'राष्ट्रीय खेल भारत की असाधारण खेल शक्ति का उत्सव है'
'भारत की हर गली, हर कोने में प्रतिभा मौजूद है इसलिए 2014 के बाद हमने खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्रतिबद्धता जताई'
'गोवा की आभा तुलना से परे है'
'खेल की दुनिया में भारत को मिली हाल की सफलता हर युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी प्रेरणा है'
'खेलो इंडिया के जरिए प्रतिभाओं की खोज, उन्हें आगे बढ़ाना, प्रशिक्षण देना और टॉप्स द्वारा ओलंपिक पोडियम तक पहुंचाने का प्रयास हमारा रोडमैप है'
'भारत आज कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है और अभूतपूर्व मानक स्थापित कर रहा है'
'भारत की स्पीड और स्केल की बराबरी कर पाना मुश्किल है'
'भारत की युवा शक्ति के विकसित भारत की युवा शक्ति बनने में माई भारत एक माध्यम बनेगा'
'भारत 2030 में यूथ ओलंपिक और 2036 में ओलंपिक का आयोजन करने के लिए तैयार है, ओलंपिक के आयोजन की हमारी आकांक्षा सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसके ठोस कारण हैं'

भारत माता की जय,

भारत माता की जय,

भारत माता की जय,

गोवा के राज्यपाल श्रीमान पीएस श्रीधरन पिल्लई जी, यहां के लोकप्रिय और युवा, ऊर्जावान मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत जी, खेल मंत्री अनुराग ठाकुर, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे अन्य साथी, मंच पर विराजमान अन्य जनप्रतिनिधिगण, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष बहन पी टी ऊषा जी, देश के कोने-कोने से आए हुए सभी मेरे खिलाड़ी साथी, supporting staff, अन्य पदाधिकारी और नौजवान दोस्तों, भारतीय खेल के महाकुंभ का महासफर आज गोवा आ पहुंचा है। हर तरफ रंग है... तरंग है... रोमांच है...रवानगी है। गोवा की हवा में बात ही कुछ ऐसी है। आप सभी को सैंतीसवें national games के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं, अनेक- अनेक बधाईयां।

साथियों,

गोवा वो धरती है जिसने देश को ऐसे अनेक sports stars दिए हैं। जहां football के प्रति दीवानगी तो गली-गली में दिखती है। और देश के सबसे पुराने football clubs में कुछ यहां हमारे गोवा में हैं। ऐसे खेल प्रेमी गोवा में राष्ट्रीय खेलों का होना, अपने आप में नई ऊर्जा भर देता है।

मेरे परिवारजनों,

ये राष्ट्रीय खेल, ऐसे समय में हो रहे हैं, जब भारत का खेल जगत एक के बाद एक सफलता की नई ऊंचाई प्राप्त कर रहा है। 70 सालों में जो ना हुआ, वो इस बार हमने एशियाई खेलों में होते हुए देखा है और अभी Asian Para Games भी चल रहे हैं। इनमें भी भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 70 से ज्यादा मेडल जीतकर अब तक के सारे records तोड़ दिए हैं। इससे पहले World University Games हुए थे। इसमें भी भारत ने एक नया इतिहास रच दिया। ये सफलताएं यहां आए हर खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये National Games, एक प्रकार से आपके लिए, सभी नौजवानों के लिए, सभी खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत launchpad है। आपके सामने कितने अवसर हैं, उनको ध्यान में रखते हुए पूरे दम-खम के साथ आपको श्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। करोगे ना? पक्का करोगे ? पुराने record तोड़ोगे? मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

मेरे युवा साथियों,

भारत के गांव-गांव, गली-गली में talent की कोई कमी नहीं है। हमारा इतिहास साक्षी है कि अभाव में भी भारत ने champions पैदा किए हैं। मेरे साथ मंच पर हमारी बहन पी टी ऊषा जी बैठी हैं। लेकिन फिर भी हर देशवासी को हमेशा एक कमी खलती थी। हमारा इतना बड़ा देश international sports events की medal tally में, हम बहुत पीछे रह जाते थे। इसलिए 2014 के बाद, हमने देश की इस पीड़ा को राष्ट्रीय संकल्प से पीड़ा को दूर करने का बीड़ा उठाया। हम बदलाव लाए sports infrastructure में, हम बदलाव लाए चयन प्रक्रिया में, हमने उसे और पारदर्शी बनाया। हम बदलाव लाए खिलाड़ियों को आर्थिक मदद देने वाली योजनाओं मेंI हम बदलाव लाए खिलाड़ियों को training देने वाली योजनाओं में। हम बदलाव लाए, समाज की मानसिकता में, पुरानी सोच, पुरानी approach के कारण, हमारे sports infrastructure में जो roadblocks थे, हमने उन्हें एक-एक करके दूर हटाने का काम शुरु किया। सरकार ने talent की खोज से लेकर उनकी handholding कर, Olympic podium तक पहुंचाने का एक roadmap बनाया। इसका परिणाम हम आज पूरे देश में देख रहे हैं।

साथियों,

पहले की सरकारों में sports के budget को लेकर भी संकोच का भाव रहता था। लोग सोचते थे कि - खेल तो खेल ही है, खेल ही है और क्या है? इस पर खर्च क्यों करना! हमारी सरकार ने इस सोच को भी बदला। हमने sports का budget बढ़ाया। इस वर्ष का central sport budget, 9 वर्ष पहले की तुलना में 3 गुणा अधिक है। सरकार ने खेलो इंडिया से लेकर TOPS scheme तक, देश में खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए एक नया ecosystem बनाया है। इन योजनाओं के तहत देशभर से school, college, university स्तर से आप जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की जा रही है। उनकी training, उनकी diet, उनके दूसरे खर्चों पर सरकार बहुत पैसा खर्च कर रही है। TOPS यानि Target Olympic Podium Scheme, इसके तहत देश के शीर्ष खिलाड़ियों को दुनिया की श्रेष्ठ training दी जाती है। आप कल्पना कीजिए, खेलो इंडिया योजना के तहत अभी देशभर के 3 हज़ार युवा, ये हमारे खिलाड़ियों की training चल रही है। इतना बड़ा talent pool खिलाड़ियों का तैयार हो रहा है। और इसमें से हर खिलाड़ी को प्रतिवर्ष 6 लाख रुपए से अधिक की scholarship दी जा रही है। खेलो इंडिया अभियान से निकलने वाले करीब सवा सौ युवा खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों में हिस्सा लिया था। पुराना system होता तो शायद ही इस प्रतिभा को कभी पहचान मिल पाती। इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने 36 medals जीते हैं। खेलो इंडिया से खिलाड़ियों की पहचान करो, उन्हें तैयार करो, और फिर TOPS से उन्हें Olympic Podium Finish की training और temperament दो। ये हमारा roadmap है।

मेरे युवा साथियों,

किसी भी देश के sports sector की प्रगति का सीधा नाता, उस देश की अर्थव्यवस्था की प्रगति से भी जुड़ा होता है। जब देश में negativity हो, निराशा हो, नकारात्मकता हो, तो मैदान पर भी, जीवन के हर क्षेत्र पर भी इसका बहुत बुरा असर दिखता है। भारत की ये successful sports story, भारत की overall success story से अलग नहीं है। भारत आज हर sector में आगे बढ़ रहा है, नए record बना रहा है। भारत की speed और scale का मुकाबला आज मुश्किल है। भारत कैसे आगे बढ़ रहा है, इसका अंदाज़ा आपको बीते 30 दिनों के काम और उपलब्धियों से मिलेगा।

साथियों,

मैं आपका ज्यादा समय नहीं ले रहा हूं। आप कल्पना कीजिए आपका उज्जवल भविष्य कैसे तैयार किया जा रहा है। मेरे नौजवान गौर से सुनिये सिर्फ 30 दिन का मैं काम बताता हूं आपको। बीते 30-35 दिन में क्या हुआ है और आपको लगेगा अगर इस speed और इस scale से देश आगे बढ़ रहा है तो आपके उज्जवल भविष्य की मोदी की गारंटी पक्की है।

बीते 30-35 दिनों में ही,

- नारीशक्ति वंदन अधिनियम, कानून बना।

- गगनयान से जुड़ा एक बहुत ही अहम टेस्ट सफलता से किया गया।

- भारत को अपनी पहली regional rapid rail, नमो भारत मिली।

- बेंगुलुरु metro सेवा का विस्तार हुआ।

- जम्मू-कश्मीर की पहली vistadome train सेवा की शुरुआत हुई।

- इन्हीं 30 दिनों में दिल्ली-वड़ोदरा expressway का उदघाटन हुआ

- भारत में G-20 देशों के सांसदों और speakers का सम्मेलन हुआ।

- भारत में Global Maritime Summit हुई, इसमें 6 लाख करोड़ रुपए के समझौते हुए।

- इज़रायल से भारतीयों की वापसी के लिए ऑपरेशन अजय शुरु किया गया।

- 40 साल बाद भारत और श्रीलंका के बीच ferry service शुरु हुई।

- यूरोप को पीछे छोड़ते हुए भारत, 5G user base के मामले में दुनिया के top-3 देशों में पहुंचा।

- Apple के बाद Google ने भी मेड इन इंडिया smartphone बनाने का ऐलान किया।

- हमारे देश ने अन्न और फल-सब्जी उत्पादन का नया record बनाया।

साथियों,

ये तो अभी halftime हुआ है अभी मेरे पास गिनाने को और भी बहुत कुछ है। आज ही मैंने महाराष्ट्र में नलवंडे डैम पर भूमिपूजन किया है , जो 50 साल से अटका हुआ था।

- बीते 30 दिनों में ही तेलंगाना में 6 हजार करोड़ रुपए के super thermal power project का लोकार्पण हुआ।

- छत्तीसगढ़ के बस्तर में 24 हजार करोड़ रुपए के आधुनिक steel plant का लोकार्पण हुआ।

- राजस्थान में मेहसाणा-भटिंडा-गुरदासपुर gas pipeline के एक section का लोकार्पण हुआ।

- जोधपुर में नई airport terminal building और IIT कैंपस का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ।

- बीते 30 दिनों में ही महाराष्ट्र में 500 से अधिक skill development केंद्र launch किए गए हैं।

- कुछ दिन पहले गुजरात के धोरडो को best tourism village का पुरस्कार मिला1

- जबलपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती स्मारक का भूमि पूजन हुआ।

- हल्दी किसानों के लिए turmeric board की घोषणा हुई।

- तेलंगाना में central tribal university को स्वीकृति मिली।

- मध्य प्रदेश में एक साथ सवा-2 लाख गरीब परिवारों को पीएम आवास योजना के घर मिले।

- इन्हीं 30 दिनों में पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों की संख्या 50 लाख पहुंची।

- आयुष्मान भारत योजना के तहत 26 करोड़ कार्ड बनने का पड़ाव पार हुआ।

- आकांक्षी जिलों के बाद देश में आकांक्षी ब्लॉक्स के विकास का अभियान शुरु किया।

- गांधी जयंति पर दिल्ली में खादी की एक ही दुकान पर डेढ़-करोड़ रुपए की सेल हुई।

 

और साथियों,

इन्हीं 30 दिनों में खेलों की दुनिया में भी बहुत कुछ हुआ।

- भारत ने एशियाई खेलों में 100 से ज्यादा medals जीते।

- 40 साल बाद भारत में International Olympic Committee का session हुआ।

- उत्तराखंड को हॉकी astro-turf और velodrome stadium मिला।

- वाराणसी में आधुनिक cricket stadium पर काम शुरु हुआ।

- ग्वालियर को अटल बिहारी वाजपेयी दिव्यांग sports centre मिला।

- और यहां गोवा में ये National Games भी तो हो रहे हैं।

सिर्फ 30 दिन के, मेरे नौजवान सोचिये, सिर्फ 30 दिन के कार्यों की ये list बहुत लंबी है। मैंने आपको बस एक छोटी सी झलक दिखाई है। आज देश के हर sector में, देश के हर हिस्से में अभूतपूर्व तेजी से काम हो रहा है, हर कोई विकसित भारत के निर्माण में जुटा है।

साथियों,

ये जितने भी काम हो रहे हैं, इनके मूल में मेरे देश का युवा है, मेरे भारत का युवा है। आज भारत का युवा, अभूतपूर्व आत्मविश्वास से भरा हुआ है। भारत के युवा के इसी आत्मविश्वास को राष्ट्रीय संकल्पों से जोड़ने के लिए हाल में एक और बड़ा काम हुआ है। मेरा युवा भारत, यहां आपने boards देखे हैं सब जगह पर, मेरा युवा भारत, यानि MY भारत नाम से एक नए platform को स्वीकृति दी गई है। ये ग्रामीण और शहरी, यानि देश के हर युवा को आपस में भी और सरकार के साथ connect करने का भी one stop centre होगा। ताकि उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए, राष्ट्र निर्माण के लिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा अवसर भी प्रदान किए जा सकें। ये भारत की युवा शक्ति को, विकसित भारत की शक्ति बनाने का माध्यम बनेगा। अब से कुछ दिन बाद, 31 अक्टूबर को एकता दिवस पर मैं MY भारत अभियान की शुरुआत करने जा रहा हूं। और देशवासियों को मालूम है 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती पर हम देश भर में Run for Unity बड़ा कार्यक्रम करते हैं। मैं चाहु्ंगा गोवा में भी और देश के हर कोने में 31 अक्टूबर को देश की एकता के लिए Run for Unity का शानदार कार्यक्रम भी होना चाहिए। आप सब भी इस अभियान से जरूर जुड़िएगा।

साथियों,

आज जब भारत के संकल्प और प्रयास, दोनों इतने विराट हैं, तब भारत की आकांक्षाओं का बुलंद होना भी स्वभाविक है। इसलिए ही IOC के session के दौरान मैंने 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षा को सामने रखा है। मैंने Olympics की Supreme committee को आश्वस्त किया कि भारत 2030 में Youth Olympics और 2036 में Olympics के आयोजन के लिए तैयार है।

साथियों,

Olympics के आयोजन के लिए हमारी आकांक्षा सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं है। बल्कि इसके पीछे कुछ ठोस कारण हैं। 2036 यानि आज से करीब 13 साल बाद भारत दुनिया की अग्रणी आर्थिक ताकतों में से एक होगा। उस समय तक आज के मुकाबले हर भारतीय की आय, कई गुना अधिक होगी। तब तक भारत में एक बहुत बड़ा middle class होगा। Sports से लेकर space तक, भारत का तिरंगा और शान से लहरा रहा होगा। Olympics के आयोजन के लिए connectivity और दूसरे आधुनिक infrastructure की जरूरत होती है। आज भारत आधुनिक infra पर 100 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने की तैयारी में है। इसलिए Olympics भी हमारे लिए उतना ही आसान हो जाएगा।

साथियों,

हमारे National Games, एक भारत, श्रेष्ठ भारत का भी प्रतीक हैं। ये भारत के हर राज्य को अपना सामर्थ्य दिखाने का बहुत बड़ा माध्यम होता है। इस बार गोवा को ये अवसर मिला है। गोवा सरकार ने, गोवा वासियों ने जिस प्रकार की तैयारियां की हैं, वो वाकई ही बहुत सराहनीय है। ये जो sports infrastructure यहां बना है, वो आने वाले अनेक दशकों तक गोवा के युवाओं के काम आएगा। यहां से अनेक नए खिलाड़ी भारत को मिलेंगे। इससे यहां और ज्यादा national और international sports events आयोजित करना संभव होगा। बीते कुछ वर्षों में गोवा में connectivity से जुड़ा आधुनिक infrastructure भी बना है। National Games से गोवा के tourism को, यहां की economy को भी लाभ बहुत होगा।

साथियों,

गोवा, ये गोवा तो उत्सवों के लिए, celebrations के लिए जाना जाता है। गोवा International Film Festival की चर्चा अब पूरी दुनिया में होने लगी है। हमारी सरकार, गोवा को international conferences, meetings और summits का भी महत्वपूर्ण centre बना रही है। साल 2016 में हमने BRICS सम्मेलन गोवा में आयोजित किया था। G-20 से जुड़ी कई महत्वपूर्ण meetings भी यहां गोवा में हुई हैं। मुझे खुशी है कि दुनिया में tourism की sustainable growth के लिए, Goa Roadmap for Tourism को G-20 देशों ने आम सहमति से स्वीकार किया है। ये गोवा के लिए तो गर्व का विषय है ही, भारत के tourism के लिए भी बहुत बड़ी बात है।

साथियों,

मैदान कोई भी हो, चुनौती कैसी भी हो, हमें हर हाल में अपना best देना है। इस अवसर को हमें खोना नहीं है। इसी आह्वान के साथ मैं 37वें (सैंत्तीसवें) राष्ट्रीय खेलों की शुरुआत की घोषणा करता हूं। आप सभी athletes को फिर से अनेक शुभकामनाएं। गोवा है तैयार! गोंय आसा तयार! Goa is ready ! बहुत-बहुत धन्यवाद।

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स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!