दुबई की धरती पर आज मैं लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं: प्रधानमंत्री
दुनिया भर से लोग यहां दुबई आये हैं। इस जगह ने दुनिया भर के लोगों को आकर्षित किया है: प्रधानमंत्री
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच लगभग 700 फ्लाइट हैं, लेकिन इस देश का दौरा करने में एक प्रधानमंत्री को 34 साल लग गए: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से आग्रह किया कि वे खड़े होकर अबू धाबी के क्राउन प्रिंस का अभिनंदन करें
भारत 40 साल से आतंकवाद का शिकार रहा है। निर्दोष लोगों को अपनी जानें गवानी पड़ी हैं: प्रधानमंत्री
Good Taliban, Bad Taliban, Good Terror, Bad Terror, ये अब चलने वाला नहीं। फैसला आपको करना है- आप आतंकवाद के साथ हैं या मानवता के साथ: पीएम
हमारा प्रयास भारत को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाना और पड़ोसी देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना है: प्रधानमंत्री

दुबई की धरती पर मैं आज मेरे सामने लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे देशवासियों को मैं नमन करता हूं। आप वे लोग हैं, जिन्होंने परिश्रम की पराकाष्ठा करके..कोई दस साल से, कोई पंद्रह साल से, कोई बीस साल से, कोई तीस साल से, रोजी रोटी कमा रहे हैं, लेकिन साथ-साथ भारत के गौरव को भी बढ़ाने में कभी पीछे नहीं रहे। आपके व्यवहार के कारण आपके आचरण के कारण हमेशा भारत गौरव अनुभव करता रहा है। भारत में अगर अधिक बारिश भी हो जाए तो दुबई में बैठा हुआ मेरा हिंदुस्तानी छाता खोल देता है। भारत में कहीं अगर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए, दुबई में बैठा हुआ मेरा देशवासी चैन से सो नहीं सकता।

जब अटल बिहारी देश के प्रधानमंत्री थे, भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था, दुनिया चौंक गई थी, कुछ लोग गुस्से में आए थे और रातों-रात भारत पर sanction लगा दिए गए थे। भारत को आर्थिक मुसीबतों में धकेल दिया गया था.. और तब वाजपेयी जी ने विश्व भर में फैले हुए भारत वासियों को आह्वान किया था, देश की मदद करने के लिए। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि वाजपेयी जी के उस आह्वान पर, हिन्‍दुस्‍तान की तिजोरी भरने में Gulf Countries में जो मजदूरी का काम करते थे, उन मेरे भारतवासियों का सबसे बड़ा योगदान था। इस अर्थ में यहां बसा हुआ हर भारतवासी, एक प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से जुड़ा हुआ है। पिछली बार जब देश लोकसभा के चुनाव के लिए व्यस्त था, चुनाव नतीजे आ रहे थे, हिन्‍दुस्‍तान ही नहीं, पूरा दुबई नाच रहा था। ये प्यार भारत माता के कल्याण के लिए..मां भारती फिर से एक बार सामर्थ्यवान बने, सशक्त बने, सम्‍पन्‍न बने, समृद्ध बने, ये सपना संजोकर के दिन-रात एक करने वाले आप लोग मेरे सामने बैठे हैं।

भाइयों-बहनों, आज..यहां तो हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए मेरे भाई-बहन बैठे हैं और दुबई, वो सिर्फ लघु भारत ही रहा है ऐसा नहीं है, अब तो दुबई एक लघु विश्व भी बन गया है। दुनिया के सभी देशों के लोग, कम अधिक मात्रा में दुबई में रह रहे हैं। ठंडे से ठंडे प्रदेश के लोग भी इस 40-45 डिग्री तापमान में रहना पसंद करते हैं। क्या ताकत दिखाई होगी इस देश ने, क्या magnetic power पैदा किया होगा विकास के माध्यम से कि पूरा विश्व यहां आकर्षित हो जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए सभी देशवासियों ने अभी दो दिन पूर्व 15 अगस्त, भारत की आज़ादी का पर्व मनाया है। मैं भी आप सब को आज़ादी के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

यहां केरल से आया हुआ भी समुदाय बहुत बड़ी मात्रा में है। मैं केरल का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए कर रहा हूं क्योंकि आज केरल का नववर्ष है। सहोदरकअ एंटे रूदयम निरन्या नववलसरा आशम सफलअ। नमस्कारम्।



हर हफ्ते हिन्‍दुस्‍तान से 700 से भी ज्यादा फ्लाइट यहां आती हैं। दुनिया में किसी एक देश के साथ इतनी बड़ी मात्रा में हवाई आवागमन अगर कहीं है, तो इस इलाके से है। हर हफ्ते 700 से भी अधिक फ्लाइट आती हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लग गए। कभी-कभी मुझे लगता है कि बहुत सारे ऐसे अच्छे अच्छे काम हैं, जो पूर्व के लोग मेरे लिए बाकी छोड़ करके चले गए हैं और इसलिए बहुत सारे बाकी रहे अच्छे काम करने का मुझे भाग्य मिला है। उन अच्छे कामों में से महत्वपूर्ण अच्छा काम मेरा अबुधाबी आना, मेरा दुबई आना है। जिस प्रकार से..ये मेरी पहली मुलाकात है। इसके पहले कभी मैं धरती के इस भू-भाग पर नहीं आया। ..और 34 साल में प्रधानमंत्री के रूप में कोई आएं, तो किसी को भी, किसी को भी नाराज़गी व्यक्त करने का हक बनता है। हक बनता है कि नहीं बनता है? बनता है कि नहीं बनता है? लेकिन अबुधाबी में His Highness Crown Prince ने, दुबई में His Highness अल मख्तूम जी ने नाराज़गी नहीं दिखाई, इतने प्यार की वर्षा की, इतने प्यार की वर्षा की, मैं उनके इस प्यार को कभी भूल नहीं पाउंगा। जो स्वागत किया, जो सम्मान किया.. His Highness Crown Prince अपने सभी पांचों भाइयों के साथ एयरपोर्ट पर लेने के लिए आए। मेरे प्यारे देशवासियों, ये प्यार, ये सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं है। ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। ये भारत की बदली हुई तस्वीर का सम्मान है। भारत जिस प्रकार से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, उस बदले हुए हालात का सम्मान है। मैं His Highness Crown Prince का, अमीरात का, दुबई के Rulers का हृदयपूर्वक बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

एक तरफ संप्रदाय के नाम पर आतंकवाद के खेल खेले जाते हैं। निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। पूर्णतया: चिंता का माहौल हो, ऐसे समय अबुधाबी के His Highness Crown Prince भारतीय समुदाय के लिए मंदिर बनाने के लिए जगह देने का निर्णय करते हैं। जो लोग अबुधाबी से परिचित हैं, उन्हें पता है कि निर्णय कितना बड़ा है, ये सौगात कितनी बड़ी है। आप मुझे बताइए, सभी देशवासियों को उनका विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि तालियों की गूंज से Crown Prince का अभिनंदन कीजिए। Crown Prince को Standing Ovation दीजिए। उनका अभिनंदन कीजिए। मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं।

भाइयों-बहनों, दो दिन की मेरी यात्रा में जिस प्रकार का विश्वास का माहौल बना, आखिरकार अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का आधार..आपकी भाषा क्या है, आप कितने articulate हैं, आप diplomatic relation में कितने बढि़या ढंग से मेलजोल करते हैं..उससे भी ज्यादा महत्व होता है, एक दूसरे पर भरोसे का। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ये भरोसा, ये विश्वास, एक बहुत बड़ी पूंजी होता है ..और आज मैं चंद घंटों की मेरी मुलाकात के बाद कह सकता हूं कि भारत, अबुधाबी, दुबई, अमीरात.. जो विश्वास का सेतू बना है, वो अभूतपूर्व है और आने वाली पीढि़यों तक काम आए, ऐसा foundation तैयार हुआ है।

आज मुझे खुशी हुई कि जब आज भारत और अमीरात के बीच जो Joint Statement आया है, आपको भी खुशी होगी जान करके.. Crown Prince ने हिन्‍दुस्‍तान में साढ़े चार लाख करोड़ रूपए का निवेश करने का संकल्प दोहराया है। साढ़े चार लाख करोड़ रूपया! कितना? कितना? कितना? भाइयों-बहनों, अगर आप पर किसी का भरोसा न हो, तो कोई 10 रूपया भी आप पर लगाने के लिए तैयार होगा क्या? ये भारत की साख बनी है। आज भारत का बदला हुआ रूप विश्‍व के सामने अपनी स्वीकृति बनाता आगे चल रहा है।

आज अमीरात और भारत की तरफ से आतंकवाद के खिलाफ, दो टूक शब्दों में, बिना लाग लपेट और किसी की परवाह किए बिना साफ-साफ शब्‍दों में संकेत दे दिए गए हैं। आतंकवाद के खिलाफ एकता का स्वर आज इस धरती से उठा है। मैं इसे बहुत अहम मानता हूं और इतना ही नहीं..समझने वाले समझ जाएंगे, अक्लमंद को इशारा काफी। आतंकवाद में लिप्त लोगों को सजा होनी चाहिए, ये स्पष्ट शब्दों में संकेत यहां से निकला है। मैं आज यहां के शासकों का इसलिए भी आभारी हूं कि उन्होंने..United Nations जब अपने 70 साल मनाने जा रहा है, तो यहां से कहा गया है और भारत की इस बात का खुला समर्थन किया गया है कि भारत को United Nations की Security Council की Permanent Membership मिलनी चाहिए। मैं आभारी हूं उनका।

इससे भी आगे एक बहुत-बहुत महत्वपूर्ण बात पर..आज भारत की लंबे अर्से से एक position है। उसका आज His Highness Crown Prince ने खुले आम समर्थन घोषित किया। भाइयों-बहनों, कई वर्षों से United Nations में एक Resolution लटका पड़ा है। आपको भी बड़ी हैरानी होगी..और दो-पांच साल से नहीं, कई वर्षों से लटका पड़ा है। क्या.. ? United Nations, जो कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध से पीडि़त मानव समुदाय को मरहम लगाने के लिए..आगे मानव जाति को ऐसे संकट झेलने की नौबत न आए, इसके लिए precaution लेने के लिए, व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए 70 साल पहले United Nations का जन्म हुआ। लेकिन वह United Nations आतंकवाद की अभी तक परिभाषा नहीं कर पाया। आतंकवादी किसको कहें, आतंकवाद किसको कहें, आतंकवाद को समर्थन करने वाले कौन माना जाए, किस देश को आतंकवाद का समर्थक माना जाएं, किस देश को समर्थक न माना जाए। इसलिए Comprehensive Convention on International Terrorism..इसका निर्णय करने का प्रस्ताव लंबे अर्से से United Nations में लंबित पड़ा हुआ है। भारत ने position ली हैं सालों से किए एक प्रस्ताव पर चर्चा हो जाए, निर्णय होना चाहिए और ये टाला जा रहा है। आज मुझे खुशी इस बात की है कि His Highness Crown Prince ने भारत की स्थिति का समर्थन का किया है, भारत की position का समर्थन किया है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संबंध में आपने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। न सिर्फ.. साढ़े चार लाख करोड़ का पूंजी निवेश की बात नहीं है ये। ये एक निश्चित दिशा में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का एक प्रकार का संकेत, इस Joint Statement में है। मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं।

भाइयों-बहनों आप तो सालों से बाहर हैं। आज भारत का नाम सुनते ही आपके सामने खड़े हुए व्यक्ति की आंखों में चमक आती है कि नहीं आती है? आपका माथा गर्व से ऊंचा होता है कि नहीं होता है, आपका सीना गर्व से तन जाता है कि नहीं तन जाता है? एक गर्व महसूस करते हैं कि नहीं करते हैं? भाइयों बहनों आज दुनिया का हिन्‍दुस्‍तान की तरफ देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया है और उसका एक कारण..क्या कारण है?.. क्या कारण है, ये बदलाव आया है? मोदी के कारण नहीं, ये जो बदलाव आया है, सवा सौ करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति के कारण आया है। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2014 मई महीने में 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी। आज दुनिया का कोई भी महापुरूष, दुनिया का कोई भी राजनेता मोदी से जब हाथ मिलाता है न, तब उसे मोदी नहीं दिखता है। उसे सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखाई देते हैं। दुनिया की तेज़ गति से बढ़ रही economy दिखाई दे रही है।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों, IMF हो, World Bank हो, Moody हो, विश्व की जितनी भी आर्थिक पैमाने पर Rating Institutions हैं, सब किसी ने एक स्वर से कहा है कि आज दुनिया में बड़े देशों में सबसे तेज गति से अगर आर्थिक सुधार हो रहा है, तेज गति से growth हो रहा है तो उस देश का नाम है.. (दर्शक दीर्घा से भारत-भारत के नारे). मुझे बताइए सीना तन जाएगा कि नहीं तन जाएगा? माथा ऊंचा हो जाएगा कि नहीं होगा कि नहीं होगा। एक साल के भीतर-भीतर ये बदलाव आया है। भाइयों बहनों, हमने मेक इन इंडिया.. कुछ महीने पहले इस अभियान का प्रारंभ किया। दुनिया को मैं कह रहा हूं- मेक इन इंडिया। आइए, हिन्‍दुस्‍तान एक ऐसा देश है जो संभावनाओं से भरा हुआ है, Opportunities ही Opportunities हैं। ये एक ऐसा भाग्‍यशाली देश है, जिसके पास 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है। भारत एक नौजवान देश है। आज यहां जवानी लबालब भरी पड़ी है और विश्व वहां आए, हमारे युवकों की शक्ति जुटाए, उत्पादन करे, दुनिया के बाज़ार में जाकर बेचे। और आज..ये कुछ ही महीनों का मामला है.. Foreign Direct Investment..FDI में 48 प्रतिशत वृद्धि हुई है, 48%। भाइयों-बहनों विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Ease of doing Business का माध्‍यम हो। देश की युवा शक्‍ति में Skill Development का अभियान हो। आधुनिक भारत के निर्माण के लिए डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए दिन-रात पुरुषार्थ चलता हो। तो विश्‍व का आना बहुत स्‍वाभाविक है मेरे भाइयों और बहनों, बहुत स्‍वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, आज दुनिया जिस आतंकवाद के नाम सुनते ही कांप उठती हैं, एक नफरत पैदा होती है। मैं दुनिया को कहता हूं हम हिन्‍दुस्‍तान के लोग 40-40 साल से ये आतंकवाद के शिकार हुए हैं। हमारे निर्दोष लोग आतंकवादियों की गोलियों से भून दिए गए हैं, मौत के घाट उतार दिए गए हैं और जब कभी मैं विश्‍व के लोगों के साथ आज से 25-30 साल पहले कभी मुझे बात करने का अवसर मिलता था, तो वे आतंकवाद समझने की उनकी क्षमता ही नहीं थी। कभी मैं आतंकवाद की बात करता था तो वे मुझे कहते थे ये तो आपका Policing का problem है Law and Order का problem है। अब उनको समझ आ गया है कि आतंकवाद का कितना भयंकर रूप होता है। आतंकवाद की कोई सीमाएं नहीं होती है, वो पता नहीं कब किस सीमा पर जाकर आ धमकेगा। आज अभी मैं यहां पहुंच रहा था, मैंने सुना बैंकॉक के अंदर आज एक बम धमाका हुआ, निर्दोष लोगों को मार दिया गया। भारत तो लगातार इन हरकतों को झेलता रहा है और विश्‍व समुदाय जब तक आतंकवाद की मानसिकता वाले देशों को, आतंकवाद को, उसको समर्थन करने वालों को एक ओर, और मानवता में विश्‍वास करने वाले दूसरी ओर, और मानवतावाद में विश्‍वास करने वाले दुनिया के देश एक होकर के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का वक्‍त आ चुका है।

Good Taliban-Bad Taliban, Good Terrorism- Bad Terrorism ये अब चलने वाला नहीं है। हर किसी को तय करना पड़ेगा कि फैसला करो कि आप आतंकवाद के साथ हो या मानवता के साथ हो, निर्णय करो। भारत को तो आज भी आए दिन इन नापाक हरकतों का शिकार होना पड़ता है। हम समस्‍याओं का समाधान खोजने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं। यहां बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत की आजादी के पहले से नागालैंड में अतिवाद, insurgency इस समस्‍या से नागालैंड जूझता रहा और उसके कारण भारत का पूरा ये पूर्वी हिस्‍सा, नॉर्थ-ईस्‍ट, आए दिन हिंसा का शिकार होता था और धीरे-धीरे वो बीमारी इतनी फैलती गई कि अन्‍य राज्‍यों में भी अलग-अलग नाम से, अलग-अलग अतिवादी, आतंकवादी गुट बनते चले गए। आजादी के भी पहले से चल रहा था।

आज मैं बहुत संतोष के साथ मेरे देशवासियों, आपको कहना चाहता हूं कि अभी एक महीने पहले नागालैंड के इन गुटों के साथ, जो कभी हिंसा में विश्‍वास करते थे, जो शस्‍त्रों को लेकर के गतिविधि चलाते थे। उनसे जो बातचीत चल रही थी, वो सफलतापूर्वक आगे बढ़ी, निर्णय हुआ, मुख्‍य धारा में आने का निर्णय हुआ। 60-70 साल के बाद ये संभव हुआ। मैं नागालैंड की ये घटना का जिक्र इसलिए करना चाहता हूं कि हिंसा के राह पर चले हुए भारत के नौजवानों को और विश्‍व के नौजवानों को मैं एक उदाहरण के रूप में कहना चाहता हूं, समस्‍या कितनी भी गंभीर क्‍यों न हो, आखिर तो बातचीत से ही रास्‍ता निकलता है। कोई 10 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, कोई 20 साल लड़ाई लड़ने के बाद करें, कोई 40 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, लेकिन आखिर में तो बात ही होती है और टेबल पर ही फैसले होते हैं और इसलिए विश्‍व भर से इस गलत रास्‍ते पर चल पड़ लोग बम-बंदूक के भरोसे, अपने सपनों को साकार करने के रास्‍ते पर चले हुए लोग। ये रास्‍ता कभी आपका भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी किसी और का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी मानवता का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता इतिहास को बेदाग नहीं रहने देगा। ये पूरे इतिहास को कलंकित कर देगा, ये पूरे इतिहास को दागदार बना देगा और इसलिए हिंसा का मार्ग छोड़कर के मुख्‍यधारा में जाना, ये आज समय की मांग है।

मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों, बांग्‍लादेश 1947 में भारत का विभाजन हुआ, 1947 में। तब से पूर्व पाकिस्‍तान, पश्‍चिम पाकिस्‍तान थे उस समय। पूर्वी पाकिस्‍तान जो आज बांग्‍लादेश बना, भारत और उनके बीच सीमा का विवाद चल रहा था। तनाव का कारण बना हुआ था। आशंकाओं का कारण बना हुआ था। घुसपैठ के लिए एक सुविधाजनक स्‍थिति बनी हुई थी। आप सब के आशीर्वाद से हिन्‍दुस्‍तान ने बीड़ा उठाया, सबने मिलकर के बीड़ा उठाया। इस समस्‍या का समाधान करना है, बातचीत से करना है। मैं पिछले सितंबर में बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी से मिला था और मैंने उनको वादा किया था कि मुझ पर भरोसा कीजिए और मुझे थोड़ा समय दीजिए। उन्‍होंने कहा कि मेरे पास भरोसा रखने के सिवाए है भी क्‍या! लेकिन आज, आज मैं मेरे प्‍यारे देशवासियों आपके सामने सर झुकाकर के कहना चाहता हूं कि आजादी से लटका हुआ ये सवाल 1 अगस्‍त को समाप्‍त कर दिया गया है। सीमा निर्धारित हो गई। जिनको बांग्‍लादेश जाना था, बांग्‍लादेश चले गए, जिनको भारत आना था भारत आ गए। हम लोग तो 15 अगस्‍त, 1947 को आजाद हो गए थे। भारत के नागरिक के नाते गौरवगान करने लगे थे। लेकिन ये हमारे भाई-बहन अभी 1 अगस्‍त, 2015 को भारत की भूमि पर आजादी का स्‍वाद लेने का उन्‍हें सौभाग्‍यमान मिला है। भारत की संसद में सर्वसम्‍मति से सभी राजनैतिक दलों ने साथ दिया और सर्वसम्‍मति से फैसला हुआ, बातचीत के माध्‍यम से फैसला हुआ।

ये छोटी-मोटी उपलब्‍धि नहीं है मेरे भाइयों-बहनों। और मैं, औरों को भी हमेशा कहता हूं, अड़ोस-पड़ोस के देशों को भी कहता रहता हूं। जैसे हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को भी कभी न कभार बातचीत के रास्‍ते पर आना पड़ता है। वैसे अड़ोस-पड़ोस में भी समस्‍याओं का समाधान बातचीत से ही निकलता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों में आज भारत एक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। मानवता के अधिष्‍ठान पर कर रहा है। जब नेपाल में भूकंप आया चंद घंटों में, ऐसा नहीं है कि भई ज़रा पूछो तो क्‍या हुआ है? जरा जानकारी लो क्‍या हुआ है? ऐसा करो अफसरों का delegation भेजो, देखो ज़रा क्‍या मुसीबत आई है? ऐसा करो भई कोई अपने रिश्‍तेदार वहां हो तो पूछो भई हुआ क्‍या है? ऐसा इंतजार नहीं किया? आज दिल्‍ली में ऐसी सरकार है, जो हर पल नज़र आती है, हर जगह पर नज़र आती है और चंद घंटों में, चंद घंटों में, भारत से जो भी हो सकता था, ये मानवता का काम था। नेपाल के चरणों में जाकर के हमारे लोग बैठ गए और उनकी सेवा में लग गए और आज भी सेवा चालू है। नेपाल हमारा पड़ोसी है। वो दुखी हो और हम सुखी हों, ये कभी संभव नहीं होता है। उसके सुख में भी हमारा सुख समा हुआ है।

श्रीलंका, आपको हैरानी होगी। जब मैं नेपाल गया, प्रधानमंत्री बनने के बाद। नेपाल जाना है, तो 70 मिनट नहीं लगते। दिल्‍ली से नेपाल जाना हो, तो 70 मिनट नहीं लगते। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को नेपाल पहुंचने में 17 साल लग गए। फिर से हम गए, संबंधों को फिर से जोड़ा। अपनापन। आज नेपाल भारत पर भरोसा कर रहा है। भारत नेपाल का सुख-दु:ख का साथी बन रहा है। श्रीलंका, राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, उसके बाद कोई प्रधानमंत्री की stand alone visit नहीं हुई थी। कितने साल बीत गए। हमारा पड़ोसी है, आए दिन हमारे तमिलनाडु, केरल के मछुआरे और उनके मछुआरे आपस में भिड़ जाते हैं। लेकिन उधर कोई जाता नहीं था। हम गए, इतना ही नहीं। जाफना जहां 20-20 साल तक बम और बंदूक का ही कारोबार चलता था, उस जाफना में जाकर के उन दुखियारों के आंसू पोंछने का काम करने का सौभाग्‍य मुझे मिला। एक प्रधानमंत्री के रूप में जाफना जाने का सौभाग्‍य मुझे मिला।

हमारे पड़ोस में मालदीव, आइलैंड पर बसा हुआ देश, tourism की दृष्‍टि से काफी आगे बढ़ा है। अचानक एक दिन उनके यहां पानी के सारे संयंत्र खराब हो गए। पूरे देश के पास पीने का पानी नहीं था। आप कल्‍पना कर सकते हो, कोई देश के पास पीने का पानी न हो। कितना बड़ा गहरा संकट आया। मालदीव से हमें message आया कि ऐसी मुसीबत आई है। एक पल का इंतज़ार नहीं किया, भाइयों और बहनों। हवाई जहाज से पीने का पानी पहुंचाया मालदीव में। दूसरे दिन स्‍टीमर से पानी पहुंचाना शुरू कर दिया और जब तक उनकी वो मशीन चालू नहीं हुई, पानी की व्‍यवस्‍था दुबारा पुनर्जीवित नहीं हुई, हमने मालदीव को प्‍यासा नहीं रहने दिया।

अफगानिस्‍तान हमारा पड़ोसी है। अफगानिस्‍तान संकटों से गुजर रहा है। लंबे अरसे से आए दिन वो घाव झेलता चला जा रहा है। हर पल अफगानिस्‍तान को मरहम लगाने का काम हिन्‍दुस्‍तान करता आया है। अफगानिस्‍तान फिर से एक बार खड़ा हो जाए, क्‍योंकि हम सब बचपन से काबुलीवाला से तो बहुत परिचित हैं। जब काबुली वाले की बात करते हैं, तो हमें कितना अपनापन महसूस होता है। भाइयों-बहनों हमारी कोशिश रही है भारत को विकास की नई ऊचाइयों पर ले जाना। भारत में निरंतर विकास को आगे बढ़ाना और अपने अड़ोस-पड़ोस के देशों से दोस्‍ती बनाकर करके साथ और सहयोग लेकर करके आगे चल पड़ना।

SAARC देशों का समूह उसमें एक नया प्राण पूरने का प्रयास किया है, सफलतापूर्वक प्रयास किया है। वरना पहले SAARC देशों के मंच का उपयोग तू-तू मैं मैं के लिए होता था, कभी भारत को घेरने के लिए होता था। आज SAARC देशों के लोग, जितने साथ चल सकते हैं, उनको ले करके इन SAARC की इकाई का विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना हमने देखा था। हमने घोषित किया है कि 2016 में हम आकाश में एक SAARC Satellite छोड़ेंगे जिसकी सेवाएं SAARC देशों में मुफ्त में देंगे, जो शिक्षा के काम आए , जो आरोग्‍य के लिए काम आये, जो किसानों को काम आये, जो मछुआरों के काम आये, सामान्‍य जन को काम आये। अभी हम बीच में सोच रहे थे कि SAARC देश Connectivity के लिए गंभीरता से सोचे और हम जानते हैं, आज विकास में Connectivity का महत्‍व बहुत है। आप समुद्री मार्ग से जुडि़ए या रेल मार्ग से जुडि़ए, या रोड मार्ग से जुडि़ए, जुड़ना जरूरी है। यूरोप के देशों को ये लाभ मिला हुआ है। एक देश से दूसरे देश चले जाओ पता तक नहीं चलता कि देश कब बदल गया। क्‍या ये SAARC देशों के बीच नहीं हो सकता है? हमने मिल करके सामूहिक निर्णय करने का प्रयास किया नेपाल में। लेकिन आप जानते हैं, कुछ लोगों को जरा तकलीफ होती है, लेकिन कुछ लोगों की तकलीफ के लिए क्‍या रुकना चाहिए? हमारे काम को क्‍या हमें रोक देना चाहिए? हमें अटक जाना चाहिए क्‍या? ठीक है आपकी मर्जी, आप वहां रह जाइये, हम तो चल पड़े भाई और हमने क्‍या किया। एक बहुत बड़ा अहम फैसला लिया है भाइयों और बहनों, इसका प्रभाव आने वाले दिनों में क्‍या होने वाला है, वो तो वक्‍त बताएगा। नेपाल, भूटान, भारत, बांग्‍लादेश, इन चार देशों ने एक नया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बना करके Connectivity का एक पूरा काम तय कर लिया, Agreement हो गया, ये आगे चल करके नॉर्थ-ईस्‍ट से जुड़ेगा। वहां से ये म्‍यांमार मार्ग से जुड़ेगा। वो इंडोनेशिया, थाइलैंड, पूरब, हिन्‍दुस्‍तान, पूरब की बीच की तरफ भारत को Connectivity की ताकत देगा एक नया भारत का बदला हुआ, संबंधों का नया विश्‍व खड़ा हो जाएगा।

भाइयों-बहनों, एक निश्चत समय के साथ भारत अपनी भूमिका भी अदा करें, भारत बड़े होने के अहंकार से नहीं, हर किसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता । विकास की नई ऊंचाईयों को पार करना चाहता। भारत में नौजवानों को रोजगार मिले, हमारे कृषि में Second Green Revolution हो, हमारा पूर्वी हिन्‍दुस्‍तान, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे असम हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, चाहे ओडि़शा हो, ये हमारा जो इलाका है, ये मानना पड़ेगा कि वहां विकास की ज्‍यादा जरूरत है। अगर वहां पर विकास हो गया और हिन्‍दुस्‍तान का पश्चिमी छोर और पूरब का छोर बराबर हो गये, तो भारत बहुत तेज गति से दौड़ने लग जाएगा और इसलिए भारत के इस पूर्वी छोर पर आर्थिक विकास का एक नया अभियान हमने चलाया है। Infrastructure खड़ा करने का एक नया अभियान चलाया है। Fertiliser के नये कारखाने शुरू कर रहे हैं। गैस की पाइप लाइन लगानी है। बिजली पहुंचानी है। आप मुझे बताइए आजादी के इतने सालों के बाद बिजली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? बिजली मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए? क्‍या आज के युग में बिजली के बिना गुजारा संभव है? भाइयों-बहनों हमने सपना संजोया है। पांच साल के भीतर-भीतर हम देश के कोने-कोने में 24 घंटे बिजली मैंने देने के लिए फैसला किया। ये हम करके रहेंगे।

दुबई में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, हमने एक महत्‍वपूर्ण योजना घोषित की है । हमारे देश में लोगों को पहले Bank Accounts नहीं थे, हमने हर हिन्‍दुस्‍तानी का Bank Account खोल दिया, एक काम किया। भारत में हमारे देश के नागरिकों को इंश्‍योरंस नहीं है, बीमा नहीं है। उसके परिवार में कोई आपत्ति आ जाए, पीछे वालों को देखने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं। हमने तीन योजनाएं लगाई हैं, एक प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना और इंश्‍योरेंस के लिए कितना पैसा देना है? एक स्‍कीम ऐसी है कि जिसमें एक महीने में सिर्फ एक रुपया देना है, 12 महीने में 12 रुपया। हमारे देश का गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी दे सकता है या नहीं दे सकता है? मुझे बताइए दे सकता है या नहीं दे सकता है? गरीब से गरीब व्‍यक्ति एक रुपया महीने में दे सकता है या नहीं दे सकता है? महीने का 12 रुपया,.. साल भर का 12 रुपया, साल भर का 12 रुपया देगा, दो लाख रुपयों का सुरक्षा का बीमा मिलेगा। दूसरी योजना है जिसमें उसे और भी मददें मिलेंगी, वो है एक दिन का नब्‍बे पैसा, एक रुपया भी नहीं, एक दिन का एक रुपया भी नहीं, आज तो चाय भी एक रुपये में मिलती नहीं है। मैं जब चाय बेचता था तो एक रुपया भी नहीं मिलता था। लेकिन आज एक रुपये में चाय नहीं मिलती है। एक दिन का नब्‍बे पैसा, साल भर के 330 रुपये, और उसे भी ये सुरक्षा कवच मिलेगा। Natural मृत्‍यु होगा Natural अकस्‍मात नहीं हुआ है, सहज, तो भी उसके परिवार को दो लाख रुपया मिलेगा। हमने लोगों से आग्रह किया है कि रक्षाबन्‍धन के पर्व पर हमारे देश की परम्‍परा है, हम अपनी बहनों को Best सौगात देते हैं। कोई न कोई Gift देते हैं। मैं मेरे, Gulf Countries में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयों बहनों का आग्रह करता हूं, इस बार रखी के त्‍यौहार पर आप अपनी बहन को ये जीवन सुरक्षा योजना दे दीजिए। अगर आप 600 रुपया बैंक में Fixed Deposit करा दोगे, तो हर साल उसको 12 रुपये से ज्‍यादा Interest मिलेगा, कटता जाएगा और आपकी बहन को दो लाख रुपये का सुरक्षा का कवच मिल जाएगा, और दोनों योजना लें लेगे, उतने पैसे जमा करा दिये, तो चार लाख रुपया उसके चरणों में आपकी तरफ से पहुंच जाएगा। भाइयो-बहनों, हमनें समाज-जीवन को एक सुरक्षित बनाना है, हमारी नई पीढ़ी को शिक्षित बनाना है, देश को आधुनिक बनाना है, और आज जब विश्‍व का भारत की तरफ आकर्षण बढ़ा है, उस परि‍स्थिति का हमने लाभ उठाना है और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मेरे प्‍यारे भाइयो, बहनों, आपने जो मुझे सम्‍मान दिया, प्‍यार दिया, पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपको देख रहा होगा। ये बदले हुए माहौल का असर हर भारतवासी के दिल पर भी होता है। और मुझे लगता है कि विश्‍व भर में जो हमारा भारतीय समुदाय पहुंचा है, उस भारतीय समुदाय को भी आज एक नई ऊर्जा, नई शक्ति मिली है। आज जब मैं अबुधाबी आया, दुबई आया, तो कुछ बातें मेरे ध्‍यान में आई हैं, उसके विषय में भी आज आपको मैं कह करके जाना चाहता हूं, Embassy के संबंध में, Counsel के संबंध में, आपकी शिकायतें रहती हैं, नहीं रहती हैं? नहीं रहती हैं तो अच्‍छी बात है। लेकिन अगर रहती हैं तो भारत सरकार ने ‘MADAD’ नाम का एक Online Platform बनाया है, इस ‘MADAD’ नाम के Online Platform का उपयोग दुनिया भर में फैले हुए हमारे भारतीय भाई, बहन उसका उपयोग कर सकते हैं, ताकि आपकी बात आगे पहुंच सकती है। मोबाइल फोन के द्वारा भी आप उनका सम्‍पर्क कर सकते हैं। एक, दूसरा काम किया है, E-migrate portal शुरू किया गया है। जिसके द्वारा इस प्रकार सके हमारे प्रवासी भारतीयों को कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो, तो उनको Emigration Office के चक्‍कर काटने नहीं पड़ेंगे ये E-migrate portal पर अपनी बात रख करके वो मदद ले सकता है, इसकी एक व्‍यवस्‍था की गई है, क्‍यों यहां दूर-दूर से आपका वहां जाना, बहुत तकलीफ होती है। मुझे ये भी बताया गया कि कही- कहीं पर E-migrate Portal का उपयेाग करने में नागरिकों को दिक्‍कत होती है इसके लिए मैंने हमारे Embassy को आदेश किया है कि वे ये जो Technical Problem है इसका 30 दिन के भीतर-भीतर Solution दें। आज 17 अगस्‍त है, 17 सितम्‍बर तक Solution दें, ऐसा मैंने उनसे कहा है और मुझे विश्‍वास है कि हमारे Embassy के भाई, ये जो Technical Problem कहीं-कहीं आता है, उसका रास्‍ता निकालेंगे।

एक और काम मैंने कहा है, यहां भारतीय समुदाय ज्‍यादातर workers हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं कि एक जगह से दूसरी जगह पर वो भागते रहें और इसलिए हमने कहा है, कि हम समय-समय पर जहां हमारे भारतीय भाई समुदाय रहते हैं, वहां जा करके, Counselor Camp लगाएं। महीने में एक बार, दो महीने में एक बार, और वहीं जा करके उनसे बैठें, बातचीत करें, और उनकी समस्‍या के समाधान के लिए योग्‍य व्‍यवस्‍था करें। मैं यहां ये बातें इसलिए कह रहा हूं कि ये भू-भाग ऐसा है, के जहां मेरे गरीब तबके के भाई-बहन रहते हैं, मजदूरी करने के लिए यहां आए हुए हैं। अमेरिका के लिए कुछ कर पाऊं, या न कर पाऊं लेकिन अगर आपके लिए नहीं कुछ करता तो मैं बेचैन हो जाता हूं। और इसलिए हमने एक और काम किया है, इन दिनों विदेशों में कभी-कभी जाते हैं तो हमारे भारतीय भाई कभी-कभी संकट में जैसे अचानक बीमारी आ गई, कुछ हो गया, कभी कोई कानूनी पचड़े में फंस गए, बेचारे जेल चले गए। तो दुनिया के बाहर कौन उनको देखने वाला है? परिवार तो है नहीं, और इन हमारे कभी-कभी मुसीबत में कोई परिवार आ जाए तो उनकी मदद करने के लिए Indian Community Welfare Fund (ICWF) स्‍थापित किया गया है। सब दूतावासों को ये Welfare Fund दिया गया है, और इसलिए ऐसी मुसीबत में कोई फंस गया हो तो उनको कानून की मर्यादा में रह करके जो मदद हो सकती है, कोई अगर जेल में बंद हुआ है, तो कम से कम उसको खाना-पीना मिल जाए मानवता की दृष्‍टि से कोई व्‍यवस्‍था हो जाए, इन सारे कामों के लिए एक Fund की हमने व्‍यवस्‍था की है। हमने ये भी निर्णय किया है, इस Fund के द्वारा दूतावास, Counsel में Counselor सुविधाएं और अच्‍छी कैसे बनें, जो नागरिकों की भलाई के लिए हों, उनके लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। जिनको कानूनी सलाह की जरूरत पड़ेगी और अगर वो खुद इसको करने के लिए स्थिति नहीं है, कभी-कभार तो एक हजार-दो हजार का दंड बेचारा नहीं भर पाता, उसके कारण जेलों में सड़ता रहता है। ऐसे लोगों को मदद करके, भारतीय नागरिक होने के नाते उनको मदद करना इसके लिए Welfare Fund का उपयोग हो, ताकि वो संकटों से बाहर आ सकें, ये भी हमने व्‍यवस्‍था करने के लिए कहा है। मैं जानता हूं यहां पर स्‍कूलों में Admission में कितनी दिक्‍कत होती है, आपके बच्‍चों को स्‍कूलों में पढ़ाई की कितनी दिक्‍कत होती है? मैंने यहां के संबंधित लोगों से ये बात कही है और मैंने कहा है कि अधिक स्‍कूल कैसे बनें, उसकी चिन्‍ता मैंने की है, देखते हैं, मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में उसका भी लाभ आप लोगों को मिलेगा।

मुझे विश्‍वास है मेरे भाइयो, बहनों, कि जो आपकी छोटी-मोटी बातें मेरे ध्‍यान में आई थीं, इसको पूरा करने का मैंने प्रयास किया है। मैं फिर एक बार आप सबको दृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और दुनिया में कहीं पर भी मेरा भारतवासी है, तो हम पासपोर्ट का रंग नहीं देखते हैं। हमारा खून का रंग काफी है, वो धरती का नाता काफी है, और इसलिए आइए मेरे साथियो हम सब मिल करके जहां भी हों, मां भारती का माथा ऊंचा करने के लिए, गौरव से जीवन जीने के लिए एक माहौल बनाने में सक्रिय शरीक हों और आपका योगदान आपकी शक्ति सामर्थ्‍यवान आपके परिवार को भी भला करने में काम आए, देश का भी भला करने के लिए काम आए।

इसी शुभ कामनाओं के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए, भारत माता की जय। दोनों मुट्ठी पूरी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत के कोने-कोने में, आपके अपने गांव में आवाज पहुंचनी चाहिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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आज 'कारगिल विजय दिवस' पर मैं सभी बहादुर शहीदों और सैनिकों को नमन करता हूं: पीएम मोदी
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लंदन के लॉर्ड्स मैदान पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार टेस्ट मैच जीतकर इतिहास रच दिया, यह एक ऐतिहासिक जीत है: पीएम मोदी
पिछले रविवार 'विक्रम-1' के सफल प्रक्षेपण ने हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है: पीएम मोदी
भारत में ओलंपियाड और हैकाथॉन का कल्चर लगातार बढ़ रहा है, यह देखकर खुशी होती है: पीएम मोदी
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आज मणिपुर की लोकटक झील केवल देश के मैप पर ही नहीं, बल्कि विशाल ब्रह्मांड में भी अपनी चमक बिखेर रही है : पीएम मोदी
मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि आने वाले त्योहारों के मौसम में खादी, हैंडलूम या हस्तशिल्प से बना कम-से-कम एक उत्पाद जरूर खरीदें: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार | हमारे जीवन में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जिन्हें याद रखने के लिए कैलेंडर देखने की जरूरत नहीं पड़ती | आज, 26 जुलाई ऐसी ही एक तारीख है | आज ‘कारगिल विजय दिवस’ है | ये दिन हमें गर्व से भर देता है | ये दिन हमें अपने वीर जवानों के अद्भुत साहस की याद दिलाता है | कारगिल की ऊंची-ऊंची चोटियाँ, कठिन मौसम, दुश्मन की चुनौती, हर परिस्थिति हमारे सैनिकों के सामने थी, लेकिन उनका हौंसला हर चुनौती से बड़ा था | उन्होंने माँ भारती की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया | आज ‘कारगिल विजय दिवस’ पर मैं सभी वीर शहीदों और वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ |

साथियो,

आज का भारत अपने वीरों को सिर्फ याद ही नहीं करता, बल्कि नई पीढ़ी तक उनकी गाथा भी पहुंचाता है | इसी भावना से इस वर्ष एक विशेष ‘शौर्य विजय यात्रा’ निकाली गई है | 14 जुलाई को दिल्ली के ‘National War Memorial’ से शुरू हुई यह मोटरसाइकिल यात्रा, द्रास के कारगिल वॉर मेमोरियल तक पहुंचेगी | इसका संदेश है - “One Ride, One Nation, One Salute.” यह यात्रा हमें याद दिलाती है कि राष्ट्र के लिए दिया गया बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता |

साथियो,

आज भारत अपने सैनिकों के साहस के साथ-साथ अपनी तकनीकी क्षमता को भी लगातार मजबूत कर रहा है | कुछ दिन पहले भारतीय नौ-सेना में INS महेंद्रगिरि शामिल किया गया | यह आधुनिक जंगी जहाज भारत में ही design किया गया है, भारत में ही बना है | इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है | यह आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती शक्ति का प्रतीक है | इसी महीने DRDO ने Pinaka Long Range Guided Rocket का भी सफल परीक्षण किया | इस सफलता के पीछे हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का सामूहिक परिश्रम है | दो-तीन दिन पूर्व ही DRDO ने कुशा मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया है |

साथियो,

आज रक्षा उत्पादन हो, रक्षा निर्यात हो या मित्र देशों के साथ राजनीतिक सहयोग - भारत लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है | इस महीने की शुरुआत में, मैं, इंडोनेशिया में था, जहाँ, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों के लिए एक बड़ा समझौता हुआ है |

दुनिया का भरोसा भारत के रक्षा उपकरणों और तकनीक पर बढ़ रहा है | आइए, इस ‘कारगिल विजय दिवस’ पर हम अपने अमर शहीदों को नमन करें, और एक सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का अपना संकल्प और मजबूत करें |

मेरे प्यारे देशवासियो,

‘मन की बात’ के पिछले Episode में मैंने आपसे ‘Catch The Rain’ अभियान की चर्चा की थी | मैंने आग्रह किया था कि बारिश की हर बूँद को सहेजने के इस अभियान को जन-आंदोलन बनाएं | ‘Catch The Rain’ का संदेश बहुत सीधा है – जहाँ बारिश गिरे, जब बारिश गिरे, पानी को वहीं सहेजिए, इसलिए 04 जुलाई से देश-भर में एक विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है | इसके तहत बारिश के पानी के संचयन, Ground Water Recharge, पुराने जल-स्त्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण को नई गति दी जा रही है | मुझे बहुत खुशी है कि गाँव हों या शहर, पंचायतें हों या सामाजिक संस्थाएं हर जगह लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की है | कहीं पुराने तालाबों से गाद निकाली जा रही है, कहीं कुओं और बावड़ियों को फिर से जीवन दिया जा रहा है | बंद पड़े Borewell अब Ground Water Recharge का माध्यम बन रहे हैं |

साथियो,

मध्य-प्रदेश के सीधी जिले में करीब डेढ़ हजार तालाब बनाए गए हैं | नरसिंहपुर में अमृत सरोवरों को संवारा गया है | महाराष्ट्र के नासिक में बड़ी मात्रा में पानी सहेजने की क्षमता विकसित हुई है | आंध्र-प्रदेश के नंद्याल में सभी ग्राम पंचायतें इस अभियान से जुड़ी हैं और पुराने तालाबों को फिर से उपयोगी बनाया गया है | हमारे शहर भी पीछे नहीं हैं | छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र-प्रदेश के विजयनगरम - इस अभियान के उत्साहजनक परिणाम दिखाई दे रहे हैं | आइए, हम भी अपने आस-पास किसी एक तालाब, कुएं या बावड़ी की जिम्मेदारी लें - पानी की हर बूँद बचाएं | आज बचाई गई हर बूँद, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

कुछ ही दिन पहले Glasgow में Commonwealth Games शुरू हुए हैं | हर देशवासी भारतीय दल को निरंतर अपनी शुभकामनाएं दे रहा है | उनकी कामना है कि सभी खिलाड़ी और athlete बेहतरीन प्रदर्शन करें और लोगों का दिल भी जीतें |

साथियो,

हमारे युवाओं ने हाल के दिनों में sports में कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं | PV Sindhu Badminton में Japan Open का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं | उनकी इस उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है | भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी लंदन में Lord’s Stadium में अपना पहला Test Match जीता है | यह एक ऐतिहासिक जीत है | हमारी टीम ने 270 रनों के बड़े अंतर से यह मुकाबला जीता है | लेकिन बात सिर्फ इतनी सी नहीं है | Lord’s के लंबे इतिहास में यह महिलाओं की टीम का पहला Test Match था | 1983 में इसी मैदान पर भारत ने अपना पहला क्रिकेट विश्व कप जीता था | अब हमारी नारी शक्ति ने यहां देश का नाम रोशन किया है |

साथियो,

कुछ छोटे प्रयास ऐसे भी होते हैं, जो बहुत मायने रखते हैं | मुझे केरलम में एर्णाकुलम के साउथ चित्तूर में sports के ऐसे ही एक प्रयास के बारे में पता चला है | वहां के एक स्कूल में संस्कृत club है | यहां के teacher अभिलाष जी बड़े अनूठे तरीके से संस्कृत को लोकप्रिय बना रहे हैं | इस project को ‘अक्षरकंदुक’ नाम दिया गया है | इसमें संस्कृत के अक्षरों को football में इस्तेमाल होने वाले शब्दों से जोड़कर आसान तरीके से समझाया जाता है | इससे सीखने में आनंद मिलता है, साथ ही खेलों से लोगों का जुड़ाव भी बढ़ता है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

पिछले रविवार Vikram-1 इसके सफल launch से हर देशवासी गौरव से भरा हुआ है | हम सभी भारतीय space sector के इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने | ये private sector द्वारा विकसित भारत का पहला rocket है | हमारे युवा innovators ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी | उन्होंने गजब की skill, passion और patience दिखाया | लंबे समय तक हमारा space sector निजी क्षेत्र के लिए बंद रहा था | इस sector में रुचि रखने वाले काफी युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं मिल पा रहा था | युवा हित को देखते हुए हमने space sector को private sector के लिए खोला | आज इसका परिणाम दुनिया देख रही है |

साथियो,

हमारे युवा साथी science में भी भारत का मस्तक ऊंचा कर रहे हैं| Science Olympiads दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण competition में से एक हैं | इनमें बड़ी संख्या में students हिस्सा लेते हैं | इसी महीने Physics, Chemistry, Biology और Mathematics के Olympiad हुए | इन competitions में भारतीय दल का प्रदर्शन शानदार रहा | Physics Olympiad में हमारे सभी पाँच students ने Gold Medal जीते और भारत ने पहली rank हासिल की | पिछले एक दशक में हुए हर Physics Olympiad में हमारे देश के students ने Gold या Silver Medal जरूर जीता है | Chemistry Olympiad में भी हमारे सभी students ने Gold Medal जीता | यह अब तक की best performance रही है | Biology Olympiad में भी हमारे सभी students ने medal जीते, इनमें एक Gold Medal भी शामिल है | वहीं, Mathematics Olympiad में हमारे students ने दो Gold और चार Silver Medals अपने नाम किए | मुझे देश की युवा शक्ति पर बहुत गर्व है | यह देखकर खुशी होती है कि भारत में Olympiads और Hackathons का culture निरंतर बढ़ रहा है| मुझे विश्वास है कि देश के अधिक से अधिक युवा ऐसे forums में अपना interest दिखाएंगे और भारत का परचम भी लहराएंगे |

मेरे प्यारे देशवासियो,

जब हुनर भी हो और कुछ करने का जज्बा भी हो, तो हर राह, आसान हो जाती है | कश्मीर की पारंपरिक चटाई ‘वगू’ को लेकर आज जो प्रयास हो रहे हैं उसमें इसी की झलक मिलती है | इसे सरकंडे और धान के पुआल से, straw से, तैयार किया जाता है | इस चटाई को बनाने की परंपरा बरसों पुरानी है | इसके लिए सबसे पहले कश्मीर के दलदली इलाकों की घास और सरकंडे की कटाई की जाती है | धूप में सुखाने के बाद छंटाई होती है और फिर शुरू होता है हाथों से बुनाई का काम | दो कारीगरों को एक चटाई बनाने में करीब-करीब चार दिन लगते हैं | यह चटाई अनूठी भी है और eco-friendly भी है | एक बड़ी खासियत ये है कि आपको गर्मियों में इससे ठंडक मिलेगी और सर्दियों में गर्माहट| पहले यह कश्मीर के हर घर में दिखती थी, लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में इसका उपयोग कम होने लगा था | ऐसे में श्रीनगर के गुलाम हुसैन जी और उनकी बेटी तंजीला जी ने एक संकल्प लिया | दोनों ‘वगू’ craft की परंपरा को एक नया जीवन देने में जुट गए | गुलाम हुसैन जी बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं | उन्हें इस काम में कई तरह की चुनौतियां भी आई | लेकिन ‘वगू’ के संरक्षण का उनका संकल्प अडिग था | देखते ही देखते उनके इस प्रयास से बहुत सारे लोग जुड़ते चले गए | गुलाम हुसैन जी ने इस कौशल को खूब बढ़ाया | अपने मिशन में उन्हें स्थानीय स्तर पर सरकारी सहयोग भी मिला | आज तेजी से लोकप्रिय हो रहा, ‘वगू’ देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच रहा है | मुझे इस प्रयास से जुड़े सभी लोगों पर बहुत गर्व है | आज हम सभी का Local products पर जोर है | हम Vocal for Local के मंत्र को लेकर चल रहे हैं | ऐसे में कश्मीर का ‘वगू’ भी आपके घर का हिस्सा बने, इस पर एक बार जरूर सोचिएगा |

साथियो,

हमारे देश में चाय सिर्फ एक पेय नहीं है - ये अपनापन भी है | सुबह की शुरुआत हो, दोस्तों की मुलाकात हो या परिवार के साथ कुछ पल बिताने हों ‘चाय’ हर मौके का हिस्सा बन जाती है | वैसे तो आप भी भलीभाँति जानते हैं मेरा चाय से रिश्ता क्या है | लेकिन आज मैं जिस चाय की चर्चा कर रहा हूं, उसने सिर्फ स्वाद ही नहीं दिया, बल्कि अनेक बहनों के जीवन में, आत्मनिर्भरता की नई खुशबू भी घोल दी है | उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखीवाला गांव में Self Help Group से जुड़ी महिलाओं ने ‘विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी’ तैयार की है | इसमें lemongrass, गिलोय, मुलेठी, तुलसी, कच्ची हल्दी, दालचीनी, इलायची और सौंफ जैसी प्राकृतिक सामग्रियां शामिल हैं | अपने अनोखे स्वाद और गुणों की वजह से इस चाय ने बहुत कम समय में लोगों के बीच खास पहचान बना ली | प्रयागराज के महाकुंभ और दिल्ली के International Food Festival में इस हर्बल चाय को खूब सराहना मिली है | विदेशों से आए लोगों ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है |

साथियो,

सबसे प्रेरक बात इसकी शुरुआत है | यह पूरा प्रयास सिर्फ एक लाख रुपये से शुरू हुआ था | आज यह brand देश के बड़े संस्थानों तक पहुंच चुका है | ये पहल हमें बताती है कि जब स्थानीय ज्ञान, प्रकृति और महिलाओं का आत्मविश्वास साथ आते हैं, तो एक छोटा-सा प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन जाता है |


मेरे प्यारे देशवासियो,

आज देश-भर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से लोग प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभा रहे हैं| जब समाज इस भावना से जुड़ता है, तो बहुत सुन्दर और प्रेरक उदाहरण सामने आते हैं | साथियो, अमदाबाद (अहमदाबाद) में जन-भागीदारी की अद्भुत शक्ति दिखाई दी है | भाड़ज़ क्षेत्र में एक घंटे के भीतर साढ़े 3 लाख से अधिक पौधे रोपे गए, इसमें, 25 हजार से अधिक लोग जुटे | स्कूली बच्चे, NCC Cadets, स्वयंसेवक और आम नागरिक - सभी ने इस अभियान में हिस्सा लिया | आने वाले वर्षों में यही पौधे एक घने शहरी वन का रूप लेंगे | इस प्रयास को Guinness Book of World Record में दर्ज किया गया है | साथियो ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत यूपी में भी जन-शक्ति का अद्भुत संकल्प देखने को मिला है | वहां एक ही दिन में 12 जुलाई को 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं | UP का सांसद होने के नाते मेरे लिए ये भी विशेष गर्व की बात है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

पेड़ केवल मनुष्यों के लिए नहीं होते, वे अनगिनत जीवों के घर भी होते हैं | गुजरात के गिर के जंगलों में करीब 60 वर्षों बाद Indian Grey Hornbill फिर से बसेरा बना रहा है | ये गिर में बरसों से हो रहे संरक्षण और पुनर्स्थापन के प्रयासों का परिणाम है | Hornbill को जंगलों का किसान कहा जाता है | ये फल खाते हैं और बीजों को दूर-दूर तक पहुंचाते हैं, उन्हीं बीजों से, जंगल में नए पेड़ उगते है इस तरह एक पक्षी जंगल को फिर से हरा-भरा बनाने में मदद करता है | मैं आप सभी से कहूँगा, हम सभी अपने जीवन के किसी विशेष अवसर को, प्रकृति से जरूर जोड़ें | एक पेड़ माँ के नाम लगाएं | आज का लगाया एक छोटा सा पौधा, आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली, स्वच्छ हवा और सुंदर भविष्य की विरासत बन सकता है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

हम सभी जानते हैं कि आज plastic प्रदूषण पूरी दुनियाँ के पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है | Single use plastic का कचरा कई वर्षों तक प्रकृति को नुकसान पहुंचाता रहता है, इसलिए, plastic का सही निस्तारण बहुत जरूरी है | साथियो, बिहार के सीतामढ़ी में ‘Waste to Wealth’ का शानदार उदाहरण सामने आया है | यहां कचरे की recycling कर उससे आकर्षक bench बनाई जा रही है | एक bench तैयार होने में करीब 40 किलो single use plastic खप जाती है | यह मजबूत, टिकाऊ और आरामदायक होने के साथ-साथ eco-friendly भी होती है | इसे सरकारी स्कूलों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाया जाता है | इसके जरिए लोगों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है | इस प्रयास में स्थानीय इकाई के साथ ही जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है | इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं | सीतामढ़ी का ये प्रयास हमें बताता है कि Reduce, Reuse और Recycle आज केवल एक नारा नहीं बल्कि हमारा जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है |

साथियो,

आपको याद होगा पिछली बार ‘मन की बात’ में, मैंने ‘गणेश उत्सव’ की बात की थी | मैंने आग्रह किया था कि हमें अपने देश की मिट्टी से ही बने गणेश जी की पूजा करनी चाहिए | जो POP (पी.ओ.पी.) से बने गणेश जी होते हैं या विदेश से आई गणेश जी की प्रतिमा होती है, उसके बजाय हमें देश की मिट्टी से बने गणेश जी को घर में स्थापित करना चाहिए | इस विषय पर अनेक लोगों ने मुझे संदेश भेजा है और अपने विचार रखे हैं | लोगों ने बताया कि उन्होंने मेरे आग्रह को अपनाया है | उन्होंने स्थानीय मिट्टी से तैयार होने वाले गणेश जी को स्थापित करने का संकल्प लिया है | लोगों ने लिखा है कि ‘मन की बात’ में पहले ही इस पर चर्चा हुई, इससे उन्हें सही वक्त पर सही कदम उठाने में मदद मिली | मैं एक बार फिर अपना आग्रह दोहराता हूं, इस बार गणपति पूजा में देश की मिट्टी से बने गणेश जी को अपने घर पर स्थापित करें, उनकी पूजा करें | आपका ये प्रयास भी एक तरह से प्रकृति की ही पूजा होगा |

मेरे प्यारे देशवासियो,

अब मैं आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताऊँगा, जिनके बारे में सुनकर आपको बहुत गर्व होगा | एक ऐसे व्यक्ति जो science और innovation के क्षेत्र में बढ़-चढ़कर काम कर रहे हैं, दुनिया में जिनकी पहचान बन रही है, लेकिन इसके बाद भी वो अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं, अवसर मिलते ही वो अपनी मिट्टी का सम्मान करना नहीं भूलते - वो व्यक्ति हैं, मणिपुर के Dr. Ronaldo Laishram जी | नाम उनका Ronaldo है लेकिन काम से वो एक Astrophysicist हैं | वे जापान में काम करते हैं और young galaxies के एक विशाल समूह की खोज करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं | आप जानना चाहेंगे कि उन्होंने आखिर किया क्या है? दरअसल, उन्होंने इस पूरे समूह का नाम मणिपुर की एक खूबसूरत झील से जोड़कर Loktak proto-cluster रखा है | Loktak ताजे पानी की बहुत बड़ी झील है | Loktak लेक में तैरती हुई फूमडी मिलकर एक अनोखा landscape बनाती है | ऐसा लगता है कि विशाल समंदर में छोटे-छोटे द्वीप तैर रहे हों | उसी प्रकार universe में ये young galaxies भी एक विशाल संरचना का निर्माण करती हैं | आज मणिपुर की Loktak केवल देश के Map पर ही नहीं, बल्कि विशाल ब्रह्मांड में भी अपनी चमक बिखेर रही है | यह उपलब्धि हर भारतीय का गौरव बढ़ाने वाली है | इससे हमारे युवा साथियों को सीख मिलती है कि वे अपनी परंपरा से जुड़े रहकर भी नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं | ये ऐसी जड़ें हैं, जो सितारों की दुनिया को भी जगमगा सकती हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो,

कुछ ही दिनों बाद, 7 अगस्त को हमारा देश ‘National Handloom Day’ मनाएगा | इस अवसर पर हम अपने बुनकर भाई-बहनों के कौशल और उनकी सृजनशीलता का उत्सव मनाते हैं | हमारे ये साथी पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं |

साथियो,

हथकरघे से बना हर परिधान किसी-न-किसी क्षेत्र, समुदाय और इससे जुड़े असंख्य लोगों की कहानी को सामने लाता है | ये वो लोग हैं, जो गर्व के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजोने में जुटे हैं | आज के दिन मेरा आग्रह है कि हम हस्तकला को प्रोत्साहित कर, अपने बुनकर साथियो का सम्मान करें | आइए, हम vocal for local की भावना को और सशक्त करें |

साथियो,

आज देश में जिस तरह handloom को बढ़ावा दिया जा रहा है | उससे बड़ी संख्या में लोगों का जीवन बेहतर हो रहा है | पोचमपल्ली से पटना और कुथमपल्ली से कच्छ तक इसके कई उदाहरण देखने को मिलते हैं | आज ऐसे कई लोग और समूह हैं, जो, handloom की हमारी गौरवशाली परंपरा को नई ऊर्जा और पहचान दे रहे हैं | कोई ‘पोचमपल्ली इकत’ की सुंदर परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, तो कोई महिला बुनकरों को जोड़कर wool products बना रहा है | कुछ लोग केरलम की पारंपरिक ‘कसावु कला’ को संरक्षित कर रहे हैं | इससे हमारी माताओं-बहनों को रोजगार भी मिल रहा है |

साथियो,

एक और विषय जिसका मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा, वह है ‘खादी’ | हम सभी जानते हैं कि ‘खादी’ महात्मा गांधी को बहुत प्रिय थी | बीते कुछ वर्षों में ‘खादी’ काफी लोकप्रिय हुई है | पिछले 12 वर्षों में इसकी बिक्री 6 गुना बढ़ी है | बिक्री का यह आंकड़ा अब 8,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है | मेरा आप सभी से आग्रह है कि आने वाले त्योहार में ‘खादी’ का कोई-न-कोई, handloom का कोई-न- कोई, handicraft का कोई-न-कोई product जरूर खरीदें|

मेरे प्यारे देशवासियो,

अगर आपसे पूछा जाए कि भारत के कितने तरह के musical instruments हैं, तो आप सोच में पड़ जाएंगे | ऐसा इसलिए, क्योंकि हमारे यहां बहुत से वाद्ययंत्र और उनसे जुड़ी परम्पराएं हैं | इसी तरह का एक instrument है - त्रिपुरा का ‘चौंगप्रेंग’ | यह वहां की tribal communities में काफी लोकप्रिय है | बांस से बने इस वाद्ययंत्र में तीन तार होते हैं | इससे निकली धुन बहुत मधुर होती है, जो सरोद से मिलती-जुलती है | कुछ वजहों से युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता कम होने लगी थी | ऐसे में सूरज कुमार देबबर्मा जी ने इसे फिर से लोकप्रिय बनाने का संकल्प लिया | आज उनका प्रयास रंग ला रहा है | वे चौंगप्रेंग के साथ ही वहां के अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर भी perform करते रहे हैं | Kokborok folk songs, Baul songs, Bangali Folk उन्हें खूब भाता है | अब मैं आपको एक छोटी सी clip सुनाना चाहता हूं | इस संगीत को आप कभी भूल नहीं पाएंगे |

साथियो,

मुझे विश्वास है इसे सुनकर आपके मन को बहुत अच्छा लगा होगा | मुझे देबबर्मा जी पर बहुत गर्व है | पारंपरिक संगीत को लोकप्रिय बनाने का उनका प्रयास बहुत ही सराहनीय है | मेरा आग्रह है कि आप भी अपने आस-पास के पारंपरिक वाद्ययंत्र की जानकारी social media पर जरूर share करें | आपकी यह कोशिश दूसरों को भी पारंपरिक भारतीय संगीत से जरूर जोड़ेगी |

मेरे प्यारे देशवासियो,

कल 27 जुलाई को, भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की पुण्यतिथि है | डॉ. कलाम के व्यक्तित्व में कई प्रेरक रूप थे, लेकिन, उनके हृदय के सबसे करीब एक शिक्षक की भूमिका थी | वे बच्चों और युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे | संयोग से, इसी हफ्ते हम ‘गुरु पूर्णिमा’ का पावन पर्व मनाएंगे | हमारे माता-पिता हमारे पहले गुरु होते हैं | स्कूल के शिक्षक हमें अक्षर ज्ञान देते हैं | गुरु पूर्णिमा ऐसे सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है | मैं देश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं |

साथियो,

कुछ ही सप्ताह बाद हम अपनी स्वतंत्रता का महापर्व भी मनाएंगे | 15 अगस्त हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है | ये उन असंख्य वीरों को याद करने का दिन है, जिन्होंने ‘भारत माता’ की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया | उनके त्याग और तपस्या की वजह से आज हमारे हाथ में तिरंगा है | इस तिरंगे में हमारे संविधान के आदर्श हैं |

साथियो,

पिछले कुछ वर्षों में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने पूरे देश को एक अद्भुत भावना से जोड़ा है | हर घर, हर गली में तिरंगे का उत्सव दिखाई देता है | इस वर्ष भी हमें ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाना है | अपने घर पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराना है |

साथियो,

हर वर्ष 15 अगस्त से पहले आप मुझे बहुत से विचार और सुझाव भेजते हैं | इस वर्ष भी आप अपने विचार MyGov पर जरूर साझा कीजिए | मुझे आपके सुझावों का इंतजार है |

साथियो,

‘मन की बात’ में आज इतना ही | अगले महीने हम फिर मिलेंगे देशवासियों की अनेक नई उपलब्धियां, और, प्रेरक प्रयासों के साथ, तब तक के लिए मुझे अनुमति दीजिए | बहुत-बहुत धन्यवाद, नमस्कार |