Our focus is all-round development of India & North east cannot stay behind in this journey: PM Modi
We want to ensure that youth here gets the opportunities to fulfil their dreams: PM
We would set up Central Institute of Technology for better technical education, Kokrajhar to get deemed university status: PM
Assam gave a PM for 10 years, Congress ruled here for 15 years, still the state faces problems: PM
We want to Act East. Be it rail, roads or waterways, we want to connect our North east with entire India: PM
Our aim is housing for all by 2022 & 24/7 electricity and water: PM Modi during rally in Assam
I assure our Govt would leave no stone unturned in developing the North east region: PM Modi

मंच पर विराजमान बीटीसी के चीफ़ श्रीमान अग्रमा मोहिलरी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और जनप्रिय नेता श्रीमान सर्वानंद जी सोनमल, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी और डोनर के मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह जी, बीटीसी के डिप्टी चीफ़ श्रीमान खम्पा जी, श्रीमान हेमंत विश्व शर्मा जी, सांसद श्रीमान विश्वजीत और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों एवं बहनों।

मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा मांगता हूँ क्योंकि मुझे आने में विलंब हुआ। मैं सिक्किम में था मुझे निकलने में देर हुई और आपको काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मुझे इतनी देरी नहीं हुई है जिस कारण आपको विकास के लिए इंतज़ार करना पड़े, आपको अपने हक़ के लिए लड़ाई करनी पड़े। मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर यहाँ के लोगों की भलाई करने आया हूँ, आपके शक्ति, सामर्थ्य, सपनों, यहाँ के युवाओं को अवसर मिले और वे विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करें।

मैं आपके बीच में एक ऐसे समय आया हूँ जब यहाँ पर एकता और सद्भावना का माहौल है। यहाँ के राजनीतिक गुट भी अपने वाद-विवादों को पीछे रखते हुए यहाँ के लोगों की भलाई और उनके विकास के लिए आगे आए हैं। मैं इसके लिए यहाँ के नेतृत्व को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और जो लोग जुड़ रहे हैं, उनका मैं तहे दिल से स्वागत करता हूँ। अग्रमा जी, खम्पा जी मेरे घर पर आये थे, दिल खोलकर बातें हुई थी। उनसे मिलकर मुझे यहाँ की समस्याओं को समझने का अवसर मिला तभी उन्होंने कहा कि मोदी जी, जो देना है, वो दिल खोलकर दे दीजिए क्योंकि बातें भी तो दिल खोलकर हुई थीं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि दिल में आप समा गए हैं।

12-15 साल से जो वादे आपको किये गए, उन वादों का भी निपटारा नहीं हुआ। मैं यह तो मान सकता हूँ कि इसमें कुछ समय लग सकता है लेकिन आप हर बार वादे करें और फ़िर वादों को भुला दें, नए-नए वादें करें इस तरह के वादाखिलाफी से गुस्सा आता है, ये आपकी नाराजगी का प्रदर्शन है।

मैं आपको इतना ही कहने आया हूँ कि जो बात मैं कर रहा हूँ, उसे पूरा करने के लिए मैं जी-जान से जुड़ जाता हूँ, खप जाता हूँ। मैं हैरान हूँ कि एक पार्टी जिसने यहाँ 15 साल राज किया, ये असम प्रदेश जिसने 10 साल के लिए देश को प्रधानमंत्री दिया, 15 साल कांग्रेस ने लगातार राज किया; देखा जाए तो 60 साल तक वो ही सरकार चलाते रहे, मैं तो यह सोच रहा था कि असम में तो अब कोई समस्या हो ही नहीं सकती क्योंकि 10 साल यहाँ से प्रधानमंत्री रहे हैं और 15 साल से एक मुख्यमंत्री यहाँ सरकार चला रहे हैं। जिन्हें अपने काम का हिसाब देना चाहिए, वे सवाल पूछ रहे हैं तो फिर उन्होंने किया क्या? ये सब विफलताओं की दस्तक है। उन्हें यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि उनका अपना प्रधानमंत्री था, असम से मनमोहन सिंह जी को भेजा था लेकिन अभी समस्याओं की लंबी लिस्ट है आपकी।

भाईयों-बहनों, वे 15 साल में कुछ नहीं कर पाए और मुझसे अपेक्षा करते हैं कि मैं 15 दिन में सबकुछ कर दूँ। मुझे बताईये कि क्या ये मेरे साथ न्याय है? ये आपलोगों को गुमराह करने के लिए है लेकिन मेरा आप पर भरोसा है कि आप गुमराह नहीं होंगे। आपने उनके 15 साल देखे हैं और आपने हमारे 15 महीने भी देखे हैं। मेरे सामने कुछ बातें रखी गई थीं और आज मैं बड़े संतोष के साथ कहना चाहता हूँ कि असम के कार्बी मिकिर जनजाति को मैदानी इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में और असम के बोडो काछारी जनजाति को ट्राइब आंगलोंग और एनसी हिल ऑटोनोमस काउंसिल के इलाके में अनुसूचित जनजाति के रूप में घोषित किये जाने का मुद्दा काफ़ी समय से लंबित है। अब दोनों ही मसलों की रजिस्ट्रार सेंट्रल ऑफ़ इंडिया और अनुसूचित जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग द्वारा सिफ़ारिश कर दी गई है। आने वाले कुछ समय में ये मामला कैबिनेट में अप्रूव हो जाएगा और उसके बाद संसद में इसे पारित किया जाएगा। वर्षों से आपकी इस समस्या का समाधान निकाला जा रहा है।

आपके नेता ने जब मुझे इस समस्या के बारे में बताया तो मैंने कहा कि मैं पहले इसका समाधान निकालूँगा, फ़िर आऊंगा। इस क्षेत्र के छात्रों को उच्च गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए, औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कोकराझार को एक वर्ष की अवधि में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जाएगा। इस कार्य से यूनिवर्सिटी को और अधिक अकादमिक तथा प्रशासनिक अधिकार प्राप्त होंगे।

मेरे सामने एक मसला आया था, एयरपोर्ट का बहुत पहले एक एयरपोर्ट सेना के साथ मिलकर काम कर रहा था, फ़िर वो बंद हो गया। अब राज्य सरकार ज़मीन नहीं दे रही है मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जैसे ही ज़मीन का मसला पूरा हो जाएगा, रूपसी एयरपोर्ट को भारतीय वायुसेना और आम जनता के लिए संयुक्त रूप से विकसित किया जाएगा।

कंचनजंघा एक्सप्रेस ट्रेन के रूट का बराक वेली में सिलचर तक विस्तार किया जाएगा और मैं आने वाले दिनों में बहुत जल्द उस ट्रेन को आरंभ करने जा रहा हूँ। मुझे एक और कठिनाई बताई गई कि हमारे लिए बजट में इतना आवंटन होता है लेकिन पता नहीं कहाँ जाता है। जनता की पाई-पाई जनता के ही पास जानी चाहिए; जो अब तक लूटा गया है और अब लूटने का अवसर नहीं मिल रहा है इसलिए ये लोग हमसे परेशान हैं। दिल्ली आजकल हिसाब मांगता है।

दिल्ली में अटल जी के समय में नार्थ-ईस्ट के विकास के लिए एक विशेष मंत्रालय - डोनर बना था। अटल जी की सरकार के जाने के बाद इनकी सरकार में क्या-क्या होता है, ये आप सभी को मालूम ही है। हमने डोनर मंत्रालय को एक नया काम दिया है जिससे यहाँ के कुछ नेता लोग काफ़ी परेशान हैं। पहले यहाँ के लोगों को दिल्ली जाना पड़ता था, मिनिस्ट्री खोजनी पड़ती थी, सामान्य लोग वहां जा नहीं पाते थे, शिकायत पहुंचाई नहीं जा सकती थी, क्या चल रहा है, सच-झूठ का पता ही नहीं चलता था। रुपये तो आते थे लेकिन ज़मीन पर कोई काम दिखाई नहीं देता था।

राजीव गाँधी सही कहते थे कि दिल्ली से एक रुपया निकलता है और गाँव में जाते-जाते 15 पैसे हो जाता है। इसलिए हमने तय किया कि डोनर मिनिस्ट्री, उसके अधिकारी महीने में एक बार नार्थ-ईस्ट के राज्यों में जाएंगे, पूरा सचिवालय दिल्ली से गुवाहाटी जाएगा। दिनभर वहां बैठेंगे, सरकार ने जो पैसे दिये, उसका हिसाब मांगेंगे, रुपये कहाँ जा रहे हैं, उसकी पूछताछ होगी और यह काम डॉ. जितेन्द्र सिंह की टीम बखूबी कर रही है। इसके कारण यहाँ लोगों को परेशानी हो रही है कि मोदी हिसाब मांग रहे हैं और आजकल फैशन हो गया है, अपने काम का हिसाब नहीं देना। जब हिसाब मांगते हैं तो कोई और ही आरोप लगाना शुरू कर देते हैं इसलिए नार्थ-ईस्ट की सभी सरकारों को पैसे का हिसाब देना पड़ेगा क्योंकि ये जनता का पैसा है और ये जनता के काम आना चाहिए और इसलिए मैं इन लोगों को बुरा लगता हूँ।

मैं अपना समय इस लिए बर्बाद नहीं करता कि मैं अच्छा लगूं यां बुरा लगूं; मैं अपना समय खपाता हूँ ताकि मेरा देश अच्छा बने। हमारे देश का भविष्य बदलने के लिए मेरा तीन सूत्रीय कार्यक्रम है – विकास, विकास और सिर्फ़ विकास। सारी समस्याओं का समाधान विकास में ही है। पिछले दिनों आपने देखा होगा कि जब दिल्ली में पुलिस की भर्ती हुई तो मैंने आग्रह रखा कि नार्थ-ईस्ट राज्यों के नौजवानों को दिल्ली में पुलिस में भर्ती करना चाहिए और आज बहुत बड़ी संख्या में यहाँ के नौजवानों को दिल्ली में रक्षा के लिए ले जाया गया। एक बार जो बात कही, उसे लागू करने के लिए जी-जान से लगे रहते हैं, पूरी कोशिश करते हैं।

हमें अगर विकास करना है तो इस इलाके की सबसे पहली ज़रूरत है – इंफ्रास्ट्रक्चर, चाहे सड़क हो, रेल हो, या जलमार्ग हो और इसलिए हमारी सरकार ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी बनाई है। इस पॉलिसी के माध्यम से नार्थ-ईस्ट राज्यों को भारत की विकासधारा में जोड़ना है, रास्तों का नेटवर्क बनाना है। पिछले बजट में आपने देखा होगा कि जैसा आवंटन हुआ था, वैसा पहले कभी नहीं किया गया होगा, उतने रुपये हम नार्थ-ईस्ट में सड़क और रेल में लगा रहे हैं।

देश की आज़ादी के इतने साल बीत गए और मैं सोच रहा था कि अब तक तो देश के सभी गांवों में बिजली पहुँच गई होगी लेकिन मुझे हिसाब मिला कि अभी भी 18,000 गाँव ऐसे हैं जहाँ बिजली का खंभा भी नहीं है। हमने बीड़ा उठाया, 15 अगस्त को लाल किले से हमने घोषणा की कि मेरी सरकार जी-जान से काम करेगी और 1,000 दिन में 18,000 गाँव में बिजली पहुंचाऊंगा। आप अपने मोबाइल पर इसका पूरा विवरण देख सकते हैं। इसके लिए एक अलग वेबसाइट बनाई है कि कहाँ-कहाँ बिजली पहुंची और दिन-प्रतिदिन का हिसाब रखा जाता है और हर दिन किसी-न-किसी गाँव में बिजली पहुँच रही है। गाँव में बिजली पहुँचने के बाद लोगों को अहसास होता होगा कि आज़ादी किसे कहते हैं। मैं तो मीडिया के मित्रों को भी कहता हूँ कि बिजली पहुँचने के बाद गाँव में जो लोगों का उत्साह है, उसे लोगों को दिखाएं। इससे देश के साथ-साथ काम करने वालों का भी हौसला बुलंद होगा।

बिजली पहुँचने से शिक्षा और जीवन-व्यवस्था में सुधार होगा और हमारा सपना है 2022 में भारत की आज़ादी के 75 साल होने पर सब जगह लोगों को 24 घंटे बिजली मिले जो आज नहीं मिल रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि 2022 तक हम यह काम करके रहेंगे।

हमारा एक और सपना यह है कि देश के गरीब परिवारों को अपना घर मिले। हमने ठान लिया है कि 2022 में देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के पास भी ख़ुद का रहने का घर हो और घर भी ऐसा जिसमें बिजली हो, पानी आता हो, शौचालय भी हो और बच्चों के लिए नजदीक में स्कूल भी हो। जब इतने मकान बनेंगे, रास्ते बनेंगे, रेल का काम होगा तो बहुत सारे लोगों को रोजगार भी मिलेगा, काम के अवसर बढ़ेंगे।

हमने तय किया था कि हम गरीब से गरीब व्यक्ति का बैंक खाता खोलेंगे; प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की। लोगों को लगता था कि जो काम 70 साल में नहीं हुआ, वो मोदी जी कैसे करेंगे। आज बताते हुए मुझे ख़ुशी हो रही है कि जन-धन योजना के अंतर्गत हमने 20 करोड़ लोगों के खाते खोल दिए हैं। हमने उन्हें अर्थव्यवस्था के धारा में जोड़ा, बैंक तक उनका रास्ता खोला। मैंने कहा था कि पैसे नहीं होंगे तो भी खाते खुलेंगे लेकिन मुझे ख़ुशी है कि गरीबों ने भी सोच लिया कि मुफ़्त में नहीं करना है, बैंक में कुछ तो जमा करेंगे और लोगों ने करीब-करीब 30 हज़ार करोड़ रुपये जमा किये। ये ताकत है देश के आम जन की और इस ताकत को लेकर हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरा एक ही इरादा है कि हिन्दुस्तान में और जगहों पर जितना विकास हुआ है, यहाँ भी उतना ही विकास होना चाहिए। ये काम मुझे करना है और इसलिए मैं आपके पास आशीर्वाद लेने आया हूँ। आज लाखों की तादाद में मैं यह जनसैलाब देख रहा हूँ। मैंने असम में बहुत दौरे किये हैं। लोकसभा के चुनाव में भी आपने भरपूर आशीर्वाद दिया है लेकिन ऐसा नज़ारा मैंने पहले कभी नहीं देखा, ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा। आपके इसी आशीर्वाद से मुझे ताकत मिलती है, आपके लिए दिन-रात दौड़ने की मुझे प्रेरणा मिलती है। मुझे ख़ुशी है कि मुझे नए साथियों के साथ काम करने का मौका मिला है और मैं विश्वास दिलाता हूँ कि यहाँ की जितनी रुकी समस्याएं हैं, उनके समाधान के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। मैं आप सभी का आभारी हूँ, बहुत-बहुत धन्यवाद!       

            

Explore More
శ్రీరామ జన్మభూమి ఆలయ ధ్వజారోహణ ఉత్సవం సందర్భంగా ప్రధానమంత్రి ప్రసంగం

ప్రముఖ ప్రసంగాలు

శ్రీరామ జన్మభూమి ఆలయ ధ్వజారోహణ ఉత్సవం సందర్భంగా ప్రధానమంత్రి ప్రసంగం
Samsung to manufacture AI data center HVAC products in India, expanding to Asia-Pacific

Media Coverage

Samsung to manufacture AI data center HVAC products in India, expanding to Asia-Pacific
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
పూర్వ రాష్ట్రపతి శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ కోవింద్ ఆత్మకథ ఆవిష్కరణ సందర్భంగా ప్రధానమంత్రి ప్రసంగం
August 12, 2026
శ్రీ రాంనాథ్ కోవింద్ ఆత్మకథను ఆవిష్కరించే అవకాశం ఈ రోజు మనకు లభించింది.. ఈ కార్యక్రమంలో భాగం కావడం సంతోషాన్నిస్తోంది
ప్రజా సేవకు, దేశ పురోగతికి ఆయన జీవితం అంకితం.. ఆ స్ఫూర్తిని ప్రతిబింబించేలా ఆయన ప్రస్థానం
ఆయనతో నాకున్న సుదీర్ఘ పరిచయం, నా పట్ల ఆయనకున్న ప్రత్యేక ఆప్యాయత, ఆదరణలే నాకు గొప్ప సంపద
నిరుపేదలు, అట్టడుగు వర్గాల వారు అత్యున్నత స్థాయికి చేరుకునే అవకాశం లభించే నవభారత్‌ను నిర్మించాలని మహాత్మాగాంధీ, బాబాసాహెబ్ అంబేద్కర్, జ్యోతిబాపూలే, సావిత్రీబాయి పూలే స్వప్నించారు
సొంత జీవితాలను తీర్చిదిద్దుకోవడమే కాదు.. నిరంతర కృషి, దీక్షాదక్షతతో శతాబ్దాల నాటి ఆ స్వప్నాన్నీ, సంకల్పాన్నీ సాకారం చేయడంలో శ్రీ రాంనాథ్ కోవింద్ వంటి వ్యక్తులది కీలక భూమిక
రాష్ట్రపతిగా పదవీ బాధ్యతలు ముగిసిన తర్వాత కూడా ‘ఒక దేశం - ఒకే ఎన్నిక’పై కృషి చేస్తున్న శ్రీ రాంనాథ్ కోవింద్.. ప్రజాస్వామ్యంలో సరికొత్త అధ్యాయానికి నాంది పలకడమే కార్యక్రమ లక్ష్యం
ప్రధాని శ్రీ నరేంద్ర మోదీ వ్యాఖ్యలు

మన పూర్వ రాష్ట్రపతి శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ కోవింద్‌, లోక్‌సభ స్పీకర్‌ శ్రీ ఓం బిర్లా, శ్రీమతి సవితా కోవింద్‌ గారు, ఇక్కడ ఆసీనులైన ప్రముఖులందరి పేర్లనూ ప్రస్తావించలేనేమోగానీ, మీకందరికీ నమస్కారం. ఈ కార్యక్రమం నిస్సందేహంగా నాకెంతో ఆనందోత్సాహాలనిచ్చే కుటుంబ వేడుకలాంటిది!

సోదరీసోదరులారా!

శ్రీ రామ్‌‌నాథ్‌ కోవింద్ గారి ఆత్మకథను మనం ఇవాళ ఆవిష్కరించుకున్నాం. ఈ కార్యక్రమంలో పాలుపంచుకునే భాగ్యం దక్కినందుకు నేనెంతో సంతోషిస్తున్నాను. శ్రీ కోవింద్‌తో నాది సుదీర్ఘ కాల అనుబంధం. ఆయనతో సాన్నిహిత్యం, రాష్ట్రపతిగా ఆయన మార్గనిర్దేశం సహా నాపై ఆయన చూపిన అవ్యాజానురాగం, ఆత్మీయత జీవితంలో అనిర్వచనీయ మధురానుభూతిగా, గొప్ప సంపదగా నిలిచిపోయాయంటే అతిశయోక్తి కాబోదు. ఆయన జీవిత విశేషాలు, విషయాలు, సామర్థ్యం ఆధారంగా రూపొందిన ఈ ఆత్మకథ భారత ప్రజాస్వామ్యానికి, సమాజానికి గొప్ప వారసత్వ సంపద కాగలదని నేను ఘంటాపథంగా చెప్పగలను. శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ జీవన ప్రస్థానం, సమాజం-దేశంపై అంకిత భావంతో ఆయన చేసిన కృషి గురించి చెప్పాలంటే ఇప్పుడు సమయం చాలదు. అయితే, ఈ పుస్తకావిష్కరణ వేళ ఓ పరిచయ ప్రస్తావన అనివార్యం. ఈ పుస్తకం ద్వారా పూర్తి ప్రయోజనం లభించాలంటే మీరు అక్షరం విడవకుండా దీన్ని ఆసాంతం చదవాలి!

మిత్రులారా!

శ్రీ కోవింద్ జీవనయానంలోని విశేషాలను ఈ ఆత్మకథలో తెలుసుకోవడం, ఆయన ఇతర రచనలతోపాటు అనుభవాలను ఆస్వాదించడం ద్వారా నవతరం ఎంతో నేర్చుకోగలదు. విస్తృత అనుభవ సారంతో ఈ ఆత్మకథను మనకు అందించిన శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ కోవింద్‌కు నా హృదయపూర్వక అభినందనలు.

మిత్రులారా!

ఈ పుస్తకానికి “ట్రయంఫ్ ఆఫ్ ది ఇండియన్ రిపబ్లిక్: మై లైఫ్.. మై స్ట్రగుల్స్” (భారత గణతంత్ర విజయం: నా జీవితం-నా సంఘర్షణలు) పేరిట శ్రీ కోవింద్‌ ఎంతో సముచిత శీర్షికనిచ్చారు. తన జీవితం, తానెదుర్కొన్న సంఘర్షణలు ఆయన వ్యక్తిగతమే అయినా, ఆ పోరాటాలతో లభించిన విజయాలు మాత్రం భారత గణతంత్రానికి, ప్రజాస్వామ్యానికి సొంతం.

మిత్రులారా!

విజయం సిద్ధిస్తే... అది తన ప్రతిభేనని, అపజయం ఎదురైతే.. సమాజమే అందుకు కారణమని నిందించడం మానవుల సహజ స్వభావం. అయితే, హృదయ వైశాల్యం, భారతీయ విలువలపై గౌరవంగల వ్యక్తి సమాజం తప్పులు వెదుకుతూ ఎన్నడూ తన సమయం వృథా చేసుకోడు. తనకేది సానుకూలమో దానిపైనే నిశితంగా దృష్టి సారిస్తాడు. అంతేకాకుండా విజయం సాధిస్తే అందులో సగభాగం సమాజానికి పంచుతాడు. శ్రీ కోవింద్ ఆత్మకథ-దాని శీర్షిక ఇందుకు తిరుగులేని నిదర్శనాలు. ఇప్పుడు ఆయన జీవితాన్ని ఓసారి అవలోకిద్దాం... కాన్పూర్ దేహత్‌లోని ఒక సామాన్య కుటుంబంలో జన్మించిన ఆయన , ఓ మండు వేసవి కాలంలో తమ నివాసం అగ్నిప్రమాదం బారినపడిన వైనాన్ని ఈ పుస్తకంలో వివరించారు. ఆనాడు ఆయన తల్లి తన ప్రాణాలను లెక్కచేయకుండా బిడ్డలను, వారి కోసం ఇంట్లో ఉంచిన వస్తువులను బయటకు చేరవేసేందుకు ప్రయత్నించారు. ఒక సాధారణ గృహిణికి ఇంట్లోని ప్రతి చిన్న వస్తువూ తన పిల్లల పోషణకు ఉపయోగపడే ఉపకరణమే. ఆ తపనలో ఆమె తన శరీరం మంటలపాలు కావడం కూడా గమనించలేక ప్రాణాలు కోల్పోయారు. ఒక్కసారి ఊహించుకోండి- ఒక బాలుడు పసితనంలోనే ఇలా తల్లిని కోల్పోవడం ఎంతటి వేదనను కలిగించి ఉంటుందో! నా అదృష్టం కొద్దీ మా అమ్మ వంద ఏళ్లకు పైగా జీవించి నాకు ఆశీస్సులిస్తూ వచ్చినా, ఆమె లేని వెలితి నాకెన్నటికీ తీరేది కాదు.

మిత్రులారా!

అలాంటి బాధాకర సంఘటనతో ఎవరైనా కుంగిపోతారు... కానీ, శ్రీ కోవింద్ తననుతానే సముదాయించుకున్నారు. ఆయన భవిష్యత్‌ జీవితం పొరుగింటి మహిళ సాయంతో కొనసాగింది. తద్వారా సామాజిక ఐక్యత, సామరస్యం ఎంత శక్తిమంతమైనవో చిన్ననాడే ఆయన అవగతం చేసుకున్నారు. శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ తండ్రి కూడా ఎంతో కీలక పాత్ర పోషించారు. భార్య లేని లోటును భరిస్తూనే కుటుంబాన్ని నడిపించిన తీరు, పిల్లలకు నేర్పిన విలువలు చాలా గొప్పవి- కనుకనే శ్రీ కోవింద్ తన తండ్రే తన హీరో అని చెబుతారు.

మిత్రులారా!

బాల్యంలో ఎన్నో సవాళ్లు ఎదురైనా, విద్యాభ్యాసమే తనను దృఢంగా నిలుపుతుందని శ్రీ కోవింద్ గ్రహించారు. ఆ మేరకు కఠోరంగా శ్రమించారు.. వనరుల కొరత ఆయన పురోగమనాన్ని అడ్డుకోలేకపోయింది. అప్పట్లోనే ఎవరూ ఊహించనంతటి ఉన్నత స్థాయికి ఎదిగి... భారత్‌ వంటి సువిశాల దేశానికి రాష్ట్రపతి అయ్యారు.

మిత్రులారా!

దేశంలో అత్యున్నత పదవిని అధిష్టించినా, శ్రీ కోవింద్‌ వినమ్ర స్వభావం, నిరాడంబర జీవన శైలి చెక్కుచెదరలేదు. నాకింకా గుర్తుంది.. ప్రధానమంత్రిగా ఆయనను రాష్ట్రపతి భవన్‌లో కలవడానికి వెళ్లినపుడు అధికారిక విధివిధానాలకు అతీతంగా ఆదరించేవారు. నేను తిరిగి వెళ్లే సమయంలో కారుదాకా వచ్చి మరీ, వీడ్కోలు పలికేవారు. అలా చేయవద్దని ఎన్నోసార్లు నేను కోరినా, తన పదవీకాలం పూర్తయ్యేదాకా ఈ అలవాటును ఆయన మానుకోలేదు. రాష్ట్రపతి హోదాలో తన స్వగ్రామం ‘పరోంఖ్’ వెళ్లినపుడు తన చిన్ననాటి ఉపాధ్యాయుల పాదాలంటి మరీ, గురువులపై తనకుగల గౌరవాన్ని చాటుకున్నారు. గ్రామంలో భూమాతకు ప్రణమిల్లి, అక్కడి ప్రజలందరికీ కృతజ్ఞతలు తెలిపారు. ఆ భావోద్వేగ దృశ్యాన్ని యావద్దేశం చూసింది. ప్రతి భారతీయుడూ గర్వపడే భారతీయ విలువలను ఆయన నడవడికే ప్రపంచానికి చాటిచెప్పింది.

మిత్రులారా!

శతాబ్దాల తరబడి సాగిన పరాయి పాలనలో మన దేశం ఆర్థికంగా, సామాజికంగా ఎంతో నష్టపోయింది. స్వాతంత్ర్యం కోసం మన పూర్వికులు నిరంతరం పోరాడుతూ వచ్చారు. మహాత్మా గాంధీ, బాబాసాహెబ్ అంబేద్కర్, జ్యోతిబా ఫూలే, సావిత్రిబాయి ఫూలే వంటి ఎందరో మహనీయులు నవ భారతం కోసం ఎన్నో కలలు కన్నారు. నిరుపేదలు, అణగారిన వర్గాల వారందరూ అత్యున్నత స్థాయికి ఎదగాలని ఆశించారు. వారి బాటలోనే శ్రీ కోవింద్ వంటి ఎందరో వ్యక్తులు కఠోర శ్రమ, దీక్షతో తమ జీవితాలను మార్చుకోవడమే కాకుండా శతాబ్దాల నాటి మహనీయుల స్వప్న సాకారంలో కీలక పాత్ర పోషించారు. ఇప్పుడు అదే బాటలో మేం కూడా కృషి చేస్తున్నాం. మనకిప్పుడు శ్రీ కోవింద్ తరహా భావితరం- సమస్యలకు వెరవని, కష్టాలకు తలవంచని, కఠోర శ్రమతో ప్రతి లక్ష్యాన్ని సాధించగల సాహస యువత ఎంతో అవసరం. బలమైన భారత్‌ రూపకల్పన సంకల్పాన్ని ఈ మార్పు సుసాధ్యం చేస్తుంది. తద్వారానే స్వయంసమృద్ధ, వికసిత భారత్‌ ప్రస్థానానికి మార్గం సుగమమవుతుంది.

మిత్రులారా!

అటువంటి యువశక్తికి రూపుదిద్దడంలో శ్రీ కోవింద్ ఆత్మకథ ఓ కీలక స్ఫూర్తిదాయక ఉపకరణంగా ఉపయోగపడుతుంది.

మిత్రులారా!

పూర్వ ప్రధానమంత్రి శ్రీ మొరార్జీ దేశాయ్‌తో తన అనుభవాలను కూడా శ్రీ కోవింద్ తన ఆత్మకథలో విశదీకరించారు. మొరార్జీతో కలిసి పనిచేసినప్పటి అనుభవాలు, ఆయనలోని దేశ సేవానిరతి, తాను నేర్చుకున్న విషయాలు- వీటన్నింటి ద్వారా శ్రీ కోవింద్ రాజకీయాలను, సామాజిక సేవను తన జీవన మార్గంగా మలచుకున్నారు. ఈ క్రమంలో తన విధులకు అంకితభావంతో కట్టుబడి, ప్రజాసేవనే లక్ష్యంగా ఎంచుకున్నారు. పార్లమెంటులో ఆయన పదవీకాలం ఇందుకొక ఉదాహరణ. అలాగే, గవర్నర్‌గానూ ఆయన అందరికీ ఆదర్శప్రాయులుగా నిలిచారు. రాష్ట్రపతి పదవిలోనూ అదే అంకితభావాన్ని మనమంతా ప్రత్యక్షంగా గమనించాం. అలాంటి అత్యున్నత పదవీ కాలం పూర్తయ్యాక కూడా వారు విశ్రాంతి తీసుకోవాలని భావించలేదు. ‘ఒకే దేశం-ఒకే ఎన్నిక’ వంటి కీలకాంశాలపై ఇప్పటికీ వారు అధ్యయనం కొనసాగిస్తూ దేశాన్ని చైతన్యవంతం చేస్తున్నారు. ఈ అంశానికి పరిష్కారం లభిస్తే- అది భారతీయ ప్రజాస్వామ్యంలో అదొక కొత్త అధ్యాయానికి నాంది పలుకుతుంది. శ్రీ కోవింద్ అంకితభావం, సేవానిరతి నుంచి దేశ ప్రజలు నేర్చుకోవాల్సింది ఎంతో ఉందని నేను ప్రగాఢంగా విశ్వసిస్తున్నాను.

మిత్రులారా!

సామాజిక జీవనంలో ఇంత చురుగ్గా ఉంటూనే, ఆత్మకథ రాసేందుకు సమయం కేటాయించడం అంత సులభమేమీ కాదు. అయితే, మనందరి కోసం శ్రీ కోవింద్ అందుకు కృషి చేశారు. తన జీవితంలో పేద, వెనుకబడిన వర్గాల ప్రజల జీవన స్థితిగతులను ప్రతిబింబించే విషయాలు ఎన్నో ఉండటమే ఇందుకు కారణం. ఒక సామాన్య కుటుంబం ఎన్నో కష్టనష్టాలు ఎదురైనప్పటికీ ఎన్నడూ రాజీ పడకుండా స్వచ్ఛమైన జీవనం, నిండు నిజాయితీని కొనసాగించడం ఈ పుస్తకం ద్వారా మనకు తెలుస్తుంది. ఇలాంటి ఆదర్శాలే మన భవిష్యత్‌ జీవన పునాదిగా మారుతాయి. కష్టకాలంలో మనం పాటించిన విలువలు జీవితాంతం మనకు వెలుగుబాట చూపుతాయి. ఈ మానసిక స్వచ్ఛత జాతి సేవకు ఎంతో బలాన్నిస్తుంది. కాబట్టే, వివిధ పదవీ బాధ్యతలలో తలమునకలైనప్పటికీ సమాజానికి శ్రీ కోవింద్ నిరంతరం స్ఫూర్తినిచ్చారు.

మిత్రులారా!

స్వీయ జీవిత జ్ఞాపకాలను మాత్రమే కాకుండా, మన ప్రజాస్వామ్య సంబంధిత ముఖ్యమైన స్మృతులను కూడా శ్రీ కోవింద్ ఆత్మకథ మనకు అందిస్తుందనడంలో సందేహం లేదు. ఈ ఆత్మకథ రచనకుగాను మరోసారి ఆయనకు నా శుభాకాంక్షలు తెలుపుతున్నాను. ముఖ్యంగా యువతరాన్ని నేను కోరేదొకటే- ఇది రీల్స్ యుగం.. సామాజిక మాధ్యమాల్లోని ప్రభావశీలురు మిమ్మల్ని బాగా ఆకర్షిస్తారు. అయితే, దగ్గరి దారుల శకంలో ఒక వాస్తవాన్ని మీరు సదా గుర్తుంచుకోవాలి. రైల్వే స్టేషన్లలో వంతెన మీదుగా పట్టాలు దాటాలని స్పష్టంగా హెచ్చరిక కనిపిస్తుంది. కానీ, కొందరు అలా కాకుండా పట్టాల మీదకు దూకి దాటే ప్రయత్నంలో ప్రమాదాల బారిన పడుతుంటారు. ఈ సందర్భంగా యువతకు నా మాటగా చెబుతున్నా- మీరు దగ్గరి దారులు వెదకాలనుకున్నా- మొదట మీరు ఆరాధించే వారి ఆత్మకథలను చదవండి. అవి చరిత్రకు చాలా దగ్గరగా ఉంటాయి. భిన్న చారిత్రక సంఘటనలను విభిన్నంగా అర్థం చేసుకునే అవకాశాన్నిస్తాయి. అందుకే శ్రీ కోవింద్ కృషి భవిష్యత్తరాలకు... ముఖ్యంగా యువతరానికి ప్రయోజనం చేకూర్చాలని ఆకాంక్షిస్తున్నాను.

అనేకానేక అభినందనలు.. ధన్యవాదాలు!