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यहां के राजयपाल श्रीमान कातीकल शंकर नारायणन जी, मुख्‍यमंत्री श्रीमान पृथ्‍वीराज जी, मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्री नितिन गडकरी जी, श्री पीयूष गोयल जी, यहां के नौजवान सांसद भाई शरद जी, श्री विनोद तांबरे जी, ऊर्जा सचिव श्री पी के सिन्‍हा जी, श्री आर पी सिंह, श्री आर एन नायक और विशाल संख्‍या में आए हुए सोलापुर के भाइयो-बहनो।

तीन महीना पूर्व मी आला होता (तीन महीने पहले मैं यहां आया था)

क्‍या सोलापुर के लोगों में उत्‍साह की कमी नहीं है क्‍या सोलापुर के प्‍यार पे शत शत नमन। ऐसा लगता है, सोलापुर ने मुझे अपना बना लिया। लेकिन मैं सोलापुर वासियों को ये विश्‍वास दिलाता हूं कि चुनाव के समय जब मैं यहां आया था और आपने जो भरपूर प्‍यार दिया था, और इतने कम समय में में दुबारा आया हूं। और मैं देख रहा हूं आपका प्‍यार बढ़ता ही जा रहा है। सोलापुर के मेरे भाइयों-बहनों, मैं इस प्‍यार को ब्‍याज समेत लौटाउंगा। विकास करके लौटाउंगा।

सोलापुर की पहचान टैक्‍सटाइल के साथ जुड़ी हुई है। टैक्‍सटाइल के क्षेत्र में सोलापुर के लोग कई नए प्रयोग करते हैं। लेकिन उन प्रयोगों को राष्‍ट्रीय-अंतर्राष्‍ट्रीय फलक पे जो स्‍थान मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है। टैक्‍सटाइल उद्योग एक ऐसा उद्योग है जो सर्वाधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। गरीब से गरीब को रोजगार देने वाला क्षेत्र है। और दिल्‍ली में बिठाई हुई आपकी सरकार नौजवानों को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है। नौजवान को अगर रोजगार मिल जाए तो इस देश के आशाओं को पूर्ण करने की ताकत हमारे नौजवानों में है, हमारी युवा पी‍ढ़ी में है और उसके लिए हमारे युवकों की क्षमता बढ़े, उनके हाथ में हुनर हो, उनके कौशल्‍य में वृद्धि हो, हमारा नौजवान सामर्थवान बने और सामर्थवान नौजवान से उनके कर्तव्‍यों से, उनके पुरूषार्थ से हमारा राष्‍ट्र समृद्ध बने, ये सपना लेकर हम योजनाएं बनाते हैं और जिसका लाभ भारत में जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की संभावनाएं पड़ी हैं, जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की पुरानी नींव पड़ी है, उन क्षेत्रों पर विशेष ध्‍यान देकर के टैक्‍सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने का हमारा सपना है और इसका लाभ शोलापुर को भी मिलेगा, सोलापुर के नौजवानों को भी मिलेगा

आज दो महत्‍वपूर्ण कार्यों के लिए मुझे सोलापुर की धरती पर फिर से आने का सौभाग्‍य मिला है। हमारे देश में कई चुनाव इस मुद्दे पर लड़े गए और मुद्दा हुआ करता था बीएसपी। में बीएसपी पार्टी का नाम नहीं कह रहा हूं। बीएसपी -बिजली, सड़क, पानी। अगर हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को महत्‍व देते हैं, उसको अगर प्राथमिकता देते हैं, तो लोगों में इतना पुरूषार्थ पड़ा हुआ है तो मिट्टी में से सोना बना सकते हैं। अगर किसान को पानी मिला जाए तो किसान सोना पैदा कर सकता है। और इसलिए तो इस सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना का एक बड़ा अभियान उठाया है मन में। एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर के लिए उपयोगी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर बल देना। कृषि क्षेत्र में पानी पहुंचाने को प्राथमिकता देना। उसी प्रकार से देश का औद्योगिक विकास, देश के सामान्‍य नागरिक के जीवन में क्‍वालिटी आफ लाइफ में परिवर्तन आए। आज गांव में डाक्‍टर रहने के लिए तैयार नहीं हैं, शिक्षक रहने को तैयार नहीं, सरकारी मुलाजिम रहने को तैयार नहीं। वह शाम होने से पहले ही भाग जाता है, शहर में चला जाता है, क्‍यों, क्‍योंकि गांवमें बिजली नहीं है। बिजली नहीं तो टीवी नहीं चलता है। इंटरनेट नहीं है। तो डाक्‍टर का इस स्थिति में रहने को मन नहीं करता। हमारी सरकार का सपना है सात दिवस 365 दिवस, 24 घंटे बिजली गांवों में कैसे मिले। आज इस सपने को पूरा करने के लिए एक तरफ बिजली का उत्‍पादन बढ़ाना पड़ेगा, दूसरी तरफ बिजली पहुंचाने का प्रबंध करना पड़ेगा और जन भागीदारी से महत्‍वपूर्ण काम भी करना पड़ेगा, वह है बिजली बचाओ।

कुछ लोगों को लगता है कि सेना में भर्ती होंगे, तभी देश सेवा होगी। चुनाव लड़कर के एमएलए, एमपी बनेंगे, मंत्री बनेंगे, तभी देश सेवा होगी। मेरे भाइयो-बहनो, अगर हम बिजली बचाने में योगदान करें, तो भी वह देश की बहुत बड़ी सेवा है। मैं तो चाहता हूं कि सभी विद्यार्थी देश सेवा का एक काम अपने जिम्‍मे लें। हर विद्यार्थी कर सकता है। हर महीने अपने घर पे जो बिजली का बिल आता है, हर विद्या‍र्थी उसे देखें और जब भोजन करते हैं, तब माता-पिता, भाई-बहन सबके सामने चर्चा करें, बिजली का बिल दिखा कर के। और तय करें कि इस महीने अगर 100 रुपये का बिजली का बिल आता है तो अगले महीने बिजली का बिल 90 रुपये आ जाए, यह परिवार संकल्‍प करें और इस काम को विद्यार्थी कर सकता है। एक विद्यार्थी भी अपने घर में महीने में दस दस रुपये का बिल बचाएगा, घर के लोगों को भी लगेगा, वाह अपना बेटा बहुत छोटा है लेकिन कितना बड़ा काम करता है। हमने तो कभी सोचा ही नहीं कि चलो भई बिजली का बिल कम हो, इसके लिए कुछ करें। गरीब परिवार को हर महीने 10 रुपये, 20 रुपये, 25 रुपये बिल बच जाता है तो वह गरीब के लिए काम आता है। बच्‍चों को दूध पिलाने के लिए काम आता है। लेकिन यह तब बनता है, बिजली बचाना ये हमारा स्‍वभाव बने। बिजली बचाना- यह हमारा राष्‍ट्रीय कर्तव्‍य बने। क्‍योंकि बिजली बनाने पर जितना खर्च होता है, उससे कम खर्चे में बिजली बचा कर हम देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं। और मैं देशवासियों का आह्वान करता हूं । अगर हमें भारत को आगे ले जाना हैं, गरीब की झोपड़ी में भी बिजली का दीया जले, यह हम सबका अगर सपना है तो हम भी बिजली बचाने का प्रण लें, शपथ लें। और बिजली बचाने से औरों को जितना फायदा होगा, उससे ज्‍यादा हम परिवार वालों को होगा। और मुझे यह विश्‍वास है कि मेरी यह बात स्‍कूल में, कालेज में, शिक्षकों में, परिवारों में पहुंचेगी और आने वाले दिनों में बिजली बचत के अभियान में हम सफल होंगे। उसी प्रकार से हमारे देश में सब जगह बिजली के कारखाने नहीं लग पाये। कुछ राज्‍य हैं जो प्रगतिशील हैं, उन्‍होंने इस काम में प्रगति की है। एक जमाना था, महाराष्‍ट्र भी बिजली के उत्‍पादन में हिन्‍दुस्‍तान में बहुत आगे था। पर बाद की हालत का तो मैं वर्णन करना नहीं चाहता। लेकिन मुख्‍यमंत्री जी ने जो कहा, वह सही है। पूरे देश में इंधन न होने के कारण बिजली के कारखाने बंद पड़े हैं। उनकी पीड़ा सही है। लेकिन यह पीड़ा मुख्‍यमंत्री जी आज व्‍यक्‍त कर रहे हैं। मैं जब गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, तो दो साल तक इस पीड़ा को मैं व्‍यक्‍त करता रहा था। लेकिन मेरे में उस समय कहने का अवसर था, पृथ्‍वीराज के लिए बोलना जरा मुश्किल था, लेकिन मैं बोलता था। लेकिन भाइयो-बहनो, अब जिम्‍मेदारी हमारी है। हम जिम्‍मेदारियों से भागने वाले लोग नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अटका हुआ है, कोयला चोरी का। जांच-पड़ताल चल रही है। लेकिन हम नई नीतियों को लेकर के जल्‍द से जल्‍द कोयले के खदानों में तेज गति से काम चले, इसके लिए प्रयासरत हैं। कोयले के खदानों में इनवायरामेंट के नुकसान के बिना, जंगलों में नुकसान किये बिना, आधुनिक टेक्‍नोलोजी से कोयला निकालना चाहते हैं। जल्‍द से जल्‍द कोयला भी पहुंचेगा, बिजली भी पैदा होगी। बिजली हिन्‍दुस्‍तान के कोने कोने में जाएगी।

भाइयो-बहनो, जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, हम गुजरात में 24 घंटे, 365 दिन गांव को भी बिजली देते थे। वहां बिजली का जाना, यह पता ही नहीं है लोगों को। हमारे पास अतिरिक्‍त बिजली थी, इसके बावजूद भी, वह बिजली देश के काम नहीं आती थी। बिजली के कारखाने हमें बंद करने पड़ते थे। क्‍योंकि बिजली ले जाने के लिए जो ट्रांसमिशन लाइन चाहिए, वह नहीं थी। ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण बिजली नहीं जाती थी। एक बार दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री ने मुझे कहा, मोदी जी हमारे यहां चुनाव आ रहा है। दिल्‍ली में अंधेरा हमें परेशान करता है। आप कुछ बिजली दीजिए। मैंने कहा, में राजनीति बीच में नहीं लाता हूं, मैं प्रबंध करता हूं। मैं मीटिंग में था, आधे घंटे में मैंने उनको जवाब दिया, आपको जितनी बिजली चाहिए, आप ले सकते हैं। मैंने हमारे अफसरों से बात करना, उनके अफसरों से मिला देना, फोन पर सारा कारोबार चला। दूसरे दिन मैंने पूछा, सब हो गया, तो मुख्‍यमंत्री जी ने कहा- मोदी जी आप तो तैयार हैं पर बिजली लाने के लिए मेरे पास तार नहीं है। तार नहीं होने के कारण दिल्‍ली अंधेरे में रह गई। भाइयों-बहनों आज हमारे लिए यह बिजली के ट्रासंमिशन लाइन के द्वारा पूरे देश को जोड़ना आवश्‍यक है। जिस इलाके में बिजली नहीं है, वहां बिजली पहुंचाना आवश्‍यक है और वही महत्‍वपूर्ण काम उत्‍तर को पश्चिम से जोड़ना, पश्चिम को पूरब से जोड़ने का एक महत्‍वपूर्ण काम, जिसका आज उद्घाटन आपके सोलापुर की धरती से राष्‍ट्र को समर्पित किया जा रहा है। दक्षिण भारत, जहां बिजली की जरूरत है, महाराष्‍ट्र में जहां बिजली की जरूरत है, जिन राज्‍यों के पास अतिरिक्‍त बिजली है, उसको पहुंचाने के लिए एक ग्रिड काम आने वाली है। उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

भाइयो-बहनो, गुजरात में एक सरदार सरोवर डैम नर्मदा योजना, जिसकी भागीदारी महाराष्‍ट्र, गुजरात, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान चारों की है। लेकिन पिछले सात साल से दिल्‍ली सरकार की परमिशन नहीं मिलती है। नर्मदा डैम के काम को ऊचाई नहीं मिल रही थी और इसके कारण हमने हाइड्रो प्रोजेक्‍ट लगाया हुआ था, बिजली पैदा करने के लिए, पानी कम होने के कारण जितनी बिजली पैदा होनी चाहिए, नहीं होती थी। पूरी क्षमता का उपयोग करना है तो डैम का काम पूरा होना जरूरी था। लेकिन राजनीतिक कारणों से डैम की ऊंचाई बढ़ाने की हमें अनुमति नहीं मिलती थी। सात साल से दिल्‍ली से हमारा झगड़ा चलता रहता था। नई सरकार बनने के बाद दस दिन में ही ये परमिशन दे दी। डैम की हाइट बढ़ाने का काम चल रहा है, लेकिन इससे महाराष्‍ट्र का क्‍या। आपको जानकर के खुशी होगी, इसके कारण अब बिजली पूरी क्षमता से पैदा होगी। उसके कारण महाराष्‍ट्र को हर वर्ष 400 करोड़ रुपये की बिजली मुफ्त में मिलेगी। ये काम आज से 7 साल पहले हो सकता था। यह काम अगर हो गया होता तो आज पृथ्‍वीराज जी गर्व के साथ महाराष्‍ट्र में बिजली पहुंचा सकते थे, लेकिन नहीं हुआ।

भाइयो-बहनो, ऐसे कई रुके हुए काम अब मेरे करने के दिन आए हैं। आज पुणे-सोलापुर हाईवे का भी शिलान्‍यास हो रहा है। आगे चल कर के यह आपको कर्नाटक से भी जोड़ेगा। इसके कारण , नितिन जी अभी कह रहे थे, अमेरिका के प्रेसिडेंट का उल्‍लेख करते थे। दुनिया में जहां-जहां विकास हुआ है, आप अगर उसका अध्‍ययन करेंगे तो सबसे पहले उस देश ने हिम्‍मत करके और कठिनाइयां झेल कर के, दो काम और रह जाए तो रह जाए, उसकी चिंता किए बिना इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता दी। खास करके रोड नेटवर्क को प्राथमिकता दी। और रोड नेटवर्क को प्राथमिकता देने के कारण उन राष्‍ट्रों के विकास में बहुत बड़ी तेजी आई। साउथ कोरिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। साउथ कोरिया हमारे महाराष्‍ट्र से भी छोटा है। आर्थिक हालत बहुत खराब थी। लेकिन 30 वर्ष पहले वहां के शासकों ने पूरे साउथ कोरिया के बीच में से बहुत बड़ा रोड बना लिया। बहुत आंदोलन हुआ, लोगों ने विरोध किया सरकार का, कि इतने पैसे गंवा रहे हैं। खाने को पैसे नहीं हैं, गरीब देश है, भुखमरी है और आप रोड बना रहे हैं। सरकार बहुत मक्‍कमल थी, रोड बना दिया। देखते ही देखते रोड ने कोरिया की स्‍थति को बदल दिया और वो कोरिया, हिन्‍दुस्‍तान के बाद आजाद हुआ था, इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि आज से दस-पंद्रह साल पहले कोरिया के अंदर ओलंपिक गेम को आयोजित करने का सामर्थ्‍य दिखाया था। एक रोड से सारी सोच बदल गई।

भाइयो-बहनो, रोड बनाने में इतनी ताकत होती है। रोड, रास्‍ता सिर्फ आपको ले जाता है, ऐसा नहीं है, आपकी सोच को भी बदल देता है। और यह सही है संपत्ति से रोड नहीं बनते हैं, रोड बनाने से संपत्ति बनती है। और इसलिए जितने अच्‍छे मार्गों के माध्‍यम से हम देश के हर कोने को जोड़ेंगे, उतना अच्‍छा। अटल बिहारी वाजपेयी ने एक और बड़ा काम किया था, गोल्‍डन चर्तुभुज बनाया था। बाद में वह काम अटक गया। लेकिन पूरे देश में उस रास्‍ते के नेटवर्क ने एक नया विश्‍वास पैदा किया था। नितिन जी के नेतृत्‍व में हम उस काम को भी तेज गति से आगे बढ़ाने वाले हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना, जो वाजपेयी जी लाए थे, उस सड़क योजना के कारण गांव गांव को जोड़ने की सुविधा में गति आई थी। उसी प्रकार से रोड नेटवर्क हों, रेल नेटवर्क हो, उसे भी बढ़ाना है। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता देते हुए इस देश के कोने कोने में हर एक क्षेत्र को जोड़ना है। और जब इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बढ़ता है तो रोजगारी की संभावनाएं भी बहुत बढ़ती है। रोड बनाने में रोजगार मिलता है। सिर्फ ऐसा ही नहीं है, रोड में लगने वाला सामान जहां से आता है, उन कारखानों में रोगजार मिलता है। ट्रांसपोर्ट में भी रोजगार मिलता है। एक प्रकार से बेरोजगारी भगाने के लिए एक बड़ा माध्‍यम बन जाता है। और इसलिए ये रोड नेटवर्क, हम इन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का निर्माण भी स्‍ट्रेटेजिकली महत्‍वपूर्ण करने वाले हैं।

ऐसे नहीं, एक तरफ तो हम टूरिज्‍म बढ़ाने की बात करें लेकिन रास्‍ते वाला जो डिपार्टमेंट है, उसका कोई कंट्रीव्‍यूशन ही नहीं हो तो टूरिज्‍म कैसे बढ़ेगा। अगर टूरिज्‍म बढ़ाने के लिए अच्‍छे रोड नेटवर्क की जरूरत है तो उसको प्राथमिकता दे कर के उस रोड नेटवर्क को पूरा किया जाएगा। देश, आज से 20-25 साल पहले रेल-रोड नेटवर्क से संतुष्‍ट हो जाता था। लेकिन देश 21 वीं सदी में सिर्फ रेल और रोड के माध्‍यम से संतुष्‍ट नहीं हो सकता। आज देश को हाईवेज भी चाहिए, आईवेज भी चाहिए। आईवेज का मेरा मतलब है इंफोरमेशन हाईवेज। इंफोरमेशन टेक्‍नोलोजी के माध्‍यम से, ब्राडबैंड कनेक्टिविटी के माध्‍यम से, इंटरनेट कनेक्टिविटी के माध्‍यम से गांव गांव जुड़ना चाहिए। नए युग की आवश्‍यकता है। गैस गिड चाहिए, वाटर ग्रिड चाहिए। बिजली की ग्रिड चाहिए। हर प्रकार से एक रूप का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का माडल आज समय की मांग है। और उसी की पूर्ति की दिशा में आज एक कदम जो उत्‍तर से दक्षिण को जोड़ने वाला है, महाराष्‍ट्र से कर्नाटक को जोड़ने वाला है। चाहे बिजली के माध्‍यम से हो, चाहे रोड नेटवर्क के माध्‍यम से हो, यह जोड़ने के अभियान के हिस्‍से के स्‍वरूप में आज मुझे सोलापुर आने का सौभाग्‍य मिला है। मैं आपके प्‍यार के लिए बहुत-बहुत आभारी हूं और मैं विश्‍वास करता हूं कि यह काम बहुत तेज गति से आगे बढ़ेगा और सोलापुर के विकास तथा इस क्षेत्र के विकास में, हिन्‍दुस्‍तान के दक्षिणी छोर में बिजली की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए यह सारे प्रयास सुखकर परिणाम देंगे।

इसी विश्‍वास के साथ आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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माझ्या प्रिय देशवासियांनो, नमस्कार! आज जेंव्हा आपल्या सर्वांचं धैर्य, दुःख सहन करण्याच्या मर्यादेची कोरोना परीक्षा पहात आहे, अशा वेळेस आपल्याशी मन की बात मधून संवाद साधत आहे. आपल्या सर्वांचे कित्येक जिवलग अकालीच आपल्याला सोडून गेले आहेत. कोरोनाच्या पहिल्या लाटेचा यशस्वीपणे सामना केल्यानंतर देशामध्ये खूप मोठी उमेद निर्माण झाली होती, आत्मविश्वासाने देश भारलेला होता, परंतु या कोरोनाच्या वादळाने देशाला हादरवून टाकलं आहे.

 

मित्रांनो गेल्या काही दिवसात, या संकटाचा मुकाबला करण्यासंदर्भात माझी, वेगवेगळ्या क्षेत्रांतल्या तज्ज्ञांबरोबर दीर्घ चर्चा झाली आहे. आमच्या औषध निर्माण उद्योगांच्या क्षेत्रातले लोक असोत की लस उत्पादनाशी संबंधित लोक असोत, ऑक्सिजनच्या निर्मितीशी संबंधित लोक असोत किंवा मग वैद्यकीय क्षेत्रातले जाणकार असोत, त्यांनी अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना सरकारला केल्या आहेत. यावेळी, आम्हाला हे युद्ध जिंकण्यासाठी, तज्ज्ञ आणि वैज्ञानिक सल्ल्याला प्राधान्य द्यायचं आहे. राज्यसरकारांच्या प्रयत्नांना पुढे नेण्यासाठी, भारत सरकार पूर्ण शक्तिनं त्यांच्या पाठिशी खंबीरपणे उभं आहे. राज्य सरकारंही आपापली जबाबदारी निभावण्यासाठी पूर्ण प्रयत्न करत आहेत.

 

मित्रांनो, देशातले डॉक्टर्स आणि आरोग्य कर्मचारी कोरोनाच्या विरोधात यावेळी खूप मोठ्या लढाईमध्ये गुंतले आहेत. या आजाराबाबत त्यांना गेल्या एक वर्षात वेगवेगळ्या प्रकारचे अनुभवही आले आहेत. आमच्याबरोबर, आता यावेळी मुंबईतले प्रसिद्ध डॉक्टर शशांक जोशीजी जोडले गेले आहेत.

 

डॉक्टर जोशी जींकडे कोरोनावरील उपचार आणि त्यासंदर्भातल्या संशोधनाचा प्रत्यक्ष अनुभव मोठा आहे, आणि ते इंडियन कॉलेज ऑफ फिजिशियन्सचे अधिष्ठाताही राहिले आहेत. या आपण आता डॉ. शशांक यांच्याशी बातचीत करू या.

 

मोदी जीः नमस्कार, डॉ. शशांक जी.

 

डॉ० शशांक – नमस्कार सर |

 

मोदी जीः आता अलिकडेच काही दिवसांपूर्वीच आपल्याशी चर्चा करण्याची संधी मिळाली होती. आपले स्पष्ट विचार मला अत्यंत आवडले होते. मला असं वाटलं की, देशातल्या सर्व नागरिकांनी आपले विचार जाणून घ्यायला हवेत. ज्या गोष्टी हल्ली ऐकायला मिळतात, त्याबाबतच मी एक प्रश्न विचारू इच्छितो. डॉ. शशांक, आपण सर्व जण सध्या दिवसरात्र लोकांचे जीव वाचवण्याच्या कामात गुंतला आहात. सर्वात प्रथम आपण लोकांना कोरोनाच्या दुसऱ्या लाटेबद्दल सांगावं, असं मला वाटतं. वैद्यकीय दृष्ट्या ही लाट कशी वेगळी आहे आणि त्यासाठी काय खबरदारी आवश्यक आहे.

 

डॉ० शशांक – धन्यवाद, सर. ही दुसरी लाट आली आहे, ती खूप वेगानं आली आहे आणि पहिल्या लाटेपेक्षा विषाणुच्या संसर्गाची गति जोरात आहे. परंतु, त्याच्या संसर्गापेक्षाही जास्त गतिनं लोक बरे होत आहेत आणि मृत्युदरही खूप कमी आहे, ही याच्याबाबतीत दिलासादायक गोष्ट आहे. या लाटेबाबत दोन- तीन फरक आहेत. पहिल्यांदा कोरोनाचा संसर्ग युवक आणि मुलांमध्येही थोडा दिसून येत आहे. त्याची जी श्वास लागणं, कोरडा खोकला येणं, ताप येणं ही पहिल्या लाटेसारखी लक्षणं तर आहेतच, परंतु त्याबरोबर वासाची जाणिव नष्ट होणं, चव न लागणं हीही आहेत. आणि लोक थोडे घाबरले आहेत. खरंतर लोकांनी घाबरण्याची अजिबात गरज नाही. 80 ते 90 टक्के लोकांमध्ये याची कोणतीही लक्षणं दिसत नाहीत. आणि हे जे उत्परिवर्तन किंवा म्युटेशन वगैरेबाबत बोललं जातं, त्यामुळे घाबरण्याची काहीच आवश्यकता नाही. हे म्युटेशन्स होत राहतात अगदी आपण जसं कपडे बदलतो तसे विषाणुही आपलं रूप बदलत असतात आणि त्यामुळे मुळीच घाबरण्याची आवश्यकता नाही. आम्ही या लाटेला परतवून लावू. लाटा येत जात राहतात आणि विषाणुही येत जात असतात आणि त्यांची लक्षणं वेगवेगळी असतात. वैद्यकीय दृष्ट्या आम्हाला सतर्क रहाण्याची गरज आहे. कोविडचा 14 ते 21 दिवसांचा कालावधी असून त्यात आपल्या डॉक्टरांचा सल्ला घेत राहिलं पाहिजे.

 

मोदी जीः डॉ. शशांक, आपण जे विश्लेषण सांगितलं, ते माझ्यासाठीही खूप महत्वाचं आहे. मला खूप पत्रं आली असून त्यात उपचारांबाबत लोकांच्या मनात अनेक शंका आहेत. औषधांची मागणी काहीशी जास्त प्रमाणात आहे. म्हणून आपण कोविडवरील उपचारांबाबतही लोकांना माहिती द्यावी, असं मला वाटतं.

 

डॉ० शशांकः हां सर. लोक खूप उशिरानं क्लिनिकल उपचार सुरू करतात आणि आपोआप आजार जाईल, अशा विश्वासावर रहातात. तसंच मोबाईलवर येणाऱ्या माहितीवर विश्वास ठेवतात. आणि, जर सरकारच्या कडून देण्यात आलेल्या सूचनांचं पालन केलं तर या संकटाचा सामना करण्याची वेळच येत नाही. कोविडमध्ये क्लिनिकल उपचारांबाबत नियमावली आहे आणि त्यात तीन प्रकारच्या तीव्रतेनुसार म्हणजे सौम्य कोविड, मध्यम किंवा माफक प्रमाणातला कोविड आणि तीव्र कोविड ज्याला म्हणतात, त्याच्यासाठी हे नियम आहेत. जो सौम्य कोविड आहे,त्यासाठी आम्ही ऑक्सिजनवर नजर ठेवून असतो, तापावर देखरेख करत असतो आणि ताप वाढला तर पॅरासिटॅमॉलसारख्या औषधाचा वापर करतो. सौम्य कोविड किंवा मध्यम किंवा तीव्र स्वरूपाचा असला तरीही, आपल्या डॉक्टरांशी संपर्क साधला पाहिजे. कोविड कोणत्याही स्वरूपाचा असला तरीही आपल्या डॉक्टरशी संपर्क ठेवणं खूप आवश्यक आहे. अगदी अचूक आणि स्वस्त औषधंही उपलब्ध आहेत. यामध्ये उत्तेजक म्हणजे स्टेरॉईड आहे, जे जीव वाचवू शकते. इनहेलर देता येतं तसंच टॅबलेटही देता येतात आणि त्याबरोबरच प्राणवायु द्यावा लागतो आणि त्यासाठी लहान लहान स्वरूपाचे उपचार आहेत. परंतु हल्ली एक नवीन प्रयोगात्मक औषध ज्याचं नाव रेमडेसिवीर आहे. त्याच्या वापरामुळे रूग्णाचा रूग्णालयात राहण्याचा कालावधी दोन ते तीन दिवसांनी कमी होतो आणि क्लिनिकल रिकव्हरीमध्ये त्याची मदत होते. आणि हे ही औषध पहिल्या नऊ ते दहा दिवसात दिलं तरच काम करतं आणि पाचच दिवस ते देता येतं. परंतु असं पाहिलं गेलं आहे की, लोक रेमडेसिवीरच्या मागे धावत सुटले आहेत. असं मुळीच धावता कामा नये. हे औषध थोड्या प्रमाणातच काम करतं. ज्यांना प्राणवायुची आवश्यकता आहे,ते रूग्णालयात दाखल होतात. परंतु डॉक्टर सांगतील तेव्हाच बाहेरून प्राणवायु घेतला पाहिजे. लोकांनी हे समजून घेणं खूप आवश्यक आहे. आपण प्राणायाम केला, आपल्या शरिरातल्या फुफ्फुसांना जरासं विस्तारित केलं, आणि शरिरातलं रक्त पातळ करणारी जी इंजेक्शन्स येतात, ती घेतली, ज्यांना आम्ही हेपरिन म्हणतो, या छोट्या छोट्या औषधांनीही 98 टक्के रूग्ण बरे होतात. शिवाय, लोकांनी सकारात्मक रहाणंही खूप आवश्यक आहे. उपचार डॉक्टरांच्या सल्ल्यानंच घेणं अत्यंत आवश्यक आहे. या महागड्या औषधांच्या मागं धावण्याची काहीच गरज नाही सर.

 

आपल्याकडे चांगले उपचार सुरू आहेत. प्राणवायु आहे, व्हेंटीलेटरची सुविधाही आहे आणि सर्व काही आहे. आणि जेंव्हा केंव्हा ही औषधे मिळतील तेंव्हा ती पात्र लोकांनाच दिली गेली पाहिजेत. आपल्याकडे याबाबतीत खूप गैरसमज पसरवले जात आहेत. यासाठी, आपल्याकडे जगातले सर्वात उत्कृष्ट उपचार उपलब्ध आहेत, हे मी स्पष्ट करु इच्छितो. आपण पाहू शकता की, भारतात रूग्ण बरे होण्याचा दर (रिकव्हरी रेट) सर्वात चांगला आहे. आपण युरोप किंवा अमेरिकेशी तुलना केली तर आमच्याकड़े रूग्ण उपचारांच्या नियमावलीनुसार बरे होत आहेत सर.

 

मोदी जीः डॉ. शशांक, आपले खूप खूप धन्यवाद. डॉ. शशांक यांनी जी माहिती आपल्याला दिली, ती खूप आवश्यक आहे आणि आपल्या सर्वांना उपयुक्त ठरेल.

मित्रांनो, आपल्याला कोणतीही माहिती हवी असेल किंवा कोणतीही शंका असेल तर ती योग्य व्यक्तिकडूनच ती माहिती घ्या. आपले फॅमिली डॉक्टर्स असतील किवा आसपास जे डॉक्टर्स असतील, त्यांच्याकडून दूरध्वनीवरून संपर्क करून माहिती घ्या. आमचे खूप सारे डॉक्टर्स स्वतःच ही जबाबदारी घेत आहेत, हे ही मी पहात आहे. काही डॉक्टर्स समाजमाध्यमांच्या द्वारे लोकांना माहिती देत आहेत. फोनवर किंवा व्हॉट्सअपवर लोकांचे समुपदेशन करत आहेत. अनेक रूग्णालयांच्या वेबसाईट आहेत ज्यावरही माहिती उपलब्ध आहे. तेथे आपण डॉक्टर्सकडून सल्लाही घेऊ शकता, हे खूप प्रशंसनीय आहे.

 

माझ्या समवेत श्रीनगरचे डॉक्टर नाविद शाह जोडले गेले आहेत. डॉक्टर नाविद हे श्रीनगरच्या सरकारी वैद्यकीय महाविद्यालयात प्राध्यापक आहेत. नाविदजी यांनी आपल्या देखरेखीखाली अनेक कोरोना रूग्णांना बरं केलं आहे आणि रमजानच्या या पवित्र महिन्यातही डॉ. नाविद आपलं कार्य करत आहेत. त्यांनी आमच्याशी बातचीत करण्यासाठी वेळ काढला आहे. त्यांच्याशी आता चर्चा करू या.

 

मोदी जीः नाविद जी, नमस्कार.

डॉ. नावीदः नमस्कार सर |

 

मोदी जीः डॉक्टर नाविद, मन की बातच्या आमच्या श्रोत्यांनी या बिकट प्रसंगी घबराट व्यवस्थापन म्हणजे पॅनिक मॅनेजमेंटचा प्रश्न उपस्थित केला आहे. आपण आपल्या अनुभवानुसार त्यांना काय सांगाल?

 

डॉ. नावीदः जेंव्हा कोरोना महामारी सुरू झाली तेव्हा सर्वप्रथम जे रूग्णालय कोविड़साठी विशेष रूग्णालय म्हणून नियुक्त करण्यात आलं, ते आमचं सिटी हॉस्पिटल होतं. जे वैद्यकीय महाविद्यालयाच्या अंतर्गत येतं. त्यावेळेस एक दहशतीचं वातावरण होतं. कोविडचां संसर्ग ज्याला होतो, त्याच्यासाठी हे मृत्युचं आमंत्रणच आहे, असं लोक मानायचे आणि आमच्या रूग्णालयातले डॉक्टर आणि निम वैद्यकीय कर्मचार्यांमध्येही अशा रूग्णांना आम्ही सामोरं कसं जायचं, आम्हाला संसर्ग होण्याचा धोका तर नाहि, अशी दहशत होती. जसा काळ गेला तसं आम्ही पाहिलं की, संपूर्ण प्रकारचं संरक्षक साधनं आम्ही वापरून सुरक्षेची खबरदारी घेतली, तर आम्ही सुरक्षित राहू शकतो आणि आमचे बाकी कर्मचारीही सुरक्षित राहू शकतात. पुढे तर आम्ही पाहिलं की, काही रूग्ण किंवा जे आजारी लोक होते ते असिम्प्टोमॅटिक म्हणजे त्यांच्यात कोविडची कसलीच लक्षणं नव्हती. जवळपास 90 ते 95 टक्के उपचाराविनाही ठीक होतात, हेही आम्ही पाहिलं आणि जसा काळ गेला तसा लोकांमध्ये कोरोनाच्या बाबतीत जी एक भीती होती ती खूपच कमी झाली. आज आमच्याकडे कोरोनाची दुसरी लाट आली आहे. परंतु यावेळीही आम्हाला घाबरण्याची अजिबात गरज नाहि. यावेळीही जे संरक्षक उपाय आहेत, मास्क वापरणं, सॅनिटायझरनं हात सतत धुणं आणि शारिरिक अंतर राखणं किंवा सामाजिक मेळावे टाळणं अशी जी आदर्श कार्यप्रणाली आहे तिचं पालन केलं तर आम्ही आपलं दैनंदिन काम अगदी चांगल्या प्रकारे पार पाडू शकतो आणि या आजारापासून संरक्षणही प्राप्त करू शकतो.

 

मोदी जीः डॉ. नाविद, लसीबाबतही लोकांच्या मनात खूप प्रश्न आहेत. लसीपासून कितपत सुरक्षा मिळेल, लस घेतल्यानंतर किती प्रमाणात आश्वस्त राहू शकतो? आपण याबाबतीत काही सांगितलं तर श्रोत्यांना त्याचा खूप फायदा होईल.

 

डॉ० नावीदः आपल्याकडे कोरोनाचा संसर्ग झाल्याचं समोर आलं तेव्हापासून आजपर्यत आमच्याकडे कोविड-19 साठी कोणतेही परिणामकारक उपचार उपलब्ध नाहित. म्हणून, आम्ही या आजाराशी दोन प्रकारे लढा देऊ शकतो. एक म्हणजे प्रमुख संरक्षक उपाय आणि आम्ही प्रथमपासून हेच सांगत आलो आहोत की, जर एखादी परिणामकारक लस आमच्याकडे आली तर या आजारापासून आम्हाला मुक्ती मिळू शकते. यावेळी आमच्या देशात कोवॅक्सिन आणि कोव्हिशिल्ड या दोन लस उपलब्ध आहेत. या दोन्ही लस याच देशात तयार झाल्या आहेत. आणि ज्या कंपन्यांनी ज्या चाचण्या घेतल्या आहेत, त्यातून असं पाहिलं गेलं आहे की, त्यांची परिणामकारकता 60 टक्क्याहून अधिक आहे. आणि जम्मू आणि काश्मीरबाबत बोलायचं तर, आमच्या केंद्रशासित प्रदेशात आतापर्यंत 15 ते 16 लाख लोकांनी लस घेतली आहे. एक आहे की, समाजमाध्यमांमध्ये या बद्दल खूप गैरसमज आहेत किंवा गृहितकं आहेत. लस घेतल्यानं दुष्परिणाम होतात वगैरे. तर आमच्याकडे ज्यांनी लस टोचून घेतली आहे, त्यांच्यात काहीही दुष्परिणाम दिसलेले नाहित. कोणत्याही नेहमीच्या लसीसोबत जे परिणाम संबंधित असतात म्हणजे ताप येणं, संपूर्ण अंगदुखी किंवा जेथे इंजेक्शन टोचलं जातं त्या भागात वेदना होणं हे दुष्परिणाम प्रत्येक रूग्णाच्या बाबतीत पाहिले आहेत. परंतु एकंदरीत कोणतेही विपरित परिणाम आम्ही पाहिलेले नाहित. दुसरी गोष्ट म्हणजे, काही लोक लसीकरणाच्या नंतर कोविड पॉझिटिव्ह झाले. याबाबतीत तर कंपन्यांनीच मार्गदर्शक तत्वांमध्ये जाहिर केलं आहे की, जर लस टोचून घेतल्यानंतर कुणाला संसर्ग झाला तर तो पॉझिटिव्ह असू शकतो. परंतु, त्या रूग्णांमध्ये आजाराची जी तीव्रता आहे ती तितकीशी रहाणार नाही म्हणजे ते पॉझटीव्ह असू शकतात परंतु तो आजार जीवघेणा सिद्ध होऊ शकत नाही. त्यामुळे लसीबाबत जो आमच्या मनात गैरसमज आहे तो आपण काढून टाकला पाहिजे. आणि जे जे पात्र ठरतील त्यांनी लस टोचून घेतली पाहिजे. कारण एक मे नंतर देशात 18 वर्षावरील प्रत्येकाला लस टोचण्याचा कार्यक्रम सुरू होईल. म्हणून लोकांना हेच आवाहन करेन की, आपण लस टोचून घ्या आणि स्वतःला सुरक्षित करून घ्या. त्यामुळे एकंदरीत आमचा समाज, आमचा समुदाय कोविड-19 संसर्गापासून संरक्षित होईल.

 

मोदी जीः डॉ. नाविद, आपल्याला खूप खूप धन्यवाद. आणि आपल्याला रमजानच्या पवित्र महिन्याच्या खूप खूप शुभेच्छा.

 

डॉ० नाविद: खूप खूप धन्यवाद.

 

मोदी जीः मित्रांनो, कोरोनाच्या या संकट काळात लसीचं महत्व तर सगळ्यांनाच पटलं आहे. म्हणून, लसीच्या बाबतीत कोणत्याही अफवांना बळी पडू नका, असा माझा आग्रह आहे. आपल्याला सर्वांना माहितच असेल की, भारत सरकारकडून सर्व राज्यसरकारांना विनामूल्य लस पुरवण्यात आली आहे, जिचा लाभ 45 वर्षांवरील सर्व लोक घेऊ शकतात. आता तर एक मेपासून देशात 18 वर्षांवरील प्रत्येकाला लस उपलब्ध होणार आहे. आता देशातलं कॉर्पोरेट क्षेत्र, कंपन्यासुद्धा आपल्या कर्मचाऱ्यांच्या लसीकरणाची मोहिम राबवण्यातील भागीदारीचं पालन करू शकतील. भारत सरकारकडून जो विनामूल्य लसीकरणाचा कार्यक्रम सुरू आहे, तो पुढेही चालूच राहिल, हे ही मला सांगायचं आहे. माझा राज्यांना आग्रह आहे की, त्यांनी भारत सरकारच्या या विनामूल्य लसीकरण मोहिमेचा फायदा आपल्या राज्यातील नागरिकांना जास्तीत जास्त प्रमाणात पोहचवावा.

 

मित्रांनो, आजाराच्या काळात, आपली तसंच आमच्या कुटुंबाची देखभाल करणं मानसिक स्तरावर किती अवघड असतं, हे आपणा सर्वाना माहितच आहे. परंतु, आमच्या रूग्णालयातील परिचारिकांना तर हेच काम सातत्यानं, अनेक रूग्णांसाठी एकाचवेळेस करावं लागतं. हा सेवाभाव आमच्या समाजाची खूप मोठी शक्ति आहे. परिचारिका ज्या प्रकारची सेवा देतात आणि कठोर कष्ट करतात, त्याबाबतीत तर सर्वात चांगल्या प्रकारे एखादी परिचारिकाच सांगू शकेल. म्हणून, मी रायपूरच्या डॉ. बी आर आंबेडकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटलमध्ये सेवारत असलेल्या सिस्टर भावना ध्रुवजी यांना मन की बातमध्ये निमंत्रित केलं आहे. त्या अनेक कोरोना रूग्णांची शुश्रुषा करत आहेत. आता त्यांच्याशी बोलू या.

 

मोदी जीः नमस्कार भावना जी!

भावना: आदरणीय प्रधानमंत्री जी, नमस्कार !

मोदी जी: भावना जी...

भावना:- येस सर

 

मोदी जी: मन की बात ऐकणाऱ्यांना आपण हे सांगा की, आपल्या कुटुंबात इतक्या मोठ्या जबाबदाऱ्या पार पाडतानाच मल्टीटास्क करत असताना आपण कोविड रूग्णांच्या शुश्रुषेचं काम करत आहात. कोरोना रूग्णांबाबतीत आपला अनुभव देशवासियांना ऐकायला आवडेल कारण सिस्टर किंवा परिचारिका ही रूग्णाच्या सर्वात जवळ शिवाय सर्वात दीर्घकाळ असते. प्रत्येक गोष्ट ती बारकाईने समजून घेऊ शकते.

 

भावना: जी सर, कोविडच्या संदर्भात माझा एकूण अनुभव दोन महिन्यांचा आहे. आम्ही 14 दिवस ड्युटी करतो आणि 14 दिवस आम्हाला विश्रांती दिली जाते. नंतर दोन महिन्यांनी आमची कोविडची ड्युटी पुन्हा लावली जाते. जेंव्हा सर्वप्रथम माझी कोविड ड्युटी लागली तेव्हा मी आपल्या कुटुंबातील लोकांना कोविड ड्युटीबाबत सांगितलं. मे महिन्यातली ही गोष्ट आहे आणि मी जसं हे सांगितलं तसं सर्वजण घाबरले. व्यवस्थित काम कर, असं मला बजावत होते. तो एक भावनात्मक क्षण होता, सर. जेंव्हा माझी मुलगी मला म्हणाली, “ममा आप कोविड ड्युटीवर जा रहे हो”, तेंव्हा तो क्षण माझ्यासाठी खूपच भावनिक होता. परंतु, जेंव्हा मी कोविड रूग्णाच्या जवळ गेले तेंव्हा एक जबाबदारी घरी सोडून आले. जेंव्हा मी कोविड रूग्णाला भेटले तेंव्हा ते सर्वात जास्त घाबरले होते. कोविडच्या नावानेच सारे रूग्ण इतके घाबरले होते सर की, आपल्याला हे काय होत आहे, आपलं पुढे काय होणार आहे. हेच त्यांना समजत नव्हते. त्यांची भीती दूर करण्यासाठी आम्ही त्यांना एक चांगलं आरोग्यदायी वातावरण तयार केलं सर. आम्हाला जेव्हा कोविड ड्युटी करायला सांगण्यात आलं तेव्हा सर्वप्रथम आम्हाला पीपीई किट घालण्यास सांगण्यात आलं सर, पीपीई किट घालून काम करणं खूपच अवघड आहे. सर, आमच्यासाठी हे सारं खूप अवघड होतं, मी दोन महिन्याच्या ड्युटीमध्ये चौदा चौदा दिवस वॉर्डात, आयसीयू मध्ये आणि आयसोलेशनमध्ये ड्युटी केली, सर.

मोदी जी: म्हणजे एकूण आपण एक वर्षापासून याच प्रकारचे काम करत आहात.

 

भावना: येस सर. तिथं जाण्यापूर्वी मला माझे सहकारी कोण आहेत, हे माहित नव्हतं. आम्ही एका टीमप्रमाणे काम केलं. त्यांचे जे प्रश्न होते, ते सांगितले. आम्ही रूग्णांच्या बाबतीतील माहिती घेतली आणि त्यांच्यातील गैरसमज दूर केले. अनेक लोक कोविडच्या नावानेच घाबरत असत. जेंव्हा आम्ही त्यांची केस हिस्टरी घेत असू तेव्हा त्यांच्यात आम्हाला लक्षणं दिसत होती परंतु भीतीपोटी ते आपली चाचणी करायला धजावत नव्हते. तेंव्हा आम्ही त्यांना समजावून सांगत होतो आणि सर, जेंव्हा आजाराची तीव्रता वाढायची, तेव्हा त्यांची फुफ्फुसं संसर्गित झालेली असत. त्यांना आयसीयूची गरज लागे आणि तेंव्हा ते त्यांच्या संपूर्ण कुटुंबासह येत. एक दोन प्रकरणात आम्ही हे पाहिलं सर आणि प्रत्येक वयोगटाबरोबर आम्ही काम केलं सर. ज्यात लहान मुलं होती, महिला, पुरूष, ज्येष्ठ नागरिक, सर्व प्रकारचे रूग्ण होते. त्या सर्वांशी आम्ही बोललो तेव्हा सर्वांनी हेच सांगितलं की, घाबरल्यामुळे आम्ही आलो नाही. सर्वांकडून आम्हाली हीच उत्तरं मिळाली सर. आम्ही त्याना समजावून सांगितलं की, भीती वगैरे काही नसते आणि आपण आम्हाला साथ द्या, आम्ही आपल्याला मदत करू. बस आपण कोविडच्या नियमावलीचं पालन करा आणि आम्ही त्यांच्याकडून हे करून घेऊ शकलो सर.

 

मोदी जीः भावना जी, आपल्याशी बोलल्यामुळे मला खूप छान वाटलं. आपण खूप चांगली माहिती दिली आहे. आपल्या स्वतःच्या अनुभवावरून दिली आहे. त्यामुळे देशवासियांना यातून एक प्रकारचा सकारात्मकतेचा संदेश जाईल . आपल्याला खूप खूप धन्यवाद भावना जी.

 

भावनाः धन्यवाद सर. जय हिंद सर.

 

 

भावना जी, नर्सिंग स्टाफचे आपल्यासारखेच लाखो बंधुभगिनी आपलं कर्तव्य अत्यंत चांगल्या प्रकारे पार पाडत आहेत. आपण आपल्या आरोग्याची काळजी घ्या. आपल्या परिवाराचींही काळजी घ्या.

मित्रांनो, आपल्या सोबत आता बंगळूरू इथल्या सिस्टर सुरेखा जी आहेत. सुरेखा जी के सी सामान्य रुग्णालयात वरिष्ठ परिचारिका अधिकारी म्हणून कार्यरत आहेत. चला, त्यांचे अनुभवही जाणून घेऊया.

मोदीजी: नमस्कार सुरेखा जी

सुरेखा: देशाच्या पंतप्रधानांसोबत बोलण्याची संधी मला मिळाली. याचा मला अभिमान वाटतो आणि हा मी माझा गौरव समजते.

मोदीजी:सुरेखा जी, आपण आपल्या सहकारी परीचारिकांसोबत तसंच रुग्णालयातल्या इतर कर्मचाऱ्यांसोबत अत्यंत उत्कृष्ट काम करत आहात. भारत तुम्हा सर्वांचा ऋणी आहे. कोविड-19 विरुद्धच्या या लढाईत देशातल्या नागरिकांना तुम्ही काय संदेश द्याल?

सुरेखा: हो सर. एक जवाबदार नागरिक म्हणून मला सर्वांना नक्कीच सांगयला आवडेल की, तुमच्या शेजाऱ्यांशी प्रेमाने वागा तसंच लवकर चाचण्या आणि संपर्कात आलेल्या संशयित रुग्णांचा शोध आपल्याला मृत्यू दर कमी करण्यात नक्कीच मदत करेल. तसंच जर तुम्हाला कोविडची लक्षणं आढळली, तर स्वतःला वेगळं करा आणि जवळच्या डॉक्टरांचा सल्ला घेऊन जितक्या लवकर शक्य आहे, तितक्या लवकर उपचार सुरु करा. सर्व लोकांमध्ये या आजाराबाबत जागृती होणं गरजेचं आहे. सकारात्मक दृष्टीकोन ठेवा. घाबरू नका आणि कुठलाच तणावही घेऊ नका. यामुळे रुग्णाची स्थिती आणखी ढासळू शकते. आणि आमच्या सरकारचे आभारी आहोत आणि आपल्या देशात लस उपलब्ध झाल्याचा आम्हाला अभिमान आहे. मी स्वतः लस घेतली आणि माझ्या अनुभवावरून मला भारताच्या सर्व नागरिकांना सांगायचं आहे की कोणतीही लस तुमचं लगेचच 100% संरक्षण करू शकत नाही. आपल्यात रोगप्रतिकारशक्ती निर्माण व्हायला वेळ लागतो. लस घ्यायला अजिबात घाबरू नका. स्वतःचं लसीकरण करून घ्या. त्याचे अगदी किरकोळ दुष्परिणाम होतात आणि मला आणखी एक संदेश द्यायचा आहे की, घरी राहा, निरोगी राहा, आजारी लोकांसोबत संपर्क टाळा तसंच गरज नसताना नाक, डोळे आणि तोंडाला स्पर्श करू नका. शारीरिक अंतराचे नियम पाळा, मास्क योग्य प्रकारे लावा. आपले हात नियमितपणे स्वच्छ धुवा. आणि आपण घरी जे उपाय करू शकता ते अवश्य करा. आयुर्वेदीक काढा प्या, वाफ घ्या आणि दररोज गुळण्या करा. तसंच श्वसनाचे व्यायाम देखील तुम्ही करू शकता. आणखी एक शेवटची, मात्र अत्यंत महत्वाची गोष्ट म्हणजे कोरोना योद्धे आणि वैद्यकीय व्यावासायिकांबद्दल सहानुभूती असू द्या. आम्हाला आपला पाठिंबा आणि सहकार्याची गरज आहे. आपण एकत्र लढूया. आपण या महामारीतून निश्चित बाहेर पडू. हाच माझा लोकांसाठी संदेश आहे सर.

मोदीजी: धान्यवाद सुरेखा जी.

सुरेखा: धन्यवाद सर.

सुरेखाजी, खरंच या अत्यंत कठीण प्रसंगी आपण नेटाने मोर्चा सांभाळला आहे. आपण आपली काळजी घ्या आपल्या कुटुंबालाही माझ्या खूप खूप शुभेच्छा आहेत. मी सर्व देशबांधवांनाही आग्रह करेन की, जसं भावना जी, सुरेखा जी यांनी त्यांच्या अनुभवातून सांगितलं आहे, तसं कोरोनाशी लढण्यासाठी सकारात्मक उर्जा अत्यंत आवश्यक आहे. आणि देशबांधवांना ही ऊर्जा कायम ठेवायची आहे.

मित्रांनो,

डॉक्टर्स आणि परिचारिकांसोबतच या काळात प्रयोगशाळेतले तंत्रज्ञ आणि रुग्णवाहिकांचे चालक यांच्यासारखे पहिल्या फळीतले कोरोना योद्धे ही देवाप्रमाणेच काम करत आहेत. जेंव्हा एखादी रुग्णवाहिका रूग्णांना घ्याला येते, तेव्हा त्यांना रुग्णवाहिकेचा चालक देवदूतासारखाच वाटतो. हे सर्व लोक करत असलेल्या सेवांविषयी, त्यांच्या अनुभवांविषयी देशाला नक्कीच कळायला हवं. माझ्यासोबत आता असेच एक सज्जन आहेत. श्री प्रेम वर्मा जी. हे एक रुग्णवाहिका चालक आहेत. त्यांच्या नावावरूनच जसं आपल्याला कळतं

तसं प्रेम वर्मा जी आपलं काम, आपलं कर्तव्य अत्यंत प्रेमानं आणि चिकाटीनं करत असतात. चला, आपण त्यांच्याशी बोलूया.

मोदी जी: नमस्कार प्रेमजी.

प्रेम जी: नमस्ते सर.

मोदी जी: भाई प्रेम

प्रेम जी: हो सर..

मोदी जी: आपण आपल्या कार्याविषयी...

प्रेम जी: हां सर...

मोदी जी: जरा विस्तारानं सांगा. आपल्याला जे अनुभव येतात ते ही सांगा.

प्रेम जी: सर, मी CATS रुग्णवाहिकामध्ये चालक म्हणून काम करतो. नियंत्रण कक्षातून जसा आमच्या टॅब वर कॉल येतो. 102 क्रमांकावरून जेंव्हा फोन येतो, त्यावेळी आम्ही आमच्या रुग्णाकडे जातो. गेल्या दोन वर्षांपासून आम्ही सातत्यानं हे काम करतो आहोत. आपली कीट घालून, हात मोजे, मास्क घालून रुग्णांना, ते जिथे घेऊन जायला सांगतात, मग ते कोणतेही रुग्णालय असो, आम्ही लवकरात लवकर त्यांना तिथे पोहोचवतो.

मोदी जी: आपण तर लसींच्या दोन्ही मात्रा घेतल्या असतील.

प्रेम जी: हो, नक्कीच सर.

मोदी जी: मग इतरांनी ही लस घ्यावी यासाठी तुम्ही त्यांना काय संदेश द्याल?

प्रेम जी: हो सर, नक्कीच. सर्वांना लसीच्या मात्रा घ्यायला हव्यात. आपल्या कुटुंबासाठी हे लसीकरण हिताचेच आहे. आता माझी आई मला म्हणत असते की ही नोकरी सोडून दे. मी सांगितलं, आई, मी जर नोकरी सोडून घरी बसलो, तर सगळीकडे रुग्णांना सोडायला कोण जाणार? कारण आता कोरोना काळात तर सगळेच दूर पळताहेत. सगळे नोकरी सोडून जात आहेत. आई मलाही म्हणत असते की बेटा ही नोकरी सोडून दे. मात्र मी सांगितलं, आई मी नोकरी नाही सोडणार.

मोदी जी –प्रेम जी, आपल्या आईचे मान नाराज करु नका, त्यांना समजून घ्या.

प्रेम जी- हो, सर.

मोजी जी – पण ही जी आईची गोष्ट तुम्ही सांगितलीत ना....

प्रेम जी – हो सर,

मोदी जी –ती मनाला स्पर्शून जाणारी आहे.

प्रेम जी –हो, सर.

मोदी जी –आपल्या आईंनाही.....

प्रेम जी – हो सर,

मोदी जी- माझा नमस्कार सांगा.

प्रेम जी – बिलकूल !

मोदी जी – हो...

प्रेम जी – हो सर...

मोदी सर- आणि प्रेम जी, आपल्या माध्यमातून...

प्रेम जी—हो सर,

मोदी जी—हे रुग्णवाहिका चालवणारे सगळे चालक देखील ....

प्रेम जी—हो ...

मोदी जी --किती मोठा धोका पत्करून काम करत आहेत.

प्रेम जी---हो सर

मोदी जी —आणि प्रत्येकाची आई काय विचार करत असेल?

प्रेम जी –बिलकूल सर

मोदी जी—जेव्हा आपल्या श्रोत्यांपर्यंत हे तुमचं हे बोलणं पोहोचेल..

प्रेम जी—हो सर,

मोदी जी—मला निश्चित वाटतं की त्यांच्याही मनाला ही गोष्ट स्पर्शून जाईल.

प्रेम जी—हो सर..

मोदी जी—प्रेम जी, खूप खूप धन्यवाद ! आपण एकप्रकारे प्रेमाची गंगाच पुढे नेत आहात...

प्रेम जी –धन्यवाद सर !

मोदी जी- धन्यवाद भाऊ..

प्रेम जी—धन्यवाद !!

मित्रांनो,

प्रेम वर्मा जी आणि त्यांच्यासारखे हजारो लोक आज आपल्या जीवाची पर्वा न करता, लोकांची सेवा करत आहेत. कोरोना विरुध्दच्या या लढाईत जितकी आयुष्ये वाचवली जात आहेत, त्यात या रुग्णवाहिका चालकांचेयोगदान खूप मोठे आहे.

प्रेम जी, आपल्याला आणि देशभरातल्या आपल्या सर्व सहकाऱ्यांना मी खूप खूप साधूवाद देतो. आपण वेळेवर पोहोचत रहा, असेच लोकांचे जीव वाचवत रहा.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, हे खरे आहे की सध्या कोरोनाचा संसर्ग खूप लोकांना होतो आहे. मात्र, कोरोनामधून बरे होणाऱ्या लोकांची संख्या देखील तितकीच जास्त आहे.

गुरूग्रामच्या प्रीती चतुर्वेदी जी यांनी अलीकडेच कोरोनावर मात केली आहे. प्रीती जी, ‘मन की बात’ मध्ये आपल्याशी संवाद साधण्यासाठी आल्या आहेत. त्यांचे अनुभव आपल्याला खूप उपयोगी पडतील.

मोदी जी-प्रीती जी, नमस्कार !

प्रीती—नमस्कार सर. कसे आहात आपण?

मोदी जी—मी तर ठीक आहे. सर्वात आधी मी कोविड-19 वर ...

प्रीती—जी

मोदी जी—यशस्वीपणे मात मिळवल्याबद्दल ..

प्रीती –जी

मोदी जी—आपलं कौतुक करतो.

प्रीती – धन्यवाद सर !

मोदी जी—आपले आरोग्य लवकरच सुदृढ, निरोगी व्हावे,याच शुभेच्छा !

प्रीती – धन्यवाद सर !

मोदी जी—प्रीती जी,

प्रीती—हो सर

मोदी जी—या कोविड लाटेत केवळ आपल्याला संसर्ग झाला की आपल्या कुटुंबांतल्या इतर व्यक्तीनांही त्याची बाधा पोहोचली?

प्रीती—नाही नाही सर, मला एकटीलाच संसर्ग झाला होता.

मोदी जी- चला, देवाची कृपा झाली. अच्छा, माझी अशी इच्छा आहे...

प्रीती—हो सर..

मोदी जी—की आपण जर आपल्या या त्रासाच्या काळातले काही अनुभव लोकांना सांगितले, तर कदाचित जे श्रोते आहेत, त्यांनाही अशा वेळी आपल्या स्वतःला कसं सांभाळायचं याविषयी मार्गदर्शन मिळू शकेल.

प्रीती—हो सर, नक्कीच ! सर सुरुवातीला मला खूप आळस... सुस्त सुस्त वाटतहोतं. त्यानंतर, माझ्या गळ्यात थोडीशी खवखव जाणवायला लागली. त्यावेळी, माझ्या असं लक्षात आलं की ही लक्षणे वाटताहेत, त्यामुळे मग मी चाचणी करुन घेतली आणि दुसऱ्या दिवशी रिपोर्ट आल्यावर मी पॉझिटिव्ह असल्याचं कळलं. मग मी स्वतःला सर्वांपासून विलग केलं. एका वेगळ्या खोलीत गेले. डॉक्टरांचा सल्ला घेतली. त्यांच्या सल्ल्यानुसार औषधे सुरु केली.

मोदी – म्हणजे आपल्या या तत्परतेमुळे आपले कुटुंबीय सुरक्षित राहिले.

प्रीती- हो सर, इतरांचीही नंतर चाचणी केली. ते सगळे निगेटिव्ह होते. मी एकटीच पॉझिटिव्ह आले होते. आणि आधीच मी स्वतःला आयसोलेट केलं होतं, एका वेगळ्या खोलीत.

मला आवश्यक ते सगळं सामान ठेवून घेत,मी स्वतःला खोलीत बंद करुन घेतलं होतं. त्यासोबतच मी नंतर डॉक्टरांच्या सल्ल्यानं औषधोपाचार पण सुरु केले होते. सर, मी या औषधोपचारांसह योगाभ्यास, आयुर्वेदिक उपचारही सुरु केले होते.आणि त्यासोबतच, मी काढाही घ्यायला सुरुवात केली होती. माझी रोगप्रतिकारशक्ती वाढावी, यासाठी सर, मी जेंव्हाही जेवत असे, त्यावेळी सकस अन्न घेत असे. प्रथिनयुक्त पदार्थ खात असे. मी खूप द्रवपदार्थ ही खात होते. मी वाफ घेत होते, गुळण्या करत होते आणि गरम पाणी पीत होते. रोज दिवसभर मी हेच सगळं करत होते. आणि सर, या दिवसांबद्दल सांगायचं ना, तर एक सर्वात मोठी गोष्ट मला सांगायची आहे ती अशी-, की अजिबात घाबरू नका. मानसिक शक्ती मजबूत असू द्यात. आणि यासाठी मला योगाभ्यासाची, श्वसनाच्या व्यायामांची खूपच मदत झाली. मला ते सगळं करतानांच खूप छान वाटत असे.

मोदी जी—हो. अच्छा,प्रीती जी, आता जेंव्हा तुमची सगळी प्रक्रिया पूर्ण झाली, आपण संकटांतून बाहेर पडलात ना ?

प्रीती – हो सर...

मोदी जी—मग आता आपल्या आरोग्याच्या रक्षणासाठी, त्याची काळजी घेण्यासाठी आपण काय करताय?

प्रीती- सर, एकतर मी योगाभ्यास बंद केलेला नाही.

मोदी जी- हो..

प्रीती—त्यासोबतच, मी काढाही घेते आणि माझी रोगप्रतिकार शक्ती उत्तम ठेवण्यासाठी मी अजूनही उत्तम सकस आहार घेते आहे.

मोदी जी—हो, बरोबर

प्रीती—आधी मी स्वतःच्या प्रकृतीकडे फार दुर्लक्ष करत असे. आता मात्र मी त्याकडे नीट लक्ष देते.

मोदी जी—धन्यवाद प्रीती जी!

प्रीती—धन्यवाद सर !

मोदी जी—आपण आता जी माहिती आणि आपला अनुभव सांगितला तो अनेकांना उपयोगी पडेल असे मला वाटते. आपण निरोगी रहा, आपल्या कुटुंबातले लोक निरोगी राहावेत, यासाठी माझ्या खूप खूप शुभेच्छा !

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, आज आपल्या वैद्यकीय क्षेत्रातले लोक, पहिल्या फळीत काम करणारे सर्व कर्मचारी, अहोरात्र सेवाकार्य करत आहेत. तसेच, समाजातले इतर लोकही, या काळात कुठेहही मागे नाहीत. देश पुन्हा एकदा एकजूट होऊन कोरोनाविरुध्द लढा देत आहेत. आजकाल मी पाहतो,

कोणी विलगीकरणात असलेल्या कुटुंबांपर्यंत औषधं पोहोचवत आहेत. कोणी भाज्या, दूध, फळे अशा गोष्टी पोहचवत आहेत. कोणी मोफत रुग्णवाहिका सेवा रूग्णांना देत आहेत. देशाच्या कानाकोपऱ्यातून या आव्हानात्मक काळात देखील अनेक स्वयंसेवी संस्था पुढाकार घेऊन इतरांची मदत करण्यासाठी जे जे करु शकतात, ते करण्याचा प्रयत्न करत आहेत. यावेळी, गावांमध्ये देखील नवी जागृती दिसते आहे. कोविड नियमांचं पालन कठोर पालन करत लोक आपापल्या गावांचं कोरोनापासून रक्षण करत आहेत. जे लोक बाहेरून येत आहेत, त्यांच्यासाठी योग्य त्या व्यवस्था तयार केल्या जात आहेत. शहरात देखील अनेक युवक मैदानात उतरले आहेत. ते आपापल्या भागात, कोरोनाचे रुग्ण वाढू नयेत, यासाठी, स्थानिक रहिवाशांसोबत प्रयत्न करत आहेत. म्हणजे एकीकडे देश, दिवसरात्र रुग्णालये, व्हेंटीलेटर्स आणि औषधांसाठी काम करत आहे, तर दुसरीकडे, देशबांधव देखील प्राणपणाने कोरोनाच्या या आव्हानाचा सामना करत आहेत. ही भावना आपल्याला किती बळ देते ! केवढा विश्वास निर्माण करते. हे जे सगळे प्रयत्न सुरु आहेत, ते समाजाची खूप मोठी सेवा आहे. यातून समाजाची शक्ती वाढत असते.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, आज ‘मन की बात’ मधली पूर्ण चर्चा आपण कोरोना महामारीवरच घेतली. कारण, आज आपली सर्वात मोठी प्राथमिकता आहे, या आजारावर मात करणे. आज भगवान महावीर जयंती देखील आहे. यानिमित्त मी सर्व देशबांधवांना शुभेच्छा देतो. भगवान महावीरांची शिकवण आपल्याला तप आणि आत्मसंयमाची प्रेरणा देते. सध्या रमझानचा पवित्र महिनाही सुरु आहे. पुढे बुद्धपौर्णिमा आहे. गुरु तेगबहादूर यांचे 400 वे प्रकाश पर्व देखील आहे. आणखी एक महत्वाचा दिवस म्हणजे- पोचीशे बोईशाक- टागोर जयंतीचा दिवस आहे. हे सगळे उत्सव आपल्याला प्रेरणा देतात.

आपली कर्तव्ये पूर्ण करण्याची प्रेरणा देतात. एक नागरिक म्हणून आपण आपल्या आयुष्यात जेवढ्या कौशल्याने आपली कर्तव्ये पार पाडू, तेवढ्या लवकर आपण संकटातून मुक्त होत भविष्याच्या आपल्या मार्गांवर तितक्याच वेगाने आपण पुढे जाऊ. याच कामनेसह, मी आपल्या सर्वांना पुन्हा एकदा आग्रह करतो की लस आपण सर्वांनी घ्यायची आहे आणि पूर्णपणे सतर्कही राहायचं आहे. ‘औषधही –अनुशासन ही’. हा मंत्र कधीही विसरायचा नाही. आपण सगळे एकत्रितपणे या संकटातून बाहेर पडणार आहोत. याच विश्वासासह आपल्या सर्वांना खूप खूप धन्यवाद ! नमस्कार !!