मंच पर विराजमान मंत्रि परिषद के मेरे सभी साथी, उद्योग जगत के सभी मित्र भिन्न भिन्न देशों के सभी राजदूत और बहुत बड़ी संख्या में पधारे हुए नौजवान दोस्तों,
मैं श्रीमान रविशंकर प्रसाद और उनकी टीम को ह्दय से बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं बधाई देता हूं कि उन्होंने comprehensive integrated approach के साथ भारत के भविष्य को बदलने का एक खाका खींचा है और जिस बारीकी से सारी योजनाओं की रचना की है, मुझे विश्वास है कि करोड़ों देशवासी जिन सपनो को संजो रहे हैं वे सपने साकार हो कर रहेंगे।
उद्योग जगत के कुछ मित्रों को यहां मंच पर, डिजिटल इंडिया के संदर्भ में वे क्या सोचते हैं वे क्या कर सकते हैं के विचार हमे सुनने को मिले। हमारे रविशंकरप्रसाद जी हिसाब लगा रहे थे बैठे बैठे, कि वो क्या बोल रहे हैं और उन्होंने मुझे बताया है कि करीब करीब साढे चार लाख करोड़ रूपये का investment.. और करीब करीब 18 लाख लोगों को रोजगार.. और यह तो जो ऊपर बैठे हैं उन्होंने बताया हैं और नीचे बहुत बड़ी मात्रा में बैठे हैं.. उनका अभी सुनना बाकी है। यहां बहुत बड़ी मात्रा में इस क्षेत्र में पहले से ही काम करने वाले उद्योग जगत के मित्र बैठे हैं।
वक्त बहुत तेजी से बदल चुका है। पहले हम लोग कभी किसी परिवार में जाते थे और छोटे बच्चे से बात करते थे तो बच्चा क्या करता था? अगर आपका चश्मा है तो खींच के ले जाता था या आपकी जेब में पेन है तो उसको उठाता था। लेकिन आज आप मार्क करना कि वह न चश्मे को हाथ लगाता है न पेन को हाथ लगाता है वह आपका मोबाइल फोन छीनता है। मोबाईल फोन हाथ में आते ही ठीक से पकड़ता है, आप मार्क करना.. और अपना शुरू कर देता है और अगर, जैसा चाहे वैसा आपरेशन नहीं होता तो रोने लगता है यानी बाकी वह कुछ समझे या ना समझे डिजिटल ताकत को समझता है। समय की मांग है कि हम इस बदलाव को समझें और अगर हम इस बदलाव को नहीं समझेंगे तो हम कहीं पड़ रहेंगे कोने में दुनिया दूर चली जाएगी और हम देखते ही रह जायेंगे एक समय था कि सदियों पहले लोग बसते थे, नदी के तट पर। गांव बसते थे, शहर बसते थे नदी के तट पर या समुंदर के किनारे पर।
वक्त बदल गया बाद में जहां जहां से हाइवे गुजरते थे, शहर वहां बसना शुरू हुए लेकिन अब मानव जाति वहीं पर बसेगी जहां से ऑप्टिकल फाइबर गुजरता होगा। ये बहुत बड़ा बदलाव आया है और इसलिए अगर विश्व के अंदर सवा सौ करोड़ का देश, अपनी ताकत का अहसास कराना चाहता है तो जो हजारो साल पुरानी महान संस्कति है.. हम सवा सौ करोड़ देश वासी हैं, हम 65 प्रतिशत 35 साल से कम उम्र के हैं, ये गीत गाने से बात बनने वाली नहीं है। ये जो भी विरासत है, जो सामर्थ्य है, उसके साथ आधुनिक विज्ञान को, आधुनिक टेक्नॉलॉजी को जोड़ना अनिवार्य है। अगर demographic dividend.. इसको अगर digital strength नहीं मिलेगी तो ये demographic dividend ..हम global level पर जितनी मात्रा में फायदा उठाना चाहिए नहीं उठा पायेंगे। इसलिए देश को तैयार करने की आवश्यकता है। आज हमारे देश में करीब करीब 25 करोड़-तीस करोड़ internet users हैं। users की संख्या में तो दुनिया में ये संख्या बहुत बड़ी है लेकिन जो इससे वंचित है वो संख्या भी दुनिया के हिसाब से बड़ी है। जिनकी अपनी पहुंच थी जिनकी अपनी ताकत थी जो खुद कर सकता था, जिसको ज़रूरत थी, उन्होंने तो अपना कर लिया। लेकिन जो खुद नहीं कर सकता है, उसको उसके नसीब पर छोड़ देना चाहिए क्या? देश का एक तबका.. वो तो Digital world के साथ बहुत तेज गति से आगे बढ़ता हो और देश का बहुत बड़ा तबका उससे वंचित रह जाए तो जो अमीर और गरीब की खाई के कारण समस्याएं पैदा होती हैं, शहर और गांव में सुविधा के कारण जो खाई पैदा होती है, उससे भंयकर स्थिति Digital Divide के कारण पैदा हो सकती है।
इसलिए यह हमारा दायितव बनता है, हमारी जिम्मेवारी बनती है कि हम इस आधुनिक विज्ञान, जो कि मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति का एक बहुत बड़ा catalyst agent बना हुआ है, उससे गरीब से गरीब भी वंचित नहीं रहना चाहिए। यह सुविधा जब तक हम गांव, गरीब, किसान तक नहीं पहुंचाएंगे तो यह विकास की जो बातें हैं, न वो उसका लाभ उठा पाएगा, न हम उसको सेवा दे पाएंगे। इसलिए इस चुनौती को हमने स्वीकार किया है कि आने वाले वर्षों में, दूर-सुदूर गांव में भी गरीब से गरीब व्यक्ति को भी इस platform को उपलब्ध कराना चाहिए, जिस platform से वो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम..आवश्यकता के अनुसार उपयोग करता रहे। दुनिया जिस प्रकार से बदल रही है, आपने देखा होगा आपको घर में.. मान लीजिए कभी तय करें कि चलो भई किसी restaurant में आज अच्छा खाने जाना है, परिवार के चार लोग बैठकर के चर्चा करें कि कहां जाएंगे और आपका 15-16 साल का बच्चा है, वो सुनता है, तो वो क्या करता है.. तुरंत वो Google गुरू के पास जाता है। Google गुरू से पूछता है कि नजदीक में अच्छे से अच्छा restaurant कौन सा है, अच्छे से अच्छा menu कौन सा है? और वो table पर वहां बैठे बैठे बुक करा देता है। यह इतना बड़ा बदलाव है, इस बदलाव को समझते हुए हमने भी अपनी व्यवस्थाओं को विकसित करना चाहिए। minimum government maximum governance, इस सपने को साकार करने में technology बहुत बड़ा रोल प्ले करती है। e-governance, सामान्य मानव की.. जो शासकीय सेवाओं में उसका हक है, उसको प्राप्त करने के लिए उत्तम से उत्तम मार्ग है। e-governance बहुत ही तेजी से m-governanceमें बदलने वाला है। ‘m’ does not mean Modi Governance, it is mobile governance. सारा कारोबार, सारी आवश्यकतांए, सारी व्यवस्थाएं मोबाइल फोन के ईद-गिर्द.. पूरी सरकार आपके मोबाइल फोन में मौजूद होने वाली है, वो दिन दूर नहीं है।
लेकिन इसके लिए हमें अपने आप को सजग करना होगा, व्यवस्थाएं विकसित करनी होगी। e-governances easy governance, is economical governance.. आर्थिक रूप से अनुकुल यह governance.. और उसको हम जितना बल दे सकें, हमें उसको बल देना है। उसी प्रकार से हमारे सामने समस्या रहती है, सरकार में, एक ही काम के लिए इतनी multiple activity करनी पड़ती है, इतना समय बर्बाद होता है। आधुनिक विज्ञान के माध्यम से conversion इतना सरल होता है.. और जैसा अभी आपको presentation में बताया कि आज सरकार में 10 जगह पर 10 काम हैं तो सारे certificate दस जगह पर देने पड़ते हैं। अब वो सारी मुसीबत चली जाएगी। जब व्यवस्थाएं खड़ी हो जाएंगी तो आपके एक Digital number से उसको सारी चीजें उपलब्ध हो जाएंगी और कारोबार आगे चलता चला जाएगा। आने वाले दिनों में.. आज हम चर्चा करते हैं कि बच्चों को इतना बोझ उठाकर के स्कूल जाना पड़ता है। उनके बक्से में उनके वजन से ज्यादा किताबों का वजन होता है। इन बालकों की समस्या का समाधान भी Digital India में है। सारा syllabus एक छोटे से equipment में वो अपने साथ लेकर के घूम सकता है। इसलिए कुछ लोग, ऐसी जब बात होती है तो उनको लगता है कि यह तो बड़ा elite class के लिए काम है, बड़े लोगों के लिए काम है.. हकीकत नहीं है।
जब satellite छोड़े जाते थे, आज से कुछ वर्षों पहले, तो कुछ लोग डिबेट करते थे कि भारत जैसा गरीब देश! यह satellite किस के लिए छोड़े जा रहे हैं! क्या उपयोग है! लेकिन आज वही satellite, weather forecast अगर सही ढंग से करता है तो सीधा-सीधा फायदा गरीब किसान को होता है। जब खर्चा करते हैं तो आलोचना होती है लेकिन वही बाद में मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। यह सारी योजनाएं जो आपने देखीं.. अब देखिए आज, तो बैंक में जाना वगैरह सब है लेकिन वो दिन अब दूर नहीं है कि बैंक पेपर लेस होने वाला है, बैंक premises less होने वाला है। पूरा बैंकिंग कारोबार आपके मोबाइल फोन से चलने वाला है।
यह जो बदलाव आ रहा है, इस बदलाव के लिए हमें अपने आप को सजग करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। अगर हम देखें तो हम 19वीं शताब्दी से.. तब से इन कामों को तेज गति से आगे बढ़ाने की आवश्यकता थी। जब दुनिया ने Industrial revolution देखा, हम पिछड़ गए, क्यों? क्योंकि हम गुलाम थे। औद्योगिक क्रांति का हमें लाभ नहीं मिला। लेकिन आज जब IT revolution आया, हम आजाद हैं, हम youthful nation हैं और हमारे पास talent है। जहां तक IT की बात होगी, दुनिया हिंदुस्तान का लोहा मानती है। हमें यह मौका गंवाना नहीं है। गुलामी के कालखंड में हमने जो मौका गंवाया, यह मौका हमें IT revolution में गंवाना नहीं है। इसके सामने कुछ और चीजों पर भी बल देने की आवश्यकता है। Petroleum Import की हमारी मजबूरी है, ऊर्जा की आवश्कयता है, जरूरत पड़ती है, हमारे पास source कम है, लाना पड़ता है। लेकिन यह बात गले नहीं उतरती है कि हिंदुस्तान का second highest import electronic goods हैं। क्या यह देश, जहां पर इतने IT Professionals हो, जहां इतनी बड़ी मात्रा में उद्योगकार हों.. और कोई इतनी बड़ी technology भी नहीं है। क्या हम हमारे देश में electronic goods इतनी बड़ी मात्रा में न बना पाएं कि जो qualitatively globally competitive हों, और भारत का बना हुआ हो ताकि भारत को कभी बाहर से import न करना पड़े।
Digital India के माध्यम से हम electronic good को हिंदुस्तान में manufacture करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हम देश के उद्योग जगत को निमंत्रित करना चाहते हैं। मैं नौजवानों को भी, start-up के लिए जो मदद चाहिए, सरकार देने के लिए तैयार है। और आज दुनिया में start-up की दिशा में हिंदुस्तान के नौजवानों की संख्या बहुत बड़ी मात्रा में है। आने वाले दिनों में शायद अमेरिका के बाद हम नंबर दो पर आ जाएंगे, start-up के लिए। लेकिन इसे और बढ़ाना है। मैं देश के नौजवानों को भी चुनौती देता हूं, अगर IT Professional हमारे हैं, दुनिया के IT कंपनियों में ढेर सारी मात्रा में भारतीय मूल के लोग नजर आते हैं, लेकिन क्या कारण है कि Google का innovation हमारे यहां नहीं होता है। क्या कारण है कि innovation बाहर होते हैं। Digital India के माध्यम से हम देश के नौजवानों कोinnovations के लिए आह्वान कर रहे हैं, कि आप आइए, इस चुनौती को स्वीकार कीजिए।
भारत जैसे देश को सबसे पहली आवश्यकता है.. जैसे Make in India का महत्व है, वैसे ही Design in India भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमारे देश के नागरिकों की रूचि, प्रकृति, प्रवृति के अनुसार हमारा प्रोडक्ट तैयार हो। वो जिस भाषा में समझता है, उस भाषा में प्रोडक्ट तैयार है। जिस age group को address करना है, उसकी आवश्यकता है के अनुसार प्रोडक्ट तैयार हो। सवा सौ करोड़ देशवासियों का बाजार है। हमारे देश के नौजवान अपने talent का उपयोग करते हुए, innovations को ध्यान में रखते हुए Design in India.. इस concept को पकड़ते हुए Digital India के अंदर नई ताकत, नए प्राण भर सकते हैं.. और उसको बल देने के लिए मैं देश के नौजवानों का आह्वान करता हूं। विश्व की ओर नजर करें, मैं मानता हूं कि भारत को एक बहुत बड़ी जिम्मेवारी अदा करने का समय आ गया है। हम देख सकते हैं कि दुनिया में रक्तविहीन युद्ध.. और मैं बहुत जिम्मेवारी के साथ बोल रहा हूं, रक्तविहीन युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। इस रक्तविहीन युद्ध के जब बादल मंडरा रहे हैं तो ऐसे में सुख-चैन की जिंदगी जी सके, क्या भारत इसका नेतृत्व कर सकता है कि नहीं कर सकता है?विश्व को सुख-चैन की जिंदगी जीने के लिए रक्तहीन युद्ध से सुरक्षा देने के लिए क्या भारत का talent काम आ सकता है कि नहीं आ सकता है? मैं जो रक्तहीन युद्ध की बात करता हूं, वो मु्द्दा है – cyber security का, उस पर हम बल देना चाहते हैं। और आज जब हम इस Digital India को launch कर रहे हैं तब उनको सपनों को साकार करने का हमारा प्रयास है तब मैं जरूर कहना चाहूंगा...
I dream of a DIGITAL INDIA where:
High-speed Digital Highwaysunite the Nation
एक जमाना था Highwaysके लिए मांग होती थीअब अकेले Highwaysसे चलने वाला नहीं है Highwaysभी चाहिए information Highwaysभी चाहिए
I dream of a DIGITAL INDIA where:1.2 billion Connected Indians drive Innovation
I dream of a DIGITAL INDIA where:Knowledge is strength – and empowers the People
I dream of a DIGITAL INDIA where:Access to Information knows no barriers
I dream of a DIGITAL INDIA where:Government is Open - and Governance Transparent...और मैं जब कह रहा हूं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने में technology बहुत बड़ी मदद कर सकती है। सारे लीकेजेस को रोका जा सकता है। हमने जो अभी कोयले का auction किया सारा Digital platform का उपयोग किया था। अनेक खादानों का auction हुआ, लाखों करोड़ों का काम हुआ, लेकिन यह सरकार पर एक भी इल्जाम नहीं लगा। क्यों, क्योंकि हमने इस Digital platform का उपयोग किया, सम्पूर्ण रूप से transparency पर हमने बल दिया। और इसलिए भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी information and communication technology एक बहुत बड़ा instrument के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
I dream of a DIGITAL INDIA where: Technology ensures the Citizen-Government Interface is Incorruptible
I dream of a DIGITAL INDIA where:Government Services are easily and efficiently available to citizens on Mobile devices
I dream of a DIGITAL INDIA where: Government proactively engages with the people through Social Media
I dream of a DIGITAL INDIA where:Quality Education reaches the most inaccessible corners driven by Digital Learning
I dream of a DIGITAL INDIA where: Quality Healthcare percolates right up to the remotest regions powered by e-Healthcare
I dream of a DIGITAL INDIA where: Farmers are empowered with Real-time Information to be connected with Global Markets
I dream of a DIGITAL INDIA where: Mobile enabled Emergency Services ensure Personal Security
I dream of a DIGITAL INDIA where: Cyber Security becomes an integral part of our National Security
I dream of a DIGITAL INDIA where: Mobile and e-Banking ensures Financial Inclusion
I dream of a DIGITAL INDIA where:e-Commerce drives Entrepreneurship
I dream of a DIGITAL INDIA where: the World looks to India for the next Big Idea
I dream of a DIGITAL INDIA where: the Netizen is an Empowered Citizen
Thank you.
প্রধানমন্ত্রী – আপনারা একটি নতুন ক্ষেত্রে সাহস দেখিয়েছেন। সবচেয়ে গুরুত্বপূর্ণ বিষয় হলো, আপনারা সরকারের ওপর আস্থা রেখেছেন। আমার একটিই বিশ্বাস সবসময় ছিল যে, আমরা যে সিদ্ধান্তই নিই না কেন, তাতে আমাদের অবিচল থাকা উচিত এবং বারবার তা পরিবর্তন করা উচিত নয়, যাতে কেউ যদি ঝুঁকি নিতে চায়, তারা এই আশ্বাস পেতে পারে যে আমার ভুলের কারণে কিছু ভুল হলেও সমস্যা নেই, কিন্তু কেউ আমাকে পরিত্যাগ করবে না। আর আস্থা স্থাপনের জন্য এটাই ছিল আমাদের প্রচেষ্টা।
সিইও – আমরা ভারতের প্রথম স্পেস টেক ইউনিকর্ন। গত ১৮ জুলাই, আমরা সফলভাবে স্যাটেলাইট নিক্ষেপকারী ভারতের প্রথম বেসরকারি রকেট উৎক্ষেপণ করেছি। আর এটা তো সবে শুরু। সাধারণত আমরা বলি যে, এটা স্কাইরুটের জন্য কেবল একটি প্রস্তুতি পর্ব। আগামী বছরের মাঝামাঝি নাগাদ আমরা প্রতি মাসে একটি করে উৎক্ষেপণ করব। এছাড়াও, এই ক্ষেত্রটি উন্মুক্ত করার জন্য আমি আপনাকে ধন্যবাদ জানাই, স্যার। তিনটি কারখানা তৈরি করা হয়েছে। প্রতি মাসে একটি রকেট উৎক্ষেপণের সক্ষমতা ইতিমধ্যেই রয়েছে। আর এটা তো কেবল শুরু। এই মুহূর্তে, আমার ভবিষ্যৎ স্বপ্ন হলো প্রতি সপ্তাহে একটি এবং দিনে একাধিক উৎক্ষেপণ করা।

সিইও – আমরা এমন একটি ইঞ্জিন তৈরি করেছি যা বিশ্বের অন্যতম উন্নত। স্যার, আমরা এইমাত্র এটি তৈরি করেছি এবং এর পরীক্ষা চলছে।
প্রধানমন্ত্রী – বিনিয়োগকারীদের কি তাদের ওপর আস্থা আছে?
সিইও – স্যার, প্রথম উৎক্ষেপণের পর থেকে স্কাইরুট আরও উন্নত হয়েছে।
প্রধানমন্ত্রী – আচ্ছা। এই রুটটি কি আপনাদের জন্য উপকারী?
সিইও – এটি খুবই উপকারী প্রমাণিত হচ্ছে।

প্রধানমন্ত্রী – বিশ্ব এখন নিশ্চয়ই ভারতীয় স্টার্টআপগুলোর দিকে তাকিয়ে আছে। এই ক্ষেত্রে কারা আছে? কারণ যখন কোনো যুগান্তকারী সাফল্য আসে, মানুষ সঙ্গে সঙ্গে তা লক্ষ্য করে।
সিইও – আমার মনে হয়, মহাকাশ শিল্প উন্মুক্ত হওয়ার পর থেকে আমরা একটি অত্যন্ত ইতিবাচক প্রবণতা দেখেছি। মার্কিন যুক্তরাষ্ট্র এবং ইউরোপে থাকা আমাদের অনেক নাগরিক ফিরে এসে আমাদের সঙ্গে কাজ করতে চাইছেন।
প্রধানমন্ত্রী – আমাদের অনেক মানুষের সঙ্গে সংযোগ স্থাপন করতে হবে, এবং মেহতা যেমনটা বলেছেন, যারা বিদেশে গিয়েছিলেন তারা এখন ফিরে আসছেন। আমি বিশ্বাস করি, আমাদের এমন একটি আবহ তৈরি করা উচিত যাতে সারা বিশ্বের মানুষ অনুভব করে যে, এই ক্ষেত্রে জীবিকা নির্বাহ করতে চাইলে তাদের ভারতে আসা উচিত। কোনো ভারতীয় স্টার্টআপে যোগ দিন। কোনো ভারতীয় মহাকাশ সংস্থায় যোগ দিন। আমি দৃঢ়ভাবে বিশ্বাস করি যে আপনারা চুম্বকের মতো সমগ্র প্রতিভাপুলকে আকর্ষণ করতে পারেন, এবং এটি আমাদের জন্য একটি গুরুত্বপূর্ণ শক্তি হয়ে উঠতে পারে।
সিইও – আমাদের লক্ষ্য হলো আগামী ১৮ মাসের মধ্যে একটি বিশ্বব্যাপী গ্রাউন্ড স্টেশন নেটওয়ার্ক স্থাপন করা।
সিইও – আমরা স্যাটেলাইট ইঞ্জিন তৈরি করি, যা মহাকাশে স্যাটেলাইটকে এক স্থান থেকে অন্য স্থানে চালিত করে। স্যার, এগুলো ৫ থেকে ১৫ বছর পর্যন্ত টেকে। আমরা বিশ্বব্যাপী খুব ভালো সাড়া পেয়েছি, এবং ভারতীয় কোম্পানিগুলো যে এখন রপ্তানির জন্য সরকারি সহায়তা পাচ্ছে, তার পেছনে আপনাদের প্রচেষ্টাও একটি গুরুত্বপূর্ণ কারণ।

প্রধানমন্ত্রী – আমরা খরচের দিক থেকে খুবই প্রতিযোগিতামূলক, প্রতিভা নিয়ে কোনো প্রশ্নই ওঠে না, এবং আমাদের দেশবাসীর ঝুঁকি নেওয়ার ক্ষমতা অনেক বেশি। আর সেই কারণেই আমরা খুব দ্রুত নিজেদের প্রতিষ্ঠিত করতে পারব।
সিইও – এই রোবোটিক মহাকাশযানটি মহাকাশে যাবে, অচল স্যাটেলাইটটিকে সরাসরি ধরে ফেলবে এবং কক্ষপথ থেকে সরিয়ে দেবে।
সিইও – আমরাই প্রথম ভারতীয় কোম্পানি যারা মহাকাশে একটি ফুয়েল স্টেশন স্থাপনের লক্ষ্য নিয়ে ডকিং আন্ডার রিফুয়েলিং প্রযুক্তিতে কাজ করছি।
সিইও – আমার নাম অন্তরীক্ষ, আমার সহ-প্রতিষ্ঠাতা মনিকাও এখানে আছেন। স্যার, আমরা ভারতের প্রথম স্পেস ফার্মা স্টার্টআপ। আমরা এমন স্যাটেলাইট তৈরি করছি যা মহাকাশে যেতে, ওষুধ তৈরি করতে এবং মহাকাশ থেকে তা ফিরিয়ে আনতে পারবে।
প্রধানমন্ত্রী – আপনার নাম অন্তরীক্ষ। এর আগে আপনার পরিবারের কোনো সদস্য কি এর সঙ্গে জড়িত ছিলেন?

সিইও – হ্যাঁ, স্যার, না, আমার মা-ই আমাদের এই নাম রেখেছেন, স্যার।
সিইও – একটি উৎক্ষেপণের পর, আমরা গত এক মাসে আটটি উৎক্ষেপণ চুক্তি পেয়েছি।
প্রধানমন্ত্রী – ঠিক আছে, ঠিক আছে।
সিইও – এবং বেশিরভাগই আন্তর্জাতিক।
সিইও – স্যার, এই মুহূর্তে আমরা ১০ লক্ষ অংশীদারের সঙ্গে এই উদ্ভাবনটি চালু করার পরিকল্পনা করছি।
সিইও – স্যার, এটা আপনার জন্যই, যাতে এটি একটি স্মৃতি হয়ে থাকে।
প্রধানমন্ত্রী – ওয়াও।
সিইও – বেসরকারি খাতের জন্য আপনারা যে দ্বার উন্মোচন করেছেন, বেসরকারি স্যাটেলাইটের মাধ্যমে ভারতের সৌন্দর্য দৃশ্যমান হচ্ছে।


