Published By : Admin |
December 28, 2020 | 11:03 IST
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Work is on for developing 21st century attractions in Delhi: PM
প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী আজ বলেছেন, দেশের প্রতিটি শহর, তা সে বড়ই হোক বা ছোট, ভারতীয় অর্থ-ব্যবস্থার অগ্রণী কেন্দ্র হয়ে উঠতে চলেছে। জাতীয় রাজধানী হওয়ার কারণে দিল্লি শহরে একবিংশ শতাব্দীর মহিমা প্রতিফলিত হওয়া প্রয়োজন। বিশ্বে এই শহরের নিজস্ব পরিচিতি ও স্বতন্ত্রতা স্থাপনের জন্যই এটা আবশ্যক হয়ে উঠেছে। শ্রী মোদী বলেন, প্রাচীন এই শহরটিকে আধুনিক করে তোলার যাবতীয় প্রয়াস চলছে। দিল্লি মেট্রোতে চালক বিহীন পরিষেবার সূচনা করে এবং দিল্লি মেট্রোর এয়ারপোর্ট এক্সপ্রেস লাইন পর্যন্ত ন্যাশনাল কমন মোবিলিটি কার্ডের সুবিধা সম্প্রসারণের সূচনা করে শ্রী মোদী ভিডিও কনফারেন্সে ভাষণ দিচ্ছিলেন।
শ্রী মোদী আরও বলেন, সরকার কর ছাড়ের সুবিধা দিয়ে বৈদ্যুতিন যানবাহনের ব্যবহার ও গতিময়তার প্রসারে উৎসাহ দিচ্ছে। প্রাচীন দিল্লি শহরের পরিকাঠামোর সংস্কার করে আধুনিক প্রযুক্তির সাহায্যে সেগুলির নতুন রূপদান করা হচ্ছে। এমনকি, বস্তিবাসীদের জীবনযাপনের মানোন্নয়নে শতাধিক কলোনীর আইনি স্বীকৃতি দেওয়া হয়েছে। একই সঙ্গে, পুরনো সরকারি ভবনগুলিকে আধুনিক পরিবেশ-বান্ধব কাঠামো হিসাবে রূপ দেওয়া হচ্ছে।
প্রধানমন্ত্রী জোর দিয়ে বলেন, জাতীয় রাজধানী দিল্লি একটি জনপ্রিয় পর্যটন কেন্দ্র হওয়ার পাশাপাশি এই শহরটিকে একবিংশ শতাব্দীর আকর্ষণীয় কেন্দ্র হিসাবে গড়ে তোলার কাজ চলছে। দিল্লি শহর যেহেতু ধীরে ধীরে আন্তর্জাতিক সভা-সম্মেলন, আন্তর্জাতিক প্রদর্শনী ও আন্তর্জাতিক বাণিজ্য-পর্যটনের আকর্ষণীয় গন্তব্য হয়ে উঠছে তাই দেশের সর্ববৃহৎ কেন্দ্রটি দ্বারকার কাছেই গড়ে তোলা হচ্ছে। একই সঙ্গে, নতুন সংসদ ভবন নির্মাণের কাজও শুরু হয়েছে। ভারত বন্দনা উদ্যান গড়ে তোলার কাজ চলছে। এই কর্মসূচিগুলি কেবল দিল্লির কয়েক হাজার মানুষের কাছে কর্মসংস্থানের সুবিধাই নিয়ে আসবে না, বরং পুরনো এই শহরটির রূপ ও আদল সম্পূর্ণ পাল্টে ফেলবে।
প্রথম চালক বিহীন মেট্রো পরিষেবার সূচনার জন্য রাজধানীর বাসিন্দাদের অভিনন্দন জানিয়ে শ্রী মোদী মেট্রো পরিষেবা ব্যবহারকারীদের সুবিধার্থে এয়ারপোর্ট এক্সপ্রেস লাইন পর্যন্ত ন্যাশনাল কমন মোবিলিটি কার্ডের সুবিধার সম্প্রসারণেরও সূচনা করেন। প্রধানমন্ত্রী বলেন, ১৩০ কোটিরও বেশি মানুষের বৃহত্তর অর্থনৈতিক ও কৌশলগত ক্ষমতার রাজধানী হ’ল দিল্লি। তাই, এই শহরের মহিমা অবশ্যই প্রতীয়মান হওয়া প্রয়োজন।
Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026
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पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!
आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।
साथियों,
आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।
साथियों,
BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।
साथियों,
बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।
साथियों,
दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।
साथियों,
इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।
साथियों,
स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!