राजस्थान के लिए यह एक बहुत ही खास दिन, विमानन, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में विकास की पहल से इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, विकास में तेजी आएगी और जीवन-यापन आसान होगा: प्रधानमंत्री
चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी और अप्रत्याशित क्यों न हो, 'नया भारत' न तो अपने संकल्पों से पीछे हटता है और न ही अपनी गति धीमी करता है: प्रधानमंत्री
आज ही जोधपुर में नए एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन हुआ है; इससे मारवाड़ क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार को नई गति मिलेगी: प्रधानमंत्री
21वीं सदी के 'नए भारत' के संकल्प और प्रयासों ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर जीत हासिल की है: प्रधानमंत्री
भारत ने हर स्तर पर सही फ़ैसले लिए, समय रहते संकट का सही आकलन किया, एक असरदार रणनीति बनाई और भारत के संसाधनों का संतुलित तरीक़े से इस्तेमाल किया; भारत ने अपनी कूटनीतिक ताक़त का सकारात्मक इस्तेमाल किया और इसी तरह भारत इस संकट से बाहर निकलने में कामयाब रहा: प्रधानमंत्री
भारत ने हर स्तर पर सही निर्णय लेकर खुद को ऊर्जा संकट से उबारा: पीएम
आज मैं हमारे 140 करोड़ नागरिकों का धन्यवाद करता हूं और आभार प्रकट करता हूं कि इस मुश्किल समय में वे मजबूती से देश के साथ खड़े रहे: पीएम
हमारे 140 करोड़ नागरिकों के विश्वास के बल पर ही देश आगे बढ़ पाया है: पीएम
अब शेखावाटी में पानी पहुंचाने के लिए राजस्थान और हरियाणा सरकार सहयोग करेंगी, जिससे पूरे शेखावाटी क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा: पीएम


भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी जी, प्रेमचंद बैरवा जी, राजस्थान सरकार के सभी मंत्रीगण, सांसद और विधायक साथी, और मेरे प्यारे भाइयों-बहनों।

मुझे बताया गया कि आज राजस्थान में 10-12 हजार स्थान पर लाखों की तादाद में इस कार्यक्रम में लोग जुटे हैं, और अभी मैं स्क्रीन पर भी देख रहा था, जहां भी देखूं, लोग ही लोग ही नजर आ रहे हैं। टेक्नॉलोजी के माध्यम से राजस्थान के कोने-कोने से जुड़े हुए, सभी मेरे राजस्थान के भाई बहनों को भी मैं यहां से प्रणाम करता हूं।

साथियों,

गर्मी के इस मौसम में स्थान-स्थान पर इतनी बड़ी मात्रा में लोगों का एकत्र आना, हम सबको आशीर्वाद देना, ये दिखाता है कि भाजपा सरकार के प्रयासों पर आपका विश्वास कितना बुलंद है। मैं इस समर्थन और स्नेह के लिए राजस्थान की माटी का ऋणी हूं।

भाइयों- बहनों,

ये धरती अनगिनत वीरों के शौर्य की साक्षी रही है। इस रण के कण-कण में, कण-कण ने हमें स्वाभिमान को सर्वोपरि रखने की सीख दी है। और स्वाभिमान व्यक्ति का या फिर स्वाभिमान देश का, वो तभी ऊंचा रह सकता है, जब वो आत्मनिर्भर हो, दूसरों पर कम से कम निर्भर हो। आज राजस्थान की इस धरती से भारत ने विकसित होने, आत्मनिर्भर होने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। आज इस रिफाइनरी को देश को समर्पित किया गया है। ये रिफाइनरी यहां हजारों लोगों के रोजगार का माध्यम बनेगी। मैं राजस्थान के युवाओं को इस रिफाइनरी की विशेष तौर पर बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का दिन साक्षी है कि बीजेपी सरकारें परियोजनाओं को सिर्फ शिलान्यास करके नहीं छोड़ती है, बल्कि हम उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी दिन रात एक कर देते हैं। दो महीने पहले यहां जो हादसा हुआ, उसके बाद इतनी तेजी से काम पूरा कर लेना, ये भी परिश्रम की पराकाष्ठा का उदाहरण है। आप सबने दिखा दिया है चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी और अप्रत्याशित क्यों न हो, नया भारत अपने संकल्पों से न पीछे हटता है, और न ही अपनी रफ्तार कम करता है।

भाइयों और बहनों,

आज राजस्थान में विकास के कई और भी कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। आज ही, जोधपुर में नए एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन किया गया है। और मैं सोशल मीडिया में देख रहा था कि नए टर्मिनल का आर्केटेक्चर इंटिरियर, ये सोशल मीडिया में छाया हुआ है। चारों तरफ राजस्थान ही राजस्थान दिख रहा है।

साथियों,

ये मारवाड़ में पर्यटन, व्यापार और रोजगार को नई गति देगा। इस कार्यक्रम में जो लोग जोधपुर से जुड़े हैं, मैं उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। जोधपुर से ही आज उड़ान योजना के नए चरण की भी शुरुआत हुई है। इसके तहत छोटे-छोटे शहरों और दूर-दराज के क्षेत्रों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा। साथ ही, अब जयपुर में मेट्रो का विस्तार भी होने जा रहा है।

भाइयों-बहनों,

शेखावटी क्षेत्र के जल संकट को दूर करने का इंतज़ार भी अब खत्म होने जा रहा है। मैं इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए राजस्थान के मेरे भाई-बहनों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज राजस्थान के करीब 54 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र भी मिला है। मैं नियुक्ति पत्र पाने वाले सभी युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं, और उनका युवा मन राजस्थान के उज्ज्वल भविष्य को और मजबूती देगा, मैं सबको शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

आज राजस्थान की इस धरती से, मैं देश के एक और सामर्थ्य की चर्चा करूंगा। आप भी देख रहे हैं, पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है, हर देश त्रस्त है। इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं।

लेकिन साथियों,

21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर, 21वीं सदी के नए भारत की इच्छा-शक्ति और भारत के प्रयास इन संकटों भारी पड़े हैं। भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए, संकट का समय रहते सटीक आंकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई, भारत के संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया। भारत की diplomatic पावर का सकारात्मक इस्तेमाल किया। और तब जाकर भारत संकट से उबर पाया है।

साथियों,

जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताक़तें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थीं, तब किस स्केल पर दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वो मेहनत, वो प्रयास, वो धैर्य, नीतिगत स्तर पर, कूटनीति स्तर पर उठाए गए एक-एक संवेदनशील कदम, कभी न कभी इतिहास लिखेगा, ये सब अभूतपूर्व हैं। मैं एक उदाहरण देता हूं, रसोई गैस, यानी LPG के विषय में। हम सब जानते हैं, हमारी जरूरतों की करीब 60 प्रतिशत LPG अन्य देशों से आयात की जाती थी, और इसमें से भी 90 प्रतिशत LPG गल्फ देशों से आ रही थी, होर्मुज से होकर के आ रही थी। और अचानक से युद्ध के हालातों ने उस सप्लाई को लगभग बंद कर दिया। आप अंदाजा लगा सकते हैं, हमारे देश में कितना बड़ा हाहाकार मचने जा रहा था। लेकिन, राजस्थान की इस धरती ने हमें चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया है। और इसलिए हमने संकट शुरू होते ही रिफाइनरीज़ के सामर्थ्य पर फोकस किया। औद्योगिक काम के लिए जो गैस बनती थी, उसकी जगह रिफाइनरीज को रसोई गैस-LPG बनाने के लिए कहा गया। और, 7 दिनों के भीतर-भीतर LPG के उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई, पहले जो 35 हजार मीट्रिक टन LPG का उत्पादन देश में होता था, संकट के दौरान वो 54 हजार मीट्रिक टन तक बढ़ गया। जिन रिफाइनरीज़ ने पहले कभी LPG नहीं बनाया था, उन्हें भी इसके लिए configure किया गया।

साथियों,

रसोई गैस की डिमांड का पूरा लोड LPG पर न पड़े, सरकार ने इसका भी ध्यान रखा। PNG कनेक्शन, यानी पाइप से रसोई गैस के कनेक्शन बढ़ाने का अभियान चलाया गया, बहुत ही कम समय में भारत ने करीब 11 लाख से ज़्यादा घरों को गैस के पीएनजी कनेक्शन से जोड़ दिया।

भाइयों बहनों,

हमने एक ओर सप्लाई को सुनिश्चित किया। दूसरी ओर, घरेलू उपभोक्ताओं पर बहुत बोझ भी नहीं पड़ने दिया। जो हालात थे, उनमें घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत दो हजार रुपए तक जा सकती थी! बड़े-बड़े मार्केट एक्सपर्ट्स यही आकलन कर रहे थे। लेकिन, हमारे यहाँ अभी भी घरेलू LPG सिलिंडर साढ़े नौ सौ रुपए से भी कम में दिया जा रहा है। गरीबों को तो उज्ज्वला सिलिंडर ₹650 के भी भीतर पड़ रहा है! अब से दो दिन पहले, सरकार ने कमर्शियल गैस की कीमतों में भी बहुत बड़ी कटौती कर दी है। ये दिखाता है कि हमारी सरकार कितनी संवेदनशीलता से काम कर रही है।

साथियों,

युद्ध की वजह से डीजल पेट्रोल पर आया संकट भी बहुत बड़ा था। हमारे देश में तेल के बड़े-बड़े कुएं नहीं हैं। जब ये संकट बढ़ा, तो क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं थीं। आयात के रास्ते भी बंद थे। दुनिया के कई देशों में डीजल पेट्रोल की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत का इजाफा हो गया। कई देशों में तो डीजल पेट्रोल कोटे के आधार पर मिलने लगा था। लेकिन, भारत में एक दिन भी ऐसे हालात नहीं आए। अफवाएं बहुत फैलाई गई, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए, लेकिन जिनके इरादे गलत थे वो सफल नहीं हो पाए। दूर-सुदूर इलाकों में भी, छोटी-मोटी अड़चनों के अलावा सप्लाई की कोई बड़ी चुनौती नहीं आई। अप्रैल से जून के बीच ही, अकेले डीजल पेट्रोल में 75 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा कंपनियों को उठाना पड़ा। यानी एक नई रिफाइनरी बन जाए, इतना घाटा सहना पड़ा। और इस घाटे को पूरा करने की जिम्मेदारी सरकारी खजाने से उठाई गर्ह। हमने प्रति लीटर 10 रुपए की एक्साइज़ ड्यूटी भी कम की। और, बहुत ज्यादा बोझ जनता पर नहीं पड़ने दिया।

साथियों,

युद्ध के इसी समय में भारत की दूसरे देशों के साथ जो दोस्ती है ना, वो दोस्ती भी बहुत काम आई। जब ये संकट शुरू हुआ था, उससे पहले भारत 25-26 देशों से ही ईंधन का, ऊर्जा का आयात करता था। लेकिन संकट के समय भारत की डिप्लोमेसी का जलवा दिखा, दूसरे देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध इस संकट की घड़ी में बहुत काम आए। युद्ध के दौरान ही भारत 40 से ज्यादा देशों से ईंधन मंगाने लगा। भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारे लिए राष्ट्रहित, और राष्ट्र के नागरिकों का हित सर्वोपरि है। नागरिक देवो भव: ये हमारा मंत्र है।

साथियों,

इतनी अप्रत्याशित चुनौती से देश ऐसे ही नहीं उबरा, इसके पीछे हमारी एक दशक से चल रही दूरदर्शी नीतियों की सफलता भी हैं। आज हम राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन यहाँ कर रहे हैं। हमने 2017 में इसके लिए MoU साइन किया था। लेकिन, 2018 से 2023 तक, राजस्थान में काँग्रेस सरकार रही। काँग्रेस के असहयोग के कारण, यहां का काम लगभग ठप्प ही रह गया। लेकिन, जैसे ही डबल इंजन सरकार आई, इसका काम तेजी से आगे बढ़ा, आज हम इसका लोकार्पण भी कर रहे हैं। और आप तो जानते हैं मेरी कार्यशैली। जिसका शिलान्यास हम करते हैं, उसका लोकार्पण भी हम ही करते हैं। इसी तरह, भारत ने अपनी रिफाइनरी क्षमता को लगातार बढ़ाया है। अमेरिका में पिछले 50 वर्षों में एक भी नई रिफाइनरी नहीं बनी है। यूरोप की रिफाइनरी क्षमता लगातार कम होती गई है। वहीं, भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी रिफाइनरी क्षमता वाला देश बन चुका है। और हम यहां रूकने वाले नहीं हैं, आने वाले वर्षों में ये क्षमता और भी बढ़ने वाली है। इन्हीं प्रयासों के कारण भारत सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट से लड़कर उबरा है।

साथियों,

दुनिया में युद्ध और अशांति से हमारे किसानों के लिए भी चुनौतियाँ पैदा होती हैं। अभी वेस्ट एशिया क्राइसिस, खाड़ी के देशों का संकट और इसके पहले यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया में खाद का बड़ा संकट भी पैदा हुआ, फर्टिलाइजर के लिए समस्या पैदा हो गई। यूक्रेन युद्ध के बाद एक समय एक यूरिया बोरी की कीमत 3 हजार रुपए से भी ऊपर पहुँच गई थी। लेकिन, हम अपने किसानों को जो दुनिया के बाजार में 3 हजार की बोरी थी, हम मेरे देश के किसानों को हम सिर्फ 3 सौ रुपए में यूरिया देते रहे। और इसके लिए खजाने से लाखों करोड़ रुपए खर्च करने पड़े, सब्सिडी दी गई। आपूर्ति के लिए जो सप्लाई चेन्स प्रभावित हुई थीं, भारत ने उसके भी समाधान निकाले। सरकार ने वैकल्पिक रास्ते तलाशे। हमने कई देशों में हमारे दूतावासों को विशेष ज़िम्मेदारी सौंपी। दूसरे देशों से उर्वरक खरीदने की, खाद खरीदने की पहल की। आयात के साथ-साथ हमने घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया, उस पर ध्यान केंद्रित किया। और इतना ही नहीं, हमने प्राकृतिक खेती जैसे विकल्पों को भी बढ़ावा दिया। और जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ भी सख्ती की।

साथियों,

इसी तरह, हमने हमारे उद्योगों का, MSMEs का भी ध्यान रखा। MSMEs को बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा था। इसलिए हम Emergency Credit Line Guarantee Scheme का एक नया चरण लेकर आए। इस स्कीम के तहत, बैंकों ने MSMEs को 20 परसेंट तक का अतिरिक्त लोन दिया, और सरकार ने MSMEs के इन सभी लोन के लिए 100 परसेंट गारंटी, और ये मोदी की गारंटी है। इसका बहुत लाभ लघु उद्योगों को मिला, कुटीर उद्योगों को मिला। ऐसे ही अनेक फैसलों का नतीजा है कि आज हमारे छोटे-बड़े उद्योग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

साथियों,

हमारी सरकार ने निरंतर निर्णय लिए, क्योंकि, हमें भारत के सामर्थ्य पर भरोसा था। हमें हमारे देशवासियों की क्षमताओं पर, उनकी सूझबूझ पर हमार शत प्रतिशत भरोसा था। और आज, मैं 140 करोड़ देशवासियों का आभार प्रकट करता हूँ, मैं देशवासियों को नमन करते हुए धन्यवाद कहता हूँ, जिस तरह, वो इस मुश्किल समय में देश के साथ मजबूती से खड़े रहे, जिस तरह, देशवासियों ने अफवाह, डर और भ्रम फैलाने वालों का सामना किया, देश में अस्थिरता फैलाने की साज़िशों को नाकाम किया, देश उसी विश्वास के भरोसे आगे बढ़ पाया है। जो लोग भारत को असफल होते देखना चाह रहे थे, इसके लिए भविष्यवाणी भी करने लग गए थे, वो जरूर आज निराशा की गर्त में पड़े होंगे।

साथियों,

आज विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास के साथ ही मुझे यहाँ एक पेड़ मां के नाम, खेजड़ी का पौधा लगाने का सौभाग्य भी मिला है। मैं जानता हूं कि राजस्थान में खेजड़ी का कितना महत्व है। बढ़ते रेगिस्तान को रोकने में इसकी बहुत सार्थक भूमिका रही है। इसीलिए, ये वृक्षारोपण हमारी कार्य संस्कृति का उदाहरण भी है। हमें प्रगति की नई ऊंचाइयों को भी छूना है। और, हमारे पर्यावरण का संरक्षण भी करना है। इसी सोच के साथ, हमारी सरकार ऊर्जा के दूसरे स्रोतों पर भी काम कर रही है। खासकर, राजस्थान पर सूर्य देवता की कुछ ज्यादा ही कृपा है। इसलिए, यहां विश्व-स्तरीय सोलर पार्क बनाने का काम चल रहा है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत भी, राजस्थान में डेढ़ लाख से ज्यादा घरों को सोलर से जोड़ा जा चुका है। पीएम कुसुम योजना के तहत भी राजस्थान में किसानों को 65 हजार से ज्यादा सोलर पंप भी दिए गए हैं।

साथियों,

कठिन से कठिन लगने वाले संकल्प भी सिद्ध हो जाते हैं, अगर उनके पीछे की नियत साफ हो। यही, बीजेपी और काँग्रेस में एक बहुत बड़ा अंतर है।

साथियों,

राजस्थान में पानी से जुड़ी परेशानियों का समाधान इसका एक और बड़ा उदाहरण है। आप सब जानते हैं, काँग्रेस की सरकारों ने कभी राजस्थान के जल-संकट को दूर करने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। लेकिन, बीजेपी क्षेत्रवाद और बंटबारे की सियासत नहीं करती। बीजेपी राष्ट्र प्रथम की भावना पर चलती है। हमने जब गुजरात में पानी पहुंचाने की योजनाओं पर काम किया था, और राजस्थान को पानी देने की बात आई थी, मुझे बराबर याद है, हिन्दुस्तान के हर कोने में, एक राज्य दूसरे राज्य से पानी के लिए लंबे अर्से से लड़ाईयां चल रही हैं। राजस्थान के लोगों को भी लगता था कि पता नहीं गुजरात नर्मदा का पानी देगा की नहीं देगा। लेकिन हमारा सौभाग्य था कि राजस्थान में भी बीजेपी सरकार, गुजरात में भी बीजेपी सरकार, उस समय मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था, यहां बहन वसुंधरा जी यहां मुख्यमंत्री थी, और हम दोनों ने मिलकर बिना कोई संघर्ष, बिना कोई वाद-विवाद, बिना कोई आंदोलन, बिना कोई लड़ाई, गुजरात से नर्मदा का पानी राजस्थान के साथ साझा किया। और आज राजस्थान के कई गांवों तक माँ नर्मदा का पानी पहुँच रहा है। अभी भजनलाल जी बड़े भावुक होकर पानी के इस काम का वर्णन कर रहे थे।

भाइयों बहनों,

अब जब राजस्थान और हरियाणा, दोनों राज्यों में भाजपा सरकार है, तो, पहली बार आपसी सहमति से समाधान निकाले गए हैं। अब राजस्थान और हरियाणा सरकार मिलकर शेखावटी तक पानी पहुंचाएंगे। हाल ही में दोनों राज्यों के बीच समझौते पर मुहर भी लग चुकी है। इस समझौते के तहत हथिनीकुंड बैराज से पानी राजस्थान लाया जाएगा। इसके लिए अंडर-ग्राउंड पाइप-लाइन बिछाई जाएगी। इसका लाभ सीकर, चूरू, झुंझुनूं और आसपास के पूरे शेखावटी क्षेत्र के लाखों लोगों को इसका लाभ मिलने वाला है। इस परियोजना पर लगभग 34 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

साथियों,

आने वाले समय में अपर यमुना बेसिन में रेणुका, लखवाड़ और किशाऊ बांधों का निर्माण पूरा होने पर राजस्थान को पानी का और लाभ होगा। गांवों में नल से जल पहुंचाने का काम भी तेजी से आगे बढ़ा है। रामजल सेतु परियोजना भी इसी सोच का परिणाम है। साथ ही, राजस्थान में जल संरक्षण के लिए ‘जल संचय, जन भागीदारी’ भी बड़ी भूमिका निभा रही है। देश में इस अभियान के तहत जल संरक्षण के लिए करीब–करीब 25 लाख सोक पिट्स बने हैं। राजस्थान में भी सवा लाख से ज्यादा सोक पिट्स बनाए गए हैं। इनसे पानी संरक्षित हो रहा है, ग्राउंड-वॉटर का स्तर सुधर रहा है। मैं इन प्रयासों के लिए, केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों को, और, शेखावटी क्षेत्र के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज जब देश कोई संकल्प लेता है, कोई लक्ष्य बनाता है, तो राजस्थान उसके केंद्र में होता है। आज राजस्थान में तेज गति से आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर निर्माण हो रहा है। नए-नए records बन रहे हैं। आज जयपुर मेट्रो फेज़–2 की आधारशिला, और जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन, ये राजस्थान के विकास को और गति देंगे, और नई उड़ान देंगे। जयपुर में फेज़–2 पूरा होने के बाद जयपुर का कुल मेट्रो नेटवर्क 50 किलोमीटर से अधिक हो जाएगा। पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण मेट्रो नेटवर्क एक-दूसरे से जुड़ जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को आसानी तो होगी ही, पर्यटकों के लिए सुविधा भी बढ़ेगी।

साथियों,

आने वाले समय में हमें विकास के और भी नए आयाम छूने हैं। मुझे पूरा भरोसा है, आप सब इसी तरह डबल इंजन सरकार को आशीर्वाद देते रहेंगे। हम साथ मिलकर राजस्थान के नए भविष्य का निर्माण करेंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर राजस्थान रिफ़ाइनरी के लिए, अन्य विकास कार्यों के लिए, देशवासियों को, राजस्थान वासियों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय।

दोनों मुट्ठी ऊपर करके राजस्थान की ताकत नजर आए-

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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पीएम मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीने के महत्व पर जोर डालते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने कहा कि सच्ची वीरता और ताकत किसी भी परिस्थिति में समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर दृढ़ रहने में निहित है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” 

इस सुभाषितम् का यह संदेश है कि व्यक्ति को सदैव आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीना चाहिए। सच्ची वीरता और ताकत इसमें है कि किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता किए बिना सत्य, धैर्य और आत्म-गौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहें।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा; 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥”