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यहां के राजयपाल श्रीमान कातीकल शंकर नारायणन जी, मुख्‍यमंत्री श्रीमान पृथ्‍वीराज जी, मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्री नितिन गडकरी जी, श्री पीयूष गोयल जी, यहां के नौजवान सांसद भाई शरद जी, श्री विनोद तांबरे जी, ऊर्जा सचिव श्री पी के सिन्‍हा जी, श्री आर पी सिंह, श्री आर एन नायक और विशाल संख्‍या में आए हुए सोलापुर के भाइयो-बहनो।

तीन महीना पूर्व मी आला होता (तीन महीने पहले मैं यहां आया था)

क्‍या सोलापुर के लोगों में उत्‍साह की कमी नहीं है क्‍या सोलापुर के प्‍यार पे शत शत नमन। ऐसा लगता है, सोलापुर ने मुझे अपना बना लिया। लेकिन मैं सोलापुर वासियों को ये विश्‍वास दिलाता हूं कि चुनाव के समय जब मैं यहां आया था और आपने जो भरपूर प्‍यार दिया था, और इतने कम समय में में दुबारा आया हूं। और मैं देख रहा हूं आपका प्‍यार बढ़ता ही जा रहा है। सोलापुर के मेरे भाइयों-बहनों, मैं इस प्‍यार को ब्‍याज समेत लौटाउंगा। विकास करके लौटाउंगा।

सोलापुर की पहचान टैक्‍सटाइल के साथ जुड़ी हुई है। टैक्‍सटाइल के क्षेत्र में सोलापुर के लोग कई नए प्रयोग करते हैं। लेकिन उन प्रयोगों को राष्‍ट्रीय-अंतर्राष्‍ट्रीय फलक पे जो स्‍थान मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है। टैक्‍सटाइल उद्योग एक ऐसा उद्योग है जो सर्वाधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। गरीब से गरीब को रोजगार देने वाला क्षेत्र है। और दिल्‍ली में बिठाई हुई आपकी सरकार नौजवानों को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है। नौजवान को अगर रोजगार मिल जाए तो इस देश के आशाओं को पूर्ण करने की ताकत हमारे नौजवानों में है, हमारी युवा पी‍ढ़ी में है और उसके लिए हमारे युवकों की क्षमता बढ़े, उनके हाथ में हुनर हो, उनके कौशल्‍य में वृद्धि हो, हमारा नौजवान सामर्थवान बने और सामर्थवान नौजवान से उनके कर्तव्‍यों से, उनके पुरूषार्थ से हमारा राष्‍ट्र समृद्ध बने, ये सपना लेकर हम योजनाएं बनाते हैं और जिसका लाभ भारत में जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की संभावनाएं पड़ी हैं, जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की पुरानी नींव पड़ी है, उन क्षेत्रों पर विशेष ध्‍यान देकर के टैक्‍सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने का हमारा सपना है और इसका लाभ शोलापुर को भी मिलेगा, सोलापुर के नौजवानों को भी मिलेगा

आज दो महत्‍वपूर्ण कार्यों के लिए मुझे सोलापुर की धरती पर फिर से आने का सौभाग्‍य मिला है। हमारे देश में कई चुनाव इस मुद्दे पर लड़े गए और मुद्दा हुआ करता था बीएसपी। में बीएसपी पार्टी का नाम नहीं कह रहा हूं। बीएसपी -बिजली, सड़क, पानी। अगर हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को महत्‍व देते हैं, उसको अगर प्राथमिकता देते हैं, तो लोगों में इतना पुरूषार्थ पड़ा हुआ है तो मिट्टी में से सोना बना सकते हैं। अगर किसान को पानी मिला जाए तो किसान सोना पैदा कर सकता है। और इसलिए तो इस सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना का एक बड़ा अभियान उठाया है मन में। एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर के लिए उपयोगी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर बल देना। कृषि क्षेत्र में पानी पहुंचाने को प्राथमिकता देना। उसी प्रकार से देश का औद्योगिक विकास, देश के सामान्‍य नागरिक के जीवन में क्‍वालिटी आफ लाइफ में परिवर्तन आए। आज गांव में डाक्‍टर रहने के लिए तैयार नहीं हैं, शिक्षक रहने को तैयार नहीं, सरकारी मुलाजिम रहने को तैयार नहीं। वह शाम होने से पहले ही भाग जाता है, शहर में चला जाता है, क्‍यों, क्‍योंकि गांवमें बिजली नहीं है। बिजली नहीं तो टीवी नहीं चलता है। इंटरनेट नहीं है। तो डाक्‍टर का इस स्थिति में रहने को मन नहीं करता। हमारी सरकार का सपना है सात दिवस 365 दिवस, 24 घंटे बिजली गांवों में कैसे मिले। आज इस सपने को पूरा करने के लिए एक तरफ बिजली का उत्‍पादन बढ़ाना पड़ेगा, दूसरी तरफ बिजली पहुंचाने का प्रबंध करना पड़ेगा और जन भागीदारी से महत्‍वपूर्ण काम भी करना पड़ेगा, वह है बिजली बचाओ।

कुछ लोगों को लगता है कि सेना में भर्ती होंगे, तभी देश सेवा होगी। चुनाव लड़कर के एमएलए, एमपी बनेंगे, मंत्री बनेंगे, तभी देश सेवा होगी। मेरे भाइयो-बहनो, अगर हम बिजली बचाने में योगदान करें, तो भी वह देश की बहुत बड़ी सेवा है। मैं तो चाहता हूं कि सभी विद्यार्थी देश सेवा का एक काम अपने जिम्‍मे लें। हर विद्यार्थी कर सकता है। हर महीने अपने घर पे जो बिजली का बिल आता है, हर विद्या‍र्थी उसे देखें और जब भोजन करते हैं, तब माता-पिता, भाई-बहन सबके सामने चर्चा करें, बिजली का बिल दिखा कर के। और तय करें कि इस महीने अगर 100 रुपये का बिजली का बिल आता है तो अगले महीने बिजली का बिल 90 रुपये आ जाए, यह परिवार संकल्‍प करें और इस काम को विद्यार्थी कर सकता है। एक विद्यार्थी भी अपने घर में महीने में दस दस रुपये का बिल बचाएगा, घर के लोगों को भी लगेगा, वाह अपना बेटा बहुत छोटा है लेकिन कितना बड़ा काम करता है। हमने तो कभी सोचा ही नहीं कि चलो भई बिजली का बिल कम हो, इसके लिए कुछ करें। गरीब परिवार को हर महीने 10 रुपये, 20 रुपये, 25 रुपये बिल बच जाता है तो वह गरीब के लिए काम आता है। बच्‍चों को दूध पिलाने के लिए काम आता है। लेकिन यह तब बनता है, बिजली बचाना ये हमारा स्‍वभाव बने। बिजली बचाना- यह हमारा राष्‍ट्रीय कर्तव्‍य बने। क्‍योंकि बिजली बनाने पर जितना खर्च होता है, उससे कम खर्चे में बिजली बचा कर हम देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं। और मैं देशवासियों का आह्वान करता हूं । अगर हमें भारत को आगे ले जाना हैं, गरीब की झोपड़ी में भी बिजली का दीया जले, यह हम सबका अगर सपना है तो हम भी बिजली बचाने का प्रण लें, शपथ लें। और बिजली बचाने से औरों को जितना फायदा होगा, उससे ज्‍यादा हम परिवार वालों को होगा। और मुझे यह विश्‍वास है कि मेरी यह बात स्‍कूल में, कालेज में, शिक्षकों में, परिवारों में पहुंचेगी और आने वाले दिनों में बिजली बचत के अभियान में हम सफल होंगे। उसी प्रकार से हमारे देश में सब जगह बिजली के कारखाने नहीं लग पाये। कुछ राज्‍य हैं जो प्रगतिशील हैं, उन्‍होंने इस काम में प्रगति की है। एक जमाना था, महाराष्‍ट्र भी बिजली के उत्‍पादन में हिन्‍दुस्‍तान में बहुत आगे था। पर बाद की हालत का तो मैं वर्णन करना नहीं चाहता। लेकिन मुख्‍यमंत्री जी ने जो कहा, वह सही है। पूरे देश में इंधन न होने के कारण बिजली के कारखाने बंद पड़े हैं। उनकी पीड़ा सही है। लेकिन यह पीड़ा मुख्‍यमंत्री जी आज व्‍यक्‍त कर रहे हैं। मैं जब गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, तो दो साल तक इस पीड़ा को मैं व्‍यक्‍त करता रहा था। लेकिन मेरे में उस समय कहने का अवसर था, पृथ्‍वीराज के लिए बोलना जरा मुश्किल था, लेकिन मैं बोलता था। लेकिन भाइयो-बहनो, अब जिम्‍मेदारी हमारी है। हम जिम्‍मेदारियों से भागने वाले लोग नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अटका हुआ है, कोयला चोरी का। जांच-पड़ताल चल रही है। लेकिन हम नई नीतियों को लेकर के जल्‍द से जल्‍द कोयले के खदानों में तेज गति से काम चले, इसके लिए प्रयासरत हैं। कोयले के खदानों में इनवायरामेंट के नुकसान के बिना, जंगलों में नुकसान किये बिना, आधुनिक टेक्‍नोलोजी से कोयला निकालना चाहते हैं। जल्‍द से जल्‍द कोयला भी पहुंचेगा, बिजली भी पैदा होगी। बिजली हिन्‍दुस्‍तान के कोने कोने में जाएगी।

भाइयो-बहनो, जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, हम गुजरात में 24 घंटे, 365 दिन गांव को भी बिजली देते थे। वहां बिजली का जाना, यह पता ही नहीं है लोगों को। हमारे पास अतिरिक्‍त बिजली थी, इसके बावजूद भी, वह बिजली देश के काम नहीं आती थी। बिजली के कारखाने हमें बंद करने पड़ते थे। क्‍योंकि बिजली ले जाने के लिए जो ट्रांसमिशन लाइन चाहिए, वह नहीं थी। ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण बिजली नहीं जाती थी। एक बार दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री ने मुझे कहा, मोदी जी हमारे यहां चुनाव आ रहा है। दिल्‍ली में अंधेरा हमें परेशान करता है। आप कुछ बिजली दीजिए। मैंने कहा, में राजनीति बीच में नहीं लाता हूं, मैं प्रबंध करता हूं। मैं मीटिंग में था, आधे घंटे में मैंने उनको जवाब दिया, आपको जितनी बिजली चाहिए, आप ले सकते हैं। मैंने हमारे अफसरों से बात करना, उनके अफसरों से मिला देना, फोन पर सारा कारोबार चला। दूसरे दिन मैंने पूछा, सब हो गया, तो मुख्‍यमंत्री जी ने कहा- मोदी जी आप तो तैयार हैं पर बिजली लाने के लिए मेरे पास तार नहीं है। तार नहीं होने के कारण दिल्‍ली अंधेरे में रह गई। भाइयों-बहनों आज हमारे लिए यह बिजली के ट्रासंमिशन लाइन के द्वारा पूरे देश को जोड़ना आवश्‍यक है। जिस इलाके में बिजली नहीं है, वहां बिजली पहुंचाना आवश्‍यक है और वही महत्‍वपूर्ण काम उत्‍तर को पश्चिम से जोड़ना, पश्चिम को पूरब से जोड़ने का एक महत्‍वपूर्ण काम, जिसका आज उद्घाटन आपके सोलापुर की धरती से राष्‍ट्र को समर्पित किया जा रहा है। दक्षिण भारत, जहां बिजली की जरूरत है, महाराष्‍ट्र में जहां बिजली की जरूरत है, जिन राज्‍यों के पास अतिरिक्‍त बिजली है, उसको पहुंचाने के लिए एक ग्रिड काम आने वाली है। उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

भाइयो-बहनो, गुजरात में एक सरदार सरोवर डैम नर्मदा योजना, जिसकी भागीदारी महाराष्‍ट्र, गुजरात, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान चारों की है। लेकिन पिछले सात साल से दिल्‍ली सरकार की परमिशन नहीं मिलती है। नर्मदा डैम के काम को ऊचाई नहीं मिल रही थी और इसके कारण हमने हाइड्रो प्रोजेक्‍ट लगाया हुआ था, बिजली पैदा करने के लिए, पानी कम होने के कारण जितनी बिजली पैदा होनी चाहिए, नहीं होती थी। पूरी क्षमता का उपयोग करना है तो डैम का काम पूरा होना जरूरी था। लेकिन राजनीतिक कारणों से डैम की ऊंचाई बढ़ाने की हमें अनुमति नहीं मिलती थी। सात साल से दिल्‍ली से हमारा झगड़ा चलता रहता था। नई सरकार बनने के बाद दस दिन में ही ये परमिशन दे दी। डैम की हाइट बढ़ाने का काम चल रहा है, लेकिन इससे महाराष्‍ट्र का क्‍या। आपको जानकर के खुशी होगी, इसके कारण अब बिजली पूरी क्षमता से पैदा होगी। उसके कारण महाराष्‍ट्र को हर वर्ष 400 करोड़ रुपये की बिजली मुफ्त में मिलेगी। ये काम आज से 7 साल पहले हो सकता था। यह काम अगर हो गया होता तो आज पृथ्‍वीराज जी गर्व के साथ महाराष्‍ट्र में बिजली पहुंचा सकते थे, लेकिन नहीं हुआ।

भाइयो-बहनो, ऐसे कई रुके हुए काम अब मेरे करने के दिन आए हैं। आज पुणे-सोलापुर हाईवे का भी शिलान्‍यास हो रहा है। आगे चल कर के यह आपको कर्नाटक से भी जोड़ेगा। इसके कारण , नितिन जी अभी कह रहे थे, अमेरिका के प्रेसिडेंट का उल्‍लेख करते थे। दुनिया में जहां-जहां विकास हुआ है, आप अगर उसका अध्‍ययन करेंगे तो सबसे पहले उस देश ने हिम्‍मत करके और कठिनाइयां झेल कर के, दो काम और रह जाए तो रह जाए, उसकी चिंता किए बिना इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता दी। खास करके रोड नेटवर्क को प्राथमिकता दी। और रोड नेटवर्क को प्राथमिकता देने के कारण उन राष्‍ट्रों के विकास में बहुत बड़ी तेजी आई। साउथ कोरिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। साउथ कोरिया हमारे महाराष्‍ट्र से भी छोटा है। आर्थिक हालत बहुत खराब थी। लेकिन 30 वर्ष पहले वहां के शासकों ने पूरे साउथ कोरिया के बीच में से बहुत बड़ा रोड बना लिया। बहुत आंदोलन हुआ, लोगों ने विरोध किया सरकार का, कि इतने पैसे गंवा रहे हैं। खाने को पैसे नहीं हैं, गरीब देश है, भुखमरी है और आप रोड बना रहे हैं। सरकार बहुत मक्‍कमल थी, रोड बना दिया। देखते ही देखते रोड ने कोरिया की स्‍थति को बदल दिया और वो कोरिया, हिन्‍दुस्‍तान के बाद आजाद हुआ था, इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि आज से दस-पंद्रह साल पहले कोरिया के अंदर ओलंपिक गेम को आयोजित करने का सामर्थ्‍य दिखाया था। एक रोड से सारी सोच बदल गई।

भाइयो-बहनो, रोड बनाने में इतनी ताकत होती है। रोड, रास्‍ता सिर्फ आपको ले जाता है, ऐसा नहीं है, आपकी सोच को भी बदल देता है। और यह सही है संपत्ति से रोड नहीं बनते हैं, रोड बनाने से संपत्ति बनती है। और इसलिए जितने अच्‍छे मार्गों के माध्‍यम से हम देश के हर कोने को जोड़ेंगे, उतना अच्‍छा। अटल बिहारी वाजपेयी ने एक और बड़ा काम किया था, गोल्‍डन चर्तुभुज बनाया था। बाद में वह काम अटक गया। लेकिन पूरे देश में उस रास्‍ते के नेटवर्क ने एक नया विश्‍वास पैदा किया था। नितिन जी के नेतृत्‍व में हम उस काम को भी तेज गति से आगे बढ़ाने वाले हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना, जो वाजपेयी जी लाए थे, उस सड़क योजना के कारण गांव गांव को जोड़ने की सुविधा में गति आई थी। उसी प्रकार से रोड नेटवर्क हों, रेल नेटवर्क हो, उसे भी बढ़ाना है। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता देते हुए इस देश के कोने कोने में हर एक क्षेत्र को जोड़ना है। और जब इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बढ़ता है तो रोजगारी की संभावनाएं भी बहुत बढ़ती है। रोड बनाने में रोजगार मिलता है। सिर्फ ऐसा ही नहीं है, रोड में लगने वाला सामान जहां से आता है, उन कारखानों में रोगजार मिलता है। ट्रांसपोर्ट में भी रोजगार मिलता है। एक प्रकार से बेरोजगारी भगाने के लिए एक बड़ा माध्‍यम बन जाता है। और इसलिए ये रोड नेटवर्क, हम इन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का निर्माण भी स्‍ट्रेटेजिकली महत्‍वपूर्ण करने वाले हैं।

ऐसे नहीं, एक तरफ तो हम टूरिज्‍म बढ़ाने की बात करें लेकिन रास्‍ते वाला जो डिपार्टमेंट है, उसका कोई कंट्रीव्‍यूशन ही नहीं हो तो टूरिज्‍म कैसे बढ़ेगा। अगर टूरिज्‍म बढ़ाने के लिए अच्‍छे रोड नेटवर्क की जरूरत है तो उसको प्राथमिकता दे कर के उस रोड नेटवर्क को पूरा किया जाएगा। देश, आज से 20-25 साल पहले रेल-रोड नेटवर्क से संतुष्‍ट हो जाता था। लेकिन देश 21 वीं सदी में सिर्फ रेल और रोड के माध्‍यम से संतुष्‍ट नहीं हो सकता। आज देश को हाईवेज भी चाहिए, आईवेज भी चाहिए। आईवेज का मेरा मतलब है इंफोरमेशन हाईवेज। इंफोरमेशन टेक्‍नोलोजी के माध्‍यम से, ब्राडबैंड कनेक्टिविटी के माध्‍यम से, इंटरनेट कनेक्टिविटी के माध्‍यम से गांव गांव जुड़ना चाहिए। नए युग की आवश्‍यकता है। गैस गिड चाहिए, वाटर ग्रिड चाहिए। बिजली की ग्रिड चाहिए। हर प्रकार से एक रूप का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का माडल आज समय की मांग है। और उसी की पूर्ति की दिशा में आज एक कदम जो उत्‍तर से दक्षिण को जोड़ने वाला है, महाराष्‍ट्र से कर्नाटक को जोड़ने वाला है। चाहे बिजली के माध्‍यम से हो, चाहे रोड नेटवर्क के माध्‍यम से हो, यह जोड़ने के अभियान के हिस्‍से के स्‍वरूप में आज मुझे सोलापुर आने का सौभाग्‍य मिला है। मैं आपके प्‍यार के लिए बहुत-बहुत आभारी हूं और मैं विश्‍वास करता हूं कि यह काम बहुत तेज गति से आगे बढ़ेगा और सोलापुर के विकास तथा इस क्षेत्र के विकास में, हिन्‍दुस्‍तान के दक्षिणी छोर में बिजली की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए यह सारे प्रयास सुखकर परिणाम देंगे।

इसी विश्‍वास के साथ आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀଗଣ, ନମସ୍କାର । ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ‘ମନ୍ କି ବାତ୍‌’ ଏପରି ଏକ ସମୟରେ କହୁଛି, ଯେତେବେଳେ କରୋନା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କର ଧୈର୍ଯ୍ୟ ଓ ସମସ୍ତଙ୍କର ଦୁଃଖ ସହିବାର ସୀମାକୁ ପରଖୁଛି । ଅନେକ ନିଜ ଲୋକ ଆମକୁ ଅସମୟରେ ଛାଡ଼ି ଚାଲିଯାଇଛନ୍ତି । କରୋନାର ପ୍ରଥମ ଲହରକୁ ସଫଳତାର ସହିତ ମୁକାବିଲା କରିବା ପରେ ଦେଶ ଉତ୍ସାହରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ ଥିଲା, ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସରେ ଭରି ରହିଥିଲା, କିନ୍ତୁ ଏହି ଝଡ଼ ଦେଶକୁ ଦୋହଲାଇ ଦେଇଛି ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, ବିଗତ ଦିନରେ ଏହି ସଙ୍କଟର ମୁକାବିଲା ପାଇଁ, ଭିନ୍ନ ଭିନ୍ନ କ୍ଷେତ୍ରର ବିଶେଷଜ୍ଞମାନଙ୍କ ସହ ମୋର ଦୀର୍ଘ ଆଲୋଚନା ହୋଇଛି । ଆମର ଔଷଧ ପ୍ରସ୍ତୁତି ଶିଳ୍ପ ସହ ଜଡ଼ିତ ଲୋକ ହୁଅନ୍ତୁ, ଟିକା ନିର୍ମାତା ହୁଅନ୍ତୁ, ଅମ୍ଳଜାନ ପ୍ରସ୍ତୁତି ସହ ଜଡ଼ିତ ଲୋକ ହୁଅନ୍ତୁ କିମ୍ବା ଚିକିତ୍ସା କ୍ଷେତ୍ରର ବିଶେଷଜ୍ଞମାନେ ହୁଅନ୍ତୁ, ସେମାନେ ନିଜ ନିଜର ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ପରାମର୍ଶ ସରକାରଙ୍କୁ ଦେଇଛନ୍ତି । ଏବେ ଆମକୁ ଏହି ସଂଗ୍ରାମରେ ବିଜୟ ଲାଭ କରିବାକୁ ହେଲେ ବିଶେଷଜ୍ଞ ଏବଂ ବୈଜ୍ଞାନିକମାନଙ୍କ ପରାମର୍ଶକୁ ଅଗ୍ରାଧିକାର ଦେବାକୁ ହେବ । ରାଜ୍ୟ ସରକାରମାନଙ୍କର ପ୍ରଚେଷ୍ଟାକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବା ପାଇଁ ଭାରତ ସରକାର ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଶକ୍ତି ସହ ଲାଗିପଡ଼ିଛନ୍ତି । ରାଜ୍ୟ ସରକାରମାନେ ମଧ୍ୟ ନିଜ ଦାୟିତ୍ୱ ନିର୍ବାହ କରିବାର ପୂର୍ଣ୍ଣ ଚେଷ୍ଟା କରୁଛନ୍ତି ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, କରୋନା ବିରୁଦ୍ଧରେ ବର୍ତମାନ ଦେଶର ଡାକ୍ତର ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟକର୍ମୀମାନେ ସଂଗ୍ରାମ ଚଳାଇଛନ୍ତି । ଗତବର୍ଷ ଏହି ବ୍ୟାଧିକୁ ନେଇ ସେମାନେ ଅନେକ ଅନୁଭୂତି ସାଉଁଟିଛନ୍ତି । ଆମ ସହ ବର୍ତମାନ ମୁମ୍ବାଇରୁ ପ୍ରସିଦ୍ଧ ଡାକ୍ତର ଶଶାଙ୍କ ଜୋଷୀ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି ।

କରୋନା ଚିକିତ୍ସା ଏବଂ ତା’ସହ ସମ୍ପୃକ୍ତ ଗବେଷଣା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଡାକ୍ତର ଶଶାଙ୍କ କ୍ଷେତ୍ରୀୟ ସ୍ତରରେ ଗଭୀର ଅନୁଭବ ଲାଭ କରିଛନ୍ତି । ସେ ଇଣ୍ଡିଆନ୍ କଲେଜ ଅଫ୍ ଫିଜିସିଆନ୍ସର ଡିନ୍ ଥିଲେ । ଆସନ୍ତୁ, କଥା ହେବା ଡା. ଶଶାଙ୍କଙ୍କ ସହ –

ମୋଦି ଜୀ - ନମସ୍କାର ଡା. ଶଶାଙ୍କ ।

ଡା. ଶଶାଙ୍କ - ନମସ୍କାର ସାର୍ ।

ମୋଦି ଜୀ - କିଛିଦିନ ତଳେ ଆପଣଙ୍କ ସହ କଥା ହେବାର ସୁଯୋଗ ମିଳିଥିଲା । ଆପଣଙ୍କ ମତାମତର ସ୍ପଷ୍ଟତା ମୋତେ ବହୁତ ଭଲ ଲାଗିଥିଲା । ଦେଶର ସମସ୍ତ ନାଗରିକ ଆପଣଙ୍କ ମତାମତ ଜାଣିବା ଉଚିତ ବୋଲି ମୋର ମନେ ହେଲା । ଯାହା ସବୁ ଶୁଣିବାକୁ ମିଳୁଛି, ସେଗୁଡ଼ିକୁ ମୁଁ ପ୍ରଶ୍ନ ରୂପେ ଆପଣଙ୍କ ଆଗରେ ଉପସ୍ଥାପିତ କରୁଛି । ଡା. ଶଶାଙ୍କ, ଆପଣମାନେ ଏବେ ଦିନରାତି ଜୀବନରକ୍ଷା କାର୍ଯ୍ୟରେ ଲାଗିଛନ୍ତି । ସର୍ବପ୍ରଥମେ ଏହି ଦ୍ୱିତୀୟ ଲହର ବିଷୟରେ ଲୋକଙ୍କୁ ଜଣାନ୍ତୁ ବୋଲି ମୁଁ ଚାହୁଁଛି । ଚିକିତ୍ସା ଦୃଷ୍ଟିରୁ ଏହା କିପରି ଭିନ୍ନ ଏବଂ ଏଥିପାଇଁ କି କି ସତର୍କତାର ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି?

ଡା. ଶଶାଙ୍କ - ଧନ୍ୟବାଦ ସାର୍‌, ଇଏ ଯେଉଁ ଦ୍ୱିତୀୟ ଲହର ଆସିଛି, ଏହା ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଆସିଛି । ପ୍ରଥମେ ଯେଉଁ ଲହର ଚାଲିଥିଲା, ତା’ ଅପେକ୍ଷା ଏଥର ଭାଇରସ ଅଧିକ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ବ୍ୟାପୁଛି । କିନ୍ତୁ, ଭଲ କଥା ଯେ, ତା’ଠାରୁ ଅଧିକ ବେଗରେ ଲୋକେ ସୁସ୍ଥ ମଧ୍ୟ ହେଉଛନ୍ତି ଏବଂ ମୃତ୍ୟୁହାର ଯଥେଷ୍ଟ କମ ରହିଛି । ଏଥିରେ ୨-୩ଟି ପାର୍ଥକ୍ୟ ରହିଛି । ପ୍ରଥମତଃ, ଏହା ଯୁବଗୋଷ୍ଠୀ ଏବଂ ଶିଶୁମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ବି କିଛି ମାତ୍ରାରେ ଦେଖାଯାଉଛି । ଏହାର ଲକ୍ଷଣ ପୂର୍ବ ଥରର ଲକ୍ଷଣ ଯେମିତିକି ନିଃଶ୍ୱାସ-ପ୍ରଶ୍ୱାସରେ କଷ୍ଟ ହେବା, ଶୁଖିଲା କାଶ ହେବା, ଜ୍ୱର ହେବା, ଏସବୁ ତ ରହିଛି, ତା’ ସାଙ୍ଗକୁ ଗନ୍ଧ ବାରି ନ ପାରିବା, ସ୍ୱାଦ ଜାଣି ନ ପାରିବା ଭଳି ଲକ୍ଷଣ ମଧ୍ୟ ରହିଛି । ଲୋକେ ମଧ୍ୟ କିଛି ମାତ୍ରାରେ ଭୟଭୀତ ହୋଇଛନ୍ତି । ଭୟ କରିବାର କୌଣସି ଆବଶ୍ୟକତା ନାହିଁ। ଶତକଡ଼ା ୮୦ରୁ ୯୦ ଭାଗ ଲୋକଙ୍କଠାରେ ଏହାର କୌଣସି ଲକ୍ଷଣ ପ୍ରକାଶ ପାଏ ନାହିଁ । ଯେଉଁ ମ୍ୟୁଟେସନ୍ କଥା କହୁଛନ୍ତି, ସେଥିରେ ଡରିବାର କୌଣସି କାରଣ ନାହିଁ । ଏହି ମ୍ୟୁଟେସନ ଏକ ନିରନ୍ତର ପ୍ରକ୍ରିୟା । ଆମେ ପୋଷାକ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିବା ଭଳି, ଭାଇରସ୍ ନିଜ ରୂପ ପରିବର୍ତନ କରୁଛି । ତେଣୁ ଭୟ କରିବାର କୌଣସି କାରଣ ନାହିଁ । ଏହି ଲହରର ମୁକାବିଲା କରିବାରେ ଆମେ ସଫଳତା ଲାଭ କରିବା । ଲହର ଏମିତି ଚାଲିଥାଏ । ଭାଇରସ୍ ମଧ୍ୟ ଏମିତି ଆସୁଥାଏ-ଯାଉଥାଏ । ସେଥିପାଇଁ ଏମିତି ଭିନ୍ନ ଭିନ୍ନ ଲକ୍ଷଣ ପ୍ରକାଶ ପାଇଥାଏ । ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଦୃଷ୍ଟିରୁ ଆମେ ସତର୍କ ରହିବା ଉଚିତ । ଏହା ୧୪ରୁ ୨୧ ଦିନର ଗୋଟିଏ କୋଭିଡ ଟାଇମ-ଟେବୁଲ । ଏଥିରେ ଡାକ୍ତରମାନଙ୍କ ପରାମର୍ଶ ନେବା ଆବଶ୍ୟକ ।

ମୋଦି ଜୀ - ଡା. ଶଶାଙ୍କ, ଆପଣ ଯେଉଁ ବିଶ୍ଲେଷଣ କଲେ, ତାହା ମୋ ପାଇଁ ବହୁତ କୌତୂହଳପ୍ରଦ । ମୁଁ ଅନେକ ଚିଠି ପାଇଛି, ଯେଉଁଥିରେ ଚିକିତ୍ସା ବିଷୟରେ ଲୋକଙ୍କ ମନରେ ଅନେକ ଆଶଙ୍କା ରହିଛି । କେତେକ ଔଷଧର ଚାହିଦା ବହୁତ ବଢ଼ିଛି । ଏଥିପାଇଁ ମୁଁ ଚାହୁଁଛି ଯେ, ଆପଣ କୋଭିଡ୍‌ର ଚିକିତ୍ସା ସମ୍ପର୍କରେ ଲୋକଙ୍କୁ ନିଶ୍ଚୟ କିଛି କୁହନ୍ତୁ ।

ଡା. ଶଶାଙ୍କ- ହଁ ସାର୍‌, ଲୋକେ ଚିକିତ୍ସା ପାଇଁ ବିଳମ୍ବରେ ଡାକ୍ତରଖାନା ଆସୁଛନ୍ତି । ରୋଗ ଆପେ ଆପେ ଭଲ ହୋଇଯିବ ବୋଲି ଭାବୁଛନ୍ତି । ମୋବାଇଲରେ ଆସୁଥିବା କଥାଗୁଡ଼ିକ ଉପରେ ବିଶ୍ୱାସ କରୁଛନ୍ତି । ଯଦି ସେମାନେ ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଦିଆଯାଉଥିବା ସୂଚନାକୁ ପାଳନ କରିଥାନ୍ତେ, ତାହେଲେ ଏଭଳି କଠିନ ପରିସ୍ଥିତି ଉପୁଜି ନ ଥାନ୍ତା । କୋଭିଡ୍‌ରେ କ୍ଲିନିକ୍ ଟ୍ରିଟମେଣ୍ଟ ପ୍ରୋଟୋକଲ୍ ରହିଛି । ସେଥିରେ ତିନି ପ୍ରକାର ତୀବ୍ରତା କଥା କୁହାଯାଇଛି – ହାଲ୍‌କା ବା ମାଇଲ୍ଡ କୋଭିଡ୍‌, ମଧ୍ୟମ ବା ମଡ୍‌ରେଟ୍ କୋଭିଡ୍ ଏବଂ ତୀବ୍ର ବା ସିଭିୟର୍ କୋଭିଡ୍। ମାଇଲ୍ଡ୍ କୋଭିଡ୍ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆମେ ଅକ୍ସିଜେନ୍ ମନିଟରିଂ ବା ଅମ୍ଳଜାନର ମାତ୍ରାକୁ ତଦାରଖ କରିଥାଉ, ଜ୍ୱର ବଢ଼ିଗଲେ ବେଳେବେଳେ ପାରାସିଟାମଲ୍ ଭଳି ଔଷଧ ବ୍ୟବହାର କରିଥାଉ । ଏଭଳି ପରିସ୍ଥିତିରେ ନିଜର ଚିକିତ୍ସକଙ୍କ ପରାମର୍ଶ ନେବା ଉଚିତ । ମଧ୍ୟମ ଏବଂ ତୀବ୍ର କୋଭିଡ୍ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଡାକ୍ତରଙ୍କ ପରାମର୍ଶ ନେବା ନିହାତି ଜରୁରୀ । ଭଲ ଔଷଧ ସୁଲଭ ମୂଲ୍ୟରେ ଉପଲବ୍ଧ । ସେଥିରେ ରହିଥିବା ଷ୍ଟେରଏଡ୍ ଜୀବନ ରକ୍ଷା କରିପାରେ । ଇନ୍‌ହେଲର୍ ଏବଂ ଟ୍ୟାବଲେଟ୍ ମଧ୍ୟ ଦିଆଯାଇପାରେ । ତା’ସହିତ ଅମ୍ଳଜାନ ମଧ୍ୟ ଦେବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ । ଏଥିପାଇଁ ଛୋଟ ଛୋଟ ଚିକିତ୍ସାମାନ ରହିଛି, କିନ୍ତୁ, ପ୍ରାୟତଃ ଦେଖାଯାଇଥାଏ ଯେ, ଗୋଟିଏ ନୂଆ ପ୍ରୟୋଗାତ୍ମକ ଔଷଧ ରହିଛି, ଯାହାର ନାଁ ରେମ୍‌ଡେସିଭିର୍ । ଏହି ଔଷଧ ଯୋଗୁଁ ଗୋଟିଏ କଥା ନିଶ୍ଚିତ ହୋଇଥାଏ ଯେ ଡାକ୍ତରଖାନାରେ ୨-୩ ଦିନ କମ୍ ରହିବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ ଏବଂ କ୍ଲିନିକାଲ୍ ରିକଭରିରେ ଏହା ଟିକିଏ ସାହାଯ୍ୟ କରିଥାଏ । ଏ ଔଷଧ ପୁଣି କେତେବେଳେ କାମ କରେ? ଯଦି ଏହି ଔଷଧକୁ ପ୍ରଥମ ୯-୧୦ ଦିନରେ ଦିଆଯାଏ ତାହେଲେ ଏହା ଭଲ କାମ କରିଥାଏ । ଆଉ ଏହାକୁ ପାଂଚଦିନ ଦେବାକୁ ହୋଇଥାଏ। ତେଣୁ ଲୋକେ ରେମ୍‌ଡେସିଭିର ପଛରେ ଯେମିତି ଧାଇଁଛନ୍ତି, ତାହା ଉଚିତ ନୁହେଁ । ଏହି ଔଷଧକୁ ଅତି ଜରୁରୀ ନ ଥିଲେ ଦିଆଯାଏ ନାହିଁ । ଯେଉଁମାନଙ୍କର ଅମ୍ଳଜାନ ଦରକାର ହୋଇଥାଏ, ଯେଉଁମାନଙ୍କୁ ଡାକ୍ତରଖାନାରେ ଭର୍ତି ହେବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ, ସେହିମାନେ ହିଁ ଡାକ୍ତରଙ୍କ ପରାମର୍ଶ ଅନୁସାରେ ଏହି ଔଷଧ ପ୍ରୟୋଗ କରିବା ଉଚିତ। ସମସ୍ତେ ଏକଥା ବୁଝିବା ନିହାତି ଆବଶ୍ୟକ । ଯଦି ଆମେ ପ୍ରାଣାୟାମ କରିବା, ଆମର ଶରୀରର ଫୁସ୍‌ଫୁସ୍‌କୁ ପ୍ରସାରିତ କରିବା ଏବଂ ରକ୍ତକୁ ପତଳା କରିବା ପାଇଁ ଯେଉଁ ଇଞ୍ଜେକସନ ଦିଆଯାଇଥାଏ, ଯାହାକୁ ଆମେ ହେପାରିନ୍ କହୁଁ, ଏହି ଛୋଟ ଛୋଟ ଔଷଧରେ ହିଁ ଶତକଡ଼ା ୯୮ ଭାଗ ଲୋକେ ଭଲ ହୋଇଯାଆନ୍ତି । କିନ୍ତୁ ମନରେ ସକାରାତ୍ମକ ଭାବନା ରହିବା ବହୁତ ଜରୁରୀ । ଟ୍ରିଟମେଣ୍ଟ ପ୍ରୋଟୋକଲ୍ ଚିକିତ୍ସକଙ୍କ ପରାମର୍ଶ ଅନୁଯାୟୀ ହେବା ନିହାତି ଆବଶ୍ୟକ । ଦାମିକା ଔଷଧ ପଛରେ ଗୋଡ଼ାଇବାର କୌଣସି ଆବଶ୍ୟକତା ନାହିଁ । ସାର୍‌, ଆମ ନିକଟରେ ଉତମ ଚିକିତ୍ସାର ଉପଲବ୍ଧତା ଅଛି, ଅମ୍ଳଜାନ ରହିଛି, ଭେଣ୍ଟିଲେଟର୍‌ର ସୁବିଧା ରହିଛି - ସବୁ କିଛି ଅଛି ସାର୍‌, ଆଉ ଯଦି କେବେ କେବେ ଏହି ଔଷଧ ମିଳେ ତାହେଲେ ଯୋଗ୍ୟ ରୋଗୀଙ୍କୁ ହିଁ ଦିଆଯିବା ଉଚିତ । ଏହି କ୍ଷେତ୍ରରେ ବହୁତ ଭୁଲ ଧାରଣା ରହିଛି । ତେଣୁ ଏକଥା ସ୍ପଷ୍ଟ କରିଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି ସାର୍‌, ଯେ ଆମ ପାଖରେ ବିଶ୍ୱର ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଚିକିତ୍ସା ଉପଲବ୍ଧ । ଆପଣ ଲକ୍ଷ୍ୟ କରିବେ ଯେ, ଭାରତରେ ଆରୋଗ୍ୟ ହାର ସବୁଠାରୁ ଅଧିକ । ଆପଣ ଯଦି ଇଉରୋପ କିମ୍ବା ଆମେରିକା ସହ ତୁଳନା କରିବେ ତାହେଲେ ଦେଖିବେ ଯେ, ତାଙ୍କ ଅପେକ୍ଷା ଆମ ଟ୍ରିଟମେଣ୍ଟ ପ୍ରୋଟୋକଲ୍‌ରେ ଅଧିକ ରୋଗୀ ଭଲ ହେଉଛନ୍ତି ସାର୍ ।

ମୋଦି ଜୀ -ଡା. ଶଶାଙ୍କ, ଆପଣଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ । ଡା. ଶଶାଙ୍କ ଆମକୁ ଯାହା ସୂଚନା ଦେଲେ, ସେସବୁ ନିହାତି ଜରୁରୀ ଏବଂ ଆମମାନଙ୍କ କାମରେ ଲାଗିବ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଅନୁରୋଧ କରୁଛି, ଯଦି ଆପଣଙ୍କର କୌଣସି ସୂଚନା ଦରକାର ହୁଏ, ଯଦି କୌଣସି ଆଶଙ୍କା ଥାଏ, ତାହେଲେ ଉଚିତ ସ୍ରୋତରୁ ହିଁ ସୂଚନା ଗ୍ରହଣ କରନ୍ତୁ, ଯେମିତିକି ଆପଣଙ୍କ ଫ୍ୟାମିଲି ଡାକ୍ତର ହୁଅନ୍ତୁ, ପାଖରେ ଥିବା ଡାକ୍ତର ହୁଅନ୍ତୁ, ଆପଣ ସେମାନଙ୍କୁ ଟେଲିଫୋନରେ ଯୋଗାଯୋଗ କରି ତାଙ୍କ ପରାମର୍ଶ ଗ୍ରହଣ କରନ୍ତୁ । ମୁଁ ଲକ୍ଷ୍ୟ କରୁଛି, ଆମର ଅନେକ ଡାକ୍ତର ସ୍ୱୟଂ ଏହି ଦାୟିତ୍ୱ ଗ୍ରହଣ କରୁଛନ୍ତି । ଅନେକ ଡାକ୍ତର ସାମାଜିକ ଗଣମାଧ୍ୟମ ଜରିଆରେ ଲୋକଙ୍କୁ ସୂଚନା ପ୍ରଦାନ କରୁଛନ୍ତି । ଫୋନରେ, ହ୍ୱାଟ୍ସଆପ୍ ମାଧ୍ୟମରେ ବି ପରାମର୍ଶ ଦେଉଛନ୍ତି । ଅନେକ ଡାକ୍ତରଖାନାର ୱେବ୍‌ସାଇଟ୍ ରହିଛି, ଯେଉଁଠି ସୂଚନା ଉପଲବ୍ଧ ହେଉଛି । ସେଠାରେ ଆପଣ ଡାକ୍ତରଙ୍କ ପରାମର୍ଶ ମଧ୍ୟ ନେଇପାରିବେ । ଏହା ବହୁତ ପ୍ରଶଂସନୀୟ ।

ମୋ ସହିତ ଶ୍ରୀନଗରରୁ ଡାକ୍ତର ନାୱିଦ୍ ନଜିର ଶାହ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି । ଡାକ୍ତର ନାୱିଦ୍ ହେଉଛନ୍ତି ଶ୍ରୀନଗରର ଗୋଟିଏ ସରକାରୀ ଭେଷଜ ମହାବିଦ୍ୟାଳୟର ଜଣେ ପ୍ରଫେସର । ଡା. ନାୱିଦ୍ ନିଜ ଉଦ୍ୟମରେ ଅନେକ କରୋନା ରୋଗୀଙ୍କୁ ସୁସ୍ଥ କରିସାରିଛନ୍ତି, ତା’ଛଡ଼ା ରମଜାନ୍‌ର ଏହି ପବିତ୍ର ମାସରେ ବି ଡା. ନାୱିଦ୍ ନିଜ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଚାଲିଛନ୍ତି । ସେ ଆମ ସହିତ କଥା ହେବାପାଇଁ ସମୟ ମଧ୍ୟ ବାହାର କରିଛନ୍ତି । ଆସନ୍ତୁ ତାଙ୍କରି ସହ କଥା ହେବା ।

ମୋଦି ଜୀ - ନାୱିଦ୍ ଜୀ ନମସ୍କାର ।

ଡା. ନାୱିଦ୍‌ - ନମସ୍କାର ସାର୍ ।

ମୋଦି ଜୀ - ଡା. ନାୱିଦ୍‌, ଆମ ‘ମନ୍ କି ବାତ୍‌’ର ଶ୍ରୋତାମାନେ ଏହି କଠିନ ସମୟରେ ପାନିକ୍ ମାନେଜ୍‌ମେଣ୍ଟ ସମ୍ପର୍କରେ ପ୍ରଶ୍ନ ଉତ୍‌ଥାପନ କରିଛନ୍ତି । ଆପଣ ନିଜ ଅନୁଭୂତିରୁ ସେମାନଙ୍କୁ କ’ଣ ଉତର ଦେବେ?

ଡା. ନାୱିଦ୍‌- ଦେଖନ୍ତୁ, କରୋନା ଆରମ୍ଭ ହେବା ସମୟରେ କାଶ୍ମୀରର ଯେଉଁ ହସପିଟାଲକୁ ପ୍ରଥମ କୋଭିଡ ହସ୍‌ପିଟାଲ୍ ଭାବରେ ରୂପାନ୍ତରିତ କରାଯାଇଥିଲା, ତାହାଥିଲା ଆମର ସିଟି ହସପିଟାଲ୍ । ସେହି ହସ୍‌ପିଟାଲ ଭେଷଜ ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ଅଧିନରେ ହିଁ ରହିଛି । ସେତେବେଳେ ଗୋଟିଏ ଭୟର ବାତାବରଣ ଥିଲା । ଲୋକଙ୍କ ମନରେ ତ ଏହା ନିଶ୍ଚିତ ଭାବେ ରହିଥିଲା, ଯେ ଯଦି କେହି କରୋନା ସଂକ୍ରମିତ ହେଲା, ତାହେଲେ ତାହାକୁ ମୃତ୍ୟୁଦଣ୍ଡ ବୋଲି ଧରି ନିଆଯାଉଥିଲା । ଆମ ଚିକିତ୍ସାଳୟରେ ଯେଉଁ ଡାକ୍ତରମାନେ କିମ୍ବା ପାରା-ମେଡିକାଲ ଷ୍ଟାଫ୍ କାମ କରୁଥିଲେ, ସେମାନଙ୍କ ମନରେ ବି ଗୋଟିଏ ଭୟର ବାତାବରଣ ଥିଲା ଯେ, ଏଭଳି ରୋଗୀଙ୍କୁ ଆମେ କେମିତି ଚିକିତ୍ସା କରିବା? ଏଥିରେ ଆମ ପ୍ରତି ସଂକ୍ରମଣର ଭୟ ନାହିଁ ତ? କିନ୍ତୁ ସେହି ସମୟରେ ଆମେ ଅନୁଭବ କଲୁ ଯେ, ଯଦି ଆମେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବେ ସୁରକ୍ଷା ପୋଷାକ (ପ୍ରୋଟେକ୍ଟିଭ୍ ଗିୟର୍‌) ପରିଧାନ କରିବା, ଅନ୍ୟ ସମସ୍ତ ପ୍ରକାର ସାବଧାନତା ଅବଲମ୍ବନ କରିବା, ତାହେଲେ ଆମେ ନିଜେ ସୁରକ୍ଷିତ ରହିବା ସହ ଆମର ଅନ୍ୟ କର୍ମଚାରୀମାନେ ମଧ୍ୟ ସୁରକ୍ଷିତ ରହିପାରିବେ । ଆଗକୁ ଆମେ ଏ କଥା ମଧ୍ୟ ଲକ୍ଷ୍ୟ କଲୁ ଯେ, କିଛି ରୋଗୀଙ୍କଠାରେ କୌଣସି ଲକ୍ଷଣ ପ୍ରକାଶ ପାଉନଥିଲା । ଆମେ ଦେଖିଲୁ ଯେ, ପ୍ରାୟଃ ଶତକଡ଼ା ୯୦ରୁ ୯୫ ଭାଗରୁ ଅଧିକ ରୋଗୀ ବିନା ଚିକିତ୍ସାରେ ମଧ୍ୟ ଆରୋଗ୍ୟ ଲାଭ କରୁଛନ୍ତି । ତେଣୁ ସମୟକ୍ରମେ ଲୋକଙ୍କ ମନରୁ କରୋନା ପ୍ରତି ରହିଥିବା ଭୟ ବହୁ ମାତ୍ରାରେ ଦୂର ହେଇଗଲା । ଏବେ ଇଏ ଯେଉଁ ଦ୍ୱିତୀୟ ଲହର ଆସିଛି, ଏଥିରେ ମଧ୍ୟ ଭୟଭୀତ ହେବା ଦରକାର ନାହିଁ । ଏଥର ମଧ୍ୟ ଯେଉଁ ସବୁ ସୁରକ୍ଷା ଉପାୟ ରହିଛି, ଯାହା ଏସ୍‌.ଓ.ପି. ରହିଛି, ସେଗୁଡ଼ିକ ଅବଲମ୍ବନ କଲେ – ଯେମିତିକି ମାସ୍କ ପିନ୍ଧିବା, ହ୍ୟାଣ୍ଡ ସାନିଟାଇଜର ବ୍ୟବହାର କରିବା, ସାମାଜିକ ଦୂରତା ରକ୍ଷା କରିବା କିମ୍ବା ସାମାଜିକ କାର୍ଯ୍ୟରେ ଏକାଠି ହେବା ଆଦିକୁ ଏଡ଼ାଇ ଦେଲେ, ଆମ ଦୈନନ୍ଦିନ କାର୍ଯ୍ୟକୁ ଆମେ ସୁଚାରୁ ରୂପେ କରିପାରିବା ଏବଂ ଏହି ବ୍ୟାଧିରୁ ସୁରକ୍ଷା ମଧ୍ୟ ପାଇପାରିବା ।

ମୋଦି ଜୀ - ଡା. ନାୱିଦ୍‌, ଟିକାକୁ ନେଇ ମଧ୍ୟ ଲୋକଙ୍କ ମନରେ ଅନେକ ପ୍ରଶ୍ନ ରହିଛି, ଯେମିତିକି - ଟିକା କେତେ ସୁରକ୍ଷା ପ୍ରଦାନ କରିପାରିବ, ଟିକା ନେବା ପରେ ଆମେ ସୁରକ୍ଷିତ ବୋଲି ଆଶ୍ୱସ୍ତ ହୋଇପାରିବା କି? ଏ ବିଷୟରେ ଆପଣ ଏଠାରେ କିଛି କୁହନ୍ତୁ । ଶ୍ରୋତାମାନେ ବହୁତ ଉପକୃତ ହେବେ ।

ଡା. ନାୱିଦ୍‌-କରୋନା ସଂକ୍ରମଣ କଥା ଯେବେଠାରୁ ଆମ ସାମ୍‌ନାକୁ ଆସିଲା, ସେଦିନଠାରୁ ଆଜି ଯାଏ ଆମ ପାଖରେ କୋଭିଡ୍‌-୧୯ ପାଇଁ କୌଣସି ପ୍ରଭାବଶାଳୀ ଚିକିତ୍ସା ନାହିଁ । ତେଣୁ, ଆମେ କେବଳ ଦୁଇଟି ଉପାୟରେ ଏହି ସମସ୍ୟାକୁ ପ୍ରତିହତ କରିପାରିବା । ପ୍ରଥମତଃ ସୁରକ୍ଷା ଉପାୟ ଏବଂ ଦ୍ୱିତୀୟରେ ଯଦି କୌଣସି ପ୍ରଭାବଶାଳୀ ଟିକା ଆମକୁ ମିଳିଯାଏ, ତାହା ଆମକୁ ଏହି ରୋଗରୁ ମୁକ୍ତି ଦେଇପାରିବ । ଆମ ଦେଶରେ ଏବେ ଦୁଇଟି ଟିକା ଉପଲବ୍ଧ - କୋଭାକ୍ସିନ ଓ କୋଭିସିଲ୍ଡ, ଯାହା ଆମରି ଦେଶରେ ତିଆରି ହୋଇଥିବା ଟିକା । କମ୍ପାନୀମାନେ କରିଥିବା ପ୍ରୟୋଗରେ ଦେଖାଯାଇଛି ଯେ, ଏହାର କାର୍ଯ୍ୟକାରିତା ୬୦ ପ୍ରତିଶତରୁ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ । ଆଉ, ଜାମ୍ମୁ-କାଶ୍ମୀର କଥା କହିବାକୁ ଗଲେ, ଆମ କେନ୍ଦ୍ରଶାସିତ ଅଞ୍ଚଳରେ ଏ ଯାଏ ୧୫ରୁ ୧୬ ଲକ୍ଷ ଲୋକ ଏହି ଟିକା ନେଇସାରିଛନ୍ତି । ହଁ, ସାମାଜିକ ଗଣମାଧ୍ୟମରେ ଏହାକୁ ନେଇ କିଛି ଭ୍ରମଧାରଣା ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଛି ଯେ ଏହାର ଏ ସବୁ ପାର୍ଶ୍ଵ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ରହିଛି । କିନ୍ତୁ ଆମ ପାଖରେ ଯେଉଁମାନେ ଏ ଟିକା ଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି, ସେମାନଙ୍କଠାରେ କୌଣସି ପାର୍ଶ୍ଵ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ଦେଖାଯାଇନି । କେବଳ ଯାହା ପ୍ରତ୍ୟେକ ଟିକା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଦେଖାଯାଏ, କାହାକୁ ଟିକିଏ ଜ୍ୱର ହୋଇଥାଏ, କାହାକୁ ସାରା ଶରୀର ଦରଜ ବା କାହାକୁ ଇଂଜେକ୍ସନ ଦିଆଯାଇଥିବା ସ୍ଥାନରେ ଦରଜ ହେବାଭଳି ସାମାନ୍ୟ ପାଶ୍ୱର୍ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ଆମେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ରୋଗୀଙ୍କଠାରେ ଦେଖିବାକୁ ପାଇଛୁ, କିନ୍ତୁ ମୋଟାମୋଟି ସେମିତି କୌଣସି ବଡ଼ ଧରଣର ପାର୍ଶ୍ଵ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ଆମେ ଦେଖିବାକୁ ପାଇନୁ । ଆଉ ହଁ, ଦ୍ୱିତୀୟ କଥା, ଲୋକଙ୍କ ମନରେ ଯାହା ଆଶଙ୍କା ଥିଲା ଯେ, କିଛି ଲୋକ ଟିକା ନେବାପରେ ମଧ୍ୟ ପଜେଟିଭ୍ ହୋଇଗଲେ, ସେ କ୍ଷେତ୍ରରେ କମ୍ପାନୀର ଗାଇଡ୍‌ଲାଇନ୍ ରହିଛି ଯେ, ଟିକା ନେବାପରେ ଯଦି କୌଣସି ବ୍ୟକ୍ତି ସଂକ୍ରମିତ ହୁଅନ୍ତି, ତା ହେଲେ ସେ ପଜିଟିଭ୍ ହୋଇପାରନ୍ତି; କିନ୍ତୁ ରୋଗର ସିଭିୟରିଟି ବା ସେହି ରୋଗୀମାନଙ୍କଠାରେ ଏହା ସେତେଟା ଘାତକ ହେବନି । ତେଣୁ ଟିକା ବିଷୟରେ ଆମ ମନରେ ଯାହା କିଛି ଭ୍ରମଧାରଣା ରହିଛି, ତାହା ଆମେ ମନରୁ ଦୂର କରିଦେବା ଉଚିତ ଏବଂ ଆଉ ଯାହାର ପାଳି ଆସିବ ମଇ ୧ ତାରିଖରୁ ଆମ ଦେଶରେ ଯେଉଁମାନଙ୍କ ବୟସ ୧୮ ବର୍ଷରୁ ଉର୍ଦ୍ଧ୍ୱ, ସେମାନଙ୍କୁ ଟିକା ଦିଆଯିବାର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଆରମ୍ଭ ହେବ । ତେଣୁ, ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଏହାହିଁ ଅନୁରୋଧ କରିବୁ ଯେ, ଆପଣମାନେ ଆସନ୍ତୁ – ଟିକା ନିଅନ୍ତୁ ଏବଂ ନିଜକୁ ସୁରକ୍ଷିତ କରନ୍ତୁ । ଏହାଦ୍ୱାରା ଆମର ସମଗ୍ର ସମାଜ କୋଭିଡ-୧୯ର ସଂକ୍ରମଣରୁ ସୁରକ୍ଷିତ ହୋଇଯିବ ।

ମୋଦି ଜୀ - ଡା. ନାୱିଦ୍‌, ଆପଣଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କୁ ରମଜାନ ମାସ ଉପଲକ୍ଷେ ଅନେକ ଅନେକ ଶୁଭେଚ୍ଛା ।

ଡା. ନାୱିଦ୍‌- ଅନେକ ଅନେକ ଧନ୍ୟବାଦ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, କରୋନାର ଏହି ସଙ୍କଟ ସମୟରେ ଟିକାର ଗୁରୁତ୍ୱ ସମସ୍ତେ ଉପଲବ୍ଧି କରୁଛନ୍ତି । ତେଣୁ, ଟିକାକୁ ନେଇ କୌଣସି ଗୁଜବରେ ବିଶ୍ୱାସ ନ କରିବା ପାଇଁ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଅନୁରୋଧ କରୁଛି । ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଜାଣିଥିବେ ଯେ, ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ତରଫରୁ ସମସ୍ତ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କୁ ମାଗଣା ଟିକା ଯୋଗାଇ ଦିଆଯାଇଛି । ଯାହାର ଲାଭ ୪୫ ବର୍ଷରୁ ଉର୍ଦ୍ଧ୍ୱ ବୟସର ସମସ୍ତ ବ୍ୟକ୍ତି ନେଇପାରିବେ । ଏବେ ତ ମଇ ୧ ତାରିଖରୁ ଦେଶରେ ୧୮ ବର୍ଷ ବୟସରୁ ଉର୍ଦ୍ଧ୍ୱ ପ୍ରତ୍ୟେକ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କ ପାଇଁ ଟିକା ଉପଲବ୍ଧ ହେବାକୁ ଯାଉଛି। ଏବେ ଦେଶର କର୍ପୋରେଟ୍ ସେକ୍ଟର, କମ୍ପାନୀମାନେ ମଧ୍ୟ ନିଜ କର୍ମଚାରୀମାନଙ୍କୁ ଟିକା ଦେବାର ଅଭିଯାନରେ ଅଂଶଗ୍ରହଣ କରିପାରିବେ । ମୁଁ ଏ କଥା ମଧ୍ୟ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି ଯେ, ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ତରଫରୁ ମାଗଣା ଟିକା ଦେବାର ଯେଉଁ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଏବେ ଚାଲିଛି, ତାହା ଆଗକୁ ମଧ୍ୟ ଜାରି ରହିବ । ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ମୋର ଅନୁରୋଧ ଯେ, ସେମାନେ ଭାରତ ସରକାରଙ୍କର ଏହି ମାଗଣା ଟିକା ଅଭିଯାନର ଲାଭ ନିଜ ରାଜ୍ୟର ଅଧିକାଂଶ ଲୋକଙ୍କ ନିକଟକୁ ପହଞ୍ଚାନ୍ତୁ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, ଆମେ ସମସ୍ତେ ଜାଣିଛୁ ଯେ, ରୋଗ ହେଲେ ଆମ ପାଇଁ ଆମର, ନିଜ ପରିବାରର ଯତ୍ନ ନେବା – ମାନସିକ ସ୍ତରରେ କେତେ କଠିନ କାର୍ଯ୍ୟ । କିନ୍ତୁ, ଆମ ଚିକିତ୍ସାଳୟର ନର୍ସିଂ ଷ୍ଟାଫ୍‌ମାନଙ୍କୁ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟ ନିରନ୍ତର ଭାବେ ଅନେକ ରୋଗୀମାନଙ୍କ ପାଇଁ କରିବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ । ଏହି ସେବା ଭାବନା ଆମ ସମାଜର ଗୋଟିଏ ବହୁତ ବଡ଼ ଶକ୍ତି । ନର୍ସିଂ ଷ୍ଟାଫ୍‌ଙ୍କ ଦ୍ୱାରା କରାଯାଉଥିବା ସେବାକାର୍ଯ୍ୟ ଏବଂ ପରିଶ୍ରମ ସମ୍ପର୍କରେ ସବୁଠୁ ଭଲ ଭାବେ କୌଣସି ନର୍ସ ହିଁ କହିପାରିବେ । ତେଣୁ ମୁଁ ରାୟପୁରର ଡ. ବି.ଆର୍‌. ଆମ୍ବେଦକର୍ ମେଡିକାଲ କଲେଜ ହସ୍ପିଟାଲରେ ନିଜର ସେବା ପ୍ରଦାନ କରୁଥିବା ସିଷ୍ଟର ଭାବ୍‌ନା ଧୃବଙ୍କୁ ‘ମନ୍ କି ବାତ୍‌’ରେ ନିମନ୍ତ୍ରିତ କରିଛି । ସେ ଅନେକ କରୋନା ରୋଗୀଙ୍କ ଯତ୍ନ ନେଉଛନ୍ତି । ଆସନ୍ତୁ, ତାଙ୍କରି ସହ କଥା ହେବା ।

ମୋଦି ଜୀ - ନମସ୍କାର ଭାବନା ଜୀ ।

ଭାବନା - ଆଦରଣୀୟ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମହୋଦୟ ନମସ୍କାର ।

ମୋଦି ଜୀ - ଭାବନା ଜୀ . . .

ଭାବନା - ୟେସ୍ ସାର୍ . . .

ମୋଦି ଜୀ - ‘ମନ୍ କି ବାତ୍‌’ର ଶ୍ରେତୋମାନଙ୍କୁ ଆପଣ ନିଶ୍ଚୟ କୁହନ୍ତୁ ଯେ, ଆପଣଙ୍କ ପରିବାରର ଦାୟିତ୍ୱ ଓ ବିଭିନ୍ନ କାର୍ଯ୍ୟ ସାଙ୍ଗକୁ ଆପଣ କରୋନା ରୋଗୀମାନଙ୍କର ମଧ୍ୟ ଯତ୍ନ ନେଉଛନ୍ତି । କରୋନା ରୋଗୀମାନଙ୍କ ସହିତ ଆପଣଙ୍କ ଅନୁଭୂତି କିଭଳି ଥିଲା, ତାହା ଦେଶବାସୀ ନିଶ୍ଚୟ ଶୁଣିବାକୁ ଚାହିଁବେ କାରଣ, ସିଷ୍ଟର୍‌ମାନେ, ନର୍ସମାନେ ରୋଗୀଙ୍କ ଅତି ନିକଟ ସଂସ୍ପର୍ଶରେ ଆସନ୍ତି ଏବଂ ଦୀର୍ଘ ସମୟ ଧରି ସେମାନଙ୍କ ନିକଟରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରନ୍ତି । ସେମାନେ ପ୍ରତ୍ୟେକ କଥାକୁ ସୂକ୍ଷ୍ମ ଭାବେ ବୁଝିପାରନ୍ତି । ତେଣୁ କୁହନ୍ତୁ –

ଭାବନା - ଆଜ୍ଞା, କୋଭିଡ୍‌କୁ ନେଇ ମୋର ଦୁଇମାସର ଅନୁଭୂତି ରହିଛି । ଆମେ ୧୪ ଦିନ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛୁ ଏବଂ ୧୪ ଦିନ ପରେ ଆମକୁ ବିଶ୍ରାମ ଦିଆଯାଇଥାଏ । ସାର୍ ପୁଣି ଦୁଇ ମାସ ପରେ ଆମର ଏହି କୋଭିଡ୍ ଡ୍ୟୁଟି ରିପିଟ୍ ହୋଇଥାଏ । ଯେତେବେଳେ ପ୍ରଥମେ ମୋର କୋଭିଡ୍ ଡ୍ୟୁଟି ପଡ଼ିଲା, ସେତେବେଳେ ମୁଁ ନିଜ ପରିବାର ଲୋକଙ୍କୁ ଏ କଥା ଜଣାଇଲି । ଏହା ଗତବର୍ଷ ମଇ ମାସର କଥା । ମୁଁ କହିବା ମାତ୍ରେ ପରିବାରର ସମସ୍ତେ ଭୟଭୀତ ହୋଇଯାଇଥିଲେ । ବ୍ୟସ୍ତହୋଇ କହିଥିଲେ, ଝିଅ, ସୁରକ୍ଷିତ ହୋଇ କାମ କରିବୁ। ଗୋଟେ ଇମୋସ୍‌ନାଲ୍ ପରିସ୍ଥିତି ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଥିଲା । ମଝିରେ ଯେତେବେଳେ ମୋ ଝିଅ ମୋତେ ପଚାରିଲା – ମା’ ତମେ କୋଭିଡ୍ ଡ୍ୟୁଟି କରିବାକୁ ଯାଉଛ? ତାହା ମୋ ପାଇଁ ସବୁଠୁ ବଡ଼ ଇମୋସନାଲ ମୋମେଂଟ ଥିଲା । କିନ୍ତୁ, ମୁଁ ଯେତେବେଳେ କୋଭିଡ୍ ରୋଗୀ ପାଖକୁ ଗଲି, ମୁଁ ଗୋଟିଏ ଦାୟିତ୍ୱ ଘରେ ଛାଡ଼ିଦେଇ ଯାଇଥିଲି ଆଉ ସାର୍ ମୁଁ ଯେତେବେଳେ କୋଭିଡ୍‌ରୋଗୀଙ୍କ ସହ ମିଶିଲି, ମୋ ଝିଅ ଆହୁରି ଅଧିକ ବ୍ୟତିବ୍ୟସ୍ତ ହୋଇପଡ଼ିଲା । ସାର୍‌, କୋଭିଡ୍ ନାଁରେ ସବୁ ରୋଗୀ ଏତେ ଭୟଭୀତ ଥିଲେ ଯେ, ସେମାନଙ୍କ ସହ କ’ଣ ଚାଲିଛି, ଆଗକୁ ଆମେ କ’ଣ କରିବାକୁ ଯାଉଛୁ - ତାହା ସେମାନେ ବୁଝିପାରୁ ନ ଥିଲେ । ଆମେ ତାଙ୍କ ଭୟକୁ ଦୂର କରିବା ପାଇଁ ସେମାନଙ୍କ ସହିତ ଖୁବ୍ ଭଲ ବ୍ୟବହାର କରିବା ସହ ତାଙ୍କୁ ଗୋଟିଏ ଉତମ ସୁସ୍ଥ ବାତାବରଣ ଦେଲୁ । ଯେବେଠାରୁ ଆମକୁ ଏହି କୋଭିଡ୍ ଡ୍ୟୁଟି କରିବାକୁ କୁହାଗଲା, ସେତେବେଳେ ସର୍ବପ୍ରଥମେ ଆମକୁ ପି.ପି.ଇ. କିଟ୍ ପିନ୍ଧିବାକୁ କୁହାଗଲା, ଯାହା ବହୁତ କଷ୍ଟଦାୟକ । ପି.ପି.ଇ. କିଟ୍ ପିନ୍ଧି ଡ୍ୟୁଟି କରିବା ଆମମାନଙ୍କ ପାଇଁ ବହୁତ କଠିନ ଥିଲା । ସାର୍‌, ଦୁଇ ମାସର କାର୍ଯ୍ୟରେ ମୁଁ ୱାର୍ଡ଼ରେ, ଆଇ.ସି.ୟୁ.ରେ, ଆଇସୋଲେସନ୍‌ରେ – ଏହିଭଳି ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ଥାନରେ ୧୪-୧୪ ଦିନ ଡ୍ୟୁଟି କଲି ।

ମୋଦି ଜୀ - ମାନେ, କହିବାକୁ ଗଲେ ଆପଣ ଗତ ଏକବର୍ଷ ଧରି ଏହି କାମ କରୁଛନ୍ତି ।

ଭାବନା - ହଁ ସାର୍‌, ସେଠି ଯିବା ଆଗରୁ ମୁଁ ଏକଥା ଜାଣି ନ ଥିଲି ଯେ, କେଉଁମାନେ ମୋ ସହକର୍ମୀ । ଆମେ ଗୋଟିଏ ଟିମ୍ ମେମ୍ବର ଭାବେ କାମ କଲୁ । ତାଙ୍କର ଯାହା ସମସ୍ୟା ଥିଲା, ସେସବୁକୁ ଶେୟାର କଲୁ । ଆମେ ରୋଗୀଙ୍କ ବିଷୟରେ ଜାଣିଲୁ ଏବଂ ତାଙ୍କର ମନରେ ଥିବା ଭ୍ରାନ୍ତିକୁ ଦୂର କଲୁ । ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ଅନେକ ଏଭଳି ଥିଲେ, ଯେଉଁମାନେ କୋଭିଡ୍ ନାଁ କୁ ହିଁ ଭୟ କରୁଥିଲେ । ସେମାନଙ୍କ ହିଷ୍ଟ୍ରି ଲେଖିବା ବେଳକୁ ସେମାନଙ୍କଠାରେ ମଧ୍ୟ ସେହି ଲକ୍ଷଣମାନ ଦେଖାଦେଉଥିଲା । କିନ୍ତୁ ଭୟରେ ସେମାନେ ନିଜର ଟେଷ୍ଟ କରାଇ ପାରୁନଥିଲେ । ସେତେବେଳେ, ଆମେ ତାଙ୍କୁ ବୁଝାଉଥିଲୁ, ଆଉ ସାର୍‌, ଯେତେବେଳେ ରୋଗୀର ଅବସ୍ଥା ଗୁରୁତର ହେଉଥିଲା, ସେତେବେଳେ ତାଙ୍କ ଫୁସ୍‌ଫୁସ୍ ସଂକ୍ରମିତ ହୋଇସାରିଥିଲା । ସେତେବେଳେ ସେମାନଙ୍କୁ ଆଇ.ସି.ୟୁ.ର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ୁଥିଲା । ସେତେବେଳେ ସେମାନେ ଡାକ୍ତରଖାନାକୁ ଆସୁଥିଲେ ଏବଂ ସାଙ୍ଗରେ ତାଙ୍କର ପୁରା ପରିବାର ଆସୁଥିଲେ । ଆମେ ସେହିଭଳି ଗୋଟିଏ ଦୁଇଟି କେସ୍ ଦେଖିଥିଲୁ । ଆମେ ସବୁ ବୟସର ଲୋକଙ୍କ ସଂସ୍ପର୍ଶରେ ଆସିଲୁ – ଯେଉଁଥିରେ ଛୋଟ ପିଲା, ମହିଳା, ପୁରୁଷ, ବୟସ୍କ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କ ଭଳି ସବୁ ଶ୍ରେଣୀର ରୋଗୀ ଥିଲେ ସାର୍ । ଆମେ ସେମାନଙ୍କ ସହ କଥା ହେଲୁ । ସମସ୍ତେ ଏ କଥା କହିଲେ ଯେ, ଆମେ ଭୟଭୀତ ହୋଇପଡ଼ିଥିବାରୁ ଆଗରୁ ଆସିପାରିଲୁନି । ସମସ୍ତଙ୍କଠାରୁ ଏହି ଉତ୍ତର ମିଳିଲା ସାର୍ । ଆମେ ତାଙ୍କୁ ବୁଝାଇଲୁ ଯେ, ଭୟ କରିବାର କିଛି ନାହିଁ । ଆପଣ ଆମକୁ ସହଯୋଗ କରନ୍ତୁ, ଆମେ ମଧ୍ୟ ଆପଣଙ୍କୁ ସହଯୋଗ କରିବୁ । ଆପଣ କେବଳ ପ୍ରୋଟୋକଲ୍‌କୁ ଅନୁସରଣ କରନ୍ତୁ । ଆମେ ଏତିକି ମାତ୍ର କଲୁ ସାର୍ ।

ମୋଦି ଜୀ - ଭାବନା ଜୀ, ଆପଣଙ୍କ ସହ କଥାହୋଇ ମୋତେ ବହୁତ ଭଲ ଲାଗିଲା । ଆପଣ ନିଜ ଅନୁଭୂତିରୁ ଖୁବ ଉପାଦେୟ ସୂଚନା ଦେଇଛନ୍ତି । ତେଣୁ ଏହାଦ୍ୱାରା ଦେଶବାସୀଙ୍କ ନିକଟକୁ ନିଶ୍ଚୟ ଗୋଟିଏ ସକାରାତ୍ମକ ବାର୍ତା ଯିବ । ଆପଣଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ, ଭାବନା ଜୀ ।

ଭାବନା - ଥାଙ୍କ୍ ୟୁ ସୋ ମଚ୍ ସାର୍ . . . ଥାଙ୍କ୍ ୟୁ ସୋ ମଚ୍‌, ଜୟହିନ୍ଦ ସାର୍ ।

ମୋଦି ଜୀ - ଜୟହିନ୍ଦ ।

ଭାବନା ଜୀ ଆଉ ତାଙ୍କଭଳି ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ନର୍ସିଂ ଭାଇ-ଭଉଣୀ ଖୁବ୍ ସୁନ୍ଦର ଭାବେ ନିଜ କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ସମ୍ପାଦନ କରୁଛନ୍ତି । ଏହା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଖୁବ୍ ପ୍ରେରଣାଦାୟକ । ଆପଣ ନିଜ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ପ୍ରତି ମଧ୍ୟ ବହୁତ ସଚେତନ ରୁହନ୍ତୁ । ନିଜ ପରିବାରର ମଧ୍ୟ ଯତ୍ନ ନିଅନ୍ତୁ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, ଆମ ସହ ଏବେ ବେଙ୍ଗାଲୁରୁରୁ ସିଷ୍ଟର ସୁରେଖା ଜୀ ମଧ୍ୟ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି । ସୁରେଖା ଜୀ, କେ.ସି. ଜେନେରାଲ ହସ୍ପିଟାଲ୍‌ରେ ସିନିୟର ନର୍ସିଂ ଅଫିସର ଭାବେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି । ଆସନ୍ତୁ, ତାଙ୍କ ଅନୁଭୁତି ବି ଜାଣିବା –

ମୋଦି ଜୀ - ନମସ୍ତେ ସୁରେଖା ଜୀ ।

ସୁରେଖା - ଆମ ଦେଶର ମାନ୍ୟବର ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ସହ କଥାହେବାର ସୁଯୋଗ ମିଳିଥିବାରୁ ମୁଁ ଖୁବ୍ ଆନନ୍ଦିତ ଓ ଗର୍ବିତ ଅନୁଭବ କରୁଛି ।

ମୋଦି ଜୀ - ସୁରେଖା ଜୀ, ଆପଣ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ସାଥୀ ନର୍ସ ଓ ହସପିଟାଲ୍ କର୍ମଚାରୀମାନେ ଖୁବ୍ ସୁନ୍ଦର କାମ କରୁଛନ୍ତି । ଦେଶ ଆପଣମାନଙ୍କ ନିକଟରେ କୃତଜ୍ଞତା ପ୍ରକାଶ କରୁଛି । କୋଭିଡ୍‌-୧୯ ବିରୋଧରେ ଲଢ଼ିବା ପାଇଁ ଆପଣ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ କି ବାର୍ତ୍ତା ଦେବେ?

ସୁରେଖା- ହଁ ସାର୍ ... ଜଣେ ଦାୟିତ୍ୱବାନ ନାଗରିକ ଭାବେ ମୁଁ ପ୍ରଥମେ କିଛି କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଦୟାକରି ନିଜ ପଡ଼ୋଶୀଙ୍କ ସହ ସହାନୁଭୂତିଶୀଳ ହୁଅନ୍ତୁ ଏବଂ ଆଗୁଆ ପରୀକ୍ଷା ଓ ଠିକ୍ ଅନୁସନ୍ଧାନ ଆମକୁ ମୃତ୍ୟୁହାର କମାଇବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ । ଯଦି ଆପଣ ନିଜଠାରେ କୌଣସି ଲକ୍ଷଣ ଦେଖିବାକୁ ପାଆନ୍ତି, ତେବେ ପାଖ ଡାକ୍ତରଙ୍କୁ ଦେଖାନ୍ତୁ ଓ ଯଥାଶୀଘ୍ର ଚିକିତ୍ସିତ ହୁଅନ୍ତୁ । ତେଣୁ ଲୋକେ ଏହି ରୋଗ ସମ୍ପର୍କରେ ସଚେତନ ହେବା ଦରକାର । ସକାରାତ୍ମକ ହୁଅନ୍ତୁ, ଡରନ୍ତୁ ନାହିଁ ଏବଂ ଚିନ୍ତା କରନ୍ତୁ ନାହିଁ । ତା'ଦ୍ୱାରା ରୋଗୀର ଅବସ୍ଥା ଅଧିକ ଖରାପ ହେବ । ଆମେ ଆମ ସରକାରଙ୍କ ନିକଟରେ କୃତଜ୍ଞ । ଟିକା ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଆମେ ଗର୍ବିତ ଏବଂ ମୁଁ ନିଜେ ଟିକା ନେଇସାରିଛି । ମୋ ଅଭିଜ୍ଞତାରୁ ମୁଁ ଭାରତର ସବୁ ନାଗରିକଙ୍କୁ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି ଯେ କୌଣସି ଟିକା ୧୦୦ ପ୍ରତିଶତ ସୁରକ୍ଷା ସାଂଗେସାଂଗେ ଦିଏ ନାହିଁ । ପ୍ରତିରୋଧକ ଶକ୍ତି ତିଆରି କରିବା ପାଇଁ ଏହା ସମୟ ନେଇଥାଏ । ଟିକା ନେବାପାଇଁ ଭୟ କରନ୍ତୁ ନାହିଁ । ଦୟାକରି ନିଜେ ଟିକା ନିଅନ୍ତୁ; ଏହାର ବହୁତ କମ୍ ପାଶ୍ୱର୍ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ରହିଛି ଏବଂ ମୁଁ ଏହି ବାର୍ତା ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି ଯେ ଘରେ ରୁହନ୍ତୁ, ସୁସ୍ଥ ରହନ୍ତୁ; ଯେଉଁମାନେ ଅସୁସ୍ଥ ଅଛନ୍ତି ସେମାନଙ୍କ ସଂସ୍ପର୍ଶରେ ଆସନ୍ତୁ ନାହିଁ; ନାକ, ଆଖି ପାଟିକୁ ଆବଶ୍ୟକ ନ ଥିଲେ ଛୁଅଁନ୍ତୁ ନାହିଁ । ଦୟାକରି ସାମାଜିକ ଦୂରତା ରଖନ୍ତୁ, ମାସ୍କ ପିନ୍ଧନ୍ତୁ, ସର୍ବଦା ହାତ ଧୁଅନ୍ତୁ ଏବଂ ଘରୋଇ ଉପଚାର କରନ୍ତୁ । ଦୟାକରି ଆୟୁର୍ବେଦିକ କାଢା ପିଅନ୍ତୁ, ବାମ୍ଫ ଆଘ୍ରାଣ କରନ୍ତୁ ଏବଂ ପ୍ରତିଦିନ ପାଟିରେ ପାଣି ଗଳଗଳ କରନ୍ତୁ ଏବଂ ପ୍ରାଣାୟାମ କରିବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରନ୍ତୁ । ହଁ, ଶେଷରେ ଆଉ ଗୋଟିଏ କଥା ଦୟାକରି ଆଗଧାଡ଼ିର କର୍ମୀମାନଙ୍କ ପ୍ରତି ସହାନୁଭୂତିଶୀଳ ହୁଅନ୍ତୁ । ଆମକୁ ଆପଣଙ୍କ ସହଯୋଗ ଦରକାର । ଆମେ ମିଳିମିଶି ଲଢ଼େଇ କରିବା । ଆମେ ଏହି ମହାମାରୀକୁ ହରାଇ ଆଗକୁ ଯିବା । ଲୋକଙ୍କ ପାଇଁ ଏହାହିଁ ମୋର ବାର୍ତ୍ତା ସାର୍ ।

ମୋଦି ଜୀ - ଧନ୍ୟବାଦ ସୁରେଖା ଜୀ ।

ସୁରେଖା - ଧନ୍ୟବାଦ ସାର୍ ।

ମୋଦି ଜୀ - ସୁରେଖା ଜୀ, ସତରେ ଆପଣ ବହୁତ କଠିନ ସମୟରେ ନିଜ କର୍ତବ୍ୟ କରିଚାଲିଛନ୍ତି । ଆପଣ ନିଜର ଯତ୍ନ ନିଅନ୍ତୁ । ଆପଣଙ୍କ ପରିବାରକୁ ମଧ୍ୟ ମୋର ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭକାମନା । ମୁଁ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଏକଥା ମଧ୍ୟ କହିବାକୁ ଚାହେଁ ଯେଉଁଭଳି ଭାବନା ଜୀ ଏବଂ ସୁରେଖା ଜୀ ନିଜ ନିଜର ଅନୁଭବ ବାଣ୍ଟିଛନ୍ତି ସେଥିରେ କରୋନା ସହ ଲଢ଼ିବା ପାଇଁ Positive Spirit ବହୁତ ଜରୁରୀ ଏବଂ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଏହା ସର୍ବଦା ବଜାୟ ରଖିବାକୁ ପଡ଼ିବ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, ଡାକ୍ତର ଓ ନର୍ସିଂ ଷ୍ଟାଫ୍‌ଙ୍କ ସହିତ ଏବେ Lab-Technicians ଏବଂ Ambulance Drivers ଭଳି ସମ୍ମୁଖ ଯୋଦ୍ଧାମାନେ ମଧ୍ୟ ଭଗବାନଙ୍କ ଭଳି କାମ କରୁଛନ୍ତି । ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ କୌଣସି ରୋଗୀ ନିକଟରେ ପହଂଚୁଛି, ସେତେବେଳେ ତାଙ୍କୁ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଚାଳକ ଦେବଦୂତ ପରି ହିଁ ମନେହୁଏ । ଏମାନଙ୍କ ସେବା ସମ୍ପର୍କରେ, ଏମାନଙ୍କ ଅଭିଜ୍ଞତା ସମ୍ପର୍କରେ ଦେଶ ନିହାତି ଜାଣିବା ଆବଶ୍ୟକ । ମୋ ସହ ଏବେ ଏପରି ଜଣେ ସଜ୍ଜନ ଅଛନ୍ତି - ଶ୍ରୀମାନ ପ୍ରେମ ବର୍ମା, ଯିଏକି ଜଣେ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଚାଳକ । ତାଙ୍କ ନାମଭଳି, ଶ୍ରୀ ପ୍ରେମ ବର୍ମା ନିଜର କାମ ଏବଂ କର୍ତବ୍ୟକୁ ସଂପୂର୍ଣ୍ଣ ପ୍ରେମ ଓ ନିଷ୍ଠାର ସହ କରିଥାନ୍ତି । ଆସନ୍ତୁ ତାଙ୍କ ସହ କଥା ହେବା-

ମୋଦି ଜୀ - ନମସ୍ତେ ପ୍ରେମ୍ ଜୀ ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ନମସ୍ତେ ସାର୍ ।

ମୋଦୀ ଜୀ - ଭାଇ ପ୍ରେମ୍ ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ଆଜ୍ଞା ।

ମୋଦି ଜୀ - ଆପଣ ନିଜ କାମ ସମ୍ପର୍କରେ ବିସ୍ତୃତ ଭାବେ କିଛି କୁହନ୍ତୁ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କର ଯେଉଁ ଅଭିଜ୍ଞତା ରହିଛି ତାହା ବି ଆମକୁ ଜଣାନ୍ତୁ ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ହଁ ସାର୍ । ମୁଁ CATS Ambulanceରେ ଡ୍ରାଇଭର କାମ କରୁଛି ଏବଂ ୧୦୨କୁ ଯୋଉଠୁ କଲ୍ ଆସେ ସେଠାକୁ ଯାଇ ରୋଗୀଙ୍କୁ ଆଣିବାକୁ ପଡ଼େ । ଏହି କାମ ମୁଁ ଦୁଇବର୍ଷ ହେଲା କରିଆସୁଛି। ସୁରକ୍ଷାକିଟ୍‌, ଗ୍ଲୋଭ୍‌ସ, ମାସ୍କ ପିନ୍ଧି ରୋଗୀଙ୍କୁ ଯେଉଁଠି ଡ୍ରପ୍ କରିବାକୁ କୁହାଯାଇଥାଏ କିମ୍ବା ଯେଉଁ ଡାକ୍ତରଖାନାରେ ପହଂଚାଇବାକୁ କୁହାଯାଇଥାଏ ସେଠି ଶୀଘ୍ର ଶୀଘ୍ର ସେମାନଙ୍କୁ ପହଂଚାଇବାକୁ ପଡିଥାଏ ।

ମୋଦି ଜୀ - ଆପଣ ତ ଟିକାର ଦୁଇଟି ଡୋଜ୍ ନେଇସାରିବେଣି ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ନିଶ୍ଚୟ ସାର୍ ।

ମୋଦି ଜୀ - ତ ଅନ୍ୟ ଲୋକଙ୍କୁ ଟିକା ଦେବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରନ୍ତୁ । ଏଥିପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ବାର୍ତା କ'ଣ?

ପ୍ରେମ ଜୀ - ସାର୍ ନିଶ୍ଚୟ । ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଏହି ଟିକା ନେବା ଉଚିତ ଆଉ ପରିବାର ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଭଲ । ଏବେ ମୋତେ ମୋ ମାଆ କହନ୍ତି ଯେ ଏହି ଚାକିରି ଛାଡ଼ିଦେ । ମୁଁ କହିଲି, ମାଆ, ଯଦି ମୁଁ ବି ଚାକିରି ଛାଡ଼ି ବସିଯିବି ତ ଅନ୍ୟ ରୋଗୀମାନଙ୍କୁ କିଏ କେମିତି ଛାଡ଼ିବାକୁ ଯିବ? କାହିଁକିନା ଏହି କରୋନା ସମୟରେ ସମସ୍ତେ ଛାଡ଼ି ପଳାଉଛନ୍ତି । ସମସ୍ତେ ଚାକିରି ଛାଡ଼ିଛୁଡ଼ି ଯାଉଛନ୍ତି । ମାଆ ବି ମୋତେ କହନ୍ତି ଯେ ପୁଅ ସେ ଚାକିରି ଛାଡ଼ିଦେ । ମୁଁ କହିଲି- ନା ମାଆ, ମୁଁ ଚାକିରି ଛାଡ଼ିବିନି ।

ମୋଦି ଜୀ - ପ୍ରେମ୍‌ଜୀ ମାଆଙ୍କୁ ଦୁଃଖୀ କରିବେନି । ମାଆଙ୍କୁ ବୁଝାଇଦେବେ ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ହଁ ଆଜ୍ଞା ।

ମୋଦି ଜୀ - ଆପଣ ଯେଉଁ ମାଆଙ୍କ ସହ କଥାବାର୍ତ୍ତା କଥା କହିଲେ ନା ଏହା ବହୁତ ମନଛୁଆଁ ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ହଁ ଆଜ୍ଞା ।

ମୋଦି ଜୀ - ଆପଣଙ୍କ ମାଆଙ୍କୁ ମୋର ପ୍ରଣାମ ଜଣାଇଦେବେ ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ନିଶ୍ଚୟ ଆଜ୍ଞା ।

ମୋଦି ଜୀ - ଆଉ ପ୍ରେମ୍ ଜୀ ମୁଁ ଆପଣଙ୍କ ମାଧ୍ୟମରେ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଚଳାଉଥିବା ଆମର ଡ୍ରାଇଭର୍ ଭାଇମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି ଯେ ସେମାନେ କେତେ ବଡ଼ କ୍ସସଗ୍ଦଳ ନେଇ କାମ କରୁଛନ୍ତି ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ହଁ ଆଜ୍ଞା ।

ମୋଦି ଜୀ - ଆଉ ପ୍ରତ୍ୟେକ ମାଆ କ'ଣ ଭାବିଥାନ୍ତି - ଏକଥା ଯେତେବେଳେ ଶ୍ରୋତାଙ୍କ ପାଖରେ ପହଞ୍ଚିବ ମୁଁ ନିଶ୍ଚିତ କହିବି ଯେ ସେମାନଙ୍କ ହୃଦୟକୁ ଏକଥା ଛୁଇଁଯିବ ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ହଁ ଆଜ୍ଞା ।

ମୋଦି ଜୀ - ପ୍ରେମ୍ ଜୀ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ । ଆପଣ ଏକପ୍ରକାର ପ୍ରେମର ଗଙ୍ଗା ବୁହାଇ ଚାଲିଛନ୍ତି ।

ପ୍ରେମ୍ ଜୀ - ଧନ୍ୟବାଦ ସାର୍ ।

ମୋଦି ଜୀ - ଧନ୍ୟବାଦ ଭାଇ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, ପ୍ରେମ୍ ବର୍ମା ଜୀ ଓ ତାଙ୍କପରି ହଜାର ହଜାର ଲୋକ ଆଜି ନିଜର ଜୀବନକୁ ବାଜି ଲଗାଇ ଲୋକଙ୍କର ସେବା କରୁଛନ୍ତି । କରୋନା ବିରୋଧରେ ଚାଲିଥିବା ଏହି ଲଢ଼େଇରେ ଯେତିକି ଜୀବନ ବି ବଞ୍ଚୁଛି ସେଥିରେ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଚାଳକମାନଙ୍କର ବହୁତ ବଡ଼ ଯୋଗଦାନ ରହିଛି । ପ୍ରେମ୍ ଜୀ ଆପଣଙ୍କୁ ଆଉ ସମଗ୍ର ଦେଶରେ ଥିବା ଆପଣଙ୍କ ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ସାଧୁବାଦ ଦେଉଛି । ଆପଣ ଠିକ୍ ସମୟରେ ପହଂଚୁଥାନ୍ତୁ, ଜୀବନ ବଞ୍ଚାଉଥାନ୍ତୁ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀଗଣ, ଏହା ଠିକ୍ ଯେ କରୋନାରେ ବହୁତ ଲୋକ ସଂକ୍ରମିତ ହେଉଛନ୍ତି; କିନ୍ତୁ କରୋନାରୁ ସୁସ୍ଥ ହେଉଥିବା ଲୋକଙ୍କ ସଂଖ୍ୟା ମଧ୍ୟ ସେହିପରି ବହୁତ ଅଧିକ । ଗୁରୁଗ୍ରାମର ପ୍ରୀତି ଚତୁର୍ବେଦୀ ମଧ୍ୟ ନିକଟରେ କରୋନାକୁ ହରାଇଛନ୍ତି । ପ୍ରୀତି ଜୀ ‘ମନ୍ କି ବାତ୍‌'ରେ ମୋ ସହ ସଂଯୁକ୍ତ ହୋଇଛନ୍ତି । ତାଙ୍କର ଅଭିଜ୍ଞତା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କର ବେଶ୍ କାମରେ ଆସିବ ।

ପ୍ରୀତି - ନମସ୍କାର ସାର୍ । ଆପଣ କେମିତି ଅଛନ୍ତି?

ମୋଦି ଜୀ - ମୁଁ ଠିକ୍ ଅଛି ଆଜ୍ଞା । ସର୍ବପ୍ରଥମେ ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ କୋଭିଡ-୧୯ ସହ ସଫଳତାପୂର୍ବକ ଲଢ଼ିଥିବାରୁ ପ୍ରଶଂସା କରୁଛି ।

ପ୍ରୀତି - Thank you so much sir

ମୋଦି ଜୀ - ମୋର କାମନା ଆପଣଙ୍କ ଶୀଘ୍ର ସୁସ୍ଥ ହୁଅନ୍ତୁ ।

ପ୍ରୀତି - ଧନ୍ୟବାଦ ସାର ।

ମୋଦି ଜୀ - ଏହି ଦ୍ୱିତୀୟ ଲହରରେ ଆପଣ ଏକା ସଂକ୍ରମିତ ହୋଇଛନ୍ତି ନା ପରିବାରର ଅନ୍ୟ କେହି?

ପ୍ରୀତି - ନା ସାର୍ କେବଳ ମୁଁ ସଂକ୍ରମିତ ହୋଇଛି ।

ମୋଦି ଜୀ - ଯାହାହେଉ, ଭଗବାନଙ୍କ କୃପା ଥିଲା । ଆଚ୍ଛା ମୁଁ ଚାହିଁବି ଯଦି ଆପଣଙ୍କ ଅସୁସ୍ଥ ଅବସ୍ଥାର କିଛି ଅଭିଜ୍ଞତା କହନ୍ତେ ତାହାଲେ ବୋଧହୁଏ ଶ୍ରୋତାମାନେ ଏଭଳି ସମୟରେ ନିଜକୁ କିପରି ସମ୍ଭାଳିହେବ ସେ ଦିଗରେ କିଛିଟା ମାର୍ଗଦର୍ଶନ ପାଆନ୍ତେ ।

ପ୍ରୀତି - ଆଜ୍ଞା ନିଶ୍ଚିତ । ସାର୍ ... ଆରମ୍ଭରେ ମୋତେ ବହୁତ ଅବଶ ଲାଗିଲା ଆଉ ତା'ପରେ ମୋ ତଣ୍ଟିରେ କିଛି ଗୋଟେ ଅଟକିବା ଭଳି ମନେହେଲା । ତା'ପରେ ମୋତେ ଜଣାପଡ଼ିଲା ଏଇ ହୁଏତ କରୋନାର ଲକ୍ଷଣ ହୋଇଥାଇପାରେ ତେଣୁ ପରୀକ୍ଷା କରାଇଲି । ତା'ପରଦିନ ରିପୋର୍ଟ ଆସିବାରୁ ଜଣାପଡ଼ିଲା ଯେ ମୁଁ କୋଭିଡ୍ ପଜିଟିଭ, ତେଣୁ ମୁଁ ନିଜେ ନିଜେ ସଂଗରୋଧରେ ରହିଲି । ଗୋଟିଏ କୋଠରିରେ ନିଜକୁ ଏକାନ୍ତବାସରେ ରଖି ଡାକ୍ତରଙ୍କ ସହ ପରାମର୍ଶ କଲି । ତାଙ୍କ ପରାମର୍ଶରେ ଔଷଧ ଖାଇବା ଆରମ୍ଭ କଲି ।

ମୋଦି ଜୀ -ଆପଣଙ୍କର ତ୍ୱରିତ ପଦକ୍ଷେପ ଯୋଗୁଁ ଆପଣଙ୍କ ପରିବାର ବଞ୍ଚିଗଲା ।

ପ୍ରୀତି- ଆଜ୍ଞା ସାର୍ । ସେମାନଙ୍କର ସମସ୍ତଙ୍କର ମଧ୍ୟ ପରେ ପରୀକ୍ଷା କରାଗଲା, ସମସ୍ତେ negative ବାହାରିଲେ, ମୋର ହିଁ positive ଥିଲା । ତା’ପୂର୍ବରୁ ଗୋଟିଏ କୋଠରି ଭିତରେ ମୁଁ ନିଜକୁ ନିଜେ ଅଲଗା ରଖିନେଇଥିଲି । ମୋର ଜରୁରୀ ଜିନିଷଗୁଡ଼ିକୁ ନେଇ ସେଇ କୋଠରିରେ ନିଜକୁ ସଂଗରୋଧ କରି ରଖିଥିଲି । ଆଉ ତା'ସହିତ ମୁଁ ପୁଣି ଡାକ୍ତରଙ୍କ ସହିତ ପରାମର୍ଶ କରି ଔଷଧ ଖାଇବା ଆରମ୍ଭ କଲି । ସାର୍‌, ମୁଁ ଔଷଧ ସହ ଯୋଗ, ଆୟୁର୍ବେଦିକ କାଢ଼ା ସେବନ କଲି । ରୋଗ ପ୍ରତିରୋଧକ ଶକ୍ତି ବଢ଼ାଇବା ପାଇଁ ମୁଁ ଖାଇଲା ବେଳେ ଭୋଜନରେ ପ୍ରୋଟିନ୍‌ଯୁକ୍ତ ସୁଷମ ଖାଦ୍ୟ ଖାଇଲି । ପ୍ରଚୁର ପାଣି ଏବଂ ଫଳରସ ପିଇଲି; steam ନେଲି, gargle କଲି, ଆଉ ଉଷୁମ ପାଣି ପିଇଲି । ମୁଁ ସାରାଦିନ ଏହିଭଳି ଭାବେ ଅସୁସ୍ଥତା ସମୟ ବିତାଉଥିଲି । ଆଉ ସାର୍ ଏ ସମୟରେ ସବୁଠୁ ବଡ଼କଥା ହେଲା ଆଦୌ ଭୟଭୀତ ନ ହେବା । ମାନସିକ ଭାବେ ଦୃଢ଼ ରହିବା ପାଇଁ ମୁଁ ବହୁତ ଯୋଗାଭ୍ୟାସ ଏବଂ ପ୍ରାଣାୟାମ କରୁଥିଲି ।

ମୋଦି ଜୀ - ହଁ । ଆଚ୍ଛା ପ୍ରୀତି ଜୀ ... ଏବେ ଯେତେବେଳେ ଆପଣଙ୍କ process ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ହେଇଛି ଆପଣ ସଙ୍କଟରୁ ବାହାରିଆସିଛନ୍ତି?

ପ୍ରୀତି - ହଁ ଆଜ୍ଞା ।

ମୋଦି ଜୀ - ଏବେ ପରୀକ୍ଷାରେ negative ଆସିଛି?

ପ୍ରୀତି - ହଁ ଆଜ୍ଞା ।

ମୋଦି ଜୀ - ଏବେ ଆପଣ ନିଜ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟର ଯତ୍ନ ନେବାପାଇଁ କ'ଣ କରୁଛନ୍ତି?

ପ୍ରୀତି - ସାର୍ ଏକରେ ତ ମୁଁ ଯୋଗ କରିବା ବନ୍ଦ କରିନି, କାଢ଼ା ବି ପିଉଛି ଆଉ ନିଜର ରୋଗ ପ୍ରତିରୋଧକ ଶକ୍ତି ବଢ଼ାଇବା ପାଇଁ ସୁଷମ ଖାଦ୍ୟ ମଧ୍ୟ ଖାଉଛି ।

ମୋଦି ଜୀ - ହଁ ହଁ ।

ପ୍ରୀତି - ଯେଉଁସବୁରେ ମୁଁ ନିଜକୁ ନିଜେ ଅବହେଳା କରୁଥିଲି ସେଗୁଡ଼ିକ ଉପରେ ବେଶୀ ଧ୍ୟାନ ଦେଉଛି।

ମୋଦି ଜୀ - ଧନ୍ୟବାଦ ପ୍ରୀତି ଜୀ ।

ପ୍ରୀତି - Thank you so much sir

ମୋଦି ଜୀ - ଆପଣ ଯେଉଁ ସୂଚନା ଦେଲେ ମୋତେ ଲାଗୁଛି ଯେ ଏହା ବହୁତ ଲୋକଙ୍କର କାମରେ ଆସିବ । ଆପଣ ସୁସ୍ଥ ରୁହନ୍ତୁ । ଆପଣଙ୍କ ପରିବାରର ଲୋକ ସୁସ୍ଥ ରୁହନ୍ତୁ । ମୋର ଆପଣଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭକାମନା ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀଗଣ, ଆଜି ଯେମିତି ଆମର Medical Field ଲୋକ Frontline Workers ଦିନରାତି ସେବା କାର୍ଯ୍ୟରେ ଲାଗିଛନ୍ତି ସେହିପରି ସମାଜର ଅନ୍ୟ ଲୋକେ ମଧ୍ୟ ଏବେ ପଛରେ ନାହାନ୍ତି । ଦେଶ ପୁଣିଥରେ ଏକଜୁଟ ହୋଇ କରୋନା ବିରୋଧରେ ଲଢ଼େଇ ଲଢ଼ୁଛି । ଏବେ ମୁଁ ଦେଖୁଛି Quarantineରେ ରହୁଥିବା ପରିବାର ପାଇଁ କିଏ ଔଷଧ ନେଇ ଦେଉଛି ତ ଆଉ କିଏ ପନିପରିବା, କ୍ଷୀର, ଫଳ ଆଦି ନେଇ ଦେଇଆସୁଛନ୍ତି । କିଏ ରୋଗୀଙ୍କୁ ମାଗଣାରେ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଯୋଗାଇ ଦେଉଛି । ଦେଶର ବିଭିନ୍ନ କୋଣଅନୁକୋଣରେ ଏହି ଆହ୍ୱାନଭରା ସମୟରେ ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବୀ ସଂଗଠନ ଆଗକୁ ଆସି ଅନ୍ୟର ସାହାଯ୍ୟ ପାଇଁ ଯାହା କରିପାରିବେ ତାହା କରିବାର ପ୍ରୟାସ କରୁଛନ୍ତି । ଏଥର ଗାଁଗୁଡ଼ିକରେ ବି ନୂଆ ସଚେତନତା ଦେଖିବାକୁ ମିଳୁଛି । କୋଭିଡ଼ ନିୟମର କଡ଼ାକଡ଼ି ପାଳନ କରିବା ସହ ଲୋକେ ନିଜ ଗାଁକୁ କରୋନାରୁ ରକ୍ଷା କରୁଛନ୍ତି । ଯେଉଁ ଲୋକେ ବାହାରୁ ଆସୁଛନ୍ତି ସେମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଠିକ୍ ବ୍ୟବସ୍ଥାର ବନ୍ଦୋବସ୍ତ କରାଯାଉଛି । ସହରଗୁଡ଼ିକରେ ମଧ୍ୟ ଅନେକ ଯୁବକ ଆଗକୁ ବାହାରିଛନ୍ତି, ଯେଉଁମାନେ ନିଜ ଅଂଚଳରେ କିପରି କରୋନା ମାମଲା ନ ବଢ଼ିବ ସେଥିପାଇଁ ସ୍ଥାନୀୟ ଲୋକଙ୍କ ସହ ମିଶି ପ୍ରୟାସ କରୁଛନ୍ତି । ଅର୍ଥାତ୍‌, ଗୋଟିଏ ପଟେ ଦେଶ ଦିନରାତି ଡାକ୍ତରଖାନା, ଭେଣ୍ଟିଲେଟର ଆଉ ଔଷଧ ପାଇଁ କାମ କରୁଛି ତ ଅନ୍ୟପଟେ ଦେଶବାସୀ ମଧ୍ୟ କରୋନାର ମୁକାବିଲା ପାଇଁ ପ୍ରାଣପଣେ ଲାଗିପଡ଼ିଛନ୍ତି । ଏହି ଭାବନା ଆମକୁ ଖୁବ୍ ଶକ୍ତି ଦେଉଛି, ବିଶ୍ୱାସ ଦେଉଛି । ଏସବୁ ଯାହାବି ପ୍ରୟାସ ହେଉଛି ସେସବୁ ସମାଜର ବହୁତ ବଡ଼ ସେବା । ଏହା ସମାଜର ଶକ୍ତି ବଢ଼ାଇଥାଏ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀଗଣ, ଆଜି "ମନ୍ କୀ ବାତ୍‌'ର ସମଗ୍ର ଆଲୋଚନାକୁ ମୁଁ କରୋନା ମହାମାରୀ ଉପରେ ହିଁ ରଖିଥିଲି; କାରଣ ଆଜି ଆମର ସବୁଠୁ ବଡ଼ ପ୍ରାଥମିକତା ହେଉଛି ଏହି ମହାମାରୀକୁ ପରାଜିତ କରିବା । ଆଜି ଭଗବାନ ମହାବୀରଙ୍କ ଜୟନ୍ତୀ । ଏହି ଅବସରରେ ମୁଁ ସମସ୍ତ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଶୁଭକାମନା ଜଣାଉଛି । ଭଗବାନ ମହାବୀରଙ୍କ ଦର୍ଶନ ଆମକୁ ତପ ଏବଂ ଆତ୍ମସଂଯମର ପ୍ରେରଣା ଦିଏ । ଏବେ ରମଜାନର ପବିତ୍ର ମାସ ବି ଚାଲୁରହିଛି । ଆଗକୁ ଅଛି ବୁଦ୍ଧ ପୂର୍ଣ୍ଣିମା । ଗୁରୁ ତେଗ୍ ବାହାଦୁରଙ୍କର ୪୦୦ତମ ପ୍ରକାଶ ପର୍ବ ବି ପାଳନ କରାଯିବ । ଗୋଟିଏ ମହତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଦିନ ହେଉଛି ‘ପୋଚିଶ ବୈଶାଖ୍‌’ – ବିଶ୍ୱକବି ରବୀନ୍ଦ୍ରନାଥ ଟାଗୋରଙ୍କ ଜୟନ୍ତୀ । ଏସବୁ ଆମକୁ ପ୍ରେରଣା ଦେଇଥାଏ ନିଷ୍ଠାର ସହ ନିଜର କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ସମ୍ପାଦନ କରିବା ପାଇଁ। ଜଣେ ନାଗରିକ ଭାବରେ ଆମେ ଜୀବନରେ ନିଜର ଯେତିକି କୁଶଳତା କାମନା କରିଥାଉ ନିଜର କର୍ତବ୍ୟକୁ ବି ସେହିଭଳି ସମ୍ପାଦନ କରିବା ଆବଶ୍ୟକ । ସଙ୍କଟରୁ ମୁକ୍ତ ହୋଇ ଭବିଷ୍ୟତ ରାସ୍ତାରେ ସେତିକି ହିଁ ଦ୍ରୁତଗତିରେ ଅଗ୍ରସର ହେବା ଜରୁରୀ । ଏହି କାମନା ସହ ମୁଁ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ପୁଣିଥରେ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି ଯେ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଟିକା ନେବାକୁ ହେବ ଆଉ ସାବଧାନତା ମଧ୍ୟ ଅବଲମ୍ବନ କରିବାକୁ ପଡ଼ିବ । "ଦୱାଇ ଭି-କଡ଼ାଇ ଭି' - ଏହି ମନ୍ତ୍ରକୁ କେବେ ଭୁଲିବା ନାହିଁ । ଆମେ ଖୁବ୍‌ଶୀଘ୍ର ମିଳିମିଶି ଏହି ବିପଦରୁ ମୁକୁଳିବା । ଏହି ବିଶ୍ୱାସର ସହ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ ।

ନମସ୍କାର ।