Development is the only solution for all problems related to poverty and unemployment: PM
India will progress only through the development of the States and for this the Centre and States have to work together: PM

देवियों और सज्‍जनों,

आज यहां अनेक शिलान्‍यास के और उद्घाटन के कार्यक्रम हुए। हम सब इस बात को अब भलीभांति समझने लगे हैं कि विकास का कोई पर्याय नहीं है। अगर हमें गरीबी से लड़ना है तो विकास करना होगा, हमें बेरोजगारी से लड़ना है, तो विकास करना होगा, हमें अशिक्षा से लड़ना है तो विकास करना होगा, यदि हमें आरोग्‍य की सुविधाएं मुहैया करानी होंगी तो विकास करना होगा। सब दुखों की अगर कोई एक दवाई है तो वो दवाई है – विकास। यह अच्‍छी बात है कि इन दिनों राज्‍यों के बीच भी विकास को लेकर एक स्‍पर्धा का माहौल बनता चला जा रहा है। राज्‍यों को लगने लगा है कि वो राज्‍य उस बात में मुझसे आगे निकल गया, अब हम कुछ कोशिश करेंगे, हम आगे निकलेंगे। आखिरकार देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों के विकास से ही आगे बढ़ने वाला है। इसलिए देश के विकास के लिए राज्‍यों का विकास.. इस मूलमंत्र को ले करके, केंद्र हो या राज्‍य हो, सबने मिलकर के काम करना, काम को आगे बढ़ाना, यह आवश्‍यक होता है।

विकास के कामों में राजनीति कितना नुकसान करती है उसका ब्‍यौरा आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी ने विस्‍तार से दिया। अटल जी के समय में जो काम.. छ: महीने मिलते तो पूरा हो जाता, उसको पूरा होते-होते आज 2015 आ गया। मैं नीतीश जी की बात से सहमत हूं कि अटल जी की सरकार का चुनाव यदि थोड़ी देर से होता, छ: महीने मिल जाते तो उस समय अटल जी के मार्गदर्शन में.. और यही के रेल मंत्री थे नीतीश जी, यह काम पूरा हो गया होता। वो सही बोल रहे हैं। लेकिन बाद में सरकार बदल गई और रेल मंत्री यहां से ऐसे आए कि काम को रोक दिया गया और हमारे आने के बाद उसको चालू किया गया। अब, राजनीति जो करते हैं करें लेकिन नुकसान बिहार का हुआ, बिहार की जनता का हुआ। नीतीश कुमार की इस व्‍यथा के साथ मैं भी अपना स्‍वर मिलाता हूं।



लेकिन मैं इस मत का हूं कि हमें विकास की यात्रा को निरंतर गति देना चाहिए। आज नीतीश जी ने बहुत अच्‍छी बातें बताई कि भई IIT है, हमें यहां की आवश्‍यकताओं के अनुसार और यहां की क्षमता के अनुसार नई-नई faculties को लाना चाहिए। मुझे विश्‍वास है कि नए परिसर की क्षमता इतनी है, 500 बीघा ज़मीन है.. यह होगा। हम तो कोशिश यह कर रहे हैं कि दुनिया में जो top cost faculties हों उनको भी भारत में लाया जाए ताकि भारत के हमारे युवकों को देश के लिए जो आवश्‍यक है, जिस राज्‍य में IIT हैं, वहां जो आवश्‍यक है, उन विषयों को बल दिया जाए। सिर्फ दिल्‍ली में बैठ करके योजनाएं बनाने का वक्‍त पूरा हो गया। अब तो राज्य के मन में जो भाव उठते हैं, उसकी जो आवश्यकताएं होती हैं, उसके अनुसार ही दिल्ली को ढलना चाहिए, ये मेरी सोच है औऱ मैं उसी को आगे बढ़ा रहा हूं।

आज यहां एक Incubation centre का प्रारंभ हो रहा है। ये Incubation centre मैं मानता हूं, ये एक बहुत बड़ा नजराना है। IIT complex, इमारत से भी ज्यादा, ये Incubation centre बहुत बड़ा महत्वपूर्ण हमारा initiative है। इसलिए मैं इस बात से convince हूं। मैं जिस प्रदेश से आया हूं, लोगों ने परिश्रम किया होगा, परमात्मा ने कृपा की होगी, लक्ष्मी ने वहां जाना पसंद किया होगा लेकिन ये भूमि है, जहां सरस्वती वास करती है। यहां के नौजवान तेजस्‍वी हैं। और मैं मानता हूं, यहां की जो तेजस्विता है वो पूरे हिंदुस्तान को तेजस्वी बना सके, ऐसी तेजस्विता इस धरती पर है। ..और मुझे विश्वास है कि ये जो Incubation centre हम सोच रहे हैं, बनाने जा रहे हैं, वो भी एक विशेष मकसद से है।

आज हम देख रहे हैं कि Medical services, health sector ये सिर्फ डॉक्टर नाड़ी पकड़ लें, चार सवाल पूछ लें और निर्णय नहीं होता कि बीमारी क्या है, दवाई क्या दें? ढेर सारे मशीनों के अंदर से शरीर को गुजारा जाता है, भांति-भांति मशीनों को शऱीर पर लगाया जाता है उसके बाद बीमारी तय होती है, उसके बाद उपचार तय होता है। पूरे Health Sector में Technology का प्रभाव इतना बढ़ा है, इतने नये-नये संसाधनों का आविष्‍कार हो रहा है। आज भारत को गरीब व्‍यक्ति को अगर इन संसाधनों को मुहैया कराना पड़े.. विदेशों से लाना बहुत महंगा पड़ रहा है। इस पटना की धरती पर बिहार के मेरे नौजवानों की प्रतिभा को एक अवसर दिया जा रहा है कि इस incubation centre में प्रमुख रूप से Electronic and Digital mechanics के साथ किस प्रकार से हम Health Sector के नये विषयों में आविष्‍कार करें, उसका उत्‍पादन करें ताकि हमारे गरीब से गरीब के लिए हमारे अस्‍पतालों में भारत में बने हुए उत्‍तम से उत्‍तम साधन तैयार हों, जिसका लाभ गरीब को मिले, उस दिशा में हम काम करें। इसलिए यह incubation Centre भले ही पटना की धरती पर बनने वाला हो, लेकिन वह हिंदुस्‍तान के गरीबों के आरोग्‍य की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने का एक अहम कार्यक्रम बनेगा, यह मैं देख रहा हूं।

आखिरकार विकास करना है तो infrastructure का बहुत महत्‍व होता है। अगर infrastructure को बहुत महत्‍व नहीं दिया गया तो हम बहुत पिछड़कर रह जाएंगे। बिहार में चाहे rail हो, road हो air हो, उसको infrastructure मिलें, उसकी connectivity बढ़े, capacity बढ़ें, इस पर हम बल दे रहे हैं। हिंदुस्‍तान में शायद अधिकतम रेलमंत्री यदि किसी राज्‍य ने दिये है तो बिहार ने दिये हैं। जमाने से जैसे यह रेल डिपार्टमेंट बिहार के लिए reservation है। रेल मंत्री तो मिले हैं, रेल देने का काम मेरे दिमाग में भरा पड़ा है। मैं रेल के माध्‍यम से बिहार के दूर-सुदूर इलाकों को कैसे जोड़ पाऊं, मुख्‍य धारा में विकास की.. यहां infrastructure आता है, उसको कैसे आगे बढ़ाऊं, इस दिशा में योजनाएं लेकर के आगे चल रहा हूं।

आज एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम हमने launch किया है। वैसे नीतीश जी ने धर्मेंद्र प्रधान जी की इतनी तारीफ कर दी है, उसी से मुझे समझ आता है कि इस प्रोजेक्‍ट का कितना महत्‍व है। नीतीश जी की बात सही है, आने वाले दिनों में जिस प्रकार से रोड का महत्‍व है, रेल का महत्‍व है वैसे ही गैस ग्रिड का भी महत्‍व है। पूरी economy में गैसे आधारित economy shape ले रही है और गैस पहुंचाने के लिए महंगा खर्चीला नेटवर्क खड़ा करना पड़ता है, infrastructure बनाना पड़ता है। मैं देख रहा हूं कि energy के sector में गैस की उपलब्धि उस देश की पूरी economy को बदल देती है। बिहार की economy को बदलने का एक बहुत बड़ा ताकतवर प्रयास.. गंगा तो हमारे पास है ही है, हम ऊर्जा गंगा को लेकर के आ रहे हैं आपके पास।



गैस पाइप लाइन बिछाएंगे सैंकड़ों किलोमीटर। पटना में पाइप लाइन से घर-घर गैस कैसे पहुंचे.. जैसे हमारे घर में गृहणी के kitchen में tap चालू करते ही पानी आता है, वैसे ही tap चालू करते ही गैस आ जाए, इसके लिए यह योजना है। हर परिवार को यह पहुंचे हैं .. सैंकड़ों किलोमीटर से दूर से पाइप लाइन आएगी, हां बड़ा महंगा कारोबार है लेकिन एक बार अगर वह लग गया तो सालों साल तक यहां के जीवन को भी लाभ होगा और यहां के quality of life में भी बहुत बड़ा फायदा होगा, economy में भी फायदा होगा।

जैसा नीतीश जी ने कहा कि बिजली का पैसा तक माफ कर दिया है, fertilizer कारखाने का। उस समय हमारे सुशील जी आया करते थे कि साहब हमसे 300 करोड़ क्‍यों ले रहे हो। लेकिन फिर भी बिहार ने तकलीफ झेल करके भी इस काम को किया है। वित्‍त मंत्री थे हमारे सुशील जी, कठिनाई होने के बावजूद भी किया। यह करने के बावजूद भी 10 साल बीत गए साहब, fertilizer कारखाने की किसी को याद नहीं आई। क्‍या गुनाह है बिहार का? बिहार की जेब से पैसा निकाल करके यहां की सरकार ने तकलीफ होने के बावजूद भी दिया लेकिन उसको रोक दिया गया। हमने तय किया है कि यह बिहार का यह हक है। यह fertilizer का काम चालू होगा। यहां के किसानों को सस्‍ता fertilizer मिले, यह काम हम करेंगे। बिहार की जनता का या बिहार की सरकार का कोई दोष नहीं था। बिहार की सरकार आगे आई थी। लेकिन काम रोक दिया गया। लेकिन भाईयों बहनों मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि यह काम भी पूरा होगा और नौजवानों को रोजगार भी मिलेगा और किसान को fertilizer भी पहुंचेगा, इसका पूरा प्रबंध करके हम आगे बढ़ेंगे।

भाईयों बहनों, विकास की इस अवधारणा में हमने यह भी हमेशा निरंतर प्रयास किया है, cooperative federalism का। हमारा मत है कि राज्‍यों को अगर सहायता मिले, राज्‍यों को अगर अवसर मिले तो देश के आगे बढ़ने की ताकत बहुत बढ़ जाएगी। इसलिए 14th finance commission जो कि लागू हुआ है, उसके कारण बहुत बड़ा लाभ राज्‍यों को हो रहा है। एक राज्‍य को हो रहा है, एक को नहीं हो रहा है, ऐसा नहीं है। सभी राज्‍यों को हो रहा है। इसलिए कोई बिहार को कम मिला, अधिक मिला, किसी और राज्‍य को कम मिला, अधिक मिला, ऐसा नहीं है। क्‍योंकि हमारी योजना है। आज स्थिति ऐसी है.. एक जमाना था भारत का खजाना जो था, केंद्र का और राज्‍य का उसमें से 65-70% खजाना दिल्‍ली की सरकार की तिजौरी में रहता था। 38-35% सभी राज्‍यों की मिला करके तिजौरी में रहता था। हमने ऐसा एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है, कठिन काम लिया है सर पर। लेकिन जैसा नीतीश जी ने कहा कि मोदी जी आप पर हमारी आशा है, उसको पूरा करने के लिए हमने एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है। वो फैसला है vote in finance commission जिसके कारण आने वाले दिनों में बिहार को .. अगर पांच साल के finance commission का मैं देखूं तो बिहार को 2015 से 2020 के दरम्यिान finance commission के द्वारा करीब-करीब पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं। पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं, जो पहले सिर्फ बीते हुए समय में सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपया मिला था। डेढ़ लाख का पौने चार लाख करोड़ रुपया आने वाले दिनों में.. क्‍योंकि हम मानते हैं कि यह प्रदेश आगे बढ़ना चाहिए।

मेरा यह विश्‍वास है कि पूरब में जब तक प्रगति नहीं होती है, देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता। चाहे बिहार हो, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे ओडि़शा हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे झारखंड हो असम हो, नागालैंड हो, मिजोरम हो, यह सारा हिंदुस्‍तान का पूर्वी भाग यह जब विकसित नहीं होता है, यह भारत माता हमारी समृध नहीं हो सकती है। इसलिए बिहार का विकास, यह हमारा प्राइम एजेंडा है। पूर्वी भारत का विकास, हमारा मकसद है, हमारा लक्ष्‍य है। उसको आगे बढ़ाने के लिए अनेक विध हम नई योजनाएं लाने वाले हैं, उसको पूरा करेंगे।

आने वाले कुछ दिनों में हमारे कुछ साथियों से मैंने कहा है कि आप जाइये, शिलान्‍यास कीजिए, उद्घाटन कीजिए, काम को आगे बढ़ाइये। जैसे मुजफ्फरपुर स्‍वर्ण-वर्ष नेशनल हाइवे, 77 किलोमीटर को double lane करने का काम पूर्ण हो चुका है। करीब छ: सौ करोड़ रुपया की लागत लगी है। पटना-गया-डोबी रोड के four laning का काम मंजूर हो गया है। करीब 1231 करोड़ रुपये की लागत है। पटना-कोयलावर-भोजपुर और भोजपुर-बक्‍सर रोड के भी four laning का काम मंजूर हो चुका है। लागत है करीब 2012 करोड़ रुपया। भागलपुर बाइपास का काम मंजूर हो गया है। लागत है करीब 230 करोड़ रुपया। शिवहरी-सीतामढ़ी-जयनगर-निरहिया रोड का भी सुधार मंजूर कर दिया गया है। लागत है करीब 701 करोड़ रुपया। फतवा-हरनोद-बारा रोड का काम भी मंजूर कर दिया है। लागत है करीब 590 करोड़ रुपया। यह सारे नेशनल हाइवे के प्रोजेक्‍ट जो इस सरकार ने already मंजूर कर दिये हैं, इन सबकी लागत होती है करीब-करीब पांच हजार करोड़ रुपया। क्‍योंकि मैं जानता हूं कि बिहार को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए इन चीजों का भरपूर उपयोग होना चाहिए। और हम इसको करना चाहते हैं।



आपको याद होगा पिछले लोकसभा के चुनाव में मैं यहां आया था। गांधी मैदान में बम धमाकों के बीच, मैं भाषण कर रहा था। उस समय मैंने कहा था कि केंद्र में हम सत्‍ता में आएंगे तो बिहार को विशेष पैकेज देंगे। उस समय मैंने घोषणा की थी.. चुनाव के पहले मैंने घोषणा की थी, मैंने कहा था कि 50 हजार करोड़ रुपयों का पैकेज बिहार को दिया जाएगा। भाईयों बहनों मैं जब दिल्‍ली में बैठा, बारीकी से चीजों को देखा तो मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि मेरे दिल दिमाग में बिहार की जो कल्‍पना है, बिहार को अगर मुझे उस ऊंचाई पर ले जाने में बिहार को साथ लेकर के चलना है तो 50 हजार करोड़ से बात बनने वाली नहीं है। उसे और अधिक करने की आवश्‍यकता है। मैं आज उसकी घोषणा नहीं करूंगा, मैं सही समय पर आ करके उसकी घोषणा करूंगा, लेकिन मैं इतना कहता हूं कि मैंने जो वादा किया उसको तो निभाऊंगा, उससे भी आगे मामला ले जाऊंगा, यह आपको मैं वादा करने आया हूं। ताकि बिहार को विकास की यात्रा में कोई रूकावट नहीं आनी चाहिए और विकास की यात्रा तेज गति से आगे बढ़नी चाहिए।

इसी एक अपेक्षा के साथ, मुझे विश्‍वास है कि आज जिन योजनाओं का आरंभ हुआ है, जिन कार्यक्रमों की शुरूआत हो गई है, और भी हमारे मंत्रिगण के लोग आने वाले हैं, वो इस बात को आगे बढ़ाएंगे। आज यहां पर देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को मैंने बुलाया है, पटना की धरती पर। अब इस कार्यक्रम के बाद उनके साथ बैठने वाला हूं, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि हिंदुस्‍तान की second green revolution की संभावना अगर कहीं है, तो हिंदुस्‍तान के पूर्वी इलाके में हैं। बिहार में है, बंगाल में है, असम में है, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में है। second green revolution की संभावना इस इलाके में है। इसलिए मैंने देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को आज पटना की धरती पर बुलाया है। वो यहां बैठ करके विचार-विमर्श करने वाले हैं। आने वाले दिनों में यहां के कृषि क्षेत्र को एक नई ताकत देने की दिशा में प्रयास करने वाले हैं।

मैं फिर एक बार बिहार सरकार का, बिहार की जनता-जर्नादन का, यहां के मुख्‍यमंत्री जी का स्‍वागत सम्‍मान के लिए हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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‘ବିକଶିତ ଭାରତ ସଙ୍କଳ୍ପ ପାଇଁ ନିଶାମୁକ୍ତ ଯୁବ’ ଅଭିଯାନର ଶୁଭାରମ୍ଭ ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣର
August 02, 2026
I urge every citizen, especially our youth, to join this movement: PM
Today, as the nation has set the goal of a Viksit Bharat, it is imperative that the country's youth remain fit, brimming with self-confidence and permanently steer clear of drugs: PM
We must protect every youth from falling into the trap of addiction: PM
Society’ support, yoga and meditation give strength to our inner selves against addiction and today facilities like rehabilitation centers also help quit addiction: PM
Even if a youth has mistakenly fallen into the trap of addiction, it absolutely does not mean that all doors are closed for them: PM
We must always remember that if a child in the house falls victim to addiction, we must not hide it but seek medical help to free the child from addiction: PM
We should also create a culture of open communication with children in the family, so that you can hold their hand before they get caught in such a whirlpool: PM
I appeal to our professors to discuss the perils of drug abuse with their students and spearhead a movement against addiction on campuses to achieve significant results: PM

ନମସ୍କାର!

ଆଜି, ଆମେ ସମସ୍ତ ଦେଶବାସୀ ଏକ ମହାନ ଏବଂ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ସଙ୍କଳ୍ପ ସାକାର ପାଇଁ ଏକତ୍ରିତ ହୋଇଛୁ। ଏହି ପବିତ୍ର ଅବସରରେ, ଏହି ସଙ୍କଳ୍ପକୁ ନେଇ ଆୟୋଜିତ ଏବଂ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ସହ ଜଡିତ ସମସ୍ତ ପୂଜ୍ୟ ସନ୍ଥମହାତ୍ମାମାନଙ୍କୁ, ବିଭିନ୍ନ ରାଜ୍ୟର ପ୍ରତିନିଧିତ୍ୱ କରୁଥିବା ସମସ୍ତ ରାଜ୍ୟପାଳ, ସମସ୍ତ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ, ଅନ୍ୟ ସମସ୍ତ ଜନପ୍ରତିନିଧିବୃନ୍ଦ ଏବଂ ଦେଶର ୨୮ ହଜାରରୁ ଅଧିକ ସ୍ଥାନରୁ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ଯୋଡ଼ିହୋଇଥିବା ଏକ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନଙ୍କୁ ମୁଁ ହାର୍ଦ୍ଦିକ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ଆଜି ଆମେ ସମସ୍ତେ ଯେଉଁ ଅଭିଯାନର ସାକ୍ଷୀ ହୋଇଛୁ, ସେହି ଅଭିଯାନ କେବଳ ଜଣେ ବ୍ୟକ୍ତି ପାଇଁ ନୁହେଁ; ଏହା ପରିବାର ପାଇଁ, ସମାଜ ପାଇଁ ଏବଂ ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ କଥା ହେଉଛି, ଏହା ସମଗ୍ର ରାଷ୍ଟ୍ର ପାଇଁ ଉତ୍ସର୍ଗୀକୃତ ଏକ ଅଭିଯାନ।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

‘ବିକଶିତ ଭାରତ ସଙ୍କଳ୍ପ ଅଭିଯାନ’ ପାଇଁ ‘ନିଶା ମୁକ୍ତ ଯୁବ’ ଆନ୍ଦୋଳନର ନାମ ହିଁ ଏହାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟକୁ ସ୍ପଷ୍ଟ ଭାବରେ ପ୍ରତିଫଳିତ କରୁଛି। ଦେଶ ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରୟାସ କରୁଥିବାରୁ, ଆମର ଯୁବପିଢ଼ି ଶାରୀରିକ ଏବଂ ମାନସିକ ଭାବରେ ସୁସ୍ଥ ରହିବା, ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ ହେବା ଏବଂ ନିଶା ସେବନ ଭଳି ଘାତକ ଅଭ୍ୟାସର କବଳରୁ ସର୍ବଦା ମୁକ୍ତ ରହିବା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଜରୁରୀ। ଏହା ହେଉଛି ଅଭିଯାନର ମୂଳ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ। ସେଥିପାଇଁ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଏହି ସଙ୍କଳ୍ପ ନେବାକୁ ହେବ ଯେ, ଆମର ଯୁବପିଢ଼ି ନିଶା ଓ ଡ୍ରଗ୍ସର କୁପ୍ରଭାବକୁ ଭଲଭାବରେ ବୁଝିବେ, ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ସଚେତନ ରହିବେ ଏବଂ ଏହାଠାରୁ ଦୂରେଇ ରହିବେ। ଏହି ସଙ୍କଳ୍ପକୁ ସାକାର କରିବାରେ ‘ଜାତୀୟ ନିଶା ମୁକ୍ତ ଯୁବ ଅଭିଯାନ’ ଏକ ବଡ଼ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରିବ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

କାଶୀର ସାଂସଦ ଭାବରେ, ମୁଁ ଖୁସି ଯେ, ଏହି ଅଭିଯାନ ଗତ ବର୍ଷ କାଶୀର ପବିତ୍ର ଭୂମିରୁ ଏକ ପାଇଲଟ୍ ପ୍ରକଳ୍ପ ଭାବରେ ଆରମ୍ଭ କରାଯାଇଥିଲା। ସେଥିପାଇଁ ଏହି ଅଭିଯାନରେ ବୈଜ୍ଞାନିକ ସ୍ପଷ୍ଟତା ସହିତ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ଶକ୍ତି, ସନ୍ଥମହାତ୍ମାମାନଙ୍କର ଆଶୀର୍ବାଦ ଏବଂ ଆମର ମହାନ ସାଂସ୍କୃତିକ ଐତିହ୍ୟର ପ୍ରେରଣା ମଧ୍ୟ ନିହିତ ରହିଛି। ଏଥିରେ ସେହି ସାଂସ୍କୃତିକ ସମର୍ପଣର ଭାବନା ମଧ୍ୟ ଜଡିତ ରହିଛି, ଯାହା ଶତାବ୍ଦୀ ଶତାବ୍ଦୀ ଧରି ନିଶାକୁ ପ୍ରତ୍ୟାଖ୍ୟାନ କରିଆସିଛି। ଏହି କାରଣରୁ ଦେଶର ୧୨୫ରୁ ଅଧିକ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ସଂଗଠନ କୋଟି କୋଟି ଦେଶବାସୀଙ୍କ କଲ୍ୟାଣ ପାଇଁ ଆଜି ଆମ ସହ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି। ସାମାଜିକ ସଂଗଠନ ଏବଂ ବିଭିନ୍ନ ଏନ୍‌ଜିଓ ମଧ୍ୟ ଏହି ଦିଗରେ ସଙ୍କଳ୍ପବଦ୍ଧ ହୋଇଛନ୍ତି। ସମସ୍ତେ ମିଶି ‘କାଶୀ ଘୋଷଣାନାମା’ ମାଧ୍ୟମରେ ଏକ ରୋଡମ୍ୟାପ୍ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିଛନ୍ତି। ଆଜି ଆମେ ଦେଖୁଛୁ, କାଶୀରୁ ଆରମ୍ଭ ହୋଇଥିବା ସେହି କଲ୍ୟାଣକାରୀ ପଦକ୍ଷେପ ଏବେ ଏକ ଜାତୀୟ ପ୍ରକଳ୍ପରେ ପରିଣତ ହୋଇଛି। ଆଜିଠାରୁ ସମଗ୍ର ଦେଶରେ ‘ନିଶାମୁକ୍ତ ଯୁବ’ ଅଭିଯାନର ଶୁଭାରମ୍ଭ ହେଉଛି।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

କିଛି କାମ ଏପରି ଥାଏ, ଯାହାକୁ କୌଣସି ବ୍ୟକ୍ତି ଏକାକୀ କରିବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କଲେ ବେଳେବେଳେ ନିରାଶ ହୋଇଯାଏ, ଥକ୍କାପଣ ଅନୁଭବ କରେ ଏବଂ ଦୀର୍ଘ ଯାତ୍ରା କରିବା ପାଇଁ ମନ ପ୍ରସ୍ତୁତ ହୋଇପାରେ ନାହିଁ। କିନ୍ତୁ ସେହି କାମ ଯେତେବେଳେ ଏକ ସାମୂହିକ ଅଭିଯାନର ରୂପ ନିଏ, କୋଟି କୋଟି ଲୋକ କାନ୍ଧକୁ କାନ୍ଧ ମିଳାଇ ଏକାଠି ଆଗକୁ ବଢ଼ନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଯେଉଁମାନେ ବ୍ୟକ୍ତିଗତ ଭାବେ କିଛି କରିପାରୁ ନଥିଲେ, ସେମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଏକ ନୂତନ ଶକ୍ତି ମିଳିଥାଏ। ସାମୂହିକ ପ୍ରୟାସର ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ଶକ୍ତି ଥାଏ ଏବଂ ଆଜି ସେହି ଶକ୍ତିକୁ ନେଇ ଏହି ଅଭିଯାନ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୁବ ହୃଦୟକୁ ସ୍ପର୍ଶ କରିବାକୁ ଯାଉଛି। କିଛି ସମୟ ପୂର୍ବରୁ ଦେଶର ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଯୁବକ ଓ ଯୁବତୀ ନିଶାମୁକ୍ତିର ଶପଥ ନେଇଛନ୍ତି। ଆପଣମାନେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ନିଶାଠାରୁ ଦୂରେଇ ରଖିବାର ସଙ୍କଳ୍ପ ନେଇଛନ୍ତି। ଆପଣମାନେ ନିଜ ବିଦ୍ୟାଳୟ, ନିଜ ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ଏବଂ ନିଜ ସମାଜରେ ନିଶାମୁକ୍ତିର ବାର୍ତ୍ତା ପହଞ୍ଚାଇବା ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ସଙ୍କଳ୍ପବଦ୍ଧ ହୋଇଛନ୍ତି।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆଜି ନିଆଯାଇଥିବା ଏହି ସଙ୍କଳ୍ପ ଆଗାମୀ ୧୦୦ ସପ୍ତାହ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏଭଳି ନିରନ୍ତର ଆଗକୁ ବଢ଼ିଚାଲିବ। ପ୍ରତ୍ୟେକ ରବିବାର କଳା, ସଂସ୍କୃତି, କ୍ରୀଡ଼ା, ଧ୍ୟାନ, ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକତା ଏବଂ ସମାଜ ସେବା ସହ ଜଡ଼ିତ ବିଭିନ୍ନ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଆୟୋଜିତ ହେବ। ନିଶାମୁକ୍ତ ଜୀବନର ବାର୍ତ୍ତା ନୂତନ ଲୋକଙ୍କ ପାଖରେ ପହଞ୍ଚିବ। ଆଗାମୀ ୧୦୦ଟି ରବିବାର ନିଶାମୁକ୍ତ ଭାରତ ଦିଗରେ ୧୦୦ଟି ସୁଦୃଢ଼ ପଦକ୍ଷେପ ପ୍ରମାଣିତ ହେବ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆଜି ହଜାର ହଜାର ବିଦ୍ୟାଳୟ, ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ଏବଂ ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟର ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ସହ ଅନଲାଇନ୍ ମାଧ୍ୟମରେ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି। ‘ମାଇ ଭାରତ’ର ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବକମାନେ ମଧ୍ୟ ଲକ୍ଷାଧିକ ସଂଖ୍ୟାରେ ଆଜି ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ସାମିଲ ହୋଇଛନ୍ତି। ମୋର ଏନ୍‌ଏସ୍‌ଏସ୍‌’ର ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନେ ମଧ୍ୟ ଆଜି ଆମ ସହ ଉପସ୍ଥିତ ଅଛନ୍ତି। ଦେଶର ବିଭିନ୍ନ ଅଞ୍ଚଳରୁ, ବିଭିନ୍ନ ଅନୁଷ୍ଠାନରୁ ଏବଂ ବିଭିନ୍ନ ପୃଷ୍ଠଭୂମିରୁ ଏକ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଯୁବପିଢ଼ି ଆଜି ଏକାଠି ହୋଇଛନ୍ତି। ମୋର ଆପଣମାନଙ୍କ ପ୍ରତି ଅନୁରୋଧ, ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଏହି ବିଶାଳ ଆନ୍ଦୋଳନର ନେତୃତ୍ୱ ନିଅନ୍ତୁ। ଆପଣମାନେ ମୋର ଏହି ବିଶ୍ୱାସକୁ ଆହୁରି ଦୃଢ଼ କରିଛନ୍ତି ଯେ, ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ି କେତେ ସଚେତନ, କେତେ ସମବେଦନାପୂର୍ଣ୍ଣ ଏବଂ ନିଜର କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ପ୍ରତି କେତେ ଗମ୍ଭୀର। ଏହି ଅଭିଯାନର ସଫଳତା ପାଇଁ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଅନେକ ଅନେକ ଶୁଭକାମନା ଜଣାଉଛି।

 ମୋର ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନେ,

ଆପଣମାନେ ଭାରତର ଅମୃତ ପିଢ଼ି (ଅମୃତ ଭଳି ଯୁଗର ପିଢ଼ି)। ଆସନ୍ତା ୨୦-୨୫ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆପଣମାନେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ଦିଗ୍‌ଦର୍ଶନ ଦେବେ ଏବଂ ଆପଣମାନେ ହିଁ ୨୦୪୭ ମସିହା ସୁଦ୍ଧା ଦେଶକୁ ବିକଶିତ ଭାରତର ଲକ୍ଷ୍ୟରେ ପହଞ୍ଚାଇବେ। ସେହି ବିକଶିତ ଭାରତର ଶିଖରରେ ଆପଣମାନେ ହିଁ ରହିବେ ଏବଂ ତାହାର ସମସ୍ତ ସଫଳତା ଓ ଗୌରବର ଫଳ ଉପଭୋଗ କରିବାର ସୁଯୋଗ ମଧ୍ୟ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ହିଁ ମିଳିବ। ଦେଶକୁ ଆପଣମାନଙ୍କର ଶକ୍ତି, ଆପଣମାନଙ୍କର କଳ୍ପନାଶକ୍ତି ଏବଂ ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରତିଭାର ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି। ସେଥିପାଇଁ ଦେଶର ସ୍ୱାର୍ଥରେ ଏବଂ ନିଜ ଜୀବନର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ, ନିଜକୁ ନିଶାମୁକ୍ତ ରଖିବା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଜରୁରୀ। ନିଶା ମଣିଷର ଲକ୍ଷ୍ୟରୁ ଧ୍ୟାନକୁ ବିଚ୍ୟୁତ କରିଦିଏ ଏବଂ ଧୀରେ ଧୀରେ ଜଣେ ଯୁବକଙ୍କୁ ତାଙ୍କ ନିଜ ସ୍ୱପ୍ନଠାରୁ ଦୂରକୁ ନେଇଯାଏ। କିଛି ସମୟ ପୂର୍ବରୁ ଯେଉଁ ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନେ ନାଟ୍ୟ ପରିବେଷଣ କରିଥିଲେ, ସେମାନେ ଅତ୍ୟନ୍ତ କମ୍ ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ଖୁବ ସୁନ୍ଦର ଭାବରେ ସମସ୍ୟାକୁ ଉପସ୍ଥାପନ କରିଥିଲେ। ସେମାନେ ଏହି ସମସ୍ୟାରୁ ସୃଷ୍ଟି ହେଉଥିବା ସଙ୍କଟକୁ ମଧ୍ୟ ଦେଖାଇଥିଲେ ଏବଂ ଏଥିରୁ ମୁକ୍ତି ପାଇବା ପାଇଁ ସାମୂହିକ ପ୍ରୟାସର ପଥ ମଧ୍ୟ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିଥିଲେ। ନାଟ୍ୟ ପରିବେଷଣଟି ସଂକ୍ଷିପ୍ତ ଥିଲା, କିନ୍ତୁ ସେମାନେ ଯେପରି କହିଥିଲେ- “ଆସନ୍ତୁ, ଆମେ ନାଟକ ଦେଖିବା!” ଏହା କେବଳ ଏକ ନାଟକ ନଥିଲା; ଏହା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ଅତ୍ୟନ୍ତ ମହତ୍ତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ବାର୍ତ୍ତା ଥିଲା। ଏହା ଆମକୁ ସଚେତନ କରୁଥିଲା, ଆମକୁ ଜାଗ୍ରତ କରୁଥିଲା ଏବଂ ଏହି ସମସ୍ୟା ବିରୋଧରେ ସଂଘର୍ଷ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରେରଣା ଯୋଗାଉଥିଲା।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆଜିକାଲି ଆମେ ଦେଖୁଛୁ, ଆଜିର ଯୁବପିଢ଼ି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଜଗତରେ ନିଜର ଛାପ ଛାଡ଼ୁଛନ୍ତି, କୃତ୍ରିମ ବୁଦ୍ଧିମତ୍ତା (ଏଆଇ) କ୍ଷେତ୍ରରେ ନେତୃତ୍ୱ ନେଉଛନ୍ତି, କ୍ରୀଡ଼ା କ୍ଷେତ୍ରରେ ତ୍ରିରଙ୍ଗାକୁ ଗର୍ବର ସହ ଉଡ଼ାଉଛନ୍ତି ଏବଂ ମହାକାଶରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ବିଜ୍ଞାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ନୂଆ ନୂଆ କୀର୍ତ୍ତିମାନ ସ୍ଥାପନ କରୁଛନ୍ତି। କିନ୍ତୁ ବନ୍ଧୁଗଣ, ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ଯୁବକ ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟର ଶିକାର ହୋଇଥାଏ, ସେତେବେଳେ କେବଳ ଜଣେ ଯୁବକ ପରାଜିତ ହୁଏ ନାହିଁ; ଏକ ସ୍ୱପ୍ନ ପରାଜିତ ହୁଏ। ସେହି ସ୍ୱପ୍ନର ଅକାଳ ମୃତ୍ୟୁ ଘଟେ। ଏକ ପରିବାର ଭାଙ୍ଗିପଡ଼େ। ସମଗ୍ର ପରିବାର ଛିନ୍ନଭିନ୍ନ ହୋଇଯାଏ ଏବଂ ସମାଜରେ ମଧ୍ୟ ଅବହେଳା ଓ ଘୃଣାର ଶିକାର ହୁଏ। ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ କେବଳ ଶରୀରକୁ କ୍ଷତି ପହଞ୍ଚାଏ ନାହିଁ; ଏହା ଜଣେ ମାଆଙ୍କ ମୁହଁରୁ ହସ ଛଡ଼ାଇ ନେଇଥାଏ। ଏହା ଜଣେ ବାପାଙ୍କର ସ୍ୱପ୍ନକୁ ଚୂର୍ଣ୍ଣବିଚୂର୍ଣ୍ଣ କରିଦିଏ। ଏହା ଜଣେ ଭଉଣୀଙ୍କ ରାକ୍ଷୀର ଆଶାକୁ ଦୁର୍ବଳ କରିଦିଏ। ଏହା ଜଣେ ସାନ ଭାଇଙ୍କ ଆଦର୍ଶକୁ ଛଡ଼ାଇ ନେଇଥାଏ। ଘରର ବୟୋଜ୍ୟେଷ୍ଠମାନେ ପ୍ରତିଦିନ ଏହି ଯନ୍ତ୍ରଣାକୁ ଅନୁଭବ କରନ୍ତି ଯେ, ସେମାନଙ୍କର ନିଜ ସନ୍ତାନ ଧୀରେ ଧୀରେ ନିଜକୁ ହରାଇ ଚାଲିଛି, ନିଜକୁ ଧ୍ୱଂସ କରୁଛି, ତିଳ ତିଳ କରି କ୍ଷୟ ହେଉଛି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ଆଖି ଆଗରେ ହିଁ ନଷ୍ଟ ହୋଇଯାଉଛି। ଯେତେବେଳେ ପରିବାର ଓ ସମାଜରେ ଏପରି ଘଟଣା ଘଟେ, ସେତେବେଳେ କେଉଁଠି ନା କେଉଁଠି ରାଷ୍ଟ୍ରର ଶକ୍ତି ମଧ୍ୟ ଦୁର୍ବଳ ହୋଇପଡ଼େ। ଏହି କାରଣରୁ ଶତ୍ରୁ ଦେଶମାନେ ମଧ୍ୟ ଷଡଯନ୍ତ୍ର କରି ଆମ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ନିଶାର କବଳକୁ ଟାଣି ନେବା ପାଇଁ କୌଣସି ଉଦ୍ୟମ ବାକି ରଖନ୍ତି ନାହିଁ। ଡ୍ରଗ୍ସ ଯୋଗାଣ ଦ୍ୱାରା ଅର୍ଥ ଉପାର୍ଜନ କରିବା ଏବଂ ଭାରତ ଭଳି ଏକ ଦେଶକୁ ଧ୍ୱଂସ କରିବା ସେମାନଙ୍କ ଆତଙ୍କବାଦୀ ଷଡଯନ୍ତ୍ରର ଏକ ଅଂଶ। ସେଥିପାଇଁ ଆମକୁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୁବକଙ୍କୁ ନିଶାର କବଳରେ ପଡ଼ିବାରୁ ସୁରକ୍ଷିତ ରଖିବାକୁ ହେବ।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ନିଶାମୁକ୍ତ ରହି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ନିଜର ସାମର୍ଥ୍ୟର ସୁରକ୍ଷା କରିବାକୁ ହେବ। ଆପଣମାନେ ସବୁବେଳେ ମନେ ରଖିବେ ଯେ, ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ କିଛି ସମୟ ପାଇଁ ହୁଏତ ନିଶାର ‘ଉଚ୍ଚ’ ଉନ୍ମାଦ ଅନୁଭୂତି ଦେଇଥାଏ, କିନ୍ତୁ ଏହା ଆପଣଙ୍କ କ୍ୟାରିୟର ଏବଂ ପାରିବାରିକ ଜୀବନକୁ ‘ନିଚ’ ସ୍ତରକୁ ଟାଣି ନେଇଯାଏ। ତେଣୁ କୌଣସି ପରିସ୍ଥିତିରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ନିଶାକୁ ସାମାଜିକ ସ୍ୱୀକୃତି ଦେବା ଉଚିତ୍ ନୁହେଁ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆମ ସମାଜରେ ସବୁବେଳେ ନିଶାକୁ ଏକ ସାମାଜିକ କୁପ୍ରଥା ଭାବେ ଦେଖାଯାଇଛି। ଆମ ସନ୍ଥ ଓ ଗୁରୁମାନେ ସଦାସର୍ବଦା ଏହାଠାରୁ ଦୂରେଇ ରହିବା ପାଇଁ ଆମକୁ ସତର୍କ କରିଆସିଛନ୍ତି। ଶ୍ରୀ ଗୁରୁ ଗ୍ରନ୍ଥ ସାହିବରେ ମଧ୍ୟ କୁହାଯାଇଛି-

“ଜିତୁ ପୀତୈ ମତି ଦୂରି ହୋଇ, ବରଲୁ ପବୈ ବିଚି ଆଇ।

ଆପଣା ପରାଇଆ ନ ପଛାଣଇ, ଖସମହୁ ଧକେ ଖାଇ॥”

 ଅର୍ଥାତ୍, ଯେଉଁ ପଦାର୍ଥର ସେବନ ଦ୍ୱାରା ମଣିଷର ବୁଦ୍ଧି ଓ ବିବେକ ନଷ୍ଟ ହୋଇଯାଏ, ସେ ନିଜ-ପରର ଭେଦଭାବ ଭୁଲିଯାଏ, ସେହିପରି ନିଶା ତାକୁ ଅଧୋଗତି ଓ ପତନର ପଥକୁ ନେଇଯାଏ।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆମ ସଂସ୍କୃତିରେ ନିଶାରୁ ବଞ୍ଚିବା ପାଇଁ ସଚେତନବାଣୀ ଦିଆଯାଇଛି ଏବଂ ଯଦି କେହି ନିଶାର କବଳରେ ପଡ଼ିଯାଆନ୍ତି, ତାହାରୁ ମୁକ୍ତି ପାଇବାର ଉପାୟ ମଧ୍ୟ ବତାଇ ଦିଆଯାଇଛି। ସମାଜର ସହଯୋଗ, ଯୋଗ ଓ ଧ୍ୟାନର ଶକ୍ତି ନିଶା ବିରୋଧରେ ଆମର ଅନ୍ତରାତ୍ମାକୁ ଦୃଢ଼ କରିଥାଏ। ଆଜି ନିଶା ଛାଡ଼ିବା ପାଇଁ ପୁନର୍ବାସ କେନ୍ଦ୍ର ପରି ସୁବିଧା ମଧ୍ୟ ଉପଲବ୍ଧ ଅଛି। ତେଣୁ ଯଦି କୌଣସି ଯୁବକ ଅଜାଣତରେ ନିଶାର ଶିକାର ହୋଇଯାଏ, ତାହାର ଅର୍ଥ ଏହା ନୁହେଁ ଯେ ତାଙ୍କ ପାଇଁ ସମସ୍ତ ରାସ୍ତା ବନ୍ଦ ହୋଇଗଲା। ଆମେ ସର୍ବଦା ଏହି କଥା ମନେ ରଖିବା ଉଚିତ ଯେ, ଘରର କୌଣସି ପିଲା ଯଦି ନିଶାର ଶିକାର ହୋଇଥାଏ, ତେବେ ସାମାଜିକ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କ୍ଷୁର୍ଣ୍ଣ ହେବାର ଭୟରେ ଏହାକୁ ଲୁଚାଇବା ଉଚିତ ନୁହେଁ। ଯେଉଁଠି ସହାୟତାର ଆବଶ୍ୟକତା ଅଛି, ସେଠାରେ ସହଯୋଗ ମାଗନ୍ତୁ, ତାଙ୍କ ସହ ଖୋଲାଖୋଲି କଥା ହୁଅନ୍ତୁ ଏବଂ ବିଶେଷଜ୍ଞମାନଙ୍କ ପରାମର୍ଶ ନିଅନ୍ତୁ। ଚିକିତ୍ସା ସହାୟତା ନେଇ ନିଜ ସନ୍ତାନଙ୍କୁ ନିଶାମୁକ୍ତ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରୟାସ କରନ୍ତୁ। ଆମ ପରିବାରରେ ପିଲାମାନଙ୍କ ସହ ଖୋଲାଖୋଲି ଆଲୋଚନାର ଏକ ସଂସ୍କୃତି ଗଢ଼ି ତୋଳିବା ମଧ୍ୟ ଆବଶ୍ୟକ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ସେମାନେ ଏପରି ବିପଦର ସମ୍ମୁଖୀନ ହେବା ପୂର୍ବରୁ ଆମେ ସେମାନଙ୍କର ମାର୍ଗଦର୍ଶନ କରିପାରିବା। ଅଭିଭାବକମାନେ ଟିକେ ସତର୍କ ରହିଲେ ଏହାର ସଙ୍କେତ ସହଜରେ ପାଇପାରିବେ। ଯଦି ପିଲାର ବ୍ୟବହାରରେ ପରିବର୍ତ୍ତନ ଆସୁଛି, ସେ ସବୁବେଳେ ଅନ୍ୟମନସ୍କ ରହୁଛି, ମୁହଁ ଲୁଚାଉଛି, ନିଜକୁ କୋଠରୀରେ ବନ୍ଦ ରଖୁଛି, ବିଳମ୍ବିତ ରାତିରେ ଘରକୁ ଫେରୁଛି କିମ୍ବା ବାରମ୍ବାର ଅସ୍ୱାଭାବିକ ଭାବେ ଟଙ୍କା ମାଗୁଛି, ତେବେ ଏସବୁ ସଙ୍କେତରୁ ବୁଝିହେବ ଯେ, କିଛି ନା କିଛି ଅସୁବିଧା ହେଉଛି। ଏପରି ସମୟରେ ସଚେତନ ହୋଇ ଠିକ୍ ସମୟରେ ପଦକ୍ଷେପ ନେବା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଜରୁରୀ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ମୁଁ ଆମ କଲେଜ ଓ ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟର ପ୍ରଫେସର ବନ୍ଧୁମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଏକ ନିବେଦନ କରିବାକୁ ଚାହୁଚି। ଆପଣମାନେ ପାଠ୍ୟକ୍ରମର ପାଠପଢା ସହିତ ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀମାନଙ୍କ ସହ ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟର କୁପ୍ରଭାବ ବିଷୟରେ ମଧ୍ୟ ଆଲୋଚନା କରନ୍ତୁ। ନିଶା ବିରୋଧରେ ନିଜ ଶିକ୍ଷାନୁଷ୍ଠାନ ପରିସରରେ ଏକ ସଚେତନତା ଆନ୍ଦୋଳନ ଆରମ୍ଭ କରନ୍ତୁ। ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରୟାସ ବହୁତ ବଡ଼ ବଡ଼ ପରିଣାମ ଆଣିପାରିବ। ଏଥିସହିତ ବନ୍ଧୁଗଣ, ଆମକୁ ଆଉ ଏକ କଥା ମଧ୍ୟ ମନେ ରଖିବାକୁ ହେବ। ଯେଉଁ ଯୁବକ-ଯୁବତୀମାନେ ନିଶା ବିରୋଧରେ ସଂଘର୍ଷ କରି ସେଥିରୁ ମୁକ୍ତି ପାଇଛନ୍ତି, ସେମାନେ ଦୁର୍ବଳ ନୁହନ୍ତି; ବରଂ ଯିଏ ନିଶାକୁ ପରାସ୍ତ କରି ବାହାରି ଆସିଛି, ସେ ହିଁ ପ୍ରକୃତ ଯୋଦ୍ଧା। ସମାଜ ସେମାନଙ୍କୁ ସମ୍ମାନ ଦେବା ଉଚିତ, ଆପଣାର କରିବା ଉଚିତ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କୁ ଜୀବନରେ ଦ୍ୱିତୀୟ ସୁଯୋଗ ଦେବା ଉଚିତ। କାରଣ ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ ସହ ଜଡ଼ିତ କାହାରି ଅତୀତ ତାଙ୍କର ପରିଚୟ ହୋଇପାରିବ ନାହିଁ; ତାଙ୍କର ସାହସ ହିଁ ତାଙ୍କର ପ୍ରକୃତ ପରିଚୟ।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ନିଶା ବିରୋଧୀ ଅଭିଯାନରେ ଆଜି ସରକାର ମଧ୍ୟ ଦୃଢ଼ତାର ସହ ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ସହ ଛିଡ଼ା ହୋଇଛନ୍ତି। ଦେଶରେ ନିଶା ବ୍ୟବସାୟୀ ଓ ଚୋରାଚାଲାଣକାରୀଙ୍କ ବିରୋଧରେ କଠୋର କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ ନିଆଯାଉଛି। ପୂର୍ବ ତୁଳନାରେ ଗିରଫଦାରୀଙ୍କ ସଂଖ୍ୟା ବହୁଗୁଣିତ ହୋଇଛି। ହଜାର ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା ମୂଲ୍ୟର ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ ମଧ୍ୟ ଜବତ କରାଯାଇଛି। ଏହା ପ୍ରମାଣ କରୁଛି ଯେ, ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ ବିରୋଧରେ ଆମ ସରକାର କେତେ କଠୋର ଆଭିମୁଖ୍ୟ ଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର, ରାଜ୍ୟ ସରକାର ଏବଂ ସମସ୍ତ ସମ୍ପୃକ୍ତ ପକ୍ଷ ଏହାକୁ ମିଶନ ମୋଡ୍‌ରେ ଆଗେଇ ନେବେ। ମୋର ଏହା ମଧ୍ୟ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, ଆମ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ନିଶାମୁକ୍ତ ରହି ନିଜର ଯୁବଶକ୍ତିକୁ କେବଳ ସୁରକ୍ଷିତ ରଖିବେ ନାହିଁ, ବରଂ ବିକଶିତ ଭାରତର ସଂକଳ୍ପକୁ ସାକାର କରିବା ଦିଗରେ ମଧ୍ୟ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବେ। ଆଜି ମୋ ସମ୍ମୁଖରେ ଅନେକ ମହାନ ସନ୍ଥ-ମହାତ୍ମାଙ୍କୁ ଦେଖି ମୁଁ ଦୂରରୁ ସେମାନଙ୍କୁ ଆନ୍ତରିକ ପ୍ରଣାମ ଜଣାଉଛି। ଦେଶର କୋଣ ଅନୁକୋଣରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଥିବା ସମସ୍ତ ସାମାଜିକ ସଂସ୍ଥା, ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ସଂସ୍ଥା ଏବଂ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ଗୁରୁଜନଙ୍କୁ ମୁଁ ଏକ ବିନମ୍ର ଅନୁରୋଧ କରୁଛି। ଆପଣମାନଙ୍କର ଦେଶବ୍ୟାପୀ ସଂଗଠନ ରହିଛି, ଆପଣମାନଙ୍କ ସହ ଯୁବ ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବକ ଓ ଭକ୍ତମାନେ ମଧ୍ୟ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି। ଆସନ୍ତା ୧୦୦ ଦିନ ମଧ୍ୟରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ସଂଗଠନ ଗୋଟିଏ ସପ୍ତାହର ଦାୟିତ୍ୱ ନେଇପାରିବ। ସେହି ସପ୍ତାହରେ ସମଗ୍ର ଦେଶରେ ସେହି ସଂଗଠନ ନେତୃତ୍ୱ ନେଉ, ଅନ୍ୟ ସମସ୍ତ ସଂଗଠନ ତାହା ସହ ଯୋଡ଼ି ହୁଅନ୍ତୁ ଏବଂ ରବିବାର ଦିନ ଏକ ବିଶାଳ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ଆୟୋଜନ କରନ୍ତୁ। ପରବର୍ତ୍ତୀ ସପ୍ତାହରେ ଅନ୍ୟ ଏକ ସଂଗଠନ ଏହି ଦାୟିତ୍ୱ ନେଉ, ସପ୍ତାହବ୍ୟାପୀ ବିଭିନ୍ନ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ କରାଯାଉ ଏବଂ ରବିବାର ଦିନ ଏକ ବୃହତ୍ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ହେଉ। ଯଦି ଆମ ଦେଶର ଏଭଳି ୧୦୦ଟି ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ, ସାମାଜିକ ଓ ଯୁବ ସଂଗଠନ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗୋଟିଏ ସପ୍ତାହର ଦାୟିତ୍ୱ ନିଅନ୍ତି ଏବଂ ଅନ୍ୟ ସମସ୍ତ ଶକ୍ତି ସେମାନଙ୍କ ସହ ମିଶି ରବିବାର ଦିନ ସାମୂହିକ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ କରନ୍ତି, ତେବେ ଆପଣମାନେ କଳ୍ପନା କରିପାରିବେ ଯେ, ଦେଶରେ କେତେ ବିରାଟ ଜନଆନ୍ଦୋଳନ ସୃଷ୍ଟି ହୋଇପାରିବ। ଆପଣମାନେ ସମୟ ବାହାର କରି ଏହି ପବିତ୍ର କାର୍ଯ୍ୟରେ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ କରିଛନ୍ତି। ଏଥିପାଇଁ ମୁଁ ସମସ୍ତ ସନ୍ଥ, ଆଚାର୍ଯ୍ୟ ଏବଂ ବିଭିନ୍ନ ସଂଗଠନର ନେତୃବୃନ୍ଦଙ୍କୁ ସହୃଦୟତାର ସହିତ କୃତଜ୍ଞତା ଜଣାଉଛି। ଏହି ଅଭିଯାନରେ ସାମିଲ ହୋଇଥିବା ଏକ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଯୁବକ-ଯୁବତୀଙ୍କୁ ମୁଁ ବିଶେଷ ଭାବରେ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ଆପଣମାନେ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ କାମ କରିଛନ୍ତି। ମୁଁ ‘ମାଇ ଭାରତ’ର ସମସ୍ତ ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବୀଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ସେମାନେ ଯେଉଁ କାମ କରିବାକୁ ସଂକଳ୍ପ କରନ୍ତି, ତାହାକୁ ଆଜିକାଲି ସଫଳତାର ସହ କରି ଦେଖାଉଛନ୍ତି। କିଛିଦିନ ପୂର୍ବରୁ ମୋତେ ‘ମାଇ ଭାରତ’ର ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବୀମାନଙ୍କ ସହ ସାକ୍ଷାତ କରିବାର ସୁଯୋଗ ମିଳିଥିଲା। ସେମାନେ ଭାରତର ସୀମାନ୍ତ ଗ୍ରାମଗୁଡ଼ିକୁ ଯାଇ ସେଠାରେ ଏକ ସପ୍ତାହ ରହିଥିଲେ। ଯେଉଁ ଗ୍ରାମକୁ କେବେ ଦେଶର ସୀମାନ୍ତ ଗ୍ରାମ ବୋଲି କୁହାଯାଉଥିଲା, ଆଜି ଆମେ ତାହାକୁ ଦେଶର ପ୍ରଥମ ଗ୍ରାମ ବୋଲି କହୁଛୁ। ସେଠାରୁ ଫେରିବା ପରେ ସେମାନଙ୍କ ଅନୁଭୂତି ଅତ୍ୟନ୍ତ ପ୍ରେରଣାଦାୟକ ଥିଲା। ଆଜି ‘ମାଇ ଭାରତ’ର ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବୀମାନେ ଏତେ ବଡ଼ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ଆୟୋଜନ କରିପାରୁଛନ୍ତି, ଏହା ସେମାନଙ୍କର ରାଷ୍ଟ୍ର ପ୍ରତି ସଚେତନ, ସମର୍ପିତ ଭାବନାର ଏକ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ପ୍ରତୀକ। ମୁଁ ସେମାନଙ୍କୁ ହାର୍ଦ୍ଦିକ ଅଭିନନ୍ଦନ ଓ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି। ମୋର ପୂର୍ଣ୍ଣ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଏହି ସାମୂହିକ ପ୍ରୟାସ ଦ୍ୱାରା ଏହି ଆନ୍ଦୋଳନ ଘରେ ଘରେ ପହଞ୍ଚିବ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୁବପିଢ଼ିର ହୃଦୟରେ ସ୍ଥାନ ପାଇବ ଏବଂ ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ ବ୍ୟବସାୟୀଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ବଡ଼ ସଂଶୟର କାରଣ ପାଲଟିବ। ଆସନ୍ତୁ, ଆମେ ସମସ୍ତେ ମିଳିମିଶି ଏହି ଅଭିଯାନକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବା। ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ମୋର ଅନେକ ଅନେକ ଶୁଭକାମନା।

 ଆପଣଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!