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NDA is dedicated to welfare of poor; our mantra is all round development of Bihar: PM #ParivatanRally
Don't let the 'Jungle Raj' & 'Jantar Mantar Raj' come into power, they will ruin Bihar: PM
Bihar's youth is extremely talented. They can do wonders: PM Modi #ParivatanRally
BIHAR stands for: Brilliant, Innovative, Hardworking, Action-oriented & Resourceful: PM Modi
Bihar needs NDA's engine of development to drive out the state of all the problems it faces today: PM
Elect NDA Govt with 2/3rd majority for Bihar's uninterrupted progress: PM Modi
Lack of proper educational institutes & other amenities a proof that 'Mahaswarthbandhan' has done nothing for Bihar: PM Modi
Bihar will touch skies of development because of its hardworking people: PM Modi

पावन मिथिला भूमि के नमन करै छी। मिथिला की ई धरती कविराज विद्यापति सन विद्वान भूमि छै यहाँ के मिथिला पेंटिंग विश्व भर में ख्याति प्राप्त कैलक। अहाँ सब के अपार स्नेह देखकर मन भाव-विभोर भे गेल। अहाँ सब के ह्रदय से अभिनंदन करै छी। मंच पर विराजमान एनडीए के सभी वरिष्ठ नेतागण और उम्मीदवार।

चुनाव में बेनीपट्टी से भाजपा के उम्मीदवार विनोद नारायण झा, खजौली से भाजपा के उम्मीदवार अरुण शंकर प्रसाद, मधुबनी से भाजपा के उम्मीदवार रामदेव महतो, राजनगर से भाजपा के उम्मीदवार रामप्रीत पासवान, जनजारपुर से भाजपा के उम्मीदवार श्री नीतीश मित्र, बुलपरा से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान राम सुंदर यादव जी, लोकहा से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान प्रमोद कुमार प्रियदर्शी, बाबू बरही से लोजपा के उम्मीदवार श्री विनोद कुमार सिंह, बिसफ़ी से रालोसपा के उम्मीदवार मनोज कुमार यादव, हरलाखी से रालोसपा के उम्मीदवार वसन कुमार, ये हैं जो बिहार का भाग्य बदलने के लिए एड़ी-चोटी का जोड़ लगाने वाले हैं।

इस सभा में यहाँ कर्पूरी गाँव की कुछ बहनों ने मुझे मेमोरेंडम भेजा है। अब देखिये, बिहार का हाल, गाँव के गरीब लोगों को बिहार सरकार में कोई सुनने को तैयार नहीं है, उनको प्रधानमंत्री के पास पहुंचना पड़ा, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है। उनकी शिकायत है कि सरकार उनको उनकी जमीन से हटाने पर तुली हुई है, कोई हमें रहने के लिए जगह दे, ये कहने के लिए यहाँ तक आये हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि 8 तारीख को भाजपा, एनडीए की सरकार बनेगी और यहाँ के मुलाज़िम ख़ुद आकर आपकी शिकायत सुनेंगे और आपकी समस्या का समाधान करेंगे। मुझे दुःख इस बात का है कि इस मेमोरेंडम में नीचे जिन लोगों ने अपनी वेदना प्रकट की है, ये 21वीं सदी का हिन्दुस्तान, बिहार जिसमें 20-30 साल की महिलाएं बैठी हैं, लेकिन किसी को भी हस्ताक्षर करना नहीं सिखाया। उनको अंगूठा करना सिखाया। लालू जी, नीतीश बाबू, ये चिट्ठा आपके कुकर्मों का सबूत है। मुझे ख़ुशी होती कि गरीब से गरीब मेरी माताएं-बहनें अपने हाथ से लिखकर मुझे चिट्ठी देते। उन्हें अंगूठा के निशान के माध्यम से अपनी वेदना प्रकट करनी पड़ रही है, इससे बुरा कोई हाल नहीं हो सकता।

भाईयों-बहनों, जिस धरती से नालंदा की गूँज उठती थी, जिस धरती पर दुनिया के लोग पढ़ाई के लिए आते थे, उस धरती पर आजाद हिन्दुस्तान में जन्म लेनी वाली हमारी माताएं-बहनें अपनी वेदना प्रकट करने के लिए अंगूठा के निशान लगाने के लिए मजबूर हैं। मैडम सोनिया जी, आपने 35 साल सरकार चलाई और आपने बिहार को ये दिया। लालू जी, नीतीश जी, आपने 25 साल सरकार चलाई और आपने बिहार को ये दिया। ये दस्तावेज़ आपकी विफ़लता, आपकी सरकार की समाज और गरीब के प्रति क्रिमिनल नेग्लिजिएन्स का सबूत है।

इस चुनाव में हम विकास का मुद्दा लेकर आए हैं मैं हैरान हूँ कि मीलों दूर लोग मुझे देख नहीं पाते होंगे, उसके बावजूद ऐसी धूप में लाखों लोग आशीर्वाद देने आये हैं। इससे बड़ा नसीब क्या हो सकता है। मैं आपको नमन करता हूँ और ये प्यार कभी मैं भूल नहीं सकता। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आप इस ताप में जो तपस्या कर रहे हैं, मैं उसे कभी बेकार नहीं होने दूंगा। मैं लोकसभा के चुनाव में भी आया था और उस समय भी यहीं पर मेरी सभा हुई थी लेकिन इतनी भीड़ नहीं आयी थी। आपका प्यार बढ़ता ही जा रहा है। लोकसभा चुनाव की मेरी रैलियों में 5-50 महिलाएं होती थीं लेकिन इस बार सभी रैलियों में हज़ारों महिलाओं को देखकर पता चलता है कि हवा का रूख किस तरफ़ है।

आज बिहार में चौथे चरण का मतदान चल रहा है। जो लोग पराजय से कांप रहे हैं, उन्हें दो-दो इंजन की ज़रुरत है। दो इंजन लगेंगे तब यह बिहार गड्ढ़े में से बाहर आएगा, एक इंजन पटना में एनडीए की सरकार और दूसरा इंजन दिल्ली में मेरी सरकार। मैं आपसे चाहता हूँ कि दिल्ली में तो आपने एक इंजन लगा दिया है, यहाँ भी आप एक इंजन बिठा दीजिए ताकि बिहार में एनडीए, भाजपा की सरकार बने जो बिहार को गड्ढ़े में से निकाल सके।

भाईयों-बहनों, मैं तहे दिल से बिहार का आदर करता हूँ क्योंकि मैं जब गुजरात में था या हिन्दुस्तान के कोने-कोने में पार्टी का काम करता था, तब भी जहाँ-जहाँ बिहार के लोग पहुंचे हैं, उस धरती को नंदनवन बना दिया है। आप मॉरिशस को देखिये, कहाँ से कहाँ पहुँच गया है, 150 साल पहले बिहार के लोग मजदूरी के लिए मॉरिशस गये और आज वहां की आन-बान-शान बिहार के लोगों की वजह से है। झारखंड भी तो बिहारियों की पहचान है और जैसे वहां भाजपा की सरकार बन गई, आज झारखंड चौथे नंबर पर है और ये बिहार वहीँ का वहीँ है क्योंकि यहाँ के नेता ऐसे कुंडली मार कर बैठे हैं कि बिहार को उठने ही नहीं दे रहे। ये नेता ही बिहार पर बोझ बन गए हैं और इन्होंने बिहार को तबाह कर दिया है। मेरा भरोसा बिहार के किसानों पर है, माताओं पर है, गरीबों पर है, मजदूरों पर है, विकास के लिए मेहनत करने वाले और पसीना बहाने वाले सभी भाईयों-बहनों पर है कि उनकी बदौलत बिहार आगे बढ़ने वाला है।

मेरे लिए बिहार का मतलब है, अंग्रेज़ी में स्पेलिंग को विस्तृत करें तो ‘बी’ से ब्रिलियंट, ‘आई’ से इनोवेटिव, ‘एच’ से हार्ड वर्किंग, ‘ए’ से एक्शन ओरिएंटेड और ‘आर’ से रिसॉर्सफुल। ये ताक़त है बिहार की और इसी ताक़त के भरोसे मैं बिहार को हिन्दुस्तान में नई ऊंचाईयों तक पहुँचाने का सपना देखता हूँ और उन सपनों को पूरा करने के लिए विकास का मंत्र लेकर आया हूँ।

जब मैं प्रधानमंत्री नहीं था तो एक बार हवाई सफ़र के दौरान एक सज्जन मेरे पास बैठे थे, वो मेरी तरफ़ देख रहे थे और मुझसे उन्होंने पूछा कि आप कोई अंगूठी या तावीज़ नहीं पहनते हो। मैंने कहा कि मैं जंतर-मंतर पर भरोसा नहीं करता। मैं लोकतंत्र पर भरोसा करता हूँ, किसी जंतर-मंतर पर नहीं। सवा सौ करोड़ देशवासी ही मेरे लिए सब कुछ हैं, मुझे और किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है। जिन्हें लोकतंत्र में श्रद्धा न हो, जिनके पास जनता-जनार्दन का विश्वास न हो, उनके लिए जंतर-मंतर के सिवा कोई चारा नहीं होता है। आपके परिवार में भी कभी कोई बीमार हो जाए, आप हर प्रकार की दवाई करवा ले, बड़े से बड़े डॉक्टर या दिल्ली के अच्छे से अच्छे अस्पताल में जाकर ईलाज करवा ले लेकिन बीमारी जब ठीक न हो तो परिवार वाले कितने भी पढ़े-लिखे क्यों हों, वो भी थक-हार कर किसी जंतर-मंतर वाले के पास चले जाते हैं। ये नीतीश जी भी ऐसे थक गए हैं, मन से ऐसे हार गए हैं, अब बचना मुश्किल है तो बाबा के पास चले जाते हैं। लोकतंत्र का मज़ाक बना दिया है।

आप बताईये कि आपके घर में बिजली न हो तो क्या जंतर-मंतर से बिजली आ जाएगी क्या? अगर पानी न हो तो क्या जंतर-मंतर से पानी आएगा क्या? अगर रोजगार न हो तो क्या जंतर-मंतर से रोजगार मिलेगा क्या? स्कूल में मास्टर जी न हो तो क्या जंतर-मंतर से मास्टर जी आ जाएंगे क्या? पहले बिहार ने जंगलराज झेला और क्या-क्या झेला, ये आपको अच्छे से पता है। यहाँ की महिलाएं गहने पहन कर बाहर नहीं जा सकती थी क्योंकि उन्हें लूट लिया जाता था। सरेआम अपहरण होता था, लूट चलती थी। पहले जंगलराज था और अब जंतर-मंतर का राज, ये दोनों जुड़वाँ भाई इकट्ठे हो गए। इन दोनों को इकठ्ठा मत होने दो, नहीं तो बिहार की बर्बादी के सिवा आपके नसीब में कुछ नहीं आएगा।

एक बात साफ़ है कि ये मधुबनी ज़िला हमारे अटल बिहारी वाजपेयी का सबसे प्रिय ज़िला है। उनका इस धरती पर इतना प्यार था जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते। वे स्वयं कविराज रहे हैं। ये मंडन मिश्र की धरती है जहाँ शंकराचार्य जी के साथ उनका संवाद हुआ। लोकतंत्र में संवाद की क्या ताक़त होती है, ये उनके संवाद ने दिखा दिया।

आज बिहार का हाल क्या है।।। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से बिहार हिन्दुस्तान में 29वें नंबर पर पड़ा है; शिक्षा की दृष्टि से बिहार हिन्दुस्तान में 29वें नंबर पर है; प्रति व्यक्ति विद्युत् की खपत में बिहार हिन्दुस्तान में 29वें नंबर पर पड़ा है; शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने की दृष्टि से बिहार हिन्दुस्तान में 32वें नंबर पर पड़ा है; ग्रामीण क्षेत्रों में टेली डेंसिटी के स्तर से बिहार हिन्दुस्तान में 28वें नंबर पर पड़ा है; रोजगार निर्माण की दृष्टि से बिहार हिन्दुस्तान में 20वें नंबर पर पड़ा है; मैं क्या-क्या गिनाऊं, झारखंड आप ही का हिस्सा था और अलग होने के बाद इतना आगे निकाल गया। अभी वर्ल्ड बैंक ने एक रिपोर्ट निकाली थी कि किस राज्य में लोग निवेश करना चाहते हैं, ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस कहाँ है। आपको जानकर दुःख होगा कि झारखंड, जो कभी बिहार की हिस्सा था, वो आज चौथे नंबर पर है और ये बिहार 21वें – 22वें नंबर पर खड़ा है। इस बर्बादी का करण ये सरकार है।

मैं विकास की बात करता हूँ क्योंकि मुझे बिहार के जीवन को बदलना है। गंगा घाट का विकास, कोसी को तो मैं कभी भूल नहीं सकता, जब यहाँ कोसी संकट था तो मैं यहाँ के लोगों की सेवा करना चाहता था लेकिन उनके अहंकार ने मुझे रोक दिया। बिहार में हमने 20 घाटों के विकास को करने का प्रोजेक्ट आरंभ कर दिया, 16 घाटों पर कार्य प्रगति में हैं और 4 घाट, जब आप छठ पूजा करने जाएंगे तब तक उनका भी काम पूरा कर दिया जाएगा। इसके लिए 262 करोड़ रूपया दिया गया, ये कोई छोटी रकम नहीं है। करीब-करीब 300 करोड़ रूपया हम गंगा घाटों के पुनर्निर्माण के लिए हम लगा चुके हैं।

बिहार का भाग्य बदल सकता है – बिहार का पानी और बिहार की जवानी। कोसी का पानी आता है और बिहार को तबाह करके चला जाता है और किसान के कोई काम नहीं आता है। इसके साथ-साथ इसी इलाक़े में दूसरी तरफ़ सूखा होता है। नरेगा के लिए 100 प्रतिशत पैसा केंद्र देता है और अगर इन्होंने नाले ठीक कर दिए होते और पानी को खेतों तक पहुंचा दिया होता तो मेरा किसान मिट्टी में से सोना पैदा कर देता। हिन्दुस्तान का 80 प्रतिशत मखाना यहाँ बनता है और देशभर के लोगों का व्रत तब तक पूरा नहीं होता जब तक मखाना खाने का सौभाग्य न मिले लेकिन उनको विकास से कोई लेना-देना नहीं है।

बिहार में पर्यटन के इतने अवसर हैं, हम पर्यटन को इतना बढ़ावा देना चाहते हैं ताकि गरीबों को रोजगार मिले। टूरिज्म में इतनी ताक़त होती है कि ये गरीब से गरीब को रोजगार देने में सक्षम है। फल और फूल बेचने वाला, खिलौने बेचने वाला, हर कोई कमा सकता है और कोई ज्यादा पूँजी की भी जरुरत नहीं है। महात्मा गाँधी सर्किट, पटना साहिब, रामायण सर्किट, बुद्ध के लिए पावापुरी, ढ़ेरों ऐसे उदाहरण हैं पर्यटन के क्षेत्र में। टूरिज्म सेक्टर के विकास के लिए हमने 600 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है ताकि यहाँ के गरीबों को रोजगार मिले।

बिहार के विकास के लिए 1 लाख 25 हज़ार करोड़ का पैकेज और 40 हज़ार करोड़ पुराना वाला जो कागज़ पर पड़ा था लेकिन जिसे कोई देने का नाम नहीं लेता था, हमने निर्णय लिया इसे देने का। हमने सब मिलाकर 1 लाख 65 हज़ार करोड़ का पैकेज दिया जो बिहार का भाग्य बदलने का ताकत रखता है। एनएच – 104, शिवहर, सीतामढ़ी, जयनगर, नरैया सेक्शन के 180 किमी अपग्रेडेशन के लिए 700 करोड़ रूपया, एनएच – 106, वीरपुर सेक्शन के 105 किमी के लिए पौने 600 करोड़ रूपया, गंगा सेतु पर मौजूदा लेन को 4 लेन करने के लिए 5,000 करोड़ रूपया, अनगिनत कह सकता हूँ।

मेरा मकसद है, तीन सूत्रीय कार्यक्रम – परिवारों का भाग्य बदलने के लिए पढ़ाई, कमाई और बुजुर्गों को दवाई। अगर बिहार के नौजवानों को सस्ती एवं अच्छी शिक्षा मिल जाए तो क्या उसे रोजगार के लिए भटकना पड़ेगा क्या। मेरा पहला संकल्प है, बिहार के नौजवानों के लिए पढ़ाई। दूसरी बात है, कमाई; नौजवान के लिए रोजगार। बिहार में पलायन रूकना चाहिए। ये पलायन रूकना चाहिए और बिहार के नौजवान को यहीं पर रोजगार का अवसर मिलना चाहिए। तीसरा कार्यक्रम है, दवाई; बुजुर्गों के लिए सस्ती दवाई, डॉक्टर और दवाखाना होना चाहिए। इंसान अगर बीमार हो तो कहाँ जाएगा। इसलिए आपके लिए मेरे तीन मंत्र हैं - पढ़ाई, कमाई और बुजुर्गों को दवाई। बिहार राज्य की भलाई के लिए तीन सूत्र है, बिजली, पानी एवं सड़क।  

एक बार मैंने ये छह चीज़ें कर लीन तो बिहार के नौजवानों का कभी पलायन नहीं होगा। बिहार हिन्दुस्तान के नक़्शे पर बहुत आगे बढ़ जाएगा और इसके लिए मैं आपका आशीर्वाद चाहता हूँ। चौथे चरण का मतदान अभी रिकॉर्ड ब्रेक चल रहा है, कतारें लगी हुई हैं, सुबह में भी वोटरों का प्रतिशत बढ़ रहा है। ये आंधी है, दो-तिहाई बहुमत से भाजपा, एनडीए की सरकार बनेगी, आपका यह आशीर्वाद मैं देख रहा हूँ। मैं आप सभी बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ। दोनों मुट्ठी बंद कर मेरे साथ ज़ोर से बोलिये –

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!       

बहुत-बहुत धन्यवाद!

Modi Govt's #7YearsOfSeva
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சர்வதேச யோகா தினத்தையொட்டி பிரதமர் ஆற்றிய உரையின் முக்கிய அம்சங்கள்
June 21, 2021
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அனைத்து நாடுகள், சமுதாயம் மற்றும் தனிநபர்களின் ஆரோக்கியத்துக்காக பிரார்த்திப்பதாக உரை
எம்-யோகா செயலி பற்றி அறிவித்த பிரதமர், 'ஒரே உலகம் ஒரே ஆரோக்கியம்' என்பதை எட்ட இது உதவும் எனத் தெரிவித்தார்
உலகம் முழுவதும் பெருந்தொற்றுக்கு எதிராக போரிடும் வலிமையையும், நம்பிக்கையையும் வளர்க்க மக்களுக்கு யோகா உதவியது; பிரதமர்
கொரோனா முன்களப் போர் வீரர்கள் யோகாவை தங்கள் கவசமாக மாற்றி, நோயாளிகளுக்கு உதவுகின்றனர்; பிரதமர்
துன்பங்களில் இருந்து ஒருமைத்தன்மைக்கு மாற்றும் கருவி யோகா, ஒருமைத்தன்மையை உணர்ந்து கொள்தல் யோகா-பிரதமர்
'உலகமே ஒரே குடும்பம்' என்னும் மந்திரத்துக்கு உலக அங்கீகாரம் கிடைத்துள்ளது;பிரதமர்
ஆன்லைன் வகுப்புகளின் போது, கொரோனாவுக்கு எதிராக போராட குழந்தைகளை யோகா வலிமையாக்கியுள்ளது; பிரதமர்

வணக்கம்! உங்கள் அனைவருக்கும் மகிழ்ச்சிகரமான 7-வது சர்வதேச யோகாதின வாழ்த்துகள்!

இன்று, உலகம் முழுவதும் கொரோனா பெருந்தொற்றுக்கு எதிராக போரிட்டு வரும் நிலையில், யோகா ஒரு நம்பிக்கை கீற்றாக திகழ்கிறது. கடந்த இரண்டு ஆண்டுகளாக, உலகம் முழுவதிலும் பல நாடுகளிலும், இந்தியாவிலும் பெரிய பொது நிகழ்ச்சிகள் நடைபெறவில்லை என்றாலும், யோகா மீதான உற்சாகம் ஒரு சிறிதும் குறையவில்லை. கொரோனாவுக்கு இடையிலும், இந்த ஆண்டின் யோகா தின கருப்பொருளான ‘’ ஆரோக்கியத்துக்கான யோகா’’ கோடிக்கணக்கான மக்களிடம் உற்சாகத்தை தீவிரப்படுத்தியுள்ளது. அனைத்து நாடுகள்,சமுதாயம், எல்லா மக்களும் ஆரோக்கியமாக இருக்க வேண்டும் என நான் பிரார்த்திக்கிறேன்.  ஒவ்வொருவரது வலிமைக்காகவும் நாம் ஒன்றிணைவோம்.

நண்பர்களே, நமது துறவிகள் யோகாவைப் பற்றி குறிப்பிட்டுள்ளனர். அதாவது ஒவ்வொரு சூழலிலும் உறுதியாக இருப்போம். கட்டுப்பாட்டின் அளவுகோலாக யோகாவை அவர்கள் பயன்படுத்தியுள்ளனர். மகிழ்ச்சியிலும், துன்பத்திலும் அது உறுதியாக திகழ்கிறது. இந்த உலக துன்பத்தில் இன்று யோகா தனது நிலையை நிரூபித்துள்ளது. இந்த ஒன்றரை ஆண்டுகளில், இந்தியா உள்ளிட்ட ஏராளமான நாடுகள் பெரும் நெருக்கடியை சந்தித்துள்ளன.

நண்பர்களே, பல நாடுகளில் யோகா நீண்டகாலமாக கடைப்பிடிக்கப்படும் கலாச்சார திருவிழாவாக இருக்கவில்லை. இந்தக் கடினமான காலத்தில், மக்கள் அதனை எளிதாக மறந்து விட்டு, புறந்தள்ளியிருக்க  முடியும். ஆனால், மாறாக, யோகா மீதான உற்சாகமும், பிரியமும் மக்களிடையே அதிகரித்துள்ளது. கடந்த ஒன்றரை ஆண்டுகளில், உலகின் ஒவ்வொரு பகுதியிலும் யோகாவை கற்க லட்சக்கணக்கானோர் விரும்பியுள்ளனர். வாழ்க்கையில், கட்டுப்பாடு மற்றும் ஒழுக்கத்தை போதிக்கும்  யோகாவைக் கற்க ஒவ்வொருவரும் விரும்புகின்றனர்.

நண்பர்களே, கண்ணுக்குத் தெரியாத தொற்று உலகை உலுக்கி வரும் நிலையில், திறமைகள், ஆதாரங்கள் அல்லது மன வலிமையுடன் எந்த நாடும் இதற்காக தயாராகவில்லை. துன்பத்தை எதிர்கொள்ளும் தன்னம்பிக்கையை யோகா ஊட்டுவதை நாம் கண்டுள்ளோம். இந்த நோயை எதிர்கொள்ளும் வலிமையை அதிகரிக்க யோகா மக்களுக்கு உதவியுள்ளது.

 முன்களப் பணியாளர்கள் மற்றும் மருத்துவர்களுடன் நான் உரையாடிய போது, கொரோனாவுக்கு எதிரான போரில் யோகாவை பாதுகாப்பு கவசமாக தாங்கள் மாற்றியுள்ளதாக அவர்கள் தெரிவித்தனர். யோகாவின் மூலம் மருத்துவர்கள் தங்களை வலுப்படுத்திக் கொண்டுள்ளனர். நோயாளிகள் விரைந்து குணமடைய  அதை அவர்களுக்கு  பயன்படுத்தியுள்ளனர். இன்று, மருத்துவர்களும், செவிலியர்களும் மருத்துவமனைகளில், நோயாளிகளுக்கு யோகாவை கற்பித்து வருவதையும், நோயாளிகள் தங்கள் அனுபவங்களைப் பகிர்ந்து கொள்வதையும் பற்றிய  பல்வேறு கதைகள் வெளிவருவதைக் காணலாம்.  ‘ பிரணாயாமம்’, ‘அனுலோம்-விலோம்’ போன்ற மூச்சுப் பயிற்சிகள் நமது சுவாச முறையை வலுப்படுத்த மிகவும் அவசியம் என உலகம் முழுவதும் நிபுணர்கள் அறிவுறுத்தி வருகின்றனர்.

நண்பர்களே, பெரும் தமிழ் துறவி திருவள்ளுவர், ‘’நோய் நாடி நோய்முதல் நாடி அதுதணிக்கும் வாய்நாடி வாய்ப்பச் செயல்.’’ என்று கூறியுள்ளார். அதாவது, ஒரு நோய் வந்தால், அதற்கு என்ன காரணம் என அதன் வேரைக் கண்டறிந்து, அதன்பின்னர் சிகிச்சையை உறுதி செய்ய வேண்டும். யோகா இதற்கான வழியைக் காட்டுகிறது. இன்று, மருத்துவ அறிவியலும் குணமடைதல் பற்றி ஆர்வம் கொண்டுள்ளது. இந்த விஷயத்தில் யோகா பயனளிக்கிறது. யோகாவின் இந்த அம்சம் குறித்து, உலகம் முழுவதும் நிபுணர்கள் பல்வேறு விதமான அறிவியல் ஆராய்ச்சிகளை மேற்கொண்டுள்ளது குறித்து நான் மனநிறைவு அடைகிறேன்.

நமது உடலுக்கு யோகாவால் ஏற்படும் நன்மைகள், நமது எதிர்ப்பு சக்தி விஷயத்தில் ஏற்படும் நேர்மறையான விளைவுகள் குறித்து பல ஆய்வுகள் நடைபெற்று வருகின்றன. இன்றைய சூழலில், பல பள்ளிகளில் ஆன்லைன் வகுப்புகளை தொடங்குவதற்கு முன்பாக, மாணவர்களுக்கு 10-15 நிமிடம் மூச்சுப் பயிற்சி-யோகா ஆகியவை போதிக்கப்படுவதை நாம் காண்கிறோம். இது கொரோனாவுக்கு எதிராக போராட குழந்தைகளைத் தயார்படுத்துகிறது.

நண்பர்களே, நமது இந்தியத் துறவிகள், யோகா செய்வதன் மூலம், நாம் நல்ல ஆரோக்கியத்தைப் பெற்று நீண்ட மகிழ்ச்சியான வாழ்க்கையை வாழ்வது எப்படி என்பதை நமக்கு கற்பித்துள்ளனர். நமக்கு ஆரோக்கியம் என்பது பெரும் வாய்ப்பாகும். நல்ல உடல் நலம் அனைத்து வெற்றிகளுக்கும் அடிப்படை. நமது இந்திய சாதுக்கள் ஆரோக்கியம் பற்றி பேசும்போதெல்லாம், அது உடல் ஆரோக்கியத்தைப் பற்றியதாக மட்டும் இருந்ததில்லை. உடல் நலத்துடன் மன நலத்தையும் யோகா வலியுறுத்துகிறது. நாம் மூச்சுப் பயற்சி, தியானம் மற்றும் இதர யோகா பயிற்சிகளை மேற்கொள்ளும் போது, நமது மனதின் உள் உணர்வை உணருகிறோம். யோகாவின் மூலம், நமது வலிமையான உள்மனதின் ஆற்றலை நாம் உணர்கிறோம். உலகில் எந்தப் பிரச்சினையும், எதிர்மறை விஷயங்களும் நம்மை அசைக்க முடியாது என்பதை யோகா உணர்த்துகிறது. யோகா அழுத்தத்திலிருந்து வலிமையை, எதிர்மறை எண்ணத்திலிருந்து படைப்பாற்றலை அடையும் வழியைக் காட்டுகிறது. மன அழுத்தத்திலிருந்து, மகிழ்ச்சியையும், மகிழ்ச்சியிலிருந்து அருளையும் யோகா நமக்கு அளிக்கிறது.

நண்பர்களே, ஏராளமான பிரச்சினைகள் வெளியேறுவதாக யோகா நமக்கு கூறுகிறது. ஆனால், எண்ணற்ற தீர்வுகள் நம்மிடம் உள்ளன. நமது பிரபஞ்சத்தில் நாமே பெரும் ஆற்றல் ஆதாரமாக உள்ளோம். நம்மிடம் உள்ள பல பிளவுகளால், அந்த ஆற்றலை நாம் உணரவில்லை. மக்களின் வாழ்க்கையைத் துன்பம் சூழும் நேரங்களில், அவை ஒட்டுமொத்த ஆளுமையைப் பிரதிபலிக்கின்றன. பிளவுகளில் இருந்து ஒற்றுமைக்கு திரும்புவதே யோகா. ஒருமைத் தன்மையை உணரும் நிரூபிக்கப்பட்ட வழியே யோகா. குருதேவ் தாகூரின் வார்த்தைகளை நான் நினைவு படுத்துகிறேன். ’ நமது தனித்தன்மை என்பது கடவுளிடம் இருந்தும், மற்ற மனிதர்களிடம் இருந்தும் நம்மைத் தனிமைப்படுத்துவதல்ல. யோகாவின் முடிவற்ற உணர்வே ஒருமைத்தன்மை’’ என்று அவர் கூறியுள்ளார்.

இந்தியா பல யுகங்களாகப் பின்பற்றி வரும் உலகமே ஒரே குடும்பம் என்னும் மந்திரம் தற்போது, உலக அங்கீகாரத்தைப் பெற்றுள்ளது. மனித குலத்துக்கு அச்சுறுத்தல் ஏற்படும் போது, நாம் அனைவரும், பரஸ்பர நலனுக்காக இப்போது பிரார்த்திக்கிறோம். முழுமையான ஆரோக்கியத்துக்கான வழியை  யோகா எப்போதும்  காட்டுகிறது. யோகா மகிழ்ச்சியான வாழ்க்கையை அளிக்கிறது. மக்களின் சுகாதாரத்தில் யோகா தொடர்ந்து தடுப்பாகவும், அதேசமயம் ஆக்கபூர்வமான பங்கையும் வகிக்கும் என நான் உறுதியாக நம்புகிறேன்.

நண்பர்களே, ஐக்கிய நாடுகள் சபையில் இந்தியா சர்வதேச யோகாதினத்தை முன்மொழிந்த போது, அதன் பின்னால் இருந்த எழுச்சி இந்த யோகா அறிவியலை உலகம் முழுவதும் கொண்டு செல்ல உதவியது. இன்று, இந்த திசையில் இந்தியா ஐக்கிய நாடுகள் சபை மற்றும் உலக சுகாதார அமைப்பின் ஒத்துழைப்புடன் மற்றொரு முக்கிய நடவடிக்கையை எடுத்துள்ளது.

இப்போது, எம்-யோகா செயலியின் ஆற்றலை உலகம் பெறவுள்ளது. இந்தச் செயலியில், ஏராளமான யோகா பயிற்சி வீடியோக்கள், உலகின் பல்வேறு மொழிகளில், அடிப்படை யோகா விதிமுறைகளுடன் கிடைக்கும். நவீன தொழில்நுட்பம் மற்றும் பழமையான அறிவியலின் கலவைக்கு இது பெரும் எடுத்துக்காட்டாகும். உலகம் முழுவதும் யோகாவை விரிவுபடுத்துவதில் எம் –யோகா செயலி பெரும்பங்காற்றும் என்றும், ஒரே உலகம் ஒரே ஆரோக்கியம் என்பதை வெற்றிகரமாக செயல்படுத்த முயற்சி மேற்கொள்ளும் எனவும் நான் நிச்சயமாக நம்புகிறேன்.

நண்பர்களே, கீதையில், யோகா துன்பங்களில் இருந்து விடுதலை அளிக்கிறது என சொல்லப்பட்டுள்ளது. நாம் யோகா என்னும் மனிதகுலத்தின் இந்தப் பயணத்தில், அனைவரையும் உடன் அழைத்துக் கொண்டு, முன்னெடுத்துச் செல்ல வேண்டும். எந்த இடமாக இருந்தாலும், எந்தச் சூழலாக இருந்தாலும், எந்த வயதாக இருந்தாலும், யோகாவில் அனைவருக்கும் ஏதாவதொரு தீர்வு உள்ளது. இன்று, உலகில், யோகாவைப் பற்றி தெரிந்துகொள்ள விரும்புபவர்களின் எண்ணிக்கை அதிகரித்து வருகிறது. யோகா நிறுவனங்களின் எண்ணிக்கையும், இந்தியாவிலும், உலகிலும் அதிகரித்து வருகின்றன. இத்தகைய நிலையில், யோகாவின் அடிப்படை தத்துவத்தின் முக்கிய அம்சத்திலிருந்து வழுவாமல், அனைவரிடமும் அதனைக் கொண்டு செல்வது அவசியமாகும். யோகா ஆசிரியர்கள், பயிற்சியாளர்கள் என யோகாவுடன் தொடர்பு கொண்டவர்கள் ஒன்று சேர்ந்து இந்தப் பணியைச் செய்ய வேண்டும். யோகா பற்றிய உறுதிமொழியை நாம் ஏற்கவேண்டும். இந்த உறுதி ஏற்பில் நமக்கு பிரியமானவர்களையும் இணைக்க வேண்டும். ‘’ ஒத்துழைப்புக்கு யோகா’’ என்னும் இந்த மந்திரம் புதிய எதிர்காலத்துக்கான வழியை நமக்கு காட்டுவதுடன், மனித குலத்தை அதிகாரமயப்படுத்தும்.

உங்களுக்கும், மனித குலம் அனைத்துக்கும் சர்வதேச யோகா தின வாழ்த்துக்களை நான் தெரிவித்துக் கொள்கிறேன்.

நன்றிகள் பல!