मैं जानता हूं कि हम सभी किस गहरी वेदना से गुजर रहे हैं, पुलवामा में जो हुआ, उसको लेकर आपके आक्रोश को मैं समझ रहा हूं, जिन परिवारों ने अपने लाल को खोया है, उनकी पीड़ा मैं अनुभव कर सकता हूं: प्रधानमंत्री मोदी
ज़मीन हो, जंगल की पैदावार हो, पढ़ाई लिखाई हो, खेल से जुड़ी प्रतिभा हो, हर स्तर पर आदिवासियों के कल्याण के लिए व्यापक प्रयास हो रहे हैं: पीएम मोदी
केंद्र सरकार ने 2022 तक हर बेघर को पक्का घर देने का लक्ष्य रखा है और सरकार तेज़ी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रही है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के धुले का दौरा किया । उन्होंने राज्य में अनेक परियोजनाओं का अनावरण किया । इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री सी विद्यासागर राव, केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री डॉक्टर सुभाष भामरे एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फड़नवीस भी उपस्थित थे ।

पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शूरवीरों की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश शोक एवं दुख के इस अवसर पर उनके साथ खड़ा है । आतंकवादी हमले के गुनाहगारों को कड़ा संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की नीति है कि वह किसी अन्य के मामलों में छेड़छाड़ नहीं करता । यद्यपि यदि कोई भारत के मामलों से छेड़छाड़ करे तो वह उनको छोड़ता भी नहीं । “मैं न सिर्फ भारत के वीर सपूतों को नमन करता हूं, बल्कि उनकी माताओं को भी नमन करता हूं जिन्होंने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया । पुलवामा के गुनाहगारों को न्याय के अंजाम तक पहुंचाया जाएगा एवं विश्व यह देखेगा कि भारत एक नया भारत है और नये दृष्टिकोण वाला भारत है एवं हर आंसू का प्रतिशोध लिया जाएगा ।”

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत लोअर पंजारा मध्यम परियोजना का शुभारंभ भी किया । यह परियोजना धुले एवं आसपास के क्षेत्रों के 21 गांवों के लगभग 7585 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई करेगी, यथा पानी की कमी वाले क्षेत्र में जीवनदायिनी का कार्य करेगी । उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना धुले समेत महाराष्ट्र एवं देश के अन्य हिस्सों में सिंचाई की स्थिति की बेहतरी करने के लिये शुरू की गई है । उन्होंने आगे कहा, “पिछले चार वर्षों में 99 सिंचाई परियोजनाओं के कार्य में गति लाकर उनको पूरा किया गया है । इनमें से 26 ऐसी परियोजनाएं महाराष्ट्र से ही संबंधित हैं, इनमें से पंजारा एक परियोजना है । इस परियोजना की शुरुआत पच्चीस वर्ष पूर्व केवल 21 करोड़ रुपये में की गई थी किंतु अब यब 500 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हो चुका है । यह महाराष्ट्र के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक जल पहुंचाने के हमारे प्रयासों का परिणाम है ।”

प्रधानमंत्री ने जलगांव-उधना रेलमार्ग के दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण की परियोजना भी देश के नाम समर्पित की । माल एवं लोगों का गमन सुसाध्य बनाने के लिये पिछले चार वर्षों के दौरान 2400 करोड़ रुपये की परियोजना के कार्य में गति लाई गई । देश के उत्तर एवं दक्षिण भागों को जोड़ने वाली रेल लाइन से आसपास के क्षेत्रों की अभूतपूर्व प्रगति होगी ।

प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी ने वीडियो-लिंक के माध्यम से भुसावल-बांद्रा खंडेश एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई । यह ट्रेन मुंबई से भुसावल के बीच सीधा रेल सम्पर्क मुहैया कराएगी । प्रधानमंत्री ने नंदूदरबार-उधना मेमू ट्रेन एवं उधना-पालदी मेमू ट्रेन को भी हरी झंडी दिखलाई ।

प्रधानमंत्री ने बटन दबा कर 51 किलोमीटर लंबे धुले-नरदाना रेलमार्ग एवं 107 किलोमीटर लंबे जलगांव-मनमाड़ तीसरे रेलमार्ग का शिलान्यास किया । इन परियोजनाओं से समय एवं यातायात के बेहतर प्रबंधन में सहायता प्राप्त होगी ।

 प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजनाएं इस क्षेत्र में रेल सम्पर्क एवं विकास को बढ़ावा देंगी एवं विकास के मामले में धुले शीघ्र ही सूरत से प्रतिस्पर्धा करने लगेगा ।

प्रधानमंत्री ने सुलवाड़े झम्फल कनोली लिफ्ट सिंचाई योजना का अनावरण भी किया । इस परियोजना से तापी नदी से जल की प्राप्ति होगी एवं इससे जुड़े बांधों, जलाशयों एवं नहरों को जल की आपूर्ति होगी, जिससे 100 गांवों के 1 लाख किसानों को लाभ पहुंचेगा ।

प्रधानमंत्री ने धुले शहर के लिये लगभग 500 करोड़ रुपये की प्राक्कलित लागत से अमृत के अंतर्गत जलापूर्ति योजना एवं भूमिगत सीवर परियोजना की आधारशिला रखी । जलापूर्ति योजना पानी की कमी वाले धुले क्षेत्र में जल संबंधी परेशानियों का समापन करेगी ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार भारत के हर नागरिक का जीवन आसान बनाने के लिये हरसंभव प्रयास कर रही है । उन्होंने कहा कि इतनी छोटी से अवधि में आयुष्मान भारत ने महाराष्ट्र के 70,000 रोगियों, जिनमें से धुले के 1800 हैं, समेत 12 लाख लोगों को लाभान्वित किया है, साथ ही यह निर्धन एवं हाशिए पर धकेले गए लोगों के लिये एक आशा की किरण रही है ।

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आपने सिर्फ पदकों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि पूरी पीढ़ी को तैयार किया: CWG चैंपियंस से पीएम मोदी
August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।