NDA is dedicated to welfare of poor; our mantra is all round development of Bihar: PM #ParivatanRally
Don't let the 'Jungle Raj' & 'Jantar Mantar Raj' come into power, they will ruin Bihar: PM
Bihar's youth is extremely talented. They can do wonders: PM Modi #ParivatanRally
BIHAR stands for: Brilliant, Innovative, Hardworking, Action-oriented & Resourceful: PM Modi
Bihar needs NDA's engine of development to drive out the state of all the problems it faces today: PM
Elect NDA Govt with 2/3rd majority for Bihar's uninterrupted progress: PM Modi
Lack of proper educational institutes & other amenities a proof that 'Mahaswarthbandhan' has done nothing for Bihar: PM Modi
Bihar will touch skies of development because of its hardworking people: PM Modi

पावन मिथिला भूमि के नमन करै छी। मिथिला की ई धरती कविराज विद्यापति सन विद्वान भूमि छै यहाँ के मिथिला पेंटिंग विश्व भर में ख्याति प्राप्त कैलक। अहाँ सब के अपार स्नेह देखकर मन भाव-विभोर भे गेल। अहाँ सब के ह्रदय से अभिनंदन करै छी। मंच पर विराजमान एनडीए के सभी वरिष्ठ नेतागण और उम्मीदवार।

चुनाव में बेनीपट्टी से भाजपा के उम्मीदवार विनोद नारायण झा, खजौली से भाजपा के उम्मीदवार अरुण शंकर प्रसाद, मधुबनी से भाजपा के उम्मीदवार रामदेव महतो, राजनगर से भाजपा के उम्मीदवार रामप्रीत पासवान, जनजारपुर से भाजपा के उम्मीदवार श्री नीतीश मित्र, बुलपरा से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान राम सुंदर यादव जी, लोकहा से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान प्रमोद कुमार प्रियदर्शी, बाबू बरही से लोजपा के उम्मीदवार श्री विनोद कुमार सिंह, बिसफ़ी से रालोसपा के उम्मीदवार मनोज कुमार यादव, हरलाखी से रालोसपा के उम्मीदवार वसन कुमार, ये हैं जो बिहार का भाग्य बदलने के लिए एड़ी-चोटी का जोड़ लगाने वाले हैं।

इस सभा में यहाँ कर्पूरी गाँव की कुछ बहनों ने मुझे मेमोरेंडम भेजा है। अब देखिये, बिहार का हाल, गाँव के गरीब लोगों को बिहार सरकार में कोई सुनने को तैयार नहीं है, उनको प्रधानमंत्री के पास पहुंचना पड़ा, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है। उनकी शिकायत है कि सरकार उनको उनकी जमीन से हटाने पर तुली हुई है, कोई हमें रहने के लिए जगह दे, ये कहने के लिए यहाँ तक आये हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि 8 तारीख को भाजपा, एनडीए की सरकार बनेगी और यहाँ के मुलाज़िम ख़ुद आकर आपकी शिकायत सुनेंगे और आपकी समस्या का समाधान करेंगे। मुझे दुःख इस बात का है कि इस मेमोरेंडम में नीचे जिन लोगों ने अपनी वेदना प्रकट की है, ये 21वीं सदी का हिन्दुस्तान, बिहार जिसमें 20-30 साल की महिलाएं बैठी हैं, लेकिन किसी को भी हस्ताक्षर करना नहीं सिखाया। उनको अंगूठा करना सिखाया। लालू जी, नीतीश बाबू, ये चिट्ठा आपके कुकर्मों का सबूत है। मुझे ख़ुशी होती कि गरीब से गरीब मेरी माताएं-बहनें अपने हाथ से लिखकर मुझे चिट्ठी देते। उन्हें अंगूठा के निशान के माध्यम से अपनी वेदना प्रकट करनी पड़ रही है, इससे बुरा कोई हाल नहीं हो सकता।

भाईयों-बहनों, जिस धरती से नालंदा की गूँज उठती थी, जिस धरती पर दुनिया के लोग पढ़ाई के लिए आते थे, उस धरती पर आजाद हिन्दुस्तान में जन्म लेनी वाली हमारी माताएं-बहनें अपनी वेदना प्रकट करने के लिए अंगूठा के निशान लगाने के लिए मजबूर हैं। मैडम सोनिया जी, आपने 35 साल सरकार चलाई और आपने बिहार को ये दिया। लालू जी, नीतीश जी, आपने 25 साल सरकार चलाई और आपने बिहार को ये दिया। ये दस्तावेज़ आपकी विफ़लता, आपकी सरकार की समाज और गरीब के प्रति क्रिमिनल नेग्लिजिएन्स का सबूत है।

इस चुनाव में हम विकास का मुद्दा लेकर आए हैं मैं हैरान हूँ कि मीलों दूर लोग मुझे देख नहीं पाते होंगे, उसके बावजूद ऐसी धूप में लाखों लोग आशीर्वाद देने आये हैं। इससे बड़ा नसीब क्या हो सकता है। मैं आपको नमन करता हूँ और ये प्यार कभी मैं भूल नहीं सकता। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आप इस ताप में जो तपस्या कर रहे हैं, मैं उसे कभी बेकार नहीं होने दूंगा। मैं लोकसभा के चुनाव में भी आया था और उस समय भी यहीं पर मेरी सभा हुई थी लेकिन इतनी भीड़ नहीं आयी थी। आपका प्यार बढ़ता ही जा रहा है। लोकसभा चुनाव की मेरी रैलियों में 5-50 महिलाएं होती थीं लेकिन इस बार सभी रैलियों में हज़ारों महिलाओं को देखकर पता चलता है कि हवा का रूख किस तरफ़ है।

आज बिहार में चौथे चरण का मतदान चल रहा है। जो लोग पराजय से कांप रहे हैं, उन्हें दो-दो इंजन की ज़रुरत है। दो इंजन लगेंगे तब यह बिहार गड्ढ़े में से बाहर आएगा, एक इंजन पटना में एनडीए की सरकार और दूसरा इंजन दिल्ली में मेरी सरकार। मैं आपसे चाहता हूँ कि दिल्ली में तो आपने एक इंजन लगा दिया है, यहाँ भी आप एक इंजन बिठा दीजिए ताकि बिहार में एनडीए, भाजपा की सरकार बने जो बिहार को गड्ढ़े में से निकाल सके।

भाईयों-बहनों, मैं तहे दिल से बिहार का आदर करता हूँ क्योंकि मैं जब गुजरात में था या हिन्दुस्तान के कोने-कोने में पार्टी का काम करता था, तब भी जहाँ-जहाँ बिहार के लोग पहुंचे हैं, उस धरती को नंदनवन बना दिया है। आप मॉरिशस को देखिये, कहाँ से कहाँ पहुँच गया है, 150 साल पहले बिहार के लोग मजदूरी के लिए मॉरिशस गये और आज वहां की आन-बान-शान बिहार के लोगों की वजह से है। झारखंड भी तो बिहारियों की पहचान है और जैसे वहां भाजपा की सरकार बन गई, आज झारखंड चौथे नंबर पर है और ये बिहार वहीँ का वहीँ है क्योंकि यहाँ के नेता ऐसे कुंडली मार कर बैठे हैं कि बिहार को उठने ही नहीं दे रहे। ये नेता ही बिहार पर बोझ बन गए हैं और इन्होंने बिहार को तबाह कर दिया है। मेरा भरोसा बिहार के किसानों पर है, माताओं पर है, गरीबों पर है, मजदूरों पर है, विकास के लिए मेहनत करने वाले और पसीना बहाने वाले सभी भाईयों-बहनों पर है कि उनकी बदौलत बिहार आगे बढ़ने वाला है।

मेरे लिए बिहार का मतलब है, अंग्रेज़ी में स्पेलिंग को विस्तृत करें तो ‘बी’ से ब्रिलियंट, ‘आई’ से इनोवेटिव, ‘एच’ से हार्ड वर्किंग, ‘ए’ से एक्शन ओरिएंटेड और ‘आर’ से रिसॉर्सफुल। ये ताक़त है बिहार की और इसी ताक़त के भरोसे मैं बिहार को हिन्दुस्तान में नई ऊंचाईयों तक पहुँचाने का सपना देखता हूँ और उन सपनों को पूरा करने के लिए विकास का मंत्र लेकर आया हूँ।

जब मैं प्रधानमंत्री नहीं था तो एक बार हवाई सफ़र के दौरान एक सज्जन मेरे पास बैठे थे, वो मेरी तरफ़ देख रहे थे और मुझसे उन्होंने पूछा कि आप कोई अंगूठी या तावीज़ नहीं पहनते हो। मैंने कहा कि मैं जंतर-मंतर पर भरोसा नहीं करता। मैं लोकतंत्र पर भरोसा करता हूँ, किसी जंतर-मंतर पर नहीं। सवा सौ करोड़ देशवासी ही मेरे लिए सब कुछ हैं, मुझे और किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है। जिन्हें लोकतंत्र में श्रद्धा न हो, जिनके पास जनता-जनार्दन का विश्वास न हो, उनके लिए जंतर-मंतर के सिवा कोई चारा नहीं होता है। आपके परिवार में भी कभी कोई बीमार हो जाए, आप हर प्रकार की दवाई करवा ले, बड़े से बड़े डॉक्टर या दिल्ली के अच्छे से अच्छे अस्पताल में जाकर ईलाज करवा ले लेकिन बीमारी जब ठीक न हो तो परिवार वाले कितने भी पढ़े-लिखे क्यों हों, वो भी थक-हार कर किसी जंतर-मंतर वाले के पास चले जाते हैं। ये नीतीश जी भी ऐसे थक गए हैं, मन से ऐसे हार गए हैं, अब बचना मुश्किल है तो बाबा के पास चले जाते हैं। लोकतंत्र का मज़ाक बना दिया है।

आप बताईये कि आपके घर में बिजली न हो तो क्या जंतर-मंतर से बिजली आ जाएगी क्या? अगर पानी न हो तो क्या जंतर-मंतर से पानी आएगा क्या? अगर रोजगार न हो तो क्या जंतर-मंतर से रोजगार मिलेगा क्या? स्कूल में मास्टर जी न हो तो क्या जंतर-मंतर से मास्टर जी आ जाएंगे क्या? पहले बिहार ने जंगलराज झेला और क्या-क्या झेला, ये आपको अच्छे से पता है। यहाँ की महिलाएं गहने पहन कर बाहर नहीं जा सकती थी क्योंकि उन्हें लूट लिया जाता था। सरेआम अपहरण होता था, लूट चलती थी। पहले जंगलराज था और अब जंतर-मंतर का राज, ये दोनों जुड़वाँ भाई इकट्ठे हो गए। इन दोनों को इकठ्ठा मत होने दो, नहीं तो बिहार की बर्बादी के सिवा आपके नसीब में कुछ नहीं आएगा।

एक बात साफ़ है कि ये मधुबनी ज़िला हमारे अटल बिहारी वाजपेयी का सबसे प्रिय ज़िला है। उनका इस धरती पर इतना प्यार था जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते। वे स्वयं कविराज रहे हैं। ये मंडन मिश्र की धरती है जहाँ शंकराचार्य जी के साथ उनका संवाद हुआ। लोकतंत्र में संवाद की क्या ताक़त होती है, ये उनके संवाद ने दिखा दिया।

आज बिहार का हाल क्या है।।। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से बिहार हिन्दुस्तान में 29वें नंबर पर पड़ा है; शिक्षा की दृष्टि से बिहार हिन्दुस्तान में 29वें नंबर पर है; प्रति व्यक्ति विद्युत् की खपत में बिहार हिन्दुस्तान में 29वें नंबर पर पड़ा है; शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने की दृष्टि से बिहार हिन्दुस्तान में 32वें नंबर पर पड़ा है; ग्रामीण क्षेत्रों में टेली डेंसिटी के स्तर से बिहार हिन्दुस्तान में 28वें नंबर पर पड़ा है; रोजगार निर्माण की दृष्टि से बिहार हिन्दुस्तान में 20वें नंबर पर पड़ा है; मैं क्या-क्या गिनाऊं, झारखंड आप ही का हिस्सा था और अलग होने के बाद इतना आगे निकाल गया। अभी वर्ल्ड बैंक ने एक रिपोर्ट निकाली थी कि किस राज्य में लोग निवेश करना चाहते हैं, ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस कहाँ है। आपको जानकर दुःख होगा कि झारखंड, जो कभी बिहार की हिस्सा था, वो आज चौथे नंबर पर है और ये बिहार 21वें – 22वें नंबर पर खड़ा है। इस बर्बादी का करण ये सरकार है।

मैं विकास की बात करता हूँ क्योंकि मुझे बिहार के जीवन को बदलना है। गंगा घाट का विकास, कोसी को तो मैं कभी भूल नहीं सकता, जब यहाँ कोसी संकट था तो मैं यहाँ के लोगों की सेवा करना चाहता था लेकिन उनके अहंकार ने मुझे रोक दिया। बिहार में हमने 20 घाटों के विकास को करने का प्रोजेक्ट आरंभ कर दिया, 16 घाटों पर कार्य प्रगति में हैं और 4 घाट, जब आप छठ पूजा करने जाएंगे तब तक उनका भी काम पूरा कर दिया जाएगा। इसके लिए 262 करोड़ रूपया दिया गया, ये कोई छोटी रकम नहीं है। करीब-करीब 300 करोड़ रूपया हम गंगा घाटों के पुनर्निर्माण के लिए हम लगा चुके हैं।

बिहार का भाग्य बदल सकता है – बिहार का पानी और बिहार की जवानी। कोसी का पानी आता है और बिहार को तबाह करके चला जाता है और किसान के कोई काम नहीं आता है। इसके साथ-साथ इसी इलाक़े में दूसरी तरफ़ सूखा होता है। नरेगा के लिए 100 प्रतिशत पैसा केंद्र देता है और अगर इन्होंने नाले ठीक कर दिए होते और पानी को खेतों तक पहुंचा दिया होता तो मेरा किसान मिट्टी में से सोना पैदा कर देता। हिन्दुस्तान का 80 प्रतिशत मखाना यहाँ बनता है और देशभर के लोगों का व्रत तब तक पूरा नहीं होता जब तक मखाना खाने का सौभाग्य न मिले लेकिन उनको विकास से कोई लेना-देना नहीं है।

बिहार में पर्यटन के इतने अवसर हैं, हम पर्यटन को इतना बढ़ावा देना चाहते हैं ताकि गरीबों को रोजगार मिले। टूरिज्म में इतनी ताक़त होती है कि ये गरीब से गरीब को रोजगार देने में सक्षम है। फल और फूल बेचने वाला, खिलौने बेचने वाला, हर कोई कमा सकता है और कोई ज्यादा पूँजी की भी जरुरत नहीं है। महात्मा गाँधी सर्किट, पटना साहिब, रामायण सर्किट, बुद्ध के लिए पावापुरी, ढ़ेरों ऐसे उदाहरण हैं पर्यटन के क्षेत्र में। टूरिज्म सेक्टर के विकास के लिए हमने 600 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है ताकि यहाँ के गरीबों को रोजगार मिले।

बिहार के विकास के लिए 1 लाख 25 हज़ार करोड़ का पैकेज और 40 हज़ार करोड़ पुराना वाला जो कागज़ पर पड़ा था लेकिन जिसे कोई देने का नाम नहीं लेता था, हमने निर्णय लिया इसे देने का। हमने सब मिलाकर 1 लाख 65 हज़ार करोड़ का पैकेज दिया जो बिहार का भाग्य बदलने का ताकत रखता है। एनएच – 104, शिवहर, सीतामढ़ी, जयनगर, नरैया सेक्शन के 180 किमी अपग्रेडेशन के लिए 700 करोड़ रूपया, एनएच – 106, वीरपुर सेक्शन के 105 किमी के लिए पौने 600 करोड़ रूपया, गंगा सेतु पर मौजूदा लेन को 4 लेन करने के लिए 5,000 करोड़ रूपया, अनगिनत कह सकता हूँ।

मेरा मकसद है, तीन सूत्रीय कार्यक्रम – परिवारों का भाग्य बदलने के लिए पढ़ाई, कमाई और बुजुर्गों को दवाई। अगर बिहार के नौजवानों को सस्ती एवं अच्छी शिक्षा मिल जाए तो क्या उसे रोजगार के लिए भटकना पड़ेगा क्या। मेरा पहला संकल्प है, बिहार के नौजवानों के लिए पढ़ाई। दूसरी बात है, कमाई; नौजवान के लिए रोजगार। बिहार में पलायन रूकना चाहिए। ये पलायन रूकना चाहिए और बिहार के नौजवान को यहीं पर रोजगार का अवसर मिलना चाहिए। तीसरा कार्यक्रम है, दवाई; बुजुर्गों के लिए सस्ती दवाई, डॉक्टर और दवाखाना होना चाहिए। इंसान अगर बीमार हो तो कहाँ जाएगा। इसलिए आपके लिए मेरे तीन मंत्र हैं - पढ़ाई, कमाई और बुजुर्गों को दवाई। बिहार राज्य की भलाई के लिए तीन सूत्र है, बिजली, पानी एवं सड़क।  

एक बार मैंने ये छह चीज़ें कर लीन तो बिहार के नौजवानों का कभी पलायन नहीं होगा। बिहार हिन्दुस्तान के नक़्शे पर बहुत आगे बढ़ जाएगा और इसके लिए मैं आपका आशीर्वाद चाहता हूँ। चौथे चरण का मतदान अभी रिकॉर्ड ब्रेक चल रहा है, कतारें लगी हुई हैं, सुबह में भी वोटरों का प्रतिशत बढ़ रहा है। ये आंधी है, दो-तिहाई बहुमत से भाजपा, एनडीए की सरकार बनेगी, आपका यह आशीर्वाद मैं देख रहा हूँ। मैं आप सभी बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ। दोनों मुट्ठी बंद कर मेरे साथ ज़ोर से बोलिये –

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!       

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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March 30, 2026
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नमस्कार साथियों।

मुझे पक्का विश्वास है हर बूथ पर बहुत बड़ी मात्रा में बड़े उत्साह के साथ कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। सबसे पहले तो मां कामाख्या को नमन करते हुए मां कामाख्या मोह सेवा जनालु जॉय आई होम ओ के नमस्कार जोनैशु।

ब्रह्मपुत्र घाटी से लेकर बराक वैली तक पहाड़ से लेकर पठार तक असम बीजेपी के सभी कार्यकर्ता साथियों का मैं अभिनंदन करता हूं। मैं भी आपकी तरह एक कार्यकर्ता ही हूं और पार्टी जो दायित्व सौंपती है उसे निभाने के लिए जो भी मुझसे हो सकता है मैं करता हूं। मुझे असम में आपके बीच आकर काम करना होता है। इस दौरान आप में से बहुत सारे साथियों के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। आज बूथ के स्तर पर काम करने वाले आप सभी कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत का अवसर मिला है। और मैं जानता हूं कि आप सभी आज-कल बहुत व्यस्त हैं। हर कार्यकर्ता के मन में एक ही भाव, एक ही संकल्प है। मोर बूथ सभा तो के मजबूत, यानी मेरा बूथ सबसे मजबूत। असम में बीजेपी एनडीए की हैट्रिक लगे। इसके लिए आप सभी जबरदस्त मेहनत कर रहे हैं।

दूसरी तरफ यह बोहाग बिहू और अन्य उत्सवों का भी समय है। इनसे जुड़ी तैयारियां भी रहती हैं। मैं जानता हूं असम में बीजेपी एनडीए को लेकर बहुत अधिक समर्थन है। लेकिन आप लोग जमीन पर जो अनुभव कर रहे हैं, जो आपके विचार हैं, मैं उन्हें जानने के लिए बहुत उत्सुक हूं। तो चलिए बातचीत शुरू करते हैं। सबसे पहले कौन बात करेंगे मेरे साथ?

पंकज हजारिका- नमस्कार। मैं पंकज हजारिका असम के सुनीतपुर जिले के नौद विधानसभा क्षेत्र से मैं बोल रहा हूं।

पीएम- पंकज जी नमस्कार। मुझे बहुत अच्छा लगा। आपसे बात करने का मौका मिला। अच्छा पंकज जी मैं जाना चाहता हूं। असम ने अस्थिरता और अशांति का एक लंबा दौर देखा। बीते दशक में स्थिति बिल्कुल बदल गई है। जब आप पुराने लोगों से मिलते हैं तो वह इसको लेकर क्या कहते हैं?

पंकज हजारिका- मैं मानता हूं कि सन 2016 से पहले असम में जो हुआ वो बहुत एक दुखजनक माहौल चल रहा था। बाद में जब भाजपा गवर्नमेंट आया उस समय पर असम में एक नया परिवर्तन देख रहा है। सभी किसानों, व्यवसायियों और शिक्षक सभी जनों के लिए एक आमूल परिवर्तन हुआ। जैसे एक प्रगति का दौर नया दौर चल रहा है। अभी-अभी किसानों ने व्यवसायियों ने अपने काम आराम से धूमधाम से शांति से कर रहा है। अभी प्रगति के एक नया दौर आसाम में दिख रहा है सभी जनों के लिए और किसान का आय बढ़ गया। किसान का मन में शांति आ गया। इसी माहौल से गांव-गांव से लोग बहुत खुश है।

पीएम- जब लोगों से मिलते हैं तो लोग आपसे क्या पूछते हैं? आपको क्या बताते हैं लोग, पुराने लोग जब मिलते हैं ?

पंकज हजारिका- पुराने लोगों को एक प्रकार से मुक्ति मिल गया, जब से भाजपा गवर्नमेंट आई है। जो भाजपा गवर्नमेंट आने वाली है.. टेन इयर्स आसाम में भाजपा गवर्नमेंट को हुआ है। पहले तो आसाम में लूटपाट, घर्षण, उग्रवाद से शांति का कोई उपाय नहीं मिला। जब से टेन इयर्स असम में गवर्नमेंट भाजपा का हुआ है। अभी सभी एक शांति से प्रगति से उन्नयन से एक नया धारा, एक नया दिशा बन गया। ये बोल रहा है सर।

पीएम- यह जो नए वोटर है उनका तो उस समय जन्म भी नहीं हुआ होगा या अगर होंगे तो पांच सात आठ 10 के साल के उम्र के होंगे। उनको तो उस समय का कुछ पता नहीं होगा। तो उन सबको कौन बताता है?

पंकज हजारिका- हमलोगों का जो कार्यकर्ता है जो सभी लोगों के लिए एक नया माहौल बना रहा है। मेरा बूथ सबसे मजबूत हर बूथ में हर घर-घर में जाकर हम हमारा जो कार्यकर्ता है सभी लोग उस दिशा में एक नया रास्ता दिखाया और बुजुर्गों ने वो बच्चा लोगों को बताया कि पहले तो असम का क्या व्यवस्था है क्या माहौल चल रहा है वो नया यूथ को वो रास्ता दिखा दिया।

पीएम- पंकज जी आपने बिल्कुल सही कहा। हमने वह समय देखा है जब अस्रम का एक बड़ा बड़ा हिस्सा हिंसा की आग में झुलस रहा था। लेकिन आज ब्रह्मपुत्र की लहरों में एक नया आत्मविश्वास है, क्योंकि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने स्थायी शांति के लिए प्रयास किए हैं। पिछले 10 वर्षों में 12 बड़े शांति समझौते हो चुके हैं। साथियों यह जो पुराने दिन है वो असम के बूढ़े, बड़े और बुजुर्गों को याद है। लेकिन जो 18-20-22 साल के युवा है जो फर्स्ट टाइम वोटर्स हैं इनके दिमाग में बीते 10 साल की शांति ही है। वैसे ही हमारी माताओं बहनों को भी बार-बार इन चीजों को याद कराना चाहिए। इसलिए एक सक्रिय बूथ कार्यकर्ता होने के नाते आपका दायित्व और बढ़ जाता है। यह जरूरी है कि फर्स्ट टाइम वोटर्स को कांग्रेस के पुराने दिनों की याद दिलाएं और बताएं कि जरा सी गलती असम को फिर से उस दौर में गिरा सकती है, वापस ले जा सकती है। आप अपनी बात परिवार के उदाहरण से भी समझा सकते हैं। जब घर में शांति होती है तो घर के लोग भी आगे बढ़ते हैं। वैसे ही राज्य के डेवलपमेंट के लिए शांति पहली जरूरत होती है और यही बीजेपी एनडीए सरकार कर रही है। मेरा एक और काम करिएगा। जब आप युवाओं से मिले तो आप पुराने अखबारों की कटिंग 10 साल पहले के फोन पर पुराने वीडियो ये सब जरूर उनको दिखाना चाहिए। आपके मोबाइल फोन पर सब रेडी रहना चाहिए और जब कोई देखता है ना तो फिर उसको मानता है और आज-कल जो एआई के द्वारा जो फालतू चीजें बना करके सर्कुलेट की जाती है उससे भी बचने के लिए उनको समझाना चाहिए।

साथियों,

आपको लोगों को कांग्रेस की नीति भी याद दिलानी है। कांग्रेस कागज पर तो समझौता करती थी, ताकि अखबारों में छप जाए लोग गुमराह हो जाए और गलती से वोट भी डाल दे। लेकिन जैसे ही कांग्रेस सरकार बनती थी समझौते कूड़े कचरे के ढेर में चले जाते थे। कोई समझौता आगे बढ़ता नहीं था। फिर दंगे फसाद में असम हमारा फंस जाता था। हमारी नई पीढ़ी फंस जाती थी। जबकि बीजेपी मीडिया में जगह पाने के लिए काम नहीं करती। शांति स्थापित करने के लिए काम करती है। आपके बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाने के लिए काम करती है। और हम ईमानदारी से शांति के लिए समझौते कर रहे हैं। और असम के लोगों ने भी देखा है 10 साल में करके दिखाया। आप अपने बूथ पर फर्स्ट टाइम वोटर्स के लिए विशेष कार्यक्रम करिए। जैसे त्योहारों का मौसम है। इसमें आप भजन संध्याएं या ऐसी कोई आयोजन बूथ पर कर सकते हैं। इसमें विरासत का उत्सव भी होगा और विकसित असम बनाने के लिए बीजेपी क्या कर रही है? इस पर भी अच्छी चर्चा हो सकती है। पंकज जी बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके। चलिए आगे बढ़ते हैं.. अब कौन मेरे साथ बात करेंगे?

धनेश्वर जी- नमस्ते माननीय मोदी जी।

पीएम- नमस्ते

धनेश्वर जी- नमस्ते मोदी जी, मैं तामलपुर जिले के क्षेत्र के 43 नौ तामलपुर विधानसभा क्षेत्र से धनेश्वर बासुमतारी बोल रहा हूं सर।

पीएम- धानेश्वर जी आपके जिम्मे अभी क्या है।

धनेश्वर जी- मेरा मैं अभी 2016 से भारतीय जनता पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं और वर्तमान में शक्ति केंद्र प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहा हूं।

पीएम- और आप व्यवसाय क्या करते हैं जीवन में?

धनेश्वर जी- - जीवन में मैं एक व्यवसायी हूं। मेरा कपड़ों का एक छोटा सा व्यवसाय है। जिसे सीएम ट्रिपल ए योजना की मदद से शुरू किया था। इसके साथ हमारे घर में पाट और मुगा उद्योग भी है, जहां हम कपड़े तैयार करते हैं।

पीएम- तो आपके पिता-माता ने आपका नाम धनेश्वर रखा है, तो सचमुच में धनेश्वर है क्या आप?

धनेश्वर जी- थैंक यू। थैंक यू सर। सर

पीएम- अच्छा धनेश्वर जी मैं कुछ समय पहले ही बोडोलैंड में आया था। वहां जो बदलाव हो रहा है वह सचमुच में बहुत अद्भुत है। आज बोडोलैंड विकास के नए रास्ते पर है। आप तो इसी क्षेत्र के निवासी हैं। जब आप लोगों से मिलते हैं लोगों से बात करते हैं और स्वाभाविक है जहां भी जाते होंगे चुनाव की चर्चा होती होगी और आप भाजपा वाले हैं तो ज्यादा करते होंगे। तो लोग इन सारे बातों पर यह जो बोडोलैंड में बदलाव आया है क्या बातें करते हैं?

धनेश्वर जी- बोडोलैंड शांति समझौते के बाद पूरे क्षेत्र में बहुत ही सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां इस इलाके में संघर्ष और अस्थिरता की बात होती थी। आज वहां विकास और शांति की बात हो रही है। सड़क, शिक्षा और रोजगार के अवसर पहले से काफी बढ़ रहे हैं। जिससे लोगों की जिंदगी में सुधार आया है। जब हम बोडो समाज के लोगों से बात करते हैं तो वे बताते हैं कि अब उन्हें अपने भविष्य को लेकर भरोसा और उम्मीद महसूस होती है। खासकर युवा को कि सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब वे हिंसा की बजाय शिक्षा, कौशल और अपने काम धंधे पर ध्यान दे रहे हैं। यह बदलाव ना केवल बदलन बल्कि पूरे उत्तर पूर्व के लिए एक प्रेरणा है।

पीएम- अच्छा ये जो बागुरूंबा का कार्यक्रम इतना बड़ा गुवाहाटी में हुआ और पूरी दुनिया में उसकी चर्चा चल रही है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों के साथ लोग उसकी तुलना करते हैं। यह सब देखकर के बोडोलैंड के लोगों को क्या लगता है?

धनेश्वर जी- बोडो समाज के लोग बहुत उत्साह हुआ कि मोदी जी ने हमारे बोडो समाज की बागुरूंब को विश्व दरबार में जो लेके गया ये हमारे लिए बहुत प्रेरणादायक है ये आपको बहुत बोडो समाज ने धन्यवाद ज्ञापन किया सर आपको बहुत लोगों ने

पीएम- धनेश्वर जी आप सच्चे अर्थ में धनेश्वर भी बनें, दिल के भी धनेश्वर बने, विचारों के भी धनेश्वर बने और असम को भी धनेश्वर बनाए। आपने बहुत अच्छी तरह से बताया है। जिस बोडोलैंड की संस्कृति इतनी समृद्ध है उसके साथ दशकों तक कांग्रेस ने धोखा किया। मुझे इस बात को लेकर बहुत संतोष होता है कि आज वहां शांति और समृद्धि आ रही है। एक समय बोडोलैंड में कर्फ्यू ही ज्यादा रहता था। बम बारूद के ही धमाके सुनाई देते थे। आज वहां खाम और सिफुंग की धुनें फिर से गूंज रही है। और जैसा आपने कहा आज दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक और मैं तो कहता हूं दुनिया में बागुरंबा की अद्भुत छटा का ही जलवा दिखता है। ये देश के हर उस क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा मॉडल है। जहां अतीत में अशांति रही है। वहां आज शांति का सूरज निकला है।

धनेश्वर जी मैं सभी कार्यकर्ताओं से कहना चाहूंगा कि बोडोलैंड के मेरे बूथ कार्यकर्ता साथी चुनाव से पहले अपनेपने बूथ पर ऐसे कार्यक्रम करें जहां वह साथी शामिल हो, जिन्होंने बंदूके छोड़ी है। फिर उनके अनुभव सुने और लोगों को सुनाए और इतना ही नहीं जिन माताओं के बेटे घर वापस आए हैं। वह माताएं बहने बहुत आशीर्वाद देती है। जब मैं 2014 के बाद एक कार्यक्रम में बोले आया था और सब माताओं को मैंने कहा कि मुझे आपके बच्चे वापस लाने हैं और आज मुझे संतोष है वो सारे संतान वापस आए बंदूक छोड़कर के कलम को हाथ लगाए हैं। कई ऐसे साथी भी होंगे जो बरसों तक जंगलों में रहे हैं। और अब पहली बार वोट दे रहे हैं। उनका विशेष अभिनंदन हो। ऐसे समारोह भी रखे जा सकते हैं। आपके बूथ में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के जो लाभार्थी हैं उनसे तो बार-बार मिलना है। उन्हें कहना है कि वोटिंग के दिन टोली बनाकर एक साथ ही वोट डालने चले। गाजे बाजे हुए साथ निकलना चाहिए। जैसे उत्सव है ना वैसा माहौल बनाना चाहिए। बोल में आज बहुत बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम हो रहा है। ऐसा हर काम जो आपके बूथ में आपके ब्लॉक में हो रहा है। उसके क्या फायदा होंगे? यह विस्तार से बताना है। जिनको गैस का सिलेंडर मिला होगा। जिनको बिजली का कनेक्शन मिला होगा। जिनको पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा मिला होगा। जिनको पीएम आवास योजना का घर मिला होगा। ऐसे कई काम है। इन सब के लोगों की लिस्ट बनानी चाहिए। किसको क्या-क्या मिला है और उन सब से बात करनी चाहिए। और आप एक काम कर सकते हैं शांति की दीवार वाल आर्ट ऐसा कुछ कर सकते हैं क्या? जैसे बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन में गांवों में स्थानीय कलाकारों से दीवारों पर बोडो लोक कला में पहले और अब का चित्रण करवाएं। हो सके तो अपने अपने बूथ के युवा साथियों को भी इसे जोड़ें और मैं मानता हूं कि वहां तो हमारे एनडीए के साथी भी चुनाव लड़ रहे हैं। उनके भी सबको विजय बनाना है। हर बूथ पर एनडीए के सब साथियों को मिलकर काम करना है। और यह बीजेपी की जिम्मेवारी ज्यादा है कि अन्य दलों के लोगों को भी साथ लेकर के उनके साथ काम करना है। चलिए धनेश्वर जी मुझे बहुत अच्छा लगा। अब किसी और एक साथी से सुनते हैं। हां जी.. बताइए कौन है हमारे साथ?

डिंपी जी - नमस्कार। मैं दीपी दास

पीएम- डिंपी दास जी नमस्ते…अपने बारे में बताइए..

डिंपी जी - नमस्कार मैं भारतीय युवा मसा की नौगांव जिले का वाइस प्रेसिडेंट हूं। असम के नौगांव जिले का रहा विधानसभा समष्टि के अंतर्गत खाही भांतिपुरी की रहने वाली हूं।

पीएम- डिंपी जी आप और भी कुछ काम करती हैं भाजपा के सिवाय

डिंपी जी- मैं 9 साल से बीजेपी से समाज सेवा के कार्य में जुड़ी हुई हूं। मेरे परिवार में मेरी मां जी, मेरा छोटा भाई, ताऊ जी, ताई जी और चाचू रहते हैं। उसके साथ में मैं अपने आपके द्वारा जो एक स्कीम मिली थी मुझे पीएमएमएसवाई का उसी को लेके मैंने कुछ जमीन लीज पे लेके एक न्यू पोंड का जो फिश फार्मिंग है वो शुरू किया और उसी के साथ में बच्चों को पढ़ाती भी हूं और युवाओं के साथ में मिलकर ये भारतीय जनता पार्टी के साथ में जुड़ी हुई हूं और बाकी जन कल्याण का कार्य कर रही हूं।

पीएम- डिंपी जी आप इतनी बढ़िया हिंदी कैसे बोलती है?

डिंपी जी- मैं कोशिश करती हूं।

पीएम - बहुत बढ़िया बोल रही हैं आप।

डिंपी जी- धन्यवाद।

पीएम- आप भाषण भी करती हैं क्या?

डिंपी जी- कभी-कभी कर लेती हूं।

पीएम- अच्छा चलिए मुझे कभी आपका भाषण सुनना पड़ेगा। अच्छा मैंने सोशल मीडिया पर देखा कि हमारी कार्यकर्ता बहनें देर रात तक बिना डर प्रचार कर रही है। देर-देर रात तक लोगों के घर जा रही हैं। 10 साल पहले तक यह संभव नहीं था। यह जो डर भय खत्म हुआ है इसको लेकर असम की बहनें क्या कह रही है?

डिंपी जी- जी आज असम में सब लोग महिलाएं बहुत सुरक्षित है। क्योंकि पहले आज की भाजपा सरकार जो हर महिलाओं के ऊपर आने वाली परेशानियों को आने ही नहीं देती है। उसी वजह से सब लोग बहुत सेफ हैं और पहले हमारी लड़की लोग महिलाएं लोग रात क्या दिन में भी सुरक्षित नहीं थे लेकिन आज जब से भाजपा सरकार बनी हुई है तब से लेके हर महिलाएं बहुत सुरक्षित है और रात में देर तक कार्य कर सकती हैं। कोई डर नहीं है और मैं भी सुरक्षित हूं। इसलिए मैं दिल से कहती हूं कि एक बार फिर से मोदी सरकार क्योंकि ये जो आज के दिनों की परिस्थिति है और पहले जो कांग्रेस सरकार के दिन में लड़की लोग और मैं भी उस टाइम में एकदम ही सेफ नहीं थे। दिन में भी सेफ नहीं थी। रात की बात तो बहुत दूर की बात थी। लेकिन आज सब लोग बहुत सुरक्षित है, कुशल है और मैं फिर से भगवान से भी विनती करती हूं और कि फिर से भाजपा सरकार बने। आने वाले और सालों तक मतलब ऐसे ही सुरक्षित महिलाएं रहें।

पीएम- देखिए हम राजनीतिक दल के नेताओं के लिए तो जनता जनार्दन ही हमारा भगवान है। बूथ में जो परिवार है वही हमारे भगवान हैं। हमें उनकी सेवा करनी है। उनको जीवन में सब सुख मिलेंगे तो भगवान अपने आप प्रसन्न हो जाएगा।

डिंपी जी आपने बहुत अच्छे तरीके से बताया। मुझे बहुत संतोष हुआ। आपकी बातों से मुझे पूरा विश्वास हो गया है कि आप केंद्र और राज्य की योजनाओं को प्रभावी तरीके से रख रहेंगे। नारी शक्ति का आत्मविश्वास ही नए असम की ताकत है। बीजेपी की डबल इंजन सरकार तो पूरे देश की बहनों की पहली पसंद है। असम में भी हम यही अनुभव कर रहे हैं। अच्छा मैं कुछ काम बताने चाहता हूं। सारे बूथ के कार्यकर्ताओं को बताता हूं। डिंपी जी के माध्यम से बताता हूं।

देखिए कुछ काम तो करने ही करने हैं। आप सभी कार्यकर्ता Namo ऐप में जरूर जाए। आपका मोबाइल में Namo ऐप तो होना ही चाहिए। वहां बहुत विस्तार से आपको हर वो जानकारी मिलेगी जो हमारी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कर रही है। डबल इंजन सरकार का क्या फायदा होता है? यह आप जरूर लोगों को बताएं। जैसे असम की हमारी सरकार अरुणोदय योजना चला रही है। इसके तहत 40 लाख बहनों को आर्थिक सहायता दी है। ऐसे ही केंद्र सरकार लखपति दीदी अभियान चला रही है। इसके तहत देश में 3 करोड़ लखपति दीदी बन चुकी है। इनमें असम में भी अनेक बहने लखपति बन चुकी हैं। और अब हमने 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। 3 करोड़ और बनाने का। आप एक काम यह भी कीजिएगा कि आपके बुथ में जो लखपति दीदी है उनके वीडियो रिकॉर्ड कीजिए। उनका अनुभव सुनाइए और औरों को भी प्रेरित करेगा। उसको सोशल मीडिया पर डालिए। डिजिटल जमाना है तो क्या हम लाभार्थी बहनों के साथ कोई शॉर्ट वीडियो वगैरह बना सकते हैं? जिसमें हमारी बहनें अपना एक्सपीरियंस शेयर करें और वीडियो हम जन-जन तक पहुंचाएं। साथियों आने वाले दिनों में किसी महिला कार्यकर्ता के घर पर मोहल्ले की सभी महिलाओं की छोटी-छोटी बैठक हो। हमें ऐसे प्रयास करना चाहिए। हमारी बहुत सारी बहनें हस्तशिल्प से जुड़ी हैं। बिहू के अवसर पर तो गमोसा और अन्य पारंपरिक वस्त्रों का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे पारंपरिक वस्त्रों को उपहार में देने का विशेष अभियान हमें चलाना चाहिए। यह वोकल फॉर लोकल के प्रति बीजेपी के कमिटमेंट को भी आगे बढ़ाएगा। एक आग्रह मुझे बूथ की सभी बहनों से करना है। उन्हें कहना है कि वे जिम्मेदारी ले कि वोटिंग के दिन परिवार का हर सदस्य बूथ पर पहुंच जाए। वोटिंग से जुड़ी पर्ची और अन्य जरूरी दस्तावेज भी समय पर तैयार रहे। सुनिश्चित करने के लिए भी बहनें उनको प्रोत्साहित करना चाहिए। और मैंने जैसा कहा जब पोलिंग के जाए ना तो 20-20 25-25 लोगों के जुलूस निकाल के जाना चाहिए। गाने बजाने चाहिए, ढोल बजाने चाहिए। एक उत्सव का माहौल बनाना चाहिए। चलिए डिंपी जी बहुत अच्छा लगा। अब आगे बढ़ते हैं। कौन बात करेंगे?

देवराज जी- नमस्कार आदरणीय प्रधानमंत्री जी। मैं देवराज सिग्नार बात कर रहा हूं।

पीएम- देवराज जी, आपको बहुत- बहुत नमस्कार। क्या करते हो बताइए जरा।

देवराज जी- मैं 108 बोकाजन कंस्टिच्युएंसी जिला कारबंग से बात कर रहा हूं। और मैं पिछले 15 सालों से बीजेपी के कार्यकर्ता हूं। और मैं अभी हम मेरा खुद एक इंजीनियर हू और मैं अभी इलेक्शन का माहौल है। मैं जोरों शोरों से भाजपा के लिए दिन रात करके मैं मेहनत कर रहा हूं।

पीएम- अच्छा देवराज जी अभी इन दिनों घुसपैठियों का विषय असम के लिए तो जीवन मरण का इशू बन चुका है। कांग्रेस ने किस प्रकार से घुसपैठियों को जमीन पर कब्जे करने दिए। बट हमारी कोशिश है कि हमारे नौजवानों के रोजगार कोई आकर के छीन ना ले। हमारी कोशिश है कि हमारे गरीब आदिवासी भाई बहनों के दलित भाई बहनों की जमीन कोई छीन ना ले आकर के विदेशों से। हमारी कोशिश ये है कि हमारी माताओं बहनों के सम्मान को कोई लूट ना ले। और इसलिए घुसपैठियों से देश को मुक्त करना बहुत जरूरी है। और सरकार लगातार कोशिश कर रही है। सरकार यह जो प्रयास कर रही है उसका लोगों में क्या चर्चा है? जी बताइए..

देवराज जी- ये डिस्ट्रिक्ट बॉर्डर जैसे हमारे कारग जिला में घुसपैठ हमेशा से लोगों की बहुत बड़ी चिंता रही है। पहली बात तो यह है कि घुसपैठिये जितने भी यहां कारबिंग जिला में हमारे यहां डिस्ट्रिक्ट में जितने भी यहां पे घुसपैठिए घुसे हैं ये ये कांग्रेसियों ने पिछले 15 सालों से अपना वोट बैंक बना के रखा है। तो जैसे हमारे जो मुख्यमंत्री हेमंत जी ने जो पांच सालों से जो कोशिश है घुसपैठियों को यहां से खदेड़ने के लिए या बाहर निकालने के बांग्लादेशियों को वापस भेजने की जो कोशिश है उसमें हम सब जितने भी यहां पे असमिया लोग है हम लोग दिन-रात मेहनत करके उनको अपना सर्वस्व मानते हैं इसको। जैसे कि हम लोगों का जमीन पे ये लोग कब्जा करते ये हमारे जमीन को छीन रहे हैं। हमारे रोटी मकान को छीन रहे हैं। हर चीज को मतलब कि हिस्सा मांग रहे हैं। तो इस चीज को हम लोग कभी एक्सेप्ट नहीं कर सकते।

पीएम- देवराज जी आपने बहुत अच्छे से स्थिति को समझाया और पुरानी परिस्थितियां कैसी थी लेकिन इसको अभी भी नई पीढ़ी को बताना पड़ेगा और इससे क्या-क्या संकट आने वाले हैं यह भी समझाना होगा। यह जो घुसपैठियों का मुद्दा है यह सिर्फ चुनाव का मुद्दा नहीं है। यह असम की पहचान, असम की सुरक्षा देश की सुरक्षा का मुद्दा है। एक किसानों की जमीन, आदिवासियों की, गरीबों की रोजीरोटी, महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। आप देखिए कांग्रेस ने बीते दशकों में जो अवैध कब्जे होने दिए, इससे असम में कितनी परेशानी हुई है। हमारे आस्था के, सांस्कृति के स्थानों तक को उन्होंने छोड़ा नहीं है। किसानों की जमीनों को नहीं छोड़ा गया। जहां घुसपैठिए बढ़ जाते हैं, वह मेहनत मजदूरी के काम पर कब्जा कर लेते हैं। इसलिए जरूरतमंद लोगों को काम मिलना कम हो जाता है।

साथियों,

मैं असम के सभी कार्यकर्ताओं से कहना चाहूंगा, आपके पास इनके इलाके के अपने ब्लॉक, अपने जिले में जो अवैध कब्जे हैं उनकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। उससे क्या क्या असर वहां बीते दशकों में हुआ है। इस के विषय में विस्तार से लोगों को बताया जाए। आपके क्षेत्र में घुसपैठियों से जो पीड़ित लोग रहे उनके वीडियो आप शेयर कर सकते हैं। हमें लोगों को बताना है कि कांग्रेस ने अतिक्रमण दिया और बीजेपी अधिकार दे रही है। और मैं पक्का मानता हूं असम के लोग अतिक्रमण से मुक्ति चाहते हैं और अधिकार पाना चाहते हैं। आप सभी को एक काम और करना है। उन लोगों की सूची बनानी है जो वोटर तो हैं लेकिन जिन्हें बूथ तक जाने में असुविधा हो सकती है। ऐसे लोगों को बूथ तक पहुंचाने के लिए आपको व्यवस्था करनी होगी। जो युवा वोटर्स अपने गृह क्षेत्र से बाहर हैं। उन्हें घर आकर वोट देने के लिए प्रेरित करना है। कई साथी कामकाज के लिए भी अन्य राज्यों में गए होंगे या गांव से शहर गए होंगे। उनको भी अभी से संपर्क करके बुलाना है और उनके परिवार को भी कहना चाहिए कि वो बच्चों बाहर है तो फोन करें, चिट्ठी लिखें, बुलाएं। चलिए मुझे बहुत अच्छा लगा। देवराज जी आपसे बात कर करके आइए। अब हमारे साथ कौन बात करेगा?

अर्जुन जी- नमस्कार मोदी जी मैं अर्जुन ग्वाला बोल रहा हूं।

पीएम- अर्जुन जी नमस्ते बताइए अर्जुन जी अपने विषय में पहले तो जानना चाहूंगा।

अर्जुन जी- मोदी जी मैं अर्जुन गोवाला असम 86 तिनसुकिया विधानसभा अलकादा चाय बागान के निवासी हूं। मैं संघ से जुड़ा हुआ व्यक्ति हूं। बचपन से ही मैं संघ से प्यार करता हूं। और वर्तमान में बीजेपी तिनसुकिया किसान मोर्चा का सेक्रेटरी हूं और माकुम विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी हूं। और मेरा घर चाय बागान में है। और मैं छोटा सा एक गसरी दुकान है और छोटा सा एक चाय बागान है। चाय का खेती करता हूं।

पीएम- बच्चे पढ़ते हैं अर्जुन जी।

अर्जुन जी- हां, मेरा दो बच्चा है। एक सिक्स में गया है और एक छोटा है मोदी जी। एक साल दो महीना हुआ है। अच्छा।

पीएम- लेकिन बच्चों को पढ़ाना पक्का। हां। बीजेपी का काम भी करना है लेकिन घर को भी संभालना है और बच्चों को तो जरूर पढ़ाना है। अच्छा, अर्जुन जी श्री कृष्ण को ग्वाला कहते थे। आप तो अर्जुन गोवाता है। यह हमारे जो चाय बागान के साथी हैं। उनसे मेरी भी कई बार बात हुई है। पिछले दिनों गुवाहाटी में भी मुझे कई लोगों से मिलने का मौका मिला। भूमि के पट्टे मिलने से बहुत खुश है। और मैं मानता हूं जब जमीन का पट्टा मिल जाता है ना तो जीवन का एक बहुत बड़ा आधार मिल जाता है। घर को पता मिल जाता है। जिंदगी को पता मिल जाता है। और पूरी परिवार की भावी पीढ़ी के लिए एक सुरक्षा का कवच बन जाता है। यह कोई एक टुकड़ा नहीं है। यह आपके बच्चों के भविष्य का एक मजबूत नीव है। आप जब हमारे चाय बागान के लोगों को मिलते हैं तो उनके अंदर इन विषयों की क्या चर्चा होती है? वो क्या कहते हैं?

अर्जुन जी- मोदी जी पहले तो जो आपके इतिहास जो सिद्धांत है जो चाय बागान के लोग 200 साल से असम में रह रहा था वो आपके ये सिद्धांत के लिए बहुत-बहुत आभारी है और ये जो चाय बागान के मदद भाइयों बहनों को पिता को जो जमीन का अधिकार मिला है उसमें वो लोग बहुत खुश है। कांग्रेस के समय में जब उन लोगों को बगान में जब किसी समस्या का विषय में बोला जाता था तो उस समय में वो लोग बोलता था यह कुंभानी करेंगे हम लोग करने वाला नहीं है। सिर्फ उन लोगों का भूत समय नहीं याद पड़ता था। नहीं तो उन्नयन के दिख में उन उन्नति के दिख में चाहे जनगष्ठी जो आदिवासी भाई बहन है उसको याद नहीं करता था। यह जमीन का जो अधिकार मिला है, इसमें हम लोगों का माता-पिता भाइयों बहनों आपसे बहुत खुश है और आपसे बहुत आभार व्यक्त करते हैं मोदी जी।

पीएम- अर्जुन जी मुझे बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके। आप लोगों को पता ही है कुछ दिन पहले ही जब मैं गुवाहाटी आया था तब एक बड़ा प्रोग्राम हुआ था। उसमें टी गार्डन के साथियों को भूमि पट्टे सौंपने का अवसर मिला था। और जब एक चाय वाले को चाय बागान के लोगों को भूमि के पट्टे देने का जो आनंद होता है ना वह अद्भुत होता है जो मुझे था। अच्छा जब भी हम चाय बागानों के बारे में बात करते हैं तो देश के हर नागरिक को असम की चाय पर गर्व होता है। असम वालों को तो स्वाभाविक है डबल गर्व होता है। इसलिए टी गार्डन में काम करने वाले परिवारों को हम उसी गौरव के भाव से देखते हैं।

साथियों,

अगले कुछ दिनों में आपको एक और काम करना है। चाय बागानों में जो बूथ है वहां के कार्यकर्ता एक दिन किसी चाय के बागान में ही टी गार्डन वर्कर्स की एक टिफिन बैठक करिए या फिर चाय पर चर्चा कीजिए। ये सब क्या कहते हैं? खुलकर के उनको सुनिए। और पुराने उनकी क्या मुसीबतें थी? कैसे उनको असहाय छोड़ दिया गया था। कंपनियों के भरोसे जीने के लिए मजबूर कर दिया था। यह सारी बातें पुराने लोग बताएंगे और उसमें नई पीढ़ी को भी बिठाइए। बीते 10 सालों में सरकार ने बहुत कुछ किया है। लेकिन अभी भी हमसे लोगों को बहुत सारी अपेक्षाएं हैं।

जब आप उनकी बात सुनेंगे और हमें भी उससे नया काम करने का उत्साह मिलेगा। उनको भी विश्वास होगा कि उनकी बात सरकार तक पहुंच रही है और इसके कारण हम कर भी पाएंगे। हमको बताइए कि जो भूमि दस्तावेज है यह केवल कागज का टुकड़ा नहीं है। यह हजारों परिवारों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी है। यह काम बीजेपी सरकार इसलिए कर रही है ताकि चाय बागान में कठिन परिश्रम करने वाले साथियों को सम्मान का जीवन मिले। इन साथियों को जमीन का पट्टा मिलने से कौन-कौन सी योजना का लाभ मिलेगा? इसकी पूरी सूची उन्हें बताइए। एक काम आप और कर सकते हैं। आप पश्चिम बंगाल में जो टी गार्डन के साथी है उनकी खराब स्थिति के बारे में जानकारी दें। वहां बीजेपी सरकार नहीं है। बंगाल की सरकार तो केंद्र की योजनाओं तक चाय बागान के साथियों तक नहीं पहुंचने देती। पता नहीं उनकी क्या दुश्मनी है। यह दिखाता है कि डबल इंजन की बीजेपी सरकार कितनी जरूरी है। अगर सिर्फ कोई असम के टी गार्डन के काम और बंगाल के टी गार्डन के काम कंपैरिजन करेंगे तो सब कहेंगे कि असम के टी गार्डन के लोगों के लिए बहुत काम हुआ है और बंगाल के टी गार्डन के लोगों के लिए कुछ नहीं हुआ है। तो लोगों को फर्क साफ-साफ नजर आएगा। अर्जुन जी बहुत अच्छा लगा। मैं समझता हूं कि आप लोग चुनाव के काम में बहुत व्यस्त है। मुझे ज्यादा समय लेना नहीं चाहिए। आखिर में कुछ बातें मैं जरूर बताना चाहता हूं और उसके बाद हमारा ये ऑडियो ब्रिज का कार्यक्रम पूरा करेंगे।

सारे प्रदेश के हजारों कार्यकर्ताओं से आज मैं बात कर रहा हूं। जिन पांच साथियों से बात की है, वह एक प्रकार से आपके ही प्रतिनिधि है। मतलब कि मैं असम के हजारे छोटे-मोटे सब कार्यकर्ताओं के साथ बात कर रहा हूं। और आपसे जो बातें सुनी उसमें जो आपने जो विश्वास जताया है. यह सुनने वाले किसी का भी विश्वास और मजबूत कर देता है। और अब यह तय है कि इस बार असम वोटिंग के रिकॉर्ड तो तोड़ेगा ही। हमें विजय के भी नए रिकॉर्ड बनाना है। और विजय के नए रिकॉर्ड बनाना है तो उसकी पहली शर्त है बूथ में नए रिकॉर्ड बनाना। ज्यादा से ज्यादा मतदान का रिकॉर्ड। मतदान करने वाले लोग भाजपा के लिए वोट करें, एनडीए के लिए वोट करें। यह पक्का करना चाहिए। असम के कोने-कोने से एक ही आवाज सुनाई दे रही है। आखो ए बार बीजेपी सरकार

आपने बीते 10 11 वर्षों में बार-बार शानदार काम किया है। बीजेपी के हर कार्यकर्ता ने अपने दायित्व को हर बार अच्छे से निभाया है। एनडीए के हर साथी के साथ मिलकर आपने हर उम्मीदवार को विजय बनाने की भरपूर मेहनत की है। अब मतदान के लिए बहुत कम समय है। इसलिए आने वाले 8-10 दिनों में आपको दिन रात जुड़ना है। पहले मतदान फिर जलपान यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। देखिए साथियों आप ही मेरे हाथ, पैर, कान, नाक आप ही सब है मेरे लिए तो आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा इन दिनों गर्मी बहुत है। पानी बहुत पीजिए। आप कितनी मेहनत क्यों ना करें लेकिन पानी का बोतल साथ ही रखिए। पानी जरूर पीजिए ताकि आप इस समय इस गर्मी में के समय में इतनी दौड़ धूप में कोई कठिनाई पैदा ना हो। एक बार फिर आप सभी को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।