यहां के राजयपाल श्रीमान कातीकल शंकर नारायणन जी, मुख्‍यमंत्री श्रीमान पृथ्‍वीराज जी, मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्री नितिन गडकरी जी, श्री पीयूष गोयल जी, यहां के नौजवान सांसद भाई शरद जी, श्री विनोद तांबरे जी, ऊर्जा सचिव श्री पी के सिन्‍हा जी, श्री आर पी सिंह, श्री आर एन नायक और विशाल संख्‍या में आए हुए सोलापुर के भाइयो-बहनो।

तीन महीना पूर्व मी आला होता (तीन महीने पहले मैं यहां आया था)

क्‍या सोलापुर के लोगों में उत्‍साह की कमी नहीं है क्‍या सोलापुर के प्‍यार पे शत शत नमन। ऐसा लगता है, सोलापुर ने मुझे अपना बना लिया। लेकिन मैं सोलापुर वासियों को ये विश्‍वास दिलाता हूं कि चुनाव के समय जब मैं यहां आया था और आपने जो भरपूर प्‍यार दिया था, और इतने कम समय में में दुबारा आया हूं। और मैं देख रहा हूं आपका प्‍यार बढ़ता ही जा रहा है। सोलापुर के मेरे भाइयों-बहनों, मैं इस प्‍यार को ब्‍याज समेत लौटाउंगा। विकास करके लौटाउंगा।

सोलापुर की पहचान टैक्‍सटाइल के साथ जुड़ी हुई है। टैक्‍सटाइल के क्षेत्र में सोलापुर के लोग कई नए प्रयोग करते हैं। लेकिन उन प्रयोगों को राष्‍ट्रीय-अंतर्राष्‍ट्रीय फलक पे जो स्‍थान मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है। टैक्‍सटाइल उद्योग एक ऐसा उद्योग है जो सर्वाधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। गरीब से गरीब को रोजगार देने वाला क्षेत्र है। और दिल्‍ली में बिठाई हुई आपकी सरकार नौजवानों को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है। नौजवान को अगर रोजगार मिल जाए तो इस देश के आशाओं को पूर्ण करने की ताकत हमारे नौजवानों में है, हमारी युवा पी‍ढ़ी में है और उसके लिए हमारे युवकों की क्षमता बढ़े, उनके हाथ में हुनर हो, उनके कौशल्‍य में वृद्धि हो, हमारा नौजवान सामर्थवान बने और सामर्थवान नौजवान से उनके कर्तव्‍यों से, उनके पुरूषार्थ से हमारा राष्‍ट्र समृद्ध बने, ये सपना लेकर हम योजनाएं बनाते हैं और जिसका लाभ भारत में जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की संभावनाएं पड़ी हैं, जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की पुरानी नींव पड़ी है, उन क्षेत्रों पर विशेष ध्‍यान देकर के टैक्‍सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने का हमारा सपना है और इसका लाभ शोलापुर को भी मिलेगा, सोलापुर के नौजवानों को भी मिलेगा

आज दो महत्‍वपूर्ण कार्यों के लिए मुझे सोलापुर की धरती पर फिर से आने का सौभाग्‍य मिला है। हमारे देश में कई चुनाव इस मुद्दे पर लड़े गए और मुद्दा हुआ करता था बीएसपी। में बीएसपी पार्टी का नाम नहीं कह रहा हूं। बीएसपी -बिजली, सड़क, पानी। अगर हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को महत्‍व देते हैं, उसको अगर प्राथमिकता देते हैं, तो लोगों में इतना पुरूषार्थ पड़ा हुआ है तो मिट्टी में से सोना बना सकते हैं। अगर किसान को पानी मिला जाए तो किसान सोना पैदा कर सकता है। और इसलिए तो इस सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना का एक बड़ा अभियान उठाया है मन में। एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर के लिए उपयोगी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर बल देना। कृषि क्षेत्र में पानी पहुंचाने को प्राथमिकता देना। उसी प्रकार से देश का औद्योगिक विकास, देश के सामान्‍य नागरिक के जीवन में क्‍वालिटी आफ लाइफ में परिवर्तन आए। आज गांव में डाक्‍टर रहने के लिए तैयार नहीं हैं, शिक्षक रहने को तैयार नहीं, सरकारी मुलाजिम रहने को तैयार नहीं। वह शाम होने से पहले ही भाग जाता है, शहर में चला जाता है, क्‍यों, क्‍योंकि गांवमें बिजली नहीं है। बिजली नहीं तो टीवी नहीं चलता है। इंटरनेट नहीं है। तो डाक्‍टर का इस स्थिति में रहने को मन नहीं करता। हमारी सरकार का सपना है सात दिवस 365 दिवस, 24 घंटे बिजली गांवों में कैसे मिले। आज इस सपने को पूरा करने के लिए एक तरफ बिजली का उत्‍पादन बढ़ाना पड़ेगा, दूसरी तरफ बिजली पहुंचाने का प्रबंध करना पड़ेगा और जन भागीदारी से महत्‍वपूर्ण काम भी करना पड़ेगा, वह है बिजली बचाओ।

कुछ लोगों को लगता है कि सेना में भर्ती होंगे, तभी देश सेवा होगी। चुनाव लड़कर के एमएलए, एमपी बनेंगे, मंत्री बनेंगे, तभी देश सेवा होगी। मेरे भाइयो-बहनो, अगर हम बिजली बचाने में योगदान करें, तो भी वह देश की बहुत बड़ी सेवा है। मैं तो चाहता हूं कि सभी विद्यार्थी देश सेवा का एक काम अपने जिम्‍मे लें। हर विद्यार्थी कर सकता है। हर महीने अपने घर पे जो बिजली का बिल आता है, हर विद्या‍र्थी उसे देखें और जब भोजन करते हैं, तब माता-पिता, भाई-बहन सबके सामने चर्चा करें, बिजली का बिल दिखा कर के। और तय करें कि इस महीने अगर 100 रुपये का बिजली का बिल आता है तो अगले महीने बिजली का बिल 90 रुपये आ जाए, यह परिवार संकल्‍प करें और इस काम को विद्यार्थी कर सकता है। एक विद्यार्थी भी अपने घर में महीने में दस दस रुपये का बिल बचाएगा, घर के लोगों को भी लगेगा, वाह अपना बेटा बहुत छोटा है लेकिन कितना बड़ा काम करता है। हमने तो कभी सोचा ही नहीं कि चलो भई बिजली का बिल कम हो, इसके लिए कुछ करें। गरीब परिवार को हर महीने 10 रुपये, 20 रुपये, 25 रुपये बिल बच जाता है तो वह गरीब के लिए काम आता है। बच्‍चों को दूध पिलाने के लिए काम आता है। लेकिन यह तब बनता है, बिजली बचाना ये हमारा स्‍वभाव बने। बिजली बचाना- यह हमारा राष्‍ट्रीय कर्तव्‍य बने। क्‍योंकि बिजली बनाने पर जितना खर्च होता है, उससे कम खर्चे में बिजली बचा कर हम देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं। और मैं देशवासियों का आह्वान करता हूं । अगर हमें भारत को आगे ले जाना हैं, गरीब की झोपड़ी में भी बिजली का दीया जले, यह हम सबका अगर सपना है तो हम भी बिजली बचाने का प्रण लें, शपथ लें। और बिजली बचाने से औरों को जितना फायदा होगा, उससे ज्‍यादा हम परिवार वालों को होगा। और मुझे यह विश्‍वास है कि मेरी यह बात स्‍कूल में, कालेज में, शिक्षकों में, परिवारों में पहुंचेगी और आने वाले दिनों में बिजली बचत के अभियान में हम सफल होंगे। उसी प्रकार से हमारे देश में सब जगह बिजली के कारखाने नहीं लग पाये। कुछ राज्‍य हैं जो प्रगतिशील हैं, उन्‍होंने इस काम में प्रगति की है। एक जमाना था, महाराष्‍ट्र भी बिजली के उत्‍पादन में हिन्‍दुस्‍तान में बहुत आगे था। पर बाद की हालत का तो मैं वर्णन करना नहीं चाहता। लेकिन मुख्‍यमंत्री जी ने जो कहा, वह सही है। पूरे देश में इंधन न होने के कारण बिजली के कारखाने बंद पड़े हैं। उनकी पीड़ा सही है। लेकिन यह पीड़ा मुख्‍यमंत्री जी आज व्‍यक्‍त कर रहे हैं। मैं जब गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, तो दो साल तक इस पीड़ा को मैं व्‍यक्‍त करता रहा था। लेकिन मेरे में उस समय कहने का अवसर था, पृथ्‍वीराज के लिए बोलना जरा मुश्किल था, लेकिन मैं बोलता था। लेकिन भाइयो-बहनो, अब जिम्‍मेदारी हमारी है। हम जिम्‍मेदारियों से भागने वाले लोग नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अटका हुआ है, कोयला चोरी का। जांच-पड़ताल चल रही है। लेकिन हम नई नीतियों को लेकर के जल्‍द से जल्‍द कोयले के खदानों में तेज गति से काम चले, इसके लिए प्रयासरत हैं। कोयले के खदानों में इनवायरामेंट के नुकसान के बिना, जंगलों में नुकसान किये बिना, आधुनिक टेक्‍नोलोजी से कोयला निकालना चाहते हैं। जल्‍द से जल्‍द कोयला भी पहुंचेगा, बिजली भी पैदा होगी। बिजली हिन्‍दुस्‍तान के कोने कोने में जाएगी।

भाइयो-बहनो, जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, हम गुजरात में 24 घंटे, 365 दिन गांव को भी बिजली देते थे। वहां बिजली का जाना, यह पता ही नहीं है लोगों को। हमारे पास अतिरिक्‍त बिजली थी, इसके बावजूद भी, वह बिजली देश के काम नहीं आती थी। बिजली के कारखाने हमें बंद करने पड़ते थे। क्‍योंकि बिजली ले जाने के लिए जो ट्रांसमिशन लाइन चाहिए, वह नहीं थी। ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण बिजली नहीं जाती थी। एक बार दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री ने मुझे कहा, मोदी जी हमारे यहां चुनाव आ रहा है। दिल्‍ली में अंधेरा हमें परेशान करता है। आप कुछ बिजली दीजिए। मैंने कहा, में राजनीति बीच में नहीं लाता हूं, मैं प्रबंध करता हूं। मैं मीटिंग में था, आधे घंटे में मैंने उनको जवाब दिया, आपको जितनी बिजली चाहिए, आप ले सकते हैं। मैंने हमारे अफसरों से बात करना, उनके अफसरों से मिला देना, फोन पर सारा कारोबार चला। दूसरे दिन मैंने पूछा, सब हो गया, तो मुख्‍यमंत्री जी ने कहा- मोदी जी आप तो तैयार हैं पर बिजली लाने के लिए मेरे पास तार नहीं है। तार नहीं होने के कारण दिल्‍ली अंधेरे में रह गई। भाइयों-बहनों आज हमारे लिए यह बिजली के ट्रासंमिशन लाइन के द्वारा पूरे देश को जोड़ना आवश्‍यक है। जिस इलाके में बिजली नहीं है, वहां बिजली पहुंचाना आवश्‍यक है और वही महत्‍वपूर्ण काम उत्‍तर को पश्चिम से जोड़ना, पश्चिम को पूरब से जोड़ने का एक महत्‍वपूर्ण काम, जिसका आज उद्घाटन आपके सोलापुर की धरती से राष्‍ट्र को समर्पित किया जा रहा है। दक्षिण भारत, जहां बिजली की जरूरत है, महाराष्‍ट्र में जहां बिजली की जरूरत है, जिन राज्‍यों के पास अतिरिक्‍त बिजली है, उसको पहुंचाने के लिए एक ग्रिड काम आने वाली है। उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

भाइयो-बहनो, गुजरात में एक सरदार सरोवर डैम नर्मदा योजना, जिसकी भागीदारी महाराष्‍ट्र, गुजरात, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान चारों की है। लेकिन पिछले सात साल से दिल्‍ली सरकार की परमिशन नहीं मिलती है। नर्मदा डैम के काम को ऊचाई नहीं मिल रही थी और इसके कारण हमने हाइड्रो प्रोजेक्‍ट लगाया हुआ था, बिजली पैदा करने के लिए, पानी कम होने के कारण जितनी बिजली पैदा होनी चाहिए, नहीं होती थी। पूरी क्षमता का उपयोग करना है तो डैम का काम पूरा होना जरूरी था। लेकिन राजनीतिक कारणों से डैम की ऊंचाई बढ़ाने की हमें अनुमति नहीं मिलती थी। सात साल से दिल्‍ली से हमारा झगड़ा चलता रहता था। नई सरकार बनने के बाद दस दिन में ही ये परमिशन दे दी। डैम की हाइट बढ़ाने का काम चल रहा है, लेकिन इससे महाराष्‍ट्र का क्‍या। आपको जानकर के खुशी होगी, इसके कारण अब बिजली पूरी क्षमता से पैदा होगी। उसके कारण महाराष्‍ट्र को हर वर्ष 400 करोड़ रुपये की बिजली मुफ्त में मिलेगी। ये काम आज से 7 साल पहले हो सकता था। यह काम अगर हो गया होता तो आज पृथ्‍वीराज जी गर्व के साथ महाराष्‍ट्र में बिजली पहुंचा सकते थे, लेकिन नहीं हुआ।

भाइयो-बहनो, ऐसे कई रुके हुए काम अब मेरे करने के दिन आए हैं। आज पुणे-सोलापुर हाईवे का भी शिलान्‍यास हो रहा है। आगे चल कर के यह आपको कर्नाटक से भी जोड़ेगा। इसके कारण , नितिन जी अभी कह रहे थे, अमेरिका के प्रेसिडेंट का उल्‍लेख करते थे। दुनिया में जहां-जहां विकास हुआ है, आप अगर उसका अध्‍ययन करेंगे तो सबसे पहले उस देश ने हिम्‍मत करके और कठिनाइयां झेल कर के, दो काम और रह जाए तो रह जाए, उसकी चिंता किए बिना इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता दी। खास करके रोड नेटवर्क को प्राथमिकता दी। और रोड नेटवर्क को प्राथमिकता देने के कारण उन राष्‍ट्रों के विकास में बहुत बड़ी तेजी आई। साउथ कोरिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। साउथ कोरिया हमारे महाराष्‍ट्र से भी छोटा है। आर्थिक हालत बहुत खराब थी। लेकिन 30 वर्ष पहले वहां के शासकों ने पूरे साउथ कोरिया के बीच में से बहुत बड़ा रोड बना लिया। बहुत आंदोलन हुआ, लोगों ने विरोध किया सरकार का, कि इतने पैसे गंवा रहे हैं। खाने को पैसे नहीं हैं, गरीब देश है, भुखमरी है और आप रोड बना रहे हैं। सरकार बहुत मक्‍कमल थी, रोड बना दिया। देखते ही देखते रोड ने कोरिया की स्‍थति को बदल दिया और वो कोरिया, हिन्‍दुस्‍तान के बाद आजाद हुआ था, इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि आज से दस-पंद्रह साल पहले कोरिया के अंदर ओलंपिक गेम को आयोजित करने का सामर्थ्‍य दिखाया था। एक रोड से सारी सोच बदल गई।

भाइयो-बहनो, रोड बनाने में इतनी ताकत होती है। रोड, रास्‍ता सिर्फ आपको ले जाता है, ऐसा नहीं है, आपकी सोच को भी बदल देता है। और यह सही है संपत्ति से रोड नहीं बनते हैं, रोड बनाने से संपत्ति बनती है। और इसलिए जितने अच्‍छे मार्गों के माध्‍यम से हम देश के हर कोने को जोड़ेंगे, उतना अच्‍छा। अटल बिहारी वाजपेयी ने एक और बड़ा काम किया था, गोल्‍डन चर्तुभुज बनाया था। बाद में वह काम अटक गया। लेकिन पूरे देश में उस रास्‍ते के नेटवर्क ने एक नया विश्‍वास पैदा किया था। नितिन जी के नेतृत्‍व में हम उस काम को भी तेज गति से आगे बढ़ाने वाले हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना, जो वाजपेयी जी लाए थे, उस सड़क योजना के कारण गांव गांव को जोड़ने की सुविधा में गति आई थी। उसी प्रकार से रोड नेटवर्क हों, रेल नेटवर्क हो, उसे भी बढ़ाना है। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता देते हुए इस देश के कोने कोने में हर एक क्षेत्र को जोड़ना है। और जब इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बढ़ता है तो रोजगारी की संभावनाएं भी बहुत बढ़ती है। रोड बनाने में रोजगार मिलता है। सिर्फ ऐसा ही नहीं है, रोड में लगने वाला सामान जहां से आता है, उन कारखानों में रोगजार मिलता है। ट्रांसपोर्ट में भी रोजगार मिलता है। एक प्रकार से बेरोजगारी भगाने के लिए एक बड़ा माध्‍यम बन जाता है। और इसलिए ये रोड नेटवर्क, हम इन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का निर्माण भी स्‍ट्रेटेजिकली महत्‍वपूर्ण करने वाले हैं।

ऐसे नहीं, एक तरफ तो हम टूरिज्‍म बढ़ाने की बात करें लेकिन रास्‍ते वाला जो डिपार्टमेंट है, उसका कोई कंट्रीव्‍यूशन ही नहीं हो तो टूरिज्‍म कैसे बढ़ेगा। अगर टूरिज्‍म बढ़ाने के लिए अच्‍छे रोड नेटवर्क की जरूरत है तो उसको प्राथमिकता दे कर के उस रोड नेटवर्क को पूरा किया जाएगा। देश, आज से 20-25 साल पहले रेल-रोड नेटवर्क से संतुष्‍ट हो जाता था। लेकिन देश 21 वीं सदी में सिर्फ रेल और रोड के माध्‍यम से संतुष्‍ट नहीं हो सकता। आज देश को हाईवेज भी चाहिए, आईवेज भी चाहिए। आईवेज का मेरा मतलब है इंफोरमेशन हाईवेज। इंफोरमेशन टेक्‍नोलोजी के माध्‍यम से, ब्राडबैंड कनेक्टिविटी के माध्‍यम से, इंटरनेट कनेक्टिविटी के माध्‍यम से गांव गांव जुड़ना चाहिए। नए युग की आवश्‍यकता है। गैस गिड चाहिए, वाटर ग्रिड चाहिए। बिजली की ग्रिड चाहिए। हर प्रकार से एक रूप का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का माडल आज समय की मांग है। और उसी की पूर्ति की दिशा में आज एक कदम जो उत्‍तर से दक्षिण को जोड़ने वाला है, महाराष्‍ट्र से कर्नाटक को जोड़ने वाला है। चाहे बिजली के माध्‍यम से हो, चाहे रोड नेटवर्क के माध्‍यम से हो, यह जोड़ने के अभियान के हिस्‍से के स्‍वरूप में आज मुझे सोलापुर आने का सौभाग्‍य मिला है। मैं आपके प्‍यार के लिए बहुत-बहुत आभारी हूं और मैं विश्‍वास करता हूं कि यह काम बहुत तेज गति से आगे बढ़ेगा और सोलापुर के विकास तथा इस क्षेत्र के विकास में, हिन्‍दुस्‍तान के दक्षिणी छोर में बिजली की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए यह सारे प्रयास सुखकर परिणाम देंगे।

इसी विश्‍वास के साथ आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी, सभी सांसदगण, विकसित भारत यंग लीडर्स चैलेंज के विनर्स, अन्य महानुभाव और देशभर से यहां आए मेरे सभी युवा साथी, विदेशों से जो नौजवान आएं हैं, उनको भी यहां एक नया अनुभव मिला होगा। आप लोग थक नहीं गए? दो दिन से यही कर रहे हैं, तो अब क्या सुन- सुनके थक नहीं जाओगे? वैसे तो बैक सीट में मैंने जितना कहना था, कह दिया था। जब मैंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब मैं समझता हूं आप में से बहुत सारे युवा ऐसे होंगे, जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा। और जब मैंने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब आप में से ज्यादातर लोगों को बच्चा कहा जाता होगा। लेकिन पहले मुख्यमंत्री के रूप में और फिर अभी प्रधानमंत्री के रूप में, मुझे हमेशा युवा पीढ़ी पर बहुत ज्यादा विश्वास रहा है। आपका सामर्थ्य, आपका टैलेंट, मैं हमेशा आपकी एनर्जी से, खुद भी एनर्जी पाता रहा हूं। और आज देखिए, आज आप सभी विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर थामे हुए हैं।

साथियों,

साल 2047 में, जब हमारी आजादी के 100 साल होंगे, वहां तक की यात्रा भारत के लिए भी अहम है, और यही वो समय है, जो आपके जीवन में भी सबसे महत्वपूर्ण है, यानी बड़ी golden opportunity है आपके लिए। आपका सामर्थ्य, भारत का सामर्थ्य बनेगा, आपकी सफलता, भारत की सफलता को नई ऊंचाइयां जरूर देगी। मैं आप सभी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में सहभागिता के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं इस विषय पर आगे विस्तार से बात जरूर करूंगा, लेकिन पहले बात आज के विशेष दिन की।

साथियों,

आप सभी जानते हैं कि आज स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती है। स्वामी विवेकानंद जी के विचार, आज भी हर युवा के लिए प्रेरणा हैं। हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है, purpose of life क्या है, कैसे हम नेशन फर्स्ट की भावना के साथ अपना जीवन जीएं। हमारे हर प्रयास में समाज का,देश का हित हो, इस दिशा में स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हम सभी के लिए बहुत बड़ा मार्गदर्शक है, प्रेरक है। स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए, हर साल 12 जनवरी को हम राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं, और उन्हीं की प्रेरणा आज 12 जनवरी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के लिए चुना गया है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि बहुत ही कम समय में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग इतना बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहां देश के विकास की दिशा तय करने में युवाओं की सीधी भागीदारी होती है। करोड़ों नौजवानों का इससे जुड़ना, 50 लाख से अधिक नौजवानों की रजिस्ट्री, 30 लाख से अधिक युवाओं का विकसित भारत चैलेंज में हिस्सा लेना, देश के विकास के लिए अपने विचार शेयर करना, इतने बड़े स्केल पर युवाशक्ति का एंगेज होना, अपने आप में अभूतपूर्व है। दुनिया के अनेक देशों में आमतौर पर थिंक टैंक, यह शब्द बहुत प्रचलित है। थिंक टैंक की चर्चा भी होती है। और उस थिंक टैंक का प्रभाव भी बहुत होता है। वे एक प्रकार से ओपिनियन मेकर्स का एक समूह बन जाता है। लेकिन शायद, आज जो मैंने प्रेजेंटेशन देखें और जिस प्रकार से challenging होते-होते आप लोगों ने, यहां तक जो लाए हैं। मैं समझता हूं कि ये अपने आप में, ये इवेंट institutionalized तो हुआ है, एक अपने आप में, दुनिया में अनोखी थिंक टैंक के रूप में उसने अपनी जगह बना ली। एक निश्चित विषय को लेकर, निश्चित लक्ष्य को लेकर के लाखों लोगों का मंथन होना, इससे बड़ा थिंकिंग क्या हो सकता है? और मुझे लगता है कि इसके साथ थिंक टैंक शब्द बैठता नहीं है, क्योंकि टैंक शब्द इसलिए आया होगा, छोटा सा होता है, ये तो विशाल है, सागर से भी विशाल है और समय से भी आगे है, और विचारों में समंदर से भी ज्यादा गहरा है। और इसलिए थिंक टैंक शब्द, टैंक वाले शब्द से भी सीमित नहीं किया जा सकता, ऐसा इसका अनुभव है। और जिन विषयों को आज आपने चर्चा में लिया हैं, जैसे खासतौर पर Women Led Development और Youth Participation in Democracy, ऐसे गंभीर विषयों पर जिस प्रकार से विचार आपने रखें हैं, ये प्रशंसनीय है। थोड़ी देर पहले आपने यहां जो प्रजेंटेशन रखे, अलग-अलग थीम्स को लेकर प्रभावी बात रखी है। ये दिखाता है कि हमारी अमृत पीढ़ी, विकसित भारत के निर्माण के लिए कितनी संकल्पित है। इससे ये भी स्पष्ट होता है कि भारत में जेन-ज़ी का मिज़ाज क्या है। भारत का जेन-ज़ी कितनी creativity से भरा हुआ है। मैं आप सभी युवा साथियों को मेरा युवा भारत संगठन से जुड़े सभी नौजवानों को इस आयोजन के लिए और इसकी सफलता के लिए, मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं, आप सबका अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने जब अभी आपसे बातचीत शुरू की तो 2014 का जिक्र किया था। तब यहाँ बैठे ज़्यादातर युवा 8–10 साल के ही रहे होंगे। अखबार पढ़ने की उनकी आदत भी नहीं डेवलप हुई होगी। आपने पॉलिसी पैरालिसिस का वो पुराना दौर नहीं देखा, जब उस समय की सरकार की इसलिए आलोचना होती थी कि वो समय पर फैसले नहीं लेती। और जो फैसले होते भी थे, वो ज़मीन पर ठीक से लागू नहीं होते थे। नियम-कायदे ऐसे थे, जिससे हमारा नौजवान कुछ नया करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। देश का युवा परेशान था कि इतनी बंदिशों में वो जाए तो, जाए कहां।

साथियों,

हालत ये थी कि अगर किसी एग्जाम के लिए, जॉब के लिए अप्लाई करना होता था, तो सर्टिफिकेट अटेस्ट कराने के लिए अफसरों और नेताओं के साइन लेने में ही दम निकल जाता था। फिर फीस का डिमांड ड्राफ्ट बनाने के लिए बैंकों और पोस्ट-ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे। अपना कोई बिजनेस शुरु करना होता था, तो बैंक कुछ हज़ार रुपए के लोन के लिए 100 गारंटी मांगते थे। आज ये बातें बहुत असामान्य लगती हैं, लेकिन एक दशक पहले तक यही सबकुछ चलता था।

साथियों,

आपने यहां स्टार्ट-अप्स को लेकर प्रेजेंटेशन दिया, मैं आपको स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का ही उदाहरण देता हूं, कि इसमें जो परिवर्तन होता है, वो कैसे हुआ है। दुनिया में 50-60 साल पहले स्टार्ट अप कल्चर शुरु हुआ, धीरे-धीरे वो मेगा-कॉर्पोरेशन्स के युग में बदल गया, लेकिन इस पूरी जर्नी के दौरान भारत में स्टार्ट अप्स के बारे में बहुत कम चर्चा होती थी। साल 2014 तक तो देश में 500 से भी कम रजिस्टर्ड स्टार्ट-अप हुआ करते थे। स्टार्ट अप कल्चर के अभाव में, हर क्षेत्र में सरकार का ही दखल हावी रहा। हमारा युवा टैलेंट, उसका सामर्थ्य, उसे अपने सपने पूरे करने का मौका ही नहीं मिला।

साथियों,

मुझे अपने देश के युवाओं पर भरोसा है, आपके सामर्थ्य पर भरोसा है, इसलिए हमने एक अलग राह चुनी। हमने युवाओं को ध्यान में रखते हुए, एक के बाद एक नई स्कीम्स बनाई, यहीं से Startup Revolution ने भारत में असली गति पकड़ी। Ease of Doing Business reforms, Startup India, Digital India, Fund of Funds, Tax और compliance simplification, ऐसे अनेक Initiatives लिए गए। ऐसे सेक्टर,जहां पहले सिर्फ सरकार ही सबकुछ थी, सबकुछ उसी की चलती थी, उनको युवा इनोवेशन, युवा एंटरप्राइज़ के लिए ओपन किया गया। इसका जो प्रभाव हुआ, वो भी एक अलग ही सक्सेस स्टोरी बन चुका है।

साथियों,

आप स्पेस सेक्टर को ही लीजिए, 5-6 साल पहले तक स्पेस सेक्टर को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ ISRO पर थी। हमने स्पेस को प्राइवेट एंटरप्राइज के लिए ओपन किया, इससे जुड़ी व्यवस्थाएं बनाईं, संस्थाएं तैयार कीं और आज स्पेस सेक्टर में 300 से अधिक स्टार्ट-अप्स काम कर रहे हैं। देखते ही देखते हमारे स्टार्टअप Skyroot Aerospace ने अपना रॉकेट 'विक्रम-S' तैयार कर लिया है। एक और स्टार्ट अप अग्निकुल Cosmos ने दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड इंजन बनाकर सबको चौंका दिया, ये सब स्टार्टअप की कमाल है। भारत के स्पेस स्टार्टअप्स अब लगातार कमाल करके दिखा रहे हैं।

साथियों,

मैं अब आपसे एक सवाल करता हूं। आप कल्पना करिए कि अगर ड्रोन उड़ाने पर चौबीसों घंटे अनेकों तरह की पाबंदी लगी रहती, तो क्या होता? ये थी। पहले हमारे यहां ड्रोन उड़ाना या बनाना, दोनों कानूनों के जाल में फंसा हुआ था। लाइसेंस लेना पहाड़ चढ़ने जैसा काम था और इसे केवल सुरक्षा के नजरिए से ही देखा जाता था। हमने नए नियम बनाए, नियम आसान किए, इसके कारण आज हमारे यहां कितने ही युवाओं को ड्रोन से जुड़े सेक्टर में आगे बढ़ने का मौका मिला है। युद्ध-क्षेत्र में मेड इन इंडिया ड्रोन देश के दुश्मनों को धूल चटा रहे हैं, और कृषि क्षेत्र में हमारी नमो ड्रोन दीदियां खेती में ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रही हैं।

साथियों,

डिफेंस सेक्टर भी पहले सरकारी कंपनियों पर ही निर्भर था। हमारी सरकार ने इसको भी बदला, भारत के डिफेंस इकोसिस्टम में स्टार्ट अप्स के लिए दरवाजे खोले। इसका बहुत बड़ा फायदा हमारे युवाओं को ही मिला। आज भारत में 1000 से अधिक डिफेंस स्टार्ट अप्स काम कर रहे हैं। आज एक युवा ड्रोन बना रहा है, तो दूसरा युवा एंटी-ड्रोन सिस्टम बना रहा है, कोई AI कैमरा बना रहा है, कोई रोबोटिक्स पर काम कर रहा है।

साथियों,

डिजिटल इंडिया ने भी भारत में क्रिएटर्स की एक नई कम्युनिटी खड़ी कर दी है। भारत आज 'ऑरेंज इकोनॉमी' यानि कल्चर, कंटेंट और क्रिएटिविटी का अभूतपूर्व विकास होते देख रहा है। भारत मीडिया, फिल्म, गेमिंग, म्यूज़िक,डिजिटल कंटेंट,VR-XR जैसे क्षेत्रों में एक बड़ा ग्लोबल सेंटर बन रहा है। अभी यहां पर एक प्रेजेंटेशन में हमारे कल्चर को एक्सपोर्ट करने की बात आई। मैं तो आप नौजवानों से आग्रह करता हूं, हमारी जो कहानियां हैं, कहानी- किस्से हैं, रामायण है, महाभारत है, बहुत कुछ है। क्या हम उसमें गेमिंग की दुनिया में ले जा सकते है, इन चीजों को? पूरी दुनिया में गेमिंग एक बहुत बड़ा मार्केट है, बहुत बड़ी इकोनॉमी है। हम अपनी माइथोलॉजी की कथाओं को लेकर के भी गेमिंग की दुनिया में नए-नए खेल ले जा सकते हैं, हमारे हनुमान जी पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं। हमारा कल्चर भी एक्सपोर्ट हो जाएगा, आधुनिक रूप में हो जाएगा, टेक्नोलॉजी का उपयोग होगा। और आजकल भी मैं देख रहा हूं, हमारे देश के इस कई स्टार्टअप है, जो गेमिंग की दुनिया में बहुत बढ़िया भारत की बातें कह रहे हैं, और बच्चों को भी खेलते-खेलते भारत को समझना सरल हो जाता है।

साथियों,

'वर्ल्ड ऑडियो-विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट' यानि WAVES युवा क्रिएटर्स के लिए एक बहुत बड़ा लॉन्च-पैड बन गई है। यानि सेक्टर कोई भी हो, आपके लिए आज भारत में अनंत संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। इसलिए मेरा आज यहां इस आयोजन से जुड़े सभी युवाओं से, देश के युवाओं से आह्वान है, आप अपने आइडिया के साथ आगे बढ़िए, रिस्क लेने से पीछे मत हटिए, सरकार आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।

साथियों,

बीते दशक में बदलाव का, रिफॉर्म्स का जो सिलसिला हमने शुरु किया, वो अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है। और इन रिफॉर्म्स के केंद्र में आप हैं, हमारी युवाशक्ति है। GST में हुए नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स से युवाओं और आंत्रप्रन्योर्स के लिए प्रोसेस और आसान हो गई है। अब 12 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स ज़ीरो हो गया है, इससे नई नौकरी वालों या नया बिजनेस शुरु करने वाले नौजवानों को, उनके पास बहुत ज्यादा बचत होने की संभावना बढ़ गई है ।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, आज बिजली सिर्फ रोशनी का माध्यम नहीं है, आज AI, Data सेंटर्स, सेमीकंडक्टर, मैन्युफेक्चरिंग, ऐसे हर इकोसिस्टम के लिए ज्यादा बिजली की ज़रूरत है। इसलिए आज भारत Assured Energy सुनिश्चित कर रहा है। सिविल न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़ा रिफॉर्म यानि शांति एक्ट इसी लक्ष्य के साथ किया गया है। इससे न्यूक्लियर सेक्टर में तो हज़ारों नये जॉब्स पैदा होंगे ही, बाकी सेक्टर्स पर भी इसका मल्टीप्लायर effect होने वाला है।

साथियों,

दुनिया के अलग-अलग देशों की अपनी जरूरतें हैं,अपनी डिमांड है। वहां वर्कफोर्स लगातार घट रही है। हमारा प्रयास है कि भारत के युवा दुनियाभर में बन रहे अवसरों के लिए तैयार हों। इसलिए, स्किल डवलपमेंट से जुड़े सेक्टर्स में भी लगातार रिफॉर्म किया जाना चाहिए, और हम कर रहे हैं। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के बाद, अब हायर एजुकेशन से जुड़े रेगुलेशन्स को रिफॉर्म किया जा रहा है। विदेशी यूनिवर्सिटीज़ भी अब भारत में अपने कैंपस खोल रही हैं। हाल में ही हज़ारों करोड़ रुपए के निवेश के साथ पीएम सेतु प्रोग्राम शुरु किया गया है। इससे हमारे हज़ारों ITI अपग्रेड किए जाएंगे, ताकि युवाओं को इंडस्ट्री की वर्तमान और भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से ट्रेन किया जा सके। बीते समय में दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ भारत ने ट्रेड डील्स की हैं। ये भी भारत के युवाओं के लिए नए-नए अवसर लेकर आ रही हैं।

साथियों,

कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर नहीं हो सकता,विकसित नहीं हो सकता। और इसलिए,अपने सामर्थ्य,अपनी विरासत,अपने साजो-सामान पर गौरव का अभाव, हमें खलता है, हमारे पास उसके प्रति एक कमिटमेंट चाहिए, गौरव का भाव होना चाहिए। और हमें बड़ी मजबूती के साथ, गौरव के साथ मजबूत कदमों से आगे बढ़ना चाहिए। आपने ब्रिटिश राजनेता मैकाले के बारे में ज़रूर पढ़ा होगा, उसने गुलामी के कालखंड में शिक्षा-तंत्र के माध्यम से भारतीयों की ऐसी पीढ़ी बनाने के लिए काम किया, जो मानसिक रूप से गुलाम हो। इससे भारत में स्वदेशी के प्रति,अपनी परंपराओं के प्रति,अपने प्रोडक्ट्स,अपने सामर्थ्य के प्रति हीन-भावना पनपी। सिर्फ स्वदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, विदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, इसी को श्रेष्ठता की गारंटी मान लिया, अब ये कोई गले उतरने वाली चीज है क्या? हमें मिलकर गुलामी की इस मानसिकता को खत्म करना है। दस साल बाद, मैकाले के उस दुस्साहस को 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं, और ये पीढ़ी की जिम्मेवारी है कि 200 साल पहले का जो पाप है ना, वो धोने के लिए अभी 10 साल बचे हैं हमारे पास। और ये युवा पीढ़ी धोकर के रहेगी, मुझे पूरा भरोसा है। और इसलिए देश के हर युवा को संकल्प लेकर इस मानसिकता से देश को बाहर निकालना है।

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है, और यहां पर स्टार्टअप, यहां जो प्रेजेंटेशन हुआ, उसमें भी उसका उल्लेख किया गया- आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः यानि हमारे लिए सभी दिशाओं से कल्याणकारी और शुभ और श्रेष्ठ विचार आने दें। आपको भी दुनिया की हर बेस्ट प्रेक्टिस से सीखना है, लेकिन अपनी विरासत, अपने आइडियाज़ को कमतर आंकने की प्रवृत्ति को कभी हावी नहीं होने देना है। स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हमें यही तो सिखाता है। उन्होंने दुनियाभर में भ्रमण किया, वहां की अच्छी बातों की प्रशंसा की, लेकिन उन्होंने भारत की विरासत को लेकर फैलाए गए भ्रम को तोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए, कठोरता उन्होंने घाव किए उस पर। उन्होंने विचारों को सिर्फ इसलिए नहीं स्वीकार किया, क्योंकि वे पॉपुलर थे, बल्कि उन्होंने कुरीतियों को चैलेंज किया, स्वामी विवेकानंद जी एक बेहतर भारत बनाना चाहते थे। उसी स्पिरिट के साथ, आज आप युवाशक्ति को आगे बढ़ना है। और यहां, अपनी फिटनेस का भी ध्यान रखना है, खेलना है, खिलखिलाना है। मुझे आप सभी पर अटूट भरोसा है। आपका सामर्थ्य,आपकी ऊर्जा पर मेरा विश्वास है। इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी को एक बार फिर से युवा दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मैं एक और सुझाव देना चाहता हूं। ये जो हमारा डायलॉग का कार्यक्रम चल रहा है, क्या आप कभी योजना करके अपने स्टेट में, स्टेट को विकसित बनाने के लिए डायलॉग, ये कार्यक्रम शुरू करें। और थोड़े समय के बाद हम डिस्ट्रिक्ट को विकसित बनाने के लिए भी डायलॉग शुरू करें, इस दिशा में जाएंगे। लेकिन हर राज्य में एक कार्यक्रम राज्य के नौजवान मिलकर के ताकि एक थिंक टैंक, जिसको कहा गया, ये थिंक वेब बन जाएगा, ये दिशा में हम करें। मेरी पूरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों।