NDA's 6 sutras for development of Bihar-for people: Education, Employment, Medical facilities; for state: Power, Water, Roads: PM
If hitting out at Modi develops Bihar, then I'm ready to take all allegations: PM Modi
For NDA biggest of the grounds seem minute while for 'Mahaswarthbandhan' even a small pandal becomes huge: PM Modi
People of Bihar do not spare the one's who betrays the state. Nitish Kumar would be wiped off in the elections: PM
Lies spread by Nitish & Lalu are unveiling the truth of reservation: PM Modi
People of Bihar would press the button of development. They would vote for the NDA: PM
The term 'Darbhanga Module' was used after blasts in Mumbai & Pune, innocent policewoman had to face consequences: PM

मंच पर विराजमान यहाँ के सभी वरिष्ठ नेतागण। चुनाव में कुशेश्वर स्थान से लोजपा के उम्मीदवार धनंजय कुमार, लोजपा के उम्मीदवार विनोद साहनी, बेनीपुर से भाजपा के उम्मीदवार गोपाल जी ठाकुर, अलीनगर से भाजपा के उम्मीदवार लाल जी यादव, दरभंगा ग्रामीण से हम पार्टी के उम्मीदवार नौशाद आलम जी, दरभंगा नगर से भाजपा के उम्मीदवार संजय जी, हयागढ़ से लोजपा के उम्मीदवार आर। के। चौधरी जी, बहादूरपुर से भाजपा के उम्मीदवार हरीश साहनी, और केवटी से भाजपा के उम्मीदवार अशोक यादव, झाले से भाजपा के उम्मीदवार द्विवेश कुमार मिश्रा, विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों एवं बहनों।

दरभंगा के ई पावन मिथिला भूमि के नमन करै छी। बाबा कुशेश्वर के ई पावन धरती पर आई के गौरवान्वित महसूस काय रहल छी। दरभंगा की जो पहचान है – पग-पग पोखर पान मखान, सरस बोल मुस्की मुस्कान; विद्या, वैभव, शांति प्रतीक, ललित नगर मिथिला ठीक। आप सबके दिल से अभिनंदन करै छी।

आज मैं सबसे पहले अपने प्रिय मित्र कीर्ति आज़ाद के खिलाफ़ शिकायत करना चाहता हूँ। मेरी शिकायत ये है कि जब कीर्ति स्वयं चुनाव लड़ रहे थे, मैं लोकसभा का चुनाव लड़ रहा था, तब तो आधी भीड़ भी नहीं थी और आज क्या कमाल कर दिया आप लोगों ने। जहाँ भी मेरी नज़र पहुँचती है, लोग ही लोग नज़र आते हैं। दरभंगा का मैदान भी छोटा पड़ गया है, ये चुनाव ऐसा है कि एनडीए वालों के लिए मैदान छोटा पड़ता है और महास्वार्थबंधन वालों के लिए पंडाल भी बड़ा हो जाता है।

भाईयों-बहनों, इस चुनाव अभियान का ये मेरा आखिरी कार्यक्रम है। पिछली बार मैं जब दरभंगा आया था, समय-सीमा के कारण 12-15 मिनट ही बोल पाया था, मेरे मन में भी कसक थी कि जिस मिथिला की भूमि को अटल जी इतना प्यार करते थे, वहां इतनी कम देर लेकिन आज मैं आपसे जी भर कर मिलने आया हूँ। मुझे बिहार के हर कोने में जाने और एक से बढ़कर एक रैलियों को संबोधित करने का अवसर मिला। इसे क्या कहें, चुनाव सभा, जन सभा, रैली, रैला कहें, मुझे तो लगता है कि ये मेला है, परिवर्तन का मेला है।

दिल्ली में बैठकर पॉलिटिकल पंडित हिसाब लगाते हैं कि 2% इधर जाएगा तो ये होगा, 2% उधर जाएगा तो ये होगा। पंडित जी, अपने पुराने हिसाब-किताब बंद कर दो, बिहार नया इतिहास लिखने जा रहा है। ये पुराने समीकरण और नई गिनतियाँ अब नहीं चलेंगी। बिहार की जनता ने बिहार की तो सेवा की है, इस चुनाव के माध्यम से देश की बहुत बड़ी सेवा की है। जातिवाद और संप्रदायवाद का ज़हर हमारे लोकतंत्र में खरोच पैदा कर रहा है लेकिन इस चुनाव में बिहार का नौजवान नेतृत्व कर विकास के मुद्दे पर लड़ रहा है। इस चुनाव के बाद हिन्दुस्तान की सभी पॉलिटिकल पार्टियों को विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और इसका क्रेडिट बिहार के लोगों को जाता है। इस चुनाव में बिहार का माहौल देश के भविष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

मैं आज सार्वजनिक रूप से प्रधान देवक के रूप में बिहार के नागरिकों का सर झुका कर अभिनंदन करता हूँ। मैं जहाँ-जहाँ गया, एनडीए के लोग जहाँ-जहाँ गए, बिहार की जनता ने पलकें बिछाकर हम सभी का स्वागत किया, इसलिए मैं आप सभी को सर झुका कर धन्यवाद करता हूँ। दूसरी बात कि पहले के मतदान के सारे रिकॉर्ड बिहार के चार चरणों ने तोड़ दिए, भारी मतदान किया, माओवादियों के बम-बंदूक की धमकी के बावजूद अभूतपूर्व मतदान किया। इससे लोकतंत्र में जो विश्वास बढ़ा है, इसके लिए मैं बिहार की जनता को नमन करता हूँ। तीसरी बात, पहले बिहार में जब भी चुनाव होता था तो ये ख़बर आती थी कि इतने पोलिंग बूथ लूटे गए, इतनी गोलीबारी हुई, इतनी हत्याएं हुईं लेकिन इस बार के शांतिपूर्ण चुनाव के लिए बिहार के मतदाताओं का ह्रदय से अभिनंदन करता हूँ।

भाईयों-बहनों, इस चुनाव में हम विकास का मुद्दा लेकर पहले दिन से चले, लोकसभा के चुनाव में भी हमारा मुद्दा विकास था लेकिन हम आशा करते थे कि जिन्होंने यहाँ 60 साल राज किया, मैडम सोनिया जी ने 35 साल राज किया, 15 साल तक लालू जी और 10 साल तक नीतीश जी ने राज किया; ये हमारे साथ विकास के मुद्दों पर चर्चा करते, बिहार की बर्बादी के कारण और बिहार से नौजवानों के पलायन का जवाब देते लेकिन अभी भी वे 1990 के कालखंड में जी रहे हैं। उन्हें पता नहीं है कि ये 21वीं सदी चल रही है और 1990 में पैदा हुआ बच्चा आज बिहार का भाग्य बदलने को लालायित है।

दो महीने से चुनाव का अभियान चल रहा है लेकिन लालू जी हो या नीतीश जी या मैडम सोनिया जी, ये लोग बिहार के विकास पर कुछ भी नहीं बोलते। बिहार के भविष्य की किसी योजना के बारे में बात नहीं करते। 25 साल इन्होंने सरकार चलाई, ये कोई कम समय नहीं होता। एक बालक में भी 25 साल के बाद अपने माँ-बाप का पेट भरने की ताक़त आ जाती है। आप मुझे बताईये, 25 साल की इनकी सरकार में किसी का भी कोई भला हुआ? मेरी सरकार को अभी 25 महीने नहीं हुए हैं और ये लोग मेरा हिसाब मांग रहे हैं। ख़ुद का 25 साल का हिसाब देने का तैयार नहीं हैं; और हमसे हिसाब मांग रहे हैं।

चुनाव लोकतंत्र का पर्व होता है और यह पर्व लोकतंत्र को ताक़तवर बनाता है। सभी राजनीतिक दलों को अपनी बात और अपनी नीतियां बतानी होती हैं और जो सरकार में हैं उन्हें अपना हिसाब देना होता है। 2019 में जब मैं लोकसभा चुनाव के लिए आपसे वोट मांगने आऊंगा, तो मेरा फ़र्ज बनता है कि मैं आपको अपने 5 सालों का हिसाब दूँ और आपका हक़ बनता है कि आप मुझसे हिसाब मांगें। लेकिन इन लोगों को देखो, इन्हें मोदी पर कीचड़ उछालने के सिवा और कोई काम ही नहीं है। रोज नए-नए आरोप और गालियां गढ़ी जाती है, क्या इससे बिहार का भला होगा क्या? लालू जी, नीतीश जी, अगर मोदी पर आरोप लगाने से या कीचड़ उछालने से बिहार का भला होता है तो मैं मौजूद हूँ, आपको जो कहना है कहिये। बिहार का भला हो तो मैं ये झेलने के लिए तैयार हूँ।

मेरा जीवन बिहार के काम आए, इससे बड़ा भाग्य मेरा क्या हो सकता है। लालू जी, नीतीश जी, कान खोलकर सुन लीजिये, अहंकार ने आपके आँखों पर ऐसी पट्टी बांध दी है कि आप देख नहीं पाओगे, आप जितना कीचड़ उछालोगे, कमाल उतना ही ज्यादा खिलने वाला है। पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक लगातार मतदान करने वालों की संख्या बढ़ी है और एक बात जो बाहर नहीं आई है, मुझे भी आश्चर्य लगा कि हर चरण के बाद 12-15 पोलिंग बूथ ऐसे थे जहाँ मतदान के बाद लालू जी और नीतीश जी के कार्यकर्ताओं के बीच झगड़े हुए, कहीं हाथापाई हुई, धमकियाँ हुई; मतदान पूरा होने के बाद अगर ये तुरंत लड़ना शुरू कर देते हैं तो आगे क्या होगा, आप समझ सकते हैं।

पिछले दो महीनों से चुनाव अभियान चल रहा है लेकिन क्या आपने लालू जी, नीतीश जी और राहुल जी को एक साथ मंच पर देखा, पत्रकार परिषद् में देखा, कार्यकर्ता की मीटिंग में देखा? आप उनसे सवाल पूछिये, उनके दरबारी तो पूछेंगे नहीं। जो तीन लोग चुनावी अभियान में एकसाथ नहीं आए, वो बाद में क्या साथ आएंगे और साथ में चलेंगे। जिन्हें ख़ुद पर विश्वास नहीं है, वो आपका भला नहीं कर सकते।

मुझे अपने विश्वस्त सूत्रों से पता चला, उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता ने उनसे पूछा कि क्या हमारा मुख्यमंत्री नहीं बन सकता है, क्या आपका बेटा नहीं बन सकता है, लालू जी के मुंह में पानी आ गया, उनको ख़ुशी होने लगी कि हाँ, संभावना दिखती है; दूसरे ने पूछा कि अगर चुनाव हार जाते हैं तो विपक्ष का नेता कौन बनेगा; इस पर लालू जी ने जवाब दिया कि मैंने तो नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने पर समर्थन देने का वाद किया है न कि विपक्ष के नेता बनने का वादा। लालू जी ने कहा कि चुनाव हारने पर तो विपक्ष का नेता हमारा बेटा बनेगा। मैं सार्वजनिक रूप से मैं लालू जी से पूछना चाहता हूँ कि आप बिहार की जनता को बताओ कि विपक्ष का नेता कौन होगा, लालू जी का बेटा होगा या नीतीश बाबू होंगे, क्योंकि आपका चुनाव हारना तय है। ये मेरी मांग है आपसे।

मैं आपको एक पुरानी घटना याद कराना चाहता हूँ। जब मुंबई में बम धमाके हुए तो हमारे देश में आतंकी दुनिया के लिए एक शब्द चल पड़ा था - दरभंगा मॉड्युल, और कारण ये थे कि कुछ लोग यहाँ बैठ कर हिन्दुस्तान में आतंकवाद फ़ैलाने का षड़यंत्र रच रहे हैं। यहाँ पर एक जाबांज पुलिस अधिकारी महिला थी, दलित कन्या थी, उसने हिन्दुस्तान के निर्दोष नागरिकों की रक्षा के लिए आतंकवादी गतिविधि करने वाले लोगों की कार ढूंढने की कोशिश की। इस महास्वार्थबंधन के निकट के नेता के घर तक आतंकवाद के तार जाने लगे थे, तब सरकार में बैठे लोगों ने आतंकवाद से जुड़े नेताओं पर कदम नहीं उठाया लेकिन उस पुलिस अफसर को यहाँ से जाने और बिहार छोड़ने के लिए मज़बूर कर दिया। आप देश की रक्षा के साथ समझौता करने वाले और आतंकवादियों पर कृपा करने वाले लोगों को पटना में सरकार में बिठाएंगे क्या?

बिहार का भाग्य बदलने के लिए भाजपा, एनडीए का आप समर्थन करें, इसके लिए मैं आपके पास वोट मांगने आया हूँ। भाईयों-बहनों, मेरे पास एक जानकारी है, सही है या गलत पता नहीं क्योंकि समय के अभाव के कारण मैं वेरीफाई नहीं कर पाया, 1990 में लालू जी की सरकार ने बिहार के लोक सेवा आयोग से मैथिलि भाषा को निकाल दिया था, लालू जी ने मैथिलि भाषा का अपमान किया लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली में एनडीए की सरकार बनने के तुरंत बाद 2002 में संविधान की 8वीं सूची में इसे स्थान दिया गया। हम अपमानित करना नहीं बल्कि सम्मानित करना जानते हैं।  

हमने 1 लाख 25 हज़ार करोड़ का पैकेज और 40 हज़ार करोड़ पुराना वाला जो कागज़ पर पड़ा था जिसकी न कोई फाइल थी, न बजट था लेकिन बिहार के प्रति मेरा यह प्यार है, बिहार के लिए हमें कुछ करना है, हमने निर्णय लिया इसे देने का। हमने सब मिलाकर 1 लाख 65 हज़ार करोड़ का पैकेज दिया जो बिहार का भाग्य बदलने और यहाँ के लोगों का जीवन बदलने की ताकत रखता है। विकास के बिना बिहार की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। बिहार एक ज़माने में हिन्दुस्तान का सिरमौर हुआ करता था लेकिन 25 साल में जंगलराज और जंतर-मंतर ने बिहार को बर्बाद कर दिया। इन दोनों की जुगलबंदी वो भी बर्बाद कर देगी जो कुछ बिहार में अब बचा हुआ है।

कोई स्कूटर अगर छोटे से गड्ढ़े में फंस जाए तो 3-4 लोग निकालें तो निकल जाता है लेकिन अगर स्कूटर कुएं में गिरा हो तो उसको निकालने के लिए ट्रेक्टर की ज़रुरत होती है। 25 साल की इनकी सरकार ने बिहार को ऐसे गड्ढ़े में डाल दिया है जिसे निकालने के लिए दो-दो इंजन की जरुरत है। पटना और दिल्ली के दो इंजन लगेंगे तब यह बिहार गड्ढ़े में से बाहर आएगा। एक इंजन बिहार में जो नई सरकार बनेगी वो और दूसरा इंजन दिल्ली में मेरी सरकार जो आपने बनाई है।

भाईयों-बहनों, हम चुनाव के मैदान में विकास के मुद्दे को लेकर आए थे। लालू जी और नीतीश जी के पास विकास का ‘व’ बोलने की कोई जगह नहीं है और इसलिए उन्होंने चुनाव को जातिवाद के रंग में रंगने का नाटक किया। आरक्षण को लेकर महीने भर चीखते-चिल्लाते रहे, दिल्ली में उनके दरबारी भी इसी बात को बढ़ाते रहे। इन्होंने एक काल्पनिक भय पैदा किया और आरक्षण के नाम पर हौवा खड़ा किया। उनकी हर बात में बस आरक्षण था। जब एक दिन मुझे लगा कि इनका गुब्बारा बहुत बड़ा हो गया है तो मैंने एक छोटी सी सुई लगा दी और उनका पूरा गुब्बारा नीचे आ गया। उनकी सारी पोल खुल गई है।

यही लालू जी और नीतीश जी ने आरक्षण पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। उन्हें चिंता अपनी कुर्सी की थी और जब मैंने उनका वीडियो निकाल दिया तो पिछले एक हफ़्ते से आरक्षण का नाम लेना भूल गए। बिजली की तो वो कोई बात ही नहीं करते क्योंकि उन्हें डर है कि अगर बोल दिया तो लोग उनसे हिसाब मांगेंगे क्योंकि 2010 में नीतीश जी ने कहा था कि अगर घर-घर बिजली नहीं पहुंचाऊंगा तो 2015 में अगले चुनाव में वोट मांगने नहीं आऊंगा। बिजली नहीं तो वोट नहीं, ऐसे उन्होंने कहा था कि नहीं? उन्होंने अपना वादा तोड़ा है, आपसे धोखा किया है। जो जनता से धोखा कर सकते हैं, जनता उन्हें कभी स्वीकार नहीं करती।

बिहार की जनता जब देती है तो छप्पर फाड़ कर देती है; कांग्रेस को 35 साल तक दिया और जब लेती है तो चुन-चुन कर साफ़ कर देती है। जब लालू जी को दिया तो जी भर दिया लेकिन जब लालू जी पर गुस्सा आया तो फ़िर किसी को बचने नहीं दिया। अब बारी आई अहंकार की, बिहार अहंकार को बर्दाश्त नहीं कर सकता और अब अहंकार की विदाई की बारी है। नीतीश बाबू ने कहा था कि अगर किसी का भ्रष्टाचार पकड़ा गया तो उसकी मिल्कियत जब्त कर ली जाएगी और उसके घर में स्कूल खोला जाएगा। नीतीश जी रोज इस बात का ढोल पीटते थे। लोगों को क्यों मूर्ख बना रहे हैं? जेडीयू के मंत्री कैमरा के सामने घूस लेते पकड़े गए। ये अभी से ऐसा काम कर रहे हैं तो चुनाव के बाद क्या करेंगे। बिहार बेचने का एडवांस लिया जा रहा है। अब नीतीश बाबू बताएं कि उनका घर कब्ज़े में किया क्या, उनके घर में स्कूल खोला?

भाईयों-बहनों, बिहार में आप लोगों के लिए मेरा तीन सूत्रीय कार्यक्रम है – पढ़ाई, कमाई और दवाई। बिहार के गरीब से गरीब बच्चे को अच्छी एवं सस्ती शिक्षा मिलनी चाहिए। हर मां अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती है, लेकिन बिहार में पढ़ाई की इतनी हालत खराब है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए माँ-बाप को अपनी ज़मीन गिरवी रखनी पड़ती है। ये हमें शोभा देता है क्या? इसलिए मेरा संकल्प है, बिहार के बच्चों को सस्ती एवं अच्छी पढ़ाई। मेरा दूसरा सपना है, कमाई; नौजवान के लिए रोजगार। बिहार में नौजवान को अपना राज्य और अपने माँ-बाप को छोड़ना पड़ता है। बिहार के नौजवान को यहीं पर रोजगार का अवसर मिलना चाहिए और ये पलायन बंद होना चाहिए। इसलिए मेरा दूसरा संकल्प है, बिहार के नौजवानों के लिए कमाई। मेरा तीसरा सपना है, दवाई; बुजुर्गों के लिए सस्ती दवाई, दवाखाना और डॉक्टर होना चाहिए।

बिहार राज्य के लिए तीन कार्यक्रम है - बिजली, पानी एवं सड़क। बिजली आएगी तो कारखाने लगेंगे, और इससे रोजगार मिलेगा। बिजली के लिए अकेले दरभंगा को मैंने पौने 400 करोड़ आवंटित कर दिये हैं। बिहार को जो सौभाग्य मिला है, वो किसी और राज्य को नहीं मिला है; बिहार की दो ताक़त है - बिहार का पानी और बिहार की जवानी। ये दोनों पूरे हिन्दुस्तान का भाग्य बदल सकती हैं। किसान को अगर पानी मिल जाए तो वो मिट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। हमारा दूसरा संकल्प है - खेतों में पानी, उद्योगों को पानी और पीने का पानी पहुँचाना। तीसरा मेरा संकल्प है – सड़क; बिहार में सडकों का जाल हो। गाँव ज़िले से, ज़िला राज्य से, राज्य दिल्ली से जुड़ जाए, ऐसा नेटवर्क बनाना है ताकि बिहार का सीधा मार्ग विकास की ओर चल पड़े, इन कामों को लेकर मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ।

विकास ही एक मंत्र है, विकास के लिए मैं आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। मैं आपसे वोट विकास के लिए मांगता हूँ। पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक लगातार मतदान करने वालों की संख्या बढ़ी है और अब पांचवे चरण में आप सारे रिकॉर्ड तोड़ दोगे न? आप सब दस-दस परिवारों से वोट कराओ, भाजपा, एनडीए को वोट कराओ।  मेरे साथ बोलिये –

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!        

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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పూర్వ రాష్ట్రపతి శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ కోవింద్ ఆత్మకథ ఆవిష్కరణ సందర్భంగా ప్రధానమంత్రి ప్రసంగం
August 12, 2026
శ్రీ రాంనాథ్ కోవింద్ ఆత్మకథను ఆవిష్కరించే అవకాశం ఈ రోజు మనకు లభించింది.. ఈ కార్యక్రమంలో భాగం కావడం సంతోషాన్నిస్తోంది
ప్రజా సేవకు, దేశ పురోగతికి ఆయన జీవితం అంకితం.. ఆ స్ఫూర్తిని ప్రతిబింబించేలా ఆయన ప్రస్థానం
ఆయనతో నాకున్న సుదీర్ఘ పరిచయం, నా పట్ల ఆయనకున్న ప్రత్యేక ఆప్యాయత, ఆదరణలే నాకు గొప్ప సంపద
నిరుపేదలు, అట్టడుగు వర్గాల వారు అత్యున్నత స్థాయికి చేరుకునే అవకాశం లభించే నవభారత్‌ను నిర్మించాలని మహాత్మాగాంధీ, బాబాసాహెబ్ అంబేద్కర్, జ్యోతిబాపూలే, సావిత్రీబాయి పూలే స్వప్నించారు
సొంత జీవితాలను తీర్చిదిద్దుకోవడమే కాదు.. నిరంతర కృషి, దీక్షాదక్షతతో శతాబ్దాల నాటి ఆ స్వప్నాన్నీ, సంకల్పాన్నీ సాకారం చేయడంలో శ్రీ రాంనాథ్ కోవింద్ వంటి వ్యక్తులది కీలక భూమిక
రాష్ట్రపతిగా పదవీ బాధ్యతలు ముగిసిన తర్వాత కూడా ‘ఒక దేశం - ఒకే ఎన్నిక’పై కృషి చేస్తున్న శ్రీ రాంనాథ్ కోవింద్.. ప్రజాస్వామ్యంలో సరికొత్త అధ్యాయానికి నాంది పలకడమే కార్యక్రమ లక్ష్యం
ప్రధాని శ్రీ నరేంద్ర మోదీ వ్యాఖ్యలు

మన పూర్వ రాష్ట్రపతి శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ కోవింద్‌, లోక్‌సభ స్పీకర్‌ శ్రీ ఓం బిర్లా, శ్రీమతి సవితా కోవింద్‌ గారు, ఇక్కడ ఆసీనులైన ప్రముఖులందరి పేర్లనూ ప్రస్తావించలేనేమోగానీ, మీకందరికీ నమస్కారం. ఈ కార్యక్రమం నిస్సందేహంగా నాకెంతో ఆనందోత్సాహాలనిచ్చే కుటుంబ వేడుకలాంటిది!

సోదరీసోదరులారా!

శ్రీ రామ్‌‌నాథ్‌ కోవింద్ గారి ఆత్మకథను మనం ఇవాళ ఆవిష్కరించుకున్నాం. ఈ కార్యక్రమంలో పాలుపంచుకునే భాగ్యం దక్కినందుకు నేనెంతో సంతోషిస్తున్నాను. శ్రీ కోవింద్‌తో నాది సుదీర్ఘ కాల అనుబంధం. ఆయనతో సాన్నిహిత్యం, రాష్ట్రపతిగా ఆయన మార్గనిర్దేశం సహా నాపై ఆయన చూపిన అవ్యాజానురాగం, ఆత్మీయత జీవితంలో అనిర్వచనీయ మధురానుభూతిగా, గొప్ప సంపదగా నిలిచిపోయాయంటే అతిశయోక్తి కాబోదు. ఆయన జీవిత విశేషాలు, విషయాలు, సామర్థ్యం ఆధారంగా రూపొందిన ఈ ఆత్మకథ భారత ప్రజాస్వామ్యానికి, సమాజానికి గొప్ప వారసత్వ సంపద కాగలదని నేను ఘంటాపథంగా చెప్పగలను. శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ జీవన ప్రస్థానం, సమాజం-దేశంపై అంకిత భావంతో ఆయన చేసిన కృషి గురించి చెప్పాలంటే ఇప్పుడు సమయం చాలదు. అయితే, ఈ పుస్తకావిష్కరణ వేళ ఓ పరిచయ ప్రస్తావన అనివార్యం. ఈ పుస్తకం ద్వారా పూర్తి ప్రయోజనం లభించాలంటే మీరు అక్షరం విడవకుండా దీన్ని ఆసాంతం చదవాలి!

మిత్రులారా!

శ్రీ కోవింద్ జీవనయానంలోని విశేషాలను ఈ ఆత్మకథలో తెలుసుకోవడం, ఆయన ఇతర రచనలతోపాటు అనుభవాలను ఆస్వాదించడం ద్వారా నవతరం ఎంతో నేర్చుకోగలదు. విస్తృత అనుభవ సారంతో ఈ ఆత్మకథను మనకు అందించిన శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ కోవింద్‌కు నా హృదయపూర్వక అభినందనలు.

మిత్రులారా!

ఈ పుస్తకానికి “ట్రయంఫ్ ఆఫ్ ది ఇండియన్ రిపబ్లిక్: మై లైఫ్.. మై స్ట్రగుల్స్” (భారత గణతంత్ర విజయం: నా జీవితం-నా సంఘర్షణలు) పేరిట శ్రీ కోవింద్‌ ఎంతో సముచిత శీర్షికనిచ్చారు. తన జీవితం, తానెదుర్కొన్న సంఘర్షణలు ఆయన వ్యక్తిగతమే అయినా, ఆ పోరాటాలతో లభించిన విజయాలు మాత్రం భారత గణతంత్రానికి, ప్రజాస్వామ్యానికి సొంతం.

మిత్రులారా!

విజయం సిద్ధిస్తే... అది తన ప్రతిభేనని, అపజయం ఎదురైతే.. సమాజమే అందుకు కారణమని నిందించడం మానవుల సహజ స్వభావం. అయితే, హృదయ వైశాల్యం, భారతీయ విలువలపై గౌరవంగల వ్యక్తి సమాజం తప్పులు వెదుకుతూ ఎన్నడూ తన సమయం వృథా చేసుకోడు. తనకేది సానుకూలమో దానిపైనే నిశితంగా దృష్టి సారిస్తాడు. అంతేకాకుండా విజయం సాధిస్తే అందులో సగభాగం సమాజానికి పంచుతాడు. శ్రీ కోవింద్ ఆత్మకథ-దాని శీర్షిక ఇందుకు తిరుగులేని నిదర్శనాలు. ఇప్పుడు ఆయన జీవితాన్ని ఓసారి అవలోకిద్దాం... కాన్పూర్ దేహత్‌లోని ఒక సామాన్య కుటుంబంలో జన్మించిన ఆయన , ఓ మండు వేసవి కాలంలో తమ నివాసం అగ్నిప్రమాదం బారినపడిన వైనాన్ని ఈ పుస్తకంలో వివరించారు. ఆనాడు ఆయన తల్లి తన ప్రాణాలను లెక్కచేయకుండా బిడ్డలను, వారి కోసం ఇంట్లో ఉంచిన వస్తువులను బయటకు చేరవేసేందుకు ప్రయత్నించారు. ఒక సాధారణ గృహిణికి ఇంట్లోని ప్రతి చిన్న వస్తువూ తన పిల్లల పోషణకు ఉపయోగపడే ఉపకరణమే. ఆ తపనలో ఆమె తన శరీరం మంటలపాలు కావడం కూడా గమనించలేక ప్రాణాలు కోల్పోయారు. ఒక్కసారి ఊహించుకోండి- ఒక బాలుడు పసితనంలోనే ఇలా తల్లిని కోల్పోవడం ఎంతటి వేదనను కలిగించి ఉంటుందో! నా అదృష్టం కొద్దీ మా అమ్మ వంద ఏళ్లకు పైగా జీవించి నాకు ఆశీస్సులిస్తూ వచ్చినా, ఆమె లేని వెలితి నాకెన్నటికీ తీరేది కాదు.

మిత్రులారా!

అలాంటి బాధాకర సంఘటనతో ఎవరైనా కుంగిపోతారు... కానీ, శ్రీ కోవింద్ తననుతానే సముదాయించుకున్నారు. ఆయన భవిష్యత్‌ జీవితం పొరుగింటి మహిళ సాయంతో కొనసాగింది. తద్వారా సామాజిక ఐక్యత, సామరస్యం ఎంత శక్తిమంతమైనవో చిన్ననాడే ఆయన అవగతం చేసుకున్నారు. శ్రీ రామ్‌నాథ్‌ తండ్రి కూడా ఎంతో కీలక పాత్ర పోషించారు. భార్య లేని లోటును భరిస్తూనే కుటుంబాన్ని నడిపించిన తీరు, పిల్లలకు నేర్పిన విలువలు చాలా గొప్పవి- కనుకనే శ్రీ కోవింద్ తన తండ్రే తన హీరో అని చెబుతారు.

మిత్రులారా!

బాల్యంలో ఎన్నో సవాళ్లు ఎదురైనా, విద్యాభ్యాసమే తనను దృఢంగా నిలుపుతుందని శ్రీ కోవింద్ గ్రహించారు. ఆ మేరకు కఠోరంగా శ్రమించారు.. వనరుల కొరత ఆయన పురోగమనాన్ని అడ్డుకోలేకపోయింది. అప్పట్లోనే ఎవరూ ఊహించనంతటి ఉన్నత స్థాయికి ఎదిగి... భారత్‌ వంటి సువిశాల దేశానికి రాష్ట్రపతి అయ్యారు.

మిత్రులారా!

దేశంలో అత్యున్నత పదవిని అధిష్టించినా, శ్రీ కోవింద్‌ వినమ్ర స్వభావం, నిరాడంబర జీవన శైలి చెక్కుచెదరలేదు. నాకింకా గుర్తుంది.. ప్రధానమంత్రిగా ఆయనను రాష్ట్రపతి భవన్‌లో కలవడానికి వెళ్లినపుడు అధికారిక విధివిధానాలకు అతీతంగా ఆదరించేవారు. నేను తిరిగి వెళ్లే సమయంలో కారుదాకా వచ్చి మరీ, వీడ్కోలు పలికేవారు. అలా చేయవద్దని ఎన్నోసార్లు నేను కోరినా, తన పదవీకాలం పూర్తయ్యేదాకా ఈ అలవాటును ఆయన మానుకోలేదు. రాష్ట్రపతి హోదాలో తన స్వగ్రామం ‘పరోంఖ్’ వెళ్లినపుడు తన చిన్ననాటి ఉపాధ్యాయుల పాదాలంటి మరీ, గురువులపై తనకుగల గౌరవాన్ని చాటుకున్నారు. గ్రామంలో భూమాతకు ప్రణమిల్లి, అక్కడి ప్రజలందరికీ కృతజ్ఞతలు తెలిపారు. ఆ భావోద్వేగ దృశ్యాన్ని యావద్దేశం చూసింది. ప్రతి భారతీయుడూ గర్వపడే భారతీయ విలువలను ఆయన నడవడికే ప్రపంచానికి చాటిచెప్పింది.

మిత్రులారా!

శతాబ్దాల తరబడి సాగిన పరాయి పాలనలో మన దేశం ఆర్థికంగా, సామాజికంగా ఎంతో నష్టపోయింది. స్వాతంత్ర్యం కోసం మన పూర్వికులు నిరంతరం పోరాడుతూ వచ్చారు. మహాత్మా గాంధీ, బాబాసాహెబ్ అంబేద్కర్, జ్యోతిబా ఫూలే, సావిత్రిబాయి ఫూలే వంటి ఎందరో మహనీయులు నవ భారతం కోసం ఎన్నో కలలు కన్నారు. నిరుపేదలు, అణగారిన వర్గాల వారందరూ అత్యున్నత స్థాయికి ఎదగాలని ఆశించారు. వారి బాటలోనే శ్రీ కోవింద్ వంటి ఎందరో వ్యక్తులు కఠోర శ్రమ, దీక్షతో తమ జీవితాలను మార్చుకోవడమే కాకుండా శతాబ్దాల నాటి మహనీయుల స్వప్న సాకారంలో కీలక పాత్ర పోషించారు. ఇప్పుడు అదే బాటలో మేం కూడా కృషి చేస్తున్నాం. మనకిప్పుడు శ్రీ కోవింద్ తరహా భావితరం- సమస్యలకు వెరవని, కష్టాలకు తలవంచని, కఠోర శ్రమతో ప్రతి లక్ష్యాన్ని సాధించగల సాహస యువత ఎంతో అవసరం. బలమైన భారత్‌ రూపకల్పన సంకల్పాన్ని ఈ మార్పు సుసాధ్యం చేస్తుంది. తద్వారానే స్వయంసమృద్ధ, వికసిత భారత్‌ ప్రస్థానానికి మార్గం సుగమమవుతుంది.

మిత్రులారా!

అటువంటి యువశక్తికి రూపుదిద్దడంలో శ్రీ కోవింద్ ఆత్మకథ ఓ కీలక స్ఫూర్తిదాయక ఉపకరణంగా ఉపయోగపడుతుంది.

మిత్రులారా!

పూర్వ ప్రధానమంత్రి శ్రీ మొరార్జీ దేశాయ్‌తో తన అనుభవాలను కూడా శ్రీ కోవింద్ తన ఆత్మకథలో విశదీకరించారు. మొరార్జీతో కలిసి పనిచేసినప్పటి అనుభవాలు, ఆయనలోని దేశ సేవానిరతి, తాను నేర్చుకున్న విషయాలు- వీటన్నింటి ద్వారా శ్రీ కోవింద్ రాజకీయాలను, సామాజిక సేవను తన జీవన మార్గంగా మలచుకున్నారు. ఈ క్రమంలో తన విధులకు అంకితభావంతో కట్టుబడి, ప్రజాసేవనే లక్ష్యంగా ఎంచుకున్నారు. పార్లమెంటులో ఆయన పదవీకాలం ఇందుకొక ఉదాహరణ. అలాగే, గవర్నర్‌గానూ ఆయన అందరికీ ఆదర్శప్రాయులుగా నిలిచారు. రాష్ట్రపతి పదవిలోనూ అదే అంకితభావాన్ని మనమంతా ప్రత్యక్షంగా గమనించాం. అలాంటి అత్యున్నత పదవీ కాలం పూర్తయ్యాక కూడా వారు విశ్రాంతి తీసుకోవాలని భావించలేదు. ‘ఒకే దేశం-ఒకే ఎన్నిక’ వంటి కీలకాంశాలపై ఇప్పటికీ వారు అధ్యయనం కొనసాగిస్తూ దేశాన్ని చైతన్యవంతం చేస్తున్నారు. ఈ అంశానికి పరిష్కారం లభిస్తే- అది భారతీయ ప్రజాస్వామ్యంలో అదొక కొత్త అధ్యాయానికి నాంది పలుకుతుంది. శ్రీ కోవింద్ అంకితభావం, సేవానిరతి నుంచి దేశ ప్రజలు నేర్చుకోవాల్సింది ఎంతో ఉందని నేను ప్రగాఢంగా విశ్వసిస్తున్నాను.

మిత్రులారా!

సామాజిక జీవనంలో ఇంత చురుగ్గా ఉంటూనే, ఆత్మకథ రాసేందుకు సమయం కేటాయించడం అంత సులభమేమీ కాదు. అయితే, మనందరి కోసం శ్రీ కోవింద్ అందుకు కృషి చేశారు. తన జీవితంలో పేద, వెనుకబడిన వర్గాల ప్రజల జీవన స్థితిగతులను ప్రతిబింబించే విషయాలు ఎన్నో ఉండటమే ఇందుకు కారణం. ఒక సామాన్య కుటుంబం ఎన్నో కష్టనష్టాలు ఎదురైనప్పటికీ ఎన్నడూ రాజీ పడకుండా స్వచ్ఛమైన జీవనం, నిండు నిజాయితీని కొనసాగించడం ఈ పుస్తకం ద్వారా మనకు తెలుస్తుంది. ఇలాంటి ఆదర్శాలే మన భవిష్యత్‌ జీవన పునాదిగా మారుతాయి. కష్టకాలంలో మనం పాటించిన విలువలు జీవితాంతం మనకు వెలుగుబాట చూపుతాయి. ఈ మానసిక స్వచ్ఛత జాతి సేవకు ఎంతో బలాన్నిస్తుంది. కాబట్టే, వివిధ పదవీ బాధ్యతలలో తలమునకలైనప్పటికీ సమాజానికి శ్రీ కోవింద్ నిరంతరం స్ఫూర్తినిచ్చారు.

మిత్రులారా!

స్వీయ జీవిత జ్ఞాపకాలను మాత్రమే కాకుండా, మన ప్రజాస్వామ్య సంబంధిత ముఖ్యమైన స్మృతులను కూడా శ్రీ కోవింద్ ఆత్మకథ మనకు అందిస్తుందనడంలో సందేహం లేదు. ఈ ఆత్మకథ రచనకుగాను మరోసారి ఆయనకు నా శుభాకాంక్షలు తెలుపుతున్నాను. ముఖ్యంగా యువతరాన్ని నేను కోరేదొకటే- ఇది రీల్స్ యుగం.. సామాజిక మాధ్యమాల్లోని ప్రభావశీలురు మిమ్మల్ని బాగా ఆకర్షిస్తారు. అయితే, దగ్గరి దారుల శకంలో ఒక వాస్తవాన్ని మీరు సదా గుర్తుంచుకోవాలి. రైల్వే స్టేషన్లలో వంతెన మీదుగా పట్టాలు దాటాలని స్పష్టంగా హెచ్చరిక కనిపిస్తుంది. కానీ, కొందరు అలా కాకుండా పట్టాల మీదకు దూకి దాటే ప్రయత్నంలో ప్రమాదాల బారిన పడుతుంటారు. ఈ సందర్భంగా యువతకు నా మాటగా చెబుతున్నా- మీరు దగ్గరి దారులు వెదకాలనుకున్నా- మొదట మీరు ఆరాధించే వారి ఆత్మకథలను చదవండి. అవి చరిత్రకు చాలా దగ్గరగా ఉంటాయి. భిన్న చారిత్రక సంఘటనలను విభిన్నంగా అర్థం చేసుకునే అవకాశాన్నిస్తాయి. అందుకే శ్రీ కోవింద్ కృషి భవిష్యత్తరాలకు... ముఖ్యంగా యువతరానికి ప్రయోజనం చేకూర్చాలని ఆకాంక్షిస్తున్నాను.

అనేకానేక అభినందనలు.. ధన్యవాదాలు!