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यहां के राजयपाल श्रीमान कातीकल शंकर नारायणन जी, मुख्‍यमंत्री श्रीमान पृथ्‍वीराज जी, मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्री नितिन गडकरी जी, श्री पीयूष गोयल जी, यहां के नौजवान सांसद भाई शरद जी, श्री विनोद तांबरे जी, ऊर्जा सचिव श्री पी के सिन्‍हा जी, श्री आर पी सिंह, श्री आर एन नायक और विशाल संख्‍या में आए हुए सोलापुर के भाइयो-बहनो।

तीन महीना पूर्व मी आला होता (तीन महीने पहले मैं यहां आया था)

क्‍या सोलापुर के लोगों में उत्‍साह की कमी नहीं है क्‍या सोलापुर के प्‍यार पे शत शत नमन। ऐसा लगता है, सोलापुर ने मुझे अपना बना लिया। लेकिन मैं सोलापुर वासियों को ये विश्‍वास दिलाता हूं कि चुनाव के समय जब मैं यहां आया था और आपने जो भरपूर प्‍यार दिया था, और इतने कम समय में में दुबारा आया हूं। और मैं देख रहा हूं आपका प्‍यार बढ़ता ही जा रहा है। सोलापुर के मेरे भाइयों-बहनों, मैं इस प्‍यार को ब्‍याज समेत लौटाउंगा। विकास करके लौटाउंगा।

सोलापुर की पहचान टैक्‍सटाइल के साथ जुड़ी हुई है। टैक्‍सटाइल के क्षेत्र में सोलापुर के लोग कई नए प्रयोग करते हैं। लेकिन उन प्रयोगों को राष्‍ट्रीय-अंतर्राष्‍ट्रीय फलक पे जो स्‍थान मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है। टैक्‍सटाइल उद्योग एक ऐसा उद्योग है जो सर्वाधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। गरीब से गरीब को रोजगार देने वाला क्षेत्र है। और दिल्‍ली में बिठाई हुई आपकी सरकार नौजवानों को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है। नौजवान को अगर रोजगार मिल जाए तो इस देश के आशाओं को पूर्ण करने की ताकत हमारे नौजवानों में है, हमारी युवा पी‍ढ़ी में है और उसके लिए हमारे युवकों की क्षमता बढ़े, उनके हाथ में हुनर हो, उनके कौशल्‍य में वृद्धि हो, हमारा नौजवान सामर्थवान बने और सामर्थवान नौजवान से उनके कर्तव्‍यों से, उनके पुरूषार्थ से हमारा राष्‍ट्र समृद्ध बने, ये सपना लेकर हम योजनाएं बनाते हैं और जिसका लाभ भारत में जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की संभावनाएं पड़ी हैं, जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की पुरानी नींव पड़ी है, उन क्षेत्रों पर विशेष ध्‍यान देकर के टैक्‍सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने का हमारा सपना है और इसका लाभ शोलापुर को भी मिलेगा, सोलापुर के नौजवानों को भी मिलेगा

आज दो महत्‍वपूर्ण कार्यों के लिए मुझे सोलापुर की धरती पर फिर से आने का सौभाग्‍य मिला है। हमारे देश में कई चुनाव इस मुद्दे पर लड़े गए और मुद्दा हुआ करता था बीएसपी। में बीएसपी पार्टी का नाम नहीं कह रहा हूं। बीएसपी -बिजली, सड़क, पानी। अगर हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को महत्‍व देते हैं, उसको अगर प्राथमिकता देते हैं, तो लोगों में इतना पुरूषार्थ पड़ा हुआ है तो मिट्टी में से सोना बना सकते हैं। अगर किसान को पानी मिला जाए तो किसान सोना पैदा कर सकता है। और इसलिए तो इस सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना का एक बड़ा अभियान उठाया है मन में। एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर के लिए उपयोगी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर बल देना। कृषि क्षेत्र में पानी पहुंचाने को प्राथमिकता देना। उसी प्रकार से देश का औद्योगिक विकास, देश के सामान्‍य नागरिक के जीवन में क्‍वालिटी आफ लाइफ में परिवर्तन आए। आज गांव में डाक्‍टर रहने के लिए तैयार नहीं हैं, शिक्षक रहने को तैयार नहीं, सरकारी मुलाजिम रहने को तैयार नहीं। वह शाम होने से पहले ही भाग जाता है, शहर में चला जाता है, क्‍यों, क्‍योंकि गांवमें बिजली नहीं है। बिजली नहीं तो टीवी नहीं चलता है। इंटरनेट नहीं है। तो डाक्‍टर का इस स्थिति में रहने को मन नहीं करता। हमारी सरकार का सपना है सात दिवस 365 दिवस, 24 घंटे बिजली गांवों में कैसे मिले। आज इस सपने को पूरा करने के लिए एक तरफ बिजली का उत्‍पादन बढ़ाना पड़ेगा, दूसरी तरफ बिजली पहुंचाने का प्रबंध करना पड़ेगा और जन भागीदारी से महत्‍वपूर्ण काम भी करना पड़ेगा, वह है बिजली बचाओ।

कुछ लोगों को लगता है कि सेना में भर्ती होंगे, तभी देश सेवा होगी। चुनाव लड़कर के एमएलए, एमपी बनेंगे, मंत्री बनेंगे, तभी देश सेवा होगी। मेरे भाइयो-बहनो, अगर हम बिजली बचाने में योगदान करें, तो भी वह देश की बहुत बड़ी सेवा है। मैं तो चाहता हूं कि सभी विद्यार्थी देश सेवा का एक काम अपने जिम्‍मे लें। हर विद्यार्थी कर सकता है। हर महीने अपने घर पे जो बिजली का बिल आता है, हर विद्या‍र्थी उसे देखें और जब भोजन करते हैं, तब माता-पिता, भाई-बहन सबके सामने चर्चा करें, बिजली का बिल दिखा कर के। और तय करें कि इस महीने अगर 100 रुपये का बिजली का बिल आता है तो अगले महीने बिजली का बिल 90 रुपये आ जाए, यह परिवार संकल्‍प करें और इस काम को विद्यार्थी कर सकता है। एक विद्यार्थी भी अपने घर में महीने में दस दस रुपये का बिल बचाएगा, घर के लोगों को भी लगेगा, वाह अपना बेटा बहुत छोटा है लेकिन कितना बड़ा काम करता है। हमने तो कभी सोचा ही नहीं कि चलो भई बिजली का बिल कम हो, इसके लिए कुछ करें। गरीब परिवार को हर महीने 10 रुपये, 20 रुपये, 25 रुपये बिल बच जाता है तो वह गरीब के लिए काम आता है। बच्‍चों को दूध पिलाने के लिए काम आता है। लेकिन यह तब बनता है, बिजली बचाना ये हमारा स्‍वभाव बने। बिजली बचाना- यह हमारा राष्‍ट्रीय कर्तव्‍य बने। क्‍योंकि बिजली बनाने पर जितना खर्च होता है, उससे कम खर्चे में बिजली बचा कर हम देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं। और मैं देशवासियों का आह्वान करता हूं । अगर हमें भारत को आगे ले जाना हैं, गरीब की झोपड़ी में भी बिजली का दीया जले, यह हम सबका अगर सपना है तो हम भी बिजली बचाने का प्रण लें, शपथ लें। और बिजली बचाने से औरों को जितना फायदा होगा, उससे ज्‍यादा हम परिवार वालों को होगा। और मुझे यह विश्‍वास है कि मेरी यह बात स्‍कूल में, कालेज में, शिक्षकों में, परिवारों में पहुंचेगी और आने वाले दिनों में बिजली बचत के अभियान में हम सफल होंगे। उसी प्रकार से हमारे देश में सब जगह बिजली के कारखाने नहीं लग पाये। कुछ राज्‍य हैं जो प्रगतिशील हैं, उन्‍होंने इस काम में प्रगति की है। एक जमाना था, महाराष्‍ट्र भी बिजली के उत्‍पादन में हिन्‍दुस्‍तान में बहुत आगे था। पर बाद की हालत का तो मैं वर्णन करना नहीं चाहता। लेकिन मुख्‍यमंत्री जी ने जो कहा, वह सही है। पूरे देश में इंधन न होने के कारण बिजली के कारखाने बंद पड़े हैं। उनकी पीड़ा सही है। लेकिन यह पीड़ा मुख्‍यमंत्री जी आज व्‍यक्‍त कर रहे हैं। मैं जब गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, तो दो साल तक इस पीड़ा को मैं व्‍यक्‍त करता रहा था। लेकिन मेरे में उस समय कहने का अवसर था, पृथ्‍वीराज के लिए बोलना जरा मुश्किल था, लेकिन मैं बोलता था। लेकिन भाइयो-बहनो, अब जिम्‍मेदारी हमारी है। हम जिम्‍मेदारियों से भागने वाले लोग नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अटका हुआ है, कोयला चोरी का। जांच-पड़ताल चल रही है। लेकिन हम नई नीतियों को लेकर के जल्‍द से जल्‍द कोयले के खदानों में तेज गति से काम चले, इसके लिए प्रयासरत हैं। कोयले के खदानों में इनवायरामेंट के नुकसान के बिना, जंगलों में नुकसान किये बिना, आधुनिक टेक्‍नोलोजी से कोयला निकालना चाहते हैं। जल्‍द से जल्‍द कोयला भी पहुंचेगा, बिजली भी पैदा होगी। बिजली हिन्‍दुस्‍तान के कोने कोने में जाएगी।

भाइयो-बहनो, जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, हम गुजरात में 24 घंटे, 365 दिन गांव को भी बिजली देते थे। वहां बिजली का जाना, यह पता ही नहीं है लोगों को। हमारे पास अतिरिक्‍त बिजली थी, इसके बावजूद भी, वह बिजली देश के काम नहीं आती थी। बिजली के कारखाने हमें बंद करने पड़ते थे। क्‍योंकि बिजली ले जाने के लिए जो ट्रांसमिशन लाइन चाहिए, वह नहीं थी। ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण बिजली नहीं जाती थी। एक बार दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री ने मुझे कहा, मोदी जी हमारे यहां चुनाव आ रहा है। दिल्‍ली में अंधेरा हमें परेशान करता है। आप कुछ बिजली दीजिए। मैंने कहा, में राजनीति बीच में नहीं लाता हूं, मैं प्रबंध करता हूं। मैं मीटिंग में था, आधे घंटे में मैंने उनको जवाब दिया, आपको जितनी बिजली चाहिए, आप ले सकते हैं। मैंने हमारे अफसरों से बात करना, उनके अफसरों से मिला देना, फोन पर सारा कारोबार चला। दूसरे दिन मैंने पूछा, सब हो गया, तो मुख्‍यमंत्री जी ने कहा- मोदी जी आप तो तैयार हैं पर बिजली लाने के लिए मेरे पास तार नहीं है। तार नहीं होने के कारण दिल्‍ली अंधेरे में रह गई। भाइयों-बहनों आज हमारे लिए यह बिजली के ट्रासंमिशन लाइन के द्वारा पूरे देश को जोड़ना आवश्‍यक है। जिस इलाके में बिजली नहीं है, वहां बिजली पहुंचाना आवश्‍यक है और वही महत्‍वपूर्ण काम उत्‍तर को पश्चिम से जोड़ना, पश्चिम को पूरब से जोड़ने का एक महत्‍वपूर्ण काम, जिसका आज उद्घाटन आपके सोलापुर की धरती से राष्‍ट्र को समर्पित किया जा रहा है। दक्षिण भारत, जहां बिजली की जरूरत है, महाराष्‍ट्र में जहां बिजली की जरूरत है, जिन राज्‍यों के पास अतिरिक्‍त बिजली है, उसको पहुंचाने के लिए एक ग्रिड काम आने वाली है। उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

भाइयो-बहनो, गुजरात में एक सरदार सरोवर डैम नर्मदा योजना, जिसकी भागीदारी महाराष्‍ट्र, गुजरात, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान चारों की है। लेकिन पिछले सात साल से दिल्‍ली सरकार की परमिशन नहीं मिलती है। नर्मदा डैम के काम को ऊचाई नहीं मिल रही थी और इसके कारण हमने हाइड्रो प्रोजेक्‍ट लगाया हुआ था, बिजली पैदा करने के लिए, पानी कम होने के कारण जितनी बिजली पैदा होनी चाहिए, नहीं होती थी। पूरी क्षमता का उपयोग करना है तो डैम का काम पूरा होना जरूरी था। लेकिन राजनीतिक कारणों से डैम की ऊंचाई बढ़ाने की हमें अनुमति नहीं मिलती थी। सात साल से दिल्‍ली से हमारा झगड़ा चलता रहता था। नई सरकार बनने के बाद दस दिन में ही ये परमिशन दे दी। डैम की हाइट बढ़ाने का काम चल रहा है, लेकिन इससे महाराष्‍ट्र का क्‍या। आपको जानकर के खुशी होगी, इसके कारण अब बिजली पूरी क्षमता से पैदा होगी। उसके कारण महाराष्‍ट्र को हर वर्ष 400 करोड़ रुपये की बिजली मुफ्त में मिलेगी। ये काम आज से 7 साल पहले हो सकता था। यह काम अगर हो गया होता तो आज पृथ्‍वीराज जी गर्व के साथ महाराष्‍ट्र में बिजली पहुंचा सकते थे, लेकिन नहीं हुआ।

भाइयो-बहनो, ऐसे कई रुके हुए काम अब मेरे करने के दिन आए हैं। आज पुणे-सोलापुर हाईवे का भी शिलान्‍यास हो रहा है। आगे चल कर के यह आपको कर्नाटक से भी जोड़ेगा। इसके कारण , नितिन जी अभी कह रहे थे, अमेरिका के प्रेसिडेंट का उल्‍लेख करते थे। दुनिया में जहां-जहां विकास हुआ है, आप अगर उसका अध्‍ययन करेंगे तो सबसे पहले उस देश ने हिम्‍मत करके और कठिनाइयां झेल कर के, दो काम और रह जाए तो रह जाए, उसकी चिंता किए बिना इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता दी। खास करके रोड नेटवर्क को प्राथमिकता दी। और रोड नेटवर्क को प्राथमिकता देने के कारण उन राष्‍ट्रों के विकास में बहुत बड़ी तेजी आई। साउथ कोरिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। साउथ कोरिया हमारे महाराष्‍ट्र से भी छोटा है। आर्थिक हालत बहुत खराब थी। लेकिन 30 वर्ष पहले वहां के शासकों ने पूरे साउथ कोरिया के बीच में से बहुत बड़ा रोड बना लिया। बहुत आंदोलन हुआ, लोगों ने विरोध किया सरकार का, कि इतने पैसे गंवा रहे हैं। खाने को पैसे नहीं हैं, गरीब देश है, भुखमरी है और आप रोड बना रहे हैं। सरकार बहुत मक्‍कमल थी, रोड बना दिया। देखते ही देखते रोड ने कोरिया की स्‍थति को बदल दिया और वो कोरिया, हिन्‍दुस्‍तान के बाद आजाद हुआ था, इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि आज से दस-पंद्रह साल पहले कोरिया के अंदर ओलंपिक गेम को आयोजित करने का सामर्थ्‍य दिखाया था। एक रोड से सारी सोच बदल गई।

भाइयो-बहनो, रोड बनाने में इतनी ताकत होती है। रोड, रास्‍ता सिर्फ आपको ले जाता है, ऐसा नहीं है, आपकी सोच को भी बदल देता है। और यह सही है संपत्ति से रोड नहीं बनते हैं, रोड बनाने से संपत्ति बनती है। और इसलिए जितने अच्‍छे मार्गों के माध्‍यम से हम देश के हर कोने को जोड़ेंगे, उतना अच्‍छा। अटल बिहारी वाजपेयी ने एक और बड़ा काम किया था, गोल्‍डन चर्तुभुज बनाया था। बाद में वह काम अटक गया। लेकिन पूरे देश में उस रास्‍ते के नेटवर्क ने एक नया विश्‍वास पैदा किया था। नितिन जी के नेतृत्‍व में हम उस काम को भी तेज गति से आगे बढ़ाने वाले हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना, जो वाजपेयी जी लाए थे, उस सड़क योजना के कारण गांव गांव को जोड़ने की सुविधा में गति आई थी। उसी प्रकार से रोड नेटवर्क हों, रेल नेटवर्क हो, उसे भी बढ़ाना है। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता देते हुए इस देश के कोने कोने में हर एक क्षेत्र को जोड़ना है। और जब इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बढ़ता है तो रोजगारी की संभावनाएं भी बहुत बढ़ती है। रोड बनाने में रोजगार मिलता है। सिर्फ ऐसा ही नहीं है, रोड में लगने वाला सामान जहां से आता है, उन कारखानों में रोगजार मिलता है। ट्रांसपोर्ट में भी रोजगार मिलता है। एक प्रकार से बेरोजगारी भगाने के लिए एक बड़ा माध्‍यम बन जाता है। और इसलिए ये रोड नेटवर्क, हम इन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का निर्माण भी स्‍ट्रेटेजिकली महत्‍वपूर्ण करने वाले हैं।

ऐसे नहीं, एक तरफ तो हम टूरिज्‍म बढ़ाने की बात करें लेकिन रास्‍ते वाला जो डिपार्टमेंट है, उसका कोई कंट्रीव्‍यूशन ही नहीं हो तो टूरिज्‍म कैसे बढ़ेगा। अगर टूरिज्‍म बढ़ाने के लिए अच्‍छे रोड नेटवर्क की जरूरत है तो उसको प्राथमिकता दे कर के उस रोड नेटवर्क को पूरा किया जाएगा। देश, आज से 20-25 साल पहले रेल-रोड नेटवर्क से संतुष्‍ट हो जाता था। लेकिन देश 21 वीं सदी में सिर्फ रेल और रोड के माध्‍यम से संतुष्‍ट नहीं हो सकता। आज देश को हाईवेज भी चाहिए, आईवेज भी चाहिए। आईवेज का मेरा मतलब है इंफोरमेशन हाईवेज। इंफोरमेशन टेक्‍नोलोजी के माध्‍यम से, ब्राडबैंड कनेक्टिविटी के माध्‍यम से, इंटरनेट कनेक्टिविटी के माध्‍यम से गांव गांव जुड़ना चाहिए। नए युग की आवश्‍यकता है। गैस गिड चाहिए, वाटर ग्रिड चाहिए। बिजली की ग्रिड चाहिए। हर प्रकार से एक रूप का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का माडल आज समय की मांग है। और उसी की पूर्ति की दिशा में आज एक कदम जो उत्‍तर से दक्षिण को जोड़ने वाला है, महाराष्‍ट्र से कर्नाटक को जोड़ने वाला है। चाहे बिजली के माध्‍यम से हो, चाहे रोड नेटवर्क के माध्‍यम से हो, यह जोड़ने के अभियान के हिस्‍से के स्‍वरूप में आज मुझे सोलापुर आने का सौभाग्‍य मिला है। मैं आपके प्‍यार के लिए बहुत-बहुत आभारी हूं और मैं विश्‍वास करता हूं कि यह काम बहुत तेज गति से आगे बढ़ेगा और सोलापुर के विकास तथा इस क्षेत्र के विकास में, हिन्‍दुस्‍तान के दक्षिणी छोर में बिजली की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए यह सारे प्रयास सुखकर परिणाम देंगे।

इसी विश्‍वास के साथ आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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Text of PM’s address on Completion of 20 years of Indian School of Business, Hyderabad
May 26, 2022
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Acknowledges the role of students of ISB in the economic and business landscape of the country
“Today the world is realising that India means business”
“I would like to ask you to link your personal goals with the goals of the country”
“Due to the continuous political instability in the last three decades, the country has seen a lack of political willpower and stayed away from reforms and big decisions”
“In the system now government reforms, bureaucracy performs and people’s participation leads to transformation”
“To make India future-ready, we have to ensure that India becomes self-reliant. All you business professionals have a big role in this”

तेलंगाना की राज्यपाल श्रीमती तमिलसाई सौन्दर्यराजन सौंदरराजन जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री जी कृष्ण रेड्डी जी, तेलंगाना सरकार के मंत्री, इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नस एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन, डीन, अन्य प्रोफेसर्स, टीचर्स, पेरेंट्स और मेरे प्यारे युवा साथियों !

आज इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नस ने अपनी गौरवमयी यात्रा का एक अहम माइलस्टोन पार किया है। हम सभी ISB की स्थापना के 20 साल पूरे होने को सेलिब्रेट कर रहे हैं। आज अनेक साथियों को अपनी डिग्री मिली है, गोल्ड मेडल मिले हैं। ISB को सफलता के इस पड़ाव पर पहुंचाने में अनेकों लोगों की तपस्या रही है। मैं आज उन सभी को याद करते हुए आप सभी को, ISB के प्रोफेसर्स, फेकल्टी, सभी स्टूडेंट्स को, पेरेन्ट्स को, आई एस बी के एल्यूमनाइज को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

साल 2001 में अटल जी ने इसे देश को समर्पित किया था। तब से लेकर आज तक लगभग 50 हज़ार एक्ज़ीक्यूटिव यहाँ से ट्रेन होकर निकले हैं। आज आई एस बी एशिया के टॉप बिजनेस स्कूलों में से एक है। आई एस बी से निकलने वाले जो प्रोफेशनल्स हैं। वे देश के बिजनेस को गति दे रहे हैं, बड़ी-बड़ी कंपनियों का मैनेजमेंट संभाल रहे हैं। यहाँ के स्टूडेंट्स ने अनेक स्टार्ट अप्स बनाए हैं, अनेकों यूनिकॉर्न्स निर्माण में उनकी भूमिका रही है। ये आई एस बी के लिए उपलब्धि तो है ही पूरे देश के लिए गर्व का विषय भी है।

साथियों,

मुझे बताया गया है कि ये हैदाराबाद और मोहाली कैंपस की पहली जॉइंट ग्रेजुएशन सेरेमनी है। आज जो स्टूडेंट्स पास होकर निकल रहे हैं, उनके लिए ये इसलिए भी खास है क्योंकि इस समय देश अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व मना रहा है, अमृत महोत्सव मना रहा है। हम बीते 75 साल की उपलब्धियों को देख रहे हैं और आने वाले 25 साल के संकल्पों का रोडमैप भी बना रहे हैं। आज़ादी के इस अमृतकाल में, आने वाले 25 साल के लिए जो संकल्प हमने लिए हैं, उसकी सिद्धि में आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका है। और आज भारत में जो आशा है, लोगों में जो आत्मविश्वास है, नए भारत के निर्माण के लिए जो इच्छाशक्ति है, वो आपके लिए भी अनेक संभावनाओं के द्वार खोल रही है। आप खुद देखिए, आज भारत G20 देशों के समूह में फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी है। Smartphone date consumer के मामले में भारत पहले नंबर पर है। Internet users की संख्या को देखें तो भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। Global Retail Index में भी भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem भारत में है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Consumer Market भारत में है। ऐसी कई चीजें मैं आपके सामने रख सकता हूँ, गिना सकता हूँ। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में हम सबने और दुनिया ने भारत का सामर्थ्य देखा है। सदी की इस सबसे बड़ी आपदा में ग्लोबल सप्लाई चेन्स में इतना बड़ा disruption हुआ, फिर युद्ध ने भी इस संकट को और बढ़ा दिया। इन सबके बीच भी, भारत आज ग्रोथ के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। पिछले साल भारत में अब तक का सबसे ज्यादा, रेकॉर्ड FDI आया। आज दुनिया ये महसूस कर रही है कि India means business. और ये केवल अकेले सरकार के प्रयासों के कारण संभव नहीं हुआ है। इसमें ISB जैसे बिज़नेस स्कूल्स का, यहाँ से निकलने वाले प्रोफेशनल्स का, देश के युवा का भी बहुत बड़ा योगदान है। चाहे स्टार्टअप्स हों, या traditional business हो, चाहे manufacturing हो या सर्विस सेक्टर हो, हमारे युवा ये साबित कर रहे हैं कि वो दुनिया को लीड कर सकते हैं। मैं सही बता रहा हूँ ना, आपको भरोसा है कि नहीं अपने आप पर। मुझे आप पर भरोसा है। आपको अपने आप पर है?

साथियों,

इसीलिए आज दुनिया भारत को, भारत के युवाओं को, और भारत के products को एक नए सम्मान और नए भरोसे के साथ देख रही है।

साथियों,

भारत जिस स्केल पर लोकतांत्रिक तरीके से अनेक चीजें अपने यहाँ कर सकता है, जिस तरीके से हम यहाँ कोई नीति या निर्णय लागू कर सकते हैं, वो पूरी दुनिया के लिए अध्ययन का सीखने का विषय बन जाता है। और इसलिए हम अक्सर Indian solutions को globally implement होते हुए देखते हैं। और इसलिए मैं आज इस महत्वपूर्ण दिन पर आपसे कहूंगा कि आप अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को, देश के लक्ष्यों के साथ जोड़िए। आप जो सीखते हैं, आपका जो भी अनुभव होता है, आप जो भी initiatives लेते हैं, उससे देशहित कैसे सधेगा, इस बारे में हमेशा सोचना चाहिए, जरूर सोचिये। आज देश में चाहे Ease of Doing Business के लिए अभियान हो, डेढ़ हजार से ज्यादा पुराने कानूनों और हजारों compliances को समाप्त करने का काम हो, टैक्स के अनेकों कानूनों को समाप्त करके GST जैसी पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण हो, Entrepreneurs और innovation को बढ़ावा देना हो, नई स्टार्ट अप पॉलिसी हो, ड्रोन पॉलिसी हो, अनेक नए सेक्टर्स को खोलना हो, 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा करने वाली नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू करना हो, ये सारे बड़े बदलाव आप जैसे युवाओं के लिए ही तो हो रहे हैं। आप जैसे युवाओं की तरफ से आने वाले जो solutions हैं, उन solutions को implement करने के लिए, आपके idea को देश की ताकत बनाने के लिए हमारी सरकार हमेशा देश की युवा शक्ति के साथ खड़ी है।

साथियों,

आपने सुना होगा कई बार मैं एक बात को बार-बार दोहराता भी हूँ और अक्सर मैं कहता हूँ Reform, Perform, Transform की बात करता हूँ। ये मंत्र, देश में आज जो governance है, उसे define करता है। ये आप जैसे मैनेजमेंट के स्टूडेंटस, प्रोफेशनल्स के लिए भी बहुत अहम है। मैं ये सारी बातें आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि आप लोग यहाँ से निकलने के बाद बहुत सारे Policy decisions लेने वाले हैं। Policy सिर्फ ड्रॉइंग बोर्ड पर अच्छी हो, कागज़ पर बेहतर हो, जमीन पर अगर नतीजे ना दें, तो उसका कोई लाभ नहीं होता। इसलिए पॉलिसी का आकलन, Implementation और End Result के आधार पर होना चाहिए। Reform, Perform, Transform के मंत्र ने कैसे Policies को, देश की Governance को Redefine किया है, ये भी मैं चाहूँगा कि आप जैसे नौजवानों ने जानना बहुत जरूरी है।

साथियों,

बीते 8 साल की तुलना अगर आप उससे पहले के 3 दशक से करेंगे तो, एक बात जरूर नोट करेंगे। हमारे देश में रिफॉर्म्स की ज़रूरत तो हमेशा से महसूस की जाती रही थी लेकिन Political willpower की हमेशा कमी रहती थी। पिछले तीन दशकों में लगातार बनी रही राजनीतिक अस्थिरता के कारण देश ने लंबे समय तक Political willpower की कमी देखी। इस वजह से देश reforms से, बड़े फैसले लेने से दूर ही रहा है। 2014 के बाद से हमारा देश राजनीतिक इच्छाशक्ति को भी देख रहा है और लगातार Reforms भी हो रहे हैं। हमने दिखाया है कि अगर ईमानदारी के साथ, इच्छाशक्ति के साथ reform की प्रक्रिया को आगे बढ़ाई जाए तो जनसमर्थन अपने आप बढ़ता है। Fintech का उदाहरण हमारे सामने है। जिस देश में कभी बैंकिंग ही एक privilege मानी जाती थी, उसी देश में fintech सामान्य नागरिकों के जीवन को बदल रही है। जहाँ कभी बैंकों के प्रति भरोसा कायम करने के लिए बहुत सारी मेहनत करनी पड़ती थी, वहाँ अब दुनिया की 40 प्रतिशत डिजिटल ट्रांजेक्शन हिन्दुस्तान में हो रही हैं। हमारे Health Sector को भी ये माना जाता था कि ये किसी बड़ी चुनौती को respond नहीं कर पाएगा। लेकिन Health Sector में reform की देश की इच्छाशक्ति का परिणाम हमने 100 साल की सबसे बड़ी महामारी के दौरान अनुभव किया है। कोरोना ने जब दस्तक दी तब हमारे पास PPE किट्स बनाने वाले मैन्युफेक्चरर ना के बराबर थे, कोरोना स्पेसिफिक ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं था। लेकिन देखते ही देखते 1100 से अधिक PPE manufacturers का नेटवर्क भारत में तैयार हो गया। कोरोना की टेस्टिंग के लिए भी शुरुआत में कुछ दर्जन लैब्स थीं। बहुत कम समय में देश में ढाई हज़ार से अधिक टेस्ट लैब्स का नेटवर्क बन गया। कोविड वैक्सीन्स के लिए तो हमारे यहाँ चिंता जताई जा रही थी कि हमें विदेशी वैक्सीन मिल पाएगी भी या नहीं। लेकिन हमने अपनी वैक्सीन्स तैयार कीं। इतनी वैक्सीन्स बनाईं कि भारत में भी 190 करोड़ से ज्यादा डोज़ लगाई जा चुकी हैं। भारत ने दुनिया के 100 से अधिक देशों को भी वैक्सीन्स भेजी हैं। इसी प्रकार मेडिकल एजुकेशन में भी हमने एक के बाद एक अनेक रिफार्म किए। इसी का परिणाम है कि बीते 8 सालों में मेडिकल कॉलेज की संख्या 380 से बढ़कर 600 से भी अधिक हो गई है। देश में मेडिकल की ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की सीटें 90 हज़ार से बढ़कर डेढ़ लाख से ऊपर हो चुकी हैं।

साथियों,

पिछले आठ वर्षों में देश ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, उसकी वजह से एक और बड़ा बदलाव आया है। अब ब्यूरोक्रेसी भी पूरी शक्ति से Reforms को जमीन पर उतारने में जुटी है। सिस्टम वही है, लेकिन अब नतीजे बहुत संतोषजनक मिल रहे हैं। और इन आठ वर्षों में जो सबसे बड़ी प्रेरणा बनी है, वो है जनभागीदारी। देश की जनता खुद आगे बढ़कर Reforms को गति दे रही है। और हमने ये स्वच्छ भारत अभियान में देखा है। और अब वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान में भी हम जनभागीदारी की ताकत को देख रहे हैं। जब जनता सहयोग करती है तो नतीजे अवश्य मिलते हैं, जल्दी मिलते हैं। यानि सरकारी व्यवस्था में सरकार reform करती है, ब्यूरोक्रेसी perform करती है और जनता के सहयोग से transformation होता है।

साथियों,

ये आपके लिए एक बहुत बड़ी केस स्टडी है, Reform, Perform, Transform की जो ये डायनिमिक्स है, वो आपके लिए रिसर्च का विषय है। ISB जैसे बड़े संस्थान को अध्ययन करके, analysis करके दुनिया के सामने इसे लाना चाहिए। यहाँ से जो युवा साथी पढ़कर निकल रहे हैं, उन्हें भी Reform, Perform, Transform के इस मंत्र को हर क्षेत्र में लागू करने का प्रयास करना चाहिए।

साथियों,

मैं आपका ध्यान, देश के sports ecosystem में आए ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ भी दिलाना चाहता हूँ। आखिर क्या कारण है कि 2014 के बाद हमें खेल के हर मैदान में अभूतपूर्व प्रदर्शन देखने को मिल रहा है? इसका सबसे बड़ा कारण है हमारे एथलीट्स का आत्मविश्वास। आत्मविश्वास तब आता है, जब सही टैलेंट की खोज होती है, जब टैलेंट की handholding होती है, जब एक transparent selection होता है, ट्रेनिंग का, कंपीटिशन का एक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलता है। खेलो इंडिया से लेकर ओलंपिक्स पोडियम स्कीम तक ऐसे अनेक रिफॉर्म्स के चलते आज sports को Transform होते हम अपनी आंखों के सामने देख सकते हैं, अनुभव कर सकते हैं।

साथियों,

मैनेजमेंट की दुनिया में performance, value addition, productivity और motivation, इन बातों पर भी बहुत चर्चा होती है। अगर आपको पब्लिक पॉलिसी में इसका उत्तम उदाहरण देखना है, तो आपको aspirational district program को ज़रूर स्टडी करना चाहिए। हमारे देश में 100 से अधिक ऐसे जिले थे, जो विकास की दौड़ में काफी पीछे थे। देश के लगभग सभी राज्यों में एकाद दो-एकाद दो कहीं पर थोड़े ज्यादा ऐसे aspirational district हैं। विकास से जुड़े हर पैरामीटर में ये जिले बहुत कम स्कोर करते थे। इसका सीधा प्रभाव देश की ओवरऑल performance पर, रेटिंग पर, ओवरऑल प्रदर्शन पर बड़ा नेगेटिव असर पड़ता था। इनको ये समझकर कुछ हो नहीं रहा है, बदलाव दिख नहीं रहा है, हालात बुरे हैं, और इसलिए सरकारें क्या करती थीं। उसको पिछड़ा घोषित कर देती थी।, ये तो backward district है, अगर यही सोच है तो उनके मन में भी हो जाता आया आता ऐसी ही रहेगा कुछ बदलाव नही होगा। सरकारी सिस्टम में जिन अफसरों को सबसे कम प्रोडक्टिव माना जाता था, निकम्मा माना जाता था, उनको अक्सर इन जिलों में तैनात करने देना और जाओ बई तुम तुम्हारा जानो तुम्हारा नसीब जाने पडे रहो।

लेकिन साथियों,

हमने अप्रोच बदली। जिसे कल तक backward district कहते थे। हमने कहा ये backward नहीं है ये aspirational district है हमने उनको aspirational घोषित किया, और हमने तय किया कि हम इन जिलों में विकास की आकांक्षा जगाएंगे, एक नई भूख जगाएंगे। देश के Efficient, युवा अधिकारियों को चिन्हित करके इन जिलों में भेजा गया। इन जिलों में होने वाले हर काम को विशेष तौर पर मॉनीटर किया गया, डैस्क बोर्ड पर रियल टाइम मॉनिटरिंग करने की व्यव्सथा की है। जहाँ-जहाँ कमियाँ नजर आती थी उन कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। और साथियों आपको जानकर के खुशी होगी आज स्थिति ये है कि इनमें से कई जिले आज देश के दूसरे बेहतर समझे जाने वाले जिलों से कहीं ज्यादा अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। जिन्हें कभी पिछड़े जिले कहते थे देश के development parameters को प्रभावित करते थे, वो आज aspirational district बनकर, देश के विकास को गति दे रहे हैं। अब हमने राज्यों से कहा है इस अप्रोच को और विस्तार दें। हर जिले में ऐसे ब्लॉक्स होते हैं जो विकास के मामले में दूसरों से पिछड़ गए हैं। ऐसे ब्लॉक्स को identify करके aspirational blocks अभियान को अब आगे बढ़ाया जा रहा है। देश में हो रहे ये बदलाव, इनकी जानकारी, आपको policy decisions में, मैनेजमेंट में बहुत मदद करेगी।

साथियों,

आपके लिए ये सब जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आज देश में ‘business' के मायने भी बदल रहे हैं और ‘business’ का दायरा भी बढ़ रहा है। आज भारत में economic landscape, small, medium, cottage और यहाँ तक की informal enterprises तक में फैल रहा है। ये बिजनेस लाखों-लाख लोगों को रोजगार के अवसर दे रहे हैं। इनका सामर्थ्य बहुत ज्यादा है, इनमें आगे बढ़ने का कमिटमेंट बहुत ज्यादा है। इसलिए आज जब देश आर्थिक विकास के नए अध्याय को लिख रहा है तो हमें एक और बात याद रखनी होगी। हमें छोटे व्यापारियों, small business का भी उतना ही ध्यान रखना होगा। हमें उन्हें ज्यादा बड़े प्लेटफॉर्म देने होंगे, Grow करने के लिए ज्यादा बेहतर मौके देने होंगे। हमें उन्हें देश-विदेश में नए-नए बाजारों से जोड़ने में मदद करनी होगी। हमें उन्हें ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी से जोड़ना होगा। और यहीं पर इसी बात पर ISB जैसे संस्थान, ISB के Students की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। एक future business leader के तौर पर आप सभी को हर बिजनेस को और बड़ा और विस्तार देने करने के लिए आगे आना होगा, जिम्मेवारियाँ संभालनी होगी। और आप देखिएगा, आप छोटे business को grow करने में मदद करेंगे तो आप लाखों entrepreneurs के निर्माण में मदद करेंगे, करोड़ों परिवारों की मदद करेंगे। भारत को future-ready बनाने के लिए हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि भारत आत्मनिर्भर बने। और इसमें आप भी बिजनेस प्रोफेशनल्स की बहुत बड़ी भूमिका है। और ये आपके लिए एक तरह से देश की सेवा का अहम उदाहरण होगा।

साथियों,

देश के लिए कुछ करने का, देश के लिए कुछ कर गुजरने का आपका जज्बा, देश को नई ऊँचाई पर ले जाएगा। मुझे ISB पर, ISB के Students पर, आप सभी नौजवानों पर बहुत भरोसा है, बहुत विश्वास है। आप एक purpose के साथ इस प्रतिष्ठित संस्थान से बाहर निकलें। आप अपने goals को राष्ट्र के संकल्पों के साथ जोड़िए। हम जो कुछ भी करेंगे, उससे एक राष्ट्र के रूप में सशक्त होंगे, इस कमिटमेंट के साथ जब आप कोई भी प्रयास करेंगे तो सफलता आपके कदम पर होगी। एक बार फिर आज जिन-जिन साथियों को मुझे मैडल देने का अवसर मिला है और भी जो लोगों ने सिद्धियाँ प्राप्त की हैं उनको उनके परिवारजनों को अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूँ। और ISB भरत की विकास यात्रा में ऐसी पीढ़ियों को तैयार करता रहे, ऐसी पीढ़ियां राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करती रहे, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद !