Statement by PM Modi at Joint Press Meet with Indonesian President

Published By : Admin | May 30, 2018 | 10:50 IST
Agreements exchanged between India and Indonesia will further strengthen ties between both the countries: PM Modi
We will double our efforts to take India-Indonesia bilateral trade to $50 billion by 2025: PM Modi
India and Indonesia are youthful nations. Both countries can learn from one another when it comes to employment generation and skill development for our youth: PM Modi

Your Excellency
President जोको विदोडो,
Distinguished delegates,
Members of the Media,
सेलामत सियांग

नमस्कार!

इस महान एवं सुंदर देश की यह मेरी पहली यात्रा है। मैं सबसे पहले इस यात्रा का शानदार प्रबंध करने एवं गर्मजोशी के साथ मेरा आतिथ्य-सत्कार करने के लिए राष्ट्रपति विदोडो के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ। इंडोनेशिया की विवधिता दर्शाते हुए , नागरिको और छोटे छोटे बच्चो ने जेसे राष्ट्रीय पोशाको में मेरा स्वागत किया, उसने खासतोर पर मेरे मन को छू लिया. राष्ट्रपति महोदय की दूरदर्शिता के लिए उनके Visionary नेतृत्व के लिए तथा हमारी भागीदारी को और मज़बूत बनाने के लिए उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के प्रति मेरे मन में गहरा आदर है।

Friends,

हाल में हुए आतंकी हमलों में इंडोनेशिया के निर्दोष लोगों के मारे जाने का मुझे गहरा दुःख है। भारत इस प्रकार के हमलों की कड़ी निंदा करता है। इस मुश्किल समय में भारत इंडोनेशिया के साथ मज़बूती से खड़ा है। इस प्रकार की त्रासद घटनाएं यह संदेश देती है कि आतंकवाद से लड़ने के लिए विश्व स्तर पर मिल-जुल कर किए जा रहे प्रयासों में और अधिक गति लाने की आवश्यकता है।

Friends,

इंडोनेशिया की पंचशील philosophy, इंडोनेशिया के लोगों के विवेक और दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण है। इसमें धार्मिक विश्वासों के साथ सांस्कृतिक परंपराओं का भी निर्बाध एकीकरण किया गया है। सामुद्रिक पड़ोसियों एवं सामरिक साझेदारों के रूप में हमारी चिन्ताएं एक जैसी हैं। सामुद्रिक मार्गों की सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है। यह हमारे आर्थिक हितों की रक्षा के लिए भी आवश्यक है। आज के बदलते हुए Indo-Pacific क्षेत्र में हमारी विशेष geo-strategic location है। हम एक जैसी विकास एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। Indo-Pacific क्षेत्र में सहयोगियों के रूप में, एक दूसरे की प्रगति एवं संपन्नता में हमारे साझा हित हैं। और इसलिए, हमने Indo-Pacific क्षेत्र के लिए साझे Vision और सिद्धांतों पर सहमति की है। Friends, भारत की Act East Policy के साथ ''सागर'' – Security and Growth for All in the Region – का हमारा Vision, राष्ट्रपति विदोडो की Maritime Fulcrum Policy के साथ मेल करता है। December 2016 में राष्ट्रपति विदोडो की भारत यात्रा के समय हमने एक roadmap तैयार किया था। आज हमारी चर्चा में हमने उसके कार्यान्वयन पर हुई प्रगति का आकलन किया। आज हमारे बीच हुए समझौतों से हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। मुझे प्रसन्नता है कि हमने अपनी साझेदारी को Comprehnsive Strategic Partnership के रूप में upgrade करने का निर्णय लिया है। हम वर्ष 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन डॉलर के स्तर तक ले जाने के लिए अपने प्रयास दोगुने करेंगे। और इन प्रयासों में सहायता के लिए मैं हमारे CEO Forum के सकारात्मक योगदान का भी अभिनंदन करता हूँ।

Friends,

हम दोनों देशों के बीच सहस्त्राब्दियों से मजबूत सांस्कृतिक संबंध है। इनकी एक झलक इस वर्ष हमारे गणतंत्र दिवस पर आयोजित parade में भी देखने को मिली थी। इस वर्ष की parade में आसियान-भारत संबंधों की झाँकी में भारत के ओड़िशा राज्य के त्यौहार "बाली जात्रा” को दर्शाया गया था। प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला यह त्यौहार हमारे हज़ारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंधों के आज भी जीवंत होने का उदाहरण है। अगले वर्ष 2019 में हम अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मनाएंगे। इस दौरान दोनों देशों में बहुत से समारोह आयोजित किए जाएंगे। बहुत बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक इंडोनेशिया आते हैं, विशेष रूप से बाली में। उत्तराखंड एवं बाली को Twin करने से इस आदान-प्रदान में और बढ़ोतरी होगी। दोनों देशों में अधिकांश आबादी युवा है। इन युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए और उनके लिए रोज़गार के अवसर उत्पन्न करने हेतु, हम शिक्षा तथा कौशल विकास के क्षेत्र में एक-दूसरे से सीख सकते हैं। हमनें शिक्षा तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। हम भारत के IT सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने एवं इसे विस्तार देने के लिए इंडोनेशिया के नेतृत्व के विचारों का स्वागत करेंगे। यह दोनों देशों के लिए लाभकारी भागीदारी रहेगी।

 Friends,

India-ASEAN partnership एक ऐसी शक्ति है जो Indo- Pacific क्षेत्र में तथा उससे परे भी शांति और साझा उन्नति के लिए है। हम ASEAN में इंडोनेशिया की सकारात्मक भूमिका को महत्व देते हैं। साथ ही, व्यापक क्षेत्रीय सहयोग एवं एकीकरण के लिए इस Association के प्रयास भी एक उदाहरण और प्रेरणा है। मैंने ASEAN में भारत की Strategic Partnership को विकसित करने में इंडोनेशिया के पुरज़ोर समर्थन के लिए President विदोडो के समक्ष हमारा आभार व्यक्त किया है। मैं अगस्त में 18वें एशियाई खेलों की मेजबानी के लिए इंडोनेशिया को अपनी शुभकामनाएं देता हूँ। मुझे विश्वास है कि यह बहुत ही शानदार एवं ऐतिहासिक आयोजन होगा। और मैं रमजान के इस पवित्र महीने में, भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की ओर से इंडोनेशिया के सभी लोगों की समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं सफलता की कामना करता हूँ और उन्हें आगामी ईद-उल-फित्र के त्योहार की बधाई देता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।
तरीमा कासि बन्याक।

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Prime Minister shares Sanskrit Subhashitam highlighting the spirit of selfless service and dedication
August 21, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi has said that the continuous flow of rivers teaches us how we can utilise our capabilities for the welfare of humanity. He noted that the spirit of selfless service, dedication and benevolence gives a new direction to the nation.

The Prime Minister shared a Sanskrit Subhashitam-

“जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।

इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”

The Subhashitam conveys that human beings, dedicate your lives to the service and welfare of others. Just as rivers flow ceaselessly and selflessly, sustaining countless lives with their waters before ultimately merging into the ocean, so should we devote our time, abilities and resources to the well-being of others. The true purpose and fulfilment of human life lie in selfless service, compassion and the welfare of all.

The Prime Minister wrote on X;

“नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।

जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।

इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”