ਇਹ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਕਨੈਕਟਿਵਿਟੀ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ, ਸਫ਼ਰ ਕਰਨ ਦੀ ਬਿਹਤਰ ਸੁਵਿਧਾ, ਲੌਜਿਸਟਿਕਸ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨੂੰ ਘੱਟ ਕਰਨ, ਤੇਲ ਦਾ ਆਯਾਤ ਘਟਾਉਣ ਅਤੇ ਸੀਓ2 ਨਿਕਾਸੀ ਨੂੰ ਘਟਾਉਣਗੇ
ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਗ਼ੈਰ-ਸੰਬੰਧਿਤ ਖੇਤਰਾਂ ਨੂੰ ਜੋੜਨ ਲਈ ਲੌਜਿਸਟਿਕਲ ਕੁਸ਼ਲਤਾ ਵਿੱਚ ਸੁਧਾਰ ਕਰਨਗੇ, ਮੌਜੂਦਾ ਲਾਇਨ ਸਮਰੱਥਾ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣਗੇ ਅਤੇ ਟ੍ਰਾਂਸਪੋਰਟੇਸ਼ਨ ਨੈੱਟਵਰਕ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣਗੇ, ਜਿਸ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਸਪਲਾਈ ਚੇਨ ਨੂੰ ਸੁਚਾਰੂ ਬਣਾਇਆ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਆਰਥਿਕ ਵਿਕਾਸ ਵਿੱਚ ਤੇਜ਼ੀ ਆਵੇਗੀ
ਇਹ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਲਗਭਗ 106 ਲੱਖ ਮਨੁੱਖੀ ਦਿਨਾਂ ਲਈ ਪ੍ਰਤੱਖ ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਪੈਦਾ ਕਰਨਗੇ

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀ ਨਰੇਂਦਰ ਮੋਦੀ ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਵਾਲੀ ਆਰਥਿਕ ਮਾਮਲਿਆਂ ਦੀ ਕੈਬਨਿਟ ਕਮੇਟੀ (ਸੀਸੀਈਏ) ਨੇ ਰੇਲਵੇ ਮੰਤਰਾਲੇ ਦੇ ਦੋ ਰੇਲਵੇ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਦੇ ਦਿੱਤੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਦੀ ਕੁੱਲ ਅਨੁਮਾਨਿਤ ਲਾਗਤ 6,798 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ (ਲਗਭਗ) ਹੈ।

ਦੋ ਪ੍ਰਵਾਨਿਤ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਹਨ - (ਏ) ਨਰਕਟੀਆਗੰਜ-ਰਕਸੌਲ-ਸੀਤਾਮੜੀ-ਦਰਭੰਗਾ ਅਤੇ ਸੀਤਾਮੜੀ-ਮੁਜ਼ੱਫਰਪੁਰ (Narkatiaganj-Raxaul-Sitamarhi-Darbhanga & Sitamarhi-Muzaffarpur) ਸੈਕਸ਼ਨ ਦੇ 256 ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਨੂੰ ਕਵਰ ਕਰਨਾ ਅਤੇ (ਬੀ) ਅਮਰਾਵਤੀ ਰਾਹੀਂ ਅਰਰੂਪਲੇਮ ਅਤੇ ਨੰਬੁਰੂ (Errupalem and Namburu) ਵਿਚਕਾਰ ਨਵੀਂ ਲਾਇਨ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ 5 ਵਰ੍ਹਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪੂਰਾ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਹੈ। ਇਹ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਲਗਭਗ 106 ਲੱਖ ਮਨੁੱਖੀ ਦਿਨਾਂ ਲਈ ਪ੍ਰਤੱਖ ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਪੈਦਾ ਕਰਨਗੇ।

ਨਰਕਟੀਆਗੰਜ-ਰਕਸੌਲ-ਸੀਤਾਮੜੀ-ਦਰਭੰਗਾ ਅਤੇ ਸੀਤਾਮੜੀ-ਮੁਜ਼ੱਫਰਪੁਰ (Narkatiaganj-Raxaul-Sitamarhi-Darbhanga & Sitamarhi-Muzaffarpur) ਸੈਕਸ਼ਨ ਨੂੰ ਡਬਲ ਕਰਨ ਨਾਲ ਨੇਪਾਲ, ਉੱਤਰ-ਪੂਰਬ ਭਾਰਤ ਅਤੇ ਸਰਹੱਦੀ ਖੇਤਰਾਂ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਮਾਲ ਗੱਡੀਆਂ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਯਾਤਰੀ ਟ੍ਰੇਨਾਂ ਦੇ ਆਵਾਗਮਨ ਨੂੰ ਸੁਚਾਰੂ ਬਣਾਇਆ ਜਾਵੇਗਾ, ਜਿਸ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਖੇਤਰ ਦਾ ਸਮਾਜਿਕ-ਆਰਥਿਕ ਵਿਕਾਸ ਹੋਵੇਗਾ।

ਨਵੀਂ ਰੇਲ ਲਾਇਨ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਏਰੁਪਾਲੇਮ-ਅਮਰਾਵਤੀ-ਨੰਬੁਰੂ (Errupalem-Amaravati-Namburu) ਆਂਧਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੇ ਐੱਨਟੀਆਰ ਵਿਜੈਵਾੜਾ ਅਤੇ ਗੁੰਟੂਰ ਜ਼ਿਲ੍ਹਿਆਂ ਅਤੇ ਤੇਲੰਗਾਨਾ ਦੇ ਖੰਮਮ (Khammam) ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਦਾ ਹੈ।

ਤਿੰਨ ਰਾਜਾਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਆਂਧਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼, ਤੇਲੰਗਾਨਾ ਅਤੇ ਬਿਹਾਰ ਦੇ 8 ਜ਼ਿਲ੍ਹਿਆਂ ਨੂੰ ਕਵਰ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਦੋ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਭਾਰਤੀ ਰੇਲਵੇ ਦੇ ਮੌਜੂਦਾ ਨੈੱਟਵਰਕ ਨੂੰ ਲਗਭਗ 313 ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਤੱਕ ਵਧਾਉਣਗੇ।

ਨਵੀਂ ਲਾਇਨ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ 9 ਨਵੇਂ ਸਟੇਸ਼ਨਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਲਗਭਗ 168 ਪਿੰਡਾਂ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 12 ਲੱਖ ਆਬਾਦੀ ਨੂੰ ਸੰਪਰਕ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰੇਗਾ। ਮਲਟੀ-ਟ੍ਰੈਕਿੰਗ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਲਗਭਗ 388 ਪਿੰਡਾਂ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 9 ਲੱਖ ਆਬਾਦੀ ਲਈ ਦੋ ਖ਼ਾਹਿਸ਼ੀ ਜ਼ਿਲ੍ਹਿਆਂ (ਸੀਤਾਮੜੀ ਅਤੇ ਮੁਜ਼ੱਫਰਪੁਰ) ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਵਧਾਏਗਾ।

ਇਹ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਉਤਪਾਦਾਂ, ਖਾਦ, ਕੋਲਾ, ਲੋਹਾ, ਇਸਪਾਤ, ਸੀਮਿੰਟ ਆਦਿ ਜਿਹੀਆਂ ਵਸਤਾਂ ਦੀ ਢੋਆ-ਢੁਆਈ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਮਾਰਗ ਹਨ। ਸਮਰੱਥਾ ਵਧਾਉਣ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ 31 ਐੱਮਟੀਪੀਏ (ਮਿਲੀਅਨ ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਸਾਲ) ਦੀ ਅਤਿਰਿਕਤ ਫ੍ਰੇਟ ਟ੍ਰੈਫਿਕ ਹੋਵੇਗੀ। ਰੇਲਵੇ ਵਾਤਾਵਰਣ ਅਨੁਕੂਲ ਅਤੇ ਊਰਜਾ ਕੁਸ਼ਲ ਆਵਾਜਾਈ ਦੇ ਸਾਧਨ ਹੋਣ ਕਾਰਨ, ਜਲਵਾਯੂ ਲਕਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਲੌਜਿਸਟਿਕਸ ਲਾਗਤ ਨੂੰ ਘੱਟ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰੇਗਾ, ਸੀਓ2 ਨਿਕਾਸੀ (168 ਕਰੋੜ ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ) ਘੱਟ ਕਰੇਗੀ, ਜੋ ਕਿ 7 ਕਰੋੜ ਰੁੱਖ ਲਗਾਉਣ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੈ।

ਨਵੀਂ ਲਾਇਨ ਦਾ ਪ੍ਰਸਤਾਵ ਆਂਧਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੀ ਪ੍ਰਸਤਾਵਿਤ ਰਾਜਧਾਨੀ "ਅਮਰਾਵਤੀ" ਨਾਲ ਸਿੱਧਾ ਸੰਪਰਕ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰੇਗਾ ਅਤੇ ਉਦਯੋਗਾਂ ਅਤੇ ਆਬਾਦੀ ਲਈ ਗਤੀਸ਼ੀਲਤਾ ਵਿੱਚ ਸੁਧਾਰ ਕਰੇਗਾ, ਭਾਰਤੀ ਰੇਲਵੇ ਲਈ ਵਧੀ ਹੋਈ ਕੁਸ਼ਲਤਾ ਅਤੇ ਸੇਵਾ ਭਰੋਸੇਯੋਗਤਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰੇਗਾ। ਮਲਟੀ-ਟ੍ਰੈਕਿੰਗ ਪ੍ਰਸਤਾਵ ਭਾਰਤੀ ਰੇਲਵੇ ਦੇ ਸਭ ਤੋਂ ਵਿਅਸਤ ਸੈਕਸ਼ਨਾਂ 'ਤੇ ਬਹੁਤ-ਲੋੜੀਂਦਾ ਬੁਨਿਆਦੀ ਢਾਂਚਾ ਵਿਕਾਸ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਸੰਚਾਲਨ ਨੂੰ ਸੌਖਾ ਬਣਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਭੀੜ-ਭੜੱਕੇ ਨੂੰ ਘਟਾਏਗਾ।

ਇਹ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਨਿਊ ਇੰਡੀਆ ਦੇ ਵਿਜ਼ਨ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹਨ, ਜੋ ਖੇਤਰ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ "ਆਤਮਨਿਰਭਰ" ਬਣਾਉਣਗੇ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਵਿਆਪਕ ਵਿਕਾਸ ਹੋਵੇਗਾ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਰੋਜ਼ਗਾਰ/ਸਵੈ-ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਦੇ ਮੌਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੋਵੇਗਾ।

ਇਹ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਮਲਟੀ-ਮੋਡਲ ਕਨੈਕਟਿਵਿਟੀ ਦੇ ਲਈ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ-ਗਤੀ ਸ਼ਕਤੀ ਨੈਸ਼ਨਲ ਮਾਸਟਰ ਪਲਾਨ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਹਨ, ਜੋ ਏਕੀਕ੍ਰਿਤ ਯੋਜਨਾਬੰਦੀ ਦੁਆਰਾ ਸੰਭਵ ਹੋਏ ਹਨ ਅਤੇ ਲੋਕਾਂ, ਵਸਤਾਂ ਅਤੇ ਸੇਵਾਵਾਂ ਦੇ ਆਵਾਗਮਨ ਦੇ ਲਈ ਨਿਰਵਿਘਨ ਕਨੈਕਟਿਵਿਟੀ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨਗੇ।

 

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Text of PM's remarks at beginning of the Budget Session of Parliament
January 29, 2026
The President’s Address Reflects Confidence and Aspirations of 140 crore Indians: PM
India-EU Free Trade Agreement Opens Vast Opportunities for Youth, Farmers, and Manufacturers: PM
Our Government believes in Reform, Perform, Transform; Nation is moving Rapidly on Reform Express: PM
India’s Democracy and Demography are a Beacon of Hope for the World: PM
The time is for Solutions, Empowering Decisions and Accelerating Reforms: PM

नमस्कार साथियों!

कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था और 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवा, उनके एस्पिरेशन को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन, सभी सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक बातें भी, कल आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सदन में सबके सामने रखी हैं। सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रूप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा और यह सत्र अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण सत्र होता है। यह बजट सत्र है, 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, यह दूसरी चौथाई का प्रारंभ हो रहा है, और 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है और यह दूसरे क्वार्टर का, इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का यह पहला बजट आ रहा है और वित्त मंत्री निर्मला जी, देश की पहली वित्त मंत्री ऐसी हैं, महिला वित्त मंत्री ऐसी हैं, जो लगातार 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही है। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में रजिस्टर हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का प्रारंभ बहुत ही पॉजिटिव नोट के साथ शुरू हुआ है। आत्मविश्वास से भरा हिंदुस्तान आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है, आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय यूनियन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आने वाली दिशाएं कितनी उज्ज्वल हैं, भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है, उसकी एक झलक है। यह फ्री ट्रेड फॉर एंबिशियस भारत है, यह फ्री ट्रेड फॉर एस्पिरेशनल यूथ है, यह फ्री ट्रेड फॉर आत्मनिर्भर भारत है और मुझे पक्का विश्वास है, खास करके जो भारत के मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे इस अवसर को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। और मैं सभी प्रकार के उत्पादकों से यही कहूंगा कि जब भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसको कहते हैं, वैसा समझौता हुआ है तब, मेरे देश के उद्योगकार, मेरे देश के मैन्युफैक्चरर्स, अब तो बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब बहुत सस्ते में हमारा माल पहुंच जाएगा, इतने भाव से वो बैठे ना रहे, यह एक अवसर है, और इस अवसर का सबसे पहले मंत्र यह होता है, कि हम क्वालिटी पर बल दें, हम अब जब बाजार खुल गया है तो उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के बाजार में जाएं और अगर उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के जाते हैं, तो हम यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के खरीदारों से पैसे ही कमाते हैं इतना ही नहीं, क्वालिटी के कारण से उनका दिल जीत लेते हैं, और वो लंबे अरसे तक प्रभाव रहता है उसका, दशकों तक उसका प्रभाव रहता है। कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ नए गौरव को प्रस्थापित कर देता है और इसलिए 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता, हमारे देश के मछुआरे, हमारे देश के किसान, हमारे देश के युवा, सर्विस सेक्टर में जो लोग विश्व में अलग-अलग जगह पर जाने के उत्सुक हैं, उनके लिए बहुत बड़े अवसर लेकर के आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है, एक प्रकार से कॉन्फिडेंस कॉम्पिटेटिव और प्रोडक्टिव भारत की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।

साथियों,

देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की यह पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। और अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं, बहुत तेजी से चल पड़े हैं और मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं, इस रिफॉर्म एक्सप्रेसवे को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति को लगा रहे हैं और उसके कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को भी लगातार गति मिल रही है। देश लॉन्ग टर्म पेंडिंग प्रॉब्लम अब उससे निकल करके, लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के मार्ग पर मजबूती के साथ कदम रख रहा है। और जब लॉन्ग टर्म सॉल्यूशंस होते हैं, तब predictivity होती है, जो विश्व में एक भरोसा पैदा करती है! हमारे हर निर्णय में राष्ट्र की प्रगति यह हमारा लक्ष्य है, लेकिन हमारे सारे निर्णय ह्यूमन सेंट्रिक हैं। हमारी भूमिका, हमारी योजनाएं, ह्यूमन सेंट्रिक है। हम टेक्नोलॉजी के साथ स्पर्धा भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी को आत्मसात भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को स्वीकार भी करेंगे, लेकिन उसके साथ-साथ हम मानव केंद्रीय व्यवस्था को जरा भी कम नहीं आकेंगे, हम संवेदनशीलताओं की महत्वता को समझते हुए टेक्नोलॉजी की जुगलबंदी के साथ आगे बढ़ने के व्यू के साथ आगे सोचेंगे। जो हमारे टिकाकार रहते हैं साथी, हमारे प्रति पसंद ना पसंद का रवैया रहता है और लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है, लेकिन एक बात हर कोई कहता है, कि इस सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजनाओं को फाइलों तक नहीं, उसे लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। और यही हमारी जो परंपरा है, उसको हम आने वाले दिनों में रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ आगे बढ़ाने वाले हैं। भारत की डेमोक्रेसी और भारत की डेमोग्राफी, आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है, तब इस लोकतंत्र के मंदिर में हम विश्व समुदाय को भी कोई संदेश दें, हमारे सामर्थ्य का, हमारे लोकतंत्र के प्रति समर्पण का, लोकतंत्र की प्रक्रियाओं के द्वारा हुए निर्णय का सम्मान करने का यह अवसर है, और विश्व इसका जरूर स्वागत भी करता है, स्वीकार भी करता है। आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान के माध्यम से रोते बैठने का नहीं है, आज हिम्मत के साथ समाधानकारी निर्णयों का कालखंड है। मैं सभी माननीय सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे आएं, राष्ट्र के लिए आवश्यक समाधानों के दौर को हम गति दें, निर्णयों को हम शक्ति दें और लास्ट माइल डिलीवरी में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ें, साथियों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।