों की इनकम को भी बढ़ाने में मददगार होगा। ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर इसके आधुनिकीकरण के लिए इस वर्ष गोवा को मिलने वाले फंड में पहले की तुलना में 5 गुना वृद्धि की गई है। गोवा के Rural Infrastructure के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपए गोवा को आवंटित किए हैं। इससे कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में गोवा में हो रहे काम को नई गति मिलेगी।

साथियों,

किसानों और मछुआरों को बैंक और बाज़ार से जोड़ने के लिए जो योजनाएं केंद्र सरकार ने बनाई हैं, उनको जन-जन तक पहुंचाने में गोवा सरकार जुटी है। गोवा में बहुत बड़ी संख्या छोटे किसानों की है, ये या तो फल-सब्जियों पर निर्भर हैं या फिर मछली के व्यवसाय से जुड़े हैं। इन छोटे किसानों को, पशुपालकों को, मछुआरों को आसान बैंक लोन एक बहुत बड़ी चुनौती थी। इसी परेशानी को देखते हुए किसान क्रेडिट कार्ड की योजना का विस्तार किया गया है। एक तो छोटे किसानों को मिशन मोड पर केसीसी दिया जा रहा है, दूसरा पशुपालकों और मछुआरों को पहली बार इससे जोड़ा गया है। गोवा में भी बहुत कम समय में सैकड़ों नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं और करोड़ो रुपए की मदद दी गई है। पीएम किसान सम्मान निधि से भी गोवा के किसानों को बहुत बड़ी मदद मिली है। ऐसे ही प्रयासों के कारण अनेक नए साथी भी खेती को अपना रहे हैं। सिर्फ एक वर्ष के भीतर ही गोवा में फल-सब्जियों के उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दूध का उत्पादन भी 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है। मुझे बताया गया है कि गोवा सरकार ने भी इस बार किसानों से रिकॉर्ड खरीदी भी की है।

साथियों,

स्वयंपूर्ण गोवा की एक बड़ी ताकत फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री होने वाली है। विशेष रूप से फिश प्रोसेसिंग में गोवा भारत की ताकत बन सकता है। भारत लंबे समय से Raw fish को एक्सपोर्ट करता रहा है। भारत की फिश, पूर्वी एशियाई देशों से प्रोसेस होकर दुनिया के बाज़ारों तक पहुंचती हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए Fisheries Sector को पहली बार बहुत बड़े स्तर पर मदद दी जा रही है। मछली के व्यापार-कारोबार के लिए अलग मंत्रालय से लेकर मछुआरों की नावों के आधुनिकीकरण तक, हर स्तर पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत भी गोवा में हमारे मछुआरों को बहुत मदद मिल रही है।

साथियों,

गोवा का पर्यावरण और गोवा का पर्यटन, इन दोनों का विकास, भारत के विकास से सीधे जुड़ा है। गोवा, भारत के टूरिज्म सेक्टर का एक अहम केंद्र है। तेज़ गति से बढ़ रही भारत की अर्थव्यवस्था में टूर, ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। स्वाभाविक है कि इसमें गोवा की हिस्सेदारी भी काफी अधिक है। बीते कुछ सालों से टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को गति देने के लिए हर प्रकार की मदद दी जा रही है। Visa on Arrival की सुविधा का विस्तार किया गया है। कनेक्टिविटी के अलावा दूसरे टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बीते सालों में केंद्र सरकार ने करोड़ों रुपए की मदद गोवा को दी है।

साथियों,

भारत के वैक्सीनेशन अभियान में भी गोवा सहित देश के उन राज्यों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है, जो टूरिज्म के केंद्र हैं। इससे गोवा को भी बहुत लाभ हुआ है। गोवा ने दिन रात प्रयास करके, अपने यहां सभी पात्र लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लगवाई। अब देश ने भी 100 करोड़ वैक्सीन डोज का आंकड़ा पार कर लिया है। इससे देश के लोगों में विश्वास बढ़ा है, टूरिस्टों में विश्वास बढ़ा है। अब जब आप दीवाली, क्रिसमस और New Year की तैयारी कर रहे हैं, तो त्योहारों और छुट्टियों के इस सीज़न में गोवा के टूरिज्म सेक्टर में नई ऊर्जा देखने को लेगी। गोवा में स्वदेशी और विदेशी, दोनों पर्यटकों की आवाजाही भी निश्चित तौर पर बढ़ने वाली है। ये गोवा की टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए बहुत शुभ संकेत है।

भाइयों और बहनों,

जब गोवा, विकास की ऐसी हर संभावना का शत-प्रतिशत उपयोग करेगा, तभी गोवा स्वयंपूर्ण बनेगा। स्वयंपूर्ण गोवा, सामान्य जन की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को साकार करने का संकल्प है। स्वयंपूर्ण गोवा, माताओं, बहनों, बेटियों के स्वास्थ्य, सुविधा, सुरक्षा और सम्मान का भरोसा है। स्वयंपूर्ण गोवा में, युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोज़गार के अवसर हैं। स्वयंपूर्ण गोवा में, गोवा के समृद्ध भविष्य की झलक है। ये सिर्फ 5 महीने या 5 साल का एक प्रोग्राम भर नहीं है, बल्कि ये आने वाले 25 सालों के विजन का पहला पड़ाव है। इस पड़ाव तक पहुंचने के लिए गोवा के एक-एक जन को जुटना है। इसके लिए गोवा को डबल इंजन के विकास की निंरतरता चाहिए। गोवा को अभी जैसी स्पष्ट नीति चाहिए, अभी जैसी स्थिर सरकार चाहिए, अभी जैसा ऊर्जावान नेतृत्व चाहिए। संपूर्ण गोवा के प्रचंड आशीर्वाद से हम स्वयंपूर्ण गोवा के संकल्प को सिद्ध करेंगे, इसी विश्वास के साथ आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद !