उद्योग जगत के सभी वरिष्‍ठ महानुभाव

मैं जेट्रो का आभारी हूं, निक्‍केइ का आभारी हूं, कि मुझे आज आप सबके साथ बातचीत करने का सौभाग्‍य मिला है। मैं जब यहां आ रहा था तो, ये सभी वरिष्‍ठ महानुभाव मुझे बता रहे थे और बड़े आश्‍चर्य के साथ बता रहे थे कि हमारे इतने सालों में इतना बड़ा गैदरिंग पहली बार हुआ है। मुझे कह रहे थे कि 4000 लोगों ने अप्‍लाई किया था, लेकिन हमारे पास एकोमोडेशन पूरी नहीं होने के कारण आधे लोगों को निराश करना पड़ा है। ये इस बात का संकेत है कि अब जैसे भारत ‘लुक ईस्‍ट’ पालिसी लेकर चल रहा है, वैसे जापान ‘लुक एट इंडिया’ इस मूड में आगे बढ़ रहा है।

जब वाजपेयी जी भारत के प्रधानमंत्री थे और एक्‍सीलेंसी मोरी जी यहां प्रधानमंत्री थे, तब से यह रिश्‍ता बड़ा सघन बना। मेरा भी सौभाग्‍य रहा, मैं पहले भी आया। मैंने हर बार देखा कि जापान जिस प्रकार की कार्य संस्‍कृति का आदी है, जापान जिस प्रकार के गवर्नेंस का आदी है, जापान ने जिस प्रकार से इफीशिएंसी और डिसीप्लिन को आत्‍मसात किया है, अगर उस इन्‍वायरमेंट को प्रोवाइड करते हैं तो जापान को भारत में भी अपनापन महसूस होगा।

तब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, 2007 में, मैं यहां आया। जो बातें आप से सीखीं ,समझी, देखी, उसको मैंने भली-भांति वहां लागू किया था। 2012 में आया, मैंने दुबारा उसको और बारीकी से देखा फिर उसको लागू किया। आज परिणाम यह हुआ कि जब मैं भारत के प्रधानमंत्री के रूप में आपके बीच आया हूं, तब मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, कि आपको जापान के बाहर कहीं नजर डालनी है तो, मुझे नहीं लगता है कि अब आपको इधर-उधर देखने की जरूरत है।

अब एक ऐसी जगह है, जो आपकी चिर-परिचत है। सांस्‍कृतिक रूप से तो चिर-परिचित है, लेकिन अब अपने आप के विस्‍तार के लिए, अपने आप को ग्रो करने के लिए, आप जिस जगह की तलाश में हैं, मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मैं आपको निमंत्रण देता हूं, शायद भारत से बढ़कर के आप के अनुकूल कोई जगह नहीं है। ये मैं विश्‍वास दिलाने आया हूं।

मुझे अभी सरकार में सिर्फ 100 दिन हुए हैं। एक्‍सीलेंसी मोरी जी के साथ भी मेरा संबंध बहुत पुराना है और प्रधानमंत्री आबे जी के साथ भी बहुत पुराना संबंध है। पिछले तीन दिनों में मैंने देखा है कि जापान का भारत के साथ जुड़कर के अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं। उसमें हमारा विश्‍वास पक्‍का हो गया है। कल का हमारा ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट आपने देखा है। मैं समझता हूं, किसी भी जापान के उद्योगकार के लिए भारत में आकर के कार्य प्रारंभ करना, इससे बड़ा स्‍ट्रांग मैसेज कोई नहीं हो सकता है। मेरी सरकार बनने के बाद मैने एक विजन के रूप में लोगों के सामने रखा है, ‘मेक इन इंडिया’।

मैं छोटा था, तो कोई कहता था ‘मेड इन जापान’, तो हम लागों का मन करता था कि कुछ देखने की जरूरत नहीं है कि किस शहर में बना है, किस कंपनी में बना है। ले लो, ये प्रतिष्‍ठा थी। हम ‘मेक इन इंडिया’ कह रहे हैं, इसका मतलब यह है कि हम ऐसा इन्‍वायरमेंट आपको देना चाहते हैं, कि आपकी वैश्विक मांग है, जो आपके प्रोडक्‍ट की, उस वैश्विक मांग को अगर पूरा करना है तो आज जापान, जो कि हाई कॉंस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग की ओर चल पड़ा है, आपकी पूरी इकोनोमी हाई कॉस्‍ट एंड वाली बनती जा रही है। इसलिए आपके लिए बहुत अनिवार्य है कि लो कॉम्‍स्‍ट मैन्‍यूफैचरिंग की संभावनाएं हों। ‘ईज़ आफ बिजनेस’ का वातावरण हो। स्किल्‍ड क्‍वालिटी मैनपावर अवेलेबल हो।

तो मैं विश्‍वास से कहता, जो दस साल में मिरेकल आप जापान में रह कर के आपकी कंपनी का करते हैं, आप वो मिरेकल दो साल के भीतर-भीतर हिन्‍दुस्‍तान में कर सकते हैं। इतनी संभावनाओं का वो देश है आप विश्‍व में अपने प्रोडक्‍ट को अगर पहुंचाना चाहते हैं, और कंपीटिटिव भी मार्केट है। अगर विश्‍व में अगर प्रोडक्‍ट पहुंचाना चाहते हो तो, इट इज ए गॉड गिफ्टेड लोकेशन है, इंडिया का। हमारा बहुत ही वाइब्रेंट सी कोस्‍ट है, वहीं से आप वेस्‍टर्न पार्ट आफ दि वर्ल्‍ड, मिडिल ईस्‍ट से लेकर, आगे कहीं भी जाना है, मैं समझता हूं, इससे बढ़कर कोई सुविधा नहीं होती है।

जब सुजूकि, मारूति उद्योग के संबंध में लोग, मुझसे मिलने आते थे, तो मैंने उन्हे एक हिसाब समझाया था। मैंने कहा- आप गुड़गांवां में कार बनाते हैं और एक्‍सपोर्ट करते हैं, तो समुद्र तट पर जाने में आपकी कार को जाने में 9000 रुपए का खर्च लगता है। लेकिन समुद्र तट पर यदि आप गाड़ी बनाओगे तो हर कार पर आपका 9000 रुपए बच जाएगा। तो उन्‍होनें कहा कि मुझे तो यह व्‍यापारिक गुर किसी ने सिखाया ही नहीं और वह एक बात ऐसी थी कि उनको निर्णय करने में क्लिक कर गई।

पिछले दिनों में मैंने इतने वहां पर इतने महत्‍वपूर्ण निर्णय किये, जैसे – डिफेंस के सेक्‍टर में। एक समय था, मेरे यहां इतने सारे रिस्‍ट्रीक्‍शंस थे, डिफेंस इक्विपमेंट मैन्यूफैक्‍चरिंग में, यदि डिफेंस के लिए एक मुझे ट्रक चाहिए तो वो भी डिफेंस के रूल्‍स एवं रेगुलेशन के रिस्ट्रिक्‍शंस में पड़े हुए थे। हमने इन 100 दिन के अंदर-अंदर करीब-करीब 55 प्रतिशत ऐसी चीजों को उस सारी कानूनी व्‍यवस्‍था से बाहर निकाल दिया। हमने कहा कि आइए, ये सब आप जैसे सामान्यत: कोई भी चीज आप प्रोड्यूस करते हैं, आप कर सकते हैं और डिफेंस उसका परचेज करेगा। हमारा बहुत बड़ा मार्केट विदिन इंडिया है। डिफेंस मैन्‍यूफैक्‍चरिग सेक्‍टर में अगर आप आते हैं, तो मुझे विश्‍वास है कि आप न सिर्फ भारत की आवश्‍यकताएं, बल्कि विश्‍व के अनेक छोटे-छोटे देश हैं, जिनकी रिक्‍वायरमेंट को पूरा करने का, ऐसी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग का काम आप हिंदुस्‍तान की धरती पर कर सकते हैं।

आपको जानकर के हैरानी होगी, भारत की पहचान साफ्टवेयर में है। हमारे टैलेंट, हमारे नौजवान साफ्टवेयर के क्षेत्र में बहुत बड़ी पहचान बनायी है। आपने हार्डवेयर में अपनी ताकत बनायी है। लेकिन साफ्टवेयर हार्डवेयर के बिना अधूरा है। हार्डवेयर साफ्टवेयर के बिना अधूरा है। भारत जापान के बिना अधूरा है, जापान भारत के बिना अधूरा है।

अगर हार्डवेयर इंडस्‍ट्री, भारत आपको निमंत्रण देता है। भारत के टैलेंट का साफ्टवेयर, आपकी बुद्धिमानी और मेहनत और बिजनेस एक्‍सीलेंस के कारण तैयार हुआ हार्डवेयर। अगर ये मेलजोल हो जाए, आप विश्‍व के अंदर बहुत बड़ा मिरेकल कर सकते हैं। मैंने देखा है कि स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज का एक बड़ा नेटवर्क ऐसा है, कि जो हार्डवेयर की दिशा में काम कर रहा है।

आज भारत का अपना इंपोर्ट इतना है। हमारा आज सबसे बड़ा इंपोर्ट पेट्रोलियम और आयल सेक्‍टर का है। हमारा एक अनुमान है कि 2020 में हमारा सबसे ज्‍यादा इंपोर्ट इलेक्‍ट्रानिक्‍स गुड्स का होने वाला है। आप कल्‍पना कर सकते हैं, कितना बड़ा मार्केट है। जापान का व्‍यापारी इंतजार करेगा क्‍य ? इतना बड़ा मार्केट आपका इंतजार कर रहा है। अगर आपका वहां लो कॉस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग होता है, आपको इफिशिएंट गवर्नेंस की अनुभूति होती है। मैं विश्‍वास से कहता हूं कि आपकी स्थिति बदल जाएगी।

आमतौर पर भारत की पहचान यह बन जाती है कि छोड़ो यार, वहां रेड टैप है। पता नहीं सरकारी कारोबार में कब गाड़ी चलेगी। मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, आज भारत में रेड टैप नहीं, रेड कार्पेट है और रेड कार्पेट आपका इंतजार कर रही है।

हमने ईज़ आफ बिजनेस के लिए इतने सारे नए रेगुलेशन्‍स को लिबरल कर दिया है। शायद विश्‍व में इतनी तेज गति से लिबरलाइज मूड में, सारे हमारे पुराने रूल्‍स और रेगुलेशन्‍स में परिवर्तन लाने का किसी एक सरकार ने काम किया हो तो आज हिंदुस्‍तान की सरकार है। आखिरकार व्‍यापारी को, उद्योगकार को, इंवेस्‍टर को एक सिक्‍युरिटी चाहिए। उसको प्रोपरली ग्रो करने के लिए एक इन्‍वायरामेंट चाहिए।

आज भारत, किसी को भी आकर के ग्रो करने के लिए प्रोपर इन्‍वायरामेंट के लिए, बहुत तेज गति से आगे चल रहा है। जहां तक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का सवाल है, अब कभी, जो भी आज भारत में हमारे साथ काम करते हैं, और जिन्‍होंने गुजरात में मेरे साथ काम किया है, कई उद्योगकार हैं, जिन्‍होंने मेरे साथ काम किया है। जिस गति से हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्रोवाइड करने के लिए व्‍यवस्‍थाएं करते हैं, जिस गति से हम निर्णय करते हैं। मैं नहीं मानता हूं कि आज किसी भी उद्योगकार को उसके लिए कठिनाई हो सकती है।

आप कल्‍पना कर सकते हैं, हिंदुस्‍तान के आज 50 से अधिक छोटे शहर ऐसे हैं, जो मेट्रो रेल के लिए कतार में खड़े हैं। 50 शहरों में मेट्रो ट्रेन लगना, यानी इस फील्‍ड में काम करने वाले लोगों के लिए किसी एक देश में इतना बड़ा बिजनेस कभी सोचा है आपने ? इतना बड़ा बिजनेस अ‍बेलेबल है। आप कितना सारा काम वहां पर कर सकते हैं। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, और खास करके हम एस एम ईज को पोत्‍साहन देना चाहते हैं। स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज को हम इंवाइट करना चाहते हैं। ताकि जॉब क्रिएशन भी हो, मास स्‍केल पर प्रोडक्‍शन भी हो और एक ऐसी हेल्‍दी कंपीटिशन हो, जिसके कारण क्‍वालिटी प्रोडक्‍शन पर बल मिले। इसलिए मैं आप सबसे आग्रह करने आया हूं कि आप आइए। और कल भी मैंने एक जगह कहा था, 21वीं सदी एशिया की सदी है। मतलब क्‍या है ? इसका मतलब ये है कि विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र ये बनने वाला है।

विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनने वाला है तो कहां बनेगा ? मैं देख रहा हूं, आज विश्‍व के लोगों को तीन बातों के लिए शायद कोई एक जगह पर ऑपरच्‍युनिटी हो, वैसी विश्‍व में कोई जगह नहीं है। एक स्‍थान पर तीन ऑपरच्‍युनिटी, एक – डेमोक्रेसी, दूसरा – डेमोग्राफी, तीसरा – डिमांड। ये एक ही जगह ऐसी है, जहां डेमोक्रेसी है, जहां पर डिमांड है और जहां पर 65 प्रतिशत पोपुलेशन बिलो 35 एज ग्रुप की है, डेमोग्राफिक डिवीजन। तीनों जगह एक स्‍थान पर हो, वैसी विश्‍व में एक भी जगह नहीं नहीं है और डेमोक्रेसी सेफ्टी, सिक्‍योरिटी एंड जस्टिस की गारंटी देती है।

आखिरकर बाहर के व्‍यक्ति को ये चीजें चाहिए, जो हम प्रोवाइड करते हैं। उसी प्रकार से, किसी भी उद्योगकार को, मैन्‍यूफैचरर को यंग ब्रेन चाहिए, यंग माइंड चाहिए, यंग पोपुलेशन चाहिए। उत्‍साह-उमंग से भरी हुई जवानी, अगर उसके हाथ में स्किल हो तो मिरेकल कर देती है। भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। और डिमांड, आप कल्‍पना कर सकते हैं, सवा सौ करोड़ देशवासी कितना बड़ा मार्केट है। अकेले हिंदुस्‍तान के मार्केट को आप सर्व करें तो भी आज जहां है, वहां से अनेक गुना आपकी कंपनी ग्रो कर जाएगी। एक ऐसी सरकार आई है जो विकास के मुद्दे पर काम कर रही है। मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सैक्‍टर को हम बढ़ावा देना चाहते हैं।

हमारे 100 दिन का रिकॉर्ड देखिए आप। सिर्फ 100 दिन में हमारा जो जीडीपी था, 4.4 - 4.5 - 4.6 पर लुढ़क रहा था। पिछले ढ़ाई-तीन साल में जो हमने अचीव नहीं किया था, वह 100 दिन में कर दिया और 5.7 प्रतिशत का जीडीपी अचीव कर लिया। यह बताता है कि हमारी जो निर्णय हैं, हमारी जो पालिसीज हैं, ‘ईज़ आफ बिजनेस’ की हमारी जो सोच है, उसके कारण ये परिणाम मिल रहे हैं। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देता हूं कि आप आइए, हम सब मिल करके एशिया की पीस और प्रोग्रेस की गारंटी के लिए, जापान और भारत को कंधे से कंधा मिला कर के जितना आगे बढ़ने की जरूरत है। उसी प्रकार से हमने एशिया की समृधि के लिए, भारत जैसे देश की समृधि की दिशा में मिलकर के प्रयास करने की आवश्‍यकता है।

मैं आप सबको निमंत्रण देता हूं। आप भारत आइए। अपना नसीब आजमाइए। अपना कौशल्‍य आजमाइए। भारत पूरी तरह आपका स्‍वागत करने के लिए तैयार है। मुझे दुबारा एक बार यहां आने का मौका मिला। बार-बार मैं जेट्रो में आता हूं। मैं जब गुजरात में था तो एक जेट्रो का आफिस भी मेरे यहां मैंने खोल दिया था और हमारे कुछ मित्र हैं जो अब गुजराती बोलना भी सीख गए हैं।

मैं बारीक-बारीक चीजों का केयर करने वाला इंसान हूं। मैं जानता हूं कि ‘ईज़ आफ बिजनेस’ के लिए जितनी छोटी-छोटी चीजें, अगर दो चीजें आप भी ध्‍यान में लाएंगे तो हम तुरंत उसको करने के पक्ष में रहते है। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देने आया हूं। फिर से आपने मुझे बुलाया, इतनी बड़ी संख्‍या में आपका यहां आना, ये बताता है कि आपका हिंदुस्‍तान के प्रति कितना विश्‍वास बढ़ा है। आपकी हिंदुस्‍तान के प्रति कितनी रूचि बढ़ी है और हिंदुस्‍तान और जापान मिलकर के एक नया इतिहास आर्थिक विकास के क्षेत्र में निर्माण कर सकते हैं। इस पूरे विश्‍वास के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

थैंक यू,थैंक यू वैरीमच।

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ৰোজগাৰ মেলাত নিযুক্তি পত্ৰ বিতৰণৰ সময়ত প্ৰধানমন্ত্ৰীয়ে আগবঢ়োৱা ভাষণৰ পূৰ্ণপাঠ
May 23, 2026
India’s youth are playing a vital role in accelerating the journey towards a Viksit Bharat: PM
Rozgar Mela reflects our Government’s commitment to empowering the Yuva Shakti with new opportunities: PM
The world is excited by India’s youth and technological progress and today the global community wants to partner in India’s development journey: PM
Sectors like clean energy, critical minerals, green hydrogen, and sustainable manufacturing are advancing rapidly and partnerships in these areas are creating new opportunities: PM Modi
Every Indian is moving forward with the resolve of building a Viksit Bharat by 2047: PM Modi at Rozgar Mela
Today, Rapid transformation is clearly visible even in rural areas; Enhanced connectivity has opened new avenues for farmers, small traders, and students: PM
Viksit Bharat will be built by the efforts of such youth who view their work as a means of national service: PM Modi

বন্ধুসকল,

সমগ্ৰ দেশৰ হাজাৰ হাজাৰ যুৱক-যুৱতীৰ বাবে আজি এক অতি উল্লেখযোগ্য দিন। আজি ৫১ হাজাৰৰো অধিক যুৱক-যুৱতীয়ে চৰকাৰী চাকৰিৰ নিযুক্তি পত্ৰ লাভ কৰিছে। আজি আপোনালোক সকলোৱেই দেশৰ উন্নয়নৰ যাত্ৰাৰ মূল অংশগ্ৰহণকাৰী—দায়িত্বশীল অংশগ্ৰহণকাৰী হৈ পৰিছে। ৰে'লৱে, বেংকিং, প্ৰতিৰক্ষা, স্বাস্থ্য, শিক্ষা, আৰু বহু খণ্ডকে ধৰি বিভিন্ন খণ্ডত আপোনালোকে  নতুন দায়িত্ব গ্ৰহণ কৰিবলৈ ওলাইছে। আগন্তুক বছৰবোৰত আপোনালোকে  ‘উন্নত ভাৰত’ গঢ়ি তোলাৰ সংকল্পক বাস্তৱায়িত কৰাত গুৰুত্বপূৰ্ণ ভূমিকা ল’বলৈ সাজু হৈছে।

বন্ধুসকল,

এই মাইলৰ খুঁটিত উপনীত হ’বলৈ আপোনালোকে  নিশ্চয় বিস্তৃত প্ৰস্তুতি চলাইছিল আৰু  কঠোৰ পৰিশ্ৰম কৰিছিল। এই সাফল্যৰ বাবে আপোনালোক আৰু আপোনালোকৰ পৰিয়াল উভয়কে আন্তৰিক অভিনন্দন জ্ঞাপন কৰিছোঁ। আপোনালোকক এই পৰ্যায়ত উপনীত কৰোৱাত  আপোনালোকৰ পিতৃ-মাতৃ আৰু পৰিয়ালৰ অৱদান কোনো কাৰণতে তুচ্ছ নহয়। কিন্তু—আৰু এয়া  এটা গুৰুত্বপূৰ্ণ কথা—পৰিয়ালে যেনেকৈ অৰিহণা যোগায়, সমাজেও আমাক আজি য’ত আছো তাত উপনীত হোৱাত সহায় কৰাত বিশেষ ভূমিকা পালন কৰে। আমি কেৱল নিজৰ প্ৰচেষ্টাৰ বাবেই সফল নহয়, কেৱল পৰিয়ালৰ বাবেও নহয়। এইক্ষেত্ৰত এই বিশাল দেশৰ  ১৪ কোটি নাগৰিকৰ অৱদানৰ গুৰুত্বও অপৰিসীম। গতিকে আমি কেৱল নিজৰ লগতে পৰিয়ালৰ প্ৰতিয়েই ,  নহয় সমগ্ৰ সমাজৰ প্ৰতিও সমানে  দায়িত্ব  পালন কৰোঁ।  এই সকলো  দায়িত্ব পালনৰ বাবে আপোনালোকৰ সামৰ্থ্য বৃদ্ধি কৰি যাব বুলি মোৰ বিশ্বাস। আন্তৰিক শুভেচ্ছা জ্ঞাপন কৰিলো।

 

বন্ধুসকল,

আপোনালোক সকলোৱে জ্ঞাত যে মাত্ৰ দুদিন আগতে মই পাঁচখন দেশ ভ্ৰমণ কৰি উভতি আহিছো। ক’বলৈ গ’লে এয়া  মাত্ৰ পাঁচখন  ৰাষ্ট্ৰৰ ভ্ৰমণ আছিল যদিও এই সময়ছোৱাত মই বহুতৰে সৈতে কথা-বতৰা পাতিলোঁ, বিশদভাবে আলোচনা কৰিলোঁ আৰু কেইবা ডজনো দেশৰ ডাঙৰ ডাঙৰ কোম্পানীসমূহৰ আগশাৰীৰ ব্যক্তিসকলক সাক্ষাৎ কৰিলোঁ। মই য’তেই গৈছিলো তাতেই এটাই আবেগ পৰ্যবেক্ষণ কৰিছিলোঁ যে ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতী আৰু ভাৰতৰ প্ৰযুক্তিগত অগ্ৰগতিৰ প্ৰতি বিশ্বই অবিশ্বাস্যভাৱে উৎসাহী হৈ আছে। আজি বিশ্বই ভাৰতৰ উন্নয়নমূলক যাত্ৰাৰ অংশ হ’ব বিচাৰিছে। ভাৰতেও সমগ্ৰ বিশ্বৰ বিভিন্ন ৰাষ্ট্ৰৰ সৈতে অংশীদাৰিত্ব গঢ়ি তুলিছে। ইয়াৰ আঁৰৰ প্ৰধান উদ্দেশ্য হৈছে ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকলে যাতে সুযোগ তথা  কৰ্মসংস্থাপন লাভ কৰে  আৰু তেওঁলোকৰ বাবে  সম্ভাৱনাৰ দুৱাৰ  মুকলি হয় । সঁচাকৈয়ে মোৰ আন্তৰিক ইচ্ছা  এয়াই যে মোৰ দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলেও বিশ্বজুৰি  পৰিচয় লাভ কৰক। এই ভ্ৰমণৰ সময়ত—নেদাৰলেণ্ডৰ উদাহৰণ দিছো— তাত অৰ্ধপৰিবাহী, পানী ব্যৱস্থাপনা, কৃষি আৰু উন্নত উৎপাদন সম্পৰ্কে আলোচনা কৰা হৈছিল। ছুইডেনৰ সৈতে কৃত্ৰিম বুদ্ধিমত্তা (এআই) আৰু ডিজিটেল উদ্ভাৱনৰ ক্ষেত্ৰত সহযোগিতা সম্পৰ্কে বিস্তৃত আলোচনা অনুষ্ঠিত হয়। নৰ'ৱেৰ সৈতে সেউজ প্ৰযুক্তি আৰু সামুদ্ৰিক সহযোগিতাৰ ক্ষেত্ৰত হোৱা আলোচনাত অগ্ৰগতি লাভ কৰা হয়। কৌশলগত শক্তি আৰু প্ৰযুক্তি অংশীদাৰিত্বৰ সন্দৰ্ভত ইউ এ ইৰ সৈতে উল্লেখযোগ্য চুক্তি স্বাক্ষৰিত হয় আৰু ইটালীৰ সৈতে প্ৰতিৰক্ষা, গুৰুত্বপূৰ্ণ খনিজ পদাৰ্থ তথা বিজ্ঞান আৰু প্ৰযুক্তিৰ দৰে জটিল খণ্ডত অংশীদাৰিত্বৰ ক্ষেত্ৰত চুক্তিত উপনীত হও।

বন্ধুসকল,

এই সকলোবোৰ চুক্তিৰ প্ৰত্যক্ষ লাভ ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে। আপোনালোকে  হয়তো লক্ষ্য কৰিছে যে এই সকলোবোৰ পদক্ষেপে ভাৰতৰ উজ্জ্বল তথা  সক্ষম ভৱিষ্যতৰ নিশ্চয়তা হিচাপে কাম কৰে। কাৰণ প্ৰতিটো নতুন বিনিয়োগ, প্ৰতিটো প্ৰযুক্তিৰ অংশীদাৰিত্ব  আৰু প্ৰতিটো উদ্যোগিক সহযোগিতাই ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে নতুন সুযোগ কঢ়িয়াই অনাই নহয়, বিকাশৰ বাবে অগণন নতুন পথো সৃষ্টি কৰিছে।

 বন্ধুসকল,

আমি মনত ৰাখিব লাগিব যে এইবোৰেই সেই খণ্ড য’ত আগন্তুক বিনিয়োগ আৰু অংশীদাৰিত্বই এনে উদ্যোগক লালন-পালন কৰিব , যিয়ে অনাগত তিনি-চাৰি দশকত বিশ্বৰ বিকাশক গঢ় দিবলৈ সাজু হৈছে।  নিঃসন্দেহে ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকলে এই পৰিৱৰ্তনত গুৰুত্বপূৰ্ণ ভূমিকা পালন কৰিব।

বন্ধুসকল,

বিশ্বৰ যোগান শৃংখলৰ বিশ্বাসযোগ্য অংশীদাৰ হিচাপে ভাৰতৰ কেনেদৰে উত্থান ঘটিছে তাৰ এটা উদাহৰণ দিওঁ। উদাহৰণস্বৰূপে ডাচ অৰ্ধপৰিবাহী কোম্পানী এ এছ এম এলৰ কথাই ধৰা হওক —এই নামটোৰ সৈতে আপোনালোকৰ বহুতেই হয়তো ইতিমধ্যে পৰিচিত। ভাৰতৰ টাটা গ্ৰুপে এ এছ এম এলৰ সৈতে চুক্তি স্বাক্ষৰ কৰিছে। বিশ্বৰ অতি কম সংখ্যক ৰাষ্ট্ৰৰ ভিতৰত ভাৰত অন্যতম, যাৰ সৈতে এই কোম্পানীটোৱে  এনে চুক্তি কৰিছে। কেৱল এ এছ এম এল আৰু টাটা ইলেক্ট্ৰনিকছৰ মাজত হোৱা এই   চুক্তিয়ে ভাৰতৰ ভিতৰতে অগণন নতুন নিয়োগৰ সুযোগ সৃষ্টি কৰিব আৰু ভাৰতক পৰৱৰ্তী প্ৰজন্মৰ প্ৰযুক্তিৰ ক্ষেত্ৰখনত প্ৰৱেশৰ দুৱাৰ মুকলি কৰিব। একেদৰে ছুইডেনৰ সৈতে প্ৰযুক্তি আৰু এআইৰ অংশীদাৰিত্বৰ লগতে ইউ এ ইৰ সৈতে ছুপাৰ কম্পিউটিঙৰ সহযোগিতাই ভাৰতৰ প্ৰযুক্তিগত সামৰ্থ্যক যথেষ্ট শক্তিশালী কৰিবলৈ সাজু হৈছে। এই চুক্তিসমূহে নিঃসন্দেহে যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে নতুন সুযোগৰ সৃষ্টি কৰিব।

 

বন্ধুসকল,

আজি স্বচ্ছ শক্তি, গুৰুত্বপূৰ্ণ  খনিজ পদাৰ্থ, সেউজ হাইড্ৰজেন আৰু বহনক্ষম উৎপাদনৰ সৈতে জড়িত খণ্ডসমূহো দ্ৰুতগতিত বৃদ্ধি  পাইছে আৰু আগবাঢ়িছে। এই খণ্ডসমূহৰ সৈতে জড়িত অংশীদাৰিত্বই নতুন অৰ্থনীতিৰ দুৱাৰ মুকলি কৰিছে আৰু নতুন  সুযোগৰ সৃষ্টি কৰিছে। ছুইডেন, নৰ'ৱে, ইটালীৰ দৰে দেশৰ সৈতে অংশীদাৰিত্বৰ জৰিয়তে সেউজ পৰিৱৰ্তন আৰু বহনক্ষম প্ৰযুক্তিৰ ক্ষেত্ৰতো সহযোগিতা সম্প্ৰসাৰিত হৈছে। ইয়াৰ দ্বাৰা স্বচ্ছ উৎপাদনৰ সৈতে জড়িত ভৱিষ্যতৰ উদ্যোগসমূহত ভাৰতৰ স্থিতি শক্তিশালী হ’ব। তদুপৰি ভাৰতে বন্দৰ, জাহাজ, আৰু সামুদ্ৰিক আন্তঃগাঁথনিৰ সৈতে জড়িত চুক্তিসমূহৰ বিষয়ত দ্ৰুতগতিত কাম কৰি আহিছে। ইউ এ ই আৰু নৰ'ৱেৰ সৈতে অংশীদাৰিত্বই ভাৰতৰ জাহাজ নিৰ্মাণৰ পৰিৱেশ তন্ত্ৰক শক্তিশালী কৰিব। আপোনালোকে  জানে যে জাহাজ নিৰ্মাণৰ লগত দক্ষ জনশক্তিৰ চাহিদাৰ কথাটো  জড়িত হৈ থাকে। অৰ্থাৎ ভাৰতৰ অভিযন্তা, কাৰিকৰী, দক্ষ শ্ৰমিকৰ চাহিদা কল্পনাতীত পৰিমাণে বৃদ্ধি পাব, যাৰ ফলত নতুন সুযোগৰ এক বিশাল শৃংখল সৃষ্টি হ’ব।

বন্ধুসকল,

প্ৰতিটো নতুন অংশীদাৰিত্বৰ লগে লগে আমি ভাৰতীয় ষ্টাৰ্টআপ, গৱেষক আৰু যুৱ পেছাদাৰীসকলৰ বাবে বিশ্বৰ সৈতে সংযোগ স্থাপনৰ অৰ্থে  নতুন পথ গঢ়ি তুলিছো। ইয়াৰ দ্বাৰা ভাৰতীয় যুৱক-যুৱতীসকলে উন্নত বিশেষজ্ঞতা, বিশ্ব বজাৰ আৰু বৃদ্ধিৰ নতুন পথৰ সুবিধা লাভ কৰিব। আজি বিশ্বই সেই দেশসমূহক সন্মান কৰে যিবোৰে উদ্ভাৱন কৰে, যিবোৰে নিৰ্মাণ কৰে আৰু যিবোৰৰ বৃহৎ পৰিসৰত কাম কৰাৰ ক্ষমতা আছে। বৰ্তমান ভাৰত এই তিনিওটা দিশতে দ্ৰুতগতিত আগবাঢ়িছে; আৰু এই পৰিৱৰ্তনৰ আঁৰৰ আটাইতকৈ ডাঙৰ চালিকা শক্তি হৈছে আপোনালোক—মোৰ যুৱ বন্ধুসকল—ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকল। সঁচাকৈয়ে মই সমগ্ৰ বিশ্বৰ য’তেই ভ্ৰমণ কৰো, মই নিৰৱচ্ছিন্নভাৱে মোৰ আলোচনাৰ এক উল্লেখযোগ্য অংশ ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ শক্তিক উজ্জ্বল কৰি তোলাৰ বাবে উৎসৰ্গা কৰোঁ।

বন্ধুসকল,

আজি প্ৰতিজন ভাৰতীয়ই এক গভীৰ সংকল্পৰে আগবাঢ়িছে—২০৪৭ চনৰ ভিতৰত ‘উন্নত ভাৰত’ গঢ়ি তোলাৰ সংকল্প।এই লক্ষ্যত উপনীত হ’বলৈ দেশখনে বৰ্তমান বিভিন্ন খণ্ডত কৌশলগত বিনিয়োগ কৰি আছে। এই বিনিয়োগসমূহে পাছলৈ দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে লাখ লাখ নতুন কৰ্মসংস্থাপনৰ সুযোগ সৃষ্টি কৰিব। উদাহৰণস্বৰূপে, বৰ্তমান ভাৰতৰ ভিতৰতে অৰ্ধপৰিবাহী নিৰ্মাণৰ বাবে এটা সম্পূৰ্ণ যোগান শৃংখল স্থাপন কৰা হৈছে। আগন্তুক সময়ত ভাৰতৰ ১০টা প্ৰধান অৰ্ধপৰিবাহী গোটে  বিশ্বজুৰি নিজৰ স্থান দখল কৰিব। এই উদ্যোগসমূহ ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ সম্ভাৱ্য, বৌদ্ধিক প্ৰতিভা  আৰু অটল দায়বদ্ধতাৰ দ্বাৰা চালিত হ’ব—আৰু, স্বাভাৱিকতে, ইয়াৰ দ্বাৰা যথেষ্ট নিয়োগৰ সুযোগ সৃষ্টি হ’ব। আজি ভাৰতে জাহাজ নিৰ্মাণৰ পৰা আৰম্ভ কৰি জাহাজ মেৰামতি আৰু অভাৰহ’লিঙলৈকে এক ব্যাপক পৰিৱেশ তন্ত্ৰ গঢ়ি তুলিছে। এই পদক্ষেপত প্ৰায় ৭৫,০০০ কোটি টকা বিনিয়োগ  কৰা হৈছে। একেদৰে আমি ভাৰতৰ ভিতৰতে ইয়াতেই এটা সম্পূৰ্ণ এম আৰ অ’ পৰিৱেশ তন্ত্ৰ স্থাপন কৰিছো—য’ত ৰক্ষণাবেক্ষণ, অভাৰহ’ল আৰু মেৰামতিৰ সুবিধাসমূহ সামৰি লোৱা হৈছে। ইয়াৰ দ্বাৰা দেশৰ বিমান পৰিবহণ খণ্ডত এক উল্লেখযোগ্য উত্থান ঘটিব আৰু ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে কৰ্মসংস্থাপনৰ এক সম্পূৰ্ণ নতুন পথ মুকলি হোৱাটো নিশ্চিত।

 

বন্ধুসকল,

আজি ভাৰত এক প্ৰধান ইলেক্ট্ৰনিকছ নিৰ্মাতা হিচাপে থিয় দিছে। আমি  দেশৰ ভিতৰতে ইলেক্ট্ৰনিকছৰ সৈতে জড়িত সমগ্ৰ মূল্য শৃংখলটো গঢ়ি তুলিছো। এই খণ্ডৰ বাবে চলি থকা পিএলআই (প্ৰডাকচন লিংকড ইনচেণ্টিভ) আঁচনিয়ে দেশৰ ভিতৰতে অভিলেখ ভংগকাৰী ইলেক্ট্ৰনিকছ উৎপাদনক আগুৱাই লৈ গৈছে আৰু লাখ লাখ যুৱক-যুৱতীৰ বাবে চাকৰিৰ সৃষ্টি কৰিছে।

বন্ধুসকল,

ভাৰতৰ ৰাজহুৱা আৰু ব্যক্তিগত খণ্ডই যৌথভাৱে এনে অসংখ্য পদক্ষেপত ব্যাপক বিনিয়োগ কৰিছে। এই বিনিয়োগসমূহে দেশৰ ভিতৰতে দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলক চাকৰিৰ সুবিধা প্ৰদান কৰিছে, তেওঁলোকৰ সপোন পূৰণ কৰাত সহায় কৰিছে। চৰকাৰী কৰ্মচাৰী হিচাপে—এটা পেছাদাৰী পৰিচয় , যিটো আজি আপুনি আপোনালোকৰ নিযুক্তি পত্ৰ গ্ৰহণ কৰাৰ লগে লগে আপোনালোকৰ হৈ পৰিছে। দেশখনে  ‘ব্যৱসায়ৰ সহজতা’ক অপৰিসীম অগ্ৰাধিকাৰ দিয়ে সেই কথা  আপোনালোকে  সদায় মনত ৰাখিব লাগিব । 

বন্ধুসকল,

এয়া এক বহুলভাৱে স্বীকৃতিপ্ৰাপ্ত সত্য—যিটো আপোনালোকেও ভালদৰেই জানে—যে ভাৰতৰ বৃদ্ধিৰ কাহিনী আৰু নিয়োগ সৃষ্টিৰ ক্ষেত্ৰত আন্তঃগাঁথনিয়ে গুৰুত্বপূৰ্ণ ভূমিকা পালন কৰে। যেতিয়া গাঁও, সৰু চহৰ  আৰু দুৰ্গম অঞ্চলসমূহক উন্নয়ন প্ৰক্ৰিয়াৰ সৈতে একত্ৰিত কৰা হয় তেতিয়াহে দেশৰ  প্ৰগতিৰ সুবিধাসমূহ জনসংখ্যাৰ বহল ক্ষেত্ৰসমূহত উপনীত হয়। যোৱা ১২ বছৰত ৰে'লৱে, ঘাইপথ, বিমানবন্দৰ, লজিষ্টিক, বন্দৰ আৰু ডিজিটেল আন্তঃগাঁথনিৰ দৰে খণ্ডই কল্পনাতীত গতি লাভ কৰাৰ লগতে পৰিসৰৰ সম্প্ৰসাৰণ ঘটাইছে  আৰু বিকাশৰ সাক্ষী হৈছে; প্ৰতিটো স্তৰতে নানান ধৰণৰ কাম হাতত লোৱা হৈছে। আজি যদি আপোনালোকে  নিজ নিজ অঞ্চলৰ ভিতৰত যিকোনো দিশত মাত্ৰ ১০০ কিলোমিটাৰ যাত্ৰা কৰে , তেন্তে ভাৰত চৰকাৰৰ দ্বাৰা ৰূপায়ণ কৰা কিবা নহয় কিবা  প্ৰকল্প সম্পন্ন হোৱাটো  নিৰৱচ্ছিন্নভাৱে প্ৰত্যক্ষ কৰিব। আজি পৰিৱর্তনৰ বতাহজাক আমাৰ গাঁওবোৰতো অনুভূত হৈছে। বৰ্ধিত সংযোগে কৃষক, ক্ষুদ্ৰ ব্যৱসায়ী আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীৰ বাবে নতুন পথ আৰু সুযোগ মুকলি কৰিছে। আজি লাখ লাখ পৰিয়ালে নিজাকৈ  পকা ঘৰ লাভ কৰিছে। এই   দৃষ্টিকোণেৰে  ক’বলৈ গ’লে: আমি বছৰি নিৰ্মাণ কৰা নতুন ঘৰৰ সংখ্যা সমগ্ৰ বিশ্বৰ বহু দেশত থকা মুঠ গৃহতকৈ কেইবাগুণো বেছি। তদুপৰি—আৰু এই কথাটো মই কেতিয়াও মানুহক পাহৰিবলৈ নিদিওঁ, নিজেও কেতিয়াও নাপাহৰো—মোৰ স্বচ্ছতা অভিযানে (স্বচ্ছ অভিযান) শৌচাগাৰৰ ব্যৱস্থা কৰাৰ বিষয়ত  অপৰিসীম গুৰুত্ব দিয়ে; এয়া  এটা ক্ষেত্ৰ হৈয়েই আছে,  য'ত আমি আমাৰ প্ৰচেষ্টা কেন্দ্ৰীভূত কৰি আছো। এতিয়া লাখ লাখ ঘৰত বিদ্যুৎ সংযোগ  হৈছে। ছাদৰ ওপৰৰ সৌৰশক্তিৰ ক্ষেত্ৰখনত একাধিক নতুন বিক্ৰেতা আৰু সেৱা প্ৰদানকাৰীয়ে প্ৰৱেশ কৰিছে। আন এক উদাহৰণস্বৰূপে  জল জীৱন মিছন—প্ৰতিটো ঘৰতে নলৰ পানী যোগান ধৰাৰ এয়া আমাৰ পদক্ষেপ। শেহতীয়াকৈ মই এটা আকৰ্ষণীয় পৰিস্থিতি পৰ্যবেক্ষণ কৰিলোঁ: আমাৰ চহৰসমূহত পিএনজি (পাইপেড নেচাৰেল গেছ) সংযোগ ত্বৰান্বিত কৰিবলৈ মই আগ্ৰহী আছিলো যদিও আমি প্লাম্বাৰৰ অভাৱৰ সন্মুখীন হ’লোঁ। কাৰণ? ইতিমধ্যে বিপুল সংখ্যক প্লাম্বাৰ জল জীৱন মিছন প্ৰকল্পসমূহ সম্পন্ন কৰাত সম্পূৰ্ণৰূপে নিয়োজিত হৈ পৰিছিল। এইদৰে  শক্তিৰ চাহিদা পূৰণৰ বাবে মই ডাঙৰ চহৰসমূহত পিএনজি সংযোগ দ্ৰুতগতিত বৃদ্ধি কৰিবলৈ বিচাৰিলেও, আপোনালোকে ভালদৰে কল্পনা কৰিব পাৰিব  যে কেনেকৈ—কেতিয়াবা—প্ৰয়োজনীয়তাৰ  পৰিসৰে উপলব্ধ জনশক্তিৰ অভাৱৰো সৃষ্টি কৰিব পাৰে।

 

বন্ধুসকল,

এই পৰিৱৰ্তনশীল পৰিৱৰ্তনসমূহৰ প্ৰভাৱ কেৱল সাধাৰণ নাগৰিকৰ বাবে উপলব্ধ সুবিধাসমূহ বৃদ্ধি কৰাতে সীমাবদ্ধ নহয়। গাঁৱত উন্নত  ৰাস্তা-ঘাট হোৱাৰ  লগে লগে বজাৰলৈ অহা-যোৱা কৰাটো যথেষ্ট সহজ হৈ পৰিল। বিদ্যুতৰ আন্তঃগাঁথনি উন্নত হোৱাৰ লগে লগে ক্ষুদ্ৰ উদ্যোগ আৰু ব্যৱসায়ৰ বিকাশ হ’বলৈ ধৰিলে। আনকি আমাৰ গাঁৱৰ ভিতৰতো কৃষি খণ্ডত মূল্য সংযোজনৰ প্ৰক্ৰিয়া এতিয়া  আৰম্ভ হ'বলৈ ধৰিছে। আগতে যদি তেওঁলোকে গোটা ৰঙা জলকীয়া বিক্ৰী কৰিছিল, এতিয়া—বিদ্যুতৰ আগমনৰ লগে লগে—তেওঁলোকে সেইবোৰ প্ৰক্ৰিয়াকৰণ কৰি ৰঙা জলকীয়া গুড়ি কৰি লয়; তেওঁলোকে এই গুড়ি পেকেজ কৰি বিক্ৰী কৰে। ফলস্বৰূপে গাঁৱতো ক্ষুদ্ৰ উদ্যোগসমূহ ক্ৰমাগতভাৱে ঠন ধৰি উঠিছে। ডিজিটেল সংযোগৰ সম্প্ৰসাৰণৰ লগে লগে গাঁওবাসীয়ে এতিয়া সমগ্ৰ বিশ্বৰ সৈতে সংযোগ স্থাপন কৰি আধুনিকতাক আঁকোৱালি লৈছে। চহৰ-গাঁৱৰ মাজৰ বিভাজন ক্ৰমান্বয়ে ম্লান হৈ আহিছে। ইয়াৰ ফলত অৰ্থনীতিৰ গতি ত্বৰান্বিত হৈছে। তদুপৰি এই সকলোবোৰ উন্নয়নৰ ইতিবাচক প্ৰভাৱে দেশৰ  যুৱক-যুৱতীসকলৰ উজ্জ্বল ভৱিষ্যতৰ নিশ্চয়তা হিচাপে কাম কৰিছে। কেৱল কৰ্মসংস্থাপনৰ সৃষ্টি হোৱাই নহয়, দেশখনে  নিজেই আত্মসন্মানৰ নৱীকৃত ভাৱনাৰে আগবাঢ়িছে, আনহাতে লাখ লাখ মানুহে নতুন সুযোগ লাভ কৰিছে।

বন্ধুসকল,

ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকলে আজি আগবাঢ়ি আগবাঢ়ি যাবলৈ আৰু নিজৰ সপোন পূৰণ কৰিবলৈ যি সুযোগ লাভ কৰিছে—তেওঁলোকে আগতে সন্মুখীন হোৱা কোনো সুযোগৰ দৰে নাছিল। মই কাকো দোষ নিদিওঁ, কিন্তু আজিৰ সকলোবোৰ যে দ্ৰুতগতিত, বৃহৎ পৰিসৰত আৰু বৈচিত্ৰময় বৰ্ণালীৰ মাজেৰে উন্মোচিত হৈছে সেয়া এক অনস্বীকাৰ্য বাস্তৱ। আজি আমাৰ বাবে  সুযোগে অপেক্ষা কৰি আছে অসংখ্য খণ্ডত—যেনে উৎপাদন, প্ৰযুক্তি, ষ্টাৰ্টআপ, ডিজিটেল সেৱা, ৰে’লৱে, আৰু প্ৰতিৰক্ষা—আৰু আনকি মহাকাশৰ ক্ষেত্ৰখনলৈও এয়া বিস্তৃত। আমাৰ প্ৰচেষ্টা হৈছে যাতে সৰ্বাধিক সংখ্যক যুৱক-যুৱতীয়ে  এই নতুন সুযোগসমূহ মূলধন হিচাপে ব্যৱহাৰ কৰিব পাৰে আৰু দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলে নিজৰ প্ৰতিভা প্ৰদৰ্শনৰ সুযোগ লাভ কৰিছে। সেয়েহে দক্ষতা বিকাশ, উদ্যোগ-সংলগ্ন শিক্ষা  আৰু ভৱিষ্যতৰ প্ৰযুক্তিৰ বিষয়ত  নিৰন্তৰ গুৰুত্ব দিয়া হৈছে। ঔদ্যোগিক প্ৰশিক্ষণ প্ৰতিষ্ঠান (আই টি আই)ৰ আধুনিকীকৰণ কৰা হৈছে  আৰু ৰাষ্ট্ৰীয় দক্ষতা প্ৰশিক্ষণ প্ৰতিষ্ঠানসমূহ শক্তিশালী কৰা হৈছে। পি এম সেতুৰ দৰে পদক্ষেপে  এই দিশত কাম কৰি আছে।

বন্ধুসকল,

যোৱা কেইবছৰমানৰ পৰা দেশত আত্ম  সংস্থাপন  আৰু উদ্যোগীকৰণৰ এক নতুন সংস্কৃতিৰ উন্মেষ ঘটিছে। ভাৰত বিশ্বৰ তৃতীয় বৃহৎ ষ্টাৰ্টআপ পৰিবেশতন্ত্ৰ হৈ পৰিছে। দেশখনত ২ লাখ ৩০ হাজাৰতকৈ অধিক স্বীকৃতিপ্ৰাপ্ত ষ্টাৰ্টআপ আছে—এই সংখ্যাটো মনত ৰাখিব: ২ লাখ ৩০ হাজাৰৰো অধিক। আৰু ইয়াৰ প্ৰতিটোতে বহু  যুৱক-যুৱতীৰ অংশগ্ৰহণ জড়িত হৈ আছে। আটাইতকৈ উল্লেখযোগ্য দিশটো—আৰু মোক আটাইতকৈ বেছি আনন্দ দিয়া দিশটো হ’ল এই ৰূপান্তৰ কেৱল ডাঙৰ ডাঙৰ মহানগৰবোৰতে সীমাবদ্ধ নহয়। আজি টায়াৰ-২ আৰু টায়াৰ-৩ চহৰৰ যুৱক-যুৱতীসকলেও ষ্টাৰ্টআপ আৰু উদ্ভাৱনৰ জগতখনত নিজৰ দক্ষতা প্ৰদৰ্শন কৰিছে; তেওঁলোকৰ সামৰ্থ্যই সঁচাকৈয়ে সকলোৰে মনোযোগ আকৰ্ষণ কৰিছে। এই ৰূপান্তৰ এতিয়া দেশৰ  অৰ্থনীতিৰ এক গুৰুত্বপূৰ্ণ উপাদান হৈ পৰিছে। এই পৰিৱৰ্তনক আগুৱাই নিয়াত আমাৰ ‘নাৰী শক্তি’ৰ ভূমিকাও ক্ৰমাগতভাৱে বাঢ়িছে। আজি আমি যেতিয়া মহিলা নেতৃত্বাধীন বৃহৎ সংখ্যক ষ্টাৰ্টআপৰ কথা শুনিবলৈ পাওঁ তেতিয়া আমাৰ হৃদয় গৌৰৱেৰে ফুলি উঠে। মই প্ৰায়ে সমগ্ৰ বিশ্বৰ মানুহক কওঁ যে আমাৰ ষ্টাৰ্টআপ পৰিৱেশ তন্ত্ৰত মহিলাসকলে ক্ৰমান্বয়ে গুৰুত্বপূৰ্ণ ভূমিকা পালন কৰিছে, বিপুল সংখ্যক আগবাঢ়িছে। মুদ্ৰা আঁচনিৰ অধীনত কোটি কোটি মহিলাই আৰ্থিক সাহায্য লাভ কৰিছে। পি এম স্বনিধিৰ দৰে আঁচনিসমূহেও লাখ লাখ মহিলাক স্বাৱলম্বী হোৱাৰ সুযোগেৰে সবল কৰি তুলিছে। আজি—গাঁও আৰু সৰু চহৰত—পূৰ্বতকৈ অধিক মহিলাই নিজা প্ৰচেষ্টাত নতুন উদ্যোগ আৰম্ভ কৰিছে।

 

 

বন্ধুসকল,

নীতি আৰু সিদ্ধান্তৰ এই চলি থকা অভিযানৰ মাজত আৰু এটা কথা আপোনালোকে  মনত ৰাখিব লাগিব। যিকোনো ব্যৱস্থাৰ প্ৰকৃত শক্তি নিহিত হৈ থাকে ইয়াৰ জনসাধাৰণৰ মাজত। ই জনসাধাৰণৰ শক্তিত বাস কৰে—জন শক্তি—আৰু এই জন শক্তিয়েই শেষত ৰাষ্ট্ৰ শক্তি (জাতীয় শক্তি)লৈ ৰূপান্তৰিত হয়। আপোনালোকে  যিটো ব্যৱস্থাৰ অংশ হ’বলৈ ওলাইছে, সেই ব্যৱস্থাটো কোটি কোটি  নাগৰিকৰ জীৱনৰ সৈতে পোনপটীয়াকৈ জড়িত হৈ আছে— তেওঁলোকৰ আশা, তেওঁলোকৰ আকাংক্ষা আৰু তেওঁলোকৰ সপোনৰ সৈতে জড়িত হৈ আছে। চৰকাৰী চাকৰি এটাই, মৌলিকভাৱে, মানুহৰ জীৱন সহজ কৰি তোলাৰ মাধ্যম হিচাপে কাম কৰে। আপোনালোকে যি বিভাগতে সেৱা আগবঢ়াওক কিয়, আপোনালোকৰ আচৰণ, আপোনালোকৰ সংবেদনশীলতা আৰু কামৰ প্ৰতি আপোনালোকৰ দৃষ্টিভংগীৰ গুৰুত্ব অপৰিসীম হ’ব। দেশে  আপোনালোকৰ ওপৰত আস্থা ৰাখিছে। সেই আস্থাক আৰু অধিক শক্তিশালী তথা বজাই ৰখাটো এতিয়া আপোনালোকৰ দায়িত্ব—আপোনালোকৰ কাম, আপোনালোকৰ আচৰণ, আপোনালোকৰ কথাৰ জৰিয়তে। এক নতুন আত্মবিশ্বাসে আমাৰ  নাগৰিকসকলৰ হৃদয় ভৰাই তুলিব; আপোনালোকক লগ পোৱাৰ লগে লগে তেওঁলোকে নৱীকৃত আশাৰে আগবাঢ়ি যাব। গতিকে প্ৰতিগৰাকী যুৱক-যুৱতী   কৰ্মযোগী হৈ  নিজৰ কৰ্মক পবিত্ৰ দায়িত্ব হিচাপে চাব লাগিব। অতীতৰ দিনত আমি কিংবদন্তি ব্যক্তিৰ কাহিনী শুনিছিলোঁ—এইজন বা সেইজন নায়কৰ—যিসকলৰ হাতত হাজাৰটা বাহু আছিল। আজি আপোনালোক  চৰকাৰৰ বাহু; আপোনালোকে  চৰকাৰৰ শক্তিক মূৰ্ত কৰি তোলে—আপোনালোক  ব্যৱস্থাটোৰ ভিতৰৰ এজন পুৰণি ব্যক্তি হওক বা মাত্ৰ ইয়াৰ শাৰীত যোগদান কৰা নতুন ব্যক্তিয়েই হওক। আজি ভাৰতীয় জনসাধাৰণৰ আকাংক্ষা আকাশলংঘী হৈছে, আৰু মই ইয়াক উন্নয়নৰ ইতিবাচক লক্ষণ হিচাপে গ্ৰহণ কৰিছো। আমি কেৱল আমাৰ নাগৰিকৰ আকাংক্ষা বুজি পোৱাই নহয়, সেই আকাংক্ষা পূৰণৰ বাবেও সমানুপাতিক গতি তথা তীব্ৰতাৰে কাম কৰিব লাগিব। এই পৰিপ্ৰেক্ষিতত জনসেৱাত প্ৰৱেশ কৰা যুৱক-যুৱতীসকলৰ ভূমিকা অপৰিসীমভাবে  তাৎপৰ্যপূৰ্ণ হৈ পৰিছে। আপোনালোক চিৰন্তন শিক্ষাৰ্থী হৈ থাকিব লাগিব—নতুন প্ৰযুক্তি, নতুন ব্যৱস্থা আৰু বিকশিত প্ৰয়োজনীয়তাৰ সৈতে খাপ খুৱাবলৈ নিজকে অহৰহ সজ্জিত কৰি ৰাখিব লাগিব। আই জিঅ টি কৰ্মযোগী (iGOT-Krmayogi) প্লেটফৰ্ম এই প্ৰচেষ্টাত এক অমূল্য সম্পদ হিচাপে প্ৰমাণিত হ'ব। কৰ্মযোগী প্ৰাৰম্ভৰ দৰে মডিউলে আপোনালোকক কৰ্তব্য তথা দায়িত্ব বুজিবলৈ বহুখিনি সুবিধা কৰি দিব। এই সম্পদসমূহৰ সৰ্বোত্তম ব্যৱহাৰ কৰিবলৈ আপোনালোকক আহ্বান জনাইছো।

বন্ধুসকল,

আজি ভাৰতৰ যুৱক-যুৱতীসকলে প্ৰতিটো বিশ্বজোৰা ক্ষেত্ৰত  নিজৰ বাবে এক সুকীয়া পৰিচয় খোদিত কৰি আছে। এই আত্মাটোৱেই—এই শক্তিটোৱেই—জনসেৱাৰ ক্ষেত্ৰখনৰ ভিতৰতো সমানে দৃশ্যমান হ’ব লাগিব। এনে যুৱ ব্যক্তিৰ প্ৰচেষ্টাত— যিসকলে নিজৰ কামক ৰাষ্ট্ৰীয় সেৱা আৰু জনকল্যাণৰ মাধ্যম  হিচাপে লয়, তেওঁলোকৰ প্ৰচেষ্টাত এখন ‘উন্নত ভাৰত’ (বিকশিত ভাৰত) গঢ় লৈ উঠিব। সঁচাকৈয়ে আমাৰ পৰম্পৰাই আমাক শিকাইছে: জন সেৱাই ঈশ্বৰ  সেৱা—মানৱতাৰ সেৱা হৈছে ঈশ্বৰৰ সেৱা। মোৰ সম্পূৰ্ণ বিশ্বাস যে আজি আমাৰ যুৱ সহকৰ্মীসকলে নিযুক্তি পত্ৰ লাভ কৰাৰ পিছত  ভাৰতৰ উন্নয়নমূলক যাত্ৰাত সতেজ গতিৰ সৃষ্টি হ’ব। আপোনালোকৰ কাম আৰু সিদ্ধান্তৰ জৰিয়তে উন্নত ভাৰত গঢ়াৰ সংকল্প বাস্তৱায়িত হ’ব। তদুপৰি আমাৰ পথ প্ৰদৰ্শক মন্ত্ৰটো আপোনালোকে  কেতিয়াও পাহৰিব নালাগে—নাগাৰিক দেৱো ভৱ : নাগৰিকেই ভগৱান  । নাগৰিকৰ কল্যাণ আমাৰ সৰ্বোচ্চ কৰ্তব্য। আজি নিযুক্তি পত্ৰ লাভ কৰা সকলো যুৱক-যুৱতীলৈ   আকৌ এবাৰ মোৰ উষ্ম শুভেচ্ছা জ্ঞাপন কৰিলোঁ—আপোনালোকৰ আগলৈ উজ্জ্বল ভৱিষ্যত তথা দেশ সেৱাৰ এই উদাৰ সুযোগ পূৰণৰ প্ৰতিটো ক্ষেত্ৰত  সফলতা কামনা কৰিলোঁ।

সকলোকে বহুত বহুত  ধন্যবাদ।