Text of PM’s address at public meeting in Dantewada, Chhattisgarh

Published By : Admin | May 9, 2015 | 19:10 IST

विशाल संख्‍या में पधारे हुए उपस्थित महानुभावों!

मां दन्‍तेश्‍वरी का जहां आर्शीवाद है, जिस क्षेत्र के आदिवासियों ने दुनिया को जीने का रास्‍ता सिखाया है, ऐसी ये बस्‍तर की धरती है। आज मेरा ये सौभाग्‍य है कि आपके बीच आने का मुझे अवसर मिला, आपके दर्शन करने का सौभाग्‍य मिला। आज एक कार्यक्रम रायपुर में भी होने वाला था, लेकिन कल हवा के तूफान ने वहां सब तहस-नहस कर दिया। कई हमारे साथियों को चोट आई। मैं परमात्‍मा से प्रार्थना करता हूं कि ड्यूटी पर तैनात ये सभी बंधु-भगिनी बहुत ही जल्‍द स्‍वस्‍थ हों। डॉ. रमन ने कल ही मुझे फोन करके बताया था.. और उनके स्‍वास्‍थ्‍य की पूरी चिंता राज्‍य सरकार कर रही है और बहुत ही जल्‍द ये सभी स्‍वस्‍थ हो जाएंगे।

आज अनेक विध-कामों के निर्णय हुए हैं। शायद बस्‍तर के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि एक घंटे के इस समारोह में 24 हजार करोड़ रुपयों के निवेश के साथ विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्‍त करने का निर्णय.. एक राज्‍य, पूरे राज्‍य के लिए भी अगर 5 हजार करोड़ का प्रोजेक्‍ट है, तो राज्‍य के लिए बहुत बड़ी गौरवशाली घटना होती है। जबकि आज एक जिले में 24 हजार करोड़ रुपया..। आने वाले दिनों में इस बस्‍तर की जिंदगी में कैसा बदलाव आएगा इसका मैं भली-भांति अनुमान कर सकता हूं।

आज आप किसी भी आदिवासी को जाकर पूछें, किसी भी गांव के गरीब व्‍यक्ति को जा करके पूछें, आप कोई भी खेत मज़दूर को पूछें, आप किसी भी किसान को पूछें कि आपका क्‍या सुझाव है, कि क्‍या करना चाहिए? आपकी क्‍या अपेक्षा है क्‍या इच्‍छा है? मैं विश्‍वास से कहता हूं, अनुभव से कहता हूं, सब के सब.. किसी भी राज्‍य में क्‍यों न रहते हों, किसी भी भू-भाग पर क्‍यों न रहते हों.. एक ही जवाब निकलता है कि साहब कुछ भी करो, बच्‍चों को रोजगार मिले ऐसा कुछ करो। किसान भी चाहता है कि बच्‍चों को रोजगार मिले क्‍योंकि उसे पता है कि उनको जीवन में आगे बढ़ने के लिए अगर रोजगार मिल जाएगा तो बाकी तो अपना संसार वो खुद मेहनत करके बना लेगा, बच्‍चों को पढ़ाना है तो वो भी कर लेगा, एक बार रोजगार मिल जाए। भारत के लिए सबसे पहली प्राथमिकता है हमारे देश के नौजवान को रोजगार मिले, उसे अवसर मिले, वो देश को आगे बढ़ाने के काम में भागीदार बनना चाहता है। ..और कोई मां-बाप नहीं चाहता है कि बेटा-बेटी रोजगार के लिए सैकड़ों हजार किला मीटर दूर जा करके शहरों की झुग्‍गी-झोपड़ी में जिंदगी बिताए, कोई मां-बाप नहीं चाहता है। हर मां-बाप चाहता है कि बेटा पास रहे और कुछ उसे काम मिल जाए। बेटा भी चाहता है, बेटी भी चाहती है कि बूढ़े-बूढ़े मां-बाप को असहाय छोड़ करके शहर में झुग्‍गी-झोपड़ी की जिंदगी जीने के लिए नहीं जाना है। इसलिए सरकार का यह दायित्‍व बनता है, शासन की जिम्‍मेवारी बनती है कि हम विकास को उस रूप में आगे बढ़ाएं ताकि हिन्‍दुस्‍तान के सभी भू-भाग में विकास पहुंचे, दूर-सुदूर जंगलों में भी विकास पहुंचे और गरीब की झोपड़ी तक विकास के फल पहुंचें। गरीब की झोपड़ी तक विकास का फल पहुंचने का मतलब है कि गरीब से गरीब परिवार की संतान को भी रोजगार का अवसर उपलब्‍ध हो। इसलिए हमने जो विकास का रास्‍ता चुना है उसके केंद्र में हमारा एक ही संकल्‍प है कि देश के नौजवान को अवसर मिले, रोजगार मिले, आगे बढ़ने के लिए उसको मौका मिले।

आज बस्‍तर जिले में.. कोयला पहले भी था, iron ore पहले भी था, सरकारें भी पहले थीं, लोग भी पहले थे, बेरोजगारी भी थी लेकिन फिर भी समस्‍या का समाधान खोजने के लिए ऐसी धीमी गति से चला जाता था कि लोग निराशा के गर्त में डूब जाते थे। आज हमारी कोशिश है कि हिन्‍दुस्‍तान के चारों तरफ रेलवे connectivity मिले, दूर-सुदूर इलाकों में भी रेल की पटरी बिछे, लोगों को आने-जाने की सुविधा बने। पटरी जब लग जाती है, ट्रेन आती है तो सिर्फ यात्रा के लिए काम आती है ऐसा नहीं है, वो एक जीवन को भी गति देता है, अर्थ-जीवन को भी गति देता है। जगदलपुर तक रेल की पटरी हिन्‍दुस्तान की मुख्‍यधारा से आपको जोड़ेगी। जब हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना लाते हैं तो गरीब से गरीब को आर्थिक मुख्‍यधारा से जोड़ते हैं और बस्‍तर में जगदलपुर तक की ट्रेन की बात करते हैं तो यहां के नागरिक को हिन्‍दुस्‍तान की मुख्‍यधारा के साथ छोड़ने का हमारा प्रयास होता है।

अभी मुख्‍यमंत्री जी विस्‍तार से बता रहे थे कि हम कच्‍चा माल विदेशों में बेच-बेच कर कब तक अपनी रोजी-रोटी कमाएंगे। ..और हम कैसे लोग है कि iron ore तो हम बाहर भेजें और steel बाहर से लाएं! अब वो कारोबार हमें बंद करना है। अगर iron ore हमारा होगा तो steel भी हमारा होगा और दुनिया को चाहिए तो हम steel देगें, हम iron ore में हमारे नौजवान के पसीने को जोड़ेंगे और उसी iron ore में से steel बनाएंगे और उसी iron ore में से steel बनाते समय मेरे नौजवानों की जिंदगी भी बन जाएंगी ताकि वो दुनिया के हर संकटों से टक्‍कर लें। ऐसा जीवन उसका ऊंचा बन जाए, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। हमारी कोशिश है विकास की नई ऊंचाइयों पर देश को ले जाने की।

आज मैं यहां डॉ. रमन सिंह जी के सपने को धरती पर उतरा हुआ देख करके आया। रमन सिंह जी के प्रति मेरे मन में मित्र होने के बावजूद भी हमेशा एक सम्‍मान का भाव रहा है और सबसे ज्‍यादा मुझे आदर तब हुआ, जब यहां के लोग महंगी.. चिरौंजी हो, काजू हो ये बेच करके नमक खरीदते थे, बदले में नमक! और समाज का शोषण करने का भाव रखने वाले लोग उन महंगे उत्‍पादों को ले करके बदले में नमक देते थे और बस्‍तर जिले के नागरिक नमक पाने के लिए पता नहीं क्‍या कुछ देने के लिए तैयार हो जाते थे। रमन सिंह जी ने सरकार बनाते ही प्रारंभ में तय कर लिया कि मैं नमक लोगों को पहुंचाऊंगा। उस दिन से एक मित्र होने के बावजूद भी एक विशेष आदर की मेरे मन में अनुभूति हुई कि मेरा एक साथी है जो हर पल गरीबों के लिए सोचता है, आदिवासियों के लिए सोचता है।

आज जब मैं knowledge(Education) city में जा करके आया, उसमें जो कल्‍पना है.. हिन्‍दुस्‍तान में जो लोग कहते हैं कि हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को वापस मुख्‍यधारा में लाने का रास्‍ता क्‍या है, मैं समझता हूं कि रमन सिंह जी ने रास्‍ता बना दिया है। कंधे पर हल! वही समस्‍याओं का हल ला सकता है। कंधे पर gun, ये समस्‍याओं का समाधान नहीं है। जिस धरती पर नक्‍सलवाद का जन्‍म हुआ था और जिसके कारण देश में नक्‍सलवाद की चर्चा हुई थी, वहां पर भी जा करके देखिए, अनुभव के बाद वो सीखे.. और उन्‍होंने भी वो रास्‍ता छोड़ दिया। आज वो नक्‍सलबाड़ी, जहां से हिंसा का मार्ग शुरू हुआ था, बम, बंदुक और गोलियां चलती थी, रक्‍त की धारा बहती थी, आज वहां वो बंद हो गया। जिन लोगों को लगता है कि क्‍या.. आए दिन ये मौत का खेल बंद होगा कि नहीं होगा। मैं देशवासियों! आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि निराश होने की जरूरत नहीं है। यह भी बंद होगा। जब पंजाब में खूनी खेल खेला जा रहा था, क्‍या कभी किसी ने सोचा था कि पंजाब में वो खूनी खेल खत्‍म होगा और लोग सुख-चैन की जिंदगी जिएंगे? आज जी रहे हैं। नक्‍सलबाड़ी में सोचा था? आज लोग वहां भी जी रहे हैं। मुझे विश्‍वास है इस भू-भाग में भी, इस गलत रास्‍ते पर चल पड़े लोग भी.. उनके भीतर भी कभी न कभी मानवता जगेगी।

आज मैं उस ज्ञान नगरी में जा करके आया। 800 से अधिक उन बच्‍चों को मिला जिनको.. कोई गुनाह नहीं था, मां-बाप से बिछुड़ना पड़ा। हिंसा के रास्‍ते पर पागल बने हुए युवकों ने किसी के बाप को मार दिया, किसी की मां को मार दिया, किसी मां-बाप को वहां से दूर जाने के लिए मजबूर कर दिया। उन 800 बच्‍चों से मैं मिला जिन्‍होंने अपने परिवार-जनों को खोया है। माओवाद की हिंसा के कारण उनकी जिदगी में मुसीबत आई है। लेकिन आज डॉ. रमन सिंह जी को बधाई देता हूं कि उन्‍होंने.. जिनका सब कुछ खत्‍म करने के लिए माओवादी तुले हुए थे, जो बच्‍चों को तलवार, बम, बंदूक के रास्‍ते पर ले जाना चाहते थे उनको रमन सिंह जी ने हाथ में कलम पकड़ा दी, कम्‍प्‍यूटर पकड़ा दिया है और मैंने उनकी आंखों में जो चेतना देखी.. वो विश्‍वास देखा है, उन 800 बच्‍चों को देख करके मैं कहता हूं हिंसा का कोई भविष्‍य नहीं है। अगर भविष्‍य है तो वो शांतिमय मार्गों का है, वो मैं आज देख करके आया हूं, अनुभव करके आया हूं। मैं हिंसा के रास्‍ते पर चले हुए नौजवानों को कहना चाहता हूं कि कम से कम एक प्रयोग कीजिए, कम से कम दो-पांच दिन के लिए कंधे पर से बंदूक नीचे रख दीजिए। सादे-सीधे आदिवासी पहनते हैं, ऐसे कपड़े पहन लीजिए और आपके कारण जिस परिवार को कोई स्‍वजन खोना पड़ा है, किसी के बाप की मृत्‍यु हुई, है किसी की मां की मृत्‍यु हुई है.. उस घर में बचा हुआ जो बच्‍चा है, पांच दिन सिर्फ उसके साथ ऐसे ही बिता करके आ जाइए, उससे बातें कीजिए और उसको ये मत बताइए कि आप कौन हैं, ऐसे ही बातें कीजिए। मैं विश्‍वास से कहता हूं, वो बालक अपनी बातों से, अपने अनुभव से आपको पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर देगा, आपका हृदय परिवर्तन करके रख देगा। आप भी हिल जाएगे कि हिंसा के नशे में आपने कितना बड़ा पाप कर दिया है। एक बार मानवता को अंगीकार करके, राक्षसी वृत्ति से मुक्ति पा करके.. ज्‍यादा नहीं, कुछ पल इन पीडि़त परिवारों से जरा मिल लीजिए। आपको फिर कभी उस रास्‍ते पर जाने कि नौबत नहीं आएगी। आपको भी लगेगा कि आपने कुछ गलत किया है। कोई सरकार आपको बदले, कोई कानून आपको बदले, कोई लोभ-लालच आपको बदले उससे ज्‍यादा आप ही की गोलियों से पीड़ा पाने वाला एक बालक आपकी जिंदगी बदल सकता है। शर्त यही है कि मानवता का अंगीकार करके कुछ पल उसके साथ बिता करके देख लीजिए। मैंने देखा उन बच्‍चों को आज.. हिंसा से कभी समस्‍याओं का समाधान नहीं हुआ है। मिल-बैठ करके रास्‍ते निकल सकते हैं। छत्‍तीसगढ़ अगर इस संकट से मुक्‍त हो जाए तो मैं विश्‍वास से कहता हूं हिन्‍दुस्‍तान में आर्थिक ऊंचाइयों पर नम्‍बर एक पर छत्‍तीसगढ़ आकर खड़ा हो सकता है। यहां के नौजवानों का भविष्‍य बदल सकता है और छत्‍तीसगढ़ के पास वो ताकत है, वो हिन्‍दुस्‍तान का भविष्‍य भी बदल सकता है। इसलिए मेरे भाईयो-बहनों! विकास एक ही मार्ग है जो हमारी समस्‍याओं का समाधान करेगा।

मुझे आज रमन सिंह जी के livelihood college को भी देखने का अवसर मिला। उन्‍होंने पूरे राज्‍य में उसका जाल बिछाया है। दुनिया के समृद्ध से समृद्ध देश हो तो भी.. एक बात आज उसका प्रमुख काम बन गया है। दुनिया का सुखी देश भी skill development को महत्‍व दे रहे हैं। हुनर सिखाने के लिए दुनिया में, हर देश में priority हो गई है। छत्‍तीसगढ़ के अंदर हुनर से शिखर तक पहुंचने का जो अभियान चलाया गया है, वो काबिले दाद है। मैं देख कर आया हूं। मैंने उन बालक-बालिकाओं को देखा, हाथ में हुनर तो है लेकिन आंख में ओझ है, तेज है और बातों में एक अपरम्‍पार विश्‍वास है। बड़े-बड़े अफसर भी.. सीएम या पीएम से बात करनी है तो कुछ पल तो set होने में time लगता है। मैंने देखा कि बच्‍चे फटाफट बातें करते थे। कोई झिझक नहीं थी, उनकी बातों में कोई झिझक नहीं थी। ये जो confidence level है ये जीवन में आगे बढ़ने के लिए बहुत बड़ी अमानत होता है। वो मैं आज देख कर आया हूं।

Skill Development का मिशन ले करके हम पूरे देश में चल रहे हैं क्‍योंकि हमारे देश के नौजवानों को रोजगार देना है ..और रोजगार देना है तो Skill Development सर्वाधिक सरल मार्ग होता है। जीवन के हर क्षेत्र में, हर नौजवान के हाथ में हुनर हो। जिसके हाथ में हुनर होता है उसको कभी जीवन जीने के लिए हाथ फैलाने की नौबत नहीं आती है, वो अपने बलबूते पर, अपनी शर्तों पर जिंदगी जी सकता है। उसे कभी मजबूर नहीं होना पड़ता है और उस काम को livelihood colleges के माध्‍यम से रमन सिंह जी ने चरितार्थ किया है। देश के अन्‍य राज्‍यों के लिए भी यह अपने आप में एक मिसाल बन सकती है। मैं चाहूंगा, मैं भी प्रयास करूंगा कि देश के और राज्‍य भी आ करके इसको देखें, इस मॉडल को समझें और इसको कैसे लागू किया जा सकता है उस पर चर्चा करें।

भाईयों-बहनों! आपने हमें भारी बहुमत के साथ आपकी सेवा करने का मौका दिया है। छत्‍तीसगढ़ पूरी ताकत के साथ हमारे पीछे खड़ा है और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि जितना आपने दिया है, हम ब्‍याज समेत विकास करके लौटाएंगे।

आज तेंदू पत्‍ता वाले हमारे किसान भाइयों-बहनों को बोनस देने का भी मुझे सौभाग्‍य मिला और उनको भी मैंने पूछा कि क्‍या करोगे, हरेक से मैंने पूछा। हरेक को पता है कि इन पैसों का उपयोग अपने बच्‍चों की जिंदगी संवारने के लिए कैसे करना है, इसका खाका उनके दिमाग में तैयार है। यही तो है हरेक का aspiration । उसको पूर्ण करने का हमारा प्रयास है।

एक समय था.. हिन्‍दुस्‍तान की तरफ दुनिया कैसे दे‍खती थी? ज्‍यादातर तो देखने के लिए तैयार ही नहीं थी और जो देखते थे वो भी बड़े उपेक्षा के भाव से देखते थे या तो हंसी-मजाक के रूप में देखते थे। देखते ही देखते माहौल बदला कि नहीं बदला? दुनिया हिन्‍दुस्‍तान को पूछने लगी कि नहीं लगी? विश्‍व के समृद्ध देशों को भी हिन्‍दुस्‍तान की अहमियत को मानना पड़ा कि नहीं मानना पड़ा। सवा सौ करोड़ का देश! इसको सर झुका करके जीने की जरूरत नहीं है। वो वक्‍त चला गया। सवा सौ करोड़ देशवासियों का संकल्‍प है कि हमारा देश माथा ऊंचा करके आंख से आंख मिला करके, सीना तान करके जीने के लिए पैदा हुआ है, झुकने के लिए पैदा नहीं हुआ है। वो शक्ति हमारे भीतर पड़ी है, सवा सौ करोड़ देशवासियों के भीतर पड़ी है। उस शक्ति को मैं भली-भांति पहचानता हूं। विश्‍व में जब किसी से बात करता हूं तो अकेला मोदी बात नहीं करता है, सवा सौ करोड़ देशवासी एक साथ आंख मिला करके बात करते हैं और विश्‍व आज हिन्‍दुस्‍तान का लोहा मानने लगा है। पूरे विश्‍व मानने लगा है कि आज दुनिया में तेज गति से आर्थिक विकास करने वाला कोई देश अगर है.. सारे संसार में, तो उस देश का नाम है- हिन्‍दुस्‍तान।

कितनी तेजी से परिवर्तन आ रहा है, लेकिन कुछ लोग होते हैं, जिनको जीवनभर लोगों को गरीब रखने में ही आनंद आया, दु:खी रखने में ही आनंद आया। अगर उसमें कुछ बदलाव आता है, तो वो अब दु:खी हो रहे हैं। उनकी परेशानी मैं समझ सकता हूं। जो लोग विजय पचा नहीं पाए 60 साल तक, वो पराजय भी नहीं पचा पा रहे हैं। भाईयों-बहनों, जिनको जनता ने नकार दिया है, उनके पास झूठ फैलाने के सिवाए, जनता को भ्रमित करने के सिवाए, जनता को गुमराह करने के सिवाए कोई रास्‍ता नहीं बचा है।

मैं देशवासियों को विश्‍वास दिलाता हूं, इन्‍हीं दिनों को याद कर लीजिए, इसी कालखंड में मैं छत्‍तीसगढ़ भी आया था, पिछले साल। अखबारों में क्‍या आता था? टीवी में क्‍या समाचार आते थे एक साल पहले? .. आज इतने का भ्रष्‍टाचार हुआ, आज ये घोटाला हुआ, वो घोटाला हुआ, इसने इतना मार लिया, उसने उतना लूट लिया, यही खबरें आती थीं कि नहीं आती थीं। कोयले की चोरी की चर्चा होती थी कि नहीं होती थी? एक साल हुआ है मेरे भाईयों-बहनों! एक भी खबर आई है क्‍या? क्‍या ईमानदारी से देश नहीं चलाया जा सकता क्‍या? चलाया जा सकता है। एक साल के अनुभव से मैं कह सकता हूं कि ये देश ईमानदारी से चलाया जा सकता है।

चिठ्ठी–पर्ची से कोयले की खदानें दे दी थीं। आज हमने सार्वजनिक रूप से auction किया और वो खज़ाना राज्‍य की तिजोरी में दे दिया। कोयले के auction का पैसा राज्‍य के खज़ाने में आ गया। इतना ही नहीं, जहां पर खनिज़ निकलता है, उस इलाके के जो जिले हैं.. और ज्‍यादातर पूरे देश में आदिवासी क्षेत्र है जहां पर खनिज़ सम्‍पदा है। वहां हमने special संगठन की रचना की है। वहां से कुछ हिस्‍सा लोगों के कल्‍याण के लिए खर्च कर दिया जाएगा। पहली बार गरीबों के लिए रुपए तिजोरी से निकालने का काम हो रहा है।

मुझे विश्‍वास है कि जिस विकास के रास्‍ते पर हम चल पड़े हैं, उस रास्‍ते से देश की समस्‍याओं का समाधान भी करेंगे, आपकी आशाओ-आकांक्षाओं को परिपूर्ण भी करेंगे और आपके साथ कंधे से कंधा मिला करके देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में हम सफल होंगे।

इसी एक विश्‍वास के साथ मैं फिर एक बस्‍तर को, छत्‍तीसगढ़ को हृदयपूर्वक बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି ଦେଶବ୍ୟାପୀ ହଜାର ହଜାର ଯୁବକ ଯୁବତୀଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଦିନ।ଆଜି ୫୧ ହଜାରରୁ ଅଧିକ ଯୁବକ-ଯୁବତୀ ସରକାରୀ ଚାକିରିର ନିଯୁକ୍ତିପତ୍ର ପାଇଛନ୍ତି। ଆଜି, ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଦେଶର ବିକାଶ ଯାତ୍ରାରେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଏବଂ  ଦାୟିତ୍ବପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଂଶୀଦାର ହେବାକୁ ଯାଉଛନ୍ତି। ଆପଣମାନେ ରେଳବାଇ, ବ୍ୟାଙ୍କିଙ୍ଗ, ପ୍ରତିରକ୍ଷା, ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ, ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ଆହୁରି  ଅନେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ନୂତନ ଦାୟିତ୍ୱ ଗ୍ରହଣ କରିବାକୁ ଯାଉଛନ୍ତି। ଆଗାମୀ ବର୍ଷଗୁଡ଼ିକରେ ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତ ପାଇଁ ସଂକଳ୍ପ ପୂରଣ କରିବାରେ ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରିବେ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଏହି ସ୍ଥାନରେ ପହଞ୍ଚିବା ପାଇଁ ଆପଣମାନେ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବରେ ଅନେକ ପ୍ରସ୍ତୁତି ଏବଂ କଠିନ ପରିଶ୍ରମ କରିଛନ୍ତି। ଏହି ସଫଳତା ପାଇଁ ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ପରିବାରକୁ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ଆପଣମାଙ୍କର ଏହି ସଫଳତା ପଛରେ   ପିତାମାତା ଏବଂ ପରିବାରର ଅବଦାନ ଅତୁଳନୀୟ । ଆମେ କେବଳ ନିଜ ପାଇଁ କିମ୍ବା ଆମ ପରିବାର ଯୋଗୁଁ ଏହି ପଦବୀରେ ପହଞ୍ଚି ନାହୁଁ ଏଥିରେ ସମାଜର ମଧ୍ୟ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଅବଦାନ ରହିଛି  ।  ଏହି ବିଶାଳ ଦେଶର ୧୪୦ କୋଟି ନାଗରିକଙ୍କ ଅବଦାନର ମଧ୍ୟ ବହୁତ ମହତ୍ୱ ରହିଛି।  ସେଥିପାଇଁ ଆମର ଦାୟିତ୍ୱ କେବଳ ନିଜ ପ୍ରତି କିମ୍ବା ପରିବାର ପ୍ରତି ନୁହେଁ, ସମଗ୍ର ସମାଜ ପ୍ରତି ମଧ୍ୟ ରହିଛି।  ମୁଁ ନିଶ୍ଚିତ ଯେ ଆପଣମାନେ  ଏସବୁ କାର୍ଯ୍ୟ ପାଇଁ ନିଜକୁ ଆହୁରି ସକ୍ଷମ କରିବେ । ମୁଁ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଏଥି ପାଇଁ   ଅନେକ  ଅନେକ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଜାଣନ୍ତି ଯେ ମାତ୍ର ଦୁଇ ଦିନ ପୂର୍ବରୁ ମୁଁ ପାଞ୍ଚଟି ଦେଶର  ଯାତ୍ରା ଫେରିଥିଲି। ଯଦିଓ ଏହା କେବଳ ପାଞ୍ଚଟି ଦେଶ ଯାତ୍ରା ଥିଲା, ମୁଁ ଅନେକ  ଦେଶର ପ୍ରମୁଖ କମ୍ପାନୀର ନେତୃତ୍ୱଦାତାମାନଙ୍କ ସହିତ  ଭେଟିଥିଲି, କଥା ହୋଇଥିଲି ଏବଂ  ଆଲୋଚନା ମଧ୍ୟ କରିଥିଲି । ମୁଁ ପ୍ରତେକ  ସ୍ଥାନରେ  ଗୋଟିଏ କଥା ନିରନ୍ତର ଅନୁଭବ କରିଥିଲି। ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ଭାରତର ଯୁବଶକ୍ତି ଏବଂ ଭାରତର ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା  ପ୍ରଗତିକୁ ନେଇ ବହୁତ ଉତ୍ସାହିତ ଅଛି। ଆଜି, ବିଶ୍ୱ ଭାରତର ବିକାଶ ଯାତ୍ରାର ଏକ ଅଂଶ ହେବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଭାରତ ମଧ୍ୟ ବିଶ୍ୱର ବିଭିନ୍ନ ଦେଶ ସହିତ ସହଭାଗୀତା କରୁଛି। ଏହାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ହେଉଛି ଯୁବପିଢିଙ୍କ ପାଇଁ  ନୂତନ ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି କରିବା , ନିଯୁକ୍ତି ପ୍ରଦାନ କରିବା  ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର କ୍ଷମତାକୁ  ବିକାଶିତ କରିବା । ମୁଁ ପ୍ରକୃତରେ ଚାହୁଁଛି ଯେ ମୋ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ବିଶ୍ୱସ୍ତରରେ  ପରିଚିତ ହୁଅନ୍ତୁ। ଏହି ଗସ୍ତ ସମୟରେ ନେଦରଲ୍ୟାଣ୍ଡରେ,ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର, ଜଳ, କୃଷି ଏବଂ ଉନ୍ନତ ଉତ୍ପାଦନ ଉପରେ ଆଲୋଚନା ହୋଇଥିଲା। ସ୍ୱିଡେନ ସହିତ, କୃତ୍ରିମ ବୁଦ୍ଧିମତ୍ତା (AI) ଏବଂ ଡିଜିଟାଲ୍ ନବସୃଜନରେ ସହଯୋଗ ଉପରେ ଅନେକ ଆଲୋଚନା ହୋଇଥିଲା। ନରୱେ ସହିତ, ସବୁଜ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଏବଂ ସାମୁଦ୍ରିକ ସହଯୋଗ ଉପରେ ଆଲୋଚନା ହୋଇଥିଲା । ରଣନୈତିକ ଶକ୍ତି ଏବଂ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ସହଭାଗୀତା ଉପରେ UAE ସହିତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଚୁକ୍ତିନାମା ହୋଇଥିଲା। ଇଟାଲୀ ସହିତ, ପ୍ରତିରକ୍ଷା, ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଖଣିଜ ପଦାର୍ଥ ଏବଂ ବିଜ୍ଞାନ ଓ  ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଭଳି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ କ୍ଷେତ୍ରରେ ସହଭାଗୀତା ଉପରେ ଚୁକ୍ତିନାମା ସ୍ଵାକ୍ଷର  ହୋଇଥିଲା।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଏହି ସମସ୍ତ ଚୁକ୍ତିନାମା ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ସିଧାସଳଖ ଲାଭ ଦେବ।  ଯେପରି ଆପଣ ଲକ୍ଷ୍ୟ କରିଥିବେ, ଏହି ସମସ୍ତ ବିଷୟଗୁଡ଼ିକ ଏକ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଏବଂ ସମର୍ଥ ଭାରତର ଭବିଷ୍ୟତର ନିଶ୍ଚୟତା ନେଇ ଆସୁଛି।। କାରଣ ପ୍ରତ୍ୟେକ ନୂତନ ନିବେଶ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ସହଭାଗୀତା, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଶିଳ୍ପ ସହଯୋଗ ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ି ପାଇଁ କେବଳ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ଆଣିଥାଏ ତାହା ନୁହେଁ   ବରଂ  ଅଗଣିତ ନୂତନ ଅବସର  ମଧ୍ୟ ସୃଷ୍ଟି କରିଥାଏ।

 

ମୋର ଯୁବ ସାଥୀମାନେ,

 

ଆମକୁ ମନେ ରଖିବାକୁ ପଡିବ ଯେ ଏଗୁଡ଼ିକ ସେହି କ୍ଷେତ୍ର, ଯେଉଁଥିରେ ଆସୁଥିବା ନିବେଶ ଏବଂ ସହଭାଗିତା ଆଗାମୀ ୩-୪ ଦଶକର ବିଶ୍ୱ ଅର୍ଥନୈତିକ ବୃଦ୍ଧିକୁ ଦିଗନିର୍ଦ୍ଦେଶ କରିବାକୁ ଥିବା ଶିଳ୍ପଗୁଡ଼ିକୁ ଗଢ଼ି ତୋଳିବ। ଏଥିରେ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବେ ଭାରତର ଯୁବମାନଙ୍କର ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ରହିବ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ଏକ ଉଦାହରଣ ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି, ଯେ ଭାରତ କିପରି ବିଶ୍ୱ ପାଇଁ ଏକ ବିଶ୍ୱସ୍ତ ଯୋଗାଣ ଶୃଙ୍ଖଳ ସହଭାଗୀ ହେଉଛି। ଉଦାହରଣ ସ୍ୱରୂପ, ନେଦରଲ୍ୟାଣ୍ଡର ଏକ ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର କମ୍ପାନୀ ASML - ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ଅନେକ ଏହି ନାମ ସହିତ ପରିଚିତ ଥିବେ  - ଭାରତର ଟାଟା ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ସହିତ ଏକ ଚୁକ୍ତିନାମା କରିଛି। ଭାରତ ବିଶ୍ୱର କେବଳ କିଛି ଦେଶ ମଧ୍ୟରୁ ଗୋଟିଏ ଯାହା ସହିତ ଏହି କମ୍ପାନୀ ଏକ ଚୁକ୍ତିନାମା ସ୍ୱାକ୍ଷର କରିଛି। କେବଳ ASML ଏବଂ ଟାଟା ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ମଧ୍ୟରେ ଏହି ଚୁକ୍ତିନାମା ଭାରତରେ ଅଗଣିତ ନୂତନ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି କରିବ ଏବଂ ଭାରତକୁ ପରବର୍ତ୍ତୀ ପିଢ଼ିର ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ପାଇଁ ନୂତନ ସମ୍ଭାବନା  ସୃଷ୍ଟି ମଧ୍ୟ  କରିବ । ସେହିପରି, ସ୍ୱିଡେନ ସହିତ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଏବଂ AI ସହଭାଗୀତା ଓ  UAE ସହିତ ସୁପରକମ୍ପ୍ୟୁଟିଂ ସହଯୋଗ ଭାରତର ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା କ୍ଷମତାକୁ ଯଥେଷ୍ଟ ମଜବୁତ କରିବ। ଏହି ଚୁକ୍ତିନାମା ନିସନ୍ଦେହରେ ଯୁବପିଢ଼ି ପାଇଁ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି କରିବ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି, ସ୍ୱଚ୍ଛ ଶକ୍ତି, ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଖଣିଜ ପଦାର୍ଥ, ସବୁଜ ହାଇଡ୍ରୋଜେନ ଏବଂ ସ୍ଥାୟୀ ଉତ୍ପାଦନ ସହିତ ଜଡିତ କ୍ଷେତ୍ରଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି ଏବଂ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛି। ଏଗୁଡ଼ିକ ସହିତ ଜଡିତ ସହଭାଗୀତା ଏକ ନୂତନ ଅର୍ଥନୀତି ଏବଂ  ସୁଯୋଗର ଦ୍ୱାର ଖୋଲି ଦେଉଛି। ସ୍ୱିଡେନ୍, ନରୱେ ଏବଂ ଇଟାଲୀ ପରି ଦେଶମାନଙ୍କ ସହିତ ଗ୍ରୀନ୍ ଟ୍ରାନ୍ଜିସନ୍ ଏବଂ ସସ୍ଟେନେବଲ୍ ଟେକ୍ନୋଲୋଜିରେ ସହଯୋଗ ମଧ୍ୟ ବଢ଼ୁଛି। ଏହା ଭାରତକୁ କ୍ଲିନ୍ ମାନୁଫ୍ୟାକ୍ଚରିଂ ସମ୍ବନ୍ଧୀୟ ଭବିଷ୍ୟତ ଶିଳ୍ପଗୁଡ଼ିକରେ ଶକ୍ତିଶାଳୀ କରିବ। ଏହା ବ୍ୟତୀତ, ଭାରତ ବନ୍ଦର, ଜାହାଜ ଚଳାଚଳ ଏବଂ ସାମୁଦ୍ରିକ ଭିତ୍ତିଭୂମି ସହିତ ଜଡିତ ଚୁକ୍ତିନାମା ଉପରେ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କାମ କରିଛି। UAE ଏବଂ ନରୱେ ସହିତ ସହଭାଗୀତା ଭାରତର ଜାହାଜ ନିର୍ମାଣ ଇକୋସିଷ୍ଟମକୁ ମଜବୁତ କରିବ।  ଆପଣମାନେ  ଜାଣନ୍ତି ଯେ, ଜାହାଜ ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ଯଥେଷ୍ଟ ପରିମାଣର ଦକ୍ଷ ମାନବଶକ୍ତି ଆବଶ୍ୟକ। ଏହାର ଅର୍ଥ ହେଉଛି ଯେ ଭାରତୀୟ ଇଞ୍ଜିନିୟର, ଟେକ୍ନିସିଆନ ଏବଂ କୁଶଳୀ ଶ୍ରମିକଙ୍କ ଚାହିଦା ପାଇଁ ଏତେ ଚାହିଦା ବଢ଼ିବ ଯେ ଆପଣମାନେ କଳ୍ପନା ମଧ୍ୟ କରିପାରିବେ ନାହିଁ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ପ୍ରତ୍ୟେକ ନୂତନ ସହଭାଗିତା ସହିତ ଆମେ ଭାରତୀୟ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍, ଗବେଷକ ଏବଂ ଯୁବ ବୃତ୍ତିଗତଙ୍କ ପାଇଁ ବିଶ୍ୱ ସହିତ ଯୋଡ଼ିବାର ନୂତନ ପଥ ସୃଷ୍ଟି କରୁଛୁ। ଏହା ମାଧ୍ୟମରେ ଭାରତୀୟ ଯୁବମାନେ ଉନ୍ନତ ଦକ୍ଷତା, ବିଶ୍ୱ ବଜାର ଏବଂ ବିକାଶର ନୂତନ ସୁଯୋଗ ପାଇବେ। ଆଜି, ବିଶ୍ୱ ସେହି ଦେଶଗୁଡ଼ିକୁ ସମ୍ମାନ କରେ ଯେଉଁମାନେ ନବସୃଜନ କରନ୍ତି, ନିର୍ମାଣ କରନ୍ତି ଏବଂ ବଡ଼ ପରିମାଣରେ ସଫଳତାର ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟକରି ପାରନ୍ତି। ଭାରତ ତିନୋଟି ଦିଗରେ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ପ୍ରଗତି କରୁଛି, ଏବଂ ଏଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଶକ୍ତି ହେଉଛନ୍ତି ଆପଣମାନେ—ମୋର ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନେ, ଭାରତର ଯୁବଶକ୍ତି । ମୁଁ ବିଶ୍ୱର ଯେକୌଣସି ସ୍ଥାନକୁ ଯାଏ, ସେଠାରେ ଆଲୋଚନା ସମୟରେ ଭାରତର ଯୁବଶକ୍ତି ବିଷୟରେ ନିଶ୍ଚୟ ଆଲୋଚନା କରେ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଭାରତୀୟ ଏକ ଦୃଢ଼ ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛନ୍ତି। ଏହି ସଂକଳ୍ପ ହେଉଛି ୨୦୪୭  ସୁଦ୍ଧା ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତ ନିର୍ମାଣ କରିବା। ଏହି ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିବା ପାଇଁ, ଦେଶ ବିଭିନ୍ନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ନିବେଶ କରୁଛି।  ଏହି ନିବେଶ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ନୂତନ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି କରୁଛି। ଉଦାହରଣ ସ୍ୱରୂପ, ଆଜି, ଭାରତରେ ଅର୍ଦ୍ଧପରିବାହୀ ଉତ୍ପାଦନ ପାଇଁ ଏକ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଯୋଗାଣ ଶୃଙ୍ଖଳ ସୃଷ୍ଟି ହେଉଛି। ଆଗାମୀ ସମୟରେ, ଭାରତର ୧୦ଟି ବୃହତ୍ତମ ଅର୍ଦ୍ଧପରିବାହୀ ୟୁନିଟ୍ ବିଶ୍ୱ ସ୍ତରରେ ନିଜର ଛାପ ସୃଷ୍ଟି କରିବ। ଏଗୁଡ଼ିକ ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ସମ୍ଭାବନା, ସେମାନଙ୍କର ବୁଦ୍ଧି, ସେମାନଙ୍କର ପ୍ରତିବଦ୍ଧତା ଏବଂ ସ୍ୱାଭାବିକ ଭାବରେ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗ ଦ୍ୱାରା ପରିଚାଳିତ ହେବ। ଭାରତ ଜାହାଜ ନିର୍ମାଣ ଠାରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ଜାହାଜ ମରାମତି ଏବଂ ଓଭରହାଲିଂ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏକ ଇକୋସିଷ୍ଟମ ମଧ୍ୟ ବିକଶିତ କରୁଛି। ଏଥିପାଇଁ ପ୍ରାୟ ୭୫,୦୦୦ କୋଟି ଟଙ୍କାର ନିବେଶ କରାଯାଉଛି। ସେହିପରି, ଆମେ ଭାରତ ଭିତରେ ଏକ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ MRO ଇକୋସିଷ୍ଟମ, ଅର୍ଥାତ୍ ରକ୍ଷଣାବେକ୍ଷଣ, ଓଭରହାଲ ଏବଂ ରିପେୟାର୍ ସୁବିଧା ମଧ୍ୟ   ବିକଶିତ କରୁଛୁ। ଏହା ଦେଶର ବିମାନ ଚଳାଚଳ କ୍ଷେତ୍ରକୁ ବହୁତ ଲାଭ ଦେବ  ଏବଂ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବରେ ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ି ପାଇଁ ନିଯୁକ୍ତିର ଏକ ନୂତନ କ୍ଷେତ୍ର ସୃଷ୍ଟି କରିବ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି ଭାରତ  ଏକ ପ୍ରମୁଖ ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ଉତ୍ପାଦନକାରୀ ଦେଶ।  ଆମେ ଭାରତ ଭିତରେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ମୂଲ୍ୟ ଶୃଙ୍ଖଳା ନିର୍ମାଣ କରୁଛୁ। ଚାଲୁଥିବା PLI ଯୋଜନା ଦେଶରେ ରେକର୍ଡ ସଂଖ୍ୟକ ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ଉତ୍ପାଦନକୁ ଆଗେଇ ନେଉଛି, ଏବଂ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଯୁବକ ମଧ୍ୟ ଚାକିରି ପାଉଛନ୍ତି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଏପରି ଅନେକ ଅଭିଯାନରେ ଭାରତର ସରକାରୀ ଏବଂ ବେସରକାରୀ କ୍ଷେତ୍ର ମିଳିତ ଭାବେ ବହୁତ ବଡ଼ ନିବେଶ କରୁଛନ୍ତି। ଏହି ନିବେଶ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ଦେଶ ଭିତରେ ଚାକିରି ଯୋଗାଇ ଦେଉଛି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ସ୍ୱପ୍ନ ପୂରଣ କରୁଛି। ଜଣେ ସରକାରୀ କର୍ମଚାରୀ ଭାବରେ, ଯାହା ଆଜି ଆପଣଙ୍କର ନିଯୁକ୍ତି ପତ୍ର ପୂରଣ କରିବା ପରେ ଆପଣଙ୍କର ପରିଚୟ ହେବ, ଆପଣଙ୍କୁ ସର୍ବଦା ମନେ ରଖିବାକୁ ପଡିବ ଯେ  ବ୍ୟବସାୟରେ  ସହଜୀକରଣ (Ease of Doing Business) କେତେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

 ଭାରତର ଅଭିବୃଦ୍ଧିର  କାହାଣୀ ଏବଂ  ନୂତନ ନିଯୁକ୍ତି ସୃଷ୍ଟି କରିବାର ସାମର୍ଥ କଥା ଆପଣ ସମସ୍ତେ ଜାଣିଛନ୍ତି । ଏଥିପାଇଁ ଭିତ୍ତିଭୂମି ଏକ ବିରାଟ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରେ। ଯେତେବେଳେ ଗାଁ, ଛୋଟ ସହର ଏବଂ ଦୂରଦୂରାନ୍ତ ଅଞ୍ଚଳ ବିକାଶ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଯାଏ, ଦେଶର ପ୍ରଗତିର ଲାଭ ଅଧିକ ଲୋକଙ୍କ ପାଖରେ ପହଞ୍ଚେ। ଗତ ୧୨   ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ, ରେଳ, ରାଜପଥ, ବିମାନବନ୍ଦର, ଲଜିଷ୍ଟିକ୍ସ, ବନ୍ଦର ଏବଂ ଡିଜିଟାଲ୍ ଭିତ୍ତିଭୂମି ଏକ ଅକଳ୍ପନୀୟ ଗତିରେ ବିସ୍ତାରିତ ଏବଂ ବିକଶିତ ହୋଇଛି, ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ତରରେ କାମ କରାଯାଉଛି। ଆଜି, ଯଦି ଆପଣ ଆପଣଙ୍କ ଅଞ୍ଚଳରେ ଯେକୌଣସି ଦିଗରେ ୧୦୦  କିଲୋମିଟର ଯାତ୍ରା କରନ୍ତି, ତେବେ ଆପଣ ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା  କୌଣସି ନା କୌଣସି ବିକାଶମୂଳକ କାମ ଚାଲୁଥିବା ଦେଖିବେ। ଗାଁଗୁଡ଼ିକରେ ମଧ୍ୟ ପରିବର୍ତ୍ତନ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଦୃଶ୍ୟମାନ ହେଉଛି। ବର୍ଦ୍ଧିତ ସଂଯୋଗୀକରଣ ଚାଷୀ, ଛୋଟ ବ୍ୟବସାୟ ଏବଂ ଛାତ୍ରଙ୍କ ପାଇଁ ନୂତନ ପଥ ଖୋଲିଛି। ଆଜି, ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ପରିବାରର ସ୍ଥାୟୀ ଘର ବସବାସ କରୁଛନ୍ତି। ଏହାର ଅର୍ଥ ହେଉଛି ଯେ ଆମେ ବିଶ୍ୱର ଅନେକ ଦେଶ ଅପେକ୍ଷା ବହୁ ଗୁଣ ଅଧିକ ନୂତନ ଘର ନିର୍ମାଣ କରୁଛୁ। କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ମୁଁ କେବେବି ସ୍ୱଚ୍ଛତା ଅଭିଯାନକୁ ଭୁଲିବାକୁ ଦେଉନାହିଁ। ସ୍ୱଚ୍ଛତା ଅଭିଯାନରେ ଶୌଚାଳୟର ବଡ଼ ଭୂମିକା ରହିଛି ଏବଂ ଆମେ ମଧ୍ୟ ଏହା ଉପରେ ଅଧିକ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେଉଛୁ। ଆଜି ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଘରେ ବିଦ୍ୟୁତ୍ ପହଞ୍ଚିଛି। ଛାତ ଉପରେ ସୌରଶକ୍ତି - ଏହି କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅନେକ ନୂତନ ବିକ୍ରେତା ପ୍ରବେଶ କରିଛନ୍ତି। ଏବେ, ଜଳ ଜୀବନ ମିଶନକୁ ଦେଖନ୍ତୁ, ଯାହା ଟ୍ୟାପ୍ ପାଣି ଯୋଗାଇ ଦେଉଛି।  ମୁଁ ସହରଗୁଡ଼ିକରେ PNG ସଂଯୋଗ ବୃଦ୍ଧି କରିବାକୁ ଚାହୁଁଥିଲି, କିନ୍ତୁ ମୁଁ ପ୍ଲମ୍ବର ପାଇଲି ନାହିଁ; ଅଭାବ ଥିଲା, କାରଣ ବହୁ ସଂଖ୍ୟକ ପ୍ଲମ୍ବର ପୂର୍ବରୁ ଜଳ ଜୀବନ ମିଶନରେ ନିୟୋଜିତ ଥିଲେ। ଏବେ, ମୋତେ ଶକ୍ତି ପାଇଁ ବଡ଼ ବଡ଼ ସହରଗୁଡ଼ିକରେ PNG ସଂଯୋଗ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ବୃଦ୍ଧି କରିବାକୁ ପଡିଲା, ତେଣୁ ଆପଣ କଳ୍ପନା କରିପାରିବେ ଯେ କେବେ କେବେ ଲୋକଙ୍କ ଆବଶ୍ୟକତା ବଢେ  ସେତେବେଳେ ଲୋକମାନଙ୍କର ଅଭାବ ମଧ୍ୟ ଦେଖାଯାଏ ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନଗୁଡ଼ିକର ପ୍ରଭାବ ସାଧାରଣ ନାଗରିକଙ୍କ ସୁବିଧା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ସୀମିତ ରହେନାହିଁ । ଯେତେବେଳେ  ଗାଁଗୁଡ଼ିକରେ ରାସ୍ତା ହେଲା , ବଜାରକୁ ଯାତାୟାତ ସହଜ ହୋଇଗଲା। ବିଦ୍ୟୁତ୍ ସୁବିଧା ଉନ୍ନତ ହେବା ସହିତ, ଛୋଟ ବ୍ୟବସାୟ ସମୃଦ୍ଧ ହେବା ଆରମ୍ଭ ହେଲା। ଗ୍ରାମଗୁଡ଼ିକରେ ମଧ୍ୟ, କୃଷି ସହିତ ମୂଲ୍ୟ ବୃଦ୍ଧି ଆରମ୍ଭ ହୋଇଛି। ପୂର୍ବରୁ, ସେମାନେ ଲାଲ ଲଙ୍କା ବିକ୍ରି କରୁଥିଲେ, କିନ୍ତୁ ବର୍ତ୍ତମାନ, ବିଦ୍ୟୁତ୍ ସହିତ, ସେମାନେ ଲଙ୍କା ପାଉଡର ତିଆରି କରନ୍ତି, ପ୍ୟାକେଟ  କରନ୍ତି ଏବଂ ତା'ପରେ ବିକ୍ରି କରନ୍ତି। ଏହା ଗ୍ରାମଗୁଡ଼ିକରେ ଛୋଟ ଶିଳ୍ପର ଅଭିବୃଦ୍ଧିକୁ ଦ୍ରୁତ କରିଛି । ଡିଜିଟାଲ୍ ସଂଯୋଗ ବୃଦ୍ଧି ସହିତ, ଗ୍ରାମବାସୀ ଆଧୁନିକତା ସହିତ ସମନ୍ୱିତ ହୋଇ ବିଶ୍ୱ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହେଉଛନ୍ତି। ସହର ଏବଂ ଗ୍ରାମ ମଧ୍ୟରେ ପାର୍ଥକ୍ୟ କାମ ହେଉଛି, ଅର୍ଥନୀତିର ଗତିକୁ ତ୍ୱରାନ୍ୱିତ କରୁଛି। ଏହି ସବୁର ସକାରାତ୍ମକ ପ୍ରଭାବ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତର ସୁନିଶ୍ଚିତ କରେ। କେବଳ ନିଯୁକ୍ତି ସୃଷ୍ଟି ହୁଏ ନାହିଁ, ବରଂ ଦେଶ ସ୍ୱାଭିମାନର ନୂତନ ଭାବନା ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼େ ଏବଂ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଲୋକ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ପାଆନ୍ତି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି, ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଖରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର ସ୍ୱପ୍ନ ପୂରଣ କରିବାର ସୁଯୋଗ ଅଛି ଯାହା ପୂର୍ବରୁ କେବେ ଦେଖାଯାଇନଥିଲା। ମୁଁ କାହାକୁ ଦୋଷ ଦେଉନାହିଁ, କିନ୍ତୁ ବାସ୍ତବତା ହେଉଛି ଯେ ସବୁକିଛି ବହୁତ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ, ବିଶାଳ ସ୍ତରରେ ଏବଂ ବିବିଧତାରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ ହେଉଛି। ଆଜି, ଉତ୍ପାଦନ, ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା, ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍, ଡିଜିଟାଲ୍ ସେବା, ରେଳବାଇ, ପ୍ରତିରକ୍ଷା ଏବଂ ଏପରିକି ମହାକାଶ ସମେତ ଅନେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅଗଣିତ ସୁଯୋଗ ଆମ ପାଇଁ ଅପେକ୍ଷା କରିଛି। ଆମର ପ୍ରୟାସ ହେଉଛି ଯେ କିପରି ଯଥାସମ୍ଭବ ଅଧିକ ଯୁବକ ଏହି ନୂତନ ସୁଯୋଗର ଲାଭ  ନେଇପାରିବେ ଏବଂ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ସେମାନଙ୍କର ପ୍ରତିଭା ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିବାର ପ୍ରଚୁର ସୁଯୋଗ ପାଇବେ। ତେଣୁ, ଦକ୍ଷତା ବିକାଶ, ଶିଳ୍ପ-ସଂଯୁକ୍ତ ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ଭବିଷ୍ୟତର ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଉପରେ ନିରନ୍ତର ଗୁରୁତ୍ୱ ଦିଆଯାଉଛି। ଆଇଟିଆଇ ଗୁଡ଼ିକୁ ଆଧୁନିକୀକରଣ କରାଯାଉଛି। ଜାତୀୟ ଦକ୍ଷତା ତାଲିମ ପ୍ରତିଷ୍ଠାନଗୁଡ଼ିକୁ ସୁଦୃଢ଼ ​​କରାଯାଉଛି। ପିଏମ ସେତୁ  ଭଳି ଅଭିଯାନ ଏହି ଦିଗରେ କାମ କରୁଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଗତ କିଛି ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ, ଦେଶରେ ସ୍ୱ-ନିଯୁକ୍ତି ଏବଂ ଉଦ୍ୟୋଗର ଏକ ନୂତନ ସଂସ୍କୃତି ବିକଶିତ ହୋଇଛି। ଭାରତ ବିଶ୍ୱର ତୃତୀୟ ସର୍ବବୃହତ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଇକୋସିଷ୍ଟ ପାଲଟିଛି । ଏହି ସଂଖ୍ୟା ମନେରଖନ୍ତୁ, ଦେଶରେ ୨୩୦,୦୦୦ରୁ ଅଧିକ ସ୍ୱୀକୃତିପ୍ରାପ୍ତ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଅଛି।  ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ, ଯୁବକମାନେ ମଧ୍ୟ ସାମିଲ ଅଛନ୍ତି। ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ କଥା ହେଉଛି ଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନ କେବଳ ବଡ଼ ସହରଗୁଡ଼ିକରେ ସୀମିତ ନୁହେଁ, ଏବଂ ମୁଁ ଏଥି ପାଇଁ ବହୁତ   ଖୁସି। ଆଜିକାଲି, ଟାୟାର-୨ ଏବଂ ଟାୟାର-୩  ସହରଗୁଡ଼ିକର ବହୁ ସଂଖ୍ୟକ ଯୁବକ ମଧ୍ୟ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଏବଂ ନବସୃଜନର ଦୁନିଆରେ ସେମାନଙ୍କର ଶକ୍ତି ପ୍ରଦର୍ଶନ କରୁଛନ୍ତି; ସେମାନଙ୍କର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ  ସ୍ୱୀକାରଯୋଗ୍ୟ । ଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନ ଏବେ ଦେଶର ଅର୍ଥନୀତିର ଏକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଂଶ। ଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନରେ ଆମର ମହିଳାମାନଙ୍କ ଭୂମିକା ମଧ୍ୟ ନିରନ୍ତର ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି। ଆଜି ମହିଳା ନେତୃତ୍ୱାଧୀନ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ବିଷୟରେ ଶୁଣିଲେ  ମନ ଗର୍ବରେ ଭରିଯାଏ। ମୁଁ ବିଶ୍ୱକୁ କହୁଛି ଯେ ଆମ ଦେଶର ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ରେ ମହିଳାଙ୍କ ଭୂମିକା ଯଥେଷ୍ଟ ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି, ଏବଂ ବହୁ ସଂଖ୍ୟକ ମହିଳା ଆଗକୁ ଆସୁଛନ୍ତି। ମୁଦ୍ରା ଯୋଜନା ଅଧୀନରେ, ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ମହିଳା ଆର୍ଥିକ ସହାୟତା ପାଇଛନ୍ତି। ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ସ୍ୱନିଧି ଭଳି ଯୋଜନା ମଧ୍ୟ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ମହିଳାଙ୍କୁ ଆତ୍ମନିର୍ଭରଶୀଳ ହେବାର ସୁଯୋଗ ଦେଇଛି। ଆଜି, ଗାଁ ଏବଂ ଛୋଟ ସହରରେ, ପୂର୍ବ ଅପେକ୍ଷା ଅଧିକ ମହିଳା ନିଜସ୍ୱ ଭାବରେ ନୂତନ ବ୍ୟବସାୟ ଆରମ୍ଭ କରୁଛନ୍ତି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ନୀତି ଏବଂ ନିଷ୍ପତ୍ତିର ଏହି ଅଭିଯାନ ମଧ୍ୟରେ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଆଉ ଗୋଟିଏ କଥା ମନେ ରଖିବାକୁ ପଡିବ: ଯେକୌଣସି ବ୍ୟବସ୍ଥାର ପ୍ରକୃତ ଶକ୍ତି ଏହାର ଜନସାଧାରଣ । ଲୋକମାନେ ହେଉଛନ୍ତି ଶକ୍ତି  ଏବଂ ଏହା ହେଉଛି ଲୋକଙ୍କ ଶକ୍ତି ଯାହା ଜାତୀୟ ଶକ୍ତି ସୃଷ୍ଟି କରେ। ଆପଣ ଯେଉଁ ବ୍ୟବସ୍ଥାର ଅଂଶ ହେବାକୁ ଯାଉଛନ୍ତି ତାହା ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ଜୀବନ, ​​ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ଆଶା ଏବଂ ଆକାଂକ୍ଷା ସହିତ ସିଧାସଳଖ ଜଡିତ। ସରକାରୀ ଚାକିରି ହେଉଛି ଲୋକଙ୍କ ଜୀବନକୁ ସହଜ କରିବାର ଏକ ମାଧ୍ୟମ। ଆପଣ ଯେକୌଣସି ବିଭାଗରେ କାମ କରନ୍ତୁ, ଆପଣଙ୍କର ଆଚରଣ, ସମ୍ବେଦନଶୀଳତା ଏବଂ ଆଭିମୁଖ୍ୟ ବହୁତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ହେବ। ଦେଶ ଆପଣଙ୍କ ଉପରେ ନିଜର ବିଶ୍ୱାସ ରଖିଛି। ଏବେ ଆପଣଙ୍କ କାମ, ଆପଣଙ୍କ ଆଚରଣ, ଆପଣଙ୍କ କଥା ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ଆଚରଣ ମାଧ୍ୟମରେ ସେହି ବିଶ୍ୱାସକୁ ଆହୁରି ମଜବୁତ କରିବା ଆପଣଙ୍କର ଦାୟିତ୍ୱ। ଏକ ନୂତନ ବିଶ୍ୱାସ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ହୃଦୟରେ ପୂର୍ଣ୍ଣ ହେବ, ଏବଂ ଆପଣଙ୍କୁ ଭେଟିବା ପରେ ସେମାନେ ନୂତନ ଆଶା ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବେ। ତେଣୁ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୁବ କର୍ମଯୋଗୀ ନିଜ କାର୍ଯ୍ୟକୁ ଏକ ଦାୟିତ୍ୱ ଭାବରେ ଦେଖିବେ।  ମୋ ପାଇଁ, ଆପଣମାନେ  ବହୁତ କିଛି । ପୂର୍ବରୁ, ଆମେ ଶୁଣିଥିଲୁ, "ସହସ୍ତ୍ରବାହୁ ୱାଲେ ଅମୁକ, ସହସ୍ତ୍ରବାହୁ ୱାଲେ ଧିକନେ।" ଆଜି, ଆପଣମାନେ  ସରକାରଙ୍କ ବଳ , ସରକାରଙ୍କ ଶକ୍ତି। ଯେଉଁମାନେ ପୂର୍ବରୁ ସରକାରରେ ଅଛନ୍ତି ସେମାନେ ସେଠାରେ ଅଛନ୍ତି, ଏବଂ ଯେଉଁମାନେ ନୂତନ ଅଛନ୍ତି ସେମାନେ ସେଠାରେ ଅଛନ୍ତି। ଆଜି, ଭାରତର ଲୋକଙ୍କ ଆକାଂକ୍ଷା ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି, ଏବଂ ମୁଁ ଏହାକୁ ବିକାଶର ଏକ ସକାରାତ୍ମକ ସଙ୍କେତ ବୋଲି ଭାବୁଛି। ଆମକୁ ଆମ ଲୋକଙ୍କ ଆକାଂକ୍ଷାକୁ ବୁଝିବାକୁ ପଡିବ ଏବଂ  ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାକୁ ପଡିବ। ଏପରି ପରିସ୍ଥିତିରେ, ସାର୍ବଜନୀନ ସେବାରେ ପ୍ରବେଶ କରୁଥିବା ଯୁବକମାନଙ୍କର ଭୂମିକା ବହୁତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ହୋଇଯାଇଛି। ଆପଣଙ୍କୁ ନିରନ୍ତର ଶିଖିବାକୁ ପଡିବ ଏବଂ ନୂତନ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା, ନୂତନ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଏବଂ ନୂତନ ଆବଶ୍ୟକତା ପାଇଁ ନିଜକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାକୁ ପଡିବ। iGOT କର୍ମଯୋଗୀ ପ୍ଲାଟଫର୍ମ ଆପଣଙ୍କୁ ଏଥିରେ ବହୁତ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ। କର୍ମଯୋଗୀ ପ୍ରାରମ୍ଭ ଭଳି ମଡ୍ୟୁଲ ଆପଣଙ୍କର ଦାୟିତ୍ୱ ବୁଝିବା ପାଇଁ ବହୁତ ସହଜ କରିବ। ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ଏହାର ସର୍ବାଧିକ ଲାଭ ଉଠାଇବାକୁ ଅନୁରୋଧ କରୁଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି, ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ି ବିଶ୍ୱର ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ନିଜର ପରିଚୟ  ସୃଷ୍ଟି କରୁଛନ୍ତି। ଏହି ସମାନ ଉତ୍ସାହ ଓ ଏହି ଶକ୍ତି ସାର୍ବଜନୀନ ସେବାରେ ମଧ୍ୟ ପ୍ରତିଫଳିତ ହେବା ଉଚିତ। ଏପରି ଯୁବକମାନଙ୍କ ପ୍ରୟାସରେ ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତ ନିର୍ମାଣ ହେବ, ଯେଉଁମାନେ ନିଜ କାମକୁ ଦେଶ ଏବଂ ଲୋକଙ୍କ ସେବାର ଏକ ମାଧ୍ୟମ ବୋଲି ଭାବନ୍ତି। ଆମ ଦେଶରେ କୁହାଯାଏ ଯେ ଲୋକଙ୍କ ସେବା କରିବା ହେଉଛି ଈଶ୍ୱରଙ୍କ ସେବା। ମୋର ପୂର୍ଣ୍ଣ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଆଜି ନିଯୁକ୍ତି ପତ୍ର ପାଇଥିବା ଆମର ଯୁବ ସହକର୍ମୀମାନେ ଭାରତର ବିକାଶ ଯାତ୍ରାକୁ ନୂତନ ଗତି ଦେବେ। ଆପଣଙ୍କ କାର୍ଯ୍ୟ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ନିଷ୍ପତ୍ତି ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତର ସଂକଳ୍ପକୁ ପୂରଣ କରିବ।  ଆପଣମାନେ କେବେବି ସେହି ମନ୍ତ୍ରକୁ ଭୁଲିଯିବା ଉଚିତ୍ ନୁହେଁ। ଆମର ମନ୍ତ୍ର ହେଉଛି: ନାଗରିକ ଦେବୋ ଭବ। ନାଗରିକମାନେ ହିଁ ଈଶ୍ୱର। ନାଗରିକଙ୍କ କଲ୍ୟାଣ ଆମର କର୍ତ୍ତବ୍ୟ। ପୁଣି ଥରେ, ମୁଁ ଆଜି ନିଯୁକ୍ତି ପତ୍ର ପାଇଥିବା ସମସ୍ତ ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ସେମାନଙ୍କର ଆଗାମୀ ଜୀବନ ଏବଂ ଦେଶ ସେବା କରିବାର ଏହି ସୁଯୋଗ ପୂରଣ କରିବା ପାଇଁ ମୋର ଶୁଭକାମନା ଜଣାଉଛି। ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ।