Shri Narendra Modi's address at the Vivekananda NMO Conference

Published By : Admin | February 16, 2013 | 13:58 IST
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मंच पर बिराजमान एन.एम.ओ. के सभी पदाधिकारी, भारत के भिन्न-भिन्न भागों से आए हुए सभी प्रतिनिधि बंधु और नौजवान मित्रों..!

हम लोग एक ही अखाड़े से आए हैं और इसलिए हम सबको अपनी भाषा का पता है, भावनाओं का पता है, रास्ता भी मालूम है, लक्ष्य का भी पता है और इसलिए कौन किसको क्या कहे, कौन किससे क्या सुने..? और इसलिए मैं कुछ ना भी बोलूं तो भी बात पहुँच जाएगी। मैं अनुमान लगा सकता हूँ कि मेरे यहाँ आने से पहले सुबह से अब तक आपने क्या किया होगा और मैं ये भी अनुमान लगा सकता हूँ कि कल क्या करोगे। मैं ये भी अंदाज कर सकता हूँ कि अगले अधिवेशन का आपका ऐजेन्डा क्या होगा, क्योंकि हम सब लोग एक ही अखाड़े से आए हैं..!

मित्रों, स्वामी विवेकानंद जी की जब बात होती है तो एक बात उभर करके आती है कि वो परिस्थिति के बहावे में बहने वाले शख्सियत नहीं थे। जिन लोगों ने स्वामी विवेकानंद जी को पढ़ा होगा और जिन्होंने उस कार्यकाल की समाज व्यवस्था के सूत्रधारों को पढ़ा होगा, तो वे भलीभाँति अंदाजा लगा सकते हैं कि विवेकानंद जी को कोई काम सरलता से करने का सौभाग्य ही नहीं मिला था। हर पल, हर छोटी बात के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ा था। कोई चीज उन्हें सहज मिली नहीं थी और जब मिली तब स्वीकार्य नहीं थी। यह उनकी एक और विशेषता थी। रामकृष्ण परमहंस मिले, तो उनको भी उन्होंने सहज रूप से स्वीकार्य नहीं किया, उनकी भी उन्होंने कसौटी की..! काली के पास गए, रामकृष्ण देव की ताकत थी कि काली मिली, लेकिन स्वीकार करने से इनकार कर दिया। तो एक ऐसी शख्सियत की तरफ हम जाएं। हम जीवन में संघर्ष के लिए कितने कटिबद्घ हैं, कितने प्रतिबद्घ हैं..! थोड़ा सा भी हवा का रूख बदल जाए तो कहीं बैचेनी तो नहीं अनुभव करते, ऐसा तो नहीं लगता आपको कि यार, अब क्या होगा, हालात तो कुछ अनुकूल नहीं हैं..! तो मित्रों, वो जिंदगी नहीं जी सकते हैं, और जो खुद जिंदगी नहीं जी सकते वो औरों को जिंदगी जीने की ताकत कैसे दे सकते हैं..! और डॉक्टर का काम होता है औरों को जिंदगी जीने की ताकत देना। कोई डॉक्टर नहीं चाहेगा कि उसका पेशेन्ट हमेशा उस पर निर्भर रहे। डॉक्टर और वकील में यही तो फर्क होता है..! और वहीं पर सोचने की प्रवृति में अंतर नजर आता है। और अगर हमने उसको आत्मसात किया... मित्रों, जो सफल डॉक्टर है, उसका बंगला कितना बड़ा है, घर के आगे गाड़ियाँ कितनी खड़ी हैं, बैंक बैलेंस कैसा है... उसके आधार पर कभी भी किसी डॉक्टर की सफलता का निर्धारण नहीं हुआ है। डॉक्टर की सफलता का निर्धारण इस बात पर हुआ है कि उसने कितनी जिंदगी को बचाया, कितनों को नया जीवन दिया, किसी असाध्य रोग के मरीज के लिए उसने जिंदगी कैसे खपा दी, एक डिज़ीज़ के लिए चैन कैसे खोया..! मित्रों, इसलिए अगर मैं एन.एम.ओ. से जुड़ा हुआ हूँ, राष्ट्रीय भावना से भरा हुआ हूँ, सुबह-शाम दिन-रात भारत माँ की जय कहता हूँ, लेकिन भारत माँ के ही अंश रूप एक मरीज जो मेरे पास खड़ा है, वो मरीज सिर्फ एक इंसान नहीं है, मेरी भारत माँ का जीता-जागता अंश है और उस मरीज की सेवा ही मेरी भारत माँ की सेवा है, ये भाव जब तक भीतर प्रकटता नहीं है तब तक एन.एम.ओ. की भावना ने मेरी रगो में प्रवेश नहीं किया है..!

मित्रों, अभी देश 1962 की लड़ाई के पचास साल को याद कर रहा था। मीडिया में उसकी चर्चा चल रही थी। कौन दोषी, कौन अपराधी, किसकी गलती, क्या गलती... इसी पर डिबेट चल रहा था। मित्रों, अगर पचास साल के बाद भी इस पीढी को एक कसक हो, एक दर्द हो, एक पीड़ा हो कि कभी उस लड़ाई में हम हारे थे, हमारी मातृभूमि को हमने गंवाया था, तो उसमें विजय को प्राप्त करने के बीज भी मौजूद होते हैं। मित्रों, जिस स्वामी विवेकानंद जी की हम बात करते रहते हैं, जो सदा सर्वदा हमें प्रेरणा देते रहते हैं, लेकिन क्या कभी हमने सोचा कि जब आज उनके 150 साल मना रहे हैं और 125 साल पहले 25 साल की आयु में जिस नौजवान संन्यासी ने एक सपना देखा था कि मैं अपनी आंखों के सामने देख रहा हूँ कि मेरी भारत माता जगदगुरू के स्थान पर विराजमान होगी, मैं उसका भव्य, दिव्य रूप खुद देख रहा हूँ..! ये विवेकानंद जी ने 25 साल की आयु में दुनिया के सामने डंके की चोट पर कहा था। किसके भरोसे कहा था..? उन्होंने व्याख्यायित किया था कि इस देश के नौजवान ये परस्थिति पैदा करेंगे..! 150 साल मनाते समय क्या दिल में कसक है, दिल में दर्द है, पीड़ा है कि ऐसे महापुरुष जिसके प्रति हमारी इतनी भक्ति होने के बावजूद भी, 25 साल की आयु में जिन शब्दों को उन्होंने कहा था, 125 साल उन शब्दों को बीत गए, वो सपना अभी तक पूरा नहीं हुआ, क्या उसकी पीड़ा है, दर्द है..? पीढ़ियाँ पूरी हो गई, हम भी आए हैं और चले जाएंगे, क्या वो सपना अधूरा रहेगा..? अगर वो सपना अधूरा रहना ही है तो 150 साल मनाने से शायद ये कर्मकांड हो जाएगा और इसलिए मैं चाहता हूँ कि 150 साल जब मना रहे हैं तब, हम कुछ पा सकें या ना पा सकें, कुछ परिस्थितियां पलट सकें या ना पलट सकें, लेकिन कम से कम दिल में एक दर्द तो पैदा करें, एक कसक तो पैदा करें कि हमने समय गंवा दिया..!

मित्रों, ये महापुरूष ने जीवन के अंतकाल के आखिरी समय में कहा था कि समय की माँग है कि आप अपने भगवान को भूल जाओ, अपने ईष्ट देवता को भूल जाओ। अपने परमात्मा, अपने ईश्वर को डूबो दो। एकमात्र भारत माता की पूजा करो। एक ही ईष्ट देवता हो..! और पचास साल के लिए करो। और विवेकानंद जी के ऐसा कहने के ठीक पचास साल के बाद 1947 में ये देश आजाद हुआ था। मित्रों, कल्पना करो कि 1902 में जब स्वामी विवेकानंद जी ने ये बात कही थी, उस समय आज का मीडिया होता तो क्या होता..? आज के विवेचक होते तो क्या होता..? आज के आलोचक होते तो क्या होता..? चर्चा यही होती कि ये कैसा व्यक्ति है, जिसने ऐजेंडा बदल दिया और सिद्घांतो को छोड़ दिया..! जिस भगवान के लिए पांच-पांच हजार साल से एक कल्पना करके पीढ़ियों तक जो समाज चला, ये कह रहे हैं कि इसको छोड़ दो..! ये तो डूबो देगा देश को और संस्कृति को। सब छोड़ने के लिए कह रहा है, सब भगवान को छोड़ने के लिए कह रहा है..! पता नहीं उन पर क्या-क्या बीतती और बीती भी होगी, थोड़ा बहुत तो तब भी किया ही होगा..! हम जिस परिवार से आ रहे हैं, जिस परंपरा से आ रहे हैं, क्या हम इसमें से कुछ सबक सीखने के लिए तैयार हैं..? अगर सबक सीखने की ताकत होगी तो रास्ते अपने आप मिल जाएगें और मंजिल भी मिल जाएगी..! लेकिन इसके लिए बहुत बड़ा साहस लगता है दोस्तों, बहुत बड़ा साहस लगता है। अपनी बनी बनाई दुनिया को छोड़ कर के निकलने के लिए एक बहुत बड़ी ताकत चाहिए और अगर वो ताकत खो दें, तो हम शरीर से तो जिंदा होंगे लेकिन प्राण-शक्ति का अभाव होगा..! इसलिए जब विवेकानंद जी को याद करते हैं तब उस सामर्थ्य के आविष्कार की आवश्यकता है। उस सामर्थ्य को लेकर के जीना, सपनों को देखना, सपनों को साकार करना, उस सामर्थ्यता की आवश्यकता है।

आप एक डॉक्टर के नाते काम कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जो विद्यार्थी मित्र हैं, वे डॉक्टर बनने वाले हैं। यहाँ तक पहुँचने के लिए आपने क्या कुछ नहीं छोड़ा होगा..! दसवीं कक्षा में इतने मार्क्स लाने के लिए कितनी रात जगे होंगे..! 12वीं के लिए माँ-बाप को रात-रात दौड़ाया होगा। देखिए पेपर्स कहाँ गए हैं, देखिए रिजल्ट क्या आ रहा है..! डोनेशन से सीट मिले तो कहाँ मिले, मेरिट पर मिले तो कहाँ मिले..! कोई बात नहीं, एम.बी.बी.एस. नहीं तो डेन्टल ही सही..! अरे, वो भी ना मिले तो कोई बात नहीं, फिज़ीयोथेरेपी सही..! ना जाने कितने-कितने सपने बुने होंगे..! और अब एक बार वहाँ प्रवेश कर गए..! मैं मेडिकल स्टूडेंट्स से प्रार्थना करता हूँ कि आप सोचिए कि 12वीं की एक्जाम तक की आपकी मन:स्थिति, रिजल्ट आने तक की आपकी मन:स्थिति या मेडिकल कॉलेज में एंट्रेंस तक की मन:स्थिति... जिन भावनाओं के कारण, जिन प्रेरणा के कारण आप रात-रात भर मेहनत करते थे, क्या मेडिकल में प्रवेश पाने के बाद वो ऊर्जा जिंदा है, दोस्तों..? वो प्रेरणा आपको पुरूषार्थ करने के लिए ताकत देती है..? अगर नहीं देती है तो फिर आप भी कहीं पैसे कमाने का मशीन तो नहीं बन जाओगे, दोस्तों..? इतनी तपस्या करके जिस चीज को आपने पाया है, ये अगर धन और दौलत को इक्कठा करने का एक मशीन बन जाए तो

मित्रों, 10, 11, 12वीं कक्षा की आपकी जो तपस्या है, आपके लिए आपके माँ-बाप रात-रात भर जगे हैं, आपके छोटे भाई ने भी टी.वी. नहीं देखा, क्यों..? मेरी बड़ी बहन के 12वीं के एक्जाम हैं। आपकी माँ उसके सगे भाई की शादी में नहीं गई, क्यों..? बेटी की 12वीं की एक्जाम है। मित्रों, कितना तप किया था..! मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ दोस्तों, उस तप को कभी भूलना मत। इस चीज को पाने के लिए जो कष्ट आपने झेला है, हो सकता है वो कष्ट खुद ही आपके अंदर समाज के प्रति संवेदना जगाने का कारण बन जाए, आपको बाहर से किसी ताकत की आवश्यकता नहीं रहे..! मित्रों, एक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर के पास जब एक मरीज आता है, तो उस ऑर्थोपेडिक डॉक्टर को तय करना होगा कि उस मरीज में उसे इंसान नजर आता है कि हड्डियाँ नजर आती हैं..! मित्रों, अगर उसे हड्डियाँ नजर आती हैं तो बड़े एक्सपर्ट डॉक्टर के रूप में उसकी हड्डियाँ ठीक करके उसे वापिस भेज भी देगा, लेकिन अगर इंसान नजर आएगा तो उसका जीवन सफल हो जाएगा।

मित्रों, जीवन किस प्रकार से बदल रहा है, जीवन के मूल्य किस प्रकार से बदल रहे हैं..! अर्थ प्रधान जीवन बनता जा रहा है और अर्थ प्रधान जीवन के कारण स्थितियाँ क्या बनी हैं..? डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन दे दिया, हाथ को काटना पड़ा, हाथ चला गया... ठीक है, दो लाख का इन्श्योरेंस है, दो लाख का बीमा मंजूर हो जाएगा..! एक आंख चली गई, ढाई लाख का बीमा मंजूर हो जाएगा..! एक्सीडेंट हुआ, एक पैर कट गया... पाँच लाख मिल जाएंगे..! मित्रों, क्या ये शरीर, ये अंग-उपांग रूपयों के तराजू से तोले जा सकते हैं..? हाथ कटा दो लाख, पैर कटा पाँच लाख, आँख चली गई डेढ लाख दे दो..! मित्रों, आँख चली जाती है तो सिर्फ एक अंग नहीं जाता है, जिंदगी का प्रकाश चला जाता है। पैर कटने से शरीर का एक अंग नहीं जाता है, पैर कटता है तो जिंदगी की गति रूक जाती है। क्या जीवन को उस नजर से देखने का प्रयास किया है हमने..? और इसलिए मित्रों, सामान्य मानवी के मन में डॉक्टर की कल्पना क्या है..? सामान्य मानवी डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप मानता है, सामान्य मानवी मानता है कि जैसे भगवान मेरी जिंदगी बचाता है, वैसे ही अगर डॉक्टर के भरोसे मेरी जिंदगी रख दूँ तो हो सकता है कि वो मेरी जिंदगी बचा ले..! आप एक पेशेंट को बचाते हैं ऐसा नहीं है, आप कईयों के सपनों को संजो देते हैं, जब किसी कि जिंदगी बचाते हैं..! लेकिन ये महात्मा गांधी की तस्वीर वाली नोट से नहीं होता है, महात्मा गांधी के जीवन को याद रखने से होता है और ये भाव जगाने का काम एन.एम.ओ. के द्वारा होता है।

मित्रों, मुझे भूतकाल में गुजरात के एन.एम.ओ. के कुछ मित्रों से बातचीत करने का अवसर मिला है और विशेष कर के ये जब नार्थ-ईस्ट जाकर के आते हैं तो उनके पास कहने के लिए इतना सारा होता है, जैसे कंप्यूटर के ऊपर आप किसी स्विच पर क्लिक करो और सारी दुनिया उतर आती है, वैसे ही उनको पूछो कि नार्थ-ईस्ट कैसा रहा तो समझ लीजिए आपका दो-तीन घंटा आराम से बीत जाएगा..! वो हर गली-मोहल्ले की बात बताता है। मित्रों, नार्थ-ईस्ट के मित्रों को हमसे कितना लाभ होता होगा उसका मुझे अंदाजा नहीं है, लेकिन उनके कारण जाने वाले को लाभ होता होगा ये मुझे पूरा भरोसा है। अपनों को ही जब अलग-अलग रूप में देखते हैं, मिलते हैं, जानते हैं, उनकी भावनाओं को समझते हैं तो वो हमारी पूंजी बन जाती है, वो हमारी अपनी ऊर्जा शक्ति के रूप में कन्वर्ट हो जाती है और उसको लेकर के हम अगर आगे चलते हैं तो हमें एक नई ताकत मिलती है।

मित्रों, कभी-कभी हमारी विफलता का एक कारण ये होता है कि हमें अपने आप पर आस्था नहीं होती है, हमें खुद पर भरोसा नहीं होता है और ज्यादातर समस्या की जड़ में ये प्रमुख कारण होता है। अगर आपको अपनी ही बात पर आस्था नहीं हो और आप चाहो कि दुनिया इसको माने तो ये संभव नहीं है। होमियोपैथी डॉक्टर बन गया क्योंकि वहाँ एडमिशन नहीं मिला था। लेकिन क्योंकि अब डॉक्टर का लेबल लग गया है तो मैं होमियोपैथी नहीं, अब तो मैं जनरल प्रेक्टिस करूंगा और एलोपैथी का भी उपयोग करूँगा..! अगर मेरी ही मेरी स्ट्रीम पर आस्था नहीं है, तो मैं कैसे चाहूँगा की और पेशेंट भी होमियोपैथी के लिए आएँ..! मैं आयुर्वेद का डॉक्टर बन गया। पता था कि उसमें तो हमारा नंबर लगने वाला नहीं है तो पहले से ही संस्कृत लेकर रखी थी..! मुझे जानकारियाँ हैं ना..? मैं सही बोल रहा हूँ ना..? आप ही की बात बता रहा हूँ ना..? नहीं, आपकी नहीं है, जो बाहर है उनकी है..! आयुर्वेद डॉक्टर का बोर्ड लगा दिया, फिर इंजेक्शन शुरू..! हमारी अपनी चीजों पर हमारी अगर आस्था नहीं है तो हम जीवन में कभी सफल नहीं हो सकते। मैं एन.एम.ओ. से जुड़े मित्रों से आग्रह करूंगा कि जिस रास्ते को हमने जीवन में पाया है, जहाँ हम पहुंचे हैं उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाना भी हमारा काम है।

मित्रों, ये तो अच्छा हुआ है कि पूरी दुनिया में होलिस्टिक हैल्थ केयर का एक माहौल बना हुआ है। साइड इफैक्ट ना हो इसकी कान्शसनेस आई है और इसके कारण लोगों ने ट्रेडिशनल मार्ग पर जाना शुरू किया है और उसका बेनिफिट भी मिला है सबको। लेकिन व्यावसायिक सफलता एक बात है, श्रद्धा दूसरी बात है। और कभी-कभी डॉक्टर को तो श्रद्घा चाहिए, लेकिन पेशेंट को भी श्रद्घा चाहिए..! मैं जब संघ के प्रचारक के नाते शाखा का काम देखता था, तो बड़ौदा जिले में मेरा दौरा चल रहा था। वहां एक चलामली करके एक छोटा सा स्थान है, तो वहाँ एक डॉक्टर परिवार था जो संघ से संपर्क रखता था तो वहाँ हम जाते थे और उन्हीं के यहाँ रहते थे। वहाँ सभी ट्राइबल पेशेंट आते थे और सबसे पहले इंजेक्शन की माँग करते थे। और उनकी ये सोच थी कि डॉक्टर अगर इन्जेक्शन नहीं देता है तो डॉक्टर निकम्मा है, इसको कुछ भी आता नहीं है..! ये उनकी सोच थी और इन लोगों को भी उसको इंजेक्शन की जरूरत हो, ना हो, कुछ भी हो, मगर इंजेक्शन देना ही पड़ता था..! कभी-कभी पेशेंट की मांग को भी उनको पूरा करना पड़ता है। मित्रों, मेरे कहने का मतलब ये था कि हमें इन चीजों पर श्रद्घा होना बहुत जरूरी है। एक पुरानी घटना हमने सुनी थी कि पुराने जमाने में जो वैद्यराज होते थे, वो अपना सारा सामान लेकर के भ्रमण करते रहते थे। और अगर उनको पता हो कि इस इलाके में इतनी जड़ी-बूटियों का क्षेत्र है तो उसी गाँव में महीना, छह महीना, साल भर रहना और जड़ी-बूटियों का अभ्यास करना, दवाइयाँ बनाना, प्रयोग करना, उसमें से ट्रेडिशन डेवलप करना, फिर वहां से दूसरे इलाके में जाना, वहां करना... पुराने जमाने में वैद्यराज की जिंदगी ऐसी ही हुआ करती थी। एक बार एक गाँव में एक वैद्यराज आए तो एक पेशेंट उनको मिला, उसकी कुछ चमडी की बिमारी थी, कुछ कठिनाइ थी, कुछ ठीक नहीं हो रहा था। वैद्यराज जी को उसने कहा कि मैं तो बहुत दवाई कर-कर के थक गया, दुनिया भर की जड़ी-बूटी खा-खा कर मर रहा हूँ, मेरा तो कोई ठिकाना नहीं रहा है और मैं बहुत परेशान रहता हूँ..! तो वैद्यराज जी ने कहा कि अच्छा भाई, कल आना..! हफ्ते भर रोज आए-बुलाए, कोई दवाई नहीं देते थे, केवल बात करते रहते थे..! आखिर उसने कहा कि वैद्यराज जी, आप मुझे बुलाते हो लेकिन कोई दवाई वगैरह तो करो..! बोले भाई, दवाई तो है मेरे पास लेकिन उसके लिए परहेज की बड़ी आवश्यकता है, तुम करोगे..? तो बोला अरे, मैं इतना जिंदगी में परेशान हो चुका हूँ, जो भी परहेज है उसे मैं स्वीकार कर लूंगा..! तो वैद्यराज बोले कि चलो मैं दवाई शुरू करता हूँ। तो उन्होंने दवाई शुरू की और परहेज में क्या था..? रोज खिचडी और कैस्टर ऑइल, ये ही खाना। खिचड़ी और कैस्टर ऑयल मिला कर के खाना..! अब आपको सुन कर भी कैसा लग रहा है..! तो उसने कहा कि ठीक है। अब वो एक-दो महीना उसकी दवाई चली और उतने में वो वैद्यराज जी को लगा कि अब किसी दूसरे इलाके में जाना चाहिए, तो वो चल पड़े और उसको बता दिया कि ये ये जड़ी-बूटियाँ हैं, ऐसे-ऐसे दवाई बनाना और ऐसे तुमको करना है..! बीस साल के बाद वो वैद्यराज जी घूमते घूमते उस गाँव में वापस आए। वापिस आए तो वो जो पुराना मरीज था उसको लगा कि हाँ ये ही वो वैद्यराज है जो पहले आए थे। तो उसने जा कर के उनको साष्टांग प्रणाम किया। साष्टांग प्रणाम किया तो वैद्यराज जी ने सोचा कि ये कौन सा भक्त मिल गया जो मुझे साष्टांग  प्रणाम कर रहा है..! तो बोले भाई, क्या बात है..? तो उसने पूछा कि आपने मुझे पहचाना..? बोले नहीं भाई, नहीं पहचाना..! अरे, आप बीस साल पहले इस गाँव में आए थे और आपने एक मरीज को ऐसी-ऐसी दवाई दी थी, मैं वही हूँ और मेरा सारा रोग चला गया और मैं ठीक-ठाक हूँ..! तो वैद्यराज जी ने पूछा कि अच्छा भाई, वो परहेज तूने रखी..? अरे साब, परहेज को छोड़ो, आज भी वही खाता हूँ..! मित्रों, उस वैद्यराज की आस्था कितनी और इस पेशेंट की तपश्चर्या कितनी और उसके कारण परिणाम कितना मिला, आप अंदाज लगा सकते हैं। और इसलिए हम जिस क्षेत्र में हैं उस क्षेत्र को हमें उस प्रकार से देखना होगा।

मित्रों, हमारे यहाँ विवेकानंद जी की जब बात आती है तो दरिद्र नारायण की सेवा, ये सहज बात निकल कर आती है। आज हम स्वामी विवेकानंद जी के 150 वर्ष मना रहे हैं तब हम विवेकानंद जी की उसी भावना को अपने शब्दों में प्रकट करके आगे बढ़ सकते हैं क्या? विवेकानंद जी के लिए जितना माहात्म्य दरिद्र नारायण की सेवा का था, एक डॉक्टर के नाते मेरे लिए भी दर्दी नारायण है, ये दर्दी नारायण की सेवा करना और दर्दी ही भगवान का रूप है, ये भाव लेकर के अगर हम आगे बढ़ते हैं तो मुझे विश्वास है कि जीवन में हमें सफलता का आंनद और संतोष मिलेगा। विवेकानंद जी की 150 वीं जयंती हमारे जीवन को मोल्ड करने के लिए एक बहुत बड़ा अवसर बन कर के रहेगी।

बहुत सारे मित्रों गुजरात के बाहर से आए हैं। कई लोग होंगे जिन्होंने गुजरात पहली बार देखा होगा। और अब आपको कभी अगर अमिताभ बच्चन जी मिल जाए तो उन्हें जरूर कहना कि हमने भी कुछ दिन गुजारे थे गुजरात में..! आप आए हैं तो जरूर गिर के लायन देखने के लिए चले जाइए, आए हैं तो सोमनाथ और द्वारका देखिए, कच्छ का रन देखिए..! इसलिए देखिए क्योंकि मेरा काम है मेरे राज्य के टूरिज्म को डेवलप करना..! और हम गुजरातियों के ब्लड में बिजनेस होता है, तो मैं आया हूँ तो बिजनेस किये बिना जा नहीं सकता। मेरा इन दिनों का बिजनेस यही है कि आप मेरे गुजरात में टूरिज्म का मजा लिजीए, आप गुजरात को देखिए, सिर्फ इस कमरे में मत बैठे रहिए। अधिवेशन के बाद जाइए, बीच में से मत जाइए..!

बहुत-बहुत धन्यवाद, मित्रों..!

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हिमाचल प्रदेशातील बिलासपूर येथे विविध विकास प्रकल्पांचा शुभारंभ करताना पंतप्रधानांनी केलेले भाषण
October 05, 2022
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PM dedicates AIIMS Bilaspur to the nation
PM inaugurates Government Hydro Engineering College at Bandla
PM lays foundation stone of Medical Device Park at Nalagarh
PM lays foundation stone of project for four laning of National Highway worth over Rs 1690 crores
“Fortunate to have been a part of Himachal Pradesh's development journey”
“Our government definitely dedicates the project for which we lay the foundation stone”
“Himachal plays a crucial role in 'Rashtra Raksha', and now with the newly inaugurated AIIMS at Bilaspur, it will also play pivotal role in 'Jeevan Raksha'”
“Ensuring dignity of life for all is our government's priority”
“Happiness, convenience, respect and safety of women are the foremost priorities of the double engine government”
“Made in India 5G services have started, and the benefits will be available in Himachal very soon”

जै माता नैणा देविया री, जै बजिए बाबे री।
बिलासपुरा आल्यो... अऊं धन्य ओइ गया, आज्ज...मिंजो.....दशैरे रे, इस पावन मौके पर, माता नैणा देविया रे, आशीर्वादा ने, तुहाँ सारयां रे दर्शना रा सौभाग्य मिल्या! तुहाँ सारयां जो, मेरी राम-राम। कने एम्स री बड़ी-बड़ी बदाई।

हिमाचलचे राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकरजी, हिमाचलचे लोकप्रिय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी, भारतीय जनता पार्टीचे राष्ट्रीय अध्यक्ष, आपणा सर्वांचे मार्गदर्शक आणि याच भूमीचे सुपुत्र जेपी नड्डाजी, केंद्रीय मंत्रिमंडळातील माझे सहकारी आणि आपले खासदार अनुराग ठाकुरजी, हिमाचल भाजपाचे अध्यक्ष आणि संसदेतील माझे सहकारी सुरेश कश्यपजी, संसदेतील माझे सहकारी किशन कपूरजी, इंदु गोस्वामीताई, डॉ सिकंदर कुमारजी, इतर मंत्री, खासदार आणि आमदार, आणि मोठ्या संख्येने आम्हा सर्वांना आशीर्वाद देण्यासाठी आलेल्या माझ्या प्रिय बंधू आणि भगिनींनो ! तुम्हा सर्वांना, सर्व देशवासियांना विजयादशमी निमित्त अनेकानेक शुभेच्छा.

हे पवित्र पर्व, प्रत्येक वाईट गोष्टीवर मात करून, अमृत काळासाठी देशाने जो पंच प्रणचा संकल्प केला आहे, त्या मार्गावर चालण्यासाठी नवी ऊर्जा देईल. विजयादशमीच्या निमित्ताने हिमाचल प्रदेशच्या लोकांना आरोग्य, शिक्षण, रोजगार आणि पायाभूत विकासाशी संबंधित हजारो कोटी रुपये खर्चाच्या प्रकल्पांची भेट देण्याची संधी मला मिळाली आहे. हे माझे सौभाग्य आहे. आणि योगायोग बघा, विजयादशमी आहे आणि विजयाचे रणशिंग फुंकण्याची संधी मिळणे, हा भविष्यातील प्रत्येक विजयाचा शुभसंकेत आहे. बिलासपूरला तर आरोग्य आणि शिक्षणाची दुहेरी भेट मिळाली आहे. कहलूरा री... बंदले धारा ऊप्पर, हाइड्रो कालेज ... कने थल्ले एम्स... हुण एथी री पहचान हूणी !

बंधू आणि भगिनींनो,
इथे विकास योजनांचे लोकार्पण केल्यानंतर, जयरामजी म्हणाले, त्याप्रमाणे मी आणखी एका सांस्कृतिक वारशाचा साक्षीदार होणार आहे आणि खूप वर्षांनंतर मला पुन्हा एकदा कुल्लू दसरा सोहळ्याचा भाग बनण्याचे सौभाग्य लाभले आहे. शेकडो देवी-देवतांसह भगवान रघुनाथजींच्या यात्रेत सहभागी होऊन मी देशासाठी आशीर्वाद देखील मागणार आहे. आज बिलासपुरला आलो आहे तर जुन्या आठवणी ताज्या होणे अगदी स्वाभाविक आहे. एक काळ होता, इथे पायी फिरायचो. कधी मी, धूमल जी, नड्डा जी, पायी इथल्या बाजारातून जायचो. एका खूप मोठ्या रथयात्रेच्या कार्यक्रमात आम्ही बिलासपुरच्या गल्ल्यांमध्ये फिरलो आहोत. आणि तेव्हा सुवर्ण जयंती रथयात्रा इथून आणि ते देखील मुख्य बाजारपेठेतून गेली होती आणि तिथे जाहीर सभा झाली होती. आणि अनेकदा मी इथे आलो आहे, तुम्हा लोकांबरोबर राहिलो आहे.  

हिमाचलच्या या भूमीवर काम करत असताना मला नेहमीच हिमाचलच्या विकास यात्रेचा एक भाग बनण्याची संधी मिळाली आहे. आता मी ऐकत होतो, अनुरागजी अगदी मोठमोठ्याने बोलत होते, हे मोदीजींनी केले, हे मोदीजींनी केले, असे मोदीजी म्हणाले. आपले नड्डाजी देखील म्हणत होते, हे मोदीजींनी केले, हे मोदीजींनी केले आणि आपले मुख्‍यमंत्री जयरामजी देखील म्हणत होते, हे मोदीजींनी केले, मोदीजींनी केले. मी तुम्हाला सत्य सांगतो, कुणी केले, सांगू? हे जे काही होत आहे, ते तुम्ही केले आहे. तुमच्यामुळे झाले आहे. जर तुम्ही दिल्‍लीमध्ये केवळ मोदीजींना आशीर्वाद दिला असता आणि हिमाचलमध्ये मोदीजींच्या सहकाऱ्यांना आशीर्वाद दिला नसता तर या सर्व कामांमध्ये त्यांनी अडथळे निर्माण केले असते. हे जयराम जी आणि त्यांच्या टीमचे यश आहे. जे काम दिल्लीहून मी घेऊन येतो, ती कामे हे जलद गतीने पूर्ण करतात, म्हणून ती कामे होत आहेत. आणि हे एम्‍स उभे राहिले आहे, ती तुमच्या एका मताची ताकद आहे, भुयारी मार्ग बनला आहे, तो तुमच्या एका मताची ताकद आहे. जल अभियांत्रिकी महाविद्यालय उभे राहिले आहे, ती तुमच्या मताची ताकद आहे. मेडिकल डिवाइस पार्क बनत आहे, ते देखील तुमच्या एका मताची ताकद आहे. आणि म्हणूनच आज मी हिमाचलच्या अपेक्षा लक्षात घेऊन एकापाठोपाठ एक विकासकामे करतो आहे.

विकासाच्या बाबतीत आपण देशात प्रदीर्घ काळ एका विकृत विचारसरणीचा प्रभाव पाहिला आहे. काय होती ही विचारसरणी? चांगले रस्ते काही राज्ये आणि काही मोठ्या शहरांमध्येच असतील, दिल्लीच्या आसपास असतील. उत्तम शिक्षण संस्था मोठमोठ्या शहरांमध्येच असतील. चांगली रुग्णालये असतील तर ती दिल्लीतच असू शकतील, बाहेर असूच शकत नाहीत. उद्योग-धंदे उभे राहतील ते देखील मोठमोठ्या ठिकाणी उभे राहतील आणि विशेषतः देशातील डोंगराळ भागात मूलभूत सुविधा सर्वात शेवटी, अनेक वर्षांच्या प्रतीक्षेनंतर पोहचल्या. त्या जुन्या विचारांचा परिणाम असा झाला की देशात विकासाचा एक मोठा असमतोल निर्माण झाला. यामुळे देशाचा एक मोठा भाग, तिथले लोक यांच्यापर्यंत सुविधा पोहोचल्याच नाहीत.

गेल्या 8 वर्षांत देश आता ती जुनी विचारसरणी मागे सारून नव्या विचारांसह, आधुनिक विचारांसह पुढे जात आहे. आता पहा, मी जेव्हा इथे यायचो तेव्हा मी नेहमीच पहायचो, इथल्या एका विद्यापीठावरूनच जायचो. आणि उपचार असो किंवा वैद्यकीय शिक्षण, आयजीएमसी शिमला आणि टाटा वैद्यकीय महाविद्यालयावरच अवलंबून होते. गंभीर आजारांवरील उपचार असतील किंवा मग शिक्षण किंवा रोजगार, चंडीगढ़ आणि दिल्लीला जाणे हे तेव्हा हिमाचलसाठी मोजके पर्याय होते. मात्र गेल्या 8 वर्षांत दुहेरी इंजिनाच्या सरकारने हिमाचलच्या विकासगाथेला नव्या शिखरावर पोहोचवले आहे. आज हिमाचलमध्ये केंद्रीय विद्यापीठ देखील आहे, आयआयटी देखील आहे, ट्रिपल आयटी देखील आहे, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मॅनेजमेंट सारख्या प्रतिष्ठित संस्था देखील आहेत. देशात वैद्यकीय शिक्षण आणि आरोग्यसंबंधी सर्वात मोठी संस्था एम्स देखील आता बिलासपुर आणि हिमाचलच्या जनतेच्या गौरवात वाढ घालते आहे.  

बिलासपुर एम्स आणखी एका बदलाचे प्रतीक आहे आणि एम्‍समध्येही ते ग्रीन एम्‍स नावाने ओळखले जाईल, पूर्णपणे पर्यावरणस्नेही एम्‍स, निसर्गस्नेही एम्स. आताच आमच्या सर्व सहकाऱ्यांनी सांगितले, याआधीची सरकारे पायाभरणीचा दगड ठेवायची आणि निवडणुका झाल्यावर विसरून जायची. आजही हिमाचलला जाल, आपल्या धूमलजींनी एकदा कार्यक्रम घेतला होता. कुठे कुठे दगड पडलेत, आणि असे दगड पडले होते, काम झाले नव्हते.  

मला आठवते आहे, मी एकदा रेल्वेच्या कामाचा आढावा घेत होतो, तुमच्या उनाजवळ रेल्वे वाहिनी टाकायची होती. हा निर्णय 35 वर्षांपूर्वी झाला होता, 35 वर्षांपूर्वी. संसदेत घोषणा झाली, पण नंतर फाइल बंद झाली. हिमाचलला कोण विचारतो? पण हा तर हिमाचलचा मुलगा आहे आणि हिमाचलला विसरू शकत नाही. आपल्या सरकारची ओळख अशी आहे की ते ज्या प्रकल्पाची मुहूर्तमेढ रोवते, त्याचे लोकार्पणही करते. अडकणे, रेंगाळणे, भरकटणे, ते युग गेले मित्रांनो!

मित्रांनो,

देशाच्या संरक्षणात हिमाचलचे नेहमीच मोठे योगदान राहिले आहे, देशाच्या संरक्षणासाठी लढणाऱ्या वीरांमुळे देशभरात ओळखले जाणारे हिमाचल आता या एम्सनंतर जीवन रक्षणातही महत्त्वाची भूमिका बजावणार आहे. 2014 सालापर्यंत हिमाचलमध्ये फक्त 3 वैद्यकीय महाविद्यालये होती, त्यापैकी 2 सरकारी होती. गेल्या 8 वर्षांत हिमाचलमध्ये 5 नवीन सरकारी वैद्यकीय महाविद्यालये बांधण्यात आली आहेत. 2014 पर्यंत केवळ 500 विद्यार्थी पदवी आणि पदव्युत्तर शिक्षण घेऊ शकत होते, आज ही संख्या 1200 पेक्षा जास्त म्हणजेच दुप्पटीपेक्षा अधिक झाली आहे. एम्समध्ये दरवर्षी अनेक नवीन डॉक्टर तयार होतील, नर्सिंगशी संबंधित तरुणांना येथे प्रशिक्षण मिळेल. मला विशेषत: जयरामजी यांच्या चमुचे, जयरामजी यांचे, आरोग्य मंत्री, केंद्र सरकार आणि आरोग्य मंत्रालयाचे अभिनंदन करायचे आहे. नड्डाजी आरोग्यमंत्री होते, त्यावेळी आम्ही निर्णय घेतला, तेव्हा नड्डाजींवर मोठी जबाबदारी आली, मी पायाभरणीही केली. या काळात कोरोनाचा भयंकर साथरोग आला आणि आपल्याला माहित आहे की हिमाचलमध्ये कोणतेही बांधकाम करायचे म्हटले तर किती कठीण असते. पर्वतावर प्रत्येक वस्तू आणणे किती अवघड असते. जे काम खाली तासाभरात होते, ते इथे डोंगरात करायला एक दिवस लागतो. असे असूनही, कोरोनाची अडचण असूनही, केंद्र सरकारच्या आरोग्य मंत्रालयाने आणि जयरामजींच्या राज्य सरकारच्या चमुने केलेले काम, आज एम्सच्या रुपाने समोर आहे, एम्सने काम सुरू केले आहे.

केवळ वैद्यकीय महाविद्यालयच नाही तर आम्ही आणखी वेगळ्या दिशेने वाटचाल केली आहे. औषधे आणि जीवनरक्षक लसींचा निर्माता म्हणूनही हिमाचलची भूमिका मोठ्या प्रमाणात विस्तारते आहे. बल्क ड्रग्ज पार्कसाठी देशातील फक्त तीन राज्यांची निवड करण्यात आली आहे. त्यापैकी एक कोणते राज्य आहे भावांनो, ते राज्य कोणते? हिमाचल आहे, तुम्हाला अभिमान वाटतो की नाही? तुमच्या मुलांच्या उज्ज्वल भविष्याचा हा पाया आहे की नाही? ही तुमच्या मुलांच्या उज्ज्वल भविष्याची हमी आहे की नाही? आम्ही मोठ्या ताकदीने काम करतो आणि आजच्या पिढीसाठी तसेच पुढच्या पिढीसाठीही करतो.

त्याचप्रमाणे मेडिकल डिव्हाईस पार्कसाठी 4 राज्यांची निवड करण्यात आली आहे. तिथे आज तंत्रज्ञानाचा मोठ्या प्रमाणावर औषधोपचारात वापर केला जात आहे. विशेष प्रकारची उपकरणे बनवण्यासाठी देशात चार राज्यांची निवड करण्यात आली आहे. एवढा मोठा भारत, एवढी मोठी लोकसंख्या, हिमाचल हे माझे छोटे राज्य आहे, पण ही वीरांची भूमी आहे आणि मी इथली भाकरी खाल्ली आहे, मला कर्जही फेडावे लागेल. आणि म्हणून चौथे मेडिकल डिव्हाईस पार्क कुठे बांधले जात आहे? हे चौथे मेडिकल डिव्हाईस पार्क कुठे बांधले जात आहे - तुमच्या हिमाचलमध्ये बांधले जाते आहे मित्रांनो. जगभरातून मोठी माणसे इथे येतील. नालागड येथील या मेडिकल डिव्हाईस पार्कची पायाभरणी हा त्याचाच एक भाग आहे. या डिव्हाईस पार्कच्या उभारणीसाठी येथे हजारो कोटी रुपयांची गुंतवणूक करण्यात येणार आहे. याच्याशी संबंधित अनेक छोटे-मोठे उद्योग जवळपास विकसित होतील. यामुळे येथील हजारो तरुणांना रोजगाराची संधी उपलब्ध होणार आहे.

मित्रांनो,

हिमाचलची आणखी एक बाजू आहे, यामध्ये विकासाच्या अनंत शक्यता दडलेल्या आहेत. ही वैद्यकीय पर्यटनाची जमेची बाजू आहे. इथले हवामान, इथले वातावरण, इथली वनौषधी उत्तम आरोग्यासाठी अतिशय उपयुक्त आहे. भारत हे आज वैद्यकीय पर्यटनाच्या दृष्टीने जगाचे मोठे आकर्षण केंद्र बनत आहे. देशातील आणि जगातील लोक वैद्यकीय उपचारांसाठी भारतात येऊ लागले की येथील नैसर्गिक सौंदर्य इतके अप्रतिम आहे की ते येथे येतील, एक प्रकारे त्यांना आरोग्याचाही फायदा होईल आणि पर्यटनालाही फायदा होईल. हिमाचलचा तर फायदाच फायदा आहे.

मित्रांनो,

गरीब आणि मध्यमवर्गीयांना कमीत कमी खर्चात उपचार मिळावेत, उपचार पद्धतीही चांगली असावी आणि त्यासाठी त्यांना फार दूर जावे लागणार नाही, असा केंद्र सरकारचा प्रयत्न आहे. म्हणून आज आम्ही एम्स वैद्यकीय महाविद्यालय, जिल्हा रुग्णालयांमध्ये अतिदक्षता सुविधा आणि गावागावात आरोग्य आणि आरोग्यसेवा केंद्रे बांधून अखंड संपर्क व्यवस्थेवर काम करत आहोत. यावर भर दिला जात आहे. आयुष्मान भारत योजनेंतर्गत हिमाचलमधील बहुतांश कुटुंबांना ५ लाख रुपयांपर्यंत मोफत उपचाराची सुविधा मिळत आहेत.

या योजनेंतर्गत देशभरात आतापर्यंत 3 कोटी 60 लाख गरीब रुग्णांवर मोफत उपचार करण्यात आले असून यापैकी दीड लाख लाभार्थी हे माझ्या हिमाचलमधील आहेत. देशातील या सर्वं नागरिकांच्या उपचारांवर सरकारने आतापर्यंत 45 हजार कोटी रूपयांपेक्षा जास्त खर्च केला आहे. जर आयुष्मान भारत योजना नसती तर त्याच्या जवळपास दुप्पट म्हणजे सुमारे 90 हजार कोटी रुपये या रुग्णांच्या कुटुंबीयांना त्यांच्या खिशातून द्यावे लागले असते. म्हणजेच गरीब आणि मध्यमवर्गीय कुटुंबाला उत्तम उपचारासह एवढ्या मोठ्या बचतीचाही लाभ झाला आहे.

मित्रांनो,

माझ्यासाठी आणखी एक समाधानाची बाब म्हणजे सरकारच्या अशा योजनांचा सर्वाधिक लाभ आपल्या माता, भगिनी, मुलींना मिळाला आहे. आणि आपल्याला माहीत आहे, आपल्या आई बहिणींचा एक स्वभाव आहे, कितीही वेदना झाल्या, कितीही शारिरीक त्रास झाला तरी त्या घरातील कोणाला सांगत नाहीत. ती सहनही करत राहते, कामसुद्धा करत राहते, पूर्ण कुटुंबाला सांभाळून घेते कारण तिच्या मनात असा विचार असतो की कुटुंबातील सदस्यांना, आपल्या मुलांना जर आपल्या आजाराची माहिती कळली तर ते कर्ज काढून माझे उपचार करतील आणि आई विचार करते की, मी थोडा काळ आजार सहन करेन पण मुलांवर कर्जाचा डोंगर होऊ देणार नाही. मी रूग्णालयात जाऊन खर्च करणार नाही. या मातांची चिंता कोण करणार? माझ्या मातांनी या यातना मुकाट्याने सहन करायच्या का? हा मुलगा मग काय कामाचा, या भावनेतूनच आयुष्मान भारत योजनेचा जन्म झाला आहे. ज्या योजनेमुळे माझ्या माता- भगिनींना आजारांच्या समस्या सहन कराव्या लागणार नाहीत. निव्वळ असहाय्यतेच्या भावनेतून त्यांना हे जीवन जगावे लागणार नाही. आयुष्मान भारत योजनेच्या अंतर्गत लाभान्वित होणाऱ्यांमध्ये माताभगिनींचे प्रमाण 50 टक्क्यांपेक्षा जास्त आहत. आमच्या माता भगिनी आणि कन्या आहेत.

मित्रांनो,

शौचालय बनवण्यासाठी सुरू केलेले स्वच्छ भारत अभियान असो, मोफत गॅस जोडणी देणारी उज्वला योजना असो, मोफत सॅनिटरी नॅपकिन देणारे अभियान असो, मातृवंदना योजनेच्या अंतर्गत प्रत्येक गर्भवतीला पोषक आहारासाठी हजारो रूपयांची मदत करण्याची योजना असो, किंवा प्रत्येक घरी पाणीपुरवठा करण्यासाठी आमचे हर घर जल अभियान असो, माझ्या माता भगिनींना सशक्त बनवण्यासाठी असलेली ही कामे आम्ही एकापाठोपाठ एक करत चाललो आहोत. माता-भगिनी-कन्यांना  सुख, सुविधा, सन्मान, सुरक्षा आणि आरोग्य पुरवण्यास दुहेरी इंजिनचे सरकारने, म्हणजे केंद्रात आणि राज्यात एकाच पक्षाच्या आमच्या सरकारने प्रथम प्राधान्य दिले आहे.

केंद्र सरकारने ज्या योजना तयार केल्या आहेत, त्या जयरामजी आणि त्यांच्या चमुतील सर्व सहकार्यांनी अतिशय वेगाने आणि कळकळीने साकारल्या आहेत आणि त्यांची व्याप्तीही वाढवली आहे. प्रत्येक घरात नळाने पाणीपुरवठा करण्याचे आमचे काम (हर घर नल से जल) येथे किती वेगाने झाले आहे, हे आमच्यासमोर आहे. गेल्या 7 दशकांमध्ये जितक्या नळ जोडण्या हिमाचल प्रदेशात दिल्या गेल्या आहेत, त्याच्या दुपटीहूनही अधिक नळ जोडण्या फक्त गेल्या तीन वर्षांत आम्ही दिल्या आहेत, लोकांना मिळाल्या आहेत. या तीन वर्षांत, 8.50 लाखांपेक्षा जास्त नवीन कुटुंबांना पाईपने पाण्याची सुविधा पुरवण्यात आली आहे.

बंधु आणि भगिनींनो,

जयरामजी आणि त्यांच्या सहकाऱ्यांचे आणखी एका बाबतीत संपूर्ण देश कौतुक करत आहे. सामाजिक सुरक्षेसाठी केंद्र सरकारचे प्रयत्न आणखी विस्तारित करण्यासाठी, हे कौतुक केले जात आहे. आज हिमाचल प्रदेशातील असे एखादेच कुटुंब असेल की ज्यात कोणत्या ना कोणत्या सदस्याला एखाद्या तरी निवृत्ती वेतनाची सुविधा मिळत नसेल. विशेषत: जे निराश्रित आहेत, एखाद्या गंभीर आजाराने ग्रासलेले आहेत, अशा कुटुंबांना निवृत्ती वेतन योजना आणि उपचारांसाठी खर्च देण्यासाठी अर्थसहाय्य करण्याचे प्रयत्न कौतुकास्पद आहेत. हिमाचल प्रदेशातील हजारो कुटुंबांना एक श्रेणी- एक निवृत्ती वेतन( वन रँक-वन पेन्शन) लागू झाल्यामुळेही मोठा लाभ झाला आहे.

मित्रांनो,

हिमाचल प्रदेश हे संधी देणारे राज्य आहे. आणि मी जयरामजींचे आणखी एका बाबीसाठी अभिनंदन करतो. लसीकरणाचे काम तर संपूर्ण देशातच सुरू आहे, परंतु लोकांच्या जीवनाच्या सुरक्षिततेसाठी हिमाचल प्रदेश असे पहिले राज्य आहे की ज्याने लसीकरणाचे काम शंभर टक्के पूर्ण केले आहे. करू, नंतर बघू वगैरे असा प्रकार नाही, एकदा निश्चय केला आहे तर काम पूर्ण करायचे आहे.

येथे वीज निर्माण होते पाण्यावर, फळे आणि भाजीपाल्यासाठी अत्यंत सुपीक जमीन आहे आणि रोजगाराच्या अगणित संधी देणारा पर्यटन व्यवसायही येथे आहे. या संधींचा लाभ घेण्यात केवळ चांगल्या संपर्काचा अभाव हाच एक सर्वात मोठा अडसर होता. पण 2014 नंतर उत्तमोत्तम पायाभूत सुविधा हिमाचल प्रदेशातील गावागावांपर्यंत पोहचवण्याचे प्रयत्न सुरू झाले आहेत. आज हिमाचल प्रदेशातील रस्ते रूंद करण्याचे कामही सर्वत्र सुरू आहे. यावेळी हिमाचल प्रदेशात रस्त्यांची संपर्क व्यवस्था तयार करण्याच्या कामांवर जवळपास 50 हजार कोटी रूपये खर्च करण्यात येत आहेत. पिंजौर ते नालागढ चारपदरी महामार्गाचे काम जेव्हा पूर्ण होईल, तेव्हा औद्योगिक क्षेत्र असलेल्या नालागढ आणि बद्दीला तर त्याचा लाभ मिळेलच, पण चंडीगढ आणि अंबालाहून विलासपूर, मंडी आणि मनालीच्या दिशेने जाणाऱ्या पर्यटकांसाठीही सुविधा वाढणार आहेत. इतकेच नव्हे तर, हिमाचल प्रदेशच्या लोकांना गोलगोल फिरणाऱ्या रस्त्यांपासून मुक्ती देण्यासाठी बोगद्यांचे जाळे पसरण्याचे काम सुरू आहे.

मित्रांनो,

डिजिटल संपर्काच्या बाबतीतही हिमाचल प्रदेशात अभूतपूर्व असे काम झाले आहे. गेल्या 8 वर्षात, मेड इन इंडिया मोबाईल फोन स्वस्त झाले आणि गावागावांत नेटवर्कही पोहचले. उत्कृष्ट 4 जी संपर्कामुळे हिमाचल प्रदेशात डिजिटल व्यवहारही अतिशय गतीने वाढत आहेत. डिजिटल इंडियाचा सर्वाधिक लाभ जर कुणाला होत असेल तर माझ्या हिमाचलच्या बंधु-भगिनींना होत आहे, माझ्या हिमाचलच्या नागरिकांना होत आहे. अन्यथा बिल भरण्यापासून ते बँकांशी संबंधित कामे असोत, प्रवेशाचे काम असो, अर्ज करायचा असो, अशा प्रत्येक लहानसहान कामांसाठी पहाड उतरून कार्यालयांमध्ये जावे लागत असे आणि त्यासाठी एक एक दिवस मोडत असे आणि कधी तर रात्रीही थांबावे लागत असे. आता तर देशात प्रथमच मेड इन इंडिया 5 जी सेवाही सुरू झाली आहे आणि तिचा लाभ हिमाचल प्रदेशला लवकरच मिळणार आहे.

भारताने ड्रोनसंबंधी जे नियम बनवले आहेत आणि त्यात बदल केला आहे. त्यानंतर ड्रोनसंबंधी धोरण बनवणारे देशातील पहिले राज्य म्हणून मी हिमाचल प्रदेशचे अभिनंदन करतो. आता मालवाहतुकीसाठी ड्रोनचा उपयोग खूप जास्त प्रमाणात वाढणार आहे. यात किन्नोरपर्यंतचे आमचे बटाटे आम्ही ड्रोनद्वारे मोठ्या बाजारात त्वरित आणू शकतो. आमची फळे खराब होत असत. आता ती ड्रोनद्वारे आम्ही उचलून आणू शकतो. अनेक प्रकारचे लाभ येत्या दिवसांत होणार आहेत. याच प्रकारचा विकास, ज्यामुळे प्रत्येक नागरिकाची सुविधा वाढेल, त्याला समृद्धीशी जोडले जाईल, यासाठी आम्ही प्रयत्न करत आहोत. हाच विकसित भारत, विकसित हिमाचल प्रदेशाचा संकल्प साकार करेल.

आज विजयादशमीच्या पवित्र पर्वानिमित्त विजय नाद करण्याचा मला संधी मिळाली याचा मला आनंद वाटतो. आपणा सर्वांच्या आशिर्वादाने हे करण्याची संधी मिळाली. मी एम्ससह सर्व विकास प्रकल्पांसाठी आपल्याला खूप खूप शुभेच्छा देतो. दोन्ही मुठी वळून माझ्याबरोबर बोला

भारत माता की जय पूर्ण ताकतीनिशी बोला

भारत माता की जय

भारत माता की जय

भारत माता की जय

खूप खूप धन्यवाद.