उद्योग जगत के सभी वरिष्‍ठ महानुभाव

मैं जेट्रो का आभारी हूं, निक्‍केइ का आभारी हूं, कि मुझे आज आप सबके साथ बातचीत करने का सौभाग्‍य मिला है। मैं जब यहां आ रहा था तो, ये सभी वरिष्‍ठ महानुभाव मुझे बता रहे थे और बड़े आश्‍चर्य के साथ बता रहे थे कि हमारे इतने सालों में इतना बड़ा गैदरिंग पहली बार हुआ है। मुझे कह रहे थे कि 4000 लोगों ने अप्‍लाई किया था, लेकिन हमारे पास एकोमोडेशन पूरी नहीं होने के कारण आधे लोगों को निराश करना पड़ा है। ये इस बात का संकेत है कि अब जैसे भारत ‘लुक ईस्‍ट’ पालिसी लेकर चल रहा है, वैसे जापान ‘लुक एट इंडिया’ इस मूड में आगे बढ़ रहा है।

जब वाजपेयी जी भारत के प्रधानमंत्री थे और एक्‍सीलेंसी मोरी जी यहां प्रधानमंत्री थे, तब से यह रिश्‍ता बड़ा सघन बना। मेरा भी सौभाग्‍य रहा, मैं पहले भी आया। मैंने हर बार देखा कि जापान जिस प्रकार की कार्य संस्‍कृति का आदी है, जापान जिस प्रकार के गवर्नेंस का आदी है, जापान ने जिस प्रकार से इफीशिएंसी और डिसीप्लिन को आत्‍मसात किया है, अगर उस इन्‍वायरमेंट को प्रोवाइड करते हैं तो जापान को भारत में भी अपनापन महसूस होगा।

तब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, 2007 में, मैं यहां आया। जो बातें आप से सीखीं ,समझी, देखी, उसको मैंने भली-भांति वहां लागू किया था। 2012 में आया, मैंने दुबारा उसको और बारीकी से देखा फिर उसको लागू किया। आज परिणाम यह हुआ कि जब मैं भारत के प्रधानमंत्री के रूप में आपके बीच आया हूं, तब मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, कि आपको जापान के बाहर कहीं नजर डालनी है तो, मुझे नहीं लगता है कि अब आपको इधर-उधर देखने की जरूरत है।

अब एक ऐसी जगह है, जो आपकी चिर-परिचत है। सांस्‍कृतिक रूप से तो चिर-परिचित है, लेकिन अब अपने आप के विस्‍तार के लिए, अपने आप को ग्रो करने के लिए, आप जिस जगह की तलाश में हैं, मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मैं आपको निमंत्रण देता हूं, शायद भारत से बढ़कर के आप के अनुकूल कोई जगह नहीं है। ये मैं विश्‍वास दिलाने आया हूं।

मुझे अभी सरकार में सिर्फ 100 दिन हुए हैं। एक्‍सीलेंसी मोरी जी के साथ भी मेरा संबंध बहुत पुराना है और प्रधानमंत्री आबे जी के साथ भी बहुत पुराना संबंध है। पिछले तीन दिनों में मैंने देखा है कि जापान का भारत के साथ जुड़कर के अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं। उसमें हमारा विश्‍वास पक्‍का हो गया है। कल का हमारा ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट आपने देखा है। मैं समझता हूं, किसी भी जापान के उद्योगकार के लिए भारत में आकर के कार्य प्रारंभ करना, इससे बड़ा स्‍ट्रांग मैसेज कोई नहीं हो सकता है। मेरी सरकार बनने के बाद मैने एक विजन के रूप में लोगों के सामने रखा है, ‘मेक इन इंडिया’।

मैं छोटा था, तो कोई कहता था ‘मेड इन जापान’, तो हम लागों का मन करता था कि कुछ देखने की जरूरत नहीं है कि किस शहर में बना है, किस कंपनी में बना है। ले लो, ये प्रतिष्‍ठा थी। हम ‘मेक इन इंडिया’ कह रहे हैं, इसका मतलब यह है कि हम ऐसा इन्‍वायरमेंट आपको देना चाहते हैं, कि आपकी वैश्विक मांग है, जो आपके प्रोडक्‍ट की, उस वैश्विक मांग को अगर पूरा करना है तो आज जापान, जो कि हाई कॉंस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग की ओर चल पड़ा है, आपकी पूरी इकोनोमी हाई कॉस्‍ट एंड वाली बनती जा रही है। इसलिए आपके लिए बहुत अनिवार्य है कि लो कॉम्‍स्‍ट मैन्‍यूफैचरिंग की संभावनाएं हों। ‘ईज़ आफ बिजनेस’ का वातावरण हो। स्किल्‍ड क्‍वालिटी मैनपावर अवेलेबल हो।

तो मैं विश्‍वास से कहता, जो दस साल में मिरेकल आप जापान में रह कर के आपकी कंपनी का करते हैं, आप वो मिरेकल दो साल के भीतर-भीतर हिन्‍दुस्‍तान में कर सकते हैं। इतनी संभावनाओं का वो देश है आप विश्‍व में अपने प्रोडक्‍ट को अगर पहुंचाना चाहते हैं, और कंपीटिटिव भी मार्केट है। अगर विश्‍व में अगर प्रोडक्‍ट पहुंचाना चाहते हो तो, इट इज ए गॉड गिफ्टेड लोकेशन है, इंडिया का। हमारा बहुत ही वाइब्रेंट सी कोस्‍ट है, वहीं से आप वेस्‍टर्न पार्ट आफ दि वर्ल्‍ड, मिडिल ईस्‍ट से लेकर, आगे कहीं भी जाना है, मैं समझता हूं, इससे बढ़कर कोई सुविधा नहीं होती है।

जब सुजूकि, मारूति उद्योग के संबंध में लोग, मुझसे मिलने आते थे, तो मैंने उन्हे एक हिसाब समझाया था। मैंने कहा- आप गुड़गांवां में कार बनाते हैं और एक्‍सपोर्ट करते हैं, तो समुद्र तट पर जाने में आपकी कार को जाने में 9000 रुपए का खर्च लगता है। लेकिन समुद्र तट पर यदि आप गाड़ी बनाओगे तो हर कार पर आपका 9000 रुपए बच जाएगा। तो उन्‍होनें कहा कि मुझे तो यह व्‍यापारिक गुर किसी ने सिखाया ही नहीं और वह एक बात ऐसी थी कि उनको निर्णय करने में क्लिक कर गई।

पिछले दिनों में मैंने इतने वहां पर इतने महत्‍वपूर्ण निर्णय किये, जैसे – डिफेंस के सेक्‍टर में। एक समय था, मेरे यहां इतने सारे रिस्‍ट्रीक्‍शंस थे, डिफेंस इक्विपमेंट मैन्यूफैक्‍चरिंग में, यदि डिफेंस के लिए एक मुझे ट्रक चाहिए तो वो भी डिफेंस के रूल्‍स एवं रेगुलेशन के रिस्ट्रिक्‍शंस में पड़े हुए थे। हमने इन 100 दिन के अंदर-अंदर करीब-करीब 55 प्रतिशत ऐसी चीजों को उस सारी कानूनी व्‍यवस्‍था से बाहर निकाल दिया। हमने कहा कि आइए, ये सब आप जैसे सामान्यत: कोई भी चीज आप प्रोड्यूस करते हैं, आप कर सकते हैं और डिफेंस उसका परचेज करेगा। हमारा बहुत बड़ा मार्केट विदिन इंडिया है। डिफेंस मैन्‍यूफैक्‍चरिग सेक्‍टर में अगर आप आते हैं, तो मुझे विश्‍वास है कि आप न सिर्फ भारत की आवश्‍यकताएं, बल्कि विश्‍व के अनेक छोटे-छोटे देश हैं, जिनकी रिक्‍वायरमेंट को पूरा करने का, ऐसी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग का काम आप हिंदुस्‍तान की धरती पर कर सकते हैं।

आपको जानकर के हैरानी होगी, भारत की पहचान साफ्टवेयर में है। हमारे टैलेंट, हमारे नौजवान साफ्टवेयर के क्षेत्र में बहुत बड़ी पहचान बनायी है। आपने हार्डवेयर में अपनी ताकत बनायी है। लेकिन साफ्टवेयर हार्डवेयर के बिना अधूरा है। हार्डवेयर साफ्टवेयर के बिना अधूरा है। भारत जापान के बिना अधूरा है, जापान भारत के बिना अधूरा है।

अगर हार्डवेयर इंडस्‍ट्री, भारत आपको निमंत्रण देता है। भारत के टैलेंट का साफ्टवेयर, आपकी बुद्धिमानी और मेहनत और बिजनेस एक्‍सीलेंस के कारण तैयार हुआ हार्डवेयर। अगर ये मेलजोल हो जाए, आप विश्‍व के अंदर बहुत बड़ा मिरेकल कर सकते हैं। मैंने देखा है कि स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज का एक बड़ा नेटवर्क ऐसा है, कि जो हार्डवेयर की दिशा में काम कर रहा है।

आज भारत का अपना इंपोर्ट इतना है। हमारा आज सबसे बड़ा इंपोर्ट पेट्रोलियम और आयल सेक्‍टर का है। हमारा एक अनुमान है कि 2020 में हमारा सबसे ज्‍यादा इंपोर्ट इलेक्‍ट्रानिक्‍स गुड्स का होने वाला है। आप कल्‍पना कर सकते हैं, कितना बड़ा मार्केट है। जापान का व्‍यापारी इंतजार करेगा क्‍य ? इतना बड़ा मार्केट आपका इंतजार कर रहा है। अगर आपका वहां लो कॉस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग होता है, आपको इफिशिएंट गवर्नेंस की अनुभूति होती है। मैं विश्‍वास से कहता हूं कि आपकी स्थिति बदल जाएगी।

आमतौर पर भारत की पहचान यह बन जाती है कि छोड़ो यार, वहां रेड टैप है। पता नहीं सरकारी कारोबार में कब गाड़ी चलेगी। मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, आज भारत में रेड टैप नहीं, रेड कार्पेट है और रेड कार्पेट आपका इंतजार कर रही है।

हमने ईज़ आफ बिजनेस के लिए इतने सारे नए रेगुलेशन्‍स को लिबरल कर दिया है। शायद विश्‍व में इतनी तेज गति से लिबरलाइज मूड में, सारे हमारे पुराने रूल्‍स और रेगुलेशन्‍स में परिवर्तन लाने का किसी एक सरकार ने काम किया हो तो आज हिंदुस्‍तान की सरकार है। आखिरकार व्‍यापारी को, उद्योगकार को, इंवेस्‍टर को एक सिक्‍युरिटी चाहिए। उसको प्रोपरली ग्रो करने के लिए एक इन्‍वायरामेंट चाहिए।

आज भारत, किसी को भी आकर के ग्रो करने के लिए प्रोपर इन्‍वायरामेंट के लिए, बहुत तेज गति से आगे चल रहा है। जहां तक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का सवाल है, अब कभी, जो भी आज भारत में हमारे साथ काम करते हैं, और जिन्‍होंने गुजरात में मेरे साथ काम किया है, कई उद्योगकार हैं, जिन्‍होंने मेरे साथ काम किया है। जिस गति से हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्रोवाइड करने के लिए व्‍यवस्‍थाएं करते हैं, जिस गति से हम निर्णय करते हैं। मैं नहीं मानता हूं कि आज किसी भी उद्योगकार को उसके लिए कठिनाई हो सकती है।

आप कल्‍पना कर सकते हैं, हिंदुस्‍तान के आज 50 से अधिक छोटे शहर ऐसे हैं, जो मेट्रो रेल के लिए कतार में खड़े हैं। 50 शहरों में मेट्रो ट्रेन लगना, यानी इस फील्‍ड में काम करने वाले लोगों के लिए किसी एक देश में इतना बड़ा बिजनेस कभी सोचा है आपने ? इतना बड़ा बिजनेस अ‍बेलेबल है। आप कितना सारा काम वहां पर कर सकते हैं। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, और खास करके हम एस एम ईज को पोत्‍साहन देना चाहते हैं। स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज को हम इंवाइट करना चाहते हैं। ताकि जॉब क्रिएशन भी हो, मास स्‍केल पर प्रोडक्‍शन भी हो और एक ऐसी हेल्‍दी कंपीटिशन हो, जिसके कारण क्‍वालिटी प्रोडक्‍शन पर बल मिले। इसलिए मैं आप सबसे आग्रह करने आया हूं कि आप आइए। और कल भी मैंने एक जगह कहा था, 21वीं सदी एशिया की सदी है। मतलब क्‍या है ? इसका मतलब ये है कि विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र ये बनने वाला है।

विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनने वाला है तो कहां बनेगा ? मैं देख रहा हूं, आज विश्‍व के लोगों को तीन बातों के लिए शायद कोई एक जगह पर ऑपरच्‍युनिटी हो, वैसी विश्‍व में कोई जगह नहीं है। एक स्‍थान पर तीन ऑपरच्‍युनिटी, एक – डेमोक्रेसी, दूसरा – डेमोग्राफी, तीसरा – डिमांड। ये एक ही जगह ऐसी है, जहां डेमोक्रेसी है, जहां पर डिमांड है और जहां पर 65 प्रतिशत पोपुलेशन बिलो 35 एज ग्रुप की है, डेमोग्राफिक डिवीजन। तीनों जगह एक स्‍थान पर हो, वैसी विश्‍व में एक भी जगह नहीं नहीं है और डेमोक्रेसी सेफ्टी, सिक्‍योरिटी एंड जस्टिस की गारंटी देती है।

आखिरकर बाहर के व्‍यक्ति को ये चीजें चाहिए, जो हम प्रोवाइड करते हैं। उसी प्रकार से, किसी भी उद्योगकार को, मैन्‍यूफैचरर को यंग ब्रेन चाहिए, यंग माइंड चाहिए, यंग पोपुलेशन चाहिए। उत्‍साह-उमंग से भरी हुई जवानी, अगर उसके हाथ में स्किल हो तो मिरेकल कर देती है। भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। और डिमांड, आप कल्‍पना कर सकते हैं, सवा सौ करोड़ देशवासी कितना बड़ा मार्केट है। अकेले हिंदुस्‍तान के मार्केट को आप सर्व करें तो भी आज जहां है, वहां से अनेक गुना आपकी कंपनी ग्रो कर जाएगी। एक ऐसी सरकार आई है जो विकास के मुद्दे पर काम कर रही है। मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सैक्‍टर को हम बढ़ावा देना चाहते हैं।

हमारे 100 दिन का रिकॉर्ड देखिए आप। सिर्फ 100 दिन में हमारा जो जीडीपी था, 4.4 - 4.5 - 4.6 पर लुढ़क रहा था। पिछले ढ़ाई-तीन साल में जो हमने अचीव नहीं किया था, वह 100 दिन में कर दिया और 5.7 प्रतिशत का जीडीपी अचीव कर लिया। यह बताता है कि हमारी जो निर्णय हैं, हमारी जो पालिसीज हैं, ‘ईज़ आफ बिजनेस’ की हमारी जो सोच है, उसके कारण ये परिणाम मिल रहे हैं। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देता हूं कि आप आइए, हम सब मिल करके एशिया की पीस और प्रोग्रेस की गारंटी के लिए, जापान और भारत को कंधे से कंधा मिला कर के जितना आगे बढ़ने की जरूरत है। उसी प्रकार से हमने एशिया की समृधि के लिए, भारत जैसे देश की समृधि की दिशा में मिलकर के प्रयास करने की आवश्‍यकता है।

मैं आप सबको निमंत्रण देता हूं। आप भारत आइए। अपना नसीब आजमाइए। अपना कौशल्‍य आजमाइए। भारत पूरी तरह आपका स्‍वागत करने के लिए तैयार है। मुझे दुबारा एक बार यहां आने का मौका मिला। बार-बार मैं जेट्रो में आता हूं। मैं जब गुजरात में था तो एक जेट्रो का आफिस भी मेरे यहां मैंने खोल दिया था और हमारे कुछ मित्र हैं जो अब गुजराती बोलना भी सीख गए हैं।

मैं बारीक-बारीक चीजों का केयर करने वाला इंसान हूं। मैं जानता हूं कि ‘ईज़ आफ बिजनेस’ के लिए जितनी छोटी-छोटी चीजें, अगर दो चीजें आप भी ध्‍यान में लाएंगे तो हम तुरंत उसको करने के पक्ष में रहते है। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देने आया हूं। फिर से आपने मुझे बुलाया, इतनी बड़ी संख्‍या में आपका यहां आना, ये बताता है कि आपका हिंदुस्‍तान के प्रति कितना विश्‍वास बढ़ा है। आपकी हिंदुस्‍तान के प्रति कितनी रूचि बढ़ी है और हिंदुस्‍तान और जापान मिलकर के एक नया इतिहास आर्थिक विकास के क्षेत्र में निर्माण कर सकते हैं। इस पूरे विश्‍वास के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

थैंक यू,थैंक यू वैरीमच।

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ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਮੇਲੇ ਤਹਿਤ ਨਿਯੁਕਤੀ ਪੱਤਰ ਵੰਡਣ ਦੌਰਾਨ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਸੰਬੋਧਨ ਦਾ ਪੰਜਾਬੀ ਅਨੁਵਾਦ
May 23, 2026
India’s youth are playing a vital role in accelerating the journey towards a Viksit Bharat: PM
Rozgar Mela reflects our Government’s commitment to empowering the Yuva Shakti with new opportunities: PM
The world is excited by India’s youth and technological progress and today the global community wants to partner in India’s development journey: PM
Sectors like clean energy, critical minerals, green hydrogen, and sustainable manufacturing are advancing rapidly and partnerships in these areas are creating new opportunities: PM Modi
Every Indian is moving forward with the resolve of building a Viksit Bharat by 2047: PM Modi at Rozgar Mela
Today, Rapid transformation is clearly visible even in rural areas; Enhanced connectivity has opened new avenues for farmers, small traders, and students: PM
Viksit Bharat will be built by the efforts of such youth who view their work as a means of national service: PM Modi

ਸਾਥੀਓ,

ਅੱਜ ਦੇਸ਼ ਭਰ ਦੇ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਹੀ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਦਿਵਸ ਹੈ। ਅੱਜ 51 ਹਜ਼ਾਰ ਤੋਂ ਵੱਧ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਰਕਾਰੀ ਨੌਕਰੀ ਦਾ ਨਿਯੁਕਤੀ ਪੱਤਰ ਮਿਲਿਆ ਹੈ। ਅੱਜ ਤੁਸੀਂ ਸਭ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਵਿਕਾਸ ਯਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਅਹਿਮ ਭਾਗੀਦਾਰ ਬਣ ਰਹੇ ਹੋ, ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰ ਭਾਗੀਦਾਰ ਬਣ ਰਹੇ ਹੋ। ਰੇਲਵੇ, ਬੈਂਕਿੰਗ, ਰੱਖਿਆ, ਸਿਹਤ, ਸਿੱਖਿਆ ਅਤੇ ਹੋਰ ਕਈ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀਂ ਸਭ ਨਵੀਆਂ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀਆਂ ਸੰਭਾਲਣ ਜਾ ਰਹੇ ਹੋ। ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਵਰ੍ਹਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵਿਕਸਿਤ ਭਾਰਤ ਦੇ ਸੰਕਲਪ ਨੂੰ ਸਿੱਧ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀਂ ਸਭ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਣ ਵਾਲੇ ਹੋ।

ਸਾਥੀਓ,

ਇੱਥੋਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਣ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਸਾਰਿਆਂ ਨੇ ਲੰਬੀ ਤਿਆਰੀ ਅਤੇ ਕਰੜੀ ਮਿਹਨਤ ਜ਼ਰੂਰ ਕੀਤੀ ਹੋਵੇਗੀ। ਇਸ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਲਈ ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵੀ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਪਰਿਵਾਰਕ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਬਹੁਤ-ਬਹੁਤ ਵਧਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ। ਤੁਹਾਨੂੰ ਇੱਥੋਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਵਿੱਚ ਤੁਹਾਡੇ ਮਾਤਾ-ਪਿਤਾ ਅਤੇ ਪਰਿਵਾਰ ਦਾ ਯੋਗਦਾਨ ਘੱਟ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ। ਪਰ ਇੰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਜਿਵੇਂ ਪਰਿਵਾਰ ਦਾ ਯੋਗਦਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਸਮਾਜ ਦਾ ਵੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਯੋਗਦਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਸਾਨੂੰ ਇੱਥੇ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਲਈ। ਅਸੀਂ ਸਿਰਫ਼ ਆਪਣੇ ਕਾਰਨ ਨਹੀਂ ਪਹੁੰਚਦੇ, ਸਿਰਫ਼ ਆਪਣੇ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਕਾਰਨ ਨਹੀਂ ਪਹੁੰਚਦੇ। ਇਸ ਵਿਸ਼ਾਲ ਦੇਸ਼ ਦੇ 140 ਕਰੋੜ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਦੇ ਯੋਗਦਾਨ ਦਾ ਵੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਮਹੱਤਵ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਾਡਾ ਫਰਜ਼ ਆਪਣੇ ਪ੍ਰਤੀ, ਆਪਣੇ ਪਰਿਵਾਰ ਪ੍ਰਤੀ, ਓਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪੂਰੇ ਸਮਾਜ ਪ੍ਰਤੀ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਮੈਨੂੰ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਹੈ ਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਕੰਮਾਂ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਹੋਰ ਵੀ ਯੋਗ ਬਣਾਵੋਗੇ। ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਹੁਤ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ।

 

ਸਾਥੀਓ,

ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਭ ਨੂੰ ਪਤਾ ਹੈ ਕਿ ਹੁਣੇ ਦੋ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਮੈਂ 5 ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀ ਯਾਤਰਾ ਕਰਕੇ ਵਾਪਸ ਆਇਆ ਹਾਂ। ਕਹਿਣ ਨੂੰ ਤਾਂ ਇਹ ਸਿਰਫ਼ ਪੰਜ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀ ਯਾਤਰਾ ਸੀ, ਪਰ ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਮੇਰੀ ਦਰਜਨਾਂ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀਆਂ ਵੱਡੀਆਂ-ਵੱਡੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਹੋਈ, ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਚਰਚਾ ਹੋਈ, ਮੁਲਾਕਾਤ ਹੋਈ ਅਤੇ ਹਰ ਥਾਂ ਮੈਂ ਇੱਕ ਗੱਲ ਬਰਾਬਰ ਤੌਰ 'ਤੇ ਮਹਿਸੂਸ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ, ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਅਤੇ ਭਾਰਤ ਦੀ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਪ੍ਰਗਤੀ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਬਹੁਤ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਹੈ। ਅੱਜ ਦੁਨੀਆ ਭਾਰਤ ਦੀ ਵਿਕਾਸ ਯਾਤਰਾ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਬਣਨਾ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਵੀ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨਾਲ ਭਾਗੀਦਾਰੀ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸਦਾ ਮੰਤਵ ਇਹੋ ਹੈ ਕਿ ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਮੌਕੇ ਮਿਲਣ, ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਮਿਲੇ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਖਿੜ ਜਾਵੇ। ਮੈਂ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰੀ ਤਜਰਬਾ ਵੀ ਮਿਲੇ। ਇਸ ਯਾਤਰਾ ਦੌਰਾਨ, ਜਿਵੇਂ ਮੈਂ ਨੀਦਰਲੈਂਡਜ਼ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰਾਂ ਤਾਂ ਨੀਦਰਲੈਂਡਜ਼ ਨਾਲ ਸੈਮੀਕੰਡਟਰ, ਪਾਣੀ, ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਤੇ ਉੱਨਤ ਨਿਰਮਾਣ 'ਤੇ ਚਰਚਾ ਹੋਈ - ਸਵੀਡਨ ਨਾਲ ਮਸਨੂਈ ਬੁੱਧੀ ਅਤੇ ਡਿਜੀਟਲ ਨਵੀਨਤਾ 'ਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਦੀਆਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਹੋਈਆਂ - ਨਾਰਵੇ ਨਾਲ ਗ੍ਰੀਨ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਅਤੇ ਸਮੁੰਦਰੀ ਸਹਿਯੋਗ ਦੀ ਗੱਲ ਅੱਗੇ ਵਧੀ ਹੈ, ਸੰਯੁਕਤ ਅਰਬ ਅਮੀਰਾਤ ਨਾਲ ਰਣਨੀਤਿਕ ਊਰਜਾ ਅਤੇ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਭਾਗੀਦਾਰੀਆਂ 'ਤੇ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਸਮਝੌਤੇ ਹੋਏ, ਇਟਲੀ ਨਾਲ ਰੱਖਿਆ, ਅਤਿ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਖਣਿਜ, ਵਿਗਿਆਨ ਅਤੇ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਵਰਗੇ ਬੇਹੱਦ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਭਾਗੀਦਾਰੀਆਂ 'ਤੇ ਸਮਝੌਤੇ ਹੋਏ।

ਸਾਥੀਓ,

ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਸਮਝੌਤਿਆਂ ਦਾ ਸਿੱਧਾ ਲਾਭ ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਣ ਵਾਲਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਤੁਸੀਂ ਦੇਖਿਆ ਹੋਵੇਗਾ, ਇਹ ਸਾਰੇ ਵਿਸ਼ੇ ਇੱਕ ਰੌਸ਼ਨ ਸਮਰੱਥ ਭਾਰਤ ਦੇ ਭਵਿੱਖ ਦੀ ਗਾਰੰਟੀ ਲੈ ਕੇ ਆਉਂਦੇ ਹਨ। ਕਿਉਂਕਿ ਹਰ ਨਵਾਂ ਨਿਵੇਸ਼, ਹਰ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਭਾਗੀਦਾਰੀ, ਹਰ ਉਦਯੋਗਿਕ ਸਹਿਯੋਗ, ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਨਵੇਂ ਮੌਕੇ ਤਾਂ ਲੈ ਕੇ ਆਉਂਦਾ ਹੀ ਹੈ, ਪਰ ਅਣਗਿਣਤ ਨਵੇਂ ਮੌਕੇ ਤਿਆਰ ਕਰਦਾ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਨੌਜਵਾਨ ਸਾਥੀਓ,

ਅਸੀਂ ਯਾਦ ਰੱਖਣਾ ਹੈ, ਇਹ ਉਹ ਖੇਤਰ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਵਾਲਾ ਨਿਵੇਸ਼ ਅਤੇ ਭਾਗੀਦਾਰੀ, ਆਉਣ ਵਾਲੇ 3-4 ਦਹਾਕਿਆਂ ਦੀ ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰੀ ਵਿਕਾਸ ਨੂੰ ਰੂਪ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਉਦਯੋਗ ਤਿਆਰ ਕਰਨਗੇ। ਅਤੇ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਤੌਰ 'ਤੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੀ ਇਸ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਭੂਮਿਕਾ ਹੋਵੇਗੀ।

 

ਸਾਥੀਓ,

ਭਾਰਤ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੁਨੀਆ ਦਾ ਇੱਕ ਭਰੋਸੇਯੋਗ ਸਪਲਾਈ ਲੜੀ ਭਾਗੀਦਾਰ ਬਣ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਇਸਦਾ ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ। ਜਿਵੇਂ ਨੀਦਰਲੈਂਡਜ਼ ਦੀ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਕੰਪਨੀ, ਤੁਹਾਡੇ ਵਿੱਚੋਂ ਬਹੁਤ ਲੋਕ ਇਸ ਨਾਮ ਨਾਲ ਜਾਣੂ ਹੋਣਗੇ ਏਐੱਸਐੱਮਐੱਲ, ਏਐੱਸਐੱਮਐੱਲ ਦੇ ਨਾਲ ਭਾਰਤ ਦੀ ਟਾਟਾ ਕੰਪਨੀ ਦਾ ਸਮਝੌਤਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ, ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਕੁਝ ਹੀ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਇਸ ਕੰਪਨੀ ਨੇ ਸਮਝੌਤਾ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਏਐੱਸਐੱਮਐੱਲ-ਟਾਟਾ ਇਲੈਕਟ੍ਰਾਨਿਕਸ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਇਹ ਇਕੱਲਾ ਸਮਝੌਤਾ ਹੀ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਦੇ ਅਣਗਿਣਤ ਨਵੇਂ ਮੌਕੇ ਸਿਰਜੇਗਾ ਅਤੇ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਇੱਕ ਅਗਲੀ ਪੀੜ੍ਹੀ ਦੀ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਦਾ ਦਰਵਾਜ਼ਾ ਖੋਲ੍ਹ ਦੇਵੇਗਾ। ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਵੀਡਨ ਨਾਲ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਅਤੇ ਮਸਨੂਈ ਬੁੱਧੀ ਭਾਗੀਦਾਰੀਆਂ, ਸੰਯੁਕਤ ਅਰਬ ਅਮੀਰਾਤ ਨਾਲ ਸੁਪਰ ਕੰਪਿਉਟਿੰਗ ਸਹਿਯੋਗ, ਭਾਰਤ ਦੀ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਸਮਰੱਥਾ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮਝੌਤਿਆਂ ਨਾਲ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਨਵੇਂ ਮੌਕੇ ਤਾਂ ਹੋਣਗੇ ਹੀ ਹੋਣਗੇ।

ਸਾਥੀਓ,

ਅੱਜ ਸਾਫ਼ ਊਰਜਾ, ਅਤਿ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਖਣਿਜ, ਗ੍ਰੀਨ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਅਤੇ ਟਿਕਾਊ ਨਿਰਮਾਣ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਖੇਤਰ ਵੀ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵੱਧ ਰਹੇ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਜੁੜੀਆਂ ਭਾਗੀਦਾਰੀਆਂ ਇੱਕ ਨਵੀਂ ਅਰਥ-ਵਿਵਸਥਾ ਦੇ, ਨਵੇਂ ਮੌਕਿਆਂ ਦੇ ਦਰਵਾਜ਼ੇ ਖੋਲ੍ਹ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਸਵੀਡਨ, ਨਾਰਵੇ ਅਤੇ ਇਟਲੀ ਵਰਗੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨਾਲ, ਹਰਿਤ ਬਦਲਾਅ ਅਤੇ ਟਿਕਾਊ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਵਿੱਚ ਵੀ ਸਹਿਯੋਗ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਹ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਨਿਰਮਾਣ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਭਵਿੱਖ ਦੇ ਉਦਯੋਗਾਂ ਵਿੱਚ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰੇਗਾ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਭਾਰਤ ਨੇ ਬੰਦਰਗਾਹਾਂ, ਜਹਾਜ਼ਰਾਨੀ ਅਤੇ ਸਮੁੰਦਰੀ ਬੁਨਿਆਦੀ ਢਾਂਚੇ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਸਮਝੌਤਿਆਂ 'ਤੇ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਸੰਯੁਕਤ ਅਰਬ ਅਮੀਰਾਤ ਅਤੇ ਨਾਰਵੇ ਨਾਲ ਭਾਗੀਦਾਰੀ ਤੋਂ ਭਾਰਤ ਦਾ ਜਹਾਜ਼ ਨਿਰਮਾਣ ਤੰਤਰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੋਵੇਗਾ। ਅਤੇ ਤੁਸੀਂ ਤਾਂ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ਜਹਾਜ਼ ਨਿਰਮਾਣ ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ, ਹੁਨਰਮੰਦ ਮਨੁੱਖੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਬਹੁਤ ਲੋੜ ਪੈਂਦੀ ਹੈ। ਭਾਵ ਭਾਰਤ ਦੇ ਇੰਜੀਨੀਅਰਾਂ, ਤਕਨੀਸ਼ੀਅਨਾਂ ਅਤੇ ਹੁਨਰਮੰਦ ਕਰਮਚਾਰੀਆਂ ਲਈ ਏਨੀ ਮੰਗ ਵਧਣ ਵਾਲੀ ਹੈ, ਜਿਸਦੀ ਤੁਸੀਂ ਕਲਪਨਾ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ, ਇੰਨੇ ਮੌਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋਣਗੇ।

ਸਾਥੀਓ,

ਹਰ ਨਵੀਂ ਭਾਗੀਦਾਰੀ ਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਭਾਰਤੀ ਨਵੀਂ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਵਾਲੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ, ਖੋਜਾਰਥੀਆਂ ਅਤੇ ਨੌਜਵਾਨ ਪੇਸ਼ਾਵਰਾਂ ਲਈ ਦੁਨੀਆ ਨਾਲ ਜੁੜਨ ਦੇ ਨਵੇਂ ਰਸਤੇ ਬਣਾ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਇਸ ਨਾਲ ਭਾਰਤੀ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਉੱਨਤ ਮੁਹਾਰਤ, ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰੀ ਬਾਜ਼ਾਰਾਂ ਅਤੇ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਨਵੇਂ ਮੌਕੇ ਵੀ ਮਿਲਣਗੇ। ਅੱਜ ਦੁਨੀਆ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦਾ ਸਨਮਾਨ ਕਰਦੀ ਹੈ, ਜੋ ਨਵੀਨਤਾ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਜੋ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਜੋ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਸਪੁਰਦਗੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ। ਭਾਰਤ ਅੱਜ ਇਨ੍ਹਾਂ ਤਿੰਨਾਂ ਦਿਸ਼ਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਅਤੇ ਇਸ ਬਦਲਾਅ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਤਾਕਤ ਤੁਸੀਂ ਸਭ ਮੇਰੇ ਨੌਜਵਾਨ ਸਾਥੀ ਹੋ, ਭਾਰਤ ਦਾ ਨੌਜਵਾਨ ਹੈ, ਅਤੇ ਮੈਂ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ ਵੀ ਜਾਂਦਾ ਹਾਂ, ਮੈਂ ਕਾਫ਼ੀ ਸਮਾਂ ਚਰਚਾ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦੀ ਨੌਜਵਾਨ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਚਰਚਾ ਕਰਦਾ ਹਾਂ।

 

ਸਾਥੀਓ,

ਅੱਜ ਹਰ ਭਾਰਤੀ, ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਸੰਕਲਪ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵੱਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਹ ਸੰਕਲਪ, 2047 ਤੱਕ ਵਿਕਸਿਤ ਭਾਰਤ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ਹੈ। ਇਸ ਟੀਚੇ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਲਈ ਅੱਜ ਦੇਸ਼ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਨਿਵੇਸ਼ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਇਸ ਨਿਵੇਸ਼ ਨਾਲ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਦੇ ਲੱਖਾਂ ਨਵੇਂ ਮੌਕੇ ਬਣ ਰਹੇ ਹਨ। ਜਿਵੇਂ, ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਨਿਰਮਾਣ ਦੀ ਪੂਰੀ ਸਪਲਾਈ ਲੜੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦੀਆਂ 10 ਵੱਡੀਆਂ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਇਕਾਈਆਂ, ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਆਪਣਾ ਝੰਡਾ ਲਹਿਰਾਉਣਗੀਆਂ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਹੋਵੇਗੀ, ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੀ ਗਿਆਨ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਹੋਵੇਗੀ, ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੀ ਵਚਨਬੱਧਤਾ ਹੋਵੇਗੀ ਅਤੇ ਸੁਭਾਵਿਕ ਹੈ ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਤਾਂ ਹੈ ਹੀ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਅੱਜ ਜਹਾਜ਼ ਨਿਰਮਾਣ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਜਹਾਜ਼ ਮੁਰੰਮਤ ਅਤੇ ਓਵਰਹੌਲਿੰਗ ਦਾ ਵੀ ਤੰਤਰ ਵਿਕਸਿਤ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸ ਲਈ ਕਰੀਬ 75 ਹਜ਼ਾਰ ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦਾ ਨਿਵੇਸ਼ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਹੀ ਅਸੀਂ ਪੂਰਾ ਰੱਖ-ਰਖਾਅ, ਓਵਰਹੌਲਿੰਗ ਅਤੇ ਮੁਰੰਮਤ ਸਹੂਲਤ ਤੰਤਰ ਤਿਆਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਇਸ ਨਾਲ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਹਵਾਈ ਯਾਤਰਾ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਮਦਦ ਮਿਲਣ ਵਾਲੀ ਹੈ, ਅਤੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਦਾ ਨਵਾਂ ਖੇਤਰ ਤਾਂ ਖੁੱਲ੍ਹਣਾ ਹੀ ਖੁੱਲ੍ਹਣਾ ਹੈ।

ਸਾਥੀਓ,

ਭਾਰਤ ਅੱਜ ਇੱਕ ਵੱਡਾ ਇਲੈਕਟ੍ਰਾਨਿਕ ਨਿਰਮਾਤਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਇਲੈਕਟ੍ਰਾਨਿਕਸ ਨਾਲ ਜੁੜੀ ਸੰਪੂਰਨ ਮੁੱਲ ਲੜੀ, ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਹੀ ਤਿਆਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਇਸ ਲਈ ਜੋ ਉਤਪਾਦਨ ਆਧਾਰਤ ਪ੍ਰੋਤਸਾਹਨ ਯੋਜਨਾ ਚੱਲ ਰਹੀ ਹੈ, ਉਸ ਨਾਲ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਰਿਕਾਰਡ ਇਲੈਕਟ੍ਰਾਨਿਕ ਉਤਪਾਦਨ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਅਤੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਲੱਖਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਨੌਕਰੀਆਂ ਵੀ ਮਿਲ ਰਹੀਆਂ ਹਨ।

ਸਾਥੀਓ,

ਅਜਿਹੇ ਅਨੇਕਾਂ ਅਭਿਆਨਾਂ 'ਤੇ ਭਾਰਤ ਦਾ ਸਰਕਾਰੀ ਅਤੇ ਨਿੱਜੀ ਖੇਤਰ ਮਿਲ ਕੇ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਨਿਵੇਸ਼ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਹ ਨਿਵੇਸ਼ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਹੀ ਨੌਕਰੀਆਂ ਦੇ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸੁਪਨੇ ਪੂਰੇ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇੱਕ ਸਰਕਾਰੀ ਕਰਮਚਾਰੀ ਹੋਣ ਦੇ ਨਾਤੇ, ਜੋ ਕਿ ਅੱਜ ਨਿਯੁਕਤੀ ਪੱਤਰ ਮਿਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਡੀ ਪਛਾਣ ਬਣਨ ਵਾਲੀ ਹੈ, ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਸਰਕਾਰੀ ਕਰਮਚਾਰੀ ਹੋ। ਤਾਂ ਉਸ ਨਾਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵੀ ਹਮੇਸ਼ਾ ਇਹ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਹੈ ਕਿ ਕਾਰੋਬਾਰ ਕਰਨ ਦੀ ਸੌਖ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਕਿੰਨੀ ਵੱਡੀ ਤਰਜੀਹ ਹੈ।

 

ਸਾਥੀਓ,

ਭਾਰਤ ਦੀ ਵਿਕਾਸ ਕਹਾਣੀ ਅਤੇ ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਸਿਰਜਣਾ ਵਿੱਚ ਇਹ ਮੰਨੀ ਹੋਈ ਗੱਲ ਹੈ, ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਜਾਣਦੇ ਹੋ। ਬੁਨਿਆਦੀ ਢਾਂਚੇ ਦੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਭੂਮਿਕਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਜਦੋਂ ਪਿੰਡ, ਛੋਟੇ ਸ਼ਹਿਰ ਅਤੇ ਦੂਰ-ਦੁਰਾਡੇ ਦੇ ਇਲਾਕੇ ਵਿਕਾਸ ਨਾਲ ਜੁੜਦੇ ਹਨ, ਤਾਂ ਹੀ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਤਰੱਕੀ ਦਾ ਲਾਭ ਵੱਧ ਲੋਕਾਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਦਾ ਹੈ। ਪਿਛਲੇ 12 ਵਰ੍ਹਿਆਂ ਵਿੱਚ ਰੇਲਵੇ, ਰਾਜਮਾਰਗ, ਹਵਾਈ ਅੱਡੇ, ਰਸਦ ਪ੍ਰਬੰਧ, ਬੰਦਰਗਾਹਾਂ, ਡਿਜੀਟਲ ਬੁਨਿਆਦੀ ਢਾਂਚੇ 'ਤੇ ਕਲਪਨਾ ਤੋਂ ਪਰੇ ਤੇਜ਼ ਗਤੀ ਨਾਲ ਵਿਸਥਾਰ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਵਿਕਾਸ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਹਰ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਕੰਮ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਅੱਜ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ, ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ 100 ਕਿੱਲੋਮੀਟਰ ਜਾਵੋਗੇ, ਤਾਂ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਕੋਈ ਨਾ ਕੋਈ ਕੰਮ ਚੱਲਦਾ ਹੋਇਆ ਤੁਹਾਨੂੰ ਨਜ਼ਰ ਆਵੇਗਾ। ਅੱਜ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਬਦਲਾਅ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਦਿਖਾਈ ਦੇ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਸੰਪਰਕ ਵਧਣ ਨਾਲ ਕਿਸਾਨਾਂ, ਛੋਟੇ ਵਪਾਰੀਆਂ, ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਲਈ ਨਵੇਂ ਰਸਤੇ ਖੁੱਲ੍ਹੇ ਹਨ। ਅੱਜ ਕਰੋੜਾਂ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਪੱਕਾ ਘਰ ਮਿਲਿਆ ਹੈ। ਭਾਵ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਕਈ ਦੇਸ਼ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਕੋਲ ਕੁੱਲ ਘਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਉਸ ਤੋਂ ਕਈ ਗੁਣਾ ਘਰ ਅਸੀਂ ਨਵੇਂ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਾਂ। ਏਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ, ਜੋ ਮੇਰਾ ਸਫ਼ਾਈ ਦਾ ਅਭਿਆਨ ਹੈ, ਉਸਨੂੰ ਤਾਂ ਮੈਂ ਕਦੇ ਵੀ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਭੁੱਲਣ ਨਹੀਂ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ, ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਮੈਂ ਖੁਦ ਭੁੱਲਦਾ ਹਾਂ, ਉਸ ਵਿੱਚ ਪਖ਼ਾਨੇ ਦੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਭੂਮਿਕਾ ਹੈ, ਅਸੀਂ ਉਸ 'ਤੇ ਵੀ ਜ਼ੋਰ ਦੇ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਕਰੋੜਾਂ ਘਰਾਂ ਤੱਕ ਅੱਜ ਬਿਜਲੀ ਪਹੁੰਚੀ ਹੈ। ਛੱਤ 'ਤੇ ਸੌਰ ਊਰਜਾ, ਕਿੰਨੇ ਨਵੇਂ-ਨਵੇਂ ਵਿਕਰੇਤਾ ਮੈਦਾਨ ਵਿੱਚ ਆਏ ਹਨ। ਹੁਣ ਵੇਖੋ ਜਲ ਜੀਵਨ ਮਿਸ਼ਨ ਨਾਲ, ਟੂਟੀ ਰਾਹੀਂ ਪਾਣੀ ਪਹੁੰਚਾਉਣਾ, ਮੈਂ ਹੁਣੇ ਵੇਖ ਰਿਹਾ ਸੀ, ਕਿ ਮੈਂ ਚਾਹੁੰਦਾ ਸੀ ਕਿ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਈਪ ਰਾਹੀਂ ਗੈਸ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਧਣ, ਤਾਂ ਮੈਨੂੰ ਪਲੰਬਰ ਨਹੀਂ ਮਿਲ ਰਹੇ ਸਨ, ਘਾਟ ਪੈ ਰਹੀ ਸੀ, ਕਿਉਂਕਿ ਜਲ ਜੀਵਨ ਮਿਸ਼ਨ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਪਲੰਬਰ ਉੱਥੇ ਲੱਗੇ ਹੋਏ ਸਨ। ਹੁਣ ਇੱਥੇ ਮੈਨੂੰ ਊਰਜਾ ਲਈ ਵੱਡੇ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਈਪ ਰਾਹੀਂ ਗੈਸ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧਾਉਣੇ ਸਨ, ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਕਲਪਨਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਿ ਕਦੇ-ਕਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਪਏ ਤਾਂ ਲੋਕ ਘੱਟ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ।

ਸਾਥੀਓ,

ਇਨ੍ਹਾਂ ਤਬਦੀਲੀਆਂ ਦਾ ਅਸਰ ਸਿਰਫ਼ ਆਮ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਦੀਆਂ ਸਹੂਲਤਾਂ ਤੱਕ ਸੀਮਤ ਨਹੀਂ ਰਹਿੰਦਾ। ਪਿੰਡ ਤੱਕ ਸੜਕ ਪਹੁੰਚੀ, ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਤੱਕ ਆਉਣਾ-ਜਾਣਾ ਸੌਖਾ ਹੋਇਆ। ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਸਹੂਲਤ ਬਿਹਤਰ ਹੋਈ, ਤਾਂ ਛੋਟੇ ਉਦਯੋਗ-ਧੰਦੇ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਲੱਗੇ। ਪਿੰਡ ਵਿੱਚ ਵੀ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਵਿੱਚ ਮੁੱਲ ਵਾਧਾ ਹੋਣ ਲੱਗਾ। ਪਹਿਲਾਂ ਜੇਕਰ ਉਹ ਲਾਲ ਮਿਰਚ ਵੇਚਦੇ ਸਨ, ਹੁਣ ਬਿਜਲੀ ਆਈ ਤਾਂ ਲਾਲ ਮਿਰਚ ਦਾ ਚੂਰਨ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ, ਚੂਰਨ ਬਣਾਕੇ ਪੈਕਟ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ, ਪੈਕਟ ਬਣਾਕੇ ਵੇਚਦੇ ਹਨ। ਤਾਂ ਪਿੰਡ ਵਿੱਚ ਵੀ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਉਦਯੋਗ ਇਸ ਕਾਰਨ ਵੱਧਦੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਡਿਜੀਟਲ ਸੰਪਰਕ ਵਧਿਆ, ਤਾਂ ਪਿੰਡ ਦੇ ਲੋਕ ਵੀ ਪੂਰੀ ਦੁਨੀਆ ਨਾਲ ਜੁੜ ਰਹੇ ਹਨ, ਆਧੁਨਿਕਤਾ ਨਾਲ ਜੁੜ ਰਹੇ ਹਨ। ਸ਼ਹਿਰ ਅਤੇ ਪਿੰਡ ਦਾ ਫ਼ਰਕ ਮਿਟਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਇਸ ਨਾਲ ਅਰਥ-ਵਿਵਸਥਾ ਦੀ ਗਤੀ ਤੇਜ਼ ਹੋਈ ਹੈ। ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਭ ਦਾ ਸਕਾਰਾਤਮਕ ਪ੍ਰਭਾਵ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੇ ਰੌਸ਼ਨ ਭਵਿੱਖ ਦੀ ਗਾਰੰਟੀ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਤਾਂ ਬਣਦੇ ਹੀ ਬਣਦੇ ਹਨ, ਪਰ ਰਾਸ਼ਟਰ ਵੀ ਇੱਕ ਨਵੇਂ ਸਵੈ ਮਾਣ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵਧਦਾ ਹੈ, ਲੱਖਾਂ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਨਵੇਂ ਮੌਕੇ ਵੀ ਮਿਲਦੇ ਹਨ।

ਸਾਥੀਓ,

ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨ ਕੋਲ ਜਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅੱਗੇ ਵੱਧਣ ਦੇ, ਆਪਣੇ ਸੁਪਨੇ ਪੂਰੇ ਕਰਨ ਦੇ ਮੌਕੇ ਹਨ, ਅਜਿਹਾ ਮੌਕਾ ਪਹਿਲਾਂ ਨਹੀਂ ਮਿਲਿਆ ਹੈ, ਮੈਂ ਕਿਸੇ ਦਾ ਦੋਸ਼ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ, ਪਰ ਇਹ ਹਕੀਕਤ ਹੈ ਕਿ ਅੱਜ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ ਗਤੀ ਨਾਲ ਸਭ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਭਿੰਨਤਾਵਾਂ ਨਾਲ ਭਰਿਆ ਹੋਇਆ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਅੱਜ ਨਿਰਮਾਣ, ਤਕਨਾਲੋਜੀ, ਨਵੀਂ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਵਾਲੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ, ਡਿਜੀਟਲ ਸੇਵਾਵਾਂ, ਰੇਲਵੇ, ਰੱਖਿਆ, ਇੰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਪੁਲਾੜ, ਅਜਿਹੇ ਅਨੇਕ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਅਣਗਿਣਤ ਮੌਕੇ ਸਾਡਾ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਸਾਡਾ ਯਤਨ ਹੈ ਕਿ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਨੌਜਵਾਨ ਨਵੇਂ ਮੌਕਿਆਂ ਦਾ ਲਾਭ ਲੈ ਸਕਣ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਦਿਖਾਉਣ ਦਾ ਪੂਰਾ ਮੌਕਾ ਮਿਲੇ। ਇਸ ਲਈ, ਹੁਨਰ ਵਿਕਾਸ, ਉਦਯੋਗ ਨਾਲ ਜੁੜੀ ਸਿੱਖਿਆ ਅਤੇ ਭਵਿੱਖ ਦੀ ਤਕਨਾਲੋਜੀ 'ਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਉਦਯੋਗਿਕ ਸਿਖਲਾਈ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਨੂੰ ਆਧੁਨਿਕ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਹੁਨਰ ਸਿਖਲਾਈ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਸੇਤੂ ਵਰਗੇ ਅਭਿਆਨ ਇਸੇ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ।

 

ਸਾਥੀਓ,

ਪਿਛਲੇ ਕੁਝ ਵਰ੍ਹਿਆਂ ਵਿੱਚ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਸਵੈ-ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਅਤੇ ਉਦਮਤਾ ਦਾ ਇੱਕ ਨਵਾਂ ਸਭਿਆਚਾਰ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਦੁਨੀਆ ਦਾ ਤੀਜਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਸਟਾਰਟ ਅੱਪ ਤੰਤਰ ਹੈ। ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ 2 ਲੱਖ 30 ਹਜ਼ਾਰ ਤੋਂ ਵੱਧ, ਇਹ ਅੰਕੜਾ ਯਾਦ ਰੱਖੋ, 2 ਲੱਖ 30 ਹਜ਼ਾਰ ਤੋਂ ਵੱਧ ਮਾਨਤਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਸਟਾਰਟ ਅੱਪ ਹਨ। ਅਤੇ ਉਸ ਵਿੱਚ ਵੀ ਦੋ-ਚਾਰ ਨੌਜਵਾਨ ਵੀ ਜੁੜੇ ਹੋਏ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਅਹਿਮ ਗੱਲ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਬਦਲਾਅ ਸਿਰਫ਼ ਵੱਡੇ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਤੱਕ ਸੀਮਤ ਨਹੀਂ ਹੈ ਅਤੇ ਮੈਨੂੰ ਇਸ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਖੁਸ਼ੀ ਹੈ। ਅੱਜਕੱਲ੍ਹ ਤਾਂ ਦੂਜੇ ਅਤੇ ਤੀਜੇ ਪੱਧਰ ਦੇ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨ ਵੀ, ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਸਟਾਰਟ ਅੱਪ ਅਤੇ ਨਵੀਨਤਾ ਦੀ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਤਾਕਤ ਦਿਖਾ ਰਹੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਪੈ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਹ ਬਦਲਾਅ ਹੁਣ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਅਰਥ-ਵਿਵਸਥਾ ਦਾ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹਿੱਸਾ ਹੈ। ਇਸ ਬਦਲਾਅ ਵਿੱਚ ਸਾਡੀ ਨਾਰੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਵੀ ਲਗਾਤਾਰ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ। ਅੱਜ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਮਹਿਲਾ ਅਗਵਾਈ ਸਟਾਰਟ ਅੱਪ ਹਨ, ਇਹ ਜਦੋਂ ਸੁਣਦੇ ਹਾਂ ਨਾ ਮਨ ਮਾਣ ਨਾਲ ਭਰ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਮੈਂ ਤਾਂ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਦੱਸਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਸਾਡੇ ਇੱਥੇ ਸਟਾਰਟ ਅੱਪ ਵਿੱਚ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਦੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਭੂਮਿਕਾ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ, ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਅੱਗੇ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਮੁਦਰਾ ਯੋਜਨਾ ਦੇ ਤਹਿਤ ਕਰੋੜਾਂ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵਿੱਤੀ ਸਹਾਇਤਾ ਮਿਲੀ ਹੈ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਸਵਾਨਿਧੀ ਵਰਗੀਆਂ ਯੋਜਨਾਵਾਂ ਨੇ ਵੀ ਲੱਖਾਂ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਨੂੰ ਆਤਮ-ਨਿਰਭਰ ਬਣਨ ਦਾ ਮੌਕਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਅੱਜ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ, ਛੋਟੇ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ, ਪਹਿਲਾਂ ਤੋਂ ਵੱਧ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਆਪਣੇ ਦਮ 'ਤੇ ਨਵੇਂ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਹਨ।

ਸਾਥੀਓ,

ਨੀਤੀਆਂ ਅਤੇ ਫ਼ੈਸਲਿਆਂ ਦੀ ਇਸ ਮੁਹਿੰਮ ਦਰਮਿਆਨ, ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਹੋਰ ਗੱਲ ਯਾਦ ਰੱਖਣੀ ਹੈ। ਕਿਸੇ ਵੀ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦੀ ਅਸਲੀ ਤਾਕਤ ਉਸਦੇ ਲੋਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਜਨਤਾ ਜਨਾਰਦਨ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਲੋਕ ਸ਼ਕਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਲੋਕ ਸ਼ਕਤੀ ਹੀ ਤਾਂ ਰਾਸ਼ਟਰ ਸ਼ਕਤੀ ਬਣਦੀ ਹੈ। ਤੁਸੀਂ ਸਭ ਜਿਸ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਬਣਨ ਜਾ ਰਹੇ ਹੋ, ਉਸਦਾ ਸਿੱਧਾ ਸਬੰਧ ਕਰੋੜਾਂ-ਕਰੋੜਾਂ ਦੇਸ਼-ਵਾਸੀਆਂ ਦੇ ਜੀਵਨ ਨਾਲ ਹੈ, ਕਰੋੜਾਂ-ਕਰੋੜਾਂ ਦੇਸ਼-ਵਾਸੀਆਂ ਦੀਆਂ ਆਸਾਂ-ਉਮੀਦਾਂ ਨਾਲ ਹੈ। ਸਰਕਾਰੀ ਨੌਕਰੀ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਜੀਵਨ ਨੂੰ ਸੌਖਾ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਮਾਧਿਅਮ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਤੁਸੀਂ ਜਿਸ ਵੀ ਵਿਭਾਗ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰੋਗੇ, ਉੱਥੇ ਤੁਹਾਡੇ ਵਰਤਾਓ, ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲਤਾ ਅਤੇ ਕੰਮ ਕਰਨ ਦੇ ਢੰਗ ਦਾ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵ ਹੋਵੇਗਾ। ਦੇਸ਼ ਨੇ ਤੁਹਾਡੇ 'ਤੇ ਭਰੋਸਾ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਹੁਣ ਇਹ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਤੁਹਾਡੀ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਕੰਮ ਨਾਲ, ਆਪਣੇ ਆਚਰਨ ਨਾਲ, ਆਪਣੀ ਬੋਲੀ ਨਾਲ, ਆਪਣੇ ਵਰਤਾਓ ਨਾਲ, ਉਸ ਭਰੋਸੇ ਨੂੰ ਹੋਰ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਦਿਓਗੇ। ਦੇਸ਼-ਵਾਸੀਆਂ ਦੇ ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਨਵਾਂ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਭਰ ਜਾਵੇਗਾ, ਤੁਹਾਨੂੰ ਮਿਲਦੇ ਹੀ ਉਹ ਨਵੀਂ ਆਸ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵਧੇਗਾ, ਇਸ ਲਈ ਹਰ ਨੌਜਵਾਨ ਕਰਮਯੋਗੀ ਆਪਣੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਵਾਂਗ ਦੇਖੇ। ਅਤੇ ਮੇਰੇ ਲਈ ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਬਹੁਤ ਕੁਝ ਹੋ। ਪਹਿਲਾਂ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਸੁਣਦੇ ਸੀ ਨਾ – ਸਹਸਤ੍ਰਬਾਹੂ ਵਾਲੇ ਫਲਾਣੇ, ਸਹਸਤ੍ਰਬਾਹੂ ਵਾਲੇ ਢਕਾਣੇ। ਅੱਜ ਸਰਕਾਰ ਦੀਆਂ ਬਾਂਹਾਂ ਤੁਸੀਂ ਹੀ ਹੋ, ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਤੁਸੀਂ ਹੀ ਹੋ, ਜੋ ਪਹਿਲਾਂ ਤੋਂ ਸਰਕਾਰ ਵਿੱਚ ਹਨ ਉਹ ਵੀ ਹਨ, ਜੋ ਨਵੇਂ ਆ ਰਹੇ ਹਨ ਉਹ ਵੀ ਹਨ। ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦੀਆਂ ਅਭਿਲਾਸ਼ਾਵਾਂ ਬਹੁਤ ਵਧ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਮੈਂ ਇਸਨੂੰ ਵਿਕਾਸ ਦਾ ਸਕਾਰਾਤਮਕ ਸੰਕੇਤ ਮੰਨਦਾ ਹਾਂ। ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦੀਆਂ ਅਭਿਲਾਸ਼ਾਵਾਂ ਨੂੰ ਸਮਝਣਾ ਵੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਓਨੀ ਹੀ ਤੇਜ਼ ਗਤੀ ਨਾਲ ਕੰਮ ਵੀ ਕਰਨਾ ਹੈ। ਅਜਿਹੇ ਵਿੱਚ ਸਰਕਾਰੀ ਸੇਵਾ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੋ ਗਈ ਹੈ। ਤੁਹਾਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਸਿੱਖਦੇ ਰਹਿਣਾ ਪਵੇਗਾ। ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਨਵੀਂ ਤਕਨਾਲੋਜੀ, ਨਵੇਂ ਪ੍ਰਬੰਧ ਅਤੇ ਨਵੀਆਂ ਲੋੜਾਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਇਸ ਵਿੱਚ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਕਰੂਪ ਸਰਕਾਰੀ ਆਨਲਾਈਨ ਸਿਖਲਾਈ ਕਰਮਯੋਗੀ ਮੰਚ ਤੋਂ ਬਹੁਤ ਮਦਦ ਮਿਲੇਗੀ। ਕਰਮਯੋਗੀ ਪ੍ਰਾਰੰਭ ਵਰਗੇ ਮਾਡਿਊਲ ਤੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਆਪਣੀਆਂ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀਆਂ ਸਮਝਣ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਸਹੂਲਤ ਹੋਵੇਗੀ। ਮੇਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਅਪੀਲ ਹੈ ਕਿ ਇਸਦਾ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਲਾਭ ਲਓ।

ਸਾਥੀਓ,

ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਦਾ ਨੌਜਵਾਨ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਹਰ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਪਛਾਣ ਬਣਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਹ ਜਜ਼ਬਾ, ਇਹ ਊਰਜਾ ਲੋਕ ਸੇਵਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਵਿਕਸਿਤ ਭਾਰਤ ਅਜਿਹੇ ਹੀ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੇ ਯਤਨਾਂ ਨਾਲ ਬਣੇਗਾ, ਜੋ ਆਪਣੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਸੇਵਾ ਦਾ ਮਾਧਿਅਮ ਮੰਨਦੇ ਹਨ, ਲੋਕ ਸੇਵਾ ਦਾ ਮਾਧਿਅਮ ਮੰਨਦੇ ਹਨ, ਅਤੇ ਸਾਡੇ ਇੱਥੇ ਤਾਂ ਕਿਹਾ ਗਿਆ ਹੈ – ਲੋਕ ਸੇਵਾ ਹੀ ਪ੍ਰਭੂ ਸੇਵਾ ਹੈ। ਮੈਨੂੰ ਪੂਰਾ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਹੈ, ਅੱਜ ਨਿਯੁਕਤੀ ਪੱਤਰ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਸਾਡੇ ਨੌਜਵਾਨ ਸਾਥੀ, ਭਾਰਤ ਦੀ ਵਿਕਾਸ ਯਾਤਰਾ ਨੂੰ ਨਵੀਂ ਰਫ਼ਤਾਰ ਦੇਣਗੇ। ਤੁਹਾਡੇ ਕੰਮ, ਤੁਹਾਡੇ ਫ਼ੈਸਲਿਆਂ ਨਾਲ ਵਿਕਸਿਤ ਭਾਰਤ ਦੇ ਸੰਕਲਪ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਹੋਵੇਗੀ, ਅਤੇ ਤੁਸੀਂ ਉਹ ਮੰਤਰ ਕਦੇ ਭੁੱਲਣਾ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਸਾਡਾ ਮੰਤਰ ਹੈ – ਨਾਗਰਿਕ ਦੇਵੋ ਭਵ। ਨਾਗਰਿਕ ਦੇਵੋ ਭਵ। ਨਾਗਰਿਕ ਦਾ ਭਲਾ ਹੀ ਸਾਡਾ ਕਰਤੱਵ ਹੈ। ਮੈਂ ਇੱਕ ਵਾਰ ਫਿਰ ਅੱਜ ਨਿਯੁਕਤੀ ਪੱਤਰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਦੇ ਜੀਵਨ ਲਈ, ਦੇਸ਼ ਸੇਵਾ ਦੇ ਇਸ ਮੌਕੇ ਨੂੰ ਨਿਭਾਉਣ ਲਈ, ਅਨੇਕਾਂ-ਅਨੇਕ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ। ਤੁਹਾਡਾ ਸਭ ਦਾ ਬਹੁਤ-ਬਹੁਤ ਧੰਨਵਾਦ।