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जैव ईंधन 21वीं शताब्दी में भारत की विकास यात्रा को शक्ति प्रदान करेगा: प्रधानमंत्री मोदी
जैव ईंधन से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है और इससे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी: पीएम मोदी
जैव ईंधन से न केवल किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे: प्रधानमंत्री
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिश्रण करके लगभग 4,000 करोड़ बचाए गए हैं, इससे किसानों को भी फायदा हुआ: प्रधानमंत्री मोदी
हम कचरे से बायो सीएनजी बनाने के लिए काम कर रहे हैं, सार्वजनिक परिवहन में सीएनजी का उपयोग बढ़या जा रहा है; हम सीएनजी आयात पर निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने विश्‍व जैव ईंधन दिवस के अवसर पर आज यहां किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों, छात्रों, सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की एक विविध जनसभा को संबोधित किया।

श्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि जैव ईंधन से 21 वीं सदी में भारत को एक नयी गति मिल सकती है। उन्‍होंने कहा कि‍ फसलों से बनाया जाने वाला जैव ईंधन गांवों और शहरों दोंनों स्‍थानों में रहने वाले लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जैव ईंधन से एथनॉल बनाने की पहल श्री अटल बिहार वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान हुयी थी। एथनॉल ब्‍लेंडिंग कार्यक्रम की रूप रेखा वर्ष 2014 के बाद तैयार की गयी। इस पहल से न केवल किसानों को फायदा हुआ बल्कि इससे बीते साल 4 हजार करोड़ रूपए की विदेशी मुद्रा की भी बचत हुयी। अगले चार वर्षों में इसे 12 हजार करेाड़ रूपए तक पहुंचाने का लक्ष्‍य रखा गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बायोमास को जैव ईंधन में बदलने के लिए केन्‍द्र सरकार बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। देशभर में 12 आधुनिक रिफाइनरी बनाने की योजना है। इससे बड़ी संख्‍या में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि आज जनधन,वनधन और गोबरधन जैसी योजनायों से गरीबों, किसानों, आदिवासियों के जीवन में व्यापक बदलाव के लाने में मदद मिल रही है। उन्‍होंने कहा कि जैव ईंधन की बड़े बदलाव लाने की क्षमता का सदुपयोग इसमें छात्रों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और आम जन की भागीदारी से ही संभव है। उन्‍होंने उपस्थित लोगों से जैव ईंधन के फायदे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद करने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर “राष्‍ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018” की पुस्तिका का विमोचन किया। साथ ही उन्‍होंने पर्यावरण मंत्रालय के डिज़िटल प्लेटफार्म “परिवेश” का भी शुभारंभ किया।

बायोफ्यूल सिर्फ विज्ञान नहीं है बल्कि वो मंत्र है जो 21वीं सदी के भारत को नई ऊर्जा देने वाला है

बायोफ्यूल यानि फसलों से निकला ईंधन, कूड़े-कचरे से निकला ईंधन

ये गांव से लेकर शहर तक के जीवन को बदलने वाला है

आम के आम, गुठली के दाम की जो पुरानी कहावत है, उसका ये आधुनिक रूप है: PM

— PMO India (@PMOIndia) August 10, 2018

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