श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाळी जीवोत्तम मठ अपनी स्थापना की 550वीं वर्षगांठ मना रहा है, ये बहुत ऐतिहासिक अवसर है। बीते 550 वर्षों में, इस संस्था ने समय के कितने ही चक्रवात झेले हैं, युग बदला, दौर बदला, देश और समाज में कई परिवर्तन हुए, लेकिन बदलते युगों और चुनौतियों के बीच भी इस मठ ने अपनी दिशा नहीं खोई, बल्कि ये मठ लोगों को दिशा देने वाला केंद्र बनकर उभरा: प्रधानमंत्री
ऐसे समय भी आए जब गोवा के मंदिरों और स्थानीय परंपराओं को संकट का सामना करना पड़ा। जब भाषा और सांस्कृतिक पहचान पर दबाव बना। लेकिन ये परिस्थितियां समाज की आत्मा को कमजोर नहीं कर पाईं, बल्कि उसे और दृढ़ बनाया: प्रधानमंत्री
गोवा की यही विशेषता है कि यहाँ की संस्कृति ने हर बदलाव में अपने मूल स्वरूप को बनाए रखा और समय के साथ पुनर्जीवित किया है। इस यात्रा में पर्तगाळी मठ जैसी संस्थाओं का बहुत बढ़ा योगदान रहा: प्रधानमंत्री
आज भारत एक अद्भुत सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में राम मंदिर का पुनर्स्थापन, काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनरुद्धार और उज्जैन में महाकाल महालोक का विस्तार, ये सब हमारे राष्ट्र की उस जागरूकता को प्रकट करते हैं जो अपनी आध्यात्मिक धरोहर को नई शक्ति के साथ उभार रही है: प्रधानमंत्री
आज का भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को नए संकल्प और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रहा है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गोवा में श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ के 550वें वर्ष समारोह को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पावन अवसर पर उनका मन गहन शांति से भर गया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि संतों के सान्निध्य में बैठना अपने आप में एक आध्यात्मिक अनुभव है। यह देखते हुए कि यहाँ उपस्थित भक्तों की बड़ी संख्या इस मठ की सदियों पुरानी जीवंत शक्ति को और बढ़ा रही है, श्री मोदी ने कहा कि वह आज इस समारोह में लोगों के बीच उपस्थित होकर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ आने से पहले उन्हें राम मंदिर और वीर विट्ठल मंदिर के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि वहाँ की शांति और वातावरण ने इस समारोह की आध्यात्मिकता को और प्रगाढ कर दिया है।

श्री मोदी ने कहा, “श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ अपनी 550वीं वर्षगांठ मना रहा है, जो एक अत्यंत ऐतिहासिक अवसर है। विगत 550 वर्षों में इस संस्था ने अनेक उथल-पुथल, बदलते युग, बदलते समय और देश व समाज में अनेक परिवर्तनों का सामना किया है, फिर भी मठ ने अपनी दिशा नहीं खोई। इसके बजाय, मठ लोगों के लिए एक मार्गदर्शक केंद्र के रूप में उभरा है और इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि इतिहास में निहित होने के बावजूद, यह समय के साथ आगे बढ़ता रहा है।" उन्होंने कहा कि जिस भावना के साथ मठ की स्थापना हुई थी, वह आज भी उतनी ही जीवंत है, एक ऐसी भावना जो साधना को सेवा से और परंपरा को लोक कल्याण से जोड़ती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पीढ़ी दर पीढ़ी, मठ ने यह बोध दिया है कि आध्यात्मिकता का वास्तविक उद्देश्य जीवन को स्थिरता, संतुलन और मूल्य प्रदान करना है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मठ की 550 वर्षों की यात्रा उस शक्ति का प्रमाण है जो कठिन समय में भी समाज को सहारा देती है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर मठाधिपति श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ स्वामीजी, समिति के सभी सदस्यों और समारोह से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि जब कोई संस्था सत्य और सेवा की नींव पर खड़ी होती है, तो वह समय के साथ नहीं डगमगाती, बल्कि समाज को सहन करने की शक्ति देती है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज, इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, मठ एक नया अध्याय लिख रहा है। उन्होंने बताया कि यहाँ भगवान श्री राम की 77 फुट ऊँची भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि अभी तीन दिन पहले ही उन्हें अयोध्या में भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था और आज उन्हें यहाँ भगवान श्री राम की भव्य प्रतिमा का अनावरण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर रामायण पर आधारित एक थीम पार्क का भी उद्घाटन किया गया है।

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि इस मठ से जुड़े नए आयाम आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान, प्रेरणा और साधना के स्थायी केंद्र बनने जा रहे हैं, प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि यहाँ विकसित किया जा रहा संग्रहालय और आधुनिक तकनीक से सुसज्जित 3-डी थिएटर, मठ की परंपरा को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी को इसकी विरासत से जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, देश भर के लाखों श्रद्धालुओं की भागीदारी से 550 दिनों से अधिक समय तक चलने वाला श्री राम नाम जप यज्ञ और राम रथ यात्रा, समाज में भक्ति और अनुशासन की सामूहिक ऊर्जा के प्रतीक बन गए हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यही सामूहिक ऊर्जा आज देश के कोने-कोने में एक नई चेतना का संचार कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आध्यात्म को आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाली ये व्यवस्थाएँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी। उन्होंने इस निर्माण के लिए सभी को बधाई दी। श्री मोदी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि इस भव्य समारोह में, सदियों से समाज को एकजुट रखने वाली आध्यात्मिक शक्ति को समर्पित, इस विशेष अवसर के प्रतीक के रूप में स्मारक सिक्के और डाक टिकट भी जारी किए गए हैं।

इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि इस मठ को निरंतर शक्ति का प्रवाह उस महान गुरु परंपरा से मिला है जिसने द्वैत वेदांत की दिव्य नींव स्थापित की, श्री मोदी ने स्मरण किया कि श्रीमद् नारायण तीर्थ स्वामीजी द्वारा 1475 में स्थापित यह मठ उस ज्ञान परंपरा का विस्तार है जिसके मूल स्रोत अद्वितीय आचार्य जगद्गुरु श्री माधवाचार्य हैं। उन्होंने इन आचार्यों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि उडुपी और पर्तगली एक ही आध्यात्मिक नदी की जीवंत धाराएँ हैं और भारत के पश्चिमी तट के सांस्कृतिक प्रवाह का मार्गदर्शन करने वाली गुरु-शक्ति एक ही है। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह एक विशेष संयोग है कि मुझे एक ही दिन इस परंपरा से जुड़े दो कार्यक्रमों में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

इस परंपरा से जुड़े परिवारों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी अनुशासन, ज्ञान, परिश्रम और उत्कृष्टता को अपने जीवन का आधार बनाए रखने पर गर्व करते हुए, श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि व्यापार से लेकर वित्त तक और शिक्षा से लेकर तकनीक तक, इनमें दिखाई देने वाली प्रतिभा, नेतृत्व और समर्पण इस जीवन-दृष्टि की गहरी छाप है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा से जुड़े परिवारों और व्यक्तियों की सफलता की अनेक प्रेरक कहानियाँ हैं और इन सभी सफलताओं की जड़ें विनम्रता, मूल्यों और सेवा में निहित हैं। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि यह मठ इन मूल्यों के संरक्षण में आधारशिला रहा है, प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह आने वाली पीढ़ियों को ऊर्जा प्रदान करता रहेगा।

ऐतिहासिक मठ की एक और महत्वपूर्ण विशेषता - सेवा की भावना, जिसने सदियों से समाज के हर वर्ग का साथ दिया है, पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने याद दिलाया कि सदियों पहले, जब इस क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियाँ आईं और लोगों को अपना घर छोड़कर नए स्थानों पर शरण लेनी पड़ी, तो इसी मठ ने समुदाय को सहारा दिया, उन्हें संगठित किया और नए स्थानों पर मंदिर, मठ और आश्रय स्थल स्थापित किए। श्री मोदी ने कहा कि मठ ने न केवल धर्म, बल्कि मानवता और संस्कृति की भी रक्षा की और समय के साथ इसकी सेवा का दायरा और विस्तृत होता गया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज, शिक्षा से लेकर छात्रावासों तक, वृद्धों की देखभाल से लेकर ज़रूरतमंद परिवारों की सहायता तक, मठ ने हमेशा अपने संसाधनों को जन कल्याण के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि चाहे विभिन्न राज्यों में निर्मित छात्रावास हों, आधुनिक विद्यालय हों, या कठिन समय में राहत कार्य हों, हर पहल इस बात का प्रमाण है कि जब अध्यात्म और सेवा साथ-साथ चलते हैं, तो समाज को स्थिरता और आगे बढ़ने की प्रेरणा दोनों मिलती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गोआ में कई बार मंदिरों और स्थानीय परंपराओं को संकट का सामना करना पड़ा, भाषा और सांस्कृतिक पहचान पर दबाव पड़ा, फिर भी इन परिस्थितियों ने समाज की आत्मा को कमज़ोर नहीं किया, बल्कि उसे और मज़बूत बनाया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि गोआ की अनूठी विशेषता यह है कि इसकी संस्कृति ने हर बदलाव के बावजूद अपने मूल स्वरूप को बचाए रखा है और समय के साथ खुद को पुनर्जीवित भी किया है, जिसमें पर्तगली मठ जैसी संस्थाओं की प्रमुख भूमिका रही है।

श्री मोदी ने कहा, "आज भारत एक उल्लेखनीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है, अयोध्या में राम मंदिर का जीर्णोद्धार, काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनर्विकास और उज्जैन में महाकाल महालोक का विस्तार, ये सभी उस राष्ट्र कीआ की पवित्र भूमि सदियों से भक्ति, संत परंपरा और सांस्कृतिक साधना के अविरल प्रवाह के साथ अपनी विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान रखती है, श्री मोदी ने कहा कि यह भूमि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ 'दक्षिण काशी' की पहचान भी रखती है, जिसे पर्तगली मठ ने और भी प्रगाढ़ किया है। उन्होंने कहा कि मठ का संबंध केवल कोंकण और गोआ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी परंपरा देश के विभिन्न हिस्सों और वाराणसी की पावन भूमि से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि वाराणसी के सांसद के रूप में, संस्थापक आचार्य श्री नारायण तीर्थ ने उत्तर भारत की अपनी यात्राओं के दौरान वाराणसी में एक केंद्र की स्थापना की, जिससे मठ की आध्यात्मिक धारा दक्षिण से उत्तर की ओर विस्तारित हुई। उन्होंने कहा कि आज भी वाराणसी में स्थापित यह केंद्र समाज की सेवा कर रहा है।

श्री मोदी ने इस पवित्र मठ के 550 वर्ष पूरे होने पर ज़ोर देते हुए कहा कि हम न केवल इतिहास का उत्सव मना रहे हैं, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मार्ग एकता से होकर गुजरता है, और जब समाज एकजुट होता है, जब हर क्षेत्र और हर वर्ग एकजुट होता है, तो राष्ट्र ऊँची छलांग लगाता है। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ का प्राथमिक मिशन लोगों को जोड़ना, मन को जोड़ना और परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सेतु का निर्माण करना है, और इसलिए एक विकसित भारत की यात्रा में, यह मठ एक प्रमुख प्रेरणा केंद्र की भूमिका निभाता है।

श्री मोदी ने कहा कि जहाँ भी उन्हें स्नेह होता है, वहाँ वे आदरपूर्वक कुछ अनुरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि आज जब वे लोगों के बीच आए हैं, तो उनके मन में स्वाभाविक रूप से कुछ विचार उठ रहे हैं जिन्हें वे साझा करना चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वे उनके समक्ष नौ अपीलें रखना चाहते हैं, जिन्हें उनकी संस्था के माध्यम से प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाया जा सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ये अपीलें नौ संकल्पों के समान हैं। श्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हम पर्यावरण संरक्षण को अपना कर्तव्य मानेंगे, क्योंकि पृथ्वी हमारी माता है और मठ की शिक्षाएँ हमें प्रकृति का सम्मान करने का मार्गदर्शन करती हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए पहला संकल्प जल संरक्षण, जल संचय और नदियों की रक्षा का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरा संकल्प पौधारोपण का होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि "एक पेड़ माँ के नाम" का राष्ट्रव्यापी अभियान गति पकड़ रहा है और यदि इस संस्था की शक्ति इसमें शामिल हो जाए, तो इसका प्रभाव और भी व्यापक होगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि तीसरा संकल्प स्वच्छता का मिशन होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर गली, मोहल्ला और शहर स्वच्छ रहे। चौथे संकल्प के रूप में स्वदेशी अपनाने पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है, और देश "वोकल फॉर लोकल" कह रहा है। यह एक ऐसा संकल्प जिसे हमें भी आगे बढ़ाना होगा।

पाँचवें संकल्प के बारे में बोलते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह 'देश दर्शन' होना चाहिए, जिससे सभी को देश के विभिन्न हिस्सों को जानने और समझने के लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि छठा संकल्प प्राकृतिक खेती को जीवन का हिस्सा बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सातवाँ संकल्प स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, 'श्री अन्न' - मोटा अनाज को अपनाना और भोजन में तेल की खपत को 10 प्रतिशत तक कम करना होना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आठवाँ संकल्प योग और खेल को अपनाना होना चाहिए, और नौवाँ संकल्प किसी न किसी रूप में गरीबों की सहायता करना होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मठ इन संकल्पों को सामूहिक सार्वजनिक प्रतिबद्धताओं में बदल सकता है। उन्होंने कहा कि इस मठ का 550 वर्षों का अनुभव हमें सिखाता है कि परंपरा समाज को तभी आगे बढ़ाती है जब वह समय के साथ अपनी ज़िम्मेदारियों का विस्तार करता है, और मठ ने सदियों से समाज को जो ऊर्जा दी है, उसे अब भविष्य के भारत के निर्माण में लगाना चाहिए।

गोआ के आध्यात्मिक वैभव को उसके आधुनिक विकास जितना ही विशिष्ट बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि गोआ उच्चतम प्रति व्यक्ति आय वाले राज्यों में से एक है और पर्यटन, फार्मा और सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में गोआ ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ हासिल की हैं और केंद्र तथा राज्य सरकारें मिलकर इसके बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राजमार्गों, हवाई अड्डों और रेल संपर्क के विस्तार ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों, दोनों के लिए यात्रा को आसान बना दिया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण में पर्यटन एक प्रमुख घटक है और गोआ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा, "भारत एक निर्णायक दौर से गुज़र रहा है, जहाँ युवाओं की शक्ति, राष्ट्र का बढ़ता आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जड़ों के प्रति उसका झुकाव मिलकर एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विकसित भारत का संकल्प तभी पूरा होगा जब आध्यात्म, राष्ट्रसेवा और विकास एक साथ आगे बढ़ेंगे। अपने संबोधन के समापन पर, श्री मोदी ने कहा कि गोआ की पावन भूमि और यह मठ इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस पावन अवसर पर एक बार फिर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

इस कार्यक्रम में गोआ के राज्यपाल श्री पुष्पपति अशोक गजपति राजू, गोआ के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, केंद्रीय मंत्री श्री श्रीपद नाइक सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ के 550वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित 'सार्ध पंचशतामनोत्सव' के अवसर पर, प्रधानमंत्री ने दक्षिण गोआ के कैनाकोना स्थित मठ का दौरा किया।

प्रधानमंत्री ने श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ में प्रभु श्री राम की 77 फीट ऊँची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया और मठ द्वारा विकसित 'रामायण थीम पार्क गार्डन' का भी उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने विशेष डाक टिकट और एक स्मारक सिक्का भी जारी किया।

श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ, पहला गौड़ सारस्वत ब्राह्मण वैष्णव मठ है। यह द्वैत संप्रदाय का पालन करता है, जिसकी स्थापना जगद्गुरु माधवाचार्य ने 13वीं शताब्दी में की थी। इस मठ का मुख्यालय कुशावती नदी के तट पर, दक्षिण गोआ के एक छोटे से कस्बे पर्तगली में स्थित है।

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Prime Minister shares Sanskrit Subhashitam highlighting the power of determination and hard work
March 06, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, said that the people of India, through their firm resolve, make even the most difficult tasks possible. He noted that with tireless effort in the right direction, they achieve even the biggest goals.

The Prime Minister shared a Sanskrit Subhashitam-

“यद् दूरं यद् दुराराध्यं यच्च दूरे व्यवस्थितम्। तत् सर्वं तपसा साध्यं तपो हि दुरतिक्रमम्॥”

The Subhashitam conveys that no matter how far, difficult, or out of reach a goal may seem, it can be achieved through firm determination and continuous hard work. Determination and patience are the forces that turn the impossible into possible.

The Prime Minister wrote on X;

“भारत के लोग अपने दृढ़ निश्चय से किसी भी कार्य को संभव बना देते हैं। सही दिशा में अपनी अथक मेहनत से वे बड़े से बड़े लक्ष्य को भी हासिल कर दिखाते हैं।

यद् दूरं यद् दुराराध्यं यच्च दूरे व्यवस्थितम्।

तत् सर्वं तपसा साध्यं तपो हि दुरतिक्रमम्॥”