India is a bright spot in global economy: PM Modi

Published By : Admin | March 7, 2017 | 15:55 IST
Dahej SEZ has made it to the top 50 industrial areas in the world: PM
OPAL will have a key role to play in intiatives like 'Make In India' and 'Start up India': PM
Petrochemical sector is expanding at a fast rate in the country: PM Modi
After we assumed office, we took measures to control inflation rate: PM Modi
Today India is a bright spot in global economy: PM Modi
Latest GDP data reveals that demonetisation did not affect India's growth: PM Modi

गुजरात के मुख्य मंत्री श्री विजय रूपाणी

केन्द्र में मंत्रिमण्डल के मेरे साथी श्री नितिन गडकरी और श्री मनसुख मांडविया 

इसी क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद श्री मनसुख भाई वसावा 

मंचस्थ अन्य गण्मान्य व्यक्ति 

मेरे साथियों, 

हमारा दहेज एक प्रकार से लघु भारत बन गया है। देश का कोई जिला ऐसा नहीं होगा जिसके लोग यहां ना हों और जिनकी आजीविका का साधन यहां से ना जुड़ा हो। 

पूरे देश में और विश्व में गुजरात की व्यापारिक सोच और साहसिकता की गूंज है। 

गुजरात की उस साहसिकता को उजागर करने में दहेज-भरूच क्षेत्र का बहुत योगदान है। 

मैं जब गुजरात का मुख्यमंत्री था, तो अनेक बार इस क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए यहां आता था और लगातार इससे मैं जुड़ा रहा।  

इस जगह को मैंने Brick by Brick मजबूत होते और Step By Step आगे बढ़ते हुए देखा है। 

पिछले 15 वर्षों में दहेज के विकास के लिए गुजरात सरकार ने भगीरथ प्रयास किए हैं। आज उसी का परिणाम है कि दहेज का पूरा इलाका औद्योगिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान बन चुका है। 

दोस्तों, ये गुजरात सरकार की लगातार कोशिशों का ही नतीजा था कि दहेज-SEZ दुनिया के टॉप-50 औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी जगह बना पाया। 

ये भारत का पहला ऐसा औद्योगिक क्षेत्र था, जिसने वर्ल्ड रैकिंग में इतनी धमाकेदार इंट्री दर्ज की थी।  

साल 2011-12 में तो दहेज SEZ की वर्ल्ड रैकिंग 23वीं थी।  

आज भी दहेज-SEZ विश्व के कुछ गिने-चुने औद्योगिक क्षेत्रों में अपना विशेष स्थान रखता है। 

दहेज औद्योगिक क्षेत्र सिर्फ गुजरात के ही नहीं बल्कि पूरे देश के लाखों नौजवानों को रोजगार देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। अब तक इस क्षेत्र में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो चुका है।

दहेज-SEZ की इस शानदार कामयाबी के लिए मैं इससे जुड़े लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। 

दहेज और उसके आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में गुजरात सरकार ने हमेशा गंभीरता दिखाई है। इसी वजह से जब ये चर्चा शुरू हुई की देश में चार पेट्रोलियम-केमिकल-पेट्रोकेमिकल इन्वेस्टमेंट रीजन यानि PCPIR बनाए जाएंगे तो उसमें गुजरात के दहेज का भी नाम था। 

PCPIR की वजह से सवा लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है और इनमें से 32 हजार तो ऐसे हैं जो सीधे इससे जुड़े हुए हैं। एक अनुमान है कि जब PCPIR की पूर्ण क्षमता का विकास हो जाएगा तो 8 लाख लोगों को किसी ना किसी तरीके से रोजगार मिलेगा।  

PCPIR की वजह से दहेज और पूरे भरूच के आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर का भी बहुत अच्छा विकास हुआ है। पेट्रोलियम-केमिकल-पेट्रोकेमिकल इन्वेस्टमेंट रीजन की वजह से बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आई है।  

आज दहेज का SEZ, PCPIR और गुजरात इंडस्ट्रियल डवलपमेंट कॉपरेशन बहुत ही वाइब्रेंट औद्योगिक स्थल बन चुका है। ये एक ऐसे शिशु की तरह है जिसे मैंने अपनी आंखों के सामने बढ़ते हुए देखा है और इसलिए यहां से मेरा भावनात्मक लगाव भी बहुत है। 

दहेज SEZ और PCPIR को चार चाँद अगर किसी ने लगाए हैं तो वो है ONGC PETRO ADDITIONS LIMITED यानि ओपेल।  

ओपेल यहां के लिए एक एंकर इंडस्ट्री की तरह है। ये देश का सबसे बड़ा पेट्रोकेमिकल प्लांट है। इसमें 30 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया जाना था जिसमें से लगभग 28 हजार करोड़ तो लग भी चुके हैं।  

साथियों, आज भारत में Polymers का Per capita consumption सिर्फ 10 किलो है जबकि पूरे विश्व का औसत लगभग 32 किलो है। 

आज जब पूरे देश में मिडिल क्लास का दायरा बढ़ रहा है, लोगों की आय बढ़ रही है, शहरों का विकास हो रहा है तो निश्चित तौर पर Polymers के Per capita consumption में भी बढोतरी आएगी। 

ONGC PETRO ADDITIONS LIMITED की इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। Polymers से जुड़े हुए प्रॉडक्ट का इस्तेमाल कई अहम सेक्टरों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग, पैकेजिंग, इरिगेशन, ऑटोमोटिव, हेल्थकेयर में होता है। 

केंद्र सरकार के मेक इन इंडिया और स्मार्ट सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्टों में भी ओपेल का बहुत योगदान होगा। एक अनुमान है कि 2018 तक Polymers में OPAL की हिस्सेदारी लगभग 13 प्रतिशत हो जाएगी। 

Polymers का इस्तेमाल बढ़ने का सीधा मतलब है कि जो परंपरागत चीजें हैं जैसे कि लकड़ी, कागज, मेटल, उनका उपयोग कम होगा। यानि ये हमारे देश के प्राकृतिक संसाधनों को बचाने में सहायक सिद्ध होगा।  

देश में पेट्रोकेमिकल सेक्टर इस समय बहुत तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले दो दशक तक ये सेक्टर 12 से 15 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ेगा।  

दोस्तों, भविष्य में इस क्षेत्र में और भी बड़े पैमाने पर infrastructure का विकास होगा जिसमें port का आधुनिकीकरण, 5000 मेगावाट बिजली का उत्पादन एवं waste treatment plant शामिल हैं। निश्चित तौर पर इससे देश के लाखों नौजवानों को रोजगार भी मिलेगा। 

श्रमिकों की सुविधा के लिए, जॉब मार्केट के विस्तार के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है। उद्योगों में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ कौशल विकास के लिए भी भगीरथ प्रयास किए जा रहे हैं। देश में पहली बार कौशल विकास मंत्रालय बनाकर इस पर सुनियोजित तरीके से काम हो रहा है। सरकार वर्षों पुराने कानूनों को हटाकर या फिर उनमें बदलाव करके भी जॉब मार्केट का विस्तार कर रही है। 

अप्रेन्टिसशिप एक्ट में सुधार करके अप्रेन्टिसों की संख्या बढ़ाई गई है और अप्रेन्टिस के दौरान मिलने वाले भुगतान में भी बढोतरी की गई है। 

1948 के फैक्ट्री एक्ट में बदलाव करके राज्यों को सलाह दी गई है कि वो महिलाओं को रात्रि में काम करने की सुविधा प्रदान करें।

इसके अलावा Paid Maternity Leave को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया गया है। 

श्रमिकों की मेहनत की कमाई और बचत EPF अकाउंट में जमा होती है। ये राशि उन्हें कहीं भी, कभी भी मिल सके इसके लिए Universal Account Number देने की शुरुआत की गई है। 

कुछ क्षेत्रों में जहां रोजगार बढ़ने की विशेष संभावनाएं हैं, जैसे की टेक्सटाइल सेक्टर, वहां आवश्यकता के अनुरूप “fixed term employment” के तहत श्रमिकों को रोजगार देने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 

सामान्य दुकानें और संस्थान साल में पूरे 365 दिन खुले रह सकें उसके लिए भी राज्यों को सलाह दी गई है। 

साथियों, 2014 में सरकार बनने से पहले देश के सामने किस तरह की आर्थिक चुनौतियां थीं, ये आप सभी को पता है। महंगाई बेकाबू थी, निवेश और निवेशकों का भरोसा, दोनों घट रहा था। निवेश घटने का सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर और रोज़गार पर पड़ रहा था। 

लेकिन अर्थव्यवस्था से जुड़ी हर चुनौती को केंद्र सरकार ने सुलझाने का प्रयास किया। एक तरफ जहां पूरे विश्व में आशंका के बादल हैं, वहीं भारत “ब्राइट स्पॉट” बनकर चमक रहा है। 

पिछले साल आई वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट में भारत को वर्ष 2016 से 18 के बीच दुनिया की टॉप 3 Prospective Host Economy में आंका गया है। 

वर्ष 2015-16 में 55.5 बिलियन डॉलर अर्थात 3.64 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड विदेशी निवेश हुआ। ये किसी भी वित्तीय वर्ष में अब तक हुए निवेश से ज्यादा है। 

दो वर्ष में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के Global Competitiveness Index में भारत 32 स्थान ऊपर उठा है।  

वर्ल्ड बैंक के Logistics Performance Index में भारत 2014 में 54वें स्थान पर था। 2016 में भारत ने इस रैंकिंग में काफी सुधार करते हुए 35वां स्थान प्राप्त किया। 

मेक इन इंडिया आज भारत का सबसे बड़ा Initiative बन चुका है।  

तमाम रेटिंग एजेंसियों ने इसकी कामयाबी की प्रशंसा की है। मेक इन इंडिया एक प्रयास है भारत को मैन्यूफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन का ग्लोबल HUB बनाने का।  

इसी मुहिम के चलते आज भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग देश है। जबकि पहले भारत नौवें नंबर पर था।  

मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में काफी अच्छी वृद्धि देखी गई है। इसका उदाहरण Gross Value Addition की विकास दर है। वर्ष 2012- से 2015 के बीचये 5 से 6 प्रतिशत थी और पिछले साल बढ़कर 9.3 प्रतिशत तक पहुंच गई। 

आज भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ गति से विकास करने वाला देश है। 

पोर्ट लेड डेवलपमेंट सरकार की प्राथमिकता है। सागरमाला योजना पर तेज़ी से कार्य चल रहा है | 

पोर्ट्स का आधुनिकीकरण, नए पोर्ट्स का निर्माण, कनेक्टिविटी के सुधार पर बल, पोर्ट लेड औद्योगीकरण और कोस्टल कम्मुनिटी के विकास की यह एक महत्त्वकांक्षी परियोजना है | 

8 लाख करोड़ के इन्वेस्टमेंट वाले 400 से अधिक प्रोजेक्ट्स का चयन किया जा चुका है; और एक लाख करोड़ के लगभग के प्रोजेक्ट क्रियान्वयन के अलग अलग चरणों में हैं | 

रेलवे और पोर्ट्स की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए इंडियन पोर्ट रेल कॉर्पोरशन की स्थापना की गयी है | 

देश के विभिन्न हिस्सों में 14 कोस्टल इकोनोमिक ज़ोन्स प्रस्तावित हैं | 

गुजरात में 85 हज़ार करोड़ की लागत के 40 से भी अधिक प्रोजेक्ट चिन्हित किये गए हैं | 5 हज़ार करोड़ के लगभग के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है | 

कांडला पोर्ट पर कुछ बहुत बड़ी योजनाएं शुरू की गयी हैं |  

कांडला पोर्ट की वर्तमान क्षमता तो बढ़ाई ही जा रही है | इसके अलावा, 1400 एकड़ में स्मार्ट औद्योगिक सिटी का विकास किया जा रहा है | इससे लगभग 50 हज़ार जॉब्स क्रीएट होंगे |  

दो नयी कार्गो जेटी और एक आयल जेटी पर काम चल रहा है |  विंड पावर प्रोजेक्ट और रूफ सोलर प्रोजेक्ट भी तेज़ी से पूरे किये जा रहे हैं | 

नवंबर में काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लिए गए फैसले के बाद अर्थव्यवस्था को नुकसान के जो आरोप लगाए जा रहे थे, उनका जवाब पिछली तिमाही के आंकड़ों ने दे दिया है। 

दीवाली के बाद हुई इस कार्रवाई का दुनिया के बड़े-बड़े संगठनों और जानकारों ने समर्थन किया।  

Apple के CEO टिम कुक ने कहा कि इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। 

माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स ने कहा कि ये फैसला पैरेलेल इकॉनोमी को खत्म करेगा और अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा। 

वर्ल्ड बैंक के CEO क्रिस्टलिना जार्जीएवा भी इस फैसले के समर्थन में थे। उन्होंने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा और भारत ने जो किया है, उसकी दुनिया के दूसरे देश Study करेंगे।  

मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने भी इस फैसले को बहुत साहसिक बताया।  

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने भी इस फैसले का समर्थन किया।  

नोबल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री मोहम्मद युनूस ने भी कहा कि Demonetisation से ग्रामीण और असंगठित क्षेत्र अब बैंकिंग सिस्टम के दायरे में आ गए हैं। 

ब्रिटेन के प्रसिद्द समाचार पत्र Financial Times के प्रमुख आर्थिक टीकाकार मार्टिन वुल्फ ने लिखा  कि इस फैसले से पूंजी, अपराधियों के हाथ से निकलकर सरकार के पास आयेगी | और पूंजी के ऐसे हस्तान्तरण से जिनको नुकसान हुआ, उनके लिए कोई सुहानुभूति होना मुश्किल है |  

दोस्तों, निश्चित तौर पर, जब अर्थव्यवस्था से काला धन खत्म होगा, तो इसका फायदा हर सेक्टर, चाहे वो आर्थिक हो या सामाजिक, सभी को होगा। आज दुनिया भारत के इस साहसिक फैसले को बहुत सम्मान के साथ देख रही है। 

साथियों, आखिरी में, मैं एक और महत्वपूर्ण बात आपके सामने रखना चाहता हूं। ये है पर्यावरण की सुरक्षा।  

मैंने पहले भी कहा है कि हमें परियोजनाओं का विस्तार करते हुए, नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाते हुए इस बात पर भी जोर देना है कि उसकी वजह से पर्यावरण का कोई नुकसान ना हो। पर्यावरण की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। 

मुझे उम्मीद है कि जैसे दहेज का पूरा environment सभी के लिए friendly  है, वैसे ही दहेज SEZ भी environment friendly रहेगा। 

इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।  

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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February 27, 2026

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।