“সুপরিকল্পিত নগরোন্নয়নই ভারতের ভাগ্য নির্ণয় করতে পারে”
“ভারতে নগরোন্নয়নের দুট প্রধান দিক রয়েছে। নতুন শহরগুলির উন্নয়ন আর পুরনো শহরগুলিতে পুরনো ব্যবস্থার আধুনিকীকরণ”
“অমৃতকালে নগর পরিকল্পনা যেমন শহরগুলির ভবিষ্যৎ গড়ে তুলতে পারে, ঠিক তেমনভাবেই সুপরিকল্পিত নগরোন্নয়নই ভারতের ভাগ্য নির্ণয় করতে পারে”
“ভারত মেট্রো নেটওয়ার্কের ক্ষেত্রে অনেক দেশের তুলনায় এগিয়ে আছে”
“২০১৪ সালে দেশে যেখানে মাত্র ১৪-১৫ শতাংশ বর্জ্য প্রক্রিয়াকরণ হ’ত, আজ সেখানে ৭৫ শতাংশ বর্জ্য প্রক্রিয়াকরণ হচ্ছে”
“আমাদের শহর পরিবেশের দিক থেকে এবং জল সংরক্ষণের দিক থেকে স্থিতিস্থাপক হয়ে উঠবে”
“আমরা যত পরিকল্পনা ও নীতি প্রণয়ন করছি, সেগুলি আমাদের শহরগুলিতে বসবাসকারী মানুষের জীবনকে সহজ ও সুগম করে তুলছে কিনা, তাঁদের নিজেদের উন্নয়নে সাহায্য করছে কিনা”

অমৃতকালে নগর পরিকল্পনা যেমন শহরগুলির ভবিষ্যৎ গড়ে তুলতে পারে, ঠিক তেমনভাবেই সুপরিকল্পিত নগরোন্নয়নই ভারতের ভাগ্য নির্ণয় করতে পারে। উন্নততর পরিকল্পনার মাধ্যমে দেশের শহরগুলির জলবায়ু পরিবর্তনের মোকাবিলা এবং জল নিরাপত্তা নিশ্চিত করা সম্ভব।

‘পরিকল্পনার ওপর বিশেষ চিন্তাভাবনার মাধ্যমে নগরোন্নয়ন’ সম্পর্কিত বাজেট পরবর্তী এক ওয়েবিনারে আজ ভাষণদানকালে এই আশার কথা ব্যক্ত করেন প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী। পাশাপাশি, তিনি বিশেষ আক্ষেপের সঙ্গে বলেন যে স্বাধীনতা লাভের পর বহু বছর অতিক্রান্ত। কিন্তু এই সময়কালের মধ্যে দেশে মাত্র একটি কি দুটি শহর পরিকল্পিতভাবে গড়ে উঠেছে। অথচ, স্বাধীনতা পরবর্তী ৭৫ বছরে বিশ্বে ভারতের অবস্থান অনেকটাই উন্নত হতে পারত যদি অন্তত ৭৫টি পরিকল্পিত শহর ঐ সময়কালের মধ্যে গড়ে তোলা যেত।

প্রধানমন্ত্রীর মতে, একুশ শতকের ভারতে সুপরিকল্পিত নগরোন্নয়ন একান্ত জরুরি একটি প্রয়োজন। কারণ, দেশ এখন অপ্রতিহত গতিতে এগিয়ে চলেছে। নতুন নতুন শহরগুলির উন্নয়ন এবং বর্তমান শহরগুলিতে পরিষেবা ব্যবস্থার আধুনিকীকরণকে নগরোন্নয়নের দুটি বিশেষ দিক বলে চিহ্নিত করেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, দেশের প্রত্যেকটি বাজেটে নগরোন্নয়নের মতো বিষয়টির যথেষ্ট গুরুত্ব ও তাৎপর্য রয়েছে। নগরোন্নয়নের উচ্চ তথা উন্নত মানের জন্য এ বছরের বাজেটে ১৫ হাজার কোটি টাকার বিশেষ সংস্থান রাখা হয়েছে যা পরিকল্পিত নগরোন্নয়নের কাজকে বিশেষভাবে উৎসাহিত করবে বলে মনে করেন তিনি।

শ্রী মোদী বলেন, শহরগুলির অপরিকল্পিত উন্নয়ন পরিকল্পনা এবং পরিকল্পনা পরবর্তীকালের বাস্তবায়ন প্রচেষ্টা যথাযথভাবে না হওয়ার ফলে উন্নয়নের লক্ষ্যে ভারতের যাত্রাপথে নানা ধরনের সমস্যার উদ্ভব হয়। এই কারণে নগরোন্নয়নের ক্ষেত্রে পরিকল্পনা ও পরিচালনের এক বিশেষ ভূমিকা রয়েছে। দেশের রাজ্যগুলিতে নগর পরিকল্পনার উপযোগী পরিবেশ ও পরিস্থিতিকে অনুকূল করে তোলার লক্ষ্যে তিনটি বিষয়ের ওপর নজর দেওয়া প্রয়োজন। এগুলি হল – স্থানীয় সমস্যাগুলির নিরসন করা, পরিবহণ ব্যবস্থাকে সুষ্ঠু ও জটমুক্ত করতে উপযুক্ত চিন্তাভাবনা করা এবং শহর পরিকাঠামোর প্রসার।

প্রধানমন্ত্রী বলেন, সবক’টি রাজ্য সরকার এবং শহরাঞ্চলের পৌর ও সরকারি সংস্থাগুলি জাতি গঠনের কাজে বিশেষ অবদানের নজির গড়তে পারে যদি শহরাঞ্চলগুলিকে সুপরিকল্পিতভাবে গড়ে তোলা যায়। এজন্য উদ্ভাবনী চিন্তাভাবনা নিয়ে এগিয়ে আসার জন্য নগর পরিকল্পনা বিষয়ে বিশেষজ্ঞদের আহ্বান জানিয়ে তিনি বলেন, বিশেষজ্ঞদের পরামর্শ ও মতামত স্থানীয় পৌর তথা সরকারি সংস্থাগুলিকে শহরাঞ্চলের সুযোগ-সুবিধার প্রসারে চিন্তাভাবনার খোরাক এনে দিতে পারে।

পরিবহণ পরিকল্পনাকে শহরোন্নয়ন প্রচেষ্টার ক্ষেত্রে একটি গুরুত্বপূর্ণ স্তম্ভ বলে বর্ণনা করেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, শহরাঞ্চলের যান চলাচলকে কোনভাবেই রুদ্ধ বা ব্যহত হতে দেওয়া যায় না। প্রসঙ্গত, ২০১৪ সালের আগে দেশের শহরগুলিতে মেট্রো চলাচলের পরিস্থিতি কিরকম ছিল তার বর্ণনা করতে গিয়ে তিনি বলেন, ২০১৪-র পরবর্তী সময়ে বর্তমান কেন্দ্রীয় সরকার দেশের বহু শহরে মেট্রো সম্প্রসারণের কাজ শুরু করে এবং এই বিষয়টিতে বিশ্বের অনেক দেশের তুলনায় অনেকাংশে এগিয়ে আছে। দেশের শহরগুলিতে মেট্রো নেটওয়ার্ক দ্রুত গড়ে তোলার ওপর গুরুত্ব দেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, আমাদের প্রয়োজন শেষ প্রান্ত পর্যন্ত সংযোগ ও যোগাযোগ ব্যবস্থার সুষ্ঠু ও সুঠাম প্রসার। শহরগুলির রাস্তাঘাট সুপ্রশস্ত করা, পরিবেশ-বান্ধব যান চলাচল, ওভারব্রিজ সহ সড়ক উন্নয়ন এবং বিভিন্ন রাস্তার জংশনগুলিকে উন্নত করে তোলার মাধ্যমে নগর পরিকল্পনাকে এক বিশেষ রূপ দেওয়া যায় বলে মন্তব্য করেন শ্রী নরেন্দ্র মোদী।

তিনি বলেন, চক্রাকার অর্থনীতিকে ভিত্তি করে নগরোন্নয়নের ক্ষেত্রে ভারত এক বিশেষ প্রচেষ্টা চালিয়ে যাচ্ছে। শহরাঞ্চলের বিভিন্ন ধরনের বর্জ্যকে পুনর্ব্যবহারযোগ্য করে তোলার মাধ্যমে উন্নতমানের সারে রূপান্তরের প্রচেষ্টাও চালানো হয়েছে। ২০১৪ সালে যেখানে মোট বর্জ্যের ১৪-১৫ শতাংশ প্রক্রিয়াকরণের ব্যবস্থা করা হত সেখানে বর্তমানে ৭৫ শতাংশ বর্জ্যকে প্রক্রিয়াকরণের মাধ্যমে পুনর্ব্যবহারযোগ্য করে তোলা হচ্ছে। বর্জ্যের প্রক্রিয়াকরণ ও ব্যবস্থাপনার মাধ্যমে শহরগুলিকে আবর্জনামুক্ত করে তোলার ওপর যে বিশেষ জোর দেওয়া হচ্ছে, একথাও প্রসঙ্গত তুলে ধরেন প্রধানমন্ত্রী। এক্ষেত্রে স্টার্ট-আপ সংস্থাগুলি যেভাবে কাজ করে যাচ্ছে তাকে সমর্থন জানানোর জন্য প্রত্যেককে এগিয়ে আসার আহ্বান জানান তিনি। বর্জ্য ব্যবস্থাপনার সম্ভাবনাকে সর্বোচ্চ মাত্রায় কাজে লাগানোর জন্য শিল্প সংস্থাগুলির কাছে আর্জি জানান প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, ‘অম্রুত’ কর্মসূচির সাফল্যের পথ অনুসরণ করে শহরাঞ্চলে বিশুদ্ধ পানীয় জলের যোগান দিতে ‘অম্রুত-২’ কর্মসূচির কাজ শুরু করা হয়।

শ্রী মোদী বলেন, আমাদের নতুন নতুন শহরগুলিকে অবশ্যই আবর্জনামুক্ত হতে হবে। এর পাশাপাশি, বিশুদ্ধ জলের নিরন্তর যোগান সহ পরিবেশ অনুকূল রূপেও এই ধরনের শহরগুলিকে গড়ে তোলা প্রয়োজন। এই লক্ষ্যে নগর পরিকাঠামোর উন্নয়নে বিনিয়োগের প্রসার ঘটানোও প্রয়োজন বলে মনে করেন তিনি। দেশের ভবিষ্যৎ শহরগুলির চেহারা কিরকম হতে পারে তার বর্ণনা দিয়ে প্রধানমন্ত্রী বলেন যে স্থাপত্য, দূষণমুক্ত, পরিবেশ-বান্ধব জ্বালানি, জমি ব্যবহারের ক্ষেত্রে দক্ষতা, ট্রানজিট করিডর এবং জন-পরিষেবাকে ‘এ-ওয়ান’ মানের হতে হবে।

শ্রী মোদী বলেন, যে সমস্ত নীতি ও পরিকল্পনা সরকার গ্রহণ করেছে তা শহরাঞ্চলের অধিবাসীদের জীবনযাত্রাকে আরও সহজ করে তোলার মধ্যেই শুধুমাত্র সীমাবদ্ধ থাকবে না, বরং শহরবাসীরা তাঁদের জীবনকে যাতে আরও নতুনভাবে সাজিয়ে তুলতে পারেন সেদিকেও দৃষ্টি দেবে। এ বছরের বাজেটে ‘প্রধানমন্ত্রী আবাস যোজনা’র আওতায় ৮০ হাজার কোটি টাকা ব্যয়ের যে অঙ্গীকার করা হয়েছে তার উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, সিমেন্ট, ইস্পাত, রং এবং আসবাবপত্র নির্মাণের সঙ্গে সংশ্লিষ্ট শিল্পক্ষেত্রগুলি তাতে বিশেষ চাঙ্গা হয়ে উঠবে। নগরোন্নয়নের সঙ্গে ভবিষ্যৎ প্রযুক্তির যোগসাধনের লক্ষ্যে স্টার্ট-আপ সংস্থা এবং অন্যান্য শিল্পক্ষেত্রকে চিন্তাভাবনা করার জন্য আবেদন জানান প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, যে সমস্ত সম্ভাবনা রয়েছে সেগুলির সুযোগ যেমন আমাদের গ্রহণ করতে হবে, অন্যদিকে তেমনই নতুন নতুন সম্ভাবনার সৃষ্টিও আমাদের করে যেতে হবে। গৃহ নির্মাণ প্রযুক্তি থেকে নগরোন্নয়ন – প্রতিটি ক্ষেত্রেই নতুন নতুন সমাধানের পথ আমাদের খুঁজে বের করতে হবে।

 

 

 

 

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August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।