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यहां के राजयपाल श्रीमान कातीकल शंकर नारायणन जी, मुख्‍यमंत्री श्रीमान पृथ्‍वीराज जी, मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्री नितिन गडकरी जी, श्री पीयूष गोयल जी, यहां के नौजवान सांसद भाई शरद जी, श्री विनोद तांबरे जी, ऊर्जा सचिव श्री पी के सिन्‍हा जी, श्री आर पी सिंह, श्री आर एन नायक और विशाल संख्‍या में आए हुए सोलापुर के भाइयो-बहनो।

तीन महीना पूर्व मी आला होता (तीन महीने पहले मैं यहां आया था)

क्‍या सोलापुर के लोगों में उत्‍साह की कमी नहीं है क्‍या सोलापुर के प्‍यार पे शत शत नमन। ऐसा लगता है, सोलापुर ने मुझे अपना बना लिया। लेकिन मैं सोलापुर वासियों को ये विश्‍वास दिलाता हूं कि चुनाव के समय जब मैं यहां आया था और आपने जो भरपूर प्‍यार दिया था, और इतने कम समय में में दुबारा आया हूं। और मैं देख रहा हूं आपका प्‍यार बढ़ता ही जा रहा है। सोलापुर के मेरे भाइयों-बहनों, मैं इस प्‍यार को ब्‍याज समेत लौटाउंगा। विकास करके लौटाउंगा।

सोलापुर की पहचान टैक्‍सटाइल के साथ जुड़ी हुई है। टैक्‍सटाइल के क्षेत्र में सोलापुर के लोग कई नए प्रयोग करते हैं। लेकिन उन प्रयोगों को राष्‍ट्रीय-अंतर्राष्‍ट्रीय फलक पे जो स्‍थान मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है। टैक्‍सटाइल उद्योग एक ऐसा उद्योग है जो सर्वाधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। गरीब से गरीब को रोजगार देने वाला क्षेत्र है। और दिल्‍ली में बिठाई हुई आपकी सरकार नौजवानों को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है। नौजवान को अगर रोजगार मिल जाए तो इस देश के आशाओं को पूर्ण करने की ताकत हमारे नौजवानों में है, हमारी युवा पी‍ढ़ी में है और उसके लिए हमारे युवकों की क्षमता बढ़े, उनके हाथ में हुनर हो, उनके कौशल्‍य में वृद्धि हो, हमारा नौजवान सामर्थवान बने और सामर्थवान नौजवान से उनके कर्तव्‍यों से, उनके पुरूषार्थ से हमारा राष्‍ट्र समृद्ध बने, ये सपना लेकर हम योजनाएं बनाते हैं और जिसका लाभ भारत में जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की संभावनाएं पड़ी हैं, जहां-जहां टैक्‍सटाइल उद्योग की पुरानी नींव पड़ी है, उन क्षेत्रों पर विशेष ध्‍यान देकर के टैक्‍सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने का हमारा सपना है और इसका लाभ शोलापुर को भी मिलेगा, सोलापुर के नौजवानों को भी मिलेगा

आज दो महत्‍वपूर्ण कार्यों के लिए मुझे सोलापुर की धरती पर फिर से आने का सौभाग्‍य मिला है। हमारे देश में कई चुनाव इस मुद्दे पर लड़े गए और मुद्दा हुआ करता था बीएसपी। में बीएसपी पार्टी का नाम नहीं कह रहा हूं। बीएसपी -बिजली, सड़क, पानी। अगर हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को महत्‍व देते हैं, उसको अगर प्राथमिकता देते हैं, तो लोगों में इतना पुरूषार्थ पड़ा हुआ है तो मिट्टी में से सोना बना सकते हैं। अगर किसान को पानी मिला जाए तो किसान सोना पैदा कर सकता है। और इसलिए तो इस सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना का एक बड़ा अभियान उठाया है मन में। एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर के लिए उपयोगी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर बल देना। कृषि क्षेत्र में पानी पहुंचाने को प्राथमिकता देना। उसी प्रकार से देश का औद्योगिक विकास, देश के सामान्‍य नागरिक के जीवन में क्‍वालिटी आफ लाइफ में परिवर्तन आए। आज गांव में डाक्‍टर रहने के लिए तैयार नहीं हैं, शिक्षक रहने को तैयार नहीं, सरकारी मुलाजिम रहने को तैयार नहीं। वह शाम होने से पहले ही भाग जाता है, शहर में चला जाता है, क्‍यों, क्‍योंकि गांवमें बिजली नहीं है। बिजली नहीं तो टीवी नहीं चलता है। इंटरनेट नहीं है। तो डाक्‍टर का इस स्थिति में रहने को मन नहीं करता। हमारी सरकार का सपना है सात दिवस 365 दिवस, 24 घंटे बिजली गांवों में कैसे मिले। आज इस सपने को पूरा करने के लिए एक तरफ बिजली का उत्‍पादन बढ़ाना पड़ेगा, दूसरी तरफ बिजली पहुंचाने का प्रबंध करना पड़ेगा और जन भागीदारी से महत्‍वपूर्ण काम भी करना पड़ेगा, वह है बिजली बचाओ।

कुछ लोगों को लगता है कि सेना में भर्ती होंगे, तभी देश सेवा होगी। चुनाव लड़कर के एमएलए, एमपी बनेंगे, मंत्री बनेंगे, तभी देश सेवा होगी। मेरे भाइयो-बहनो, अगर हम बिजली बचाने में योगदान करें, तो भी वह देश की बहुत बड़ी सेवा है। मैं तो चाहता हूं कि सभी विद्यार्थी देश सेवा का एक काम अपने जिम्‍मे लें। हर विद्यार्थी कर सकता है। हर महीने अपने घर पे जो बिजली का बिल आता है, हर विद्या‍र्थी उसे देखें और जब भोजन करते हैं, तब माता-पिता, भाई-बहन सबके सामने चर्चा करें, बिजली का बिल दिखा कर के। और तय करें कि इस महीने अगर 100 रुपये का बिजली का बिल आता है तो अगले महीने बिजली का बिल 90 रुपये आ जाए, यह परिवार संकल्‍प करें और इस काम को विद्यार्थी कर सकता है। एक विद्यार्थी भी अपने घर में महीने में दस दस रुपये का बिल बचाएगा, घर के लोगों को भी लगेगा, वाह अपना बेटा बहुत छोटा है लेकिन कितना बड़ा काम करता है। हमने तो कभी सोचा ही नहीं कि चलो भई बिजली का बिल कम हो, इसके लिए कुछ करें। गरीब परिवार को हर महीने 10 रुपये, 20 रुपये, 25 रुपये बिल बच जाता है तो वह गरीब के लिए काम आता है। बच्‍चों को दूध पिलाने के लिए काम आता है। लेकिन यह तब बनता है, बिजली बचाना ये हमारा स्‍वभाव बने। बिजली बचाना- यह हमारा राष्‍ट्रीय कर्तव्‍य बने। क्‍योंकि बिजली बनाने पर जितना खर्च होता है, उससे कम खर्चे में बिजली बचा कर हम देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं। और मैं देशवासियों का आह्वान करता हूं । अगर हमें भारत को आगे ले जाना हैं, गरीब की झोपड़ी में भी बिजली का दीया जले, यह हम सबका अगर सपना है तो हम भी बिजली बचाने का प्रण लें, शपथ लें। और बिजली बचाने से औरों को जितना फायदा होगा, उससे ज्‍यादा हम परिवार वालों को होगा। और मुझे यह विश्‍वास है कि मेरी यह बात स्‍कूल में, कालेज में, शिक्षकों में, परिवारों में पहुंचेगी और आने वाले दिनों में बिजली बचत के अभियान में हम सफल होंगे। उसी प्रकार से हमारे देश में सब जगह बिजली के कारखाने नहीं लग पाये। कुछ राज्‍य हैं जो प्रगतिशील हैं, उन्‍होंने इस काम में प्रगति की है। एक जमाना था, महाराष्‍ट्र भी बिजली के उत्‍पादन में हिन्‍दुस्‍तान में बहुत आगे था। पर बाद की हालत का तो मैं वर्णन करना नहीं चाहता। लेकिन मुख्‍यमंत्री जी ने जो कहा, वह सही है। पूरे देश में इंधन न होने के कारण बिजली के कारखाने बंद पड़े हैं। उनकी पीड़ा सही है। लेकिन यह पीड़ा मुख्‍यमंत्री जी आज व्‍यक्‍त कर रहे हैं। मैं जब गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, तो दो साल तक इस पीड़ा को मैं व्‍यक्‍त करता रहा था। लेकिन मेरे में उस समय कहने का अवसर था, पृथ्‍वीराज के लिए बोलना जरा मुश्किल था, लेकिन मैं बोलता था। लेकिन भाइयो-बहनो, अब जिम्‍मेदारी हमारी है। हम जिम्‍मेदारियों से भागने वाले लोग नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अटका हुआ है, कोयला चोरी का। जांच-पड़ताल चल रही है। लेकिन हम नई नीतियों को लेकर के जल्‍द से जल्‍द कोयले के खदानों में तेज गति से काम चले, इसके लिए प्रयासरत हैं। कोयले के खदानों में इनवायरामेंट के नुकसान के बिना, जंगलों में नुकसान किये बिना, आधुनिक टेक्‍नोलोजी से कोयला निकालना चाहते हैं। जल्‍द से जल्‍द कोयला भी पहुंचेगा, बिजली भी पैदा होगी। बिजली हिन्‍दुस्‍तान के कोने कोने में जाएगी।

भाइयो-बहनो, जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, हम गुजरात में 24 घंटे, 365 दिन गांव को भी बिजली देते थे। वहां बिजली का जाना, यह पता ही नहीं है लोगों को। हमारे पास अतिरिक्‍त बिजली थी, इसके बावजूद भी, वह बिजली देश के काम नहीं आती थी। बिजली के कारखाने हमें बंद करने पड़ते थे। क्‍योंकि बिजली ले जाने के लिए जो ट्रांसमिशन लाइन चाहिए, वह नहीं थी। ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण बिजली नहीं जाती थी। एक बार दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री ने मुझे कहा, मोदी जी हमारे यहां चुनाव आ रहा है। दिल्‍ली में अंधेरा हमें परेशान करता है। आप कुछ बिजली दीजिए। मैंने कहा, में राजनीति बीच में नहीं लाता हूं, मैं प्रबंध करता हूं। मैं मीटिंग में था, आधे घंटे में मैंने उनको जवाब दिया, आपको जितनी बिजली चाहिए, आप ले सकते हैं। मैंने हमारे अफसरों से बात करना, उनके अफसरों से मिला देना, फोन पर सारा कारोबार चला। दूसरे दिन मैंने पूछा, सब हो गया, तो मुख्‍यमंत्री जी ने कहा- मोदी जी आप तो तैयार हैं पर बिजली लाने के लिए मेरे पास तार नहीं है। तार नहीं होने के कारण दिल्‍ली अंधेरे में रह गई। भाइयों-बहनों आज हमारे लिए यह बिजली के ट्रासंमिशन लाइन के द्वारा पूरे देश को जोड़ना आवश्‍यक है। जिस इलाके में बिजली नहीं है, वहां बिजली पहुंचाना आवश्‍यक है और वही महत्‍वपूर्ण काम उत्‍तर को पश्चिम से जोड़ना, पश्चिम को पूरब से जोड़ने का एक महत्‍वपूर्ण काम, जिसका आज उद्घाटन आपके सोलापुर की धरती से राष्‍ट्र को समर्पित किया जा रहा है। दक्षिण भारत, जहां बिजली की जरूरत है, महाराष्‍ट्र में जहां बिजली की जरूरत है, जिन राज्‍यों के पास अतिरिक्‍त बिजली है, उसको पहुंचाने के लिए एक ग्रिड काम आने वाली है। उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

भाइयो-बहनो, गुजरात में एक सरदार सरोवर डैम नर्मदा योजना, जिसकी भागीदारी महाराष्‍ट्र, गुजरात, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान चारों की है। लेकिन पिछले सात साल से दिल्‍ली सरकार की परमिशन नहीं मिलती है। नर्मदा डैम के काम को ऊचाई नहीं मिल रही थी और इसके कारण हमने हाइड्रो प्रोजेक्‍ट लगाया हुआ था, बिजली पैदा करने के लिए, पानी कम होने के कारण जितनी बिजली पैदा होनी चाहिए, नहीं होती थी। पूरी क्षमता का उपयोग करना है तो डैम का काम पूरा होना जरूरी था। लेकिन राजनीतिक कारणों से डैम की ऊंचाई बढ़ाने की हमें अनुमति नहीं मिलती थी। सात साल से दिल्‍ली से हमारा झगड़ा चलता रहता था। नई सरकार बनने के बाद दस दिन में ही ये परमिशन दे दी। डैम की हाइट बढ़ाने का काम चल रहा है, लेकिन इससे महाराष्‍ट्र का क्‍या। आपको जानकर के खुशी होगी, इसके कारण अब बिजली पूरी क्षमता से पैदा होगी। उसके कारण महाराष्‍ट्र को हर वर्ष 400 करोड़ रुपये की बिजली मुफ्त में मिलेगी। ये काम आज से 7 साल पहले हो सकता था। यह काम अगर हो गया होता तो आज पृथ्‍वीराज जी गर्व के साथ महाराष्‍ट्र में बिजली पहुंचा सकते थे, लेकिन नहीं हुआ।

भाइयो-बहनो, ऐसे कई रुके हुए काम अब मेरे करने के दिन आए हैं। आज पुणे-सोलापुर हाईवे का भी शिलान्‍यास हो रहा है। आगे चल कर के यह आपको कर्नाटक से भी जोड़ेगा। इसके कारण , नितिन जी अभी कह रहे थे, अमेरिका के प्रेसिडेंट का उल्‍लेख करते थे। दुनिया में जहां-जहां विकास हुआ है, आप अगर उसका अध्‍ययन करेंगे तो सबसे पहले उस देश ने हिम्‍मत करके और कठिनाइयां झेल कर के, दो काम और रह जाए तो रह जाए, उसकी चिंता किए बिना इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता दी। खास करके रोड नेटवर्क को प्राथमिकता दी। और रोड नेटवर्क को प्राथमिकता देने के कारण उन राष्‍ट्रों के विकास में बहुत बड़ी तेजी आई। साउथ कोरिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। साउथ कोरिया हमारे महाराष्‍ट्र से भी छोटा है। आर्थिक हालत बहुत खराब थी। लेकिन 30 वर्ष पहले वहां के शासकों ने पूरे साउथ कोरिया के बीच में से बहुत बड़ा रोड बना लिया। बहुत आंदोलन हुआ, लोगों ने विरोध किया सरकार का, कि इतने पैसे गंवा रहे हैं। खाने को पैसे नहीं हैं, गरीब देश है, भुखमरी है और आप रोड बना रहे हैं। सरकार बहुत मक्‍कमल थी, रोड बना दिया। देखते ही देखते रोड ने कोरिया की स्‍थति को बदल दिया और वो कोरिया, हिन्‍दुस्‍तान के बाद आजाद हुआ था, इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि आज से दस-पंद्रह साल पहले कोरिया के अंदर ओलंपिक गेम को आयोजित करने का सामर्थ्‍य दिखाया था। एक रोड से सारी सोच बदल गई।

भाइयो-बहनो, रोड बनाने में इतनी ताकत होती है। रोड, रास्‍ता सिर्फ आपको ले जाता है, ऐसा नहीं है, आपकी सोच को भी बदल देता है। और यह सही है संपत्ति से रोड नहीं बनते हैं, रोड बनाने से संपत्ति बनती है। और इसलिए जितने अच्‍छे मार्गों के माध्‍यम से हम देश के हर कोने को जोड़ेंगे, उतना अच्‍छा। अटल बिहारी वाजपेयी ने एक और बड़ा काम किया था, गोल्‍डन चर्तुभुज बनाया था। बाद में वह काम अटक गया। लेकिन पूरे देश में उस रास्‍ते के नेटवर्क ने एक नया विश्‍वास पैदा किया था। नितिन जी के नेतृत्‍व में हम उस काम को भी तेज गति से आगे बढ़ाने वाले हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना, जो वाजपेयी जी लाए थे, उस सड़क योजना के कारण गांव गांव को जोड़ने की सुविधा में गति आई थी। उसी प्रकार से रोड नेटवर्क हों, रेल नेटवर्क हो, उसे भी बढ़ाना है। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्राथमिकता देते हुए इस देश के कोने कोने में हर एक क्षेत्र को जोड़ना है। और जब इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बढ़ता है तो रोजगारी की संभावनाएं भी बहुत बढ़ती है। रोड बनाने में रोजगार मिलता है। सिर्फ ऐसा ही नहीं है, रोड में लगने वाला सामान जहां से आता है, उन कारखानों में रोगजार मिलता है। ट्रांसपोर्ट में भी रोजगार मिलता है। एक प्रकार से बेरोजगारी भगाने के लिए एक बड़ा माध्‍यम बन जाता है। और इसलिए ये रोड नेटवर्क, हम इन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का निर्माण भी स्‍ट्रेटेजिकली महत्‍वपूर्ण करने वाले हैं।

ऐसे नहीं, एक तरफ तो हम टूरिज्‍म बढ़ाने की बात करें लेकिन रास्‍ते वाला जो डिपार्टमेंट है, उसका कोई कंट्रीव्‍यूशन ही नहीं हो तो टूरिज्‍म कैसे बढ़ेगा। अगर टूरिज्‍म बढ़ाने के लिए अच्‍छे रोड नेटवर्क की जरूरत है तो उसको प्राथमिकता दे कर के उस रोड नेटवर्क को पूरा किया जाएगा। देश, आज से 20-25 साल पहले रेल-रोड नेटवर्क से संतुष्‍ट हो जाता था। लेकिन देश 21 वीं सदी में सिर्फ रेल और रोड के माध्‍यम से संतुष्‍ट नहीं हो सकता। आज देश को हाईवेज भी चाहिए, आईवेज भी चाहिए। आईवेज का मेरा मतलब है इंफोरमेशन हाईवेज। इंफोरमेशन टेक्‍नोलोजी के माध्‍यम से, ब्राडबैंड कनेक्टिविटी के माध्‍यम से, इंटरनेट कनेक्टिविटी के माध्‍यम से गांव गांव जुड़ना चाहिए। नए युग की आवश्‍यकता है। गैस गिड चाहिए, वाटर ग्रिड चाहिए। बिजली की ग्रिड चाहिए। हर प्रकार से एक रूप का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का माडल आज समय की मांग है। और उसी की पूर्ति की दिशा में आज एक कदम जो उत्‍तर से दक्षिण को जोड़ने वाला है, महाराष्‍ट्र से कर्नाटक को जोड़ने वाला है। चाहे बिजली के माध्‍यम से हो, चाहे रोड नेटवर्क के माध्‍यम से हो, यह जोड़ने के अभियान के हिस्‍से के स्‍वरूप में आज मुझे सोलापुर आने का सौभाग्‍य मिला है। मैं आपके प्‍यार के लिए बहुत-बहुत आभारी हूं और मैं विश्‍वास करता हूं कि यह काम बहुत तेज गति से आगे बढ़ेगा और सोलापुर के विकास तथा इस क्षेत्र के विकास में, हिन्‍दुस्‍तान के दक्षिणी छोर में बिजली की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए यह सारे प्रयास सुखकर परिणाम देंगे।

इसी विश्‍वास के साथ आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM Modi
June 18, 2021
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One lakh youth will be trained under the initiative in 2-3 months: PM
6 customized courses launched from 111 centres in 26 states
Virus is present and possibility of mutation is there, we need to stay prepared: PM
Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM
The pandemic has tested the strength of every country, institution, society, family and person of the world: PM
People below 45 years of age will get the same treatment for vaccination as for people above 45 years of age from June 21st: PM
PM Lauds ASHA workers, ANM, Anganwadi and health workers deployed in the dispensaries in the villages

नमस्कार, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमान महेंद्र नाथ पांडे जी, आर के सिंह जी, अन्य सभी वरिष्ठ मंत्रीगण, इस कार्यक्रम में जुड़े सभी युवा साथी, प्रोफेशनल्स, अन्य महानुभाव और भाइयों और बहनों,

कोरोना के खिलाफ महायुद्ध में आज एक महत्वपूर्ण अभियान का अगला चरण प्रारंभ हो रहा है। कोरोना की पहली वेव के दौरान देश में हजारों प्रोफेशनल्स, स्किल डवलपमेंट अभियान से जुड़े। इस प्रयास ने देश को कोरोना से मुकाबला करने की बड़ी ताकत दी। अब कोरोना की दूसरी वेव के बाद जो अनुभव मिले हैं, वो अनुभव आज के इस कार्यक्रम का प्रमुख आधार बने हैं। कोरोना की दूसरी वेव में हम लोगों ने देखा कि कोरोना वायरस का बदलना और बार-बार बदलता स्वरूप किस तरह की चुनौतियां हमारे सामने ला सकता है। ये वायरस हमारे बीच अभी भी है और जब तक ये है, इसके म्यूटेट होने की संभावना भी बनी हुई है। इसलिए हर इलाज, हर सावधानी के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हमें देश की तैयारियों को और ज्यादा बढ़ाना होगा। इसी लक्ष्य के साथ आज देश में 1 लाख फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स तैयार करने का महाअभियान शुरु हो रहा है।

साथियों,

इस महामारी ने दुनिया के हर देश, हर संस्था, हर समाज, हर परिवार, हर इंसान के सामर्थ्य को, उनकी सीमाओं को बार-बार परखा है। वहीं, इस महामारी ने साइंस, सरकार, समाज, संस्था और व्यक्ति के रूप में भी हमें अपनी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए सतर्क भी किया है। पीपीई किट्स और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर कोविड केयर और ट्रीटमेंट से जुड़े मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का जो बड़ा नेटवर्क आज भारत में बना है, वो काम अब भी चल रहा है और वो इसी का परिणाम है। आज देश के दूर-सुदूर में अस्पतालों तक भी वेंटिलेटर्स, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स पहुंचाने का भी तेज गति से प्रयास किया जा रहा है। डेढ़ हजार से ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट्स बनाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है और हिन्दुस्तान के हर जिले में पहुंचने का एक भगीरथ प्रयास है। इन प्रयासों के बीच एक स्किल्ड मैनपावर का बड़ा पूल होना, उस पूल में नए लोग जुड़ते रहना, ये भी उतना ही जरूरी है। इसी को देखते हुए, कोरोना से लड़ रही वर्तमान फोर्स को सपोर्ट करने के लिए, देश में करीब 1 लाख युवाओं को ट्रेन करने का लक्ष्य रखा गया है। ये कोर्स दो-तीन महीने में ही पूरा हो जाएगा, इसलिए ये लोग तुरंत काम के लिए उपलब्ध भी हो जाएंगे और एक ट्रेन्ड सहायक के रूप में वर्तमान व्यवस्था को काफी कुछ सहायकता देंगे, उनका बोझ हल्का करेंगे। देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की मांग के आधार पर, देश के टॉप एक्सपर्ट्स ने क्रैश कोर्स डिजायन किया है। आज 6 नए कस्टमाइज़्ड कोर्स लॉन्च किए जा रहे हैं। नर्सिंग से जुड़ा सामान्य काम हो, होम केयर हो, क्रिटिकल केयर में मदद हो, सैंपल कलेक्शन हो, मेडिकल टेक्निशियन हों, नए-नए उपकरणों की ट्रेनिंग हो, इसके लिए युवाओं को तैयार किया जा रहा है। इसमें नए युवाओं की स्किलिंग भी होगी और जो पहले से इस प्रकार के काम में ट्रेन्ड हो चुके हैं, उनकी अप-स्किलिंग भी होगी। इस अभियान से, कोविड से लड़ रही हमारी हेल्थ सेक्टर की फ्रंटलाइन फोर्स को नई ऊर्जा भी मिलेगी और हमारे युवाओं रोजगार के नए अवसर के लिए उनके लिए सुविधा भी बनेगी।

साथियों,

Skill, Re-skill और Up-Skill, ये मंत्र कितना महत्वपूर्ण है, ये कोरोना काल ने फिर सिद्ध किया है। हेल्थ सेक्टर के लोग Skilled तो थे ही, उन्होंने कोरोना से निपटने के लिए बहुत कुछ नया सीखा भी। यानि एक तरह से उन्होंने खुद को Re-skill किया। इसके साथ ही, उनमें जो स्किल पहले से थी, उसका भी उन्होंने विस्तार किया। बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्किल को अपग्रेड या वैल्यू एडिशन करना, ये Up-Skilling है, और समय की यही मांग है और जिस गति से टेक्नोलॉजी जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर रही है तब लगातार dynamic व्यवस्था Up-Skilling की अनिवार्य हो गई है। Skill, Re-skill और Up-Skill, के इसी महत्व को समझते हुए ही देश में Skill India Mission शुरु किया गया था। पहली बार अलग से कौशल विकास मंत्रालय बनाना हो, देशभर में प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र खोलना हो, ITI's की संख्या बढ़ाना हो, उनमें लाखों नई सीट्स जोड़ना हो, इस पर लगातार काम किया गया है। आज स्किल इंडिया मिशन हर साल लाखों युवाओं को आज की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग देने में बहुत बड़ी मदद कर रहा है। इस बात की देश में बहुत चर्चा नहीं हो पाई, कि स्किल डवलपमेंट के इस अभियान ने, कोरोना के इस समय में देश को कितनी बड़ी ताकत दी। बीते साल जब से कोरोना की चुनौती हमारे सामने आई है, तब से ही कौशल विकास मंत्रालय ने देशभर के लाखों हेल्थ वर्कर्स को ट्रेन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Demand Driven Skill Sets तैयार करने की जिस भावना के साथ इस मंत्रालय को बनाया गया था, उस पर आज और तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

हमारी जनसंख्या को देखते हुए, हेल्थ सेक्टर में डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिक्स से जुड़ी जो विशेष सेवाएं हैं, उनका विस्तार करते रहना उतना ही आवश्यक है। इसे लेकर भी पिछले कुछ वर्षों में एक फोकस्ड अप्रोच के साथ काम किया गया है। बीते 7 साल में नए AIIMS, नए मेडिकल कॉलेज और नए नर्सिंग कॉलेज के निर्माण पर बहुत ज्यादा बल दिया गया। इनमें से अधिकांश ने काम करना शुरू भी कर दिया है। इसी तरह, मेडिकल एजुकेशन और इससे जुड़े संस्थानों में रिफॉर्म्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज जिस गति से, जिस गंभीरता से हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करने पर काम चल रहा है, वो अभूतपूर्व है।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम में, मैं हमारे हेल्थ सेक्टर के एक बहुत मजबूत स्तंभ की चर्चा भी जरूर करना चाहता हूं। अक्सर, हमारे इन साथियों की चर्चा छूट जाती है। ये साथी हैं- हमारे आशा-एनम-आंगनवाड़ी और गांव-गांव में डिस्पेंसरियों में तैनात हमारे स्वास्थ्य कर्मी। हमारे ये साथी संक्रमण को रोकने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान तक में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम की स्थितियां, भौगौलिक परिस्थिति कितनी भी विपरीत हों, ये साथी एक-एक देशवासी की सुरक्षा के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। गांवों में संक्रमण के फैलाव को रोकने में, दूर-सुदूर के क्षेत्रों में, पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान को सफलता पूर्वक चलाने में हमारे इन साथियों ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। 21 जून से जो देश में टीकाकरण अभियान का विस्तार हो रहा है, उसे भी हमारे ये सारे साथी बहुत ताकत दे रहे हैं, बहुत ऊर्जा दे रहे हैं। मैं आज सार्वजनिक रूप से इनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं, इन हमारी सभी साथियों की सराहना करता हूं।

साथियों,

21 जून से जो टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है, उससे जुड़ी अनेक गाइडलाइंस जारी की गई हैं। अब 18 साल से ऊपर के साथियों को वही सुविधा मिलेगी, जो अभी तक 45 साल से ऊपर के हमारे महानुभावों को मिल रही थी। केंद्र सरकार, हर देशवासी को टीका लगाने के लिए, 'मुफ्त' टीका लगाने के लिए, प्रतिबद्ध है। हमें कोरोना प्रोटोकॉल का भी पूरा ध्यान रखना है। मास्क और दो गज़ की दूरी, ये बहुत ज़रूरी है। आखिर में, मैं ये क्रैश कोर्स करने वाले सभी युवाओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मुझे विश्वास है, आपकी नई स्किल्स, देशवासियों का जीवन बचाने में लगातार काम आएगी और आपको भी अपने जीवन का एक नया प्रवेश एक बहुत ही संतोष देगा क्योंकि आप जब पहली बार रोजगार के लिए जीवन की शुरूआत कर रहे थे तब आप मानव जीवन की रक्षा में अपने आप को जोड़ रहे थे। लोगों की जिन्दगी बचाने के लिए जुड़ रहे थे। पिछले डेढ़ साल से रात-दिन काम कर रहे हमारे डॉक्टर, हमारी नर्सिस इतना बोझ उन्होंने झेला है, आपके आने से उनको मदद मिलने वाली है। उनको एक नई ताकत मिलने वाली है। इसलिए ये कोर्स अपने आप में आपकी जिन्दगी में एक नया अवसर लेकर के आ रहा है। मानवता की सेवा का लोक कल्याण का एक विशेष अवसर आपको उपलब्ध हो रहा है। इस पवित्र कार्य के लिए, मानव सेवा के कार्य के लिए ईश्वर आपको बहुत शक्ति दे। आप जल्द से जल्द इस कोर्स की हर बारीकी को सीखें। आपने आप को उत्तम व्यक्ति बनाने का प्रयास करें। आपके पास वो स्किल हो जो हर किसी की जिन्दगी बचाने के काम आए। इसके लिए मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !