Published By : Admin |
August 27, 2025 | 14:49 IST
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اسٹریٹ وینڈرز اور ان کے خاندانوں کے لیے بہتر کریڈٹ ، یو پی آئی سے منسلک کریڈٹ کارڈ ، ڈیجیٹل ایڈاپشن ، اور جامع سماجی و اقتصادی ترقی
وزیر اعظم جناب نریندر مودی کی صدارت میں مرکزی کابینہ نے "وزیر اعظم اسٹریٹ وینڈرز آتم نربھر ندھی (پی ایم سواندھی) اسکیم کی‘ از سرِ نو تشکیل ’ اور قرض دینے کی مدت کو 31 دسمبر 2024 سے آگے بڑھانے کو منظوری دی۔ قرض کی مدت کو اب 31 مارچ 2030 تک بڑھا دیا گیا ہے ۔ اس اسکیم کے لیے کل اخراجات 7,332 کروڑ روپے ہیں ۔ اس اسکیم کا مقصد 50 لاکھ نئے مستفیدین سمیت 1.15 کروڑ مستفیدین کو فائدہ پہنچانا ہے ۔ اسکیم کا نفاذ ہاؤسنگ اور شہری امور کی وزارت (ایم او ایچ یو اے) اور مالیاتی خدمات کے محکمہ (ڈی ایف ایس) کی مشترکہ ذمہ داری ہوگی جس میں ڈی ایف ایس ،بینکوں/مالیاتی اداروں اور ان کے زمینی سطح کے عہدیداروں کے ذریعے قرض/کریڈٹ کارڈ تک رسائی کو آسان بنانے کے لیے ذمہ دار ہوگا ۔ از سرِ نو تشکیل شدہ اسکیم کی کلیدی خصوصیات میں پہلی اور دوسری قسط میں قرض کی رقم میں اضافہ ، دوسرے قرض کی ادائیگی کرنے والے مستفیدین کے لیے یو پی آئی سے منسلک روپے کریڈٹ کارڈ کی فراہمی اور خوردہ اور تھوک لین دین کے لیے ڈیجیٹل کیش بیک مراعات شامل ہیں ۔ اسکیم کی کوریج کو مرحلہ وار طریقے سے قانونی قصبوں سے آگے مردم شماری والے قصبوں ، نیم شہری علاقوں وغیرہ تک بڑھایا جا رہا ہے۔ بہتر بنائے گئے قرض ڈھانچے میں پہلی قسط کے قرضوں کو بڑھا کر 15,000 روپے (10,000 روپے سے) اور دوسری قسط کے قرضوں کو بڑھا کر 25,000 روپے (20,000 روپے سے) کر دیا گیا ہے جبکہ تیسری قسط میں کوئی تبدیلی نہیں کی گئی ہے ۔
یو پی آئی سے منسلک روپے کریڈٹ کارڈ کو متعارف کرانے والا عمل اسٹریٹ وینڈرز کو کسی بھی ہنگامی کاروباری اور ذاتی ضروریات کو پورا کرنے کے لیے کریڈٹ کی فوری رسائی فراہم کرے گا۔
مزید برآں ، ڈیجیٹل ایڈاپشن کو فروغ دینے کے لیے ، اسٹریٹ وینڈرز، خوردہ اور تھوک لین دین کرنے پر 1,600 روپے تک کیش بیک مراعات حاصل کر سکتے ہیں ۔
یہ اسکیم اسٹریٹ وینڈرز کی صلاحیت سازی پر بھی توجہ مرکوز کرتی ہے جس میں انٹرپرینیورشپ ، مالی خواندگی ، ڈیجیٹل مہارت اور کنورجنس کے ذریعے مارکیٹنگ پر توجہ دی جاتی ہے ۔ ایف ایس ایس اے آئی کے ساتھ شراکت داری میں اسٹریٹ وینڈرز کے لیے معیاری حفظان صحت اور فوڈ سیفٹی ٹریننگ کا انعقاد کیا جائے گا ۔
اسٹریٹ وینڈرز اور ان کے خاندانوں کی مجموعی فلاح و بہبود اور ترقی کو یقینی بنانے کے لیے ماہانہ لوک کلیان میلوں کے ذریعے 'سواندھی سے سمردھی' جزو کو مزید مضبوط کیا جائے گا ۔ اس کا مقصد اس بات کو یقینی بنانا ہے کہ حکومت ہند کی مختلف اسکیموں کے تحت فوائد مستفیدین اور ان کے اہل خانہ تک سیچوریشن اپروچ میں پہنچیں ۔
حکومت نے ابتدائی طور پر یکم جون 2020 کو پی ایم سواندھی اسکیم کا آغاز کیا تھا تاکہ اسٹریٹ وینڈرز کی مدد کی جا سکے جنہیں کووڈ-19 کی وبا کے دوران بے مثال مشکلات کا سامنا کرنا پڑا تھا ۔ تاہم ، اس اسکیم کے آغاز کے بعد سے یہ اسٹریٹ وینڈرز کے لیے مالی مدد سے زیادہ ثابت ہوا ہے اور اس نے انہیں معیشت میں ان کے تعاون کے لیے شناخت اور باضابطہ شناخت کا احساس دلایا ہے ۔
مشہور پی ایم سواندھی اسکیم پہلے ہی اہم سنگ میل حاصل کر چکی ہے ۔ 30 جولائی 2025 تک ، 68 لاکھ سے زیادہ اسٹریٹ وینڈرز کو 13,797 کروڑ روپے کے 96 لاکھ سے زیادہ قرضے تقسیم کیے گئے ہیں ۔ تقریبا 47 لاکھ ڈیجیٹل فعال مستفیدین نے 6.09 لاکھ کروڑ روپے کے 557 کروڑ سے زیادہ ڈیجیٹل لین دین کیے ہیں ، جس سے مجموعی طور پر 241 کروڑ روپے کا کیش بیک حاصل ہوا ہے ۔ 'سواندھی سے سمردھی' پہل کے تحت 3,564 اربن لوکل باڈیز (یو ایل بی) کے 46 لاکھ مستفیدین کو پروفائل کیا گیا ہے ، جس کے نتیجے میں 1.38 کروڑ سے زیادہ اسکیموں کو منظوری دی گئی ہے ۔
اس اسکیم کو قومی سطح پر پذیرائی ملی ہے، جس نے معیشت کو فروغ دینے، معاش کو فروغ دینے، مالی شمولیت کو آگے بڑھانے، اور ڈیجیٹل تفویض اختیارات میں اپنی شاندار شراکت داری کے لیے جدت طرازی سے منسلک پرائم منسٹر ایوارڈ فار پبلک ایڈمنسٹریشن (2023) (سنٹرل لیول) اور ڈیجیٹل ٹرانسفارمیشن (2022) کے لیے سلور ایوارڈ فار ایکسی لینس ان گورنمنٹ پروسیس ری انجینئرنگ حاصل کیا ہے۔
اسکیم کی توسیع کا مقصد کاروبار کی توسیع اور پائیدار ترقی کے مواقع کی حمایت کے لیے مالیات کا ایک قابل اعتماد ذریعہ پیش کر کے اسٹریٹ وینڈرز کی مجموعی ترقی ہے ۔ یہ نہ صرف اسٹریٹ وینڈرز کو بااختیار بنائے گی بلکہ جامع اقتصادی ترقی ، اسٹریٹ وینڈرز اور ان کے خاندانوں کی سماجی و اقتصادی ترقی کو بھی فروغ دے گی، ان کی روزی روٹی میں اضافہ کرے گی اور بالآخر شہری مقامات کو ایک متحرک ، خود کفیل ماحولیاتی نظام میں تبدیل کر ےگی ۔
देशभर के अपने रेहड़ी-पटरी वाले भाई-बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। इसी दिशा में आज पीएम स्वनिधि योजना को 31 मार्च, 2030 तक बढ़ाने को मंजूरी दी गई है। मुझे विश्वास है कि यह उनके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लाने में मददगार साबित होगा। https://t.co/6byxlSjOu0
The government places great emphasis on bringing a 'technology culture' to agriculture: PM Modi
March 06, 2026
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This year’s Union Budget gives a strong push to agriculture and rural transformation : PM
Government has continuously strengthened the agriculture sector ,major efforts have reduced the risks for farmers and provided them with basic economic security: PM
If we scale high-value agriculture together, it will transform agriculture into a globally competitive sector: PM
As export-oriented production increases, employment will be created in rural areas through processing and value addition: PM
Fisheries can become a major platform for export growth, a high-value, high-impact sector of rural prosperity: PM
The government is developing digital public infrastructure for agriculture through AgriStack: PM
Technology delivers results when systems adopt it, institutions integrate it, and entrepreneurs build innovations on it: PM
नमस्कार !
बजट वेबिनार सीरीज के तीसरे वेबिनार में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इससे पहले, टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे अहम विषयों पर दो वेबिनार हो चुके हैं। आज, Rural Economy और Agriculture जैसे अहम सेक्टर पर चर्चा हो रही है। आप सभी ने बजट निर्माण में अपने मूल्यवान सुझावों से बहुत सहयोग दिया, और आपने देखा होगा बजट में आप सबके सुझाव रिफ्लेक्ट हो रहे हैं, बहुत काम आए हैं। लेकिन अब बजट आ चुका है, अब बजट के बाद उसके full potential का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और सरल तरीके से बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो। बजट का पाई-पाई पैसा जिस हेतु से दिया गया है, उसको परिपूर्ण कैसे करें? जल्द से जल्द कैसे करें? आपके सुझाव ये वेबिनार के लिए बहुत अहम है।
साथियों,
आप सभी जानते हैं, कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा, ये सब हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। एग्रीकल्चर, भारत की लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट जर्नी का Strategic Pillar भी है, और इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है। करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। MSP में हुए Reforms से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के क्लेम सेटल किए गए हैं। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है, और उन्हें एक बेसिक इकोनॉमिक सिक्योरिटी मिली है। इससे कृषि क्षेत्र का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज खाद्यान्न और दालों से लेकर तिलहन तक देश रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है। लेकिन अब, जब 21वीं सदी का दूसरा क्वार्टर शुरू हो चुका है, 25 साल बीत चुके हैं, तब कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना भी उतना ही आवश्यक है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं। मुझे विश्वास है, इस वेबिनार में आप सभी के बीच हुई चर्चा, इससे निकले सुझाव, बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।
साथियों,
आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं, ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्य़क है। हमारे पास Diverse Climate है, हमें इसका पूरा फायदा उठाना है। एग्रो क्लाइमेटिक जोन, उस विषय में हम बहुत समृद्ध है। इस साल का बजट इन सब बातों के लिए अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की दिशा तय करता है, और एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ को बढ़ावा देता है। बजट में हमने high value agriculture पर फोकस किया है। नारियल, काजू, कोको, चंदन, ऐसे उत्पादों के regional-specific promotion की बात कही है, और आपको मालूम है, दक्षिण के हमारे जो राज्य हैं खासकर केरल है, तमिलनाडु है, नारियल की पैदावार बहुत करते हैं। लेकिन अब वो क्रॉप, वो सारे पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उसकी वो क्षमता नहीं रही है। केरल के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो, तमिलनाडु के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो। इसलिए इस बार कोकोनट पर एक विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा।
साथियों,
नॉर्थ ईस्ट की तरफ देखें, अगरवुड बहुत कम लोगों को मालूम है, जो ये अगरबत्ती शब्द है ना, वो अगरवुड से आया हुआ है। अब हिमालयन राज्यों में टेम्परेट नट क्रॉप्स, और इन्हें बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार सृजन होगा। इस दिशा में एक coordinated action कैसे हो, आप सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर जरूर मंथन करें। अगर हम मिलकर High Value Agriculture को स्केल करते हैं, तो ये एग्रीकल्चर को ग्लोबली कंपेटिटिव सेक्टर में बदल सकता है। एग्री experts, इंडस्ट्री और किसान एक साथ कैसे आएं, किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए किस तरह से गोल्स सेट किए जाएं, क्वालिटी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड्स, ऐसे हर पहलू, इन सबको कैसे प्रमोट किया जाए, इन सारे विषयों पर चर्चा, इस वेबिनार को, इसके महत्व को बढ़ाएंगे। मैं एक और बात आपसे कहना चाहूंगा। आज दुनिया हेल्थ के संबंध में ज्यादा कॉनशियस है। होलिस्टिक हेल्थ केयर और उसमें ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड, इस पर बहुत रुचि है। भारत में हमें केमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें नेचुरल फार्मिंग पर बल देना होगा। नेचुरल फार्मिंग से, केमिकल फ्री प्रोडक्ट से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए सर्टिफिकेशन, लेबोरेटरी ये सारी व्यवस्थाएं सरकार सोच रही है। लेकिन आप लोग इसमें भी जरूर अपने विचार रखिए।
साथियों,
एक्सपोर्ट बढ़ाने में एक बहुत बड़ा फैक्टर फिशरीज सेक्टर का पोटेंशियल भी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश भी है। आज हमारे अलग-अलग तरह के जलाशय, तालाब, ये सब मिलाकर लगभग 4 लाख टन मछली उत्पादन होता है। जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना मौजूद है। अब विचार कीजिए आप, 4 लाख टन से हम अतिरिक्त 20 लाख टन जोड़ दें, तो हमारे गरीब मछुआरे भाई-बहन हैं, उनकी जिंदगी कैसी बदल जाएगी। हमारे पास Rural Income को डायवर्सिफाई करने का अवसर है। फिशरीज एक्सपोर्ट ग्रोथ का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है, दुनिया में इसकी मांग है। इस वेबिनार से अगर बहुत ही प्रैक्टिकल सुझाव निकलते हैं, तो कैसे रिज़रवॉयर, उसकी पोटेंशियल की सटीक मैपिंग की जाए, कैसे क्लस्टर प्लानिंग की जाए, कैसे फिशरीज डिपार्टमेंट और लोकल कम्युनिटी के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन हो, तो बहुत ही उत्तम होगा। हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट, उसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स, हर स्तर पर हमें नए बिजनेस मॉडल विकसित करने ही होंगे। ये Rural Prosperity, ग्रामीण समृद्धि के लिए, वहां की हाई वैल्यू, हाई इम्पैक्ट सेक्टर के रूप में परिवर्तित करने का एक अवसर है हमारे लिए, और इस दिशा में भी हम सबको मिलकर काम करना है, और आप आज जो मंथन करेंगे, उसके लिए, उस कार्य के लिए रास्ता बनेगा।
साथियों,
पशुपालन सेक्टर, ग्रामीण इकोनॉमी का हाई ग्रोथ पिलर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर है, Egg प्रोडक्शन में हम दूसरे स्थान पर है। हमें इसे और आगे ले जाने के लिए ब्रीडिंग क्वालिटी, डिजीज प्रिवेंशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। एक और अहम विषय पशुधन के स्वास्थ्य का भी है। मैं जब One Earth One Health की बात करता हूं, तो उसमें पौधा हो या पशु, सबके स्वास्थ्य की बात शामिल है। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर है। फुट एंड माउथ डिजीज, उससे पशुओं को बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत टेक्नोलॉजी का विस्तार किया जा रहा है। हमारी सरकार में अब पशुपालन क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ मिल रहा है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की शुरुआत भी की गई है, और आपको ये पता है हम लोगों ने गोबरधन योजना लागू की है। गांव के पशुओं के निकलने वाला मलमूत्र है, गांव का जो वेस्ट है, कूड़ा-कचरा है। हम गोबरधन योजना में इसका उपयोग करके गांव भी स्वच्छ रख सकते हैं, दूध से आय होती है, तो गोबर से भी आय हो सकती है, और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में गैस सप्लाई में भी ये गोबरधन बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। ये मल्टीपर्पज बेनिफिट वाला काम है, और गांव के लिए बहुत उपयोगी है। मैं चाहूंगा कि सभी राज्य सरकारें इसको प्राथमिकता दें, इसको आगे बढ़ाएं।
साथियों,
हमने पिछले अनुभवों से समझा है कि केवल एक ही फसल पर टिके रहना किसान के लिए जोखिम भरा है। इससे आय के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए, हम crop diversification पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, National Mission on Edible Oils And Pulses, National Mission on Natural Farming, ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं।
साथियों,
आप भी जानते हैं एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है, राज्यों का भी एक बड़ा एग्रीकल्चर बजट होता है, हमें राज्यों को भी निरंतर प्रेरित करना है कि वो अपना दायित्व निभाने में, हम उनको कैसे मदद दें, हमारे सुझाव उनको कैसे काम आएं। राज्य का भी एक-एक पैसा जो गांव के लिए, किसान के लिए तय हुआ है, वो सही उपयोग हो। हमें बजट प्रावधानों को जिला स्तर तक मजबूत करना होगा। तभी नई पॉलिसीज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है।
साथियों,
ये टेक्नोलॉजी की सदी है और सरकार का बहुत जोर एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी कल्चर लाने पर भी है। आज e-NAM के माध्यम से मार्केट एक्सेस का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है। सरकार एग्रीस्टैक के जरिए, एग्रीकल्चर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसके तहत डिजिटल पहचान, यानी किसान आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है, और लगभग 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया गया है। भारत-विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।
लेकिन साथियों,
टेक्नोलॉजी तभी परिणाम देती है, जब सिस्टम उसे अपनाएं, संस्थाएं उसे इंटीग्रेट करें और एंटरप्रेन्योर्स उस पर इनोवेशन खड़ा करें। इस वेबिनार में आपको इससे जुड़े सुझावों को मजबूती से सामने लाना होगा। हम टेक्नोलॉजी को कैसे सही तरीके से इंटीग्रेट करें, इस दिशा में इस वेबिनार से निकले सुझावों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।
साथियों,
हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद, इसने रूरल इकोनॉमी को निरंतर मजबूत किया है। लखपति दीदी अभियान की सफलता को भी हमें नई ऊंचाई देनी है। अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक, 2029 तक 3 करोड़ में और 3 करोड़ जोड़ना है, और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये लक्ष्य और तेजी से कैसे प्राप्त किया जाए, इसे लेकर भी आपके सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।
साथियों,
देश में स्टोरेज का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज के अलावा एग्री एंटरप्रेन्योर्स प्रोसेसिंग, सप्लाई चैन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक, एक्सपोर्ट, इन सब में इनोवेशन और निवेश बढ़ाना आज समय की मांग है। मुझे विश्वास है आज जो आप मंथन करेंगे, उससे निकले अमृत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आप सबको इस वेबिनार के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन से जुड़े हुए विचार, जड़ों से जुड़े हुए विचार, इस बजट को सफल बनाने के लिए, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बहुत काम आएंगे। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।