શેર
 
Comments

The global economic environment remains uncertain and challenging. Recovery is still fragile despite improved prospects. 

In an environment of political conflict and persisting weakness in major economies; we have to be watchful for signs of a new bout of financial turmoil. 

Developments in Iraq and the wider region could affect this. I am also concerned that tight monetary policies in some countries couldundercut investment and growth in ours.

An open, rule-based, international trading regime is critical for global economic growth.

It must address the aspirations of the developing world. 

It must also accommodate the special needs of the most vulnerable sections of our societies, especially in areas such as food security. 

This is our broad expectation from the negotiations in the Doha Round of WTO. 

Excellencies, 

The Agreement towards setting up the BRICS New Development Bank is a significant step. I am happy, the initiative announced at the BRICS Summit in New Delhi in 2012, has become a reality. 

The agreement on the BRICS Contingent Reserve Arrangement is another major achievement. 

I compliment our Finance Ministers for concluding these two initiatives so quickly. 

These initiatives are rooted in our own experience as developing countries. 

They show our capacity to set up global institutions. 

They will open new avenues for supporting development in our countries as well as helping other developing nations. 

We should ensure these institutions establish a new model for supporting growth and stability. 

Excellencies, the theme of this Summit is also the guiding principle of my Government. For us, inclusion is a special challenge and responsibility; given our vast social, regional and economic diversity.

Our policies will focus on empowering people with skills and opportunities.

We will invest heavily in infrastructure, affordable housing, healthcare,education and clean energy.

We will harness all possibilities that advanced technologies open up.

All this will require fast-tracking of Growth. 

We will champion, clean and frugal resource use; to maintain the Sustainabilityof our development process, without constraining our growth. 

Sustainability has in fact been a core element of the Indian way of life. As Mahatma Gandhi had said, the World has enough, for everyone’s Need, but not for everyone’s Greed. We can all partake of the bounty of nature. However, exploitation of nature is a crime.

We have made progress, on the Millennium Development Goals. But widespread poverty still haunts us. 

We must keep poverty eradication at the centre of the post-2015 Development Agenda. 

It is important to shape the global discourse on the same, especially in forums like the UN. BRICS can be a major voice on the world stage to build consensus towards such efforts.

Excellencies, 

BRICS is in a position today where it wields enough horizontal influence to compel the world to take notice.

Our own good, however, lies in deepening our bonds vertically. 

We must focus on further decentralizing, this powerful forum. 

We must go beyond Summit and Leader-centric deliberations; and champion Sub-national Level exchanges. We must encourage engagement between our States, Cities and other local bodies. 

BRICS should in fact be truly driven by ‘People to People’ contact. Our Youth, in particular, must take a lead in this. 

Popularizing our languages through dedicated BRICS language schoolsin all BRICS countries could be a beginning in this direction. 

We could also consider establishing Massive Open Online Courses for making quality education accessible to all.

We could even explore the idea of a BRICS University. 

Today, technology is a transformative toolin every area of social and economic development. 

The vast pool of talent in BRICS could be combined to cooperate in areas like: health, education, agriculture, resource management and urban development. 

Perhaps a Young Scientists’ Forum of BRICS Countries could be explored.

Other initiatives could include: 

An affordable healthcare platform of BRICS nations. 

Mechanism to further cooperation, between our Small and Medium enterprises.

And, a common framework for promoting Tourism among BRICS countries.

I am aware of the comprehensive proposals that our Chinese and Russian partners have put forward to deepen BRICS cooperation. 

Our Sherpas should examine them urgently.

Let us deepen our bonds to make BRICS a stronger instrument of progress, for all mankind.

Thank you

Share your ideas and suggestions for 'Mann Ki Baat' now!
Explore More
પ્રધાનમંત્રીએ 76મા સ્વતંત્રતા દિવસના પ્રસંગે લાલ કિલ્લાની પ્રાચીર પરથી દેશને કરેલાં સંબોધનનો મૂળપાઠ

લોકપ્રિય ભાષણો

પ્રધાનમંત્રીએ 76મા સ્વતંત્રતા દિવસના પ્રસંગે લાલ કિલ્લાની પ્રાચીર પરથી દેશને કરેલાં સંબોધનનો મૂળપાઠ
How Direct Benefit Transfer Became India’s Booster During Pandemic, and Why World Bank is in Awe

Media Coverage

How Direct Benefit Transfer Became India’s Booster During Pandemic, and Why World Bank is in Awe
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Our government dedicates the project for which we lay the foundation stone: PM Modi in Himachal Pradesh
October 05, 2022
શેર
 
Comments
PM dedicates AIIMS Bilaspur to the nation
PM inaugurates Government Hydro Engineering College at Bandla
PM lays foundation stone of Medical Device Park at Nalagarh
PM lays foundation stone of project for four laning of National Highway worth over Rs 1690 crores
“Fortunate to have been a part of Himachal Pradesh's development journey”
“Our government definitely dedicates the project for which we lay the foundation stone”
“Himachal plays a crucial role in 'Rashtra Raksha', and now with the newly inaugurated AIIMS at Bilaspur, it will also play pivotal role in 'Jeevan Raksha'”
“Ensuring dignity of life for all is our government's priority”
“Happiness, convenience, respect and safety of women are the foremost priorities of the double engine government”
“Made in India 5G services have started, and the benefits will be available in Himachal very soon”

जै माता नैणा देविया री, जै बजिए बाबे री।

बिलासपुरा आल्यो...अऊं धन्य ओइ गया, आज्ज...मिंजो.....दशैरे रे, इस पावन मौके पर, माता नैणा देविया रे, आशीर्वादा ने, तुहाँ सारयां रे दर्शना रा सौभाग्य मिल्या! तुहाँ सारयां जो, मेरी राम-राम। कने एम्स री बड़ी-बड़ी बदाई।

हिमाचल के राज्यपाल श्री राजेंद्र आर्लेकर जी, हिमाचल के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान जयराम ठाकुर जी, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम सबके मार्गदर्शक और इसी धरती की संतान, श्रीमान जेपी नड्डा जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी और हमारे सांसद श्री अनुराग ठाकुर जी, हिमाचल भाजपा के अध्यक्ष और संसद में मेरे साथी सुरेश कश्यप जी, संसद में मेरे साथी किशन कपूर जी, बहन इंदु गोस्वामी जी, डॉ सिकंदर कुमार जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद और विधायकगण, और भारी संख्या में हम सबको आशीर्वाद देने के लिए पधारे हुए मेरे प्‍यारे भाइयों और बहनों ! आप सभी को, संपूर्ण देशवासियों को विजयादशमी के अवसर पर अनंत-अनंत शुभकामनाएं।

ये पावन पर्व, हर बुराई से पार पाते हुए, अमृतकाल के लिए जिन पंच प्राणों का संकल्प देश ने लिया है, उन पर चलने के लिए नई ऊर्जा देगा। मेरा सौभाग्य है कि विजयादशमी पर हिमाचल प्रदेश के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और इंफ्रास्ट्रक्चर के हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स, इसका उपहार देने का अवसर मिला है। और ये भी देखिए संयोग, विजयादशमी हो और विजय का रणसिंहा फूंकने का अवसर मिले, ये भविष्‍य के हर विजय का आगाज ले करके आया है। बिलासपुर को तो शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का डबल गिफ्ट मिला है। कहलूरा री... बंदले धारा ऊप्पर, हाइड्रो कालेज ... कने थल्ले एम्स... हुण एथी री पहचान हूणी !

भाइयों और बहनों,

यहां विकास योजनाओं को आपको सौंपने के बाद, जैसा जयराम जी ने बताया, एक और सांस्कृतिक विरासत का साक्षी बनने जा रहा हूं और बहुत वर्षों बाद मुझे एक बार फिर कुल्लू दशहरे का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिलेगा। सैकड़ों देवी-देवताओं के साथ भगवान रघुनाथ जी की यात्रा में शामिल होकर मैं देश के लिए भी आशीर्वाद भी मांगूंगा। और आज जब यहां बिलासपुर आया हूं तो पुरानी यादें ताजा होना बहुत स्‍वाभाविक है। वो भी एक वक्‍त था, यहां पैदल टहलते थे। कभी मैं, धूमल जी, नड्डा जी, पैदल यहां बाजार से निकल पड़ते थे। हम एक बहुत बड़ा रथयात्रा का कार्यक्रम लेकर भी यहां बिलासपुर की गलियों से गुजरे थे। और तब स्वर्ण जयंती रथयात्रा यहां से होकर और वो भी मेन मार्केट से निकली थी और वहां जनसभा हुई थी। और अनेक बार मेरा यहां आना हुआ, आप लोगों के बीच रहना हुआ है।

हिमाचल की इस भूमि पर काम करते हुए मुझे निरंतर हिमाचल की विकास यात्रा का सहयात्री बनने का अवसर मिला है। और मैं अभी सुन रहा था, अनुराग जी बड़े जोर-जोर से बोल रहे थे, ये मोदी जी ने किया, ये मोदी जी ने किया, ये मोदी जी ने कहा। हमारे नड्डा जी भी कह रहे थे, ये मोदी जी ने किया, ये मोदी जी ने किया और हमारे मुख्‍यमंत्री जयराम जी भी कह रहे थे, मोदी जी ने किया, मोदी जी ने किया। लेकिन मैं सच्‍चाई बता दूं, सच्‍चाई बता दूं किसने किया, बता दूं? ये जो कुछ भी हो रहा है ना, वो आपने किया है। आपके कारण हुआ है। अगर आप दिल्‍ली में सिर्फ मोदी जी को आशीर्वाद देते और हिमाचल में मोदी जी के साथियों को आशीर्वाद न देते तो ये सारे कामों में वो अड़ंगे डाल देते। ये तो जयराम जी और उनकी टीम है कि जो काम दिल्‍ली से मैं लेकर आता हूं, उसको तेजी गति से ये लोग दौड़ाते हैं, इसलिए हो रहा है। और ये अगर एम्‍स बना है तो आपके एक वोट की ताकत है, अगर टनल बना है तो आपके एक वोट की ताकत है, हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बना है तो ये आपके वोट की ताकत है, अगर मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहा है तो ये भी आपके एक वोट की ताकत है। और इसलिए आज मैं हिमाचल की अपेक्षाओं को ध्‍यान में रखते हुए एक के बाद एक विकास के काम कर रहा हूं।

विकास को लेकर हमने देश में लंबे समय तक एक विकृत सोच को हावी होते देखा है। ये सोच क्या थी? अच्छी सड़कें होंगी तो कुछ राज्यों और कुछ बड़े शहरों में होंगी, दिल्‍ली के आसपास होंगी। अच्छे शिक्षण संस्थान होंगे, तो बहुत बड़े-बड़े शहरों में होंगे। अच्छे अस्पताल होंगे वो तो दिल्‍ली में ही हो सकता है, बाहर हो ही नहीं सकता है। उद्योग-धंधे लगेंगे तो भी बड़ी-बड़ी जगह पर लगेंगे, और विशेषकर देश के पहाड़ी प्रदेशों में मूल सुविधाएं तक सबसे अंत में, कई-कई बरसों के इंतज़ार के बाद पहुंचती थीं। उस पुरानी सोच का नतीजा ये हुआ कि इससे देश में विकास का एक बड़ा असंतुलन पैदा हो गया। इस वजह से देश का एक बड़ा हिस्‍सा, वहां के लोग असुविधा में, अभाव में रहे।

पिछले 8 वर्षों में देश अब उस पुरानी सोच को पीछे छोड़कर, नई सोच, आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। अब देखिए, लंबे समय तक, और मैं तो जब यहां आता था, मैं लगातार देखता था, यहां एक यूनिवर्सिटी से ही गुज़ारा होता था। और इलाज हो या फिर मेडिकल की पढ़ाई, IGMC शिमला और टाटा मेडिकल कॉलेज पर ही निर्भरता थी। गंभीर बीमारियों का इलाज हो या फिर शिक्षा या रोज़गार, चंडीगढ़ और दिल्ली जाना तब हिमाचल के लिए मजबूरी बन गया था। लेकिन बीते आठ वर्षों में हमारी डबल इंजन की सरकार ने हिमाचल की विकास गाथा को नए आयाम पर पहुंचा दिया है। आज हिमाचल में सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी है, आईआईटी भी है, ट्रिपल आईटी भी है, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी हैं। देश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य का सबसे बड़ा संस्थान, एम्स भी अब बिलासपुर और हिमाचल की जनता की आन-बान-शान बढ़ा रहा है।

बिलासपुर एम्स एक और बदलाव का भी प्रतीक है और एम्‍स के अंदर भी ये ग्रीन एम्‍स के नाम से जाना जाएगा, पूरी तरह पर्यावरण प्रेमी एम्‍स, प्रकृति प्रेमी एम्‍स। अभी हमारे सभी साथियों ने बताया पहले सरकारें शिलान्यास का पत्थर लगाती थीं और चुनाव निकलने के बाद भूल जाती थीं। आज भी हिमाचल में जाओगे, हमारे धूमल जी ने एक बार कार्यक्रम किया था, कहां-कहां पत्‍थर पड़े हैं ढूंढने का, और ढेर सारे ऐसे कार्यक्रम जहां पत्‍थर पड़े थे, काम नहीं हुआ था।

मुझे याद है मैं एक बार रेलवे का रिव्‍यू कर रहा था, आपके ऊना के पास एक रेलवे लाइन बिछानी थी। 35 साल पहले निर्णय हुआ था, 35 साल पहले। पार्लियामेंट में घोषणा हुई थी, लेकिन फिर फाइल बंद। हिमाचल को कौन पूछेगा भाई। लेकिन ये तो हिमाचल का बेटा है और हिमाचल को भूल नहीं सकता। लेकिन हमारी सरकार की पहचान है कि जिस प्रोजेक्ट का शिलान्यास करती है, उसका लोकार्पण भी करती है। अटकना, लटकना, भटकना, वो जमाना चला गया दोस्‍तों !

साथियों,

राष्ट्ररक्षा में हमेशा से हिमाचल का बहुत बड़ा योगदान रहा है, जो हिमाचल पूरे देश में राष्‍ट्र रक्षा के वीरों के लिए जाना जाता है वो हिमाचल अब इस एम्‍स के बाद जीवन रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। साल 2014 तक हिमाचल में सिर्फ 3 मेडिकल कॉलेज थे, जिसमें 2 सरकारी थे। पिछले 8 सालों में 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज हिमाचल में बने हैं। 2014 तक अंडर और पोस्टग्रेजुएट मिलाकर सिर्फ 500 विद्यार्थी पढ़ सकते थे, आज ये संख्या 1200 से अधिक, यानि दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी है। एम्स में हर साल अनेक नए डॉक्टर बनेंगे, नर्सिंग से जुड़े युवा यहां ट्रेनिंग पाएंगे। और मुझे जयराम जी की टीम को, जयराम जी को, भारत सरकार के आरोग्‍य मंत्री और आरोग्‍य मंत्रालय को विशेष रूप से बधाई देनी है। जब नड्डा जी आरोग्‍य मंत्री थे, उस समय हमने निर्णय किया तो नड्डा जी के जिम्‍मे बहुत बड़ा दायित्‍व आ गया, मैं शिलान्‍यास भी कर गया। इसी कालखंड में कोरोना की भयंकर महामारी आई और हम जानते हैं हिमाचल के लोग तो हिमाचल में कोई भी कंस्‍ट्रक्‍शन का काम करता है तो कितना मुश्किल होता है, एक-एक चीज पहाड़ पर लाना, कितना दिक्‍कत भरा होता है। जो काम नीचे एक घंटे में होता है, उसको यहां पहाड़ों में करने के लिए एक दिन लग जाता है। उसके बावजूद भी, कोरोना की कठिनाई के बावजूद भी भारत सरकार का आरोग्‍य मंत्रालय और जयराम जी के राज्‍य सरकार की टीम ने मिल करके जो काम किया, आज एम्‍स मौजूद है, एम्‍स काम करने लग गया है।

मेडिकल कॉलेज ही नहीं, हम एक और दिशा में आगे बढ़े, दवाओं और जीवन रक्षक टीकों के निर्माता के रूप में भी हिमाचल की भूमिका का बहुत अधिक विस्तार किया जा रहा है। बल्क ड्रग्स पार्क के लिए देश के सिर्फ तीन राज्‍यों को चुना गया है, और उसमें से एक कौन सा राज्‍य है भाई, कौन सा राज्‍य है? हिमाचल है, आपको गर्व हो रहा है‍ कि नहीं हो रहा है? ये आपके बच्‍चों के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य का शिलान्‍यास है कि नहीं है? ये आपके बच्‍चों के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य की गारंटी है कि नहीं है? हम काम बड़ी मजबूती से करते हैं और आज की पीढ़ी के लिए भी करते हैं, आने वाली पीढ़ी के लिए भी करते हैं।

उसी प्रकार से मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए 4 राज्यों को चुना गया है, जहां आज मेडिकल में टेक्‍नोलॉजी का भरपूर उपयोग हो रहा है। विशिष्‍ट प्रकार के औजारों की जरूरत पड़ती है, उसको बनाने के लिए देश में चार राज्‍य चुने गए हैं। इतना बड़ा हिन्‍दुस्‍तान, इतनी बड़ी जनसंख्‍या, हिमाचल तो मेरा छोटा सा राज्‍य है, लेकिन ये वीरों की धरती है और मैंने यहां की रोटी खाई है, मुझे कर्ज भी चुकाना है। और इसलिए चौथा मेडिकल डिवाइस पार्क कहां बन रहा है, ये चौथा मेडिकल डिवाइस पार्क कहां बन रहा है- आपके हिमाचल में बन रहा है दोस्तों। दुनिया भर के बड़े-बड़े लोग यहां आएंगे। नालागढ़ में ये मेडिकल डिवाइस पार्क का शिलान्यास इसी का हिस्सा है। इस डिवाइस पार्क के निर्माण के लिए हज़ारों करोड़ रुपए का निवेश यहां होगा। इससे जुड़े अनेक छोटे और लघु उद्योग आस-पास विकसित होंगे। इससे यहां के हज़ारों युवाओं को रोज़गार के अवसर मिलेंगे।

साथियों,

हिमाचल का एक पक्ष और है, जिसमें यहां विकास की अनंत संभावनाएं छिपी हुई हैं। ये पक्ष है मेडिकल टूरिज्म का। यहां की आबो-हवा, यहां का मौसम, यहां का वातावरण, यहां की जड़ी-बूटियां, यहां का अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयुक्त वातावरण। आज भारत मेडिकल टूरिज्म को लेकर दुनिया का एक बहुत बड़ा आकर्षण केंद्र बन रहा है। जब देश और दुनिया के लोग हिन्‍दुस्‍तान में मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए आना चाहेंगे तो यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इतना बढ़िया है कि वे यहां आएंगे, एक प्रकार से उनके लिए आरोग्‍य का लाभ भी होगा और पर्यटन का भी लाभ होने वाला है। हिमाचल के तो दोनों हाथ में लड्डू हैं।

साथियों,

केंद्र सरकार का प्रयास है कि गरीब और मध्यम वर्ग का इलाज, उस पर खर्च कम से कम हो, ये इलाज भी बेहतर मिले और इसके लिए उसको दूर तक जाना भी न पड़े। इसलिए आज एम्स मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों में क्रिटिकल केयर सुविधाओं और गांवों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाने पर एक seamless connectivity पर हम काम कर रहे हैं। उस पर बल दिया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत हिमाचल के अधिकतर परिवारों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

इस योजना के तहत अभी तक देशभर में 3 करोड़ 60 लाख गरीब मरीज़ों का मुफ्त इलाज हो चुका है, और इसमें से डेढ़ लाख तो लाभार्थी ये मेरे हिमाचल के मेरे परिवारजन हैं। देश में इन सभी साथियों के इलाज पर सरकार अब तक 45 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है। अगर आयुष्मान भारत योजना ना होती तो इसका करीब दोगुना यानि लगभग 90 हज़ार करोड़ रुपए ये जो मरीज लोग थे, उन परिवारों को अपनी जेब से देना पड़ता। यानि इतनी बड़ी बचत भी गरीब और मध्‍यम वर्ग के परिवार को बेहतरीन इलाज के साथ मिली है।

साथियों,

मेरे लिए एक और संतोष की बात है। सरकार की इस प्रकार की योजनाओँ का सबसे अधिक लाभ हमारी माताओं को, बहनों को, बेटियों को मिला है। और हम तो जानते हैं, हमारी मां-बहनों का स्‍वभाव होता है, कितनी ही तकलीफ हो, शरीर में कितनी ही पीड़ा होती हो, लेकिन वो परिवार में किसी को बताती नहीं हैं। वो सहन करती भी हैं, काम भी करती हैं, पूरे परिवार को संभालती भी हैं, क्‍योंकि उसके मन में रहता है कि अगर बीमारी का पता परिवार के लोगों को लगेगा, बच्‍चों को लगेगा तो वो कर्ज कर-करके भी मेरा उपचार कराएंगे, और मां सोचती है, अरे बीमारी में ही थोड़ा समय निकाल दूंगी, लेकिेन बच्‍चों पर कर्ज नहीं होने दूंगी, मैं अस्‍पताल जाकर खर्च नहीं करूंगी। इन माताओं की चिंता कौन करेगा? क्‍या मेरी माताएं इस प्रकार की यातनाएं चुपचाप सहती रहें। ये बेटा किस काम का है, और उसी भावना से आयुष्‍मान भारत योजना का जन्‍म हुआ है। ताकि मेरी माताओं-बहनों को बीमारी से गुजारा न करना पड़े। जीवन में इस मजबूरी से जीना न पड़े। आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभ लेने वाली माताएं-बहनें 50 प्रतिशत से ज्‍यादा हैं। हमारी माताएं-बहनें और बेटियां हैं।

साथियों,

चाहे शौचालय बनाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान हो, मुफ्त गैस कनेक्शन देने के लिए उज्ज्वला योजना हो, मुफ्त सैनेटेरी नैपकिन देने का अभियान हो, मातृवंदना योजना के तहत हर गर्भवती महिला को पोषक आहार के लिए हज़ारों रुपए की मदद हो, या फिर अब हर घर जल पहुंचाने का हमारा अभियान हो, ये सारा मेरी माताओं-बहनों को सशक्‍त करने वाले काम हम एक के बाद एक करते चले जा रहे हैं। माताओं-बहनों-बेटियों का सुख, सुविधा, सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य डबल इंजन की सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है।

केंद्र सरकार ने जो भी योजनाएं बनाई हैं, उनको जयराम जी और उनकी पूरी टीम ने, उनकी सरकार ने बहुत तेज गति से और बड़ी स्पिरिट के सा‍थ उसको ज़मीन पर उतारा है और उनका दायरा भी बढ़ाया है। हर घर नल से जल पहुंचाने का काम यहां कितना तेज़ी से हुआ है, ये हम सभी के सामने है। पिछले 7 दशकों में जितने नल कनेक्शन हिमाचल में दिए गए हैं, उससे दोगुने से भी अधिक सिर्फ बीते 3 साल में दे चुके हैं हम, मिल चुके हैं लोगों को। इन तीन वर्षों में साढ़े 8 लाख से अधिक नए परिवारों को पाइप के पानी की सुविधा मिली है।

भाइयों और बहनों,

जयराम जी और उनकी टीम की एक और मामले में देश बहुत अधिक प्रशंसा कर रहा है। ये प्रशंसा सामाजिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के प्रयासों को विस्तार देने के लिए हो रही है। आज हिमाचल का शायद ही कोई परिवार ऐसा हो, जहां किसी ना किसी सदस्य को पेंशन की सुविधा न मिलती हो। विशेष रूप से जो साथी बेसहारा हैं, जिनको गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया है, ऐसे परिवारों को पेंशन और इलाज के खर्च से जुड़ी सहायता के प्रयास सराहनीय है। हिमाचल प्रदेश के हजारों परिवारों को वन-रैंक वन-पेंशन लागू होने से भी बड़ा लाभ हुआ है।

साथियों,

हिमाचल अवसरों का प्रदेश है। और मैं जयराम जी को और एक बधाई देता हूं। वैक्‍सीनेशन का काम तो पूरे देश में चल रहा है, लेकिन आपकी जिंदगी की सुरक्षा के लिए हिमाचल देश का वो पहला प्रदेश है, जिसने शत-प्रतिशत वैक्‍सीनेशन का काम पूरा कर लिया है। होती है, चलती है, वाला मामला नहीं, ठान लिया है तो करके रहना है।

यहां बिजली पैदा होती है हाइड्रो से, फल-सब्ज़ी के लिए उपजाऊ ज़मीन है और रोज़गार के अनंत अवसर देने वाला पर्यटन यहां पर है। इन अवसरों के सामने बेहतर कनेक्टिविटी का अभाव सबसे बड़ी रुकावट थी। 2014 के बाद से हिमाचल प्रदेश में बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास हो रहा है। आज हिमाचल की सड़कों को चौड़ा करने का काम भी चारों तरफ चल रहा है। हिमाचल में इस समय कनेक्टिविटी के कामों पर लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। पिंजौर से नालागढ़ हाईवे के फोरलेन का काम जब पूरा हो जाएगा, तब औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ और बद्दी को तो लाभ होगा ही, चंडीगढ़ और अम्बाला से बिलासपुर, मण्डी और मनाली की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी सुविधा बढ़ने वाली है। यही नहीं, हिमाचल के लोगों को घुमावदार रास्तों से मुक्ति दिलाने के लिए सुरंगों का जाल भी बिछाया जा रहा है।

साथियों,

डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर भी हिमाचल में अभूतपूर्व काम हुआ है। पिछले 8 वर्षों में मेड इन इंडिया मोबाइल फोन सस्ते भी हुए और गांव-गांव में नेटवर्क भी पहुंचा है। बेहतर 4G कनेक्टिविटी के कारण हिमाचल प्रदेश डिजिटल लेनदेन में भी बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। डिजिटल इंडिया का सबसे अधिक लाभ सबसे अधिक किसी को हो रहा है तो मेरे हिमाचल के भाइयों-बहनों को हो रहा है, मेरे हिमाचल के नागरिकों को हो रहा है। वरना बिल भरने से लेकर बैंक से जुड़े काम हों, एडमिशन हो, एप्लीकेशन हो, ऐसे हर छोटे-छोटे काम के लिए पहाड़ से नीचे उतर करके दफ्तरों में जाना, एक-एक दिन लगता था, कभी रात को रुकना पड़ता था। अब तो देश में पहली बार मेड इन इंडिया 5G सेवाएं भी शुरू हो चुकी हैं, जिसका लाभ हिमाचल को भी बहुत जल्दी मिलने वाला है।

भारत ने ड्रोन को लेकर जो नियम बनाये, बदले हैं, उसके बाद और मैं हिमाचल को इसके लिए भी बधाई देता हूं, देश में सबसे पहला राज्‍य हिमाचल है, जिसने राज्‍य की ड्रोन पॉलिसी बनाई है। अब ड्रोन से ट्रांसपोर्टेशन के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ने वाला है। और इसमें किन्‍नौर तक के हमारे अगर आलू भी हैं, तो हम वहां से ड्रोन से उठा करके बड़ी मंडी में तुरंत ला सकते हैं। हमारे फल खराब हो जाते थे, ड्रोन से उठा करके ला सकते हैं। अनेक प्रकार के लाभ आने वाले दिनों में होने वाले हैं। इसी प्रकार का विकास, जिससे हर नागरिक की सुविधा बढ़े, हर नागरिक समृद्धि से जुड़े, इसके लिए हम प्रयासरत हैं। यही विकसित भारत, विकसित हिमाचल प्रदेश के संकल्प को सिद्ध करेगा।

मुझे खुशी है विजयादशमी के पावन पर्व पर विजय नाद करने का अवसर मिला और मुझे रणसिंहा फूंक करके विजय का आगाज करने का अवसर‍ मिला और यह सब आप सबके इतने आशीर्वाद के बीच करने का अवसर मिला। मैं फिर एक बार एम्‍स सहित सभी विकास परियोजनाओं के लिए आप लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। दोनों मुट्ठी बंद करके मेरे साथ बोलिए-

भारत माता की–जय। पूरी ताकत से आवाज चाहिए-

भारत माता की–जय

भारत माता की–जय

भारत माता की–जय

बहुत-बहुत धन्यवाद!