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Bihar must be free from unemployment and Goonda Raaj: PM
Bihar cannot go back to the era of loot and Jungle Raaj, says PM Modi
PM Modi urges people of Bihar to vote wisely and elect a stable BJP Government

भारत माता की जय

कुछ लोग दूसरी मंजिल पर हैं, कुछ लोग तीसरी मंजिल पर हैं, कोई गिर जाएगा तो मैं क्या जवाब दूंगा भैया। एक बार नई सरकार बनने दो आप और नई उंचाईयों पर पहुँचने वाले हो। विश्वास रखिये लेकिन अभी कम-से-कम नीचे उतर जाईये। मुझे चिंता रहेगी कुछ हो गया तो मैं बहुत दुखी हो जाऊंगा।

मंच पर विराजमान केंद्र सरकार में मेरे साथी, श्रीमान अनंत कुमार जी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, श्रीमान मंगल पांडेय जी, राज्य के पूर्व उप-मुख्यमंत्री, श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, विधानसभा के नेता, श्री नंद किशोर यादव जी, भाजपा के प्रभारी श्री भूपेन्द्र यादव जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी, श्रीमान राधामोहन सिंह जी, श्री रविशंकर प्रसाद जी, श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी, श्रीमान राजीव प्रताप रूडी जी, श्रीमान गिरिराज जी, श्रीमान राम विलास पासवान जी, और हमारे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जिनका चेहरा सदाय हँसता रहता है, ऐसे हमारे जीतन राम मांझी जी, मेरे साथी, श्रीमान उपेन्द्र कुशवाहा जी, हम सबके मार्गदर्शक, हमारे सबसे पुराने वरिष्ठ नेता, डॉ. सी पी ठाकुर जी, हमारे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, श्रीमान गोपाल नारायण जी, श्रीमान शकुनी चौधरी जी, सांसद श्री अरुण कुमार जी, पूर्व सांसद श्रीमान एम के सिंह, राज्य के पूर्व मंत्री डॉ. प्रेम कुमार जी। बिहार के कोना कोना से आईल हमार भाई और बहन लोग, तोहरा सबके शत शत प्रणाम।

जब मेरे से यहाँ इस कार्यक्रम के लिए समय माँगा गया, मैं कल्पना नहीं कर सकता था कि ऐसा हुजूम मुझे देखने को मिलेगा। जहाँ भी मेरी नज़र पहुँच रही है, माथे ही माथे नज़र आ रहे हैं और सबसे बड़ी बात मुझे जो आपका ज़ज्बा नज़र आ रहा है। सारे पॉलिटिकल पंडित ये एक कार्यक्रम देख लें नतीजा साफ दिखता है अगली सरकार किसकी बनने वाली है। भाईयों-बहनों, जब हम पहले सोशल मीडिया में कभी ट्वीट करते थे तो यहाँ के एक नेता बड़ा मज़ाक उड़ाते थे और वो कहते थे, चहकते हैं, चहकते हैं, और ये चहकना, बड़ा मखौल उड़ाते थे। आज उन्होंने भी चहकने का रास्ता पसंद कर लिया और आज जब मैं उतरा तो उन्होंने ट्वीट किया था कि 14 महीने के बाद आप बिहार आ रहे हैं, आपका स्वागत है। मुख्यमंत्री जी, स्वागत के लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ। वक्त कैसे बदलता है और बदले हुए वक़्त का अंजाम कैसा होता है। वो भी एक वक़्त था, वो कहा करते थे कि हमारे पास एक मोदी है, दूसरे मोदी की क्या जरुरत है। बिहार में आपको आने की क्या आवश्यकता है। आप बिहार मत आईये और आज देखिये, अपनों का विरह कितना परेशान करता है अपनों की दूरी कैसी बेचैन बनाती है। पिछले दस साल के जो प्रधानमंत्री थे, वो दस साल में एक बार हवाई निरीक्षण करने आये थे और मेरा 14 महीने का विरह भी यहाँ के मुख्यमंत्री को परेशान कर रहा है, दुखी कर रहा है। एक-एक दिन कितना भारी गया होगा उनका। अपनों से जब इतना प्यार होता है, इतना लगाव होता है तो उनकी दूरी मुश्किल ही करती है। लेकिन आप चिंता मत कीजिये, मैं अब आ गया हूँ आपको अब ज्यादा विरह झेलना नहीं पड़ेगा।

भाईयों-बहनों, मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, आप जवाब दोगे, आपको लगता है बिहार में बदलाव होना चाहिए? हालात बदलने चाहिए? स्थिति बदलनी चाहिए? अंधेरे से उजाला होना चाहिए? बेरोजगारी से रोजगारी आनी चाहिए? गुंडागर्दी से मुक्ति चाहिए? सुख-शांति की जिंदगी चाहिए? भाईयों-बहनों, अगर ये चाहिए तो मुझे सेवा करने का अवसर दीजिए। मुझे आपकी सेवा करने का मौका दीजिए और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि देश की आजादी से बिहार के लोगों ने जो सपने सजोये हैं, मैं 60 महीने के भीतर आपको पूरे करके दूंगा। मैं आपको वादा करता हूँ हम जिम्मेवारी से भागने वाले लोग नहीं हैं, हम जिम्मेवारियों को लेने वाले लोग हैं। मैं कभी-कभार समझ सकता हूँ कि एकाध व्यक्ति के प्रति हमारी राजी-नाराजी हो, मैं यह भी समझ सकता हूँ कि किसी का चेहरा हमें पसंद न आता हो, मैं ये भी समझता हूँ कि हमारे राजनीतिक भविष्य में शायद कहीं टकराव नज़र आता हो, लेकिन भाई इतना मैं बुरा था तो एक कमरे में आकर के एक चांटा मर देते, गला घोंट देते। आपने एक व्यक्ति के प्रति गुस्से में आकर के पूरे बिहार की विकास यात्रा का गला घोंट दिया। क्या ये लोकतंत्र होता है? क्या लोकतंत्र के ये तौर-तरीके होते हैं? मैं समझता हूँ कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, राजी-नाराजी हो सकती है। अरे गुस्सा निकालने के लिए आकर के मेरा गला भी घोंट देते लेकिन मुझे दुःख इस बात का नहीं है कि आपने हमारे साथ क्या किया। मुझे दुःख इस बात का है कि आपने बिहार की जनता के साथ क्या किया।

यहाँ के लोग जंगलराज से मुक्ति के लिए आपके पीछे खड़े हो गए, और आज फिर से आप बिहार को उसी जंगलराज की ओर घसीट रहे हो। आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, क्या बिहार में वो जंगलराज के दिन दोबारा चाहिए? वो मौत का खेल दोबारा चाहिए? ये गुंडागर्दी दोबारा चाहिए? ये लूट-खसोट चाहिए दोबारा? मेरे बिहार के भाईयों-बहनों को इस हालात में छोड़ा नहीं जा सकता और इसलिए भाईयों-बहनों, ये चुनाव किसकी सरकार बने, किसकी न बने, इसके लिए नहीं है। ये चुनाव बिहार के नौजवानों का भविष्य तैयार करने के लिए है, ये चुनाव बिहार के किसानों का भाग्य बदलने के लिए है, ये चुनाव बिहार की माताओं-बहनों की सुरक्षा के लिए है और इसलिए भाईयों-बहनों, विकास के रास्ते पर गए बिना बिहार का भला नहीं होगा। और इसलिए मैं आज आग्रह करने आया हूँ कि आप आईये, अपने हर किसी को आजमा लिया है, हर प्रकार के मॉडल आप देख चुके हो, एक बार हमें भी आजमा कर के देखो। एक बार हमारे एनडीए के मेरे साथियों को बिहार की जनता का सेवा करने का अवसर दीजिए। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ आज देखिये, हमारी दिल्ली सरकार का जरा लेखा-जोखा लीजिये। मैं नहीं जानता हूँ कि यहाँ के पॉलिटिकल पंडितों ने कभी हिसाब लगाया है या नहीं। दिल्ली में मोदी की सरकार में सबसे ज्यादा मंत्री, सबसे महत्वपूर्ण मंत्री, सबसे महत्वपूर्ण डिपार्टमेंट अगर किसी के पास है तो मेरे इन बिहार के नेताओं के पास है। एक प्रकार से बिहार के नेता आज पूरे हिंदुस्तान को चला रहे हैं। ये ताकत बिहार को कहाँ से कहाँ ले जा सकती है, इसका आप अंदाज कर सकते हैं।

भाईयों-बहनों, आपने मुझे पांच साल के लिए चुनकर के भेजा है और बिहार ने तो भारी समर्थन किया है। मैं बिहार की जनता को शत-शत वंदन करता हूँ, आपने मुझे जो समर्थन दिया है। मुझे बताईये, जो लोग यह कहते रहे हैं कि हम मोदी को बिहार में घुसने नहीं देंगे, हम मोदी को बिहार आने नहीं देंगे, हमें मोदी की बिहार में जरुरत नहीं है, अगर ऐसे लोग सरकार बनाएंगे और केंद्र से कोई नाता ही नहीं रखेंगे तो बिहार का भला होगा क्या? क्या इस देश में एक सरकार दूसरी सरकार से लड़ती रहे? इससे किसी राज्य का भला होगा क्या? ये लड़ाई वाली सरकारें चाहिए या कंधे-से-कंधा मिलाकर चलने वाली सरकार चाहिए? भाईयों-बहनों, मैं दिल्ली में बैठकर के, जो भी पूरे देशभर में संसाधन है, एक बार सेवा का अवसर दीजिए आपके काम आते हैं कि नहीं आते, आप देख लीजिये।

मैं तो यहाँ हैरान हूँ मेरा जन्म गुजरात की धरती पर हुआ था। द्वारकाधीश गुजरात में है, भगवान श्रीकृष्ण गुजरात के लोगों के आराध्य हैं। यदुवंश की उत्तम परंपरा को निभाने का काम गुजरात की धरती पर सदियों से होता आया है लेकिन हम जिस कृष्ण के पुजारी हैं, मैं जरा पूछना चाहता हूँ, मुझे श्रीकृष्ण की एक बात बराबर याद रहती है जब वो बालक थे और कालीनाग के कारण लोग परेशान थे तो बालक कृष्ण ने ताकत दिखाकर के कालीनाग का शिरच्छेद कर दिया था। कालीनाग को ख़त्म किया था कि नहीं किया था और आज यदुवंश की बातें करने वाले लोग रो रहे हैं कि उन्हें जहर पीना पड़ रहा है। अरे कृष्ण का वंशज जहर पीता नहीं, बल्कि कालीनाग के वंश को ही ख़त्म कर देता है। यही तो उसकी ताकत होती है और आपने तो जहर पीया क्योंकि आपका स्वार्थ है। अपने बेटे-बेटियों के लिए आपको कुछ इंतजाम करना है लेकिन आपने सभी यदुवंशियों को जहर पीने के लिए मजबूर क्यों किया? उनको जहर पीने के लिए मजबूर क्यों किया? क्या गुनाह है उनका? और इसलिए मैं तो हैरान हूँ, अख़बारों में पढ़ते हैं, यहाँ पर क्या चर्चा चल रही है, यहाँ के किसानों का भला होगा कि नहीं होगा, चर्चा नहीं हो रही है; नौजवानों को रोजगार मिलेगा कि नहीं मिलेगा, चर्चा नहीं हो रही है; गुंडागर्दी खत्म होगी कि नहीं होगी चर्चा नहीं हो रही है; उद्योग-कारखाने लगेंगे कि नहीं लगेंगे, चर्चा नहीं हो रही है; गाँव में बिजली आएगी कि नहीं आएगी, चर्चा नहीं हो रही है; किसानों को पानी मिलेगा कि नहीं मिलेगा, चर्चा नहीं हो रही है। चर्चा क्या हो रही है, कौन सांप है, कौन सांप नहीं है, कौन जहर पीता है, कौन जहर पिलाता है। अरे भाई ये तुम दोनों तय कर लो कि सांप कौन है, जहर कौन है, कौन जहर पिलाता है, कौन जहर पीता है। आप दोनों का अंदरूनी मामला है एक कमरे में बैठकर के तय कर लो। बिहार की जनता को जहर पीने के लिए मजबूर मत करो। ये आपको अंदरूनी मामला है बिहार की जनता को तो पीने का पानी चाहिए। बिहार के नौजवान को रोजगार चाहिए। बिहार में उद्योगों का विकास चाहिए। बिहार में सड़कें चाहिए।

भाईयों-बहनों, बिहार में चुनाव तो अब आया है। ये पिछले चुनाव में जब वोट लेने निकले थे, अभी राम विलास जी बता रहे थे, उन्होंने अपने भाषण में भी कहा। उन्होंने आपको कहा था कि 2015 में अगर मैं आपको बिजली न पहुंचाऊं तो मैं वोट मांगने के लिए नहीं आऊंगा ऐसा कहा था? याद करो कहा था? बिजली नहीं दूंगा तो वोट नहीं मांगूंगा, ऐसा कहा था? उन्होंने कहा था ना? बिजली आई? बिजली आई? नहीं आई न, वो वोट मांगने आये कि नहीं आये? आपका भरोसा तोड़ा कि नहीं तोड़ा? आपकी पीठ में छूरा भोंका कि नहीं भोंका? अरे हमारी छोडो, आपकी पीठ में छूरा भोंकना जिन लोगों के कारनामे रहे हैं, ऐसे लोगों पर दोबारा भरोसा नहीं किया जा सकता। और इसलिए भाईयों-बहनों, मैं आज आपसे आग्रह करने आया हूँ, बिहार का भाग्य बदलने के लिए। बिहार के पास न सिर्फ़ बिहार का भाग्य बदलने का बल्कि पूरे हिंदुस्तान का भाग्य बदलने की ताकत है। इतने प्राकृतिक संसाधन हैं, इतने उत्तम प्रकार का मानव बल है, इतनी महान शक्ति का स्त्रोत है। जो सदियों पहले पूरा देश जिस धरती के लिए गर्व करता था, उस धरती के संतानों में आज भी वो ताकत है हिंदुस्तान को गर्व दिलाने की और इसे मुझे पुनः वापस लाना है और इसलिए मैं आपके पास आया हूँ।

भाईयों-बहनों, ये सब परेशानियां ज्यादा-से-ज्यादा 100 दिन हैं। 100 दिन के बाद बिहार की जनता इनकी छुट्टी कर देगी। बिहार की जनता अब इस प्रकार के लोगों को कभी स्वीकार नहीं करेगी। मैं तो हैरान हूँ। एक बार मैं पटना आया था। हमारी पार्टी की कार्यसमिति की मीटिंग थी और यहाँ के मुख्यमंत्री ने हमको खाने पर बुलाया था। अब हमारी थाली उन्होंने छीन ली। भोजन पर बुला कर के कभी कोई थाली छीन लेता है क्या? ये लालू जी कह रहे हैं, मैं आज जहर पी रहा हूँ, मैंने तो उस दिन भी जहर पीया था और तब मेरे मन को जरा चोट पहुंची थी। क्या राजनीति में इतनी छुआछूत? सार्वजनिक जीवन के ये संस्कार कि टेबल पर परोसी हुई थाली खींच लेना, मेरे मन को बड़ी चोट पहुंची थी, मैंने कभी बोला नहीं न ही मैंने कभी मन में इसका मलाल रखा, चलो ठीक है भाई लेकिन जब जीतन राम मांझी पर जुल्म हुआ तो मैं बेचैन हो गया। मुझे लगा कि अरे मोदी की क्या औकाद है, उसकी तो थाली खींच ली, एक चाय वाले के बेटे की थाली खींच लें, एक गरीब के बेटे की थाली खींच लें लेकिन एक महादलित की तो सारी की सारी पूँजी ले ली, सारा पुण्य खींच कर के ले लिया। भाईयों और बहनों, तब मुझे लगा कि शायद डीएनए में ही कुछ गड़बड़ है क्योंकि लोकतंत्र का डीएनए ऐसा नहीं होता है। लोकतंत्र का डीएनए अपने विरोधियों को भी आदर और सत्कार देने का होता है लेकिन इन्होंने जो लोकतंत्र सीखा और चलाया है, उसमें जॉर्ज फ़र्नान्डिस का क्या हुआ? इसी धरती से जुड़े थे, उनके साथ क्या किया गया? सुशील मोदी जो कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे उनके साथ क्या किया? ये सारे नेता जो कभी न कभी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले, उनके साथ क्या किया? क्या आप अब भी लोकतंत्र के इस डीएनए को नहीं समझ पाएंगे क्या? क्या ऐसे लोगों को माफ़ करेंगे क्या?

भाईयों-बहनों, और इसलिए आज मैं आग्रह से कहने आया हूँ कि बिहार को हम ऐसे तत्वों के भरोसे नहीं छोड़ सकते। बिहार में दोबारा जंगलराज नहीं आने देंगे ये बिहार की जनता को शपथ लेनी चाहिए। आरजेडी का पूरा अर्थ मालूम है क्या? आरजेडी का पूरा अर्थ मालूम है क्या? आरजेडी का पूरा अर्थ होता है – रोजाना जंगलराज का डर, आरजेडी का मतलब होता है – रोजाना जंगलराज का डर। क्या ये रोजाना जंगलराज का डर चाहिए आपको? इस डर से मुक्ति चाहिए कि नहीं चाहिए? और इसलिए भाईयों-बहनों, ये चुनाव रोजाना जंगलराज के डर से मुक्ति का चुनाव है और इसलिए मैं यह कहने आया हूँ। आप देखिये पहले भी सरकारें हुईं, बिहार के साथ क्या हुआ है और हम बिहार के साथ क्या करेंगे। आज मैं अनेक कार्यक्रमों का उद्घाटन करके आया हूँ, शिलान्यास करके आया हूँ, हज़ारों-करोड़ की सौगात बिहार की धरती को देकर के आया हूँ।

भाईयों-बहनों, एक झूठ फैलाया जा रहा है तेरहवें फाइनेंस कमीशन और चौदहवें फाइनेंस कमीशन के संबंध में। 2010 से 2015, किसकी सरकार थी आपको मालूम है, उस सरकार ने बिहार को फाइनेंस कमीशन के माध्यम से जो पैसा दिया, वो था करीब-करीब ढेढ़ लाख करोड़। अब 2015 से 2020, हमारी बारी है, हमने क्या देना तय किया, पौने चार लाख करोड़ रुपये। पहले क्या मिलता था - ढेढ़ लाख करोड़, अब कितना मिलेगा - पौने चार लाख करोड़ रुपये। बिहार की जनता की झोली में पौने चार लाख करोड़ रुपये आएंगे। मुझे बताईये कि विकास के काम आगे बढ़ेंगे कि नहीं बढ़ेंगे? इन्होने वादा किया था कि बिजली नहीं तो वोट नहीं। उन्होंने तो कुछ किया नहीं और न कभी मेरे पास आकर के कहा। लेकिन मेरी सरकार बनने के बाद मैं जब विदेश यात्रा के लिए गया तो सबसे पहले मैं भूटान गया। बहुत छोटा देश है बिहार से तो बहुत कम आबादी है, बहुत कम पटना से भी कम। भूटान में जाकर कौन सा करार किया – भूटान के अन्दर भारत सरकार धन लगाएगी और पानी से पैदा होने वाली बिजली, जल विद्युत् के लिए करार किया, शिलान्यास किया और इस तरह भूटान में जो बिजली पैदा होगी, उसका सबसे ज्यादा हिस्सा ये मेरी बिहार की जनता को मिलेगा। ये निर्णय हमने किया और सरकार बनने के बाद मेरी पहली विदेश यात्रा में हमने यह काम किया। दूसरी विदेश यात्रा मेरी नेपाल की थी। नेपाल में भी जल विद्युत् का करार किया और वहां से बिजली बन करके कहाँ आएगी, इसी इलाके में आएगी। मुझे बताईये, आज इतना बड़ा बिहार, 300 मेगावाट बिजली के भी आप मालिक नहीं हो जबकि आपको 5000 मेगावाट बिजली की जरुरत है। इन सरकारों ने केवल 300 मेगावाट बिजली बनाई है, बाकि बिजली ये बना पाएंगे क्या? इतने सालों में जो बिजली नहीं दे पाए, वो अब दे पाएंगे क्या? मैं वादा करता हूँ, मेरा अनुभव है और मैंने करके दिखाया है। मैं बिहार में 24 घंटे घरों में बिजली देने का वादा करने आया हूँ। और बिजली आती है तो अकेली बिजली नहीं आती। बिजली आती है तो सिर्फ़ घर में रोशनी आती है, ऐसा नहीं है। बिजली आती है तो इसके साथ जीवन बदलना शुरू हो जाता है। अगर बच्चों को पढ़ाई करनी है, कंप्यूटर सीखना है तो बिजली आने के साथ वो भी शुरू हो जाता है। अरे मोबाइल फ़ोन चार्ज करना हो तो भी दूसरे गाँव जाना पड़ता है। जाना पड़ता है ना? मोबाइल फ़ोन कितना ही महंगा क्यों न लाए हो लेकिन आपके काम नहीं आता है क्योंकि पटना में बैठी हुई सरकार आपको बिजली नहीं देती है। मुझे बताईये, आपको भी अच्छे टीवी शो देखने का मन करता है कि नहीं करता है? सास भी कभी बहू थी, देखने को मन करता है कि नहीं करता है; टीवी पर अच्छे गाने सुनने का मन करता है कि नहीं करता है? अगर बिजली नहीं होगी तो कहाँ से देखोगे? इन्होने आपको पिछली सदी में धकेल करके रखा है। बिहार को उन्होंने आधुनिक नहीं बनने दिया है। बिजली आएगी, कारखाने लगेंगे। हम कारखाने लगाना चाहते हैं, हम उद्योग लगाना चाहते हैं।

आज बिहार का एक संतान, एक युवा मेरी सरकार में मंत्री है और मैंने उसे इतना बड़ा काम दिया है, स्किल डेवलपमेंट का। ये स्किल डेवलपमेंट बिहार का भाग्य बदलने वाला है, यह मैं आपको कहने आया हूँ। यहाँ उद्योग लगे, यहाँ के नौजवानों का स्किल डेवलपमेंट हो और यहाँ का जीवन बदल जाए, बिहार के नौजवान को बिहार में अपने बूढ़े मां-बाप को छोड़कर रोजी-रोटी कमाने कहीं जाना न पड़े, ऐसा बिहार बनाने का मेरा इरादा है और उसके लिए मुझे आपको आशीर्वाद चाहिए और वो आशीर्वाद लेने के लिए मैं आया हूँ। भाईयों-बहनों, आज वक़्त इतना बदल चुका है, रोड कनेक्टिविटी चाहिए, रेल कनेक्टिविटी चाहिए, एयर कनेक्टिविटी चाहिए। लेकिन अब जैसे-जैसे युग बदला है लोग कहते हैं हमें तो गैस ग्रिड चाहिए। चाहिए कि नहीं चाहिए? सूरत में मेरे यहाँ बिहार के लोग रहते हैं, वो जब यहाँ वापिस आते हैं तो यहाँ झगड़ा होता है जब वो कहते हैं कि जैसे यहाँ नलके में पानी आता है ना वैसे गुजरात में नलके में गैस आता है। यहाँ के लोग भरोसा नहीं करते। बिहार के लोग जब मुझे मिलते है तो बताते हैं कि मोदी जी मेरे गाँव के लोग तो मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि ऐसा भी होता है। बिहार के भाईयों-बहनों, वो दिन अब दूर नहीं है जब मैं पटना तक शुरुआत करूँगा और सैंकड़ों किमी गैस की लंबी पाइपलाइन लगा करके पटना में घरों में गैस देना प्रारंभ कर दूंगा और आगे बिहार के और स्थानों पर भी गैस जाएगा। रसोईघर में टैब चालू करते ही गैस आएगा। अब गैस का सिलिंडर लेने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। किसी दलाल को पैसा नहीं देना पड़ेगा। ये काम हम करते हैं और हजारों करोड़ रूपया लगता है इन कामों के लिए। आज मैं इसका शिलान्यास करके आया हूँ। काम शुरू हो जाएगा, बजट मंजूर कर दिया है। आपके यहाँ बरौनी में फ़र्टिलाइज़र का कारखाना बंद पड़ा हुआ है। यहाँ के नौजवानों को रोजगार चाहिए कि नहीं चाहिए? रोजगार मिलने चाहिए कि नहीं मिलने चाहिए? अगर कारखाने नहीं होंगे तो रोजगार कहाँ से मिलेगा और इसलिए हमने उस फ़र्टिलाइज़र का कारखाना, जो बंद पड़ा था, उसको चालू करने का निर्णय किया है ताकि यहाँ के किसानों को सस्ता खाद मिल जाए और यहाँ के नौजवान को रोजगार मिल जाए। और करीब 5 हजार करोड़ रूपया लगने वाला है, कोई कम पैसा नहीं है यह।

भाईयों-बहनों, कुछ लोग होते हैं जो वादे की खातिर वादे करते हैं, फिर वादे भुला देने की कोशिश करते हैं और इनको वादे की याद दिला दें तो मुकर जाने की आदत रहती है। जैसे आपको कहा गया था कि बिजली दूंगा तभी तो वोट मांगने आऊंगा। मैं भी चुनाव के समय यहाँ आया था। मैंने भी वादे किये थे लेकिन मैं वादे भुलाने के लिए नहीं आया हूँ। मैंने जो वादे किये थे, उन वादों को मैं खुद दोबारा याद करने यहाँ आया हूँ और मुकर जाने का तो सवाल ही नहीं उठता है। लोकसभा के चुनाव में पटना की धरती पर जब बम धमाके चल रहे थे, लोग मौत के घाट उतार दिये जा रहे थे, हिंसा के मातम से लोकतंत्र का गला दबोचा जा रहा था, उस समय बम धमाकों के बीच डरे बिना, विचलित हुए बिना, गुस्सा व्यक्त किये बिना, नाराजगी व्यक्त किये बिना पूरे शांत मन से उस सभा को मैंने संबोधित किया था। मौत अंगड़ाई ले रहा था उस मैदान में, लेकिन पूरी स्वस्थता के साथ मैंने बिहार की जनता से संवाद किया था और ऐसे संकट की घड़ी में भी मैंने कहा था कि दिल्ली में जब हमारी सरकार बनेगी और जब पूरी योजना बनने लगेगी, हम बिहार को 50 हजार करोड़ रुपये का पैकेज देंगे। आपको याद है, नहीं है न? मैंने ये वादा किया था और आज जब मैं बिहार की धरती पर आया हूँ तो मैं आपको मैं कहता हूँ, वो वादा मैं निभाऊंगा और सिर्फ़ 50 हजार करोड़ से बात बनेगी नहीं अब तो क्योंकि दिल्ली सरकार में बैठने के बाद बिहार को मैंने बारीकी से अध्ययन किया है। बिहार में क्या अच्छा हो सकता है, उस पर मैं सोचने लगा, बिहार के सभी नेताओं से बातचीत करने लगा, सुझाव लेने लगा और मेरे मन में धीरे-धीरे एक समृद्ध बिहार का चित्र बनने लगा, एक विकास वाले बिहार का चित्र खड़ा होने लगा। मुझे लगा ये अगर सपना मुझे पूरा करना है तो 50 हजार करोड़ से पूरा नहीं होगा और इसलिए मैंने उससे भी ज्यादा बड़ा पैकेज देने का विचार कर लिया है। लेकिन अभी पार्लियामेंट चालू है मेरे जुबान पर थोड़ा ताला लगा हुआ है। मैं बोल नहीं पा रहा हूँ लेकिन जैसे ही पार्लियामेंट समाप्त हो जाएगी, मैं आपको खुद आकर बता दूंगा कि कितना बड़ा पैकेज आपको मिलने वाला है।

आजकल कुछ ऐसे झूठ फैलाये जाते हैं, किसी ने हमसे माँगा नहीं था लेकिन जब बजट आया तो हमारा सपना था बिहार को आगे ले जाने का, बिहार में औद्योगिक क्रांति लाने का, बिहार के नौजवानों को रोजगार मिले, इसलिए हमने बजट के अन्दर एक योजना बनाई स्पेशल स्टेटस वाला राज्य, उसमें सबसे फायदा होने वाली बातें कौन सी हैं और हमने पाया कि स्पेशल स्टेटस में दो बड़ी महत्वपूर्ण बातें हैं। हमने तय किया कि जो सबसे बड़ा फायदा है, वो बिहार को मिलना चाहिए और इसलिए हमने बिहार के लिए, नए इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट करने के लिए 15% इन्वेस्टमेंट अलाउंस और 15% का एडिशनल डेप्रिसिएशन अलाउंस इसमें रिडक्शन की हमने घोषणा कर दी और मैं समझता हूँ कि हिंदुस्तान में स्पेशल केटेगरी का इतना बड़ा लाभ, बिहार अगर दम हो तो ले सकता है। कितना बड़ा लाभ मिलेगा, इसका आप अंदाज कर सकते हो। बिहार के नौजवानों को कितना रोजगार मिल सकता है, इसका आप अंदाज कर सकते हो।

भाईयों-बहनों, अभी तो ये शुरुआत है लेकिन मैं जो ये नजारा देख रहा हूँ इससे मुझे साफ लगता है कि जैसे लोकसभा में अपने मेरा साथ दिया, विधानसभा में उससे भी बढ़कर आप मेरा साथ दोगे। बिहार में इस बार आप निर्णय कर लीजिये कि दो-तिहाई बहुमत के साथ ही सरकार बनाएंगे। दो-तिहाई बहुमत के साथ ही एक मजबूत सरकार बनाईये। मुझे बताईये कि किसी ट्रेक्टर को एक इंजन लगा हो तो ज्यादा तेज चलता है कि दो इंजन लगा हो तो ज्यादा तेज चलता है? बताईये, कितने इंजन चाहिए? आपने दिल्ली में तो आपने इंजन दे दिया है अब बिहार में इंजन दे दीजिए। दो इंजन से बिहार की गाड़ी ऐसी तेज चलेगी भाईयों कि पिछले 60 सालों में जो नहीं हुआ, वो तेज गति से हमारी विकास की यात्रा आगे बढ़ेगी। इसी एक संकल्प के साथ मैं एक बार फिर एनडीए के मेरे सभी साथियों का हृदय से अभिनन्दन करता हूँ और बिहार का भाग्य बदलेगा इस विश्वास के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।                  

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गोव्यामधील कोविड प्रतिबंधक लसीकरण कार्यक्रमाचे लाभार्थी आणि आरोग्य कर्मचाऱ्यांशी संवाद कार्यक्रमात पंतप्रधानांनी केलेले भाषण
September 18, 2021
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सर्व प्रौढ लाभार्थ्यांना लसीची पहिली मात्रा देण्याचे उद्दिष्ट 100 टक्के पूर्ण केल्याबद्दल, पंतप्रधानांकडून गोव्याचे कौतूक
या प्रसंगानिमित्त पंतप्रधानांकडून मनोहर पर्रीकर यांच्या कार्याचेही स्मरण
‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास आणि सबका प्रयास’ या मूलमंत्रानुरूप गोवा सरकारचे उत्तम कार्य:पंतप्रधान
माझ्या आयुष्यात आजवर अनेक वाढदिवस आलेत, मात्र मी त्याविषयी अलिप्त असायचो, मात्र, काल, देशात अडीच कोटी लोकांचे लसीकरण होणे ही माझ्यासाठी अत्यंत हृद्य घटना : पंतप्रधान
काल प्रति तास 15 लाख लसी, एका मिनिटाला 26 हजारांहून अधिक लसी आणि दर सेकंदाला 425 लसी दिल्या गेल्या : पंतप्रधान
‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ संकल्पनेला मूर्त स्वरुप देणारे गोव्यातील प्रत्येक यश माझ्यासाठी अत्यंत आनंददायी : पंतप्रधान
गोवा केवळ देशातील एक राज्य नाही; तर ‘ब्रँड इंडिया’ चा एक आश्वासक चेहरा : पंतप्रधान

गोव्याचे उर्जावान आणि लोकप्रिय मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, केंद्रीय मंत्रिमंडळातील माझे सहकारी, गोव्याचे सुपुत्र श्रीपाद नाईक, केंद्र सरकारमधील मंत्रिमंडळातील माझ्या सहकारी डॉक्टर भारती पवार, गोव्याचे सर्व मंत्री, खासदार आणि आमदार, इतर लोकप्रतिनिधी, सर्व कोरोना योद्धे, बंधू आणि भगिनींनो!

गोंयच्या म्हजा मोगाल भावा बहिणींनो, तुमचे अभिनंदन.

तुम्हा सर्वांना श्री गणेश उत्सवाच्या अनेकानेक शुभेच्छा. उद्या अनंत चतुर्दशीच्या पवित्र प्रसंगी आपण सर्वच जण बाप्पांना निरोप देणार, हातात अनंत सूत्र देखील बांधणार. अनंत सूत्र म्हणजे जीवनात सुख-समृद्धी, दीर्घायुष्याच्या आशीर्वाद.

या पवित्र दिवसाच्या आधी गोव्याच्या लोकांनी आपल्या हातावर, बाहुवर जीवन रक्षण सूत्र म्हणजेच लस टोचण्याचे काम देखील पूर्ण केले आहे. गोव्याच्या प्रत्येक व्यक्तीने लसीची एक मात्रा घेतली आहे. कोरोना विरुद्धच्या लढाईमध्ये ही अतिशय मोठी गोष्ट आहे यासाठी गोव्याच्या सर्व सर्व जनतेचे खूप खूप अभिनंदन.

 

मित्रांनो,

गोवा एक असे राज्य आहे जिथे भारताच्या विविधतेचे दर्शन घडते. पूर्व आणि पश्चिम यांची संस्कृती, राहणीमान खाण्यापिण्याच्या सवयी ज्या ठिकाणी एकत्र पाहायला मिळतात येथे गणेश उत्सव देखील साजरा होतो, दिवाळी देखील उत्साहात साजरी केली जाते आणि नाताळच्या काळात तर गोव्याची चमक आणखीनच वाढते. हे करत असताना गोवा आपल्या परंपरा देखील जपत असते. एक भारत श्रेष्ठ भारत ही ही भावना सातत्याने बळकट करणार्‍या गोव्याच्या प्रत्येक कामगिरीबाबत केवळ मलाच नाही तर संपूर्ण देशाला आनंद आहे अभिमान आहे.

 

बंधू आणि भगिनींनो,

या महत्त्वाच्या प्रसंगी मला माझे मित्र आणि सच्चे कर्मयोगी स्वर्गवासी मनोहर पर्रिकर यांची आठवण होत आहे. 100 वर्षातल्या या सर्वात मोठ्या संकटाच्या काळात गोव्याने ज्याप्रकारे लढा दिला आहे अशावेळी पर्रिकर जर आपल्यात असते तर या कामगिरीचा, या सिद्धीचा त्यांना देखील अभिमान वाटला असता. जगातील सर्वात मोठ्या आणि सर्वात वेगवान लसीकरण मोहिमेमध्ये ‘सर्वांना लस डमोफत लस’ च्या यशामध्ये गोवा महत्त्वाची भूमिका बजावत आहे. गेल्या काही महिन्यांमध्ये मुसळधार पाऊस चक्रीवादळ पूर यांसारख्या नैसर्गिक आपत्तींना गोव्याने मोठ्या धैर्याने तोंड दिले आहे. या नैसर्गिक संकटांच्या काळात देखील प्रमोद सावंत यांच्या नेतृत्वाखाली हा लढा अतिशय शौर्याने लढला आहे. या नैसर्गिक आपत्तींच्या काळात कोरोना प्रतिबंधक लसीकरणाचा वेग कायम राखल्याबद्दल आरोग्य कर्मचारी टीम गोवा आणि प्रत्येकाचेच मी खूप खूप अभिनंदन करत आहे. या ठिकाणी अनेक सहकाऱ्यांनी मला त्यांचे जे अनुभव सांगितले त्यावरून हे अगदी स्पष्ट दिसत आहे की ही मोहीम किती खडतर होती दुथडी भरून वाहणाऱ्या नद्या ओलांडून, लसींना सुरक्षित राखून दूर दूर अंतरावर त्या पोहोचवण्यासाठी कर्तव्य भावनेची देखील गरज असते, समाजाविषयी जिव्हाळा आवश्यक असतो आणि अदम्य साहसाची देखील गरज असते. तुम्ही सर्व न थांबता, न थकता मानवतेची सेवा करत आहात. तुम्ही केलेली ही सेवा सदैव लक्षात राहील.

 

मित्रांनो,

‘सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास आणि सबका प्रयास’ या सर्व गोष्टी  कशा प्रकारे उत्तम परिणाम साध्य करतात हे गोव्याने, गोव्याच्या सरकारने, गोव्याच्या नागरिकांनी गोव्याच्या कोरोना योद्ध्यांनी, आघाडीवरील कर्मचाऱ्यांनी सिद्ध केले आहे. सामाजिक आणि भौगोलिक आव्हानांना तोंड देण्यासाठी ज्याप्रकारे गोव्याने समन्वय दाखवला आहे तो अतिशय प्रशंसनीय आहे.  प्रमोद जी तुमचे आणि तुमच्या टीमचे खूप खूप अभिनंदन.  राज्यात दूर दूर अंतरावर, कॅनाकॉना सब डिव्हिजन मध्येही राज्याप्रमाणेच वेगाने लसीकरण होणे याचाच दाखला देत आहे. गोव्याने आपल्या लसीकरणाचा वेग कमी होऊ दिला नाही याचा मला आनंद आहे यावेळी देखील आपण येथे  बोलत असताना राज्यात लसींच्या दुसऱ्या मात्रेसाठी लसीकरण उत्सव सुरू आहे आहे. अशा प्रामाणिक, एकनिष्ठ प्रयत्नांमुळेच संपूर्ण लसीकरण मोहिमेत, गोवा देशातील अग्रणी राज्य बनण्याच्या दिशेने वाटचाल करत आहे.  केवळ गोव्यातील लोकांनाच नाही तर बाहेरून येणाऱ्या पर्यटकांना, बाहेरून येणाऱ्या कामगारांना देखील लसी दिल्या जात आहेत, ही अतिशय आनंदाची बाब आहे.

 

मित्रांनो,

आज या प्रसंगी मी देशातील सर्व डॉक्टर, वैद्यकीय कर्मचारी, प्रशासन यामधील सर्व लोकांचे देखील अभिनंदन करत आहे. तुम्हा सर्वांच्या प्रयत्नांमुळेच काल भारताने एकाच दिवसात अडीच  कोटीपेक्षा जास्त लोकांचे लसीकरण करण्याचा विक्रम केला. जगातील मोठमोठे आणि समृद्ध आणि सामर्थ्यवान मानल्या जाणाऱ्या देशांना देखील हे करता आले नव्हते. काल आपण पाहत होतो की कशाप्रकारे देश टक लावून कोविड डॅशबोर्डकडे पाहात होता.  वाढणाऱ्या आकड्यांना पाहून उत्साह निर्माण होत होता.

काल दर तासाला 15 लाखापेक्षा जास्त लसीकरण झाले आहे, दर मिनिटाला 26 हजार पेक्षा जास्त लसीकरण झाले, दर सेकंदाला 400 पेक्षा जास्त लोकांना लस देण्यात आली. देशातल्या कानाकोपऱ्यात उभारण्यात आलेल्या एक लाखांपेक्षा जास्त लसीकरण केंद्रांवर लोकांना लसी देण्यात आल्या. भारताची आपली स्वतःची लस, लसीकरणासाठी इतके मोठे जाळे, कौशल्यप्राप्त मनुष्यबळ यातून भारताचे सामर्थ्य प्रदर्शित होत आहे.

 

मित्रांनो,

कालची जी तुमची कामगिरी आहे, ती संपूर्ण जगात केवळ लसीकरणाच्या आकड्यांवर आधारित नाही तर भारताकडे केवढे सामर्थ्य आहे याची ओळख जगाला होणार आहे. आणि यासाठी या कामगिरीचे गौरवगान करणे प्रत्येक भारतीयाचे कर्तव्य देखील आहे आणि आणि तो स्वभाव देखील असला पाहिजे. मित्रांनो, आज या ठिकाणी मला माझे मनोगत देखील व्यक्त करायचे आहे. वाढदिवस तर किती आले आणि किती गेले. मी नेहमीच या गोष्टींपासून अलिप्त राहिलो आहे, या गोष्टींपासून लांब राहिलो आहे. पण माझ्या संपूर्ण आयुष्यात कालचा दिवस माझ्यासाठी अतिशय भावना उचंबळून आणणारा दिवस होता वाढदिवस साजरा करण्याचे प्रकार वेगवेगळे असतात. लोक वेगवेगळ्या प्रकारे आपला वाढदिवस साजरा देखील करतात आणि जर साजरा करत असतील तर तर त्यात काही चुकीचे आहे असे मला वाटत नाही. पण तुम्हा सर्वांच्या प्रयत्नांमुळे कालचा दिवस माझ्यासाठी अतिशय विशेष दिवस ठरला. वैद्यकीय क्षेत्रातील जे लोक, गेल्या दीड-दोन वर्षांपासून दिवस-रात्र काम करत आहेत, आपल्या जीवाची पर्वा न करता कोरोनाशी लढण्यासाठी देशवासीयांची मदत करत आहेत. त्यांनी काल ज्याप्रकारे लसीकरणाचा विक्रम करून दाखवला आहे. ती अतिशय मोठी गोष्ट आहे. प्रत्येकाने यामध्ये मोठ्या प्रमाणात सहकार्य केले आहे लोकांनी सेवाभावाने हे काम केले आहे. त्यांची करुणेची भावना, कर्तव्याची भावना यामुळेच अडीच कोटी मात्रा देणे शक्य झाले आणि मला असे वाटते की लसीकरणाची प्रत्येक मात्रा एक जीव वाचवण्यासाठी मदत करत असते. अडीच कोटी पेक्षा जास्त जास्त लोकांना इतके मोठे सुरक्षा कवच इतक्या कमी कालावधीत मिळणे, मनाला खूप मोठे समाधान देत आहे. वाढदिवस येतील आणि जातील पण कालचा दिवस माझ्या मनात कायम कोरला गेला आहे. अविस्मरणीय बनला आहे. यासाठी मी जितके आभार व्यक्त करेन ते कमी आहेत. मी मनापासून देशवासियांना नमन करत आहे.सर्वांचे आभार व्यक्त करत आहे.

 

बंधू आणि भगिनींनो,

भारताचे लसीकरण अभियान, केवळ आरोग्याचे सुरक्षा  कवच नाही तर एक प्रकारे उपजीविकेच्या सुरक्षेचे देखील  कवच आहे. आता आपण पाहिले तर हिमाचलमध्ये  लसीच्या पहिल्या मात्रेचे 100 टक्के लसीकरण पूर्ण झाले आहे,  गोवा इथे ही 100 टक्के झाले आहे, चंदीगड आणि लक्षद्वीपमध्येही सर्व पात्र व्यक्तींना पहिली मात्रा देण्यात आली आहे. सिक्कीममध्ये देखील लवकरच 100 टक्के  लसीकरणाचा टप्पा पार होणार आहे. अंदमान निकोबार, केरळ, लडाख, उत्तराखंड, दादरा आणि नगर हवेली देखील यापासून खूप दूर नाहीत.

 

मित्रांनो,

याबाबत खूप चर्चा झाली नाही, मात्र भारताने आपल्या लसीकरण अभियानात पर्यटन क्षेत्राशी संबंधित राज्यांना खूप प्राधान्य दिले आहे. सुरुवातीला नाही सांगितले,  कारण त्यावरूनही राजकारण सुरु होते. मात्र आपली पर्यटन स्थळे लवकरात लवकर सुरु होणे हे खूप आवश्यक होते. आता उत्तराखंडमध्येही चारधाम यात्रा शक्य होईल.  या सर्व प्रयत्नांमध्ये गोव्यात 100 टक्के लसीकरण होणे ही  खूप विशेष बाब आहे.

पर्यटन क्षेत्राला पुरुज्जीवित करण्यात गोव्याची खूप महत्वपूर्ण भूमिका आहे.

तुम्हीच विचार करा, हॉटेल उद्योगातील लोक असतील, टॅक्सी चालक असतील, फेरीवाले असतील, दुकानदार असतील, जेव्हा या सर्वांचे  लसीकरण झाले असेल तेव्हा पर्यटक देखील मनात सुरक्षिततेची भावना घेऊन येतील. आता गोवा जगातील त्या निवडक आंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थळांमध्ये समाविष्ट झाला आहे जिथे लोकांना लसीचे सुरक्षा कवच मिळाले आहे.

 

मित्रांनो,

आगामी पर्यटन हंगामात इथे पूर्वीप्रमाणेच पर्यटन उपक्रम सुरु रहावेत , देश-विदेशातील  पर्यटकानी इथे आनंद लुटावा  ही आपणा सर्वांची इच्छा आहे. हे तेव्हाच शक्य आहे जेव्हा आपण  कोरोनाशी संबंधित सावधानतेच्या उपायांवर तेवढेच लक्ष देऊ जेवढे लसीकरणावर देत आहोत. कोरोना संसर्ग कमी झाला  आहे मात्र अजूनही आपण या विषाणूला कमी लेखता कामा नये. सुरक्षितता आणि स्वच्छतेवर इथे जेवढा भर दिला जाईल,  तेवढ्याच मोठ्या संख्येने पर्यटक इथे येतील.

 

मित्रांनो,

केंद्र सरकारने देखील अलिकडेच पर्यटकांना प्रोत्साहित करण्यासाठी अनेक पावले उचलली आहेत. भारतात येणाऱ्या पाच  लाख पर्यटकांना निःशुल्क व्हिसा देण्याचा निर्णय घेण्यात आला आहे. प्रवास आणि  पर्यटन क्षेत्रातील हितधारकाना सरकारी हमीसह 10 लाख रुपयांपर्यंतचे कर्ज दिले जात आहे. नोंदणीकृत पर्यटन गाईड म्हणून काम करणाऱ्यांना देखील एक  लाख         रुपयांपर्यंतचे कर्ज देण्याची व्यवस्था करण्यात आली आहे.  केंद्र सरकार यापुढेही देशाच्या पर्यटन क्षेत्राला वेगाने पुढे घेऊन जाण्यासाठी सहाय्यक असे प्रत्येक पाऊल उचलण्यासाठी वचनबद्ध आहे.

 

मित्रांनो,

गोव्याच्या पर्यटन क्षेत्राला आकर्षक बनवण्यासाठी, तिथले शेतकरी, मच्छिमार  आणि अन्य लोकांच्या सुविधेसाठी पायाभूत विकासाला डबल इंजिन सरकारच्या दुहेरी शक्तीची जोड मिळत आहे. विशेषतः कनेक्टिविटीशी संबंधित पायाभूत प्रकल्पांवर गोव्यात अभूतपूर्व काम होत आहे.  'मोपा' इथे  बनत असलेला ग्रीनफील्ड विमानतळ येत्या काही महिन्यात बांधून तयार होईल. या विमानतळाला राष्ट्रीय महामार्गाशी जोडण्यासाठी सुमारे 12 हजार कोटी रुपये खर्चून  6 पदरी  एक आधुनिक महामार्ग तयार केला जात आहे. केवळ राष्ट्रीय महामार्गाच्या बांधकामातच गेल्या काही वर्षात हजारो कोटी रुपयांची गुंतवणूक गोव्यात झाली आहे.

ही देखील आनंदाची बाब आहे की उत्तर गोव्याला दक्षिण गोव्याशी जोडण्यासाठी 'झुआरी ब्रिज' चे लोकार्पण पुढील काही महिन्यांमध्ये होणार आहे. जसे की तुम्ही जाणता, हा पूल पणजीला 'मडगाव' शी जोडतो. मला सांगण्यात आले आहे की  गोवा मुक्ति संग्रामाच्या अनोख्या गाथेचा  साक्षी 'अग्वाद' किल्ला देखील लवकरच लोकांसाठी पुन्हा खुला केला जाणार आहे.

 

बंधू आणि भगिनींनो,

गोव्याच्या विकासाचा जो वारसा  मनोहर पर्रिकर मागे  ठेवून गेले आहेत तो  माझे मित्र डॉ. प्रमोद जी आणि त्यांची  टीम समर्पित भावनेने पुढे नेत  आहेत. स्वातंत्र्याच्या अमृतकाळात जेव्हा  देश आत्मनिर्भरतेच्या नव्या संकल्पासह पुढे जात असताना गोव्यानेही स्वयंपूर्ण गोव्याचा संकल्प केला आहे. मला सांगण्यात आले आहे की आत्मनिर्भर भारत, स्वयंपूर्ण गोवा या संकल्पाअंतर्गत गोव्यात  50 हून अधिक सुट्या भागांच्या निर्मितीवर काम सुरु आहे. यावरून हे दिसून येते की  गोवा राष्ट्रीय उद्दिष्टे साध्य करण्यासाठी, युवकांसाठी रोजगाराच्या नव्या संधी निर्माण करण्यासाठी किती गांभीर्याने काम करत आहे.

 

मित्रांनो,

आज गोवा केवळ कोविड लसीकरणात अग्रेसर नाही तर विकासाच्या अनेक बाबतीत देशातील अव्वल राज्यांपैकी एक आहे. गोव्याचा जो शहरी आणि ग्रामीण भाग आहे, तो पूर्णपणे उघडयावरील शौचापासून मुक्त होत आहे. वीज आणि पाणी यांसारख्या पायाभूत सुविधांच्या बाबतीतही गोव्यात चांगले काम होत आहे.  गोवा हे देशातील असे  राज्य आहे जिथे शंभर टक्के विद्युतीकरण झाले आहे. प्रत्येक घरात नळाद्वारे पाण्याच्या बाबतीत तर गोव्याने कमालच  केली आहे. गोव्याच्या ग्रामीण भागात प्रत्येक घरात नळाद्वारे पाणीपुरवठा करण्याचा हा प्रयत्न प्रशंसनीय आहे. जल जीवन अभियानाअंतर्गत मागील 2 वर्षांत देशाने आतापर्यंत 5 कोटी कुटुंबांना पाईपद्वारे पाण्याची सुविधा उपलब्ध केली आहे. ज्याप्रकारे गोव्याने हे अभियान पुढे नेले आहे,  ते 'सुशासन' आणि  'राहण्यास सुलभ ' बाबत  गोवा सरकारची प्राथमिकता  स्पष्ट करते.

 

बंधू आणि भगिनींनो,

सुशासनाप्रती हीच वचनबद्धता कोरोना काळात गोवा सरकारने दाखवली आहे. विविध प्रकारची आव्हाने असूनही केंद्र सरकारने जी काही मदत गोव्यासाठी पाठवली, ती जलद गतीने, कुठल्याही भेदभावाशिवाय प्रत्येक लाभार्थीपर्यंत पोहचवण्याचे  काम गोव्याच्या टीमने केले आहे. प्रत्येक गरीब, प्रत्येक मच्छिमार बांधवापर्यंत मदत पोहचवण्यात कोणतीही कसर सोडण्यात आली    नाही. गेले अनेक महिने गोव्याच्या गरीब कुटुंबांना मोफत शिधा प्रामाणिकपणे पोहचवला जात आहे. मोफत गॅस सिलेंडर मिळाल्यामुळे गोव्याच्या अनेक भगिनींना कठीण काळात आधार मिळाला आहे.

गोव्याच्या शेतकरी कुटुंबांना  पीएम किसान सम्मान निधि मधून कोट्यवधी   रुपये थेट बँक खात्यात मिळाले आहेत.  कोरोना काळातच इथल्या छोट्या शेतकऱ्यांना  मिशन मोडवर  किसान क्रेडिट कार्ड मिळाली आहेत. एवढेच नाही, गोव्याचे  गुराखी आणि मच्छिमारांना प्रथमच मोठ्या संख्येने किसान क्रेडिट कार्ड  सुविधा मिळाली आहे. पीएम स्वनिधी योजनेंतर्गत देखील गोव्यात फेरीवाले आणि ठेल्यांच्या माध्यमातून व्यापार करणाऱ्याना जलद गतीने      कर्जपुरवठा करण्याचे काम सुरु आहे. या सर्व प्रयत्नांमुळे गोव्यातील लोकांना पुराच्या संकटादरम्यानही  खूप मदत मिळाली आहे.

 

बंधू आणि भगिनींनो,

गोवा अमर्याद संधी असलेला प्रदेश आहे. गोवा हे देशातील केवळ एक राज्य   नाही तर ब्रांड इंडियाची देखील एक सशक्त ओळख आहे. ही आपली सर्वांची जबाबदारी आहे की गोव्याच्या या भूमिकेचा आपण आणखी विस्तार करावा. गोव्यात  आज जी चांगली कामे होत आहेत, त्यात निरंतरता खूप  आवश्यक आहे. दीर्घ काळानंतर गोव्याला राजकीय स्थैर्य आणि सुशासनाचा लाभ मिळत आहे.

ही मालिका गोव्यातील लोक अशीच कायम राखतील या इच्छेसह तुम्हा सर्वांचे खूप-खूप अभिनंदन.  प्रमोद जी आणि त्यांच्या पूर्ण टीमचे अभिनंदन.

सगल्यांक देव बरें करूं

धन्यवाद !