Text of PM’s address at public meeting in Dantewada, Chhattisgarh

Published By : Admin | May 9, 2015 | 19:10 IST

विशाल संख्‍या में पधारे हुए उपस्थित महानुभावों!

मां दन्‍तेश्‍वरी का जहां आर्शीवाद है, जिस क्षेत्र के आदिवासियों ने दुनिया को जीने का रास्‍ता सिखाया है, ऐसी ये बस्‍तर की धरती है। आज मेरा ये सौभाग्‍य है कि आपके बीच आने का मुझे अवसर मिला, आपके दर्शन करने का सौभाग्‍य मिला। आज एक कार्यक्रम रायपुर में भी होने वाला था, लेकिन कल हवा के तूफान ने वहां सब तहस-नहस कर दिया। कई हमारे साथियों को चोट आई। मैं परमात्‍मा से प्रार्थना करता हूं कि ड्यूटी पर तैनात ये सभी बंधु-भगिनी बहुत ही जल्‍द स्‍वस्‍थ हों। डॉ. रमन ने कल ही मुझे फोन करके बताया था.. और उनके स्‍वास्‍थ्‍य की पूरी चिंता राज्‍य सरकार कर रही है और बहुत ही जल्‍द ये सभी स्‍वस्‍थ हो जाएंगे।

आज अनेक विध-कामों के निर्णय हुए हैं। शायद बस्‍तर के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि एक घंटे के इस समारोह में 24 हजार करोड़ रुपयों के निवेश के साथ विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्‍त करने का निर्णय.. एक राज्‍य, पूरे राज्‍य के लिए भी अगर 5 हजार करोड़ का प्रोजेक्‍ट है, तो राज्‍य के लिए बहुत बड़ी गौरवशाली घटना होती है। जबकि आज एक जिले में 24 हजार करोड़ रुपया..। आने वाले दिनों में इस बस्‍तर की जिंदगी में कैसा बदलाव आएगा इसका मैं भली-भांति अनुमान कर सकता हूं।

आज आप किसी भी आदिवासी को जाकर पूछें, किसी भी गांव के गरीब व्‍यक्ति को जा करके पूछें, आप कोई भी खेत मज़दूर को पूछें, आप किसी भी किसान को पूछें कि आपका क्‍या सुझाव है, कि क्‍या करना चाहिए? आपकी क्‍या अपेक्षा है क्‍या इच्‍छा है? मैं विश्‍वास से कहता हूं, अनुभव से कहता हूं, सब के सब.. किसी भी राज्‍य में क्‍यों न रहते हों, किसी भी भू-भाग पर क्‍यों न रहते हों.. एक ही जवाब निकलता है कि साहब कुछ भी करो, बच्‍चों को रोजगार मिले ऐसा कुछ करो। किसान भी चाहता है कि बच्‍चों को रोजगार मिले क्‍योंकि उसे पता है कि उनको जीवन में आगे बढ़ने के लिए अगर रोजगार मिल जाएगा तो बाकी तो अपना संसार वो खुद मेहनत करके बना लेगा, बच्‍चों को पढ़ाना है तो वो भी कर लेगा, एक बार रोजगार मिल जाए। भारत के लिए सबसे पहली प्राथमिकता है हमारे देश के नौजवान को रोजगार मिले, उसे अवसर मिले, वो देश को आगे बढ़ाने के काम में भागीदार बनना चाहता है। ..और कोई मां-बाप नहीं चाहता है कि बेटा-बेटी रोजगार के लिए सैकड़ों हजार किला मीटर दूर जा करके शहरों की झुग्‍गी-झोपड़ी में जिंदगी बिताए, कोई मां-बाप नहीं चाहता है। हर मां-बाप चाहता है कि बेटा पास रहे और कुछ उसे काम मिल जाए। बेटा भी चाहता है, बेटी भी चाहती है कि बूढ़े-बूढ़े मां-बाप को असहाय छोड़ करके शहर में झुग्‍गी-झोपड़ी की जिंदगी जीने के लिए नहीं जाना है। इसलिए सरकार का यह दायित्‍व बनता है, शासन की जिम्‍मेवारी बनती है कि हम विकास को उस रूप में आगे बढ़ाएं ताकि हिन्‍दुस्‍तान के सभी भू-भाग में विकास पहुंचे, दूर-सुदूर जंगलों में भी विकास पहुंचे और गरीब की झोपड़ी तक विकास के फल पहुंचें। गरीब की झोपड़ी तक विकास का फल पहुंचने का मतलब है कि गरीब से गरीब परिवार की संतान को भी रोजगार का अवसर उपलब्‍ध हो। इसलिए हमने जो विकास का रास्‍ता चुना है उसके केंद्र में हमारा एक ही संकल्‍प है कि देश के नौजवान को अवसर मिले, रोजगार मिले, आगे बढ़ने के लिए उसको मौका मिले।

आज बस्‍तर जिले में.. कोयला पहले भी था, iron ore पहले भी था, सरकारें भी पहले थीं, लोग भी पहले थे, बेरोजगारी भी थी लेकिन फिर भी समस्‍या का समाधान खोजने के लिए ऐसी धीमी गति से चला जाता था कि लोग निराशा के गर्त में डूब जाते थे। आज हमारी कोशिश है कि हिन्‍दुस्‍तान के चारों तरफ रेलवे connectivity मिले, दूर-सुदूर इलाकों में भी रेल की पटरी बिछे, लोगों को आने-जाने की सुविधा बने। पटरी जब लग जाती है, ट्रेन आती है तो सिर्फ यात्रा के लिए काम आती है ऐसा नहीं है, वो एक जीवन को भी गति देता है, अर्थ-जीवन को भी गति देता है। जगदलपुर तक रेल की पटरी हिन्‍दुस्तान की मुख्‍यधारा से आपको जोड़ेगी। जब हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना लाते हैं तो गरीब से गरीब को आर्थिक मुख्‍यधारा से जोड़ते हैं और बस्‍तर में जगदलपुर तक की ट्रेन की बात करते हैं तो यहां के नागरिक को हिन्‍दुस्‍तान की मुख्‍यधारा के साथ छोड़ने का हमारा प्रयास होता है।

अभी मुख्‍यमंत्री जी विस्‍तार से बता रहे थे कि हम कच्‍चा माल विदेशों में बेच-बेच कर कब तक अपनी रोजी-रोटी कमाएंगे। ..और हम कैसे लोग है कि iron ore तो हम बाहर भेजें और steel बाहर से लाएं! अब वो कारोबार हमें बंद करना है। अगर iron ore हमारा होगा तो steel भी हमारा होगा और दुनिया को चाहिए तो हम steel देगें, हम iron ore में हमारे नौजवान के पसीने को जोड़ेंगे और उसी iron ore में से steel बनाएंगे और उसी iron ore में से steel बनाते समय मेरे नौजवानों की जिंदगी भी बन जाएंगी ताकि वो दुनिया के हर संकटों से टक्‍कर लें। ऐसा जीवन उसका ऊंचा बन जाए, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। हमारी कोशिश है विकास की नई ऊंचाइयों पर देश को ले जाने की।

आज मैं यहां डॉ. रमन सिंह जी के सपने को धरती पर उतरा हुआ देख करके आया। रमन सिंह जी के प्रति मेरे मन में मित्र होने के बावजूद भी हमेशा एक सम्‍मान का भाव रहा है और सबसे ज्‍यादा मुझे आदर तब हुआ, जब यहां के लोग महंगी.. चिरौंजी हो, काजू हो ये बेच करके नमक खरीदते थे, बदले में नमक! और समाज का शोषण करने का भाव रखने वाले लोग उन महंगे उत्‍पादों को ले करके बदले में नमक देते थे और बस्‍तर जिले के नागरिक नमक पाने के लिए पता नहीं क्‍या कुछ देने के लिए तैयार हो जाते थे। रमन सिंह जी ने सरकार बनाते ही प्रारंभ में तय कर लिया कि मैं नमक लोगों को पहुंचाऊंगा। उस दिन से एक मित्र होने के बावजूद भी एक विशेष आदर की मेरे मन में अनुभूति हुई कि मेरा एक साथी है जो हर पल गरीबों के लिए सोचता है, आदिवासियों के लिए सोचता है।

आज जब मैं knowledge(Education) city में जा करके आया, उसमें जो कल्‍पना है.. हिन्‍दुस्‍तान में जो लोग कहते हैं कि हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को वापस मुख्‍यधारा में लाने का रास्‍ता क्‍या है, मैं समझता हूं कि रमन सिंह जी ने रास्‍ता बना दिया है। कंधे पर हल! वही समस्‍याओं का हल ला सकता है। कंधे पर gun, ये समस्‍याओं का समाधान नहीं है। जिस धरती पर नक्‍सलवाद का जन्‍म हुआ था और जिसके कारण देश में नक्‍सलवाद की चर्चा हुई थी, वहां पर भी जा करके देखिए, अनुभव के बाद वो सीखे.. और उन्‍होंने भी वो रास्‍ता छोड़ दिया। आज वो नक्‍सलबाड़ी, जहां से हिंसा का मार्ग शुरू हुआ था, बम, बंदुक और गोलियां चलती थी, रक्‍त की धारा बहती थी, आज वहां वो बंद हो गया। जिन लोगों को लगता है कि क्‍या.. आए दिन ये मौत का खेल बंद होगा कि नहीं होगा। मैं देशवासियों! आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि निराश होने की जरूरत नहीं है। यह भी बंद होगा। जब पंजाब में खूनी खेल खेला जा रहा था, क्‍या कभी किसी ने सोचा था कि पंजाब में वो खूनी खेल खत्‍म होगा और लोग सुख-चैन की जिंदगी जिएंगे? आज जी रहे हैं। नक्‍सलबाड़ी में सोचा था? आज लोग वहां भी जी रहे हैं। मुझे विश्‍वास है इस भू-भाग में भी, इस गलत रास्‍ते पर चल पड़े लोग भी.. उनके भीतर भी कभी न कभी मानवता जगेगी।

आज मैं उस ज्ञान नगरी में जा करके आया। 800 से अधिक उन बच्‍चों को मिला जिनको.. कोई गुनाह नहीं था, मां-बाप से बिछुड़ना पड़ा। हिंसा के रास्‍ते पर पागल बने हुए युवकों ने किसी के बाप को मार दिया, किसी की मां को मार दिया, किसी मां-बाप को वहां से दूर जाने के लिए मजबूर कर दिया। उन 800 बच्‍चों से मैं मिला जिन्‍होंने अपने परिवार-जनों को खोया है। माओवाद की हिंसा के कारण उनकी जिदगी में मुसीबत आई है। लेकिन आज डॉ. रमन सिंह जी को बधाई देता हूं कि उन्‍होंने.. जिनका सब कुछ खत्‍म करने के लिए माओवादी तुले हुए थे, जो बच्‍चों को तलवार, बम, बंदूक के रास्‍ते पर ले जाना चाहते थे उनको रमन सिंह जी ने हाथ में कलम पकड़ा दी, कम्‍प्‍यूटर पकड़ा दिया है और मैंने उनकी आंखों में जो चेतना देखी.. वो विश्‍वास देखा है, उन 800 बच्‍चों को देख करके मैं कहता हूं हिंसा का कोई भविष्‍य नहीं है। अगर भविष्‍य है तो वो शांतिमय मार्गों का है, वो मैं आज देख करके आया हूं, अनुभव करके आया हूं। मैं हिंसा के रास्‍ते पर चले हुए नौजवानों को कहना चाहता हूं कि कम से कम एक प्रयोग कीजिए, कम से कम दो-पांच दिन के लिए कंधे पर से बंदूक नीचे रख दीजिए। सादे-सीधे आदिवासी पहनते हैं, ऐसे कपड़े पहन लीजिए और आपके कारण जिस परिवार को कोई स्‍वजन खोना पड़ा है, किसी के बाप की मृत्‍यु हुई, है किसी की मां की मृत्‍यु हुई है.. उस घर में बचा हुआ जो बच्‍चा है, पांच दिन सिर्फ उसके साथ ऐसे ही बिता करके आ जाइए, उससे बातें कीजिए और उसको ये मत बताइए कि आप कौन हैं, ऐसे ही बातें कीजिए। मैं विश्‍वास से कहता हूं, वो बालक अपनी बातों से, अपने अनुभव से आपको पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर देगा, आपका हृदय परिवर्तन करके रख देगा। आप भी हिल जाएगे कि हिंसा के नशे में आपने कितना बड़ा पाप कर दिया है। एक बार मानवता को अंगीकार करके, राक्षसी वृत्ति से मुक्ति पा करके.. ज्‍यादा नहीं, कुछ पल इन पीडि़त परिवारों से जरा मिल लीजिए। आपको फिर कभी उस रास्‍ते पर जाने कि नौबत नहीं आएगी। आपको भी लगेगा कि आपने कुछ गलत किया है। कोई सरकार आपको बदले, कोई कानून आपको बदले, कोई लोभ-लालच आपको बदले उससे ज्‍यादा आप ही की गोलियों से पीड़ा पाने वाला एक बालक आपकी जिंदगी बदल सकता है। शर्त यही है कि मानवता का अंगीकार करके कुछ पल उसके साथ बिता करके देख लीजिए। मैंने देखा उन बच्‍चों को आज.. हिंसा से कभी समस्‍याओं का समाधान नहीं हुआ है। मिल-बैठ करके रास्‍ते निकल सकते हैं। छत्‍तीसगढ़ अगर इस संकट से मुक्‍त हो जाए तो मैं विश्‍वास से कहता हूं हिन्‍दुस्‍तान में आर्थिक ऊंचाइयों पर नम्‍बर एक पर छत्‍तीसगढ़ आकर खड़ा हो सकता है। यहां के नौजवानों का भविष्‍य बदल सकता है और छत्‍तीसगढ़ के पास वो ताकत है, वो हिन्‍दुस्‍तान का भविष्‍य भी बदल सकता है। इसलिए मेरे भाईयो-बहनों! विकास एक ही मार्ग है जो हमारी समस्‍याओं का समाधान करेगा।

मुझे आज रमन सिंह जी के livelihood college को भी देखने का अवसर मिला। उन्‍होंने पूरे राज्‍य में उसका जाल बिछाया है। दुनिया के समृद्ध से समृद्ध देश हो तो भी.. एक बात आज उसका प्रमुख काम बन गया है। दुनिया का सुखी देश भी skill development को महत्‍व दे रहे हैं। हुनर सिखाने के लिए दुनिया में, हर देश में priority हो गई है। छत्‍तीसगढ़ के अंदर हुनर से शिखर तक पहुंचने का जो अभियान चलाया गया है, वो काबिले दाद है। मैं देख कर आया हूं। मैंने उन बालक-बालिकाओं को देखा, हाथ में हुनर तो है लेकिन आंख में ओझ है, तेज है और बातों में एक अपरम्‍पार विश्‍वास है। बड़े-बड़े अफसर भी.. सीएम या पीएम से बात करनी है तो कुछ पल तो set होने में time लगता है। मैंने देखा कि बच्‍चे फटाफट बातें करते थे। कोई झिझक नहीं थी, उनकी बातों में कोई झिझक नहीं थी। ये जो confidence level है ये जीवन में आगे बढ़ने के लिए बहुत बड़ी अमानत होता है। वो मैं आज देख कर आया हूं।

Skill Development का मिशन ले करके हम पूरे देश में चल रहे हैं क्‍योंकि हमारे देश के नौजवानों को रोजगार देना है ..और रोजगार देना है तो Skill Development सर्वाधिक सरल मार्ग होता है। जीवन के हर क्षेत्र में, हर नौजवान के हाथ में हुनर हो। जिसके हाथ में हुनर होता है उसको कभी जीवन जीने के लिए हाथ फैलाने की नौबत नहीं आती है, वो अपने बलबूते पर, अपनी शर्तों पर जिंदगी जी सकता है। उसे कभी मजबूर नहीं होना पड़ता है और उस काम को livelihood colleges के माध्‍यम से रमन सिंह जी ने चरितार्थ किया है। देश के अन्‍य राज्‍यों के लिए भी यह अपने आप में एक मिसाल बन सकती है। मैं चाहूंगा, मैं भी प्रयास करूंगा कि देश के और राज्‍य भी आ करके इसको देखें, इस मॉडल को समझें और इसको कैसे लागू किया जा सकता है उस पर चर्चा करें।

भाईयों-बहनों! आपने हमें भारी बहुमत के साथ आपकी सेवा करने का मौका दिया है। छत्‍तीसगढ़ पूरी ताकत के साथ हमारे पीछे खड़ा है और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि जितना आपने दिया है, हम ब्‍याज समेत विकास करके लौटाएंगे।

आज तेंदू पत्‍ता वाले हमारे किसान भाइयों-बहनों को बोनस देने का भी मुझे सौभाग्‍य मिला और उनको भी मैंने पूछा कि क्‍या करोगे, हरेक से मैंने पूछा। हरेक को पता है कि इन पैसों का उपयोग अपने बच्‍चों की जिंदगी संवारने के लिए कैसे करना है, इसका खाका उनके दिमाग में तैयार है। यही तो है हरेक का aspiration । उसको पूर्ण करने का हमारा प्रयास है।

एक समय था.. हिन्‍दुस्‍तान की तरफ दुनिया कैसे दे‍खती थी? ज्‍यादातर तो देखने के लिए तैयार ही नहीं थी और जो देखते थे वो भी बड़े उपेक्षा के भाव से देखते थे या तो हंसी-मजाक के रूप में देखते थे। देखते ही देखते माहौल बदला कि नहीं बदला? दुनिया हिन्‍दुस्‍तान को पूछने लगी कि नहीं लगी? विश्‍व के समृद्ध देशों को भी हिन्‍दुस्‍तान की अहमियत को मानना पड़ा कि नहीं मानना पड़ा। सवा सौ करोड़ का देश! इसको सर झुका करके जीने की जरूरत नहीं है। वो वक्‍त चला गया। सवा सौ करोड़ देशवासियों का संकल्‍प है कि हमारा देश माथा ऊंचा करके आंख से आंख मिला करके, सीना तान करके जीने के लिए पैदा हुआ है, झुकने के लिए पैदा नहीं हुआ है। वो शक्ति हमारे भीतर पड़ी है, सवा सौ करोड़ देशवासियों के भीतर पड़ी है। उस शक्ति को मैं भली-भांति पहचानता हूं। विश्‍व में जब किसी से बात करता हूं तो अकेला मोदी बात नहीं करता है, सवा सौ करोड़ देशवासी एक साथ आंख मिला करके बात करते हैं और विश्‍व आज हिन्‍दुस्‍तान का लोहा मानने लगा है। पूरे विश्‍व मानने लगा है कि आज दुनिया में तेज गति से आर्थिक विकास करने वाला कोई देश अगर है.. सारे संसार में, तो उस देश का नाम है- हिन्‍दुस्‍तान।

कितनी तेजी से परिवर्तन आ रहा है, लेकिन कुछ लोग होते हैं, जिनको जीवनभर लोगों को गरीब रखने में ही आनंद आया, दु:खी रखने में ही आनंद आया। अगर उसमें कुछ बदलाव आता है, तो वो अब दु:खी हो रहे हैं। उनकी परेशानी मैं समझ सकता हूं। जो लोग विजय पचा नहीं पाए 60 साल तक, वो पराजय भी नहीं पचा पा रहे हैं। भाईयों-बहनों, जिनको जनता ने नकार दिया है, उनके पास झूठ फैलाने के सिवाए, जनता को भ्रमित करने के सिवाए, जनता को गुमराह करने के सिवाए कोई रास्‍ता नहीं बचा है।

मैं देशवासियों को विश्‍वास दिलाता हूं, इन्‍हीं दिनों को याद कर लीजिए, इसी कालखंड में मैं छत्‍तीसगढ़ भी आया था, पिछले साल। अखबारों में क्‍या आता था? टीवी में क्‍या समाचार आते थे एक साल पहले? .. आज इतने का भ्रष्‍टाचार हुआ, आज ये घोटाला हुआ, वो घोटाला हुआ, इसने इतना मार लिया, उसने उतना लूट लिया, यही खबरें आती थीं कि नहीं आती थीं। कोयले की चोरी की चर्चा होती थी कि नहीं होती थी? एक साल हुआ है मेरे भाईयों-बहनों! एक भी खबर आई है क्‍या? क्‍या ईमानदारी से देश नहीं चलाया जा सकता क्‍या? चलाया जा सकता है। एक साल के अनुभव से मैं कह सकता हूं कि ये देश ईमानदारी से चलाया जा सकता है।

चिठ्ठी–पर्ची से कोयले की खदानें दे दी थीं। आज हमने सार्वजनिक रूप से auction किया और वो खज़ाना राज्‍य की तिजोरी में दे दिया। कोयले के auction का पैसा राज्‍य के खज़ाने में आ गया। इतना ही नहीं, जहां पर खनिज़ निकलता है, उस इलाके के जो जिले हैं.. और ज्‍यादातर पूरे देश में आदिवासी क्षेत्र है जहां पर खनिज़ सम्‍पदा है। वहां हमने special संगठन की रचना की है। वहां से कुछ हिस्‍सा लोगों के कल्‍याण के लिए खर्च कर दिया जाएगा। पहली बार गरीबों के लिए रुपए तिजोरी से निकालने का काम हो रहा है।

मुझे विश्‍वास है कि जिस विकास के रास्‍ते पर हम चल पड़े हैं, उस रास्‍ते से देश की समस्‍याओं का समाधान भी करेंगे, आपकी आशाओ-आकांक्षाओं को परिपूर्ण भी करेंगे और आपके साथ कंधे से कंधा मिला करके देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में हम सफल होंगे।

इसी एक विश्‍वास के साथ मैं फिर एक बस्‍तर को, छत्‍तीसगढ़ को हृदयपूर्वक बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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మిత్రులారా,

దేశవ్యాప్తంగా ఉన్న వేలాది మంది యువతీ యువకులకు నేడు చాలా ముఖ్యమైన రోజు. 51,000 కంటే ఎక్కువ మంది యువత నేడు ప్రభుత్వ ఉద్యోగాల నియామక పత్రాలను అందుకున్నారు. మీరు దేశ అభివృద్ధి ప్రయాణంలో అత్యంత కీలకమైన, బాధ్యతాయుతమైన భాగస్వాములుగా మారుతున్నారు. రైల్వే, బ్యాంకింగ్, రక్షణ, ఆరోగ్యం, విద్య, ఇతర అనేక రంగాల్లో సరికొత్త బాధ్యతలను స్వీకరించబోతున్నారు. రాబోయే సంవత్సరాల్లో అభివృద్ధి చెందిన భారత్‌ సంకల్పాన్ని నెరవేర్చడంలో మీరే కీలక పాత్ర పోషిస్తారు.

 

మిత్రులారా, 

ఈ స్థాయికి చేరుకోవడానికి మీరు సుదీర్ఘమైన సన్నద్ధత, కఠినమైన శ్రమను దాటి వచ్చి ఉంటారు. మీరు సాధించిన ఈ విజయానికి గాను మీకు, మీ కుటుంబ సభ్యులకు నా హృదయపూర్వక అభినందనలు తెలియజేస్తున్నాను. మిమ్మల్ని ఈ స్థాయికి తీసుకురావడంలో మీ తల్లిదండ్రులు, కుటుంబ సభ్యుల కృషి ఎంతో ఉంది. కేవలం కుటుంబమే కాదు, మనం ఇక్కడికి చేరుకోవడంలో సమాజం కూడా చాలా పెద్ద పాత్ర పోషిస్తుంది. మనం కేవలం మన వల్లనో, లేదా కేవలం మన కుటుంబం వల్లనో ఇక్కడికి చేరుకోలేదు. ఈ విశాల దేశంలోని 140 కోట్ల మంది పౌరుల సహకారం కూడా ఇందులో ఎంతో ముఖ్యమైనది. మన బాధ్యత కేవలం మన పట్ల, మన కుటుంబం పట్ల మాత్రమే కాదు.. సమాజం మొత్తం పట్ల కూడా సమానంగా ఉంటుంది. ఈ పనులన్నింటికీ మీరు మిమ్మల్ని మరింత సమర్థులుగా తీర్చిదిద్దుకుంటారని నేను నమ్ముతున్నాను. మీ అందరికీ నా హృదయపూర్వక శుభాకాంక్షలు.

 

మిత్రులారా, 

రెండు రోజుల క్రితమే నేను అయిదు దేశాల పర్యటన ముగించుకుని తిరిగి వచ్చిన సంగతి మీ అందరికీ తెలుసు. అవి కేవలం అయిదు దేశాలే అయినప్పటికీ, ఆ సమయంలో నేను డజన్ల కొద్దీ దేశాలకు చెందిన ప్రముఖ కంపెనీల అధినేతలతో చర్చలు, సమావేశాలు జరిపాను. ప్రతిచోటా నాకు ఒకే ఒక్క విషయం స్పష్టంగా కనిపించింది. దేశ యువత పట్ల, భారత్‌ పురోగతి పట్ల ప్రపంచం ఎంతో ఉత్సాహంగా ఉంది. నేడు దేశ అభివృద్ధి ప్రయాణంలో భాగస్వామి కావాలని ప్రపంచం కోరుకుంటోంది. భారత్‌ కూడా వివిధ దేశాలతో భాగస్వామ్యాలను కుదుర్చుకుంటోంది. దేశ యువతకు మరిన్ని అవకాశాలను నిర్ధారించడం, ఉపాధిని కల్పించడం, వారి సామర్థ్యాన్ని చాటిచెప్పడమే దీని ముఖ్య ఉద్దేశం. మన దేశ యువతకు అంతర్జాతీయ స్థాయి అనుభవాన్ని పొందాలని నేను కోరుకుంటున్నాను. ఈ పర్యటనలో  నెదర్లాండ్స్‌తో సెమీకండక్టర్లు, నీరు, వ్యవసాయం, అధునాతన తయారీ రంగాలపై చర్చించాం.స్వీడన్‌తో కృత్రిమ మేధ, డిజిటల్ ఆవిష్కరణల రంగంలో సహకారంపై...నార్వేతో హరిత సాంకేతికత, నౌకా వాణిజ్య సహకారంపై... యూఏఈతో వ్యూహాత్మక ఇంధన, సాంకేతిక భాగస్వామ్యం వంటి ముఖ్యమైన ఒప్పందాలపై చర్చించాం. ఇటలీతో రక్షణ, కీలక ఖనిజాలు, శాస్త్ర, సాంకేతికత వంటి ప్రాధాన్యత కలిగిన రంగాల్లో ఒప్పందాలు కుదుర్చుకున్నాం. 

 

మిత్రులారా,

ఒప్పందాలన్నీ నేరుగా దేశ యువతకే ప్రయోజనం చేకూరుస్తాయి. ఈ అంశాలన్నీ భారత్‌కు ఒక ఉజ్వలమైన, సమర్థవంతమైన భవిష్యత్తుకు హామీ ఇస్తున్న విషయాన్ని మీరు గమనించే ఉంటారు. ప్రతి కొత్త పెట్టుబడి, ప్రతి సాంకేతిక భాగస్వామ్యం, ప్రతి పారిశ్రామిక సహకారం. భారతీయ యువతకు కేవలం కొత్త అవకాశాలను తీసుకురావడమే కాకుండా, లెక్కలేనన్ని సరికొత్త మార్గాలను కూడా సృష్టిస్తుంది.

 

నా యువ మిత్రులారా,

రాబోయే పెట్టుబడులు, భాగస్వామ్యాలు వచ్చే మూడు నాలుగు దశాబ్దాల పాటు ప్రపంచ వృద్ధిని నిర్దేశించే పరిశ్రమలను తీర్చిదిద్దబోయే రంగాలు ఇవేనని మనం గుర్తుంచుకోవాలి. నిస్సందేహంగా ఇందులో దేశ యువత అత్యంత కీలకమైన పాత్ర పోషించబోతోంది. 

 

మిత్రులారా, 

ప్రపంచానికి భారత్‌ ఎలా ఒక విశ్వసనీయమైన సరాఫరా వ్యవస్థ భాగస్వామిగా మారుతోందో చెప్పడానికి మీకు ఒక ఉదాహరణ ఇస్తాను. మీలో చాలా మందికి నెదర్లాండ్స్‌కు చెందిన ప్రముఖ సెమీకండక్టర్ సంస్థ ఎస్‌ఎంఎల్‌ గురించే తెలిసే ఉంటుంది. ఈ సంస్థ దేశానికి చెందిన టాటా కంపెనీతో ఒక ఒప్పందం కుదుర్చుకుంది. ప్రపంచంలోనే ఈ సంస్థతో ఇలాంటి ఒప్పందం కుదుర్చుకున్న చాలా కొద్దిపాటి దేశాల్లో భారత్‌ ఒకటి. ఈ ఒక్క ఎస్‌ఎంఎల్‌-టాటా ఎలక్ట్రానిక్స్ ఒప్పందం దేశంలో లెక్కలేనన్ని కొత్త ఉపాధి అవకాశాలను సృష్టించడమే కాకుండా, తదుపరి తరం సాంకేతికతకు మార్గాన్ని అందిస్తుంది. స్వీడన్‌తో కుదిరిన సాంకేతికత, కృత్రిమ మేధ భాగస్వామ్యాలు, యూఏఈతో సూపర్ కంప్యూటింగ్ రంగంలో ఏర్పడిన సహకారం వంటివి దేశ సాంకేతిక సామర్థ్యాన్ని మరింత బలోపేతం చేస్తాయి. ఈ ఒప్పందాలు  మన యువతకు ఖచ్చితంగా సరికొత్త అవకాశాలను అందిస్తాయి. 

 

మిత్రులారా,

ప్రస్తుతం స్వచ్ఛమైన ఇంధనం, కీలక ఖనిజాలు, హరిత హైడ్రోజన్‌, సుస్థిర ఉత్పాదకత వంటి రంగాలు శరవేగంగా వృద్ధి చెందుతున్నాయి. ఈ రంగాల్లో కుదురుతున్న భాగస్వామ్యాలు నూతన ఆర్థిక వ్యవస్థకు, సరికొత్త అవకాశాలకు మార్గం సుగుమం చేస్తున్నాయి. స్వీడన్, నార్వే, ఇటలీ వంటి దేశాలతో పర్యావరణ హిత మార్పు, సుస్థిర సాంకేతికత రంగాల్లోసహకారం నిరంతరం పెరుగుతోంది. ఇది పర్యావరణ అనుకూల తయారీకి సంబంధించిన భవిష్యత్తు పరిశ్రమల్లో భారత్‌ను మరింత బలోపేతం చేస్తుంది. దీనితో పాటు ఓడరేవులు, నౌకాయానం, నౌకా వాణిజ్య మౌలిక సదుపాయాలఒప్పందాలపై కూడా భారత్‌ వేగంగా పనిచేస్తోంది. యూఏఈ, నార్వే దేశాలతో కుదిరిన భాగస్వామ్యాలు దేశ నౌకానిర్మాణ వ్యవస్థను మరింత బలోపేతం చేస్తాయి. నౌకల నిర్మాణానికి భారీ ఎత్తున నైపుణ్యం కలిగిన మానవ వనరుల అవసరమని మీ అందరికీ బాగా తెలుసు. దీని అర్థం దేశీయ ఇంజనీర్లు, సాంకేతిక నిపుణులు, నైపుణ్యం కలిగిన కార్మికులకు మీరు ఊహించలేని స్థాయిలో డిమాండు పెరగబోతోంది. దీని ద్వారా అపారమైన అవకాశాలు లభిస్తాయి.

 

మిత్రులారా,

ప్రతి కొత్త భాగస్వామ్యంతోనూ భారతీయ అంకుర సంస్థలు, పరిశోధకులు, యువ నిపుణులు ప్రపంచంతో అనుసంధానం కావడానికి మనం సరికొత్త మార్గాలను సృష్టిస్తున్నాం. ఇది మన భారతీయ యువతకు అధునాతన నైపుణ్యాలను, అంతర్జాతీయ మార్కెట్లను, అభివృద్ధికి కొత్త అవకాశాలను అందిస్తుంది. నేడు ప్రపంచం  వినూత్నంగా ఆలోచించే, సరికొత్తగా నిర్మించే, భారీ స్థాయిలో ఫలితాలను అందించే దేశాలను ఎంతగానో గౌరవిస్తోంది. భారత్‌ ఈ మూడు దిశల్లోనూ శరవేగంగా ముందుకు దూసుకుపోతోంది. ఈ అద్భుతమైన మార్పు వెనుక ఉన్న అతిపెద్ద శక్తి మీరే. నా యువ సహచరులు, దేశ యువశక్తి. నేను ప్రపంచంలో ఎక్కడికి వెళ్లినా దేశ యువశక్తి గురించి చర్చించడానికి చాలా సమయాన్ని కేటాయిస్తాను.

 

 మిత్రులారా,

నేడు ప్రతి భారతీయుడు ఒక గొప్ప సంకల్పంతో ముందుకు సాగుతున్నారు. ఆ సంకల్పమే... 2047 నాటికి అభివృద్ధి చెందిన భారత్‌ను నిర్మించడం. ఈ లక్ష్యాన్ని చేరుకోవడానికి దేశం వివిధ రంగాలలో భారీగా పెట్టుబడులు పెడుతోంది. ఈ పెట్టుబడులు మన యువతకు లక్షలాది సరికొత్త ఉపాధి అవకాశాలను సృష్టిస్తున్నాయి. ఉదాహరణకు... సెమీకండక్టర్ల తయారీకి అవసరమైన పూర్తి సరఫరా వ్యవస్థను భారత్‌ ఇక్కడే నిర్మిస్తోంది. రాబోయే సంవత్సరాల్లో దేశానికి చెందిన పది భారీ సెమీకండక్టర్ కేంద్రాలు ప్రపంచవ్యాప్తంగా తమ ప్రత్యేక గుర్తింపును చాటుకోబోతున్నాయి. ఇవన్నీ భారతీయ యువత సామర్థ్యం, మేధస్సు, నిబద్ధతతో నడుస్తాయి. తద్వారా సహజంగానే భారీగా ఉపాధి లభిస్తుంది. నౌకానిర్మాణ, నౌకల మరమ్మతు, వ్యవస్థను కూడా భారత్‌ వేగంగా అభివృద్ధి చేస్తోంది. దీనికోసం సుమారు 75,000 కోట్ల రూపాయల భారీ పెట్టుబడి పెడుతోంది. మనం భారత్‌లోనే  పూర్తి స్థాయి ఎంఆర్‌ఓ వ్యవస్థను (విమానాల నిర్వహణ, ఓవర్‌హాలింగ్, మరమ్మతుల సౌకర్యాలను) నిర్మిస్తున్నాం. ఇది విమానయాన రంగానికి ఎంతో అండగా నిలవడమే కాకుండా దేశ యువత కోసం సరికొత్త ఉపాధి రంగాన్ని అందుబాటులోకి తీసుకువస్తుంది. 

 

మిత్రులారా,

నేడు భారత్‌ ఒక ప్రధాన ఎలక్ట్రానిక్స్ తయారీ దేశంగా అవతరించింది. ఎలక్ట్రానిక్స్ రంగానికి సంబంధించిన పూర్తి విలువ వ్యవస్థను మనం భారత్‌లోనే నిర్మిస్తున్నాం. పీఎల్ఐ పథకం ద్వారా దేశంలో రికార్డు స్థాయిలో ఎలక్ట్రానిక్స్ ఉత్పత్తి జరుగుతోంది. దీని ద్వారా యువతకు లక్షలాది ఉద్యోగాలు లభిస్తున్నాయి.

 

మిత్రులారా,

ఇలాంటి మరెన్నో ప్రతిష్టాత్మక కార్యక్రమాలపై భారత ప్రభుత్వ, ప్రైవేటు రంగాలు రెండూ కలిసి భారీ ఎత్తున పెట్టుబడులు పెడుతున్నాయి. ఈ పెట్టుబడులు దేశంలోని యువతకు ఉద్యోగాలు కల్పిస్తూ వారి కలలను నిజం చేస్తున్నాయి. ఈ రోజు నియామక పత్రాలను అందుకున్న తర్వాత ప్రభుత్వ ఉద్యోగులుగా మీకు లభించే ఈ కొత్త గుర్తింపుతో ఎల్లప్పుడూ ఒక విషయాన్ని గుర్తుంచుకోవాలి. దేశానికి వ్యాపార సౌలభ్యం ఎంత ప్రాధాన్యత కలిగిన అంశమో మీ మనసులో నిరంతరం మెదలాలి. 

 

మిత్రులారా,

దేశ వృద్ధి గాథ, ఉపాధి కల్పన.. ఈ రెండూ మీ అందరికీ బాగా తెలిసినవే. దీనిలో మౌలిక సదుపాయాలు కీలక పాత్ర పోషిస్తాయి. గ్రామాలు, చిన్న పట్టణాలు, మారుమూల ప్రాంతాలు అభివృద్ధితో అనుసంధానమైనప్పుడు దేశ ప్రగతి ప్రయోజనాలు మరింత ఎక్కువ మంది ప్రజలకు చేరుతాయి. గడిచిన పన్నెండేళ్ల కాలంలో రైల్వేలు, రహదారులు, విమానాశ్రయాలు, సరుకు రావణా, ఓడరేవులు, డిజిటల్ మౌలిక సదుపాయాల రంగంలో మునుపెన్నడూ లేని విధంగా విస్తరణ జరిగింది. ప్రతి స్థాయిలోనూ అభివృద్ధి సాకారమైంది. ఈ రోజు మీరు ఏ దిశలోనైనా 100 కిలోమీటర్లు ప్రయాణిస్తే, అక్కడ భారత ప్రభుత్వానికి సంబంధించిన ఏదో ఒక ప్రాజెక్టు పనులు సాగుతూ ఉండటం మీకు ఖచ్చితంగా కనిపిస్తుంది. గ్రామాల్లో సైతం మార్పు వేగంగా జరుగుతుండటం కూడా కనిపిస్తోంది. మెరుగైన అనుసంధానం వల్ల రైతులకు, చిన్న వ్యాపారులకు, విద్యార్థులకు సరికొత్త మార్గాల తెరుచుకున్నాయి. నేడు లక్షలాది కుటుంబాలకు శాశ్వత గృహాలు లభించాయి. వాస్తవానికి మనం నిర్మిస్తున్న ఇళ్ల సంఖ్య ప్రపంచంలోని అనేక దేశాల మొత్తం గృహాల సంఖ్య కంటే కూడా ఎక్కువ. నేను ప్రారంభించిన స్వచ్ఛ భారత్ అభియాన్‌ను ఎప్పటికీ మర్చిపోను, ప్రజలను కూడా మర్చిపోనివ్వను.ఇందులో మరుగుదొడ్లు అత్యంత కీలకమైన పాత్ర పోషిస్తాయి. లక్షలాది ఇళ్లకు విద్యుత్ సరఫరా చేరింది. ఇంటిపై ఏర్పరిచే సౌరశక్తి విధానం వల్ల ఈ రంగంలోకి ఎంతో మంది కొత్త సరఫరాదారులు వచ్చారు. జల జీవన్ మిషన్ ద్వారా ఇళ్లకు కుళాయిల ద్వారా నీరు అందుతోంది.  నగరాల్లో పీఎన్‌జీ కనెక్షన్లను విస్తరించాలని నేను భావించినప్పుడు మనకు ప్లంబర్ల కొరత ఎదురవడం నేను గమనించాను. ఎందుకంటే అప్పటికే చాలా మంది ప్లంబర్లు జల జీవన్ మిషన్ పనుల్లో నిమగ్నమై ఉన్నారు. కొన్నిసార్లు నైపుణ్యం కలిగిన వ్యక్తుల డిమాండు, సరఫరాను మించిపోవడాన్ని, అవకాశాలు ఎంత శరవేగంగా పెరుగుతున్నాయో చెప్పడానికి ఇదే ఒక నిదర్శనం.

 

మిత్రులారా,

ఈ మార్పుల ప్రభావం కేవలం సామాన్య పౌరుల సౌకర్యాల కల్పనకు మాత్రమే పరిమితం కాలేదు. గ్రామాలకు రోడ్లు చేరినప్పుడు మార్కెట్లకు చేరుకోవడం సులభతరమవుతుంది. మెరుగైన విద్యుత్ సదుపాయాల వల్ల చిన్న పరిశ్రమలు, వ్యాపారాలు వృద్ధి చెందడం ప్రారంభిస్తాయి. గ్రామాల్లో సైతం వ్యవసాయ రంగానికి విలువ జోడింపు లభిస్తోంది. గతంలో వారు కేవలం ఎర్ర మిరపకాయలను మాత్రమే విక్రయించేవారు. కానీ ఇప్పుడు విద్యుత్ సౌకర్యం ఉండటం వల్ల కారం పొడి తయారు చేసి, దానిని ప్యాక్ చేసి విక్రయిస్తున్నారు. ఈ విధంగా గ్రామాల్లో చిన్న పరిశ్రమలు నిరంతరం విస్తరిస్తున్నాయి. పెరుగుతున్న డిజిటల్ అనుసంధానం వల్ల గ్రామస్తులు ప్రపంచం మొత్తంతో అనుసంధానమవుతూ, ఆధునికతను అలవర్చుకుంటున్నారు. నగరాలకు, గ్రామాలకు మధ్య ఉన్న వ్యత్యాసం క్రమంగా కనుమరుగవుతోంది. ఇది ఆర్థిక వ్యవస్థ వేగాన్ని మరింత పెంచింది. వీటన్నింటి వల్ల దేశ యువతకు ఒక ఉజ్వలమైన భవిష్యత్తుకు హామినిచ్చే సానుకూల ప్రభావం ఏర్పడుతుంది. ఉద్యోగాలు లభిస్తున్నాయి. అంతకుమించి దేశం ఒక సరికొత్త ఆత్మగౌరవంతో ముందుకు సాగుతోంది. కోట్లాది మంది ప్రజలు కొత్త అవకాశాలను పొందుతున్నారు.

 

మిత్రులారా, 

నేడు దేశ యువతకు ముందుకు సాగడానికి, తమ కలలను నిజం చేసుకోవడానికి మునుపెన్నడూ లేని విధంగా అద్భుతమైన అవకాశాలు ఉన్నాయి. నేను ఎవరినీ నిందించడం లేదు. కానీ నేటి వాస్తవికత ఏమిటంటే.. ప్రతిదీ అత్యంత వేగంగా, భారీ స్థాయిలో, అపారమైన వైవిధ్యంతో జరుగుతోంది. తయారీ రంగం, సాంకేతికత, అంకుర సంస్థలు, డిజిటల్ సేవలు, రైల్వేలు, రక్షణ, అంతరిక్ష రంగాల వ్యాప్తంగా లెక్కలేనన్ని అవకాశాలు మన కోసం వేచి ఉన్నాయి. గరిష్ట సంఖ్యలో యువత ఈ అవకాశాల ద్వారా లబ్ధి పొందేలా చేయడం, దేశ యువతకు తమ ప్రతిభను చాటుకునే ప్రతి అవకాశాన్ని కల్పించడమే మా ప్రయత్నం. అందుకే నైపుణ్యాభివృద్ధి , పరిశ్రమలతో ముడిపడిన విద్య, భవిష్యత్తు సాంకేతికతలపై నిరంతరం ప్రత్యేక దృష్టి సారిస్తున్నాం. ఐటీఐలను ఆధునీకరిస్తున్నాం. జాతీయ నైపుణ్య శిక్షణా సంస్థలను బలోపేతం చేస్తున్నం. పీఎం సేతు వంటి కార్యక్రమాలు ఈ దిశగా పనిచేస్తున్నాయి.

 

మిత్రులారా,

ఇటీవలి కాలంలో దేశంలో స్వయం ఉపాధి, వ్యవస్థాపకతకు సంబంధించి ఓ కొత్త సంస్కృతి అభివృద్ధి చెందింది. భారత్‌ నేడు ప్రపంచంలోనే మూడో అతిపెద్ద స్టార్టప్‌ వ్యవస్థగా నిలిచింది.  దేశంలో 2,30,000 కంటే ఎక్కువ గుర్తింపు పొందిన అంకుర సంస్థలు ఉన్నాయి. వీటిలో ప్రతి ఒక్కదాని వెనుక యువతీ యువకుల బృందాలు ఉన్నాయి. ఈ మార్పు కేవలం పెద్ద నగరాలకే పరిమితం కాకపోడం నాకు అత్యంత సంతృప్తిని ఇస్తోంది. నేడు టైర్-2, టైర్-3 నగరాల నుంచి యువత కూడా అంకుర సంస్థలు, ఆవిష్కరణల ప్రపంచంలో పెద్ద సంఖ్యలో సత్తా చాటుతున్నారు. వారి సామర్థ్యాలకు గుర్తింపు లభిస్తోంది. ఈ మార్పు జాతీయ ఆర్థిక వ్యవస్థలో ఒక ముఖ్యమైన భాగంగా మారింది. ఈ మార్పులో మన మహిళా శక్తి పాత్ర కూడా నిరంతరం పెరుగుతోంది. నేడు మహిళల నేతృత్వంలో నడుస్తున్న అనేక అంకుర సంస్థలు మనల్ని గర్వపడేలా చేస్తున్నాయి. దేశంలో మహిళలు స్టార్టప్ రంగంలో కీలక పాత్ర పోషిస్తున్నారని, వారు పెద్ద సంఖ్యలో ముందుకు వస్తున్నారని నేను ప్రపంచవ్యాప్తంగా చెప్తుంటాను. ముద్ర యోజన కింద కోట్లాది మంది మహిళలు ఆర్థిక సహాయం పొందారు. పీఎం స్వనిధి వంటి పథకాలు కోట్లాది మంది మహిళలకు స్వయం సమృద్ధి సాధించే అవకాశాన్ని కల్పించాయి. నేడు గ్రామాలు, చిన్న పట్టణాల్లో మునుపెన్నడూ లేని విధంగా అత్యధిక సంఖ్యలో మహిళలు తమకు తాముగా సొంతంగా సరికొత్త వ్యాపారాలను ప్రారంభిస్తున్నారు.

 

మిత్రులారా, 

ఈ విధానాలు, నిర్ణయాల మధ్య మీరు ఇంకొక విషయాన్ని కూడా గుర్తుంచుకోవాలి. ఏ వ్యవస్థకైనా అసలైన బలం అక్కడి ప్రజలలోనే ఉంటుంది. ప్రజల శక్తి దేశ శక్తిగా మారుతుంది. మీరు భాగం కాబోతున్న ఈ వ్యవస్థ కోట్లాది మంది పౌరుల జీవితాలతో, వారి ఆశలు, ఆకాంక్షలతో నేరుగా ముడిపడి ఉంది. ప్రభుత్వ ఉద్యోగం అనేది ప్రజల జీవితాలను సులభతరం చేసే ఒక సాధనం. మీరు ఏ శాఖలో పనిచేసినప్పటికీ మీ ప్రవర్తన, సున్నితత్వం,  పనిచేసే విధానం అత్యంత ప్రాముఖ్యతను కలిగి ఉంటాయి. దేశం మీపై నమ్మకం ఉంచింది. ఇప్పుడు మీ పని, ప్రవర్తన, మాట, నడవడిక ద్వారా ఆ నమ్మకాన్ని మరింత బలోపేతం చేయాల్సిన బాధ్యత మీపై ఉంది. మిమ్మల్ని కలవడం పౌరుల్లో సరికొత్త నమ్మకాన్ని నింపాలి. కొత్త ఆశలతో ముందుకు సాగేలా వారిని ప్రోత్సహించాలి. ప్రతి యువ కర్మయోగి తమ పనిని ఒక గొప్ప బాధ్యతగా భావించాలి.

 

నా దృష్టిలో మీరు అంతకంటే ఎక్కువే. పూర్వ కాలంలో మనం వెయ్యి చేతులు ఉన్న ‘‘సహస్రబాహు’’ గురించి విన్నాం. నేడు మీరే ప్రభుత్వ బాహువులు, మీరే ప్రభుత్వానికి బలమైన శక్తి. ఇప్పటికే సేవలో ఉన్నవారు, కొత్తగా చేరుతున్నవారంతా ఈ వ్యవస్థలో భాగమే. దేశ ప్రజల ఆకాంక్షలు నిరంతరం పెరుగుతున్నాయి. దీనిని నేను అభివృద్ధికి ఒక సానుకూల సంకేతంగా చూస్తున్నాను. మనం మన ప్రజల ఆకాంక్షలను అర్థం చేసుకోవాలి, వాటిని నెరవేర్చడానికి అదే వేగంతో పని చేయాలి. ఇందులో ప్రజాసేవలోకి అడుగుపెడుతున్న యువత పాత్ర ఎంతో కీలకమైనది. మీరు నిరంతరం నేర్చుకుంటూనే ఉండాలి. సరికొత్త సాంకేతికతలకూ, కొత్త వ్యవస్థలకూ, మారుతున్న అవసరాలకు అనుగుణంగా మిమ్మల్ని మీరు సిద్ధం చేసుకోవాలి. ఇందులో ఐగాట్ కర్మయోగి వేదిక మీకు ఎంతగానో సహాయపడుతుంది. కర్మయోగి వంటి మాడ్యూళ్లు మీ బాధ్యతలను సులభంగా అర్థం చేసుకోవడానికి తోడ్పడతాయి. ఈ వనరులను మీరు పూర్తిగా సద్వినియోగం చేసుకోవాలని నేను కోరుతున్నాను.

 

మిత్రులారా,

నేడు దేశ యువత ప్రపంచవ్యాప్తంగా ప్రతి రంగంలోనూ తమదైన ముద్ర వేస్తున్నారు. ఇదే స్ఫూర్తి, ఇదే శక్తి మీ ప్రజాసేవలోనూ ప్రతిబింబించాలి. తమ పనిని దేశ సేవగా, ప్రజల సేవగా భావించే యువత ప్రయత్నాల వల్లే అభివృద్ధి చెందిన భారత్‌ కల సాకారమవుతుంది. మన సంస్కృతిలో ప్రజా సేవే దైవ సేవ అనే మాట ఉంది. నేడు నియామక పత్రాలను అందుకుంటున్న యువ సహచరులు దేశ అభివృద్ధి ప్రయాణానికి సరికొత్త వేగాన్ని అందిస్తారని నేను పూర్తి విశ్వాసం వ్యక్తం చేస్తున్నాను. మీ పని, నిర్ణయాల ద్వారా వికసిత్‌ భారత్‌ సంకల్పం నెరవేరుతుంది. ప్రజలే దైవం అనే మన మంత్రాన్ని ఎప్పటికీ మర్చిపోకూడదు. పౌరుల సంక్షేమమే మన కర్తవ్యం. ఈ రోజు నియామక పత్రాలను అందుకుంటున్న యువకులందరికీ భవిష్యత్తు కోసం, దేశానికి సేవ చేసే ఈ అవకాశాన్ని సద్వినియోగం చేసుకోవడానికి మరోసారి నా హృదయపూర్వక శుభాకాంక్షలు తెలియజేస్తున్నాను. మీ అందరికీ ధన్యవాదాలు.