PM Modi speaks at the 46th Indian Labour Conference
The country cannot be happy, if the worker is unhappy. As a society, we need to respect the Dignity of Labour: PM
If we want to move ahead, we need to give opportunities to our youth. Giving opportunities to apprentices is the need for the hour: PM Modi

केंद्र और राज्‍य के भिन्‍न-भिन्‍न सरकारों के प्रतिनिधि बंधु गण,

ये भारत की श्रम-संसद है और एक लंबे अरसे से हमारे देश में त्रिपक्षीय वार्ता का सिलसिला चला है। एक प्रकार से ये त्रिपक्षीय वार्ता के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ये अपने आप में एक उज्‍ज्‍वल इतिहास है कि 75 साल का हमारे पास एक गहरा अनुभव है। उद्योग जगत सरकार एवं श्रम संगठन गत 75 वर्ष से लगातार बैठ करके विचार-विमर्श करके मत भिन्‍नताओं के बीच भी मंथन करके अमृत निकालने का प्रयास करते रहे हैं। और उसी संजीवनी से देश को आगे बढ़ाने की कोशिश करते रहे हैं और उसी कड़ी में आज यह श्रम संसद हो रहा है। हम सबके लिए प्रेरणा की बात है कि यह वो समारोह है जहां कभी बाबा साहेब अंबेडकर का मार्ग दर्शन मिला था। यह वो समारोह है जिसे कभी भारत के भूत-पूर्व राष्‍ट्रपति श्रीमान वीवी गिरि जी का मार्ग दर्शन मिला था। अनेक महानुभावों के पद चिन्‍हों पर चलते-चलते आज हम यहां पहुंचे हैं। समय का अपना एक प्रभाव होता है। आज से 70-75 साल पहले जिन बिंदुओं पर विचार करने की जरूरत होती थी वो आज जरूरत नहीं होगी और आज जिन बिंदुओं पर विचार करने की आवश्‍यकता है हो सकता है 25 साल बाद वह भी काल बाह्य हो जाए, क्‍योंकि एक जीवंत व्‍यवस्‍था का यह लक्षण होता है, नित्‍य नूतन, नित्‍य परिवर्तनशील और अच्‍छे लक्षण की पूर्ति के लिए एकत्र होकर आगे बढ़ना है। इस बात में कोई दुविधा नहीं है। इस बात में कोई मत-मतांतर नहीं है कि राष्‍ट्र के निर्माण में श्रमिक का कितना बड़ा योगदान होता है, चाहे वो किसान हो मजदूर हो, वो unorganized लेबर का हिस्‍सा हो, और हमारे यहां तो सदियों से इन सबको एक शब्‍द से जाना जाता है- विश्‍वकर्मा। विश्‍वकर्मा के रूप में जिसको जाना जाता है, माना जाता है और इसलिए अगर श्रमिक रहेगा दुखी , तो देश कैसे होगा सुखी? और मैं नहीं मानता हूं कि इन मूलभूत बातों में हममें से किसी में कोई मतभेद है। मैं श्रम को एक महायज्ञ मानता हूं जिसमें कोटि अवधि लोग अपनी आहूति देते हैं। सिर्फ श्रम की नहीं, कभी-कभार तो सपनों की भी आहूति देते हैं और तब जा करके किसी ओर के सपने संजोए जा सकते हैं। अगर एक श्रमिक अपने सपनों को आहूत न करता तो किसी दूसरे के सपने कभी संजोए नहीं जा सकते। इतना बड़ा योगदान समाज के इस तबके का है और इस सच्‍चाई को स्‍वीकार करते हुए हमने आगे किस दिशा में जाना है उस पर हमें आगे सोचना होगा। जब तक श्रमिक, मालिक- उनके बीच परिवार भाव पैदा नहीं होता है, अपनेपन का भाव पैदा नहीं होता है। मालिक अगर यह सोचता है कि वो किसी का पेट भरता है और श्रमिक यह सोचता है कि मेरे पसीने से ही तुम्‍हारी दुनिया चलती है तो मैं नहीं समझता कि कारोबार ठीक से चलेगा। लेकिन अगर परिवार भाव हो, एक श्रमिक का दुख मालिक को रात को बैचेन बना देता हो, और फैक्‍टरी का हुआ कोई नुकसान श्रमिक को रात को सोने न देता हो, यह परिवार भाव जब पैदा होता है तब विकास की यात्रा को कोई रोक नहीं सकता | और यह जिम्‍मेवारी जब हम निभाएंगे तब जाकर के, मैं तो चाहूंगा कभी यह भी सोचा जा सकता है क्‍या। इन सारी चर्चाओं का कभी वैज्ञानिक तरीके से अध्‍ययन होने की आवश्‍यकता है। ऐसे बड़े उद्योग और ऐसे छोटे उद्योग या मध्‍यम दर्जे के उद्योग 50 साल पुराने है, लेकिन कभी हड़ताल नहीं हुई है क्‍या कारण होगा। उसको चलाने वाले लोगों की सोच क्‍या रही होगी। उन्‍होंने उनके साथ किस प्रकार से नाता जोड़ा है, क्‍या हम आज नए उद्योगकारों को, establish उद्योगकारों को , उनको यह नमूना दिखा सकते हैं कि हमारे सामने, हमारे ही देश में, इसी धरती में ये 50 उद्योग ऐसे हैं जो 50 साल से चल रहे हैं। हजारों की तादाद में श्रमिक है। लेकिन न कभी संघर्ष हुआ है, न कभी हड़ताल हुई है, न उनकी कोई शिकायत, न इनकी कोई शिकायत। एक मंगलम माहौल जिन-जिन इकाईयों में है, कभी उनको छांटकर निकालना चाहिए और उस मंगलम का कारण क्‍या है, इस मंगल अवस्‍था को प्राप्‍त करने के उनके तौर तरीके क्‍या है। अगर इन चीजों को हम श्रमिकों के सामने ले जाएंगे, इन चीजों को हम उद्योगकारों के सामने ले जाएंगे तो उनको भली-भांति समझा सकते हैं और मंगलम का माहौल जहां होगा, वहां यह भी नजर आया होगा कि सिर्फ श्रमिक का असंतोष है, ऐसा नहीं है। वहां यह भी ध्‍यान में आया होगा कि उस उद्योग का विकास भी उतना ही हुआ होगा और उन श्रमिकों का विकास भी उतना ही हुआ होगा। जब तक हम इस भावनात्‍मक अवस्‍था को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास नहीं करते और जो सफल गाथाएं हैं और उन सफल गाथाओं को हम उजागर नहीं करते, मैं नहीं मानता हूं कि हम सिर्फ कानूनों के द्वारा बंधनों को लगाते-लगाते समस्‍याओं का समाधान कर पाएंगे। हां, कानून उनके लिए जरूरी है कि जो किसी चीज को मानने को तैयार नहीं होते, श्रमिक को इंसान भी मानने को तैयार नहीं होते। उनकी सुख-सुविधा की बात तो छोड़ दीजिए उसकी minimum आवश्‍यकताओं की ओर भी देखने को तैयार नहीं होते। ऐसे लोगों को कानूनों की उतनी ही जरूरत होती है और इसलिए हम इस व्‍यवस्‍था को उस रूप में समझकर चलाएं। एक सामाजिक दृष्‍टि से भी हमारे यहां सोचने की बहुत आवश्‍यकता है। किसी न किसी कारण से हमारे भीतर एक बहुत बड़ी बुराई पनप गई है। हमारी सोच का हिस्‍सा बन गई है। हर चीज को देखने के हमारे तरीके की आदत सा बन गयी है और वो है हम कभी भी श्रम करने वाले के प्रति आदर के भाव से देखते ही नहीं। कोई बढ़िया कपड़े पहन करके हमारे दरवाजे की घंटी बजाए, दोपहर दो बजे हम आराम से सोए हों, कोट-पैंट सूट पहनकर आए और घंटी बजाए तो नींद खराब होगी ही होगी, दरवाजा खोलेंगे और जैसे ही उसको देखेंगे तो कहेंगे आइए आइए कहां से आए हैं, क्‍या काम था, बैठिए-बैठिए। और कोई ऑटो रिक्‍शा वाले ने घंटी बजाई, पता नहीं चलता है दोपहर दो बजे हम सोते हैं, इस समय घंटी बजा दी। क्‍यों भई यह फर्क क्‍यों?



यह जो हमारी सामाजिक जीवन की सबसे बड़ी कमी आई है सदियों के कारण आई हुई है। लेकिन कभी न कभी dignity of labour , श्रम की प्रतिष्‍ठा, श्रमिक का सम्‍मान ये समाज के नाते अगर हम स्‍वभाव नहीं बनाएंगे तो हम हमारे श्रमिकों के प्रति जो कि उसके बिना हमारी जिन्‍दगी नहीं है, अगर कोई धोबी बढ़िया सा iron नहीं करता तो मैं कुर्ता पहनकर कहां से आता यहां और इसलिए जिनके भरोसे हमारी जिन्‍दगी है उनके प्रति सम्‍मान का भाव यह सामाजिक चरित्र कैसे पैदा हो, उसके लिए हम किस प्रकार से व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करे। हमारे बच्‍चों की पाठ्य पुस्‍तकों में उस प्रकार के syllabus कैसे आए ताकि सहज रूप से आनी वाली पीढ़ियां हमारे श्रमिक के प्रति सम्‍मान के भाव से देखने लगे। आप देखिए माहौल अपने आप बदलना शुरू हो जाएगा। हमारी सरकार को सेवा करने का अवसर मिला है, श्रम संगठनों के साथ लगातार बातचीत चल रही है और त्रिपक्षीय बातचीत के आधार पर ही आगे बढ़ रहे हैं। कई पुरानी-पुरानी गुत्‍थियां हैं, सुलझानी है और मुझे विश्‍वास है कि देश के श्रमिकों के आशीर्वाद से इन गुत्‍थियों को सुलझाने में हम सफल होंगे और समस्‍याओं का समाधान करने में हम कोई न कोई रास्‍ते खोजते चलेंगे। और सहमति से कानूनों का भी परिवर्तन करना होगा। कानूनों में कोई कुछ जोड़ना होगा, कुछ निकालना होगा वो भी सहमति से करने का प्रयास, प्रयास करते ही रहना चाहिए और निरंतर प्रक्रिया चलती रही है, आगे भी चलती रहने वाली है। कोई भी सरकार आए, ये कोई आखिरी कार्यक्रम कभी होता नहीं है और इसलिए मैं समझता हूं कि इस प्रक्रिया का अपना महत्‍व है। मेरा विश्‍वास रहा है- ‘minimum government , maximum governance’ और इसलिए ये जो कानूनों के ढेर हैं कानूनों का ऐसा कहीं खो जाए इन्‍सान। पता नहीं इतने कानून बनाये कर रखे हुए और हरेक को अपने फायदे वाला कानून ढूंढ सकते हैं ऐसी स्थिति है। हर कोई उद्योगकार एक ही कानून में से उद्योगकार को अपने मतलब का कानून निकलाना है तो वो भी निकाल सकता है सामाजिक संगठन को निकालना है तो वो भी निकाल सकता है, सरकार को निकालना है तो वो भी निकाल सकती है। क्‍योंकि टुकड़ों में सब चीजें चलती रही हैं | जब तक हम एक एकत्रित भाव से, composite भाव से, हमें जाना कहां है उसको ले करके , और इसीलिए मैंने एक कमेटी भी बनाई है के इन सबमें जो पुराने कानूनों को जरा देखरेख में सही कैसे किया जाए। और सच्‍चे अर्थ में जिनके लिए बनाए गए हैं कानून उनको लाभ हो रहा है या नहीं हो रहा। वरना कोई और जगह पर ऐसा कानून बनके बैठा हुआ है जो इसको आगे ही नहीं जाने देता। अब श्रमिक कहां लड़ेगा, कहां जाएगा। वो क्‍या कोर्ट कचहरी में इतने महंगे वकील रखेगा क्‍या। और इसलिए मेरा यहा आग्रह है और मैं ये कोशिश कर रहा हूं कि ये कानूनों का एक बहुत बड़ा जाल हो गया है उसका सरलीकरण हो, गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी अपने हकों को भली भांति समझ पाएं, हकों को प्राप्‍त कर पाएं। ऐसी व्‍यवस्‍थाओं को हमने विकसित करने की दिशा में हमारा प्रयास है और मेरा विश्‍वास है कि हम उसको कर पाएंगे। मैं कभी-कभी उद्योग जगत के मित्रों से भी कहना चाहता हूं और मैं चाहूंगा कभी हमारे इस Forum में एक और पहलू पर भी हम सोच सकते हैं क्‍या, क्‍योंकि हमने अपने एजेंडे को बड़ा सीमित कर दिया है। और जब तक उसका दायरा नहीं बढ़ाऐंगे पूरे माहौल में बदलाव नहीं आएगा। कितने उद्योगार हैं जिन्‍होंने अपने उद्योग चलाते-चलाते ऐसा माहौल बनाया, ऐसी व्‍यवस्‍था बनाई कि खुद का ही काम करने वाला एक मजदूर आगे चल करके Entrepreneur बना। कभी ये ऐसे ही तो खोज के निकालना चाहिए क्‍या उद्योगकार का यही काम है क्‍या। क्‍या 18-20 साल की उम्र में उसके यहां आया वो 60 साल का होने के बाद किसी काम का न रहे तब तक उसी के यहां फंसा पड़ा रहे। क्‍या ऐसा माहौल कभी उसने बताया कि हां मेरे यहां मजदूर के यहां पे आया था लेकिन मैंने देखा भई उसमें बहुत बड़ी क्षमता है, टेलैंट है, थोड़ा मैं उसको सहारा दे दूं वो अपने-आप में एक Entrepreneur बन सकता है और मैं ही एक-आध पुर्जा बनाएगा तो मैं खुद खरीद लूंगा जो मेरी फैक्‍टरी के लिए जरूरी है तो एक अच्‍छा Entrepreneur तैयार हो जाएगा।



कभी न कभी हमें सोचना चाहिए हमारे देश में छोटे और मध्‍यम एवं बड़े उद्योगकार कितने हैं कि जो हर वर्ष अपने ही यहां काम करने वाले कितने मजदूरों को उद्योगकार बनाया हो, Entrepreneur बनाया हो, Supplier बनाया हो, कितनों को बनाया कभी ये भी तो हिसाब लगाया जाए। उसी प्रकार से हमने देखा है कि आईटी फर्म, उसके विकास का मूल कारण क्‍या है, IT Firm के विकास का मूल कारण यह है कि उन्‍होंने अपन employee को कहा कि कुछ समय तुम्‍हारा अपना समय है। तुम खुद सॉफ्टवेयर‍ विकसित करो, तुम अपने ‍दिमाग का उपयोग करो और ये motivation के कारण सॉफटेवयर की दुनिया में नई-नई चीजें वो लेकर के आए फिर वो कम्‍पनी की बनी और बाद में जा करके वो बिकी। अवसर दिया गया, हमारे इतने सारे उद्योग चल रहे हैं, मैन्‍युफैक्‍चरिंग का काम करते हैं, कैमिकल एक्टिविटी का काम करते हैं, क्‍या हमने हमारे यहां इस टैलेंट को innovation के लिए अवसर दिया है क्‍या? क्‍या उद्योगकारों को पता है कि जिसको आप अनपढ़ मानते हो, जिसको आप unskilled labour मानते हो, उसके अंदर भी वो ईश्‍वर ने ताकत दी है, वो आपकी फैक्‍टरी में एकाध चीज ऐसी बदल देता है, कि आपके प्रोडक्‍ट की क्‍वालिटी इतनी बढ़ जाती है, बाजार में बहुत बड़ा मार्केट खड़ा हो जाता है, आप फायदा तो ले लेते हो लेकिन उसके innovation skill को recommend नहीं करते हो। मैं मानता हूं हमारे उद्योगकारों ने अपने जीवन में, सरकारों ने भी और श्रम संगठनों ने भी पूछना चाहिए कि कितने उद्योगकार हैं, कितने उद्योग हैं कि जहां पर इनोवेशन को बल दिया गया है। हर वर्ष कम से कम एक नया इनोवेटेड काम निकलता है क्‍या? हमारे यहां सेना के विशेष दिवस मनाए जाते हैं,आर्मी का, एयरफोर्स का, नेवी का। राष्‍ट्रपति जी, प्रधानमंत्री सब जाते हैं, एट-होम करते हैं वो, तो मैं पिछली बार जब हमारे सेना के लोगों के पास गया तो मैंने उनको कहा भई ठीक है ये आपका चल रहा है कि ये ही चलाते रहोगे क्‍या? हम आते हैं, 30-40 मिनट वहां रुकते हैं, चायपान होता है, फिर चले जाते हैं। मैंने कहा मेरा एक सुझाव है अगर आप कर सकते हो तो, तो बोले क्‍या है सर? मैंने कहा क्‍या फौज में ऐसे छोटे-छोटे लोग हैं क्‍या, सिपाही होंगे, छोटे-छोटे लोग हैं, लेकिन उन्‍होंने काम करते-करते कोई न कोई इनोवेशन किया है जो देश की सुरक्षा के लिए बहुत काम आता है। उसमें नया आइडिया, क्‍योंकि वो फील्‍ड में है, उसे पता रहता है कि इसके बजाय ऐसा करो तो अच्‍छा रहेगा। मैंने ये कहा तो फिर हमारे आर्मी के लोगों ने ढूंढना शुरू किया।

बहुत ही कम समय मिला था लेकिन कोई 12-15 लोगों को ले आए वो और जब उनकी innovations मैंने देखा, मैं हैरान था सेना के काम आनेवाली टेक्‍नोलॉजी के संदर्भ में, कपड़ों के संदर्भ में, इतने बारीक छोटी-छोटी चीजों में उन्‍होंने बदलाव लाकर के बताया था अगर इसको हम मल्‍टीप्‍लाई करें तो सेना के कितना बड़ा काम आएगा और भारत की रक्षा के लिए कितना बड़ा काम आएगा। लेकिन उस आखिरी इन्‍सान की तरफ देखता कौन है जी? उसकी क्षमता को कौन स्‍वीकार करता है? मुझे ये माहौल बदलना है कि मेरे उद्योगकार मित्र बहुत बड़ी डिग्री लेकर आया हुआ व्‍यक्ति ही दुनिया को कुछ देता है ऐसा नहीं है। छोटे से छोटा व्‍यक्ति भी दुनिया को बहुत कुछ दे करके जाता है, सिर्फ हमारी नजरों की तरफ नहीं होता है और इसलिए हम एक कल्‍चर विकसित कर सकते हैं, व्‍यवस्‍था विकसित कर सकते हैं कि जिसमें उन, और मैं तो चाहता हूं श्रमिक संगठन भी ऐसे लोगों को सम्‍मानित करें, उद्योग भी सम्‍मानित करें और सरकार भी श्रम संसद के समय सामान्‍य मजदूर ने की हुई इनोवेशन जिसने देश का भला किया हो, उसमा सम्‍मान करने का कार्यक्रम करके हम श्रम की प्रतिष्‍ठा कैसे बढ़ाएं उस दिशा में हमें आगे बढ़ना चाहिए। हमें एक नए तरीके से चीजों को कैसे सोचना चाहिए, नई चीजों में कैसे बदलाव लाना चाहिए, उस पर सोचने की आवश्‍यकता है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि मजदूर हमेशा मजदूर क्‍यों रहे? उसी प्रकार से कुछ लोग ऐसे होते हैं कि पिताजी एक कारखाने में काम करते हैं, बेटा भी साथ जाना शुरू कर दिया, और वहीं काम करते, करते, करते एकाध चीज सीख लेता है और अपनी गाड़ी चला लेता है। उसके पास ऑफिशियल कोई डिग्री नहीं होती है, कोई सर्टिफिकेट नहीं होता है और उसके लिए वो हमेशा उस उद्योगकार की कृपा पर जीने के लिए मजबूर हो जाता है। इससे बड़ा शोषणा क्‍या हो सकता है कि उसको जो जिसके यहां उसके पिताजी काम करते थे, अब उसको वहीं पर काम करना पड़ रहा है, क्‍यों, क्‍योंकि उसके पास स्किल है लेकिन स्किल को दुनिया के अंदर ले जाने के लिए एक जो सर्टिफिकेट चाहिए वो नहीं है तो कोई घुसने नहीं देता है और वो भी कहीं जाने की हिम्‍मत नहीं करता है, उसको लगता है चलिए ये ही मेरे मां-बाप हैं उन्‍होंने ही मेरे बाप को संभाला था, मुझे भी संभाल लिया, चलिए भई जो दें मैं काम कर लूंगा। इससे बड़ी कोई अपमानजनक स्थिति नहीं हो सकती हमारी। और इसको बदलने का मेरे भीतर एक दर्द बढ़ा था और उसी में से हमने एक योजना बनाई है और मैं मानता हूं ये योजना श्रमिक के जीवन को और मैं नहीं मानता किसी श्रमिक संगठनों ने इस पर ध्‍यान गया होगा। कभी उसने सोचा नहीं होगा कि कोई सरकार श्रमिकों के लिए सोचती है तो कैसे सोचती है? हमने कहा कि जो परम्‍परागत इस प्रकार के शिक्षा पाए बिना ही चीजों को करता है भले ही उसकी उम्र 30 हो, 40 हो गई, 50 हो गई होगी, सरकार ने उसको सर्टिफाई करना चाहिए,official recognition देना चाहिए, official government का सर्टिफिकेट देना चाहिए ताकि उनका confidence लेवल बढ़ेगा, उसका मार्केट वैल्‍यू बढ़ेगा और वो एक उद्योगकार के यहां कभी अपाहिज बन करके जिन्‍दगी नहीं गुजारेगा। हमने officially ये decision लिया है।



कहने का तात्‍पर्य ये है कि हमें इन दिशाओं में सोचने की आवश्‍यकता है। हमें बदलाव करने की दिशा में प्रयास करने चाहिएं। इसी प्रकार से एक बात की ओर ध्‍यान देने की मैं आवश्‍यकता समझता हूं, इसको कोई गलत अर्थ न निकाले, कोई बुरा न माने। कभी-कभार, जब चर्चा होती है कि उद्योग की भलाई, ये बात ठीक है कि देश की भलाई के लिए उद्योगों का विकास आवश्‍यक है, उद्योग की भलाई और उद्योगपति की भलाई, इसमें बहुत ही बारीक रेखा होती है। देश की भलाई और सरकार की भलाई इसमें बहुत बारीक रेखा होती है। श्रम संगठन की भलाई और श्रमिक की भलाई, बहुत बारीक रेखा होती है। और इसलिए इस बारीक रेखा की नजाकत को कभी-कभार उद्योग बचाना चाहते हैं लेकिन उनमें कभी-कभार हम उद्योगपति को बचा लेते हैं। कभी-कभार हम बात तो कर लेते हैं देश को बचाने की लेकिन कोशिश सरकार को बचाने की करते हैं। और उसी प्रकार से कभी-कभार हम बात श्रमिक की करते हैं लेकिन हम कोशिश हमारे श्रम संगठन की सुरक्षा की करते हैं। हम तीनों पार्टनर यहां बैठे हैं, हम तीनों पार्टनर यहां बैठे हैं और तीनों ने इस बारीक रेखा की मर्यादाओं को स्‍वीकार करना होगा, letter and spirit को स्‍वीकार करना होगा तब मैं मानता हूं श्रमिक का भी भला होगा, देश के उद्योग के विकास की यात्रा भी चलेगी और देश का भी भला होगा, सरकारों की भलाई के लिए नहीं चलता होगी। और इसलिए इन मूलभूत बातों की ओर हम कैसे मिल-बैठ करके एक सकारात्‍मक माहौल बनाने के भी दस कदम हो सकते हैं, श्रमिक की भलाई के दस कदम हो सकते हैं आवश्‍यक है तो राष्‍ट्र को आगे बढ़ाने की भी दस कदम हो सकते हैं वो भी इसके साथ-साथ आना चाहिए। जब तक हम इन बातों को संतुलित रूप से आगे नहीं ले जाएंगे, तब तक हम माहौल बदलने में सफल नहीं होंगे। और मुझे विश्‍वास है कि आज की श्रम संसद में बैठ करके हम लोग उस माहौल को निर्माण करने की दिशा में आगे बढ़गे। भारत में 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 साल से कम आयु की है। हमारा देश एक प्रकार से विश्‍व का सबसे नौजवान देश है। आज दुनिया को skilled workforce की आवश्‍यकता है। Skill Development और Skill India ये मिशन हमारे नौजवानों को रोजगार कैसे मिले, अगर हम जो आज रोजगारी में है जो हमारे संगठन के सदस्‍य हैं, उनकी चिन्‍ता कर-करके बैठेंगे तो हो सकता है कि उनके हितों का भी भला हो जाएगा, उनकी रक्षा भी हो जाएगी, दो-चार चीजें हम उनको दिलवा भी देंगे लेकिन यहां बैठा हुआ कोई व्‍यक्ति ऐसी सीमित सोच वाला नहीं है ये मेरा विश्‍वास है। यहां बैठा हुआ हर व्‍यक्ति जो आज श्रमिक है उनकी तो चिन्‍ता करता ही करता है, लेकिन जो नौजवान बेरोजगार हैं जिनको कहीं न कहीं काम मिल जाए, इसकी उसको तलाश है, हमें उनके दरवाजे बंद करने का कोई हम नहीं है। जब तक हम हमारे देश के और नौजवानों कोरोजगार देने के लिए अवसर उपलब्‍ध नहीं कराएंगे तो हम जाने-अनजाने में गरीब का कहीं नुकसान तो नहीं कर देंगे। हो सकता है वो आज गरीब है श्रमिक नहीं बन पाया है, वो दरवाजे पर दस्‍तक दे रहा है और इसीलिए सरकार ने एक initiative लिया है apprenticeship को प्रोत्‍साहन देना। हमें जान करके हैरानी होगी, हम सबको लगता है हमारा देश आगे बढ़ना चाहिए और कभी पीछे रहता है तो हमीं लोग कहते हैं देखो बातें बड़ी करते थे,वो तो वहां पहुंच गया ये यहां रह गया, ये हम करते ही हैं। लेकिन जो पहुंचे हैं, आज चीन के अंदर जो भी साम्‍यवादी विचार से चलने वाले मूलभूत तो लोग हैं। चीन के अंदर दो करोड़ apprenticeship पर लोग काम कर रहे हैं,चीन के अंदर। जापान में एक करोड़ apprenticeship में काम कर रहे हैं। जर्मनी बहुत छोटा देश है, हमारे देश के किसी राज्‍य से भी छोटा देश है वहां पर तीस लाख लोग apprenticeship के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन मुझे आज दुख के साथ कहना चाहिए, सवा सौ करोड़ का हिन्‍दुस्‍तान,सिर्फ तीन लाख लोग apprenticeship पर काम कर रहे हैं। मेरे नौजवानों का क्‍या होगा मैं पूछना चाहता हूं।मैं सभी श्रमिक संगठनों से पूछना चाहता हूं कि इन नौजवानों को रोजगार मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए। इन नौजवानों के लिए अवसर खुलने चाहिए कि नहीं खुलने चाहिए। और भारत को आगे बढ़ाना है तो हमारे skill को काम में लाने के लिए ये हमें अवसर देना पड़ेगा। सरकारों ने, उद्योगकारों ने भी सोचना होगा इसलिए कि कानून के दायरे में फंस जाएंगे इसलिए कोई apprenticeship किसी को देनी नहीं, किसी नौजवान को अवसर नहीं देना, ये उद्योगकार जो दरवाजे बंद करके बैठे हैं, मैं नहीं मानता हूं ये लम्‍बे अरसे तक दरवाजे बंद करके बैठ पाएंगे। देश का नौजवान लम्‍बे अरसे तक इन्‍तजार नहीं करेगा। और इसलिए मैं उद्योगकारों को विशेष रूप से आग्रह करता हूं कि आपका दायित्‍व बनता है, मुनाफा कम होगा, होगा लेकिन अगर इतनी मात्रा में आपके यहां श्रमिक हैं तो इतनी मात्रा में apprenticeship, ये आपकी social responsibility का हिस्‍सा बनना चाहिए। और इस प्रकार से क्‍या हम सपना नहीं दे सकते। दो करोड़ कर न पायें ठीक है, जब कर पाएंगे, कर पाएंगे अभी कम से कम तीन लाख में से 20 लाख apprenticeship पर जा सकते हैं हम क्‍या। कम से कम इतना तो करें। करोड़ों नौजवानों को रोजगार चाहिए, कहीं से तो शुरू करें। और इसलिए मैं चाहूंगा कि जो श्रमिक आज हैं उनकी चिन्‍ता करने वाले लोगों का ये भी दायित्‍व है कि जिनकी श्रमिक बनने की संभावना है उनकी जिन्‍दगी की भीचिन्‍ता उस नौजवान की भी करने की आवश्‍यकता है जो गरीब है। पिछले 16 अक्‍टूबर को हमने श्रमेव जयते के अभियान की शुरुआत की थी। ये सर्वांगीण प्रयास है हमारा। जिन सुविधाओं की शुरुआत हमने की उनकी प्रगति आप सबकी नजर में है। यूनिवर्सल एकाउंट नम्‍बर (यूएएन) इसके माध्‍यम से प्रोविडेंट फंड के एकाउंट पोर्टेबल हो गए हैं बल्कि लगभग 4 करोड़ 67 लाख मजदूरों को digital network platform का already लाभ मिलना शुरू हो गया है। पीएफपी ऑनलाईन लाभ ले रहा है ये चीजें नहीं थीं, इन चीजों का वो लाभ ले रहा है ये ही तो श्रमिक को empower करने के लिए टेक्‍नोलॉजी का सदुपयोग करने का प्रयास किया है। जब हम सरकार में आए हमारे देश में कई लोग ऐसे थे कि जिनको पचास रुपये पेंशन मिलता था, अस्‍सी रुपये पेंशन मिलता था, सौ रुपये पेंशन मिलता था,कुछ लोग तो पेंशन लेने के लिए जाते नहीं थे क्‍योंकि पेंशन से ऑटोरिक्‍शा का खर्चा ज्‍यादा होता था। इस देश में करीब-करीब बीस लाख से अधिक ऐसे श्रमिक थे जिनको पचास रुपया, सौ रुपया, दौ सौ रुपया पेंशन मिलता था। हमने आ करके, बहुत बड़ा आर्थिक बोझ लगा है, सबके लिए minimum पेंशन एक हजार रुपया कर दिया है। मैं आशा करता हूं कि हमारे श्रमिक संगठन, ये हमारा जो pro-active initiative है उसके प्रति भी उस भाव से देखें ताकि हम सबको मिल करके दौड़ने का आनंद आ जाए,चार नई चीजें करने का उमंग आ जाए क्‍योंकि हमें चलना नहीं है और मुझे मैं मानता हूं, अगर इस देश में इतने सारे प्रधानमंत्री हो गए होंगे लेकिन श्रमिकों पर किसी एक प्रधानमंत्री पर सबसे ज्‍यादा हक है तो मुझ पर। क्‍योंकि मैं उसी बिरादरी से निकल कर आया हूं, मैंने गरीबी देखी है और इसलिए गरीब के हाल को समझने के लिए मुझे कैमरामैन को लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।मैं उसको भली-भांति समझता हूँ और इसलिए जो बातें मैं बता रहा हूं। भीतर एक आग है, कुछ करना है। गांव, गरीब, किसान, मजदूर, वंचित, दलित, पीड़ित शोषित उनके लिए कुछ करना है। लेकिन हरेक के करने की सोच अलग होगी, रास्‍ते अलग होंगे। हमारी एक अलग सोच है, अलग रास्‍ते है लेकिन लक्ष्‍य यही है कि मेरे देश के मजदूर का भला हो, मेरे देश के गरीब का भला हो, मेरे देश के किसानों का भला हो, ये सपने लेकर के हम चल पड़े हैं। और इसलिए जैसा मैंने कहा हमने apprentice sector में सुधार किया। हमने on the job training के मौके बढ़ गए हैं, उस दिशा में हमने काम किया है। आज हमने हेल्‍थ को सेक्‍टर को ESIC 2.0 स्‍कीम को लांच किया है। हम कभी-कभार ये तो देखते हैं कि भई काम मिलना चाहिए, लेकिन कैसे मिले, मिल रहा है कि नहीं मिल रहा है। उसके लिए न सरकारों को फुरसत है, न श्रमिक संगठनों को फुरसत है। उनको तो लगता है देखो यार, कागज पर दिखा दे, ये तुमको दिलवा दिया या नहीं दिलवा दिया। वो श्रमिक भी बड़ा खुश है, यार मैं इसका मेम्‍बर बन गया हूं मेरा काम हो गया। मैं इस स्‍थिति को बदलना चाहता हूं। मैं श्रमिक संगठन और सरकार की पाटर्नरशिप से आगे बढ़ना चाहता हूं। कंधे से कंधा मिलाकर के आगे चलना चाहता हूं और अगर हमने ये अस्‍पतालों की व्‍यवस्‍था को बदलने की दिशा में काम किया, अब छोटा निर्णय है कि भई हर दिन चद्दर बदलो। अब मुझे बताइए health की दृष्‍टि से, hygiene की दृष्‍टि से, ये सब जानते हैं कि बदलनी चाहिए और लोग मानते होंगे कि बदलें, लेकिन हमको मालूम है कि लोग नहीं बदलते। ठीक है, आया है patient पड़ा है। आखिरकार मुझे रास्‍ता खोजना पड़ा, मैंने कहा हर दिन की चद्दर का कलर ही अलग होगा, patient को पता चलेगा कि चद्दर बदली कि नहीं बदली। हमारे देश के बड़े-बड़े जो विद्वान लोग है वो मुझे सवाल करते रहते हैं कि मोदी कुछ बड़ा ले आओ, कुछ बड़ा। बहुत सरकारें बड़ा-बड़ा ले आईं। मुझे तो मेरे गरीब के लिए जीना है, मेरे गरीब के लिए कुछ काम करना है इसलिए मेरा दिमाग इसी में चलता रहता है। यही, यही मैं सोच, और मैं दिल से बातें कर रहा हूं कि ये अन्‍य जो कई चीजें लाए हैं। हम चाहते हैं कि श्रमिक की हेल्‍थ को लेकर के चिन्‍ता होनी चाहिए, होनी चाहिए। और हमने उस दिशा में हमने एक तो उसके सारे हेल्‍थ रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिए ताकि अब उसको अपना ब्‍लड टेस्‍ट का क्‍या हुआ, यूरिन टेस्‍ट का क्‍या हुआ, दुनिया भर में चक्‍कर नहीं काटना पड़ेगा। अपने मोबाइल फोन पर सारी चीजें उपलब्‍ध हो जाएं ये व्‍यवस्‍था की है ताकि श्रमिक को सुविधा कैसे हो, हम उस दिशा में काम कर रहे हैं। और मैं मानता हूं कि उस काम के कारण उसको लाभ होगा।



आज हमारे देश में असंगठित मजदूर कुल मजदूरों का 93 पर्सेंट है। इस सरकार ने असंगठित मजदूरों के संबंध में बहुत ही constructive way में और well planned way में योजनाएं बनाई हैं और हम आगे बढ़ रहे हैं। सबसे बड़ी बात है असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा कैसे मिले। न उसे स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा है, न जीवन बीमा है और न हीं पेंशन है और बड़ी संख्‍या में असंगठित ग्रामीण मजदूर अनपढ़ हैं, जिन्‍हें अपनी बात कहां कहना है, कैसे पहुंचे, इसकी कोई जानकारी तक नहीं है। ऐसे मजदूर के लिए सामाजिक सुरक्षा उपलब्‍ध कराने में सरकार का उत्‍तरदायित्‍व मानता हूं। देश के गरीब, असंगठित वर्गों को ध्‍यान में रख करके हमने तीन महत्‍वपूर्ण योजनाएं शुरू कीं । और ये योजनाएं गरीब के लिए हैं। अमीर का उससे कोई लेना-देना नहीं है। और मैं मानता हूं, सभी श्रमिक संगठनों से मैं आग्रह करूंगा कि आप भी इस बात में मदद कीजिए। अगर किसी के घर में, हम कई यहां संगठन है जो असंगठित मजदूरों का काम करते हैं। कुछ लोग हैं जो घरों में बर्तन साफ करने वाले लोग होते हैं, उनका संगठन चलाते हैं। क्‍या हम कोशिश नहीं करे तो उसके मालिकों को मिल करके कहे कि भई आपके यहां ये लड़का कपड़े धोता है, बर्तन साफ करता है या खाना पकाता है या गाड़ी चलाता है। या आपका धोबी है। इसके लिए ये-ये सरकार की स्‍कीम है। आप एक मालिक हो, इसके लिए इतना पैसा बैंक में डालो, उसका जीवन भरा हो जाएगा। मैं मानता हूं हर कोई इसको करेगा। हम मध्‍यम वर्ग के लोगों को भी अगर समझाएंगे कि भई तुम्‍हारे साथ काम करने वाले जो गरीब लोग है उनको इन स्‍कीम का फायदा तुम दो। तुमको कोई महंगा नहीं पड़ने वाला है, तुम्हारे लिए तो एक फाइव स्‍टार होटल का एक खाने से ज्‍यादा का खर्च नहीं है। लेकिन उस गरीब की तो जिन्‍दगी बदल जाएगी और इसलिए हमने अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन जयोति बीमा योजना और मैं बताऊं यानी एक महीने का एक रुपया,12 महीने का 12 रुपया। एक स्‍कीम ऐसी है एक दिन का सिर्फ 80-90 पैसा। साल भर का 330 रुपया। लेकिन उसको जीवन भर उसकी व्‍यवस्‍था मिल सकती है। ये काम उसके मालिक, जिसके वहां वह काम करता है, वो कर सकते हैं और श्रमिक संगठन एक सामाजिक काम के तौर पर इस बात को आगे बढ़ा सकते हैं। सरकार से कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे। मुझे लगता है कि इसका उसको फायदा होगा और हमने यह फायदा दिलवाना चाहिए। व्‍यवस्‍थाएं हैं, योजनाएं हैं। अटल पेंशन योजना। अगर आज से उसको जोड़ दिया जाए, समझा दिया जाए उसका तो जीवन धन्‍य हो जाएगा कि भई चलो 60 साल के बाद मुझे ये लाभ मिलेगा। मैं समझता हूं कि हम एक सामाजिक चेतना जगाने का भी काम करें, सामाजिक बदलाव का भी काम करें और उस काम को आगे बढ़ाएंगे तो मैं समझता हूं बहुत सारी बातें हम कर पाएंगे। कई विषय है जिसको मैं आपके सामने रखता ही चला जाता हूं। लेकिन मुझे विश्‍वास है कि इस श्रम संसद के अंदर जो कुछ भी महत्‍वपूर्ण चर्चाएं हो रही है। हमारे वित्‍त मंत्री और उनकी एक कमेटी बनी है जो उनको सुन रही है। और बातचीत से ही अच्‍छे नतीजे निकलते हैं, सुखद परिणाम निकलेंगे। कल भी मेरी श्रम संगठन के प्रमुख लोगों के साथ मुझे मिलने का अवसर मिला था, उनको सुनने का अवसर मिला था और मैं भली-भांति उनकी बात को, उनकी भावनाओं को समझता हूं। मिल-बांट करके हमें आगे बढ़ना है और हम देश को आगे बढ़ाने में कैसे काम आएं, देश को आर्थिक नई ऊंचाइयों पर कैसे ले जाएं, देश में नौजवानों को अधिकतम रोजगार के अवसर कैसे उपलब्‍ध कराएं।

आज भारत के सामने मौका है विश्‍व के परिदृश्‍य में भारत के सामने मौका है। यह मौका अगर हमने खो दिया तो फिर पता नहीं हमारे हाथ में कब मौका आएगा और उस काम को लेकर आगे बढ़ें इसी एक अपेक्षा के साथ मेरी इस श्रम सांसद को हृदयपूर्वक बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, उत्‍तर परिणाम निकलेंगे इस भरोसे के साथ और साथ मिल करके आगे चलेंगे इस विश्‍वास के साथ बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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Transcript for PM Modi’s interacts with BJP booth Karyakartas of Assam for Mera Booth Sabse Mazboot
March 30, 2026
‘Seva, Sangathan, and Samarpan’, PM Modi says Assam’s BJP karyakartas embody the true spirit of the organisation
When every booth becomes strong, victory becomes certain, and Assam’s future becomes brighter: PM Modi lauding the efforts of BJP karyakartas
The importance of protecting Assam’s identity and tackling issues like illegal infiltration is not just a political issue but one of security, culture and justice: PM Modi
Over a dozen key peace agreements have brought lasting stability, especially in regions like Bodoland: PM Modi

नमस्कार साथियों।

मुझे पक्का विश्वास है हर बूथ पर बहुत बड़ी मात्रा में बड़े उत्साह के साथ कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। सबसे पहले तो मां कामाख्या को नमन करते हुए मां कामाख्या मोह सेवा जनालु जॉय आई होम ओ के नमस्कार जोनैशु।

ब्रह्मपुत्र घाटी से लेकर बराक वैली तक पहाड़ से लेकर पठार तक असम बीजेपी के सभी कार्यकर्ता साथियों का मैं अभिनंदन करता हूं। मैं भी आपकी तरह एक कार्यकर्ता ही हूं और पार्टी जो दायित्व सौंपती है उसे निभाने के लिए जो भी मुझसे हो सकता है मैं करता हूं। मुझे असम में आपके बीच आकर काम करना होता है। इस दौरान आप में से बहुत सारे साथियों के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। आज बूथ के स्तर पर काम करने वाले आप सभी कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत का अवसर मिला है। और मैं जानता हूं कि आप सभी आज-कल बहुत व्यस्त हैं। हर कार्यकर्ता के मन में एक ही भाव, एक ही संकल्प है। मोर बूथ सभा तो के मजबूत, यानी मेरा बूथ सबसे मजबूत। असम में बीजेपी एनडीए की हैट्रिक लगे। इसके लिए आप सभी जबरदस्त मेहनत कर रहे हैं।

दूसरी तरफ यह बोहाग बिहू और अन्य उत्सवों का भी समय है। इनसे जुड़ी तैयारियां भी रहती हैं। मैं जानता हूं असम में बीजेपी एनडीए को लेकर बहुत अधिक समर्थन है। लेकिन आप लोग जमीन पर जो अनुभव कर रहे हैं, जो आपके विचार हैं, मैं उन्हें जानने के लिए बहुत उत्सुक हूं। तो चलिए बातचीत शुरू करते हैं। सबसे पहले कौन बात करेंगे मेरे साथ?

पंकज हजारिका- नमस्कार। मैं पंकज हजारिका असम के सुनीतपुर जिले के नौद विधानसभा क्षेत्र से मैं बोल रहा हूं।

पीएम- पंकज जी नमस्कार। मुझे बहुत अच्छा लगा। आपसे बात करने का मौका मिला। अच्छा पंकज जी मैं जाना चाहता हूं। असम ने अस्थिरता और अशांति का एक लंबा दौर देखा। बीते दशक में स्थिति बिल्कुल बदल गई है। जब आप पुराने लोगों से मिलते हैं तो वह इसको लेकर क्या कहते हैं?

पंकज हजारिका- मैं मानता हूं कि सन 2016 से पहले असम में जो हुआ वो बहुत एक दुखजनक माहौल चल रहा था। बाद में जब भाजपा गवर्नमेंट आया उस समय पर असम में एक नया परिवर्तन देख रहा है। सभी किसानों, व्यवसायियों और शिक्षक सभी जनों के लिए एक आमूल परिवर्तन हुआ। जैसे एक प्रगति का दौर नया दौर चल रहा है। अभी-अभी किसानों ने व्यवसायियों ने अपने काम आराम से धूमधाम से शांति से कर रहा है। अभी प्रगति के एक नया दौर आसाम में दिख रहा है सभी जनों के लिए और किसान का आय बढ़ गया। किसान का मन में शांति आ गया। इसी माहौल से गांव-गांव से लोग बहुत खुश है।

पीएम- जब लोगों से मिलते हैं तो लोग आपसे क्या पूछते हैं? आपको क्या बताते हैं लोग, पुराने लोग जब मिलते हैं ?

पंकज हजारिका- पुराने लोगों को एक प्रकार से मुक्ति मिल गया, जब से भाजपा गवर्नमेंट आई है। जो भाजपा गवर्नमेंट आने वाली है.. टेन इयर्स आसाम में भाजपा गवर्नमेंट को हुआ है। पहले तो आसाम में लूटपाट, घर्षण, उग्रवाद से शांति का कोई उपाय नहीं मिला। जब से टेन इयर्स असम में गवर्नमेंट भाजपा का हुआ है। अभी सभी एक शांति से प्रगति से उन्नयन से एक नया धारा, एक नया दिशा बन गया। ये बोल रहा है सर।

पीएम- यह जो नए वोटर है उनका तो उस समय जन्म भी नहीं हुआ होगा या अगर होंगे तो पांच सात आठ 10 के साल के उम्र के होंगे। उनको तो उस समय का कुछ पता नहीं होगा। तो उन सबको कौन बताता है?

पंकज हजारिका- हमलोगों का जो कार्यकर्ता है जो सभी लोगों के लिए एक नया माहौल बना रहा है। मेरा बूथ सबसे मजबूत हर बूथ में हर घर-घर में जाकर हम हमारा जो कार्यकर्ता है सभी लोग उस दिशा में एक नया रास्ता दिखाया और बुजुर्गों ने वो बच्चा लोगों को बताया कि पहले तो असम का क्या व्यवस्था है क्या माहौल चल रहा है वो नया यूथ को वो रास्ता दिखा दिया।

पीएम- पंकज जी आपने बिल्कुल सही कहा। हमने वह समय देखा है जब अस्रम का एक बड़ा बड़ा हिस्सा हिंसा की आग में झुलस रहा था। लेकिन आज ब्रह्मपुत्र की लहरों में एक नया आत्मविश्वास है, क्योंकि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने स्थायी शांति के लिए प्रयास किए हैं। पिछले 10 वर्षों में 12 बड़े शांति समझौते हो चुके हैं। साथियों यह जो पुराने दिन है वो असम के बूढ़े, बड़े और बुजुर्गों को याद है। लेकिन जो 18-20-22 साल के युवा है जो फर्स्ट टाइम वोटर्स हैं इनके दिमाग में बीते 10 साल की शांति ही है। वैसे ही हमारी माताओं बहनों को भी बार-बार इन चीजों को याद कराना चाहिए। इसलिए एक सक्रिय बूथ कार्यकर्ता होने के नाते आपका दायित्व और बढ़ जाता है। यह जरूरी है कि फर्स्ट टाइम वोटर्स को कांग्रेस के पुराने दिनों की याद दिलाएं और बताएं कि जरा सी गलती असम को फिर से उस दौर में गिरा सकती है, वापस ले जा सकती है। आप अपनी बात परिवार के उदाहरण से भी समझा सकते हैं। जब घर में शांति होती है तो घर के लोग भी आगे बढ़ते हैं। वैसे ही राज्य के डेवलपमेंट के लिए शांति पहली जरूरत होती है और यही बीजेपी एनडीए सरकार कर रही है। मेरा एक और काम करिएगा। जब आप युवाओं से मिले तो आप पुराने अखबारों की कटिंग 10 साल पहले के फोन पर पुराने वीडियो ये सब जरूर उनको दिखाना चाहिए। आपके मोबाइल फोन पर सब रेडी रहना चाहिए और जब कोई देखता है ना तो फिर उसको मानता है और आज-कल जो एआई के द्वारा जो फालतू चीजें बना करके सर्कुलेट की जाती है उससे भी बचने के लिए उनको समझाना चाहिए।

साथियों,

आपको लोगों को कांग्रेस की नीति भी याद दिलानी है। कांग्रेस कागज पर तो समझौता करती थी, ताकि अखबारों में छप जाए लोग गुमराह हो जाए और गलती से वोट भी डाल दे। लेकिन जैसे ही कांग्रेस सरकार बनती थी समझौते कूड़े कचरे के ढेर में चले जाते थे। कोई समझौता आगे बढ़ता नहीं था। फिर दंगे फसाद में असम हमारा फंस जाता था। हमारी नई पीढ़ी फंस जाती थी। जबकि बीजेपी मीडिया में जगह पाने के लिए काम नहीं करती। शांति स्थापित करने के लिए काम करती है। आपके बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाने के लिए काम करती है। और हम ईमानदारी से शांति के लिए समझौते कर रहे हैं। और असम के लोगों ने भी देखा है 10 साल में करके दिखाया। आप अपने बूथ पर फर्स्ट टाइम वोटर्स के लिए विशेष कार्यक्रम करिए। जैसे त्योहारों का मौसम है। इसमें आप भजन संध्याएं या ऐसी कोई आयोजन बूथ पर कर सकते हैं। इसमें विरासत का उत्सव भी होगा और विकसित असम बनाने के लिए बीजेपी क्या कर रही है? इस पर भी अच्छी चर्चा हो सकती है। पंकज जी बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके। चलिए आगे बढ़ते हैं.. अब कौन मेरे साथ बात करेंगे?

धनेश्वर जी- नमस्ते माननीय मोदी जी।

पीएम- नमस्ते

धनेश्वर जी- नमस्ते मोदी जी, मैं तामलपुर जिले के क्षेत्र के 43 नौ तामलपुर विधानसभा क्षेत्र से धनेश्वर बासुमतारी बोल रहा हूं सर।

पीएम- धानेश्वर जी आपके जिम्मे अभी क्या है।

धनेश्वर जी- मेरा मैं अभी 2016 से भारतीय जनता पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं और वर्तमान में शक्ति केंद्र प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहा हूं।

पीएम- और आप व्यवसाय क्या करते हैं जीवन में?

धनेश्वर जी- - जीवन में मैं एक व्यवसायी हूं। मेरा कपड़ों का एक छोटा सा व्यवसाय है। जिसे सीएम ट्रिपल ए योजना की मदद से शुरू किया था। इसके साथ हमारे घर में पाट और मुगा उद्योग भी है, जहां हम कपड़े तैयार करते हैं।

पीएम- तो आपके पिता-माता ने आपका नाम धनेश्वर रखा है, तो सचमुच में धनेश्वर है क्या आप?

धनेश्वर जी- थैंक यू। थैंक यू सर। सर

पीएम- अच्छा धनेश्वर जी मैं कुछ समय पहले ही बोडोलैंड में आया था। वहां जो बदलाव हो रहा है वह सचमुच में बहुत अद्भुत है। आज बोडोलैंड विकास के नए रास्ते पर है। आप तो इसी क्षेत्र के निवासी हैं। जब आप लोगों से मिलते हैं लोगों से बात करते हैं और स्वाभाविक है जहां भी जाते होंगे चुनाव की चर्चा होती होगी और आप भाजपा वाले हैं तो ज्यादा करते होंगे। तो लोग इन सारे बातों पर यह जो बोडोलैंड में बदलाव आया है क्या बातें करते हैं?

धनेश्वर जी- बोडोलैंड शांति समझौते के बाद पूरे क्षेत्र में बहुत ही सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां इस इलाके में संघर्ष और अस्थिरता की बात होती थी। आज वहां विकास और शांति की बात हो रही है। सड़क, शिक्षा और रोजगार के अवसर पहले से काफी बढ़ रहे हैं। जिससे लोगों की जिंदगी में सुधार आया है। जब हम बोडो समाज के लोगों से बात करते हैं तो वे बताते हैं कि अब उन्हें अपने भविष्य को लेकर भरोसा और उम्मीद महसूस होती है। खासकर युवा को कि सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब वे हिंसा की बजाय शिक्षा, कौशल और अपने काम धंधे पर ध्यान दे रहे हैं। यह बदलाव ना केवल बदलन बल्कि पूरे उत्तर पूर्व के लिए एक प्रेरणा है।

पीएम- अच्छा ये जो बागुरूंबा का कार्यक्रम इतना बड़ा गुवाहाटी में हुआ और पूरी दुनिया में उसकी चर्चा चल रही है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों के साथ लोग उसकी तुलना करते हैं। यह सब देखकर के बोडोलैंड के लोगों को क्या लगता है?

धनेश्वर जी- बोडो समाज के लोग बहुत उत्साह हुआ कि मोदी जी ने हमारे बोडो समाज की बागुरूंब को विश्व दरबार में जो लेके गया ये हमारे लिए बहुत प्रेरणादायक है ये आपको बहुत बोडो समाज ने धन्यवाद ज्ञापन किया सर आपको बहुत लोगों ने

पीएम- धनेश्वर जी आप सच्चे अर्थ में धनेश्वर भी बनें, दिल के भी धनेश्वर बने, विचारों के भी धनेश्वर बने और असम को भी धनेश्वर बनाए। आपने बहुत अच्छी तरह से बताया है। जिस बोडोलैंड की संस्कृति इतनी समृद्ध है उसके साथ दशकों तक कांग्रेस ने धोखा किया। मुझे इस बात को लेकर बहुत संतोष होता है कि आज वहां शांति और समृद्धि आ रही है। एक समय बोडोलैंड में कर्फ्यू ही ज्यादा रहता था। बम बारूद के ही धमाके सुनाई देते थे। आज वहां खाम और सिफुंग की धुनें फिर से गूंज रही है। और जैसा आपने कहा आज दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक और मैं तो कहता हूं दुनिया में बागुरंबा की अद्भुत छटा का ही जलवा दिखता है। ये देश के हर उस क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा मॉडल है। जहां अतीत में अशांति रही है। वहां आज शांति का सूरज निकला है।

धनेश्वर जी मैं सभी कार्यकर्ताओं से कहना चाहूंगा कि बोडोलैंड के मेरे बूथ कार्यकर्ता साथी चुनाव से पहले अपनेपने बूथ पर ऐसे कार्यक्रम करें जहां वह साथी शामिल हो, जिन्होंने बंदूके छोड़ी है। फिर उनके अनुभव सुने और लोगों को सुनाए और इतना ही नहीं जिन माताओं के बेटे घर वापस आए हैं। वह माताएं बहने बहुत आशीर्वाद देती है। जब मैं 2014 के बाद एक कार्यक्रम में बोले आया था और सब माताओं को मैंने कहा कि मुझे आपके बच्चे वापस लाने हैं और आज मुझे संतोष है वो सारे संतान वापस आए बंदूक छोड़कर के कलम को हाथ लगाए हैं। कई ऐसे साथी भी होंगे जो बरसों तक जंगलों में रहे हैं। और अब पहली बार वोट दे रहे हैं। उनका विशेष अभिनंदन हो। ऐसे समारोह भी रखे जा सकते हैं। आपके बूथ में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के जो लाभार्थी हैं उनसे तो बार-बार मिलना है। उन्हें कहना है कि वोटिंग के दिन टोली बनाकर एक साथ ही वोट डालने चले। गाजे बाजे हुए साथ निकलना चाहिए। जैसे उत्सव है ना वैसा माहौल बनाना चाहिए। बोल में आज बहुत बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम हो रहा है। ऐसा हर काम जो आपके बूथ में आपके ब्लॉक में हो रहा है। उसके क्या फायदा होंगे? यह विस्तार से बताना है। जिनको गैस का सिलेंडर मिला होगा। जिनको बिजली का कनेक्शन मिला होगा। जिनको पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा मिला होगा। जिनको पीएम आवास योजना का घर मिला होगा। ऐसे कई काम है। इन सब के लोगों की लिस्ट बनानी चाहिए। किसको क्या-क्या मिला है और उन सब से बात करनी चाहिए। और आप एक काम कर सकते हैं शांति की दीवार वाल आर्ट ऐसा कुछ कर सकते हैं क्या? जैसे बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन में गांवों में स्थानीय कलाकारों से दीवारों पर बोडो लोक कला में पहले और अब का चित्रण करवाएं। हो सके तो अपने अपने बूथ के युवा साथियों को भी इसे जोड़ें और मैं मानता हूं कि वहां तो हमारे एनडीए के साथी भी चुनाव लड़ रहे हैं। उनके भी सबको विजय बनाना है। हर बूथ पर एनडीए के सब साथियों को मिलकर काम करना है। और यह बीजेपी की जिम्मेवारी ज्यादा है कि अन्य दलों के लोगों को भी साथ लेकर के उनके साथ काम करना है। चलिए धनेश्वर जी मुझे बहुत अच्छा लगा। अब किसी और एक साथी से सुनते हैं। हां जी.. बताइए कौन है हमारे साथ?

डिंपी जी - नमस्कार। मैं दीपी दास

पीएम- डिंपी दास जी नमस्ते…अपने बारे में बताइए..

डिंपी जी - नमस्कार मैं भारतीय युवा मसा की नौगांव जिले का वाइस प्रेसिडेंट हूं। असम के नौगांव जिले का रहा विधानसभा समष्टि के अंतर्गत खाही भांतिपुरी की रहने वाली हूं।

पीएम- डिंपी जी आप और भी कुछ काम करती हैं भाजपा के सिवाय

डिंपी जी- मैं 9 साल से बीजेपी से समाज सेवा के कार्य में जुड़ी हुई हूं। मेरे परिवार में मेरी मां जी, मेरा छोटा भाई, ताऊ जी, ताई जी और चाचू रहते हैं। उसके साथ में मैं अपने आपके द्वारा जो एक स्कीम मिली थी मुझे पीएमएमएसवाई का उसी को लेके मैंने कुछ जमीन लीज पे लेके एक न्यू पोंड का जो फिश फार्मिंग है वो शुरू किया और उसी के साथ में बच्चों को पढ़ाती भी हूं और युवाओं के साथ में मिलकर ये भारतीय जनता पार्टी के साथ में जुड़ी हुई हूं और बाकी जन कल्याण का कार्य कर रही हूं।

पीएम- डिंपी जी आप इतनी बढ़िया हिंदी कैसे बोलती है?

डिंपी जी- मैं कोशिश करती हूं।

पीएम - बहुत बढ़िया बोल रही हैं आप।

डिंपी जी- धन्यवाद।

पीएम- आप भाषण भी करती हैं क्या?

डिंपी जी- कभी-कभी कर लेती हूं।

पीएम- अच्छा चलिए मुझे कभी आपका भाषण सुनना पड़ेगा। अच्छा मैंने सोशल मीडिया पर देखा कि हमारी कार्यकर्ता बहनें देर रात तक बिना डर प्रचार कर रही है। देर-देर रात तक लोगों के घर जा रही हैं। 10 साल पहले तक यह संभव नहीं था। यह जो डर भय खत्म हुआ है इसको लेकर असम की बहनें क्या कह रही है?

डिंपी जी- जी आज असम में सब लोग महिलाएं बहुत सुरक्षित है। क्योंकि पहले आज की भाजपा सरकार जो हर महिलाओं के ऊपर आने वाली परेशानियों को आने ही नहीं देती है। उसी वजह से सब लोग बहुत सेफ हैं और पहले हमारी लड़की लोग महिलाएं लोग रात क्या दिन में भी सुरक्षित नहीं थे लेकिन आज जब से भाजपा सरकार बनी हुई है तब से लेके हर महिलाएं बहुत सुरक्षित है और रात में देर तक कार्य कर सकती हैं। कोई डर नहीं है और मैं भी सुरक्षित हूं। इसलिए मैं दिल से कहती हूं कि एक बार फिर से मोदी सरकार क्योंकि ये जो आज के दिनों की परिस्थिति है और पहले जो कांग्रेस सरकार के दिन में लड़की लोग और मैं भी उस टाइम में एकदम ही सेफ नहीं थे। दिन में भी सेफ नहीं थी। रात की बात तो बहुत दूर की बात थी। लेकिन आज सब लोग बहुत सुरक्षित है, कुशल है और मैं फिर से भगवान से भी विनती करती हूं और कि फिर से भाजपा सरकार बने। आने वाले और सालों तक मतलब ऐसे ही सुरक्षित महिलाएं रहें।

पीएम- देखिए हम राजनीतिक दल के नेताओं के लिए तो जनता जनार्दन ही हमारा भगवान है। बूथ में जो परिवार है वही हमारे भगवान हैं। हमें उनकी सेवा करनी है। उनको जीवन में सब सुख मिलेंगे तो भगवान अपने आप प्रसन्न हो जाएगा।

डिंपी जी आपने बहुत अच्छे तरीके से बताया। मुझे बहुत संतोष हुआ। आपकी बातों से मुझे पूरा विश्वास हो गया है कि आप केंद्र और राज्य की योजनाओं को प्रभावी तरीके से रख रहेंगे। नारी शक्ति का आत्मविश्वास ही नए असम की ताकत है। बीजेपी की डबल इंजन सरकार तो पूरे देश की बहनों की पहली पसंद है। असम में भी हम यही अनुभव कर रहे हैं। अच्छा मैं कुछ काम बताने चाहता हूं। सारे बूथ के कार्यकर्ताओं को बताता हूं। डिंपी जी के माध्यम से बताता हूं।

देखिए कुछ काम तो करने ही करने हैं। आप सभी कार्यकर्ता Namo ऐप में जरूर जाए। आपका मोबाइल में Namo ऐप तो होना ही चाहिए। वहां बहुत विस्तार से आपको हर वो जानकारी मिलेगी जो हमारी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कर रही है। डबल इंजन सरकार का क्या फायदा होता है? यह आप जरूर लोगों को बताएं। जैसे असम की हमारी सरकार अरुणोदय योजना चला रही है। इसके तहत 40 लाख बहनों को आर्थिक सहायता दी है। ऐसे ही केंद्र सरकार लखपति दीदी अभियान चला रही है। इसके तहत देश में 3 करोड़ लखपति दीदी बन चुकी है। इनमें असम में भी अनेक बहने लखपति बन चुकी हैं। और अब हमने 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। 3 करोड़ और बनाने का। आप एक काम यह भी कीजिएगा कि आपके बुथ में जो लखपति दीदी है उनके वीडियो रिकॉर्ड कीजिए। उनका अनुभव सुनाइए और औरों को भी प्रेरित करेगा। उसको सोशल मीडिया पर डालिए। डिजिटल जमाना है तो क्या हम लाभार्थी बहनों के साथ कोई शॉर्ट वीडियो वगैरह बना सकते हैं? जिसमें हमारी बहनें अपना एक्सपीरियंस शेयर करें और वीडियो हम जन-जन तक पहुंचाएं। साथियों आने वाले दिनों में किसी महिला कार्यकर्ता के घर पर मोहल्ले की सभी महिलाओं की छोटी-छोटी बैठक हो। हमें ऐसे प्रयास करना चाहिए। हमारी बहुत सारी बहनें हस्तशिल्प से जुड़ी हैं। बिहू के अवसर पर तो गमोसा और अन्य पारंपरिक वस्त्रों का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे पारंपरिक वस्त्रों को उपहार में देने का विशेष अभियान हमें चलाना चाहिए। यह वोकल फॉर लोकल के प्रति बीजेपी के कमिटमेंट को भी आगे बढ़ाएगा। एक आग्रह मुझे बूथ की सभी बहनों से करना है। उन्हें कहना है कि वे जिम्मेदारी ले कि वोटिंग के दिन परिवार का हर सदस्य बूथ पर पहुंच जाए। वोटिंग से जुड़ी पर्ची और अन्य जरूरी दस्तावेज भी समय पर तैयार रहे। सुनिश्चित करने के लिए भी बहनें उनको प्रोत्साहित करना चाहिए। और मैंने जैसा कहा जब पोलिंग के जाए ना तो 20-20 25-25 लोगों के जुलूस निकाल के जाना चाहिए। गाने बजाने चाहिए, ढोल बजाने चाहिए। एक उत्सव का माहौल बनाना चाहिए। चलिए डिंपी जी बहुत अच्छा लगा। अब आगे बढ़ते हैं। कौन बात करेंगे?

देवराज जी- नमस्कार आदरणीय प्रधानमंत्री जी। मैं देवराज सिग्नार बात कर रहा हूं।

पीएम- देवराज जी, आपको बहुत- बहुत नमस्कार। क्या करते हो बताइए जरा।

देवराज जी- मैं 108 बोकाजन कंस्टिच्युएंसी जिला कारबंग से बात कर रहा हूं। और मैं पिछले 15 सालों से बीजेपी के कार्यकर्ता हूं। और मैं अभी हम मेरा खुद एक इंजीनियर हू और मैं अभी इलेक्शन का माहौल है। मैं जोरों शोरों से भाजपा के लिए दिन रात करके मैं मेहनत कर रहा हूं।

पीएम- अच्छा देवराज जी अभी इन दिनों घुसपैठियों का विषय असम के लिए तो जीवन मरण का इशू बन चुका है। कांग्रेस ने किस प्रकार से घुसपैठियों को जमीन पर कब्जे करने दिए। बट हमारी कोशिश है कि हमारे नौजवानों के रोजगार कोई आकर के छीन ना ले। हमारी कोशिश है कि हमारे गरीब आदिवासी भाई बहनों के दलित भाई बहनों की जमीन कोई छीन ना ले आकर के विदेशों से। हमारी कोशिश ये है कि हमारी माताओं बहनों के सम्मान को कोई लूट ना ले। और इसलिए घुसपैठियों से देश को मुक्त करना बहुत जरूरी है। और सरकार लगातार कोशिश कर रही है। सरकार यह जो प्रयास कर रही है उसका लोगों में क्या चर्चा है? जी बताइए..

देवराज जी- ये डिस्ट्रिक्ट बॉर्डर जैसे हमारे कारग जिला में घुसपैठ हमेशा से लोगों की बहुत बड़ी चिंता रही है। पहली बात तो यह है कि घुसपैठिये जितने भी यहां कारबिंग जिला में हमारे यहां डिस्ट्रिक्ट में जितने भी यहां पे घुसपैठिए घुसे हैं ये ये कांग्रेसियों ने पिछले 15 सालों से अपना वोट बैंक बना के रखा है। तो जैसे हमारे जो मुख्यमंत्री हेमंत जी ने जो पांच सालों से जो कोशिश है घुसपैठियों को यहां से खदेड़ने के लिए या बाहर निकालने के बांग्लादेशियों को वापस भेजने की जो कोशिश है उसमें हम सब जितने भी यहां पे असमिया लोग है हम लोग दिन-रात मेहनत करके उनको अपना सर्वस्व मानते हैं इसको। जैसे कि हम लोगों का जमीन पे ये लोग कब्जा करते ये हमारे जमीन को छीन रहे हैं। हमारे रोटी मकान को छीन रहे हैं। हर चीज को मतलब कि हिस्सा मांग रहे हैं। तो इस चीज को हम लोग कभी एक्सेप्ट नहीं कर सकते।

पीएम- देवराज जी आपने बहुत अच्छे से स्थिति को समझाया और पुरानी परिस्थितियां कैसी थी लेकिन इसको अभी भी नई पीढ़ी को बताना पड़ेगा और इससे क्या-क्या संकट आने वाले हैं यह भी समझाना होगा। यह जो घुसपैठियों का मुद्दा है यह सिर्फ चुनाव का मुद्दा नहीं है। यह असम की पहचान, असम की सुरक्षा देश की सुरक्षा का मुद्दा है। एक किसानों की जमीन, आदिवासियों की, गरीबों की रोजीरोटी, महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। आप देखिए कांग्रेस ने बीते दशकों में जो अवैध कब्जे होने दिए, इससे असम में कितनी परेशानी हुई है। हमारे आस्था के, सांस्कृति के स्थानों तक को उन्होंने छोड़ा नहीं है। किसानों की जमीनों को नहीं छोड़ा गया। जहां घुसपैठिए बढ़ जाते हैं, वह मेहनत मजदूरी के काम पर कब्जा कर लेते हैं। इसलिए जरूरतमंद लोगों को काम मिलना कम हो जाता है।

साथियों,

मैं असम के सभी कार्यकर्ताओं से कहना चाहूंगा, आपके पास इनके इलाके के अपने ब्लॉक, अपने जिले में जो अवैध कब्जे हैं उनकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। उससे क्या क्या असर वहां बीते दशकों में हुआ है। इस के विषय में विस्तार से लोगों को बताया जाए। आपके क्षेत्र में घुसपैठियों से जो पीड़ित लोग रहे उनके वीडियो आप शेयर कर सकते हैं। हमें लोगों को बताना है कि कांग्रेस ने अतिक्रमण दिया और बीजेपी अधिकार दे रही है। और मैं पक्का मानता हूं असम के लोग अतिक्रमण से मुक्ति चाहते हैं और अधिकार पाना चाहते हैं। आप सभी को एक काम और करना है। उन लोगों की सूची बनानी है जो वोटर तो हैं लेकिन जिन्हें बूथ तक जाने में असुविधा हो सकती है। ऐसे लोगों को बूथ तक पहुंचाने के लिए आपको व्यवस्था करनी होगी। जो युवा वोटर्स अपने गृह क्षेत्र से बाहर हैं। उन्हें घर आकर वोट देने के लिए प्रेरित करना है। कई साथी कामकाज के लिए भी अन्य राज्यों में गए होंगे या गांव से शहर गए होंगे। उनको भी अभी से संपर्क करके बुलाना है और उनके परिवार को भी कहना चाहिए कि वो बच्चों बाहर है तो फोन करें, चिट्ठी लिखें, बुलाएं। चलिए मुझे बहुत अच्छा लगा। देवराज जी आपसे बात कर करके आइए। अब हमारे साथ कौन बात करेगा?

अर्जुन जी- नमस्कार मोदी जी मैं अर्जुन ग्वाला बोल रहा हूं।

पीएम- अर्जुन जी नमस्ते बताइए अर्जुन जी अपने विषय में पहले तो जानना चाहूंगा।

अर्जुन जी- मोदी जी मैं अर्जुन गोवाला असम 86 तिनसुकिया विधानसभा अलकादा चाय बागान के निवासी हूं। मैं संघ से जुड़ा हुआ व्यक्ति हूं। बचपन से ही मैं संघ से प्यार करता हूं। और वर्तमान में बीजेपी तिनसुकिया किसान मोर्चा का सेक्रेटरी हूं और माकुम विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी हूं। और मेरा घर चाय बागान में है। और मैं छोटा सा एक गसरी दुकान है और छोटा सा एक चाय बागान है। चाय का खेती करता हूं।

पीएम- बच्चे पढ़ते हैं अर्जुन जी।

अर्जुन जी- हां, मेरा दो बच्चा है। एक सिक्स में गया है और एक छोटा है मोदी जी। एक साल दो महीना हुआ है। अच्छा।

पीएम- लेकिन बच्चों को पढ़ाना पक्का। हां। बीजेपी का काम भी करना है लेकिन घर को भी संभालना है और बच्चों को तो जरूर पढ़ाना है। अच्छा, अर्जुन जी श्री कृष्ण को ग्वाला कहते थे। आप तो अर्जुन गोवाता है। यह हमारे जो चाय बागान के साथी हैं। उनसे मेरी भी कई बार बात हुई है। पिछले दिनों गुवाहाटी में भी मुझे कई लोगों से मिलने का मौका मिला। भूमि के पट्टे मिलने से बहुत खुश है। और मैं मानता हूं जब जमीन का पट्टा मिल जाता है ना तो जीवन का एक बहुत बड़ा आधार मिल जाता है। घर को पता मिल जाता है। जिंदगी को पता मिल जाता है। और पूरी परिवार की भावी पीढ़ी के लिए एक सुरक्षा का कवच बन जाता है। यह कोई एक टुकड़ा नहीं है। यह आपके बच्चों के भविष्य का एक मजबूत नीव है। आप जब हमारे चाय बागान के लोगों को मिलते हैं तो उनके अंदर इन विषयों की क्या चर्चा होती है? वो क्या कहते हैं?

अर्जुन जी- मोदी जी पहले तो जो आपके इतिहास जो सिद्धांत है जो चाय बागान के लोग 200 साल से असम में रह रहा था वो आपके ये सिद्धांत के लिए बहुत-बहुत आभारी है और ये जो चाय बागान के मदद भाइयों बहनों को पिता को जो जमीन का अधिकार मिला है उसमें वो लोग बहुत खुश है। कांग्रेस के समय में जब उन लोगों को बगान में जब किसी समस्या का विषय में बोला जाता था तो उस समय में वो लोग बोलता था यह कुंभानी करेंगे हम लोग करने वाला नहीं है। सिर्फ उन लोगों का भूत समय नहीं याद पड़ता था। नहीं तो उन्नयन के दिख में उन उन्नति के दिख में चाहे जनगष्ठी जो आदिवासी भाई बहन है उसको याद नहीं करता था। यह जमीन का जो अधिकार मिला है, इसमें हम लोगों का माता-पिता भाइयों बहनों आपसे बहुत खुश है और आपसे बहुत आभार व्यक्त करते हैं मोदी जी।

पीएम- अर्जुन जी मुझे बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके। आप लोगों को पता ही है कुछ दिन पहले ही जब मैं गुवाहाटी आया था तब एक बड़ा प्रोग्राम हुआ था। उसमें टी गार्डन के साथियों को भूमि पट्टे सौंपने का अवसर मिला था। और जब एक चाय वाले को चाय बागान के लोगों को भूमि के पट्टे देने का जो आनंद होता है ना वह अद्भुत होता है जो मुझे था। अच्छा जब भी हम चाय बागानों के बारे में बात करते हैं तो देश के हर नागरिक को असम की चाय पर गर्व होता है। असम वालों को तो स्वाभाविक है डबल गर्व होता है। इसलिए टी गार्डन में काम करने वाले परिवारों को हम उसी गौरव के भाव से देखते हैं।

साथियों,

अगले कुछ दिनों में आपको एक और काम करना है। चाय बागानों में जो बूथ है वहां के कार्यकर्ता एक दिन किसी चाय के बागान में ही टी गार्डन वर्कर्स की एक टिफिन बैठक करिए या फिर चाय पर चर्चा कीजिए। ये सब क्या कहते हैं? खुलकर के उनको सुनिए। और पुराने उनकी क्या मुसीबतें थी? कैसे उनको असहाय छोड़ दिया गया था। कंपनियों के भरोसे जीने के लिए मजबूर कर दिया था। यह सारी बातें पुराने लोग बताएंगे और उसमें नई पीढ़ी को भी बिठाइए। बीते 10 सालों में सरकार ने बहुत कुछ किया है। लेकिन अभी भी हमसे लोगों को बहुत सारी अपेक्षाएं हैं।

जब आप उनकी बात सुनेंगे और हमें भी उससे नया काम करने का उत्साह मिलेगा। उनको भी विश्वास होगा कि उनकी बात सरकार तक पहुंच रही है और इसके कारण हम कर भी पाएंगे। हमको बताइए कि जो भूमि दस्तावेज है यह केवल कागज का टुकड़ा नहीं है। यह हजारों परिवारों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी है। यह काम बीजेपी सरकार इसलिए कर रही है ताकि चाय बागान में कठिन परिश्रम करने वाले साथियों को सम्मान का जीवन मिले। इन साथियों को जमीन का पट्टा मिलने से कौन-कौन सी योजना का लाभ मिलेगा? इसकी पूरी सूची उन्हें बताइए। एक काम आप और कर सकते हैं। आप पश्चिम बंगाल में जो टी गार्डन के साथी है उनकी खराब स्थिति के बारे में जानकारी दें। वहां बीजेपी सरकार नहीं है। बंगाल की सरकार तो केंद्र की योजनाओं तक चाय बागान के साथियों तक नहीं पहुंचने देती। पता नहीं उनकी क्या दुश्मनी है। यह दिखाता है कि डबल इंजन की बीजेपी सरकार कितनी जरूरी है। अगर सिर्फ कोई असम के टी गार्डन के काम और बंगाल के टी गार्डन के काम कंपैरिजन करेंगे तो सब कहेंगे कि असम के टी गार्डन के लोगों के लिए बहुत काम हुआ है और बंगाल के टी गार्डन के लोगों के लिए कुछ नहीं हुआ है। तो लोगों को फर्क साफ-साफ नजर आएगा। अर्जुन जी बहुत अच्छा लगा। मैं समझता हूं कि आप लोग चुनाव के काम में बहुत व्यस्त है। मुझे ज्यादा समय लेना नहीं चाहिए। आखिर में कुछ बातें मैं जरूर बताना चाहता हूं और उसके बाद हमारा ये ऑडियो ब्रिज का कार्यक्रम पूरा करेंगे।

सारे प्रदेश के हजारों कार्यकर्ताओं से आज मैं बात कर रहा हूं। जिन पांच साथियों से बात की है, वह एक प्रकार से आपके ही प्रतिनिधि है। मतलब कि मैं असम के हजारे छोटे-मोटे सब कार्यकर्ताओं के साथ बात कर रहा हूं। और आपसे जो बातें सुनी उसमें जो आपने जो विश्वास जताया है. यह सुनने वाले किसी का भी विश्वास और मजबूत कर देता है। और अब यह तय है कि इस बार असम वोटिंग के रिकॉर्ड तो तोड़ेगा ही। हमें विजय के भी नए रिकॉर्ड बनाना है। और विजय के नए रिकॉर्ड बनाना है तो उसकी पहली शर्त है बूथ में नए रिकॉर्ड बनाना। ज्यादा से ज्यादा मतदान का रिकॉर्ड। मतदान करने वाले लोग भाजपा के लिए वोट करें, एनडीए के लिए वोट करें। यह पक्का करना चाहिए। असम के कोने-कोने से एक ही आवाज सुनाई दे रही है। आखो ए बार बीजेपी सरकार

आपने बीते 10 11 वर्षों में बार-बार शानदार काम किया है। बीजेपी के हर कार्यकर्ता ने अपने दायित्व को हर बार अच्छे से निभाया है। एनडीए के हर साथी के साथ मिलकर आपने हर उम्मीदवार को विजय बनाने की भरपूर मेहनत की है। अब मतदान के लिए बहुत कम समय है। इसलिए आने वाले 8-10 दिनों में आपको दिन रात जुड़ना है। पहले मतदान फिर जलपान यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। देखिए साथियों आप ही मेरे हाथ, पैर, कान, नाक आप ही सब है मेरे लिए तो आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा इन दिनों गर्मी बहुत है। पानी बहुत पीजिए। आप कितनी मेहनत क्यों ना करें लेकिन पानी का बोतल साथ ही रखिए। पानी जरूर पीजिए ताकि आप इस समय इस गर्मी में के समय में इतनी दौड़ धूप में कोई कठिनाई पैदा ना हो। एक बार फिर आप सभी को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।