Text of PM's remarks at the launch of Digital India week

Published By : Admin | July 1, 2015 | 20:19 IST
PM Modi speaks at the launch of #DigitalIndia Week
Our demographic dividend must get digital strength: PM
dream of a #DigitalIndia cyber security becomes an integral part of national security: PM Modi
dream of a #DigitalIndia where the world looks to #India for the next big idea: PM Modi
dream of #DigitalIndia where 1.2 billion connected Indians drive the nation: PM Modi

मंच पर विराजमान मंत्रि परिषद के मेरे सभी साथी, उद्योग जगत के सभी मित्र भिन्‍न भिन्‍न देशों के सभी राजदूत और बहुत बड़ी संख्‍या में पधारे हुए नौजवान दोस्‍तों,

मैं श्रीमान रविशंकर प्रसाद और उनकी टीम को ह्दय से बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं बधाई देता हूं कि उन्‍होंने comprehensive integrated approach के साथ भारत के भविष्‍य को बदलने का एक खाका खींचा है और जिस बारीकी से सारी योजनाओं की रचना की है, मुझे विश्‍वास है कि करोड़ों देशवासी जिन सपनो को संजो रहे हैं वे सपने साकार हो कर रहेंगे।

उद्योग जगत के कुछ मित्रों को यहां मंच पर, डिजिटल इंडिया के संदर्भ में वे क्‍या सोचते हैं वे क्‍या कर सकते हैं के विचार हमे सुनने को मिले। हमारे रविशंकरप्रसाद जी हिसाब लगा रहे थे बैठे बैठे, कि वो क्‍या बोल रहे हैं और उन्‍होंने मुझे बताया है कि करीब करीब साढे चार लाख करोड़ रूपये का investment.. और करीब करीब 18 लाख लोगों को रोजगार.. और यह तो जो ऊपर बैठे हैं उन्‍होंने बताया हैं और नीचे बहु‍त बड़ी मात्रा में बैठे हैं.. उनका अभी सुनना बाकी है। यहां बहुत बड़ी मात्रा में इस क्षेत्र में पहले से ही काम करने वाले उद्योग जगत के मित्र बैठे हैं।

वक्‍त बहुत तेजी से बदल चुका है। पहले हम लोग कभी किसी परिवार में जाते थे और छोटे बच्‍चे से बात करते थे तो बच्‍चा क्‍या करता था? अगर आपका चश्‍मा है तो खींच के ले जाता था या आपकी जेब में पेन है तो उसको उठाता था। लेकिन आज आप मार्क करना कि वह न चश्‍मे को हाथ लगाता है न पेन को हाथ लगाता है वह आपका मोबाइल फोन छीनता है। मोबाईल फोन हाथ में आते ही ठीक से पकड़ता है, आप मार्क करना.. और अपना शुरू कर देता है और अगर, जैसा चाहे वैसा आपरेशन नहीं होता तो रोने लगता है यानी बाकी वह कुछ समझे या ना समझे डिजिटल ताकत को समझता है। समय की मांग है कि हम इस बदलाव को समझें और अगर हम इस बदलाव को नहीं समझेंगे तो हम कहीं पड़ रहेंगे कोने में दुनिया दूर चली जाएगी और हम देखते ही रह जायेंगे एक समय था कि सदियों पहले लोग बसते थे, नदी के तट पर। गांव बसते थे, शहर बसते थे नदी के तट पर या समुंदर के किनारे पर।

वक्‍त बदल गया बाद में जहां जहां से हाइवे गुजरते थे, शहर वहां बसना शुरू हुए लेकिन अब मानव जा‍ति वहीं पर बसेगी जहां से ऑप्टिकल फाइबर गुजरता होगा। ये बहुत बड़ा बदलाव आया है और इसलिए अगर विश्‍व के अंदर सवा सौ करोड़ का देश, अपनी ताकत का अहसास कराना चाहता है तो जो हजारो साल पुरानी महान संस्‍कति है.. हम सवा सौ करोड़ देश वासी हैं, हम 65 प्रतिशत 35 साल से कम उम्र के हैं, ये गीत गाने से बात बनने वाली नहीं है। ये जो भी विरासत है, जो सामर्थ्‍य है, उसके साथ आधुनिक विज्ञान को, आधुनिक टेक्‍नॉलॉजी को जोड़ना अनिवार्य है। अगर demographic dividend.. इसको अगर digital strength नहीं मिलेगी तो ये demographic dividend ..हम global level पर जितनी मात्रा में फायदा उठाना चाहिए नहीं उठा पायेंगे। इसलिए देश को तैयार करने की आवश्‍यकता है। आज हमारे देश में करीब करीब 25 करोड़-तीस करोड़ internet users हैं। users की संख्‍या में तो दुनिया में ये संख्‍या बहुत बड़ी है लेकिन जो इससे वंचित है वो संख्‍या भी दुनिया के हिसाब से बड़ी है। जिनकी अपनी पहुंच थी जिनकी अपनी ताकत थी जो खुद कर सकता था, जिसको ज़रूरत थी, उन्‍होंने तो अपना कर लिया। लेकिन जो खुद नहीं कर सकता है, उसको उसके नसीब पर छोड़ देना चाहिए क्‍या? देश का एक तबका.. वो तो Digital world के साथ बहुत तेज गति से आगे बढ़ता हो और देश का बहुत बड़ा तबका उससे वंचित रह जाए तो जो अमीर और गरीब की खाई के कारण समस्‍याएं पैदा होती हैं, शहर और गांव में सुविधा के कारण जो खाई पैदा होती है, उससे भंयकर स्थिति Digital Divide के कारण पैदा हो सकती है।

इसलिए यह हमारा दायितव बनता है, हमारी जिम्‍मेवारी बनती है कि हम इस आधुनिक विज्ञान, जो कि मानव की आवश्‍यकताओं की पूर्ति का एक बहुत बड़ा catalyst agent बना हुआ है, उससे गरीब से गरीब भी वंचित नहीं रहना चाहिए। यह सुविधा जब तक हम गांव, गरीब, किसान तक नहीं पहुंचाएंगे तो यह विकास की जो बातें हैं, न वो उसका लाभ उठा पाएगा, न हम उसको सेवा दे पाएंगे। इसलिए इस चुनौती को हमने स्‍वीकार किया है कि आने वाले वर्षों में, दूर-सुदूर गांव में भी गरीब से गरीब व्‍यक्ति को भी इस platform को उपलब्‍ध कराना चाहिए, जिस platform से वो अपनी आवश्‍यकताओं की पूर्ति का माध्‍यम..आवश्‍यकता के अनुसार उपयोग करता रहे। दुनिया जिस प्रकार से बदल रही है, आपने देखा होगा आपको घर में.. मान लीजिए कभी तय करें कि चलो भई किसी restaurant में आज अच्‍छा खाने जाना है, परिवार के चार लोग बैठकर के चर्चा करें कि कहां जाएंगे और आपका 15-16 साल का बच्‍चा है, वो सुनता है, तो वो क्‍या करता है.. तुरंत वो Google गुरू के पास जाता है। Google गुरू से पूछता है कि नजदीक में अच्‍छे से अच्‍छा restaurant कौन सा है, अच्‍छे से अच्‍छा menu कौन सा है? और वो table पर वहां बैठे बैठे बुक करा देता है। यह इतना बड़ा बदलाव है, इस बदलाव को समझते हुए हमने भी अपनी व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करना चाहिए। minimum government maximum governance, इस सपने को साकार करने में technology बहुत बड़ा रोल प्‍ले करती है। e-governance, सामान्‍य मानव की.. जो शासकीय सेवाओं में उसका हक है, उसको प्राप्‍त करने के लिए उत्‍तम से उत्‍तम मार्ग है। e-governance बहुत ही तेजी से m-governanceमें बदलने वाला है। ‘m’ does not mean Modi Governance, it is mobile governance. सारा कारोबार, सारी आवश्‍यकतांए, सारी व्‍यवस्‍थाएं मोबाइल फोन के ईद-गिर्द.. पूरी सरकार आपके मोबाइल फोन में मौजूद होने वाली है, वो दिन दूर नहीं है।

लेकिन इसके लिए हमें अपने आप को सजग करना होगा, व्‍यवस्‍थाएं विकसित करनी होगी। e-governances easy governance, is economical governance.. आर्थिक रूप से अनुकुल यह governance.. और उसको हम जितना बल दे सकें, हमें उसको बल देना है। उसी प्रकार से हमारे सामने समस्‍या रहती है, सरकार में, एक ही काम के लिए इतनी multiple activity करनी पड़ती है, इतना समय बर्बाद होता है। आधुनिक विज्ञान के माध्‍यम से conversion इतना सरल होता है.. और जैसा अभी आपको presentation में बताया कि आज सरकार में 10 जगह पर 10 काम हैं तो सारे certificate दस जगह पर देने पड़ते हैं। अब वो सारी मुसीबत चली जाएगी। जब व्‍यवस्‍थाएं खड़ी हो जाएंगी तो आपके एक Digital number से उसको सारी चीजें उपलब्‍ध हो जाएंगी और कारोबार आगे चलता चला जाएगा। आने वाले दिनों में.. आज हम चर्चा करते हैं कि बच्‍चों को इतना बोझ उठाकर के स्‍कूल जाना पड़ता है। उनके बक्‍से में उनके वजन से ज्‍यादा किताबों का वजन होता है। इन बालकों की समस्‍या का समाधान भी Digital India में है। सारा syllabus एक छोटे से equipment में वो अपने साथ लेकर के घूम सकता है। इसलिए कुछ लोग, ऐसी जब बात होती है तो उनको लगता है कि यह तो बड़ा elite class के लिए काम है, बड़े लोगों के लिए काम है.. हकीकत नहीं है।

जब satellite छोड़े जाते थे, आज से कुछ वर्षों पहले, तो कुछ लोग डिबेट करते थे कि भारत जैसा गरीब देश! यह satellite किस के लिए छोड़े जा रहे हैं! क्‍या उपयोग है! लेकिन आज वही satellite, weather forecast अगर सही ढंग से करता है तो सीधा-सीधा फायदा गरीब किसान को होता है। जब खर्चा करते हैं तो आलोचना होती है लेकिन वही बाद में मानव की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करता है। यह सारी योजनाएं जो आपने देखीं.. अब देखिए आज, तो बैंक में जाना वगैरह सब है लेकिन वो दिन अब दूर नहीं है कि बैंक पेपर लेस होने वाला है, बैंक premises less होने वाला है। पूरा बैंकिंग कारोबार आपके मोबाइल फोन से चलने वाला है।

यह जो बदलाव आ रहा है, इस बदलाव के लिए हमें अपने आप को सजग करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। अगर हम देखें तो हम 19वीं शताब्‍दी से.. तब से इन कामों को तेज गति से आगे बढ़ाने की आवश्‍यकता थी। जब दुनिया ने Industrial revolution देखा, हम पिछड़ गए, क्‍यों? क्‍योंकि हम गुलाम थे। औद्योगिक क्रांति का हमें लाभ नहीं मिला। लेकिन आज जब IT revolution आया, हम आजाद हैं, हम youthful nation हैं और हमारे पास talent है। जहां तक IT की बात होगी, दुनिया हिंदुस्‍तान का लोहा मानती है। हमें यह मौका गंवाना नहीं है। गुलामी के कालखंड में हमने जो मौका गंवाया, यह मौका हमें IT revolution में गंवाना नहीं है। इसके सामने कुछ और चीजों पर भी बल देने की आवश्‍यकता है। Petroleum Import की हमारी मजबूरी है, ऊर्जा की आवश्‍कयता है, जरूरत पड़ती है, हमारे पास source कम है, लाना पड़ता है। लेकिन यह बात गले नहीं उतरती है कि हिंदुस्‍तान का second highest import electronic goods हैं। क्‍या यह देश, जहां पर इतने IT Professionals हो, जहां इतनी बड़ी मात्रा में उद्योगकार हों.. और कोई इतनी बड़ी technology भी नहीं है। क्‍या हम हमारे देश में electronic goods इतनी बड़ी मात्रा में न बना पाएं कि जो qualitatively globally competitive हों, और भारत का बना हुआ हो ताकि भारत को कभी बाहर से import न करना पड़े।

Digital India के माध्‍यम से हम electronic good को हिंदुस्‍तान में manufacture करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हम देश के उद्योग जगत को निमंत्रित करना चाहते हैं। मैं नौजवानों को भी, start-up के लिए जो मदद चाहिए, सरकार देने के लिए तैयार है। और आज दुनिया में start-up की दिशा में हिंदुस्‍तान के नौजवानों की संख्‍या बहुत बड़ी मात्रा में है। आने वाले दिनों में शायद अमेरिका के बाद हम नंबर दो पर आ जाएंगे, start-up के लिए। लेकिन इसे और बढ़ाना है। मैं देश के नौजवानों को भी चुनौती देता हूं, अगर IT Professional हमारे हैं, दुनिया के IT कंपनियों में ढेर सारी मात्रा में भारतीय मूल के लोग नजर आते हैं, लेकिन क्‍या कारण है कि Google का innovation हमारे यहां नहीं होता है। क्‍या कारण है कि innovation बाहर होते हैं। Digital India के माध्‍यम से हम देश के नौजवानों कोinnovations के लिए आह्वान कर रहे हैं, कि आप आइए, इस चुनौती को स्‍वीकार कीजिए।

भारत जैसे देश को सबसे पहली आवश्‍यकता है.. जैसे Make in India का महत्‍व है, वैसे ही Design in India भी उतना ही महत्‍वपूर्ण है। हमारे देश के नागरिकों की रूचि, प्रकृति, प्रवृति के अनुसार हमारा प्रोडक्‍ट तैयार हो। वो जिस भाषा में समझता है, उस भाषा में प्रोडक्‍ट तैयार है। जिस age group को address करना है, उसकी आवश्‍यकता है के अनुसार प्रोडक्‍ट तैयार हो। सवा सौ करोड़ देशवासियों का बाजार है। हमारे देश के नौजवान अपने talent का उपयोग करते हुए, innovations को ध्‍यान में रखते हुए Design in India.. इस concept को पकड़ते हुए Digital India के अंदर नई ताकत, नए प्राण भर सकते हैं.. और उसको बल देने के लिए मैं देश के नौजवानों का आह्वान करता हूं। विश्‍व की ओर नजर करें, मैं मानता हूं कि भारत को एक बहुत बड़ी जिम्‍मेवारी अदा करने का समय आ गया है। हम देख सकते हैं कि दुनिया में रक्‍तविहीन युद्ध.. और मैं बहुत जिम्‍मेवारी के साथ बोल रहा हूं, रक्‍तविहीन युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। इस रक्‍तविहीन युद्ध के जब बादल मंडरा रहे हैं तो ऐसे में सुख-चैन की जिंदगी जी सके, क्‍या भारत इसका नेतृत्‍व कर सकता है कि नहीं कर सकता है?विश्‍व को सुख-चैन की जिंदगी जीने के लिए रक्‍तहीन युद्ध से सुरक्षा देने के लिए क्‍या भारत का talent काम आ सकता है कि नहीं आ सकता है? मैं जो रक्‍तहीन युद्ध की बात करता हूं, वो मु्द्दा है – cyber security का, उस पर हम बल देना चाहते हैं। और आज जब हम इस Digital India को launch कर रहे हैं तब उनको सपनों को साकार करने का हमारा प्रयास है तब मैं जरूर कहना चाहूंगा...

I dream of a DIGITAL INDIA where:

High-speed Digital Highwaysunite the Nation

एक जमाना था Highwaysके लिए मांग होती थीअब अकेले Highwaysसे चलने वाला नहीं है Highwaysभी चाहिए information Highwaysभी चाहिए

I dream of a DIGITAL INDIA where:1.2 billion Connected Indians drive Innovation

I dream of a DIGITAL INDIA where:Knowledge is strength – and empowers the People

I dream of a DIGITAL INDIA where:Access to Information knows no barriers

I dream of a DIGITAL INDIA where:Government is Open - and Governance Transparent...और मैं जब कह रहा हूं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने में technology बहुत बड़ी मदद कर सकती है। सारे लीकेजेस को रोका जा सकता है। हमने जो अभी कोयले का auction किया सारा Digital platform का उपयोग किया था। अनेक खादानों का auction हुआ, लाखों करोड़ों का काम हुआ, लेकिन यह सरकार पर एक भी इल्‍जाम नहीं लगा। क्‍यों, क्‍योंकि हमने इस Digital platform का उपयोग किया, सम्‍पूर्ण रूप से transparency पर हमने बल दिया। और इसलिए भ्रष्‍टाचार को रोकने के लिए भी information and communication technology एक बहुत बड़ा instrument के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

I dream of a DIGITAL INDIA where: Technology ensures the Citizen-Government Interface is Incorruptible

I dream of a DIGITAL INDIA where:Government Services are easily and efficiently available to citizens on Mobile devices

I dream of a DIGITAL INDIA where: Government proactively engages with the people through Social Media

I dream of a DIGITAL INDIA where:Quality Education reaches the most inaccessible corners driven by Digital Learning

I dream of a DIGITAL INDIA where: Quality Healthcare percolates right up to the remotest regions powered by e-Healthcare

I dream of a DIGITAL INDIA where: Farmers are empowered with Real-time Information to be connected with Global Markets

I dream of a DIGITAL INDIA where: Mobile enabled Emergency Services ensure Personal Security

I dream of a DIGITAL INDIA where: Cyber Security becomes an integral part of our National Security

I dream of a DIGITAL INDIA where: Mobile and e-Banking ensures Financial Inclusion

I dream of a DIGITAL INDIA where:e-Commerce drives Entrepreneurship

I dream of a DIGITAL INDIA where: the World looks to India for the next Big Idea

I dream of a DIGITAL INDIA where: the Netizen is an Empowered Citizen

Thank you.

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May 11, 2026
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The restoration of the Somnath Temple on this exact day 75 years ago was no ordinary occasion; If India attained independence in 1947, then the consecration of Somnath in 1951 proclaimed the independent spirit of India: PM
The Somnath Amrit Mahotsav will serve as India's guiding inspiration for the next thousand years: PM
Looters tried to destroy the magnificence of the Somnath temple;Thinking of Somnath as nothing but a physical edifice, they kept striking against it; The temple was broken repeatedly, yet it was rebuilt time and again, standing tall after every fall: PM
Not only was the Somnath temple reconstructed, but the country also washed away the blemish of centuries: PM
Somnath serves as a reminder that a nation can sustain its strength over time only if it remains connected to its roots: PM

जय सोमनाथ !

जय सोमनाथ !

हर-हर महादेव !

गुजरात के मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, उपमुख्यमंत्री भाई हर्ष संघवी जी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आज प्रभास पाटन का पवित्र क्षेत्र एक अद्भुत प्रभा से भरा हुआ है। महादेव का ये साक्षात्कार, ये सौन्दर्य, धरती और आसमान से हुई पुष्पवर्षा, भगवा ध्वजों की ये आभा, कला, संगीत और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां, वेदमंत्रों का उच्चार, गर्भगृह में हो रहा शिव पंचाक्षरी का अखंड पाठ और इस सबके साथ-साथ सागर की लहरों का जयघोष, ऐसा लग रहा है, जैसे ये सृष्टि एक साथ बोल रही है- जय सोमनाथ ! जय-जय सोमनाथ !

साथियों,

समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं, जो स्वयं कालस्वरूप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं। ये सृष्टि जिनसे सृजित होती है, जिनमें लय हो जाती है, यतो जायते पाल्यते येन विश्वं, तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम् ! आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं। जो हलाहल को पीकर नीलकंठ हो गए, आज उन्हीं की शरण में यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है। ये सब भगवान सदाशिव की ही लीला है।

साथियों,

दादा सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में, मैं कितनी ही बार यहां आया हूं, कितनी ही बार उनके सामने नतमस्तक हुआ हूं। लेकिन, आज जब मैं यहां आ रहा था, तो समय की ये यात्रा एक सुखद अनुभूति दे रही थी। अभी कुछ ही महीने पहले मैं यहां आया था। तब हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहे थे। प्रथम विध्वंस के 1000 वर्ष बाद भी सोमनाथ के अविनाशी होने का गर्व और आज इस आधुनिक स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष, हम केवल दो आयोजनों का हिस्सा भर नहीं, सिर्फ हिस्सा भर नहीं बने हैं, हमें हजार वर्षों की अमृत यात्रा को अनुभव करने का शिव जी ने मौका दिया है।

साथियों,

75 साल पहले, आज के ही दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना, ये कोई साधारण अवसर नहीं था। अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था, तो 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था। आज़ादी के समय, सरदार साहब ने 500 से ज्यादा रियासतों को जोड़कर एक भारत का आधुनिक स्वरूप गढ़ा था। तो साथ ही, सोमनाथ के पुनर्निर्माण से उन्होंने दुनिया को बताया था, भारत केवल आज़ाद नहीं हुआ है, भारत अपने प्राचीन गौरव को पुनः हासिल करने के मार्ग पर भी अब आगे बढ़ चुका है।

साथियों,

इसलिए, आज इस अवसर पर, मैं केवल 75 वर्षों की झांकी नहीं देख रहा हूं। मैं यहां देख रहा हूं, विनाश में सृजन के संकल्प को, जिसे सोमनाथ ने चरितार्थ किया है। मैं यहां देख रहा हूं, असत्य पर सत्य की विजय को, जिसे प्रभास-पाटन ने बार-बार जिया है। मैं यहां देख रहा हूं, हजारों वर्षों की आध्यात्मिक चेतना को, जिसने मानव मात्र के कल्याण की सीख समूचे विश्व को दी है। मैं यहां देख रहा हूं, भारत के उस अविनाशी स्वरूप को, जिसे सदियों के कुत्सित प्रयास भी न मिटा सके, न हरा सके। और मैं यहां देख रहा हूं, सोमनाथ अमृत-महोत्सव, ये केवल अतीत का उत्सव नहीं है, ये अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है। मैं सभी देशवासियों को, दादा सोमनाथ के कोटि-कोटि भक्तों को इस महोत्सव की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का दिन एक और वजह से भी विशेष है। 11 मई 1998, 1998, यानि आज के ही दिन, देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। देश ने 11 मई को पहले तीन परमाणु परीक्षण किए। हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को, वैज्ञानिकों ने दुनिया के सामने रखा, दुनिया में तूफान आ गया। भारत, उसकी ये हैसियत, कौन होता है भारत, जो परमाणु परीक्षण करें और दुनिया की आंखें लाल हो गई, दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरी। अनेक प्रकार के बंधन लग गए। आर्थिक संकट की संभावनाओं के रास्ते सारे के सारे बंद कर दिए गए। कोई भी हिल जाता। जब दुनिया भर की बड़ी-बड़ी शक्तियां इतना बड़ा आक्रमण कर दे, तो आगे के रास्ते दिखते नहीं है। लेकिन हम कोई और मिट्टी के बने हुए हैं। 11 मई के बाद दुनिया हम पर टूट पड़ी थी। 11 मई को वैज्ञानिकों ने अपना काम कर लिया था। लेकिन 13 मई को फिर दो और परमाणु परीक्षण हुए, उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है। उस समय पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन अटल जी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने ये दिखाया था कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है। दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती, दबाव में नहीं ला सकती।

साथियों,

देश ने पोखरण परमाणु परीक्षण को ऑपरेशन शक्ति नाम दिया था। क्योंकि, शिव के साथ शक्ति की आराधना, ये हमारी परंपरा रही है। अर्धनारीश्वर शिव स्वयं भी शक्ति के साथ ही पूर्ण होते हैं। आपको याद होगा, जब देश का मिशन चंद्रयान सफल हुआ था, तब चंद्रमा पर जहां भारत का रोवर लैंड हुआ, उस जगह का नाम भी हमने ‘शिवशक्ति पॉइंट’ रखा है। क्योंकि, हमारी आस्था में चंद्रमा शिव से जुड़ा है और शिव शक्ति से जुड़े हैं। और ये कितना सुखद है कि चंद्रमा के नाम से ही इस ज्योतिर्लिंग को हम सोमनाथ कहते हैं।

साथियों,

शिव और शक्ति की हमारी आराधना का जो विचार है, वो देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए भी प्रेरणा बने, आज हम ये संकल्प साकार होते देख रहे हैं। मैं इस अवसर पर, भगवान सोमनाथ के चरणों से सभी देशवासियों को ऑपरेशन शक्ति की वर्षगांठ की भी बधाई देता हूं।

साथियों,

जब मैं पिछली बार यहाँ आया था, तब मैंने कहा था- जिसके नाम में ही सोम अर्थात्, अमृत जुड़ा हो, उसे नष्ट कौन कर सकता है? इतिहास के लंबे कालखंड में इस मंदिर ने कितने ही आक्रमण झेले। महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी जैसे अनेक आक्रांता आए, लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया। वो सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे। बार-बार इस मंदिर को, इस ढांचे को तोड़ा गया। और ये बार-बार बनता रहा, हर बार उठ खड़ा होता रहा, क्योंकि तोड़ने वालों को मालूम नहीं था, हमारे राष्ट्र का वैचारिक सामर्थ्य क्या है। हम भौतिक शरीर को नश्वर मानने वाले लोग हैं। लेकिन, हम जानते हैं, उसके भीतर बैठी आत्मा अविनाशी है। और फिर तो, शिव तो सर्वात्मा हैं। इसलिए, अलग-अलग काल में, अलग-अलग जीवों की संकल्पशक्ति में शिव प्रकट होते रहे। राजा भोज, कभी राजा भीमदेव प्रथम, कभी राजा कुमारपाल, कभी राजा महीपाल प्रथम, तो कभी राव खंगार, ऐसे अनेक शिवभक्त समय-समय पर सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाते रहे। लकुलीश और सोम शर्मा जैसे कितने मनीषी, उन्होंने प्रभास पाटन क्षेत्र की विरासत को संरक्षित किया, इसे शैव साधना और दर्शन का महान केंद्र बनाया। भाव बृहस्पति, पाशुपताचार्यों और अनेक विद्वानों ने इस तीर्थ की आध्यात्मिक परंपराओं को जीवित रखा। विशालदेव और त्रिपुरांतक जैसे व्यक्तित्वों ने यहां की बौद्धिक चेतना को सुरक्षित रखने का पुनीत कार्य किया।

साथियों,

वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगड़ाजी भील, पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर जी, बड़ौदा के गायकवाड़, जाम साहब महाराजा दिग्विजय सिंह जी, ऐसी कितनी ही महान विभूतियाँ हैं, जो सोमनाथ की सेवा में अपना सर्वस्व अर्पित करती थीं। मैं आज इस अवसर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, श्रीमान के. एम. मुंशी जी, ऐसी सभी ज्ञात-अज्ञात दिव्यात्माओं को भी श्रद्धा पूर्वक, आदर पूर्वक नमन करता हूँ। उनका स्मरण हमें ये प्रेरणा देता है कि हमें न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है, बल्कि इस ज़िम्मेदारी को आने वाली पीढ़ियों के हाथों में सौंपकर भी जाना है।

साथियों,

हमारे सांस्कृतिक स्थल हजारों वर्षों से भारत की पहचान रहे हैं। इतनी समृद्ध विरासत हमें मिली है। लेकिन, आप विडम्बना देखिए, हमने दशकों तक उसके महत्व को नहीं समझा। दुनिया में ऐसे कितने ही उदाहरण हैं, जहां विदेशी हमलावरों ने राष्ट्रीय पहचान से जुड़े स्थलों को नष्ट किया। लेकिन, जब उस देश के लोगों को मौका मिला, सबने साथ आकर, अपनी पहचान को फिर से सहेजा, फिर से संवारा, पुन: प्रतिष्ठा की। लेकिन, हमारे यहाँ राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े विषयों पर भी राजनीति होती रही। सोमनाथ खुद इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आज़ादी के बाद पहले दायित्वों में से एक था कि सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार करते। इसलिए, सरदार वल्लभ भाई पटेल और डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी, उन्होंने इसके लिए इतने प्रयास किए। लेकिन, हम सब जानते हैं, उन्हें इसके लिए नेहरूजी द्वारा कितना विरोध झेलना पड़ा था। मैं आज इसके विस्तार में नहीं जाउंगा, लेकिन ये सरदार साहब की इच्छाशक्ति थी कि इतने विरोध के बावजूद सरदार साहब डिगे नहीं। सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भी हुआ और देश ने सदियों के कलंक को भी धो दिया।

साथियों,

दुर्भाग्य से देश में ऐसी शक्तियां आज भी प्रभावी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्वाभिमान से ज्यादा तुष्टिकरण जरूरी लगता है। राममंदिर निर्माण जैसे अवसरों पर भी हमने देखा है, किस तरह राम मंदिर निर्माण का भी विरोध किया गया। हमें ऐसी मानसिकता से सावधान रहना है। इस तरह की संकुचित राजनीति को हमें पीछे छोड़ना होगा। हमें विकास और विरासत को साथ लेकर के आगे बढ़ना होगा।

साथियों,

बीते वर्षों में मुझे सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में सोमनाथ दादा की सेवा का जो अवसर मिला, इस मंदिर और क्षेत्र के विकास के लिए जो ऐतिहासिक काम हुए, उस परिवर्तन को आज हम सब प्रत्यक्ष देख रहे हैं। लेकिन साथ ही, इस सेवा का मुझे व्यक्तिगत लाभ भी हुआ है। आज मुझे देश के सभी पवित्र तीर्थों के विकास का जो मौका मिल रहा है, ये भगवान सोमनाथ का ही कृपा प्रसाद है।

साथियों,

आज काशी में सदियों बाद बाबा विश्वनाथ धाम का इतना भव्य विस्तार हुआ है। आज उज्जैन में महाकाल, महालोक के विशाल दर्शन भी हमें हो रहे हैं। केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण भी हुआ है। जैसा मैंने पहले कहा, अयोध्या में 500 साल की प्रतीक्षा भी पूरी हुई है। आज वहाँ भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हैं।

साथियों,

ऐसे कितने ही पवित्र तीर्थ, पवित्र मठ, मंदिर और क्षेत्र, उनकी जो महिमा हमने पुराणों में सुनी है, आज वहाँ हमें उस समृद्ध परंपरा के दर्शन होने लगे हैं। और, ये इतना कुछ 10-12 साल के भीतर-भीतर हुआ है।

साथियों,

हमारे सांस्कृतिक केन्द्रों की उपेक्षा देश के विकास में बड़ी बाधा रही है। क्योंकि, हमारे तीर्थ भारत की आध्यात्मिक-सामाजिक व्यवस्था के केंद्र तो हैं ही, वो देश की आर्थिक प्रगति के भी स्रोत रहे हैं। आज आप देखिए, चारधाम महामार्ग परियोजना, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे परियोजना, करतारपुर कॉरिडोर, बौद्ध सर्किट का विकास, इनके जरिए देश में तीर्थ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। सोमनाथ परिसर भी इसका एक सशक्त उदाहरण है। आज सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट से सैकड़ों परिवार जुड़े हैं। हजारों लोगों का जीवन इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। देश-दुनिया के कोने-कोने से जो लोग यहाँ आते हैं, वो गुजरात के बाकी हिस्सों में भी जाते हैं। इससे प्रदेश और देश में प्रगति के नए द्वार खुलते हैं।

साथियों,

हमारी आस्था हमें जीवन जीने का तरीका भी सिखाती है। क्योंकि, हम मानते हैं- सर्वं खल्विदं ब्रह्म ! अर्थात्, सृष्टि का हर एक घटक, ये सम्पूर्ण प्रकृति भी ईश्वर का ही स्वरूप है। इसलिए, हमारी आस्था नदियों में भी है, वृक्षों में भी है। हम जंगलों को भी श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। हम पर्वतों में भी पवित्रता का भाव रखते हैं। और, आज जब दुनिया प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौट रही है, हमें हमारी इस शक्ति को भी पहचानना होगा। हमें हमारे तीर्थों और मंदिरों के विकास के साथ-साथ उनकी गरिमा के लिए जागरूक होना होगा। हम ऐसा जीवन अपनाएं, जिससे प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा हो। साथ ही, हम हमारे पुण्य स्थलों को पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण के रूप में विकसित करें। हमें इन संकल्पों को अपनी आस्था से जोड़कर जीना होगा।

साथियों,

जब नई पीढ़ियां अपने इतिहास, अपनी आस्था और अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ती हैं, तब राष्ट्र का आत्मबल और मजबूत होता है। आज भारत जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें हमारी इस सांस्कृतिक निरंतरता की भी बहुत बड़ी भूमिका है। आधुनिक और विरासत, आधुनिकता हो या विरासत हो, भारत में इसे कोई अलग नहीं कर सकता, भारत में एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, ये साथ-साथ आगे बढ़ने वाली शक्तियां हैं, एक दूसरे में प्राण पूरने वाली शक्तियां है। सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि कोई भी राष्ट्र तभी लंबे समय तक मजबूत रह सकता है, जब वो अपनी जड़ों से जुड़ा रहे। जब हम अपनी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ उनके हाथों में सुपुर्द करें। 75 वर्ष पहले, जब ये पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में, 75 वर्ष पहले प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, तब भारत ने एक नई चेतना यात्रा शुरू की थी। आज, 75 वर्ष बाद, वही यात्रा और अधिक व्यापक रूप में हमारे सामने है। हमें इसे नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। हमारे संकल्पों को पूरा करने में दादा सोमनाथ का आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहे, यही प्रार्थना है। एक बार फिर सभी देशवासियों को, विरासत में विश्वास करने वाले हर नागरिक को, आप सभी को इस अवसर की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिए-

जय सोमनाथ।

जय सोमनाथ।

हर-हर महादेव।