विशाल संख्या में पधारे हुए उपस्थित महानुभावों!
मां दन्तेश्वरी का जहां आर्शीवाद है, जिस क्षेत्र के आदिवासियों ने दुनिया को जीने का रास्ता सिखाया है, ऐसी ये बस्तर की धरती है। आज मेरा ये सौभाग्य है कि आपके बीच आने का मुझे अवसर मिला, आपके दर्शन करने का सौभाग्य मिला। आज एक कार्यक्रम रायपुर में भी होने वाला था, लेकिन कल हवा के तूफान ने वहां सब तहस-नहस कर दिया। कई हमारे साथियों को चोट आई। मैं परमात्मा से प्रार्थना करता हूं कि ड्यूटी पर तैनात ये सभी बंधु-भगिनी बहुत ही जल्द स्वस्थ हों। डॉ. रमन ने कल ही मुझे फोन करके बताया था.. और उनके स्वास्थ्य की पूरी चिंता राज्य सरकार कर रही है और बहुत ही जल्द ये सभी स्वस्थ हो जाएंगे।
आज अनेक विध-कामों के निर्णय हुए हैं। शायद बस्तर के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि एक घंटे के इस समारोह में 24 हजार करोड़ रुपयों के निवेश के साथ विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करने का निर्णय.. एक राज्य, पूरे राज्य के लिए भी अगर 5 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट है, तो राज्य के लिए बहुत बड़ी गौरवशाली घटना होती है। जबकि आज एक जिले में 24 हजार करोड़ रुपया..। आने वाले दिनों में इस बस्तर की जिंदगी में कैसा बदलाव आएगा इसका मैं भली-भांति अनुमान कर सकता हूं।
आज आप किसी भी आदिवासी को जाकर पूछें, किसी भी गांव के गरीब व्यक्ति को जा करके पूछें, आप कोई भी खेत मज़दूर को पूछें, आप किसी भी किसान को पूछें कि आपका क्या सुझाव है, कि क्या करना चाहिए? आपकी क्या अपेक्षा है क्या इच्छा है? मैं विश्वास से कहता हूं, अनुभव से कहता हूं, सब के सब.. किसी भी राज्य में क्यों न रहते हों, किसी भी भू-भाग पर क्यों न रहते हों.. एक ही जवाब निकलता है कि साहब कुछ भी करो, बच्चों को रोजगार मिले ऐसा कुछ करो। किसान भी चाहता है कि बच्चों को रोजगार मिले क्योंकि उसे पता है कि उनको जीवन में आगे बढ़ने के लिए अगर रोजगार मिल जाएगा तो बाकी तो अपना संसार वो खुद मेहनत करके बना लेगा, बच्चों को पढ़ाना है तो वो भी कर लेगा, एक बार रोजगार मिल जाए। भारत के लिए सबसे पहली प्राथमिकता है हमारे देश के नौजवान को रोजगार मिले, उसे अवसर मिले, वो देश को आगे बढ़ाने के काम में भागीदार बनना चाहता है। ..और कोई मां-बाप नहीं चाहता है कि बेटा-बेटी रोजगार के लिए सैकड़ों हजार किला मीटर दूर जा करके शहरों की झुग्गी-झोपड़ी में जिंदगी बिताए, कोई मां-बाप नहीं चाहता है। हर मां-बाप चाहता है कि बेटा पास रहे और कुछ उसे काम मिल जाए। बेटा भी चाहता है, बेटी भी चाहती है कि बूढ़े-बूढ़े मां-बाप को असहाय छोड़ करके शहर में झुग्गी-झोपड़ी की जिंदगी जीने के लिए नहीं जाना है। इसलिए सरकार का यह दायित्व बनता है, शासन की जिम्मेवारी बनती है कि हम विकास को उस रूप में आगे बढ़ाएं ताकि हिन्दुस्तान के सभी भू-भाग में विकास पहुंचे, दूर-सुदूर जंगलों में भी विकास पहुंचे और गरीब की झोपड़ी तक विकास के फल पहुंचें। गरीब की झोपड़ी तक विकास का फल पहुंचने का मतलब है कि गरीब से गरीब परिवार की संतान को भी रोजगार का अवसर उपलब्ध हो। इसलिए हमने जो विकास का रास्ता चुना है उसके केंद्र में हमारा एक ही संकल्प है कि देश के नौजवान को अवसर मिले, रोजगार मिले, आगे बढ़ने के लिए उसको मौका मिले।
आज बस्तर जिले में.. कोयला पहले भी था, iron ore पहले भी था, सरकारें भी पहले थीं, लोग भी पहले थे, बेरोजगारी भी थी लेकिन फिर भी समस्या का समाधान खोजने के लिए ऐसी धीमी गति से चला जाता था कि लोग निराशा के गर्त में डूब जाते थे। आज हमारी कोशिश है कि हिन्दुस्तान के चारों तरफ रेलवे connectivity मिले, दूर-सुदूर इलाकों में भी रेल की पटरी बिछे, लोगों को आने-जाने की सुविधा बने। पटरी जब लग जाती है, ट्रेन आती है तो सिर्फ यात्रा के लिए काम आती है ऐसा नहीं है, वो एक जीवन को भी गति देता है, अर्थ-जीवन को भी गति देता है। जगदलपुर तक रेल की पटरी हिन्दुस्तान की मुख्यधारा से आपको जोड़ेगी। जब हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना लाते हैं तो गरीब से गरीब को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ते हैं और बस्तर में जगदलपुर तक की ट्रेन की बात करते हैं तो यहां के नागरिक को हिन्दुस्तान की मुख्यधारा के साथ छोड़ने का हमारा प्रयास होता है।
अभी मुख्यमंत्री जी विस्तार से बता रहे थे कि हम कच्चा माल विदेशों में बेच-बेच कर कब तक अपनी रोजी-रोटी कमाएंगे। ..और हम कैसे लोग है कि iron ore तो हम बाहर भेजें और steel बाहर से लाएं! अब वो कारोबार हमें बंद करना है। अगर iron ore हमारा होगा तो steel भी हमारा होगा और दुनिया को चाहिए तो हम steel देगें, हम iron ore में हमारे नौजवान के पसीने को जोड़ेंगे और उसी iron ore में से steel बनाएंगे और उसी iron ore में से steel बनाते समय मेरे नौजवानों की जिंदगी भी बन जाएंगी ताकि वो दुनिया के हर संकटों से टक्कर लें। ऐसा जीवन उसका ऊंचा बन जाए, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। हमारी कोशिश है विकास की नई ऊंचाइयों पर देश को ले जाने की।
आज मैं यहां डॉ. रमन सिंह जी के सपने को धरती पर उतरा हुआ देख करके आया। रमन सिंह जी के प्रति मेरे मन में मित्र होने के बावजूद भी हमेशा एक सम्मान का भाव रहा है और सबसे ज्यादा मुझे आदर तब हुआ, जब यहां के लोग महंगी.. चिरौंजी हो, काजू हो ये बेच करके नमक खरीदते थे, बदले में नमक! और समाज का शोषण करने का भाव रखने वाले लोग उन महंगे उत्पादों को ले करके बदले में नमक देते थे और बस्तर जिले के नागरिक नमक पाने के लिए पता नहीं क्या कुछ देने के लिए तैयार हो जाते थे। रमन सिंह जी ने सरकार बनाते ही प्रारंभ में तय कर लिया कि मैं नमक लोगों को पहुंचाऊंगा। उस दिन से एक मित्र होने के बावजूद भी एक विशेष आदर की मेरे मन में अनुभूति हुई कि मेरा एक साथी है जो हर पल गरीबों के लिए सोचता है, आदिवासियों के लिए सोचता है।
आज जब मैं knowledge(Education) city में जा करके आया, उसमें जो कल्पना है.. हिन्दुस्तान में जो लोग कहते हैं कि हिंसा के रास्ते पर गए हुए लोगों को वापस मुख्यधारा में लाने का रास्ता क्या है, मैं समझता हूं कि रमन सिंह जी ने रास्ता बना दिया है। कंधे पर हल! वही समस्याओं का हल ला सकता है। कंधे पर gun, ये समस्याओं का समाधान नहीं है। जिस धरती पर नक्सलवाद का जन्म हुआ था और जिसके कारण देश में नक्सलवाद की चर्चा हुई थी, वहां पर भी जा करके देखिए, अनुभव के बाद वो सीखे.. और उन्होंने भी वो रास्ता छोड़ दिया। आज वो नक्सलबाड़ी, जहां से हिंसा का मार्ग शुरू हुआ था, बम, बंदुक और गोलियां चलती थी, रक्त की धारा बहती थी, आज वहां वो बंद हो गया। जिन लोगों को लगता है कि क्या.. आए दिन ये मौत का खेल बंद होगा कि नहीं होगा। मैं देशवासियों! आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि निराश होने की जरूरत नहीं है। यह भी बंद होगा। जब पंजाब में खूनी खेल खेला जा रहा था, क्या कभी किसी ने सोचा था कि पंजाब में वो खूनी खेल खत्म होगा और लोग सुख-चैन की जिंदगी जिएंगे? आज जी रहे हैं। नक्सलबाड़ी में सोचा था? आज लोग वहां भी जी रहे हैं। मुझे विश्वास है इस भू-भाग में भी, इस गलत रास्ते पर चल पड़े लोग भी.. उनके भीतर भी कभी न कभी मानवता जगेगी।
आज मैं उस ज्ञान नगरी में जा करके आया। 800 से अधिक उन बच्चों को मिला जिनको.. कोई गुनाह नहीं था, मां-बाप से बिछुड़ना पड़ा। हिंसा के रास्ते पर पागल बने हुए युवकों ने किसी के बाप को मार दिया, किसी की मां को मार दिया, किसी मां-बाप को वहां से दूर जाने के लिए मजबूर कर दिया। उन 800 बच्चों से मैं मिला जिन्होंने अपने परिवार-जनों को खोया है। माओवाद की हिंसा के कारण उनकी जिदगी में मुसीबत आई है। लेकिन आज डॉ. रमन सिंह जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने.. जिनका सब कुछ खत्म करने के लिए माओवादी तुले हुए थे, जो बच्चों को तलवार, बम, बंदूक के रास्ते पर ले जाना चाहते थे उनको रमन सिंह जी ने हाथ में कलम पकड़ा दी, कम्प्यूटर पकड़ा दिया है और मैंने उनकी आंखों में जो चेतना देखी.. वो विश्वास देखा है, उन 800 बच्चों को देख करके मैं कहता हूं हिंसा का कोई भविष्य नहीं है। अगर भविष्य है तो वो शांतिमय मार्गों का है, वो मैं आज देख करके आया हूं, अनुभव करके आया हूं। मैं हिंसा के रास्ते पर चले हुए नौजवानों को कहना चाहता हूं कि कम से कम एक प्रयोग कीजिए, कम से कम दो-पांच दिन के लिए कंधे पर से बंदूक नीचे रख दीजिए। सादे-सीधे आदिवासी पहनते हैं, ऐसे कपड़े पहन लीजिए और आपके कारण जिस परिवार को कोई स्वजन खोना पड़ा है, किसी के बाप की मृत्यु हुई, है किसी की मां की मृत्यु हुई है.. उस घर में बचा हुआ जो बच्चा है, पांच दिन सिर्फ उसके साथ ऐसे ही बिता करके आ जाइए, उससे बातें कीजिए और उसको ये मत बताइए कि आप कौन हैं, ऐसे ही बातें कीजिए। मैं विश्वास से कहता हूं, वो बालक अपनी बातों से, अपने अनुभव से आपको पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर देगा, आपका हृदय परिवर्तन करके रख देगा। आप भी हिल जाएगे कि हिंसा के नशे में आपने कितना बड़ा पाप कर दिया है। एक बार मानवता को अंगीकार करके, राक्षसी वृत्ति से मुक्ति पा करके.. ज्यादा नहीं, कुछ पल इन पीडि़त परिवारों से जरा मिल लीजिए। आपको फिर कभी उस रास्ते पर जाने कि नौबत नहीं आएगी। आपको भी लगेगा कि आपने कुछ गलत किया है। कोई सरकार आपको बदले, कोई कानून आपको बदले, कोई लोभ-लालच आपको बदले उससे ज्यादा आप ही की गोलियों से पीड़ा पाने वाला एक बालक आपकी जिंदगी बदल सकता है। शर्त यही है कि मानवता का अंगीकार करके कुछ पल उसके साथ बिता करके देख लीजिए। मैंने देखा उन बच्चों को आज.. हिंसा से कभी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। मिल-बैठ करके रास्ते निकल सकते हैं। छत्तीसगढ़ अगर इस संकट से मुक्त हो जाए तो मैं विश्वास से कहता हूं हिन्दुस्तान में आर्थिक ऊंचाइयों पर नम्बर एक पर छत्तीसगढ़ आकर खड़ा हो सकता है। यहां के नौजवानों का भविष्य बदल सकता है और छत्तीसगढ़ के पास वो ताकत है, वो हिन्दुस्तान का भविष्य भी बदल सकता है। इसलिए मेरे भाईयो-बहनों! विकास एक ही मार्ग है जो हमारी समस्याओं का समाधान करेगा।
मुझे आज रमन सिंह जी के livelihood college को भी देखने का अवसर मिला। उन्होंने पूरे राज्य में उसका जाल बिछाया है। दुनिया के समृद्ध से समृद्ध देश हो तो भी.. एक बात आज उसका प्रमुख काम बन गया है। दुनिया का सुखी देश भी skill development को महत्व दे रहे हैं। हुनर सिखाने के लिए दुनिया में, हर देश में priority हो गई है। छत्तीसगढ़ के अंदर हुनर से शिखर तक पहुंचने का जो अभियान चलाया गया है, वो काबिले दाद है। मैं देख कर आया हूं। मैंने उन बालक-बालिकाओं को देखा, हाथ में हुनर तो है लेकिन आंख में ओझ है, तेज है और बातों में एक अपरम्पार विश्वास है। बड़े-बड़े अफसर भी.. सीएम या पीएम से बात करनी है तो कुछ पल तो set होने में time लगता है। मैंने देखा कि बच्चे फटाफट बातें करते थे। कोई झिझक नहीं थी, उनकी बातों में कोई झिझक नहीं थी। ये जो confidence level है ये जीवन में आगे बढ़ने के लिए बहुत बड़ी अमानत होता है। वो मैं आज देख कर आया हूं।
Skill Development का मिशन ले करके हम पूरे देश में चल रहे हैं क्योंकि हमारे देश के नौजवानों को रोजगार देना है ..और रोजगार देना है तो Skill Development सर्वाधिक सरल मार्ग होता है। जीवन के हर क्षेत्र में, हर नौजवान के हाथ में हुनर हो। जिसके हाथ में हुनर होता है उसको कभी जीवन जीने के लिए हाथ फैलाने की नौबत नहीं आती है, वो अपने बलबूते पर, अपनी शर्तों पर जिंदगी जी सकता है। उसे कभी मजबूर नहीं होना पड़ता है और उस काम को livelihood colleges के माध्यम से रमन सिंह जी ने चरितार्थ किया है। देश के अन्य राज्यों के लिए भी यह अपने आप में एक मिसाल बन सकती है। मैं चाहूंगा, मैं भी प्रयास करूंगा कि देश के और राज्य भी आ करके इसको देखें, इस मॉडल को समझें और इसको कैसे लागू किया जा सकता है उस पर चर्चा करें।
भाईयों-बहनों! आपने हमें भारी बहुमत के साथ आपकी सेवा करने का मौका दिया है। छत्तीसगढ़ पूरी ताकत के साथ हमारे पीछे खड़ा है और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि जितना आपने दिया है, हम ब्याज समेत विकास करके लौटाएंगे।
आज तेंदू पत्ता वाले हमारे किसान भाइयों-बहनों को बोनस देने का भी मुझे सौभाग्य मिला और उनको भी मैंने पूछा कि क्या करोगे, हरेक से मैंने पूछा। हरेक को पता है कि इन पैसों का उपयोग अपने बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए कैसे करना है, इसका खाका उनके दिमाग में तैयार है। यही तो है हरेक का aspiration । उसको पूर्ण करने का हमारा प्रयास है।
एक समय था.. हिन्दुस्तान की तरफ दुनिया कैसे देखती थी? ज्यादातर तो देखने के लिए तैयार ही नहीं थी और जो देखते थे वो भी बड़े उपेक्षा के भाव से देखते थे या तो हंसी-मजाक के रूप में देखते थे। देखते ही देखते माहौल बदला कि नहीं बदला? दुनिया हिन्दुस्तान को पूछने लगी कि नहीं लगी? विश्व के समृद्ध देशों को भी हिन्दुस्तान की अहमियत को मानना पड़ा कि नहीं मानना पड़ा। सवा सौ करोड़ का देश! इसको सर झुका करके जीने की जरूरत नहीं है। वो वक्त चला गया। सवा सौ करोड़ देशवासियों का संकल्प है कि हमारा देश माथा ऊंचा करके आंख से आंख मिला करके, सीना तान करके जीने के लिए पैदा हुआ है, झुकने के लिए पैदा नहीं हुआ है। वो शक्ति हमारे भीतर पड़ी है, सवा सौ करोड़ देशवासियों के भीतर पड़ी है। उस शक्ति को मैं भली-भांति पहचानता हूं। विश्व में जब किसी से बात करता हूं तो अकेला मोदी बात नहीं करता है, सवा सौ करोड़ देशवासी एक साथ आंख मिला करके बात करते हैं और विश्व आज हिन्दुस्तान का लोहा मानने लगा है। पूरे विश्व मानने लगा है कि आज दुनिया में तेज गति से आर्थिक विकास करने वाला कोई देश अगर है.. सारे संसार में, तो उस देश का नाम है- हिन्दुस्तान।
कितनी तेजी से परिवर्तन आ रहा है, लेकिन कुछ लोग होते हैं, जिनको जीवनभर लोगों को गरीब रखने में ही आनंद आया, दु:खी रखने में ही आनंद आया। अगर उसमें कुछ बदलाव आता है, तो वो अब दु:खी हो रहे हैं। उनकी परेशानी मैं समझ सकता हूं। जो लोग विजय पचा नहीं पाए 60 साल तक, वो पराजय भी नहीं पचा पा रहे हैं। भाईयों-बहनों, जिनको जनता ने नकार दिया है, उनके पास झूठ फैलाने के सिवाए, जनता को भ्रमित करने के सिवाए, जनता को गुमराह करने के सिवाए कोई रास्ता नहीं बचा है।
मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं, इन्हीं दिनों को याद कर लीजिए, इसी कालखंड में मैं छत्तीसगढ़ भी आया था, पिछले साल। अखबारों में क्या आता था? टीवी में क्या समाचार आते थे एक साल पहले? .. आज इतने का भ्रष्टाचार हुआ, आज ये घोटाला हुआ, वो घोटाला हुआ, इसने इतना मार लिया, उसने उतना लूट लिया, यही खबरें आती थीं कि नहीं आती थीं। कोयले की चोरी की चर्चा होती थी कि नहीं होती थी? एक साल हुआ है मेरे भाईयों-बहनों! एक भी खबर आई है क्या? क्या ईमानदारी से देश नहीं चलाया जा सकता क्या? चलाया जा सकता है। एक साल के अनुभव से मैं कह सकता हूं कि ये देश ईमानदारी से चलाया जा सकता है।
चिठ्ठी–पर्ची से कोयले की खदानें दे दी थीं। आज हमने सार्वजनिक रूप से auction किया और वो खज़ाना राज्य की तिजोरी में दे दिया। कोयले के auction का पैसा राज्य के खज़ाने में आ गया। इतना ही नहीं, जहां पर खनिज़ निकलता है, उस इलाके के जो जिले हैं.. और ज्यादातर पूरे देश में आदिवासी क्षेत्र है जहां पर खनिज़ सम्पदा है। वहां हमने special संगठन की रचना की है। वहां से कुछ हिस्सा लोगों के कल्याण के लिए खर्च कर दिया जाएगा। पहली बार गरीबों के लिए रुपए तिजोरी से निकालने का काम हो रहा है।
मुझे विश्वास है कि जिस विकास के रास्ते पर हम चल पड़े हैं, उस रास्ते से देश की समस्याओं का समाधान भी करेंगे, आपकी आशाओ-आकांक्षाओं को परिपूर्ण भी करेंगे और आपके साथ कंधे से कंधा मिला करके देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में हम सफल होंगे।
इसी एक विश्वास के साथ मैं फिर एक बस्तर को, छत्तीसगढ़ को हृदयपूर्वक बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
বন্ধুগণ,
আজ সারা দেশের হাজার হাজার তরুণ-তরুণীর জন্য একটি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ দিন। ৫১,০০০-এরও বেশি জন সরকারি চাকরির জন্য নিয়োগপত্র পেয়েছেন। আজ আপনারা সবাই দেশের উন্নয়ন যাত্রার গুরুত্বপূর্ণ অংশীদার, দায়িত্বশীল অংশীদার হয়ে উঠছেন। আপনারা রেল, ব্যাংকিং, প্রতিরক্ষা, স্বাস্থ্য, শিক্ষা এবং আরও অনেক ক্ষেত্রে নতুন দায়িত্ব গ্রহণ করতে চলেছেন। আগামী বছরগুলিতে একটি উন্নত ভারত গড়ার সংকল্প পূরণে আপনারা সকলেই এক গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করবেন।
বন্ধুগণ,
এই পর্যায়ে পৌঁছানোর জন্য আপনারা নিশ্চয়ই ব্যাপক প্রস্তুতি এবং কঠোর পরিশ্রম করেছেন। এই সাফল্যের জন্য আমি আপনাদের এবং আপনাদের পরিবারকে অভিনন্দন জানাই। আপনাদের এখানে নিয়ে আসার ক্ষেত্রে আপনাদের বাবা-মা এবং পরিবারের অবদান অমূল্য। কিন্তু শুধু তাই নয়, পরিবার যেমন অবদান রাখে, তেমনি আমাদের এখানে নিয়ে আসার ক্ষেত্রে সমাজও একটি বিশাল ভূমিকা পালন করে। আমরা শুধুমাত্র নিজেদের কারণে বা শুধুমাত্র আমাদের পরিবারের কারণে এই অবস্থানে পৌঁছাই না। এই বিশাল দেশের ১.৪ বিলিয়ন নাগরিকের অবদানও অপরিসীম। আর তাই, আমাদের নিজেদের প্রতি, আমাদের পরিবারের প্রতি এবং সমগ্র সমাজের প্রতি একটি দায়িত্ব রয়েছে। এবং আমি নিশ্চিত যে আপনারা এই সমস্ত কাজের জন্য নিজেদেরকে আরও বেশি সক্ষম করে তুলবেন। আপনাদের সকলের জন্য শুভকামনা রইল।

বন্ধুগণ,
আপনারা সবাই জানেন যে, মাত্র দুদিন আগে আমি পাঁচটি দেশ সফর করে ফিরেছি। যদিও এটি মাত্র পাঁচটি দেশের সফর ছিল, আমি কয়েক ডজন দেশের প্রধান সংস্থাগুলির নেতাদের সাথে কথা বলেছি, আলোচনা করেছি এবং দেখা করেছি, এবং আমি পুরোটা সময় ধরে একটি জিনিস ক্রমাগত অনুভব করেছি। বিশ্ব ভারতের যুবসমাজ এবং এর প্রযুক্তিগত অগ্রগতি নিয়ে অত্যন্ত উচ্ছ্বসিত। আজ, বিশ্ব ভারতের উন্নয়ন যাত্রার অংশ হতে চায়। ভারতও বিশ্বজুড়ে বিভিন্ন দেশের সঙ্গে অংশীদারিত্ব করছে। এর উদ্দেশ্য হল ভারতের যুবকদের সুযোগ ও কর্মসংস্থান প্রদান করা এবং তাদের সম্ভাবনাকে উন্মোচন করা। আমি সত্যিই চাই আমার দেশের যুবকদের বৈশ্বিক অভিজ্ঞতা হোক। এই সফরের সময়, যদি আমি নেদারল্যান্ডসের কথা বলি, সেমিকন্ডাক্টর, জল, কৃষি এবং উন্নত উৎপাদন নিয়ে আলোচনা হয়েছে - সুইডেনের সঙ্গে কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তা (এ আই) এবং ডিজিটাল উদ্ভাবনে সহযোগিতা নিয়ে অনেক আলোচনা হয়েছে, - নরওয়ের সঙ্গে সবুজ প্রযুক্তি এবং সামুদ্রিক সহযোগিতা নিয়ে আলোচনা এগিয়েছে, সংযুক্ত আরব আমিরাতের সঙ্গে কৌশলগত শক্তি এবং প্রযুক্তি অংশীদারিত্বের বিষয়ে গুরুত্বপূর্ণ চুক্তি স্বাক্ষরিত হয়েছে, ইতালির সঙ্গে প্রতিরক্ষা, গুরুত্বপূর্ণ খনিজ, বিজ্ঞান ও প্রযুক্তির মতো অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ ক্ষেত্রে অংশীদারিত্বের চুক্তি স্বাক্ষরিত হয়েছে।
বন্ধুগণ,
এই সমস্ত চুক্তি থেকে ভারতের যুবসমাজ সরাসরি উপকৃত হবে। এবং আপনারা হয়তো লক্ষ্য করেছেন, এই সমস্ত বিষয় ভারতের জন্য একটি উজ্জ্বল ও সক্ষম ভবিষ্যৎ নিশ্চিত করে। কারণ প্রতিটি নতুন বিনিয়োগ, প্রতিটি প্রযুক্তিগত অংশীদারিত্ব, প্রতিটি শিল্প সহযোগিতা শুধু ভারতের যুবকদের জন্য নতুন সুযোগই নিয়ে আসে না, বরং অগণিত নতুন সুযোগও তৈরি করে।
আমার তরুণ বন্ধুরা,
আমাদের মনে রাখতে হবে যে, এই ক্ষেত্রগুলিতেই বিনিয়োগ এবং অংশীদারিত্বের মাধ্যমে এমন শিল্প তৈরি হবে যা আগামী তিন থেকে চার দশকে বিশ্বব্যাপী প্রবৃদ্ধিকে রূপ দেবে। এবং এতে ভারতের যুবসমাজ নিঃসন্দেহে একটি প্রধান ভূমিকা পালন করবে।

বন্ধুগণ,
আমি আপনাদের একটি উদাহরণ দিই যে কীভাবে ভারত বিশ্বের জন্য একটি বিশ্বস্ত সাপ্লাই চেইন পার্টনার হয়ে উঠছে। উদাহরণস্বরূপ, ডাচ সেমিকন্ডাক্টর কোম্পানি এএসএমএল, যে নামটি আপনাদের অনেকের কাছেই পরিচিত, তাদের একটি ভারতীয় কোম্পানি টাটা স্টিলের সঙ্গে একটি চুক্তি রয়েছে। ভারত বিশ্বের সেই কয়েকটি দেশের মধ্যে একটি যার সঙ্গে এই কোম্পানিটি চুক্তি স্বাক্ষর করেছে। এএসএমএল এবং টাটা ইলেকট্রনিক্সের মধ্যে এই একটি চুক্তিই ভারতে অগণিত নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ তৈরি করবে এবং পরবর্তী প্রজন্মের প্রযুক্তিতে ভারতের প্রবেশদ্বার খুলে দেবে। একইভাবে, সুইডেনের সঙ্গে প্রযুক্তি ও এআই অংশীদারিত্ব এবং সংযুক্ত আরব আমিরশাহীর সঙ্গে সুপারকম্পিউটিং সহযোগিতা ভারতের প্রযুক্তিগত সক্ষমতাকে উল্লেখযোগ্যভাবে শক্তিশালী করবে। এই চুক্তিগুলো নিঃসন্দেহে আমাদের যুবকদের জন্য নতুন সুযোগ তৈরি করবে।
বন্ধুগণ,
আজ, পরিচ্ছন্ন শক্তি, গুরুত্বপূর্ণ খনিজ, সবুজ হাইড্রোজেন এবং টেকসই উৎপাদন সম্পর্কিত ক্ষেত্রগুলিও দ্রুত বৃদ্ধি পাচ্ছে এবং এগিয়ে যাচ্ছে। এই সম্পর্কিত অংশীদারিত্বগুলি একটি নতুন অর্থনীতির জন্য নতুন সুযোগের দ্বার উন্মোচন করছে। সুইডেন, নরওয়ে এবং ইতালির মতো দেশগুলির সঙ্গে সবুজ রূপান্তর এবং টেকসই প্রযুক্তিতে সহযোগিতাও বাড়ছে। এটি পরিচ্ছন্ন উৎপাদন সম্পর্কিত ভবিষ্যৎ শিল্পগুলিতে ভারতের অবস্থানকে শক্তিশালী করবে। এছাড়াও, ভারত বন্দর, জাহাজ চলাচল এবং সামুদ্রিক পরিকাঠামো সম্পর্কিত চুক্তিগুলির উপর দ্রুত কাজ করেছে। সংযুক্ত আরব আমিরশাহী এবং নরওয়ের সঙ্গে অংশীদারিত্ব ভারতের জাহাজ নির্মাণ ইকোসিস্টেমকে শক্তিশালী করবে। এবং আপনারা জানেন, জাহাজ নির্মাণের জন্য প্রচুর পরিমাণে দক্ষ জনবলের প্রয়োজন হয়। এর মানে হল যে ভারতীয় প্রকৌশলী, প্রযুক্তিবিদ এবং দক্ষ কর্মীদের চাহিদা কল্পনাতীতভাবে বাড়তে চলেছে এবং অনেক সুযোগ তৈরি হবে।
বন্ধুগণ,
প্রতিটি নতুন অংশীদারিত্বের মাধ্যমে, আমরা ভারতীয় স্টার্টআপ, গবেষক এবং তরুণ পেশাদারদের বিশ্বের সঙ্গে সংযোগ স্থাপনের জন্য নতুন পথ তৈরি করছি। এটি ভারতীয় যুবকদের উন্নত দক্ষতা, বিশ্ব বাজার এবং বিকাশের নতুন নতুন সুযোগও প্রদান করবে। আজ, বিশ্ব সেই দেশগুলিকে সম্মান করে যারা উদ্ভাবন করে, নির্মাণ করে এবং বৃহৎ পরিসরে সরবরাহ করতে পারে। ভারত তিন দিকেই দ্রুতগতিতে এগিয়ে চলেছে, এবং এই পরিবর্তনের পেছনের সবচেয়ে বড় শক্তি হলো তোমরা সবাই, আমার তরুণ বন্ধুরা, ভারতের যুবসমাজ। আমি বিশ্বের যেখানেই যাই, ভারতের যুবশক্তি নিয়ে আলোচনা করে অনেক সময় কাটাই।

বন্ধুগণ,
আজ প্রত্যেক ভারতীয় এক দৃঢ় সংকল্প নিয়ে এগিয়ে চলেছে। এই সংকল্প হলো ২০৪৭ সালের মধ্যে একটি উন্নত ভারত গড়ে তোলা। এই লক্ষ্য অর্জনের জন্য দেশ বিভিন্ন খাতে বিনিয়োগ করছে। এবং এই বিনিয়োগ দেশের যুবকদের জন্য লক্ষ লক্ষ নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ তৈরি করছে। উদাহরণস্বরূপ, আজ ভারতে সেমিকন্ডাক্টর উৎপাদনের জন্য একটি সম্পূর্ণ সাপ্লাই চেইন তৈরি করা হচ্ছে। ভবিষ্যতে, ১০টি প্রধান ভারতীয় সেমিকন্ডাক্টর ইউনিট বিশ্বব্যাপী নিজেদের ছাপ ফেলবে। এগুলি বিপুল সংখ্যক ভারতীয় যুবকের সম্ভাবনা, তাদের মেধা, তাদের প্রতিশ্রুতি এবং স্বাভাবিকভাবেই, কর্মসংস্থানের সুযোগকে কাজে লাগাবে। ভারত জাহাজ নির্মাণ থেকে শুরু করে জাহাজ মেরামত ও ওভারহোলিং পর্যন্ত একটি ইকোসিস্টেমও তৈরি করছে। এর জন্য প্রায় ৭৫,০০০ কোটি টাকা বিনিয়োগ করা হচ্ছে। একইভাবে, আমরা ভারতের অভ্যন্তরে একটি সম্পূর্ণ এমআরও ইকোসিস্টেম, অর্থাৎ রক্ষণাবেক্ষণ, ওভারহোল এবং মেরামত সুবিধা তৈরি করছি। এটি দেশের বিমান যাতায়াত ক্ষেত্রকে ব্যাপকভাবে উপকৃত করবে এবং এটি অবশ্যই ভারতের যুবকদের জন্য নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ তৈরি করবে।
বন্ধুগণ,
ভারত আজ একটি প্রধান ইলেকট্রনিক্স উৎপাদনকারী দেশ। এবং আমরা ভারতের মধ্যেই সম্পূর্ণ ইলেকট্রনিক্স ভ্যালু চেইন গড়ে তুলছি। চলমান পিএলআই প্রকল্পের ফলে দেশে রেকর্ড পরিমাণ ইলেকট্রনিক্স উৎপাদন হচ্ছে এবং লক্ষ লক্ষ যুবক-যুবতীও কর্মসংস্থান পাচ্ছে।
বন্ধুগণ,
ভারতের সরকারি ও বেসরকারি ক্ষেত্র যৌথভাবে এই ধরনের অসংখ্য উদ্যোগে বিপুল পরিমাণে বিনিয়োগ করছে। এই বিনিয়োগ দেশের যুবকদের কর্মসংস্থান দিচ্ছে এবং তাদের স্বপ্ন পূরণ করছে। একজন সরকারি কর্মচারী হিসেবে, যা আজ আপনার নিয়োগপত্র পূরণ করার পর আপনার পরিচয় হয়ে উঠবে, আপনাকে সর্বদা মনে রাখতে হবে যে দেশের জন্য ব্যবসা-বাণিজ্যের সরলীকরণ কতটা গুরুত্বপূর্ণ।

বন্ধুগণ,
ভারতের উন্নয়ন ও কর্মসংস্থান সৃষ্টির ইতিহাসে এটি একটি সুপরিচিত সত্য, এবং আপনারা জানেন যে পরিকাঠামো এক্ষেত্রে একটি বিশাল ভূমিকা পালন করে। গ্রাম, ছোট শহর এবং প্রত্যন্ত অঞ্চলগুলো যখন উন্নয়নের সঙ্গে সংযুক্ত থাকে, তখনই একটি দেশের অগ্রগতির সুফল আরও বেশি মানুষের কাছে পৌঁছাতে পারে। গত ১২ বছরে রেলপথ, মহাসড়ক, বিমানবন্দর, লজিস্টিকস, বন্দর এবং ডিজিটাল পরিকাঠামো অভাবনীয় গতিতে প্রসারিত হয়েছে এবং প্রতিটি স্তরে উন্নয়ন চলছে। আজ, আপনি আপনার এলাকার যেকোনো দিকে ১০০ কিলোমিটার ভ্রমণ করলেই দেখতে পাবেন যে ভারত সরকারের কিছু না কিছু উন্নয়ণকর্ম চলছে। এমনকি গ্রামেও দ্রুত পরিবর্তন দৃশ্যমান হচ্ছে। বর্ধিত সংযোগ ব্যবস্থা কৃষক, ছোট ব্যবসায়ী এবং শিক্ষার্থীদের জন্য নতুন সম্ভাবনার দ্বার উন্মুক্ত করেছে। আজ লক্ষ লক্ষ পরিবারের স্থায়ী বাড়ি রয়েছে। এর অর্থ হলো, বিশ্বের অনেক দেশে ইতোমধ্যে যতগুলো নতুন বাড়ি রয়েছে, আমরা গত এক দশকে তার থেকে বহুগুণ বেশি বাড়ি তৈরি করেছি। শুধু তাই নয়, আমরা আমাদের পরিচ্ছন্নতা অভিযানের কথা কাউকে ভুলতে দিই না, এবং আমরাও ভুলি না। এতে শৌচাগার একটি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করে, এবং আমরা সেদিকেও জোর দিচ্ছি। আজ কোটি কোটি বাড়িতে বিদ্যুৎ পৌঁছেছে। ছাদে উৎপাদিত সৌরশক্তির ক্ষেত্রে অনেক নতুন বিক্রেতা এসেছেন। এখন জল জীবন মিশনের দিকে তাকান, যা ট্যাপের জল সরবরাহ করছে। আমি লক্ষ্য করছিলাম যে আমি শহরগুলিতে পিএনজি সংযোগ বাড়াতে চেয়েছিলাম, কিন্তু আমরা যথেষ্ট প্লাম্বার খুঁজে পাচ্ছিলাম না; একটি ঘাটতি ছিল, কারণ বিপুল সংখ্যক প্লাম্বার জল জীবন মিশনে নিযুক্ত ছিলেন। এখন, এখানে আমাদের বিদ্যুতের জন্য বড় শহরগুলিতে দ্রুত পিএনজি সংযোগ বাড়াতে হয়েছিল, তাই আপনি কল্পনা করতে পারেন যে কখনও কখনও যখন লোকের প্রয়োজন হয়, তখন লোকের অভাব দেখা যায়।
বন্ধুগণ,
এই পরিবর্তনগুলোর প্রভাব শুধু সাধারণ নাগরিকদের সুবিধার মধ্যেই সীমাবদ্ধ নয়। গ্রামে গ্রামে রাস্তাঘাট পৌঁছেছে, ফলে বাজারে যাতায়াত সহজ হয়েছে। উন্নত বিদ্যুৎ সংযোগের ফলে ক্ষুদ্র শিল্পের বিকাশ ঘটেছে। গ্রামে গ্রামে কৃষিপণ্যের মূল্য সংযোজন শুরু হয়েছে। আগে মানুষ লাল লঙ্কা বিক্রি করত, কিন্তু এখন বিদ্যুৎ থাকায় তাঁরা লঙ্কার গুঁড়ো তৈরি করে, তা প্যাকেট করে বিক্রি করছেন। ফলস্বরূপ, গ্রামের ক্ষুদ্র শিল্পগুলো সমৃদ্ধ হচ্ছে। ডিজিটাল সংযোগ বৃদ্ধির ফলে গ্রামবাসীরা বিশ্বের সঙ্গে যুক্ত হচ্ছেন, আধুনিকতার সঙ্গে একীভূত হচ্ছেন। শহর ও গ্রামের মধ্যেকার পার্থক্য কমে আসছে, এবং এটি অর্থনীতির গতিকে ত্বরান্বিত করেছে। এই সবকিছুর ইতিবাচক প্রভাব দেশের যুবকদের জন্য একটি উজ্জ্বল ভবিষ্যৎ নিশ্চিত করে। শুধু কর্মসংস্থানই তৈরি হচ্ছে না, বরং জাতিও নতুন করে আত্মমর্যাদা ফিরে পেয়ে এগিয়ে যাচ্ছে এবং লক্ষ লক্ষ মানুষ নতুন সুযোগ পাচ্ছে।
বন্ধুগণ,
আজ ভারতের যুবকদের সামনে এগিয়ে যাওয়ার এবং তাঁদের স্বপ্ন পূরণ করার এমন সুযোগ রয়েছে যা আগে কখনও দেখা যায়নি। আমি কাউকে দোষ দিচ্ছি না, কিন্তু বাস্তবতা হলো সবকিছুই খুব দ্রুত গতিতে, বিশাল পরিসরে এবং বৈচিত্র্যে পরিপূর্ণ হয়ে ঘটছে। উৎপাদন, প্রযুক্তি, স্টার্টআপ, ডিজিটাল পরিষেবা, রেল, প্রতিরক্ষা, এমনকি মহাকাশসহ বিভিন্ন ক্ষেত্রে আমাদের জন্য অগণিত সুযোগ অপেক্ষা করছে। আমাদের প্রচেষ্টা হলো, যত বেশি সম্ভব তরুণ-তরুণী যেন এই নতুন সুযোগগুলো কাজে লাগাতে পারে এবং দেশের যুবসমাজ তাদের প্রতিভা প্রদর্শনের জন্য পর্যাপ্ত সুযোগ পায়। এজন্য, দক্ষতা উন্নয়ন, শিল্প-সংযুক্ত শিক্ষা এবং ভবিষ্যৎ প্রযুক্তির উপর ক্রমাগত জোর দেওয়া হচ্ছে। আইটিআইগুলোকে আধুনিকীকরণ করা হচ্ছে। জাতীয় দক্ষতা প্রশিক্ষণ প্রতিষ্ঠানগুলোকে শক্তিশালী করা হচ্ছে। পিএম সেতুর মতো উদ্যোগগুলো এই দিকেই কাজ করছে।

বন্ধুগণ,
গত কয়েক বছরে দেশে স্ব-কর্মসংস্থান এবং উদ্যোক্তা হওয়ার একটি নতুন সংস্কৃতি গড়ে উঠেছে। ভারত বিশ্বের তৃতীয় বৃহত্তম স্টার্টআপ ইকোসিস্টেম। এই পরিসংখ্যানটি মনে রাখবেন, দেশে ২ লক্ষ ৩০ হাজারেরও বেশি স্বীকৃত স্টার্টআপ রয়েছে। এবং তাদের মধ্যে তরুণরাও জড়িত। গুরুত্বপূর্ণ বিষয় হলো, এই পরিবর্তন শুধু বড় শহরগুলিতেই সীমাবদ্ধ নয়, এবং এতে আমি সবচেয়ে বেশি আনন্দিত। আজকাল টিয়ার-২ এবং টিয়ার-৩ শহরগুলির বহু তরুণ-তরুণীও স্টার্টআপ এবং উদ্ভাবনের জগতে তাদের শক্তি প্রদর্শন করছে; তাদের সম্ভাবনা উল্লেখযোগ্য। এই পরিবর্তন এখন দেশের অর্থনীতির একটি গুরুত্বপূর্ণ অংশ। এই পরিবর্তনে আমাদের নারীদের ভূমিকাও ক্রমাগত বাড়ছে। আজ বিপুল সংখ্যক নারী-নেতৃত্বাধীন স্টার্টআপের কথা শুনে আমি গর্বে ভরে যাই। আমি বিশ্বকে বলি যে আমাদের দেশে স্টার্টআপে নারীদের ভূমিকা উল্লেখযোগ্যভাবে বাড়ছে এবং বহু নারী এগিয়ে আসছেন। মুদ্রা প্রকল্পের অধীনে লক্ষ লক্ষ নারী আর্থিক সহায়তা পেয়েছেন। পিএম স্বনিধির মতো প্রকল্পগুলিও লক্ষ লক্ষ নারীকে স্বাবলম্বী হওয়ার সুযোগ দিয়েছে। আজকাল গ্রামে ও ছোট শহরগুলোতে আগের চেয়ে অনেক বেশি নারী নিজেরাই নতুন উদ্যোগ শুরু করছেন।
বন্ধুগণ,
এই নীতি ও সিদ্ধান্তের কথা সম্প্রচারের মাঝে, আপনাদের আরও একটি কথা অবশ্যই মনে রাখতে হবে। যেকোনো ব্যবস্থার প্রকৃত শক্তি তার জনগণের মধ্যেই নিহিত থাকে। জনগণই জনগণের শক্তি, জনগণের ক্ষমতা, এবং এই জনগণের ক্ষমতাই জাতীয় শক্তি সৃষ্টি করে। আপনারা যে ব্যবস্থার অংশ হতে চলেছেন, তা লক্ষ লক্ষ দেশবাসীর জীবন, তাদের আশা-আকাঙ্ক্ষার সঙ্গে সরাসরি সংযুক্ত। সরকারি চাকরি হলো মানুষের জীবনকে সহজ করার একটি মাধ্যম। আপনারা যে বিভাগেই কাজ করুন না কেন, আপনাদের আচরণ, সংবেদনশীলতা এবং দৃষ্টিভঙ্গি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ হবে। দেশ আপনাদের উপর আস্থা রেখেছে। এখন আপনাদের কাজ, চালচলন, কথা এবং আচরণের মাধ্যমে সেই আস্থাকে আরও শক্তিশালী করা আপনাদের দায়িত্ব। দেশবাসীর হৃদয়ে এক নতুন বিশ্বাস পূর্ণ হবে এবং আপনাদের সান্নিধ্যে এসে তারা নতুন আশা নিয়ে এগিয়ে যাবে। অতএব, প্রত্যেক তরুণ কর্মযোগীর উচিত তাদের কাজকে একটি দায়িত্ব হিসেবে দেখা। আর আমার কাছে, আপনারা অনেক মূল্যবান। অতীতে আমরা শুনতাম, "সহস্রবাহু সম্পন্ন অমুক, সহস্রবাহু সম্পন্ন তমুক ।" আজ আপনারাই সরকারের বাহু, আপনারাই সরকারের শক্তি। যাঁরা ইতিমধ্যেই সরকারে আছেন, তাঁরা যেমন আছেন, তেমনি যাঁরা নতুন এসেছেন, তাঁরাও আছেন। আজ ভারতের জনগণের আকাঙ্ক্ষা দ্রুতগতিতে বাড়ছে, এবং আমি এটিকে উন্নয়নের একটি ইতিবাচক লক্ষণ বলে মনে করি। আমাদের জনগণের আকাঙ্ক্ষা বুঝতে হবে এবং সেই অনুযায়ী সমান দ্রুত গতিতে কাজ করতে হবে। এমন পরিস্থিতিতে, সরকারি চাকরিতে প্রবেশকারী তরুণদের ভূমিকা অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ হয়ে উঠেছে। আপনাদের অবশ্যই ক্রমাগত শিখতে হবে এবং নতুন প্রযুক্তি, নতুন ব্যবস্থা ও নতুন চাহিদার জন্য নিজেদের প্রস্তুত করতে হবে। এক্ষেত্রে আইগট কর্মযোগী প্ল্যাটফর্মটি খুব সহায়ক হবে। কর্মযোগী প্রারম্ভ-এর মতো মডিউলগুলি আপনাদের দায়িত্বগুলি বুঝতে অনেক সাহায্য করবে। আমি আপনাদের এর সর্বোচ্চ সুবিধা নিতে অনুরোধ করছি।
বন্ধুগণ,
আজ ভারতের যুবসমাজ বিশ্বের প্রতিটি ক্ষেত্রে নিজেদের ছাপ রাখছে। এই একই চেতনা, এই শক্তি জনসেবার ক্ষেত্রেও প্রতিফলিত হওয়া উচিত। এমন যুবকদের প্রচেষ্টাতেই একটি উন্নত ভারত গড়ে উঠবে, যারা তাদের কাজকে দেশ ও জনগণের সেবার মাধ্যম হিসেবে বিবেচনা করে। আমাদের দেশে বলা হয় যে, জনগণের সেবা করাই ঈশ্বরের সেবা। আমার পূর্ণ বিশ্বাস আছে যে, আজ নিয়োগপত্র প্রাপ্ত আমাদের তরুণ সহকর্মীরা ভারতের উন্নয়ন যাত্রায় নতুন গতি আনবে। আপনাদের কাজ এবং আপনাদের সিদ্ধান্ত একটি উন্নত ভারত গড়ার সংকল্পকে পূর্ণতা দেবে। এবং আপনারা সেই মন্ত্রটি কখনও ভুলবেন না। আমাদের মন্ত্র হলো: নাগরিকরাই ঈশ্বর। নাগরিকরাই ঈশ্বর। নাগরিকদের কল্যাণ আমাদের কর্তব্য। আবারও, আজ নিয়োগপত্র প্রাপ্ত সকল তরুণ-তরুণীকে তাদের ভবিষ্যৎ জীবনের জন্য এবং দেশসেবার এই সুযোগটি কাজে লাগানোর জন্য আমার আন্তরিক শুভেচ্ছা জানাই। আপনাদের সকলকে অনেক ধন্যবাদ।


