"लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण मानदंडों में से एक है –इसके शिकायत निवारण प्रणाली की ताकत; एकीकृत लोकपाल योजना इस दिशा में बहुत आगे तक जाएगी”
"खुदरा प्रत्यक्ष योजना, अर्थव्यवस्था में सभी को शामिल करने की मजबूती देगी क्योंकि यह मध्यम वर्ग, कर्मचारियों, छोटे व्यापारियों और वरिष्ठ नागरिकों को उनकी छोटी बचत के साथ सीधे और सुरक्षित रूप से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश का अवसर देगी"
"सरकार के उपायों से बैंक-प्रशासन में सुधार हो रहा है और इस प्रणाली के प्रति जमाकर्ताओं का विश्वास मजबूत हो रहा है"
"हाल के दिनों में सरकार जो बड़े-बड़े फैसले ले रही थी, उसका प्रभाव बढ़ाने में आरबीआई के फैसलों ने भी मदद की"
"6-7 साल पहले तक, भारत में बैंकिंग, पेंशन और बीमा, एक विशिष्ट क्लब की तरह हुआ करते थे"
“केवल 7 वर्षों में, भारत ने डिजिटल लेनदेन के मामले में 19 गुना छलांग लगाई है; आज हमारी बैंकिंग प्रणाली देश में कहीं भी,कभी भी, 24 घंटे, 7 दिन और 12 महीने काम कर रही है”
"हमें देश के नागरिकों की आवश्यकताओं को केंद्र में रखना होगा और निवेशकों के भरोसे को निरंतर मजबूत करते रहना होगा" "मुझे विश्वास है कि आरबीआई एक संवेदनशील और निवेशक-अनुकूल गंतव्य के रूप में भारत की नई पहचान को मजबूती प्रदान करना जारी रखेगा"

नमस्कार जी, वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी, रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री शक्तिकांत दास जी, कार्यक्रम में उपस्थित अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों, कोरोना के इस चुनौतीपूर्ण कालखंड में देश के वित्त मंत्रालय ने, RBI और अन्य वित्तीय संस्थाओं ने बहुत प्रशंसनीय काम किया है। अमृत महोत्सव का ये कालखंड, 21वीं सदी का ये महत्वपूर्ण दशक देश के विकास के लिए बहुत महत्व रखता है। ऐसे में RBI की भी भूमिका बहुत बड़ी है बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे पूरा विश्वास है कि टीम RBI, देश की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगी।

साथियों,

बीते 6-7 वर्षों से, केंद्र सरकार, सामान्य मानवी, उसके हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए काम कर रही है। एक रेग्यूलेटर के तौर पर RBI, अन्य वित्तीय संस्थाओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखता है। मुझे खुशी है कि RBI ने भी सामान्य मानवी की सुविधा बढ़ाने के लिए, सामान्य नागरिक को ध्यान में रखते हुए लगातार अनेक कदम उठाए हैं। आज उसमें एक और कदम जोड़ा है। आज जिन दो योजनाओं को लॉन्च किया गया है, उनसे देश में निवेश के दायरे का विस्तार होगा और कैपिटल मार्केट्स को Access करना, निवेशकों के लिए अधिक आसान, अधिक सुरक्षित बनेगा। Retail direct scheme में देश के छोटे निवेशकों को गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ में इंवेस्टमेंट का सरल और सुरक्षित माध्यम मिल गया है। इसी प्रकार, Integrated ombudsman लोकपाल scheme के बैंकिंग सेक्टर में One Nation, One Ombudsman यह System ने आज साकार रूप लिया है। इससे बैंक कस्टमर्स की हर शिकायत, हर समस्या का समाधान समय पर, बिना परेशानी के हो सकेगा। और मेरा यह स्पष्टमत है कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत आप Grievance redressal system में कितने मजबूत हैं कितने सवेंदनशील है, कितने प्रोएक्टिव है, वहीं तो लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है।

साथियों,

अर्थव्यवस्था में सभी की भागीदारी को प्रमोट करने की जो भावना है, उसको Retail Direct Scheme नई ऊंचाई देने वाली है। देश के विकास में Government Securities Market की अहम भूमिका से आमतौर पर लोग परिचित हैं। विशेष रूप से आज जब देश अपने फिज़िकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने में जुटा है, अभूतपूर्व इंवेस्टमेंट कर रहा है, तब छोटे से छोटे निवेशक का प्रयास और सहयोग, भागीदारी बहुत काम आने वाली है। अभी तक गवर्नमेंट सिक्योरिटी मार्केट में हमारे मध्यम वर्ग, हमारे कर्मचारियों, हमारे छोटे व्यापारी, सीनियर सिटिजंस यानि जिनकी छोटी सेविंग्स है उनको सिक्योरिटीज़ में निवेश के लिए बैंक, इंश्योरेंस या म्युचुअल फंड्स जैसे Indirect रास्ते अपनाने पड़ते थे। अब उन्हें सुरक्षित निवेश का एक और बेहतरीन विकल्प मिल रहा है। अब देश के एक बहुत बड़े वर्ग को, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ में, देश की संपदा के निर्माण में सीधा निवेश करने में और आसानी होगी। ये भी आप जानते हैं कि भारत में सभी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ में guaranteed settlement का प्रावधान होता है। ऐसे में छोटे निवेशकों को सुरक्षा का एक आश्वासन मिलता है। यानि छोटे निवेशक सुरक्षित निवेश पर अच्छे रिटर्न का भरोसा मिलेगा और सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए देश के समान्य मानवी की आशा आकांक्षाओं के अनुरुप नया भारत बनाने के लिए जो- जो व्यवस्थाएं विकसित करनी चाहिए, इसके लिए ज़रूरी संसाधन मिलेंगे। और यही तो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए नागरिक और सरकार की सामूहिक शक्ति है, सामूहिक प्रयास है।

साथियों,

आमतौर पर Finance की बातें जरा टेक्नीकल हो जाती हैं, सामान्य मानवी हेडलाइन पढ़कर छोड़ देता है और इसलिए सामान्य मानवी को बेहतर तरीके से इन बातों को समझाना और उनको समझाना मैं समझता हूँ आज समय की मांग है। क्योंकि financial inclusion की बात जब हम करते हैं। तब इस देश के आखिरी व्यक्ति को भी इस process का हिस्सा हम बनाना चाहते हैं। आप एक्सपर्ट्स इन सारी बातों से भलीभांति परिचित हैं, लेकिन देश के सामान्य जन के लिए भी ये जानना, उनकी बहुत मदद करेगा। जैसे उन्हें पता होना चाहिए कि इस योजना के तहत फंड मैनेजर्स की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, सीधा "Retail Direct Gilt (गिल्ट) RDG Account'' खोला जा सकता है। ये अकाउंट भी ऑनलाइन खोला जा सकता है और सिक्योरिटीज़ की खरीद-फरोख्त भी ऑनलाइन संभव है। सैलरी वालों या फिर पेंशनर्स के लिए घर बैठे-बैठे सुरक्षित निवेश का ये बहुत बड़ा विकल्प है। इसके लिए कहीं भी आने-जाने की ज़रूरत नहीं है, फोन और इंटरनेट से ही आप मोबाइल फोन पर इंटरनेट केनक्टिविटी, आपका काम हो जाएगा। ये RDG अकाउंट, निवेशक के savings accounts से भी लिंक होगा। जिससे सेल-परचेज़ ऑटोमेटिक खरीद- फरोख्त का जो काम है ऑटोमेटिक संभव हो सकेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, लोगों को इससे कितनी आसानी होगी।

साथियों,

Financial Inclusion और Ease of Access जितनी जरूरी है, Ease of Investment और बैंकिंग सिस्टम पर सामान्य जन का भरोसा भी सामान्य जन के लिए सुविधा भी सामान्य जन के लिए सरलता भी उतना ही आवश्यक है। एक मज़बूत बैंकिंग सिस्टम मज़बूत होती अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज़रूरी है। 2014 के पहले कुछ सालों में देश के बैंकिंग सिस्टम को जिस प्रकार से नुकसान पहुंचाया गया था, आज हर किसी को पता है, कि कैसी स्थितियां पैदा हो गई थी, क्या कुछ नहीं हुआ था। बीते 7 सालों में, NPAs को पारदर्शिता के साथ Recognize किया गया, Resolution और Recovery पर ध्यान दिया गया, पब्लिक सेक्टर के बैंकों को Re-capitalize किया गया, फाइनेंशियल सिस्टम और पब्लिक सेक्टर बैंकों में एक के बाद एक रिफॉर्म्स किए गए। जो Wilful defaulters, पहले सिस्टम से खिलवाड़ करते थे, अब उनके लिए मार्केट से फंड जुटाने का रास्ता बंद कर दिया गया है। पब्लिक सेक्टर बैंकों से जुड़ी गवर्नेंस में सुधार हो, डिसीजन मेकिंग, ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ी आज़ादी हो, छोटे बैंकों को मर्ज कर बड़े बैंकों का निर्माण हो या फिर National Asset Reconstruction Company Limited की स्थापना हो, इन सभी कदमों से आज बैंकिंग सेक्टर में नया विश्वास, नई ऊर्जा लौट रही है।

साथियों,

बैंकिंग सेक्टर को और मज़बूत करने के लिए Co-operative बैंकों को भी RBI के दायरे में लाया गया। इससे इन बैंकों की गवर्नेंस में भी सुधार आ रहा है और जो लाखों depositors हैं, उनके भीतर भी इस सिस्टम के प्रति विश्वास मजबूत हो रहा है। बीते कुछ समय में depositors के हितों को देखते हुए ही, अनेक फैसले लिए गए हैं। One nation, One Ombudsman System से Depositors और Investors First के कमिटमेंट को बल मिला है। आज जो योजना लॉन्च हुई है, इससे बैंक, NBFCs और Pre-Paid Instrument में 44 करोड़ लोन अकाउंट और 220 करोड़ डिपॉजिट अकाउंट इसके जो धारक है उन धारकों को सीधी राहत मिलेगी। अब RBI के द्वारा रेगुलेटेड सभी संस्थाओं के लिए खाता धारकों की शिकायतों को दर्ज करने, ट्रैक करने और मॉनीटर करने का एक ही प्लेटफॉर्म होगा। यानि, शिकायत निवारण के लिए खाता धारक को अब एक और आसान विकल्प मिला है। जैसे कि, अगर किसी का बैंक अकाउंट लखनऊ में हो और वो दिल्ली में काम कर रहा हो। तो पहले होता ये था कि उसको लखनऊ के Ombudsman को ही शिकायत करनी पड़ती थी। लेकिन अब उसे भारत में कहीं से भी अपनी शिकायत दर्ज करने की सुविधा मिल गई है। मुझे ये भी बताया गया है कि ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों को एड्रेस करने के लिए RBI ने इस योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक उपयोग का प्रावधान किया है। इससे बैंक और जांच करने वाली एजेंसियों के बीच कम से कम समय में बेहतर तालमेल सुनिश्चित हो सकेगा। जितनी जल्दी एक्शन होगा, फ्रॉड से निकाली गई रकम की रिकवरी की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ऐसे कदमों से digital penetration और customer inclusiveness का दायरा भी बड़े विश्वास के साथ बढ़ेगा, कस्टमर का भरोसा और बढ़ेगा ।

साथियों,

बीते सालों में देश के बैंकिंग सेक्टर में, फाइनेंशियल सेक्टर में Inclusion से लेकर technological integration और दूसरे रिफॉर्म्स किए हैं, उनकी ताकत हमने कोविड के इस मुश्किल समय में भी देखी है। और उसके कारण सामान्य मानवी की सेवा करने का एक संतोष भी पैदा होता है। सरकार जो बड़े-बड़े फैसले ले रही थी, उसका प्रभाव बढ़ाने में RBI के फैसलों ने भी बहुत बड़ी मदद की है। और मैं RBI गर्वनर और उनकी पूरी टीम को सार्वजनिक रुप से इस संकटकाल में जिस प्रकार से उन्होंने चीजों को हिम्मतपूर्वक जो निर्णय किये हैं इसके लिए उन्हे बहुत- बहुत बधाई देता हूँ। सरकार द्वारा जिस क्रेडिट गारंटी स्कीम की घोषणा की गई थी, उसके तहत लगभग 2 लाख 90 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का लोन स्वीकृत किया जा चुका है। इसकी मदद से सवा करोड़ से अधिक लाभार्थियों ने अपना उद्यम और मजबूत किया है। इसमें से अधिकतर MSMEs हैं, हमारे मध्यम वर्ग के छोटे उद्यमी हैं।

साथियों,

कोविड काल में ही सरकार द्वारा छोटे किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड देने के लिए विशेष मुहिम चलाई गई। जिससे ढाई करोड़ से अधिक किसानों को केसीसी कार्ड्स भी मिले और लगभग पौने 3 लाख करोड़ का कृषि ऋण भी उन्हें मिल गया। पीएम स्वनिधि से करीब 26 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को जो ठेला चलाते हैं, सब्जी बेचते हैं। ऐसे 26 लाख लोगों को ऋण मिल चुका है, और आप कल्पना कर सकते हैं। कोविडकाल, इस संकटकाल के बाद 26 लाख से ज्यादा हमारे स्ट्रीट वैंड्रर्स को मदद मिल जाए, कितना बड़ा उनके लिए संबल हो गया । इस योजना ने उन्हें बैंकिंग सिस्टम से भी जोड़ दिया है। ऐसे अनेक interventions ने गांव और शहरों में आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरु करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

साथियों,

6-7 साल पहले तक भारत में बैंकिंग, पेंशन, इंश्योरेंस, ये सबकुछ एक exclusive club जैसा हुआ करता था। देश का सामान्य नागरिक, गरीब परिवार, किसान, छोटे व्यापारी-कारोबारी, महिलाएं, दलित-वंचित-पिछड़े, इन सबके लिए ये सब सुविधाएं बहुत दूर थीं। जिन लोगों पर इन सुविधाओं को गरीब तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने भी इस पर कभी ध्यान नहीं दिया। बल्कि बदलाव ना हो, कोई परिवर्तन न आएं, गरीब तक जाने के रास्तों बंद करने के लिए जो कुछ भी तर्क दे सकते हैं। भांति-भांति के बहाने यहीं एक परंपरा हो गई थी। और क्या कुछ कहां नहीं जाता था, खुलेआम बेशर्मी के साथ कहा जाता था। अरें, बैंक ब्रांच नहीं है, स्टाफ नहीं है, इंटरनेट नहीं है, लोगों में जागरूकता नहीं है, ना जाने कैसे- कैसे तर्क दिए जाते थे। Unproductive savings और Informal lending, इससे सामान्य नागरिक की स्थिति भी खराब हो रही थी और देश के विकास में उसकी भागीदारी भी न के बराबर थी। पेंशन और बीमा का तो यही माना जाता था कि ये सब समृद्ध परिवारों के भाग्य में ही है। लेकिन आज स्थिति बदल रही है। आज Financial Inclusion ही नहीं, बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में Ease of access भारत की पहचान बन रही है। आज अलग-अलग पेंशन योजनाओं के तहत समाज का हर व्यक्ति 60 वर्ष की आयु के बाद मिलने वाली पेंशन की सुविधा से जुड़ सकता है। पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना और पीएम सुरक्षा बीमा योजना के तहत लगभग 38 करोड़ देशवासी, 2-2 लाख रुपए की बीमा सुरक्षा से जुड़े हैं। देश के करीब-करीब हर गांव में 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक ब्रांच या बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट की सुविधा पहुंच रही है। पूरे देश में आज लगभग साढ़े 8 लाख बैंकिंग टच प्वाइंट्स हैं, जो देश के हर नागरिक की बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बढ़ा रहे हैं। जनधन योजना के तहत 42 करोड़ से अधिक ज़ीरो बैलेंस बैंक अकाउंट्स खोले गए, जिसमें आज गरीब के हज़ारों करोड़ रुपए जमा हैं। मुद्रा योजना से महिलाओं, दलित-पिछड़े-आदिवासियों में व्यापारियों-कारोबारियों की एक नई पीढ़ी सामने आई है, और स्वनिधि योजना से रेहड़ी-ठेला-फेरी चलाने वाले भी institutional lending से जुड़ पाए हैं।

साथियों,

Last-mile financial inclusion से जब digital empowerment जुड़ गया, तो उसने देश के लोगों को एक नई ताकत दी है। 31 करोड़ से अधिक रुपये कार्ड, करीब 50 लाख PoS/ m-PoS मशीनों ने आज देश के कोने-कोने में डिजिटल ट्रांजेक्शन को संभव बनाया है। UPI ने तो बहुत ही कम समय में डिजिटल ट्रांजेक्शंस के मामले में भारत को दुनिया का अग्रणी देश बना दिया है। सिर्फ 7 सालों में भारत ने डिजिटल ट्रांजेक्शंस के मामले में 19 गुणा की छलांग लगाई है। आज 24 घंटे, सातों दिन और 12 महीने देश में कभी भी, कहीं भी हमारा बैंकिंग सिस्टम चालू रहता है। इसका लाभ भी हमने कोरोना के इस काल में देखा है।

साथियों,

RBI का एक संवेदनशील रेगुलेटर होना और बदलती हुई परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार रखना, देश की एक बड़ी ताकत है। आजकल आप देख रहे हैं कि Fintech जैसे क्षेत्र में हमारे भारतीय स्टार्टप्स कैसे ग्लोबल चैंपियंस बन रहे हैं। इस क्षेत्र में टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है। हमारे देश के युवाओं ने भारत को Innovations का ग्लोबल पावर हाउस बना दिया है। ऐसे में ये जरूरी है कि हमारे regulating systems, इन बदलावों के प्रति जागरूक रहें और हमारे financial systems को विश्व स्तरीय बनाए रखने के लिए suitable ecosystem का निर्माण करें, उसे सशक्त करें।

साथियों,

हमें देश की, देश के नागरिकों की आवश्यकताओं को केंद्र में रखना ही होगा, निवेशकों के भरोसे को निरंतर मजबूत करते रहना होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि एक संवेदनशील और इन्वेस्टर फ्रेंडली डेस्टीनेशन के रूप में भारत की नई पहचान को RBI निरंतर सशक्त करता है और मुझे विश्वास है कि सशक्त करता रहेगा। एक बार फिर इन बड़े रिफॉर्म्स के लिए मैं आप सब को सभी स्टैकहोल्डर्स को initiative लाने वाले सबको टेक्नोलोजी की छलांग लगाने के लिए आप सबको बहुत शुभकामनाएं देता हूँ ! बहुत- बहुत धन्यवाद !

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Govt directs faster processing of city gas projects, hikes commercial LPG allocation to ease supply stress

Media Coverage

Govt directs faster processing of city gas projects, hikes commercial LPG allocation to ease supply stress
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
यह नया भारत है, जो अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ता: पीएम मोदी
March 23, 2026
Today, India is moving forward with a new confidence; Now India faces challenges head-on: PM
From the Gulf to the Global West and from the Global South to neighbouring countries, India is a trusted partner for all: PM
What gets measured gets improved and ultimately gets transformed: PM
This is the new India, It is leaving no stone unturned for development: PM

नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!