जैव ईंधन 21वीं शताब्दी में भारत की विकास यात्रा को शक्ति प्रदान करेगा: प्रधानमंत्री मोदी
जैव ईंधन से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है और इससे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी: पीएम मोदी
जैव ईंधन से न केवल किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे: प्रधानमंत्री
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिश्रण करके लगभग 4,000 करोड़ बचाए गए हैं, इससे किसानों को भी फायदा हुआ: प्रधानमंत्री मोदी
हम कचरे से बायो सीएनजी बनाने के लिए काम कर रहे हैं, सार्वजनिक परिवहन में सीएनजी का उपयोग बढ़या जा रहा है; हम सीएनजी आयात पर निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं: पीएम मोदी

यहां उपस्थित समाज के अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े हुए सभी देवियों और सज्‍जनों!

साथियो, अगस्‍त का ये महीना अपने-आप में पवित्रता और संकल्‍प का वातावरण लेकर आता है। ये क्रांति का देश की आजादी के लिए खुद को समर्पित करने वाले सैनानियों को याद करने का महीना होता है। स्वतंत्रता दिवस के साथ ही इस महीने में अनेक त्‍योहार आते हैं जो हमारे सामाजिक और सांस्‍कृतिक जीवन को समृद्ध बनाते हैं। आने वाले सभी पर्वों के लिए मैं आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

हमारी परम्‍परा में, हमारे उत्‍सव में, हमारे त्‍योहारों में प्रकृति का, पर्यावरण का बहुत ही ऊंचा स्‍थान है। आज का यह आयोजन भी पकृति, पर्यावरण और आधुनिक परम्‍पराओं से जुड़ा हुआ है। मैं आप सभी को विश्‍व बायोफ्यूल दिवस की बधाई देता हूं।

साथियो, सवा सौ करोड़ देशवासियों के जीवन को कैसे बेहतर किया जा सके, इसके लिए सरकार अनेक कदम उठा रही है, लगातार प्रयास कर रही है, नई-नई योजनाएं बना रही है। गांव की अर्थव्‍यवस्‍था को ताकतवर बनाना, गांव के किसान की आय बढ़ाना, पेट्रोल, डीजल, गैस का विकल्‍प तैयार करना,और पर्यावरण को सुरक्षित करना; ये हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में है। बायोफ्यूल, इन लक्ष्‍यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभाने वाला है। बायोफ्यूल पर्यावरण और हमारी आर्थिक उन्‍नति के बीच तालमेल बिठाने में बड़ा सहायक बनने की शक्ति रखता है।

सा‍थियो, बायोफ्यूल सिर्फ विज्ञान नहीं है बल्कि वो मंत्र है जो 21वीं सदी के भारत को, और न सिर्फ भारत को; पूरे विश्‍व की मानव जाति को नई ऊर्जा देने वाला है। बायोफ्यूल, यानी फसलों से निकला ईंधन, फसल के अवशेष से निकला ईंधन, कूड़े कचरे से निकला ईंधन। ये भारत के गांव से लेकर शहर तक के जीवन को बदलने वाला है, बेहतर बनाने वाला है। और अभी जो फिल्‍म दिखाई गई, उसमें एक पुरानी कहावत को भी याद किया गया- आम के आम और गुठली के दाम। बहुत पुरानी कहावत है, उसका एक प्रकार से ये आधुनिक रूप है।

बायोफ्यूल का ज्‍यादा से ज्‍यादा इस्‍तेमाल किसानों की आमदनी को बढ़ाएगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, देश का धन भी बचाएगा और पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित होगा। देश के लिए ये हमारे उस व्‍यापक vision का हिस्‍सा है, जहां स्‍वच्‍छता, स्‍वास्‍थ्‍य और गांव, गरीब किसान की समृद्धि का रास्‍ता और मजबूत होने वाला है। इसके अलावा ये हमारे Urban development के आधुनिक मॉडल से भी जुड़ा हुआ है। शहरों में clean energy के तमाम प्रयासों के बीच Biofuel Air Pollution को कम करने में बहुत मददगार है।

साथियो, यहां पर बहुत बड़ी संख्‍या में हमारे किसान भाई-बहन आज आए हुए हैं और किसान का विज्ञान भवन में आना अपने-आप में एक मैसेज है। देश के अधिकतर हिस्‍सों में बारिश की स्थिति अलग-अलग है, कहीं बाढ़ है तो कहीं बारिश का इंतजार है। हम लगातार उन खबरों को देख रहे हैं। कहीं संतोषजनक बारिश का एक आनंद भी होता है तो कहीं बारिश के कारण परेशानियों से चिंता भी होती है।

खास करके मेरे किसान भाइयो, बहनों- अब तो धान समेत खरीफ की तमाम फसलों की बुवाई मैं समझता हूं करीब-करीब देश के हर कोने में पूरी हो चुकी है और आपकी जानकारी में है कि सरकार ने 14 खरीफ फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य लागत का डेढ़ गुना तय किया है। और जब कृषि की बात आती है तो स्‍वामीनाथन जी का नाम स्‍वाभाविक रूप से हमारे यहां लिया जाता है। और मुझे खुशी है कि अभी दो-तीन दिन पहले श्रीमान स्वामीनाथन जी ने एक आर्टिकल के द्वारा कृषि क्षेत्र में किस प्रकार से बदलाव आ रहा है, सरकार कैसे initiative ले रही है, सरकार की नीतियां किस प्रकार से किसानों की जिंदगी में स्‍थायी रूप से बदलाव ला रही हैं, बड़ा विस्‍तार से हो रहा है और वो एक authority है। बहुत विस्‍तार से उन्‍होंने भारत सरकार की किसानों से संबंधित जो नीतियां हैं, योजनाएं है, प्रयास हैं, उसकी भरपूर सराहना की है।

और आपने भी देखा, फिल्‍म में भी देखा। खरीफ के मौसम में जो और फसलें होती हैं उसके साथ-साथ गन्‍ने के लिए भी हमने एमएसपी तय किया है कि किसानों को लागत के ऊपर लगभग 80 प्रतिशत लाभ मिल सके। इस सीजन के गन्‍ने का लाभकारी मूल्‍य 20 रुपये बढ़ाकर 275 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इस बढ़ी हुई कीमत से देश के करोड़ों किसानों को सीधा-सीधा फायदा होने वाला है। इसके अतिरिक्‍त गन्‍ने से Ethanol बनाने के लिए सरकार जो प्रयास कर रही है, उनका भी लाभ किसानों को मिलना सुनिश्चित है।

सा‍थियो, गन्‍ने से Ethanol बनाने की योजना पर जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, उस समय काम का प्रारंभ हुआ था। लेकिन बीते एक दशक में, अब जैसा उस सरकार का हाल था, हर योजनाओं का भी वैसा ही हाल होता था; इस प्रयास को भी अति-गंभीरता से नहीं लिया गया। जब 2014 में फिर से केन्‍द्र में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के सरकार बनी तो बकायदा एक रोडमैप तैयार किया गया। Ethanol blending program शुरू किया गया। आज देश के 25 राज्‍य और केन्‍द्रशासित प्रदेशों में ये प्रोग्राम सुचारू रूप से चल रहा है। बीते चार वर्षों में Ethanol का रिकॉर्ड उत्‍पादन किया गया है और आने वाले चार वर्षों में लगभग 450 करोड़ Ethanol का उत्‍पादन करने की दिशा में आज देश आगे बढ़ रहा है।

सा‍थियो, इथेनॉल ने न सिर्फ किसानों को लाभ पहुंचाया है बल्कि देश का पैसा भी बचाया है। इथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिक्‍स करने से पिछले वर्ष देश को लगभग चार हजार करोड़ रुपये के बराबर की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। सरकार का लक्ष्‍य है कि अगले चार वर्ष में ये बचत करीब-करीब 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचे। इतना ही नहीं, अगले चार वर्ष में गन्‍ने से इथेनॉल बनाने भर से ही लगभग 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटने का अनुमान है। इस बचत से और गन्‍ने के लिए मिले विकल्‍प से गन्‍ना किसानों को जो बार-बार मुसीबतों को झेलना पड़ता है उसका एक स्‍थायी समाधान का रास्‍ता निकलेगा। इथेनॉल से पैसे की बचत तो हो ही रही है, इसके अलावा पेट्रोल से जो हानिकारक गैस निकलती है, उनमें भी कमी आने वाली है।

साथियो, बायोफ्यूल से जुड़े लक्ष्‍य तय किए जा रहे हैं, ये यानी कोई एक wishful thinking हो, बड़ी-बड़ी बातें होती हों, ऐसा नहीं है। इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए नीतियां बनाई जा रही हैं, ठोस रणनीति बनाई जा रही है, responsibility fix की जा रही है, accountability तय की जा रही है, regular monitoring हो रहा है, टारगेट को पाने का समयबद्ध आयोजन हो रहा है। इथेनॉल समेत बायोफ्यूल के तमाम माध्‍यमों को विकसित करने के लिए सरकार ने National policy बनाई है। सरकार का ये प्रयास है कि 2022 तक 10 प्रतिशत और 2030 तक यानी दोगुना- 20 प्रतिशत इथेनॉल, पेट्रोल के साथ मिक्‍स करने की क्षमता विकसित की जा सके।

बायोफ्यूल से सिर्फ गन्‍ना किसानों को तो एक विकल्‍प मिलेगा ही, इससे देश के हर किसान को फायदा होने वाला है। हमारे गेहूं, चावल, मक्‍का, आलू, सब्जियां, हम सब जानते हैं- अक्‍सर कभी मौसम की वजह से या भंडारण के अभाव के कारण खराब हो जाती हैं, सड़ जाती हैं, बरबाद हो जाती हैं। और स्‍वाभाविक है किसान इसको संभाल कर क्‍या करेगा, वो फैंक देता है। लेकिन अब हमने तय किया है कि इसका इस्‍तेमाल भी इथेनॉल बनाने के लिए किया जाए।

एक और समस्‍या किसानों के सामने है कि प्राकृतिक कारणों से फसल में कुछ कमी रह जाती है- जैसे दाग लगना, साइज छोटा होना; ऐसे अनेक कारण होते हैं, और जिसकी वजह से उनकी फसल बिक नहीं सकती है। जो ग्राहक है वो उसको पसंद नहीं करता, नकार देता है। जो दुकानदार है, वो भी नहीं लेता है और इसके कारण मौसम की आधी-अधूरी मार भी किसान को बहुत नुकसान उठाने के लिए मजबूर करती है। इथेनॉल बनाने के लिए ऐसा सारा भी अनाज होता है- छोटा हो, टूटा-फूटा हो, दाना कम हो, रंग-रूप ठीक न हो, ये सारी चीजें इथेनॉल बनाने के लिए काम आती हैं। और इसमें अगर हम योजनाबद्ध नीति से जब पूर्णता को प्राप्‍त करेंगे तो आप विश्‍वास कर सकते हैं ऐसे में किसानों की फसल का एक भी दाना व्‍यर्थ नहीं जाएगा । आप कल्‍पना कर सकते हैं हमारे किसानों की‍ जिंदगी में कितनी बड़ी ताकत आएगी।

साथियो, नेशनल पॉलिसी में सिर्फ फसल से नहीं, बल्कि अब घर से निकलने वाले कूड़े, खेत से निकलने वाले कचरे और पशुओं के गोबर को ईंधन में बदलने के लिए भी एक राष्‍ट्रव्‍यापी योजना बनाई जा रही है। आने वाले समय में केले के छिलके, जो न सिर्फ किसान बल्कि हर घर में कचरे के रूप में आसानी से मिल जाते हैं, वो भी ईंधन के रूप में काम आने वाला है।

इसके अलावा घास और बांस से भी इथेनॉल बनाया जा रहा है। बांस विशेष तौर पर उत्‍तर-पूर्व और दूसरे आदिवासी इलाके में अच्‍छी मात्रा में पैदा होता है। ऐसे में वहां की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए ये महत्‍वपूर्ण कदम होगा, जो बांस की खेती करने वालों को फायदा करेगा।

साथियो, पराली भी किसानों की बहुत बड़ी समस्‍या है। और पता नहीं नासमझी के कारण, समय के अभाव से, कुछ भी कहो- ये पराली अपने-आप में एक बहुत बड़ी मूल्‍यवान प्राकृतिक सौगात है। लेकिन अज्ञानवश या आदतों के कारण हम ऐसी मूल्‍यवान जड़ी-बूटी को जला देते हैं। ये जमीन को नई जिंदगी देने वाली मूल्‍यवान जड़ी-बूटी हम अपनी आंखों के सामने अपने हाथों से जला देते हैं। और मैं तो देख रहा हूं- पंजाब हो, हरियाणा हो- यहां के किसान, ये एक नित्‍य कार्यक्रम होता है। और ये एक बहुत बड़ी चुनौती है।

लेकिन मेरे किसान भाइयों को मैं बार-बार समझाता हूं कि इस पराली को जलाने के कारण जमीन की उपजाऊ शक्ति पर तो असर पड़ता ही है, साथ में इससे निकले धुंए के कारण पूरे पर्यावरण का दुष्‍प्रभाव पैदा होता है। और इसलिए अब पराली से इथेनॉल बनाने की संभावनाओं पर बहुत व्‍यापक रूप से काम किया जा रहा है। यानि अब पराली भी आपको एक इन्‍कम का स्रोत बन सकती है। और इससे प्रदूषण की भी राहत मिलेगी और किसानों की अतिरिक्‍त आय भी होगी।

साथियो, biomass को बायोफ्यूल में बदलने के लिए सरकार बहुत बड़े स्‍तर पर निवेश कर रही है, investment कर रही है। देशभर में दस हजार करोड़ रुपये की लागत से 12 आधुनिक रिफाइनरी बनाने की योजना है। एक रिफाइनरी से लगभग 1000-1500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। यानि रिफाइनरी के संचालन से लेकर सप्‍लाई चेन तक, लगभग डेढ़ लाख नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्‍ध होंगे। इसके अलावा गोबर से ईंधन बनाने की योजना भी प्रगति पर है।

पिछले बजट में आपने देखा होगा, हमने योजना घोषित की- गोबर-धन। इस गोबर-धन योजना के तहत पूरे देश के हर जिले में एक बायोगैस प्‍लांट लगाया जा रहा है। अभी seven hundred plants बन रहे हैं लेकिन आगे इसको और विस्‍तार दिया जाएगा। देशभर के किसानों, self help groups, इन सबको इसमें जोड़ा जाएगा।

सा‍थियो, आज गोबर-धन, वन-धन, जन-धन, इन योजनाओं से गरीबों, किसानों, आदिवासियों के जीवन में एक नई आर्थिक संभावनाएं, आर्थिक सामर्थ्‍य, एक नया बदलाव सुनिश्चित हो रहा है। न सिर्फ आपकी फसल, बल्कि पशु के गोबर का, खेत के अवशेष का, घर से निकले कूड़े-कचरे का, हर चीज का उचित उपयोग हो, इस दिशा में काम हो रहा है।

इसके अलावा जो जंगल में उगे पौधे और फल होते हैं, उनसे होने वाली आमदनी अलग। जब पतझड़ के मौसम में आप, अगर जंगलों में जाने की आदत होगी तो आपने देखा होगा- एक-एक, दो-दो फीट पत्‍ते गिर करके पड़े होते हैं1 ये भी अपने-आपमें बहुत बड़ी कमाई का साधन बन सकता है। ये waste to wealth का अभियान है ही, साथ में इससे स्‍वच्‍छ भारत अभियान को भी गति मिल रही है। क्‍योंकि यही waste गंदगी का भी बड़ा कारण है।

सा‍थियो, इस अभियान में हमारे वैज्ञानिक बंधुओं और Start Up के जरिए तकनीक को सुलभ कराने वाले युवाओं का एक महत्‍वपूर्ण योगदान है। मैं आज इस अवसर पर आप सभी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं। आप बायोफ्यूल से जुड़ी तकनीक को बेहतर बनाने में निरंतर प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में बहुत कुछ करने की संभावना है। जैसे अनाज के अतिरिक्‍त ऐसे उत्‍पादों पर ध्‍यान दिया जाना जरूरी है जिससे अधिक गुणवत्‍ता वाला और अधिक मात्रा में बायोफ्यूल पैदा किया जा सके। इसके लिए Start Up से जुड़े उद्यमियों, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े लोगों को एक साथ मिल करके काम करना होगा।

मैं समझता हूं कि हमारे इंजीनियरिंग कॉलेजों, आईटीआई पॉलिटेक्‍नीक के syllabus में बायोफ्यूल से जुड़े कोर्स को और प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके अलावा देशभर के KVK’s कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्‍यम से बायोफ्यूल के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानकारी किसानों तक पहुंचाई जानी चाहिए। देशभर में लगने वाले कृषि मेलों में भी बायोफ्यूल को मुख्‍य थीम बनाकर किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।

सा‍थियो, शहरों के साफ-सफाई से जुड़ी ाभासबसे बड़ी समस्‍या यानि solid waste management- सीवर के पानी, उद्योग से निकला पानी, ऐसी तमाम चीजों से ऊर्जा पैदा करने के लिए नई और बेहतर टेक्‍नोलॉजी लाने का प्रयास सरकार कर रही है। और मैंने एक बार अख़बार में पढ़ा था, किसी छोटे से नगर में नाले के पास कोई चाय का ठेला ले करके खड़ा रहता था, चाय बना करके बेचता था, कोई चाय बनाने की बात आती है तो मेरा ध्‍यान जरा जल्‍दी जाता है, और वहीं पर एक नाली-गंदी नाली जाती थी। अब इसके दिमाग में कोई विचार आया। उसने उस नाली में- स्‍वाभाविक है जहां गंदी नाली होती है वहां गैस भी निकलता है- तो काफी दुर्गन्‍ध आती थी। उसने एक छोटे से बर्तन को उलटा करके उसमें छेद करके पाइप डाल दिया और जो गटर से गैस निकलता था वो पाईप लाइन से उसके अपने चाय के ठेले में ले लिया। और वो चाय बनाने के लिए उसी गैस का उपयोग कर-करके चाय बनाता था। सिम्‍पल सी टेक्‍नोलॉजी है। यानि कैसे उपयोग होता है, वैसे चाय वालों का ये काम जरा ज्‍यादा रहता है।

एक बार मैं जब गुजरात में था तो मैंने देखा कि, हमारा convey जा रहा था और आगे स्‍कूटर पर बड़ा जो ट्रेक्‍टर का ट्यूब होता है, पूरा अंदर भरा हुआ है, वो ले करके जा रहा था। कल्‍पना कर सकते हैं स्‍कूटर पर इतना बड़ा ट्रेक्‍टर का ट्यूब कोई लेकर जा रहा है तो पीछे आने वाले व्‍हीकल को डर लगता है, कहीं टकरा न जाए। मैं भी हैरान था कि ऐसे कैसे ले जा रहा है। कोई भी व्‍यक्ति समझदार तो यही करेगा ट्यूब खाली कर देगा और चला जाएगा। आगे जा करके हवा भर देगा। वो ले जा रहा था, मैंने कहा जरा रोकिए इसको।

हमने गाड़ी रोकी और स्‍कूटर वाले को पूछा भाई क्‍या है ये, क्‍या कर रहे हो, कहीं गिर जाओगे, चोट लग जाएगी, मर जाओगे। नहीं- बोला खेत जा रहा हूं। मैंने कहा ये क्‍यों ले जा रहे हो। तो बोला मेरे घर में जो घर के किचन का कूड़ा-कचरा निकलता है वो, और मेरे पास दो पशु हैं उसका जो गोबर निकलता है तो मैंने अपने घर में ही एक छोटा-सा गैस का प्‍लांट बनाया हुआ है। तो मैं उस गैस को इस ट्यूब में भरता हूं और ट्यूब ले करके खेत जाता हूं। और खेत में जा करके उससे मेरा पानी का पम्‍प चलाता हूं। आप कल्‍पना कीजिए हमारे देश का किसान। यानि इतना सामर्थ्‍य पड़ा हुआ है। आज भी हमारे किसान, गांव के लोग कुछ न कुछ नए प्रयोग करते रहते हैं।

जो Start Up की दुनिया के लोग हैं, वे अगर उसपर ध्‍यान दें तो शायद जो कभी बड़े-बड़े collages से नहीं मिलता है वो खेत में किसान की सोच में से मिल सकता है। और इन सबको समेटकर हम चीजों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

आज बी-3 की एक योजना, एक व्‍यापक योजना पर काम किया जा रहा है। बी-3 यानि बायोमास, बायोफ्यूल से और बायोएनर्जी की तरफ देश बढ़ रहा है। इथेनॉल के अतिरिक्‍त आज कचरे से सीएनजी यानि बायो-सीएनजी बनाने का भी तेज गति से काम चल रहा है। देश की ट्रांसपोर्ट व्‍यवस्‍था में सीएनजी के इस्‍तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि पेट्रोल-डीजल से होने वाले प्रदूषण से बचा जा सके। फिलहाल हम सीएनजी विदेश से आयात करते हैं। अब बायो-सीएनजी से विदेशों पर निर्भरता को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए अभी तक देश भर में पौने दो से अधिक प्‍लांट लगाए जा चुके हैं। वो दिन दूर नहीं जब शहरों के साथ-साथ गांवों में भी सीएनजी से गाड़ियां चलने लगेंगी।

साथियो, हमारे आसपास आज प्‍लास्टिक का सामान, रबर के टायर, ऐसी तमाम चीजें जो उपयोग के बाद एक अपने-आप में बहुत बड़ी समस्‍या बन जाती हैं; इनका इस्‍तेमाल सड़क बनाने में किया जा रहा है। और वहीं जो दूसरा कचरा- जो घर से निकला है- उसका भी सड़कों के निर्माण में कैसे उपयोग हो, इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

मैंने अभी एक African countries की, गरीब लोगों का एक छोटा सा काम सोशल मीडिया में देखा। वो गांव में से सारे प्‍लास्टिक इकट्ठा कर-करके नदी के तट पर ले जाते हैं और लकड़ी-वकड़ी ला करके उस प्‍लास्टिक को जला करके पिघला लेते हैं। और वहीं नदी से बालू ले करके मिक्‍स करते हैं और उसमें से ब्‍लॉक बना देते हैं और वो ब्‍लॉक बड़ीमात्रा में बेचते हैं वो। Women self help group की महिलाएं कर रही हैं ये काम। कचरे की सफाई भी कर रही हैं और उसका नया प्रॉडक्‍ट करके बाजार में बेच रही हैं।

विकास और पर्यावरण के बीच एक संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की नीति पर सरकार काम कर रही है। पर्यावरण के साथ संतुलन की जब हम बात करते हैं तब बिजली का एक महत्वपूर्ण रोल है। बिजली कैसे पैदा होती है और कैसे इस्‍तेमाल होती है, इसका पर्यावरण पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

जब बिजली पैदा करने की बात आती है तो आज कोयले और गैस जैसे पारम्‍परिक तरीकों के साथ सोलार एनर्जी समेत तमाम दूसरे माध्‍यमों से बिजली बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। International Solar Alliance के जरिए तो हम न सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्‍व में सौर ऊर्जा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।

आज खेती में सोलर पंप से लेकर उद्योग धंधा, दफ्तरों में सौर ऊर्जा के इस्‍तेमाल पर काफी प्रगति हो रही है। इसके अलावा देश की गलियों, घरों और दफ्तरों में एलईडी बल्‍ब की रोशनी सुनिश्चित करने से बिजली की बचत हो रही है। और मुझे प्रसन्‍नता है कि अब देश के रेलवे स्‍टेशन एलईडी बल्‍ब से जगमगाने लगे हैं। सारा काम उन्‍होंने पूरा कर दिया। अब लक्ष्‍य ये है कि आने वाले दिनों में रेलवे की हर बिल्डिंग और रेलवे के हर र्क्‍वाटर्स में भी शत-प्रतिशत एलईडी बल्‍ब लगाए जाएं। एलईडी लाइट्स को बढ़ावा दे रहे हैं, पर्यावरण की चिंता- स्‍वच्‍छ भारत, स्‍वस्‍थ भारत के मिशन से जुड़ी हुई है।

धुंआमुक्‍त रसोई भी इसी व्‍यापक vision का हिस्‍सा है। आज मैं इस मंच से देश के उन पांच करोड़ गरीब परिवारों को बधाई देता हूं, उन माताओं-बहनों को बधाई देता हूं, जिनको धुंए से मुक्ति मिली है।

हिन्‍दुस्‍तान में इतना बड़ा काम इतने समय में हो सकता है ये अपने-आप में अजूबा है। हमारे देश में सवा सौ करोड़ जनसंख्‍या है और करीब-करीब 25-26 करोड़ परिवार हैं। इन 25-26 करोड़ परिवार में 5 करोड़ परिवारों को गैस का चूल्‍हा इतने कम समय में पहुंचाना, ये अपने-आप में, आप हिसाब लगा सकते हैं कि तेज गति से काम होता है तो कितना परिणाम आता है।

सा‍थियो, आज दिनभर किसान भी होंगे, टैक्‍नीशियन भी होंगे, गर्वनमेंट के अफसर भी होंगे, आप सब मिल करके बायोफ्यूल को लेकर चर्चा करने वाले हैं। उससे जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने वाले हैं। किसान की जो रोजमर्रा की practical problems हैं, उसकी चर्चा करने वाले हैं। और मुझे विश्‍वास है कि इसी सवा सौ करोड़ देशवासियों की ऊर्जा जरूरतों और खेती को लाभकारी बनाने के लिए अनेक नए सुझावस आएंगे, अनेक नए रास्‍ते बनेंगे।

बायोफ्यूल से बदलाव की क्रांति घर-घर सिर्फ सरकार के प्रयासों से नहीं पहुंच पाएगी, बल्कि इसमें हमने हमारे छात्रों को, हमारे शिक्षकों को, हमारे वैज्ञानिकों को, हमारे उद्यमियों को, यानि एक प्रकार से जन-भागीदारी से जन-आंदोलन का रूप हमको देना पड़ेगा।

मेरा यहां मौजूद जो राज्‍यों के प्रतिनिधि आए हैं, उनसे भी आग्रह है कि देश के गांव-गांव तक बायोफ्यूल के लाभ पहुंचाने के लिए अपने स्‍तर पर भी अतिरिक्‍त प्रयास करें। और मुझे विश्‍वास है कि बायोफ्यूल की दिशा में भारत ने जो initiative लिए हैं और विश्‍व आज Biofuel day मना रहा है, तब भारत global warming से चिंतित विश्‍व को एक विश्‍वास देने का सामर्थ्‍य रखता है। भारत के इन कदमों की आज पूरे विश्‍व में सराहना हो रही है।

भारत की नीतियों और योजनाओं को विश्‍व बड़े गौर से देख रहा है और उसमें आज का ये प्रयास नई ऊर्जा भरेगा, दिशा को और अधिक स्‍पष्‍ट करेगा और गति तेज करेगा। इसी विश्‍वास के साथ इस सफल योजना के लिए मैं आप सबको हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्‍यवाद।

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आपने सिर्फ पदकों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि पूरी पीढ़ी को तैयार किया: CWG चैंपियंस से पीएम मोदी
August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।