गुरु रविदास जी हमारी धरती पर जन्म लेने वाले सबसे महान संतों में से एक थे। उन्होंने समतामूलक, न्यायपूर्ण और करूणामय समाज की स्थापना के लिए काम किया: प्रधानमंत्री मोदी
गुरु रविदास जी की शिक्षा शाश्वत और समाज के सभी वर्गों के लिए आज भी प्रासंगिक है: पीएम मोदी
गुरु रविदास जी ने पीछे की ओर ले जाने वाली प्रथा पर सवाल उठाया और लोगों को समय के साथ बदलाव के लिए प्रेरित किया: प्रधानमंत्री
गुरु रविदास जी सौहार्द और भाईचारे के मूल्यों में अटूट आस्था रखते थे। वे किसी के साथ भेदभाव में विश्वास नहीं करते थे: प्रधानमंत्री मोदी
जब हम ‘सबका साथ, सबका विकास’ के भाव के साथ काम करते हैं, तब यह गुरु रविदास जी के सभी लोगों, खासकर गरीबों की सेवा की शिक्षा पर आधारित होता है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने गुरु रविदास जयंती के अवसर पर गुरु रविदास को श्रद्धांजलि व्‍यक्‍त की है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, ‘मैं गुरु रविदास की जयंती पर उन्‍हें नमन करता हूं, गुरु रविदास जी हमारे देश के महान संतों में थे। वह समान, न्‍यायपूर्ण और करुणामय समाज के पक्षधर थे। उनकी शिक्षाएं हर काल और समय के लिए तथा समाज के सभी वर्गों के लोगों के लिए प्रासंगिक हैं।

गुरु रविदास जी ने हमारे समाज में अनेक सार्थक बदलाव लाए। उन्‍होंने रुढ़ीवादी और दमनकारी प्रथाओं पर सवाल खड़ा किया और लोगों को समय के साथ बदलने के लिए प्रेरित किया। उन्‍होंने ज्ञान भावना के साथ आगे बढ़ने और समय के साथ चलने की शिक्षा दी।

गुरु रविदास की सौहार्द और भाईचारे में प्रगाढ़ आस्‍था थी। वह किसी तरह के भेदभाव में विश्‍वास नहीं रखते थे। हम जब ‘सबका साथ सबका विकास ’ की भाव से काम करते हैं तो हम प्रत्‍येक मनुष्‍य विशेष गरीब की सेवा पर गुरु रविदास जी से प्रेरित होते हैं

मैं गुरु रविदास जी की इन शब्‍दों को साझा करना चाहूंगा।

ऐसा चाहूँ राज मैं जहाँ मिलै सबन को अन्न।

छोट बड़ो सब सम बसै, रैदास रहै प्रसन्न।।

गुरु रविदास जी ने उस समय का सपना देखा था, जब हर व्‍यक्ति के पास खाने का अन्‍न हो और व्‍यक्ति खुश हो।’

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प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के अपमान और संथाल संस्कृति के अनादर की निंदा की
March 07, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राष्ट्रपति जी के अपमान और संथाल संस्कृति के साथ किए गए लापरवाही भरे व्यवहार की कड़ी निंदा की है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घटना शर्मनाक है और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जो भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करता है, वो इस घटना से बहुत निराश है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति जी खुद आदिवासी समुदाय से हैं, और उन्होंने जो दर्द और पीड़ा व्यक्त की है उसने भारत के लोगों को बहुत दुःखी किया है।

श्री मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं और राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय के साथ पश्चिम बंगाल सरकार इतना लापरवाही भरा व्यवहार कर रही है।

राष्ट्रपति के कार्यालय को राजनीति से ऊपर बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यालय की पवित्रता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी को सद्बुद्धि आएगी।

प्रधानमंत्री ने X पर लिखा;

“यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। जो भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करता है, वो निराश है।

राष्ट्रपति जी खुद आदिवासी समुदाय से हैं, उन्होंने जो दर्द और पीड़ा ज़ाहिर की है, उससे भारत के लोग बहुत दुःखी हैं।

पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सच में सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन ज़िम्मेदार है।

यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय के साथ पश्चिम बंगाल सरकार इतनी लापरवाही से पेश आती है।

राष्ट्रपति का कार्यालय राजनीति से ऊपर है और इस कार्यालय की पवित्रता का सदैव सम्मान किया जाना चाहिए। आशा है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी को सद्बुद्धि आएगी।”