उद्योग जगत के सभी वरिष्‍ठ महानुभाव

मैं जेट्रो का आभारी हूं, निक्‍केइ का आभारी हूं, कि मुझे आज आप सबके साथ बातचीत करने का सौभाग्‍य मिला है। मैं जब यहां आ रहा था तो, ये सभी वरिष्‍ठ महानुभाव मुझे बता रहे थे और बड़े आश्‍चर्य के साथ बता रहे थे कि हमारे इतने सालों में इतना बड़ा गैदरिंग पहली बार हुआ है। मुझे कह रहे थे कि 4000 लोगों ने अप्‍लाई किया था, लेकिन हमारे पास एकोमोडेशन पूरी नहीं होने के कारण आधे लोगों को निराश करना पड़ा है। ये इस बात का संकेत है कि अब जैसे भारत ‘लुक ईस्‍ट’ पालिसी लेकर चल रहा है, वैसे जापान ‘लुक एट इंडिया’ इस मूड में आगे बढ़ रहा है।

जब वाजपेयी जी भारत के प्रधानमंत्री थे और एक्‍सीलेंसी मोरी जी यहां प्रधानमंत्री थे, तब से यह रिश्‍ता बड़ा सघन बना। मेरा भी सौभाग्‍य रहा, मैं पहले भी आया। मैंने हर बार देखा कि जापान जिस प्रकार की कार्य संस्‍कृति का आदी है, जापान जिस प्रकार के गवर्नेंस का आदी है, जापान ने जिस प्रकार से इफीशिएंसी और डिसीप्लिन को आत्‍मसात किया है, अगर उस इन्‍वायरमेंट को प्रोवाइड करते हैं तो जापान को भारत में भी अपनापन महसूस होगा।

तब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, 2007 में, मैं यहां आया। जो बातें आप से सीखीं ,समझी, देखी, उसको मैंने भली-भांति वहां लागू किया था। 2012 में आया, मैंने दुबारा उसको और बारीकी से देखा फिर उसको लागू किया। आज परिणाम यह हुआ कि जब मैं भारत के प्रधानमंत्री के रूप में आपके बीच आया हूं, तब मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, कि आपको जापान के बाहर कहीं नजर डालनी है तो, मुझे नहीं लगता है कि अब आपको इधर-उधर देखने की जरूरत है।

अब एक ऐसी जगह है, जो आपकी चिर-परिचत है। सांस्‍कृतिक रूप से तो चिर-परिचित है, लेकिन अब अपने आप के विस्‍तार के लिए, अपने आप को ग्रो करने के लिए, आप जिस जगह की तलाश में हैं, मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मैं आपको निमंत्रण देता हूं, शायद भारत से बढ़कर के आप के अनुकूल कोई जगह नहीं है। ये मैं विश्‍वास दिलाने आया हूं।

मुझे अभी सरकार में सिर्फ 100 दिन हुए हैं। एक्‍सीलेंसी मोरी जी के साथ भी मेरा संबंध बहुत पुराना है और प्रधानमंत्री आबे जी के साथ भी बहुत पुराना संबंध है। पिछले तीन दिनों में मैंने देखा है कि जापान का भारत के साथ जुड़कर के अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं। उसमें हमारा विश्‍वास पक्‍का हो गया है। कल का हमारा ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट आपने देखा है। मैं समझता हूं, किसी भी जापान के उद्योगकार के लिए भारत में आकर के कार्य प्रारंभ करना, इससे बड़ा स्‍ट्रांग मैसेज कोई नहीं हो सकता है। मेरी सरकार बनने के बाद मैने एक विजन के रूप में लोगों के सामने रखा है, ‘मेक इन इंडिया’।

मैं छोटा था, तो कोई कहता था ‘मेड इन जापान’, तो हम लागों का मन करता था कि कुछ देखने की जरूरत नहीं है कि किस शहर में बना है, किस कंपनी में बना है। ले लो, ये प्रतिष्‍ठा थी। हम ‘मेक इन इंडिया’ कह रहे हैं, इसका मतलब यह है कि हम ऐसा इन्‍वायरमेंट आपको देना चाहते हैं, कि आपकी वैश्विक मांग है, जो आपके प्रोडक्‍ट की, उस वैश्विक मांग को अगर पूरा करना है तो आज जापान, जो कि हाई कॉंस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग की ओर चल पड़ा है, आपकी पूरी इकोनोमी हाई कॉस्‍ट एंड वाली बनती जा रही है। इसलिए आपके लिए बहुत अनिवार्य है कि लो कॉम्‍स्‍ट मैन्‍यूफैचरिंग की संभावनाएं हों। ‘ईज़ आफ बिजनेस’ का वातावरण हो। स्किल्‍ड क्‍वालिटी मैनपावर अवेलेबल हो।

तो मैं विश्‍वास से कहता, जो दस साल में मिरेकल आप जापान में रह कर के आपकी कंपनी का करते हैं, आप वो मिरेकल दो साल के भीतर-भीतर हिन्‍दुस्‍तान में कर सकते हैं। इतनी संभावनाओं का वो देश है आप विश्‍व में अपने प्रोडक्‍ट को अगर पहुंचाना चाहते हैं, और कंपीटिटिव भी मार्केट है। अगर विश्‍व में अगर प्रोडक्‍ट पहुंचाना चाहते हो तो, इट इज ए गॉड गिफ्टेड लोकेशन है, इंडिया का। हमारा बहुत ही वाइब्रेंट सी कोस्‍ट है, वहीं से आप वेस्‍टर्न पार्ट आफ दि वर्ल्‍ड, मिडिल ईस्‍ट से लेकर, आगे कहीं भी जाना है, मैं समझता हूं, इससे बढ़कर कोई सुविधा नहीं होती है।

जब सुजूकि, मारूति उद्योग के संबंध में लोग, मुझसे मिलने आते थे, तो मैंने उन्हे एक हिसाब समझाया था। मैंने कहा- आप गुड़गांवां में कार बनाते हैं और एक्‍सपोर्ट करते हैं, तो समुद्र तट पर जाने में आपकी कार को जाने में 9000 रुपए का खर्च लगता है। लेकिन समुद्र तट पर यदि आप गाड़ी बनाओगे तो हर कार पर आपका 9000 रुपए बच जाएगा। तो उन्‍होनें कहा कि मुझे तो यह व्‍यापारिक गुर किसी ने सिखाया ही नहीं और वह एक बात ऐसी थी कि उनको निर्णय करने में क्लिक कर गई।

पिछले दिनों में मैंने इतने वहां पर इतने महत्‍वपूर्ण निर्णय किये, जैसे – डिफेंस के सेक्‍टर में। एक समय था, मेरे यहां इतने सारे रिस्‍ट्रीक्‍शंस थे, डिफेंस इक्विपमेंट मैन्यूफैक्‍चरिंग में, यदि डिफेंस के लिए एक मुझे ट्रक चाहिए तो वो भी डिफेंस के रूल्‍स एवं रेगुलेशन के रिस्ट्रिक्‍शंस में पड़े हुए थे। हमने इन 100 दिन के अंदर-अंदर करीब-करीब 55 प्रतिशत ऐसी चीजों को उस सारी कानूनी व्‍यवस्‍था से बाहर निकाल दिया। हमने कहा कि आइए, ये सब आप जैसे सामान्यत: कोई भी चीज आप प्रोड्यूस करते हैं, आप कर सकते हैं और डिफेंस उसका परचेज करेगा। हमारा बहुत बड़ा मार्केट विदिन इंडिया है। डिफेंस मैन्‍यूफैक्‍चरिग सेक्‍टर में अगर आप आते हैं, तो मुझे विश्‍वास है कि आप न सिर्फ भारत की आवश्‍यकताएं, बल्कि विश्‍व के अनेक छोटे-छोटे देश हैं, जिनकी रिक्‍वायरमेंट को पूरा करने का, ऐसी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग का काम आप हिंदुस्‍तान की धरती पर कर सकते हैं।

आपको जानकर के हैरानी होगी, भारत की पहचान साफ्टवेयर में है। हमारे टैलेंट, हमारे नौजवान साफ्टवेयर के क्षेत्र में बहुत बड़ी पहचान बनायी है। आपने हार्डवेयर में अपनी ताकत बनायी है। लेकिन साफ्टवेयर हार्डवेयर के बिना अधूरा है। हार्डवेयर साफ्टवेयर के बिना अधूरा है। भारत जापान के बिना अधूरा है, जापान भारत के बिना अधूरा है।

अगर हार्डवेयर इंडस्‍ट्री, भारत आपको निमंत्रण देता है। भारत के टैलेंट का साफ्टवेयर, आपकी बुद्धिमानी और मेहनत और बिजनेस एक्‍सीलेंस के कारण तैयार हुआ हार्डवेयर। अगर ये मेलजोल हो जाए, आप विश्‍व के अंदर बहुत बड़ा मिरेकल कर सकते हैं। मैंने देखा है कि स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज का एक बड़ा नेटवर्क ऐसा है, कि जो हार्डवेयर की दिशा में काम कर रहा है।

आज भारत का अपना इंपोर्ट इतना है। हमारा आज सबसे बड़ा इंपोर्ट पेट्रोलियम और आयल सेक्‍टर का है। हमारा एक अनुमान है कि 2020 में हमारा सबसे ज्‍यादा इंपोर्ट इलेक्‍ट्रानिक्‍स गुड्स का होने वाला है। आप कल्‍पना कर सकते हैं, कितना बड़ा मार्केट है। जापान का व्‍यापारी इंतजार करेगा क्‍य ? इतना बड़ा मार्केट आपका इंतजार कर रहा है। अगर आपका वहां लो कॉस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग होता है, आपको इफिशिएंट गवर्नेंस की अनुभूति होती है। मैं विश्‍वास से कहता हूं कि आपकी स्थिति बदल जाएगी।

आमतौर पर भारत की पहचान यह बन जाती है कि छोड़ो यार, वहां रेड टैप है। पता नहीं सरकारी कारोबार में कब गाड़ी चलेगी। मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, आज भारत में रेड टैप नहीं, रेड कार्पेट है और रेड कार्पेट आपका इंतजार कर रही है।

हमने ईज़ आफ बिजनेस के लिए इतने सारे नए रेगुलेशन्‍स को लिबरल कर दिया है। शायद विश्‍व में इतनी तेज गति से लिबरलाइज मूड में, सारे हमारे पुराने रूल्‍स और रेगुलेशन्‍स में परिवर्तन लाने का किसी एक सरकार ने काम किया हो तो आज हिंदुस्‍तान की सरकार है। आखिरकार व्‍यापारी को, उद्योगकार को, इंवेस्‍टर को एक सिक्‍युरिटी चाहिए। उसको प्रोपरली ग्रो करने के लिए एक इन्‍वायरामेंट चाहिए।

आज भारत, किसी को भी आकर के ग्रो करने के लिए प्रोपर इन्‍वायरामेंट के लिए, बहुत तेज गति से आगे चल रहा है। जहां तक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का सवाल है, अब कभी, जो भी आज भारत में हमारे साथ काम करते हैं, और जिन्‍होंने गुजरात में मेरे साथ काम किया है, कई उद्योगकार हैं, जिन्‍होंने मेरे साथ काम किया है। जिस गति से हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्रोवाइड करने के लिए व्‍यवस्‍थाएं करते हैं, जिस गति से हम निर्णय करते हैं। मैं नहीं मानता हूं कि आज किसी भी उद्योगकार को उसके लिए कठिनाई हो सकती है।

आप कल्‍पना कर सकते हैं, हिंदुस्‍तान के आज 50 से अधिक छोटे शहर ऐसे हैं, जो मेट्रो रेल के लिए कतार में खड़े हैं। 50 शहरों में मेट्रो ट्रेन लगना, यानी इस फील्‍ड में काम करने वाले लोगों के लिए किसी एक देश में इतना बड़ा बिजनेस कभी सोचा है आपने ? इतना बड़ा बिजनेस अ‍बेलेबल है। आप कितना सारा काम वहां पर कर सकते हैं। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, और खास करके हम एस एम ईज को पोत्‍साहन देना चाहते हैं। स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज को हम इंवाइट करना चाहते हैं। ताकि जॉब क्रिएशन भी हो, मास स्‍केल पर प्रोडक्‍शन भी हो और एक ऐसी हेल्‍दी कंपीटिशन हो, जिसके कारण क्‍वालिटी प्रोडक्‍शन पर बल मिले। इसलिए मैं आप सबसे आग्रह करने आया हूं कि आप आइए। और कल भी मैंने एक जगह कहा था, 21वीं सदी एशिया की सदी है। मतलब क्‍या है ? इसका मतलब ये है कि विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र ये बनने वाला है।

विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनने वाला है तो कहां बनेगा ? मैं देख रहा हूं, आज विश्‍व के लोगों को तीन बातों के लिए शायद कोई एक जगह पर ऑपरच्‍युनिटी हो, वैसी विश्‍व में कोई जगह नहीं है। एक स्‍थान पर तीन ऑपरच्‍युनिटी, एक – डेमोक्रेसी, दूसरा – डेमोग्राफी, तीसरा – डिमांड। ये एक ही जगह ऐसी है, जहां डेमोक्रेसी है, जहां पर डिमांड है और जहां पर 65 प्रतिशत पोपुलेशन बिलो 35 एज ग्रुप की है, डेमोग्राफिक डिवीजन। तीनों जगह एक स्‍थान पर हो, वैसी विश्‍व में एक भी जगह नहीं नहीं है और डेमोक्रेसी सेफ्टी, सिक्‍योरिटी एंड जस्टिस की गारंटी देती है।

आखिरकर बाहर के व्‍यक्ति को ये चीजें चाहिए, जो हम प्रोवाइड करते हैं। उसी प्रकार से, किसी भी उद्योगकार को, मैन्‍यूफैचरर को यंग ब्रेन चाहिए, यंग माइंड चाहिए, यंग पोपुलेशन चाहिए। उत्‍साह-उमंग से भरी हुई जवानी, अगर उसके हाथ में स्किल हो तो मिरेकल कर देती है। भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। और डिमांड, आप कल्‍पना कर सकते हैं, सवा सौ करोड़ देशवासी कितना बड़ा मार्केट है। अकेले हिंदुस्‍तान के मार्केट को आप सर्व करें तो भी आज जहां है, वहां से अनेक गुना आपकी कंपनी ग्रो कर जाएगी। एक ऐसी सरकार आई है जो विकास के मुद्दे पर काम कर रही है। मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सैक्‍टर को हम बढ़ावा देना चाहते हैं।

हमारे 100 दिन का रिकॉर्ड देखिए आप। सिर्फ 100 दिन में हमारा जो जीडीपी था, 4.4 - 4.5 - 4.6 पर लुढ़क रहा था। पिछले ढ़ाई-तीन साल में जो हमने अचीव नहीं किया था, वह 100 दिन में कर दिया और 5.7 प्रतिशत का जीडीपी अचीव कर लिया। यह बताता है कि हमारी जो निर्णय हैं, हमारी जो पालिसीज हैं, ‘ईज़ आफ बिजनेस’ की हमारी जो सोच है, उसके कारण ये परिणाम मिल रहे हैं। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देता हूं कि आप आइए, हम सब मिल करके एशिया की पीस और प्रोग्रेस की गारंटी के लिए, जापान और भारत को कंधे से कंधा मिला कर के जितना आगे बढ़ने की जरूरत है। उसी प्रकार से हमने एशिया की समृधि के लिए, भारत जैसे देश की समृधि की दिशा में मिलकर के प्रयास करने की आवश्‍यकता है।

मैं आप सबको निमंत्रण देता हूं। आप भारत आइए। अपना नसीब आजमाइए। अपना कौशल्‍य आजमाइए। भारत पूरी तरह आपका स्‍वागत करने के लिए तैयार है। मुझे दुबारा एक बार यहां आने का मौका मिला। बार-बार मैं जेट्रो में आता हूं। मैं जब गुजरात में था तो एक जेट्रो का आफिस भी मेरे यहां मैंने खोल दिया था और हमारे कुछ मित्र हैं जो अब गुजराती बोलना भी सीख गए हैं।

मैं बारीक-बारीक चीजों का केयर करने वाला इंसान हूं। मैं जानता हूं कि ‘ईज़ आफ बिजनेस’ के लिए जितनी छोटी-छोटी चीजें, अगर दो चीजें आप भी ध्‍यान में लाएंगे तो हम तुरंत उसको करने के पक्ष में रहते है। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देने आया हूं। फिर से आपने मुझे बुलाया, इतनी बड़ी संख्‍या में आपका यहां आना, ये बताता है कि आपका हिंदुस्‍तान के प्रति कितना विश्‍वास बढ़ा है। आपकी हिंदुस्‍तान के प्रति कितनी रूचि बढ़ी है और हिंदुस्‍तान और जापान मिलकर के एक नया इतिहास आर्थिक विकास के क्षेत्र में निर्माण कर सकते हैं। इस पूरे विश्‍वास के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

थैंक यू,थैंक यू वैरीमच।

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July 09, 2026

I would like to begin by acknowledging the traditional owners of the land on which we meet and I pay my respects to their elders past, present and emerging.

वणक्कम मेलबन
नमस्कार माइट्स !
कैसे हैं आप?
केम छो?

ये शो हाउसफुल है, ब्लॉक-बस्टर है।

मैं अपना भाषण शुरू करूँ इससे पहले विक्टोरिया के प्रीमियर और मेरे मित्र प्रधानमंत्रीजी के सम्मान में आप सब अपने मोबाइल फ़ोन का फ्लैशलाइट जलाके इनको सम्मानित कीजिये।

साथियों,

इससे पहले मैं दो बार सिडनी में आपसे मिला था, मेलबन वालों से मिलने का मुझे भी इंतजार था, इसलिए सोचा इस बार मेलबन वालों के साथ फ्लैट व्हाइट कॉफी पीता हूं।

साथियों,

जिस एनर्जी से आप सभी ने हमारे ऑसी फ्रेंड्स ने हम सभी को वेलकम किया है वो और भी Amazing है। मेलबन ने एक तरह से मैदान मार लिया है।

साथियों,

मैं, मेरे मित्र, भारत के मित्र, प्राइम मिनिस्टर एंथनी अल्बनीसी का भी आभारी हूं। आप सिडनी में भी साथ थे, और आज यहां मेलबन में भी, भारतीय कम्यूनिटी के बीच आए हैं। और ये एक प्रकार से फुल सर्कल हो गया है।

अमदाबाद जहां दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड है, और मेलबन, जहां iconic स्टेडियम है हम दोनों साथ रहे हैं। और साथियों हम सभी ने देखा है प्राइम मिनिस्टर अल्बनीसी जब बोलते हैं तो भारतीयों के दिल और दिमाग में छा जाते हैं। सिडनी में भी आपने धूम मचाई थी और यहां भी आप छा गए।

मैं विक्टोरिया के प्रीमियर का भी उनके ऊर्जा भरे शब्दों केलिए, भारत के प्रति इतने स्नेह से उन्होंने जो कहा उसके लिये उनका भी आभार व्यक्त करता हूँ।

साथियों,

मैं जब साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया आया था तो 28 साल के बाद, भारत का कोई पीएम यहां पहुंचा था। और आप याद कीजिए तब मैंने कहा था कि अब आपको 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

पिछले 12 वर्षों में मैं तीसरी बार यहां आया हूं यानि इस बार हैट्रिक लगी है। ये दिखाता है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते किस उंचाईं पर हैं। और जानते हैं इसमें सबसे बड़ी भूमिका किसकी है? मोदी की नहीं, इसमें आप सभी साथियों की भूमिका है, इंडियन डायस्पोरा की भूमिका है।

साथियों,

कहते हैं कि मेलबन शहर एक दिन में ही चार सीज़न के दर्शन करा देता है। लेकिन भारतीय समुदाय ने अपने कल्चरल कलर्स से इसको और वाइब्रेंट बना दिया है।

यहां मेलबन में और आसपास काफी ऐसे स्थान हैं, ऐसे मार्केट्स हैं, जो भारतीयता के रंगों से भरे हैं। कोई उन्हें लिटिल इंडिया कहता है, कोई मिनी इंडिया कहता है, नाम जो भी हों, लेकिन रंग भारतीयता से भरे हैं।

ऐसे ही एक मार्केट का वीडियो किसी ने मुझे दिखाया। वीडियो में बता रहे थे, कि वहां खूब सेल चलती रहती है। इस सेल के चक्कर में, लोग घनचक्कर बन जाते हैं। शॉपिंग का मूड न भी हो, तो भी खरीदारी करनी ही पड़ती है। मैं सही कह रहा हूं?

साथियों,

आप में से कई साथी, फर्स्ट टाइम ऑस्ट्रेलिया आए, और कइयों का जन्म भी यहीं हुआ, पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन भीतर की भारतीयता हमेशा ज़िंदा रहती है। यहां कई सारे साथी ऐसे होंगे जिनके घर में कम से कम दो Time Zone चलते हैं? यहाँ बच्चे स्कूल से घर, ऑस्ट्रेलियन टाइम के हिसाब से आते हैं, लेकिन भारत में दादा-दादी, नाना-नानी, Video Call पर इंतज़ार कर रहे होते हैं। यहाँ Weekend होता है, तो भारत में किसी शादी की Live Streaming चल रही होती है। यानी, दूरी हज़ारों किलोमीटर की है, लेकिन Daily Routine, आज भी भारत से जुड़ा हुआ है। और इस रुटीन के साथ आप सभी ऑस्ट्रेलिया के विकास में पूरी शक्ति से जुटे हुए हैं। मुझे आप सब पर गर्व है।

साथियों,

हम भारतीय ऐसे ही हैं, जैसे दूध में चीनी मिल जाती है, उसे और मीठा कर देती है, वैसे ही हम भारतीय दुनिया में अपने प्रेम का रंग घोलते रहते हैं।

घर में दूध, ऑस्ट्रेलिया वाला आता है, लेकिन चाय भारत वाली बनती है। दाल-सब्ज़ियाँ ऑस्ट्रेलिया की हैं लेकिन उनमें तड़का देसी मसालों का लगता है।

साथियों,

आपने सुना होगा भारत में आजकल भजन क्लबिंग का नया ट्रेंड चल रहा है। इसको हमारी gen-ज़ी ड्राइव कर रही है। और यहां ऑस्ट्रेलिया में भी मैंने सुना है कि आपका वीकेंड आस्था, और आध्यात्म से भरा रहता है।

कहीं किसी के घर भगवान सत्यनारायण की कथा, कहीं गुरुद्वारे में अरदास, कहीं बच्चों द्वारा भांगड़ा या भरतनाट्यम की प्रस्तुति, कहीं कोई क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा होता है।

और अब तो, Indian Film Festival भी यहां आ गया है। कुछ दिन बाद ही मेलबन में इंडियन फिल्म फेस्टिवल शुरु होने वाला है। मैं इसके सफल आयोजन की आपको अभी से शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

आप सभी, ऑस्ट्रेलिया की ग्रोथ को अपने परिश्रम से सींच रहे हैं। लेकिन मैं जानता हूं कि आपकी एक नज़र भारत पर लगातार रहती है। भारत क्या कर रहा है, भारत की प्रगति, भारत की गति, इसकी खोज खबर आप लेते रहते हैं।

साथियों,

21वीं सदी का भारत आज विकसित होने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। एक सपना पूरा होता है, तो नया सपना जन्म ले लेता है।

पहले कहते थे, एक दीप से जले दूसरा, जलते दीप हज़ार। आज में कहता हूँ, एक सपने से जन्मे दूसरा, सपने जन्मे हज़ार। एक लक्ष्य पूरा होता है तो उससे भी बड़ा संकल्प सामने आता है।

ये वो भारत है, जो कहता है- Grow More Achieve More.

हम 140 करोड़ Aspirations से भरे राष्ट्र हैं, हम अधीर हैं, बेसब्र हैं, हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकॉनॉमी हैं, लेकिन हम जल्द से जल्द दुनिया की टॉप थ्री इकॉनॉमी बनना चाहते हैं। क्योंकि हमारी प्रेरणा है- Grow More Achieve More.

साथियों,

आपने भी देखा है, भारत ने मून के साउथ पोल पर चंद्रयान लैंड कराया। दुनिया में कोई और देश ऐसा नहीं कर सका। लेकिन भारत इतने भर से संतुष्ट नहीं हुआ क्योंकि भारत कहता है Grow More Achieve More.

इसलिए साथियों, भारत अब स्पेस में अपना गगनयान भेजने की तैयारी कर रहा है, भारत अब अपना स्पेस स्टेशन बनाने के लक्ष्य पर चल रहा है।

साथियों,

कुछ साल पहले तक, 5G टेक्नॉलॉजी को लेकर बड़े सवाल देश के सामने थे? कब लॉन्च होगी, कैसे रोलआउट होगी, कितना समय लग जाएगा? हमने 2022 के अंत में 5G रोलआउट करना शुरु किया, और आज भारत के Ninety nine percent district इससे कवर्ड हो चुके हैं। और आपको खुशी होगी दोस्तों, भारत 5G का Fastest rollout करने वाले देशों में से एक है।

आज भारत, दुनिया का दूसरा बड़ा 5G मार्केट बन चुका है। औऱ इतना ही नहीं, भारत आज मेड इन इंडिया 6G टेक्नॉलॉजी पर भी तेज़ी से काम कर रहा है। वो इसलिए, क्योंकि भारतीय कहते हैं, Grow More Achieve More.

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में, भारत के दो दर्जन से अधिक शहरों में मेट्रो नेटवर्क पहुंच चुका है। आज भारत में हर दिन सवा करोड़ से अधिक लोग मेट्रो में सफर करते हैं। भारत, दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश है। लेकिन हम भारतीय इससे भी संतुष्ट नहीं है, हम कहते हैं- Grow More Achieve More.

इसलिए हम भारत में नमो भारत रैपिड रेल, और वंदे भारत जैसे सेमी हाईस्पीड नेटवर्क को तेज़ी से बढ़ा रहे हैं।

एक और उदाहरण मेक इन इंडिया का है। बीते 12 वर्ष में, मेक इन इंडिया ग्लोबल ब्रांड बना। हमारे मोबाइल फोन, हमारे इलेक्ट्रॉनिक्स, दुनियाभर में पहुंचे। हमारे ऑटोमोबील, हमारे फार्मा प्रोडक्ट्स का ग्लोबली और विस्तार हुआ। भारत के डिफेंस प्लेटफॉर्म की कैपेबिलिटी और क्रेडबिलिटी, दुनिया देख रही है।

आपने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, डेमो तो देख ही लिया होगा। धमाके, आतंकियों के अड्डों पर हो रहे थे, और गूंज, पूरी दुनिया में सुनाई दे रही थी। टैरर कैंप्स पर इस करारे प्रहार से आपको गर्व हुआ या नहीं?

साथियों,

भारत इतने पर ही रुकना नहीं चाहता, भारत कह रहा है Grow More Achieve More. इसलिए, आज चिप से लेकर शिप तक, मैन्युफेक्चरिंग का भारत में एक नया इकोसिस्टम डवलप किया जा रहा है।

साथियों,

भारत के बड़े सपनों, बड़ी एस्पिरेशन्स की नींव है। भारत का नागरिक, We the people और इन सपनों को एनर्जी दे रहा है। People first, यानि नागरिक देवो भव का मंत्र। ये आज के भारत की गवर्नेंस का मूल मंत्र बन गया है।

मैं आपको अटेस्टेशन का उदाहरण देता हूं। अटेस्टेशन की मजबूरी, कुछ साल पहले तक बहुत कॉमन हुआ करती था। यानि कुछ भी करना हो, कहीं भी अप्लाई करना हो, अपने डॉक्यूमेंट किसी अधिकारी से अटेस्ट कराने पड़ते थे।

कतार में खड़ा रहना पड़ता था सुबह सुबह। ये बताने के लिए कि, हां तुम वही हो। हमारे लिए तो नागरिक देवो भव। अब ये स्थिति नहीं है। अब ज्यादातर काम सेल्फ अटेस्टेशन से ही चल जाता है।

वहां से जो यात्रा शुरू हुई, वो भारत में डिजी-लॉकर तक पहुंच गई है। एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था, जिसमें भारतीय, अपने डॉक्यूमेंट्स Digi फॉर्मेट में रख सकते हैं। इसमें एक क्लिक में डॉक्यूमेंट Share होता है। Verify होता है। Accept होता है।

साथियों,

व्यवस्था बनाना एक चीज है, उसे स्केल और सिक्योर फीचर के साथ बनाना, बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। आप जानते हैं कि आज भारत में डिजीलॉकर के कितने यूज़र हैं? मैं जानता हूँ, यह आंकड़ा याद रखना थोड़ा कठिन है।

इस वक्त तक, 70 करोड़ यानि 700 मिलियन से ज्यादा डिजिलॉकर यूज़र हैं। और इनमें, 850 करोड़ से अधिक डॉक्युमेंट्स स्टोर हैं। 850 करोड़ से अधिक।

साथियों,

नागरिक देवो भव का एक उदाहरण, हमारा हेल्थकेयर सिस्टम है। आज करोड़ों भारतीयों के पास, एक सिक्योर डिजिटल हेल्थ आईडी है। इसमें हेल्थ रिकॉर्ड्स की पूरी हिस्ट्री डिजिटली स्टोर होती है। इससे भारत में, डाइअग्नोसिस और बेहतर हो रहा है। और इससे इलाज की व्यवस्था और सुधर रही है।

यही नहीं टेलिकंसल्टेशन का चलन भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का एक ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म है, इससे अभी तक 48 करोड़ यानि 480 मिलियन टेली-कंसलटेशन्स हो चुकी हैं। इस प्लेटफॉर्म से सवा दो लाख से अधिक हेल्थकेयर प्रोवाइडर जुड़े हैं।

साथियों,

एक जमाने में आप सभी ने पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां भी सही होंगी। आप याद कीजिए, कितने हफ्ते लगते थे पासपोर्ट बनने में? लेकिन आज पासपोर्ट औसतन कुछ ही दिनों में मिल जाता है। यही सिटिजन फर्स्ट गवर्नेंस है। यही नागरिक देवो भव के मंत्र की सफलता है।

साथियों,

मैं अक्सर एक बात कहता हूं, भारत का सामर्थ्य जितना बढ़ता है, उसका फायदा, पूरी मानवता को होता है। हमारे संस्कार हैं- सर्वे भवन्तु सुखिन: यानि सब सुखी रहें। यही शाश्वत संस्कार आज भी भारत की पॉलिसीज़ और एक्शन्स को प्रेरित करते हैं।

साथियों,

अभी पिछले महीने ही वेनज़ुएला में भूकंप की इतनी बड़ी त्रासदी आई। कितना बड़ा विनाश हुआ। सैकड़ों लोगों की जान गई। हमने दूरी कितनी है देखा नहीं। हमने वेनज़ुएला की उस पीड़ा को अपनी पीड़ा समझा। भारत ने रिलीफ़ और rescue के लिए ऑपरेशन चलाया।

हमने जितनी तेज़ी से संभव हो सकता था, मदद भेजी, अपने एक्सपर्ट्स भेजे, हमारी मेडिकल टीम्स ने तेज़ी से काम शुरु किया। मुझे बहुत संतोष है, कि इससे अनेक ज़िंदगियां बच पाईं।

साथियों,

ऐसे ही तुर्किए और सीरिया में जब भूकंप आया, तब भी भारत ने बहुत तेज़ी से राहत और बचाव के लिए मदद भेजी। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, पिछले साल हमने म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा चलाया। श्रीलंका में साइक्लोन की तबाही हुई, तो वहां ऑपरेशन सागर बंधु चलाया।

साथियों,

कोरोनाकाल की यादें भी आज तक हमारे मन में ताजा हैं। हमने दुनियाभर से भारत के ही नहीं, अन्य देशों के नागरिकों को भी अपने-अपने घर पहुंचाया। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। ज़रूरतमंदों तक दवाएं पहुंचाईं, 100 से अधिक देशों को वैक्सीन्स भेजीं। युद्धक्षेत्रों में भी भारत ने, संकट में फंसे व्यक्तों को बाहर निकालने का प्रयास किया।

साथियों,

भारत जब मदद करता है, तो पासपोर्ट नहीं देखता, भारत जब मदद भेजता है, पासपोर्ट का रंग नहीं देखता। इसलिए, दुनिया भी भारत पर इतना विश्वास करती है।

साथियों,

मैं जानता हूं कि मानवता के हित में काम करने में ऑस्ट्रेलिया की भी बहुत बड़ी भूमिका है। ये हम दोनों देशों की पार्टनरशिप का एक अहम पिलर है।

और हम दोनों देशों की साझेदारी को, एक और सेक्टर मजबूती देता है। ये सेक्टर है—स्पोर्ट्स। स्पोर्ट्स की दुनिया में, ऑस्ट्रेलिया अपने आप में एक ब्रैंड है। लेकिन भारत में भी स्पोर्ट्स इकोसिस्टम ट्रांसफॉर्म हो रहा है।

साथियों,

आपने खेलो इंडिया मिशन का नाम सुना होगा। ये सिर्फ एक स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं है, ये अभियान स्कूल लेवल से ही हज़ारों खिलाड़ियों का एक पूल तैयार कर रहा है। भारत में स्कूल, यूनिवर्सिटी और नेशनल लेवल पर खेलो इंडिया गेम्स होते हैं, इनमें लाखों एथलीट्स पार्टिसिपेट करते हैं।

इस मिशन के तहत, भारत के रिमोट एरियाज़ में भी स्पोर्ट्स इंफ्रा तैयार किया जा रहा है। इससे ज्यादा से ज्यादा एथलीट्स को खासतौर पर हमारी बेटियों को ज्यादा अवसर मिल रहे हैं। और ये सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है सांसद खेल महाकुंभ जैसे आयोजनों से गांव-गांव में स्पोर्ट्स को, फिटनेस से जोड़ा जा रहा है, करियर ऑपॉर्चुनिटीज़ से कनेक्ट किया जा रहा है।

और ये जो कुछ भी हो रहा है, इसका इंपैक्ट फील्ड में दिख रहा है। भारत के एथलीट्स, भारत की टीम्स, Better से बेस्ट होती जा रही हैं।

साथियों,

यही कॉन्फिडेंस, भारत को स्पोर्टिंग लीग के नेक्स्ट लेवल पर ले जा रहा है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स, भारत होस्ट कर रहा है। भारत 2036 ओलंपिक्स को होस्ट करने का भी दावेदार है। मुझे पूरा विश्वास है, स्पोर्ट्स के क्षेत्र में भी ऑस्ट्रेलिया और भारत की पार्टनरर्शिप का और विस्तार होगा।

साथियों,

भारत और ऑस्ट्रेलिया, जो कुछ भी करते हैं, वो हम दोनों देशों के लिए भी शुभ होता है। इसका एक बड़ा उदाहरण, भारत-ऑस्ट्रेलिया ट्रेड एग्रीमेंट है। आपने वो शेर सुना होगा, आपको याद होगा:

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

ऐसे ही, भारत और ऑस्ट्रेलिया का एग्रीमेंट एक शुरुआत थी, और आज ये कारवां दुनिया के लगभग 40 देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स तक पहुंच चुका है।

साथियों,

हम केवल, ट्रेडिंग नेशन नहीं हैं, हम इनोवेशन को, साइंस एंड टेक्नॉलॉजी को महत्व देते हैं। ऑस्ट्रेलिया की अनेक उपलब्धियां हैं, Hearing implant, Wi-Fi, Cervical cancer vaccine, Flight Black Box, Secret Ballot Voting, ऐसे कितने ही innovations हैं जिनमें ऑस्ट्रेलिया का एक बड़ा रोल रहा है, और आज ये पूरी दुनिया को बेहतर बनाने के काम आ रहे हैं।

साथियों,

ऐसे ही भारत भी, अपने साइंस, टेक और इनोवेशन इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म कर रहा है। आपको ये जानकर खुशी होगी, आज भारत के 10 हज़ार स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स चल रही हैं। ये स्कूल लेवल पर ही, इनोवेशन का माइंटसेट तैयार कर रही हैं।

बीते 12 वर्षों में भारत दुनिया का तीसरा बड़ा स्टार्ट अप इकोसिस्टम बन गया है। लेकिन मैं नंबर बताउंगा, तो आप भी हैरान रह जाएंगे। आप डेटा सुनना चाहेंगे, तो मैं बताऊं ?

आज भारत में 2 लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्ट अप्स हैं। भारत में हर महीने 4 हज़ार से ज्यादा नए स्टार्ट अप रजिस्टर हो रहे हैं। और डिफेंस और स्पेस जैसे सेक्टर्स में भी सैकड़ों स्टार्ट अप्स काम कर रहे हैं। इनके उदाहरण मैं इसलिए दे रहा हूं, क्योंकि ये सारे सेक्टर पहले भारत में बंद थे। कुछ साल पहले ही इनको प्राइवेट आंत्रप्रन्योरशिप के लिए खोला गया है। और आप देखिए भारत का एक स्पेस स्टार्ट-अप बहुत जल्द, अपने रॉकेट में, पहली बार सैटेलाइट्स लॉन्च करने जा रहा है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि एजुकेशन, स्किल, इनोवेशन में भारत और ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता और गहरा हो रहा है, और मजबूत हो रहा है। आज ऑस्ट्रेलिया में हज़ारों भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं। और अब ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटीज़, भारत में भी अपने कैंपस खोल रही हैं।

डीकिन और वुलोन्गोंग University के कैंपस शुरु हो चुके हैं। और भी ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटीज इस तरफ आगे बढ़ रही हैं। और ये केवल नए कैंपस खोलने तक की बात नहीं है, ये दुनिया को स्किल्ड, इनोवेटिव टैलेंट देने का ग्लोबल लीडरशिप तैयार करने का भी अभियान है।

साथियों,

भारत की इतनी सारी बातें मैंने आपके बीच की हैं। अब मैं आपसे एक आग्रह भी करूंगा। कुछ समय पहले हमने हमारी प्रवासी कम्युनिटी के बच्चों के लिए, भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। ये क्विज दुनिया को भारत की डायवर्सिटी से परिचित कराती है, और साथ ही, भारतीय कम्यूनिटी के परिवारों को अपनी विरासत से जोड़ती है। मुझे ये जानकर अच्छा लगा, कि इस साल ऑस्ट्रेलिया में बहुत सारे युवा साथियों ने इस कार्यक्रम के कर्टेन रेजर में पार्टिसिपेट किया है। अब इस कंप्टीशन के सिक्स्थ एडिशन की शुरुआत होने जा रही है। इस बार गेमीफ़ाइड मोड में बहुत से कंप्टीशन होने जा रहे हैं, मैं ऑस्ट्रेलिया में भारतीय कम्यूनिटी के सभी परिवारों से आग्रह करूंगा, कि इसमें जरूर हिस्सा लें। लेकिन साथ साथ आप ऑस्ट्रेलिया के दोस्तों को भी, आपके स्कूल में पढ़ने वाले साथियों को, कॉलेज में पढ़ने वाले साथियों को इस कंपटीशन में जरुर जोड़ें।

साथियों,

आप सभी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को मजबूत बनाने में बहुत मेहनत की है, बहुत योगदान दिया है। लेकिन आपका काम यहां खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यहां से आपकी ज़िम्मेदारियां और बढ़ गई हैं। अब भारत और ऑस्ट्रेलिया की पार्टनरशिप का एक अलग ही फेज़ शुरु हो रहा है।

इसलिए आप, ऐसे ही भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को जोश से भरते रहिए, चौके-छक्के मारते रहिए, आपकी सफलता में ही, भारत और ऑस्ट्रेलिया की सफलता है।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम के लिए प्राइम मिनिस्टर अल्बनीसी और आप सभी साथियों को मेरा एक बार फिर बहुत बहुत धन्यवाद।

भारत माता की जय!

वंदे मातरम!