संपूर्ण भारत के कोने-कोने में बसे हरेक व्यक्ति को डिजिटल शक्ति मिलनी चाहिए: प्रधानमंत्री
मेरा सपना एक ऐसे #DigitalIndia का है जहाँ साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अभिन्न हिस्सा हो: प्रधानमंत्री मोदी
मेरा सपना एक ऐसे #DigitalIndia का है जहाँ पूरा विश्व #India को अगली नई सोच के रूप में देखे: प्रधानमंत्री मोदी
मेरा सपना एक ऐसे #DigitalIndia का है जहाँ आपस में जुड़े 1.2 अरब भारतीय देश को आगे ले जाएं: प्रधानमंत्री मोदी

मंच पर विराजमान मंत्रि परिषद के मेरे सभी साथी, उद्योग जगत के सभी मित्र भिन्‍न भिन्‍न देशों के सभी राजदूत और बहुत बड़ी संख्‍या में पधारे हुए नौजवान दोस्‍तों,

मैं श्रीमान रविशंकर प्रसाद और उनकी टीम को ह्दय से बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं बधाई देता हूं कि उन्‍होंने comprehensive integrated approach के साथ भारत के भविष्‍य को बदलने का एक खाका खींचा है और जिस बारीकी से सारी योजनाओं की रचना की है, मुझे विश्‍वास है कि करोड़ों देशवासी जिन सपनो को संजो रहे हैं वे सपने साकार हो कर रहेंगे।

उद्योग जगत के कुछ मित्रों को यहां मंच पर, डिजिटल इंडिया के संदर्भ में वे क्‍या सोचते हैं वे क्‍या कर सकते हैं के विचार हमे सुनने को मिले। हमारे रविशंकरप्रसाद जी हिसाब लगा रहे थे बैठे बैठे, कि वो क्‍या बोल रहे हैं और उन्‍होंने मुझे बताया है कि करीब करीब साढे चार लाख करोड़ रूपये का investment.. और करीब करीब 18 लाख लोगों को रोजगार.. और यह तो जो ऊपर बैठे हैं उन्‍होंने बताया हैं और नीचे बहु‍त बड़ी मात्रा में बैठे हैं.. उनका अभी सुनना बाकी है। यहां बहुत बड़ी मात्रा में इस क्षेत्र में पहले से ही काम करने वाले उद्योग जगत के मित्र बैठे हैं।

वक्‍त बहुत तेजी से बदल चुका है। पहले हम लोग कभी किसी परिवार में जाते थे और छोटे बच्‍चे से बात करते थे तो बच्‍चा क्‍या करता था? अगर आपका चश्‍मा है तो खींच के ले जाता था या आपकी जेब में पेन है तो उसको उठाता था। लेकिन आज आप मार्क करना कि वह न चश्‍मे को हाथ लगाता है न पेन को हाथ लगाता है वह आपका मोबाइल फोन छीनता है। मोबाईल फोन हाथ में आते ही ठीक से पकड़ता है, आप मार्क करना.. और अपना शुरू कर देता है और अगर, जैसा चाहे वैसा आपरेशन नहीं होता तो रोने लगता है यानी बाकी वह कुछ समझे या ना समझे डिजिटल ताकत को समझता है। समय की मांग है कि हम इस बदलाव को समझें और अगर हम इस बदलाव को नहीं समझेंगे तो हम कहीं पड़ रहेंगे कोने में दुनिया दूर चली जाएगी और हम देखते ही रह जायेंगे एक समय था कि सदियों पहले लोग बसते थे, नदी के तट पर। गांव बसते थे, शहर बसते थे नदी के तट पर या समुंदर के किनारे पर।

वक्‍त बदल गया बाद में जहां जहां से हाइवे गुजरते थे, शहर वहां बसना शुरू हुए लेकिन अब मानव जा‍ति वहीं पर बसेगी जहां से ऑप्टिकल फाइबर गुजरता होगा। ये बहुत बड़ा बदलाव आया है और इसलिए अगर विश्‍व के अंदर सवा सौ करोड़ का देश, अपनी ताकत का अहसास कराना चाहता है तो जो हजारो साल पुरानी महान संस्‍कति है.. हम सवा सौ करोड़ देश वासी हैं, हम 65 प्रतिशत 35 साल से कम उम्र के हैं, ये गीत गाने से बात बनने वाली नहीं है। ये जो भी विरासत है, जो सामर्थ्‍य है, उसके साथ आधुनिक विज्ञान को, आधुनिक टेक्‍नॉलॉजी को जोड़ना अनिवार्य है। अगर demographic dividend.. इसको अगर digital strength नहीं मिलेगी तो ये demographic dividend ..हम global level पर जितनी मात्रा में फायदा उठाना चाहिए नहीं उठा पायेंगे। इसलिए देश को तैयार करने की आवश्‍यकता है। आज हमारे देश में करीब करीब 25 करोड़-तीस करोड़ internet users हैं। users की संख्‍या में तो दुनिया में ये संख्‍या बहुत बड़ी है लेकिन जो इससे वंचित है वो संख्‍या भी दुनिया के हिसाब से बड़ी है। जिनकी अपनी पहुंच थी जिनकी अपनी ताकत थी जो खुद कर सकता था, जिसको ज़रूरत थी, उन्‍होंने तो अपना कर लिया। लेकिन जो खुद नहीं कर सकता है, उसको उसके नसीब पर छोड़ देना चाहिए क्‍या? देश का एक तबका.. वो तो Digital world के साथ बहुत तेज गति से आगे बढ़ता हो और देश का बहुत बड़ा तबका उससे वंचित रह जाए तो जो अमीर और गरीब की खाई के कारण समस्‍याएं पैदा होती हैं, शहर और गांव में सुविधा के कारण जो खाई पैदा होती है, उससे भंयकर स्थिति Digital Divide के कारण पैदा हो सकती है।

इसलिए यह हमारा दायितव बनता है, हमारी जिम्‍मेवारी बनती है कि हम इस आधुनिक विज्ञान, जो कि मानव की आवश्‍यकताओं की पूर्ति का एक बहुत बड़ा catalyst agent बना हुआ है, उससे गरीब से गरीब भी वंचित नहीं रहना चाहिए। यह सुविधा जब तक हम गांव, गरीब, किसान तक नहीं पहुंचाएंगे तो यह विकास की जो बातें हैं, न वो उसका लाभ उठा पाएगा, न हम उसको सेवा दे पाएंगे। इसलिए इस चुनौती को हमने स्‍वीकार किया है कि आने वाले वर्षों में, दूर-सुदूर गांव में भी गरीब से गरीब व्‍यक्ति को भी इस platform को उपलब्‍ध कराना चाहिए, जिस platform से वो अपनी आवश्‍यकताओं की पूर्ति का माध्‍यम..आवश्‍यकता के अनुसार उपयोग करता रहे। दुनिया जिस प्रकार से बदल रही है, आपने देखा होगा आपको घर में.. मान लीजिए कभी तय करें कि चलो भई किसी restaurant में आज अच्‍छा खाने जाना है, परिवार के चार लोग बैठकर के चर्चा करें कि कहां जाएंगे और आपका 15-16 साल का बच्‍चा है, वो सुनता है, तो वो क्‍या करता है.. तुरंत वो Google गुरू के पास जाता है। Google गुरू से पूछता है कि नजदीक में अच्‍छे से अच्‍छा restaurant कौन सा है, अच्‍छे से अच्‍छा menu कौन सा है? और वो table पर वहां बैठे बैठे बुक करा देता है। यह इतना बड़ा बदलाव है, इस बदलाव को समझते हुए हमने भी अपनी व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करना चाहिए। minimum government maximum governance, इस सपने को साकार करने में technology बहुत बड़ा रोल प्‍ले करती है। e-governance, सामान्‍य मानव की.. जो शासकीय सेवाओं में उसका हक है, उसको प्राप्‍त करने के लिए उत्‍तम से उत्‍तम मार्ग है। e-governance बहुत ही तेजी से m-governanceमें बदलने वाला है। ‘m’ does not mean Modi Governance, it is mobile governance. सारा कारोबार, सारी आवश्‍यकतांए, सारी व्‍यवस्‍थाएं मोबाइल फोन के ईद-गिर्द.. पूरी सरकार आपके मोबाइल फोन में मौजूद होने वाली है, वो दिन दूर नहीं है।

लेकिन इसके लिए हमें अपने आप को सजग करना होगा, व्‍यवस्‍थाएं विकसित करनी होगी। e-governances easy governance, is economical governance.. आर्थिक रूप से अनुकुल यह governance.. और उसको हम जितना बल दे सकें, हमें उसको बल देना है। उसी प्रकार से हमारे सामने समस्‍या रहती है, सरकार में, एक ही काम के लिए इतनी multiple activity करनी पड़ती है, इतना समय बर्बाद होता है। आधुनिक विज्ञान के माध्‍यम से conversion इतना सरल होता है.. और जैसा अभी आपको presentation में बताया कि आज सरकार में 10 जगह पर 10 काम हैं तो सारे certificate दस जगह पर देने पड़ते हैं। अब वो सारी मुसीबत चली जाएगी। जब व्‍यवस्‍थाएं खड़ी हो जाएंगी तो आपके एक Digital number से उसको सारी चीजें उपलब्‍ध हो जाएंगी और कारोबार आगे चलता चला जाएगा। आने वाले दिनों में.. आज हम चर्चा करते हैं कि बच्‍चों को इतना बोझ उठाकर के स्‍कूल जाना पड़ता है। उनके बक्‍से में उनके वजन से ज्‍यादा किताबों का वजन होता है। इन बालकों की समस्‍या का समाधान भी Digital India में है। सारा syllabus एक छोटे से equipment में वो अपने साथ लेकर के घूम सकता है। इसलिए कुछ लोग, ऐसी जब बात होती है तो उनको लगता है कि यह तो बड़ा elite class के लिए काम है, बड़े लोगों के लिए काम है.. हकीकत नहीं है।

जब satellite छोड़े जाते थे, आज से कुछ वर्षों पहले, तो कुछ लोग डिबेट करते थे कि भारत जैसा गरीब देश! यह satellite किस के लिए छोड़े जा रहे हैं! क्‍या उपयोग है! लेकिन आज वही satellite, weather forecast अगर सही ढंग से करता है तो सीधा-सीधा फायदा गरीब किसान को होता है। जब खर्चा करते हैं तो आलोचना होती है लेकिन वही बाद में मानव की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करता है। यह सारी योजनाएं जो आपने देखीं.. अब देखिए आज, तो बैंक में जाना वगैरह सब है लेकिन वो दिन अब दूर नहीं है कि बैंक पेपर लेस होने वाला है, बैंक premises less होने वाला है। पूरा बैंकिंग कारोबार आपके मोबाइल फोन से चलने वाला है।

यह जो बदलाव आ रहा है, इस बदलाव के लिए हमें अपने आप को सजग करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। अगर हम देखें तो हम 19वीं शताब्‍दी से.. तब से इन कामों को तेज गति से आगे बढ़ाने की आवश्‍यकता थी। जब दुनिया ने Industrial revolution देखा, हम पिछड़ गए, क्‍यों? क्‍योंकि हम गुलाम थे। औद्योगिक क्रांति का हमें लाभ नहीं मिला। लेकिन आज जब IT revolution आया, हम आजाद हैं, हम youthful nation हैं और हमारे पास talent है। जहां तक IT की बात होगी, दुनिया हिंदुस्‍तान का लोहा मानती है। हमें यह मौका गंवाना नहीं है। गुलामी के कालखंड में हमने जो मौका गंवाया, यह मौका हमें IT revolution में गंवाना नहीं है। इसके सामने कुछ और चीजों पर भी बल देने की आवश्‍यकता है। Petroleum Import की हमारी मजबूरी है, ऊर्जा की आवश्‍कयता है, जरूरत पड़ती है, हमारे पास source कम है, लाना पड़ता है। लेकिन यह बात गले नहीं उतरती है कि हिंदुस्‍तान का second highest import electronic goods हैं। क्‍या यह देश, जहां पर इतने IT Professionals हो, जहां इतनी बड़ी मात्रा में उद्योगकार हों.. और कोई इतनी बड़ी technology भी नहीं है। क्‍या हम हमारे देश में electronic goods इतनी बड़ी मात्रा में न बना पाएं कि जो qualitatively globally competitive हों, और भारत का बना हुआ हो ताकि भारत को कभी बाहर से import न करना पड़े।

Digital India के माध्‍यम से हम electronic good को हिंदुस्‍तान में manufacture करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हम देश के उद्योग जगत को निमंत्रित करना चाहते हैं। मैं नौजवानों को भी, start-up के लिए जो मदद चाहिए, सरकार देने के लिए तैयार है। और आज दुनिया में start-up की दिशा में हिंदुस्‍तान के नौजवानों की संख्‍या बहुत बड़ी मात्रा में है। आने वाले दिनों में शायद अमेरिका के बाद हम नंबर दो पर आ जाएंगे, start-up के लिए। लेकिन इसे और बढ़ाना है। मैं देश के नौजवानों को भी चुनौती देता हूं, अगर IT Professional हमारे हैं, दुनिया के IT कंपनियों में ढेर सारी मात्रा में भारतीय मूल के लोग नजर आते हैं, लेकिन क्‍या कारण है कि Google का innovation हमारे यहां नहीं होता है। क्‍या कारण है कि innovation बाहर होते हैं। Digital India के माध्‍यम से हम देश के नौजवानों कोinnovations के लिए आह्वान कर रहे हैं, कि आप आइए, इस चुनौती को स्‍वीकार कीजिए।

भारत जैसे देश को सबसे पहली आवश्‍यकता है.. जैसे Make in India का महत्‍व है, वैसे ही Design in India भी उतना ही महत्‍वपूर्ण है। हमारे देश के नागरिकों की रूचि, प्रकृति, प्रवृति के अनुसार हमारा प्रोडक्‍ट तैयार हो। वो जिस भाषा में समझता है, उस भाषा में प्रोडक्‍ट तैयार है। जिस age group को address करना है, उसकी आवश्‍यकता है के अनुसार प्रोडक्‍ट तैयार हो। सवा सौ करोड़ देशवासियों का बाजार है। हमारे देश के नौजवान अपने talent का उपयोग करते हुए, innovations को ध्‍यान में रखते हुए Design in India.. इस concept को पकड़ते हुए Digital India के अंदर नई ताकत, नए प्राण भर सकते हैं.. और उसको बल देने के लिए मैं देश के नौजवानों का आह्वान करता हूं। विश्‍व की ओर नजर करें, मैं मानता हूं कि भारत को एक बहुत बड़ी जिम्‍मेवारी अदा करने का समय आ गया है। हम देख सकते हैं कि दुनिया में रक्‍तविहीन युद्ध.. और मैं बहुत जिम्‍मेवारी के साथ बोल रहा हूं, रक्‍तविहीन युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। इस रक्‍तविहीन युद्ध के जब बादल मंडरा रहे हैं तो ऐसे में सुख-चैन की जिंदगी जी सके, क्‍या भारत इसका नेतृत्‍व कर सकता है कि नहीं कर सकता है?विश्‍व को सुख-चैन की जिंदगी जीने के लिए रक्‍तहीन युद्ध से सुरक्षा देने के लिए क्‍या भारत का talent काम आ सकता है कि नहीं आ सकता है? मैं जो रक्‍तहीन युद्ध की बात करता हूं, वो मु्द्दा है – cyber security का, उस पर हम बल देना चाहते हैं। और आज जब हम इस Digital India को launch कर रहे हैं तब उनको सपनों को साकार करने का हमारा प्रयास है तब मैं जरूर कहना चाहूंगा...

I dream of a DIGITAL INDIA where:

High-speed Digital Highwaysunite the Nation

एक जमाना था Highwaysके लिए मांग होती थीअब अकेले Highwaysसे चलने वाला नहीं है Highwaysभी चाहिए information Highwaysभी चाहिए

I dream of a DIGITAL INDIA where:1.2 billion Connected Indians drive Innovation

I dream of a DIGITAL INDIA where:Knowledge is strength – and empowers the People

I dream of a DIGITAL INDIA where:Access to Information knows no barriers

I dream of a DIGITAL INDIA where:Government is Open - and Governance Transparent...और मैं जब कह रहा हूं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने में technology बहुत बड़ी मदद कर सकती है। सारे लीकेजेस को रोका जा सकता है। हमने जो अभी कोयले का auction किया सारा Digital platform का उपयोग किया था। अनेक खादानों का auction हुआ, लाखों करोड़ों का काम हुआ, लेकिन यह सरकार पर एक भी इल्‍जाम नहीं लगा। क्‍यों, क्‍योंकि हमने इस Digital platform का उपयोग किया, सम्‍पूर्ण रूप से transparency पर हमने बल दिया। और इसलिए भ्रष्‍टाचार को रोकने के लिए भी information and communication technology एक बहुत बड़ा instrument के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

I dream of a DIGITAL INDIA where: Technology ensures the Citizen-Government Interface is Incorruptible

I dream of a DIGITAL INDIA where:Government Services are easily and efficiently available to citizens on Mobile devices

I dream of a DIGITAL INDIA where: Government proactively engages with the people through Social Media

I dream of a DIGITAL INDIA where:Quality Education reaches the most inaccessible corners driven by Digital Learning

I dream of a DIGITAL INDIA where: Quality Healthcare percolates right up to the remotest regions powered by e-Healthcare

I dream of a DIGITAL INDIA where: Farmers are empowered with Real-time Information to be connected with Global Markets

I dream of a DIGITAL INDIA where: Mobile enabled Emergency Services ensure Personal Security

I dream of a DIGITAL INDIA where: Cyber Security becomes an integral part of our National Security

I dream of a DIGITAL INDIA where: Mobile and e-Banking ensures Financial Inclusion

I dream of a DIGITAL INDIA where:e-Commerce drives Entrepreneurship

I dream of a DIGITAL INDIA where: the World looks to India for the next Big Idea

I dream of a DIGITAL INDIA where: the Netizen is an Empowered Citizen

Thank you.

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मलेशिया में बसे भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु: पीएम मोदी
February 07, 2026
कुआलालंपुर में भारतीय प्रवासियों के स्नेह के लिए अत्यंत आभारी हूँ, हमारा प्रवासी समुदाय भारत और मलेशिया के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में निरंतर कार्य करता रहेगा: प्रधानमंत्री
मलेशिया में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा भारतीय मूल का समुदाय निवास करता है, भारत और मलेशिया के दिलों को जोड़ने वाले कई गहरे सूत्र हैं: प्रधानमंत्री
मैंने 'मन की बात' कार्यक्रम में आपके बारे में बात की थी, जहाँ मैंने 140 करोड़ भारतीयों को बताया था कि मलेशिया में 500 से अधिक स्कूल बच्चों को भारतीय भाषाओं में शिक्षा देते हैं: प्रधानमंत्री
मलेशिया में रहने वाला तमिल समुदाय विभिन्न क्षेत्रों में समाज की सेवा कर रहा हैं और तमिल समुदाय यहाँ कई सदियों से मौजूद हैं: प्रधानमंत्री
हमें यह बताते हुए गर्व है कि हमने मलाया विश्वविद्यालय में तिरुवल्लुवर चेयर की स्थापना की है। अब हम तिरुवल्लुवर सेंटर भी स्थापित करेंगे, ताकि हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत किया जा सके: प्रधानमंत्री
भारत की सफलता मलेशिया की सफलता है, यह एशिया की सफलता भी है। इसी कारण मैं कहता हूँ कि हमारे संबंधों का मार्गदर्शक शब्द ‘IMPACT’ है: प्रधानमंत्री
मैं आप सभी को, साथ ही आपके मलय मित्रों को, भारत की यात्रा करने और अतुल्य भारत का अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ, क्योंकि लोगों के बीच संपर्क हमारी मित्रता का मूल आधार है: प्रधानमंत्री
भारत को विकास के लिए एक भरोसेमंद साझेदार माना जाता है, यूके, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ओमान, ईयू और अमेरिका जैसे देशों ने भारत के साथ ट्रेड डील की हैं: प्रधानमंत्री

महामहिम प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम,

मेरे प्रिय मित्रों, भाइयों और बहनों,

सलामत पतांग!

वणक्कम्!

सुखमाणो?

सत श्री अकाल!

बागुन्नारा?

केम-छो?

आपके अभिवादन की गर्मजोशी हमारी साझा संस्कृति की सुन्दर विविधता को प्रतिबिंबित करती है।

सबसे पहले, मैं अपने प्रिय मित्र, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को इस सामुदायिक उत्सव में भाग लेने के लिए धन्यवाद देता हूं। मैं उनको इस बात के लिए भी धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने अभी अपने भाषण में भारत-मलेशिया मित्रता की व्यापकता और भविष्य की संभावनाओं को इतने सुंदर शब्दों में व्यक्त किया।

इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री मुझे स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे पर आए और वे मुझे अपनी कार में लेकर आये। केवल अपने कार में ही नहीं, बल्कि अपनी सीट पर भी। यह विशेष स्वागत उनका भारत और आप सभी के प्रति प्रेम और सम्मान को प्रतिबिंबित करता है।

मैं आपके गर्मजोशी से भरे शब्दों, आतिथ्य और मित्रता के प्रति आभारी हूं।

मित्रों,

हमने अभी-अभी एक रिकॉर्ड बनाने के स्तर का एक सांस्कृतिक प्रदर्शन देखा। 800 से अधिक नर्तक एकदम सामंजस्य में। हमारे लोग आने वाले कई वर्षों तक इस प्रदर्शन को याद रखेंगे। मैं आपको बधाई देता हूँ। मैं सभी कलाकारों को बधाई देता हूँ।

मित्रों,

प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और मैं उनके प्रधानमंत्री बनने के पहले से ही मित्र रहे हैं। मैं उनके सुधारों पर ध्यान, उनकी महान बुद्धिमत्ता और 2025 में आसियान की सक्षम अध्यक्षता की सराहना करता हूँ।

पिछले साल, मैं आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए मलेशिया नहीं आ सका। लेकिन मैंने अपने मित्र से वादा किया था कि मैं जल्द ही मलेशिया आऊँगा। और वादे के अनुसार, मैं यहाँ हूँ।

यह मेरी 2026 की पहली विदेश यात्रा है। इन उत्सवों के समय आपके साथ रहकर मुझे खुशी हो रही है। मुझे उम्मीद है कि सभी ने संक्रांति, पोंगल और तइ-पूसम् बड़े उत्साह के साथ मनाया होगा। जल्द ही, शिवरात्रि का पर्व आने वाला है। कुछ ही दिनों में रमजान शुरू होगा और फिर हरि राया बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। मेरी कामना है कि सभी को खुशी और अच्छा स्वास्थ्य मिले।

दोस्तों,

मलेशिया में भारतीय मूल की दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। भारतीय और मलेशियाई दिलों को जोड़ने वाली इतनी बहुत सी चीजें हैं। जो प्रदर्शनी प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम और मैंने थोड़ी देर पहले देखी, वह इन संबंधों को खूबसूरती से दर्शाती है। आप एक जीवंत पुल हैं, जो हमें जोड़ता है।

आपने रोटी चनाई को मलाबार परोट्टा से जोड़ा है।

नारियल, मसाले और बेशक तेह तारिक…

स्वाद इतने परिचित लगते हैं, चाहे व्यक्ति कुआलालंपुर में हो या कोच्चि में। हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। यह शायद हमारे भाषाओं और मलय भाषा में साझा शब्दों की बड़ी संख्या होने की वजह से है।

मैंने सुना है कि भारतीय फिल्में और संगीत मलेशिया में लोकप्रिय हैं। आप सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम बहुत अच्छा गाते हैं। लेकिन भारत में बहुत से देशवासियों यह नहीं पता था। उनकी पिछली यात्रा के दौरान, लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ था। भारत में एक पुराने हिंदी गाने को गाते हुए उनका वीडियो वायरल हो गया! यह अद्भुत है कि उन्हें महान एमजीआर के तमिल गाने भी पसंद हैं।

मित्रों, 

मुझे पता है कि भारत की आपके दिलों में एक खास जगह है। मुझे 2001 की एक घटना बहुत स्पष्ट रूप से याद है। जब मेरे गृह राज्य गुजरात में भूकंप आया था, तब आप में से कई लोग मदद के लिए आगे आए। मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूँ।

और उससे भी बहुत पहले, भारत को स्वतंत्र देश बनाने के लिए, आपके हजारों पूर्वजों ने महान बलिदान दिए। इनमें से कई ने कभी भारत नहीं देखा था। लेकिन वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी में शामिल होने वालों में पहले थे।

उनके सम्मान में हमने मलेशिया में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस सांस्कृतिक केंद्र रख दिया। मैं इस मौके पर मलेशिया में नेताजी सेवा केंद्र और नेताजी कल्याण फाउंडेशन के प्रयासों को भी सलाम करता हूँ।

दोस्तों,

यह वास्तव में अद्भुत है कि आपने सदियों से परंपराओं को संरक्षित रखा है। हाल ही में, मैंने अपने मासिक रेडियो संवाद 'मन की बात' में आप सभी के बारे में बात की थी। मैंने 1.4 अरब भारतीयों के साथ साझा किया कि मलेशिया में 500 से अधिक स्कूलों में बच्चों को भारतीय भाषाओं में पढ़ाया जाता है।

तिरुवळ्ळुवर और स्वामी विवेकानंद जैसे महान संतों का प्रभाव भी यहाँ महसूस किया जा सकता है। पिछले सप्ताह बतु गुफाओं में हुए तइ-पूसम् इतने दिव्य थे कि वे पळनि में होने वाले उत्सवों जैसे प्रतीत हो रहे थे। श्री वेंकटेश्वरा मंदिर, बागान दातोह में सांस्कृतिक उत्सव भी समान रूप से भव्य हैं।

मुझे बताया गया है कि यहाँ गरबा बहुत लोकप्रिय है। हम उन सिख भाइयों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को भी गहरे दिल में संजोते हैं जो यहाँ रहते हैं। आपने नाम जपो, किरत करो, वंड छको को बढ़ावा देकर श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को आज भी जीवित रखा है।

 

दोस्तों,

यहां भारत के सभी हिस्सों के लोग मौजूद हैं। सांस्कृतिक एकता के सूत्र हमें मजबूती से बांधते हैं। हमारी ताकत यह है कि हम विविधता में एकता को समझते हैं।

दोस्तों,

तमिल दुनिया को भारत का एक उपहार है। तमिल साहित्य शाश्वत है और तमिल संस्कृति वैश्विक है। इसी तरह, तमिल लोगों ने भी अपनी प्रतिभाओं से मानवता की सेवा की है। और मैं गर्व के साथ कहता हूँ, भारत के उपराष्ट्रपति, श्री सीपी राधाकृष्णन जी, हमारे विदेश मंत्री श्री जयशंकर जी, जो आज हमारे साथ हैं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी, जिन्होंने नौ बार हमारा बजट प्रस्तुत किया है और हमारे सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री, डॉ. मुरुगन, सभी तमिलनाडु के हैं।

इसी तरह, मलेशिया में तमिल प्रवासी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कर रहे हैं। वास्तव में, तमिल प्रवासी समाज यहाँ कई शताब्दियों से मौजूद है। इस इतिहास से प्रेरित होकर, हमें मलाया विश्वविद्यालय में तिरुवळ्ळुवर चेयर स्थापित करने पर गर्व है। अब हम अपने साझा विरासत को और मजबूत करने के लिए एक तिरुवळ्ळुवर केंद्र स्थापित करेंगे।

दोस्तों,

मलेशिया के साथ हमारा संबंध हर साल नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। 2024 में, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की नई दिल्ली यात्रा के दौरान, हमने अपने संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया।

आज, हम प्रगति और समृद्धि की दिशा में साझेदारों के रूप में हाथ में हाथ डाले आगे बढ़ रहे हैं। हम एक-दूसरे की सफलता का जश्न उसी तरह मनाते हैं, जैसे अपनी खुद की। मुझे प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता पर शुभकामनाओं से बहुत खुशी हुई। मैं आपसे सहमत हूं, मेरे प्रिय मित्र। भारत की सफलता मलेशिया की सफलता है, यह एशिया की सफलता है।

इसीलिए, मैं कहता हूं कि हमारे संबंधों का मार्गदर्शक शब्द है, इम्पैक्ट। इम्पैक्ट का मतलब है सामूहिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए भारत-मलेशिया साझेदारी।

हमारे संबंधों की गति पर इम्पैक्ट

हमारी महत्वाकांक्षाओं के पैमाने पर इम्पैक्ट

हमारे लोगों के लाभ के लिए इम्पैक्ट

साथ मिलकर, हम पूरी मानवता को लाभ पहुंचा सकते हैं!

दोस्तों,

भारतीय कंपनियां मलेशिया के साथ काम करने की हमेशा इच्छुक रही हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमने मलेशिया की पहली और एशिया की सबसे बड़ी इंसुलिन निर्माण सुविधा बनाने में हिस्सा लिया।

100 से अधिक भारतीय आईटी कंपनियां मलेशिया में काम कर रही हैं, जिससे हजारों नौकरियों का सृजन हुआ है। मलेशिया-भारत डिजिटल परिषद् हमारे डिजिटल सहयोग के लिए नए मार्ग बना रही है। मुझे यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत की यूपीआई जल्द ही मलेशिया में भी आ जायेगी।

दोस्तों,

हम सभी एक ही हिन्द महासागर के नीले पानी को साझा करते हैं। महासागर के पार, हमें एक-दूसरे से मिलने का बहुत शौक है। मैं आप सभी को भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करने के लिए आमंत्रित करता हूं।

पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने अवसंरचना और परोवाहन-संपर्क में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है। एक दशक में हमारे हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है। राजमार्गों का निर्माण रिकॉर्ड गति से हो रहा है। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों को अंतर्राष्ट्रीय सराहना मिल रही है। मैं आप में से अधिक से अधिक लोगों को यात्रा करने और अद्भुत भारत का अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित करता हूं।

आपको अपने मलय दोस्तों को भी अपने साथ लाना चाहिए। अकेले मत आइए। क्योंकि लोगों के बीच आपसी-संपर्क हमारी मित्रता का आधार है।

 

दोस्तों,

जब हम 2015 में मिले थे, मैंने आपसे भारत की संभावना के बारे में बात की थी। अब, मैं आपसे भारत के प्रदर्शन के बारे में बात कर रहा हूँ। एक दशक में, भारत ने बड़ा बदलाव देखा है।

तब, हम दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थे। अब, हम शीर्ष 3 के द्वार पर दस्तक दे रहे हैं। हम दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भी हैं।

तब, 'मेक इन इंडिया' एक छोटा पौधा था, जिसे अभी-अभी रोपा गया था। अब, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है। हमारा रक्षा निर्यात 2014 की तुलना में लगभग 30 गुना बढ़ गया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब भी बन गया है।

हमने दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और दुनिया के सबसे बड़े फिनटेक इकोसिस्टम का निर्माण किया है। हमारे यूपीआई प्लेटफ़ॉर्म के कारण, दुनिया के लगभग आधे रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन भारत में होते हैं।

तेज़ बढ़ोतरी के साथ-साथ, हमने यह भी सुनिश्चित किया कि हमारी वृद्धि स्वच्छ और हरित हो। उदाहरण के लिए, एक दशक में हमारी सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 40 गुनी बढ़ गई है।

मित्रों,

पहले, भारत को केवल एक विशाल बाजार के रूप में देखा जाता था। अब, हम निवेश और व्यापार के लिए एक हब हैं। भारत को विकास के लिए एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखा जाता है। चाहे यूके हो, यूएई हो, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, ओमान, ईयू या यूएसए हो, देशों ने भारत के साथ व्यापारिक समझौते किए हैं। विश्वास भारत की सबसे मजबूत मुद्रा बन गया है।

मित्रों,

भारत हमेशा आपको खुले दिल से स्वीकार करेगा। यही कारण है कि हमने कुछ महीने पहले एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। हमने भारतीय मूल के मलेशियाई नागरिकों के लिए ओसीआई कार्ड की पात्रता 6वीं पीढ़ी तक बढ़ा दी।

हम भारतीय छात्रवृत्ति ट्रस्ट फंड का समर्थन कर रहे हैं। अब, हम तिरुवळ्ळुवर छात्रवृत्तियाँ भी देने जा रहे हैं, ताकि छात्र भारत में पढ़ाई कर सकें। और हम आपको ‘भारत को जानें’ कार्यक्रम ('नो इंडिया प्रोग्राम') में देखने के लिए उत्सुक हैं।

आपको जानकर खुशी होगी कि हम जल्द ही मलेशिया में भारत का एक नया वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) खोलने जा रहे हैं। यह हमें और भी करीब लाएगा।

मित्रों,

1.4 अरब भारतीय 2047 तक एक विकसित भारत बनाना चाहते हैं।

विकसित भारत बनाना है ना?

विकसित भारत बनाके रहेंगे कि नहीं रहेंगे?

हम अपने सपनों को साकार करेंगे कि नहीं करेंगे?

हम सपनों को संकल्प में बदलेंगे कि नहीं बदलेंगे?

हम संकल्प को सिद्ध करके रहेंगे कि नहीं रहेंगे?

इस यात्रा में, हमारे प्रवासी भारतीय, भारतीय प्रवासी समुदाय, एक मूल्यवान भागीदार हैं। चाहे आपका जन्म कुआलालंपुर में हुआ हो या कोलकाता में, भारत आपके दिलों में बसता है। आप मलेशिया और भारत की प्रगति का सक्रिय हिस्सा हैं। आप समृद्ध मलेशिया और विकसित भारत के विज़न को साकार करने में मदद करेंगे।

जय हिंद!

जुम्पा लागी

मिक्का नण्ड्री!