हमारे देश का भविष्य बदलने के लिए मेरा प्रमुख लक्ष्य है– विकास और नार्थ-ईस्ट राज्यों को भारत की विकासधारा में जोड़ना: पीएम मोदी
मैं इस लक्ष्य के साथ यहाँ आया हूँ कि आपकी शक्ति, सामर्थ्य, सपनों, युवाओं को अवसर मिले और वे विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करें: पीएम
छात्रों को अच्छी तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कोकराझार को एक वर्ष में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा: पीएम
असम ने 10 साल के लिए देश को प्रधानमंत्री दिया, 15 साल कांग्रेस ने लगातार राज किया लेकिन अभी भी यहाँ समस्याएं पहले की तरह ही हैं: पीएम
हमारी सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत इस इलाके के इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, सड़क, जलमार्ग का संपूर्ण विकास किया जाएगा: प्रधानमंत्री मोदी
2022 तक देश के गरीबों को आवास, 24 घंटे बिजली और पानी सुविधा: असम में आयोजित रैली में प्रधानमंत्री मोदी  
मैं विश्वास दिलाता हूँ कि नार्थ-ईस्ट की जितनी रुकी समस्याएं हैं, हम उनके समाधान के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे: पीएम मोदी  

मंच पर विराजमान बीटीसी के चीफ़ श्रीमान अग्रमा मोहिलरी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और जनप्रिय नेता श्रीमान सर्वानंद जी सोनमल, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और डोनर के मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह जी, बीटीसी के डिप्टी चीफ़ श्रीमान खम्पा जी, श्रीमान हेमंत विश्व शर्मा जी, सांसद श्रीमान विश्वजीत और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों एवं बहनों

मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा मांगता हूँ क्योंकि मुझे आने में विलंब हुआ। मैं सिक्किम में था मुझे निकलने में देर हुई और आपको काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मुझे इतनी देरी नहीं हुई है जिस कारण आपको विकास के लिए इंतज़ार करना पड़े, आपको अपने हक़ के लिए लड़ाई करनी पड़े। मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर यहाँ के लोगों की भलाई करने आया हूँ, आपके शक्ति, सामर्थ्य, सपनों, यहाँ के युवाओं को अवसर मिले और वे विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करें।

मैं आपके बीच में एक ऐसे समय आया हूँ जब यहाँ पर एकता और सद्भावना का माहौल है। यहाँ के राजनीतिक गुट भी अपने वाद-विवादों को पीछे रखते हुए यहाँ के लोगों की भलाई और उनके विकास के लिए आगे आए हैं। मैं इसके लिए यहाँ के नेतृत्व को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और जो लोग जुड़ रहे हैं, उनका मैं तहे दिल से स्वागत करता हूँ। अग्रमा जी, खम्पा जी मेरे घर पर आये थे, दिल खोलकर बातें हुई थी। उनसे मिलकर मुझे यहाँ की समस्याओं को समझने का अवसर मिला तभी उन्होंने कहा कि मोदी जी, जो देना है, वो दिल खोलकर दे दीजिए क्योंकि बातें भी तो दिल खोलकर हुई थीं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि दिल में आप समा गए हैं।

12-15 साल से जो वादे आपको किये गए, उन वादों का भी निपटारा नहीं हुआ। मैं यह तो मान सकता हूँ कि इसमें कुछ समय लग सकता है लेकिन आप हर बार वादे करें और फ़िर वादों को भुला दें, नए-नए वादें करें इस तरह के वादाखिलाफी से गुस्सा आता है, ये आपकी नाराजगी का प्रदर्शन है।

मैं आपको इतना ही कहने आया हूँ कि जो बात मैं कर रहा हूँ, उसे पूरा करने के लिए मैं जी-जान से जुड़ जाता हूँ, खप जाता हूँ। मैं हैरान हूँ कि एक पार्टी जिसने यहाँ 15 साल राज किया, ये असम प्रदेश जिसने 10 साल के लिए देश को प्रधानमंत्री दिया, 15 साल कांग्रेस ने लगातार राज किया; देखा जाए तो 60 साल तक वो ही सरकार चलाते रहे, मैं तो यह सोच रहा था कि असम में तो अब कोई समस्या हो ही नहीं सकती क्योंकि 10 साल यहाँ से प्रधानमंत्री रहे हैं और 15 साल से एक मुख्यमंत्री यहाँ सरकार चला रहे हैं। जिन्हें अपने काम का हिसाब देना चाहिए, वे सवाल पूछ रहे हैं तो फिर उन्होंने किया क्या? ये सब विफलताओं की दस्तक है। उन्हें यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि उनका अपना प्रधानमंत्री था, असम से मनमोहन सिंह जी को भेजा था लेकिन अभी समस्याओं की लंबी लिस्ट है आपकी।

भाईयों-बहनों, वे 15 साल में कुछ नहीं कर पाए और मुझसे अपेक्षा करते हैं कि मैं 15 दिन में सबकुछ कर दूँ। मुझे बताईये कि क्या ये मेरे साथ न्याय है? ये आपलोगों को गुमराह करने के लिए है लेकिन मेरा आप पर भरोसा है कि आप गुमराह नहीं होंगे। आपने उनके 15 साल देखे हैं और आपने हमारे 15 महीने भी देखे हैं। मेरे सामने कुछ बातें रखी गई थीं और आज मैं बड़े संतोष के साथ कहना चाहता हूँ कि असम के कार्बी मिकिर जनजाति को मैदानी इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में और असम के बोडो काछारी जनजाति को ट्राइब आंगलोंग और एनसी हिल ऑटोनोमस काउंसिल के इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में घोषित किये जाने का मुद्दा काफ़ी समय से लंबित है। अब दोनों ही मसलों की रजिस्ट्रार सेंट्रल ऑफ़ इंडिया और अनुसूचित जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग द्वारा सिफ़ारिश कर दी गई है। आने वाले कुछ समय में ये मामला कैबिनेट में अप्रूव हो जाएगा और उसके बाद संसद में इसे पारित किया जाएगा। वर्षों से आपकी इस समस्या का समाधान निकाला जा रहा है।

आपके नेता ने जब मुझे इस समस्या के बारे में बताया तो मैंने कहा कि मैं पहले इसका समाधान निकालूँगा, फ़िर आऊंगा। इस क्षेत्र के छात्रों को उच्च गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए, औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कोकराझार को एक वर्ष की अवधि में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जाएगा। इस कार्य से यूनिवर्सिटी को और अधिक अकादमिक तथा प्रशासनिक अधिकार प्राप्त होंगे।

मेरे सामने एक मसला आया था, एयरपोर्ट का बहुत पहले एक एयरपोर्ट सेना के साथ मिलकर काम कर रहा था, फ़िर वो बंद हो गया। अब राज्य सरकार ज़मीन नहीं दे रही है मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जैसे ही ज़मीन का मसला पूरा हो जाएगा, रूपसी एयरपोर्ट को भारतीय वायुसेना और आम जनता के लिए संयुक्त रूप से विकसित किया जाएगा।

कंचनजंघा एक्सप्रेस ट्रेन के रूट का बराक वेली में सिलचर तक विस्तार किया जाएगा और मैं आने वाले दिनों में बहुत जल्द उस ट्रेन को आरंभ करने जा रहा हूँ। मुझे एक और कठिनाई बताई गई कि हमारे लिए बजट में इतना आवंटन होता है लेकिन पता नहीं कहाँ जाता है। जनता की पाई-पाई जनता के ही पास जानी चाहिए; जो अब तक लूटा गया है और अब लूटने का अवसर नहीं मिल रहा है इसलिए ये लोग हमसे परेशान हैं। दिल्ली आजकल हिसाब मांगता है।

दिल्ली में अटल जी के समय में नार्थ-ईस्ट के विकास के लिए एक विशेष मंत्रालय - डोनर बना था। अटल जी की सरकार के जाने के बाद इनकी सरकार में क्या-क्या होता है, ये आप सभी को मालूम ही है। हमने डोनर मंत्रालय को एक नया काम दिया है जिससे यहाँ के कुछ नेता लोग काफ़ी परेशान हैं। पहले यहाँ के लोगों को दिल्ली जाना पड़ता था, मिनिस्ट्री खोजनी पड़ती थी, सामान्य लोग वहां जा नहीं पाते थे, शिकायत पहुंचाई नहीं जा सकती थी, क्या चल रहा है, सच-झूठ का पता ही नहीं चलता था। रुपये तो आते थे लेकिन ज़मीन पर कोई काम दिखाई नहीं देता था।

राजीव गाँधी सही कहते थे कि दिल्ली से एक रुपया निकलता है और गाँव में जाते-जाते 15 पैसे हो जाता है। इसलिए हमने तय किया कि डोनर मिनिस्ट्री, उसके अधिकारी महीने में एक बार नार्थ-ईस्ट के राज्यों में जाएंगे, पूरा सचिवालय दिल्ली से गुवाहाटी जाएगा। दिनभर वहां बैठेंगे, सरकार ने जो पैसे दिये, उसका हिसाब मांगेंगे, रुपये कहाँ जा रहे हैं, उसकी पूछताछ होगी और यह काम डॉ. जितेन्द्र सिंह की टीम बखूबी कर रही है। इसके कारण यहाँ लोगों को परेशानी हो रही है कि मोदी हिसाब मांग रहे हैं और आजकल फैशन हो गया है, अपने काम का हिसाब नहीं देना। जब हिसाब मांगते हैं तो कोई और ही आरोप लगाना शुरू कर देते हैं इसलिए नार्थ-ईस्ट की सभी सरकारों को पैसे का हिसाब देना पड़ेगा क्योंकि ये जनता का पैसा है और ये जनता के काम आना चाहिए और इसलिए मैं इन लोगों को बुरा लगता हूँ।

मैं अपना समय इस लिए बर्बाद नहीं करता कि मैं अच्छा लगूं यां बुरा लगूं; मैं अपना समय खपाता हूँ ताकि मेरा देश अच्छा बने। हमारे देश का भविष्य बदलने के लिए मेरा तीन सूत्रीय कार्यक्रम है – विकास, विकास और सिर्फ़ विकास। सारी समस्याओं का समाधान विकास में ही है। पिछले दिनों आपने देखा होगा कि जब दिल्ली में पुलिस की भर्ती हुई तो मैंने आग्रह रखा कि नार्थ-ईस्ट राज्यों के नौजवानों को दिल्ली में पुलिस में भर्ती करना चाहिए और आज बहुत बड़ी संख्या में यहाँ के नौजवानों को दिल्ली में रक्षा के लिए ले जाया गया। एक बार जो बात कही, उसे लागू करने के लिए जी-जान से लगे रहते हैं, पूरी कोशिश करते हैं।

हमें अगर विकास करना है तो इस इलाके की सबसे पहली ज़रूरत है – इंफ्रास्ट्रक्चर, चाहे सड़क हो, रेल हो, या जलमार्ग हो और इसलिए हमारी सरकार ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी बनाई है। इस पॉलिसी के माध्यम से नार्थ-ईस्ट राज्यों को भारत की विकासधारा में जोड़ना है, रास्तों का नेटवर्क बनाना है। पिछले बजट में आपने देखा होगा कि जैसा आवंटन हुआ था, वैसा पहले कभी नहीं किया गया होगा, उतने रुपये हम नार्थ-ईस्ट में सड़क और रेल में लगा रहे हैं।

देश की आज़ादी के इतने साल बीत गए और मैं सोच रहा था कि अब तक तो देश के सभी गांवों में बिजली पहुँच गई होगी लेकिन मुझे हिसाब मिला कि अभी भी 18,000 गाँव ऐसे हैं जहाँ बिजली का खंभा भी नहीं है। हमने बीड़ा उठाया, 15 अगस्त को लाल किले से हमने घोषणा की कि मेरी सरकार जी-जान से काम करेगी और 1,000 दिन में 18,000 गाँव में बिजली पहुंचाऊंगा। आप अपने मोबाइल पर इसका पूरा विवरण देख सकते हैं। इसके लिए एक अलग वेबसाइट बनाई है कि कहाँ-कहाँ बिजली पहुंची और दिन-प्रतिदिन का हिसाब रखा जाता है और हर दिन किसी-न-किसी गाँव में बिजली पहुँच रही है। गाँव में बिजली पहुँचने के बाद लोगों को अहसास होता होगा कि आज़ादी किसे कहते हैं। मैं तो मीडिया के मित्रों को भी कहता हूँ कि बिजली पहुँचने के बाद गाँव में जो लोगों का उत्साह है, उसे लोगों को दिखाएं। इससे देश के साथ-साथ काम करने वालों का भी हौसला बुलंद होगा।

बिजली पहुँचने से शिक्षा और जीवन-व्यवस्था में सुधार होगा और हमारा सपना है 2022 में भारत की आज़ादी के 75 साल होने पर सब जगह लोगों को 24 घंटे बिजली मिले जो आज नहीं मिल रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि 2022 तक हम यह काम करके रहेंगे।

हमारा एक और सपना यह है कि देश के गरीब परिवारों को अपना घर मिले। हमने ठान लिया है कि 2022 में देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के पास भी ख़ुद का रहने का घर हो और घर भी ऐसा जिसमें बिजली हो, पानी आता हो, शौचालय भी हो और बच्चों के लिए नजदीक में स्कूल भी हो। जब इतने मकान बनेंगे, रास्ते बनेंगे, रेल का काम होगा तो बहुत सारे लोगों को रोजगार भी मिलेगा, काम के अवसर बढ़ेंगे।

हमने तय किया था कि हम गरीब से गरीब व्यक्ति का बैंक खाता खोलेंगे; प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की। लोगों को लगता था कि जो काम 70 साल में नहीं हुआ, वो मोदी जी कैसे करेंगे। आज बताते हुए मुझे ख़ुशी हो रही है कि जन-धन योजना के अंतर्गत हमने 20 करोड़ लोगों के खाते खोल दिए हैं। हमने उन्हें अर्थव्यवस्था के धारा में जोड़ा, बैंक तक उनका रास्ता खोला। मैंने कहा था कि पैसे नहीं होंगे तो भी खाते खुलेंगे लेकिन मुझे ख़ुशी है कि गरीबों ने भी सोच लिया कि मुफ़्त में नहीं करना है, बैंक में कुछ तो जमा करेंगे और लोगों ने करीब-करीब 30 हज़ार करोड़ रुपये जमा किये। ये ताकत है देश के आम जन की और इस ताकत को लेकर हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरा एक ही इरादा है कि हिन्दुस्तान में और जगहों पर जितना विकास हुआ है, यहाँ भी उतना ही विकास होना चाहिए। ये काम मुझे करना है और इसलिए मैं आपके पास आशीर्वाद लेने आया हूँ। आज लाखों की तादाद में मैं यह जनसैलाब देख रहा हूँ। मैंने असम में बहुत दौरे किये हैं। लोकसभा के चुनाव में भी आपने भरपूर आशीर्वाद दिया है लेकिन ऐसा नज़ारा मैंने पहले कभी नहीं देखा, ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा। आपके इसी आशीर्वाद से मुझे ताकत मिलती है, आपके लिए दिन-रात दौड़ने की मुझे प्रेरणा मिलती है। मुझे ख़ुशी है कि मुझे नए साथियों के साथ काम करने का मौका मिला है और मैं विश्वास दिलाता हूँ कि यहाँ की जितनी रुकी समस्याएं हैं, उनके समाधान के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। मैं आप सभी का आभारी हूँ, बहुत-बहुत धन्यवाद!       

            

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भारत माता की जय।

क्यों ऐसी आवाज आई आज,

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

कार्यक्रम में उपस्थित मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई, गुजरात विधानसभा के स्पीकर शंकर भाई, उप मुख्यमंत्री भाई हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के सभी मंत्रीगण, विधायक साथी, और बनासकांठा, वाव, थराद, उत्तर गुजरात के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

आज, यहां मेरी माताएं इतनी बड़ी संख्या में आई हैं, ये माताएं-बहनें इतनी बड़ी संख्या में आई हैं। ये मेरी माताओं और बहनों को मेरा विशेष प्रणाम।

अभी कुछ ही दिन पहले पावन नवरात्रि का पर्व पूर्ण हुआ है। ये मां अंबा जी की कृपा ही है कि मुझे उनके चरणों में आज आने का सौभाग्य मिला है। उनकी कृपा से आज, आप सबके, मेरे अपने परिवारजनों के, आप सबके दर्शन करने का मुझे आज लाभ मिला है। मैं मां अंबा जी के चरणों में प्रणाम करता हूं। हमारे वरास्वरूप भगवान श्री धनीधर जी, मैं उन्हें भी आज श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हू। ये भी एक सुखद संयोग है कि आज भगवान महावीर जयंती भी हम मना रहे हैं। हमारे ये क्षेत्र अनेकों जैन तीर्थों की धरती है। मैं भगवान महावीर को प्रणाम करता हूं, और आप सभी को पवित्र महावीर जनकल्याणक दिन की महावीर जयंती की बधाई भी देता हूं।

साथियों,

आज मेरा मन एक और बात से प्रसन्न है। जब मैं यहाँ आया, तो पहली बार मेरा विमान सीधे डीसा एयरबेस पर लैंड हुआ। डीसा का यह एयरबेस अंतरराष्ट्रीय सीमा से केवल 130 किलोमीटर की दूरी पर है। आप समझ सकते हैं कि ये देश की सुरक्षा के लिए भी कितना अहम है।

लेकिन साथियों,

डीसा एयरपोर्ट के इस प्रोजेक्ट का, उसका विचार आज से प्रारंभ नहीं हुआ। जब मैं यहां मुख्यमंत्री था, तब से हमने जमीन एक्वायर की, मेरे किसान भाई-बहनों ने जमीन दी, और हम चाहते थे कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए, भारत की पश्चिम सीमा की सुरक्षा के लिए, ये डीसा अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, यहां एयरबेस होना बहुत जरूरी है। लेकिन पता नहीं उस समय दिल्ली में जो लोग राज करते थे, उनको गुरजात के प्रति पता नहीं क्या नफरत थी, राष्ट्री की सुरक्षा का ये प्रोजेक्ट भी, सालों तक फाइलों में दबा रहा। आपने जब मुझे दिल्ली भेजा तो मैंने उन फाइलों को बाहर निकाला, और ये आज उसका परिणाम है कि एयरफोर्स का एक बहुत बड़ा बेस अब हमारे डीसा से जुड़ गया है। और ये सिर्फ हवाई पट्टी नहीं होती है, उसके कारण बहुत एक्टिविटी यहां होने वाली है, बहुत बड़ी मात्रा में जवान यहां रहने वाले हैं। इस क्षेत्र के विकास में इसका बहुत बड़ा योगदान होने वाला है। लेकिन ये विलंब जो हुआ, वो दिल्ली में जो समय कांग्रेस की सरकार थी, उसके कारण हुआ, उसके रवैये के कारण हुआ और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति इतनी उदासीनता देश कभी भी माफ नहीं करता है। ये हमारी सरकार है, जिसने डीसा एयरपोर्ट के काम को प्राथमिकता पर पूरा करवाया और आज ये एयरपोर्ट, इस क्षेत्र के लिए विकास का एक बड़ा माइलस्टोन भी बन रहा है, और देश की एक बहुत बड़ी स्ट्रेटेजिक ताकत भी है। मैं इस एयरपोर्ट के इस क्षेत्र को फिर आप सबको बधाई देता हूं।

साथियों,

वाव-थराद, बनासकांठा का ये क्षेत्र, आप सब जानते हैं, यहाँ से मेरा कितना लगाव रहा है। यहाँ का कोई गाँव ऐसा नहीं होगा कि जिसके साथ मेरी यादें न हो। आज में आया तो बहुत सारे पुराने लोगों के चेहरे देखने का मुझे अवसर मिला। और रोड शो भी इतना भव्य किया, कि उसके कारण मुझे एक लाभ हुआ। बहुत बड़ी संख्या में पुराने लोगों को जिनको दूर से भी मिलने का मुझे मौका मिल गया। और जब मैं संगठन का काम करता था, तब तो मैं बहुत यहाँ घूमा हूं। स्कूटर पर चक्कर लगाता था। आप सभी को मिलने का मौका मिलता था, और अपने उत्तर गुजरात में आता था, तो माताएं और बहनें बहुत अच्छी रोटियाँ बनाकर के खिलाती थी। बाजरे की रोटी, घी, गुड़, लहसुन की चटनी, मख्खन ताजा। आप सभी का वो स्नेह, आपका अपार प्रेम, मैं कभी भी भूल नहीं सकुंगा। और जितना स्नेह आप सभी ने मुझे दिया है, परिवार के एक बेटे की तरह बड़ा किया है मुझे, और इसीलिए, जहाँ हूं वहाँ से आपके स्नेह को विकास करके ब्याज के साथ चुकाने की मेहनत करता हूं। यहाँ संगठन के कई पूराने कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने दिन-रात, उनके साथ मुझे काम करने का मौका मिला है। कई बुजुर्ग अभी रहे नहीं, लेकिन उनके साथ मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है। एसे सभी साथी आज भाजपा के कार्यकर्ताओं की एक नई पीढ़ी पूरी मेरे सामने है। और ऐसी सफल पीढ़ी हो ना, तो हम को जीवन में कुछ करने का संतोष होता है। मैं देख रहा हूँ, आज हमारे युवा कार्यकर्ता, संगठन के कामों को उसी कुशलता से आगे बढ़ा रहे हैं। ये कार्यक्रम, ये रैली, इसका संयोजन, इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी यहाँ उपस्थिति, ये इसका सबूत है। मैं यहाँ दोनो कोने में गया, मुझे एसा लगा की दूर-दूर एक बार हाथ तो दिखऊं, लेकिन मेरी नजर जहाँ पहुँचे उससे भी दूर-दूर तक लोग बैठे हुए हैं, अन्य काफी सारे लोग बाहर खड़े हैं। बनासकांठा के अलावा पाटण, महेसाणा समेत कई जिलों के लोग भी मुझे उनके दर्शन करने का मौका मिला, मैं आप सबका इसके लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। खासकर के मैं मेरी माताएं और बहनों को फिर से एक बार प्रणाम करता हूं।

साथियों,

आज से 25 साल पहले आपने मुझे बनासकांठा और इस क्षेत्र के विकास का दायित्व सौंपा था। मैं जब तक गुजरात में रहा, मैंने इस काम को मिशन मोड में किया, हो सके उतना गुजरात को आगे बढ़ाया। दशकों से आपको जो परेशानियाँ हो रही थी, जो इस क्षेत्र की उपेक्षा हो रही थी, उन सारी कठिनाईयों का अंत हुआ। विकास की अपेक्षाएँ एक के बाद एक पूरी होती गई। मुझे गर्व है, यहाँ विकास का जो सिलसिला शुरू करने का सौभाग्य मुझे मिला था, वो अनवरत जारी है। और 2014 के बाद से तो इसमें डबल इंजन की सरकार की ताकत भी शामिल है। आज भी यहाँ केंद्र और राज्य की करीब 20 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाएं शुरू हो रही हैं, 20 हजार करोड़ रुपया। इन प्रोजेक्ट्स से इस पूरे इलाके की तस्वीर बदलेगी। ऊर्जा, सड़क, रेलवे और हाउसिंग सेक्टर से जुड़े ये प्रोजेक्ट यहां के जीवन को एक नई गति देंगे। मैं इन सभी विकास कार्यों के लिए वाव-थराद, बनासकांठा और पूरे गुजरात को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज रोड इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े जिन प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है, इनसे पूरे नॉर्थ गुजरात को गति मिलेगी। यहाँ नए अवसर पैदा होंगे। ईडर से वडाली बाईपास तक 4 लेन हाईवे का निर्माण, और धोलावीरा से सांतलपुर तक हाईवे के अपग्रेडेशन का काम, ये गांवों को बाजार से, किसानों को नए अवसरों से और युवाओं को रोजगार से जोड़ेंगे। अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे, ये पूरा कॉरिडोर आज इस क्षेत्र को समर्पित किया गया है। जब इतनी बड़ी कनेक्टिविटी बनती है, तो उसके साथ-साथ उद्योग भी आते हैं, और निवेश भी आता है। साथ ही,इस क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को भी बेहतर किया गया है। हिम्मतनगर से खेड़ब्रह्मा तक का गेज कन्वर्जन, हमारे उत्तर गुजरात के आदिवासी इलाके को नेशनल ब्रॉड गेज नेटवर्क से जोड़ता है। आज से खेड़ब्रह्मा, हिम्मतनगर और असारवा को जोड़ने वाली नई ट्रेन सेवा भी शुरू हो गई है।

भाइयों बहनों,

बेहतर रोड और हाइवेज, रेलवे के ये प्रोजेक्ट्स, ये सब गुजरात के चहुमुखी विकास के प्लान का हिस्सा है। इस प्लान को पूरा करने के लिए हमारा पूरा फोकस यहाँ की ऊर्जा जरूरतों पर भी है। क्योंकि, नए उद्योग, नया निवेश, नए अवसर, ये तभी आते हैं जब बिजली होती है। इसीलिए, आज खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क से जुड़े ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स इतने महत्वपूर्ण हैं। यहां से साढ़े चार गीगावॉट बिजली पैदा होगी। ये बिजली नए कारखानों के भी काम आएगी, आपके घरों तक भी पहुंचेगी, और किसानों के खेत तक भी फायदा पहुंचाएगी।

साथियों,

आज सोलर पावर में गुजरात का परचम पूरी बुलंदी से लहरा रहा है। आज renewable एनर्जी में गुजरात इसलिए इतने आगे है, क्योंकि, गुजरात ने इसकी शुरुआत तब की थी, जब भारत में इस ओर बहुत ध्यान ही नहीं था। साल 2010 में, यानी आज से 15-16 साल पहले, मैंने मुख्यमंत्री रहते हुये चारणका में रतनपुर के पास देश का पहला सोलर पार्क का काम शुरू करवाया था। जो 15-16 साल के बच्चे हैं, उनका तो जन्म भी नहीं हुआ होगा। ये अपने में एक मल्टी-टेक्नालजी पार्क है, जिसने सोलर एनर्जी का मूवमेंट शुरू किया। आज गुजरात में जिस प्रकार सोलर एनर्जी का काम होता है, सूर्यशक्ति से बिजली पैदा करने का काम हो रहा है, जैसे आज ही खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्कसे जुड़ी परियोजनाएं शुरू हुई हैं, वो दिन दूर नहीं जब गुजरात, renewable energy में दुनिया का बहुत बड़ा केंद्र बनकर के उभरेगा।

साथियों,

आज जब दुनिया में भारत के विकास की बात होती है, आज जब भारत की ग्रोथ स्टोरी की बात होती है, तो ‘गुजरात मॉडल’ की सराहना हो जाती है। और, गुजरात ने दिखाया है, विकास के लिए जितनी जरूरी इनफ्रास्ट्रक्चर की परियोजनाएं हैं, उतनी ही जरूरी जनकल्याण की योजनाएं भी हैं। यानी, सड़कें, हाइवेज, रेलवेज का विकास तो होना ही चाहिए। गाँव, गरीब और सामान्य मानवी का जीवन स्तर भी सुधरना चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए आज हम ये अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं। आज यहाँ आप विचार कीजिए, 40 हजार परिवारो को, गुजरात में 40 हजार परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर मिले, पक्के घर। हजारों परिवारों को पक्के घर की सुविधा, उनके लिए एक सुरक्षा होती है, जिंदगी की पहचान होती है और नए सपनों को सजानें का एक हौसला तैयार होता है। और इससे जीवन में कितने बडे़-बडे़ परिवर्तन आते हैं। जब पीएम आवास में जिन्हें पक्के घर मिले हैं, जिनके पास जिंदगी में आज तक घर नहीं था, फुटपाथ पर जिन्होंने जिंदगी बिताई थी, झोंपडों में जिंदगी बिताई थी, कच्ची मिट्टी के मकान बनाकर जीवन बिताया था, उन्हें जब यह पक्के घर मिले हो तो आशीर्वाद मिले कि न मिले ? आशीर्वाद मिले कि न मिले ? आशीर्वाद मिले कि न मिले ? पुण्य मिले कि न मिले? यह पुण्य किसके नसीब में जाता है? यह पुण्य किसके नसीब में जाता है? किसके नसीब में जाता है ? आज 40 हजार करोड़ लोगों को घर मिले है न, उनके आशीर्वाद, उनके पुण्य के अधिकारी आप सभी हो, देश के नागरिक हैं, क्योंकि आपके एक वोट की ताकात, जिन्होंने मुझे यह सेवा करने का मौका दिया, और यहाँ 40 हजार लोगों के खुद के पक्के घर बन गए। इस पुण्य के सही हक्कदार आप सभी हैं, में तो सिर्फ निमित्त मात्र हूं। मैं पीएम आवास के सभी लाभार्थी भाई-बहनों को आज इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो यहाँ का दशकों पुराना हाल भी याद आ रहा है। वो दिन कोई नहीं भूल सकता, जब उत्तर गुजरात का नाम आते ही लोगों के मन में एक अलग ही तस्वीर बनती थी। सूखा, दुष्काल - अकाल, पानी की कमी, 10 साल में 7 बार अकाल होता था। पानी भरने के लिए 3-4 किलोमीटर मटके लेकर जाना पड़ता था। संघर्ष से भरा ये जीवन, और कांग्रेस सरकारों द्वारा हमारी निरंतर उपेक्षा, हम से कौन भूल सकता है वो दिन, जब कई-कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता था। घर की महिलाएं, बहन-बेटियों का बहुत सारा समय पानी की व्यवस्था करने में खर्च हो जाता था। पानी की किल्लत के कारण किसानों को भी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिलता था। पशुपालक भी अपने पशुओं के पानी और चारे की चिंता में रहते थे। ये समस्या लंबे समय से चली आ रही थी। हमारे यहाँ पहले मवेशियों के बाड़े चलते थे। गरमी आती थी तब, मवेशियों के बाड़े चलते थे। और सरकार घास पहुँचाती थी। पीने के पानी की दिक्कत होती थी। दो-दो दशक हो गए, सब बंद हो गया। कही दिखता नहीं है, जरुरत ही नहीं है। ये गुजरात के लोगों का जज्बा था कि हमने मिलकर अपनी मेहनत से नियति को बदलने का संकल्प लिया। हमने ‘सुजलाम सुफलाम योजना’ के जरिए पानी की समस्या का समाधान किया। नर्मदा का पानी दूर-दूर तक पहुंचने लगा। सिंचाई की नई व्यवस्था बनी।

साथियों,

आज यहां का किसान एक फसल पर निर्भर नहीं है। वो अपने हिसाब से खेती की योजना बना रहा है। बनासकांठा का नाम आज जिस तरह आलू उत्पादन में उभरा है, वह अपने आप में एक मिसाल है।

इसी तरह भाइयों बहनों,

आज हम विकास के जिन कामों को आगे बढ़ा रहे हैं, उनका लाभ पूरे उत्तर गुजरात को होगा। वाव-थराद, बनासकांठा, पाटन और महेसाणा, हर जिले के लिए नए अवसर पैदा होंगे, बेहतर जीवन के रास्ते खुलेंगे।

साथियों,

गुजरात की सबसे बड़ी ताकत है कि इसने लगातार 25 वर्ष से विकास के महाअभियान को रुकने नहीं दिया है। गुजरात ने नए कीर्तिमान बनाए। अपने कीर्तिमानों को खुद ही तोड़ा। फिर नए कीर्तिमान बनाए, फिर कीर्तिमान को तोड़ा, फिर कीर्तिमान नए बनाए। अभी गुजरात के इनफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ज़िक्र हुआ, इसी तरह हमने पूरे गुजरात में गाँव-गाँव को अच्छी सड़कों से जोड़ा। हाइस्पीड हाइवेज बनाए। वंदेभारत जैसी हाइस्पीड ट्रेनों की सुविधा भी गुजरात को मिल रही है।

भाइयों बहनों,

2005 में, मैंने विकास को गुजरात के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए ‘शहरी विकास वर्ष’ की शुरुआत की थी। तब इसका बजट करीब साढ़े छह सौ करोड़ रुपए था। लेकिन, विकास का पहिया इतनी तेजी से घूमा कि, आज ये बजट 33 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। इसी दिशा में 9 नई महानगरपालिकाओं के लिए 2300 करोड़ रुपए के करीब 300 प्रस्ताव स्वीकृत के लिए आए हैं। 72 नगरपालिकाओं को अपग्रेड किया गया है। गुजरात सरकार ने इस साल प्रदेश का जो बजट पेश किया है, वो बजट भी 4 लाख करोड़ से ज्यादा का है। ये पैसा गाँव, कस्बे, और शहरों के कायाकल्प के लिए खर्च होगा। गाँव गाँव बेहतर सुविधाएं बनाई जा रही हैं। घर-घर पाइप से पानी पहुंचाया जा रहा है।

भाइयों बहनों,

पंचायत से पार्लियामेंट तक जब तक आपका भरोसा बना रहेगा, विकास की सुपरफास्ट एक्सप्रेस को इसी रफ्तार से चलती रहेगी।

साथियों,

भारत की हमेशा से बड़ी ताकत रही है- मुश्किल समय, कितना ही कठिन समय क्यों न आए, मुश्किल के समय हमारा देश एकजुट होकर खड़ा होता है। बीते कुछ समय से आप देख रहे हैं, दुनिया के कई देश युद्ध, अशांति और अस्थिरता से घिरे हैं। वेस्ट एशिया में जो हालात बने हुए हैं, उनका असर पूरी दुनिया पर है। ऊर्जा जरूरतों की, डीजल, पेट्रोल और गैस की दिक्कत पूरी दुनिया में बढ़ गई है। ऐसे संकट में भी, भारत ने हालातों को नियंत्रण में बनाए रखा है। इसके पीछे देश की सफल विदेश नीति, और देशवासियों की एकजुटता की सफलता की ताकत है।

लेकिन भाइयों बहनों,

दुर्भाग्य देखिए, हमारे देश में कुछ राजनैतिक दल वैश्विक संकट के दौर में भी राजनैतिक रोटियाँ सेंकने से बाज नहीं आ रहे! इस सियासी षड्यंत्र में सबसे आगे अगर कोई है, तो काँग्रेस पार्टी है! आज जब देश को एकता और एकजुटता की जरूरत है, काँग्रेस के नेता देश को बांटने में लगे हैं। आज जब देश को भरोसे की जरूरत है, काँग्रेस भय और अफवाह फैलाने में लगी है। आज जब देश को संयम की जरूरत है, काँग्रेस लोगों को उकसाने में जुटी है। राजनैतिक गिद्धों की तरह कॉंग्रेस इस इंतज़ार में है कि कब देश परेशानी में बढ़े, और उसके बहाने उनको सियासी फायदा मिले!

भाइयों बहनों,

आज दुनिया के छोटे से लेकर बड़े सुपरपावर देशों तक में, डीजल पेट्रोल के दाम कहीं 10 पर्सेंट, कहीं 20 पर्सेंट, कहीं 25 पर्सेंट प्रतिशत तक बढ़े हैं। लेकिन, भारत इसका असर देश की जनता पर नहीं पड़ने दे रहा है। काँग्रेस को ये सहन नहीं हो रहा। इसलिए,वो लगातार अफवाहें फैला रही है, ताकि, देश में डर का माहौल बने, और लोग पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर लाइन लगाकर खड़े हों, अव्यवस्था फैल जाए! उसे लेकर ये लोग दुष्प्रचार करें, ये इनकी मंशा है!

साथियों,

सत्ता से दूरी काँग्रेस पार्टी को बौखला कर देती है। अभी दिल्ली में हुई ग्लोबल AI समिट में भी आपने देखा है, दुनिया भर के मेहमान यहां थे, दिल्ली की एआई समिट की पूरे विश्व में प्रशंसा हो रही थी, लेकिन कैसे विरोध के लिए कांग्रेस के लोगों ने अपने कपड़े तक फाड़ दिए, इनकी कोशिश थी कि दुनिया के सामने भारत की छवि खराब हो! आज के हालात में भी काँग्रेस भारत से नफरत करने वाली विदेशी ताकतों की भाषा बोल रही है। हमें काँग्रेस के इस षड्यंत्र से सावधान रहना है।

साथियों,

भारत किसी भी मुश्किल परिस्थिती का सामना डटकर के सकता है, ये हमने कोरोनाकाल में भी दिखाया है। उसी तरह, ये समय भी साथ रहने का है। हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए, आज जब पूरी दुनिया केवल अपने बचाव में लगी है, भारत न केवल स्थिरता बनाये हुये हैं, बल्कि, विकास के रास्ते पर भी हर दिन आगे बढ़ रहा है। आज गुजरात में हुये हजारों करोड़ के विकास प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास इसका एक जीता जागता उदाहरण है। मैं एक बार फिर, आप सबको इन विकास कार्यों के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। मैं देशवासियों के संयम, सहयोग और अनुशासन के लिए उनका भी बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ।

ए आवजो राम राम आप सबको। ए आवजो राम राम। बहुत आनंद हुआ आप सभी को मिलकर। आपके आशीर्वाद ले के अब आगे बढता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद।